दीपावली के पाँच दिन — गोवत्स द्वादशी से भाई दूज तक, और काली चौदस पर नित्याओं सहित काली

पहले से साधना कर रहे साधकों के लिए दीपावली के अनुष्ठानों पर वार्ता।

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Questions this answers

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01

क्या इस दीपावली मैं नई साधना शुरू करूं?

कुछ नया शुरू करने से पहले एक बार सोचें — जो साधना चल रही है, उसे ही दोहराएं

· 01:39–02:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कोई भी नई साधना शुरू करने से पहले एक बार सोचिए। जो प्रयोग आपने पिछले वर्ष किया, जो अनुष्ठान आप पिछले वर्ष से करते आ रहे हैं — जैसे जो लोग कालिका योगिनी कर रहे हैं — उनका आग्रह है कि उसी साधना को फिर से दोहराएं।

02

पहले से शुरू की गई साधना क्यों नहीं बदलनी चाहिए?

नए लोग आते रहते हैं, और हर किसी की श्रद्धा अलग शक्ति में होती है

· 03:38–04:10 · Also a question

क्योंकि चैनल पर नए लोग आते रहते हैं और सबकी श्रद्धा अलग-अलग शक्तियों में होती है, इसलिए उनके लिए अलग-अलग विषय स्पष्ट रूप से रखे जाते हैं। पर अगर आपने पहले से कोई साधना उठाई है, तो उसी को बृहत रूप से कीजिए। वक्ता कहते हैं कि उनसे चर्चा न भी हो रही हो और आप स्वयं कर रहे हों, तो भी उसे करते रहिए।

03

अगर मैं कालिका योगिनी कर रहा हूं, तो पांच दिनों में क्या करूं?

कालिका योगिनी प्रमुख रहेगी; साथ में धनतेरस का पूजन होगा

· 04:11–04:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप कालिका योगिनी कर रहे हैं, तो प्रमुख रूप से उसी को करेंगे, पर साथ में धनतेरस का पूजन करना है। पांच दिन का अनुष्ठान — कम से कम त्रयोदशी से दूज तक, या द्वादशी से प्रतिपदा तक — भगवती कालिका का ही करना है।

04

प्रमुख साधना आपकी अपनी रहती है, और साथ में दीपावली का पूर्ण पूजन चलता है

प्रमुख साधना आपकी ही रहती है; दीपावली का पूजन फिर भी पूरा होता है

· 04:34–04:50

वक्ता कहते हैं कि जो लोग महाभैरव कर रहे हैं, वे प्रमुख साधना महाभैरव की ही करेंगे, पर साथ में दीपावली का पूर्ण पूजन होगा — धनतेरस, और दीपावली की रात महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, लक्ष्मी-गणेश, कुबेर और यमदीप दान, सब होगा। केवल प्रमुख साधना उन्हीं की रहती है।

05

दूसरे देवताओं का पूजन असल में किनके लिए मना है?

जो मंडल में बैठे हैं — संकल्प के साथ 41 दिन का आवरण पूजन

· 04:51–05:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह उनके लिए मना है जो मंडल में आवरण पूजन कर रहे हों। मंडल का अर्थ है 41 दिन का संकल्प लेना कि किसी विशेष देवी-देवता या शक्ति का पूर्ण मंडल पूजन और आवरण पूजन करेंगे। उनके लिए गुरु आज्ञा से, या बहुत जगह, यह मनाही होती है, क्योंकि उस मंडल में सभी की शक्तियों का पूजन पहले से हो रहा होता है, इसलिए बाहर पूजन की आवश्यकता नहीं होती।

06

अगर मेरा अनुष्ठान दत्तात्रेय या सप्तश्लोकी का है तो?

जो आप दोहराते आए हैं, वही अनुष्ठान रहेगा, और हवन उसी के मंत्रों से

· 05:52–06:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप भगवान दत्तात्रेय के माला मंत्र का अनुष्ठान बार-बार कर रहे हैं और उनमें श्रद्धा है, तो प्रमुख उन्हीं का करेंगे, पर पूजन सबका होगा। अगर आप भगवती की सप्तश्लोकी कर रहे थे, तो फिर से सप्तश्लोकी का ही अनुष्ठान करेंगे। हवन भी इन्हीं के मंत्रों से करेंगे — पर इसका अर्थ यह नहीं कि दूसरे देवताओं को आहुति नहीं मिलेगी।

07

यह बात पहले इसलिए साफ की जाती है ताकि नई साधना सुनकर कोई पुरानी साधना न छोड़े

ताकि नई साधना का वर्णन सुनकर कोई पुरानी साधना न छोड़े

· 06:46–07:05

वक्ता कहते हैं कि ताकि कोई भ्रम न रहे — ताकि जब वे आगे बाकी बातों की चर्चा करें, तो सुनने वाले यह न समझें कि पुरानी साधना छोड़कर नई उठा लेनी है। वे कहते हैं कि यह बहुत जरूरी बात है, और वे YouTube को ऐसा माध्यम नहीं बनाना चाहते जहां केवल प्रभावित करना मायने रखे, नई-नई साधनाएं डाली जाएं और पुराने लोगों का कोई फॉलो-अप न हो।

08

दीपावली का क्रम किस तिथि से शुरू होता है?

दोष व्यापिनी द्वादशी और शाम की तिथि का नियम

· 07:06–07:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह द्वादशी से शुरू होता है, और सबसे पहले दोष व्यापिनी द्वादशी का महत्व है। दीपावली के पांचों पर्वों में प्रमुख पूजन वैसे तो स्थिर लग्न आदि देखकर होता है, पर माना गया है कि पूजन का फल सही से तभी मिलता है जब शाम के समय की तिथि के अनुसार पूजन हो।

09

दो तिथियां दी हों तो मैं किस दिन को मानूं?

अपने क्षेत्र में जो मान्यता है, उसे मानें

· 07:38–07:59 · Also a question

वक्ता का सामान्य आग्रह है कि आपके क्षेत्र में जिस दिन जिस तिथि की मान्यता हो, आप उसी को मानें। फिर भी सामान्यतः 9 नवंबर को शाम में द्वादशी मिल रही है — यह गोवत्स द्वादशी है।

10

गोवत्स द्वादशी पर विशेष रूप से किसे कुछ करना चाहिए?

धन की परेशानी, पितृ दोष, नकारात्मक आवेश, या कुल देवताओं की अप्रसन्नता

· 08:00–08:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिसे धन संबंधी समस्या हो, पितृ दोष हो, शरीर पर किसी नकारात्मक शक्ति का आवेश हो, या कुल के देवी-देवताओं से जुड़ा कोई दोष या उनकी अप्रसन्नता हो। वैसे तो सब हर दिन गौ सेवा करते हैं, पर उस दिन जरूर करनी चाहिए।

11

गोवत्स द्वादशी पर बारह दीपकों का प्रयोग क्या है?

गोधूलि वेला में गौशाला में घी के बारह दीपक

· 08:28–08:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिस दिन शाम के समय द्वादशी हो, उस दिन शाम को गोधूलि वेला में गौशाला में घी से बने कम से कम बारह दीपक जरूर जलाने चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि एक यह प्रयोग है: जिस दिन शाम के समय द्वादशी रहती है, उस दिन गोधूलि वेला में, शाम के समय, गौशाला में कम से कम बारह — बारह — घी से बने दीपक जरूर जलाने चाहिए। और उस जगह पर, जहां गौ को बांधा जाता है।

12

जिस खूंटे से गाय बंधती है, उसका क्या करना है?

बांस का खूंटा और उसकी पूजा

· 08:47–09:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जहां बांस का खूंटा हो, उस दिन उसकी पूजा जरूर करनी चाहिए — उसे गंगाजल से स्नान कराना, उस पर पूरा हल्दी का लेपन करना, फिर रोली से तिलक करना, और उसके सामने पान के पत्ते पर भोग लगाना, वहां घी का एक दीपक रहेगा; बाकी ग्यारह दीपक गौशाला में अलग-अलग जगह सजा देने हैं। वे कहते हैं कि जिनके घर गौ हैं, उनसे वे हमेशा कहते हैं कि बांस का खूंटा हो, आजकल बन रहे लोहे के खूंटे नहीं।

13

अगर मेरे आसपास कोई गौशाला या गाय न हो तो?

कामधेनु, नंदिनी और समस्त गोवंश के नाम से मानसिक पूजन

· 09:28–09:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तब आप घर में ही कामधेनु माता के नाम से, नंदिनी माता के नाम से, समस्त गोवंश के नाम से मानसिक रूप से यह पूजन करेंगे; दीपक जलाकर घर में अलग-अलग जगह सजा दीजिए। पर कीजिए — जरूर कीजिए।

14

गौ सेवा से क्या दूर होता है?

अनंत पितृ दोष, पाप, यम का भय, अकाल मृत्यु और श्राप

· 09:50–10:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गौ में समस्त देवताओं का वास है। हमारे अनंत पितृ दोष और कई पाप गौ सेवा से कट जाते हैं; यम के पास से मुक्ति मिलती है। अगर अकाल मृत्यु का योग हो, या कोई श्राप लगा हो जिससे शरीर में विक्षोभ हो रहा हो, या कोई रोग पकड़ ले, तो उससे शांति होती है।

वक्ता कहते हैं कि गौ में समस्त देवताओं का वास है। हमारे अनंत पितृ दोष और कई सारे पाप गौ सेवा से कट जाते हैं। यम के पास से मुक्ति मिल जाती है। अगर अकाल मृत्यु का योग हो, किसी प्रकार का श्राप लग गया हो जिसके कारण शरीर में कोई विक्षोभ हो रहा हो, कोई रोग पकड़ ले — तो उससे शांति होती है।

15

क्या इसके लिए देसी गाय ही होनी चाहिए?

जो गाय उपस्थित है, जीव सेवा के भाव से उसकी सेवा करें

· 10:08–10:43 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह सच है कि वेद लक्षणा गौ, देसी गाय चाहिए — पर आज के समय में वे हर जगह नहीं मिलेंगी। इसलिए जो उपस्थित हो, उसकी पूजा कीजिए। वे कहते हैं कि यह भाव निकाल दीजिए: जीव सेवा के भाव से और गौ के स्वरूप के भाव से कीजिए। ऐसा नहीं कि फल नहीं मिलेगा, और ऐसा भी नहीं कि इससे आपकी कोई हानि होगी।

16

यह प्रयोग करने से पहले कौन-से लक्षण देखूं?

दरिद्रता, शरीर या मुंह से दुर्गंध, और पितृ दोष के लक्षण

· 10:44–11:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ये अच्छे से देख लीजिए: दरिद्रता बहुत है; शरीर से बहुत अधिक दुर्गंध आती रहती है; मुंह से बहुत अधिक दुर्गंध आती है; घर में पितृ दोष के लक्षण हैं। वे बताते हैं कि पितृ दोष के लक्षण क्या हैं और उसमें क्या परेशानियां होती हैं, इस पर पूरा एक अलग वीडियो है।

17

बार-बार गाड़ी की दुर्घटना हो तो?

सबसे बड़ा लक्षण है गाड़ी से बार-बार एक्सीडेंट

· 11:08–11:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आपको वाहन से जुड़ी परेशानी है — गाड़ी से बार-बार एक्सीडेंट हो रहा है, कहीं भी जाएं तो गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है — तो यह सबसे बड़ा लक्षण है।

वक्ता कहते हैं कि सबसे ज्यादा, अगर आपका वाहन — अगर आपको वाहन से जुड़ी परेशानी है, बार-बार गाड़ी से एक्सीडेंट हो रहा है, कहीं भी जा रहे हैं तो गाड़ी से एक्सीडेंट हो रहा है — तो यह सबसे बड़ा लक्षण है।

18

अगर घर में ब्रह्म दोष हो तो?

ब्रह्म राक्षस, ब्रह्म पिशाच या ब्रह्म देव — यह गांठ बांध लीजिए

· 11:36–12:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तब यह गांठ बांध लीजिए। अगर आपके घर में ब्रह्म दोष है — यानी ब्रह्म राक्षस, ब्रह्म पिशाच या ब्रह्म देव, और इनसे जुड़ा कोई कोप या दोष है, या किसी पर आवेश आता है, या आपको जानकारी है कि हां, घर में ऐसा दोष है — तो ध्यान रखिए कि यह काम जरूर करना चाहिए। वे कहते हैं कि यह कोई टोटका या उपाय नहीं, बल्कि भगवती गौ का आशीर्वाद है, और इसे गोवत्स द्वादशी पर करना चाहिए।

19

सुबह खूंटे पर क्या किया जाता है?

अक्षत, हल्दी, जल और धूप — एक दिन पहले दिया गया निमंत्रण

· 12:35–13:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सुबह, जहां गौ माता बंधी हों, उस खूंटे पर थोड़ा हल्दी में रंगा अक्षत, जल, और धूप — विशेष करके बजरंगबली की पूजा में जलाया जाने वाला धूप — लेकर जाइए। वहां धूप अच्छे से जलाइए, धूप-दीप जलाकर रखिए, जल ढारिए, और भगवती कामधेनु और मां नंदिनी, जो भगवती के स्वरूप और गौ माता के स्वरूप हैं, तथा भगवान पशुपतिनाथ महादेव का ध्यान करते हुए वहां प्रार्थना कीजिए।

20

सुबह खूंटे पर ठीक-ठीक क्या वचन देना है?

शाम को खुर की धूल लेने लौटने की बात, निमंत्रण के रूप में

· 13:17–13:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप कहेंगे कि शाम के समय, प्रदोष पूजन के समय, हम आपके इस स्थान पर आकर भगवती गौ माता के खुर की धूल, या उनके चरणों की धूल लेकर जाएंगे; और उससे जुड़ा जो भी प्रयोग करें, उसमें हमें सफलता दीजिए। वे समझाते हैं कि कोई चीज लानी हो तो एक दिन पहले निमंत्रण दिया जाता है — और क्योंकि यह प्रदोष काल में होना है, इसलिए उसी दिन सुबह निमंत्रण दे देंगे।

21

अगर गौशाला मेरी अपनी हो तो?

सुबह वाला भाग फिर भी करें, और गुड़ वाली रोटी खिलाएं

· 13:46–14:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आपकी अपनी गौशाला है, तो भी यह सुबह करना है। अगर गौ माता वहां खूंटे पर बंधी हों, तो ध्यान से कीजिए ताकि उन्हें कोई कष्ट न हो और कोई दोष न लगे। और अगर गौ माता बंधी रहती हैं, तो गुड़ वाली रोटी साथ ले जाइए और उसी समय उन्हें खिला दीजिए।

22

शाम को मैं साथ में क्या लेकर जाऊं?

पीला वस्त्र और गौ ग्रास — कम से कम पांच मीठी रोटी

· 14:25–14:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शाम को पीला वस्त्र लेकर जाना है, और गौ माता के लिए गौ ग्रास — यानी घर की बनी मीठी रोटी, कम से कम पांच। अगर एक से अधिक गौ माता हों, या अधिक गोवंश हो, तो उसी अनुपात में पांच या दस रोटी बनाइए। पहले प्रणाम कीजिए, और गौशाला में जाने से पहले चप्पल उतार दीजिए — हो सके तो घर से ही खाली पैर जाइए।

23

ग्रामीण भगतवाल, जो पूछा-बूझा देते हैं, अपनी विद्याएं इसी पर चलाते हैं

ग्रामीण भगतवाल और इस पर चलने वाली विद्याएं

· 14:53–15:21

वक्ता कहते हैं कि गांव के भगतवाल, जो लोग पूछा-बूझा देते हैं, इस प्रकार की सिद्धियां जरूर करते हैं, और इससे बहुत सारी शांति करवाई जाती है। वे कहते हैं कि ब्रह्म की शांति भी इसी पर होती है। ऐसी विद्याएं भी हैं जिनसे इन सबके माध्यम से चोर पकड़ा जाता है, भूत-प्रेत का बंधन होता है, और देवी-देवताओं को बुलाकर बांधा जाता है।

24

शाम की विधि का क्रम क्या है?

प्रणाम, रोटी खिलाना, और पीले वस्त्र से धूल बटोरना

· 15:22–16:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि खाली पैर जाइए; पहले गौ माता को प्रणाम कीजिए, फिर भगवान पशुपतिनाथ महादेव को प्रणाम कीजिए। उसके बाद वहां उपस्थित सभी गौ माता और गोवंश को मीठी रोटी खिलाइए, और उसी पीले वस्त्र से वहां जो सूखी धूल मिले, उसे हल्के से बटोरकर उसी पीले वस्त्र में लपेट लीजिए। वे कहते हैं कि बहुत थोड़ी धूल चाहिए।

25

ठीक-ठीक कौन-सी धूल लेनी चाहिए?

खूंटे के पास की धूल, और सबसे अच्छी पिछले खुर के नीचे की

· 16:06–16:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि धूल खूंटे के पास की होनी चाहिए। गौ माता के पिछले पैर की और अगले पैर की धूल — अगर पिछले पैर की धूल लें, तो वह सबसे श्रेष्ठ है। उसे उठाइए, और अगर खुर के नीचे की धूल मिल जाए, जहां खुर का छाप पड़ा हो, तो जब वे पैर हटाएं, तब उसे उठा लीजिए।

26

उस धूल को कैसे तैयार और अभिमंत्रित करें?

केसर और अष्टगंध, और पंचाक्षरी से अभिमंत्रण

· 16:28–17:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उसे घर लाइए, और इसी मिट्टी में केसर, अष्टगंध आदि मिलाइए; फिर भगवान पशुपतिनाथ महादेव का नाम लेकर, या उनके नाम से अभिमंत्रित करके, या उसी रात पंचाक्षरी की 11 माला या 108 माला जप करके, उसे अभिमंत्रित करके रख दीजिए।

वक्ता कहते हैं कि आप उसे घर ले आएंगे, और इसी मिट्टी में केसर, अष्टगंध आदि मिलाएंगे। फिर भगवान पशुपतिनाथ महादेव का नाम लेकर, या उनके नाम से अभिमंत्रित करके — या उसी दिन रात के समय पंचाक्षरी की 11 माला, 108 माला जप करके — लोग उसे अभिमंत्रित करके रख देते हैं।

27

अभिमंत्रित धूल का उपयोग कैसे होता है?

पीतल या चांदी के खोल में पहनना, या सिंदूर में मिलाना

· 17:08–17:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पूरी सामग्री को पीतल या चांदी के खोल में भरकर बाजू में या गले में पहनते हैं, जिससे भूत-पिशाच से जुड़े ज्वर, प्रेत-पिशाच के आवेश से आने वाले ज्वर, बार-बार बुखार, या पेट में बहुत जलन जैसे दोषों की शांति होती है — वे कहते हैं कि ब्रह्म की उपस्थिति पेट में आग लगा देती है। महिलाएं, विशेष करके विवाहित जिन्हें कोई दोष हो, इसे थोड़ा-सा अपने सिंदूर में मिलाकर मांग में भरें।

28

क्या मसान दोष वाले छोटे बच्चे के लिए इसका उपयोग हो सकता है?

सूखा रोग में गाय के घी में इस मिट्टी का लेपन

· 17:38–18:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर छोटे बच्चे को ऐसा दोष हो गया है — मसान से जुड़ा सूखा रोग, जिसमें मसान शरीर का पूरा खून चूस लेता है — तो इसी मिट्टी को घी में मिलाकर शरीर पर लेपन करना चाहिए। गाय का घी, और अगर एकदम शुद्ध देसी गाय का घी मिल जाए तो उसमें मिलाकर विशेष करके बच्चे की छाती पर और पीठ पर ऊपर से नीचे की ओर लगाइए। वे कहते हैं कि इससे बहुत जल्दी राहत मिलती है, और अगर आप इसे अभिमंत्रित कर लें तो सोने पे सुहागा।

29

यह तेरह वर्ष से कम के बच्चों के लिए, बताई गई तिथियों पर किया जाता है, और ऐसे पीड़ित किसी को भी बताना चाहिए

तेरह वर्ष की सीमा, और वे तिथियां जिन पर यह किया जाता है

· 18:16–18:50

वक्ता कहते हैं कि जिन्हें आप सलाह देते हैं, उनमें किसी को ऐसा कष्ट हो, तो उन्हें यह बात जरूर बताइए, और गौ माता की सेवा करने को भी जरूर कहिए। और यह काम 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए करना चाहिए। यह विशेष करके द्वादशी के समय होता है, और कुछ अन्य तिथियां भी हैं।

30

अगर 13 वर्ष से कम आयु के बच्चे पर अभिचार हुआ हो तो क्या करें?

चौदस के दिन निमंत्रण देकर लाई गई काली हल्दी

· 18:51–19:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर 13 वर्ष से कम आयु के बच्चे पर अभिचार प्रयोग हुआ हो — किसी भी प्रकार का अभिचार — और उसे बहुत कष्ट और परेशानी हो, उसकी बुद्धि भ्रमित हो रही हो, वह एकदम गंभीर हो गया हो और कुछ भी न बोलता हो, या बच्ची बहुत डिस्टर्ब रहती हो: तो गौ के खुर की यह धूल काली हल्दी के साथ लीजिए। काली हल्दी चौदस के दिन लानी होती है, और उसे भी निमंत्रण देकर लाना चाहिए।

31

वह मिश्रण कैसे बनाकर बच्चे को लगाया जाता है?

काली हल्दी, धूल और गाय का घी, अभिमंत्रित करके नाभि पर

· 19:23–19:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि काली हल्दी को इस धूल के साथ घिसिए, गाय के घी में मिलाइए — ये तीनों सामग्रियां एक साथ — और भगवती के मंत्रों से, भगवती काली के मंत्रों से, जयंती मंगला काली मंत्र से अभिमंत्रित कीजिए। फिर हर रात बच्चे के सोने से पहले, या सो जाने के बाद, रात 8-9 बजे के आसपास, पूरी सामग्री में से थोड़ी-सी उसकी नाभि पर लगाकर छोड़ दीजिए। यह लगातार करना शुरू कर दीजिए।

32

क्या तेरह वर्ष से बड़े बच्चे के लिए यह किया जा सकता है?

तेरह वर्ष से बड़े लड़के के लिए हाँ, लड़की के लिए नहीं

· 19:57–20:45 · Also a question

तेरह वर्ष से अधिक आयु का लड़का हो तो यह कर सकते हैं; लड़की का नहीं करना चाहिए। वे आगे स्पष्ट करते हैं कि यदि बच्ची रजस्वला होना आरंभ हो गई है, तो उस समय उसके लिए यह उपाय इस तरीके से नहीं करना चाहिए — उनके लिए अलग उपाय हैं। तो यह बाकी लोगों के लिए है।

33

यदि अभिमंत्रण के लिए कोई मंत्र न आता हो तो क्या करें?

अपने वर्णाश्रम धर्म के अनुसार पंचाक्षरी मंत्र

· 20:46–20:56 · Also a question

यदि आपको मंत्र नहीं आता, तो जैसा पहले चर्चा हुई, अपने वर्णाश्रम धर्म के अनुसार पंचाक्षरी मंत्र का प्रयोग करें। यज्ञोपवीत आदि को ध्यान में रखें, अतिक्रमण न करें। उसी अनुसार इसे अभिमंत्रित करें, या जयंती मंगला मंत्र से अभिमंत्रित करके प्रयोग करें — उससे भी लाभ मिलेगा।

34

क्या सामान्य लोग भी गौ रज का प्रयोग कर सकते हैं?

मस्तक पर धारण करना, और वे देव वशीकरण के विषयों से क्यों बचते हैं

· 20:57–21:23 · Also a question

सामान्य जन भी भगवती गौ माता के रज को मस्तक पर बिल्कुल धारण कर सकते हैं — केसर, अष्टगंध आदि में मिलाकर नित्य मस्तक पर लगाएँ; हर प्रकार के देवी-देवता प्रसन्न होते हैं। वे जोड़ते हैं कि बहुत लोग देव वशीकरण मंत्र सिद्धि जैसी चीजों का आरएनडी करते हैं, पर वे ऐसे विषयों की चर्चा नहीं करते, क्योंकि ये बहुत अट्रैक्टिव टॉपिक्स हैं और सामान्य व्यक्ति शायद न समझे — मान लीजिए वह देव वशीकरण साधना कर रहा है और गड़बड़ होने से कोई दैत्य शक्ति ही वशीकृत हो जाए, क्योंकि उसमें रक्षा विधान है।

35

साधक इस धूल का प्रयोग कैसे करे?

तिलक में — देवता प्रसन्न होते हैं, प्रेत शांति और पितृ कोप का शमन होता है

· 21:24–21:49 · Also a question

यदि आप साधक हैं और इस प्रकार की क्रिया करते हैं, तो इसका प्रयोग कीजिए: गोवत्स द्वादशी के दिन भगवती गौ माता के पीछे के पैर के खुर के नीचे की धूल लेकर अपने तिलक आदि में मिलाकर प्रयोग करें। आपको जरूर लाभ मिलेगा — देवताओं की कृपा अवश्य मिलती है, हर प्रकार के देवी-देवता इससे प्रसन्न होते हैं, प्रेत-पिशाच की भी शांति होती है और पितृ कोप का भी शमन होता है। वे कहते हैं, यह सभी के लिए कॉमन है।

36

कुबेर जी को लेकर क्या भ्रांतियाँ हैं?

साल में एक बार पूजा, बाकी तीन सौ चौंसठ दिन भुला दिए जाते हैं

· 21:50–22:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भैरव जी के बाद कुबेर जी को लेकर भी बहुत सारी भ्रांतियाँ हैं। उनका पूजन साल में केवल एक बार होता है, और लोग उन पर एहसान कर देते हैं — हाँ कुबेर बाबा, कुबेरनाथ बाबा, कृपा कीजिए, धन-धान्य दीजिए। बाकी तीन सौ चौंसठ दिन कुबेर जी को भी लगता होगा कि कोई मेरा नाम ले, पर कोई नहीं लेता।

37

कुबेर जी को अनदेखा क्यों नहीं करना चाहिए?

उत्तर दिशा के रक्षक, दस दिगपालों में एक, और तेरह प्रमुख यक्ष

· 22:21–23:05 · Also a question

क्योंकि वे स्वयं उत्तर दिशा के रक्षक देवता हैं, और दस दिगपालों में एक हैं — यह याद रखना चाहिए, वे कहते हैं; इसलिए कुबेर जी का पूजन कभी अनदेखा न करें। वे चैनल पर प्राण प्रतिष्ठा के उस वीडियो की ओर इशारा करते हैं जिसमें कुबेर जी की प्रतिष्ठा करके दिखाई गई है; कुबेर जी साक्षात शिव जी के मित्र कहे जाते हैं और हमारे धन के रक्षक हैं। कुबेर जी महाराज के साथ विशेष रूप से तेरह प्रमुख यक्षों की पूजा होती है।

38

यम दीपदान कब करना चाहिए — शाम को या भोजन के बाद?

बड़ों ने जैसा किया वैसा करें, पर पाँचों दिन शाम को

· 23:06–23:31 · Also a question

वे साफ कहते हैं: जैसे आपके माता-पिता या घर के बड़े-बुजुर्ग करते आए हैं, उसी प्रकार कीजिए। फिर भी धनतेरस से द्वितीया तिथि तक शाम के समय लगातार यम दीपदान करना चाहिए — पाँचों दिन करना चाहिए।

39

कुबेर जी का पिछला जन्म क्या था?

गुणनिधि, फटा गमछा और शिव मंदिर की बाती

· 23:32–24:04 · Also a question

कुबेर जी का पुराना नाम गुणनिधि था। जैसा शिव महापुराण में चर्चा हुई थी, उन्होंने अपना गमछा फाड़कर दीपक की बाती बनाई और शिव मंदिर में उसकी रोशनी बढ़ा दी, ताकि वे चोरी कर सकें — पर उसी के प्रताप से अगले जन्म में वे राजा बने, और उसके अगले जन्म में साक्षात कुबेर पद को प्राप्त हुए।

शास्त्र क्या कहता है

Guṇanidhi, having died while relighting a guttering lamp before a Śiva-liṅga with a strip torn from his own cloth (originally meaning only to steal the temple's food offering), was released from Yama's messengers by that unwitting merit, went to Śivaloka, was reborn a king (Dama of Kaliṅga), and after that life became Kubera, lord of Alakā.

मूल पाठ पढ़ें →
1

श्रुत्वा तथा स वृत्तान्तं प्राक्तनं स्वं विनिन्द्य च । कांचिद्दिशं समालोक्य निर्ययौ दीक्षितांगजः ॥

"उन वृत्तान्तों को सुनकर वह दीक्षितपुत्र अपने भाग्य की निन्दा करके किसी दिशा को देखकर अपने घर से चल पड़ा।

2

कियच्चिरं ततो गत्वा यज्ञदत्तात्मजः स हि । दुष्टो गुणनिधिस्तस्थौ गतोत्साहो विसर्जितः ॥

कुछ काल तक चलने के पश्चात् वह यज्ञदत्तपुत्र दुष्ट गुणनिधि थक जाने के कारण उत्साहहीन होकर वहीं रुक गया।

3

चिंतामवाप महतीं क्व यामि करवाणि किम् । नाहमभ्यस्तविद्योऽस्मि न चैवातिधनोऽस्म्यहम् ॥

वह बहुत बड़ी चिन्ता में पड़ गया कि अब मैं कहाँ जाऊँ, क्या करूँ? मैंने विद्या का अभ्यास भी नहीं किया और न तो मेरे पास अत्यधिक धन ही है।

4

देशांतरे यस्य धनं स सद्यः सुखमेधते । भयमस्ति धने चौरात्स विघ्नः सर्वतो भवः ॥

दूसरे देश में तत्काल सुख तो उसी को प्राप्त होता है, जिसके पास धन रहता है। यद्यपि धन रहने पर चोर से भय होता है, किंतु यह विघ्न सर्वत्र उत्पन्न हो सकता है।

5

याजकस्य कुले जन्म कथं मे व्यसनं महत् । अहो बलीयान्हि विधिर्भावि कर्मानुसंधयेत् ॥

अरे! याजक के कुल में जन्म होने पर भी मुझमें इतना बड़ा दुर्व्यसन कैसे आ गया! यह आश्चर्य है, किंतु भाग्य बड़ा बलवान् है, वही मनुष्य के भावी कर्म का अनुसंधान करता है।

6

भिक्षितुं नाधिगच्छामि न मे परिचितः क्वचित् । न च पार्श्वे धनं किंचित्किमत्र शरणं भवेत् ॥

मैं भिक्षा माँगने के लिये नहीं जाता हूँ। मेरा यहाँ कोई परिचित भी नहीं है और न मेरे पास कुछ धन ही है। मेरे लिये कोई शरण तो होनी ही चाहिये।

7

सदानभ्युदिते भानौ प्रसूर्मे मिष्टभोजनम् । दद्यादद्यात्र कं याचे न चेह जननी मम ॥

सदैव सूर्योदय होने के पूर्व ही मेरी माता मुझे मधुर भोजन देती थीं। आज मैं यहाँ किससे माँगूँ। मेरी माता भी तो यहाँ नहीं हैं।'

8

इति चिंतयतस्तस्य बहुशस्तत्र नारद । अतिदीनं तरोर्मूले भानुरस्ताचलं गतः ॥

हे नारद! इस प्रकार बहुत-सी चिन्ता करते हुए वृक्ष के नीचे बैठे-बैठे वह अत्यधिक दीन-हीन हो उठा; इतने में सूर्य अस्ताचल को चला गया।

9

एतस्मिन्नेव समये कश्चिन्माहेश्वरो नरः । सहोपहारानादाय नगराद् बहिरभ्यगात् ॥

इसी समय कोई शिवभक्त मनुष्य अनेक प्रकार की परम दिव्य पूजा-सामग्रियाँ लेकर शिवरात्रि के दिन उपवासपूर्वक महेश्वर की पूजा करने के लिये अपने परिवारजनों के साथ नगर से बाहर निकला।

10

नानाविधान्महादिव्यान्स्वजनैः परिवारितः । समभ्यर्चितुमीशानं शिवरात्रावुपोषितः ॥

उसने अनेक प्रकार की परम दिव्य पूजा-सामग्रियाँ अपने परिवारजनों के साथ लीं और शिवरात्रि के दिन उपवास रखकर महेश्वर की पूजा करने चल पड़ा।

11

शिवालयं प्रविश्याथ स भक्तः शिवसक्तधीः । यथोचितं सुचित्तेन पूजयामास शंकरम् ॥

शिव जी में रत चित्तवाले उस भक्त ने शिवालय में प्रवेश करके सावधान मन से यथोचित रूप से शंकर की पूजा की।

12

पक्वान्नगंधमाघ्राय यज्ञदत्तात्मजो द्विजः । पितृत्यक्तो मातृहीनः क्षुधितः स तमन्वगात् ॥

पक्वान्नों की गन्ध को सूँघकर पिता के द्वारा परित्यक्त, मातृहीन तथा भूख से व्याकुल यज्ञदत्त का पुत्र वह ब्राह्मण गुणनिधि उसके पास पहुँचा।

13

इदमन्नं मया ग्राह्यं शिवायोपकृतं निशि । सुप्ते शैवजने दैवात्सर्वस्मिन्विविधं महत् ॥

उसने सोचा कि ये सभी शिवभक्त जब रात्रि में सो जायँगे, तब मैं शिवपर चढ़ाये गये इस विविध नैवेद्य को भाग्यवश प्राप्त करूँगा।

14

इत्याशामवलम्ब्याथ द्वारि शम्भोरुपाविशत् । ददर्श च महापूजां तेन भक्तेन निर्मिताम् ॥

ऐसी आशा करके वह भगवान् शंकर के द्वारपर बैठ गया और उस भक्त के द्वारा की गयी महापूजा को देखने लगा।

15

विधाय नृत्यगीतादि भक्ताः सुप्ताः क्षणे यदा । नैवेद्यं स तदादातुं भर्गागारं विवेश ह ॥

भक्तलोग जिस समय नृत्य-गीत आदि करके सो गये, उसी समय वह नैवेद्य को लेने के लिये भगवान् शिव के मन्दिर में घुस गया।

16

दीपं मन्दप्रभं दृष्ट्वा पक्वान्नवीक्षणाय सः । निजचैलांचलाद्वर्तिं कृत्वा दीपं प्रकाश्य च ॥

वहाँ जल रहे दीपक के प्रकाश को मन्द देखकर पक्वान्नों को देखने के लिये अपने उत्तरीय वस्त्र को फाड़ करके बत्ती बनाकर दीपक को प्रकाशितकर

17

यज्ञदत्तात्मजः सोऽथ शिवनैवेद्यमादरात् । जग्राह सहसा प्रीत्या पक्वान्नं बहुशस्ततः ॥

यज्ञदत्त के उस पुत्र ने आदरपूर्वक शिव के लिये लगाये गये बहुत-से पक्वान्नों के नैवेद्य को एकाएक सहर्ष उठा लिया।

18

ततः पक्वान्नमादाय त्वरितं गच्छतो बहिः । तस्य पादतलाघातात्प्रसुप्तः कोऽप्यबुध्यत ॥

इसके बाद उस पक्वान्न को लेकर शीघ्र ही बाहर जाते हुए उसके पैर के आघात से कोई सोया हुआ व्यक्ति जग उठा।

19

कोऽयं कोऽयं त्वरापन्नो गृह्यतां गृह्यतामसौ । इति चुक्रोश स जनो गिरा भयमहोच्चया ॥

शीघ्रता करनेवाला यह कौन है, कौन है? इसे पकड़ो — इस प्रकार भययुक्त ऊँची वाणी में वह व्यक्ति चिल्लाने लगा।

20

यावद्भयात्समागत्य तावत्स पुररक्षकैः । पलायमानो निहतः क्षणादन्धत्वमागतः ॥

भयवश वह ब्राह्मण जब भाग रहा था, उसी समय वहाँ पुररक्षकों ने पहुँचकर उसे मारा, जिससे वह अन्धा होकर तत्काल मर गया।

21

अभक्षयच्च नैवेद्यं यज्ञदत्तात्मजो मुने । शिवानुग्रहतो नूनं भाविपुण्यबलान्न सः ॥

हे मुने! यज्ञदत्त के उस पुत्र ने निश्चित शिव की ही कृपा से नैवेद्य को खा लिया था, न कि अपने भावी पुण्यफल के प्रभाव से।

22

मृतो बद्धः समागत्य पाशमुद्गरपाणिभिः । निनीषुभिः संयमनीं याम्यैः स विकटैर्भटैः ॥

इसके पश्चात् उस मरे हुए ब्राह्मण को यमलोक ले जाने के लिये पाश, मुद्गर हाथ में लिये हुए यमके भयंकर दूत वहाँ आकर उसे बाँधने लगे।

23

तावत्पारिषदाः प्राप्ताः किंकिणीजालमालिनः । दिव्यं विमानमादाय तं नेतुं शूलपाणयः ॥

इतने में छोटी-छोटी घण्टियों से युक्त आभूषण धारण किये हुए और हाथ में त्रिशूल से युक्त हो शिव के पार्षद दिव्य विमान लेकर उसे ले जाने के लिये आ गये।

24

मुञ्चतैनं द्विजं याम्या गणाः परमधार्मिकम् । दण्डयोग्यो न विप्रोऽसौ दग्धः सर्वाघसंचयः ॥

हे यमराज के गणो! इस परम धार्मिक ब्राह्मण को छोड़ दो। यह ब्राह्मण दण्ड के योग्य नहीं है। इसके समस्त पाप भस्म हो चुके हैं।

25

इत्याकर्ण्यवचस्ते हि यमराजगणास्ततः । महादेवगणानाहुर्बभूवुश्चकिता भृशम् ॥

इसके अनन्तर शिवपार्षदों के वचन सुनकर यमराज के गण आश्चर्यचकित हो गये और महादेव जी के गणों से कहने लगे।

26

शंभोर्गणानथालोक्य भीतैस्तैर्यमकिंकरैः । अवादि प्रणतैरित्थं दुर्वृत्तोऽयं गणा द्विज ॥

शम्भु के गणों को देखकर डरे हुए तथा प्रणाम करते हुए यमराज के दूतों ने इस प्रकार कहा कि हे गणो! यह ब्राह्मण तो दुराचारी था।

27

कुलाचारं प्रतीर्ष्यैष पित्रोर्वाक्यपराङ्मुखः । सत्यशौचपरिभ्रष्टः सन्ध्यास्नानविवर्जितः ॥

कुल की मर्यादा का उल्लंघन करके यह माता-पिता की आज्ञा से पराङ्मुख, सत्य-शौच से परिभ्रष्ट और सन्ध्या तथा स्नान से रहित था।

28

आस्तां दूरेऽस्य कर्माणि शिवनिर्माल्यलंघकः । प्रत्यक्षतोऽत्र वीक्षध्वमस्पृश्योऽयं भवादृशाम् ॥

यदि इसके अन्य कर्मों को छोड़ भी दिया जाय, तो भी इसने शिव के निर्माल्य चढ़ाये गये नैवेद्य का लंघन किया है, अर्थात् चोरी की है। इस हेय कर्म को आप सब स्वयं देख लें, आप-जैसे लोगों के लिये यह स्पर्श के योग्य भी नहीं है।

29

शिवनिर्माल्यभोक्तारः शिवनिर्माल्यलंघकाः । शिवनिर्माल्यदातारः स्पर्शस्तेषां ह्यपुण्यकृत् ॥

जो शिव-निर्माल्य को खानेवाले, शिवनिर्माल्य की चोरी करनेवाले और शिवनिर्माल्य को देनेवाले हैं, उनका स्पर्श अवश्य ही पापकारक होता है।

30

विषमालोक्य वा पेयं श्रेयो वा स्पर्शनं परम् । सेवितव्यं शिवस्वं न प्राणैः कण्ठगतैरपि ॥

विष को जान-बूझकर पी लेना श्रेयस्कर है और अछूत का स्पर्श कर लेना भी अति उत्तम है, किंतु कण्ठगत प्राण होने पर भी शिवनिर्माल्य का सेवन उचित नहीं है।

31

यूयं प्रमाणं धर्मेषु यथा न च तथा वयम् । अस्ति चेद्धर्मलेशोऽस्य गणास्तं शृणुमो वयम् ॥

धर्म के विषय में आप सब जिस प्रकार प्रमाण हैं, वैसे हमलोग नहीं हैं। हे शिवगण! सुनिये। यदि इसमें धर्म का लेशमात्र भी हो, तो हम सब उसे सुनना चाहते हैं।

32

इत्थं तद्वाक्यमाकर्ण्य याम्यानां शिवकिंकराः । स्मृत्वा शिवपदाम्भोजं प्रोचुः पारिषदास्तु तान् ॥

यमके दूतों की इस बात को सुनकर शिवके पार्षद भगवान् शिव के चरणकमल का स्मरण करके कहने लगे —

33

किंकराः शिवधर्मा ये सूक्ष्मास्ते तु भवादृशैः । स्थूललक्ष्यैः कथं लक्ष्या लक्ष्या ये सूक्ष्मदृष्टिभिः ॥

हे यमकिंकरो! जो सूक्ष्म शिवधर्म हैं, जिन्हें सूक्ष्म दृष्टिवाले ही जान सकते हैं, उन्हें आप-सदृश स्थूल दृष्टिवाले कैसे जान सकते हैं?

34

अनेनानेनसा कर्म यत्कृतं शृणुतेह तत् । यज्ञदत्तात्मजेनाथ सावधानतया गणाः ॥

हे यमदूतो! पापरहित इस यज्ञदत्तपुत्र ने यहाँपर जो पुण्य कर्म किया है, उसे सावधान होकर सुनो —

35

पतन्ती लिंगशिरसि दीपच्छाया निवारिता । स्वचैलाञ्चलतोऽनेन दत्त्वा दीपदशां निशि ॥

इसने शिवलिंग के शिखर पर पड़ रही दीपक की छाया को दूर किया और अपने उत्तरीय वस्त्र को फाड़कर उससे दीपक की वर्तिका बनायी और फिर उससे दीपक को पुनः जलाकर उस रात्रि में शिव के लिये प्रकाश किया।

36

अपरोऽपि परो धर्मो जातस्तत्रास्य किंकराः । शृण्वतः शिवनामानि प्रसंगादपि गृह्यताम् ॥

हे किंकरो! इसने उस कर्म के अतिरिक्त अन्य भी पुण्यकर्म किया है। शिवपूजा के प्रसंग में इसने शिव के नामों का श्रवण किया और स्वयं उनके नामों का उच्चारण भी किया है।

37

भक्तेन विधिना पूजा क्रियमाणा निरीक्षिता । उपोषितेन भूतायामनेन स्थिरचेतसा ॥

भक्त के द्वारा विधिवत् की जा रही पूजा को इसने उपवास रखकर बड़े ही मनोयोग से देखा है।

38

शिवलोकमयं ह्याद्य गंतास्माभिः सहैव तु । कंचित्कालं महाभोगान्करिष्यति शिवानुगः ॥

अतः इन पुण्यों के प्रभाव से यह आज ही हमलोगों के साथ शिवलोक को जायगा। वहाँ शिवका अनुगामी बनकर यह कुछ समय तक उत्तम भोगों का उपभोग करेगा।

39

कलिंगराजो भविता ततो निर्धूतकल्मषः । एष द्विजवरो नूनं शिवप्रियतरो यतः ॥

तत्पश्चात् अपने पापरूपी मैल को धोकर यह कलिंग देश का राजा बनेगा; क्योंकि यह श्रेष्ठ ब्राह्मण निश्चित ही शिव का प्रिय हो गया है।

40

अन्यत्किंचिन्न वक्तव्यं यूयं यात यथागतम् । यमदूताः स्वलोकं तु सुप्रसन्नेन चेतसा ॥

हे यमदूतो! अब इसके विषय में कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। तुमलोग जैसे आये हो, वैसे ही अतिप्रसन्न मनसे अपने लोक को चले जाओ।'

41

इत्याकर्ण्य वचस्तेषां यमदूता मुनीश्वर । यथागतं ययुः सर्वे यमलोकं पराङ्मुखाः ॥

हे मुने! उनके वाक्य को सुनकर पराङ्मुख हुए समस्त यमदूत अपने लोक को लौट गये।

42

सर्वं निवेदयामासुः शमनाय गणा मुने । तद्वृत्तमादितः प्रोक्तं शंभुदूतैश्च धर्मतः ॥

गणों ने यमराज से गुणनिधि के उस सम्पूर्ण वृत्तान्त का निवेदन किया और शिवदूतों ने उनसे जो कहा था, वह समाचार आरम्भ से उन्हें सुना दिया।

43

सर्वे शृणुत मद्वाक्यं सावधानतया गणाः । तदेव प्रीत्या कुरुत मच्छासनपुरःसरम् ॥

हे गणो! तुम सब सावधान होकर मेरे इस वाक्य को सुनो। जैसा आदेश दे रहा हूँ, वैसा ही प्रेमपूर्वक तुमलोग करो।

44

ये त्रिपुण्ड्रधरा लोके विभूत्या सितया गणाः । ते सर्वे परिहर्तव्या नानेतव्याः कदाचन ॥

हे गणो! इस संसार में जो श्वेत भस्म से त्रिपुण्ड्र धारण करते हैं, उन सभी को छोड़ देना और यहाँपर कभी मत लाना।

45

उद्धूलनकरा ये हि विभूत्या सितया गणाः । ते सर्वे परिहर्तव्या नानेतव्याः कदाचन ॥

हे गणो! जो श्वेत भस्म से शरीर में उद्धूलन करते हैं, उन सबको तुमलोग छोड़ देना और यहाँ कभी मत लाना।

46

शिववेशतया लोके येन केनापि हेतुना । ते सर्वे परिहर्तव्या नानेतव्याः कदाचन ॥

इस संसार में जिस किसी भी कारण से जो शिव का वेष धारण करनेवाले हैं, उन सभी लोगों को भी छोड़ देना और यहाँ कभी मत लाना।

47

ये रुद्राक्षधरा लोके जटाधारिण एव ये । ते सर्वे परिहर्तव्या नानेतव्याः कदाचन ॥

इस जगत् में जो रुद्राक्ष धारण करनेवाले हैं या सिरपर जटा धारण करते हैं, उन सबको तुमलोग छोड़ देना और यहाँ कभी मत लाना।

48

उपजीवनहेतोश्च शिववेशधरा हि ये । ते सर्वे परिहर्तव्या नानेतव्याः कदाचन ॥

जिन लोगों ने जीविका के निमित्त ही शिव का वेष धारण किया है, उन सबको भी छोड़ देना और यहाँ कभी मत लाना।

49

दम्भेनापि छलेनापि शिववेशधरा हि ये । ते सर्वे परिहर्तव्या नानेतव्याः कदाचन ॥

जिन्होंने दम्भ या छल-प्रपंच के कारण ही शिव का वेष धारण किया है, उन सबको भी तुमलोग छोड़ देना और यहाँ कभी मत लाना।'

50

एवमाज्ञापयामास स यमो निजकिंकरान् । मत्वा तथेति ते सर्वे तूष्णीमासञ्छुचिस्मिताः ॥

इस प्रकार उन यमराज ने अपने सेवकों को आज्ञा दी, जिसको सुनकर उन लोगों ने कहा कि जैसी आपकी आज्ञा है, वैसा ही होगा — ऐसा कहकर वे मन्द-मन्द हँसते हुए चुप हो गये।

51

पार्षदैर्यमदूतेभ्यो मोचितस्त्विति स द्विजः । शिवलोकं जगामाशु तैर्गणैः शुचिमानसः ॥

इस प्रकार शिवपार्षदों ने यमदूतों से उस ब्राह्मण को छुड़ाया और वह पवित्र मनसे युक्त होकर शीघ्र ही उन शिवगणों के साथ शिवलोक को चला गया।

52

तत्र भुक्त्वाखिलान्भोगान्संसेव्य च शिवाशिवौ । अरिंदमस्य तनयः कलिंगाधिपतेरभूत् ॥

वहाँपर सभी सुखभोगों का उपभोग करके तथा भगवान् सदाशिव एवं पार्वती की सेवा करके वह दूसरे जन्म में कलिंगदेश के राजा अरिंदम का पुत्र हुआ।

53

दम इत्यभिधानोऽभूच्छिवसेवापरायणः । बालोऽपि शिशुभिः साकं शिवभक्तिं चकार सः ॥

उस शिवसेवापरायण बालक का नाम दम हुआ। बालक होते हुए भी वह अन्य शिशुओं के साथ शिव की भक्ति करने लगा।

54

क्रमाद्राज्यमवापाथ पितर्युपरते युवा । प्रीत्या प्रवर्तयामास शिवधर्मांश्च सर्वशः ॥

क्रमशः उसने युवावस्था प्राप्त की और पिता के परलोकगमन के पश्चात् उसे राज्य भी प्राप्त हुआ। उसने प्रेमपूर्वक अनेक शिवधर्मों को प्रारम्भ किया।

55

नान्यं धर्मं स जानाति दुर्दमो भूपतिर्दमः । शिवालयेषु सर्वेषु दीपदानादृते द्विज ॥

हे ब्रह्मन्! दुष्टों का दमन करनेवाला वह राजा दम शिवालयों में दीपदान के अतिरिक्त अन्य कोई धर्म नहीं मानता था।

56

ग्रामाधीशान्समाहूय सर्वान्स विषयस्थितान् । इत्थमाज्ञापयामास दीपा देयाः शिवालये ॥

उसने सभी ग्राम और जनपद-प्रमुखों को बुला करके यह आदेश दिया कि तुमलोगों को शिवालयों में दीप-प्रज्वालन की व्यवस्था करनी है।

57

अन्यथा सत्यमेवेदं स मे दण्ड्यो भविष्यति । दीपदानाच्छिवस्तुष्टो भवतीति श्रुतीरितम् ॥

यदि किसीके क्षेत्र में ऐसा नहीं हुआ, तो यह सत्य है कि उस क्षेत्र का वह प्रधान निश्चित ही मेरे द्वारा दण्ड पायेगा। दीपदान से भगवान् शिव सन्तुष्ट होते हैं — ऐसा श्रुतियों में कहा गया है।

58

यस्य यस्याभितो ग्रामं यावन्तश्च शिवालयाः । तत्र तत्र सदा दीपो द्योतनीयोऽविचारितम् ॥

जिसके-जिसके गाँव के चारों ओर जितने भी शिवालय हों, वहाँ-वहाँ सदैव बिना कोई विचार किये ही दीपक जलाना चाहिये।

59

ममाज्ञाभंगदोषेण शिरश्छेत्स्याम्यसंशयम् । इति तद्भयतो दीपा दीप्ताः प्रतिशिवालयम् ॥

अपनी आज्ञा के उल्लंघन के दोषपर मैं निश्चित ही अपराधी का सिर काट लूँगा। इस प्रकार उस राजा के भयसे प्रत्येक शिवमन्दिर में दीपक जलाये जाने लगे।

60

अनेनैव स धर्मेण यावज्जीवं दमो नृपः । धर्मर्द्धिं महतीं प्राप्य कालधर्मवशं गतः ॥

इस प्रकार जीवनपर्यन्त इसी धर्माचरण के पालन से राजा दम धर्म की महान् समृद्धि प्राप्त करके अन्त में कालधर्म की गति को प्राप्त हुआ।

61

स दीपवासनायोगाद् बहून्दीपान्प्रदीप्य वै । अलकायाः पतिरभूद्रत्नदीपशिखाश्रयः ॥

अपनी इस दीपवासना के कारण शिवालयों में बहुत-से दीपक प्रज्वलित करके वह राजा दूसरे जन्म में रत्नमय दीपकों की शिखाओं को आश्रय देनेवाली अलकापुरी का राजा कुबेर हुआ।

62

एवं फलति कालेन शिवेऽल्पमपि यत्कृतम् । इति ज्ञात्वा शिवे कार्यं भजनं सुसुखार्थिभिः ॥

इस प्रकार भगवान् शंकर के लिये अल्पमात्र भी किया गया धार्मिक कृत्य समय आनेपर फल प्रदान करता है। यह जानकर उत्तम सुख चाहनेवाले लोगों को शिव का भजन करना चाहिये।

63

क्व स दीक्षितदायादः सर्वधर्मारतिः सदा । शिवालये दैवयोगाद्यातश्चोरयितुं वसु । स्वार्थदीपदशोद्योतलिंगमौलितमोहरः ॥

कहाँ सभी धर्मों से सदा ही दूर रहनेवाला दीक्षित का पुत्र और कहाँ दैवयोग से धन चुरानेके लिये शिवमन्दिर में उसका प्रवेश एवं स्वार्थवश दीपक की वर्तिका को जलाकर शिवलिंग के मस्तकपर छाये हुए अन्धकार को दूर करनेके लिये किया गया उसका पुण्य।

64

कलिंगविषये राज्यं प्राप्तो धर्मरतिं सदा । शिवालये समुद्दीप्य दीपान्प्राग्वासनोदयात् ॥

जिसके प्रभाव से उसने कलिंगदेश का राज्य प्राप्त किया और सदैव धर्म में अनुरक्त रहने लगा। पूर्वजन्म के संस्कार के उदय होने के कारण ही शिवालय में सम्यक् रूपसे मात्र दीपक को जलाकर

65

क्वैषा दिक्पालपदवी मुनीश्वर विलोकय । मनुष्यधर्मिणानेन सांप्रतं येह भुज्यते ॥

उसने यह दिक्पाल कुबेर की महान् पदवी प्राप्त कर ली। हे मुनीश्वर! देखिये यह मनुष्यधर्मा इस समय इस लोक में रहकर इसका भोग कर रहा है।

66

इति प्रोक्तं गुणनिधेर्यज्ञदत्तात्मजस्य हि । चरितं शिवसंतोषं शृण्वतां सर्वकामदम् ॥

इस प्रकार यज्ञदत्त के पुत्र गुणनिधि के चरित्र का वर्णन कर दिया, जो शिव को प्रसन्न करनेवाला है और जिसको सुननेवाले की सभी कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।

67

सर्वदेवशिवेनासौ सखित्वं च यथेयिवान् । तदप्येकमना भूत्वा शृणु तात ब्रवीमि ते ॥

गुणनिधि ने सर्वदेवमय भगवान् सदाशिव से जिस प्रकार मित्रता प्राप्त की, अब मैं उसका वर्णन आपसे कर रहा हूँ। हे तात! एकाग्रचित्त होकर आप सुनें।

40

कुबेर बनने से पहले वाले जन्म में राजा के रूप में कुबेर जी महाराज ने क्या किया?

घोषणा कि जो दीपदान नहीं करेगा उसका सिर काट दिया जाएगा

· 24:05–24:34 · Also a question

जब कुबेर जी महाराज को राजा का जन्म मिला था, तो उन्होंने पूरे नगर में घोषणा करवा दी थी कि जो दीपदान नहीं करेगा — विशेष करके शिव जी के मंदिर में — उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा। वक्ता कहते हैं कि वे यह सब लोगों के कल्याण के लिए ही कर रहे थे; उन्होंने नियम बनाए थे। और उसी की कृपा से भगवान ने उन्हें कुबेर पद पर बैठा दिया।

41

धनतेरस पर पहला कार्य क्या है?

यक्षराज कुबेर के लिए पूजन स्थान और शिव मंदिर में तेरह दीपक

· 27:01–27:24 · Also a question

धनतेरस के दिन पहला कार्य है: शाम को अपने पूजन स्थान में, जब हम पूजन करते हैं, यक्षराज कुबेर जी महाराज के निमित्त तेरह दीपक जलाना। तेरह — तेरह दीपक। शिव मंदिर में भी तेरह दीपक जलाने हैं। यदि घी का सामर्थ्य हो, तो घी की बाती प्रयोग करें।

42

क्या सरसों के तेल का दीपक प्रेतों को खींचता है?

वे इसे आजकल की मनगढ़ंत बात कहते हैं

· 27:25–27:37 · Also a question

वे कहते हैं, यह शंका मन में मत लाइए कि सरसों के तेल का दीपक जलाने से प्रेत-पिशाच आकृष्ट होते हैं। ये मनगढ़ंत बातें हैं जो आजकल चल रही हैं। रक्षा के लिए हमेशा सरसों का ही प्रयोग होता है, सरसों के तेल का प्रयोग होता है।

वक्ता कहते हैं, यह शंका मन में मत लाइए कि जब हम सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं, तो उससे प्रेत-पिशाच आकृष्ट होते हैं। ये मनगढ़ंत बातें हैं जो आजकल चल रही हैं। रक्षा के लिए हमेशा सरसों का ही प्रयोग होता है, सरसों के तेल का प्रयोग होता है।

43

अच्छा घी न खरीद सकूँ तो क्या दीपकों के लिए सस्ता घी ले लूँ?

दो-तीन सौ रुपये वाला घी चर्बी से निकाला तेल होता है

· 27:38–27:54 · Also a question

यदि सामर्थ्य नहीं है, तो दो सौ-तीन सौ रुपये किलो वाले घी का दीपक मत जलाइए — वे कहते हैं, उससे दोष लगेगा। वह चर्बी से निकाला हुआ तेल रहता है, और वही "घी" रहता है। यह गलती मत कीजिए। आपको इन शंकाओं में नहीं पड़ना है; पूरी तरह निश्चिंत होकर तेरह दीपक जलाइए।

वक्ता कहते हैं, यदि आपका सामर्थ्य नहीं है, तो क्या आप दो सौ, तीन सौ रुपये किलो वाले घी का दीपक जलाएँगे? उससे दोष लगेगा। वह चर्बी से निकाला हुआ तेल रहता है, और वही घी रहता है। वह गलती मत कीजिए। आपको इन शंकाओं में नहीं पड़ना है। एकदम निश्चिंत होकर सबसे पहले आप तेरह दीपक जलाएँगे।

44

तेरह दीपक कहाँ-कहाँ रखे जाते हैं?

पूजन स्थान, कुलदेवता, चौखट, पानी, तुलसी और पितर

· 27:55–28:31 · Also a question

वे तेरह दीपक घर में अलग-अलग स्थानों पर रखे जाते हैं। एक पूजन स्थान में रखें; जहाँ कुलदेवी-देवता का थान है, वहाँ एक रखें; चौखट पर एक जरूर रखना है। घर में जहाँ कहीं पीने का पानी रखने का स्थान है, वहाँ पितरों के निमित्त एक रखना है। एक तुलसी जी के पास, और जो भी देव वृक्ष हो — तुलसी जी, अपराजिता — उनके पास रखना है। और यदि आपने पितरों के लिए कहीं स्थान बनाया है या उनकी फोटो रखते हैं, तो वहाँ भी जगह देकर दीपक रखेंगे।

45

चौखट पर स्वयं क्या किया जाता है?

कुलदेवी और कुल भैरव के लिए रंगोली और दोनों तरफ दीपक

· 28:32–29:08 · Also a question

चौखट का विशेष ध्यान रखना है। पहले जहाँ चौखट, घर की दहलीज, को कुछ समझा ही नहीं जाता था, अब लोग चौखट सजाते हैं: सुंदर रंगोली बनाते हैं और दोनों तरफ कुलदेवी के नाम से, कुल भैरव के नाम से, या केवल भैरव जी के नाम से दीपक जलाते हैं।

46

सब कुछ चौखट पर ही क्यों होता है?

चौखट लंघन — चौखट लाँघने से तंत्र चलता है और कटता है

· 29:09–30:00 · Also a question

वे कहते हैं, पूरा खेल चौखट का ही है; चौखट लाँघने से ही सब होता है। कहीं भी देखिए: चौखट लंघन होता है, और चौखट के उल्लंघन से तंत्र चलता है, तंत्र कटता है, अच्छी चीज होती है, बुरी चीज होती है। इसलिए सभी को चौखट पर दीपदान करना चाहिए।

47

यमराज का दीपक कैसे बनाया जाता है?

सरसों या तिल के तेल का चार मुँह वाला दीपक, पलाश के पत्तल पर अनाज के ऊपर

· 30:01–30:40 · Also a question

यमराज के निमित्त दीपदान के लिए चार मुँह वाला दीपक होना चाहिए। सरसों का तेल या तिल का तेल, दोनों में से कोई भी प्रयोग करें — उनके अनुसार सरसों का तेल प्रयोग करना चाहिए, यमराज के लिए वही सर्वश्रेष्ठ है। उसके बाद कोई अनाज, जैसे गेहूँ या साबुत अनाज; शादी-ब्याह में खिलाने के लिए जो पलाश के पत्तों वाला पत्तल होता है, उस पर अनाज की ढेरी रखें, और उसके ऊपर यमराज के नाम से चार मुँह वाला दीपक रखें।

48

यमराज के दीपक के साथ क्या रखा जाता है?

थोड़ी दक्षिणा और मिठाई, क्षेत्रपाल निकारी की तरह

· 30:41–31:15 · Also a question

या केवल अष्टगंध से तिलक करें, और वहाँ उस दीपक के लिए थोड़ी सी दक्षिणा रखें — जैसे हम क्षेत्रपाल निकारी करते हैं; यह लगभग उसी का प्रतिरूप है। वहाँ थोड़ी सी मिठाई रखेंगे। उसके बाद उस दीपक को हाथ में लें।

वक्ता कहते हैं, या उस दीपक को केवल अष्टगंध से तिलक करके वहाँ थोड़ी सी दक्षिणा रखिए — थोड़ी सी, जैसे हम क्षेत्रपाल निकारी करते हैं; यह लगभग उसी का प्रतिरूप है। वहाँ थोड़ी सी मिठाई रखेंगे। उसके बाद उस दीपक को हाथ में लेकर — मंत्र आदि हैं, और यमराज दीपदान आदि के लिए संकल्प है।

49

यम दीपक हाथ में लेकर कौन सी प्रार्थना की जाती है?

धर्मराज से प्रार्थना कि परिवार में किसी की अपमृत्यु न हो

· 31:16–31:59 · Also a question

हाथ में लेकर आप यमराज के निमित्त प्रार्थना करेंगे: हे धर्मराज, हे यमराज, हम सभी पर कृपा करें; इस घर-परिवार में किसी की अपमृत्यु न हो; हम धर्म पथ पर चलें, धर्म से धन का अर्जन करें, और प्राणी मात्र की सेवा करते हुए, धर्म पथ पर चलते हुए, अंत में उच्च लोक की प्राप्ति करें।

50

कौन-कौन से अनाज रखे जा सकते हैं, और अंत में दीपक कहाँ रखा जाता है?

गेहूँ, साबुत उड़द, काला और सफेद तिल; फिर घुमाकर दक्षिण की ओर रखना

· 32:00–32:23 · Also a question

अनाज में गेहूँ, साबुत उड़द, काला तिल और सफेद तिल भी रख सकते हैं। इन सबको थाली में साथ रखें, ऊपर दीपक रखें, फिर उसे पूरे घर में घुमाएँ; यमराज के निमित्त प्रणाम करें, और फिर घर से बाहर ले जाकर दक्षिण दिशा की ओर रखें। जहाँ आसपास दक्षिण दिशा नहीं है — घर लाइन से बने हैं — वहाँ घर के सामने ही थोड़ा साइड में रख दें।

51

पाँच दिन का अनुष्ठान करते समय क्या खाना चाहिए?

सात्विक भोजन, लहसुन-प्याज नहीं, और ब्रह्मचर्य

· 32:24–33:21 · Also a question

वे कहते हैं, इसमें कोई टेंशन नहीं है। सात्विक खाना खाइए। पाँच दिन लहसुन-प्याज मत खाइए। ब्रह्मचर्य पालन शुरू कीजिए — और कार्तिक में जितना ब्रह्मचर्य रखेंगे, उतना बढ़िया। इसके सिवाय सुबह जितना हो सके सात्विक या कम खाना खाइए, और यदि ऑफिस या जो भी काम है उससे थोड़ा समय मिले, तो थोड़ा सो भी लीजिए, ताकि नींद पूरी हो जाए, क्योंकि रात को जाप करना है।

52

क्या यह सच है कि साधक को दिन में नहीं सोना चाहिए?

केवल तभी, जब आप स्थूल शरीर पर विजय पा चुके हों

· 33:22–34:03 · Also a question

वे कहते हैं, एक विषय है कि साधक को दिन में नहीं सोना चाहिए — पर यह शरीर के सामर्थ्य तक ही है: यदि आपने प्राणायाम और योग से शरीर को जागृत कर लिया है और स्थूल शरीर पर विजय पा ली है, तो आप निद्रा पर नियंत्रण पा सकते हैं। नहीं तो यह मत सोचिए कि न दिन में सोएँगे, न रात में, बस रात ढाई बजे से दो-तीन घंटे सोएँगे। सबका शरीर साथ नहीं देगा।

53

क्या शरीर रात वाली दिनचर्या में ढल नहीं जाएगा?

ढल जाता है — जैसे नवरात्रि में, दो-तीन दिन बाद

· 34:04–35:12 · Also a question

वे कहते हैं, ढल जाता है, और नवरात्रि का उदाहरण देते हैं: शुरू के दो-तीन दिन हालत खराब रहती है, और शरीर को एडजस्ट होने में दो-तीन दिन लगते हैं; उसके बाद वह उसी अनुरूप में पूरा हो जाता है — कब सोना है, कब जागना है, कब क्या करना है। नवरात्रि पूरी होने पर फिर नॉर्मल होने में दो-तीन दिन लगते हैं; नींद ही नहीं आती। ठीक उसी प्रकार, जब आप नियम बनाकर साधना शुरू करेंगे, तो आपका शरीर एडजस्ट कर लेगा।

54

अनुष्ठान के दिनों में भोजन कब करना चाहिए?

रात की साधना पूरी होने के बाद, पहले नहीं

· 35:13–35:44 · Also a question

रात को साधना पूरी कर लेने के बाद फिर से खाना खाकर सो जाइए। साधना से पहले खाना खाएँगे तो नींद आएगी। इसलिए साधना पूरी करने के बाद खाइए — आप जो भी साधना कर रहे हों, चाहे वह कालिका योगिनी हो, महाभैरव हो या अन्य।

55

शाबरी विद्या से जुड़ी साधनाओं के लिए गौ पूजन और भी ज्यादा आवश्यक है

शाबरी विद्या के लिए गौ पूजन और भी ज्यादा आवश्यक है

· 35:45–36:42

शाबर मंत्र की साधना करने वालों से वे कहते हैं कि विशेष ध्यान रखें: शाबरी विद्या से जुड़ी साधनाओं के लिए गौ पूजन और भी ज्यादा आवश्यक है, क्योंकि गौ माता से जुड़े अनेकों प्रयोग होते हैं। विशेषकर जो लोग शाबर मंत्र की साधनाएँ करने वाले हैं, वे गोवत्स द्वादशी का बताया गया प्रयोग जरूर करें।

56

नारियल वाला दीपदान क्या है और कितने दिन करना चाहिए?

गड़ी वाला नारियल काटकर उसमें एक सौ आठ बातियाँ

· 36:43–36:59 · Also a question

नारियल से जुड़ा दीपदान — गड़ी वाले नारियल को काटकर उसमें एक सौ आठ बातियाँ डालकर, कुलदेव, कुलदेवी, कुलदेवता और कुलभैरव के निमित्त, और लक्ष्मी जी के निमित्त — वह विधि आप पाँच दिन विशेष रूप से करें। यदि आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, तो वे कहते हैं कि एक गड़ी लगभग पचास रुपये का मिलता है, तो एक दिन का खर्च लगभग ढाई सौ रुपये होगा।

57

नारियल वाला दीपदान किन दिनों जरूरी है, और यम तर्पण क्या है?

चौदस और अमावस्या का दीपदान, और यमराज का तर्पण

· 37:00–37:48 · Also a question

चौदस को और अमावस्या को — कम से कम ये दो दिन — पाँच-पाँच गड़ी का दीपदान अच्छे से कीजिए; यानी ढाई-ढाई नारियल, तो पाँच नारियल में दो दिन हो जाएँगे। ये दो दिन जरूर करने हैं; दीपदान जरूर-जरूर होना चाहिए। फिर यम तर्पण की विधि भी है, जिसमें यमराज का तर्पण किया जाता है।

58

यम तर्पण कैसे और किन दिनों किया जाता है?

यमराज के बारह नाम, दक्षिण की ओर मुख, शाम के समय

· 37:49–38:13 · Also a question

यदि आप यज्ञोपवीत पहनते हैं, जनेऊ हुआ है, तो यम तर्पण कीजिए। विधि आती हो तो अच्छा है; नहीं तो यमराज के बारह नामों से तर्पण होता है। सफेद तिल और काला तिल डालकर, जनेऊ को गले में कंठी जैसा बनाकर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, पवित्री आदि और सफेद वस्त्र धारण करके, शाम के समय तर्पण किया जाता है। यह पाँचों दिन होता है, पर धनतेरस, चौदस और अमावस्या को जरूर करना चाहिए।

59

चतुर्दशी पर पहला पूजन किसका है?

हनुमान जी — दक्षिण की मान्यता में यह उनकी जयंती है

· 38:14–38:53 · Also a question

चतुर्दशी तीसरा दिन है; प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी 11 नवंबर को है, और चौदस का पूजन उसी दिन करना है। चौदस के पूजन में शाम का सबसे पहला पूजन हनुमान जी का है। दक्षिण के मंत्र के अनुसार और कल्प भेद के अनुसार इस दिन हनुमान जयंती मानी जाती है — दक्षिण में हनुमान जी की जयंती चैत्र पूर्णिमा को न मानकर कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मानते हैं। इसलिए उस दिन सभी जरूर हनुमान जी का पूजन करें।

60

हनुमान जी का पूजन कैसे किया जाता है?

मंदिर में चोला — और स्त्रियाँ स्वयं नहीं चढ़ातीं

· 38:54–39:22 · Also a question

इसके लिए कोई बहुत विशेष विधि-विधान नहीं है। चतुर्दशी के दिन शाम को या सुबह, नहा-धोकर सबसे पहले हनुमान जी के मंदिर जाइए। संकल्प करके चोला चढ़वाइए, या यदि स्वयं चढ़ाने की व्यवस्था हो, तो स्वयं चढ़ा दीजिए। स्त्रियाँ स्वयं चोला नहीं चढ़ाएँगी — वे पंडित जी से संकल्प करवाकर चढ़वा देंगी।

61

धनतेरस पर कुबेर को पान पत्ते के साथ क्या चढ़ाया जाता है?

पान के तेरह बीड़े — यक्षों को तांबूल बहुत पसंद है

· 39:23–40:01 · Also a question

वे एक भूली हुई बात याद करते हैं: यक्षराज कुबेर के पूजन में पान पत्ते का प्रयोग जरूर करें — यक्षों को तांबूल, पान, बहुत पसंद है। तो बीड़ा चढ़ा सकते हैं: पान के तेरह बीड़े, या पान पत्ते पर लौंग, इलायची, सुपारी और कुछ मीठा भोग प्रसाद रखकर, धनतेरस के दिन यक्षराज कुबेर के निमित्त तेरह जगह भोग लगाएँ। बाद में सारे बीड़ों का विसर्जन करना है — खुद मत खाने लगिए, हालाँकि लौंग और इलायची प्रयोग कर सकते हैं।

62

हनुमान जी के लिए पान पत्तों पर क्या लिखा जाता है?

नारंगी सिंदूर से राम लिखे ग्यारह पान पत्ते

· 40:02–40:36 · Also a question

हनुमान जी के लिए ग्यारह पान पत्ते होते हैं, जिन पर — जैसा हम बार-बार कहते हैं — राम लिखना है। नारंगी सिंदूर को चमेली के तेल में, या देसी घी में मिलाकर, जिस उंगली से हम तिलक करते हैं — कनिष्ठिका के बगल वाली छोटी उंगली, जिसमें लोग सगाई की अंगूठी पहनते हैं — उससे हर पान पत्ते पर राम लिखिए: र में आकार और ऊपर बिंदु।

63

हनुमान जी को कौन से दीपक और भोग चढ़ाए जाते हैं?

पांच लड्डू, पांच तुलसी पत्ते और आटे के पांच एक मुंह वाले दीपक

· 40:37–41:30 · Also a question

कम से कम पांच लड्डू, पांच तुलसी पत्ते, और जो दीपक जलाया जाता है वह पांच अनाज या सात अनाज का होता है। अगर यह न कर सकें तो आटे का दीपक जलाइए। आटे के पांच दीपक बनाइए, एक ही मुंह वाले। हनुमान जी के लिए पांच मुंह या चार मुंह वाला नहीं बनाना है। इन्हें हनुमान जी के मंदिर ले जाइए। सरसों तेल या देसी घी, किसी से भी जला सकते हैं।

64

उस दिन हनुमान जी के कौन से अनुष्ठान दोहराए जा सकते हैं?

हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान साठिका, बड़वानल और साबर रूप

· 41:31–41:56 · Also a question

हनुमान जी के निमित्त अब तक जो भी अनुष्ठान आपने किया है — हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान साठिका, बड़वानल, या कोई और साबर मंत्र, जंजीरा या उनका पंजर, जो सब दिए गए हैं — अगर आपने ये किए हैं, तो चाहें तो उस दिन उसका जाप और पुरश्चरण कर सकते हैं।

65

शत्रु और अभिचार से परेशान व्यक्ति क्या शुरू करे?

चतुर्दशी से भैरव जयंती तक — हनुमान जी का पंजर

· 41:57–42:45 · Also a question

जिनकी समस्या शत्रु और अभिचार से जुड़ी है, और जो अभी कोई साधना नहीं कर रहे, वे चतुर्दशी के दिन से — 11 नवंबर, शनिवार को पड़ने वाली चौदस से — शुरू करके कम से कम 5 दिसंबर, भैरव जयंती तक करें। अगर बिल्कुल नई साधना, खासकर साबर से जुड़ी विशेष साधना शुरू करनी है, तो सिद्ध साबरी विद्या चैनल पर दिया गया हनुमान जी का पंजर है। वे कहते हैं कि इसका लिंक इस चैनल पर और ग्रुप में शेयर करेंगे। यह अभिचार नाश के लिए, शत्रुओं के अभिचार और षड्यंत्र से रक्षा के लिए, और शत्रु नाश के लिए भी अति तीव्र प्रभावी है।

66

पहले से शुरू की हुई साधना दोहराएं; नई साधना गुरु-गणपति की बुनियादी साधना के बाद ही

जो शुरू किया है वही दोहराएं — नई साधना गुरु-गणपति की बुनियादी साधना के बाद ही

· 42:46–43:29

वे फिर कहते हैं कि अगर पहले से कोई साधना कर रहे हैं, तो उसी को दोहराइए। रक्षात्मक साधना अगर नहीं की है, तो कर सकते हैं। बहुत लोग गणपति जी की साधना करते आए हैं, संकट नाशन किया है, दत्तात्रेय महाराज का एकाक्षरी जाप किया है। जब गुरु और गणपति की उनकी बुनियादी, आरंभिक साधना पूरी हो जाए, तब भैरव जी या हनुमान जी की साधना करनी है। दोनों में से कोई भी द्वादशी से या चतुर्दशी से शुरू कर सकते हैं। उनके अनुसार अभी हनुमान जी का पंजर करना चाहिए, जो सबसे तीव्र है। चाहें तो बड़वानल भी कर सकते हैं।

67

चतुर्दशी की शाम को घर पर क्या किया जाता है?

घर पर हनुमान पूजन, हवन और चौदह दीपक

· 43:30–44:32 · Also a question

मंदिर के बाद शाम को घर पर हनुमान जी का पूजन करें। हवन आदि करने की इच्छा हो तो उपवास रखकर शाम को हवन करें, और हवन के बाद खा सकते हैं। ऐसा उपवास पूरी तरह ज़रूरी नहीं है। अगर आप उपवास नहीं रखते आए हैं, तो इस साल पहली बार मत रखिए, क्योंकि अगले दिन दीपावली के पूजन में उपवास रखना पड़ेगा। घर में हनुमान जी के सामने घी के पांच दीपकों का दीप दान अलग से ज़रूर करें। और चतुर्दशी के दिन चौदह दीपक एक साथ जलाकर घर में अलग-अलग जगह सजाने चाहिए।

68

चतुर्दशी की रात को क्या किया जाता है?

फिर से यमराज का दीप दान, और काली चौदस पर काली जी का जाप

· 44:33–44:55 · Also a question

उसके बाद यमराज का दीप दान है — फिर से आप यमराज का दीप दान करेंगे। और चतुर्दशी की रात को, जो भी अनुष्ठान आप पहले से कर रहे हैं या शुरू कर रहे हैं — मान लीजिए आप काली जी का पूजन करते हैं, काली जी की साधना और अनुष्ठान कर रहे हैं — तो चतुर्दशी की रात उनका जाप ज़रूर करें। काली चौदस है, तो उस दिन उनका जाप ज़रूर होगा।

69

अगर मैं कोई साधना नहीं कर रहा और उलझन में हूं तो क्या करूं?

धनतेरस या काली चौदस से भाई दूज तक एक बहुत छोटा सा अभ्यास

· 44:56–45:31 · Also a question

अगर आप कोई साधना नहीं कर रहे, कर पाने में सक्षम नहीं हैं, बैठने का उतना सामर्थ्य नहीं है, या अभी बहुत कंफ्यूज हैं — कंफ्यूजन ज़रूरत से ज़्यादा है और इच्छा ही नहीं होती — तो वे एक बहुत छोटा सा काम बताते हैं। धनतेरस के दिन से, नहीं तो काली चौदस से शुरू करके कम से कम भाई दूज तक कीजिए। तीन दिन करना चाहें, तो चौदस, अमावस्या और प्रतिपदा — इतना कर लीजिए।

70

उस छोटे अभ्यास में खाने और समय के क्या नियम हैं?

सामान्य खाना खाएं, गर्म पानी से नहाएं, और रात करीब नौ बजे बैठें

· 45:32–46:03 · Also a question

इसमें आपको रात के समय काम करना है। खाने-पीने की कोई चिंता नहीं करनी है — बिल्कुल खाना खाइए। बस थोड़ी ठंड लगे, तो शाम को नहाने से पहले पानी गर्म करके नहा लीजिए। चतुर्दशी की शाम या रात करीब नौ बजे, या अगर घर में गार्जियन से अनुमति है और आपस में लड़ाई-झगड़े जैसी कोई समस्या नहीं है, तो देर रात भी यह काम कर सकते हैं — चौदस के निश्चित व्यापम में, महानिश्चित व्यापम में, महानिशीथ काल में।

71

क्या इसके लिए काली जी की छवि ज़रूरी है?

छोटा सा छाया चित्र या श्री विग्रह चलेगा, पर ज़रूरी नहीं

· 46:04–46:23 · Also a question

इसमें आपको भगवती काली जी का पूजन करना है। काली जी का कोई छोटा सा छाया चित्र या उनका श्री विग्रह आदि हो तो भी चलेगा, और न हो तो भी कोई दिक्कत नहीं। चाहें तो नया इंतज़ाम करके रख सकते हैं — रखकर करेंगे तो बढ़िया है, अच्छा है, आपके भाव ज़्यादा बनेंगे; पर उसके बिना भी चलेगा।

72

काली चौदस की रात का अभ्यास क्या है?

काली चालीसा का पाठ और भगवती काली के लिए सोलह दीपक

· 46:24–46:58 · Also a question

इसमें काली चालीसा का पाठ करना है। वे कहते हैं कि इसकी पूरी बृहद विधि, पूरा विधि विधान अलग बात है — वह काली जी की नित्याओं के साथ का पूजन है। पर सोलह दीपक जलाने होते हैं, भगवती काली के निमित्त। काली जी की सोलह नित्याएं हैं, और सोलह के सिवाय भी अन्य नित्याएं हैं जो महानित्याओं में आती हैं। उतना न करके आपको केवल इतना करना है।

73

काली मंदिर में क्या लेकर जाऊं?

सत्ताईस नींबू की माला, मिठाई, और घर से अक्षत

· 46:59–47:23 · Also a question

कम से कम सत्ताईस नींबू की माला ज़रूर बनाइए। नींबू और फूल मिलाकर भी बना सकते हैं। नहा-धोकर माला बनाइए, थोड़ी मिठाई लीजिए, और ऐसे पूजन के लिए मंदिर जाते समय घर से अक्षत ज़रूर ले जाइए। अक्षत यानी अखंडित चावल, पीले रंग में रंगे, पीले कपड़े में या किसी कटोरी या बर्तन में। पहले उसे अपने पूजा स्थान पर रखिए, प्रणाम कीजिए, और भगवती के मंदिर ले जाइए।

74

मंदिर में क्या किया जाता है?

दो दीपक, और नाम-गोत्र बताकर माला व अक्षत पुजारी को देना

· 47:24–47:54 · Also a question

सबसे पहले वहां दीप दान करें — मंदिर में कम से कम दो दीपक जलाने हैं। फिर भगवती काली के जो भी पुजारी वहां हों, उन्हें अपना नाम और गोत्र बताकर दीजिए, कि मेरे नाम-गोत्र से भगवती का पूजन कर दीजिए और यह अक्षत भगवती के श्री चरणों में समर्पित कर दीजिए। वे भगवती को माला पहनाएंगे, अक्षत चढ़ाएंगे, भोग लगाएंगे। पुजारी जी जो भी प्रसाद और उसमें रखे फूल लौटाएं — फूल, बेलपत्र, जो भी भगवती के श्री चरणों से मिले — उसे लाकर अपने पूजा स्थान पर रखना है।

75

रात में सोलह दीपक कैसे सजाए जाते हैं?

रोली की ढेरियां, मिट्टी के दीपक, डबल बाती, सरसों तेल और पांच काली मिर्च

· 47:55–48:44 · Also a question

रात में सोलह दीपक जलाने हैं। रोली लीजिए — ढाई सौ ग्राम या दो सौ ग्राम का पैकेट, क्योंकि तीनों दिन रोली अच्छी मात्रा में लगेगी। पूजा स्थान पर नीचे रोली की सोलह ढेरियां बनाइए, और हर ढेरी पर एक-एक दीपक सजाइए। मिट्टी के दीपक ले सकते हैं; मिट्टी के हों तो हर दिन नया दीपक लीजिए। एक बार में पांच दर्जन तक ले लीजिए, दीपावली में तो ज़रूरत पड़ेगी ही। हर एक में रुई की बाती डालिए — सब में डबल बाती, सब में सरसों का तेल, और हर एक में पांच काली मिर्च ज़रूर। लौंग या इलायची नहीं डालनी है, केवल काली मिर्च।

76

यह सोलह दीपकों की विधि किसलिए है?

रक्षण, शत्रु नाश, और तंत्र व प्रेत से रक्षा

· 48:45–49:30 · Also a question

यह रक्षण के लिए है, शत्रु नाश के लिए है, तंत्र विचार के नाश के लिए है, और प्रेत-पिशाच विचार आदि से रक्षा के लिए है — यह विधि विशेष रूप से। अगर बार-बार धन हानि हो रही है, बार-बार एक्सीडेंट हो रहे हैं, तो यह पूजन कर सकते हैं। और जो लोग दूसरी साधनाएं कर रहे हैं, वे भी चाहें तो दीप दान के निमित्त केवल यह कर सकते हैं।

77

दीपकों के साथ और क्या रखा जाता है, और चालीसा कैसे पढ़ी जाती है?

हर दीपक के पीछे एक फूल, लाल आसन, और लौंग पर सोलह पाठ

· 49:31–49:57 · Also a question

उन सोलह दीपकों के पीछे — मुंह भगवती की ओर होते हैं — एक-एक फूल रखना चाहिए। लाल फूल मिल जाएं तो सबसे अच्छा। एक जगह भोग लगाइए, कोई भी मिठाई या किशमिश। भगवती का श्री विग्रह या फोटो हो, तो उन्हें फूलों से सजाइए। लाल वस्त्र पहनकर लाल आसन पर बैठिए, और काली चालीसा का सोलह बार पाठ कीजिए, लौंग पर गिनकर: एक लौंग हाथ में ली, एक बार काली चालीसा का पाठ किया, भगवती के सामने समर्पित कर दी। वे कहते हैं कि काली चालीसा की पीडीएफ चैनल पर उपलब्ध है, और लोग उसका अनुभव भी पहले से डाल चुके हैं।

78

भगवती काली कैसे प्रकट हुईं?

भद्रकाली, चामुंडा और कालिका — और एक का प्राकट्य काली चौदस पर

· 49:58–50:48 · Also a question

वे कहते हैं कि जैसे ग्रहण में जाप का कई गुना फल मिलता है, वैसे ही काली चौदस का भी बड़ा महत्व है। भगवती काली कैसे प्रकट हुईं: भद्रकाली, जो भगवान शिव की जटा से प्रकट हुईं; जो भगवती कौशिकी के मस्तक से प्रकट हुईं; भगवती चामुंडा, जो भगवती काली का स्वरूप हैं, भद्रकाली का अंश भी मानी गई हैं, और सबसे अधिक पूजित हैं; और कालिका, जो भगवती पार्वती के शरीर से कौशिकी के अलग होने पर भगवती कालिका के रूप में रहीं। इन तीन प्रमुख स्वरूपों में से एक का प्राकट्य काली चौदस को माना जाता है।

79

महिषासुर और शिव जी के बारे में वे क्या कहते हैं?

रंभ का पुत्र महिषासुर, शिव जी के आशीर्वाद से प्राप्त

· 50:49–51:23 · Also a question

वे कहते हैं कि कल्प भेद के अनुसार चलें, तो ऐसे बहुत से कठिन विषय हैं जिन्हें सामान्य और नए लोग स्वीकार ही नहीं कर पाएंगे। विषय यहां तक है कि रंभ का पुत्र महिषासुर शिव जी के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ, और एक समय में शिव जी का ही स्वरूप माना गया — कि भगवान शिव ने ही उसे बचाया, और उनके जैसा त्याग कोई नहीं कर सकता। लोगों के लिए इसे स्वीकार करना संभव नहीं, पर कालिका पुराण का अध्ययन करेंगे तो बहुत से विषय स्पष्ट हो जाएंगे।

80

भगवती का सिंह वाहन कौन है?

महासिंह, जिन्हें सोमनंदी जी महाराज कहते हैं, स्वयं महाविष्णु हैं

· 51:24–52:08 · Also a question

वे कहते हैं कि यह बात आप सबको पता होनी चाहिए: भगवती के वाहन सिंह साक्षात महाविष्णु हैं। भगवती के वाहन महासिंह, जिन्हें हम सोमनंदी जी महाराज कहते हैं — और भगवती के स्वरूप के अनुसार सिंह का स्वरूप भी बदलता है — और भगवान विष्णु ही सिंह के रूप में भगवती जगदंबा के वाहन हैं। यानी जब हम जगदंबा की पूजा कर रहे होते हैं।

81

साकार से निराकार की ओर बढ़ने पर सब चीज़ें एक जगह आकर इकट्ठी हो जाती हैं

साकार से निराकार की ओर — सब चीज़ें एक जगह आकर इकट्ठी हो जाती हैं

· 52:09–52:47

वे कहते हैं कि यह द्वैत और अद्वैत की बात है। जब आप आगे बढ़ने लगेंगे, तो सब चीज़ें एक जगह आकर इकट्ठी हो जाएंगी। फिर ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई अलगाव नहीं रहता। यह सत्य विषय है, जिसे हम पुराणों में केवल पढ़ लेते हैं — कि यहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश सब एक हैं, सब भगवती से प्रकट हैं। असल में जब आप द्वैत से अद्वैत की ओर, यानी साकार से निराकार की ओर जाते हैं, जब हमारी भक्ति फलने लगती है, तब ये चीज़ें सच में प्रकट होने लगती हैं, और तब ये सारी बातें सार्थक लगती हैं।

82

दुर्गा जी के नीचे बैठा सिंह कहेगा कि हम भी तो नारायण हैं

दुर्गा जी के नीचे का सिंह कहेगा — हम भी तो नारायण हैं

· 52:48–53:24

वे कहते हैं, सोचिए: वाहन के रूप में हम नारायण की ही पूजा कर रहे हैं। जो लोग सोचते हैं कि हम तो शाक्त हैं, भगवान नारायण का नाम भी नहीं लेंगे, उनकी पूजा नहीं करेंगे — तो दुर्गा जी जिस सिंह पर बैठी हैं, वह नीचे से अपनी मूंछ पर ताव देकर कहेगा: अच्छा बबुआ, मत करो पूजा, हम भी तो नारायण हैं। तो जगदंबा भगवान नारायण के ऊपर बैठी हैं।

83

इस कल्प में भगवती को दूसरे आधार की ज़रूरत क्यों है?

कालिका पुराण में ब्रह्मा जी, और उग्रचंडा कल्प

· 53:25–54:03 · Also a question

कालिका पुराण में ब्रह्मा जी कह रहे हैं कि कल्प भेद के अनुसार भगवती का भार बढ़ रहा है, और इस कल्प में भगवान नारायण अकेले उनका भार नहीं उठा पाएंगे, तो अब वह समय आ गया है। यह उग्रचंडा कल्प के अनुसार है: इसमें यह चर्चा है कि भगवती के दोनों चरण दो अलग-अलग देवताओं पर रहें — एक विष्णु जी, और दूसरे, भगवान रुद्र भी अवतार लें, ताकि वे भगवती का भार उठा सकें।

84

क्या सायुज्य पूजन का आशीर्वाद केवल महिषासुर को मिला?

मूर्ति रहस्य, आवरण का क्रम, और भगवती के दो चरण

· 54:04–54:59 · Also a question

वे पूछते हैं: क्या आपको लगता है कि भगवती दुर्गा के साथ पूजे जाने का आशीर्वाद केवल महिषासुर को मिला, या किसी और असुर को भी सायुज्य रूप में मिला है? जब आप दुर्गा सप्तशती का मूर्ति रहस्य पढ़ते हैं, तो पढ़ते हैं कि महिष का भी सायुज्य पूजन होना चाहिए। देवी के आवरण में, प्रथम आवरण में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और उनकी प्रमुख महाशक्तियां आती हैं; बिंदु में जगदंबा का पराशक्ति रूप; और उसके बाद उसी प्रथम आवरण में, या कम से कम द्वितीय या तीसरे आवरण तक, हम देवी के वाहन सिंह का, और उसके बाद महिष का पूजन करते हैं।

85

महिषासुर के पूजन को कैसे समझें?

महादेव हर ऊर्जा का स्रोत — इतना ऊपर जाकर कुछ भी सकारात्मक या नकारात्मक नहीं रहता

· 55:00–55:57 · Also a question

वे कहते हैं कि महिषासुर का पूजन तो हो ही रहा है। हम इसे नकारात्मक रूप में लें, वह अलग विषय है; तंत्र का स्वरूप अलग विषय है, भैंसासुर की सिद्धि सब अलग विषय है — वह छोड़िए। सबको उत्पन्न करने वाले महादेव ही हैं; तंत्र ही हर ऊर्जा का स्रोत है, महादेव ही हर ऊर्जा का स्रोत हैं, और हर ऊर्जा के नाभिकीय मंडल में भगवती ही उपस्थित हैं। जब हम इतना ऊपर तक चले जाएंगे, तो हमारे लिए कुछ भी सकारात्मक या नकारात्मक नहीं रहेगा।

86

कौन सा कल्प कहां माना जाता है?

कामाख्या में प्रचंडा, विंध्य क्षेत्र में उग्रचंडा, बंगाल में कौशिकी

· 55:58–56:37 · Also a question

कामरूप कामाख्या जाइए, तो वहां विशेष पूजन, प्रमुख पूजन प्रचंडा कल्प के अनुसार होता है। विंध्य क्षेत्र में जो भी पूजन होता है, वह ज़्यादातर जगह उग्रचंडा कल्प के अनुसार होता है, खासकर जहां काली से जुड़े स्वरूपों का पूजन होता है। और हम खुद जो करते हैं, वह कौशिकी कल्प के अनुसार हो रहा है — यानी पश्चिम बंगाल का क्षेत्र, जहां ज़्यादातर जगह प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना आदि होती है, और षष्ठी के दिन प्रबोधन आदि।

87

सोलह दीपक भगवती कालिका और उनकी सोलह नित्याओं के नाम से जलाए जाते हैं

भगवती कालिका और उनकी सोलह नित्याओं के नाम से जलाए जाते हैं

· 56:38–57:17

शुरू से जो चर्चा चल रही थी, वह यह थी: जब आप पूजन करते हैं, तो इस तरह की शक्तियों का पूजन भी होता है, और भगवती ने खुद आशीर्वाद दिया है कि यह पूजन होगा। तो जब हम दीपावली की चतुर्दशी की रात सोलह दीपक जलाते हैं, वे भगवती कालिका के नाम से, उनकी सोलह नित्याओं के नाम से होते हैं। और अगर नित्याओं के नाम भी नहीं पता, तो सामान्य रूप से इतने जला दीजिए, और काली चालीसा का सोलह बार पाठ कीजिए, एक लौंग पर एक पाठ करके उन्हें समर्पित कीजिए।

88

क्या कालिका योगिनी के साधक और आवरण पूजन जानने वाले और कुछ कर सकते हैं?

नित्याओं और अष्ट मातृकाओं के नाम से दीप दान

· 57:18–57:52 · Also a question

बाकी जो लोग कालिका योगिनी की साधना या काली जी से जुड़ी दूसरी साधनाएं कर रहे हैं, वे भी चाहें तो दीप दान कर सकते हैं; इसमें कोई दोष नहीं। और जिन्होंने आवरण पूजन सीख लिया है — अब तक कुछ ने भगवती कालिका के तीन-चार सीख लिए हैं — जो कर रहे हैं, पुराने साधक, जिन्हें नित्याओं की, अष्ट मातृकाओं की और अष्ट तांत्रिक मातृकाओं की जानकारी है: वे चाहें तो उनके नाम से दीप दान कर सकते हैं, क्योंकि उनकी साधना तो पहले से चल रही है।

89

अमावस्या को किसका पूजन होता है?

लक्ष्मी-गणेश, यमराज, कुबेर, चित्रगुप्त और कुल देवता

· 57:53–59:07 · Also a question

अमावस्या के पूजन के लिए, स्थिर लग्न आदि देखकर, वे कहते हैं कि कब है यह अलग से कम्युनिटी पोस्ट में डाल देंगे। या अपने क्षेत्र के अनुसार जब चाहें, लक्ष्मी-गणेश जी का, यमराज का, कुबेर जी का, चित्रगुप्त जी महाराज का, और साथ में अपने कुल के देवी-देवताओं का, और महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती का पूजन कीजिए — पंचोपचार, दशोपचार या षोडशोपचार। सबसे पहले गणपति जी का होगा, फिर लक्ष्मी जी का, फिर कुल के देवी-देवताओं का, और उनके साथ यक्षराज कुबेर जी का।

90

एक-एक करके आवाहन और स्नान कैसे किया जाता है?

जैसे घर के चार-पांच बच्चों को एक-एक करके नहलाना

· 59:08–59:46 · Also a question

जैसे घर में चार-पांच बच्चे हों, तो एक को पकड़ो, नहलाओ, रख दो, फिर दूसरे को — वैसे ही यहां प्रमुख शक्तियों या प्रमुख विग्रहों के साथ: चाहें तो एक-एक करके, पूरे भक्ति भाव से सबका आवाहन कीजिए — पहले एक देवता का, गजाननं भूतगणादि सेवितं — अगर मंत्र आता हो। नहीं तो उनके सामने सामान्य अक्षत और फूल रखिए। फिर दूध आदि से, पंचामृत से स्नान कराइए, शुद्ध जल से स्नान कराइए, अच्छे से पोंछिए, और वस्त्र आदि पहनाकर विराजमान कर दीजिए।

91

क्या दीपावली की रात हवन ज़रूरी है?

अमावस्या की रात हवन, और इस साल कोई नया उपवास नहीं

· 59:47–1:00:33 · Also a question

इस दिन हवन आपको ज़रूर करना है — अमावस्या की रात हवन ज़रूर कर लेना चाहिए। और दीपावली के दिन, अगर आप पहले से उपवास रखते आए हैं, तो रखिए; नहीं रखते आए हैं, तो रात के पूजन के बाद खाना ज़रूर खा लीजिए। वे फिर कहते हैं कि इस साल नया उपवास शुरू नहीं करना है — इस संवत में नहीं; अगले चैत्र नवरात्रि के बाद से शुरू कीजिए।

92

देहली का पूजन क्या है?

अमावस्या को दहलीज, यानी चौखट, का पूजन

· 1:00:34–1:00:57 · Also a question

इसके बाद देहली का पूजन है — अमावस्या के दिन ही देहली का पूजन। देहली मतलब दहलीज, हमारा चौखट। जब घर के देवी-देवताओं का पूजन हो जाए, तो स्वास्तिक आदि मुख्य रूप से घर की कुल वधुओं, माताओं-बहनों, जो भी हों, उनके हाथ से बनवाना चाहिए; इससे मंगल होता है।

वक्ता कहते हैं कि इसके बाद देहली का पूजन है। अमावस्या के दिन ही देहली का पूजन। देहली मतलब यही दहलीज, अपना चौखट। जब घर के देवी-देवताओं का पूजन हो जाए, तो स्वास्तिक आदि मुख्य रूप से घर की कुल वधुओं, माताओं-बहनों, जो भी हों, उनके हाथ से बनवाना चाहिए। इससे मंगल होता है।

93

क्या दहलीज पर यंत्र बनाने चाहिए?

उनके अनुसार यह उचित नहीं — स्वास्तिक, शुभ-लाभ, रिद्धि-सिद्धि लिखिए

· 1:00:58–1:01:40 · Also a question

उनके अनुसार यह चीज़ उचित नहीं है। अगर आप बनवाते हैं या बनाते हैं, तो यह आपका अपना निजी विषय है, आपकी श्रद्धा है — कि हम बनाते हैं तो धन आता है, आकर्षण आदि के लिए। पर इसका एक नियम होता है, बनाने का तरीका होता है। अभी उसका वर्णन करना मुश्किल है; वे एक बार करके दिखाएंगे। फिर भी सामान्य रूप से बेहतर है कि आप स्वास्तिक बनाइए, शुभ लाभ लिखिए, रिद्धि-सिद्धि लिखिए — यह चलेगा।

94

चौखट का तिलक कैसे किया जाता है?

कुल देवताओं के पांच दीपकों के घी के साथ नारंगी सिंदूर

· 1:01:41–1:02:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उत्तर प्रदेश-बिहार में इसे चौखट को टिकना कहते हैं; चौखट का तिलक किया जाता है। दीपावली की शाम को जब पूजन होता है, उसी समय एक कटोरे में नारंगी सिंदूर रखा जाता है और उसमें घी आदि मिलाया जाता है — पूजन के बाद, या फिर प्रमुख देवी-देवताओं और कुल के देवी-देवताओं के नाम से जलने वाले पांच घी के दीपकों में से घी निकालकर इसमें मिलाया जाता है। इसी से प्रमुख चौखट पर पांच बार तिलक होता है, फिर घर की हर चौखट और हर दरवाजे का तिलक किया जाता है।

95

चौखट का तिलक न करने से क्या होता है?

लोगों को चोट लगती है — किदवंती मानिए, पर कीजिए

· 1:02:30–1:03:10 · Also a question

वे कहते हैं कि बहुत बार यह भी देखने को मिलता है: तिलक आदि न करने से उस दिन पैर में चोट लगनी शुरू हो जाती है; लोगों को चोट लगती भी है। किदवंती ही मानिए, पर यह करना चाहिए। विश्वास करेंगे तो विश्वास है; नहीं तो अंधविश्वास, किदवंती, कुछ भी मानिए और जहां इच्छा हो चले जाइए, यूरोप-अमेरिका, कोई दिक्कत नहीं। पर करना चाहिए। सभी को अमावस्या की रात देहली विनायक पूजन के रूप में दहलीज का, अपनी चौखट का पूजन जरूर करना चाहिए। और अगर दुर्भाग्य से घर में कोई स्त्री नहीं है, तो स्वयं ही यह पूजन कर लेना चाहिए।

96

पांचों दिन कौन सा दान करना चाहिए?

पंचबली — गाय, कुत्ता, चींटियां, कौवा और मनुष्य

· 1:03:11–1:03:56 · Also a question

इन पांच दिनों में दान-पुण्य के लिए पंचबली कीजिए: गाय को भोजन जरूर कराइए, कुत्ते को, चींटियों को; कौवे को भोजन जरूर कराइए; और किसी भी मनुष्य के निमित्त — मांगने लोग आते हैं — उनके लिए भोजन का अन्न रख दीजिए, कोई आए तो उसे दीजिए; पकाया हुआ भी दे सकते हैं, या इच्छा हो कि धन देंगे, तो धन भी दे सकते हैं। वे कहते हैं कि इन पांच दिनों में विशेष रूप से दान करना चाहिए, और गौ माता की अलग से सेवा भी कर सकते हैं।

97

भैरव साधकों को अमावस्या की रात क्या करना चाहिए?

घर पर, महानिशा काल में 108 वाला दीपदान

· 1:03:57–1:04:24 · Also a question

जिन्होंने अब तक का जीवन भैरव जी के निमित्त समर्पित कर दिया है, जो बार-बार भैरव जी का अनुष्ठान करते हैं, वे अमावस्या की रात — यानी इस बार रविवार की रात, 12 नवंबर को — 108 वाला दीपदान जरूर करें। उस दिन पूजन आदि के बाद महानिशा काल में कर सकते हैं; यह घर पर ही करना है, बाहर जाकर करने की आवश्यकता नहीं है।

98

जुआ खेलने वाले दीपक से कौन सा टोटका करते हैं?

घूरा पर की दीपावली और अमीर आदमी का दीया चुराना

· 1:04:25–1:05:25 · Also a question

वे कहते हैं कि यह प्रश्न आया था, इसलिए इस पर चर्चा करेंगे। उत्तर प्रदेश-बिहार के गांवों में छोटी दीपावली, विशेषकर चतुर्दशी के दिन, जहां कचड़ा फेंका जाता है वहां दीप जलाया जाता है; लोग इसे घूरा पर की दीपावली कहते हैं। जब व्यक्ति दीपक निकालकर घर के सामने या कहीं भी रखता है, तो जुआ खेलने वाले अमीर आदमी के घर का दीपक चुरा लेते हैं — और अमीर लोग बैठकर अपने दीये की रखवाली भी करते हैं कि कोई चुरा न ले, क्योंकि कहते हैं कि वह दीया चोरी हुआ तो उनके घर की लक्ष्मी चोरी हो जाएगी। फिर अगर लोग वह दीपक ले जाकर जुआ खेलेंगे, तो वे जीतेंगे।

99

ऐसी जगहों पर बहुत उतारा छोड़ा जाता है, और दीया उसे घर ले आता है

क्योंकि ऐसी जगहों पर बहुत उतारा किया जाता है

· 1:05:26–1:05:54

वे कहते हैं कि इस तरह के टोटके करने से बचिए; इसमें बड़ी चालाकी है। गड़बड़ यह होती है कि घूरा पर की दिवाली में लक्ष्मी जी आईं या न आईं, कोई उतारा करके रखकर चला गया हो — और आप वही दीया उठा ले गए। जुआरी जीतेगा या नहीं, पता नहीं, पर उस व्यक्ति के घर की सारी अलाय-बलाय आपके साथ चली जाएगी। वे कहते हैं कि इस चक्कर में मत पड़िए, और यह भी मत सोचिए कि पिछले साल किया था और जीत गए थे, तो इस साल भी कर लेते हैं।

100

घर से दरिद्रता कैसे निकाली जाती है?

चतुर्दशी या प्रतिपदा को सूप बजाकर अलक्ष्मी को निकालना

· 1:05:55–1:06:30 · Also a question

अपने घर की दरिद्रता निकालने के दो-तीन तरीके हैं। कहीं यह चतुर्दशी को ही करते हैं; कहीं प्रतिपदा के दिन किया जाता है — जिसमें सूप बजाकर दरिद्रता को, अलक्ष्मी को घर से निकाला जाता है। गांवों में तो विशेष रूप से सब करते हैं; शहरों में अब होता है या नहीं, उन्हें पता नहीं। इन सबके साथ बहुत सारे टोटके भी किए जाते हैं।

101

दरिद्रता वाला दीया जुए के लिए लेने में क्या बुराई है?

घूरा पर की दिवाली में पुराना दीया जलता है, नया कभी नहीं

· 1:06:31–1:07:07 · Also a question

पता चला कि दरिद्रता वाला वही दीया दोबारा जलाया गया है — क्योंकि घूरा पर की दिवाली में पुराना दीया जलाया जाता है; वहां नया दीया कभी नहीं जलता, वे कहते हैं, यह भी याद रखिए। अगर वही दीया जलाकर वहां रखा गया है, दरिद्रता का दीया वहां रखा गया है, और आप उसे जुआ जीतने के लिए ले आए हैं — तो जीवन में वह आपको क्या-क्या जिताएगा, आप समझ नहीं पाएंगे। जैसे होलिका के समय राख लाने वाले टोटके से लोग बर्बाद होते हैं, और दिवाली में दीये चुराना, पीपल के नीचे से दीया लाना — भैया, ये गड़बड़ काम मत कीजिए।

102

स्वर्णाकर्षण पादालिक भैरव का अनुष्ठान, और अलग से कालरात्रि और महाकालिका

स्वर्णाकर्षण पादालिक भैरव, और अलग से कालरात्रि और महाकालिका

· 1:07:08–1:07:44

भगवान स्वर्णाकर्षण पादालिक भैरव, जो प्रमुख भैरव हैं, उनसे संबंधित अनुष्ठान — इसलिए चुना गया क्योंकि धन से संबंधित समस्या सभी की है, सभी को धन आदि की आवश्यकता है, और धन से ही धर्म हो सकता है। वे उद्धृत करते हैं: तुम बिन यज्ञ ना होए वस्त्र ना कोई पाता। पर केवल इतना ही नहीं: दो प्रमुख आचार्य अलग-अलग अनुष्ठान करेंगे — स्वर्णाकर्षण भैरव का पूरा मंडल पूजन उत्सव एक आचार्य का, और भगवती कालरात्रि और महाकालिका का पूजन अलग।

103

जाप 10 तारीख की शाम, धनतेरस की रात्रि से, खरीदारी के मुहूर्त में आरंभ कर सकते हैं

10 तारीख की शाम से, और धनतेरस पर खरीदारी का मुहूर्त

· 1:08:37–1:09:42

इस दीपावली में साधना और मंत्र जाप कब से चालू करें, यह पूछने पर वे कहते हैं कि आप 10 तारीख की शाम से, धनतेरस की रात्रि से जाप आदि आरंभ कर सकते हैं। शुक्रवार को दोपहर 12:30 से, या 12:35 से, 1:15 तक का समय मुहूर्त शास्त्र के जानकारों ने मध्यान्ह व्यापिनी समय बताया है, जो धनतेरस पर खरीदारी के लिए सबसे उत्तम समय है, और उस समय शुक्र की होरा भी रहेगी।

104

साबरी कवच के लिए हवन कैसे करें?

वे कहते हैं कि यह करके दिखाना पड़ेगा, और वैसे हवन की जरूरत नहीं

· 1:09:43–1:09:59 · Also a question

दीपशिखा जी के पूछने पर कि साबरी कवच के लिए हवन कैसे करें, वे कहते हैं कि उन्हें यह बताना पड़ेगा — यह करके दिखाने से ही हो पाएगा। वैसे इसमें हवन की आवश्यकता नहीं है, वे कहते हैं, पर ठीक है, कभी बता देंगे।

साबरी कवच के लिए हवन कैसे करें, यह पूछने पर वक्ता दीपशिखा जी को उत्तर देते हैं कि साबरी कवच का हवन विधान उन्हें बताना पड़ेगा। वे कहते हैं कि यह करके दिखाने पर ही हो पाएगा। वैसे इसमें हवन की आवश्यकता नहीं है। लेकिन ठीक है, कभी बता देंगे।

105

क्या मैं दसों हाथों में शस्त्र वाली महाकाली की पूजा कर सकता हूं?

घर के विग्रह में कम से कम एक हाथ आशीर्वाद मुद्रा में हो

· 1:10:00–1:10:52 · Also a question

राहुल राणा जी को उत्तर देते हुए वे कहते हैं कि यह विषय पहले लाइव में स्पष्ट किया है और अलग से वीडियो भी है: घर पर ऐसे श्री विग्रह का पूजन उचित है जिसमें भगवती का कम से कम एक हाथ आशीर्वाद मुद्रा में हो, भगवती के सौम्य रूप में, क्योंकि अपना भाव भी वैसा ही बनता है। और अगर वह दस मुख वाली भगवती हैं, तो वे दस महाविद्या स्वरूपा हैं — उनकी फोटो रखकर सेवा-पूजा कर सकते हैं, चलेगा; उनके पास खप्पर है तो खप्पर में मधु रखिए, और एक हाथ आशीर्वाद मुद्रा में हो, यह उचित है।

106

क्या दीपावली की एक रात में लक्ष्मी अष्टक सिद्ध हो सकता है?

कीजिए — एक रात में 108 पाठ ही हो सकते हैं

· 1:10:53–1:11:21 · Also a question

वे कहते हैं, बिल्कुल कर लीजिए। एक रात में करना चाहते हैं, तो एक रात में — इसमें और क्या विधान बताएं? एक रात में 108 पाठ ही किए जा सकते हैं; उससे ज्यादा क्या करेंगे?

दिवाली में एक रात में लक्ष्मी अष्टक सिद्ध हो जाता है क्या और उसका क्या विधान है, यह पूछने पर वक्ता कहते हैं: बिल्कुल कर लीजिए। आप एक रात में करना चाहते हैं, तो एक रात में। अब इसमें विधान क्या ही बताएं। एक रात में 108 पाठ ही किए जा सकते हैं; उससे ज्यादा क्या करेंगे।

107

क्या कमरे में अकेले बिना धूप-दीप के जाप किया जा सकता है?

कम से कम एक कर्म साक्षी दीपक; बहुत विकट स्थिति में चंद्र-सूर्य साक्षी

· 1:11:22–1:12:09 · Also a question

यह पूछने पर कि क्या रात में कमरे में एकांत में आसन पर बैठकर, बिना धूप-दीप के, बगला माई का अष्टोत्तर नाम जाप किया जा सकता है, वे कहते हैं कि साक्षी दीपक कम से कम एक होना चाहिए — कर्म साक्षी दीपक; कम से कम एक की व्यवस्था करके जाप कीजिए, और कुछ हो चाहे न हो। बहुत विकट परिस्थिति में चंद्र और सूर्य को साक्षी बनाया जाता है, अगर ऐसी कोई अवस्था हो।

वक्ता कहते हैं: देखिए, साक्षी दीपक तो होना चाहिए। कर्म साक्षी दीपक: कम से कम एक की व्यवस्था कीजिए, और जाप कीजिए। और कुछ हो चाहे न हो। बहुत विकट परिस्थिति में चंद्र और सूर्य को साक्षी बनाया जाता है, अगर ऐसी कोई अवस्था है तो।

108

क्या मुझे महाभैरव छोड़कर कालिका योगिनी करनी चाहिए?

भागिए मत — साथ में काली पूजन कीजिए

· 1:12:32–1:13:08 · Also a question

आशीष जी को उत्तर देते हुए वे कहते हैं: महाभैरव को मत छोड़िए। उनका कीजिए। साथ में भगवती काली का पूजन कीजिए। अगर आप कालिका योगिनी करना चाहते हैं, तो वे अभी आपको मना करेंगे — रुकिए; आपने इतने दिन मेहनत की है, भागिए मत। रुकिए।

वक्ता कहते हैं: कालिका योगिनी साधना, आशीष जी — आशीष जी, महाभैरव। उनको मत छोड़िए। उनका कीजिए। साथ में भगवती काली का पूजन कर लीजिए। अगर आप कालिका योगिनी करना चाहते हैं, तो वे आपको अभी मना करेंगे। रुकिए। आपने इतने दिन मेहनत की है; भागिए मत। रुकिए।

109

क्या मैं दुर्गा 32 नामावली का पांच दिन का अनुष्ठान कर सकता हूं?

हां, चक्र विधि से — दिन में एक या अधिक चक्र

· 1:13:09–1:13:56 · Also a question

वे कहते हैं, बिल्कुल कर लीजिए — चक्र विधि से कीजिए। पांच दिन हैं, तो चक्र विधि से पांच बार कीजिए; यानी आप दिन में एक चक्र विधि की बात कर रहे हैं, वह भी कर सकते हैं, और एक से ज्यादा भी कर सकते हैं। सप्त श्लोकी दुर्गा, पुनरावृत्ति, या कालिका योगिनी की प्रथम साधना के बारे में अलग से पूछने पर, वे अनिल जी से कहते हैं कि सप्त श्लोकी कीजिए, क्योंकि इस बार उन्होंने सप्त श्लोकी की थी।

110

धनतेरस पर तंत्रोक्त लक्ष्मी कलश के साथ क्या करना है?

खोलिए, कच्ची सामग्री बदलिए, बाकी साफ करके फिर से भरिए

· 1:13:57–1:14:51 · Also a question

जिन सबके पास पहले से लक्ष्मी तंत्रोक्त कलश स्थापित है, स्वयं किया है या करवाया है, उन्हें धनतेरस के दिन — सुबह ही, या शाम के समय भी — कलश खोलकर सारी सामग्री निकालनी है। उसमें जो भी अनाज रखा है, उसे बदलना है। बाकी सारी सामग्री पर फिर से गंगाजल छिड़ककर, साफ वस्त्र से पोंछकर, तिलक करके, धूप-दीप दिखाकर, फिर कलश में रखकर बांधना है और सुगंधित करके रखना है। फिर उसका पूजन-पाठ करना है, और पांचों दिन पूजा स्थान पर रखना है।

111

कलश की कौन सी सामग्री बदली जा सकती है, और क्या कलश ही बदल सकते हैं?

केवल कच्ची सामग्री; पक्की वस्तुएं और कलश कभी नहीं

· 1:14:52–1:15:34 · Also a question

वे कहते हैं कि कलश नहीं बदलना है — ऐसा नहीं कि इस बार कलश अच्छा नहीं लग रहा, या थोड़ा बढ़िया कर लें, या अपने मन से कुछ एडिशनल जोड़ दें। वह सब नहीं करना है। केवल कच्ची सामग्री बदली जा सकती है: उसमें की लाल गुंजा खराब हो गई हो, कमल गट्टा खराब हो गया हो, तो बदल लीजिए; काली हल्दी खराब हो गई हो तो काली हल्दी ला सकते हैं। पर पक्की वस्तुएं — शंख, कौड़ी, कील आदि, सिक्के, रत्न — इनमें से कुछ नहीं बदलना है। और कलश कभी नहीं बदलेंगे; जितना पुराना होगा, उतना श्रेष्ठ होता जाएगा, क्योंकि आपकी सारी ऊर्जा उसमें सन्निहित रहती है।

112

क्या हर दिवाली नई लक्ष्मी-गणेश मूर्ति खरीदनी चाहिए?

हर साल मिट्टी और चीनी मिट्टी की मूर्तियां लाना बंद कीजिए

· 1:15:35–1:15:58 · Also a question

वे कहते हैं, हर दिवाली लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति लाना बंद कीजिए। लोग मिट्टी की मूर्ति, चीनी मिट्टी की मूर्ति लाते हैं और साल भर पूजते हैं; दुकानदार तो विशेष रूप से — हर दुकान में चीनी मिट्टी की लक्ष्मी गणेश मूर्ति, रंगीन कलश के साथ रहती है। अगले साल नई मूर्ति आती है, पंडित जी भी नई पर पूजा करवा देते हैं; पुरानी ले जाकर पीपल के नीचे रख दी जाती है, या पानी में फेंक दी जाती है, या घर में कहीं टूटी-फूटी मिलती है। साल भर पूजा करते हैं और फिर यही श्राप आपको लगता है। वे कहते हैं, यह अपराध करना बंद कीजिए।

113

इसके बदले क्या लाना चाहिए, और प्रतिष्ठा कब करें?

धनतेरस पर प्राण प्रतिष्ठा के साथ धातु का श्री विग्रह

· 1:15:59–1:16:25 · Also a question

जो भी धातु आपके सामर्थ्य में हो — पीतल का सामर्थ्य हो तो पीतल, चांदी का सामर्थ्य हो तो चांदी। एक बार श्री विग्रह लाइए और किसी जानकार पंडित जी या आचार्य से विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा करवाइए; नहीं तो धनतेरस के दिन स्वयं कीजिए। पुरानी को अभी मत हटाइए — पुरानी का विसर्जन दूज के बाद होगा; दूज तक उसे अलग स्थान पर रखिए। पर धनतेरस के दिन समय निकालकर पूरे विधि-विधान से कीजिए। आप करोड़पति हों, करोड़ों कमाते हों, फिर भी मूर्तियों को ले जाकर फेंकने का, हर साल की मूर्ति हटाने का जो अपराध आप कर रहे हैं, वह एक दिन आपको सड़क पर ले आएगा।

114

लोग घर में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिष्ठा से क्यों डरते हैं?

वे इस डर को षड्यंत्र कहते हैं, और वास्तु वाली बात का उत्तर देते हैं

· 1:16:26–1:17:03 · Also a question

श्री विग्रह लाइए, बढ़िया ठोस — लक्ष्मी गणेश जी का विग्रह खोखला नहीं होना चाहिए। इनका कभी विसर्जन नहीं होता, इन्हें कभी विदाई नहीं दी जाती। इसमें चल प्रतिष्ठा होती है, अचल नहीं, इसलिए घर में प्रतिष्ठा कैसे होगी, इसकी चिंता नहीं करनी। वे कहते हैं कि सब कुछ एक में लपेट दिया गया है: वे कहेंगे कि घर में धूमावती की साधना नहीं करनी, उनका विग्रह नहीं रखना, और बगलामुखी का विग्रह रखें तो नियम हैं — पर लोगों ने उसे भी सबके सामने रखने लायक समझा दिया है, जबकि लक्ष्मी गणेश जी की प्रतिष्ठा कराने में लोगों की हिम्मत टूट जाती है। और जो कहते हैं कि वास्तु शास्त्र कहता है घर में मंदिर नहीं होना चाहिए, उनके बारे में वे कहते हैं कि उन्हें चप्पल खोलकर मारना चाहिए।

115

विग्रह किस आकार का हो, और खड़ी लक्ष्मी वाला नियम सही है क्या?

छह इंच तक, ठोस — और खड़ी लक्ष्मी वाले टोटके में कोई लॉजिक नहीं

· 1:17:04–1:17:42 · Also a question

घर में धातु के श्री विग्रह लाइए, ठोस हों, खोखले नहीं, सामर्थ्य के अनुसार — कम से कम जितना छोटा आपको ठीक लगे, और बड़े में छह इंच तक की मूर्ति। व्यापारिक प्रतिष्ठान हो तो वहां भी मूर्ति ठोस होनी चाहिए। जो टोटका चल रहा है कि व्यापारिक प्रतिष्ठान पर खड़ी लक्ष्मी जी की फोटो या विग्रह हो और घर में बैठी हुई, क्योंकि वहां ग्राहक आते-जाते हैं और घर में लक्ष्मी जी बैठें — वे पूछते हैं, क्या इन सब चीजों का कोई लॉजिक है? कोई लॉजिक नहीं है।

116

वे विग्रह का कौन सा रूप सुझाते हैं?

कमल या सिंहासन पर विराजमान, घर और दुकान दोनों के लिए, सदा के लिए

· 1:17:43–1:18:18 · Also a question

उनके अनुसार: कमल के आसन पर विराजमान भगवती लक्ष्मी, कमल के आसन पर विराजमान भगवान गणेश; या अच्छे आसन पर बैठे लक्ष्मी जी और गणेश जी; गज पर बैठी भगवती लक्ष्मी, या मूषक पर बैठे गणपति जी — हालांकि मूषक वाले मिलना मुश्किल है। पर सिंहासन पर बैठे भगवान गणपति, और सिंहासन या कमल आसन पर बैठी भगवती लक्ष्मी — ऐसा सुंदर श्री विग्रह व्यापारिक प्रतिष्ठान और घर, दोनों में सदा के लिए प्रतिष्ठित कीजिए।

117

क्या पुरानी मूर्ति ज्यादा ऊर्जावान होती है?

कभी न हटाइए; हर साल स्नान कराइए और नए वस्त्र पहनाइए

· 1:18:19–1:18:55 · Also a question

वे कहते हैं कि यह मूर्ति जितनी पुरानी होगी, उतनी ऊर्जावान होगी। ऐसा नहीं कि बाप-दादा की स्थापित की हुई मूर्ति को अब हटाना है। पर हर साल मूर्ति हटाकर नई मूर्ति रख लेना आपकी बहुत बड़ी बेवकूफी है। ऐसे सुंदर श्री विग्रह घर में सदा के लिए स्थापित कीजिए — बस; उन्हें कभी मत हटाइए। हर वर्ष उन्हें स्नान कराएंगे और नए वस्त्र पहनाएंगे; और बीच में जो पर्व काल, ग्रहण आदि पड़ते हैं, उनमें उनके वस्त्र और जनेऊ, उपवीत बदलकर पूजन करेंगे।

118

ग्रहण के जाप के बाद भागते बछड़े के सपने का क्या अर्थ है?

पितरों से जुड़ा विषय, और दीपावली की अमावस्या पर दान

· 1:18:56–1:19:28 · Also a question

अभिषेक जी ने चंद्र ग्रहण के समय अघोर बगलामुखी का जाप किया था और उस दिन सपने में एक घर में भागता हुआ गाय का बछड़ा देखा, जिसे कोई पकड़ने की कोशिश कर रहा था, साथ में छोटे कीड़े भी। उन्हें उत्तर देते हुए वे कहते हैं कि कोई दिक्कत नहीं है, और एक रात के जाप के बारे में इतना नहीं सोचना चाहिए। फिर भी जो आप देख रहे हैं, वह पितरों से संबंधित विषय है। पितरों के निमित्त अमावस्या के दिन — दीपावली के दिन पड़ने वाली अमावस्या को — सभी यथाशक्ति संकल्प करके दान दें।

वक्ता कहते हैं: अभिषेक जी, कोई दिक्कत नहीं है, ठीक है। एक रात के जाप के बारे में इतना ज्यादा नहीं सोचना है। फिर भी जो आप देख रहे हैं, वह पितरों से संबंधित विषय है। पितरों के निमित्त अमावस्या के दिन — दीपावली के दिन जो अमावस्या पड़ रही है — सभी यथाशक्ति संकल्प करके दान आदि कर दीजिए।

119

पितरों के निमित्त दान किसे देना चाहिए?

ब्राह्मण को दान, और यह आपत्ति कि इससे ब्राह्मण अमीर बनते हैं

· 1:19:29–1:19:59 · Also a question

वे कहते हैं, ब्राह्मण को दान आदि दीजिए — उसे अमीर बना दीजिए, किसी ब्राह्मण के नाम प्रॉपर्टी कर दीजिए। क्योंकि लोगों के मन में आता है कि इससे ब्राह्मण अमीर बन रहे हैं। अगर आप ऐसी भावना रखते हैं, तो ये विषय मत सुनिए; नहीं तो कीजिए, जिससे आपका अपना भला हो। हम अपनी सारी अलाय-बलाय ही देकर आते हैं — संकल्प करके जो आप ब्राह्मण को देते हैं, उसका सारा भार ब्राह्मणों पर पड़ता है। वह संभालेगा; वह आपका विषय नहीं है। तो पितरों के निमित्त अमावस्या के दिन दान जरूर कीजिए।

120

ऊत, मिसकैरेज या मसान दोष वालों को क्या करना चाहिए?

उपाय मंदिर में ही करना है, घर में कभी नहीं

· 1:20:00–1:20:32 · Also a question

जो लोग ऊत से संबंधित उपाय करते हैं, या जिनका मिसकैरेज आदि हुआ है और वे बच्चे सपने में दिखते हैं; जो स्त्रियां स्वयं को गर्भवती देखती हैं; जो अविवाहित लड़कियां स्वयं को गर्भवती या बच्चे के साथ देखती हैं; जिन्हें मसान दोष आदि है, या कलवे का दोष है — वे अमावस्या के दिन भगवती काली जी के मंदिर जाएं, जहां पीपल का वृक्ष हो, और वहां बताया गया उपाय जरूर करें। घर के ऊत के लिए, घर के उन बच्चों के लिए जिनकी मृत्यु वैसे हुई, जो भी पूजन विधि बताई गई है, वह मंदिर में ही करनी है। यह पूजन घर में नहीं करना है — वे कहते हैं कि उन्होंने यह बार-बार स्पष्ट किया है।

121

घर के बाहर से आने वाले अटपटे सपनों का क्या करें?

अमावस्या या चतुर्दशी पर भैरव पूजन, और बटुक भैरव का साबर जाप

· 1:20:33–1:21:08 · Also a question

अगर मसान दोष आदि है, उटपटांग सपने देख रहे हैं, और घर का कुछ वैसा नहीं बल्कि बाहर का कुछ है, तो अमावस्या या चतुर्दशी के दिन भैरव मंदिर में, या घर पर भी, भैरव जी का पूजन कर सकते हैं। बटुक भैरव जी के जाप का मंत्र साबर पर दिया गया है; वह जाप आप उठा सकते हैं — स्त्री भी और पुरुष भी कर सकते हैं। और पितरों के निमित्त जरूर करेंगे।

122

पांच दिन के अष्टोत्तर शतनाम अनुष्ठान का हवन किस दिन करना चाहिए?

दीपावली की रात जरूर, और अंतिम दिन तो और भी अच्छा

· 1:23:09–1:23:42 · Also a question

दीपावली की रात अनुष्ठान है, तो हवन जरूर कीजिए; बाकी अंतिम दिन भी कर सकते हैं। दीपावली की रात महानिशा काल में हवन का कारण यह है कि उस दिन घर में भगवती लक्ष्मी का और घर की सभी प्रमुख देव शक्तियों का आगमन अवश्य होता है; इसलिए उस दिन पूजन और हवन जितना अच्छे से हो सके, करना चाहिए। और अगर अनुष्ठान चल रहा है और पांच दिन का है, तो अंतिम दिन भी कीजिए — वह और भी अच्छा है।

123

जिसने अब तक कुछ नहीं किया, वह कहां से आरंभ करे?

गणपति या दत्तात्रेय, और देव दीक्षा के दिन

· 1:23:43–1:24:23 · Also a question

जिन्होंने अब तक कुछ नहीं किया, वे अपनी साधना भगवान गणपति से आरंभ करें — लक्ष्मी गणपति जी से आरंभ कर सकते हैं — या भगवान दत्तात्रेय से; दत्तात्रेय माला मंत्र आदि कर सकते हैं। देव दीक्षा विधान धनतेरस के दिन, अमावस्या काल रात्रि के दिन, दूज के दिन, और आने वाली अक्षय नवमी को कर सकते हैं; और भगवान दत्तात्रेय का गुरु वरण करके उनकी साधना कर सकते हैं। या अगर आप नए साधक हैं, तो गणपति जी की संकट नाशन साधना आरंभ कर सकते हैं — पहले तो गणपति गुरु साधना जरूर करनी चाहिए; नहीं तो भैरव जी की साधना कीजिए, अगर आप आरंभिक साधना कर रहे हैं।

124

शिव पंचाक्षर मंत्र का पुरश्चरण कैसे होता है?

27 लाख — शिव महापुराण का लाइव सुनिए

· 1:24:24–1:25:22 · Also a question

वे कहते हैं, 27 लाख — शिव महापुराण का लाइव सुनिए। उसमें पंचाक्षर का पूरा विस्तार से वर्णन है; प्लेलिस्ट बनी हुई है। वे मेघनाथ जी से लाइव सुनने को कहते हैं, जहां प्रमाण के साथ बताया गया है: कृष्ण पक्ष चतुर्दशी से आरंभ करके शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तक आपको 5 लाख मंत्र जाप करना है; फिर आपके साथ बैठे ब्राह्मण कितनी आहुतियां देंगे और उसका क्या विधान है; और उसके बाद शिव पूजन और रुद्र पूजन कैसे होगा। सारा विधान लाइव में शिव महापुराण के साथ, प्रमाणित करके बताया गया है।

125

कालिका योगिनी साधना से क्या घर का तंत्र कटेगा, और वार्षिकी का क्या?

हाँ, कटेगा — पर महाभैरव मत छोड़िए; और बरसी तक सेवा नहीं

· 1:25:23–1:26:00 · Also a question

पूछा गया कि कालिका योगिनी साधना करने से क्या घर का तंत्र विचार कटेगा। वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल कटेगा, लेकिन महाभैरव करना मत छोड़िए। अलग से पूछा गया कि क्या हनुमान जी की साधना नहीं होती। वे कहते हैं कि होती है, क्यों नहीं होगी। और मोनिका जी से वे कहते हैं कि वार्षिक पूजन हो गया हो तभी आप कीजिए। अगर वार्षिकी नहीं हुई है, बरसी नहीं हुई है, तो अभी सेवा-पूजा मत कीजिए और किसी अनुष्ठान में भाग मत लीजिए।

126

क्या पार्वती योगिनी साधना होती है?

नहीं — और जया-विजया की साधना उग्रतम साधनाओं में आती है

· 1:27:12–1:28:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पार्वती योगिनी साधना नहीं है, मेघनाथ जी — हम उसे कैसे उपलब्ध कराएँगे? जो चीज मर्यादा में रखकर बताई जा सके, हम वही बता सकते हैं। भगवती पार्वती की योगिनियों से जुड़ी कोई चीज नहीं है। अगर जया और विजया की साधना है, तो वह उग्रतम साधनाओं में, प्रमुख साधनाओं में आती है — वह हम नहीं दे सकते।

127

हवन में अपामार्ग के साथ कौन-सी लकड़ियाँ ले सकते हैं?

नवग्रह लकड़ी, गाय के गोबर के उपले, और कवच व शाबर आहुति में खास तौर पर शमी

· 1:28:08–1:29:12 · Also a question

महाभैरव स्तोत्र से हवन के प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि अपामार्ग की लकड़ी जल्दी जल जाती है। अपामार्ग के साथ आप नवग्रह लकड़ी ले सकते हैं, और गाय के गोबर के उपले ले सकते हैं। नवग्रह लकड़ियों में से कोई भी अलग लकड़ी लीजिए; और आपकी तरफ, राजस्थान की ओर, शमी जी की लकड़ी बहुत मिलती है, तो वे लकड़ियाँ ज़्यादा मात्रा में ले सकते हैं। जब आप कवच आदि वाले देवी-देवताओं के मंत्रों से आहुति दे रहे हों, या शाबर मंत्रों की आहुति में, तो शमी जी की लकड़ी लेना बहुत बढ़िया है।

128

लोक देवता गोगा जाहरवीर के किसी खास पूजन-क्रम की जानकारी उनके पास नहीं, और वे यह साफ कहते हैं

वे साफ कहते हैं कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है

· 1:29:13–1:30:02

भरत प्रजापति जी को उत्तर देते हुए वक्ता साफ कहते हैं कि लोक देवता गोगा जाहरवीर के बारे में उनकी तरफ कोई खास पूजन-क्रम नहीं है, क्योंकि वे लोक देवता हैं; इसलिए वे क्षमा माँगते हैं — उन्हें उनकी पूरी जानकारी नहीं है। उनके अपने साथ के ऐसे साधक हैं जिन्हें बहुत जानकारी है, जिनके वे इष्ट आराध्य हैं, जिनके घर में उनका स्थान बड़े सामर्थ्य से विराजमान है — पर उन्हें न इच्छा हुई, न उतनी जानकारी ली; इसलिए वे कहते हैं कि इस मामले में उन्हें जानकारी है ही नहीं, और वे आधी-अधूरी बात नहीं बता सकते। अगर आप उनसे जुड़ी, अपनी तरफ प्रचलित साधनाएँ करते आ रहे हैं, तो आप उन्हें बिल्कुल कर सकते हैं।

129

क्या धनतेरस पर महाकाली की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है?

धनतेरस पर किसी भी देव शक्ति की प्रतिष्ठा हो सकती है — सबकी एक ही दिन

· 1:30:03–1:30:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि धनतेरस के दिन आप किसी भी देव शक्ति की प्राण प्रतिष्ठा कर सकते हैं। आराम से कीजिए; दोपहर के समय कीजिए, अभिजीत मुहूर्त में, या दोपहर में आराम से। उस दिन बटुक भैरव जी की भी कर सकते हैं। धनतेरस के दिन ही सबकी कर लीजिए — कुबेर जी की भी, बटुक भैरव जी की भी, भगवती काली की भी। सबकी एक साथ उसी दिन कीजिए। और अगर आप खुद न करें, किसी आचार्य जी को बुलाकर करवाएँ, तो और भी अच्छा है; और अगर वीडियो देखकर कर रहे हैं, तो उसे अच्छे से देखकर दोहराइए, हर विधान समझिए, सामग्री लाइए, तभी कीजिए।

130

वे तमिल नहीं पढ़ सकते, और श्री विद्या वीडियो का विषय नहीं है

वे तमिल नहीं पढ़ सकते, और श्री विद्या वीडियो के लिए नहीं है

· 1:31:52–1:32:46

मंदिर के एक यंत्र के बारे में, जिस पर तमिल में लिखा है, पूछा गया कि वह किन देवी-देवता का है। वक्ता मीना जी से कहते हैं कि उन्हें ऐसी कोई खास सिद्धि नहीं मिली जिससे वे तमिल भाषा पढ़ सकें — तमिल इल्ले। पूछा गया कि क्या वे देवी त्रिपुर सुंदरी के साधना मार्ग पर वीडियो बना सकते हैं। वे कहते हैं कि श्री विद्या सबसे विशिष्ट विद्याओं में है, और उनके अनुसार ऐसी साधनाओं पर वीडियो में चर्चा करना उचित नहीं है; फिर भी सिर्फ जानकारी के लिए एक छोटा वीडियो बन सकता है।

131

एक ही जगह एक व्यक्ति तंत्रोक्त और दूसरा वेदोक्त अनुष्ठान करे, तो क्या हानि है?

कोई हानि नहीं — समय अलग हैं, बस कुंड का ध्यान रखें

· 1:32:47–1:33:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसी कोई हानि नहीं है। वेदोक्त व्यक्ति की पूरी साधना दिन के समय होगी, हवन आदि भी दिन में होंगे; तंत्रोक्त वाले की रात के समय होगी। अगर आप एक ही कुंड रखते हैं, तो उसे थोड़ा देख लीजिए। और कोई बात नहीं है। राजसिक-तामसिक नहीं होना चाहिए।

132

कुल में किसी की मृत्यु हुई हो तो क्या अनुष्ठान हो सकता है?

तभी, जब आप सूतक से मुक्त हों और वार्षिकी से आपका लेना-देना न हो

· 1:33:09–1:33:54 · Also a question

वक्ता स्नेहल जी से कहते हैं कि पहले देखिए, कुल में जिनकी मृत्यु हुई वे आपके क्या लगते हैं, उनकी बरसी हुई या नहीं, और आपके कुल में क्या मानने की प्रथा है। अगर आप लोग सूतक से मुक्त हो चुके हैं और उनके वार्षिक आदि से आपका कोई लेना-देना नहीं है, तभी अनुष्ठान कीजिए या करवाइए। नहीं तो, अगर अभी आपको साल भर का सूतक मानना है, या वार्षिकी नहीं हुई है, तो यह बिल्कुल मत करवाइए।

133

क्या नील सरस्वती साधना सात्विक विधि से हो सकती है?

सिर्फ स्तोत्र और कवच — पूरी साधना के लिए दीक्षा चाहिए

· 1:33:55–1:34:20 · Also a question

जय सिंह जी को उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि साधना के सिर्फ स्तोत्र, कवच आदि ही किए जा सकते हैं; पूरी साधना दीक्षित होकर ही की जा सकती है — ये महाविद्याएँ हैं।

134

बहुत बड़े संयुक्त परिवार में सूतक कैसे लगता है?

मुख्य घर वालों के लिए दस दिन, बाकी के लिए तीन, तीन पीढ़ी तक

· 1:34:21–1:34:54 · Also a question

एक श्रोता का परिवार बहुत बड़ा है — लगभग पचास लोग; सात पीढ़ी के भीतर किसी न किसी के घर बच्चा होता रहता है, तो मुख्य घर वाले दस दिन का सूतक मानते हैं और बाकी सब तीन दिन का। वक्ता कहते हैं कि हाँ, ऐसा ही होता है। सात पीढ़ी वाले में तीन पीढ़ी तक का ही माना जाता है: यानी अगर आप हैं, तो आप अपने दादाजी के भाई तक का मानेंगे; परदादाजी से आगे तीन दिन वाला नियम हो जाता है।

135

प्रतियोगी परीक्षा में बच्चे के लिए कौन-सा अनुष्ठान अच्छा है?

भगवान सूर्यनारायण की साधना, जो बच्चा खुद करे

· 1:36:00–1:36:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कंपटीशन के लिए, अगर सरकारी नौकरी की पूरी बात चल रही है, तो वे बार-बार कहते हैं कि भगवान सूर्यनारायण की साधना बहुत ज़रूरी है। उनसे जुड़ी साधना अपने बच्चे को करने के लिए कहिए। आप खुद करेंगे तो आपके किए का उसे कितना मिलेगा? छठा हिस्सा मिलता है। इसलिए उसे थोड़ा समय निकालने को कहिए — कम से कम सुबह उठकर सूर्यनारायण को अर्घ्य दे दे। और देखिए कि उसके पंचम भाव में क्या स्थिति बन रही है; उसी के अनुसार उसके निमित्त साधना कीजिए, करवाइए, या खुद संकल्प लेकर कीजिए।

136

लक्ष्मी कलश के साल भर के नियम क्या हैं?

पंचमी और पूर्णिमा को विशेष अर्चन, रोज़ धूप-दीप, साल में एक बार बदलना

· 1:36:46–1:37:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि साल भर उनकी पूजा नहीं होगी। पंचमी और पूर्णिमा के दिन आप विशेष अर्चन कर सकते हैं — जैसे महालक्ष्मी के 108 नामों से गुलाब की पंखुड़ियों से अर्चन होता है, वह कर सकते हैं। रोज़ उन्हें धूप-दीप दिखाना चाहिए। और साल में एक बार, धनतेरस के दिन, पूरी सामग्री बाहर निकालिए, कच्ची सामग्री का विसर्जन करके नई सामग्री डालिए, पुरानी सामग्री पर उसी तरह गंगाजल छिड़ककर, धूप, दीप, तिलक आदि सब करके फिर से रखिए और उनका पूजन कीजिए। इतना ही नियम है। अशुद्ध अवस्था में उन्हें छूना नहीं है; और सूतक-पातक पड़े तो अंदर कुछ नहीं बदलेगा — सूतक-पातक में कुछ नहीं बदलना है, यह साल में एक ही बार बदलता है।

137

शिव मंदिर में कुबेर का दीपक कहाँ जलाएँ?

उत्तर दिशा की ओर; और काली व भवानी के लिए दीपदान हो सकता है

· 1:37:57–1:38:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उत्तर दिशा की ओर जलाइए। पूछा गया कि क्या माँ काली के लिए, माँ भवानी के लिए कोई दीपदान कर सकते हैं। वे कहते हैं: बिल्कुल कर सकते हैं। वे बताते हैं कि यम के दीये के बारे में वे पहले ही बता चुके हैं। सुभाष चंद्र जी, जिनका श्री काल भैरव अष्टक का अनुष्ठान 7 नवंबर 2023 को पूरा हुआ, उनसे वे कहते हैं कि कोई बात नहीं, जल्दी ही बात होगी।

138

नरसिंह माला मंत्र के लिए कौन-सी माला लें?

तुलसी की माला या दस मुखी रुद्राक्ष की माला

· 1:38:25–1:39:04 · Also a question

एक श्रोता कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से पाँच दिन के गणपति अनुष्ठान के बाद एक नवमी से अगली नवमी तक नरसिंह माला मंत्र करना चाहते हैं। वक्ता कहते हैं: तुलसी की माला लीजिए, या फिर दस मुखी रुद्राक्ष की माला लीजिए।

पूछा गया कि नरसिंह माला मंत्र के लिए कौन-सी माला लें। वक्ता कहते हैं: तुलसी की माला लीजिए, या फिर दस मुखी रुद्राक्ष की माला लीजिए। देवी-देवताओं का पूजन कीजिए, और कार्तिक में अपने सामर्थ्य के अनुसार खूब दीपदान कीजिए।

139

क्या दीपदान के लिए कर्ज़ लेना चाहिए?

दीपदान सिर्फ सामर्थ्य भर — कर्ज़ पर कभी नहीं

· 1:39:05–1:40:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कर्ज़ा लेकर दीपदान नहीं करना है। जितना सामर्थ्य है, उतना दीपदान कीजिए; हमें कुबेर बनाने में मदद कीजिए। यहाँ का कुबेर नहीं — ऊपर का कुबेर बनना है। इसी बहाने आप लोग करेंगे, तो आपका कल्याण होगा, और साथ में मेरा भी पूरा कल्याण हो जाएगा।

140

जिसे भाई दूज तक मृत्यु सूतक है, वह क्या करे?

सिर्फ भगवद् गीता का पाठ और मानसिक नाम जप

· 1:40:09–1:40:27 · Also a question

एक श्रोता के कुटुंब में भाई दूज तक मृत्यु सूतक है, और वे पूछते हैं कि नरक चतुर्दशी पर क्या करें। वक्ता कहते हैं: अभी केवल और केवल श्रीमद् भगवद् गीता का, या अपने इष्ट आराध्य की गीता का पाठ कीजिए। मन ही मन भगवान का नाम जप कीजिए। सूतक में अभी बस इतना ही कीजिए, और कुछ नहीं।

141

क्या बाद में यम दीप तिजोरी में रखना चाहिए?

वे कहते हैं कि यह उन्होंने कभी नहीं सुना और यह उचित नहीं

· 1:40:28–1:41:01 · Also a question

एक लड्डू गोपाल सेवक के प्रमाण के साथ बताई गई प्रथा पर — कि यम दीप शांत होने के बाद उसे घर की तिजोरी में रखते हैं — वक्ता कहते हैं: यम दीप आटे से बनता है, यह हम मानते हैं; चित्रपाल में भी हम ऐसे ही करते हैं; दोनों की पद्धति लगभग एक जैसी है, इतना वे मानते हैं। पर दीपक शांत होने के बाद उसे घर की तिजोरी में रखना, यह वे पहली बार सुन रहे हैं। जितने क्षेत्रों में वे रहे, जितने साधकों से मिले, कहीं किसी ने न ऐसी चर्चा की, न बताया, न उन्होंने सुना। उनके अनुसार यह बिल्कुल भी उचित नहीं है।

142

यम की भेंट कभी घर वापस क्यों नहीं लाई जाती?

वह घर के दुर्भाग्य और अकाल मृत्यु को ले जाती है

· 1:41:02–1:41:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर चतुर्दशी की रात घर में पकौड़ी बनती है, या कहीं-कहीं चावल-कढ़ी, तो यह सब थाली में सजाया जाता है; अगर यह सब नहीं बना, पूरी आदि बनी है, तो वह; और अगर वह भी नहीं है, तो अनाज पर दीपक रखकर मिठाई आदि सजाई जाती है, और फिर भोग सहित निकारी होती है। उसे वापस नहीं लाया जाता। आप बताइए — यमराज से हम कहते हैं कि हमारे जितने दुर्भाग्य हैं, अकाल मृत्यु आदि, दोष की निवृत्ति के लिए हम ये आपको दे रहे हैं। अब वह काल का दीपक है — और उसे तिजोरी में रखना। अगर यह टोटका कहीं रूप ले रहा है, तो यह उचित नहीं; उन्होंने ऐसा कभी नहीं सुना, और उनके अनुसार यह सही नहीं है। बाकी निर्णय आपका।

143

क्या परिवार से प्रेत नेगेटिविटी हटाने के लिए वीर साधना की जा सकती है?

महाभैरव साधना — पर पहले किसी योग्य व्यक्ति को दिखा लें

· 1:41:50–1:42:39 · Also a question

सुरक्षा के लिए, घर वालों के शरीर से प्रेत नेगेटिविटी स्थायी रूप से दूर करने के लिए, और शरीर सुडौल बनाने के लिए वीर साधना के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं: महाभैरव साधना। पर वे जोड़ते हैं कि अगर प्रेत साधना, प्रेत और इस तरह की उपस्थिति है, तो पहले किसी योग्य व्यक्ति को दिखा लीजिए। पूछा गया कि क्या पाँच दिन की साधना संकल्प में करनी है; वे कहते हैं: हाँ, हर दिन का संकल्प लीजिए।

144

अगर मुझे गायत्री से अर्घ्य देने को कहा गया हो पर मैं उसका अधिकारी न होऊँ, तो क्या करूँ?

अर्घ्य कुंडली से तय नहीं होता; बस माणिक्य वाला नियम लागू है

· 1:42:40–1:43:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पहली बात, यह धनु लग्न की कुंडली है और बृहस्पति आपके प्रमुख ग्रह हैं — पर ऐसा नहीं है कि लग्न कुंडली के अनुसार अर्घ्य दिया जाता है। वे हमेशा एक ही शर्त बताते हैं: अगर शरीर पर माणिक्य पहना है, तो अर्घ्य नहीं देना है, या अर्घ्य देते समय उसे उतारकर तब देना है, बस। बाकी हर व्यक्ति सूर्यनारायण की पूजा कर सकता है, और सबको उन्हें अर्घ्य देना ही चाहिए। सूर्य और तुलसी जी को सबको रोज़ अर्घ्य देना चाहिए — बस तुलसी जी को एकादशी और रविवार, इन दो दिनों जल नहीं देना है।

145

गायत्री की जगह अर्घ्य के लिए कौन-सा मंत्र लें?

आदित्य अथर्वशीर्ष, घृणि मंत्र, या सूर्य का तांत्रिक मंत्र

· 1:43:36–1:44:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तब भगवान सूर्य का गायत्री मंत्र न बोलकर आप उनके नाम मंत्र से भी जल दे सकते हैं — ऐसा ज़रूरी नहीं कि जल सिर्फ उनकी गायत्री से ही दिया जाए। आदित्य अथर्वशीर्ष पढ़िए; उसका हिंदी अनुवाद भी पढ़ लेंगे तो आपका विषय साफ हो जाएगा। उसमें भगवान सूर्यनारायण का एक मंत्र है — घृणि वाला, घृणि सूर्याय नमः — उस मंत्र से दे सकते हैं। या उनके अनुसार आपको सूर्यनारायण का तांत्रिक मंत्र लेना चाहिए; अगर आप अधिकारी नहीं हैं, तो उससे अर्घ्य दीजिए। ऐसा नहीं कि सूर्यनारायण अर्घ्य नहीं लेंगे।

146

प्रेडिक्शन वाले ज्योतिषियों में क्या गलत है?

वे अनधिकारी को गायत्री और ॐ वाले मंत्र दे देते हैं

· 1:44:26–1:45:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जितने भी प्रेडिक्शन और कुंडली वाले लोग हैं, जो कुछ चल रहा है — वे सीधे-सीधे कहते हैं: वे गलत कर रहे हैं। जो बार-बार अनधिकारी व्यक्ति को गायत्री, और ॐ के साथ सारे मंत्र देकर करवाते हैं, वे उन्हें बर्बाद कर रहे हैं। यह अलग बात है कि मंत्र का अपना सामर्थ्य है, वह हमारी लाज रखता है, हमारे काम बनाता-बिगाड़ता है — पर कहीं न कहीं नुकसान भी करता है। वे कहते हैं कि यह वे अपने जीवन के प्रत्यक्ष अनुभव से कह रहे हैं।

147

थर्ड आई की बातें, ऑरा चेकिंग, और अधिकार की बात किए बिना बाँटे गए मंत्र

थर्ड आई, ऑरा चेकिंग, और बिना अधिकार की चर्चा के दिए गए मंत्र

· 1:45:07–1:45:57

वक्ता कहते हैं कि कम से कम उनके अनुसार, लोग इस मार्ग पर आते हैं और परम सिद्ध बन जाते हैं, पर उनकी बातें सुनकर सिद्धि का दिखावा सामने आ जाता है। वे ऐसे ही एक व्यक्ति को सुन रहे थे — एक परम सिद्ध साधु, जिनके हर वीडियो में थर्ड आई है: थर्ड आई, ऑरा चेकिंग, यह सिद्धि वह सिद्धि, और भाई के वीडियो वायरल होते हैं। उन्होंने सोचा कि इतना हो रहा है तो वे भी सीखें। वहाँ पूरी बात बस यही है कि थर्ड आई विज़न कैसे खुलेगा, आपके ऑरा में चीज़ें कैसे आएँगी, यह मंत्र वह मंत्र — किसके अधिकार की, इसकी कोई चर्चा नहीं, कोई बात ही नहीं।

148

पंच पल्लव नहीं तो दरिद्रता, और पूर्ण पात्र नहीं तो आयु की हानि

पंच पल्लव न हो तो दरिद्रता; पूर्ण पात्र न हो तो आयु की हानि

· 1:45:58–1:47:12

वक्ता बताते हैं कि कलश पर उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि खड़ा कलश रखिए और पत्तों की कोई ज़रूरत नहीं — इस पर उन्होंने कहा, रहने दीजिए। अगर कलश पर कभी पंच पल्लव न रखे जाएँ, पत्ते न रखे जाएँ, तो यह दरिद्रता का सूचक बन जाता है; दरिद्रता आती है। कम से कम पान का पत्ता ज़रूर रखना चाहिए। अगर हम पूर्ण पात्र नहीं रखते, तो आयु का नाश होता है। और वे जोड़ते हैं कि गलत राह दिखाने का भी अपना भार है: अगर आपके दीपदान करने से हमें पुण्य आना है, तो अगर हम आपको गलत बात बताएँगे तो हम पाप के भी भागी होंगे — वह दोष हमें ज़रूर लगेगा।

149

बिना पूर्ण पात्र के खड़ा नारियल कब रखा जा सकता है?

सिर्फ चंडिका, प्रचंड चंडिका, या जानी हुई कुलदेवी त्रिनेत्रा के लिए

· 1:47:13–1:48:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर चंडिका का पूजन हो रहा है, प्रचंड चंडिका का पूजन हो रहा है, या त्रिनेत्रा आपकी कुलदेवी हैं और आप यह सौ प्रतिशत जानते हैं — तभी बिना पूर्ण पात्र के खड़ा कलश रखना है। नहीं तो अपने मन और इच्छा से कलश सजाना — खड़ा कलश रखो, बिना पूर्ण पात्र के खड़ा नारियल रखो — यह सब नाश की ओर ले जाता है। वंश की हानि होती है; आगे कुल में ऐसा होता है कि लोगों के विवाह तक नहीं होते, और शरीर की हड्डियाँ घिसने लगती हैं। ये इसके दुष्प्रभाव हैं।

150

घंटाकर्ण तेरह अक्षर वाली साधना में शामिल हैं, पर खुले में लिखे नहीं गए

तेरह अक्षर वाली साधना में शामिल, पर खुले में लिखे नहीं गए

· 1:48:28–1:48:56

घंटाकर्ण के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि इस बार जो स्वर्णाकर्षण भैरव अनुष्ठान हो रहा है, उसमें उन्होंने घंटाकर्ण साधना भी शामिल की थी; बाद में उसे लिखे हुए रूप से हटा दिया। वे फिर भी रहेंगे, क्योंकि तेरह अक्षर वाली साधना में घंटाकर्ण महावीर का भी स्थान रहेगा — पर वहाँ उन्हें साफ-साफ लिखा नहीं गया। कारण यह है कि ये सब नाम देने से लोग उनसे जुड़ी चीज़ें माँगने लगते हैं — यह बताइए, वह बताइए; और यह वे नहीं चाहते। इसलिए वे इसे नहीं डालते।

151

श्री सूक्त और पुरुष सूक्त का पाठ कौन कर सकता है?

सिर्फ यज्ञोपवीतधारी; बाकी लोग पौराणिक स्तोत्र करें

· 1:48:57–1:49:47 · Also a question

दीपावली के पाँच दिनों में विष्णु नारायण का कौन-सा अनुष्ठान करें, इस पर वक्ता कहते हैं कि वे वह कल अलग से डालेंगे। अभिषेक श्रीवास्तव जी से वे कहते हैं: श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त, पुरुष सूक्त — ये सब उच्चारण सीखकर करने चाहिए, और सिर्फ यज्ञोपवीतधारी ही करें। बाकी लोग पौराणिक स्तोत्र करें — लक्ष्मी अष्टक कीजिए, महालक्ष्मी अष्टक कीजिए। सूक्त का पाठ वेदोक्त है, तो वेदोक्त लोग करें। वे कहते हैं कि यह उनके अनुसार नहीं, शास्त्र के अनुसार है; वे बस जानकारी दे रहे हैं, निर्णय लेने को आप स्वतंत्र हैं। सच जानकर भी गलत करें, तो आपकी मर्ज़ी।

152

दरिद्रता नाश के लिए श्री सूक्त का प्रयोग क्या है?

सोलह दिन सोलह पाठ, दरिद्र दहन मंत्र से संपुटित

· 1:49:48–1:50:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप यज्ञोपवीत धारण करते हैं, तो श्री सूक्त ज़रूर कीजिए — धन प्राप्ति का इससे आसान उपाय नहीं है। कहा जाता है कि अगर श्री सूक्त और पुरुष सूक्त के सोलह-सोलह पाठ रोज़, लगातार सोलह दिन, और खास तौर पर कार्तिक मास में किए जाएँ, तो जन्म-जन्मांतर की दरिद्रता खत्म हो जाती है। और अगर श्री सूक्त का संपुटित पाठ किया जाए — दरिद्र दहन मंत्र से संपुटित, जो दुर्गा सप्तशती का मंत्र है — सोलह दिन सोलह पाठ, तो सैकड़ों-सैकड़ों जन्मों की दरिद्रता दूर होती है। पर आपको अधिकारी होना चाहिए।

153

श्री सूक्त के उस प्रयोग के बाद कौन-सा हवन होता है?

अंतिम दिन खीर और मधु, और महालक्ष्मी कल्प

· 1:50:22–1:51:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उसके बाद खीर और मधु से हवन भी होता है: अंतिम दिन, श्री सूक्त के मंत्रों से सोलह पाठ, और आपका जो भी संपुट मंत्र हो, सोलह दिनों के अनुसार कम से कम एक हज़ार आठ आहुतियाँ, या फिर कम से कम एक सौ आठ आहुतियाँ। इस तरह करें तो भगवती लक्ष्मी की अतुलनीय कृपा मिलती है। वे कहते हैं कि यह महालक्ष्मी कल्प के अनुसार है — वे कोई गढ़ी हुई बात नहीं बता रहे; महालक्ष्मी कल्प, यानी मध्यम चरित्र की, अठारह भुजा वाले पूजन की भगवती दुर्गा जो भगवती महालक्ष्मी हैं, उनके स्वरूप के अनुसार। उसमें इसका वर्णन है।

154

चोला चढ़ाना क्या है, और सूर्य अर्घ्य के लिए कोई भी कौन-सा मंत्र ले सकता है?

हनुमान जी पर सिंदूर का लेप, और जपाकुसुम श्लोक

· 1:51:01–1:51:37 · Also a question

चोला चढ़ाना यानी हनुमान जी पर जो सिंदूर का लेपन होता है — वही चोला चढ़ाना है, सिंदूर का चोला। पूछा गया कि क्या जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महा… से शुरू होने वाले मंत्र से सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं। वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल, सब दे सकते हैं; यह पौराणिक मंत्र है और इसे सब बोल सकते हैं — स्त्रियाँ, पुरुष, यज्ञोपवीतधारी और जो धारण नहीं करते, कोई भी यह मंत्र बोल सकता है। वे जोड़ते हैं कि नवग्रह स्तोत्र का पाठ हर व्यक्ति रोज़ कर सकता है; कोई दोष नहीं है, स्त्री, पुरुष, बच्चे सब कर सकते हैं।

155

क्या स्त्रियाँ तर्पण कर सकती हैं या घी की आहुति दे सकती हैं?

दोनों पर उनका उत्तर है नहीं — तर्पण पुरुष करें

· 1:51:38–1:52:38 · Also a question

बताया गया कि स्त्रियाँ भी तर्पण कर सकती हैं। वक्ता कहते हैं: नहीं, नहीं — आप लोग मत कीजिए, पुरुषों को करने दीजिए। और अर्गला स्तोत्र के पहले मंत्र पर, जिसकी आहुति घी और शहद मिलाकर देनी है, वे कहते हैं कि सब ध्यान दें: स्त्रियों को घी की आहुति नहीं देनी है। यह वे बार-बार कहते हैं।

156

अगर इस मंगलवार क्षेत्रपाल निकारी की, तो क्या अगले मंगलवार भी करनी होगी?

हाँ — कम से कम पाँच मंगलवार

· 1:52:39–1:53:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं, हाँ, बिल्कुल करनी है। कम से कम पाँच मंगलवार करनी है।

पूछा गया कि इस मंगलवार क्षेत्रपाल निकारी की है, तो क्या आने वाले मंगलवार को भी करनी होगी। वक्ता कहते हैं: हाँ, बिल्कुल करनी है। कम से कम पाँच मंगलवार करनी है। वे कहते हैं कि क्षेत्रपाल निकारी के बारे में वे पहले ही बता चुके हैं।

157

काली पंचबाण या काली रक्षा साधना — कौन-सी करनी चाहिए?

काली चौदस पर काली पंचबाण, नौकरी और धन दोनों के लिए

· 1:53:04–1:54:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं, पंचबाण कर लीजिए — काली चौदस, दीपावली को। वे कहते हैं कि ये सब साधनाएँ चैनल पर हैं, लोग देखते ही नहीं। हर समस्या का समाधान पूरा, साफ़ और विस्तार से बताया गया है। काली पंचबाण कीजिए: जिन्हें नौकरी आदि या धन आदि के लिए प्रयोग करना है, और जो काली जी को ही इष्ट मानते हैं, वे लक्ष्मी जी के लिए अलग साधना न करें, काली पंचबाण का ही प्रयोग करें।

158

सालों से छोटे अनुष्ठान किए और मंत्र कंठस्थ हो गया — अब क्या करें?

यह सब कभी व्यर्थ नहीं जाता; पीतांबरा की साधना आगे कीजिए

· 1:54:03–1:54:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं, बिल्कुल — ये सब चीज़ें आपसे कभी नहीं जाने वाली। अगर आप भगवती पीतांबरा की आरंभिक साधना करते हैं, तो वही कीजिए; अगर दीक्षित हैं, तो उसी अनुसार कीजिए। स्तोत्र और सतनामावली कर सकते हैं। अघोर साबर है, वह कर सकते हैं। एक कवच है, रुद्रयामल का बगलामुखी तंत्र कवच — वह कर सकते हैं।

159

हनुमान चालीसा किस दिन सिद्ध करें, और पाँच दिन का लघु अनुष्ठान किस समय करें?

चतुर्दशी, शनिवार — और रोज़ की बैठक के लिए शाम बेहतर

· 1:54:35–1:55:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं, चतुर्दशी के दिन, शनिवार के दिन कीजिए। पाँच दिन की लघु अनुष्ठान साधना रोज़ किस समय करना ठीक होगा, यह पूछने पर वे कहते हैं कि समय की कोई दिक्कत नहीं, पर शाम बहुत अच्छी है; बाकी अपने काम के अनुसार, ऑफिस के अनुसार कर लीजिए।

160

क्या धनतेरस पर धर्मराज के लिए एक मुख वाला दीपक जलाना चाहिए?

वे कहते हैं कि वे पाँचों दिन चार मुखी ही निकालते आए हैं

· 1:55:39–1:56:27 · Also a question

सेवक लड्डू गोपाल जी के प्रमाण के साथ बताया गया कि धनतेरस को धर्मराज के निमित्त एक मुखी और चौदस को यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करना चाहिए। वक्ता कहते हैं: देखिए, पाँचों दिन हम चार मुखी ही करते और देखते आए हैं। बाकी अगर प्रमाण है और आप उसी अनुसार करना चाहते हैं, आप सीधे देख रहे हैं, तो कर सकते हैं; हम आपको कभी मना नहीं करेंगे। पर आज तक इतने क्षेत्रों में रहते हुए, पाँच दिन में पाँचों दिन हम चार मुखी ही निकालते हैं; एक मुख वाला नहीं निकालते। हाँ — अगर आप धर्मराज के निमित्त, धर्मराज स्वरूप की बात कर रहे हैं, तो हम मान सकते हैं; पर मुख हम यमराज रूप में ही निकालते हैं, यम दीपदान कहकर।

161

अभ्यंग तेल लगाकर स्नान कब करना चाहिए?

अपामार्ग की लकड़ी और तिल के तेल से प्रोक्षण पर छोटा वीडियो आएगा

· 1:56:28–1:57:31 · Also a question

अभ्यंग तेल लगाकर स्नान कब करें, यह पूछने पर वक्ता कहते हैं कि वे कल एक छोटा वीडियो बनाएँगे — अपामार्ग की लकड़ी कैसे लानी है, और शरीर पर तिल का तेल लगाकर शरीर से कैसे प्रोक्षण करना है और फिर उसे फेंकना है। वे कहते हैं, इससे बड़े से बड़ा अभिचार, तंत्र का काट होता है, और ग्रहों की शांति होती है। वे कहते हैं कि वे इसे लिख रहे हैं और कल डाल देंगे; कल दो-तीन वीडियो आएँगे, जिनमें यह ज़रूरी है।

162

चौखट पूजन घर के अंदर से करें या बाहर से?

दोनों तरह — क्योंकि हर चौखट का तिलक करना है

· 1:57:32–1:58:21 · Also a question

पूछा गया कि चौखट पूजन घर के अंदर से करना है या बाहर खड़े होकर, क्योंकि कई वीडियो में बाहर से करते दिखाया है, पर अगर चौखट पर लक्ष्मी जी के पाँव के निशान चाहिए तो। वक्ता कहते हैं कि चौखट पूजन आप बाहर से भी कर सकते हैं और अंदर से भी। आप जिसकी बात कर रहे हैं, चौखट का टिकना, वह आप अपने तरीके से कर सकते हैं, क्योंकि हर चौखट का तिलक करना है। तो बाहर और अंदर, अपने तरीके से कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं, चौखट पूजन आप बाहर से भी कर सकते हैं और अंदर से भी। यह जो आप कह रही हैं — अगर चौखट के टिकने की बात करनी है, तो आप अपने तरीके से कर सकते हैं, क्योंकि हर चौखट का तिलक करना है। तो बाहर और अंदर, अपने तरीके से आप कर सकते हैं।

163

क्या धनतेरस के दिन बैंक से लोन लेना सही है?

कर्ज़ आमदनी नहीं है — और उस दिन जो लेते हैं वह बढ़ता है

· 1:58:22–1:59:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं, आदित्य जी, अगर आप बैंक से लोन ले रहे हैं, तो यह हमारी आमदनी नहीं — यह तो हम कर्ज़ ले रहे हैं। तो उनके अनुसार धनतेरस के दिन कर्ज़ लेना ठीक नहीं होगा; क्योंकि इस दिन हमें लक्ष्मी की प्राप्ति चाहिए, कुछ स्थायी चीज़, जबकि हम कर्ज़ ले रहे हैं जिसे फिर चुकाना है, वह भी ब्याज सहित। धनतेरस के दिन जो लेते हैं वह बढ़ता है, तो यह कर्ज़ है, और कर्ज़ बढ़ जाएगा। उनके अनुसार धनतेरस के दिन नहीं लेना चाहिए: या तो पहले ले लीजिए, या दीपावली के पाँच दिन के पर्व के बाद — या अगर कुछ ऐसा मामला हो कि बाद में कैंसिल होने की संभावना है, तब वे ऐसा नहीं कहेंगे।

164

श्री यंत्र का मंडल पूजन कभी ऑनलाइन नहीं दिया जाता, और वहाँ "अमुक" शत्रु का नाम है, अपना नहीं

कभी ऑनलाइन नहीं — और वहाँ "अमुक" शत्रु का नाम है, आपका नहीं

· 1:59:30–2:00:08

श्री यंत्र के मंडल पूजन की विधि और उसकी साधना के विधान पर वक्ता सिविल मित्र जी से कहते हैं कि यह कभी संभव नहीं होगा — ऑनलाइन और वीडियो पर, चैनल पर, यह कभी संभव ही नहीं होगा। पूछा गया कि क्या महाभैरव में "साधक" शब्द की जगह अपना नाम लेना है। वे कहते हैं: महाभैरव में ज़्यादातर जगह वह शत्रु का नाम है; वहाँ शत्रु के नाम का उच्चारण करना होता है। अगर सिद्धि कर रहे हैं, तो वहाँ किसी का नाम न लें; और जितनी जगह नाम का उच्चारण होता है वह "अमुक" है — ज़्यादातर जगह "अमुक को मारो" है, तो अपना नाम कैसे लेंगे? अपना नाम लेने का मतलब है महाभैरव का प्रयोग अपने ही ऊपर कर देना। यह गलती न करें; अभी "अमुक" से ही सिद्धि कीजिए, और जब प्रयोग किया जाता है, तब अमुक की जगह शत्रु का नाम लेते हैं।

165

धन्वंतरि और अश्विनी कुमारों का पूजन कब होता है?

धनतेरस की कलश स्थापना में घट में आवाहन, आरोग्य के लिए

· 2:00:09–2:00:48 · Also a question

पूछा गया कि भगवान धन्वंतरि और अश्विनी कुमारों का पूजन दीपावली के दिन होगा या रोज़ करना होगा। वक्ता कहते हैं: धन्वंतरि जी का पूजन वैसे त्रयोदशी से चलता है, जब हम उन्हें स्थान देते हैं — जो लोग कलश स्थापना करते हैं, धनतेरस के दिन कलश स्थापना करके पूजन करते हैं, उनका आवाहन घट में हो जाता है, तो उनका पूजन रोज़ होता है। पर धनतेरस के दिन अश्विनी कुमारों और भगवान धन्वंतरि का पूजन करना चाहिए, आरोग्य के निमित्त।

166

क्या गर्भवती महिला को विंध्यवासिनी के दरबार ले जा सकते हैं?

नहीं, अगर गर्भ ज़्यादा महीनों का है और दूरी ज़्यादा है

· 2:00:49–2:02:00 · Also a question

पूछा गया कि क्या गर्भवती महिला को विंध्यवासिनी के दरबार ले जा सकते हैं, क्योंकि लोग कहते हैं कि इस अवस्था में घर में रहना चाहिए। वक्ता नवीन दुबे जी से कहते हैं: अगर गर्भ ज़्यादा महीनों का हो गया है, तो यात्रा करना और कहीं भी आना-जाना ठीक नहीं। हम भी नहीं कहेंगे कि ऐसी अवस्था में उन्हें साथ ले जाइए; घर से इतनी दूर जाना ठीक नहीं, अगर दूर है। वे महाकाली यंत्र पर दुर्गा जी का मंत्र समर्पित करने के बारे में भी कहते हैं — बिल्कुल समर्पित कीजिए; शिवलिंग पर भी कर सकते हैं, दोनों पर कर सकते हैं।

167

महाभैरव स्तोत्र की हवन सामग्री क्या है?

काले तिल, पीली सरसों, काली मिर्च और नीम के पत्ते, सरसों तेल में सने हुए

· 2:02:01–2:03:35 · Also a question

महाभैरव स्तोत्र की हवन सामग्री में खास तौर पर पीली सरसों है: काले तिल, पीली सरसों, काली मिर्च, नीम के पत्ते — ये सब चीज़ें सरसों के तेल में सानकर फिर मुख्य रूप से इनसे आहुति दी जाती है, विचार तंत्र के नाश के लिए और महाभैरव की प्रसन्नता के लिए। वक्ता कहते हैं, आरंभिक आहुति घी से ही होगी, या सरसों के तेल से भी दे सकते हैं।

168

जिस पुराने लक्ष्मी यंत्र की रोज़ पूजा नहीं होती, क्या उसका पूजन कर सकते हैं?

अगर ठीक है और भाव है, तो बिल्कुल पूजन कीजिए

· 2:03:36–2:04:06 · Also a question

चार साल पुराने लक्ष्मी जी के यंत्र के बारे में बताया गया, जिसमें लक्ष्मी जी कमल पर विराजमान हैं और जिसका नित्य पूजन नहीं होता। वक्ता कहते हैं: अगर यंत्र ठीक है, टूटा-फूटा नहीं है, और उनके प्रति भाव है, तो बिल्कुल पूजन कीजिए। पूछा गया कि क्या पाँच दिन बटुक भैरव का पूजन-अनुष्ठान कर सकते हैं; वे अभिषेक जी से कहते हैं: बिल्कुल कर सकते हैं।

169

महालक्ष्मी कलश की स्थापना खुद करूँ या करवाऊँ?

खुद करने से आत्मविश्वास और भाव बनता है

· 2:04:07–2:04:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं, अगर आप महालक्ष्मी कलश की स्थापना खुद करना चाहते हैं, तो कर लीजिए; अगर करवाना चाहते हैं, तो बता दीजिए। खुद कीजिए — हमने विधान बता दिए हैं। अगर आप चाहें और सारी सामग्री मिल जाए, तो खुद ही कीजिए; वह अच्छा रहेगा। आखिरी विकल्प यह है कि अगर आपके पास नहीं है, या आप चाहते हैं कि पूर्ण विधान से, नियम से हो, तो हमें बताइए। खुद करेंगे तो आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा कि हाँ, हमने किया — आपका भाव ही अलग रहेगा। यहाँ हम जो करेंगे वह आप नहीं देखेंगे, हम कैसे कर रहे हैं, कितना कर रहे हैं; हम यहाँ दस घंटे जाप कर लें, पर जब आप वहाँ करेंगे तो एक अलग भाव रहेगा, और साल भर आप उसे उसी भाव में प्रबलता के साथ देखेंगे और करेंगे।

170

अगर पूरी विधि मुझसे न हो पाए तो?

ज़बरदस्ती या आधा-अधूरा न करें — कम से कम सामान्य रूप से प्रयास करें

· 2:05:00–2:05:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं, पर अगर आपसे नहीं हो पा रहा है, तो ज़बरदस्ती नहीं करना है, और आधा-अधूरा भी नहीं। वह नहीं करना है; वह भी हम नहीं कहेंगे। पर प्रयास कीजिए, कम से कम — वह नहीं तो कम से कम सामान्य रूप से प्रयास कीजिए। उसमें भी भाव बनता है। बाकी हमारे माध्यम से जो होता है वह आप वीडियो में देखते हैं: जब केवल आपको दिखाने के लिए हमने इतने विस्तार से वीडियो बनाए, तो आप सोच सकते हैं कि असल में जब वे सब चीज़ें होती हैं, तो कैसे होती हैं — उसमें कितना विधि-विधान रहता है, किन-किन तरीकों से किया जाता है।

171

अमृत कलश की कथा क्या दिखाती है?

अपनी ही नकारात्मकता, और ब्रह्मा जी की तीन बेटियाँ

· 2:06:00–2:06:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं, आप कितने सकारात्मक या नकारात्मक हैं, वह आपके भीतर है। अब आपके सामने अमृत कलश ही रखा जाए, और आप कहें कि क्या पता इस अमृत कलश के ऊपर विष लगा हो, हम नहीं पिएँगे — तो वह आपकी इच्छा है; आपके भीतर की नकारात्मकता आपसे ऐसा करवा सकती है। वे ब्रह्मा जी की तीन बेटियों की कथा याद करते हैं, जिन्होंने तपस्या की, और जब वे प्रकट हुए, तो एक-दूसरे के खिलाफ़ गलत वरदान माँगे — कि यह काली हो जाए ताकि हम धनी हो जाएँ, ऐसा हो जाए। ब्रह्मा जी सब वरदान देकर चले गए। यहाँ भी यही स्थिति होती है: अगर भगवान प्रकट हों, तो कोई अपना उत्थान नहीं माँगेगा, बल्कि दूसरे का बुरा माँगेगा।

172

क्या बिना नहाए साधना हो सकती है, और क्या कुशा की जगह तांबे की अंगूठी चल सकती है?

पानी गर्म करके नहाइए; और तांबा या सोना प्रयोग कर सकते हैं

· 2:06:58–2:08:06 · Also a question

पूछा गया कि दिन में काम के बाद शाम को बिना नहाए, केवल हाथ-मुँह धोकर साधना कर सकते हैं क्या। वक्ता कहते हैं: पानी गर्म करके नहा लीजिए। ज़्यादा से ज़्यादा बाल मत धोइए, अगर ठंड लगने की संभावना है। पूछा गया कि क्या कुशा की जगह तांबे की अंगूठी प्रयोग कर सकते हैं; वे कहते हैं कि कर सकते हैं — तांबे की अंगूठी प्रयोग कर सकते हैं, और सोने की भी।

173

क्या घर में कबूतर के मल की धूप देनी चाहिए?

वे इसे बेवकूफ़ी कहते हैं — विष्ठा तंत्र खाली घरों के लिए है

· 2:08:07–2:09:28 · Also a question

एक ज्योतिषी एक बहन को घर में कबूतर के मल की धूप देने को कहता है, और वह गुग्गल और कपूर के साथ देती है — यह सुनकर वक्ता अनिल जी से कहते हैं, बुरा मत मानिए: आप इतनी साधना-पूजा करते हैं, और उस साधना-पूजा पर लीपापोती करने का काम यही कबूतर का मल कर रहा है। अगर तंत्र की बात है, तो गृहस्थ के लिए वे साफ़ समझाते हैं: इस तरह का विष्ठा तंत्र उस घर के लिए प्रयोग होता है जो मनुष्यों से खाली हो — जहाँ लोग दो, चार, पाँच साल के लिए छोड़कर चले गए हों, जहाँ साल में एक बार भी धूप-दीप न हो, जहाँ दीपावली-होली में भी घर बंद रहे, ताकि जब वे दोबारा आएँ, उस खाली घर में प्रेत-पिशाचों की उपस्थिति बन गई हो। ऐसी जगहें खाली कराने के लिए यह प्रयोग होता है, और सूकर विष्ठा, मूषक विष्ठा और बिडाल विष्ठा का प्रयोग होता है। उस घर में नहीं जहाँ गृहस्थ पहले से रह रहे हैं और देवी-देवता पहले से उपस्थित हैं।

174

लाल किताब के ज्योतिषी पूरी ज़िंदगी बिगाड़ देते हैं, और दोष सलाह देने वाले का है

वे ज़िंदगियाँ बिगाड़ते हैं, और दोष सलाह देने वाले का है

· 2:09:29–2:10:27

वक्ता कहते हैं, ये लाल किताब के ज्योतिषी और ऐसे ही ज्योतिषी किसी की पूरी ज़िंदगी तहस-नहस कर देते हैं — खड़ा नारियल रखवाएँगे, यह-वह करवाएँगे, गायत्री दे देंगे, कुछ भी कर देंगे। और फिर दूसरों से कहना है: बाबू, आप गलत करते हो, या आप ऐसे नहीं समझा रहे। वे पूछते हैं, आप किसे दोष देने जाएँगे? अगर आपकी श्रद्धा हमारे माध्यम से, गृहस्थ तंत्र के माध्यम से जुड़ी है, तो आप यहाँ की बात मानेंगे; उनकी श्रद्धा वहाँ से जुड़ी है। अब यह तो उस व्यक्ति का दोष है — उसे गलत बातें नहीं बतानी चाहिए।

175

क्या केवल क्षेत्रपाल निकारी की जा सकती है?

हाँ — और हवन के बाद भी करनी चाहिए

· 2:10:28–2:10:55 · Also a question

उमाशंकर जी कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से आरंभिक विधि से शुरू करके पूर्णाहुति और क्षेत्रपाल निकारी भी करना चाहते हैं, और पूछते हैं कि केवल क्षेत्रपाल निकारी कैसे करें। वक्ता कहते हैं: केवल क्षेत्रपाल निकारी आप बिल्कुल कर सकते हैं। हवन के बाद भी करनी चाहिए। केवल क्षेत्रपाल निकारी का विषय बिल्कुल ऐसे ही किया जा सकता है; उस पर वे अलग वीडियो डाल रहे हैं।

वक्ता कहते हैं, उमाशंकर जी, केवल क्षेत्रपाल निकारी आप बिल्कुल कर सकते हैं। हवन के बाद भी करनी चाहिए। केवल क्षेत्रपाल निकारी का विषय बिल्कुल ऐसे ही किया जा सकता है। उस पर हम अलग वीडियो डाल रहे हैं।

176

देवघर में रहने वाला गुरु कहाँ खोजे?

सावर क्षेत्र में, और काली व बगलामुखी के मंदिरों में जाइए

· 2:10:56–2:11:43 · Also a question

देवघर में रहने वाले एक व्यक्ति पूछते हैं कि क्या आसपास कोई गुरु हैं। वक्ता कहते हैं: सावर क्षेत्र में चले जाइए; मंदिरों में, काली जी और बगला माई के मंदिर में, एक से एक साधक बैठे हैं। देखकर, जान-पहचान करके, पूछकर, फिर दीक्षा लीजिए। अगर आपको ठीक लगे, तो जान-परखकर लीजिए।

एक श्रोता पूछते हैं, आप देवघर में रहते हैं; क्या आसपास कोई गुरु हैं। वक्ता कहते हैं, सावर क्षेत्र में चले जाइए। मंदिरों में — काली जी और बगला माई के मंदिर में — एक से एक साधक बैठे हैं। देखकर, जान-पहचान करके, पूछकर, फिर दीक्षा लीजिए। अगर आपको ठीक लगे, तो जान-परखकर लीजिए।

177

क्या देवघर का शक्तिपीठ जागृत है?

बैजनाथ धाम, हृदय पीठ, और शिवरात्रि का गठबंधन

· 2:11:44–2:12:25 · Also a question

वक्ता अभिषेक तोमर जी को तीखा जवाब देते हैं: आप कहते हैं कि देवघर में रहते हैं और आपको यह भी नहीं पता कि वह जागृत है या नहीं — इसमें हम क्या कहें। वह भगवती का हृदय पीठ कहा जाता है: माई के हृदय का स्पंदन, हृदय की मुख्य धमनियाँ, वहाँ गिरीं। अंबाजी में हृदय, और यहाँ हृदय की धमनियाँ — जिसके कारण भगवान को अपना आत्मलिंग स्थापित करना पड़ा। यही बैजनाथ धाम है, जहाँ शिवरात्रि के महाकाल में इन दोनों का गठबंधन पहले करवाया गया, जिसके कारण पूरा जगत मानता है कि शिवरात्रि को शिव और पार्वती जी का विवाह हुआ — जबकि सच यह है कि उस दिन कोई विवाह नहीं हुआ; उस दिन बैजनाथ महादेव और भगवती जय दुर्गा का गठबंधन करवाया गया था। यह उस समय का प्रतीक है जब सती ने अपना शरीर त्यागा।

178

तंत्र में जय दुर्गा का क्या स्थान है?

बैजनाथ धाम की शक्ति, और एक कल्प में नौ दुर्गाओं में से एक

· 2:12:26–2:13:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह हमारे सनातन की पराकाष्ठा है — ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति पूछ रहा है कि वह जागृत है या नहीं। जाइए बाबू, दर्शन कीजिए। वहाँ लक्ष्मी और दुर्गा जी के रूप में: तंत्र के क्षेत्र में भगवती जय दुर्गा का बहुत प्रमुख स्थान है। वे चैनल और वेबसाइट पर डाली गई ब्रह्म पिशाच प्रपंच सत्य तंत्र घटना की ओर इशारा करते हैं, जिसमें जय दुर्गा का वर्णन है, उनके मंत्रों का वर्णन है, और उनका प्रयोग कैसे हुआ — वह बहुत प्रचंड है। दक्षिण भारत में होने वाले नौ दुर्गा पूजन में, अलग-अलग कल्पों के अनुसार, एक कल्प में नौ दुर्गाओं में एक दुर्गा जय दुर्गा हैं, और उनका प्रमुख शक्तिपीठ यही बैजनाथ धाम माना गया है — शक्ति जय दुर्गा और उनके भैरव बैजनाथ।

179

भगवान के पुराने वस्त्रों का क्या करें?

प्रवाह ही उपाय है

· 2:14:19–2:15:12 · Also a question

एक श्रोता पूछते हैं, जब भगवान के वस्त्र पुराने हो जाते हैं, तो उनका क्या करना चाहिए। वक्ता कहते हैं, हम उनका प्रवाह कर देते हैं — प्रवाह ही एकमात्र उपाय है; वह पानी में गल भी जाता है। वे अभिषेक तोमर जी से भी कहते हैं कि वे बहुत परेशान लगते हैं और दीपावली के बाद मैसेज करें ताकि सब बात हो सके, और सुमन जी से कहते हैं कि केवल एक अनुष्ठान करें — संकट नाशन या चालीसा, दोनों में से कोई एक।

180

साधना में लहसुन-प्याज क्या नुकसान करते हैं?

गर्मी, तामसिक वृत्ति, स्वप्न दोष और मूलाधार पर स्पंदन

· 2:15:13–2:17:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं, ये गर्मी बढ़ाते हैं: कमर में दर्द होगा, पेट में दर्द होगा, लीवर में दर्द होगा — वे कहते हैं कि उन्होंने लीवर पेन कहा, लेबर पेन नहीं। तो दिक्कत होती है। और लहसुन-प्याज से सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि तामसिक वृत्ति ज़रूर बढ़ती है। पुरुषों में स्वप्न दोष की स्थिति बहुत बढ़ जाती है। जितनी गर्मी, उतनी दिक्कत; मूलाधार के ऊपर स्पंदन की प्रक्रिया ऐसे होने लगती है कि आदमी समझ नहीं पाता। तो लहसुन-प्याज नुकसान करते हैं; लहसुन-प्याज छोड़ देने चाहिए।

181

क्या बहन के घर बच्चा होने पर सूतक लगता है?

नहीं — कन्यादान और पाणिग्रहण से वह चली गई, बस एक स्थिति को छोड़कर

· 2:17:11–2:19:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं, नहीं, अमित जी: उसका कन्यादान हो गया, पाणिग्रहण संस्कार हुआ; वह उनके घर की लक्ष्मी बन चुकी है, आपके घर से जा चुकी है। तो जब उसका बच्चा होगा, या उनके घर किसी की मृत्यु होगी, उसका सूतक आपके यहाँ नहीं लगता। पर एक स्थिति ज़रूर माननी चाहिए, और ऐसा होता भी है: अगर कोई युवती अपने माता-पिता की एकमात्र संतान है, उसका विवाह हो गया है और वह ससुराल में है, तो उसकी पूरी ज़िम्मेदारी उसके पति की है, और अपने सास-ससुर की भी — तब वह पूरा नियम ससुराल वालों को भी मानना पड़ेगा; सारा नियम यहाँ भी लागू होता है। इसके अलावा, अगर उसके भाई वगैरह हैं, तो यह नियम यहाँ लागू नहीं होता।

182

क्या सौ रुपये वाले नवरत्न असली होते हैं?

इसके बजाय सुनार के पास जाइए, या उपरत्न लीजिए

· 2:19:17–2:20:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं, सौ रुपये में जो नवरत्न आते हैं, वे वह भी नहीं होते — यह भी पता नहीं चलता कि प्लास्टिक के हैं या नहीं। उससे अच्छा है सुनार की दुकान पर जाइए; उन्हें बताइए, वे आपको बता देंगे। अगर एक रत्ती का, या सवा रत्ती का भी मिल जाए, तो कम से कम वह चल जाएगा; या उपरत्न ले लीजिए, जो कम में मिल जाएगा। पर सौ रुपये में आने वाली यह छोटी बिंदु जैसी चीज़, जिसे नवरत्न कहते हैं — उसमें क्या आएगा? कौन देगा? इतना छोटा हीरा भी खरीदने जाइए, तो पता चल जाएगा। वे इसे केवल प्रतीक के रूप में देते हैं; इसमें कुछ नहीं होता।

183

परिवार में मृत्यु हुई हो तो क्या दीपावली मनाएँ?

देवताओं का पूजन न रोकें, पर पर्व न मनाएँ

· 2:20:20–2:21:27 · Also a question

मामा के लड़के की मृत्यु के बारे में बताया गया, जिसके कारण परिवार दीपावली नहीं मना रहा, पर्व नहीं मना रहा। वक्ता कहते हैं: तो छोड़ दीजिए, इस बार अनुष्ठान में भाग मत लीजिए। ऐसे तो मामा के लड़के के लिए भी पूजन हो रहा है, तो दीपावली में देवताओं का पूजन मत रोकिए; पर्व मत मनाइए। कम से कम दीपोत्सव सामान्य रूप से कीजिए — मुख्य स्थानों पर देवताओं के निमित्त दीप जलाइए। पटाखे मत फोड़िए, घर मत सजाइए, अगर आपके लिए यह बहुत पर्व वाली बात है; पर पूजन नहीं छोड़ना चाहिए, दीपावली का पूजन भी। दीपावली का पूजन कर लीजिए। अनुष्ठान आप अपने घर में कर सकते हैं। उनकी अपनी राय है कि इस बार आप लोग छोड़ ही दें, अगर इतना नियम मान रहे हैं।

184

क्या बराबर मात्रा में घी और शहद विष का काम करते हैं?

इसे पिया नहीं जा रहा — और मात्रा का नियम हर कोई नहीं निभा सकता

· 2:21:28–2:22:36 · Also a question

बताया गया कि आयुर्वेद ग्रंथों में लिखा है कि बराबर मात्रा में मिलाए गए घी और शहद विष का काम करते हैं। वक्ता कहते हैं: पर घी और शहद पिलाया नहीं जा रहा, न पिया जा रहा है। अगर मात्रा को लेकर चलें, तो मात्रा का नियम निभा पाना हर किसी के लिए संभव ही नहीं।

एक श्रोता कहते हैं, आयुर्वेद ग्रंथों में लिखा है कि घी और शहद बराबर मात्रा में मिलाने से वे विष का काम करते हैं। वक्ता जवाब देते हैं, पर घी और शहद पिलाया नहीं जा रहा, न पिया जा रहा है। अगर मात्रा को लेकर चलें, तो मात्रा का नियम निभा पाना हर किसी के लिए संभव ही नहीं।

185

क्या घर की चींटियों को चीनी देनी चाहिए, और क्या जंगली चूहा पाल सकते हैं?

मीठा घर से दूर दिया जाता है; और चूहे पाले नहीं जाते

· 2:22:37–2:24:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं, घर में चींटियों को मिश्री, चीनी, यह सब नहीं देना है — यह घर से दूर दिया जाता है। अगर घर में बहुत चींटियाँ निकलती हैं, तो वहाँ आटा डाल दिया जाता है, और वे खाकर चली जाती हैं; बस इतना ही है। पर अगर अब आप उन्हें मीठा देंगे, तो वे शायद ही जाएँगी। घर में जंगली चूहा पालने के बारे में वे पूछते हैं कि चूहा पालने की बात कहाँ सुनी है — क्या किसी ने कहीं सुना है कि चूहा पाला गया, हमारे पौराणिक खलनायकों को छोड़कर, राक्षसों को छोड़कर? पालने के लिए हमने गौ पालन सुना है; भैंसों का, महिष का, महिषी का पालन आपने सुना-पढ़ा होगा। ये किसी न किसी तरह हमारे काम आने वाले जीव हैं, जिनके कारण पूरा समाज टिका है। श्वान पाला नहीं जाता; उसका पोषण होता है, घर के द्वार के बाहर। पर चूहा पालने की बात उन्होंने कहीं नहीं सुनी।

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नित्य हवन में पहले कौन-सी आहुतियाँ दें, और घर की चींटियों का क्या?

अग्नि, नवग्रह और पंचदेव — और जीव हत्या का दोष

· 2:24:13–2:24:52 · Also a question

नित्य हवन में सबसे पहले अग्नि देवता की आहुति, और नवग्रहों की आहुति — ये ज़रूरी हैं। और पंचदेव, मुख्य रूप से, उनकी आहुति देनी चाहिए। और अगर गायत्री से करते हैं, तो गायत्री की आहुति शुरू में ही, मौन रहकर हो जाएगी। अरविंद कुमार यादव जी से, बावली के लिए क्या करें इस पर, वक्ता कहते हैं कि यह गोवत्स द्वादशी के दिन करना है, और पूरी विधि-विधान उन्होंने इसी लाइव की शुरुआत में बता दी है — शुरू से सुनिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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