लालटेन लेकर गुरु खोजना — गुरु क्यों चाहिए, गुरु बनने योग्य कौन है, और भौतिक गुरु कब सच में जरूरी है

सिद्धि पाने के लिए गुरु खोजना क्यों भटकाव है।

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01

पहला प्रश्न यही उठता है कि क्या बिना गुरु के मंत्र सिद्ध होता है

आपके गुरु हैं या नहीं, और क्या बिना गुरु का मंत्र सिद्ध होगा

· 02:10–02:43

वक्ता कहते हैं कि जिस दिन कोई व्यक्ति दीपक जलाकर कोई मंत्र पढ़ना शुरू करता है, उसी दिन मन में पहला प्रश्न उठता है कि आपके गुरु हैं या नहीं, और क्या बिना गुरु का मंत्र सिद्ध होगा। किसी से भी बात कीजिए, किसी को भी बताइए कि आप फलाने मंत्र का जप करते हैं, तो वह सबसे पहले यही पूछेगा कि आप दीक्षित हैं या नहीं।

02

क्या तंत्र, पूजा, गायत्री और वेदांत के लिए अलग-अलग गुरु चाहिए?

एक गुरु या अनेक गुरु का प्रश्न

· 02:44–03:14 · Also a question

वक्ता दूसरा प्रश्न बताते हैं: हम तंत्र मार्ग में भी हैं, अध्यात्म मार्ग में भी हैं और सामान्य पूजन-पाठ में भी — तो क्या तंत्र मार्ग के लिए अलग गुरु, पूजा-पाठ के लिए अलग, गायत्री के लिए अलग, अध्यात्म के लिए अलग और वेद-वेदांत के लिए अलग गुरु चाहिए, या एक ही गुरु काफी है? वे कहते हैं कि ऐसे बहुत से प्रश्न आते हैं।

03

आज लोग या तो अति-उत्साहित हैं या बहुत कम उत्साहित, और बीच में उलझन है

अति-उत्साह, कम उत्साह और बीच की उलझन

· 03:15–03:53

वक्ता कहते हैं कि आज के समय में दो बातें साफ हैं। या तो लोग इतने ज्यादा उत्साहित हो जाते हैं कि कुछ भी कर डालते हैं, या उत्साह इतना कम होता है कि दीपक जलाने से भी डरते हैं। बीच की अवस्था उलझन की है — भले लोग बस उलझे रहते हैं कि करें या न करें, और साल बीतते जाते हैं; चार नवरात्रि निकल गईं, इतने अच्छे समय निकल गए, फिर भी वे निर्णय नहीं ले पाए।

04

गुरु खोजने से पहले पहला प्रश्न क्या पूछना चाहिए?

आपको गुरु क्यों चाहिए — व्हाई-व्हाई एनालिसिस

· 04:53–06:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहला प्रश्न यह है कि आप गुरु खोज ही क्यों रहे हैं। "क्यों" का पता लगाइए। जब तक आपका "क्यों" साफ नहीं होगा, कुछ भी साफ नहीं होगा। वे उद्योगों में चलने वाले व्हाई-व्हाई एनालिसिस की बात करते हैं: ऑडिट में जब कोई गड़बड़ी होती है, तो व्हाई-व्हाई एनालिसिस नाम की प्रणाली लगाई जाती है, और हर बात को बार-बार देखा जाता है — ऐसा क्यों हुआ, इसका कारण क्या था, उसका कारण क्या था — ताकि जड़ के कारण तक पहुँचा जाए। वही चीज यहाँ लगाइए।

05

सबसे कम उम्र के साधक असल में गुरु किसलिए चाहते हैं?

सत्रह से पच्चीस वर्ष वालों में जड़ का कारण वशीकरण

· 06:06–06:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सत्रह-अठारह से पच्चीस साल तक के लड़कों का पहला उत्तर होगा: वशीकरण के लिए। गर्लफ्रेंड कहीं और सेट हो गई है। वे कहते हैं कि यदि वे इंस्टाग्राम खोलें और पच्चीस मैसेज हों, तो उनमें कम से कम पंद्रह लड़कियों के होंगे, सब इस बात से परेशान कि फलानी कहानी हो गई। एक समय था जब लड़के ऐसा करते थे; आजकल लड़कियों के साथ भी ऐसा हो रहा है।

06

बहुत कम लोग ऐसी साधना माँगते हैं जिससे पढ़ाई में मन लगे या जीवन का उद्देश्य दिखे

पढ़ाई, सफलता और जीवन के उद्देश्य के दुर्लभ प्रश्न

· 06:50–07:17

वक्ता कहते हैं कि बहुत कम लोग ऐसी साधना माँगते हैं जिससे पढ़ाई में मन लगे, या जीवन में सफलता मिले। बहुत कम लोग कहते हैं कि वे बहुत भटके हुए हैं, समझ नहीं आता कि जीवन में क्या करें, और ऐसी साधना माँगते हैं जिससे उद्देश्य ही मिल जाए — साधना क्यों करें, हम जी क्यों रहे हैं।

07

लोग गुरु के पास कौन-कौन सी बिखरी हुई समस्याएँ लेकर आते हैं?

परिवार पर तंत्र, व्यापार, बात न मानने वाले बच्चे

· 07:18–07:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि प्रश्न बिखरे हुए आते हैं: हम पर कोई तंत्र प्रयोग है तो उसके लिए बताइए; काम-धंधा चौपट हो गया, उसके लिए बताइए; बेटा या बेटी बात नहीं मान रहे, उसके लिए अलग कुछ बताइए। किसी का उद्देश्य साफ नहीं रहता कि गुरु आखिर चाहिए क्यों।

प्रश्न आता है: यदि हम पर तंत्र का कोई प्रयोग है, तो उसके लिए भी बताइए। काम-धंधा चौपट हो गया है, उसके लिए बताइए। बेटा या बेटी हमारी बात नहीं मान रहे, उसके लिए अलग कुछ बताइए। वे कहते हैं कि इस तरह प्रश्न बिखरे रहते हैं, और इसलिए किसी का उद्देश्य साफ नहीं रहता कि गुरु क्यों चाहिए।

08

सच्चा उत्तर यह है कि गुरु पैसे, शत्रु और कर्ज की वजह से चाहिए

गुरु इसलिए चाहिए क्योंकि कोई समस्या है

· 07:48–08:16

वे कहते हैं कि जो उत्तर निकलता है वह यह है कि हमें गुरु इसलिए चाहिए क्योंकि हमारे जीवन में कोई समस्या है। बस इतना ही। और समस्याएँ पैसे, शत्रु और कर्ज से जुड़ी हैं। इसीलिए आप गुरु खोज रहे हैं; आपका व्हाई-व्हाई एनालिसिस यही निकालेगा। परेशानी है, इसलिए गुरु खोजा जा रहा है; परेशानी न हो तो कोई गुरु नहीं खोजेगा।

09

कुछ लोगों को कोई समस्या नहीं, पर वे जीवन के उद्देश्य के लिए मार्गदर्शक चाहते हैं

समस्या नहीं, पर पाने को एक उद्देश्य है

· 08:17–08:38

वक्ता कहते हैं कि दूसरे प्रकार के व्यक्ति को कोई समस्या नहीं है, पर वह जीवन का उद्देश्य पाना चाहता है — और इसके लिए एक अच्छा गुरु, सच्चा गुरु, अच्छा मार्गदर्शक चाहता है जो हाथ पकड़कर उसे जीवन के उद्देश्य की ओर ले चले।

वे कहते हैं कि दूसरे को कोई परेशानी नहीं है। पर जीवन में हम चाहते हैं कि जीवन का कोई उद्देश्य हो, और हम उसे पाएँ। इसके लिए हमें एक अच्छा गुरु, सच्चा गुरु, अच्छा मार्गदर्शक चाहिए जो हमारा हाथ पकड़कर जीवन के उद्देश्य की ओर ले चले। यह दूसरा प्रकार है।

10

कुछ लोग सीधे सिद्धि चाहते हैं — महाविद्या से शुरू करके, न मिलने पर नीचे उतरते जाते हैं

सिद्धि, और उतरती सीढ़ी कि बदले में क्या चलेगा

· 08:39–09:42

वे कहते हैं कि तीसरे प्रकार के लोग सीधी-सी बात, सिद्धि चाहते हैं। और आजकल बात महाविद्या से नीचे शुरू ही नहीं होती। जब वह न हो पाए तो माँग सीढ़ी दर सीढ़ी नीचे आती है: यक्षिणी करवा दीजिए; यक्षिणी नहीं तो अप्सरा; छोड़िए महाराज, बस एक छोटी सी चुड़ैल करवा दीजिए; फिर प्रेत; वह भी छोड़िए — कच्चा कलवा करवा देंगे क्या, और कितना लेंगे?

11

कुछ लोग सच में अभिचार से पीड़ित हैं और पहले ही ऐसे मंत्रों पर पैसा दे चुके हैं जिनसे कुछ नहीं हुआ

सच में अभिचार से पीड़ित लोग जो मंत्रों के लिए पैसा दे चुके हैं

· 09:43–10:21

वक्ता कहते हैं कि चौथे प्रकार के लोग सच में कहीं न कहीं अभिचार से पीड़ित हैं। वे सब दुख में हैं, बहुत परेशान हैं, अपने हाथ-पैर मारकर देख चुके हैं, खुद साधना कर चुके हैं — सच्चे लोग हैं। कुछ लोग पैसा देकर भी साधना करते हैं और मंत्र लेते हैं, यह सोचकर कि किसी सिद्ध पुरुष के मुख से लिया मंत्र ठीक से सिद्धि देगा। वहाँ भी काम नहीं बनता, तो किसी और के पास जाते हैं; समस्याएँ उलझी हुई हैं और कोई रास्ता नहीं निकलता।

12

कुछ लोग सामान्य जीवन के साथ अध्यात्म और तंत्र मार्ग पर चलना चाहते हैं — अपनी श्रेणी पहचानिए

अध्यात्म और तंत्र मार्ग पर चलने वाले, और अपनी श्रेणी पहचानना

· 10:22–10:46

वे कहते हैं कि अंतिम प्रकार के लोग समझते हैं कि मनुष्य जीवन है तो समस्याएँ हैं, पर साथ ही वे आध्यात्मिक बनना चाहते हैं, अध्यात्म मार्ग पर चलना चाहते हैं और तंत्र से जुड़ी कुछ चीजें सीखना चाहते हैं, और इसके लिए एक सक्षम गुरु चाहते हैं जो उन्हें सिखा सके। कुल मिलाकर, वे कहते हैं, इतने सारे "क्यों" निकलेंगे; देखिए आप किस श्रेणी में आते हैं और उसी हिसाब से गुरु खोजिए। चुड़ैल ट्रांसफर वाला गुरु चाहिए तो वैसा खोजिए; मसान और कच्चे कलवे चाहिए तो वह भी खोजिए।

13

अध्यात्म का अर्थ स्वच्छंदता हो गया है — नियम और अनुशासन से मुक्ति, आध्यात्मिकता के नाम पर

आध्यात्मिकता के वेश में स्वच्छंदता

· 10:47–11:24

वक्ता कहते हैं कि अध्यात्म अब खुद एक जगह नहीं रहा। आजकल अध्यात्म की परिभाषा स्वच्छंदता हो गई है। यानी हमारे सनातन धर्म से जुड़े नियमों और अनुशासन से मुक्त हो जाओ। आज लोगों ने उन्मुक्तता को आध्यात्मिकता से जोड़ दिया है।

वे कहते हैं कि जब हम अध्यात्म की चर्चा करते हैं, तो अध्यात्म भी अब एक जगह पर नहीं है। आजकल अध्यात्म की परिभाषा स्वच्छंदता हो गई है। यानी हमारे सनातन धर्म के जो नियम हैं, जो अनुशासन है, उससे मुक्त हो जाओ। आजकल लोगों ने उन्मुक्तता को आध्यात्मिकता से जोड़ दिया है।

14

सबसे बड़े चैनलों पर कोई नकारात्मक टिप्पणी टिकती नहीं, और किसी से कोई मेहनत नहीं करवाई जाती

वायरल गुरु, नकारात्मक टिप्पणी नहीं, और मेहनत न करना चाहने वाले लोग

· 11:25–12:02

वे कहते हैं कि बहुत बड़े-बड़े गुरु हैं जिनके चैनल वे देखते हैं; उनके वीडियो वायरल होकर बहुत बड़े हो गए हैं, सजेशन में आते हैं, और उनके अनुयायियों में एक भी नकारात्मक टिप्पणी नहीं दिखती — इतनी मजबूती से वे जमे हैं। वे कहते हैं कि इसका कारण यह है कि लोग मेहनत नहीं करना चाहते। वे लिखकर देते हैं: यदि उनकी बातें मानी गईं, तो जो व्यक्ति यह मानकर उन्हें मानता है कि वह वेदांत-मार्गी है, उपनिषदों में जा रहा है, वेदों की ओर जा रहा है और वेदों को मान रहा है, वह वेदों को मान ही नहीं रहा — वह वेदों को छोड़ रहा है और ऐसा नुकसान कर रहा है कि जो उसे मिलना था वह भी अब नहीं मिलेगा।

15

आपका उत्साह जहाँ जागता है, वही तय करता है कि आप किस मार्ग पर चलेंगे

उत्साह तय करता है कि आप किस मार्ग पर चलेंगे

· 12:03–12:26

वक्ता कहते हैं कि आपका उत्साह जहाँ जागता है, वही आपका जीवन तय करता है — याद रखिए। यदि आप उनकी बातों से प्रेरित होते हैं, उनकी कोई बात आपको लग जाती है, तो आप उसी मार्ग पर जाएँगे जो वे दिखा रहे हैं। यदि आप किसी और को सुनते हैं और उसकी बातें आपको अच्छी लगती हैं और आप उनसे प्रेरित होते हैं, तो आप उसके मार्ग पर जाएँगे, बिना यह सोचे कि वह सही है या गलत।

16

क्या किसी के भी पीछे आँख बंद करके चलना चाहिए?

अपनी बुद्धि का प्रयोग, और उन्हें मिलने वाली नकारात्मक टिप्पणियाँ

· 12:27–13:11 · Also a question

वे कहते हैं कि आपके भीतर कुछ बुद्धि है। भगवान ने वह थोड़ी सी बुद्धि दी है, और आपके जिए हुए जीवन का पूरा संकलन उसमें है, इसलिए आप सोचेंगे कि क्या गलत है और क्या सही, और सोचकर निर्णय लेंगे — आँख बंद करके नहीं।

17

"क्यों" साफ हो जाने के बाद भी प्रश्न बचता है कि गुरु बनाने योग्य कौन है

गुरु बनाने योग्य कौन है, यह प्रश्न

· 13:12–13:33

बात की जड़ पर आते हुए वे पूछते हैं: जब आपका "क्यों" साफ हो गया, तो क्या आप किसी को भी अपना गुरु बना लेंगे? वे अपनी ओर इशारा करते हैं — वे काफी आध्यात्मिक हैं, और आप सब उन्हें गुरु जैसा मानते हैं और गुरु कहते हैं, तो क्या उन्हें गुरु बन जाना चाहिए? कभी स्कूल के मास्टरों को भी गुरु जी कहा जाता था।

18

आज बच्चों को शिक्षकों के बारे में क्या सिखाया जाता है?

पलटकर जवाब, आहत अहंकार, और क्या ऐसे शिक्षक गुरु हैं

· 14:57–15:20 · Also a question

वे कहते हैं कि आज के समय में लोग बच्चों को यह बुद्धि दे रहे हैं कि टीचर ऐसा करे तो तुम्हें ऐसे जवाब देना है। अहंकार आहत होता है। बिल्कुल अलग तरीका चल रहा है। वे कहते हैं कि वे शिक्षक भी गुरु थे; उन्हें भी गुरु माना जाता है, हम भी उन्हें गुरु जी कहते थे, और उनके विचार से सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों में आज भी गुरु जी कहा जाता है।

19

क्या घर पर पूजा करवाने आने वाले ब्राह्मण गुरु बनाने योग्य हैं?

सीधा-सादा पुरोहित जो संतुष्ट करता है पर जिसे आप स्वीकार नहीं करेंगे

· 15:21–16:06 · Also a question

वक्ता पूछते हैं: जो गुरु आप चाहते हैं — जिसकी बातों से आप प्रेरित हुए और जिसकी बातें आप लेकर चलते हैं, जो आपको पढ़ाता है, क्या वह आध्यात्मिक रूप से आपका गुरु बनने योग्य है? घर पर सामान्य पूजन-पाठ करवाने आने वाले ब्राह्मणों में कई बहुत अच्छी प्रेरणा देते हैं, हर बात समझाते हैं और आपको संतुष्ट करते हैं; अपना स्तर काफी सामान्य होते हुए भी वे पूरे मन से कथा और पूजा करवाते हैं, और आप अपनी इच्छा से जो दें उसमें संतुष्ट रहते हैं। तो क्या वे गुरु बनाने योग्य हैं? क्या आप उन्हें अपना गुरु बनाएँगे?

20

लोग किसी सीधे-सादे व्यक्ति को अपना गुरु क्यों नहीं बनाते?

हमें जो सुंदर दिखे वही अच्छा लगता है, और हम नियम हटवाना चाहते हैं

· 16:07–16:53 · Also a question

वे पूछते हैं, जानते हैं आप किसी सामान्य, सीधे-सादे व्यक्ति को अपना गुरु क्यों नहीं बनाते? क्योंकि आज के समय में हमें वही अच्छा लगता है जो देखने में सुंदर हो। यदि हम अध्यात्म में जा रहे हैं और आध्यात्मिक गुरु चाहते हैं, तो हमें ऐसे लोग चाहिए जो आध्यात्मिकता के नाम पर ऐसी चीजें परोसें जो हमारा जीवन आसानी से चलाती रहें, जिनमें कोई नियम और कोई नियंत्रण न हो। आध्यात्मिकता में हमें स्वच्छंदता चाहिए — वे कहते हैं कि वे सीधी बात कह रहे हैं।

21

सख्त शिक्षक जल्दी पसंद नहीं आता, इसीलिए ढीला गुरु पसंद किया जाता है

ढीला गुरु क्यों पसंद आता है और सीधा गुरु क्यों नहीं पचता

· 16:54–17:26

वे कहते हैं कि स्कूल-कॉलेज में जो शिक्षक सख्त होता था, वह जल्दी पसंद नहीं आता था। पढ़ने वाले बच्चे उसे पसंद करते थे क्योंकि वे पढ़ाई में तेज थे; कामचोर तब भी सख्त शिक्षकों को गालियाँ देते थे। इसी तरह आध्यात्मिकता में जो लोग आपको स्वच्छंद बनाएँगे, जो कहेंगे कि सुबह चार बजे उठने की क्या जरूरत है — चार बजे उठने से बुद्धि बड़ी होती तो भैंस का पड्डा भी सुबह उठता है — ऐसे लोग आपके अच्छे आध्यात्मिक गुरु बनेंगे और आपको अच्छे लगेंगे। पर यदि कोई आध्यात्मिक व्यक्ति सीधा-सादा है और आपको ठीक-ठीक बताता है कि आध्यात्मिकता क्या है और उसे कैसे निभाना है, तो वह आपको नहीं पचेगा।

22

यदि किसी भी आयु में आपके भीतर तंत्र की जिज्ञासा जागे, तो उसका क्या अर्थ है?

किसी जन्म की अधूरी यात्रा

· 17:27–18:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तंत्र के जिज्ञासु और गुरु चाहने वालों के लिए यही मुख्य बात है। यदि जीवन की किसी भी आयु में आपके भीतर तंत्र से जुड़ी जिज्ञासा जाग रही है और आप किसी एक मार्ग पर जाना चाहते हैं, तो माना जाता है कि किसी समय, किसी जन्म में आपकी यात्रा अधूरी रह गई है।

23

तंत्र की गुरु परंपरा दीक्षा लेने के बारे में असल में क्या कहती है?

खुद को योग्य बनाइए ताकि आपके अपने गुरु आपको अपनी परंपरा में ले लें

· 18:08–18:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसी कारण तंत्र मार्ग की गुरु परंपरा की पारंपरिक बातों में कहा जाता है कि आपको किसी से दीक्षा लेने की जरूरत नहीं — बल्कि आपको खुद को इतना योग्य बनाना है कि जो गुरु किसी समय आपके रहे हैं, वे आपको अपनी गुरु परंपरा में ले चलें। वे कहते हैं कि यही वास्तविकता है, न कि यह कि हम तंत्र में जाना चाहते हैं तो किसी को भी गुरु बना लें।

24

लोग उसी के पास क्यों जाते हैं जो सबसे ज्यादा तांत्रिक जैसा दिखता है?

मुंडमाला, कड़े और श्मशान हवन एक वेशभूषा के रूप में

· 18:35–19:12 · Also a question

वे कहते हैं कि यहाँ होता यह है कि जो अपनी बाहरी वेशभूषा तांत्रिक जैसी बना ले — मुंडमाला पहने, तरह-तरह के कड़े पहने, जिनके बहुत सारे प्रकार होते हैं — और जो अपना जितना ज्यादा दिखावा करे, श्मशान में हवन करे, मसानिक क्रियाएँ करे, वह आपको उतना ही असली तांत्रिक लगेगा। वे सौ साधनाओं की बातें करेंगे, और फिर आप उनके पास जाकर दीक्षित होंगे, या उनसे दीक्षा लेना चाहेंगे।

25

भक्ति मार्ग के वैष्णव यह पूछे बिना नाम दीक्षा चाहते हैं कि उन्हें असल में क्या चाहिए

केवल नाम दीक्षा चाहने वाले वैष्णव

· 19:13–19:37

वे कहते हैं कि भक्ति मार्ग पर जाने वाले, वैष्णव संप्रदाय के वैष्णव लोग भी यह नहीं देखते कि उन्हें क्या चाहिए। उन्हें बस नाम लेना है, नाम दीक्षा लेनी है। उन्हें बस दीक्षित होना है; गुरु कौन है, इससे कोई मतलब नहीं।

वे कहते हैं कि जो भक्ति के मार्ग पर जाते हैं, वैष्णव संप्रदाय के वैष्णव लोग — उनमें भी हम यह नहीं देखते कि हमें क्या चाहिए। हमें बस नाम लेना है, नाम दीक्षा लेनी है। हमें बस दीक्षित होना है; गुरु कौन है, इससे हमें कोई मतलब नहीं।

26

यदि व्यक्ति नहीं, तो गुरु क्या है?

गुरु मंडल और तत्व के रूप में गुरु

· 19:38–19:50 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह वास्तविकता जान लीजिए: जो है वह गुरु मंडल है, और गुरु एक तत्व है — कोई एक सामान्य मनुष्य या एक सामान्य भौतिक शरीर नहीं। इसलिए यदि आप सच में गुरु खोज रहे हैं, और गुरु को लेकर गंभीर हैं, तो सबसे पहले गुरु खोजना बंद कीजिए। गुरु खोजा नहीं जाता।

वे कहते हैं कि यहाँ यह वास्तविकता जान लीजिए कि जो है वह गुरु मंडल है; गुरु एक तत्व है। ऐसा नहीं कि गुरु कोई सामान्य मनुष्य या सामान्य भौतिक शरीर है। यदि आप सच में गुरु खोज रहे हैं, तो सबसे पहले, यदि आप गुरु को लेकर गंभीर हैं, तो गुरु खोजना बंद कीजिए। गुरु खोजा नहीं जाता।

27

क्या कभी किसी से अपना गुरु बनने को कहना चाहिए?

न खोजिए, न माँगिए — बस योग्यता लाइए

· 19:51–20:26 · Also a question

वे कहते हैं, याद रखिए, गुरु कभी खोजा नहीं जाता, और कभी किसी के सामने जाकर यह नहीं कहना चाहिए कि मेरे गुरु बन जाइए। पहले अपने भीतर उतनी योग्यता लाइए। जो गुरु आपके रहे होंगे — आप नहीं जानते कि यह आपका पहला जन्म है या नहीं, न कोई और जानता है, पर आपके गुरु जान रहे हैं कि यह कौन सा जन्म है। जब आप गुरु के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाएँगे, तब गुरु खुद आपको आकर्षित करेंगे, और यह सब कहने-करने की जरूरत नहीं पड़ेगी; सब अपने आप होगा।

29

बंगाल के व्यक्ति को किसे गुरु मानना चाहिए?

श्री रामकृष्ण परमहंस और माँ शारदा

· 20:54–21:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप बंगाल क्षेत्र के हैं, तो श्री रामकृष्ण परमहंस और माँ शारदा को गुरु माँ और गुरु पिता, गुरु जी मानकर उनकी पूजा-सेवा कीजिए। आपको कोई कष्ट नहीं आएगा और मंत्र से जुड़ा कोई दोष नहीं लगेगा। उनके नाम का जप कीजिए — इतना काफी है। यदि आप तंत्र क्षेत्र में हैं, तो भी कीजिए; तंत्र क्षेत्र से जुड़ी साधनाएँ करनी हों, तब भी आरंभिक पूजा इन्हीं की कीजिए।

30

यदि आप वाम पद्धति में जाना चाहते हैं और कुछ नहीं जानते, तो क्या करें?

गुरु स्वरूप में वामाखेपा की उपासना

· 21:21–22:05 · Also a question

वे कहते हैं कि यदि आप वाम पद्धति में आगे जाना चाहते हैं और कुछ नहीं जानते, तो कुछ करना नहीं है: पूरे भारत में आप कहीं भी हों, वामाखेपा की पूजा कीजिए। बहुत ज्यादा कुछ नहीं करना — गुरु रूप में उनका ध्यान कीजिए, उनकी पूजा कीजिए, उनसे प्रार्थना कीजिए। वे सावधानी से जोड़ते हैं कि वे यह नहीं कह रहे कि आपको भगवती महाविद्या तारा की दीक्षा मिल जाएगी और आप उस परंपरा में दीक्षित हो जाएँगे। नहीं।

31

महाराष्ट्र के व्यक्ति को किसे गुरु मानना चाहिए?

दत्तात्रेय, जिनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश समाए हैं

· 22:06–22:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप महाराष्ट्र क्षेत्र या उसके आसपास के हैं, तो देखिए — वहाँ घर-घर में गुरु दत्तात्रेय पूजे जाते हैं। उनकी पूजा कीजिए। वे वही दोहराते हैं जो अक्सर कहते हैं: ब्रह्मा, विष्णु और महेश, सारे तत्व उनमें समाए हैं। उनकी सेवा-पूजा कीजिए और उनकी कृपा से आपको भौतिक गुरु प्राप्त होगा।

वे कहते हैं कि यदि आप महाराष्ट्र क्षेत्र के हैं या उस ओर के हैं, तो वहाँ देखिए — घर-घर में गुरु दत्तात्रेय पूजे जाते हैं। उनकी पूजा कीजिए। वे बार-बार कहते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश, सारे तत्व उनमें समाए हुए हैं। उनकी सेवा-पूजा कीजिए; उनकी कृपा से आपको भौतिक गुरु प्राप्त होगा।

32

दत्तात्रेय माला मंत्र से लोगों ने कौन से परिणाम बताए हैं?

बीस-बाईस लोगों को स्वप्न में गुरु स्वरूप के दर्शन

· 22:33–23:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चैनल पर दी गई दत्तात्रेय माला मंत्र की गुरु साधना अब तक जितने लोगों ने की है, उनमें से किसी को भौतिक गुरु नहीं मिला — पर लोग संतुष्ट हैं, और यही कहीं न कहीं उनकी कृपा है। टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक मिलाकर लगभग बीस-बाईस लोगों ने बताया है कि वे दिसंबर से लगातार, अब तक लगभग एक महीने से, दत्तात्रेय माला मंत्र की साधना कर रहे हैं और उन्हें स्वप्न में किसी गुरु स्वरूप के दर्शन हो रहे हैं। वह गुरु कौन हैं, यह उन्हें नहीं पता।

33

लोग लालटेन लेकर ऐसा गुरु खोजने निकलते हैं जो उन्हें कोई सिद्धि करवा दे

सिद्धि करवाने वाले गुरु को लालटेन लेकर खोजना

· 23:11–23:46

वे कहते हैं कि आज उन्होंने यह विषय रखा है कि लोग लालटेन लेकर गुरु खोजते हैं — आओ मित्र, लालटेन लेकर ऐसा गुरु खोजें जो हमें सिद्धि करवा दे। उन्होंने यह विषय ठीक इसीलिए रखा है: बताए गए तरीके से गुरु खोजिए, और उसी माध्यम से खोजिए, ताकि आपको सच में गुरु मिले। इसके लिए बिल्कुल भटकिए मत। वे कहते हैं, गुरु मत खोजिए — गुरु आपको खोजेंगे; पर गुरु खोजने के लिए इन्हें अपना गुरु बनाइए।

34

अभिचार से पीड़ित व्यक्ति गुरु पाने के लिए क्या करे?

दत्तात्रेय की शरण लीजिए, या क्षेत्र के सद्गुरु के समाधि स्थल जाइए

· 23:47–24:32 · Also a question

वे कहते हैं कि यदि आप कोई मंत्र साधना करना चाहते हैं, या किसी तरह के अभिचार या बाधा से ग्रस्त हैं, और ऐसा गुरु खोज रहे हैं जो आपको मंत्र दे और अपनी गुरु परंपरा में शामिल करे, तब भी वे यही कहेंगे: सबसे पहले भगवान दत्तात्रेय की शरण लीजिए। या अपनी क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार देखिए कि वहाँ सद्गुरु स्वरूप में कौन से गुरु सबसे प्रसिद्ध हैं और मान्यता रखते हैं, और उन्हें गुरु मानकर उनके समाधि स्थल जाइए, उनका जो भी सिद्ध पीठ हो वहाँ जाइए, और वहाँ बार-बार जाकर प्रार्थना कीजिए। वे कृपा करेंगे, परोक्ष रूप से; वे आपके सामने भी आ जाएँगे और आपको पता भी नहीं चलेगा।

35

भौतिक गुरु पर ही क्यों नहीं अटकना चाहिए?

गुरु तत्व पंच तत्वों से ऊपर है

· 24:33–24:54 · Also a question

वे कहते हैं कि आप भौतिक रूप से पाँच तत्वों से बना शरीर चाहते हैं — पर जान लीजिए कि गुरु तत्व उससे ऊपर है। वह पंच तत्व से ऊपर है, और पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है। गुरुत्व के बिना हम चल भी नहीं सकते; चलने के लिए भी वह चाहिए। तो इसी माध्यम से आपको गुरु खोजना है, और तब आपको गुरु मिलेंगे।

36

जब तक गुरु न मिलें, तब तक किसे गुरु मानना चाहिए?

दत्तात्रेय, नवनाथ, चौरासी सिद्ध, और क्षेत्रीय सिद्ध

· 24:55–25:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब तक गुरु प्राप्त न हों, आपको गुरु रूप में किसी एक स्वरूप को पकड़कर चलना है। भगवान दत्तात्रेय को लेकर चलिए; या नवनाथों में से किसी एक को लीजिए; या चौरासी सिद्धों को लीजिए। अपने क्षेत्र के अनुसार जो आपको सबसे ज्यादा आकर्षित करे, जो सिद्ध पुरुष लगे, उसे लीजिए। यदि आप उत्तर प्रदेश के हैं, तो देवरहा बाबा को पकड़िए — उनसे अधिक सक्षम सिद्ध योगी, वे कहते हैं, कोई नहीं होगा — या गुरु गोरखनाथ जी को, जिनके मंत्र भी चैनल पर दिए गए हैं। गुरु परंपरा में तैलंग स्वामी को लेकर चलिए, या लाहिड़ी महाशय को, या बाबा नीम करौली को।

37

क्या किसी से कहना चाहिए कि मुझे शिष्य बना लीजिए?

क्या नहीं करना है, और साथ चलने वालों से वे क्या कहते हैं

· 25:48–26:25 · Also a question

वे कहते हैं कि गुरु इसी तरह खोजा जाता है, न कि किसी के पास जाकर यह कहकर कि मुझे अपना शिष्य बना लीजिए। यह बिल्कुल नहीं करना चाहिए। जो सच में होना है, वह फिर अपने आप होगा। और यदि किसी की बातें सुनकर आपको लगे कि उनके साथ चलना चाहिए — जैसे बहुत से लोग उनसे कहते हैं कि वे उनके साथ चलना चाहते हैं — तो इस चिंता से मुक्त रहिए कि यहाँ दीक्षा लेने पर ही आप आगे बढ़ पाएँगे। यहाँ जो मार्ग दिखाया जाएगा, वह ऐसा होगा जिससे आपका कल्याण हो; नुकसान करने वाली बातें यहाँ बताई ही नहीं जातीं।

38

वे कहते हैं कि दीक्षा किस चीज में बदल गई है?

व्यापार बनी दीक्षा, और लाखों दीक्षित जिनका कुछ नहीं हुआ

· 26:26–26:54 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आज के समय में कहीं न कहीं यह एक जगह पहुँचकर व्यापार बन गया है: दीक्षा लो, नहीं तो नहीं होगा। वे कहते हैं, भाई, लाखों लोग दीक्षा लेकर पड़े हुए हैं। किसी के जीवन में कुछ नहीं हो रहा।

हम जिस समय में हैं, उसमें कहीं न कहीं यह एक जगह जाकर व्यापार बन गया है: दीक्षा लो, नहीं तो नहीं होगा। वे कहते हैं, भाई, लाखों लोग दीक्षा लेकर मरे पड़े हैं। किसी के जीवन में कुछ नहीं हो रहा।

39

आपको गुरु की असल में जरूरत कब पड़ेगी?

जब आप खुद आभिचारिक और तांत्रिक क्रिया करने जाएँ

· 26:55–27:38 · Also a question

वे पूछते हैं, जानते हैं आपको गुरु की जरूरत कब पड़ेगी? जब आप खुद आभिचारिक चीजें, तंत्र से जुड़ी कोई क्रिया करने जा रहे हों — वहाँ आपको गुरु चाहिए। वे उदाहरण देते हैं: आप महाशक्ति की साधना नहीं कर रहे, आप चैनल पर सिखाए अनुसार भैरव जी की पूजा नहीं कर रहे, जहाँ हृदय पाठ और हर चीज के साथ पाँच-सात साधनाएँ समझाई गई हैं। आप भैरव जी की तामसिक साधना करना चाहते हैं, भैरव जी के आठ वीरों की पूजा करके — हालाँकि, वे बताते हैं, वीर आठ नहीं, चौंसठ हैं।

40

आठ वीरों की पूजा किताब से करना असंभव क्यों है?

हर वीर की तीन मुद्राएँ, पहले सीखनी हैं चौबीस मुद्राएँ

· 27:39–28:12 · Also a question

वे कहते हैं कि इसका विधि-विधान ऐसा है कि कम से कम — यदि आठ वीर हैं और आप तंत्र की पद्धति से चलें — तो हर एक वीर के लिए कम से कम तीन मुद्राएँ लगेंगी, यानी चौबीस मुद्राएँ। वे चौबीस मुद्राएँ आपको पहले सीखनी होंगी: किस मुद्रा से किसका आवाहन होता है। हो सकता है दो वीरों की मुद्रा एक हो, हो सकता है हर एक की अलग हो। इसीलिए वहाँ आपको गुरु की जरूरत पड़ेगी।

41

शक्ति के साथ खेलने और उनके गणों के साथ खेलने में क्या अंतर है?

महामाया जगदंबा कभी हानि नहीं करतीं; उनके गण और वीर अलग बात हैं

· 28:13–28:30 · Also a question

वे कहते हैं कि जब आप शक्ति के साथ खेलते हैं, महाशक्ति के साथ नहीं — महाशक्ति, महामाया जगदंबा आपको कभी हानि नहीं पहुँचाएँगी — पर यदि आप उनके गण के साथ खेल रहे हैं, किसी वीर के साथ खेल रहे हैं, यदि आपको ये सब करना है और इन सबमें जाना है, तो गुरु खोजिए। तब आपको ऐसा भौतिक गुरु चाहिए, और उसके लिए भी इन्हीं चीजों का प्रयोग कीजिए, ताकि आपको सही मार्गदर्शक मिले।

42

गुरु वह नहीं जो दीक्षा के पंद्रह या पचास हजार ले और माला थमा दे

दीक्षा के पंद्रह या पचास हजार और थमाई हुई माला

· 28:31–29:01

वे कहते हैं कि बात सही मार्गदर्शक पाने की है, न कि यह कि किसी ने बस बोल बम करवाया, दीक्षा के पंद्रह हजार या पचास हजार लिए, कहानी बनाई और हो गया। माला दे दी, जप करते रहो, हो गया — नहीं।

43

मोक्ष का लक्ष्य रखने वाले गृहस्थ को किसे प्रधान रखना चाहिए?

गृहस्थ के लिए भाव प्रधान, तंत्र में क्रिया प्रधान

· 29:02–29:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप गृहस्थ हैं और आपने जीवन का उद्देश्य रखा है कि मोक्ष की ओर, मुक्ति की ओर जाना है, तो यहाँ भाव को प्रधान रखिए; यहाँ क्रिया प्रधान नहीं होगी। वे बार-बार कहते हैं कि तंत्र में क्रिया प्रधान है — भाव प्रधान नहीं, भक्ति प्रधान नहीं — और वहाँ कुछ भी गलत हुआ तो तुरंत परेशानी आती है।

पर यदि गृहस्थ रहते हुए आपने जीवन का उद्देश्य रखा है कि मोक्ष की ओर, मुक्ति की ओर जाना है, तो यहाँ भाव को प्रधान रखिए; यहाँ क्रिया प्रधान नहीं होगी। वे बार-बार कहते हैं कि तंत्र में क्रिया प्रधान है। भाव प्रधान नहीं, भक्ति प्रधान नहीं। वहाँ कुछ गलत हुआ, तो तुरंत परेशानी होगी।

44

क्या कपाल से जुड़ी क्रिया खुद कर सकते हैं या श्मशान की मिट्टी घर ला सकते हैं?

यूट्यूब, फेसबुक और पत्रिकाएँ आपको वहाँ तक क्यों नहीं ले जाएँगी

· 29:16–29:58 · Also a question

वे कहते हैं कि तंत्र प्रक्रिया से की जाने वाली कपाल से जुड़ी क्रिया के लिए, जिस तरह वह सब करना होता है और जो प्राप्त करना होता है, आपको किसी की जरूरत जरूर पड़ेगी। यदि बिना जाने आप श्मशान की मिट्टी उठाकर घर ले आएँ और करें, तो परेशानी होगी; इसके लिए कोई चाहिए जो आपको सारी क्रियाएँ समझाए। यूट्यूब, फेसबुक और पत्रिकाएँ पढ़कर आप यह नहीं कर पाएँगे, इसलिए वहाँ गुरु चाहिए। पर इतनी दूर जाने की जरूरत नहीं।

45

क्या हर संप्रदाय में गुरु मंडल की परंपरा है?

आवरण पूजा, नौ आवरण, और महा सिद्ध पीठ में चौंसठ

· 29:59–30:40 · Also a question

वे कहते हैं, एक बात समझिए: चाहे शाक्त हो, कौल हो, शैव हो या नाथ परंपरा, जितने भी अलग-अलग पंथ और संप्रदाय बने और बँटे हैं, उन सबमें गुरु मंडल की परंपरा है। गुरु मंडल की पूजा होती है। कहीं आवरण पूजन में गुरु मंडल के नौ आवरण होते हैं; कहीं चौंसठ आवरण तक होते हैं। मूल पीठ होता है, सिद्ध पीठ होता है और महा सिद्ध पीठ होता है; महा सिद्ध पीठ में चौंसठ आवरणों की पूजा होती है और उसमें आठ घंटे लगते हैं। जो सब कुछ पूरी तरह जान चुके हैं, वे करते हैं।

46

तोड़ना यह भ्रम है कि कान में फूँका गया मंत्र ही सब कुछ है

यह भ्रम तोड़ना कि कान में फूँका मंत्र ही सब कुछ है

· 30:41–31:16

वे कहते हैं कि ये सारी बातें वे सामान्य रूप से इसलिए बता रहे हैं ताकि लोगों के मन से यह भ्रम निकल जाए कि बस एक भौतिक गुरु होंगे, जो एक मंत्र देंगे, कान में फूँकेंगे, और फिर काम हो जाएगा। कृपया इस भ्रम से बाहर आइए कि बात बस इतनी ही है। वास्तव में बातें बिल्कुल अलग हैं, और वे ठीक यही बताने का प्रयास कर रहे हैं: कृपया केवल गुरु, गुरु, गुरु पर मत अटकिए, एक ऐसे भौतिक गुरु पर जिसकी दो आँखें, एक नाक और दो कान हैं।

47

क्या चैनल पर दी गई साधनाओं के लिए गुरु चाहिए?

एक-दो को छोड़कर किसी में भौतिक गुरु या कान में दिया मंत्र जरूरी नहीं

· 31:17–31:46 · Also a question

वे कहते हैं कि आप सबके सामने जो आरंभिक साधनाएँ दी गई हैं, उन्हें कीजिए। चैनल पर दी गई सारी साधनाओं में, एक-दो को छोड़कर, कहीं भी आपके लिए गुरु की जरूरत नहीं है। न भौतिक गुरु की जरूरत है, न किसी की जो आपके कान में मंत्र डाले। उन मंत्रों के लिए गुरु चाहिए।

आप सबके सामने जो साधनाएँ दी गई हैं — वे सब कीजिए, आरंभिक साधना कीजिए। चैनल पर जितनी साधनाएँ दी गई हैं, उनमें से एक-दो साधनाओं को छोड़ दें, तो कहीं भी आपके लिए गुरु की जरूरत नहीं है। न भौतिक गुरु की जरूरत है, न ही कान में मंत्र डालने वाले की जरूरत है। उन मंत्रों के लिए गुरु चाहिए।

48

गुरु ठीक-ठीक किसलिए चाहिए?

बीज का स्पष्ट उच्चारण, और संदेह दूर करना जैसे नवार्ण से पहले ॐ

· 31:47–31:59 · Also a question

वे पूछते हैं कि गुरु की जरूरत क्या है: कि वह उच्चारण स्पष्ट करे — उच्चारण में कोई बीज है तो उस बीज में उच्चारण कैसे होता है। इसके लिए गुरु जरूरी है। और यदि आपके मन में कोई शंका या संशय है, तो उसके लिए गुरु जरूरी है — जैसे लोगों के मन में रहने वाला यह संदेह कि नवार्ण में ॐ लगाएँ या नहीं; उसके लिए गुरु है। यहाँ गुरु का अर्थ हो जाता है: जो आपकी शंका और संशय दूर करे।

49

संदेह से मुक्ति कैसे मिलती है?

ज्ञान से, जिसका एकमात्र स्रोत भौतिक गुरु नहीं

· 32:00–32:14 · Also a question

वे कहते हैं कि आप संदेह से मुक्त होकर साधना कर सकें, इसलिए वहाँ गुरु जरूरी है। और आप संदेह से मुक्त कैसे होंगे? ज्ञान से। ज्ञान कौन देगा? केवल पाँच तत्वों से बने भौतिक गुरु ही उसे नहीं दे सकते। आपके पास दूसरे क्षेत्र भी उपलब्ध हैं।

वे कहते हैं कि इसीलिए वहाँ यह जरूरी है, और वहाँ वे ऐसे हो जाते हैं। ताकि आप संदेह से मुक्त होकर साधना कर सकें — और आप संदेह से मुक्त कैसे होंगे? ज्ञान से। ज्ञान कौन देगा? केवल पाँच तत्वों से बने भौतिक गुरु ही उसे नहीं दे सकते। आपके पास दूसरे क्षेत्र भी हैं।

50

तंत्र ग्रंथ से मंत्र उठाने के बारे में किताबें क्या कहती हैं?

पचास तरह के दंड और दोष लिखे हुए

· 32:15–35:02 · Also a question

वे कहते हैं कि यहाँ एक बात उठती है कि यदि कोई व्यक्ति किताब से, किसी तंत्र ग्रंथ से उठाए गए मंत्र का जप करता है, तो इसके बारे में बहुत सी बातें लिखी हैं — कि आपको दंड मिलेगा, कष्ट मिलेगा, आपको इस तरह दोष लगेगा। पचास तरह की बातें बताई गई हैं।

वे कहते हैं कि अब यहाँ एक बात उठती है: यदि कोई व्यक्ति किसी किताब से उठाए, किसी तंत्र ग्रंथ से उठाए किसी मंत्र का जप करता है, तो उसके बारे में बहुत सी बातें लिखी हैं। कि आपको दंड मिलेगा, कि आपको कष्ट मिलेगा, कि आपको इस तरह दोष लगेगा। पचास तरह की बातें बताई गई हैं।

51

किसी से मंत्र लेने पर कौन सा ऋण बनता है?

विधान देने वाले और लेने वाले के बीच ऋणानुबंध

· 35:40–36:24 · Also a question

वे कहते हैं कि इस पर वे अलग वीडियो जरूर डालेंगे, पर आज साफ कहना चाहते हैं: ऋण दोष से, जमा होने वाले ऋण से मुक्त होना बहुत जरूरी है। हम जहाँ से भी मंत्र लेते हैं, जिसके भी मार्गदर्शन में जो भी विधि-विधान करते हैं, हम दोनों के बीच एक ऋण बनता है — जिसे ऋणानुबंध कहते हैं। स्कूल-कॉलेज में पढ़कर ज्ञान लेते हैं तो वहाँ फीस देते हैं। यहाँ ज्ञान के बदले कोई फीस का लेन-देन नहीं हो रहा, पर चूँकि हम इस परंपरा में, इस प्रक्रिया में जा रहे हैं, इसकी कीमत चुकाई जानी चाहिए।

52

किसी से ली गई साधना का ऋण दोष कैसे मिटता है?

शिव मंदिर में घी के पाँच दीपक और जीवों को सवा किलो अनाज

· 36:40–37:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप जब भी, जहाँ से भी कोई साधना करें, केवल इसी चैनल से नहीं, तो जिस व्यक्ति से साधना ली उसके नाम से साधना के पहले दिन और अंतिम दिन शिव मंदिर में कम से कम पाँच घी के दीपक जलाइए, ताकि ऋण दोष न हो। दूसरी बात: उस व्यक्ति के नाम से कम से कम सवा किलो अनाज, या खाने-पीने की कोई भी चीज, जीवों को खिलाइए — कुत्ते, बिल्ली, गाय को खिलाइए; भेड़ या बकरी को खिलाइए; किसी मनुष्य को खिलाइए। इतना करना चाहिए, और इससे उस व्यक्ति पर या आप पर कभी ऋण दोष नहीं पड़ेगा।

53

वे रोज प्रयास करते हैं कि अपने मुँह से पहले किसी जीव के मुँह में भोजन जाए

अपने से पहले जीव के मुँह में भोजन, और पूरा फल

· 37:02–37:37

वे कहते हैं कि वे रोज प्रयास करते हैं कि उनके मुँह में जाने से पहले किसी जीव के मुँह में भोजन जाए, क्योंकि उन्हें भी नहीं पता कि चैनल के बहुत से वीडियो कितने लोग कर रहे हैं, इसलिए ऋण दोष उन्हें भी लग रहा है। वे कहते हैं कि यह हम दोनों के बीच है: मैं कर रहा हूँ, आप भी कीजिए। हो यह सकता है कि जो फल सौ प्रतिशत मिलना था, वह इसी कारण न मिले; जब हम यह काम करते हैं, तो वह फल पूरा मिलेगा। सबको ऋण दोष से मुक्त होते हुए चलना चाहिए।

55

क्या दुर्गा सप्तशती का पाठ हिंदी में कर सकते हैं?

कवच, अर्गला, कीलक, तेरह अध्याय और तीनों रहस्य हिंदी में

· 38:21–38:58 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि कोई कठिनाई नहीं है। यदि आप एक दिन में तेरह अध्यायों का पाठ हिंदी में करना चाहें, तो कर सकते हैं; वही विधि रहेगी, सब कुछ हिंदी में कीजिए। कवच, अर्गला और कीलक भी हिंदी में पढ़िए, फिर तेरह अध्याय हिंदी में, और तीनों रहस्य भी हिंदी में। यदि महाविद्या क्रम में करें, यानी सात दिन में तेरह अध्याय, तो उसी तरह हिंदी में कीजिए, और जिस दिन दो अध्याय बताए गए हैं उस दिन ठीक वैसे ही पढ़िए। पूरा विधि-विधान "नवरात्रि 2022" नाम की प्लेलिस्ट में है।

56

यदि पाठ हिंदी में किया हो, तो हवन कैसे करें?

मूल मंत्र से हवन, और कुछ न जानने वालों के लिए अर्गला का पहला मंत्र

· 38:59–39:22 · Also a question

वे कहते हैं कि हवन मंत्र से कीजिए, जो मूल मंत्र दिया गया है उससे। वे वही दोहराते हैं जो अक्सर कहते हैं: यदि आप कुछ भी नहीं जानते, कोई मंत्र नहीं आता, तो अर्गला का पहला मंत्र अपने जीवन में ले आइए — "ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा"। उसे अपने जीवन में उतारिए, उसी से हवन कीजिए और उसी का जप कीजिए।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · पाठ से पहले 2.1

The verse the speaker prescribes for havan and japa is the first verse of the Argalā Stotra, जयन्ती मङ्गला काली.

Using it as the havan mantra when no other is known is the speaker's instruction, not the text's.

मूल पाठ पढ़ें →
1

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥

ॐ। जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा, तुम्हें नमस्कार है।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

57

क्या बीज मंत्र का जप चलते-फिरते किया जा सकता है?

नाम मंत्र हाँ, बीज मंत्र कभी नहीं

· 39:23–40:07 · Also a question

वे कहते हैं कि ग्रुप में एक प्रश्न बार-बार आ रहा था: यदि किसी कारण हम पूजा-पाठ न कर सकें और कहीं जा रहे हों, तो क्या जो मंत्र हम करते हैं — बीज मंत्र आदि, नवार्ण मंत्र — उसका जप चलते-फिरते कर सकते हैं? उनका उत्तर है कि जप नाम मंत्र का करना चाहिए। पूरे विधि-विधान के साथ एक अलग वीडियो बना है जो जल्द अपलोड होगा, पर बीज मंत्रों का जप कभी चलते-फिरते नहीं होता। जिन मंत्रों में न्यास आदि की प्रक्रिया बताई गई है, जिनका विधि-विधान से विनियोग है, जिनका जप माला से और निर्धारित दिशा में करना है — ऐसे मंत्र का चलते-फिरते जप कभी न करें।

58

चलते-फिरते किस मंत्र का जप किया जा सकता है?

अर्गला का पहला मंत्र, ॐ के साथ या बिना

· 40:08–40:32 · Also a question

वे कहते हैं कि जप नाम मंत्र का होता है। यदि दुर्गा जी आपकी इष्ट हैं, तो आप दुर्गा जी के नाम का, अर्गला के पहले मंत्र का जप कर सकते हैं। ॐ लगाने की जरूरत नहीं, और लगाएँ तो भी कोई कठिनाई नहीं; इसमें इतना उलझने की जरूरत नहीं — आराम से कीजिए। जब वह मंत्र मन में बैठ जाएगा, तो चलते-फिरते चलता रहेगा। आप इसे कर सकते हैं क्योंकि यह अधिक से अधिक एक नाम मंत्र है: इसमें भगवती के ग्यारह नाम हैं। इसका अभ्यास कीजिए, और दो-तीन महीने में ऐसा अभ्यास हो जाएगा कि मंत्र स्वप्न में भी चलेगा।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · पाठ से पहले 2.1

The first Argalā verse is a string of eleven names of the Goddess, from Jayantī to Svadhā, ending in a salutation.

Permission to do its japa while walking is the speaker's own ruling.

मूल पाठ पढ़ें →
1

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥

ॐ। जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा, तुम्हें नमस्कार है।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

59

तुलसी और शमी पर रोज दीपक जलाने से क्या होता है?

शत्रु-नाशक शमी और नारायण से जुड़ा स्वरूप

· 40:33–41:27 · Also a question

वे कहते हैं कि घर-घर में तुलसी जी पूजी जाती हैं, और शमी शत्रु-नाशक है। इन्हें केवल शनि भगवान का नहीं मानना चाहिए — कि शमी वृक्ष केवल शनि भगवान की प्रसन्नता के लिए पूजा जाता है। नारायण का स्वरूप शमी वृक्ष से जुड़ा है। जब भी शनि से जुड़ा कोई कष्ट हो और हवन आदि किया जाए, चाहे काले तिल की आहुति दें या शनि भगवान को दीपदान करें, यदि सूखी शमी की लकड़ी डालकर जलाएँ, तो उसका बहुत बड़ा प्रभाव होता है। इसलिए घर में तुलसी जी के साथ शमी का पेड़, अपराजिता की बेल, कनेर का पेड़ और गुड़हल के फूल का पेड़ लगाना चाहिए।

60

जिसका काम बन ही नहीं रहा, उसे क्या करना चाहिए?

एक साधना पकड़िए, और अर्गला के पहले मंत्र का विधान

· 41:46–42:29 · Also a question

अभिषेक जी से, जिनका काम नहीं बन रहा, और यह समस्या रखने वाले सब लोगों से वे निवेदन करते हैं: कोई एक साधना पकड़िए। आप कौन सा स्वरूप चाहते हैं, किस स्वरूप में आपका मन लगता है? वे कहते हैं कि उसी दिन रात नौ से दस के बीच किसी तरह एक वीडियो डालने का प्रयास करेंगे, और अर्गला के पहले मंत्र पर एक वीडियो पहले से है, जिससे कुलदेवी और योगिनियों सहित ग्यारह शक्तियाँ सिद्ध होती हैं। इन दोनों साधनाओं को जीवन में लाइए। जो आभिचारिक समस्या कट नहीं रही, वह कितनी भी बड़ी हो — उससे बहुत परेशान मत होइए, पैसा बर्बाद मत कीजिए, समय बर्बाद मत कीजिए, बल्कि इन साधनाओं को जीवन में उतारिए।

61

किसी का नाम बार-बार लेने से काम क्यों बनता है?

दिन भर किसी श्रोता का नाम पुकारने का उदाहरण

· 42:30–43:25 · Also a question

वे अभिषेक जी के ही नाम से उदाहरण देते हैं। मान लीजिए हम दिन भर उनके सामने उनका नाम लेते हैं — अभिषेक, अभिषेक, अभिषेक। मेरा ध्यान उनकी ओर न भी हो, तो भी जब भी अभिषेक जी गुजरते हैं, उन्हें सुनाई देता है कि यहाँ बैठा यह रुद्रांश सुबह-शाम बार-बार अभिषेक, अभिषेक बोल रहा है। वे एक दिन नहीं सुनेंगे, दो दिन नहीं, छह महीने नहीं; पर किसी समय उनके मन में आएगा कि यह व्यक्ति मेरा नाम इतना ले रहा है। वह क्षण, जब आप इन दो-तीन मंत्रों की साधना कर रहे हों और बार-बार उनका नाम ले रहे हों, और एक बार वे कृपा दृष्टि डाल दें — तब, वे कहते हैं, सबसे बड़े तांत्रिक के मुँह से क्या निकलेगा, आप कल्पना भी नहीं कर सकते।

62

यदि आप अभी अपने सारे शत्रुओं से नहीं लड़ सकते, तो क्या करें?

उन पर भरोसा रखिए, उस क्षण की प्रतीक्षा कीजिए, घबराइए मत

· 43:26–43:28 · Also a question

वे कहते हैं, तो कृपया उन पर भरोसा रखिए, और उस समय की प्रतीक्षा कीजिए। जब आपमें सबसे युद्ध करने की क्षमता नहीं है, तो घबराइए मत।

वे कहते हैं, तो कृपया उन पर भरोसा रखिए, और उस समय की प्रतीक्षा कीजिए। घबराइए मत। जब आपमें सबसे लड़ने की क्षमता नहीं है, तो जल्दबाजी मत कीजिए।

63

हनुमान जी या भगवती की पूजा करने पर भी कष्ट क्यों नहीं रुकता?

अभिचार की समय-सीमा, बारह दिन से बारह वर्ष तक

· 43:29–44:14 · Also a question

एक भाई ने उन्हें निजी मैसेज किया था कि शत्रु तांत्रिक बार-बार उनकी हर चीज का अंत कर देते हैं, पर वे खुद जो भी प्रक्रिया करते हैं, चाहे हनुमान जी की हो या भगवती की, उससे उन्हें कष्ट ही मिलता है, और जल्दी राहत नहीं मिलती। वे कहते हैं कि कठिनाई यह है कि जब शत्रु ने अभिचार किया है, तो उसकी एक समय-सीमा होती है। वह समय-सीमा आप पहले ही पार कर चुके हैं। अक्सर वह बारह दिन की होती है; बारह दिन से बारह वर्ष तक चलती है। आपको देर से पता चलता है। जब तक उस समय-बद्ध तंत्र की क्रिया नहीं टूटती, कुछ नहीं होगा और आप उसका अंत नहीं कर पाएँगे।

64

आभिचारिक तांत्रिक जिस पर हमला करता है, उससे ज्यादा देर तक क्यों टिकता है?

वे सक्रिय और संगठित रहते हैं, आप तीन दिन में छोड़ देते हैं

· 44:15–44:47 · Also a question

वे कहते हैं कि जैसे ही आप उसका अंत करने जाते हैं, आभिचारिक तांत्रिक बहुत सक्रिय होते हैं — आप उतने सक्रिय नहीं होते। आप एक दिन, दो दिन, तीन दिन पूजा-पाठ करेंगे; परिणाम नहीं आएगा और आप छोड़ देंगे। वह कभी नहीं छोड़ता। गलत काम करने वाले ये लोग तुरंत पूरी तरह सक्रिय रहते हैं, देखते रहते हैं कि कौन कहाँ से क्या कर रहा है। वे भूत-प्रेत की पूरी चौकी बैठाकर रखते हैं, यह पूजा, वह पूजा, उनका पूरा समूह आपस में बँधा रहता है। वे कहते हैं कि बहुत गलत लोग समूह बहुत अच्छे से बनाते हैं; अच्छे लोग नहीं बना पाते।

65

सक्रिय शत्रु के विरुद्ध हनुमान पूजा शुरू करने पर क्या होता है?

पहले दिन राहत, फिर हमला परिवार की ओर मुड़ जाता है

· 44:48–45:08 · Also a question

हनुमान जी की चौकी बैठी है; आप तय करते हैं कि हनुमान जी की पूजा करेंगे। आपने पहले दिन पूजा की, उन्हें पता चल गया, और वहाँ आपको थोड़ी राहत महसूस होगी। उनकी ओर से वे ऐसे चार-पाँच काम करेंगे — सीधे आप पर नहीं, क्योंकि आप कर रहे हैं, तो वे आपके परिवार में किसी और पर कुछ करेंगे। आपके घर में चौकी बैठी है, आप घर में हनुमान जी की पूजा कर रहे हैं, पर किसी समय आप बाहर जाएँगे; कुछ ऐसा होगा कि थोड़ी देर के लिए भी शरीर अशुद्ध या अपवित्र हो जाए।

66

शक्ति की कृपा बनने में कितना समय लगता है?

डेढ़ से तीन वर्ष का लगातार अभ्यास

· 45:09–45:30 · Also a question

वे कहते हैं कि कलियुग है, शरीर भी वैसा ही है, और अभी नया होने के कारण आपकी ऊर्जा क्षमता इतनी नहीं बनी कि शत्रु जो भी प्रयोग करे उसे सह सकें। वह अवस्था बाद में आती है। डेढ़ साल, दो साल, तीन साल लगातार पूरी श्रद्धा और विश्वास से लगता है; तब शक्ति की कृपा वैसी होती है।

वे कहते हैं कि कलियुग है। शरीर भी वैसा ही है, और अभी इसमें नए होने के कारण आपकी ऊर्जा क्षमता ऐसी नहीं बनी कि शत्रु जो भी प्रयोग करे, उसे आप सह सकें। वह अवस्था बाद में आती है। डेढ़ साल, दो साल, तीन, तीन साल लगातार पूरी श्रद्धा और विश्वास से लगता है; तभी शक्ति की कृपा वैसी होती है।

67

वे कौन सी छोटी साधना कहते हैं जो हर किसी को करके रखनी चाहिए?

रुद्रगण साधना और शिव व नारायण की कृपा

· 45:31–45:44 · Also a question

वे कहते हैं कि कुछ छोटी साधनाएँ हैं — वे बार-बार दोहराते हैं कि हर एक व्यक्ति को रुद्रगण साधना करके रखनी चाहिए। भगवान शिव और नारायण, दोनों की कृपा इस तरह मिलती है कि आपको पता नहीं चलेगा कि जीवन में कब और कहाँ इसकी जरूरत पड़ जाए।

वे कहते हैं कि कुछ क्षणिक साधनाएँ, जैसे रुद्रगण साधना, वे बार-बार बताते हैं: हर किसी को रुद्रगण साधना करके रखनी चाहिए। भगवान शिव और नारायण, दोनों की कृपा इस तरह मिलती है। आपको पता नहीं चलेगा कि जीवन में कब और कहाँ इसकी जरूरत पड़ जाए।

68

हमला करने वाले मनोवैज्ञानिक रूप से कैसे काम करते हैं?

परिवार का कोई बीमार पड़ता है, आप पूजा छोड़ देते हैं और नकारात्मक हो जाते हैं

· 45:45–46:21 · Also a question

वे कहते हैं कि जब शत्रु करता है, तो आपका शरीर उस क्षमता तक नहीं पहुँचा होने से आप हिल जाएँगे। अब आपके परिवार का कोई और सदस्य बीमार पड़ गया, और फिर आप पूजा-पाठ छोड़ देंगे। आप उतनी दूर तक नहीं पहुँच पाएँगे और नकारात्मक होते जाएँगे। वे कहते हैं कि एक तरह से वे ये सारे खेल मनोवैज्ञानिक रूप से खेलते हैं; वे काफी मजबूत हैं, वे आप जैसे नहीं हैं, और इतनी जल्दी हार नहीं मानेंगे।

69

जब बाँस जलाना मना है, तो क्या मंदिरों में अगरबत्ती जलाना धर्म की हानि नहीं?

अगरबत्ती का प्रश्न, पहले से बने वीडियो की ओर इशारा करके उत्तर

· 46:22–47:25 · Also a question

आदित्य राज जी पूछते हैं कि बाँस जलाना वर्जित है, और आजकल सभी छोटे-बड़े हिंदू मंदिरों में अगरबत्ती है — क्या इससे धर्म की हानि नहीं हो रही? वक्ता उत्तर देते हैं कि इसी चैनल पर इस विषय से जुड़ा एक वीडियो है जिसमें काफी छोटी-छोटी बातें समझाई गई हैं, और उनसे उसे एक बार सुनने को कहते हैं।

आदित्य राज जी का प्रश्न है कि बाँस जलाना वर्जित किया गया है, और आजकल सभी छोटे-बड़े हिंदू मंदिरों में अगरबत्ती है — क्या इससे धर्म की हानि नहीं है? वे उत्तर देते हैं कि इसी चैनल पर इस विषय से जुड़ा एक वीडियो है। उसमें काफी छोटी-छोटी बातें समझाई गई हैं; कृपया उसे एक बार सुन लीजिए।

70

जब आप बहुत नीचे गिरें, तो क्या गुरु आपको सँभाल सकते हैं?

गुरु मंडल की कृपा, और आध्यात्मिक व्यक्ति कभी क्यों नहीं हारता

· 47:45–48:11 · Also a question

जीने के लिए मार्गदर्शन और ऐसे गुरु की चाह वाली टिप्पणी पर, जो बहुत नीचे गिरने पर आपको थाम ले, वे कहते हैं कि जब गुरु की — और सच कहें तो, वे कहते हैं, गुरु मंडल की — कृपा आती है, तो ये सब बातें नगण्य हो जाती हैं। आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली व्यक्ति इनमें से किसी चीज से कभी नहीं हारता। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, वह रोएगा, जरूर रोएगा; पर उसका रोना केवल उसके गुरु देखते हैं, और वही पार लगाते हैं।

71

भौतिक गुरु असल में कितनी मदद कर सकते हैं?

वे आपके लिए एक पूजा कर देंगे और एक दिन ऊब जाएँगे

· 48:12–48:24 · Also a question

वे कहते हैं कि भौतिक गुरु आपकी उस स्तर तक कभी मदद नहीं कर पाएँगे — आप देखेंगे। वे आपकी कितनी मदद करेंगे? आपको परेशानी है और आप उन्हें बताएँगे; वे क्या मदद करेंगे? वे आपके लिए कोई पूजा-पाठ कर देंगे, कुछ बता देंगे। एक समय वे ऊब जाएँगे।

वे कहते हैं कि भौतिक गुरु आपकी उस स्तर तक कभी मदद नहीं कर पाएँगे; आप यह देखेंगे। वे आपकी कितनी मदद करेंगे? आपको कोई परेशानी है, आप उन्हें बताएँगे, और वे क्या मदद करेंगे? वे आपके लिए कोई पूजा-पाठ कर देंगे, कुछ बता देंगे। एक समय वे ऊब जाएँगे।

72

जो दीक्षित लोग कभी अपने गुरु को देख ही नहीं पाते, उनके बारे में वे क्या कहते हैं?

दीक्षा ली, गुरु का मुँह कभी नहीं देखा, मिलने के लिए अपॉइंटमेंट

· 48:25–49:12 · Also a question

वे कहते हैं कि सुनने वालों में बहुत से दीक्षित होंगे — और उनमें कितने ऐसे होंगे जो दीक्षा लेने के बाद अपने गुरु जी का मुँह भी नहीं देख पाए। ऐसा भी होता है। दीक्षा ले ली और गुरु जी मिलते ही नहीं; उनसे मिलने के लिए भी अपॉइंटमेंट चाहिए। तो दीक्षा से क्या मिला? लोग दीक्षा लेकर गली-गली भटक रहे हैं। ऐसी दीक्षा का क्या लाभ? हम उनके पास जाएँगे जो बुलाते ही आ जाएँ, और इसके लिए गुरु मंडल की कृपा ही चाहिए।

73

तांत्रिक बंधन क्या है और कैसे किया जाता है?

प्रसाद के जरिए बंधन, और आभामंडल का दूषित होना

· 49:13–49:58 · Also a question

एक श्रोता ने बताया कि एक सोखा ने उसे दिखाया था कि उसके शरीर का बंधन कर दिया गया है, और पूछा कि यह कैसे खुलेगा। वक्ता समझाते हैं कि किसी भी तांत्रिक बंधन के तरीके ऐसे होते हैं कि पास आकर करना जरूरी नहीं। जब व्यक्ति शुरू में ये सब बातें नहीं जानता, तो लोग प्रसाद देकर भी बंधन कर देते हैं। बंधन का अर्थ है कि हमारा आभामंडल एक तरह से दूषित हो जाता है। शुभ शक्तियाँ अपना प्रभाव नहीं दे पातीं — और दें भी कैसे? हमारे षट्चक्रों में से किसी एक में मात्रा बढ़ा दी गई होगी, जिससे शरीर में कहीं असंतुलन हो जाता है, और हमें वह प्रभाव ठीक से नहीं मिल पाता।

74

नाड़ी से कैसे पता चले कि बंधन किया गया है?

सुषुम्ना का बहुत कम चलना

· 49:59–50:19 · Also a question

वे कहते हैं कि स्वप्न विद्या पर डाले गए वीडियो में उन्होंने समझाया है कि नाड़ी कैसे देखी जाती है और नाड़ी से बात कैसे समझी जाती है। वही चीज यहाँ भी प्रयोग की जा सकती है। जिस व्यक्ति पर बंधन किया गया है, उसकी सुषुम्ना नाड़ी बहुत कम चलेगी; कितना भी प्रयास करे, वह जल्दी नहीं चलेगी। कठिनाइयाँ शुरू हो जाएँगी।

75

बंधन वाला व्यक्ति मंदिर में क्यों बेचैन हो जाता है?

मंदिर की सकारात्मकता का दूषित आभामंडल से टकराना

· 50:20–50:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब भी ऐसा बंधन लगा हुआ व्यक्ति शुभ शक्तियों के संपर्क में आएगा, तो वह बहुत बेचैन होगा। मंदिर जाएगा तो वहाँ छटपटाएगा, उसे वहाँ कठिनाई होगी। क्यों? क्योंकि मंदिर में जाने के बाद उसके शरीर का आभामंडल और मंदिर की सकारात्मकता — वह सकारात्मकता उस चीज को हटाने का प्रयास करेगी, और उसके शरीर में कष्ट होगा।

76

किसी भी तांत्रिक बंधन के दो सबसे अच्छे उपाय क्या हैं?

दत्त माला मंत्र या तंत्रोक्त बजरंग बाण, जीवन भर के लिए

· 50:45–51:20 · Also a question

वे कहते हैं कि बंधन से मुक्ति के लिए, आपके शरीर में किसी भी तरह के तांत्रिक बंधन के लिए, दो सबसे अच्छे उपाय हैं। पहला, दत्त माला मंत्र को पकड़कर जीवन में लाइए। दूसरा, तंत्रोक्त बजरंग बाण, पूरा बजरंग बाण, जो चैनल पर दिया गया है। इन दोनों में से कोई एक अनुष्ठान जीवन भर के लिए अपने जीवन में उतार लीजिए, तो कोई तांत्रिक कुछ नहीं कर पाएगा। एक बार ऊर्जा बन जाए और बंधन एक बार टूट जाए, तो आप वह अनुष्ठान बार-बार करते रहेंगे, और फिर चीजें आपके पक्ष में होने लगेंगी।

77

किसी ने घर में तंत्र क्रिया कर दी है — सबसे पहले क्या देखना चाहिए?

यह घर पर है, किसी एक सदस्य पर, या पूरे परिवार पर

· 51:21–51:35 · Also a question

इंडिया विकास जी से, जो कहते हैं कि उनके घर में तंत्र क्रिया की गई है, वे कहते हैं कि बहुत सारे उपाय बताए गए हैं और कम से कम एक बार चैनल देखिए, फिर समझ न आए तो जरूर पूछिए। जब भी घर में तंत्र क्रिया की गई हो, तो पहली बात यह है कि वह केवल घर पर की गई है या सदस्यों पर है — किसी एक सदस्य पर है या पूरे घर में परेशानी है।

78

किसी पर तंत्र होने पर वे कौन से दो तरह के मामले देखते हैं?

खुद कुछ कर सकने वाला व्यक्ति, और दूसरों से करवा-करवा कर थका व्यक्ति

· 51:36–52:03 · Also a question

वे कहते हैं कि जब किसी पर तंत्र विचार आता है, तो आप दो तरह के मामले देखेंगे। एक, व्यक्ति खुद कुछ करने में सक्षम है। दूसरा, व्यक्ति करवा-करवा कर थक चुका है — कितने ओझा, सोखा, गुनी, तांत्रिक और पंडित जी घर आए, अनुष्ठान करके चले गए, और कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा।

वे कहते हैं, जानते हैं, जब किसी पर तंत्र विचार होता है, तो आप दो तरह के मामले देखेंगे। एक यह कि व्यक्ति खुद कुछ करने में सक्षम है। दूसरा यह कि व्यक्ति करवा-करवा कर थक चुका है। कितने ओझा, सोखा, गुनी, तांत्रिक, पंडित जी घर आए, अनुष्ठान करके चले गए, और कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा।

79

ऐसे व्यक्ति के लिए उपाय बार-बार असफल क्यों होते हैं?

प्रारब्ध पहले से बना, समय निकल चुका, शत्रु पूरी तरह सक्रिय

· 52:04–52:24 · Also a question

वे कहते हैं कि जिन्हें इस तरह की समस्या आती है, उनका प्रारब्ध उसी तरह बन चुका होता है। एक तो, समय पहले ही निकल चुका है। और दूसरी और सबसे बड़ी बात, जो वे बार-बार कहते हैं, यह है कि उनका शत्रु पक्ष पूरी तरह सक्रिय है। शत्रु जितना सक्रिय रहेगा, आपको उतना कष्ट होगा; और यदि आप उस सक्रियता तक नहीं पहुँचे, तो कष्ट आप पर पड़ेगा।

80

सच्चे साधक को बहुत जल्दी छोड़ देने पर क्या होता है?

तुरंत परिणाम चाहना और विश्वास छोड़ देना

· 52:25–53:02 · Also a question

वे कहते हैं कि वास्तविकता यह है कि यदि आप सच में किसी सही व्यक्ति तक पहुँचे हैं और वह आपके लिए कोई प्रक्रिया कर रहा है, काट-छाँट कर रहा है, आपके लिए तंत्रोक्त क्रियाएँ कर रहा है, और आपको परिणाम नहीं मिलता जबकि आपको तुरंत परिणाम चाहिए — हो सकता है दो-चार दिन में और कुछ परिणाम आ जाता, या अगली बार आ जाता, पर आप विश्वास छोड़कर उसे छोड़ देते हैं। और वहीं परेशानी फिर शुरू हो जाती है। कुछ दिन समस्या से छुटकारा मिलता है, फिर वही होता है, क्योंकि सक्रिय तंत्र का अर्थ है कि शत्रु जितना अपना तंत्र जगाए रखेगा, आपको उतना कष्ट होगा।

81

उच्चाटन क्रिया मन पर क्या करती है?

मन कहीं नहीं लगता, और किसी पर भरोसा नहीं होता

· 53:03–53:19 · Also a question

वे कहते हैं कि सबसे बड़ी बात यह है कि यदि उच्चाटन क्रिया की गई है, तो आपका मन किसी भी हाल में कहीं नहीं लगेगा। आप किसी पर भरोसा नहीं कर पाएँगे। यदि आप किसी को धूप-दीप जलाने के लिए सौ रुपये भी दें, तो मन में यह आएगा — हटाओ, उसके पास तो जाना ही नहीं चाहिए, वह मन खराब करता है, ऐसी-ऐसी चीजें करने को कहता है। तो यदि उच्चाटन क्रिया है, तो कठिनाई होगी, और इन सब चीजों से छुटकारा तभी मिलेगा जब आप कुछ करेंगे। और मन उचाट रहे तो आप कुछ भी नहीं कर पाएँगे।

82

जब पक्का हो जाए कि अभिचार हुआ है, तब क्या करना चाहिए?

मनोवैज्ञानिक रूप से विचलित होने के बजाय स्वीकार करके लड़िए

· 53:20–53:58 · Also a question

वे कहते हैं कि इसलिए जब भी घर में अभिचार हो, जब यह बात समझ में आ जाए कि आभिचारिक चीजें हो चुकी हैं, तो मनोवैज्ञानिक रूप से विचलित मत होइए, बल्कि यदि बातें सच में वैसी हैं तो स्वीकार करके लड़िए। अपने भीतर इतनी क्षमता रखिए कि युद्ध कर सकें। वह कहाँ से आएगी? जब आप चीजों को समझेंगे और जानेंगे। उनके विचार से इस चैनल के तंत्र से जुड़े बहुत से वीडियो सुनकर हर चीज समझ आएगी और सब कुछ साफ हो जाएगा; उसके बाद लड़िए। सब कुछ दिया गया है।

83

हनुमान जी ने केवल राम नाम से बड़े-बड़े काम किए, फिर भी लोग उन पर भरोसा नहीं करते

हनुमान जी ने राम नाम से बड़े काम किए, फिर भी लोग उन पर भरोसा नहीं करते

· 53:59–54:05

वे कहते हैं कि हनुमान जी केवल राम जी का नाम लेकर इतने बड़े-बड़े काम कर सकते हैं, और फिर भी आप सबको उन्हीं हनुमान जी पर भरोसा ही नहीं है।

वे कहते हैं कि हनुमान जी केवल राम जी का नाम लेकर इतने बड़े काम कर सकते हैं। पर उन्हीं हनुमान जी पर आप सबको भरोसा ही नहीं है।

84

पूछने पर कि क्या किया है, लोग अब सीधे बगलामुखी या प्रत्यंगिरा से शुरू करते हैं

सीधे बगलामुखी या प्रत्यंगिरा से शुरुआत

· 54:06–54:26

वे कहते हैं कि आजकल यदि हम पूछें कि आपने कौन सी साधना की है, तो सबसे पहले यही आता है कि वे भगवती बगलामुखी की साधना कर चुके हैं, या प्रत्यंगिरा साधना कर चुके हैं। वे इतनी बड़ी साधनाएँ सीधे शुरू कर देते हैं — और वे कहते हैं कि ठीक यहीं से कठिनाइयाँ भी पैदा होती हैं।

वे कहते हैं कि आजकल यदि हम किसी से पूछें कि उसने कौन सी साधना की है, तो सबसे पहले यही आता है कि या तो वह भगवती बगलामुखी की साधना कर चुका है या प्रत्यंगिरा साधना कर चुका है। वे इतनी बड़ी साधनाएँ सीधे शुरू कर देते हैं। ठीक यहीं से कठिनाइयाँ भी आती हैं।

85

सिद्धि के प्रति इतना आकर्षण क्यों है?

अपने अहंकार को संतुष्ट करना और मोटा करना

· 54:27–55:05 · Also a question

वे कहते हैं कि सिद्धि का आकर्षण इसलिए है क्योंकि वास्तव में हम सिद्धि इसलिए चाहते हैं कि लोगों में यह बात पहुँचे कि इस व्यक्ति के पास सिद्धि है — अपने मन की संतुष्टि के लिए। ताकि अपना अहंकार संतुष्ट हो और मोटा हो, और लोग हमारे बारे में कहें कि हाँ, इसके पास सिद्धि है।

वे कहते हैं कि सिद्धि का आकर्षण इसलिए है क्योंकि सच में हम सिद्धि इसलिए चाहते हैं कि लोगों में यह बात पहुँचे कि इस व्यक्ति के पास सिद्धि है — अपने मन की संतुष्टि के लिए। ताकि अपना अहंकार संतुष्ट हो, मजबूत हो। कि लोग हमारे बारे में कहें: हाँ, इसके पास सिद्धि है।

86

क्या खेचरी विद्या बोलकर सिखाई जा सकती है?

योग क्रियाओं के लिए योग में सिद्ध सनातनी गुरु चाहिए

· 55:06–55:50 · Also a question

खेचरी विद्या के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि योग की क्रियाएँ बोलकर नहीं बताई जा सकतीं — यह ध्यान रखिए। चाहे खेचरी विद्या हो या कोई और विद्या, खेचरी बिना मुद्रा के केवल विद्या के रूप में सिद्ध नहीं होती। और ये सब करने के लिए आपको योग में सिद्ध किसी सनातनी गुरु के पास जाना होगा; किसी पश्चिमी गुरु के पास इनमें से कुछ नहीं मिलेगा।

87

क्या अपने ही परिवार के दुष्ट लोगों के विरुद्ध कुछ करने में दोष है?

धर्म के मार्ग में दुष्टता करने वाले पर किसी भी क्रिया में दोष नहीं

· 55:51–56:38 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि धर्म के मार्ग में बाधा डालने वाले अपने ही कुल के गलत लोगों का उपचार करने में क्या कोई दोष है, वक्ता उत्तर देते हैं कि जो भी धर्म के मार्ग में दुष्टता करता है — किसी भी तरह से करे, चाहे तंत्र से या किसी और तरह से — उस पर किसी भी तरह की क्रिया करने से किसी भी तरह का दोष नहीं लगता। वे एक व्यक्ति का मैसेज याद करते हैं जिसने पूछा था कि किसी दुष्ट व्यक्ति पर मारण जैसा कर्म करने से दोष लगता है या नहीं। यदि कोई आपकी स्त्री छीन ले, आपका धन हड़प ले, उस तरह की क्रियाएँ करे, आपके मान-सम्मान को कष्ट पहुँचाए, तो वहाँ, वे कहते हैं, तंत्र की निकृष्ट से निकृष्ट प्रक्रिया करने से भी कोई दोष नहीं लगता, क्योंकि कहीं न कहीं आप अपना धर्म निभा रहे हैं।

88

क्या दत्त माला मंत्र का जप एक ही बैठक में बारह सौ या बारह हजार बार करना जरूरी है?

रोज एक सौ आठ, और ग्यारह दिन का संकल्प

· 56:39–57:20 · Also a question

वे उत्तर देते हैं, नहीं, यह जरूरी नहीं, पर करें तो ठीक है। रोज एक सौ आठ का जप कीजिए। कम से कम पाँच से सात दिन के संकल्प के साथ चलिए; ग्यारह दिन लें तो बेहतर, और ग्यारह दिन में ग्यारह सौ पूरे हो जाएँगे। फिर कुछ दिन रुकिए, फिर ग्यारह सौ कीजिए, फिर रुकिए, फिर दोबारा कीजिए। यदि आप जारी रख सकें और इसे आदत बना सकें — एक बार में न कर पाएँ और आपका समय ऐसा हो कि सुबह-शाम कर सकें, तो सुबह चौवन और शाम चौवन कीजिए, या रात में कीजिए। पर इसे जीवन में लाइए।

89

किसी व्यक्ति को शराब और दूसरे नशों से कैसे छुड़ाएँ?

सामान्य लत बनाम पीने के पीछे की आभिचारिक क्रिया

· 57:21–58:22 · Also a question

वे कहते हैं कि यहाँ दो तरह की बातें होती हैं। एक, व्यक्ति को सामान्य तरीके से लत लग गई है; वहाँ विषय अलग हो जाता है। दूसरी, जहाँ आभिचारिक क्रिया जुड़ी है। आभिचारिक क्रिया में यदि आप उसे झटके से छुड़वाएँ, तो उसके सिर को कष्ट होता है; और यदि आप उसे काटते जाएँ, तो जड़ में इतना बुरा तंत्र जुड़ा होता है कि जब व्यक्ति शराब छोड़ेगा, तो उसके शरीर में कोई गंभीर बीमारी जरूर आएगी, क्योंकि उसके साथ पहले से इस तरह की चीजें की जा चुकी हैं। वे कहते हैं कि इसीलिए जब लोग उनसे इस तंत्र की काट पूछते हैं तो वे इसे स्पष्ट नहीं करते — बता भी दें तो वे करेंगे कैसे? ये मलिन तरह के तंत्र हैं।

90

परेशान व्यक्ति को छुड़ाने के लिए दत्त माला मंत्र का प्रयोग अभिमंत्रित प्रसाद और किसी वस्तु के उच्चाटन से कैसे करें?

अभिमंत्रित प्रसाद, और व्यक्ति के बजाय वस्तु का उच्चाटन

· 58:23–58:51 · Also a question

वे कहते हैं कि सबसे अच्छा यह है कि यदि परेशानी है और आप दत्त माला मंत्र का ग्यारह हजार जप कर चुके हैं, तो उसी मंत्र से प्रसाद अभिमंत्रित करके उन्हें खिलाइए। उच्चाटन किसी वस्तु का भी होता है: तंत्र की प्रक्रिया किसी भी चीज पर काम करती है — यह महातंत्र है। तो इस दत्त माला मंत्र से वह वस्तु लीजिए जो संबंधित व्यक्ति को पसंद हो; खाना तो वह खाता ही होगा।

91

सेंधा नमक प्रयोग क्या है?

एक सौ आठ बार अभिमंत्रित सेंधा नमक, ग्यारह दिन भोजन में मिलाया हुआ

· 58:52–59:15 · Also a question

वे कहते हैं कि सेंधा नमक होता है: दत्त माला मंत्र से एक सौ आठ करके सेंधा नमक अभिमंत्रित कीजिए। पूरे ग्यारह दिनों के लिए कम से कम सवा सौ ग्राम नमक लाकर रखिए और उसे अभिमंत्रित कीजिए। फिर घर में जो भी स्त्री हो, उससे कहिए कि जब उसे भोजन दिया जाए, तो यह नमक दाल या सब्जी में मिलाकर दिया जाए। पर मंत्र आपने पहले से सिद्ध किया हुआ होना चाहिए, कम से कम तीन से छह महीने अच्छे से जपा हुआ।

92

नमक पर की जाने वाली प्रार्थना भगवान दत्तात्रेय से उस व्यक्ति का उस चीज से उच्चाटन माँगती है

भगवान दत्तात्रेय से प्रार्थना और नमक का खत्म होना

· 59:16–59:44

वे कहते हैं, यह प्रक्रिया करके देखिए। वहाँ बस इतना कहना है: हे भगवान दत्तात्रेय, ऐसी कृपा कीजिए कि इस व्यक्ति का इस चीज से उच्चाटन हो जाए। आप यह धर्म के मार्ग पर कर रहे हैं। जब आप करके देखेंगे, तो वह नमक खत्म होते-होते व्यक्ति उच्चाटित हो जाएगा। इस तरह घर में जो भी गलत मार्ग पर जा रहा हो, यदि आप साधक हैं तो इन चीजों का ऐसे प्रयोग कर सकते हैं; आपको किसी और के पास जाने की जरूरत नहीं। वे कहते हैं, खुद सक्षम बनिए।

93

अभिमंत्रण और यंत्र की प्रक्रियाएँ इसलिए नहीं बताई जातीं क्योंकि सक्षम लोग उनके लिए यूट्यूब पर नहीं आते

सक्षम लोग इन्हें खोजने यूट्यूब पर नहीं आएँगे

· 59:45–1:00:20

वे कहते हैं कि अभिमंत्रण करने की प्रक्रिया, और यंत्र आदि का प्रयोग, वे इसलिए नहीं बताते कि उस हद तक सक्षम लोग इसे खोजने शायद ही यूट्यूब पर आएँगे, और सीख भी लें तो शायद ही करेंगे। वे बस सुनकर आगे बढ़ जाएँगे। जिन्हें करना होता है, वे सच में पूछते हैं, और करते भी हैं।

वे कहते हैं कि अभिमंत्रण करने की प्रक्रिया, यंत्र आदि का जो प्रयोग है, वह वे इसलिए नहीं बताते कि उस हद तक सक्षम लोग इसे खोजते हुए शायद ही यूट्यूब पर आएँगे। और सीख भी लें, तो क्या करेंगे? वे बस सुनकर आगे बढ़ जाएँगे। जिन्हें करना होता है, वे सच में पूछते हैं, और करते भी हैं।

94

हिंदी सप्तशती पाठ का क्रम संस्कृत जैसा ही है, चाहे एक दिन में हो या सात में

संस्कृत जैसा ही क्रम, एक दिन या सात

· 1:00:21–1:00:53

श्रेयस कापरी जी को वे उत्तर दोहराते हैं: हिंदी में सप्तशती पाठ उसी तरह करना है जैसी संस्कृत में करने की विधि है। एक दिन में करें, तो कवच, अर्गला, कीलक, तेरह अध्याय, और फिर तीनों रहस्य। यदि एक दिन में न कर सकें और सात दिन में करना हो, तो महाविद्या क्रम पाठ की विधि अपनाइए — पहले दिन पहला अध्याय, दूसरे दिन दूसरा और तीसरा अध्याय, और इसी तरह।

95

क्या हिंदी पाठ में शाप उद्धार और उत्कीलन जरूरी है?

ये संस्कृत पाठ के हैं; हिंदी में भाव प्रधान है

· 1:00:54–1:01:15 · Also a question

वे कहते हैं कि यह प्रश्न भी था: जब हम हिंदी में पाठ करते हैं, तो क्या शाप उद्धार और उत्कीलन की विधि करना जरूरी है? वे उत्तर देते हैं कि वह संस्कृत का पाठ है, और यह जरूरी नहीं, क्योंकि यहाँ भाव पाठ हो रहा है। हिंदी में पढ़ेंगे तो वह मंत्रोक्त पाठ नहीं होगा। इसलिए आपको यह बिल्कुल करने की जरूरत नहीं। निश्चिंत होकर कीजिए; तब भी भगवती पूजा स्वीकार करेंगी, क्योंकि यहाँ मंत्र से ज्यादा भाव प्रधान होगा।

96

संस्कृत और हिंदी पाठ के भाव में क्या अंतर है?

रोंगटे खड़े होना, और भगवती का रक्त पीना

· 1:01:16–1:01:56 · Also a question

वे कहते हैं कि संस्कृत उच्चारण से जो भाव आता है, वह अलग तरह से आता है; चीजें मंत्रोक्त होती हैं, और शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पर वही चीज जब आप हिंदी में करते हैं, तो वह भी भाव प्रधान है। जब आप वह अंश पढ़ते हैं जिसमें भगवती ने मधु पीते हुए कहा — क्षण भर गरज ले, उसके बाद मैं तेरा रक्त पिऊँगी — तो कहते समय आपके भीतर जो भाव आता है, जब रोम-रोम खड़ा हो जाता है, उस भाव से भगवती प्रसन्न होकर कृपा करती हैं। इसलिए इस भ्रम में मत रहिए कि हिंदी में पढ़ेंगे तो कोई फल नहीं मिलेगा; जगदंबा उतनी ही कृपा करेंगी।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · तेरह अध्याय 3.38

The Goddess, drinking wine, tells Mahiṣa to roar a moment longer, for once she kills him the gods will soon roar.

The speaker paraphrases it as "I shall drink your blood"; the verse speaks of wine and of the gods' roar.

मूल पाठ पढ़ें →
38

गर्ज गर्ज क्षणं मूढ मधु यावत्पिबाम्यहम् । मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यन्त्याशु देवताः ॥ ३८ ॥

“अरे मूढ़! जब तक मैं मधु पीती हूँ, तब तक क्षणभर गरज ले, गरज ले। मेरे हाथों यहीं तेरे मारे जाने पर शीघ्र ही देवता गरजेंगे।”

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

97

समय के साथ सप्तशती के साधक के साथ क्या हो सकता है?

सात सौ मंत्र कंठस्थ, और नींद में माथे पर दिखता मंत्र

· 1:01:57–1:02:27 · Also a question

वे कहते हैं कि साधक के जीवन में एक समय ऐसा भी आता है जब सप्तशती के सात सौ मंत्र भी याद हो जाते हैं, और वह बिना देखे पढ़ने लगता है। यहाँ भी बहुत से साधक होंगे जो कभी-कभी अपने जीवन में देखते हैं कि जब वे एक मंत्र बार-बार पढ़ते हैं, तो सोते समय वह मंत्र उनके माथे पर दिखाई देता है। ऐसा भी होता है। ये बातें तब होती हैं जब वे शक्तियाँ कृपा करती हैं, जब वह मंत्र आपके तन-मन में घुल जाता है।

98

नरसिंह का सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

शताक्षरी, जो चैनल पर दिया गया है

· 1:02:28–1:03:15 · Also a question

अनुभव तिवारी जी के पूछने पर कि नरसिंह का शक्तिशाली मंत्र कौन सा है, वे उत्तर देते हैं: शताक्षरी। यह इसी चैनल पर दिया गया है; चैनल पर नरसिंह शताक्षरी मंत्र खोजिए, वह दिया गया है। आप सब इसे कर सकते हैं।

यह पूछे जाने पर कि नरसिंह का शक्तिशाली मंत्र कौन सा है, वे उत्तर देते हैं: शताक्षरी। यह इसी चैनल पर दिया गया है। अनुभव तिवारी जी चैनल पर नरसिंह शताक्षरी मंत्र खोजें, वह दिया गया है। आप सब इसे कर सकते हैं।

99

क्या गुरु गोरखनाथ जी को गुरु मानकर पूजा की जा सकती है?

हाँ में एक छोटा उत्तर

· 1:03:16–1:03:28 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या गुरु गोरखनाथ जी को गुरु मानकर पूजा की जा सकती है, वे उत्तर देते हैं कि बिल्कुल की जा सकती है।

यह पूछे जाने पर कि क्या गुरु गोरखनाथ जी को गुरु मानकर पूजा की जा सकती है, वे उत्तर देते हैं कि बिल्कुल की जा सकती है।

100

सवा लाख नवार्ण अनुष्ठान में क्या नवग्रह और षोडश मातृका मंडल जरूरी हैं?

अखंड दीपक, और हर पूजन घट पर ही

· 1:03:29–1:04:51 · Also a question

राजू आचार्य जी पूछते हैं कि नवरात्रि में नवार्ण मंत्र के सवा लाख जप के लिए क्या घट स्थापना के साथ नवग्रह मंडल और षोडश मातृका मंडल स्थापित करने जरूरी हैं, और क्या इनकी रोज पूजा करनी है। वे उत्तर देते हैं कि यदि आप सवा लाख का अनुष्ठान करने जा रहे हैं, तो कम से कम, और कुछ नहीं तो, अखंड दीपक जरूर जलाइए। मंडलों के बारे में: यदि आप घट स्थापना करते हैं, तो सारी पूजा उसी घट पर कीजिए। अलग मंडल बनाने की जरूरत नहीं — षोडश मातृका पूजन घट पर कीजिए, नवग्रह पूजन घट पर कीजिए, और रोज की पूजा भी उसी पर कीजिए, केवल नाम से, "नवग्रहेभ्यो नमः यथा उपलब्ध उपचारम् समर्पयामि" कहकर एक फूल चढ़ाइए; पर नाम से जरूर चढ़ाइए।

101

एक बार घट स्थापना कर लें, तो क्या उसे दोहराना बाध्य हो जाता है?

पाँच वर्ष तक उसी नवरात्रि में भगवती को फिर बुलाना

· 1:04:52–1:05:21 · Also a question

वे कहते हैं कि वे बार-बार कहते हैं — अब तक मिली सारी शिक्षा-दीक्षा और जो भी गुरु कृपा है, उससे उन्होंने यह जाना है: यदि आप किसी नवरात्रि में घट स्थापना करते हैं, तो अगले साल वह नवरात्रि फिर आने पर उसमें भी घट स्थापना करनी पड़ेगी, और यह पाँच वर्ष तक करनी चाहिए। नियम यह माना जाता है कि पाँच वर्ष तक आप उस नवरात्रि में भगवती को बार-बार बुलाएँगे, और घर की शक्तियाँ वहाँ जागृत रहती हैं। इसलिए यदि आप गुप्त नवरात्रि में घट स्थापना करते हैं, तो हर साल उसी गुप्त नवरात्रि में बार-बार घट स्थापना करनी चाहिए। यदि नहीं करते, तो अखंड दीप जलाइए।

102

क्या गृहस्थ पूजा में शंख रख सकता है, या केवल पंडित?

हर घर में शंख और ठीक-ठाक घंटी, और स्त्रियों के लिए नियम

· 1:05:22–1:05:48 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि हर घर में शंख होना चाहिए, और एक-एक घर में शंख और घंटी होनी चाहिए। और छोटी टुनटुनाने वाली घंटी मत रखिए — अच्छी घंटी रखिए जिसे पूरा पकड़कर अच्छे से बजा सकें, जो मुट्ठी भर जाए। शंख भी ऐसा रखिए जिसे आप अच्छे से बजाना जानते हों; सबको शंख बजाना चाहिए। स्त्रियों के लिए अलग-अलग समय पर निषेध है, क्योंकि अलग-अलग समय पर शरीर पर प्रभाव अलग होता है; पुरुष हमेशा बजा सकते हैं।

103

कई स्तोत्र सिद्ध हो जाएँ, तो क्या सबका रोज पाठ जरूरी है?

हर एक के लिए सप्ताह का एक दिन, और वार्षिक हवन

· 1:05:49–1:06:55 · Also a question

मोहित जी को वे एक उदाहरण से उत्तर देते हैं: मान लीजिए किसी ने अर्गला कवच का पाठ सिद्ध किया, दत्तात्रेय माला मंत्र सिद्ध किया, हनुमान जी का कोई स्तोत्र सिद्ध किया, काली जी का हृदय कवच सिद्ध किया, बटुक भैरव का हृदय कवच सिद्ध किया — तो अब चार-पाँच स्तोत्र सिद्ध हैं। यदि रोज समय न मिले, तो जिन-जिन देवी-देवताओं का कवच या स्तोत्र सिद्ध किया है, उन सबका नाम लीजिए, और सप्ताह में किसी एक दिन हर एक का पाठ जरूर कीजिए। भैरव जी का करना है तो रविवार को; दत्तात्रेय माला मंत्र गुरुवार को। सप्ताह में एक बार होना चाहिए, और किसी समय वार्षिक हवन जरूर होना चाहिए।

104

किसी देवी या देवता को अपना गुरु कैसे बनाएँ?

गुरु मंडल को गुरु बनाना सबसे आसान

· 1:06:56–1:07:45 · Also a question

राकेश दुबे जी, जो पूछते हैं कि देवी या देवता को गुरु कैसे बनाएँ, उन्हें वे उत्तर देते हैं कि यह वे पहले स्पष्ट कर चुके हैं: आप जिसे भी गुरु बनाएँ, गुरु मंडल को गुरु बनाना सबसे आसान है। क्योंकि कहीं न कहीं हमारे देवी-देवताओं ने वह शक्ति-सिद्धि या वह तत्व ऐसे दिया है कि गुरु स्वरूप में वे इस पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त हैं, और उसी वातावरण में व्याप्त हैं जिसमें हम जी रहे हैं। इसलिए उन्हें अपना गुरु बनाइए; सबसे अच्छा होगा किसी एक शुद्ध पुरुष को अपना गुरु बनाना। वे कहते हैं कि यदि लोग चाहें तो इन सबके नामों पर एक-एक करके पूरे मंत्र विधान के साथ अलग वीडियो बनाएँगे। वे उनसे कहते हैं, भौतिक गुरु के लिए भटकिए मत।

105

माँ की कृपा से गद्दी आई है पर नियम नहीं पता — क्या करना चाहिए?

त्रिवाचा, दरबार लगाने से पहले सवा साल, और बाधा बनता दरबार

· 1:07:46–1:08:51 · Also a question

नीलम जी से वे कहते हैं कि सबसे पहले यह देखिए कि जो गद्दी आई है, वह गुरु परंपरा की पारंपरिक गद्दी है या नहीं। यदि आपकी माँ ने दी है, तो वही विधि-विधान चलाइए जो पहले से चल रहा होगा। दूसरे, यदि आप इसे आगे बढ़ाना और दरबार लगाना चाहती हैं और बिल्कुल स्थापित नहीं हैं, तो पहले कुछ समय साधना आदि करनी चाहिए। त्रिवाचा लेने के बाद भी कम से कम सवा साल दरबार नहीं लगाना चाहिए; बल्कि अपनी सिद्धियाँ बढ़ानी चाहिए। और उनका अपना अनुभव, वे कहते हैं, यह है कि दरबार लगाना कहीं न कहीं साधक की प्रगति में बहुत बड़ी बाधा बन जाता है। यदि आप बस यह चाहती हैं कि गद्दी से किसी पर कृपा पहुँचे और उसका कल्याण हो, तो साथ में ऐसी साधनाएँ करनी चाहिए, या ऐसा विधि-विधान रखना चाहिए, कि आपकी अपनी प्रगति में किसी भी तरह की बाधा न बने।

106

काली जी और भैरव जी की साथ पूजा हो, तो कौन सा भोग लगाना चाहिए?

मीठा भोग, शनिवार को दही बड़ा, और रोज लौंग-इलायची

· 1:08:52–1:09:27 · Also a question

केशव मिश्रा जी को वे उत्तर देते हैं कि आप कोई भी मीठी चीज भोग में लगा सकते हैं — ऐसा क्या है जो वे भोग में स्वीकार न करें? काली जी और भैरव जी को मीठा भोग लगाइए। यदि घर में पूजा करते हैं, तो शनिवार को उड़द के बड़े बनाकर भैरव जी को दही बड़े का भोग लगा सकते हैं, और भगवती को लड्डू जैसी कोई भी मीठी चीज का भोग दे सकते हैं। रोज किशमिश, काजू या जो भी आप कर सकें — बताशे — और रोज लौंग और इलायची जरूर चढ़ानी चाहिए।

107

तामसिक साधना क्या है?

साधना में मांस और मदिरा, और श्मशानिक हवन

· 1:09:28–1:10:04 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि तामसिक साधना का अर्थ है वह साधना जिसमें हम मांस, मदिरा आदि का प्रयोग करते हैं। जैसे भैरव जी की साधना, या भगवती बगला की साधना, जहाँ आहुति मद्य से, यानी मदिरा से होती है। बहुत सी श्मशानिक साधनाएँ हैं जिनमें कलेजी से, मांस से, इन सब चीजों से हवन होता है। वह तामसिक प्रकृति की साधना हो जाती है। तामसिक भोग के बारे में, वे कहते हैं, यदि आप बंगाल की ओर जाएँ, तो वहाँ लक्ष्मी जी को भी मछली का भोग लगता है।

108

मकर संक्रांति पर छूटी दत्तात्रेय साधना गुप्त नवरात्र की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक की जा सकती है

गुप्त नवरात्र की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक

· 1:10:05–1:10:24

अनिल सोनारा जी, जो कोविड के कारण मकर संक्रांति पर दत्तात्रेय साधना शुरू नहीं कर पाए, पूछते हैं कि क्या इसे प्रतिपदा से शुरू कर सकते हैं। वे उत्तर देते हैं, हाँ, बिल्कुल — गुप्त नवरात्र से पूर्णिमा तक कीजिए; प्रतिपदा से पूर्णिमा तक साधना कीजिए।

अनिल सोनारा जी, जो कोविड के कारण मकर संक्रांति पर दत्तात्रेय साधना शुरू नहीं कर पाए, पूछते हैं कि क्या इसे प्रतिपदा से शुरू कर सकते हैं; वे उत्तर देते हैं, बिल्कुल। गुप्त नवरात्र से पूर्णिमा तक कीजिए। प्रतिपदा से पूर्णिमा तक साधना कीजिए।

109

गाँवों के देवी-देवताओं को सिद्ध करने से क्या होता है?

लौकिक देवता, भगताई का क्षेत्र, और क्या शक्ति बंधन फिर भी संभव है

· 1:10:25–1:11:15 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि लोग गाँवों में जो देवी-देवता सिद्ध करते हैं उनसे क्या होता है, और क्या तब शक्ति बंधन संभव नहीं होगा, वे कहते हैं कि गाँवों में सिद्ध किए जाने वाले देवी-देवता लौकिक देवी-देवता हैं। शक्ति बंधन संभव होगा या नहीं, यह निर्भर करता है। जो केवल देवता सिद्ध करते हैं, उनका भगतवाल अलग तरह से चलता है, भगताई का क्षेत्र चलता है, और वह बहुत सी चीजों पर निर्भर करता है; विषय बिल्कुल अलग हो जाता है। वे कहते हैं कि बंधन तो होगा ही — ऐसा नहीं कि बंधन संभव नहीं होगा।

110

लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए वे कौन सा उपाय बताते हैं?

योग मार्ग, और प्राणायाम विधि से इष्ट मंत्र

· 1:15:03–1:16:21 · Also a question

सुरसेन सुधांशु जी, जो लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए कोई आजमाया हुआ उपाय या साधना माँगते हैं, उन्हें वे उत्तर देते हैं: योग मार्ग अपनाइए। योग के मार्ग पर चलते हुए योग की क्रियाओं के साथ की जाने वाली मंत्र-संबंधी साधनाएँ लाइए। यदि वह भी न कर सकें, तो जो भी आपका मूल मंत्र, गुरु मंत्र या इष्ट मंत्र है, उसे प्राणायाम विधि से करना सीखिए। न केवल प्राणायाम करना है, न केवल मंत्र जप; दोनों को तालमेल में रखकर चलेंगे तो होगा। यौगिक क्रिया के साथ साधना कीजिए — यह सबसे अच्छा है, दोनों चीजें साथ होती हैं, आपका मंत्र जप बढ़ता है, तपोबल बढ़ता है, और शरीर पर भी प्रभाव पड़ता है।

111

यदि शरीर में कुछ खेलता हो और जप-पूजा न करने दे, तो क्या करें?

सहायता लीजिए, मंदिर में कीजिए, और हनुमान प्रयोग

· 1:16:48–1:17:34 · Also a question

वे कहते हैं कि जब शरीर में कुछ खेल रहा हो और पूजा न करने दे, तो पहले किसी की सहायता लेनी चाहिए; वहाँ आप खुद नहीं सँभाल पाएँगे। जब शरीर पर कोई जाग्रत चीज आती है, तो आप बहुत कुछ नहीं कर पाएँगे, और करें भी तो घर में नहीं, मंदिर में कीजिए। इसमें हनुमान जी का प्रयोग सबसे अच्छा है; विधान चैनल पर दिया गया है। यदि कोई उपलब्ध न हो, तो उन प्रयोगों को करके आप इससे मुक्त हो सकते हैं। पर यदि बहुत बड़ी चीज है और आप यह जानते हैं, तो खुद करने के बजाय किसी और से करवाइए।

112

यदि परिवार का ही कोई सदस्य अभिचार कर रहा हो, तो क्या?

अभिचार करने वाले के साथ एक ही घर में रहना

· 1:17:35–1:18:11 · Also a question

एक श्रोता कहता है कि घर वालों ने ही ऐसा कुछ कर दिया है कि कोई काम नहीं बनता, लोग घर छोड़ रहे हैं, और गरीबी बनी हुई है — यानी घर का ही कोई व्यक्ति शरीर पर तांत्रिक प्रक्रिया या आभिचारिक कर्म कर रहा है। वे उत्तर देते हैं कि यदि परिवार का ही कोई व्यक्ति अभिचार कर्म करता है, तो स्थिति बिल्कुल अलग हो जाती है। यदि आप अभिचार क्रिया करने वाले के साथ परिवार में रह रहे हैं, तो यह बहुत ही कठिन हो जाता है; तब आप कुछ भी नहीं कर पाएँगे। वे पूछते हैं, आप करेंगे कैसे?

वे कहते हैं कि सबसे बड़ी बात यह है कि यदि परिवार का ही कोई व्यक्ति अभिचार कर्म करता है, तो स्थिति बिल्कुल अलग हो जाती है। यदि आप अभिचार क्रिया करने वाले के साथ परिवार में रह रहे हैं, तो वहाँ बहुत कठिन हो जाएगा। तब आप कुछ भी नहीं कर पाएँगे। आप करेंगे कैसे?

113

यदि कोई मृत व्यक्ति परेशान करे, तो क्या करना चाहिए?

तंत्रोक्त बजरंग बाण पाँच बार, और गीता का ग्यारहवाँ अध्याय

· 1:18:12–1:18:47 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि रोज रात सरसों के तेल का दीपक जलाकर सामान्य विधान से तंत्रोक्त बजरंग बाण का पाँच बार पाठ कीजिए। और मृत व्यक्ति परेशान क्यों कर रहा है? कहीं न कहीं उसकी सद्गति नहीं हुई। इसके लिए भगवद्गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करना चाहिए, और यदि विधि-विधान से उसका पिंड दान भी करें तो सबसे अच्छा होगा। वे कहते हैं, उसकी गति करवाइए।

114

क्या गुप्त नवरात्रि में कामाख्या और कुलदेवी दोनों की पूजा हो सकती है?

किसी एक पर ही टिकने की जरूरत नहीं

· 1:18:48–1:18:57 · Also a question

वे कहते हैं कि गुप्त नवरात्रि में आप भगवती कामाख्या की साधना भी बिल्कुल कर सकते हैं, और कुलदेवी महाकाली की भी कर सकते हैं। जरूरी नहीं कि इनमें से केवल एक ही करें।

वे कहते हैं कि गुप्त नवरात्रि में आप भगवती कामाख्या की साधना बिल्कुल कर सकते हैं। कुलदेवी महाकाली की भी कर सकते हैं। जरूरी नहीं कि आप इनमें से केवल कोई एक ही करें।

115

क्या कवच, अर्गला और कीलक संस्कृत में और अध्याय हिंदी में पढ़ सकते हैं?

एक ही पाठ में दोनों भाषाओं का मेल

· 1:18:58–1:19:26 · Also a question

वे उत्तर देते हैं, हाँ, हो सकता है, कोई कठिनाई नहीं। यदि हम कवच, अर्गला और कीलक संस्कृत में करें क्योंकि वे हमें आते हैं, और बाकी हिंदी में करना चाहें, तो वह भी हो सकता है। और तीनों रहस्य चाहें तो संस्कृत में कीजिए, चाहें तो हिंदी में। संस्कृत और हिंदी में कोई कठिनाई और कोई दोष नहीं; मन से संदेह निकाल दीजिए। संस्कृत अच्छी आती है तो कीजिए; नहीं आती, तो हिंदी में कीजिए।

116

क्या शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा पर वीडियो संभव है?

आसान नहीं, और घर में प्राण प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं

· 1:19:27–1:20:00 · Also a question

मेहर जी को वे उत्तर देते हैं कि शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा इतनी आसान नहीं, और वह इस तरह नहीं होती। यदि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करनी है, तो पूरा विधि-विधान करवाना चाहिए; और वीडियो तभी संभव है जब कहीं प्राण प्रतिष्ठा हो रही हो और उसे शूट करके डाला जाए। यदि आप घर के लिए पूछ रहे हैं, तो बात अलग है — घर में प्राण प्रतिष्ठा की बिल्कुल जरूरत नहीं।

117

पिशाचिनी को काबू में कैसे करें?

उनका इनकार, और भूत पिसाच निकट नहिं आवै

· 1:20:01–1:20:22 · Also a question

सचिन कुमार भोपचे जी से वे पूछते हैं कि पिशाचिनी को काबू में करना ही क्यों है — कोई कठिनाई है, या आप चीजें सिद्ध करने के चक्कर में पड़ गए हैं? वे कहते हैं, इनमें से किसी चीज में मत पड़िए; इनसे मुक्त होइए। "भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥" — आप लोग कहाँ पड़ रहे हैं? वे यह भी बताते हैं कि गायत्री मंत्र पर वीडियो बन गया है और अपलोड होगा।

118

ब्रह्म शक्ति के विरुद्ध कौन सी गायत्री काम करती है?

उनका सीधा कथन कि वहाँ गायत्री कभी काम नहीं करती

· 1:20:23–1:21:30 · Also a question

प्रशांत द्विवेदी जी से वे साफ कहते हैं कि ब्रह्म शक्ति के विरुद्ध गायत्री कभी भी काम नहीं करती। वे कहते हैं कि यह तंत्र का विषय है, वैदिक विषय नहीं। आज के समय में किसी के पास इतना समय नहीं कि गायत्री का संपुट पाठ करे, या बीजात्मक गायत्रियों का विधि-विधान से पाठ करे, क्योंकि सबको अपना काम-धंधा करना है और उसके ऊपर ये सब चीजें। इसलिए यदि आप यह अपेक्षा करते हैं कि मूल गायत्रियों की प्रक्रिया से ब्रह्म शांत हो जाए, तो आज के समय में उनका अपना अनुभव बिल्कुल अलग रहा है, और लोग किताबों में जो पढ़ते-सुनते हैं उससे भी बिल्कुल अलग।

119

grihasthatantra.com पर "ब्रह्म पिशाच प्रपंच" इस विषय को समझाता है

grihasthatantra.com पर ब्रह्म पिशाच प्रपंच

· 1:21:31–1:21:36

वे कहते हैं, एक बार "ब्रह्म पिशाच प्रपंच" पढ़िए, और यह विषय समझ आ जाएगा। grihasthatantra.com पर जाकर पढ़िए; गूगल में सीधे "ब्रह्म पिशाच प्रपंच" लिखिए तो आ जाएगा। उसमें दस सच्ची घटनाएँ हैं, दस भागों में लिखी, दस अलग-अलग। उसके हिसाब से कीजिए और पढ़िए, तो काफी कुछ समझ आएगा।

वे कहते हैं, इस विषय पर एक बार "ब्रह्म पिशाच प्रपंच" पढ़िए, तो समझ आ जाएगा। grihasthatantra.com पर जाकर "ब्रह्म पिशाच प्रपंच" पढ़िए। गूगल में सीधे लिखिए, तो आ जाएगा। वे दस सच्ची घटनाएँ हैं, दस भागों में लिखी, दस अलग-अलग। उसके हिसाब से कीजिए, पढ़िए, तो काफी कुछ समझ आएगा।

120

कैसे पता चलेगा कि गुरु मंडल की कृपा आ गई है?

ब्रह्म मुहूर्त में स्वप्न, एक ही पुरुष बार-बार दिखना

· 1:21:37–1:22:25 · Also a question

रजनीश जी से वे कहते हैं कि पहली बात यह है कि कृपा का पता आपको स्वप्न से चलेगा। ब्रह्म मुहूर्त के समय स्वप्न में आपको उस तरह के किसी स्वरूप के दर्शन होंगे, जो गुरु से जुड़ा हो। आप एक ही पुरुष को बार-बार देखेंगे; खुद को बार-बार किसी एक मंदिर में देखेंगे; किसी से कुछ सुनेंगे; कोई व्यक्ति आपको निर्देश देगा। इससे आप समझेंगे कि गुरु मंडल आप पर कृपा कर रहा है। परोक्ष रूप से वे बहुत कृपा करते हैं; प्रत्यक्ष तो सामान्य साधक के लिए अलग बात है।

121

क्या कलियुग में कोई है जिसे भगवती के दर्शन हुए हों?

हाँ, जीवित — और मदद करने वालों से ज्यादा बाँधने वाले क्यों हैं

· 1:22:26–1:22:47 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या कलियुग में कोई है जिसे माँ भगवती ने दर्शन दिए हों, वे उत्तर देते हैं: बिल्कुल, जीवित। इस टिप्पणी पर कि आपकी सिद्धि करवाने वाला शायद ही मिलेगा, जबकि सिद्धि बढ़ाने वाले हजार मिलेंगे और बाँधने वाले हजार, वे सहमत होते हैं — यह सही है, क्योंकि ईर्ष्या ज्यादा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या कलियुग में कोई होगा जिसे माँ भगवती ने दर्शन दिए हों, जीवित, वे उत्तर देते हैं: बिल्कुल, हैं। इस टिप्पणी पर कि सिद्धि करवाने वाला शायद ही मिलेगा, कि सिद्धि बढ़ाने वाले हजार मिलेंगे और बाँधने वाले हजार, वे कहते हैं कि बिल्कुल सही है। क्योंकि ईर्ष्या ज्यादा है।

122

क्या कोई भी अघोर मंत्र कर सकता है?

शिव के पाँच मुखों के पाँच मंत्र

· 1:22:48–1:23:19 · Also a question

हरिता मिश्रा जी को वे उत्तर देते हैं कि हाँ, शिव जी का अघोर मंत्र करने में ऐसी कोई कठिनाई नहीं; इसके लिए निश्चिंत रहिए। शिव जी के पंचानन मंत्र में, उनके पाँच मुखों के पाँच मंत्रों में, आपको किसी भी तरह का कुछ सोचने की जरूरत नहीं — ईशान मंत्र कीजिए, वामदेव मंत्र कीजिए, तत्पुरुष कीजिए, अघोर कीजिए। जो चाहें कीजिए।

वे कहते हैं, हाँ, शिव जी का अघोर मंत्र करने में ऐसी कोई कठिनाई नहीं है। इसके लिए निश्चिंत रहिए। शिव जी के पंचानन मंत्र में, जो उनके पाँच मुखों के पाँच मंत्र हैं, आपको किसी भी तरह का कुछ सोचने की जरूरत नहीं। चाहे ईशान मंत्र करें, वामदेव मंत्र, तत्पुरुष, या अघोर — जो चाहें कीजिए।

123

जब पिशाचिनी बहुत परेशान करे, तो क्या किया जा सकता है?

बजरंग बाण, काली कवच, भैरव हृदय, और नरसिंह शताक्षरी

· 1:23:20–1:24:17 · Also a question

वे कहते हैं कि आप तंत्रोक्त बजरंग बाण का अनुष्ठान कर सकते हैं; काली कवच कर सकते हैं; भैरव हृदय कर सकते हैं। इसी चैनल पर नरसिंह शताक्षरी पर पूरा वीडियो है — यदि पिशाचिनी बहुत परेशान कर रही हो, तो नरसिंह शताक्षरी का जबरदस्त प्रयोग दिया गया है, और उसे विधि-विधान से करना चाहिए। यदि आपको लगे कि वह किसी व्यक्ति के शरीर पर बहुत हावी है, तो नरसिंह शताक्षरी और दत्त माला मंत्र का एक साथ प्रयोग कीजिए।

124

रुद्रगण साधना कब करनी चाहिए?

ऐसे ग्रहण में जिसका प्रभाव आपके क्षेत्र में न हो

· 1:24:18–1:24:47 · Also a question

रुद्रगण साधना तब करनी चाहिए जब ग्रहण हो और फिर भी ग्रहण न हो — यानी जब पृथ्वी पर ग्रहण पड़ रहा हो पर उसका प्रभाव आपके क्षेत्र में न हो। केवल तभी रुद्रगण साधना करनी चाहिए। किसी ने अभी मैसेज किया था कि अप्रैल के महीने में ग्रहण पड़ रहा है, और पूछा कि क्या उस ग्रहण में कर सकते हैं; वे कहते हैं कि वे देखकर जल्दी अपडेट करेंगे।

125

हनुमान जी और राम जी के उपासक को कौन सी महाविद्या करनी चाहिए?

सात्विक रूप से तारा, या कमला

· 1:24:48–1:25:23 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि आप किसी भी महाविद्या से जुड़ी पूजा कर सकते हैं; ऐसा नहीं कि आप केवल एक ही चुनेंगे। यदि आप इस तरह पूछ रहे हैं, तो भगवती महाविद्या तारा की सात्विक रूप से कर सकते हैं, उनका अष्टाक्षरी आदि पढ़ सकते हैं, या भगवती कमला की कर सकते हैं। सामान्य तरीके से, यदि महाविद्या चाहिए, तो भगवती कमला या भगवती महाविद्या तारा कर सकते हैं; पर वैसे आप इनमें से कोई भी कर सकते हैं।

126

क्या महाविद्या साधना के लिए पात्रता चाहिए या नहीं?

दो कथन जो दोनों प्रचलित हैं, और अब कुल क्यों देखना पड़ता है

· 1:25:24–1:26:46 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि महाविद्या साधना के बारे में दो बातें कही जाती हैं: एक, कि इसके लिए किसी भी तरह की पात्रता नहीं चाहिए; और दो, कि बहुत बड़ी पात्रता चाहिए। जब आप बंधन में हों और करने जाएँ, तब आपको सब कुछ देखना पड़ता है — आपके कुल की परंपरा क्या है। वे कहते हैं कि यह देखना पड़ता है क्योंकि आज के समय में इसकी जरूरत पड़ेगी। जब ग्रंथ लिखे गए, तब ये सब बातें देखी गईं या नहीं, या ऐसे लोगों ने वर्णन किया या नहीं, पता नहीं; पर आज के समय में परेशानी शुरू हो जाती है।

127

उग्र साधना से पहले कुल शक्ति क्यों देखनी चाहिए?

कुल देवता के रूप में पूजा जाने वाला भूत-प्रेत आपको बाँध देगा

· 1:26:47–1:27:02 · Also a question

वे कहते हैं कि क्योंकि जब घर के लोगों ने किसी भूत-प्रेत को बैठाकर कुल देवता के रूप में पूजा हो, और उसके बाद आप महाविद्या साधना करने जाएँ, तो महाविद्या आपको बाँध देंगी न — और परेशानी होगी। इसलिए किसी भी महाविद्या साधना, किसी भी अस्त्र मंत्र साधना, किसी भी उग्र मंत्र साधना से पहले, और खास तौर पर किसी महाशक्ति या शक्ति से जुड़ी किसी चीज से पहले, या यदि आप योगिनी, यक्षिणी या भैरवी की साधना करने जा रहे हैं, तो पहले अपनी कुल शक्ति देखिए, भाई — कुल की शक्ति कौन है। नहीं तो आपका जीना नरक हो जाएगा: यदि कोई भूत, प्रेत, पिशाच या ब्रह्म बैठाकर कुल शक्ति के रूप में पूजा जा रहा है और आप महाविद्या बगलामुखी साधना करने जाते हैं, तो वही ब्रह्म आपको पटकेगा और साधना भी नहीं करने देगा — और फिर आप कहेंगे कि बगलामुखी साधना की और हमारे साथ अनिष्ट हो गया।

128

क्या सिद्ध गुरु पाने की कोई साधना है?

एक सौ आठ दिन तक रात में दत्त माला मंत्र एक सौ आठ बार

· 1:27:03–1:27:26 · Also a question

वे उत्तर देते हैं, बिल्कुल: दत्त माला मंत्र की सेवा कीजिए। दत्त माला मंत्र लगातार, रोज रात एक सौ आठ बार, एक सौ आठ दिन तक कीजिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या सिद्ध गुरु की प्राप्ति के लिए कोई साधना है, वे कहते हैं, बिल्कुल: दत्त माला मंत्र की सेवा कीजिए। दत्त माला मंत्र लगातार कीजिए — एक सौ आठ दिन, रोज एक सौ आठ बार। इसे रात में कीजिए।

129

कैसे पता चलेगा कि आपके पास कौन सी सिद्धि है?

सिद्धि प्रत्यक्ष होती है, उसे खोजना नहीं पड़ता

· 1:27:27–1:28:29 · Also a question

राहुल जी को वे उत्तर देते हैं कि जब सिद्धि होगी, तो आपको खुद पता चल जाएगा। सिद्धि होगी तो आप जानेंगे न? आप पर किसी सिद्धि की कृपा है या नहीं, यह अलग विषय है; पर यदि आप सिद्धि कह रहे हैं, तो सीधी बात, सिद्धि का अर्थ क्या है? सिद्धि खोजनी नहीं पड़ती। सिद्धि प्रत्यक्ष रहती है।

130

श्री कृष्ण की मूल शक्ति कौन हैं?

विश्वरूप के पीछे तारा, विंध्यवासिनी की कृपा, और नंदजा

· 1:28:30–1:29:25 · Also a question

वे कहते हैं कि नरेंद्र मीना जी ने बहुत अच्छा प्रश्न पूछा है, और बताते हैं कि एक वीडियो में उन्होंने कहा था कि श्री राम की मूल शक्ति माँ तारा हैं। वे उत्तर देते हैं कि आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भगवान श्री कृष्ण ने जो विश्व स्वरूप दर्शन दिया, उसमें कहीं न कहीं भगवती महाविद्या तारा की कृपा रही है; भगवान के विराट रूप दर्शन के पीछे की मूल यौगिक शक्ति भगवती महाविद्या तारा हैं। और माना जाता है कि आजीवन भगवती विंध्यवासिनी की कृपा से श्री कृष्ण अपने अवतार में माया रचने में सबसे अधिक सक्षम रहे।

131

नंदजा कौन हैं?

कृष्ण की बहन, विंध्य में गुप्त शक्ति पीठ, और मूर्ति रहस्य का मंत्र

· 1:29:26–1:29:51 · Also a question

वे कहते हैं कि योगमाया स्वरूप में नंदजा — जिन्हें भगवान कृष्ण की बहन कहा जाता है — विंध्य क्षेत्र में गुप्त शक्ति पीठ के रूप में विराजमान हैं। उनके बारे में आपको शायद ही कहीं जानने-सुनने को मिले। केवल जब हम मूर्ति रहस्य में पढ़ते हैं, तब वहाँ आता है, और पहला मंत्र यह है: जो नंदा शक्ति की आजीवन उपासना करता है, वे तीनों लोकों को साधक के वश में कर देती हैं। वह नंदजा शक्ति नारायण के जन्म से पहले आईं और आजीवन उनकी रक्षा की।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · पाठ के बाद 5.1

The Mūrti Rahasya opens with Nandā, to be born of Nanda, who when praised and worshipped with devotion brings the three worlds under control.

Identifying her with a hidden Vindhya pīṭha and with Kṛṣṇa's sister is the speaker's, not in this verse.

मूल पाठ पढ़ें →
1

अथ मूर्तिरहस्यम् ऋषिरुवाच ॐ नन्दा भगवती नाम या भविष्यति नन्दजा । स्तुता सा पूजिता भक्त्या वशीकुर्याज्जगत्त्रयम् ॥ १ ॥

अब मूर्तियों का रहस्य। ऋषि ने कहा: ॐ। नन्दा नाम की जो भगवती नन्द से उत्पन्न होंगी, भक्ति से उनकी स्तुति और पूजा करने पर वे तीनों लोकों को उपासक के वश में कर देती हैं।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

132

पूरे शरीर में सुइयाँ चुभती लगती हैं और मेडिकल रिपोर्ट सामान्य है — क्या यह तंत्र है?

शरीर से उतारे कपड़े, और लगातार व रुक-रुक कर होने का अंतर

· 1:29:52–1:31:02 · Also a question

हरीश जी को वे उत्तर देते हैं कि यदि मेडिकल रिपोर्ट ठीक है और ये चीजें हो रही हैं, तो साफ है कि कहीं न कहीं आपके शरीर से उतारे गए कपड़ों का तंत्र में प्रयोग हुआ है, और जब गणंत प्रयोग किया जाता है तो ये चीजें लगातार होती हैं। यदि कभी-कभी होता है, तो यह जाग्रत तंत्र है जो किसी खास तिथि पर होता है — यानी तंत्र करके छोड़ दिया गया। इसे हटाने के लिए, यदि सामान्य तरीके से करना चाहें, तो संकल्प लेकर दत्त माला मंत्र का जप कीजिए, और साथ में नरसिंह शताक्षरी का भी प्रयोग कीजिए। इसमें किसी तरह की कठिनाई नहीं; कुछ सोचना नहीं — सीधे उठाइए और करना शुरू कीजिए। रात में करें तो बेहतर। वे चेताते हैं कि पहले कष्ट बढ़ेगा, क्योंकि जब शरीर में कुछ जकड़ा हो और आप उसे हटाने जाएँ, तो कष्ट होगा। और यदि आप खुद न कर सकें, तो कोई दूसरा व्यक्ति संकल्प लेकर आपके लिए करे।

133

मंत्र जप के समय शरीर बहुत काँपता है — क्या करना चाहिए?

मूलाधार का बिगड़ना, स्थान दोष, और मंदिर में जप

· 1:31:21–1:32:15 · Also a question

डीके सिद्धार्थ जी, जो कहते हैं कि जब भी वे मंत्र जप करते हैं तो शरीर में बहुत कंपन होता है और वह हिलने लगता है, और वे कर्ज में पड़ गए हैं और बहुत परेशान हैं — उन्हें वे उत्तर देते हैं कि मंत्र जप से इतना कंपन होने का अर्थ है कि मूलाधार पहले ही बिगड़ चुका है। इसलिए सबसे पहले मंत्र जप मत कीजिए; सीधे मंत्र जप से शुरुआत नहीं करनी चाहिए। यदि माला आदि पर कर रहे हैं, तो मत कीजिए; और आपको जानना चाहिए कि कहीं न कहीं स्थान दोष का प्रभाव है।

134

यदि घर में अकेले मंत्र जप सुरक्षित रूप से न हो सके, तो इसके बजाय क्या और कहाँ करें?

शिव मंदिर में शिव रक्षा, हनुमान जी के यहाँ बजरंग बाण, विष्णु जी के यहाँ दत्त माला

· 1:32:16–1:33:03 · Also a question

वे कहते हैं, मंदिर में जाइए: शिव मंदिर हो तो बताया गया शिव रक्षा प्रयोग कीजिए, और प्रयोग न कर सकें तो पाठ कीजिए। हनुमान जी का मंदिर हो और आप हनुमान जी की सेवा-पूजा करते हों, तो तंत्रोक्त बजरंग बाण, इस चैनल पर दिया पूरा बजरंग बाण, कीजिए। विष्णु जी का मंदिर हो, तो दत्त माला मंत्र की साधना कर सकते हैं। मंदिर में जाकर कुछ समय कीजिए — ग्यारह-ग्यारह दिन की साधना, चार-पाँच बार।

135

पूजा शुरू करने पर कुछ लोगों का शरीर क्यों झूमने लगता है?

शुभ शक्तियों के साथ जुड़ी नकारात्मक शक्ति

· 1:33:04–1:33:42 · Also a question

वे कहते हैं कि वे ऐसे साधकों से मिले हैं, जो बताते हैं कि जब उन्होंने पहली बार पूजा-पाठ शुरू किया और सुबह-शाम दीया-बाती की, तो उनका शरीर झूमने लगता था, खेलने लगता था, और वे कुछ कह नहीं पाते थे, समझ नहीं पाते थे — बस झूमते थे। बाद में जब वे संपर्क में आए, तो उन्होंने उनसे दत्त माला मंत्र, दुर्गा कवच, और दुर्गा जी की बत्तीस नामावली के साथ साधना करने को कहा। अब वे कहते हैं कि बहुत आनंद है और पूजा-पाठ की बहुत इच्छा है, और वे करते हैं, पर शरीर अब नहीं झूमता। तो कहीं न कहीं ऐसी नकारात्मक शक्ति होती है जो शुभ शक्तियों के साथ जुड़ जाती है; यह तंत्र की अलग तरह की क्रिया है।

136

तंत्र सीख चुका व्यक्ति नई-नई चीजें कैसे बनाता है?

खाना बनाने का उदाहरण, और अशुभ शक्ति को शुभ के साथ मिलाना

· 1:33:43–1:34:18 · Also a question

वे कहते हैं कि जब आप खाना बनाना सीख लेते हैं, तो सब कुछ बनाना आ जाने पर अपने तरीके से नई रेसिपी भी बना सकते हैं। उसी तरह तंत्र सीखने वाला व्यक्ति — इस विषय पर उन्होंने दो दिन पहले एक वीडियो डाला था, कि जिनके पिता-दादा तांत्रिक थे वे अब कष्ट क्यों भोग रहे हैं — नए मिश्रण करता है। वह कोई और शक्ति जगाए रखेगा, तंत्र सीखेगा, उसके गुरु ने कुछ और सिखाया होगा, और उसकी सहायता से कुछ और जगाएगा। इस तरह वह शुभ के साथ अशुभ शक्ति डाल देगा, और उस समय आपके लिए कठिनाई शुरू हो जाती है।

137

नशा छुड़ाने के लिए क्रिया मंत्र के बजाय भक्ति वाला मंत्र क्यों?

षट्कर्म मंत्र लक्ष्य का नाम लेता है; देवता से प्रार्थना नहीं

· 1:34:19–1:35:44 · Also a question

गुटखा, सिगरेट और शराब छुड़ाने के लिए वे नमक का प्रयोग करने को कहते हैं; नमक का विधान और साबरी मंत्र अलग से डाले जाएँगे। पर वे अंतर साफ बताते हैं: क्रिया मंत्र, जैसे षट्कर्म के मंत्र, व्यक्ति का नाम लेते हैं — यदि किसी को मारना है, तो हम ऐसा मंत्र प्रयोग करते हैं जिसमें व्यक्ति का नाम डाला जाता है, इसे मारो, इसे मारो, और मंत्र से यही अर्थ निकलता है। वह सीधा हमला है। जबकि जब आप देवी मंत्र में किसी देवी या देवता से प्रार्थना करते हैं कि शत्रु से छुटकारा मिले, शत्रु से बचाव हो, शत्रु से रक्षा हो, और वह शक्ति उसे मृत्यु दे दे, तो परोक्ष रूप से आप वहाँ कारण बने, पर भगवती ने कृपा की और उस ओर आपके शत्रु का कल्याण किया। इसलिए आपको कोई दोष नहीं लगेगा और काम भी ठीक से होगा।

138

दत्तात्रेय प्रयोग और साबर प्रयोग के प्रभाव में क्या अंतर है?

संतुलित प्रभाव बनाम व्यक्ति के पागल हो जाने का खतरा

· 1:35:45–1:36:00 · Also a question

वे कहते हैं कि ठीक इसी तरह, यदि आप शराब, गुटखा या तंबाकू छुड़ाने के लिए तंत्र विधि का प्रयोग करें — दत्तात्रेय माला मंत्र या किसी सिद्ध मंत्र का प्रयोग करें, संकल्प लें, नमक सिद्ध करें या शक्कर सिद्ध करें, और किसी को खिलाएँ या दें, तो उसका प्रभाव अलग तरह का होगा: संतुलित होगा। पर यदि आप साबर आदि का प्रयोग करें, और सामने वाले पर आभिचारिक प्रयोग पड़ जाए, तो वह पागल भी हो सकता है। वे कहते हैं कि इसीलिए क्रियात्मक मंत्र देने के बजाय वे आप सबको यही मंत्र करने को कहते हैं।

139

किसी व्यक्ति को जो खिलाया गया है, उसे कैसे निकाला जाता है?

पाटा ओझा, नाभि से निकालना, और जड़ी से जड़ी काटना

· 1:36:01–1:36:50 · Also a question

वे कहते हैं कि तंत्र वर्ग के ज्यादातर लोग — सब नहीं, पर ज्यादातर — एक ही मंत्र से तरह-तरह की क्रियाएँ करते हैं। उस मंत्र से जो खिलाया गया है उसे निकाला जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम दिए गए हैं: उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे पाटा ओझा कहते हैं, और वे लोग उन विद्याओं को अलग तरीके से शुद्ध करते हैं। बहुत से लोग इसे शरीर से, नाभि से चूसकर निकालते हैं; यह असली चीज है, इसमें पाखंड या धोखा कुछ नहीं। दूसरा तरीका है जड़ी से जड़ी मारना: यदि पता चल गया कि सामने वाले ने आपको क्या खिलाया और उसका प्रभाव क्या है, तो किसी खास नक्षत्र में उस तरह की जड़ी लाकर, पीसकर, मंत्र से अभिमंत्रित करके खिलाई जाती है, और उससे या तो उसका प्रभाव नष्ट होता है या उसे शरीर से बाहर निकालने की क्रिया की जाती है।

140

जहाँ चीज बाहर न निकाली जा सके, वहाँ भी अकेली साधना उसका प्रभाव खत्म कर देती है

बाहर न भी निकले, तो भी उसका प्रभाव खत्म होता है

· 1:36:51–1:37:01

वे कहते हैं कि साधना के प्रभाव से भी, साधना करने वालों के लिए, चीजें खत्म होती हैं — ऐसा नहीं कि साधना करेंगे तो चीजें नहीं होंगी। भले वह बाहर न निकल पाए, पर अपना प्रभाव जरूर नष्ट और खत्म कर देगी। पर थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

वे कहते हैं कि साधना के प्रभाव से भी, साधना करने वालों के लिए, चीजें खत्म होती हैं। ऐसा नहीं कि साधना करेंगे तो चीजें नहीं होंगी। भले वह बाहर न निकल पाए, पर उसका प्रभाव जरूर नष्ट और खत्म कर देगी। पर थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

141

जो संस्कृत का संधि विच्छेद न सँभाल सके, वह क्या पढ़े?

गीता प्रेस की सरल दुर्गा सप्तशती, एक साल या अधिक हिंदी के बाद

· 1:37:02–1:37:33 · Also a question

वे कहते हैं कि जो संस्कृत में पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए गीता प्रेस से छपी सरल दुर्गा सप्तशती है — वह लीजिए। पर फिर भी वे कहेंगे कि जो सप्तशती पाठ में बिल्कुल नए हैं, वे कम से कम एक साल हिंदी में करें। यदि आप चारों नवरात्र कर रहे हैं, या दो-तीन साल तक, तो हिंदी में कीजिए; उसके बाद गीता प्रेस से छपी सरल दुर्गा सप्तशती से पाठ कीजिए। संधि विच्छेद किया होने से उच्चारण बहुत स्पष्ट आएगा; धीरे-धीरे सीखिए।

142

क्या शुंभ और निशुंभ का वध माँ काली से जुड़ा था?

शुंभ-निशुंभ के लिए कौशिकी, चंड और मुंड के लिए काली

· 1:37:34–1:37:50 · Also a question

श्रेयस जी को वे उत्तर देते हैं कि वास्तव में यह भगवती कौशिकी से जुड़ा था। वे कहते हैं कि चंड और मुंड का वध काली जी से जुड़ा है; आप सब कहाँ अटक रहे हैं।

श्रेयस जी के इस प्रश्न पर कि क्या शुंभ-निशुंभ वध माँ काली से जुड़ा था, वे उत्तर देते हैं कि वास्तव में यह भगवती कौशिकी से जुड़ा था। चंड और मुंड का वध काली जी से जुड़ा है। वे पूछते हैं, आप सब कहाँ अटक रहे हैं?

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · तेरह अध्याय 7.27

Because she brought back Caṇḍa and Muṇḍa, the Goddess is to be known as Cāmuṇḍā.

मूल पाठ पढ़ें →
27

यस्माच्चण्डं च मुण्डं च गृहीत्वा त्वमुपागता । चामुण्डेति ततो लोके ख्याता देवि भविष्यसि ॥ ॐ ॥ २७ ॥

"देवि! तुम चण्ड और मुण्ड को लेकर मेरे पास आई हो, इसलिए संसार में तुम चामुण्डा नाम से प्रसिद्ध होगी।" ॐ।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

ग्रंथ से निकाला गया अर्थ श्रीदुर्गासप्तशती · तेरह अध्याय 5.87

Ambikā, who came out of the sheath of Pārvatī's body, is sung as Kauśikī, the form that faces Śumbha and Niśumbha.

This verse only names Kauśikī; her part in the Śumbha–Niśumbha episode comes from the chapters that follow.

मूल पाठ पढ़ें →
87

शरीरकोशाद्यत्तस्याः पार्वत्या निःसृताम्बिका । कौशिकीति समस्तेषु ततो लोकेषु गीयते ॥ ८७ ॥

क्योंकि अम्बिका पार्वती के शरीर-कोश से निकली थीं, इसलिए सब लोकों में वे कौशिकी नाम से गाई जाती हैं।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

143

क्या किसी भी मंत्र में ॐ के बाद श्रीं बीज जोड़ सकते हैं?

अपनी ओर से बीज मंत्रों से छेड़छाड़ नहीं

· 1:37:51–1:38:09 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या किसी मंत्र में ॐ से पहले श्रीं बीज लगाकर जप कर सकते हैं, वे उत्तर देते हैं कि बीज मंत्र में अपनी ओर से हेरा-फेरी नहीं करनी चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या किसी मंत्र में ॐ से पहले श्रीं बीज लगाकर जप किया जा सकता है, वे सीधा उत्तर देते हैं। बीज मंत्र में अपनी ओर से हेरा-फेरी नहीं करनी चाहिए।

144

यदि आप गुरुदत्त को गुरु मानकर रोज हवन करते हैं, तो क्या तंत्र फिर भी आप पर सफल हो सकता है?

ब्रह्मास्त्र और हनुमान जी, और तंत्र प्रयोग का मान रखना

· 1:38:10–1:39:11 · Also a question

आदि चिंतन जी से वे कहते हैं कि यदि गुरु की कृपा, गुरु मंडल की कृपा आ जाए, तो कोई तंत्र करना ही नहीं चाहेगा — कर भी कैसे पाएगा? और वे एक समानता बताते हैं: ब्रह्मास्त्र का हनुमान जी पर कोई प्रभाव नहीं होने वाला था, पर ब्रह्मास्त्र का मान रखने के लिए वे बँध गए; उनके लिए वह कुछ नहीं था। उसी तरह, यदि आप भगवान दत्तात्रेय की साधना कर रहे हैं और कोई आप पर तंत्र प्रयोग करता है, तो उस तंत्र का मान रखने के लिए आपको हानि हो सकती है। पर वह बहुत बड़ी नहीं होगी; कुछ समय के लिए होगी। यदि वह बहुत बड़ा तंत्र प्रयोग करे, तो हो सकता है कि यदि उसने मारण किया हो तो आपकी एक उँगली टूट जाए, कट जाए, कुछ हो जाए। प्रभाव होगा; आप एक-दो दिन परेशान होंगे, एक हफ्ता परेशान होंगे — पर उसके बाद उसे बचाने वाला कोई नहीं बचेगा। शक्तियाँ शक्तियों का मान रखती हैं।

145

क्या स्त्रियाँ पुरुष साधकों की ऊर्जा चुरा सकती हैं?

उनका सीधा उत्तर कि ऐसा होता है, और बहुत अच्छे से होता है

· 1:39:12–1:39:23 · Also a question

शिवांश जी के पूछने पर कि क्या स्त्रियाँ पुरुष साधकों की ऊर्जा चुरा सकती हैं, वे उत्तर देते हैं कि बहुत अच्छे से चुराई जाती है। वे कहते हैं कि इतनी जबरदस्त चुराई जाती है कि बाद में पुरुष किसी काम के नहीं रहते; काफी अच्छे साधक चित हो जाते हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या स्त्रियाँ पुरुष साधकों की ऊर्जा चुरा सकती हैं, वे उत्तर देते हैं कि बहुत अच्छे से चुराई जाती है, शिवांश जी। इतनी जबरदस्त चुराई जाती है कि बाद में पुरुष किसी काम के नहीं रहते। काफी अच्छे साधक चित हो जाते हैं।

146

क्या अपराजिता स्तोत्र का रोज पाठ किया जा सकता है?

केवल तब जब उसकी जरूरत हो

· 1:39:24–1:39:43 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि जरूरत हो तभी कीजिए। आजकल आदमी बस ऐसे ही करने को कह देता है। यदि आप आभिचारिक क्रियाओं से ग्रस्त हैं, या उस तरह की समस्या है, या आप ऐसे क्षेत्र में काम करते हैं जहाँ बार-बार लोगों से मिलना और किसी को मनाना पड़ता है — जैसे मार्केटिंग के क्षेत्र में हों — तो कीजिए।

147

हांडी प्रयोग से कैसे बचें?

अब यह दुर्लभ है, और आपके अपने इष्ट इसे सँभाल लेंगे

· 1:39:44–1:40:18 · Also a question

वे कहते हैं कि आज के समय में यदि कहीं सच में हांडी प्रयोग किया जाता है, तो लोग इसे सीधे बहुत कम करते हैं। और इससे बचने के लिए आपको अलग से कुछ करने की जरूरत ही नहीं। अपने इष्ट की सेवा-पूजा करते रहिए; जब इस तरह का प्रयोग होगा, तो आपको अलग से कोई मंत्र जप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपके अपने इष्ट इतने मजबूत होंगे कि वे सब कुछ कर देंगे।

148

क्या ध्यान से की गई पाँच माला और एक सौ एक माला में अंतर है?

समय और आपकी अपनी इच्छा पर एक छोटा उत्तर

· 1:40:19–1:40:40 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या बहुत ध्यान से पाँच माला करना एक सौ एक माला करने से अलग है, वे कहते हैं कि उन्हें ठीक से समझ नहीं आया; हो सकता है श्रोता समय की बात कर रहे हों। वे कहते हैं कि यह आपकी अपनी इच्छा है — जितना आप बैठ पाएँ, जितना आप कर पाएँ।

यह पूछे जाने पर कि क्या बहुत ध्यान से पाँच माला करना और एक सौ एक माला करना अलग है, वे कहते हैं कि उन्हें समझ नहीं आया; हो सकता है श्रोता समय की बात कर रहे हों। यह आपकी अपनी इच्छा है — जितना आप बैठ पाएँ, जितना आप कर पाएँ।

149

माँ काली कैसे बोलती हैं?

जिसे दर्शन हुए, वह कभी क्यों नहीं बताएगा

· 1:40:41–1:41:29 · Also a question

नेहा राजपूत जी से वे कहते हैं कि उनके पास कोई उत्तर नहीं — ऐसे प्रश्न आते हैं कि वे भी चुप रह जाते हैं। एक बात वे सबको बताना चाहते हैं: जिसे भी जगदंबा के किसी स्वरूप के दर्शन होते हैं, या जिस पर वे कृपा करती हैं, वह कितना भी सांसारिक तरीके से जिए और कुछ भी करे, वह इसका ढिंढोरा कभी नहीं पीट सकता। यह ध्यान रखिए। कोई कभी नहीं कहेगा कि यह इस तरह होता है। योगिनियों का बताया जा सकता है, महा योगिनियों का भी नहीं — सामान्य वालों का बताया जा सकता है; पर खास तौर पर कोई नहीं बताएगा। वह अवस्था ही नहीं आएगी कि आदमी उसके बारे में बोले।

150

स्वप्न में खुद को झाड़ू लगाते और चावल बटोरते देखने का क्या अर्थ है?

कुलदेवी के रूप में शीतला माता, या लक्ष्मी की सेवा

· 1:41:30–1:42:11 · Also a question

मीनाक्षी जी से वे कहते हैं: लक्ष्मी जी की पूजा कीजिए। यदि आप खुद को झाड़ू लगाते या चावल बटोरते देख रही हैं, तो दो तरह की बात है — या तो, यदि आपकी कुलदेवी शीतला माता हैं, तो उनकी अच्छे से पूजा कीजिए; भगवती की कृपा कहीं न कहीं है और उन्हें जो भोग लगता है, चावल का भोग, अष्टमी को लगाना चाहिए। हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दुर्गा अष्टमी और सप्तमी को शीतला सप्तमी कहते हैं; आपके यहाँ जो तिथि मानी जाती है, वह करनी चाहिए। नहीं तो भगवती लक्ष्मी की अच्छे से सेवा करनी चाहिए।

151

मेरे साथ रहने वाली एक अदृश्य शक्ति चली गई है — वह कैसे लौटेगी?

आपने पहले कुछ अच्छा किया होगा, और फिर कुछ गड़बड़ हुई

· 1:42:12–1:43:04 · Also a question

नरेश जी से वे कहते हैं कि यदि सच में ऐसी बात है, तो आपने पहले जरूर कुछ अच्छा किया होगा, इसीलिए वह आपके साथ थी। वह थी, और अब या तो कुछ गड़बड़ हो गई है या आपने सेवा-पूजा नहीं की, इसीलिए आपके साथ कठिनाई है। और आप यह कैसे कह सकते हैं कि वह पहले थी और अब नहीं है — वे कहते हैं, कुछ न कुछ होगा।

वे कहते हैं कि यदि सच में इस तरह की बात है, तो आपने पहले जरूर कुछ अच्छा किया होगा, इसीलिए वह आपके साथ थी। वह थी, और अब या तो कुछ गड़बड़ हो गई है, या आपने सेवा-पूजा नहीं की, इसीलिए आपको कठिनाई हो रही होगी। और आप यह कैसे कह सकते हैं कि वह पहले थी और नहीं थी — कुछ न कुछ होगा।

152

क्या सिद्ध किए गए मंत्र का अनुष्ठान दोबारा किया जा सकता है?

यह बार-बार करना चाहिए

· 1:43:05–1:43:16 · Also a question

वे कहते हैं कि सिद्ध किए गए मंत्र का अनुष्ठान दोबारा किया जा सकता है — यह बार-बार करना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि कैसे पता चले कि मंत्र सिद्ध हुआ है, वे सैंडी जी से कहते हैं कि इस विषय पर एक वीडियो है, उसे एक बार देखिए।

वे कहते हैं कि सिद्ध किए गए मंत्र पर अनुष्ठान दोबारा किया जा सकता है; यह बार-बार करना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि कैसे पता चले कि मंत्र सिद्ध हुआ है या नहीं, वे कहते हैं कि इस विषय पर एक वीडियो है। कृपया उसे एक बार देखिए, सैंडी जी।

153

यदि हम माता को मानते हैं और फिर भी इतना दुख है, तो वे सुनती क्यों नहीं?

कभी मत कहिए कि वे नहीं सुनतीं; हम नहीं देख सकते कि वे किस रूप में सुन रही हैं

· 1:43:17–1:44:14 · Also a question

नेहा जी से वे कहते हैं कि यह प्रश्न अलग तरह का हो जाता है। जगदंबा की सेवा करने वाले हम सबको कभी नहीं कहना चाहिए कि वे नहीं सुनतीं। वे यह बार-बार कहते हैं: जब भी आपने जगदंबा के नाम पर एक भी अगरबत्ती जलाई, एक भी नारियल या एक भी भोग चढ़ाया, वे उसे स्वीकार करती हैं — वे महामाया हैं। वे पूरी सृष्टि की अधिष्ठात्री हैं; ऐसा हो ही नहीं सकता कि वे न सुनें। आप और हम नहीं समझ सकते कि वे किस रूप में सुन रही हैं। आप जो सीधे चाहते हैं, वह नहीं होता। और कभी नहीं कहना चाहिए: हमने आपकी पूजा की, सेवा की, इतना दुख क्यों है, आप सुन क्यों नहीं रहीं। वे समझते हैं कि यह कष्ट के कारण मुँह से निकल जाता है, पर बाद में मान लेना चाहिए कि जो भी हो रहा है, जगदंबा अच्छा ही कर रही हैं।

154

यदि स्वप्न में काली माता दिखें, तो क्या करना चाहिए?

यह कृपा है, पर इसे सबके सामने मत बताइए

· 1:44:15–1:45:15 · Also a question

एक श्रोता, जो कहता है कि एक दिन स्वप्न में काली माता दिखीं, उससे वे कहते हैं कि यह बहुत अच्छा है; पर यदि भगवती दर्शन दे रही हैं, तो — और यह वे बार-बार कहते हैं — भले आपने यहाँ गलत नाम लिखा है, इसे सार्वजनिक रूप से मत बताइए। जब कोई शक्ति दर्शन देती है, उस पर भी एक अलग वीडियो है जो जल्द डाला जाएगा; सब तैयार है, बस अपलोड करना बाकी है। जब देवता दर्शन दें तो क्या करना चाहिए, जब मंत्र मिले तब — वह पहले ही डाल दिया गया है। जब स्वप्न में भविष्य पता चलने लगे, जब आप खुद को कहीं जाते पाएँ और उसका अर्थ क्या है, जब आप बार-बार किसी सिद्ध पीठ जा रहे हों, तब क्या करना चाहिए।

155

भगवती काली को कैसे प्रसन्न करें?

रोज सेवा, रंगे चावल और एक सौ आठ नामों से अर्चन

· 1:45:16–1:45:39 · Also a question

वे कहते हैं कि भगवती काली को प्रसन्न करने के लिए जगदंबा की रोज सेवा कीजिए। यदि अर्चन कर सकें, तो कीजिए — चावल से कीजिए, चावल को लाल रोली से रंगकर, और एक सौ आठ नामों के साथ भगवती को चढ़ाइए। नहीं तो अपनी क्षमता के अनुसार जितना हो सके, अर्गला के पहले मंत्र "ॐ जयन्ती मङ्गला काली" का जप कीजिए। नेहा जी, यदि आपके पास कोई और मंत्र नहीं, तो खुद को जगदंबा को समर्पित करके बस इतना ही कीजिए।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · पाठ से पहले 2.1

The mantra the speaker gives, ॐ जयन्ती मङ्गला काली, is the opening of the Argalā Stotra's first verse.

मूल पाठ पढ़ें →
1

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥

ॐ। जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा, तुम्हें नमस्कार है।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

156

क्या भौतिक जीवन में दुख कभी खत्म होगा?

पैसा, फिर स्वास्थ्य, फिर बच्चे, फिर पति

· 1:45:40–1:46:00 · Also a question

वे कहते हैं कि वे बार-बार कहते हैं कि भौतिक जीवन में हम सबने जन्म लिया है और मनुष्य का शरीर है। जब तक शरीर है और मृत्यु नहीं होती, दुख आते रहेंगे। आज दुख का कारण पैसा हो सकता है; कल पैसा होगा तो स्वास्थ्य का दुख होगा। यदि पैसा और स्वास्थ्य दोनों आ जाएँ, तो शायद बच्चे आपकी बात न मानें, पति बात न माने। इसी तरह कोई न कोई दुख आता रहेगा।

157

यदि आप सोचें कि सिद्धि से दुनिया मुट्ठी में कर लेंगे, तो?

ऐसे कर्म दूसरे जन्म में भोगने पड़ते हैं

· 1:46:01–1:46:38 · Also a question

जो सोचते हैं कि हम भगवती की सेवा-पूजा कर रहे हैं, या कोई सिद्धि मिल जाएगी, और फिर पूरी दुनिया मुट्ठी में कर लेंगे और सब हमारी इच्छा से होगा — उनसे वे कहते हैं, यह जान लीजिए: यदि आप इस तरह का काम करते भी हैं, तो ये सब दोबारा जन्म लेकर भोगना पड़ेगा। इसलिए सक्षम हो भी जाएँ, चीजें सिद्ध कर भी लें, तो कभी इसका अपने लिए इस तरह प्रयोग नहीं करना चाहिए। सीमा में रहना चाहिए, और कभी प्रयोग करने के बजाय उन्हें समर्पित कर देना चाहिए: जगदंबा, जैसी आपकी इच्छा। दुख देना चाहें तो दीजिए — पर उस दुख को सहने की क्षमता भी दीजिए। बस इतना ही करना चाहिए।

158

गुरु गोरखनाथ जी के मंत्र का विधान कहाँ है?

सिद्ध साबरी विद्या चैनल और सुमेरु साबर

· 1:46:39–1:47:14 · Also a question

वे कहते हैं कि सिद्ध साबरी विद्या चैनल खोजिए, या लिंक इस चैनल के डिस्क्रिप्शन में है — हर वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिंक है। उसमें जाइए, और सबसे पहले गुरु गोरखनाथ जी का सुमेरु साबर कीजिए। नवनाथों को जगाने का एक विधान है जो आप कर सकते हैं। भगवान गोरखनाथ के दो मंत्र हैं और दो अलग विधान; शुरुआत के लिए उन दोनों में से कोई एक कीजिए।

159

स्वप्न में मिले मंत्र का क्या करना चाहिए?

उसे गूगल मत कीजिए, और उसमें कुछ मत जोड़िए

· 1:47:15–1:47:45 · Also a question

वे कहते हैं कि एक अलग वीडियो है जिसमें पूरी तरह समझाया गया है: यदि मंत्र मिले, तो कैसे जानें कि मंत्र सही है या गलत, कहीं कोई भूत-प्रेत आकर अपना काम तो नहीं करवाना चाहता; वह किस समय मिला, उसे किस तरह जानें, और बाद में उस मंत्र का क्या करें। वे कहते हैं, इसे गूगल पर मत खोजिए, क्योंकि स्वप्न में मिला मंत्र गूगल में नहीं मिलेगा। लोग तुरंत मंत्र गूगल करने लगते हैं और फिर उन्हें मैसेज करते हैं कि गुरु जी, स्वप्न में मंत्र मिला और गूगल में नहीं मिल रहा। वे कहते हैं, भाई, जो शक्ति स्वप्न में दे रही है वह महाशक्ति है; वह कहाँ से और कब प्रसन्न होकर आपको दे रही है, और आप गूगल में खोज रहे हैं — सब कुछ गूगल में नहीं मिलेगा।

160

यदि बाद में मिले मंत्र में स्वप्न वाले से ज्यादा अक्षर हों, तो क्या करें?

स्वप्न में जो आया वही कीजिए, न जोड़ना न घटाना

· 1:47:46–1:48:31 · Also a question

वे कहते हैं कि स्वप्न में जैसा मंत्र मिला, उसमें अपनी ओर से कुछ मत जोड़िए। यदि स्वप्न में मंत्र मिला और वह आपको याद है — हो सकता है आपको आठ अक्षर का मंत्र मिला हो, और बाद में कहीं खोजने पर वह नौ अक्षर का निकले — तो आपको ठीक वही करना है जो स्वप्न में मिला, न कि अपनी ओर से कुछ जोड़ना; इसमें कोई जोड़-घटाना, गुणा-भाग नहीं करना। हालाँकि, वे जोड़ते हैं, यदि वही असली मंत्र मिल जाए जिसे आप करते हैं या करना चाहते हैं, तो उसे विधि-विधान से कीजिए।

161

यदि बैठ न सकें, तो क्या खड़े होकर जप कर सकते हैं?

पूजा स्थान से थोड़ी दूर कुर्सी, और गृहस्थ के लिए कोई दोष नहीं

· 1:48:32–1:49:30 · Also a question

वे पूछते हैं, खड़े होकर जप क्यों करें? जिसे बैठने में समस्या है, कि हम जमीन पर नहीं बैठ सकते — भगवान का पूजा स्थान बदलने की भी जरूरत नहीं। ऐसा कीजिए: वहाँ पूजा-पाठ, धूप, दीप और अगरबत्ती जलाइए, थोड़ा हटकर एक आरामदायक कुर्सी लगवाइए जहाँ बैठ सकें, और वहाँ आराम से बैठकर जप कीजिए। वे कहते हैं, विश्वास कीजिए, गृहस्थी में यदि आपका शरीर सक्षम नहीं है तो कोई दोष नहीं लगता। इस भ्रम में मत रहिए कि आसन पर नहीं बैठेंगे तो जप का फल नहीं मिलेगा। कुर्सी पर आराम से बैठकर जप कीजिए; कोई कठिनाई नहीं। क्या जगदंबा नहीं देख रहीं कि उनका बेटा या बेटी कितने कष्ट में है — क्या बैठेंगे तभी होगा?

162

पूजा स्थान ऊँचा कीजिए या बदलिए, और खड़े होकर करें तो पैरों के नीचे आसन रखिए

पूजा स्थान की ऊँचाई बदलिए, और पैरों के नीचे आसन रखिए

· 1:49:31–1:49:46

वे कहते हैं कि इस हिसाब से या तो पूजन का स्थान बदल दीजिए या उसे थोड़ा ऊँचा कर दीजिए, या अपनी कुर्सी वैसी व्यवस्थित कर लीजिए, और फिर कुर्सी पर बैठकर जप कीजिए। और यदि आप खड़े होकर कर सकते हैं, तो वह भी कीजिए; कोई कठिनाई नहीं। बस पैरों के नीचे आसन जरूर होना चाहिए।

वे कहते हैं कि इस हिसाब से या तो पूजन का स्थान बदल दीजिए या उसे थोड़ा ऊँचा कर दीजिए, या अपनी कुर्सी वैसी बना लीजिए, और फिर कुर्सी पर बैठकर जप कीजिए। और यदि आप खड़े होकर कर सकते हैं, तो वैसे भी कीजिए; कोई कठिनाई नहीं। बस पैरों के नीचे आसन जरूर होना चाहिए।

163

यदि मंत्र याद न हो, तो क्या किताब से देखकर पढ़ सकते हैं?

एक-दो महीने पढ़िए, और वह बैठ जाएगा

· 1:49:47–1:50:15 · Also a question

वे उत्तर देते हैं, बिल्कुल। जो भी हो — शताक्षरी मंत्र, दत्त माला मंत्र, या भगवती का जयंती मंत्र — यदि याद नहीं है तो देखकर करना है। एक-दो महीने देखकर कीजिए, फिर वह ऐसे कंठस्थ हो जाएगा कि मंत्र स्वप्न में भी चलेगा। आप किसी से बात करते रहेंगे और पीछे मन में वह मंत्र चलता रहेगा।

164

सोखा को दिखाने के बाद माता की सवारी आना बंद हो गई — क्या करें?

चौखट पर हवन, जो कभी खाली नहीं जाता

· 1:50:16–1:50:43 · Also a question

राकेश दुबे जी, जिन पर तंत्र हुआ था और जो कहते हैं कि जिस सोखा को दिखाया उसने ठीक नहीं किया, और उसे दिखाने के बाद से माता की सवारी नहीं आती — उनसे वे कहते हैं कि ऐसी चीजें कैसे होती हैं, यह उन्होंने स्पष्ट किया है। आपको यह करना चाहिए: यदि आप पर कुलदेवी या किसी शक्ति की सवारी आती थी, तो हवन की एक प्रक्रिया बताई गई है — चौखट पर हवन करने की विधि। वह कीजिए; उससे देवी आकर्षित होती हैं। वे कहते हैं कि चौखट पर और चौराहे पर जो किया जाता है, वह कभी खाली नहीं जाता।

165

सूतक के समय घर के शिवलिंग का क्या नियम है?

छूना नहीं, पर रोज स्नान, न श्रृंगार न फूल

· 1:50:44–1:51:28 · Also a question

भजन जी से वे कहते हैं: घर में नर्मदेश्वर हो या कोई भी शिवलिंग, उसे छूना नहीं है, पर रोज एक लोटा जल ऐसे पात्र में रखना है कि उन्हें रोज स्नान कराया जा सके। केवल स्नान कराना है; शिवलिंग को छूने की जरूरत नहीं। सूतक काल में भी शिवलिंग घर में रहेगा, और उस पर सूतक का नियम लागू होता है: कोई श्रृंगार नहीं करना, कोई फूल या कुछ नहीं चढ़ाना, पर शिवलिंग पर चाँदी का बिल्व पत्र आदि रखना चाहिए, और कम से कम रोज उन पर गंगाजल डालना चाहिए — भले पाँच बूँद ही डालें। उनका रोज स्नान जरूर होना चाहिए।

166

गोरखनाथ को गुरु मानकर साधना कैसे की जाती है?

फिर से सिद्ध साबरी विद्या चैनल

· 1:51:29–1:51:59 · Also a question

एसटीबी न्यूज़ हिंदी जी, जो पूछते हैं कि उन्हें गुरु मानकर साधना कैसे करें, उन्हें वे उत्तर देते हैं कि सिद्ध साबरी विद्या चैनल का लिंक वहाँ रहता है; यूट्यूब पर खोजिए, उसमें पूरा विधान पूरी तरह समझाया गया है कि गुरु गोरखनाथ की साधना कैसे करनी है।

उन्हें गुरु मानकर साधना कैसे करें, इस प्रश्न पर वे कहते हैं कि सिद्ध साबरी विद्या चैनल का लिंक वहाँ रहता है। यूट्यूब पर खोजिए; उसमें उन्होंने पूरा विधान पूरी तरह समझाया है कि गुरु गोरखनाथ की साधना कैसे करनी है।

167

बार-बार उड़ने के स्वप्न आने का क्या अर्थ है?

पहले वात की समस्या जाँचिए

· 1:52:00–1:52:32 · Also a question

वे कहते हैं कि सबसे पहले, आपको वात की समस्या हो सकती है — यानी पेट में गैस आदि बनती होगी। पहले वह देखिए। यदि ऐसा होता है, या इस तरह की समस्या है, तो उसे देखिए; वह आपका पहला काम है, और उस चीज को सुलझाने का प्रयास कीजिए। वे कहते हैं कि स्वप्न में खुद को उड़ते देखने का सबसे बड़ा कारण वात की समस्या है।

168

कुल देवता की सिद्धि कैसे की जाती है?

यह इस पर निर्भर है कि आपके कुल देवता कौन हैं; और झाड़-फूँक करने वालों का तपोबल

· 1:53:31–1:54:03 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि कुल देवता की सिद्धि कैसे होती है, वे उत्तर देते हैं कि आपके कुल देवता कौन हैं, उसके अनुसार उस विधि-विधान से बताया जाएगा। शिवानंदन स्वरूप जी से वे कहते हैं कि तपोबल बढ़ाइए — जो झाड़-फूँक आदि करते हैं, उनका तपोबल हमेशा मजबूत होना चाहिए; इस विषय को वे अलग से समझाएँगे।

यह पूछे जाने पर कि कुल देवता की सिद्धि कैसे की जाती है, वे कहते हैं कि आपके कुल देवता कौन हैं, उसके अनुसार उस विधि-विधान से बताया जाएगा। शिवानंदन स्वरूप जी से वे कहते हैं: तपोबल बढ़ाइए। जो झाड़-फूँक आदि करते हैं, उनका तपोबल हमेशा मजबूत होना चाहिए। इस विषय को वे अलग से समझाएँगे।

169

क्या केवल भूत-प्रेत और घर के पूर्वज ही लोगों को परेशान करते हैं?

भूत-प्रेत से आगे बढ़िए; दत्तात्रेय, गणपति अथर्वशीर्ष और अर्गला का पहला मंत्र

· 1:54:04–1:54:54 · Also a question

वे उत्तर देते हैं, अब आपसे क्या कहें। यदि आप भूत-प्रेत में अटके रहेंगे, तो भूत-प्रेत आपको परेशान करेंगे; इससे आगे बढ़िए। चाहे आपके पितृ और पूर्वज हों, भूत-प्रेत हों, देव दोष हो या मंत्र दोष, भगवान दत्तात्रेय इसीलिए हैं कि वे बार-बार उन्हें करने को कहते हैं — उनसे किसी भी तरह के दोष का शमन होता है। दत्तात्रेय माला मंत्र की साधना कीजिए, और साथ में गणपति अथर्वशीर्ष और अर्गला का पहला मंत्र। ये तीनों ऐसी चीजें हैं कि हर तरह का दोष शांत हो जाएगा; और जब दोष शांत होगा, चाहे मंत्र दोष हो, देवी दोष हो या पितरों का दोष, सब इससे दूर हो जाएँगे। वे कहते हैं, आप लोग केवल भूत-प्रेत को लेकर परेशान रहते हैं — कि भूत है तो भूत काट लेगा; आजकल आप लोगों का बहुत नाटक है।

170

कर्म कीजिए और फल की चिंता मत कीजिए

कर्म कीजिए और फल की चिंता मत कीजिए

· 1:54:55–1:56:04

इस टिप्पणी पर कि यह अपने काम और कर्म पर निर्भर है, वे कहते हैं कि तब सोचने को क्या है — कर्म कीजिए। फल की चिंता मत कीजिए।

इस टिप्पणी पर कि यह अपने काम और कर्म पर निर्भर है, वे कहते हैं: तो फिर सोचने को क्या है? कर्म कीजिए। फल की चिंता मत कीजिए।

171

स्वप्न में आया कि सोशल मीडिया से डाउनलोड की गई चालीसा गलत है — क्या ऐसा होता है?

इंटरनेट से डाउनलोड किए पाठों में गलतियाँ

· 1:56:43–1:57:04 · Also a question

एके पात्रो जी, जिन्होंने सोशल मीडिया से माँ भद्रकाली चालीसा डाउनलोड करके पढ़ना शुरू किया और बीच में स्वप्न आया कि चालीसा गलत है और इसे नहीं पढ़ना चाहिए, उन्हें वे उत्तर देते हैं कि ऐसा होता है। वे कहते हैं कि किसी ने वैष्णो देवी चालीसा भेजी थी, जिसमें पोषण की जगह शोषण लिखा था। नेट से डाउनलोड करने में ठीक यही कठिनाई है। वे यह भी कहते हैं कि सिद्ध किया गया मंत्र बिल्कुल दोबारा करना चाहिए।

172

क्या नवनाथ साधना दोहराने पर नया अनाज और नए बर्तन चाहिए?

इसे ठीक उसी तरह दोहराइए

· 1:57:05–1:57:14 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि नवनाथ साधना दोबारा करने के लिए क्या फिर से अनाज और नए बर्तन चाहिए, वे उत्तर देते हैं: हाँ, बिल्कुल, इसे ठीक उसी तरह करना चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि नवनाथ साधना दूसरी बार करने के लिए क्या फिर से अनाज और नए बर्तन चाहिए, वे उत्तर देते हैं: हाँ, बिल्कुल। इसे ठीक उसी तरह करना चाहिए।

173

कुलदेवी बाला सुंदरी की कृपा कैसे प्राप्त होती है?

श्री कुल में दीक्षा, या तब तक ललिता सहस्रनाम

· 1:57:15–1:58:00 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि यदि आपकी कुलदेवी बाला सुंदरी हैं, तो सबसे अच्छा होगा कि आप श्री कुल में दीक्षित हों। और जब तक दीक्षित न हों, तब तक भगवती के सहस्रनाम से, ललिता सहस्रनाम से, उनका पूजन और पाठ कीजिए; वह सबसे अच्छा होगा।

वे कहते हैं कि यदि वे बाला सुंदरी हैं, तो श्री कुल में दीक्षित होइए; वह सबसे अच्छा होगा। और जब तक आप दीक्षित न हों, तब तक भगवती के सहस्रनाम से, ललिता सहस्रनाम से, उनका पूजन और पाठ कीजिए। वह सबसे अच्छा होगा।

174

क्या काली चालीसा पढ़कर अपनी इष्ट देवी को अर्पित कर सकते हैं?

घर में भद्रकाली तभी, जब वे कुलदेवी हों

· 1:58:01–1:58:25 · Also a question

वे उत्तर देते हैं, हाँ, बिल्कुल कर सकते हैं। यदि भद्रकाली आपकी इष्ट और अधिष्ठात्री शक्ति हैं, तो काली चालीसा जरूर पढ़िए, और काली कवच भी पढ़ सकते हैं। सामान्य गृहस्थी में भद्रकाली की पूजा तभी होती है जब वे आपकी कुलदेवी हों; नहीं तो सामान्य रूप से घर में भद्रकाली की पूजा नहीं होती। पर यदि वे आपकी कुलदेवी हैं, तो जरूर कीजिए — और यदि आप करते आ रहे हैं, तो अब कीजिए, छोड़ना नहीं चाहिए।

175

यदि घर की माँ दुखी हों, तो क्या करना चाहिए?

भगवती मातंगी की सेवा, पर उच्छिष्ट चांडालिनी रूप में नहीं

· 1:58:59–1:59:22 · Also a question

वे कहते हैं कि यदि घर की माँ दुख में हैं, तो भगवती मातंगी की सेवा कीजिए; वह सबसे अच्छा है। सामान्य रूप से उच्छिष्ट चांडालिनी स्वरूप में सेवा मत कीजिए।

176

पहले दी गई महाभैरव साधना इस गुप्त नवरात्रि में दोहरानी है

इस गुप्त नवरात्रि में महाभैरव साधना दोहराना

· 1:59:23–2:00:14

डेडिकेटेड ग्रुप के एक साधक ने नवरात्रि के लिए पहले से साधनात्मक मार्गदर्शन माँगा, तो वे कहते हैं कि जो महाभैरव साधना दी गई है, जिसे तीन बार करना था — उन्हें लगता है कि सबने इसे केवल एक बार किया है — उसे इस गुप्त नवरात्रि में फिर से करना चाहिए।

नवरात्रि के लिए पहले से साधनात्मक मार्गदर्शन माँगने वाले डेडिकेटेड ग्रुप के एक साधक को वे अपनी दी हुई महाभैरव साधना के बारे में उत्तर देते हैं। इसे तीन बार करना था; उन्हें लगता है कि सबने इसे केवल एक बार किया है। इसलिए इस गुप्त नवरात्रि में इसे फिर से करना है।

177

नाग देवता की सिद्धि कैसे की जाती है?

कुल नाग से शुरुआत, और क्षेत्रीय अंतर

· 2:00:15–2:00:38 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि नाग देवता की सिद्धि कैसे होती है, वे कहते हैं कि यह अच्छा विषय है और वे कुल नाग से शुरू करेंगे और यह भी बताएँगे — पर इसे क्षेत्रीय दृष्टि से बताना होगा।

यह पूछे जाने पर कि नाग देवता की सिद्धि कैसे की जाती है, वे कहते हैं कि यह अच्छा विषय बताया गया है। कुल नाग से शुरू करते हैं; वे यह भी बताएँगे। पर इसे क्षेत्रीय दृष्टि से बताना होगा।

178

क्या दत्त माला मंत्र नवरात्रि में शुरू किया जा सकता है?

हाँ में एक छोटा उत्तर, और उन्हें गुरु कैसे बनाएँ

· 2:01:16–2:01:38 · Also a question

नीलम जी के पूछने पर कि वे उन्हें अपना गुरु कैसे बना सकती हैं, वे कहते हैं कि पूरा विधान बताया गया है और गुरु की बिल्कुल जरूरत नहीं; फिर भी यदि वे जोर दें, तो संपर्क करें और विधि-विधान से गुरु साधना करें। यह पूछे जाने पर कि क्या दत्त माला मंत्र नवरात्रि में शुरू किया जा सकता है, वे उत्तर देते हैं: बिल्कुल किया जा सकता है।

179

क्या कोई देवी या देवता है जो उग्र न हो?

हर किसी ने किसी दुष्ट का अंत किया है; कोई केवल सौम्य नहीं

· 2:02:28–2:03:28 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि किसने कहा कि देवी का सुमिरन नहीं करना चाहिए क्योंकि माता उग्र रूप हैं, वे अमृत जी से बस अर्गला के पहले मंत्र का पाठ करने को कहते हैं; ऐसी कोई बात नहीं। वे पूछते हैं, कौन से देवी-देवता सामान्य हैं — कौन सा देवी-देवता उग्र नहीं? किसने किसी दुष्ट का अंत नहीं किया? हमारी सनातन संस्कृति में ऐसा कौन सा स्वरूप है? हनुमान जी वैष्णव हैं, और उन्होंने बंदर बनकर इतने राक्षस मारे। सब उग्र हैं; एक भी सौम्य नहीं। और क्या नारायण ने नहीं मारा? उन्होंने कितने लोगों का अंत किया, दुष्टों का अंत किया। तो उनका नाम ही मत लीजिए। अब राम-राम कीजिए — राम ने रावण को मारा, जो इतना बड़ा दुष्ट था; राम जी ने उसे मारा, उसका वध किया। तो अब राम जी का नाम ही न लें, क्योंकि राम जी उग्र हो गए।

180

रोज दुर्गा चालीसा और हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होता है?

एक छोटा उत्तर कि यह बहुत अच्छा है

· 2:03:29–2:03:40 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि दुर्गा चालीसा और हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होता है, और रोज पढ़ने से क्या-क्या होता है, वे कहते हैं कि जीवन में बहुत अच्छा होता है — बिल्कुल कीजिए। क्या होगा, वह आप खुद समझ जाएँगे।

यह पूछे जाने पर कि दुर्गा चालीसा और हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होता है, और रोज पढ़ने से क्या-क्या होता है, वे कहते हैं कि जीवन में बहुत अच्छी चीजें होती हैं। बिल्कुल कीजिए। क्या-क्या होगा, वह आप खुद समझ जाएँगे।

181

क्या साधना के दौरान बाल और नाखून काटने चाहिए?

एक छोटा निषेध

· 2:04:27–2:04:45 · Also a question

एके जी की इस बात को कि जब भी साधना चल रही हो, बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए, वे ऐसे ही रहने देते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या दत्त माला मंत्र पंचमुखी हनुमान जी के मंदिर में किया जा सकता है, वे उत्तर देते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है।

इस कथन को कि जब भी कोई साधना कर रहा हो, बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए, वे ऐसे ही रहने देते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या दत्त माला मंत्र पंचमुखी हनुमान जी के मंदिर में किया जा सकता है, वे कहते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है। विशाल जी, देवेंद्र सिंह, विशाल प्रजापति — वे कर सकते हैं।

182

जप के समय धीरे-धीरे आगे-पीछे झूलने का क्या अर्थ है?

शरीर का असंतुलित होना; यह आदत छोड़िए

· 2:04:46–2:04:55 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि झूलना नहीं चाहिए। शरीर असंतुलित हो जाता है। इसे आदत से हटाइए; मंत्र जप करते समय झूलना नहीं है।

यह पूछे जाने पर कि मंत्र जप करते समय धीरे-धीरे आगे-पीछे झूलना क्या है, वे कहते हैं कि झूलना नहीं चाहिए। शरीर असंतुलित हो जाता है। इसे आदत से हटाइए। मंत्र जप करते समय झूलना नहीं है।

183

एक ब्रह्म राक्षस पूजा-पाठ नहीं करने देता — क्या उपाय है?

उपाय काम नहीं करेंगे; सदाशिव की उपासना और कच्चे दूध से अभिषेक

· 2:04:56–2:05:34 · Also a question

राकेश दुबे जी, जो कहते हैं कि एक ब्रह्म राक्षस पूजा-पाठ नहीं करने देता और ऐसा लगता है जैसे वहाँ पहाड़ रख दिया गया हो, उन्हें वे उत्तर देते हैं कि यहाँ कोई उपाय काम नहीं करेगा। वे कहते हैं कि वे घर के ब्रह्म होंगे — आजकल ब्राह्मणों के घरों में ब्रह्म घुस गए हैं। यदि वे घर के हैं, तो देखिए कि सही विधि-विधान क्या है; बस कुछ भी मत कर डालिए। और सामान्य तरीके से भगवान सदाशिव की उपासना कीजिए; वहाँ आपको ज्यादा कठिनाई नहीं होगी। उपासना से उनका अर्थ है: भगवान सदाशिव के मंदिर में जाकर कच्चे दूध से अभिषेक कीजिए — इससे उनकी उग्रता शांत होगी। और इसे ठीक से सुलझवाइए। उपायों के चक्कर में पड़कर अपना जीवन खराब मत कीजिए।

184

सर्वोच्च शक्ति कौन है?

जिसे आप मानें, और पत्नी और परिवार का उदाहरण

· 2:05:35–2:06:12 · Also a question

अनुज जी को वे उत्तर देते हैं कि जिसे आप मानें, वही है। सर्वोच्च शक्ति कौन है, इस पर द्वैत और अद्वैत में मत अटकिए; यह प्रश्न ही बेकार और मूर्खता से भरा है। जिसके बारे में आप पढ़ें, वही सर्वोच्च है। जो आपके इष्ट हैं, वही सर्वोच्च हैं। जैसे पत्नी के लिए उसका पति सर्वोच्च है, पर परिवार के बाकी लोग छोटे नहीं — उनका भी अपना मान-सम्मान है और वह सबको साथ लेकर चलती है; उसी तरह आपके लिए आपके इष्ट सर्वोच्च होंगे, और बाकी सब आजीवन सम्मानित रहेंगे।

185

लोग केवल सिद्धियाँ ही क्यों माँगते हैं?

भगवान के दर्शन का विधान कोई नहीं चाहता

· 2:06:13–2:06:33 · Also a question

इस टिप्पणी पर कि लोग केवल सिद्धियाँ क्यों माँगते हैं, और मंत्र जप व नाम जप करके देव दर्शन की कामना करनी चाहिए, वे कहते हैं कि अभी-अभी किसी ने ऐसा किया था: एक व्यक्ति को भगवान के दर्शन पाने का विधि-विधान बताया गया, उसने नहीं किया, और आज वह उसे दूसरे को देना चाहता है। वे इसे टेलीग्राम ग्रुप में डालेंगे और लोग थोड़ी देर में देख सकते हैं। वे कहते हैं कि आज के समय में कोई ये चीजें नहीं चाहता।

186

नरसिंह शताक्षरी कितनी बार करनी चाहिए?

जब तक परेशानी है तब तक रोज; दिन मत गिनिए

· 2:06:34–2:06:57 · Also a question

वे कहते हैं कि यह चैनल पर है — डाउनलोड कीजिए, इसी चैनल पर है। जब तक परेशानी है, रोज कीजिए। दिन मत गिनिए। शुरू में ग्यारह दिन का संकल्प लेकर कीजिए, और उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार रोज, हर रात कीजिए।

187

क्या सप्तशती सच में कहती है कि नंदा देवी तीनों लोक साधक के वश में कर देती हैं?

मंत्र के अर्थ पर उनका स्पष्टीकरण

· 2:06:58–2:07:15 · Also a question

एक श्रोता कहता है कि उन्होंने दावा किया कि दुर्गा सप्तशती में नंदा देवी तीनों लोक साधक के वश में कर देती हैं, और किसी साधक में इतनी क्षमता नहीं। वे स्पष्ट करते हैं कि वहाँ जो कहा गया है वह उस मंत्र का अर्थ है जो उन्होंने समझाया: कि जो उनकी उपासना करता है, वे तीनों लोक उसके वश में कर देती हैं। इसका विधि-विधान सप्तशती में दिया गया है — उसे देखिए; गीता प्रेस वाली में भी दिया है कि कैसे और क्या करना है।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · पाठ के बाद 5.1

Worshipping Nandā with devotion brings the three worlds under the worshipper's control (वशीकुर्याज्जगत्त्रयम्).

मूल पाठ पढ़ें →
1

अथ मूर्तिरहस्यम् ऋषिरुवाच ॐ नन्दा भगवती नाम या भविष्यति नन्दजा । स्तुता सा पूजिता भक्त्या वशीकुर्याज्जगत्त्रयम् ॥ १ ॥

अब मूर्तियों का रहस्य। ऋषि ने कहा: ॐ। नन्दा नाम की जो भगवती नन्द से उत्पन्न होंगी, भक्ति से उनकी स्तुति और पूजा करने पर वे तीनों लोकों को उपासक के वश में कर देती हैं।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

188

पूजा के समय शरीर ठंडा क्यों हो जाता है?

स्त्री में नाड़ी का बिगड़ना, और प्राणायाम

· 2:07:16–2:07:36 · Also a question

शिव कुमारी को वे उत्तर देते हैं कि यदि शरीर ठंडा हो रहा है, तो यदि आप स्त्री हैं, इसका अर्थ है कि जप या पूजा के समय, जब आप कर रही हैं, आपकी नाड़ी बिगड़ रही है। इसलिए आपको थोड़ा प्राणायाम करना चाहिए।

वे कहते हैं कि यदि शरीर ठंडा हो रहा है, तो इसका अर्थ यह है — यदि आप स्त्री हैं, जैसा लिखा नाम बताता है। तो जप के समय या पूजा के समय, जब आप कर रही हैं, आपकी नाड़ी बिगड़ रही है। इसलिए आपको थोड़ा प्राणायाम करना चाहिए।

189

यदि कलश न रखा जाए, तो क्या पूजा सफल होगी?

हाँ, और कलश किसे रखना चाहिए

· 2:07:37–2:07:59 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि बिल्कुल सफल होगी। ऐसी कोई बात नहीं कि कलश नहीं रखेंगे तो पूजा सफल नहीं होगी। गृहस्थों को केवल चैत्र और शारदीय नवरात्रि में कलश रखना चाहिए — या इन दोनों में से जिसमें भी आप रखते और करते हैं। बाकी, यदि आप साधक हैं, तो बात अलग है।

190

किसी ने मेरे मन पर उच्चाटन करवाया है — उसका प्रभाव कैसे खत्म होगा?

सहायता लेनी पड़ेगी, या किसी एक शक्ति की शरणागति

· 2:08:00–2:08:15 · Also a question

वे उत्तर देते हैं कि सहायता लेनी पड़ेगी। यदि बहुत विशेष क्रिया नहीं है, तो यह अपने आप भी खत्म हो सकता है — किसी एक शक्ति की शरणागति स्वीकार करके साधना करने से; तभी कुछ होगा।

वे कहते हैं कि सहायता लेनी पड़ेगी। यदि बहुत विशेष क्रिया नहीं है, तो यह आपसे भी खत्म हो सकता है। किसी एक शक्ति की शरणागति स्वीकार करके साधना करने से — तब कुछ होगा।

191

यदि सप्तशती के साधक पर बगलामुखी मंत्र का प्रयोग हो, तो क्या होगा?

ऐसा करना ही क्यों

· 2:08:27–2:08:41 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि यदि दुर्गा सप्तशती के साधक पर बगलामुखी मंत्र का प्रयोग किया जाए तो क्या होगा, वे पूछते हैं कि ऐसा करना ही क्यों है। जो सही है, उसके साथ सही होगा; जो गलत है, उसके साथ गलत होगा।

यह पूछे जाने पर कि यदि दुर्गा सप्तशती के साधक पर बगलामुखी मंत्र का प्रयोग किया जाए तो क्या होगा, वे पूछते हैं: यह करना ही क्यों है? जो सही है, उसके साथ सही होगा। जो गलत है, उसके साथ गलत होगा।

192

माँ काली और दुर्गा की मूर्ति की स्थापना कैसे करनी चाहिए?

अचल मूर्ति, और इसे दिखाने के लिए क्या चाहिए

· 2:08:42–2:09:18 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि माँ काली और दुर्गा की प्रतिमा कैसे स्थापित करें, वे कहते हैं कि यह अचल मूर्ति है; इसे दिखाना तभी संभव है जब कहीं स्थापना हो रही हो, और करते समय वीडियो रिकॉर्ड करके डाला जाए। एक दूसरे श्रोता से, जो कहता है कि वह माँ दुर्गा काली की प्रतिमा स्थापित करने जा रहा है ताकि माता उसमें जागृत होकर वास करें, वे कहते हैं: आप खुद करेंगे। यदि विधि-विधान से करना है, तो सब कुछ व्यवस्थित रखकर करना होगा — अकेले आप पूरा विधि-विधान नहीं कर पाएँगे।

193

शुंभ और निशुंभ के वध के बाद जगदंबा क्यों कहती हैं कि वे विंध्यवासिनी के रूप में करेंगी?

कल्प का भेद

· 2:09:19–2:10:04 · Also a question

प्रश्नकर्ता पूछते हैं कि शुंभ और निशुंभ का वध नौवें — दसवें — अध्याय में हुआ, तो ग्यारहवें अध्याय में जगदंबा ने क्यों कहा कि वे विंध्यवासिनी स्वरूप में करेंगी। वक्ता कहते हैं कि उत्तर कल्प के अनुसार है, या कल्प भेद है: एक कल्प में वे एक रूप में रहीं, अगले कल्प में दूसरे रूप में। जैसे भगवती ने अलग-अलग कल्पों में अलग-अलग स्वरूप धारण करके महिषासुर का वध किया — कभी वे अष्टभुजा थीं, कभी दशभुजा, कभी अठारह भुजा वाली। वे कहते हैं कि यही कल्प भेद है।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · तेरह अध्याय 11.42

The Goddess foretells that she will be born of Yaśodā in Nanda's house and, dwelling on the Vindhya, destroy the two demons.

The kalpa-bheda explanation is the speaker's own.

मूल पाठ पढ़ें →
42

नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भसम्भवा । ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी ॥ ४२ ॥

तब मैं नन्द गोप के घर में यशोदा के गर्भ से जन्म लूँगी। विन्ध्याचल में रहकर मैं उन दोनों का नाश करूँगी।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

194

यदि सप्तशती में नहीं है, तो शिव पर पैर रखे माँ काली का रूप क्यों पूजा जाता है?

एक प्रश्न जिसे वे दूसरी दिशा में जाता बताकर टाल देते हैं

· 2:10:05–2:10:16 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि शिव जी पर पैर रखे माँ काली का स्वरूप क्यों पूजा जाता है जब वह सप्तशती में नहीं है, वे कहते हैं कि यह एक अलग विषय की ओर जा रहा है।

यह पूछे जाने पर कि शिव जी पर पैर रखती माँ काली का स्वरूप क्यों पूजा जाता है जब वह सप्तशती में नहीं है, वे कहते हैं कि यहाँ आप दूसरे विषय की ओर जा रहे हैं।

195

ॐ नमो भगवते रुद्राय और ॐ नमः शिवाय में क्या अंतर है?

षडक्षरी और दशाक्षरी, और संकल्प के अनुसार फल

· 2:10:17–2:11:03 · Also a question

अमेज जी के पूछने पर कि "ॐ नमो भगवते रुद्राय" और "ॐ नमः शिवाय" के जप से अलग-अलग क्या फल मिलते हैं, और क्या पहले का सवा लाख अनुष्ठान किया जा सकता है, वे अक्षरों की गिनती पर उत्तर देते हैं: एक षडक्षरी हो जाता है, और ॐ लगा दें तो दशाक्षरी हो जाता है। जहाँ तक फल का प्रश्न है, चूँकि वहाँ स्वरूप एक ही है, इसलिए फल आपकी इच्छा के अनुसार, आपके लिए गए संकल्प के अनुसार मिलेगा। अनुष्ठान आप कर सकते हैं; और पूरे विधि-विधान से करें तो बेहतर है।

वे कहते हैं, देखिए: अक्षर — एक षडक्षरी हो जाता है, और ॐ लगा दें तो दशाक्षरी हो जाता है। जहाँ तक फल का प्रश्न है, चूँकि वहाँ स्वरूप एक ही है, इसलिए फल आपको आपकी इच्छा के अनुसार, आपके लिए गए संकल्प के अनुसार मिलेगा। अनुष्ठान आप कर सकते हैं। पूरे विधि-विधान से करें, तो बेहतर है।

196

क्या तंत्र में दुर्गा माता श्मशानी शक्ति को हटा सकती हैं?

हाँ में एक छोटा उत्तर

· 2:12:15–2:13:02 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि तंत्र में दुर्गा माता श्मशानी शक्ति को हटा सकती हैं या नहीं, वे उत्तर देते हैं कि बिल्कुल हटा सकती हैं। मायपाल जी से वे कहते हैं कि उन्होंने जो मंत्र लिखा है उसका पूरा विधि-विधान इसी चैनल पर है, और उसी से करें।

यह पूछे जाने पर कि तंत्र में दुर्गा माता श्मशानी शक्ति को हटा सकती हैं या नहीं, वे कहते हैं कि बिल्कुल हटा सकती हैं। मायपाल जी से वे कहते हैं कि उन्होंने जो मंत्र लिखा है, उसका पूरा विधि-विधान इसी चैनल पर है। ठीक है, उसी से कीजिए।

197

यदि बुरे स्वप्न आते रहें, तो सोने से पहले क्या पढ़ना चाहिए?

तंत्रोक्त रात्रि सूक्त, पाँच बार, कंठस्थ करके

· 2:13:03–2:13:55 · Also a question

वे कहते हैं कि यदि बहुत ज्यादा कठिनाई है और गलत स्वप्न आ रहे हैं, तो तंत्रोक्त रात्रि सूक्त पढ़कर सोइए। तंत्रोक्त रात्रि सूक्त कंठस्थ कर लीजिए और सोने से पहले कम से कम पाँच बार पढ़िए।

वे पहले एक श्रोता को उत्तर देते हैं कि यदि आप खुद करें, और विधि-विधान से करें, तो सब कुछ व्यवस्थित रखना होगा। यदि बहुत ज्यादा कठिनाई है, यदि गलत स्वप्न आ रहे हैं, तो तंत्रोक्त रात्रि सूक्त पढ़कर सोइए। तंत्रोक्त रात्रि सूक्त कंठस्थ कर लीजिए, और सोने से पहले कम से कम पाँच बार पढ़िए।

198

माता स्वयं मुझ पर आई हैं और गद्दी भेजी है — पहले क्या करना चाहिए?

तब भी पहले मंत्र साधना

· 2:13:56–2:14:24 · Also a question

एक श्रोता, जो कहती हैं कि माता स्वयं उन पर आई हैं और गद्दी भेजी है, उनसे वे कहते हैं कि तब भी सबसे पहले मंत्र आदि की साधना करनी चाहिए, भले वे आ रही हों — और भले योगिनी भाव आ रहा हो।

उस श्रोता से, जो कहती हैं कि माता स्वयं उन पर आई हैं और गद्दी भेजी है, वे कहते हैं कि तब भी सबसे पहले मंत्रों आदि की साधना करनी चाहिए। भले वे आ रही हों, कीजिए। भले योगिनी भाव आ रहा हो, कीजिए।

199

कवच से हवन करने में क्या हानि है?

अस्त्र मंत्र का तिर्यक प्रभाव और वंश की हानि

· 2:14:25–2:14:50 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि वर्षों पहले कवच से किए हवन के तिर्यक प्रभाव का क्या करें, वे उत्तर देते हैं कि यदि आप कवच से हवन करते, तो इतने समय बचते ही नहीं; यदि उसका तिर्यक प्रभाव पड़ना होता, तो — और कवच और अस्त्र मंत्र का तिर्यक प्रभाव बहुत जल्दी पड़ता है। यदि आज आप तलवार चलाएँ, तो एक-दो साल बाद हाथ नहीं कटेगा; तुरंत कटेगा। सबसे पहले वंश की हानि होती है। वे प्रश्नकर्ता से कहते हैं कि आप अविवाहित हैं, इसलिए चिंता मत कीजिए।

200

यदि अनजाने में कवच से हवन हो गया हो, तो क्या उपाय है?

देवता का दुग्ध अभिषेक, शिव की शरण, और नाम मंत्र से खीर का हवन

· 2:14:51–2:15:57 · Also a question

वे कहते हैं कि यदि अनजाने में हो गया है, तो सबसे पहले जिनके कवच से आपने हवन किया, जिनके शस्त्र मंत्र से हवन किया, उनका दूध से अभिषेक कीजिए। वे सीधी बात समझाते हैं: कवच से हवन करने का अर्थ क्या है? आप देवता का नाम ले रहे हैं और साथ में उनका अस्त्र भी; और जब आप स्वाहा देवी को आहुति देते हैं, देवता को भोजन देते हैं, तो उनके मुख में अस्त्र भी डाल रहे हैं। जैसे मनुष्य को कष्ट पहुँचता है, समझिए कि एक तरह से उन्हें भी कष्ट पहुँचता है। कोई आपके हाथ, पैर या मुँह में अस्त्र डाले तो कैसा लगेगा — कष्ट होगा। इसलिए उस तरह का दोष लगेगा; इसलिए पहले उनकी प्रतिमा का, श्री विग्रह का दूध से अभिषेक करना चाहिए। और शिव जी की शरण लेनी चाहिए, उनका भी अभिषेक करना चाहिए, और फिर उनके नाम मंत्र से खीर से हवन करना चाहिए।

201

फूलों की आहुति कैसे देनी चाहिए?

घी में डुबोकर, कभी सूखे नहीं

· 2:15:58–2:16:38 · Also a question

वे कहते हैं कि यदि आप एक सौ आठ फूलों की आहुति देने जा रहे हैं, तो सूखे फूल से मत दीजिए; फूल घी में डुबोकर फिर आहुति देनी चाहिए।

वे कहते हैं कि यदि आप एक सौ आठ फूलों की आहुति देने जा रहे हैं, तो खाली फूल से मत दीजिए। फूल घी में डुबोया होना चाहिए। फिर आहुति देनी चाहिए।

202

साधना आगे बढ़ने पर देवी के बारे में गलत विचार क्यों आते हैं?

केवल मंत्र जप मूलाधार जगाता है; स्तोत्र, आरती और पुराण भाव बदलते हैं

· 2:16:39–2:17:42 · Also a question

अजय पालीवाल जी, जो पूछते हैं कि साधना में आगे बढ़ने पर देवी के बारे में गलत विचार क्यों आते हैं, उनसे वे कहते हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण केवल मंत्र जप करना है। केवल मंत्र जप करेंगे तो मूलाधार जागेगा और कठिनाई होगी। इसीलिए, वे कहते हैं, वे बार-बार कहते हैं कि जिस भी देवी या देवता की साधना-उपासना करें, उनके स्तोत्रों का पठन-पाठन जरूर कीजिए और भाव से गाइए। आरती करनी चाहिए। ये सब करेंगे तो भाव बदल जाएगा। और उनसे जुड़े ग्रंथ और पुराण पढ़ने चाहिए — सप्ताह में एक दिन ही सही, एक घंटा ही सही।

204

वह शक्ति शीतला माता से जुड़ा एक बहुत उग्र स्वरूप है, और गुप्त रखी जाती है

शीतला माता से जुड़ा बहुत उग्र स्वरूप, गुप्त रखा हुआ

· 2:18:18–2:18:51

शिव कुमारी जी, जिन्होंने एक शक्ति का नाम लिखा है, उनसे वे कहते हैं कि हर चीज लोगों के सामने नहीं रखी जा सकती। वे भी भगवती का एक स्वरूप हैं, और बहुत उग्र स्वरूप। कुछ जगहों पर उन्हें शीतला माता के साथ चलने वाले स्वरूपों में से एक माना जाता है। उनका नियंत्रण बिल्कुल अलग तरह का है। भगतवाल और भगवती के क्षेत्र में वे काफी प्रसिद्ध हैं, और बहुत गुप्त रहती हैं; इसलिए वह विषय वे यहाँ नहीं बताना चाहेंगे।

205

यदि नौकरी की परीक्षा में बार-बार एक-दो अंक से रह जाएँ, तो क्या करें?

कोई उपाय नहीं — परीक्षा या इंटरव्यू से पहले माता-पिता का आशीर्वाद लीजिए

· 2:18:52–2:19:30 · Also a question

शिवानी जी से वे कहते हैं कि यदि आप एक-दो अंक से नौकरी से रह जा रही हैं, तो इसके लिए कोई उपाय नहीं करना। बस इतना कीजिए: नौकरी के समय, जब भी आपकी परीक्षा हो, परीक्षा देने या इंटरव्यू में जाएँ, तो माता-पिता का आशीर्वाद लेकर जाइए। थोड़ी परेशानी हो, तो इससे सूर्य और चंद्रमा मजबूत होते हैं; और जब सूर्य मजबूत होता है, तो आपकी यह छोटी कठिनाई दूर हो जाएगी। इसीलिए माता-पिता का आशीर्वाद बहुत जरूरी हो जाता है। कठिनाई छोटी हो तो यह; बहुत विशेष हो, तो बातें जाननी पड़ेंगी।

206

क्या हर विद्या की पलट होती है, और वह कितने दिन में आती है?

यदि सामने वाला जानकार है, तो वह जरूर पलटेगी

· 2:19:31–2:20:00 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या हर विद्या की पलट होती है और पलट कितने दिन में आती है, वे उत्तर देते हैं कि यदि कोई किसी पर विद्या चलाता है और सामने वाला आदमी जानकार है, तो वह जरूर पलटेगी। कुलदेवी के रोने का कारण पूछे जाने पर वे प्रश्नकर्ता से पूछते हैं कि उनकी कुलदेवी रो कहाँ रही हैं।

कुलदेवी के रोने का कारण पूछे जाने पर, वे पूछते हैं कि वे रो कहाँ रही हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या हर विद्या की पलट होती है और पलट कितने दिन में आती है, वे उत्तर देते हैं कि यदि वह किसी पर विद्या चलाता है और सामने वाला आदमी जानकार है, तो वह जरूर पलटेगी।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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