गणेश चतुर्थी, बाल गणपति और चौबीस चतुर्थियाँ — ऊत, चाँदी की सुपारी और प्राण-प्रतिष्ठा विधि

बाधाएँ दूर करने के लिए गणेश और भैरव से जुड़ी तंत्र साधनाएँ।

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01

गणेश के बिना पूजन और तंत्र साधना भी असफल क्यों रहती है?

श्री गणेश के लिए कुछ न किया तो बड़ी असफलता

· 03:43–04:51 · Also a question

क्योंकि हम कितना भी पूजन-पाठ करें और तंत्र से जुड़ी कितनी भी साधनाएँ करें, यदि भगवान श्री गणेश से जुड़ा पूजन-पाठ और उनसे जुड़ा कोई विशेष प्रयोग नहीं कर रहे, तो बहुत बड़ी असफलता हाथ लगती है। वक्ता श्रोताओं से सोचने को कहते हैं कि जिन कष्टों के कारण वे साधना में आए, उनके लिए उन्होंने वास्तव में गणेश से जुड़ी कितनी साधना की है।

02

ठीक समय पर ग्राहक चले जाना, परीक्षा में एक-दो अंक से रह जाना, और अच्छे इंटरव्यू में भी कोई कमी रह जाना

व्यापार, नौकरी, परीक्षा और इंटरव्यू अंतिम क्षण में बिगड़ना

· 04:52–05:23

ऐसे काम जिनमें सफलता हाथ नहीं आ रही; बने-बनाए काम भी बिगड़ जाना; व्यापार की बैठक जिसमें ग्राहक आते हैं और ठीक समय पर चले जाते हैं; बहुत प्रयास से ढूँढी जा रही नौकरी; परीक्षा में एक-दो अंक से रह जाना ताकि वह क्लियर न हो; बहुत अच्छा गया इंटरव्यू, फिर भी कोई कमी रह गई और पता नहीं चलता कि काम क्यों नहीं हुआ।

03

जीवन की सारी बाधाएँ कहाँ से आती हैं?

दो विशेष देवता — श्री गणेश और भैरव

· 05:24–05:56 · Also a question

केवल व्यापार और रोज़गार में ही नहीं, जीवन के हर क्षेत्र में हम जो भी काम करते हैं, उसमें जो भी विघ्न-बाधा आती है, वह दो विशेष देवताओं के कारण आती है: पहले भगवान श्री गणेश, और दूसरे भैरव जी। गणपति को सबसे ऊपर मंगल मूर्ति कहा जाता है, और उन्हें विघ्नहर्ता और विघ्नकर्ता दोनों कहा जाता है — एक साथ दोनों।

04

तंत्र के क्षेत्र में जाते समय पहला निर्देश क्या है?

सबसे पहले पितरों से जुड़ा पाठ — गीता का ग्यारहवाँ अध्याय

· 05:57–06:30 · Also a question

जो व्यक्ति इस विषय को ठीक से समझाएगा, वह बताएगा कि यदि आप तंत्र साधना करना चाहते हैं तो, दीक्षा ले रहे हों या न ले रहे हों, पहले पितरों से जुड़ा कोई विशेष पाठ और पूजा करनी होगी। वक्ता कहते हैं कि वे सुरक्षित रूप से यह बताते हैं: गीता का ग्यारहवाँ अध्याय पढ़िए और उसे अपने पितरों को समर्पित कीजिए।

05

पितरों की श्रेणियाँ क्या हैं?

ऊत — गर्भ में या बारह वर्ष से कम आयु में मरे बच्चे

· 06:31–06:54 · Also a question

जब आप विस्तार में जाते हैं, तो आयु के अनुसार पितरों की अलग-अलग श्रेणियाँ होती हैं। एक श्रेणी वह है जिस पर चैनल पहले लाइव दे चुका है: जो बच्चे गर्भ में मृत्यु को प्राप्त होते हैं, या बारह वर्ष से कम आयु के बच्चे, वे ऊतों की श्रेणी में जाते हैं। घर वालों के लिए उन्हें देवी पुत्र कहा जाता है, और बाहर वालों के लिए वे मसान होंगे।

06

जब किसी पर मसान विद्या चलाई जाती है तो क्या होता है?

हनुमान, भैरव, काली को पुकारा जाता है — गणेश को कभी नहीं

· 06:55–07:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि श्रोता चकित होंगे। जब किसी पर मसान विद्या चलाई जाती है — कच्चे कलवे, मसान, इस तरह की चीज़ें — तो वहाँ हम हनुमान जी का, भैरव जी का उपयोग करते हैं, काली जी और भगवती से जुड़े प्रयोग करते हैं। पर वहाँ कोई भी व्यक्ति कभी यह नहीं कहता कि भगवान श्री गणेश से जुड़ा प्रयोग कीजिए। यह बहुत बड़ा विषय है।

07

बाल शक्ति को रोकना इतना कठिन क्यों है?

चंचलता के साथ शरारत, और कोई देवता उन्हें नहीं रोकता

· 07:14–07:32 · Also a question

वे कहते हैं कि सदा ध्यान रखिए, इस श्रेणी की जितनी भी शक्तियाँ हैं, उनमें चंचलता के साथ शरारत भी होती है, और कोई देवी-देवता उन्हें नहीं रोकता। जितनी भी बाल शक्तियाँ हैं, उन्हीं के द्वारा इन पर नियंत्रण मिलता है।

वक्ता कहते हैं कि यह बात सदा ध्यान में रखिए: इस श्रेणी की जितनी भी शक्तियाँ हैं, उनमें चंचलता के साथ शरारत भी होती है। कोई देवी-देवता उन्हें नहीं रोकता। जितनी भी बाल शक्तियाँ हैं, उन्हीं के द्वारा इन पर नियंत्रण प्राप्त होता है।

08

क्या काल भैरव मसान को रोकेंगे?

काल भैरव उन्हें नहीं रोकेंगे — और कब रोकेंगे

· 07:33–07:59 · Also a question

कोई आपको बटुक भैरव या बाल भैरव से जुड़ा प्रयोग नहीं बताएगा; वह काल भैरव कहेगा। वक्ता कहते हैं, काल भैरव उन्हें नहीं रोकेंगे — यह स्पष्ट जान लीजिए। काल भैरव उन्हें तभी रोकेंगे जब उस मसान के साथ गर्भ वाले की माँ भी जीवित हो और स्वयं तंत्र में चली हो, यानी डाकिनी। डाकिनी और मसान दोनों साथ हों, तभी काल भैरव वहाँ रोक लगाएँगे।

09

जानकार तांत्रिक ऊत विद्या का दुरुपयोग कैसे करते हैं?

मृत्यु के समय ऐसी विद्या सिद्ध करना, और घर में बटुक भैरव को स्थान क्यों दिया जाता है

· 08:00–08:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जानकार तांत्रिक ऐसी मृत्यु होने पर वहाँ जाते हैं और अपनी विद्या से यह निम्न प्रकार का काम करते हैं, क्योंकि यदि किसी पर प्रयोग करना हो और सामने वाला साधक या भक्त हो जहाँ डाकिनी विद्या नहीं चलेगी, तो इस विद्या से वे घुसपैठ करते हैं। इसीलिए बार-बार कहा जाता है कि बटुक भैरव को घर में स्थान दीजिए और उनकी पूजा कीजिए — बटुक भैरव के द्वारा ऐसी शक्तियाँ शांत होती हैं, और उनमें इन्हें रोकने की क्षमता है।

10

बाल शक्तियाँ अपना प्रारब्ध भोग रही हैं, इसलिए मंत्र या तंत्र से बँधने की धारणा उन पर लागू नहीं होती

प्रारब्ध, और पाँच नहीं, एक तत्व का शरीर

· 08:32–09:02

बच्चे की बात बच्चा ही मानेगा। अपने बाल रूप में वे अपना प्रारब्ध भोग रहे हैं — इसलिए यहाँ यह धारणा मत लगाइए कि मंत्र चला, तंत्र चला, वे बँधे या नहीं बँधे। यदि उनकी मृत्यु गर्भ में या किसी भी कारण से हुई, तो वह उनका प्रारब्ध है, और जिस परिवार में वे हैं उसका प्रारब्ध है कि उन्हें उस योनि में जाना पड़ा। हमारा शरीर पाँच तत्वों से पूरा है; उनका एक तत्व का, वायु तत्व का है।

11

बटुक भैरव से भी पहले कौन आते हैं?

बाल गणेश, जिनका सिर महादेव के त्रिशूल से कटा

· 09:03–09:21 · Also a question

श्री गणेश। बाल गणेश ही वह देव शक्ति हैं जिनका सिर भगवान शिव के त्रिशूल से कटा। इसे तंत्र में ले जाइए, तो वहाँ भी भगवान श्री बाल गणेश ही ऊतों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और इसलिए बाल गणपति की कृपा से ऊत सबसे पहले शांत होते हैं।

12

जब घर ऊतों से परेशान हो तो क्या किया जाता है?

श्री गणेश का दूध से अभिषेक

· 09:22–09:35 · Also a question

यदि आपके शरीर में, आपके घर-परिवार में, या आपके परिवार की किसी स्त्री के शरीर में ऊतों के कारण कष्ट फैला है — तो यदि श्री गणेश का दूध से अभिषेक किया जाए, तो उससे वे जल्दी शांत होंगे। गणपति उन्हें तुरंत शांत करते हैं।

वक्ता कहते हैं कि यदि आपके शरीर में, आपके घर-परिवार में, या आपके परिवार की किसी स्त्री के शरीर में ऊतों के कारण कष्ट फैला है — तो यदि श्री गणेश का दूध से अभिषेक किया जाए, तो उससे वे जल्दी शांत होंगे। गणेश उन्हें तुरंत शांत करते हैं। गणपति उनकी शिकायत तुरंत सुनते हैं।

13

गणपति उनकी शिकायत कहाँ ले जाते हैं?

अपनी माँ के पास — बच्चों को कुंडल बनाकर पहनने वाली भगवती काली

· 09:36–10:00 · Also a question

वे उसे तुरंत अपनी माँ के पास ले जाते हैं। तंत्र में दिखाया गया है कि भगवती काली छोटे बच्चों को कानों में कुंडल के रूप में पहनती हैं। चाहे श्मशान काली हों या उग्र काली, हम सोचते हैं कि यह उग्र रूप है और यह नहीं समझते कि उन्होंने उन्हें वहाँ पहना है, कि वे वह आवाज़ सुन रही हैं — पर उस आवाज़ को पहुँचाने का माध्यम गणपति हैं।

14

श्रीमद्भगवद्गीता से ऊतों के लिए कुछ क्यों नहीं किया जा सकता?

पितृ दोष एक बात है, ऊत दूसरी — गीता उन तक नहीं पहुँचेगी

· 10:01–10:32 · Also a question

इसलिए सबसे पहले गणपति का पूजन आवश्यक है। पितर अलग प्रकृति के हैं और कई प्रकार के हो सकते हैं, पर ऊतों के लिए आप कुछ नहीं कर पाएँगे: ऊत श्रीमद्भगवद्गीता से समझेगा ही नहीं, क्योंकि वह बुद्धि अभी उनमें नहीं है। इसलिए यह माध्यम बनता है। वे कहते हैं कि यह भीतर जाने की बात है; ऊपर-ऊपर से बहुत कुछ कहा जा सकता है।

15

जहाँ पितृ दोष से बाधा आती हो, वहाँ क्या दिया जाता है?

छलनी की तरह भगवान दत्तात्रेय का माला मंत्र

· 10:33–10:58 · Also a question

यदि आप दीक्षित हैं, तो आपके गुरु बहुत कुछ बता सकते हैं। अन्यथा जो प्रयोग दिया जाता है वह भगवान दत्तात्रेय से जुड़ा माला मंत्र है — क्योंकि यदि आपके घर में पितरों के साथ बिना विचारे कुछ भी चला आया है, तो भगवान दत्त उस चीज़ को रोकते हैं; उनकी विद्या छलनी की तरह काम करती है, और छानकर वे सही चीज़ पितरों तक पहुँचाते हैं।

16

गणपति के प्रयोग के दो प्रकार कौन से हैं?

पहला सुपारी पर — विशेषकर चाँदी की सुपारी

· 10:59–11:39 · Also a question

गणपति का प्रयोग सदा दो प्रकार का होता है। पहला, जो मूल प्रयोग है, सुपारी पर होता है — और सुपारी में भी यदि चाँदी की सुपारी हो, तो वह विशेष रूप से ऊतों, पितरों और उनसे जुड़ी हर चीज़ के लिए काम करती है। वैदिक या पौराणिक पूजन में मंत्रों से आपको बिल्कुल पता नहीं चलेगा कि पितरों की शांति के लिए कुछ कहा जा रहा है; कोई विशेष मर्मज्ञ ही शायद इसे समझा सके।

17

चाँदी की सुपारी को स्नान कराने पर क्या होता है?

रजत अभिषेक — घर के ऊत प्रसन्न होते हैं और उन्हें गति मिलती है

· 11:40–12:05 · Also a question

जब आप तंत्र में आते हैं: यदि प्रयोग चाँदी की सुपारी से हो रहा है, तो उस माध्यम से आपके सारे पितर और ऊत शांत हो रहे होते हैं। जैसे-जैसे गणपति को स्नान कराया जाता है, जैसे गणपति का रजत अभिषेक होता है, वैसे आपके घर के सारे ऊत प्रसन्न हो जाते हैं — और प्रसन्न होकर कृपा करेंगे, या यदि उन्हें गति चाहिए तो गणपति के द्वारा उन्हें गति मिलेगी। भगवती गौरी के प्रसन्न होने से उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता मिलेगा। इसलिए चाँदी की सुपारी के गौरी गणपति — ठोस, खोखले नहीं।

18

मृत्तिका गणपति का प्रयोग कब किया जाता है?

जब किसी स्त्री के शरीर को ऊत परेशान कर रहे हों

· 12:06–12:35 · Also a question

दूसरा मृत्तिका का, यानी मिट्टी का होता है — तब किया जाता है जब पता चले कि किसी स्त्री के शरीर में ऊतों के कारण कष्ट हो रहा है। वक्ता बताते हैं कि तब कौन-सी परेशानियाँ आती हैं: पेट से जुड़े तरह-तरह के रोग; गर्भाशय से लेकर पेट का पूरा क्षेत्र, उनके जन्म का क्षेत्र, बच्चों का क्षेत्र — तंत्र में जो सबसे अधिक समस्याएँ दिखती हैं, वे इन्हीं क्षेत्रों से जुड़ी होती हैं, क्योंकि वे उसी स्थान से जुड़े हैं।

19

ऊत शरीर के किस क्षेत्र को नियंत्रित करते हैं?

नाभि से पूरे योनि मार्ग तक

· 12:36–12:47 · Also a question

नाभि से नीचे पूरे योनि मार्ग तक, उनके जन्म का स्थान, वह क्षेत्र — उस स्थान तक उनका प्रभाव और नियंत्रण सबसे अधिक होता है। और जब कोई किसी पर मसान विद्या चलाता है, तो वही क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होता है।

वक्ता कहते हैं कि नाभि से नीचे पूरे योनि मार्ग तक, उनके जन्म का स्थान, जो वह क्षेत्र है — उस स्थान तक उनका प्रभाव और नियंत्रण सबसे अधिक होता है। और जब कोई किसी पर मसान विद्या चलाता है, तो वही क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होता है।

20

मृत्तिका गणेश का प्रयोग कैसे किया जाता है?

शुद्ध की हुई मिट्टी, विग्रह, ब्रह्म स्थान पर पूजा, फिर क्षेत्रपाल

· 12:48–13:30 · Also a question

मृत्तिका शोधन से — मिट्टी को शुद्ध करके, उससे भगवान श्री गणेश की मूर्ति बनाकर, उसका विधिवत दूध से अभिषेक और धूप से अभिषेक करके, भोग लगाकर और पूजन करके। मिट्टी की वह मूर्ति घर में ब्रह्म स्थान पर पूजी जाती है, और फिर क्षेत्रपाल के स्थान पर पहुँचाई जाती है। संकल्प के साथ ऐसा करने से घर के ऊत क्षेत्रपाल के पास चले जाते हैं, और उनकी आगे की क्रिया वहीं होती है।

21

एक अन्य शिक्षक ने स्त्रियों से कहा कि उन्हें किसी के पास जाने की ज़रूरत नहीं, वे स्वयं इक्कीस दिन रोज़ 108 बार चंडी कवच पढ़ लें

इक्कीस दिन तक रोज़ एक सौ आठ चंडी कवच पाठ

· 13:31–14:27

वक्ता कहते हैं कि बहुत सारे लोग बड़े अजीब प्रयोग देते हैं, और यदि गलती से आप वहाँ कोई प्रश्न कर दें तो वे दूसरों के बारे में बहुत टेढ़ी बातें कहने लगते हैं। ऐसे ही एक बहुत बड़े व्यक्ति ने, जो वक्ता के अनुसार यह चैनल सुनते हैं और जिनका अपना फ़ेसबुक ग्रुप है, यह प्रयोग दिया कि स्त्रियों को किसी के पास जाने की ज़रूरत नहीं, यदि वे श्री दुर्गा सप्तशती में बताए चंडी कवच के रोज़ 108 पाठ लगातार इक्कीस दिन करें।

22

गृहस्थ के लिए नौ घंटे चंडी कवच पाठ असंभव क्यों है?

इक्कीस दिन लगातार चंडी कवच पाठ, और उसे पूरा करने में स्वयं वक्ता के तेरह-चौदह घंटे

· 14:28–15:13 · Also a question

उन्होंने लिखकर उत्तर दिया कि जो स्त्री या पुरुष साधक नहीं है — या है, पर गृहस्थ है — उसके लिए इक्कीस दिन लगातार नौ घंटे का अर्थ होगा कि माताएँ-बहनें घर का सारा काम छोड़कर बैठें; आप उनसे ज़ोमैटो और स्विगी मँगवाएँगे, और नवरात्रि से भी अधिक काम करवाएँगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब वे स्वयं आठ-नौ दिन का संकल्प लेकर यह करते हैं, तो उन्हें तेरह-चौदह घंटे लगते हैं, क्योंकि इतनी देर लगातार बैठना उनके लिए भी संभव नहीं।

23

उत्तर यह था कि संस्कृत जानने वाला आराम से पूरा कर लेगा, और केवल संस्कृत न जानने से पाठ में तेरह-चौदह घंटे लगते हैं

तीन घंटे में एक सौ आठ पाठ — हर एक डेढ़ मिनट में

· 15:14–16:06

उनका उत्तर था कि वक्ता को संस्कृत पढ़नी नहीं आती होगी — कि एलकेजी और दूसरी-तीसरी कक्षा के बच्चे उनसे अच्छी संस्कृत पढ़ते हैं, और यदि उन्हें संस्कृत आती तो वे आराम से कर लेते; न आने पर तेरह-चौदह घंटे, क्या, पचास घंटे भी लग सकते हैं। और उन्होंने लिखा कि वे स्वयं तीन घंटे में 108 पाठ पूरे कर लेते हैं — जिसका हिसाब लगाने पर अर्थ है कि वे दुर्गा सप्तशती का चंडी कवच एक मिनट तीस सेकंड में, यानी डेढ़ मिनट में पढ़ते हैं।

24

किसी को उपाय देने से पहले कौन-सा नियम मानना चाहिए?

वही दीजिए जो स्वयं किया हो या सामान्य व्यक्ति कर सके

· 16:07–16:51 · Also a question

आप जो भी उपाय दें, जो भी बात बताएँ — या तो आपने उसे स्वयं किया हो, या करवाया हो, या वह ऐसा हो जिसे सामान्य व्यक्ति कर सके। वे कहते हैं कि प्रयोग अपने आप में बहुत अच्छा है, इक्कीस दिन 108 कीजिए; पर उसे गलत ढंग से मत बताइए। हिंदी में, संस्कृत में पढ़कर देखिए: कितनी भी तेज़ी से पढ़ें, उच्चारण फिर भी सही करना होगा। डेढ़ मिनट में यह संभव नहीं, चाहे कितना भी तेज़ पढ़ें; कविता की तरह पढ़ने पर भी डेढ़ मिनट में नहीं होगा।

25

जब तक स्वयं न किया हो या करवाया न हो, वे कोई प्रयोग नहीं देते

नए लोगों के बच्चों जैसे प्रश्न, और पहले परखने का उनका अपना नियम

· 16:52–17:25

क्योंकि श्रोताओं में नए लोग उन्हें बहुत सारे प्रश्न भेजते हैं जो बिल्कुल बच्चों जैसे होते हैं — ऐसा कैसे हो सकता है? पहला पाठ कम से कम पंद्रह-बीस मिनट लेगा; आप जो भी करेंगे उसमें समय लगेगा। वे कहते हैं कि जब तक उन्होंने कोई प्रयोग स्वयं न किया हो या अपने साधक परिवार में किसी से, जहाँ आवश्यकता हो, करवाया न हो, तब तक वे नहीं बताते कि वह चीज़ कैसे करनी है। वे कहते हैं कि आज गणपति के बारे में जो कुछ कह रहे हैं, वह सब उनके साधक परिवार के लोगों के द्वारा करवाया गया है, और परिणामों के कारण ही वे इसे सामने रख रहे हैं।

26

हर गृहस्थ को कौन-सा गणेश अनुष्ठान करना चाहिए?

संकटनाशन गणेश स्तोत्र का अनुष्ठान

· 18:15–18:39 · Also a question

हर गृहस्थ को अपने जीवन में संकटनाशन गणेश स्तोत्र की साधना करनी चाहिए, और उस स्तोत्र का विधिवत अनुष्ठान करना चाहिए। यदि इसी चैनल पर दिए वीडियो में बताए विधान से चतुर्थी से चतुर्दशी तक रोज़ 108 पाठ किए जाएँ, तो यह सर्वोत्तम है। यदि न कर सकें, तो कम से कम तीन दिन, पाँच दिन, सात दिन कीजिए।

27

क्या अष्टविनायक साधना में जोड़ा बाती लगती है?

जोड़ा बाती जो बारीक बटी होने से एक जैसी दिखती है

· 18:40–19:10 · Also a question

अष्टविनायक साधना पूरी करके दिखाई गई है, जितनी सरल हो सकती थी उतनी सरल बनाकर। उसमें एक प्रश्न यह था कि उन्होंने जोड़ा बाती नहीं, एक बत्ती लगाई। वे उत्तर देते हैं कि वह जोड़ा बाती ही है — रुई को ऐसे गूँथा गया है कि आपको एक दिखेगी, वह इतनी बारीक बटी है। दोहरी कैसे दिखेगी? तभी जब हम बत्ती उतनी मोटी रखते। उन्हें देर तक पाठ करना था, इसलिए उन्होंने बहुत पतली बत्ती रखी। आठ विनायकों के आठ दीपक सदा जोड़ा बाती से ही रखने हैं, और ठीक वैसे ही करना है जैसा वहाँ बताया गया है।

28

क्या अष्टविनायक साधना एक दिन से अधिक की जा सकती है?

संकटनाशन अनुष्ठान के साथ इसके दस दिन

· 19:11–19:24 · Also a question

किसी भी दिन, यदि आप इसे एक दिन से अधिक करना चाहें — हालाँकि यह एक दिन की साधना है — यदि अधिक दिन करना चाहें और आपके पास समय हो, यदि पूरे दस दिन करना चाहें, तो यह सर्वोत्तम है। वह पूजन दस दिन कीजिए, और साथ में संकटनाशन का अनुष्ठान भी पूरा कीजिए; यह सर्वोत्तम होगा।

वक्ता कहते हैं कि किसी भी दिन, मान लीजिए आप एक दिन से अधिक करना चाहें — हालाँकि यह एक दिन की साधना है — यदि अधिक दिन करना चाहें, यदि आपके पास समय हो, यदि पूरे दस दिन करना चाहें, तो यह सर्वोत्तम है। वह पूजन दस दिन कीजिए, और साथ में संकटनाशन का अनुष्ठान भी कीजिए; यह सर्वोत्तम होगा।

29

क्या दसों दिन हवन किया जा सकता है?

रोज़ हवन, पर पूर्णाहुति केवल अनंत चतुर्दशी को

· 19:25–19:40 · Also a question

यदि रोज़ हवन करने की इच्छा हो तो रोज़ कीजिए — पर पूर्णाहुति रोज़ मत कीजिए; पूर्णाहुति अंतिम दिन, यानी अनंत चतुर्दशी के दिन कीजिए। भोग रोज़ बदलेगा, पर पान के पत्ते पर रखी चावल की ढेरी कभी हिलानी नहीं है और कभी हटानी नहीं है; वह केवल अनंत चतुर्दशी के दिन हटाई जाएगी।

30

क्या अंत में आठ सुपारियों का विसर्जन किया जा सकता है?

आठ सुपारियाँ जा सकती हैं; मुख्य विग्रह नहीं

· 19:41–20:02 · Also a question

आठ विनायकों के रूप में जो आठ सुपारियाँ रखी गई हैं — उनका विसर्जन आप कर सकते हैं, उन आठ सुपारियों के विसर्जन में कोई कठिनाई नहीं। पर जो मुख्य श्री विग्रह रहेगा, या जो फ़ोटो आप रखेंगे, उन्हें मत हटाइए।

वक्ता कहते हैं कि आठ विनायकों के रूप में जो आठ सुपारियाँ रखी गई हैं — उनका विसर्जन आप कर सकते हैं; उन आठ सुपारियों के विसर्जन में कोई कठिनाई नहीं। पर जो मुख्य श्री विग्रह रहेगा, या फिर जो फ़ोटो आप रखेंगे — उन्हें मत हटाइए। इस तरह इस वर्ष गणपति का पूजन करके देखिए।

31

किसी भी मुख्य साधना से पहले कौन-सा क्रम मानना चाहिए?

गुरु, गणपति, भैरव — और भगवती के लिए हनुमान

· 20:03–20:47 · Also a question

तंत्र के क्षेत्र में किसी भी विशेष मुख्य साधना को शुरू करने से पहले गणपति की साधना और भैरव जी की साधना अत्यंत आवश्यक है। गुरु, गणपति और भैरव इसी क्रम में चलते हैं: पहले गुरु साधना, फिर गणपति साधना, फिर भैरव साधना — जिसमें आप अपने कुल भैरव की साधना भी कर सकते हैं। उसके बाद अपने कुल देवी-देवताओं की साधना, पितरों से जुड़ी कोई बात, कुंडली से जुड़ी कोई बात; और तभी मुख्य साधनाओं पर जाते हैं। यदि साधना भगवती से जुड़ी है, तो भैरव जी के बाद हनुमान जी की साधना भी करनी चाहिए।

32

वैनायकी नवरात्रि क्या है?

वैनायकी तंत्र, और आज तंत्र ग्रंथों की स्थिति

· 20:48–21:20 · Also a question

गणपति के दस दिन करने के बारे में पूछे जाने पर वे वैनायकी तंत्र और वैनायक नवरात्र का परिचय देते हैं — नौ दिन का नवरात्र होता है, इसलिए इसे वही माना जाता है। वे कहते हैं कि श्रोताओं को यह जानना चाहिए कि हमारे जितने भी तंत्र ग्रंथ हैं, वे आज भी सब जगह प्रकट रूप में मौजूद नहीं हैं; और तंत्र ग्रंथों को छोड़ दें, तो पुराणों में भी बहुत सारी चीज़ें बदली गई हैं।

33

गुप्त कल्पेश्वर तंत्र क्या है?

विंध्य, काशी या प्रयाग क्षेत्र की एक मध्यकालीन रचना

· 21:21–21:42 · Also a question

उन ग्रंथों में गुप्त कल्पेश्वर तंत्र है। वक्ता कहते हैं कि यह मध्यकालीन भारत में, शायद विंध्य क्षेत्र या काशी क्षेत्र या प्रयाग क्षेत्र में — इन तीनों में से किसी एक क्षेत्र में — किसी विशेष साधक द्वारा लिखा गया, और इसमें तंत्र से जुड़े तरह-तरह के विषय हैं।

वक्ता कहते हैं कि उनमें गुप्त कल्पेश्वर तंत्र है। यह मध्यकालीन भारत में, शायद विंध्य क्षेत्र में, या फिर काशी क्षेत्र या प्रयाग क्षेत्र में — इन तीनों क्षेत्रों में से किसी एक स्थान पर — किसी विशेष साधक द्वारा लिखा गया, और इसमें तंत्र से जुड़े तरह-तरह के विषय हैं।

34

अरुणासुर के वध के लिए देवता भगवती विंध्यवासिनी के पास आए — श्रीमद्देवीभागवत से ली गई कथा जिसे तंत्र के विषय के साथ मिलाया गया

अरुणासुर के वध के लिए देवताओं का भगवती विंध्यवासिनी के पास आना

· 21:43–22:09

इसमें वर्णन है कि सारे देवी-देवता अरुणासुर के वध के लिए भगवती विंध्यवासिनी के पास आए। यह कथा देवीभागवत, यानी श्रीमद्देवीभागवत महापुराण में वर्णित है; वहीं से लेकर इसे तंत्र के विषय के साथ मिलाया गया है, क्योंकि पुराणों में तंत्र का पूरा विषय नहीं रहता।

35

देवताओं ने विंध्य पर स्त्री रूप क्यों धारण किया?

विंध्य पर केवल भगवती को पुरुष रूप में माना जाता है

· 22:10–22:38 · Also a question

उन्होंने लिखा है कि विंध्य क्षेत्र में आने पर यह माना जाता है कि भगवती के अलावा — विंध्य क्षेत्र में भगवती को पुरुष रूप में और बाकी सबको स्त्री रूप में माना जाता है। इसलिए जितने भी देवी-देवता थे, जितने भी देव थे, वे भी अपना स्त्री रूप, अपना शक्ति स्वरूप धारण करके गए। वक्ता बताते हैं कि धारावाहिक विघ्नहर्ता श्री गणेश में भी यह दिखाया गया था — कि जब भगवान श्री नारायण, महादेव और विनायक सब अरुणासुर के वध के लिए गए, तो सबने स्त्री रूप धारण किया।

36

तो वैनायकी तंत्र क्या है?

विंध्य पर अपने वैनायकी रूप में गणेश द्वारा दिया गया उपदेश

· 22:39–23:00 · Also a question

उस समय भगवान श्री गणेश वैनायकी स्वरूप धारण करके विंध्य पर्वत पर गए थे; और वहाँ उपस्थित अपने जितने भी भक्तों को उन्होंने जो तंत्र उपदेश में दिया, उसे वैनायकी तंत्र कहा जाता है, जिसका कुछ अंश गुप्त कल्पेश्वर तंत्र में वर्णित है। इसके अंतर्गत बहुत सारे विधि-विधान बताए गए हैं और बहुत सारे विषय शामिल हैं।

37

वैनायकी तंत्र का उपयोग कब किया जाता है?

अपने ही अतृप्त आत्माओं के कारण घर में उपद्रव

· 23:01–23:16 · Also a question

उसी तंत्र में वर्णन आता है कि यदि आपके घर में इस तरह के उपद्रव हों, जो आपके अपने घर की अतृप्त आत्माओं, बच्चों की आत्माओं आदि द्वारा किए जा रहे हों — तो वहीं वैनायकी तंत्र का प्रयोग किया जाता है।

वक्ता कहते हैं कि उसी तंत्र में यह बात वर्णित है: कि यदि आपके घर में इस तरह के उपद्रव होते हैं, जो आपके अपने घर की अतृप्त आत्माओं, बच्चों की आत्माओं आदि द्वारा किए जा रहे हैं — तो वहाँ वैनायकी तंत्र का प्रयोग किया जाता है।

38

वैनायकी तंत्र के भीतर सबसे पहले कौन-से विषय आते हैं?

संकटनाशन गणेश स्तोत्र के बारह नाम

· 23:17–23:57 · Also a question

सबसे पहले भगवान गणेश के वे बारह नाम आते हैं जो संकटनाशन गणेश स्तोत्र में दिए गए हैं। इन बारह नामों में हर एक का तंत्र से जुड़ा अलग विषय है, जिसे वे कहते हैं कि अलग वीडियो में संक्षेप में बताना होगा। उन बारह नामों — यानी बारह स्वरूपों — में से किसी एक स्वरूप को लेकर प्रयोग किया गया है। पर मुख्य रूप से यह माना जाता है कि यदि वहाँ बाल गणपति से जुड़ा प्रयोग किया जाए, तो इस तरह की शक्तियाँ पूरी तरह और शीघ्र शांत होती हैं।

39

गौरी गणपति का पूजन ठोस रजत सुपारी में या फिर मृत्तिका से बनी मूर्ति में करवाना है

गौरी गणपति का पूजन

· 23:58–24:10

इसके लिए सबसे सही चीज़ गौरी गणपति का पूजन है — जो, जैसा पहले बताया गया, या तो ठोस रजत सुपारी में या फिर मृत्तिका से बनाकर करवाना है।

वक्ता पूछते हैं कि अब यह किस तरह संभव है। इसके लिए सबसे सही चीज़ गौरी गणपति का पूजन है। और गौरी गणपति का पूजन, जैसा पहले बताया जा चुका है, या तो ठोस रजत सुपारी में करवाना है, या फिर मृत्तिका से बनाकर।

40

यदि न चाँदी की सुपारी संभव हो न मिट्टी, तो क्या करना चाहिए?

पार्वती की गोद में गणेश का चित्र, और गणेश जन्म कथा

· 24:11–24:54 · Also a question

तब, वर्तमान समय के अनुसार, भगवती पार्वती की गोद में बैठे भगवान श्री गणेश के सुंदर रूप का फ़ोटो — छाया चित्र — स्थापित कीजिए, और उसके सामने श्रीमद्देवीभागवत महापुराण में वर्णित श्री गणेश के जन्म की पूरी कथा पढ़िए। उससे संतान से जुड़ा कितना भी बड़ा दोष हो, वह दूर होता है; वंश बढ़ता है, संतान मिलती है; और साथ में स्त्रियों के गर्भाशय और पेट से लेकर हर क्षेत्र में भूतों — उस तरह की शक्तियों — से उत्पन्न विकार भी शांत होते हैं।

41

पिछले वर्ष की बाल गोपाल मूर्ति का क्या करना चाहिए?

मूर्ति बार-बार नहीं बदलनी चाहिए

· 26:06–26:49 · Also a question

जब पूछा गया कि बाल गोपाल की जन्माष्टमी पूजा के लिए अगले वर्ष नई मूर्ति लेने पर पुरानी मूर्ति का क्या करें, तो वे उत्तर देते हैं कि मूर्ति कभी बार-बार नहीं बदलनी चाहिए, चाहे किसी की भी मूर्ति हो। वे कहते हैं कि उन्हें समझ नहीं आता कि नई मूर्ति ली ही क्यों जाती है — यदि आप अपने बच्चे का जन्मदिन मनाते हैं, तो क्या अगले वर्ष नया बच्चा लाकर उसे बदल देते हैं?

42

मूर्ति आख़िर कब ख़रीदनी चाहिए?

एक बार एक ठोस धातु की मूर्ति, और दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश कभी नहीं

· 26:50–27:09 · Also a question

नई मूर्ति कभी नहीं लेनी है। जिस भी वर्ष आप ठोस मूर्ति, धातु की मूर्ति लाएँ, उसकी सेवा-पूजा विधि-विधान से कीजिए; फिर वह मूर्ति कभी नहीं जाएगी, न आपको नई मूर्ति ख़रीदनी है। वे बार-बार कहते हैं कि दीवाली पर लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति नहीं ख़रीदनी चाहिए — आपको उसे नहीं लाना है। एक बार, एक वर्ष में, अच्छी ठोस, सुंदर मूर्ति लाइए और उसे कभी मत हटाइए।

43

हर वर्ष मूर्ति बदलने से क्या खो जाता है?

पूरे वर्ष के जप, पूजा और तप का पुण्य उसके साथ चला जाता है

· 27:10–27:35 · Also a question

केवल किसी कारण से टूट जाएँ तभी उन्हें बदलना है; अन्यथा आपको नई नहीं लानी है, और उसका पूरा विधि-विधान दिया जा चुका है। यदि आप हर वर्ष नई मूर्ति लाकर पुरानी बदलते हैं, तो पूरे वर्ष आपने जो जप, पूजा और तप किया, उसका सारा पुण्य — वे लेकर चले गए। आपके पास क्या बचा? आप मूर्ति बदलते ही क्यों हैं?

44

क्या मूर्ति कभी न बदलने के नियम का कोई अपवाद है?

संकल्प के साथ ली गई छह, आठ या बारह इंच से बड़ी मिट्टी की मूर्तियाँ

· 27:36–27:40 · Also a question

एक बात यह है कि जहाँ छह इंच, आठ इंच, बारह इंच से बड़ी मिट्टी की मूर्ति होती है, वहाँ किसी का कोई विशेष संकल्प होता है — कि हमें इसे वर्ष भर रखना है — और इसलिए हर वर्ष नई मूर्ति लाई जाती है; वह अलग विषय है। पर यह इस तरह नहीं करना चाहिए कि हर वर्ष नई मूर्ति लाएँ और पुरानी हटा दें।

45

गणंत क्रिया क्या है?

शरीर के किसी अंश से, या थूक, कफ या मूत्र वाली मिट्टी से किया गया प्रयोग

· 27:41–28:25 · Also a question

इसका अर्थ है तंत्र का ऐसा प्रयोग जिसमें आपके शरीर से जुड़ा कोई अंश लिया जाता है — आपका रक्त, आपका नाख़ून, आपके बाल, आपके शरीर का कोई भी भाग — या बिना कुछ लिए भी, थूक, कफ आदि, या वह मिट्टी भी जिस पर मूत्र किया गया हो; और क्षुद्र शक्तियों के द्वारा उस तरह की क्रिया की जाती है। जैसे श्मशान से किसी क्षुद्र व्यक्ति से जुड़ी कोई चीज़, उसकी हड्डी, लाकर मंत्र से बाँधी जाती है, और फिर ऐसी जगह गाड़ दी जाती है जहाँ वह सड़ने-गलने लगे।

46

गणंत क्रिया व्यक्ति के साथ क्या करती है?

क्रिया नष्ट होने तक कोई साधना पूरा फल नहीं देती

· 28:26–28:52 · Also a question

जब ऐसी चीज़ें होती हैं तो इसे गणंत क्रिया या पाताल क्रिया कहा जाता है — गणंत बोल लीजिए, पाताल बोल लीजिए — और इसके कारण, एक बार यह चीज़ आप पर हो जाए, तो जब तक वह क्रिया नष्ट नहीं होती, आप कोई बहुत विशेष बड़ी साधना भी करें तो उसका पूरा प्रभाव या पूरा फल नहीं मिलेगा। सामान्य पूजा-पाठ से तो बहुत प्रभाव मिलेगा ही नहीं; थोड़ी राहत मिलेगी, और फिर परेशानी बनी रहेगी। यह ग्रंथ क्रिया के कारण होता है।

47

क्या कुश का आसन स्वयं बनाया जा सकता है?

हाँ — इसमें कोई नियम नहीं चाहिए

· 28:53–29:11 · Also a question

टी एन तिवारी जी ने पूछा कि साधना में बैठने के लिए रेशम या ऊन के आसन न होने पर क्या कुश का आसन स्वयं बनाया जा सकता है, तो वे उत्तर देते हैं कि बिल्कुल बनाया जा सकता है — किसी नियम की आवश्यकता नहीं; आप इसमें आसन बना सकते हैं।

टी एन तिवारी जी पूछते हैं: साधना में बैठने के लिए रेशम, ऊन आदि के आसन न होने पर क्या कुश का आसन स्वयं बनाया जा सकता है? वक्ता उत्तर देते हैं कि आप बिल्कुल बना सकते हैं। किसी नियम की आवश्यकता नहीं। आप इसमें आसन बना सकते हैं।

48

जब सब कुछ अंतिम क्षण में बिगड़ जाए तो क्या करना चाहिए?

आँखें बंद करके की गई गौरी गणपति की लंबी साधना

· 29:12–29:34 · Also a question

गणपति की विशेष साधना लंबे समय तक कीजिए। वे कहते हैं कि वे बार-बार कहते हैं: जब भी आपके सारे काम बिगड़ने लगें, गौरी गणपति का पूजन शुरू कीजिए। आँखें बंद करके उनका पूजन कीजिए — जितने भी कष्ट और बाधाएँ आएँ, संकट वही दूर करते हैं।

49

क्या समस्या सुलझाने के लिए गणपति और बटुक भैरव को एक साथ पूजा जा सकता है?

पहले ग्यारह दिन गणपति, फिर ग्यारह दिन बटुक भैरव

· 29:35–29:52 · Also a question

और उनके साथ, यदि बटुक भैरव की पूजा शुरू हो गई है — तो दोनों एक साथ मत कीजिए। पहले ग्यारह दिन गणपति कीजिए, फिर ग्यारह दिन बटुक भैरव कीजिए। यदि इन दोनों के बीच आपकी परेशानी हल नहीं हुई, तो उसके बाद दोनों को एक साथ शुरू कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि और उनके साथ, यदि बटुक भैरव की पूजा शुरू हो गई है — तो उन्हें एक समय पर मत कीजिए। पहले ग्यारह दिन गणपति कीजिए। फिर ग्यारह दिन बटुक भैरव कीजिए। यदि इन दोनों के बीच आपकी परेशानी हल नहीं होती, तो उसके बाद दोनों को एक साथ शुरू कीजिए।

50

क्या सूअर के चर्म का आसन प्रयोग हो सकता है, और महागणपति विधि का क्या?

दो छोटे उत्तर — आसन, और महागणपति विधान क्यों बोला नहीं जा सकता

· 29:53–30:24 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या सूअर के चर्म का आसन प्रयोग हो सकता है, तो वे पूछने वाले से कहते हैं कि बिल्कुल प्रयोग कीजिए — किसने मना किया है। जब महागणपति साधना में हवन, तर्पण और मार्जन का विधि-विधान समझाने को कहा गया, तो वे कहते हैं कि यदि यह भूत लिपि विधान से पूछा जा रहा है तो यहाँ बताना संभव नहीं, क्योंकि उसमें मातृकाओं का इतना प्रयोग है कि इसे इस तरह बोला नहीं जा सकता; उसे लिखकर दिखाना पड़ेगा।

51

क्या खोखली चाँदी की मूर्ति में दूसरी धातु भरी जा सकती है?

केवल चाँदी भरिए, या उन्हें रहने दीजिए और एक छोटी ठोस मूर्ति लाइए

· 30:25–30:55 · Also a question

जब घर में रखे चार अंगुल के चाँदी के गणेश जी और लक्ष्मी जी के बारे में पूछा गया जो अंदर से खाली हैं, और क्या उनमें दूसरी धातु भरी जा सकती है, तो वे उत्तर देते हैं कि दूसरी धातु नहीं भरनी चाहिए। यदि भरवा सकें, तो चाँदी ही भरवाइए। पर यदि उन्हें गलाना पड़े, तो यदि उनकी लंबे समय से पूजा हुई है, तो उन्हें वैसे ही रहने दीजिए — छोटे ही सही — और एक दूसरी ठोस मूर्ति लाइए, और उनकी पूजा भी चलती रहे।

52

मुझ पर किस देवता की कृपा है?

उनके पास बागेश्वर धाम जैसी सिद्धि नहीं कि यहीं बैठे बता दें

· 32:01–32:33 · Also a question

सतीश कुमार पांडे जी ने पूछा कि उन पर किस देवता की कृपा है, तो वे उत्तर देते हैं कि आप जिस देवता का पूजा-पाठ कर रहे होंगे, कृपा उसी की होगी। वे कहते हैं कि उन्हें बागेश्वर धाम बालाजी जैसी परम कृपा और परम सिद्धि नहीं मिली कि यहीं बैठे आपको देखकर बता दें। जो मानस की चौपाइयों में चमत्कार करते हैं — चमत्कार के स्थानों को देखिए, आपको चमत्कार मिलेंगे।

53

क्या मानस या विनय पत्रिका में कोई गुरु साधना है?

हाँ — वे इसे अलग से देंगे, जैसे रुद्रगण की साधना दी

· 32:34–32:59 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या मानस की चौपाइयों में या विनय पत्रिका में कोई गुरु साधना है — कोई चौपाई या पद जिससे गुरु साधना की जा सके — तो वे आकाश जी से कहते हैं कि हाँ, मानस में है, और उन्होंने बहुत अच्छा प्रश्न पूछा है। वे इसे अलग से देंगे: जैसे उन्होंने रुद्रगण की साधना दी है, वैसे ही इनकी भी मानस से देंगे।

54

दक्षिण भारत में हनुमान जी का जन्मोत्सव कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाया जाता है

कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, जिसे दक्षिण में हनुमान जन्म माना जाता है

· 33:00–33:10

वे कहते हैं कि कार्तिक मास में, चतुर्दशी से पहले — दक्षिण भारत में कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को — भगवान श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है, और वे यह चीज़ उसी समय देंगे।

वक्ता कहते हैं कि कार्तिक मास में, चतुर्दशी से पहले — दक्षिण भारत में कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को — भगवान श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। उस समय मैं यह चीज़ दूँगा।

55

नई लाई गई अष्टधातु गणपति मूर्ति की स्थापना कैसे करें?

प्रश्न, और पहला प्रत्युत्तर — अष्टधातु मिलती ही नहीं

· 33:11–33:21 · Also a question

जब पूछा गया कि उसी दिन लाई गई नई अष्टधातु गणपति की गणपति नवरात्र में प्राण-प्रतिष्ठा कैसे करें, तो वे पहले मिश्रा जी से कहते हैं कि यदि वे यज्ञोपवीत धारण करते हैं — और फिर कहते हैं कि अष्टधातु के गणपति कहीं नहीं मिलेंगे। सुनने वाले सब लोग यह धारणा अपने मन से निकाल दें कि अष्टधातु से बना कोई श्री विग्रह बाज़ार में मिलता है।

56

अष्टधातु की मूर्तियाँ असली रूप में क्यों नहीं बिकतीं?

कभी आसानी से नहीं मिलतीं, और मिलें तो दाम आसमान पर

· 33:22–33:42 · Also a question

कोई कितना भी छाती ठोककर कहे कि यह अष्टधातु की प्रतिमा है, अष्टधातु की प्रतिमा कभी आसानी से नहीं मिलती; और मिलती है तो उसका दाम आसमान की ऊँचाइयों पर होता है। वे अष्टधातु से नहीं बनतीं। अधिक से अधिक वे त्रिधातु की ही होती हैं।

वक्ता कहते हैं कि कोई कितना भी छाती ठोककर कहे कि यह अष्टधातु की प्रतिमा है, अष्टधातु की प्रतिमा कभी आसानी से नहीं मिलती। और यदि मिलती है, तो उसका दाम आसमान की ऊँचाइयों पर होता है। वे अष्टधातु से नहीं बनतीं। अधिक से अधिक वे केवल त्रिधातु की होती हैं।

57

अष्टधातु मूर्ति की जगह क्या ख़रीदना चाहिए?

एक धातु की, या जो उपलब्ध हो वह पीतल की

· 33:43–33:56 · Also a question

या तो मिले तो एक ही धातु की लीजिए, या जो उपलब्ध हो वह पीतल में लीजिए। अष्टधातु कहकर वह अष्टधातु नहीं होती — या तो वे आपसे पैसे ले लेंगे, या आपको अंधेरे में रखेंगे; वह किसी अशुद्ध धातु को मिलाकर बनाई गई होगी।

वक्ता कहते हैं कि या तो आपको एक ही, एक धातु की लेनी चाहिए, यदि मिल जाए; या जो उपलब्ध हो, वह पीतल में लीजिए। अष्टधातु कहकर — वह अष्टधातु नहीं होती। या तो वे आपसे पैसे ले लेंगे, या फिर आपको अंधेरे में रखेंगे: वह किसी अशुद्ध धातु को मिलाकर बनाई गई होगी।

58

अष्टधातु ढलाई पहले ढालने वाले के साथ क्या करती थी?

धुआँ, कोढ़, और परिवार के लिए राजा की ज़िम्मेदारी

· 33:57–34:38 · Also a question

वे कहते हैं कि आज तकनीक कितनी भी आगे बढ़ गई हो, एक समय ऐसा था — और वे कहते हैं कि यह वे नहीं कह रहे, स्वयं सुनारों ने बताया है — कि जब भी अष्टधातु से कोई विग्रह बनाया जाता था, तो उससे निकलने वाला धुआँ, या शरीर पर उसका प्रभाव, जिसे लगता उसे कोढ़ से जुड़ी समस्या दे देता, और वह कोढ़ का रोगी हो जाता। इसलिए पहले के समय में जो राजा अष्टधातु की मूर्तियाँ बनवाते थे, वे मूर्ति बनाने वाले के पूरे परिवार के पालन का ख़र्च और ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लेते थे, यह कहकर कि यदि तुम्हें कोई कष्ट या कोई कठिनाई हो, तो मैं तुम्हारे परिवार की ज़िम्मेदारी उठाऊँगा।

59

गणपति की प्राण-प्रतिष्ठा कब करनी चाहिए?

पहले दिन, चतुर्थी तिथि को ही — पाँच प्रकार के अधिवास के साथ

· 34:39–34:55 · Also a question

गणपति की प्राण-प्रतिष्ठा पहले दिन, चतुर्थी तिथि को ही कीजिए या करवाइए — और यदि आपको करना आता है, तो आप कर सकते हैं। दूसरे, यदि आप इसे स्वयं करना चाहते हैं और कोई विशेष विधि-विधान नहीं जानते, तो पाँच प्रकार के अधिवास कीजिए। फिर वे सामान्य क्रम में बताते हैं कि इसे कैसे करना है।

वक्ता कहते हैं कि गणपति की प्राण प्रतिष्ठा — पहले दिन, चतुर्थी तिथि को ही कीजिए या करवाइए। यदि आपको करना आता है, तो आप कर सकते हैं। दूसरे, यदि आप इसे स्वयं करना चाहते हैं और कोई विशेष विधि-विधान नहीं जानते, तो पाँच प्रकार के अधिवास कीजिए। इसे किस तरह करना है, उसे सामान्य क्रम में सुनिए।

60

गणपति की प्राण-प्रतिष्ठा का पहला चरण क्या है?

कंठस्थ हो तो अथर्वशीर्षम, और पंचगव्य स्नान

· 34:56–35:09 · Also a question

यदि अथर्वशीर्षम कंठस्थ है तो यह सर्वोत्तम है; अन्यथा आप अथर्वशीर्षम से सामान्य प्राण-प्रतिष्ठा कर सकते हैं। सबसे पहले गणपति जी के श्री विग्रह को पंचगव्य से स्नान कराइए।

वक्ता कहते हैं कि अथर्वशीर्षअथर्ववेद से लिया गया एक वैदिक उपनिषदिक स्तोत्र (यहाँ गणपति हेतु) — स्वयं सिद्ध, किंतु इसके वैदिक मंत्रों के लिए सही उच्चारण आवश्यक है। — यदि आपको कंठस्थ है, तो यह सर्वोत्तम है; अन्यथा अथर्वशीर्षम से आप सामान्य प्राण-प्रतिष्ठा कर सकते हैं। सबसे पहले गणपति जी के श्री विग्रह को पंचगव्यगाय से प्राप्त पाँच पदार्थों से बना शुद्धिकारक मिश्रण, पंचामृत व तुलसी पत्तों के साथ घर, विशेषकर चौखट, की शुद्धि हेतु प्रयुक्त होता है। से स्नान कराइए।

61

पंचगव्य स्नान के बाद क्या होता है?

अथर्वशीर्षम पढ़ते हुए कच्चे गाय के दूध की अखंड धारा

· 35:10–35:26 · Also a question

पंचगव्य स्नान के बाद, श्री गणपति अथर्वशीर्षम पढ़ते हुए, गाय के कच्चे दूध से अभिषेक कीजिए, उसे अखंड धारा बनाकर उन पर गिराइए। यदि दक्षिणावर्ती शंख से गिरे तो सर्वोत्तम है, या किसी चाँदी के पात्र से गिरे तो सर्वोत्तम है। उससे उनका अभिषेक कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि पंचगव्य से स्नान कराने के बाद, श्री गणपति अथर्वशीर्षम पढ़ते हुए, गाय के कच्चे दूध से अभिषेक कीजिए — कच्चा दूध, अखंड धारा बनाकर ताकि वह उन पर गिरे। यदि दक्षिणावर्ती शंख से गिरे तो सर्वोत्तम है; या किसी चाँदी के पात्र से गिरे, तो सर्वोत्तम है। उससे उनका अभिषेक कीजिए।

62

अधिवास क्या है और कैसे किया जाता है?

पाँच स्थान, हर एक में पंद्रह मिनट, साथ में स्तोत्र और सहस्रनाम पाठ

· 35:27–35:54 · Also a question

इतना करने के बाद, और सामान्य जल आदि से अभिषेक के बाद, उनका अधिवास करवाइए। पाँच प्रकार के अधिवास का अर्थ है उन्हें पाँच स्थानों में रखना, हर जगह पंद्रह मिनट छोड़ना — जैसे अनाज में, फल में, फूलों में, मिठाई में, कपड़े में, जल में: इन सबमें से किन्हीं पाँच प्रकार की चीज़ों में, पाँच स्थानों पर, पंद्रह-पंद्रह मिनट रखिए। और जब तक वे अधिवास करें, यानी वहाँ स्थिर रहें, उस समय गणपति जी का भजन, उनका स्तोत्र, सहस्रनाम आदि पढ़िए।

63

बाद में अधिवास की सामग्री का क्या किया जाता है?

अधिवास से जो निकले, वह प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है

· 35:55–36:02 · Also a question

इस तरह करने के बाद अब जो फूल या फल मिले, या मिठाई — अधिवास करके जो भी निकले — वही प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है।

वक्ता कहते हैं कि इस तरह करने के बाद अब जो फूल या फल मिलेगा, या मिठाई, अधिवास करके जो भी निकले — वही प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है।

64

नेत्र उन्मीलन क्या है?

सोने की सलाका, कुंडिका या दूब घास से आँखें खोलना

· 36:03–36:28 · Also a question

अधिवास करवाने के बाद, यदि गणपति की आँखों पर पट्टी बाँधी गई है, तो नेत्र उन्मीलन किया जाता है। यह सोने की सलाका से होता है; नहीं तो किसी कुंडिका से, या फिर आपकी दूब घास से होगा। नेत्र उन्मीलन करना है, यानी आँखें खोलने की विधि। यदि आप इसके विशेष वैदिक मंत्र आदि न कर सकें, तो बोलकर कीजिए, या नेत्र उन्मीलन से या गणपति गायत्री से उनकी दोनों आँखों को स्पर्श कीजिए।

65

प्राण-प्रतिष्ठा किससे पूरी होती है?

षोडशोपचार या पंचोपचार पूजन, फिर कम से कम पंद्रह अथर्वशीर्षम

· 36:29–36:45 · Also a question

उसके बाद षोडशोपचार पूजन — सोलह प्रकार का पूजन — या पंचोपचार पूजन आदि करके, गणपति को उनके स्थान पर रखिए और फिर कम से कम पंद्रह बार अथर्वशीर्षम पढ़िए। गणपति की प्राण-प्रतिष्ठा हो गई। उसके बाद अपना हवन आदि, और अपना पाठ-पूजा शुरू कीजिए। सभी देवताओं के लिए इसी तरह होगा।

66

एक ही गोबर का कंडा पाँचों आहुतियों के लिए — गणेश, शिव बाबा, काली माता, बटुक भैरव और सीताराम

पाँच आहुतियाँ — गणेश, शिव बाबा, काली माता, बटुक भैरव, सीताराम

· 36:46–37:41

एक ही गोबर के कंडे के बारे में एक प्रश्न बार-बार पढ़ा जाता है, जबकि वक्ता बार-बार आ रही तकनीकी ख़राबी की शिकायत करते हैं। श्रोता पाँच नाम बताती हैं: एक गणेश जी की, एक शिव बाबा की, एक माँ काली माता की, एक बटुक भैरव की, एक सीताराम जी की। वे आशा पटिदार जी से कहते हैं कि वे बिल्कुल यह कर सकती हैं — आहुति में कोई दिक्कत नहीं है।

एक ही गोबर के कंडे के बारे में एक प्रश्न पढ़ा जाता है। श्रोता पाँच नाम बताती हैं: एक गणेश जी की, एक शिव बाबा की, एक माँ काली माता की, एक बटुक भैरव की, एक सीताराम जी की। वक्ता उत्तर देते हैं, आशा पटिदार जी, आप बिल्कुल यह कर सकती हैं; आहुति में कोई दिक्कत नहीं है।

67

दिल्ली जैसी जगह पर क्षेत्रपाल स्थान कैसे चुना जाए?

कॉलोनी की सीमा, जैसे थाने की अपनी सीमा होती है

· 37:42–38:17 · Also a question

यदि दिल्ली भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र है, तो आपको यह देखना होगा: कि आपकी कॉलोनी जहाँ शुरू या ख़त्म होती है, वहाँ किसी न किसी जगह जाकर एक सीमा क्षेत्र होगा — जैसे थाने की अपनी सीमा होती है, कि यहाँ से दूसरा थाना है और उसके आगे दूसरा। यहाँ मायापुरी है, यहाँ चाँदनी चौक है। उसी तरह देखिए कि सीमा कहाँ दिखती है, जिसे आप नक्शे पर देख सकते हैं, कि इसके आगे दूसरी सीमा है। उस सीमा के आसपास आपका जो भी मंदिर हो, उसे क्षेत्रपाल का स्थान मानिए। यह सबके लिए है।

68

क्या रोज़ संध्या आवश्यक है, और क्या काली सहस्रनाम का कोई त्रिक प्रभाव होता है?

पूर्ण वैदिक-तंत्रोक्त के लिए नहीं; और सहस्रनाम से कोई त्रिक प्रभाव नहीं

· 38:18–38:44 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या संध्या रोज़ करनी होगी और क्या संध्या के बिना दूसरी साधना सिद्ध होगी, तो वे उत्तर देते हैं कि पूर्ण वैदिक-तंत्रोक्त ढंग से इसकी आवश्यकता नहीं। जब पूछा गया कि क्या श्री काली सहस्रनाम पढ़ने से कोई त्रिक प्रभाव होता है, तो वे उत्तर देते हैं नहीं, नहीं, नहीं — सहस्रनाम के पाठ से कोई त्रिक प्रभाव नहीं होता; ऐसी कोई बात नहीं है।

69

वशिष्ठ गोत्र की कुलदेवी कौन हैं?

अपने तीन रूपों में भगवती तारा

· 38:45–39:04 · Also a question

जब पूछा गया कि वशिष्ठ गोत्र की कुल देवी और कुल देव कौन हैं, तो वे उत्तर देते हैं कि उनकी जानकारी के अनुसार वशिष्ठ गोत्र की कुलदेवी मुख्य रूप से तीन रूपों में भगवती तारा हैं, और वे उन तीन रूपों में से किसी एक रूप में, या अपनी किसी योगिनी के द्वारा पूजी जाने लगी हैं।

एक श्रोता पूछते हैं कि वशिष्ठ गोत्र की कुल देवी और कुल देव कौन हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि देखिए, मेरी जानकारी के अनुसार वशिष्ठ गोत्र की कुलदेवी मुख्य रूप से तीन रूपों में भगवती तारा हैं। और वे उन तीन रूपों में से किसी एक रूप में, या अपनी किसी योगिनी के द्वारा पूजी जाने लगी हैं।

70

क्या सवारी खोलने का कोई अलग मंत्र है?

नहीं — जानकार व्यक्ति अपने सिद्ध इष्ट मंत्र का प्रयोग करता है

· 39:05–39:23 · Also a question

देव दीक्षा के मंत्र और शिव जी के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं कि वह पहले दिया जा चुका है और चैनल पर है। सवारी खोलने का मंत्र पूछे जाने पर वे रावल नितिन जी से कहते हैं कि ऐसा कोई अलग मंत्र नहीं होता: जो भी जानकार व्यक्ति होता है, वह अपने आराध्य के उस मंत्र के प्रयोग से सवारी खोलता है जिसे उसने सिद्ध किया है।

71

क्या डीह बाबा भैरव हैं?

डीह बाबा कोई भी हो सकते हैं — हनुमान, स्थानीय वीर, पहलवान बाबा

· 39:24–39:53 · Also a question

जब गाँव में होने वाली डीह बाबा की पूजा के बारे में पूछा गया, और क्या शीतला माता के साथ होने से वे भैरव हैं, तो वे उत्तर देते हैं कि डीह बाबा कोई भी हो सकते हैं। ज़रूरी नहीं कि डीह बाबा भैरव ही हों; डीह बाबा हनुमान जी भी हो सकते हैं, उस स्थान के स्थानीय वीर भी हो सकते हैं, कोई पहलवान बाबा भी हो सकते हैं। आवश्यक यह है कि डीह में स्थान किसको देकर बैठाया गया है। वे शीतला माता के साथ चलने वाले भैरव हैं या नहीं, यह भी ज़रूरी नहीं — वे उनके साथ चलने वाले भी हो सकते हैं, और स्वतंत्र भी हो सकते हैं।

72

हवन कुंड लोहे का हो या ताँबे का?

लोहे का कभी नहीं — सदा ताँबे का

· 39:54–40:26 · Also a question

हवन के लिए कभी लोहे का कुंड प्रयोग मत कीजिए। केवल ताँबे का कुंड प्रयोग करना चाहिए। यदि आप कभी लोहे के कुंड में हवन करें, तो उससे उठने वाले धुएँ से, हवन सामग्री आदि से आग के जलने से, वैसा ही होगा जैसा अष्टधातु मूर्ति वाले प्रश्न में: यह आपके शरीर में उलटा प्रभाव देगा और आपको परेशानी होगी।

73

वक्रतुंड गणपति की साधना कैसे की जाती है?

बारह गणपति अलग से दिए जाएँगे

· 40:27–40:51 · Also a question

जब पूछा गया कि वक्रतुंड गणपति की साधना कैसे करें, तो वे उत्तर देते हैं कि वे बारह गणपति अलग से बताएँगे। फिर विपिन जी ने, जो अपनी रोज़ की पूजा में स्वर्णाकर्षण भैरव बाबा का नाम लेते हैं, पूछा कि क्या तब वे भगवान नारायण की पूजा नहीं कर सकते, तो वे उत्तर देते हैं नहीं, नहीं, ऐसी कोई बात नहीं — यदि आप नाम लेते हैं, तो भगवान नारायण की पूजा क्यों नहीं कर सकते? स्वर्णाकर्षण भैरव की पूजा में ऐसा कुछ नहीं है; आराम से नाम लीजिए।

74

जहाँ शीतला माता कुलदेवी हों, वहाँ किस भैरव की पूजा होती है?

छत्तीसगढ़ में काल भैरव, बिहार में बटुक भैरव, उत्तर प्रदेश में दोनों

· 40:52–41:10 · Also a question

वे कहते हैं कि शीतला माता के साथ दोनों भैरव पूजे जाते हैं। छत्तीसगढ़ क्षेत्र में जाइए तो वहाँ काल भैरव हैं; बिहार क्षेत्र में जाइए तो बटुक भैरव। उत्तर प्रदेश क्षेत्र में जाइए तो दोनों अलग-अलग जगहों पर हैं, अलग-अलग भैरव। इसलिए आपको देखना होगा कि आपके अपने स्थान पर उनमें से कौन पूजे जाते हैं, और उसी के अनुसार कीजिए।

75

क्या एक दिन की गणपति साधना की जा सकती है, और भानवती सिकोटर का क्या?

एक दिन के लिए हाँ; और क्षेत्र देवी की साधना वे बिना देखे नहीं देंगे

· 41:11–41:32 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या गणपति जी की एक दिन की साधना की जा सकती है, तो वे उत्तर देते हैं बिल्कुल। जब गुजरात के एक श्रोता ने माँ भानवती सिकोटर की मंत्र साधना माँगी, तो वे कहते हैं कि वे उस क्षेत्र की देवी हैं — और सिकोटर क्या है यह पूछने वाले अच्छी तरह जानते हैं; इसलिए स्थिति क्या है, यह देखे-सुने बिना वे उनकी साधना नहीं देंगे।

76

क्या भैरव साधना नक्षत्र के अनुसार की जाती है?

नक्षत्र, राशि, लग्न, पंचम और नवम से — पर कुल भैरव सबसे प्रबल

· 41:33–42:14 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि भैरव जी इतने रूपों में विराजमान हैं कि आप उनकी साधना जिस तरह चाहें कर सकते हैं — नक्षत्र के अनुसार, राशि के अनुसार, लग्न के अनुसार, पंचम और नवम के अनुसार। कौन-सा फल देगा, यह न आप कभी तय कर पाएँगे न वे। पर यह निश्चित रूप से माना जाता है कि आपके अपने कुल की देवी के भैरव सबसे अधिक फल देने में सक्षम हैं, या जिस क्षेत्र में आप रहते हैं उसके शक्तिपीठ के भैरव।

77

क्या घर की अपनी गणेश मूर्ति का पूजन किया जा सकता है?

हाँ — 1008 नामावली से या श्री गणेशाय नमः से एक हज़ार आठ दूब

· 42:15–42:45 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या घर में जो गणेश जी की मूर्ति है उसी का पूजन किया जा सकता है, तो वे उत्तर देते हैं बिल्कुल, बिल्कुल। संभव हो तो गणपति जी को उनकी एक हज़ार आठ नामावली से 1008 दूब चढ़ाइए; और यदि वह भी न हो सके, तो संकल्प लेकर इसी मंत्र से, श्री गणेशाय नमः। वर्ष की एक पूजा भी, एक दिन की भी कीजिए, और गणपति उतने से ही बहुत प्रसन्न होंगे; आपको बहुत कुछ प्राप्त होगा।

78

क्या दोनों गणपति साधनाएँ एक साथ की जा सकती हैं?

सुबह अष्टविनायक, बाकी समय में संकटनाशन

· 42:46–43:02 · Also a question

वे कहते हैं कि बिल्कुल की जा सकती हैं — वे तो कह ही रहे हैं: यदि आपको दस दिन की साधना करनी है तो अष्टविनायक साधना आप सुबह आराम से कर लेंगे, क्योंकि वह छोटी साधना है। केवल पहले दिन व्यवस्था करने में आपको थोड़ा समय लगेगा; अगले दिन से आराम से हो जाएगी। बाकी समय में संकटनाशन की साधना कीजिए।

79

भूत डामर तंत्र किस प्रकार की विद्या है?

एक अलग प्रकार का तंत्र, जिसे रावण द्वारा रचित कहा जाता है

· 43:03–43:26 · Also a question

यह बिल्कुल अलग प्रकार का तंत्र है — भूत डामर। जैसे रुद्रयामल है, जैसे उड्डीश है, वैसे ही भूत डामर है। मुख्य रूप से इसे रावण द्वारा रचित कहा जाता है।

जब पूछा गया कि भूत डामर तंत्र कौन-सी विद्या है, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि यह बिल्कुल अलग प्रकार का तंत्र है — भूत डामर। जिस तरह रुद्रयामल तंत्र है, जिस तरह उड्डीश है, उसी तरह भूत डामर है। जिसके बारे में मुख्य रूप से कहा गया है कि यह रावण द्वारा रचित है।

80

जब पुरखों की ज़मीन छीन ली गई हो तो क्या करना चाहिए?

जिस साधना में श्रद्धा हो, उसे लंबे समय तक उठाइए

· 43:27–43:58 · Also a question

जब पूछा गया कि किसी शक्तिशाली व्यक्ति ने पुरखों की ज़मीन छीन ली है तो कोई उपाय या साधना बताइए, तो वे उत्तर देते हैं: आप कौन-सी साधना करना चाहते हैं? अपनी श्रद्धा के अनुसार उस साधना को लंबे समय तक उठाइए। चैनल देखिए, वहाँ साधनाएँ दी गई हैं; तिवारी जी, उनमें से किसमें आपकी श्रद्धा है। यदि आप अभी गणपति को उठाना चाहते हैं और यज्ञोपवीत धारण करते हैं, तो कोई एक उठाइए — अथर्वशीर्षम साधना, संकटनाशन साधना, अष्टविनायक साधना — और उसे एक वर्ष तक जारी रखिए।

81

सुपारी आठ हों या बारह?

द्वादश विनायक और संकटनाशन के लिए बारह

· 43:59–44:08 · Also a question

जब पूछा गया कि संकटनाशन स्तोत्र में बारह गणपति हैं, तो सुपारी आठ होंगी या बारह, तो वे उत्तर देते हैं कि यदि आप द्वादश विनायक की साधना करना चाहते हैं तो बारह होंगी; और यदि संकटनाशन में जाते हैं, तब भी बारह होंगी।

एक श्रोता पूछते हैं: संकटनाशन स्तोत्र में बारह गणपति हैं, तो सुपारी आठ होंगी या बारह? वक्ता उत्तर देते हैं कि यदि आप द्वादश विनायक की साधना करना चाहते हैं, तो बारह होंगी। यदि आप संकटनाशन में जाते हैं, तो बारह होंगी।

82

सिद्ध किए गए कवच का उपयोग कैसे होता है?

नियमित पाठ, या लिखकर धारण करना, या उससे अभिमंत्रित रक्षा यंत्र

· 44:09–44:53 · Also a question

जब पूछा गया कि कवच का लाभ केवल उसे धारण करने से मिलता है या उसका किसी और तरह उपयोग होता है, तो वे राकेश शर्मा जी से कहते हैं कि जब आप कवच का नियमित पाठ करते हैं, तो यह फलश्रुति में लिखा है। उसे सिद्ध करने की विधि एक बार होती है; उसके बाद जब आप रोज़ पाठ करते हैं, तो उसका लाभ अपने आप मिलता रहेगा। दूसरे, यदि आप पूरा कवच लिखकर धारण करें, तो वह भी लाभ देता है; या जिस शक्ति का कवच आपने सिद्ध किया है, उस देवता का रक्षा यंत्र बनाया जाता है, कवच से अभिमंत्रित किया जाता है, और हवन आदि के बाद धारण किया जाता है।

83

माँ गायत्री को श्राप कैसे लग सकता है?

गायत्री शाप विमोचन, और पहले आवश्यक यज्ञोपवीत

· 44:54–45:44 · Also a question

श्राप के बारे में और उसके कारण फल न मिलने के बारे में चिंतित शिवम सिंह जी को उत्तर देते हुए वे कहते हैं कि चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं: शाप विमोचन दिया जा चुका है — गायत्री शाप विमोचन कीजिए और फिर कीजिए। और यदि आप दीक्षित हैं, यानी आपका यज्ञोपवीत हुआ है, तो जिन आचार्य को आपने चुना, जिन्होंने आपको यज्ञोपवीत दिया और पहनाया, उन्होंने आपको गायत्री का उपदेश दिया होगा, और बताया होगा कि गायत्री कैसे की जाती है — तो आप चिंतित क्यों हो रहे हैं? यदि आप यज्ञोपवीत धारण नहीं करते, तो पहले धारण कीजिए, अपना पूरा जनेऊ-यज्ञोपवीत संस्कार विधि से कीजिए, फिर दीक्षा लीजिए और पूरी गायत्री कीजिए; अन्यथा आपका यह पूरा प्रश्न व्यर्थ है।

84

क्या सप्तशती की सात सौ अंग शक्तियों से हवन किया जा सकता है?

अंग शक्तियाँ अनंत हैं — हवन तंत्रोक्त देवी सूक्तम से

· 45:45–46:01 · Also a question

जब पूछा गया कि दुर्गा सप्तशती में सात सौ अंग शक्तियाँ हैं, तो क्या सात सौ नामों से उनका हवन किया जा सकता है, तो वे उत्तर देते हैं कि यदि आप इसे सामान्य रूप से जानना चाहते हैं, तो सप्तशती में अंग शक्तियाँ अनंत हैं। हवन आप तंत्रोक्त देवी सूक्तम से कर सकते हैं।

एक श्रोता बताते हैं कि दुर्गा सप्तशती में सात सौ अंग शक्तियाँ हैं, और पूछते हैं कि क्या सात सौ नामों से उनका हवन किया जा सकता है। वक्ता उत्तर देते हैं कि और यदि आप इसे सामान्य रूप से जानना चाहते हैं, तो सप्तशती में अंग शक्तियाँ अनंत हैं। हवन आप तांत्रोक्त देवीसूक्तम् से कर सकते हैं।

85

चार-पाँच पीढ़ियों से पूजे जा रहे ब्रह्म का क्या?

एक बार पूजित हो जाए तो उसे सीधे हटाया नहीं जा सकता

· 46:02–46:59 · Also a question

जब उन्हें एक ब्रह्म के बारे में बताया गया जो अभिचार में आया था और पहली पीढ़ी में पूजित हुआ और चार-पाँच पीढ़ियों से चल रहा है, और याद दिलाया गया कि उन्होंने एक वीडियो में कहा था कि यदि कोई तंत्र बारह वर्ष से अधिक हो जाए तो मुक्ति अगले जन्म में ही मिलती है, तो वे कहते हैं कि बात सही है। यदि वह चार-पाँच पीढ़ियों से पूजा जा रहा है, तो अब उसमें कौन-सा तंत्र चला — वह पूजित हो गया है। वह पूजित तभी होता है जब किसी ने उसे स्थान दिया हो, या अनजाने में आप लोगों ने उसे स्थान दिलवा दिया हो; धोखे से भी स्थान दिलवाया जा सकता है। अब उसे मनाए बिना इस तरह हटाना संभव नहीं होगा; और चार-पाँच पीढ़ियाँ बीत जाने पर, छह-सात पीढ़ियों तक जाते-जाते, या तो वह कहेगा कि भाई, मेरी गति करवा दो — या यदि वह उस तामसिक प्रकृति का है या ख़ूनी है, तो वह नहीं जाएगा।

86

किस उद्देश्य के लिए कौन-सा तेल जलाया जाता है?

रक्षा के लिए सरसों, लक्ष्मी के लिए घी, आकर्षण के लिए तिल

· 47:00–47:24 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या हनुमान जी की पूजा में सरसों का तेल प्रयोग हो सकता है, तो वे उत्तर देते हैं कि बिल्कुल होता है। जब भी हम कोई रक्षात्मक प्रयोग करते हैं, तो केवल सरसों का तेल ही जलाना चाहिए। रक्षा के लिए सरसों का तेल; लक्ष्मी जी के लिए शुद्ध घी, और वह न मिले तो तिल का तेल या मीठा तेल; आकर्षण, वशीकरण या किसी भी इच्छा की पूर्ति के लिए तिल का तेल।

87

अर्गला के पहले मंत्र का उपयोग किसके लिए हो सकता है?

इसमें इतनी बातें हैं कि कोई भी उद्देश्य लिया जा सकता है — पितरों के लिए भी

· 47:40–47:57 · Also a question

जब पूछा गया कि अर्गला के पहले मंत्र से कौन-सा प्रयोग करना है, तो वे उत्तर देते हैं कि उस मंत्र में इतनी बातें हैं कि आप जिस भी उद्देश्य के लिए चाहें उसका उपयोग कर सकते हैं। पितरों के लिए भी उससे प्रयोग किया जा सकता है। बस, वह बात आपको संकल्प में बोलनी होगी।

जब पूछा गया कि अर्गला स्तोत्र के पहले मंत्र से कौन-सा प्रयोग करना है, तो वक्ता उत्तर देते हैं: उस मंत्र में इतनी बातें हैं कि आप जिस भी उद्देश्य के लिए चाहें उसका उपयोग कर सकते हैं। पितरों के लिए भी उससे प्रयोग किया जा सकता है। बस, वह बात आपको संकल्प में बोलनी होगी।

88

क्या वैकृतिकम् रहस्यम् की स्तुतियों से हवन किया जा सकता है?

तीनों क्षेत्रों की स्तुतियाँ, और उनसे किया गया हवन

· 47:58–48:18 · Also a question

वहाँ दी गई हवन विधि के बारे में, और उसमें दी गई स्तुतियों से क्या किया जा सकता है, यह पूछे जाने पर वे कहते हैं कि पूछने वाले वैकृतिकम् रहस्यम् की बात कर रहे हैं। बिल्कुल: यदि आप तीनों क्षेत्रों में जो स्तुति है उससे हवन करें, तो वह शक्ति हवन में मानी जाएगी, और उसमें तीनों क्षेत्रों का हवन माना जाएगा — और उससे होता भी है।

89

उस औघड़ प्रेत के बारे में क्या करें जिसे लोग ब्रह्म कहते हैं?

जब तक बात पूरी न खुले तब तक कुछ नहीं, और कुल में पूजित हो जाए तो कुछ नहीं

· 48:19–49:12 · Also a question

सिद्धार्थ जी बताते हैं कि लोग इसे अलग-अलग कहते हैं — प्रत्यंगिरा, या दुर्गा सप्तशती का पाठ, या यह कि इसे मनाकर बैठाया गया है और इसका तंत्र-मंत्र से कोई उपाय नहीं। वक्ता उत्तर देते हैं कि जब तक वह चीज़ पूरी तरह न खुले, तब तक यह कहने में कोई लाभ नहीं कि वह क्या है। और पहली और सबसे बड़ी बात यह है कि यदि वह कुल में पूजित हो गया है — चाहे प्रेत हो, चाहे ब्रह्म हो, चाहे कुछ भी हो — तो एक बार पूजित हो जाने पर उसका कोई दोष वहाँ नहीं रहता। यदि वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा जा रहा है और अब आप उसे हटाना चाहते हैं, तो साफ़ है कि तंत्र का कोई जानकार व्यक्ति होना चाहिए जो पहले उससे पूछे; प्रयास यह होना चाहिए कि वह चीज़ शांति से जाए, और उसे तभी हटाया जाए जब आप हटाना चाहें और वह परेशानी दे रहा हो। उसे हटाने का भी पूरा विधि-विधान और नियम है; बिना जाने इस तरह कुछ भी करना ठीक नहीं होगा।

90

दुर्गा चालीसा सिद्धि में बिल्व पत्र पर बीज कैसे लिखा जाता है?

आगे की ओर, चिकनी ओर नहीं, और सीधा चढ़ाया जाता है

· 49:13–49:37 · Also a question

जब पूछा गया कि दुर्गा चालीसा की सिद्धि में बिल्व पत्र पर बीज चिकने भाग पर लिखना है या पीछे के भाग पर, और उसे सीधा चढ़ाना है या शिवलिंग की तरह उलटा, तो वे आकाश गुप्ता जी से कहते हैं: सीधे भाग पर करना है, चिकने पर नहीं, यानी पीछे की ओर नहीं — सामने के भाग पर कीजिए। और चढ़ाना सीधा है; शिवलिंग की तरह उलटा चढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं।

91

आज्ञा चक्र पर स्पंदन और पूजा के बाद नींद का क्या?

शरीर स्वयं को ठीक कर रहा है — इसे योग निद्रा मानिए

· 49:38–50:04 · Also a question

जब बताया गया कि आज्ञा चक्र पर बहुत स्पंदन होने लगा है और सुबह पूजा के बाद बहुत नींद आती है, तो वे उत्तर देते हैं कि ठीक जिस समय नींद आ रही है, उसी समय आपका शरीर पूरी तरह स्वस्थ हो रहा है। यदि पूजा के समय नींद आती है, तो कुछ दिन इसे योग निद्रा जैसा मानिए: पूजा के समय ही शरीर पूरी तरह शिथिल हो रहा है। इससे पहले, यानी उस समय, आपको नींद नहीं आती रही होगी। फिर कुछ दिनों के लिए रात्रिकालीन साधना बंद कर दीजिए।

92

गणपति मूर्ति की सूँड किस ओर होनी चाहिए?

दाईं ओर सूँड को बहुत उत्तम कहा जाता है

· 50:05–50:23 · Also a question

जब पूजा घर में गणपति जी की स्थापना के लिए पूछा गया कि सूँड किस ओर हो, तो वे उत्तर देते हैं: देखिए, कहा जाता है कि यदि गणपति जी की सूँड दाईं ओर हो तो बहुत उत्तम है।

एक श्रोता पूछते हैं कि पूजा घर में गणपति जी की स्थापना के लिए गणपति जी की सूँड किस ओर होनी चाहिए। वक्ता उत्तर देते हैं कि देखिए, कहा जाता है कि यदि गणपति जी की सूँड दाईं ओर हो, तो बहुत उत्तम है।

93

काली चालीसा सिद्धि के इकतालीस लौंगों का क्या किया जाता है?

विसर्जन नहीं — रखे जाते हैं, और खिलाने या उतारे के लिए उपयोग होते हैं

· 50:24–50:41 · Also a question

जब पूछा गया कि काली चालीसा सिद्धि में प्रयोग हुए इकतालीस लौंग किसी पेड़ के नीचे विसर्जित किए जा सकते हैं, या उनका उपयोग किया जा सकता है, तो वे उत्तर देते हैं: आकाश जी, लौंग का विसर्जन नहीं करना है। लौंग पूरे रख लीजिए। जब भी घर में किसी को परेशानी हो, आप उन्हें एक खिला सकते हैं, या उससे उतारा करके जला सकते हैं। उस समय आपको कोई पाठ करने की आवश्यकता नहीं होगी।

94

राम नाम जप के लिए कौन-सी माला प्रयोग करनी चाहिए?

स्फटिक प्रयोग हो सकती है; तुलसी बेहतर रहेगी

· 50:42–50:51 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या राम नाम जप के लिए स्फटिक माला प्रयोग हो सकती है, तो वे कहते हैं कि हो सकती है। यदि तुलसी माला से करें तो उत्तम रहेगा।

एक श्रोता पूछते हैं, क्या राम नाम जप के लिए स्फटिक माला प्रयोग हो सकती है। वक्ता उत्तर देते हैं कि प्रयोग हो सकती है। यदि आप तुलसी माला प्रयोग करें, तो उत्तम रहेगा।

95

हवन कुंड में नींबू की बलि कैसे दी जाती है?

लंबाई में दो टुकड़े काटकर डालना — निचोड़ना नहीं

· 50:52–51:05 · Also a question

नींबू को खड़ा काटकर, दो टुकड़े करके, हवन कुंड में डाला जाता है। वे समझाते हैं कि गारने का अर्थ है कि उसे निचोड़ना नहीं है। उसे सीधा काटकर डालना है।

एक श्रोता पूछते हैं, देखिए, हवन कुंड में नींबू की बलि कैसे देते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि नींबू को खड़ा काटकर, दो टुकड़े करके, हवन कुंड में डाल देते हैं। गारने का मतलब है कि उसे निचोड़ना नहीं है। उसे सीधा काटकर डालना है।

96

पूर्णाहुति किससे दी जाती है?

गुड़ भरा गड़ी गोला और सूखा नारियल, और बलि का क्रम

· 51:06–51:24 · Also a question

जब पूछा गया कि हवन में पूर्णाहुति बादाम और एक जोड़ी लौंग और एक जोड़ी इलायची से की जाती है, तो नींबू की बलि को निचोड़ना है या नहीं, तो वे उत्तर देते हैं: हवन में पूर्णाहुति गड़ी गोला से, सूखे नारियल आदि से दीजिए। यदि आप गड़ी में अच्छी तरह गुड़ आदि भरकर देते हैं, तो उत्तम है। उसके बाद इन सब चीज़ों से दीजिए। नींबू की बलि पहले दी जाएगी, और पूर्णाहुति उसके बाद।

97

क्या कोई तंत्रोक्त गणेश साधना है जो गृहस्थ साधक जीवन भर कर सके?

सामान्य गृहस्थों के लिए इन दोनों से बड़ी कोई तंत्र साधना नहीं

· 51:25–52:16 · Also a question

जब भविष्य में श्री गणेश की कोई तंत्रोक्त साधना देने को कहा गया जो साधक जीवन भर कर सके, तो वे उत्तर देते हैं कि उन्होंने जो संकटनाशन गणेश स्तोत्र और अष्टविनायक साधनाएँ दी हैं, सामान्य गृहस्थों के लिए इनसे बड़ी कोई तंत्र साधना नहीं। ये दोनों कीजिए। फलश्रुति में जो लिखा है — कि जो चाहिए वह मिलेगा — हमें उतने से ही मतलब है। वे पूछते हैं कि क्या यह ज़रूरी है कि उसमें हरिद्रा गणपति का कोई विशेष प्रयोग हो, उच्छिष्ट गणपति का कोई ख़तरनाक मंत्र हो, उस तरह का कोई बीज हो, तभी वह तंत्रोक्त साधना मानी जाएगी। सरल साधना से भी बहुत कुछ मिल सकता है।

98

ग्रंथ क्रिया कैसे काटी जाती है?

दत्त माला मंत्र के ग्यारह हज़ार जप, फिर भूमि पर क्षेत्रपाल यंत्र

· 52:17–52:59 · Also a question

सबसे पहले, उदाहरण के लिए यदि आप भगवान दत्तात्रेय के माला मंत्र की साधना कर रहे हैं, तो जब उसके कम से कम 11000 जप पूरे हो जाएँ, उसके बाद आपको भूमि पर क्षेत्रपाल का यंत्र बनाना है — रंगोली से बना, गोबर आदि से लिपी भूमि पर — और उस पर हर कोने में, जिस भी खाने में, सभी कोनों में, अलग-अलग देवी-देवताओं का पूजन होगा।

99

ब्रह्म भाग में व्यक्ति के नाम से पुतला बनाकर, उसकी प्राण-प्रतिष्ठा करके, उसे पान के पत्ते पर लिटाया जाता है

प्राण-प्रतिष्ठित पुतला, पत्ते पर लिटाया गया, और तर्पण से नष्ट

· 53:00–53:30

वे सब चीज़ें करने के बाद, ब्रह्म भाग में, यानी बीच के भाग में, जिस पर ग्रंथ बनाया गया उसके नाम से पुतला प्रयोग किया जाता है। यानी एक पुतला बनाया जाता है, विधि-विधान से उसकी प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है, और उसे पान के पत्ते पर लिटाया जाता है — या, प्रयोग के प्रकार के अनुसार, वह पेड़ लेकर उसका पत्ता लिया जाता है और उस पर लिटाया जाता है। उसके बाद, यदि आपने दत्त माला मंत्र किया है, तो उससे उसका तर्पण होगा। लिटाए गए पुतले का तर्पण होगा, और उस तर्पण से ग्रंथ नष्ट होगा। वे कहते हैं कि यह एक सामान्य प्रयोग है; और भी बहुत सारे विधान हैं।

100

चतुर्थी से चतुर्दशी तक की तिथियाँ क्या हैं?

31 को गणेश पूजा; अनंत चतुर्दशी 9 या 10 सितंबर को

· 53:31–53:47 · Also a question

तिथियाँ पूछे जाने पर वे कृष्णा देवरा जी से कहते हैं कि 31 तारीख को गणेश पूजा है और उस दिन चतुर्थी है, और अनंत चतुर्दशी 9 या 10 सितंबर को होनी चाहिए — दोनों में से किसी एक दिन होगी।

जब पूछा गया कि चतुर्थी से चतुर्दशी कब है और कृपया तारीख बताइए, तो वक्ता कृष्णा देवरा जी को उत्तर देते हैं: 31 तारीख को गणेश पूजा है; उस दिन से, उस दिन चतुर्थी है। और 10 सितंबर को, 9 सितंबर को, अनंत चतुर्दशी होनी चाहिए — 9 या 10 सितंबर को, दोनों में से किसी एक दिन होगी।

101

क्या शिव पर चढ़ाया गया यज्ञोपवीत बाद में पहना जा सकता है?

बहुत सारे लोग ऐसा करते हैं

· 53:48–54:11 · Also a question

जब पूछा गया कि शिव बाबा पर यज्ञोपवीत चढ़ाकर क्या फिर वह यज्ञोपवीत पहना जा सकता है, तो वे उत्तर देते हैं कि बहुत सारे लोग ऐसा करते हैं। जब फिर से सवारी खोलने का उपाय पूछा गया, तो वे कहते हैं कि वे ऊपर बता चुके हैं, और यदि आप स्वयं खोलना चाहते हैं, तो पहले बताइए कि सवारी किनकी आ रही है — उसके बाद ही आगे कुछ बताया जा सकता है।

102

वे उच्छिष्ट गणपति देने से मना क्यों करते हैं?

हर कोई इसके योग्य नहीं — सामान्य कीजिए, बहुत कुछ मिलेगा

· 54:12–54:54 · Also a question

वे कहते हैं कि हर कोई उच्छिष्ट गणपति करने के योग्य नहीं है। ठीक है, बालकृष्ण चौबे जी, आप लोग इसे केवल ख़तरनाक रूप मानते हैं — सामान्य वाला कीजिए, उसी से बहुत कुछ मिलेगा। आपको उच्छिष्ट ही क्यों करना है? आपको क्या लगता है, कि उच्छिष्ट का ज़बरदस्त प्रभाव है?

वक्ता कहते हैं कि देखिए, हर कोई उच्छिष्ट गणपति करने के योग्य नहीं है। ठीक है, बालकृष्ण चौबे जी, आप लोग इसे केवल ख़तरनाक रूप ही मानते हैं। सामान्य वाला कीजिए; उसी से बहुत कुछ प्राप्त होगा। आपको उच्छिष्ट ही क्यों करना है? आपको क्या लगता है, कि उच्छिष्ट का बहुत ज़बरदस्त प्रभाव रहता है?

103

जो लोग ऐसे प्रयोग सीधे करते हैं उनके साथ क्या होता है?

बाद में आने वाले निजी संदेश, जिनके स्क्रीनशॉट वे नहीं डालेंगे

· 54:55–55:19 · Also a question

वे कहते हैं कि वे स्क्रीनशॉट डालकर किसी की निजता भंग नहीं करना चाहते, नहीं तो चैनल पर दिखा देते कि जो लोग धूमावती साधना, धूमावती माला मंत्र, और फिर धूमावती के संपुट के साथ बगलामुखी — ये सारे रॉकेट-साइंस वाले प्रयोग एक साथ करते हैं, उनकी क्या दशा और क्या स्थिति होती है। इंस्टाग्राम पर, टेलीग्राम पर, हर जगह निजी संदेश आते हैं कि भाई, हमने कर लिया, अब क्या करें, ऐसी स्थिति हो गई है। वे कहते हैं कि वे इन्हें इसलिए नहीं डालते क्योंकि निजता भंग होगी, और जब वे नाम छिपाकर डालने की बात करते हैं, तो लोग कहते हैं भाई, मत डालिए, अच्छा नहीं लगेगा। वे कहते हैं कि यही बात उन लोगों के साथ है जो उच्छिष्ट गणपति, मातंगी, उच्छिष्ट चांडालिनी सीधे करते हैं — यह सीधे नहीं करना चाहिए। और वे स्पष्ट कहते हैं कि यदि आप इसके योग्य बन जाएँगे, तो आप यूट्यूब पर नहीं खोजेंगे; उच्छिष्ट गणपति की साधना यूट्यूब पर मत खोजिए।

104

शत्रु से तुरंत रक्षा किससे मिलती है?

हनुमान जंजीरा, और हनुमान, भैरव या भगवती के पाँच लाख जप

· 55:20–56:00 · Also a question

जब ऐसा प्रयोग पूछा गया जिससे कोई शत्रु अचानक हमला करे तो तुरंत रक्षा मिले — आजकल शत्रु सामने से नहीं, घात लगाकर वार करते हैं — तो वे उत्तर देते हैं कि यदि आप भौतिक रूप से बात कर रहे हैं, तो हनुमान जी का जंजीरा है। हनुमान जी के ऐसे बहुत सारे मंत्र हैं, और भैरव जी के ऐसे बहुत सारे मंत्र या साधनाएँ हैं। सामान्य रूप से भी, यदि आप हनुमान जी और भैरव जी की साधना, या भगवती की साधना अधिक से अधिक मात्रा में करें — यदि दीक्षा लेकर उनके मंत्रों का पाँच लाख तक विधिवत जप करें, या उनके किसी स्तोत्र, कवच आदि का उस तरह पाठ करें — तो आप जो रक्षा चाह रहे हैं और सोच रहे हैं, वह आपको मिलेगी।

105

यदि किसी पर महाकाली की सवारी आए तो क्या करें?

महाकाली की सवारी नहीं आती — उनकी योगिनियों की आती है

· 56:22–56:49 · Also a question

कविता जी ने पूछा कि जिस पर महाकाली की सवारी आती हो उसे क्या करना चाहिए, तो वे उत्तर देते हैं: माते, महाकाली की सवारी कहाँ से आ पाएगी? महाकाली की सवारी नहीं आती; उनकी योगिनियों की सवारी आती है। और आपको किसी सही समझ वाले जानकार व्यक्ति से मिलना चाहिए।

कविता जी पूछती हैं कि जिस पर महाकाली की सवारी आती हो, उसे क्या करना चाहिए। वक्ता उत्तर देते हैं, अरे माते, महाकाली की सवारी कहाँ से आ पाएगी। महाकाली की सवारी नहीं आती। उनकी योगिनीयों की सवारी आती है। और आपको किसी सही समझ वाले जानकार व्यक्ति से मिलना चाहिए।

106

कैसे परखें कि कौन-सी सवारी आ रही है?

एक महीने में चंडी कवच के एक सौ आठ पाठ

· 56:50–57:33 · Also a question

पहले, यदि कोई जानकार व्यक्ति आपके पास है, तो उसे दिखाइए। दूसरे, यदि आपको योग्य मार्गदर्शन नहीं मिल रहा और यह भी पता नहीं चल रहा कि शरीर पर किसकी सवारी आ रही है, तो भगवती के दुर्गा कवच, सप्तशती में वर्णित चंडी कवच के कम से कम 108 पाठ कीजिए। रोज़ नौ पाठ कीजिए; यदि नौ भी न कर सकें, तो कम से कम तीन सुबह और तीन शाम कीजिए। लगातार एक महीना करके देखिए: यदि वह सवारी सही होगी तो खुलकर आने लगेगी, अपना परिचय ठीक से देगी, और स्वप्नों के द्वारा मार्गदर्शन भी करेगी। यदि वह झूठी है, तो उसका आना ही बंद हो जाएगा — यह भी नहीं लगेगा कि शरीर भारी हो रहा है, कि शरीर पर कोई आ रहा है।

107

किसी देवता का नाम सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएँ तो इसका क्या अर्थ है?

यह भाव के कारण होता है — किसी और चीज़ का संकेत नहीं

· 57:34–57:55 · Also a question

जब पूछा गया कि किसी और के द्वारा किसी देवता या देवी माँ के बारे में कुछ कहे जाने पर, या फ़ोन पर सुनने पर हाथों के रोंगटे खड़े हो जाएँ तो यह किस बात का संकेत है, तो वे कहते हैं कि यह भाव के कारण होता है। कौन-सा संकेत? यह भाव के कारण होता है। आपका भाव जुड़ा रहेगा; रोंगटे खड़े होंगे।

एक श्रोता पूछते हैं कि किसी और के द्वारा किसी देवता या देवी माँ के बारे में कुछ कहे जाने पर, या फ़ोन पर सुनने पर हाथों आदि के रोंगटे खड़े हो जाएँ, तो यह किस बात का संकेत है। वे कहते हैं कि यह भाव के कारण होता है। कौन-सा संकेत? यह भाव के कारण होता है। आपका भाव जुड़ा रहेगा, और रोंगटे खड़े होंगे।

108

घर में गणपति स्थापित करने की प्रथा किसने शुरू की?

लोगों को जोड़ने के लिए बाल गंगाधर तिलक ने — पहले पूजन होता था, स्थापना नहीं

· 57:56–58:26 · Also a question

जब पूछा गया कि घर में गणपति स्थापित करने के लिए मूर्ति की सूँड किस ओर हो और मूर्ति कितनी ऊँची हो, तो वे अंकुर जी से कहते हैं कि वे इस पर पहले बोल चुके हैं और वीडियो भी डाल चुके हैं। हमारे घर में गणपति स्थापित करने की प्रथा, जब भी शुरू हुई, बाल गंगाधर तिलक ने चलाई; इसके पीछे कारण लोगों को जोड़ना था। बाद में लोग घर-घर में स्थापना करने लगे। पहले घर में स्थापना नहीं होती थी; घर में पूजन होता है।

109

भाद्रपद चतुर्थी को गणपति का कौन-सा रूप प्रकट हुआ?

बाल गणेश — यही उनके जन्मोत्सव की प्रचलित कथा है

· 58:27–58:37 · Also a question

वे कहते हैं, एक बात बताइए: भाद्रपद मास में जो गणेश चतुर्थी हम मना रहे हैं — उसमें गणपति जी का एक रूप, बाल गणेश, मुख्य रूप से प्रकट हुआ। इतनी ही प्रचलित कथा है, कि यह गणपति का जन्मोत्सव है।

वक्ता कहते हैं कि आप मुझे एक बात बताइए: भाद्रपद मास में हम लोग जो गणपति, जो गणेश चतुर्थी मना रहे हैं — उसमें गणपति जी का एक रूप, बाल गणपति, मुख्य रूप से प्रकट हुआ। इतनी ही कथा प्रचलित है, है न — कि यह गणपति का जन्मोत्सव है।

110

वर्ष में कितनी चतुर्थियाँ होती हैं?

चौबीस — हर एक पर गणपति का अलग रूप पूजा जाता है

· 58:38–58:50 · Also a question

पर आप सब जानते हैं, वे कहते हैं, कि कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को मिलाकर चौबीस चतुर्थियाँ होती हैं। और हर चतुर्थी पर गणपति के अलग रूप की पूजा की जाती है — पूरे बारह महीने।

वक्ता कहते हैं कि पर आप सब जानते हैं न, कि कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को मिलाकर चौबीस चतुर्थियाँ होती हैं। और हर चतुर्थी पर गणपति के अलग रूप की पूजा की जाती है। पूरे बारह महीने।

111

बाकी चतुर्थियाँ कभी क्यों नहीं मनाई गईं?

अष्टविनायक, बारह रूप और चौबीस — इनमें से किसी का पता नहीं

· 58:51–59:05 · Also a question

और अष्टविनायक हैं; और फिर ये बारह रूप; और ये चौबीस गणपति, जिनका पूरा पूजन अलग-अलग महीनों में अलग-अलग पक्षों के अनुसार होता है। वे कहते हैं कि इनके बारे में कभी मनाया नहीं गया। लोग कहते हैं कि इनके बारे में कुछ पता नहीं। कोई कारण बना कि यह प्रचलन में आ गया।

वक्ता कहते हैं कि और अष्टविनायक हैं। फिर ये बारह रूप हैं। और ये चौबीस गणपति, जिनका पूरा पूजन अलग-अलग महीनों में अलग-अलग पक्षों के अनुसार होता है। इनके बारे में कभी मनाया नहीं गया। लोग कहते हैं कि इनके बारे में कुछ पता नहीं। कोई कारण बना कि यह प्रचलन में आ गया।

112

क्या हर पक्ष के गणपति का अपना महत्व है?

हाँ — केवल भाद्रपद मास का नहीं

· 59:06–59:24 · Also a question

वे कहते हैं कि हर पक्ष के गणपति का अपना विशेष महत्व है — केवल भाद्रपद मास के गणपति का नहीं। तो वह प्रथा और प्रचलन शुरू हुआ, और जैसे-जैसे उसमें लोगों की आस्था बढ़ी, वे घर में पूजे जाने लगे: कि हाँ, आज हम इस तरह पूजन करेंगे, घर में गणपति का श्री विग्रह स्थापित करके पूजन करेंगे।

वक्ता कहते हैं कि हर पक्ष के गणपति का अपना विशेष महत्व है। केवल भाद्रपद मास का नहीं। तो वह प्रथा, वह प्रचलन शुरू हुआ; और जैसे-जैसे उसमें लोगों की आस्था बढ़ी, वे घर में पूजे जाने लगे — कि हाँ, आज हम इस तरह पूजन करेंगे, घर में गणपति का श्री विग्रह स्थापित करके पूजन करेंगे।

113

बंगाल में हर अमावस्या को घर के बाहर पंडाल में छह-सात फ़ुट की काली मूर्ति रखी जाती है

हर अमावस्या पर छह-सात फ़ुट की काली मूर्ति

· 59:25–59:52

वे कहते हैं, बंगाल क्षेत्र में जाइए, वहाँ बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो हर अमावस्या पर घर के बाहर भगवती काली की कम से कम छह-सात फ़ुट की मूर्ति रखते हैं — घर के अंदर नहीं, घर के बाहर, पंडाल आदि लगाकर — और पूजन होता है, और अगले दिन विसर्जन होता है, या दो-तीन दिन बाद उनका विसर्जन होता है। पर वे हर अमावस्या पर करते हैं। वे हर अमावस्या को महत्व देते हैं: काली अमावस्या, उनके लिए हर अमावस्या का महत्व है, कि हाँ, यह रात भी हमारी अमावस्या है, तो वे पूजन अवश्य करेंगे।

114

मूर्ति जैसी मिले सूँड वैसी रखी जा सकती है, पर उसकी ऊँचाई छोटी रखनी चाहिए

सूँड में कोई दिक्कत नहीं; ऊँचाई छोटी रखिए

· 59:53–1:00:06

बाकी, सूँड में कोई दिक्कत नहीं — जैसी भी आपको मिल रही है, आप रख सकते हैं। ऊँचाई छोटी रखनी चाहिए; मूर्ति बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि बाकी, सूँड में कोई दिक्कत नहीं — जिस तरह भी आपको मिल रही है, आप रख सकते हैं। ऊँचाई छोटी ही रखनी चाहिए। मूर्ति बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए।

115

क्या बिना दीक्षा के कामाख्या साधना की जा सकती है?

कवच पढ़ा जा सकता है; मूल मंत्र का जप नहीं

· 1:00:07–1:00:20 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या माँ कामाख्या की साधना बिना दीक्षा के भी की जा सकती है, तो वे उत्तर देते हैं कि कवच आदि पढ़ा जा सकता है, पर उनके मूल मंत्रों आदि का जप नहीं करना चाहिए। वे जोड़ते हैं कि हरिद्रा गणपति दीक्षा लेकर करने चाहिए।

एक श्रोता पूछते हैं, क्या माँ कामाख्या की साधना बिना दीक्षा के भी की जा सकती है। वक्ता उत्तर देते हैं कि कवच आदि पढ़ा जा सकता है; उनके मूल मंत्रों आदि का जप नहीं करना चाहिए। हरिद्रा गणपति दीक्षा लेकर कीजिए।

116

क्या आठ पान के पत्तों और सुपारियों का विसर्जन करना है?

हाँ, अंतिम दिन पूर्णाहुति के बाद

· 1:00:21–1:00:28 · Also a question

जब पूछा गया कि अष्टविनायक पूजा में आठ पान के पत्तों और सुपारियों का विसर्जन करना है या नहीं, तो वे उत्तर देते हैं हाँ — अंतिम दिन, जब पूर्णाहुति आदि हो जाए, उसके बाद आप विसर्जन कर सकते हैं।

एक श्रोता पूछते हैं, क्या अष्टविनायक पूजा में आठ पान के पत्तों और सुपारियों का विसर्जन करना है। वक्ता उत्तर देते हैं, हाँ: अंतिम दिन, जब पूर्णाहुति आदि पूरी हो जाए, उसके बाद आप विसर्जन कर सकते हैं।

117

जब स्वप्न में काली दिखना बंद हो जाएँ तो क्या करना चाहिए?

रात में पहले अर्गला मंत्र का जप, तंत्रोक्त रात्रि सूक्तम के साथ

· 1:00:29–1:00:46 · Also a question

अंजू कुमारी जी ने बताया कि माँ काली स्वप्न में दिखती थीं पर अब नहीं दिख रहीं, तो वे उत्तर देते हैं कि वे फिर दिखने लगेंगी: हर दिन रात के समय अपनी क्षमता के अनुसार अर्गला के पहले मंत्र का जप कीजिए, और साथ में तंत्रोक्त रात्रि सूक्तम पढ़ना शुरू कीजिए।

अंजू कुमारी जी बताती हैं कि माँ काली उनके स्वप्नों में दिखती थीं पर अब नहीं दिख रहीं। वक्ता उत्तर देते हैं कि वे फिर दिखने लगेंगी। हर दिन रात के समय अपनी क्षमता के अनुसार अर्गला स्तोत्र के पहले मंत्र का जप कीजिए। और साथ में तंत्रोक्त रात्रि सूक्तम् पढ़ना शुरू कीजिए।

118

क्या तीनों रहस्यों की जगह कवच, अर्गला और कीलक किए जा सकते हैं?

पूरी तरह गलत — छह अंग हैं, और बाद वाला आगे नहीं लाया जा सकता

· 1:00:47–1:01:06 · Also a question

जब पूछा गया कि दुर्गा सप्तशती के अध्याय पूरे होने पर तीनों रहस्य पढ़े जाते हैं, तो क्या उनकी जगह कवच, अर्गला और कीलक करना सही है, तो वे उत्तर देते हैं कि यह पूरी तरह गलत है। छह अंग हैं — तब आप बाद वाले अंग को आगे कैसे लाएँगे? पूरा विषय ही अलग हो जाएगा। सप्तशती के बहुत सारे क्रम हैं, और तब यह उलटे क्रम में चला जाएगा।

119

यदि सप्तशती उलटे क्रम में पढ़ी जाए तो सही क्रम क्या है?

तीन रहस्य, कवच अर्गला कीलक, तेरह अध्याय, फिर उलटा

· 1:01:07–1:01:39 · Also a question

अब उसके अनुसार करने के लिए, आपको पहले तीनों रहस्य पढ़ने होंगे, फिर कवच, अर्गला, कीलक, फिर पूरे तेरह अध्याय, फिर कीलक, अर्गला, कवच, फिर तीनों रहस्य उलटे क्रम में। वे कहते हैं कि आप इस क्रम में जा सकते हैं — पर वे इसे करने को बिल्कुल नहीं कहेंगे।

वक्ता कहते हैं कि अब उसके अनुसार करने के लिए, आपको पहले तीनों रहस्य पढ़ने होंगे, फिर कवच, अर्गला, कीलक, फिर पूरे तेरह अध्याय, फिर कीलक, अर्गला, कवच, फिर तीनों रहस्य उलटे क्रम में। आप इस क्रम में जा सकते हैं। पर मैं इसे करने को बिल्कुल नहीं कहूँगा।

120

कर्ज़ से मुक्ति और पैसा टिकने के लिए क्या करना चाहिए?

गणपति, जिनका समय सबसे निकट है — ऋद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ उन्हीं से आते हैं

· 1:01:40–1:01:58 · Also a question

वे कहते हैं कि अभी हम गणपति से जुड़े विषयों पर हैं क्योंकि उनका समय सबसे निकट है: ऋद्धि-सिद्धि उन्हीं के कारण आती हैं, शुभ-लाभ उन्हीं के कारण आते हैं, इसलिए विशेष रूप से उनकी साधना और पूजा कीजिए। यदि आप महाराष्ट्र क्षेत्र के हैं, तो वहाँ तो आप विशेष पूजन करते ही हैं। वे पूछने वाले से कहते हैं कि इस बार चैनल पर दी गई संकटनाशन गणेश स्तोत्र की साधना कीजिए।

121

संकटनाशन साधना कितनी बार दोहरानी चाहिए?

हर महीने के किसी एक पक्ष में, एक वर्ष तक

· 1:01:59–1:02:14 · Also a question

और यदि संभव हो, तो हर महीने के किसी एक पक्ष में — चाहे शुक्ल पक्ष हो, चाहे कृष्ण पक्ष, कोई एक पक्ष — यह साधना बार-बार दोहराइए। एक वर्ष करके देखिए: आपकी पूरी समस्या हल हो जाएगी।

वक्ता कहते हैं कि और यदि संभव हो, तो हर महीने के किसी एक पक्ष में — चाहे शुक्ल पक्ष हो, चाहे कृष्ण पक्ष, किसी एक पक्ष में — यह साधना बार-बार दोहराइए। एक वर्ष करके देखिए। आपकी पूरी समस्या हल हो जाएगी।

122

सफ़ेद आक के गणेश से क्या किया जा सकता है?

पिस्तौल और गोली — आप लाइसेंस के योग्य नहीं

· 1:02:15–1:03:01 · Also a question

जब सफ़ेद आक के गणेश जी रखने वाले एक श्रोता ने धन के लिए कोई प्रयोग पूछा, तो वे उत्तर देते हैं कि इस तरह का प्रयोग बताने में कोई लाभ नहीं, क्योंकि जिस तरह प्रश्न रखा गया है उसका एक ही उत्तर हो सकता है: मेरे पास पिस्तौल की गोली है, इसका उपयोग बताइए। तब हम पहले आपसे कहेंगे कि पिस्तौल ख़रीदिए; और पिस्तौल ख़रीदने के लिए आपको लाइसेंस लेना होगा — तो आप पिस्तौल लेने के योग्य भी नहीं। गोली रखने का क्या लाभ?

123

क्या आक के गणपति अपने आप काम करते हैं?

दो और चीज़ें चाहिए, और ग्रंथों को तोड़ा-मरोड़ा गया है

· 1:03:02–1:03:10 · Also a question

वे कहते हैं कि वे बार-बार कहते हैं कि लोक में प्रचलित जितने भी तंत्र ग्रंथ हैं, उनमें कोई भी बात एक सीमा तक ही बताई गई है, या टीकाकारों ने उसे तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया है। केवल आक के गणपति होने से काम नहीं होता। उनके साथ दो और चीज़ें चाहिए, तभी वह प्रयोग काम करता है। वे कहते हैं कि वे दो चीज़ें क्या हैं, यह वे किसी और समय बताएँगे।

124

भगवती मंगला कौन हैं?

राजस्थान में भूचड़ माता, उड़ीसा में मंगला — मुर्गे पर सवार, चतुर्भुजा

· 1:03:11–1:03:40 · Also a question

जब माँ मंगला की एक बहुत पुरानी मूर्ति के बारे में पूछा गया, जिसकी प्राण-प्रतिष्ठा के बारे में सुना गया कि कभी नहीं हुई — बस लाकर रख दी गई और पूजी जा रही है — और क्या अब उनकी प्राण-प्रतिष्ठा हो सकती है, तो वे पहले उनका वर्णन करते हैं: आशीष जी, भगवती मंगला वे हैं जो राजस्थान की ओर भूचड़ माता के रूप में और उड़ीसा में भगवती मंगला के रूप में पूजी जाती हैं। उनकी सवारी मुर्गे पर है; वे चतुर्भुजा हैं; एक हाथ में वेध, एक हाथ से आशीर्वाद, एक हाथ में त्रिशूल और एक हाथ में चक्र।

125

क्या लंबे समय से पूजी जा रही मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा आवश्यक है?

नहीं — इसके बजाय देवी सूक्तम के एक सौ आठ पाठ और अभिषेक

· 1:03:41–1:04:17 · Also a question

यदि उनकी प्रतिष्ठा नहीं हुई है, तो अब करने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि वे लंबे समय से पूजी जा रही हैं — इसलिए अब आपको पूजा करनी है; प्रतिष्ठा करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं। यदि इच्छा बहुत अधिक हो, तो ऊपर बताए विधि-विधान, अधिवास आदि को छोड़कर, वहीं देवी सूक्तम के पाठ के साथ उनका अभिषेक कीजिए। उनके सामने देवी सूक्तम के 108 पाठ कीजिए और समर्पित करते जाइए; एक दिन में होना ज़रूरी नहीं, दस दिन, ग्यारह दिन या नवरात्रों में कीजिए।

126

भैरव तांडव स्तोत्र और नक्षत्र अधिपति का क्या?

भैरव भेषजं कष्टहरम्; और आने वाली नक्षत्र श्रृंखला

· 1:04:18–1:04:35 · Also a question

श्री भैरव तांडव स्तोत्र के बारे में वे कहते हैं कि उसी स्तोत्र में है — भैरव भेषजं कष्टहरम् — और इसीलिए इसे किया जाता है। उत्तरा भाद्रपद में जन्मे एक श्रोता ने, जिनके अधिपति अहिर्बुध्न्य हैं, पूछा कि सेवा कैसे की जा सकती है, तो वे उत्तर देते हैं कि जब नक्षत्र श्रृंखला लाई जाएगी, तब उसमें विस्तार से बताएँगे।

127

काल भैरवाष्टकम के समय हुए अनुभव का क्या?

कमरे में पीछे कोई खड़ा — अच्छी बात, और 64 योगिनी स्तोत्र

· 1:04:36–1:05:06 · Also a question

मनोज श्रवण जी बताते हैं कि पहले काल भैरवाष्टकम की साधना करते हुए एक माला जप करने पर ऐसा लगा जैसे कमरे में कोई उनके पीछे खड़ा है, और यह बहुत तीव्र अनुभव था। वक्ता कहते हैं कि यह अच्छी बात है। जब पूछा गया कि क्या 64 योगिनी नाम स्तोत्र की कोई उपयोगिता है, तो वे उत्तर देते हैं कि इसकी बहुत बड़ी उपयोगिता है।

128

गणपति का सहस्रार्चन किससे करना चाहिए?

हरी दूब, रोगमुक्ति और धन दोनों के लिए

· 1:05:07–1:05:20 · Also a question

जब पूछा गया कि भगवान गणपति का सहस्रार्चन किस पदार्थ से करें जिससे रोग से मुक्ति मिले और रुका हुआ धन मिले, तो वे उत्तर देते हैं: रोगमुक्ति के लिए हरी दूब — और धन प्राप्ति के लिए भी। दूब से सहस्रार्चन सर्वोत्तम है।

एक श्रोता पूछते हैं कि भगवान गणेश का सहस्रार्चन किस पदार्थ से करें, जिससे रोग से मुक्ति मिले और रुका हुआ धन मिले। वक्ता उत्तर देते हैं कि रोगमुक्ति के लिए हरी दूब — और धन प्राप्ति के लिए भी। दूब से सहस्रार्चन सर्वोत्तम है।

129

पीतल के गणपति से बदले जा रहे प्लास्टिक के गणपति का क्या करें?

प्लास्टिक का विसर्जन मत कीजिए — पूजा स्थान से हटाकर सजावट के रूप में रखिए

· 1:05:21–1:05:58 · Also a question

जब दो-तीन वर्ष प्लास्टिक के गणपति की पूजा करके अब पीतल के गणपति ले आए एक श्रोता ने पूछा कि क्या प्लास्टिक के गणपति का विसर्जन करना चाहिए, और यदि हाँ तो कैसे, तो वे उत्तर देते हैं: देखिए, प्लास्टिक से बने गणपति का आप जहाँ भी विसर्जन करेंगे, वह केवल प्रदूषण ही करेगा। इसलिए यदि गणपति प्लास्टिक के बने हैं, तो उन्हें पूजा स्थान से निकालकर कहीं सजावट के रूप में रख दीजिए; धूप-दीप दिखाते रहिए। हालाँकि प्लास्टिक के बने होने से उनका कोई और उपयोग नहीं हो सकता।

130

साधक को किसी एक अनुभव पर अटकना क्यों नहीं चाहिए?

एक दिन का जप, एक अनुभव, और उस पर दस वर्ष लटके रहना

· 1:05:59–1:06:39 · Also a question

आपने एक दिन जप किया और एक अनुभव हुआ — वे पूछते हैं, अनुभव का अर्थ क्या है। वहाँ कुछ भी हो सकता है। आप सब अनुभव में इतना क्यों अटकते हैं? अनुभव से आगे बढ़िए। आपने एक बार जप किया, एक दिन एक बार पाठ किया, कोई पीछे से निकल गया, और आप उस अनुभव पर दस वर्ष लटके रहेंगे, जगह-जगह पूछते फिरेंगे कि अनुभव का अर्थ क्या है। अनुभव से बाहर निकलिए; उस अनुभव को अपने जीवन का हिस्सा बनाइए। दस जगह यह पूछने के बजाय कि अनुभव का अर्थ क्या है, बार-बार साधना कीजिए और उसे प्राप्त करने का प्रयास कीजिए।

131

अनुभव हवा का झोंका या चलता पंखा हो सकता है, या मंत्र से परेशान होकर भगाया गया कोई प्रेत

हवा का झोंका, पंखा, या आपके मंत्र से परेशान प्रेत

· 1:06:40–1:07:09

वे कहते हैं कि अनुभव का अर्थ यह हो सकता है कि पीछे से हवा निकली हो; उनका पंखा चल रहा हो। हो सकता है कोई प्रेत या पिशाच निकला हो; कि आपके मंत्र के कारण वह परेशान होकर चला गया; कि वह अवसर ढूँढ रहा है, यह कहते हुए कि आज तुमने मंत्र जप करके मुझे भगा दिया, किसी दिन मिलो तो बताता हूँ। यह भी हो सकता है। इसके बहुत सारे अर्थ हो सकते हैं। जो अनुभव में अटकते हैं उन्हें साधना में कुछ नहीं मिलता — क्योंकि उन्हें केवल अनुभव चाहिए, और अनुभव की लत लग जाती है; और जब अनुभव नहीं मिलता, तो लगता है कि पूजा सफल ही नहीं हो रही, और उस तनाव में बेचारा मन भटक जाता है।

132

माँ कैला देवी के भैरव कौन हैं?

करौली में उसी स्थान के भैरव — विंध्यवासिनी के कई हैं

· 1:07:10–1:07:39 · Also a question

जब माँ कैला देवी के भैरव के बारे में पूछा गया, जिन्हें लोग माँ विंध्यवासिनी देवी का रूप मानते हैं, तो वे कहते हैं कि उनका मंदिर करौली, राजस्थान में है, और उसी स्थान के भैरव को कैला देवी का भैरव मानिए। यदि वे विंध्यवासिनी माँ का रूप हैं, तो विंध्यवासिनी माँ का एक भैरव नहीं — पूरे विंध्य क्षेत्र में भगवती विंध्यवासिनी के कई भैरव हैं। इसलिए इस स्थान के अनुसार वे आपको नहीं बताएँगे।

133

पैसे की परेशानी के लिए क्या करें — श्री सूक्तम या कनकधारा?

वैदिक मार्ग में सही उच्चारण और यज्ञोपवीत चाहिए; अन्यथा अष्टलक्ष्मी स्तोत्र

· 1:07:40–1:08:29 · Also a question

जब श्री सूक्तम और कनकधारा सूक्तम, उनके उपयोग, श्री यंत्र और कनकधारा यंत्र की स्थापना, और कितने समय तक किस मार्ग पर चलें, यह पूछा गया, तो वे उदय प्रताप जी से कहते हैं कि यदि आप वैदिक मार्ग पर चलना चाहते हैं — क्योंकि ये वैदिक सूक्त हैं — तो आपको श्री सूक्तम का सही उच्चारण आना चाहिए। यदि आप यज्ञोपवीत धारण करते हैं और दीक्षित हैं, तो यह सर्वोत्तम है; तभी इस तरह के प्रयोग सही ढंग से करके आपको लाभ मिलेगा। अन्यथा, यदि ऐसा नहीं है, तो आपको भगवती लक्ष्मी का इंद्रकृत अष्टलक्ष्मी स्तोत्र या महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ना चाहिए, और उससे भी आपको लाभ मिलेगा।

134

यदि कुल देवता नाग देवता हों तो कुलदेवी कौन हैं?

इसे देखना पड़ेगा — नाग के साथ बहुत कुछ जुड़ा होता है

· 1:08:30–1:09:00 · Also a question

जब पूछा गया कि यदि कुल देवता नाग देवता हों तो कुल देवी कौन होंगी, तो वे उत्तर देते हैं कि इसे देखना पड़ेगा — ऐसे ही कैसे कहा जा सकता है कि वे कौन-से नाग हैं; नाग के साथ बहुत सारी चीज़ें जुड़ी होती हैं। जब उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर से पूछा गया कि किस भैरव की पूजा होगी, तो वे कहते हैं कि पूछने वाले अपने आसपास देखें कि क्या पूजा जाता है।

135

गायत्री वेदोक्त हैं, और श्री राम शर्मा जी की बातों पर चलकर करने वाले लोग बुरी तरह बर्बाद हुए हैं

वे बिल्कुल सहमत नहीं — गायत्री वेदोक्त हैं और वे शास्त्र को नकारते हैं

· 1:09:16–1:10:05

जब पूछा गया कि श्री राम शर्मा जी द्वारा गायत्री के बारे में कही गई बातें कितनी शास्त्र सम्मत हैं, तो वे कहते हैं कि वे पहले भी इस पर बोल चुके हैं: उनकी बातों पर चलकर गायत्री करने वाले लोग बुरी तरह बर्बाद हुए हैं और होते रहेंगे; वे उनसे बिल्कुल सहमत नहीं। वे आधुनिकता के अनुसार कितना भी बोलें, वे कहते हैं कि जो शास्त्र विधान के अनुसार नहीं चल सकते, उनके पक्ष में वे कभी नहीं बोलेंगे। क्योंकि यह गायत्री है: यदि यह तंत्र होता, तो तंत्र में ऐसी बहुत सारी चीज़ें हैं जहाँ परंपरा के कारण बातें अलग हो जाती हैं, क्योंकि सक्षम और सिद्ध व्यक्ति होते हैं। पर यहाँ वे जो विषय प्रस्तुत करते हैं वह शास्त्र को पूरी तरह नकारता है, और वह भी वेदोक्त चीज़ों को। गायत्री वेद के रूप में आई हैं, उन्हें वेदों का मूल माना जाता है, वेद माता माना जाता है — और वे उन्हें पूरी तरह अवैदिक रूप में प्रकट करते हैं।

136

कौल संप्रदाय एक साथ दो तरह का काम करने के बजाय अपना पंचमकार खुलकर कहता है

एक साथ दो तरह का काम, बनाम खुलकर कहा गया पंचमकार

· 1:10:06–1:11:34

वे कहते हैं कि वे गायत्री परिवार से जुड़े ऐसे लोग देखते हैं जो मांस खाते हुए भी पूछेंगे कि क्या वे उन्हें छू सकते हैं, और जो कहते हैं कि खाने के बारे में कुछ मना नहीं किया गया। वे पूछते हैं कि लोग ब्राह्मण होकर इस तरह के काम कैसे करते हैं, और कहते हैं कि उन्हें नहीं पता उन लोगों को क्या सिखाया जाता है। वे कहते हैं कि उससे बेहतर तो कम से कम कौल संप्रदाय है, जहाँ वे खुलकर कहते हैं, हाँ भाई, हम मांस खाकर आगे बढ़ेंगे, मेरा पंचमकार ऐसा है — वे छाती ठोककर कहते हैं और आगे बढ़ते हैं, और वहाँ आप उन्हें गलत नहीं कह सकते। यहाँ लोग एक साथ दो तरह का काम कर रहे हैं।

137

बामा खेपा भगवती तारा की मूर्ति पर मूत्र कर देते थे, फिर भी जगदंबा अपने हाथ से उन्हें खिलाती थीं

उन्होंने तारा की मूर्ति पर मूत्र किया, फिर भी जगदंबा ने अपने हाथ से उन्हें खिलाया

· 1:11:35–1:12:16

यदि आप सनातन संस्कृति को आगे ले जाना चाहते हैं, तो सही ढंग से ले जाइए; वे कहते हैं कि जो बेतुकी बातें करते हैं, और वह भी वेदोक्त चीज़ों के बारे में, उनसे वे कभी सहमत नहीं होंगे। अब बामा खेपा को तंत्र क्षेत्र में महागुरु कहा जाता है — वे भगवती तारा की मूर्ति पर मूत्र कर देते थे और भोजन फेंक देते थे, फिर भी जगदंबा, महामाई, इतनी कृपालु थीं कि आकर अपने हाथ से उन्हें खिलाती थीं। वे पूछते हैं, क्या उनके शिष्यों में ऐसी क्षमता है; यदि वे भी कहें कि हम अपने गुरु के अनुसार यह चीज़ इस तरह करेंगे, तो क्या उतनी क्षमता है? वे किसी काम के नहीं रहेंगे।

138

क्या दुर्गा सप्तशती के लिए दीक्षा आवश्यक है?

सामान्य पाठ के लिए नहीं; याग के लिए शाक्त दीक्षा

· 1:12:17–1:12:34 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या दुर्गा सप्तशती की दीक्षा आवश्यक है, तो वे उत्तर देते हैं नहीं — इस तरह यह नहीं कहा जा सकता कि यह बहुत आवश्यक है। आप सामान्य विधि-विधान से इसका पाठ कर सकते हैं। यदि आपको कोई विशेष विधान करना है, याग आदि करना है, तो दीक्षा आवश्यक है; शाक्त दीक्षा आवश्यक है।

139

यदि गलती से यज्ञोपवीत कट जाए तो क्या करना चाहिए?

नया पहनिए, और प्रायश्चित के रूप में गायत्री की एक से पाँच माला

· 1:12:35–1:12:49 · Also a question

वे हरीश से कहते हैं, कुछ नहीं: नया यज्ञोपवीत पहन लीजिए, और प्रायश्चित के रूप में, अपनी क्षमता के अनुसार, गायत्री की एक माला या पाँच माला जप करके समर्पित कीजिए। और वर्तमान समय के अनुसार, आपको ज़रा भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं।

140

क्या मांगलिक व्यक्ति सिद्ध रुद्राक्ष लाल धागे में पहन सकता है?

यह आयु पर, और उस लग्न के लिए मंगल क्या है, इस पर निर्भर है

· 1:12:50–1:13:12 · Also a question

जब सिद्ध रुद्राक्ष और मांगलिक कुंडली वाले एक श्रोता ने पूछा कि क्या इसे लाल धागे में पहना जा सकता है, तो वे उत्तर देते हैं: आप मांगलिक हैं, ठीक है। आपकी आयु क्या है? यदि आयु अट्ठाईस वर्ष से कम है — और आपके लिए मंगल क्या है? लग्न के अनुसार वे आपके लिए ठीक हैं या शत्रु, किस भाव में बैठे हैं, क्या फल देंगे: यह उसी पर निर्भर है।

141

सूअर के चर्मासन का प्रयोग कब होता है?

मारण कर्म, उग्र कर्म और श्मशान क्रियाओं में — गृहस्थों के लिए नहीं

· 1:13:13–1:13:39 · Also a question

जब पूछा गया कि वराह के चर्मासन का प्रयोग कब होता है, तो वे उत्तर देते हैं कि यह विशेष रूप से मारण कर्मों में प्रयोग होता है, उग्र कर्मों में प्रयोग होता है, श्मशान आदि की क्रियाओं में प्रयोग होता है। और गृहस्थ लोग इसका प्रयोग बिल्कुल न ही करें — न करें तो अच्छा है।

एक श्रोता पूछते हैं कि वराह के चर्मासन का प्रयोग कब होता है। वक्ता उत्तर देते हैं कि वराह का चर्मासन विशेष रूप से मारण कर्मों में प्रयोग होता है; उग्र कर्मों में प्रयोग होता है; श्मशान आदि की क्रियाओं में प्रयोग होता है। और गृहस्थ लोग इसका प्रयोग बिल्कुल न ही करें — न करें तो अच्छा है।

142

ध्यान में बॉडी बिल्डर दिखने का क्या अर्थ है?

पहले पूछिए कि वह पौराणिक आकृति है या जिम जाने वाला आदमी

· 1:13:40–1:14:06 · Also a question

पुनीत गर्ग जी ने पूछा कि ध्यान में बॉडी बिल्डर जैसा व्यक्ति दिखने का क्या अर्थ है, तो वे उत्तर देते हैं: बॉडी बिल्डर जैसा व्यक्ति दिखता है, ठीक है। वह किस प्रकार का है — क्या वह आपको पौराणिक रूप में दिखता है, या आप जिम जाने वाला कोई आदमी देख रहे हैं? यह नकारात्मक और सकारात्मक दोनों हो सकता है।

143

क्या संकटनाशन संध्या के समय किया जा सकता है, और बच्चों का क्या?

तीनों काल; बच्चों के लिए अथर्वशीर्षम; रोज़ बजरंग बाण

· 1:15:41–1:16:13 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या संकटनाशन गणेश स्तोत्रम का जप संध्या के समय भी किया जा सकता है, तो वे कहते हैं बिल्कुल — तीनों कालों में किया जा सकता है, और रात में भी। जब पूछा गया कि अथर्वशीर्षम का बच्चों पर क्या प्रभाव होता है, तो वे कहते हैं कि प्रभाव अच्छा है; आप उन्हें सिखा सकते हैं, और यदि वे यज्ञोपवीत होने के बाद करें तो सर्वोत्तम है, हालाँकि आप सामान्य रूप से भी करवा सकते हैं। जब पूछा गया कि क्या बजरंग बाण रोज़ पढ़ा जा सकता है, तो वे कहते हैं हाँ — पर पहले उसे अवश्य सिद्ध कीजिए, उसके बाद रोज़ एक-आध पाठ कर सकते हैं; ऐसी कोई बात नहीं कि नहीं किया जा सकता, और यदि कोई परेशानी हो तो एक से अधिक भी किए जा सकते हैं।

144

तंत्र के पूर्ण ज्ञान के लिए क्या करना चाहिए?

पहले आरंभिक ज्ञान पाइए — और आज लोगों के लिए तंत्र का अर्थ क्या है

· 1:16:14–1:17:36 · Also a question

जब पूछा गया कि तंत्र के पूर्ण ज्ञान के लिए क्या करना चाहिए, तो वे उत्तर देते हैं: तंत्र के पूर्ण ज्ञान के लिए पहले आरंभिक ज्ञान प्राप्त कीजिए। जैसे-जैसे आप योग्य बनेंगे, अपने आप ऐसे लोग आपके जीवन में आएँगे जो आपको उस क्षेत्र में ले जाएँगे। वे कहते हैं कि तंत्र का अर्थ है जादू-टोना, इंद्रजालिक विद्या, कौतूहल विद्या — आज के समय में तंत्र का यही अर्थ उन्हें दिखता है, लोग जो भी चाहते हैं। बागेश्वर धाम बालाजी के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी जैसी सिद्धि: आज तंत्र की सिद्धि का यही अर्थ बन गया है, कि कोई व्यक्ति आए और उससे कुछ पूछे बिना हम उसके बारे में सब बता दें। इसके आगे कोई अर्थ नहीं। उसे बता दो, और उसके बाद उसे कैसे ठीक करना है, वह ठीक होगा या नहीं, उसकी क्या गति होगी — इसमें कोई रुचि ही नहीं; वे बस बता रहे हैं। आज के समय में यही सिद्धि मानी जाती है। तब तो चौंसठ मुख्य तंत्र सब बेकार हैं; केवल यही एक सिद्धि, काल ज्ञान सिद्धि करना — और यह तो काल ज्ञान भी नहीं है। पूर्ण ज्ञान के लिए पूरा जीवन भी कम है। शुरुआत कीजिए।

145

जब बीच में त्योहार आएँ तो एक देवता की लंबी साधना कैसे निभाएँ?

ग्यारह और इक्कीस दिन की साधनाएँ, त्योहार से पहले पूरी

· 1:17:37–1:18:22 · Also a question

वे इसे बहुत अच्छा प्रश्न कहते हैं। वे कहते हैं कि वे बार-बार कहते हैं कि एक देवता की साधना लंबे समय तक कीजिए — आपने अभी गणपति शुरू किए हैं, तो पूरे वर्ष गणपति की साधना कीजिए। पर बीच में नवरात्रि आएगी, शिवरात्रि आएगी, दीवाली आएगी। इसके लिए: बिना टूटे लगातार साधना पुरुषों के लिए संभव है, स्त्रियों के लिए नहीं। इसलिए इक्कीस दिन, ग्यारह दिन, इक्कीस दिन की साधनाएँ इस तरह उठाइए। जैसे ही पता चले कि नवरात्रि शुरू होने वाली है, उससे पहले साधना जितने भी दिन की हो, उसे वहाँ तक ले जाकर उसकी पूर्णाहुति आदि कीजिए; फिर बाकी दिनों में उसका सामान्य पाठ करते रहिए।

146

ग्यारह सौ के संकल्प के बाद, विराम के दौरान रोज़ ग्यारह पाठ क्रम को टूटने नहीं देते

ग्यारह सौ का संकल्प, विराम, और क्रम बनाए रखने वाले रोज़ के ग्यारह पाठ

· 1:18:23–1:19:02

जैसे, आप रोज़ 108 बार संकटनाशन पढ़ते हैं और 1100 पाठ का संकल्प किया है; ग्यारह दिन का संकल्प लेकर आपका पूरा हो गया। फिर यदि आप दो-तीन दिन रुकें, तो उन दो-तीन दिनों में रोज़ ग्यारह पाठ करते रहिए, ताकि क्रम बना रहे। फिर संकल्प लेकर फिर से 1100 कीजिए। इसी तरह देखिए कि शिवरात्रि आ रही है — तो शिवरात्रि से पहले आपके पूरे 1100 पूरे हो जाने चाहिए। उसके बाद शिवरात्रि कीजिए, और उसके एक-दो दिन बाद फिर शुरू कीजिए। हर साधना इस तरह करने से, यदि बीच में कहीं जाना पड़े या कोई काम आ जाए, तो वह भी संभल जाएगा और कोई कठिनाई नहीं होगी। गृहस्थों को इसी तरह करना चाहिए।

147

लंबी साधना कब उठानी चाहिए?

केवल तभी जब पक्का हो कि तीन महीने कहीं नहीं जाना

· 1:19:03–1:19:34 · Also a question

लंबी साधना तब उठाइए जब आपको पूरी तरह पक्का हो कि अगले तीन महीने हम कहीं नहीं जा रहे; कि कोई भी परेशानी नहीं होगी; कि सब्ज़ी और सब कुछ संभल जाएगा और आप घर पर बैठे रहेंगे। वे कहते हैं कि उनका मतलब यह है कि घर के लोग उतना सहयोग करें तभी लंबी साधना उठाइए; अन्यथा ग्यारह दिन और इक्कीस दिन की छोटी साधनाएँ करते रहिए। तब कोई कठिनाई भी नहीं होगी, और आराम से हो जाएगी।

148

ध्यान में सिर पीछे की ओर क्यों झुकता है?

आभामंडल की शक्ति का आप पर हावी होना — और बिना मंत्र ध्यान का ख़तरा

· 1:19:35–1:20:39 · Also a question

सुमन विश्वकर्मा जी ने पूछा कि ध्यान में सिर पीछे की ओर ही क्यों झुकता है, तो वे कहते हैं कि इसका अर्थ है कि सिर भारी होकर पीछे की ओर झुक रहा है, और वह भी ध्यान के समय। ध्यान में सिर पीछे झुकने का पहला कारण यह है कि आपके आभामंडल से जुड़ी जो भी शक्ति है वह आप पर हावी हो रही है; इसीलिए आपका सिर पीछे झुक रहा है। और उसके पीछे झुकने का अर्थ है कि नियंत्रण नहीं बन रहा — आप अनियंत्रित हैं। नियंत्रण कैसे आएगा: वे कहते हैं कि इसीलिए वे सात चक्रों की बात करते हैं — आप किस मंत्र आदि से ध्यान कर रहे हैं, पहले वह देखिए। यदि आप बिना मंत्र के ध्यान कर रहे हैं तो यह बड़ी कठिनाई की बात है; बिना मंत्र के ध्यान करना ख़तरनाक है। किसी एक मंत्र या किसी नाम को पकड़कर ध्यान करना, और बाद में बिना जप किए उसका अपने आप भीतर से उठने लगना, अलग बात है। ध्यान के अपने स्तर हैं, और उन्हें एक-एक करके ले चलना बेहतर होगा।

149

क्या कवच दोहराने पर हर बार न्यास करना होगा?

नहीं — न्यास एक बार, और केवल मुख्य पाठ दोहराया जाता है

· 1:20:40–1:21:27 · Also a question

जब पूछा गया कि दत्त वज्र कवच में दो बार न्यास है, तो यदि इसे एक से अधिक बार पढ़ा जाए तो क्या हर बार न्यास करना होगा, तो वे उत्तर देते हैं नहीं — न्यास केवल एक बार करना है। मुख्य पाठ ही बार-बार दोहराना है; फलश्रुति भी हर बार नहीं की जाती। जब पूछा गया कि क्या पितृ पक्ष में रखी गई दादा-दादी की अस्थियों का विसर्जन किया जा सकता है, तो वे कहते हैं हाँ, पितृ पक्ष में हो सकता है।

150

अपने कुल भैरव का स्वरूप कैसे जानें?

जहाँ कुलदेवी सती मैया हों, वहाँ बटुक भैरव को कुल भैरव मानिए

· 1:21:28–1:21:48 · Also a question

एक श्रोता याद दिलाते हैं कि उन्होंने कहा था कि कुल भैरव की साधना करनी चाहिए, और पूछते हैं कि कुल भैरव का स्वरूप कैसे जानें, और बताते हैं कि कुलदेवी को सती मैया कहा जाता है। वे उत्तर देते हैं: देखिए, यदि सती मैया हैं तो केवल बटुक भैरव की साधना कीजिए; बटुक भैरव को ही कुल भैरव मानकर आगे बढ़िए। भैरव तो अवश्य होंगे, पर जब तक कोई न बताए, कुल भैरव को प्रकट रूप में जानना कठिन है — इसलिए बटुक भैरव को लेकर चलिए।

151

गुरु मंत्र के तीन से पाँच लाख जप के बाद मुँह से ऐसे प्रश्न निकलने बंद हो जाने चाहिए

तीन से पाँच लाख के बाद मुँह से पूछना बंद हो जाना चाहिए

· 1:21:49–1:22:52

एक श्रोता ने बताया कि उन्हें अपने गुरु जी से एक रक्षा मंत्र मिला, उन्होंने इक्कीस, इकतालीस और नब्बे दिन की अलग-अलग साधनाएँ की हैं, एक वीडियो देखकर तीन लाख जप किए, और गुरु मंत्र के इकतीस लाख जप हो चुके हैं — वक्ता पहले कहते हैं कि यह बहुत सुंदर बात है। फिर वे कहते हैं: उसके बाद अब आपको इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक पर ये चीज़ें खोजने की कोई आवश्यकता नहीं। वे कहते हैं कि यह बहुत बड़ी विडंबना है कि आप कहते हैं कि इकतीस लाख जप किए हैं और उसके बाद भी प्रश्न पूछ रहे हैं; यह स्थिति आनी ही नहीं चाहिए। आपके भीतर किसी के सामने अपने प्रश्न रखने की इच्छा उठी ही क्यों? यहाँ तीन लाख, पाँच लाख के बाद मुँह से आवाज़ निकलनी बंद हो जाती है — स्थिति इतनी अच्छी हो जाती है, अपने आराध्य पर इतनी श्रद्धा आ जाती है कि आपको दुख मिले या सुख, आपको उससे कोई मतलब नहीं रहता। बहुत अच्छा है कि आपने इतना अच्छा जप किया है; पर अब आपको अलग से कुछ पूछने की आवश्यकता नहीं। गुरु के अनुसार चलिए।

152

स्वप्न में जो बताया गया, गुरु उसे मना क्यों करते हैं?

या तो आप भ्रमित हो रहे हैं, या अभी योग्य नहीं हैं

· 1:22:53–1:23:26 · Also a question

जब पूछा गया कि स्वप्न में कुछ मार्गदर्शन मिलने पर पूछने पर गुरु उसे मना क्यों करते हैं, तो वे कहते हैं कि इसके दो मुख्य कारण हैं। यदि आपके गुरु बहुत जानकार हैं और उनके पास ज्ञान है, तो यदि उन्हें पता चल रहा है कि आप भ्रमित हो रहे हैं, तो वे मना करेंगे। और दूसरा कारण यह हो सकता है: यदि गुरु योग्य और सही हैं और उनका सब कुछ ठीक है, तो हो सकता है कि जो साधना बताई जा रही है उसके लिए आप अभी योग्य नहीं हुए। इसीलिए आपके गुरु मना कर रहे हैं — या तो वे उससे पहले आपसे कुछ और साधनाएँ करवाना चाहते हैं, या समय नहीं आया, और वे आपको कुछ समय के लिए रोक रहे हैं।

153

क्या चतुर्थी को चंद्रमा देखने से दोष लगता है?

विशेषकर भाद्रपद का चंद्रमा — स्यमंतक मणि की कथा सुनिए

· 1:23:27–1:24:32 · Also a question

जब पूछा गया कि किसी भी चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन हो जाएँ तो क्या दोष लगता है, तो वे उत्तर देते हैं कि भाद्रपद मास के चंद्र दर्शन का दोष विशेष रूप से कहा गया है, और स्यमंतक मणि की कथा सुननी चाहिए। फिर हरियाणा के कुरुक्षेत्र से उदय प्रताप जी ने, जो श्री कुल में दीक्षा चाहते हैं, पूछा कि दीक्षा कहाँ से होगी और आरंभिक नियम क्या होगा, तो वे उत्तर देते हैं कि वे श्री विद्या में दीक्षा, श्री कुल में दीक्षा चाहते हैं — तो आदि गुरु शंकराचार्य के कुल में दीक्षा लीजिए, और सब कुछ वहीं से शुरू कीजिए; कहीं और भटकने की आवश्यकता नहीं।

154

श्री नारायण कवच कैसे करना चाहिए?

परम वैष्णव के लिए, आयुध पूजा के साथ, कार्तिक में आरंभ

· 1:24:33–1:25:52 · Also a question

वे वीरेंद्र प्रजापति जी से कहते हैं कि यदि आप परम वैष्णव हैं — यानी लहसुन-प्याज़ नहीं खाते, गाजर-मूली नहीं खाते — तो आप नारायण कवच का पूरा प्रभाव पाने में सक्षम हैं, क्योंकि आहार का विशेष प्रभाव वे नहीं, वैष्णव आचार्य बताते हैं। परम वैष्णव को नारायण कवच का पूरा प्रभाव मिलता है: यह सबसे पहली बात है। पुरश्चरण का विधान आपको कार्तिक मास में करना चाहिए — कार्तिक में आरंभ करके, या श्राद्ध पूर्णिमा के दिन से, श्री नारायण कवच का अनुष्ठान शुरू करना चाहिए। नारायण कवच के साथ भगवान नारायण के आयुधों की पूजा भी करनी चाहिए; और नारायण कवच में जितने भी रूप बताए गए हैं, जब उनकी रक्षा के लिए आहुति दी जाती है, यानी जब आप हवन करते हैं, तो आहुति उन्हीं रूपों की होगी। और कम से कम इसके लिए 24000 माना जाता है — यानी 24000 जप करने होते हैं, जो असंभव नहीं; आपको इसे कम से कम एक वर्ष, दो वर्ष, तीन वर्ष में करना चाहिए।

155

क्या गणेश हवन रोज़ किया जा सकता है, और क्या नाम जप कभी हानिकारक है?

दोनों के लिए हाँ — पर बीज और वैदिक मंत्र मनमर्ज़ी से नहीं जपे जाते

· 1:25:53–1:26:33 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या गणेश जी का हवन भी रोज़ किया जा सकता है, तो वे कहते हैं बिल्कुल। जब पूछा गया कि क्या भगवान श्री राम के नाम का जप करने में कोई हानि है, तो वे कहते हैं कि कोई हानि नहीं, भाई — भगवान का नाम लेते रहिए, कोई हानि नहीं; इतना अधिक शंकालु मत होइए। मना बीज मंत्रों के लिए किया गया है: बीज मंत्र या वैदिक मंत्र का इस तरह मनमर्ज़ी से जप नहीं करना चाहिए। नाम जप कीजिए; यह बिल्कुल मना नहीं है। जब पूछा गया कि इस गणेश पूजन में क्या हल्दी की मूर्ति बनाकर पूजन किया जा सकता है और क्या विसर्जन भी वैसा ही होगा या विधि अलग होगी, तो वे उदय प्रताप जी से कहते हैं कि अगले ही दिन वीडियो अपलोड होगा जिसमें बताया गया है कि किस प्रकार की मूर्ति बनानी है और आप घर पर भी कैसे बना सकते हैं — उसे सुनिए और पूरा संदेह दूर हो जाएगा।

156

विद्यार्थियों की बुद्धि बढ़ाने का उपाय क्या है?

संकटनाशन गणेश स्तोत्रम — विद्यार्थी लभते विद्यां

· 1:26:34–1:27:08 · Also a question

वे कहते हैं कि यह पहले ही बताया जा चुका है: संकटनाशन गणेश स्तोत्रम। वे सिद्धार्थ सिंह जी से कहते हैं कि उसमें लिखा है विद्यार्थी लभते विद्यां — विद्यार्थी को विद्या मिलती है। फलश्रुति पढ़िए: छह महीने लगातार संकटनाशन गणेश स्तोत्र पढ़ने से, यह साफ़ लिखा है, नारद पुराण से लिया गया, भगवान नारद द्वारा कहा गया। एक बार पढ़कर देखिए; बुद्धि में काफ़ी वृद्धि होगी।

157

शिव वास और अग्नि वास क्या हैं, और इन्हें क्यों देखा जाता है?

तिथि से गिने जाते हैं, ताकि अनुष्ठान के स्थान पर देवता उपस्थित हों

· 1:27:09–1:28:20 · Also a question

वे धीरज सक्सेना जी से कहते हैं कि जब विशेष अनुष्ठान करने होते हैं, तब शिव वास और अग्नि वास देखे जाते हैं। शिव वास का अर्थ है उस समय शिव जी की स्थिति — वे कहाँ हैं, किस स्थान पर निवास कर रहे हैं; इसकी गणना तिथि के अनुसार होती है। वे कहते हैं कि इन दोनों के लिए वे अलग वीडियो बनाएँगे, गणना करके दिखाएँगे, ताकि समझ आ जाए; हालाँकि इसका परिणाम, उस दिन की उपस्थिति, दिया रहता है, इसलिए गणना किए बिना भी आप देख सकते हैं। देखने का कारण यह है कि जब कोई विशेष अनुष्ठान हो, तो भगवान उस स्थान पर उपस्थित हों, ताकि उस अनुष्ठान में हमारी इच्छा पूरी हो। संन्यासियों को शिव वास और अग्नि वास देखने की तैयारी की आवश्यकता नहीं; जो गृहस्थ हैं — क्योंकि हम इच्छाओं से भरे होकर विधि-विधान करते हैं — उन्हीं के लिए वास देखने की आवश्यकता होती है। अग्नि वास के बारे में: मान लीजिए अग्नि वास पृथ्वी में है और उस समय हम हवन करते हैं, तो माना जाता है कि अग्नि देवता के द्वारा आहुति उस शक्ति तक पहुँच रही है; और यदि अग्नि वास यहाँ नहीं, पाताल में है, तो यदि हम आहुति दें, तो वे उसे कहाँ से पाएँगे — ऐसा माना गया है।

158

माँ जगदंबा या भैरव जी को जायफल की बलि चढ़ाई जाती है, और गायत्री व यज्ञोपवीत पर एक पुस्तक और पीडीएफ़ अपलोड होगी

गायत्री पर पुस्तकें, जायफल बलि, नाथ पंथ की नाड़ी, और भुवनेश्वरी जयंती

· 1:28:21–1:29:32

जब पूछा गया कि गायत्री और यज्ञोपवीत के शास्त्र सम्मत ज्ञान के लिए कौन-सी प्रामाणिक पुस्तक पढ़ें, तो वे कहते हैं कि वे एक पुस्तक अपलोड करेंगे, एक पीडीएफ़ अपलोड करेंगे। जब पूछा गया कि जायफल की बलि कैसे की जाती है — जायफल माँ जगदंबा या भैरव जी को चढ़ाया जाता है — और विधान प्रकाशित करने को कहा गया, तो वे कहते हैं कि इसे करके दिखाना होगा, नहीं तो समझ नहीं आएगा कि कहाँ से और क्या करना है। जब पूछा गया कि क्या नाथ पंथ में सिंगी सूत्र यज्ञोपवीत जैसा ही है, तो वे उत्तर देते हैं कि यह बिल्कुल सही है: नाथ पंथ में नाड़ी को ही जनेऊ माना जाता है, जिसमें भगवती, ब्रह्मा, विष्णु और महेश सबका स्वरूप माना जाता है। वे माँ भुवनेश्वरी की सरल पूजा विधि के अनुरोध का उल्लेख करते हैं, जिनकी जयंती 7 सितंबर को है — ठीक है, वे कहते हैं, देखते हैं।

159

बिना आय वाले युवा साधक को क्या करना चाहिए?

केवल उतना पूजा-पाठ जितना चल सके — स्तोत्र और स्तुति, पूर्ण विधि से केवल वार्षिक पूजन

· 1:29:33–1:31:29 · Also a question

जब पूछा गया कि कम आयु के साधक, जिनकी पढ़ाई अभी पूरी नहीं हुई, अपनी पूजन सामग्री के लिए पैसे कैसे पाएँ, तो वे उत्तर देते हैं: केवल उतना पूजा-पाठ कीजिए जितना आपसे चल सके। विशेष विधि-विधान किए बिना, किसी एक देवी-देवता को लेकर उनके स्तोत्र और स्तुति गाइए; बहुत विशेष विधि-विधान से पूजन केवल वार्षिक पूजन आदि के रूप में कीजिए। जब पूछा गया कि क्या महादेव के शाबर मंत्रों के अधिक जप से मोक्ष संभव है, तो वे कहते हैं कि शाबर मंत्र से मोक्ष और मुक्ति संभव है, पर एक सीमा तक — उसके लिए कुछ और चीज़ें भी करनी होती हैं।

160

चौबीस गणेश चतुर्थियों के बारे में कैसे जानें?

बारह महीनों की गणेश चतुर्थियों की व्रत कथा की पुस्तक

· 1:31:30–1:31:58 · Also a question

जब पूछा गया कि गणेश जी की चौबीस, बारह महीनों और दोनों पक्षों के बारे में जानकारी कैसे मिल सकती है, तो वे उत्तर देते हैं कि बारह महीनों की गणेश चतुर्थियों की व्रत कथा की एक पुस्तक आती है — उसे लीजिए; लगभग सारी जानकारी उसमें मिल जाएगी।

एक श्रोता पूछते हैं कि गणेश जी की चौबीस, बारह महीनों, और दोनों पक्षों के बारे में जानकारी कैसे मिल सकती है। वक्ता उत्तर देते हैं कि बारह महीनों की गणेश चतुर्थी की व्रत कथा की एक पुस्तक आती है। उसे लीजिए। लगभग सारी जानकारी आपको उसमें मिल जाएगी।

161

क्या स्वप्न में मिले मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है, और विवाह के लिए कौन-सी साधना है?

चैनल पर पहले से एक वीडियो; और अर्गला का अंतिम मंत्र

· 1:31:59–1:32:55 · Also a question

जब बताया गया कि स्वप्न में काली या शिवलिंग बार-बार दिखते हैं, और काली माता पूछने वाले की रक्षा करती दिखती हैं, तो वे कहते हैं कि यह अच्छी बात है, भाई। जब पूछा गया कि क्या स्वप्न में मिले मंत्र का जप किया जा सकता है, तो वे आयुष पांडे जी से कहते हैं कि चैनल पर इससे जुड़ा एक वीडियो है — स्वप्न में मिले मंत्र को कैसे परखें, कैसे जानें और क्या करें। "स्वप्न में मिला हुआ मंत्र गृहस्थ तंत्र" खोजिए, आपको मिल जाएगा। जब पूछा गया कि विवाह के लिए कौन-सी साधना करनी चाहिए, तो वे उत्तर देते हैं: अर्गला के अंतिम मंत्र का अधिक से अधिक जप — पत्नीं मनोरमां देहि। जब पूछा गया कि यदि जप केवल सुबह नौ बजे ही हो सके तो क्या दोष लगता है, तो वे पंडित गर्ग जी से कहते हैं कि सुबह करने का प्रयास कीजिए: नौ-दस बजे करने से आपका प्रभाव कुछ कम होता जाएगा, इसलिए या तो सुबह जल्दी कीजिए या फिर शाम के समय कीजिए।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · पाठ से पहले 2.24

The Argalā Stotra asks the Goddess for a lovely wife, in tune with one's mind and of good family, who helps one cross the ocean of worldly life.

मूल पाठ पढ़ें →
24

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् । तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम् ॥ २४ ॥

मुझे मनोहर पत्नी दो, जो मेरे मन के अनुसार चले, अच्छे कुल में जन्मी हो और दुर्गम संसार-सागर से पार उतारने वाली हो।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

162

क्या भैरव बाबा के विरुद्ध बोलना सही है?

पूरी तरह गलत — और वे सार्वजनिक रूप से इसका उत्तर क्यों नहीं देंगे

· 1:32:56–1:33:52 · Also a question

जब बताया गया कि भैरव बाबा को अपशब्द कहे गए हैं, तो वे कहते हैं कि यह पूरी तरह गलत है। पर वे इस विषय को उठाकर उस व्यक्ति के विरुद्ध नहीं बोलेंगे, क्योंकि उससे एक ही बात निकलेगी — कि यह पब्लिसिटी स्टंट है: किसी बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति के बारे में कुछ टेढ़ा कहो ताकि तुम्हारा चैनल और वीडियो वायरल हो जाए, और लोग उसके भीतर का विषय न सुनेंगे न समझेंगे। तो किसी के बारे में कुछ कहने की क्या आवश्यकता? लोग स्वयं बुद्धिमान हैं; पर लोगों को बुद्धि से मतलब नहीं, उन्हें चमत्कार से मतलब है।

163

हानि है ज्ञान अर्जित किए बिना सिद्धि से किसी पद पर पहुँच जाना, फिर भी लोगों को मिलने वाला लाभ देखा जाना चाहिए

ज्ञान अर्जित किए बिना सिद्धि से किसी पद पर पहुँचना

· 1:33:53–1:34:37

बाकी, वे कहते हैं, लोगों को लाभ हो रहा है, लोग भगवान का नाम ले रहे हैं, लोग सुधर रहे हैं — यह बहुत अच्छी बात है; जो लाभ हो रहा है वह देखना चाहिए, हानि को छोड़ दीजिए। पर यह चीज़ नहीं होनी चाहिए। इसीलिए कहा जाता है कि जब ज्ञानी व्यक्ति इस तरह का काम करता है, तो बहुत अच्छा है; यदि आप ज्ञान अर्जित किए बिना, सिद्धि के कारण मिले इस तरह के पद पर जाते हैं, तो यही कठिनाई आती है। वे कहते हैं कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जो व्यक्ति समाज में विशिष्ट है उसे बहुत सोच-समझकर ही बोलना और करना चाहिए, क्योंकि समाज उसका अनुसरण करता है। अब जो विशिष्ट व्यक्ति बन गया है, जिसे देश-विदेश में लोग हर जगह सुन रहे हैं और अनुसरण कर रहे हैं, और जो हर तरह की मूर्खतापूर्ण बकवास कर रहा है — उनके भीतर गंभीरता का अभाव है। जब उनकी कथा-पुराण चलती है, तो उसमें केवल मज़ाक ही चल रहा होता है।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3.21

Kṛṣṇa says that whatever a great person does, others do too, and the world follows the standard he sets.

मूल पाठ पढ़ें →
21

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः । स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥ २१ ॥

श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण करता है, दूसरे लोग भी वैसा-वैसा ही करते हैं। वह जो प्रमाण बना देता है, संसार उसी का अनुसरण करता है।

164

क्या अविवाहित व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकता है?

पहले अर्गला का अंतिम मंत्र कीजिए, और ऐसी पत्नी पाइए जो आपके साथ पाठ करे

· 1:36:05–1:36:47 · Also a question

इस विषय पर, वे कहते हैं, जिस व्यक्ति के पास अपनी बुद्धि है वह स्वयं देख रहा है कि क्या गलत है और क्या सही; एक बात से कभी आकलन नहीं करना चाहिए। लोग केवल एक बात पकड़कर चलते हैं — यही गलती वे करते हैं। जब बताया गया कि जब भी लोग तीनों समय दुर्गा सप्तशती पढ़ने की बात करते हैं, तो वे मना कर देते हैं, यह कहकर कि तुम्हारा विवाह नहीं हुआ, कि तुम वैरागी बन जाओगे, तो वे उत्तर देते हैं: ऐसा कीजिए — अर्गला का अंतिम मंत्र, पत्नीं मनोरमां देहि, पहले उसकी साधना अच्छी तरह कीजिए। आपको ऐसी योग्य पत्नी मिले जो आपके साथ बैठकर सप्तशती का पाठ करे। यह कीजिए। उसके बाद जाकर गुरु जी से कहिए: गुरु जी, अब मुझे ऐसी मिल गई है कि हम दोनों साथ बैठकर दिन-रात सप्तशती का पाठ करते हैं। तब वे आपको ठीक से बताएँगे।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · पाठ से पहले 2.24

The Argalā Stotra asks the Goddess for a lovely wife, in tune with one's mind and of good family, who helps one cross the ocean of worldly life.

मूल पाठ पढ़ें →
24

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् । तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम् ॥ २४ ॥

मुझे मनोहर पत्नी दो, जो मेरे मन के अनुसार चले, अच्छे कुल में जन्मी हो और दुर्गम संसार-सागर से पार उतारने वाली हो।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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