देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा और पूरा सावन — गृहस्थ वास्तव में क्या करे

देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा और सावन की विधि।

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01

क्या देवशयनी एकादशी पर मुहूर्त देखना पड़ता है?

दोनों एकादशियों पर न मुहूर्त, न चौघड़िया

· 02:45–03:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबसे सामान्य बात जो सबको पता होनी चाहिए, वह यह है कि देवशयनी एकादशी और देवप्रबोधिनी एकादशी के दिन किसी भी प्रकार का मुहूर्त देखने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। चौघड़िया आदि देखे बिना, यदि आप कोई विशेष कार्य करना चाहते हैं, तो उस दिन कर सकते हैं।

02

क्या देवशयनी एकादशी पर नई साधना शुरू की जा सकती है?

चातुर्मास के लिए नरसिंह अनुष्ठान की शुरुआत

· 03:21–03:58 · Also a question

हाँ — यदि आप कोई नई साधना शुरू करना चाहते हैं, जैसे इस चैनल पर बताया गया भगवान नरसिंह से जुड़ा कोई विशेष अनुष्ठान, या उनके कवच का अनुष्ठान, तो कर सकते हैं। यदि आप एक शक्ति को पकड़कर जीवन में चलना चाहते हैं और वह शक्ति भगवान नरसिंह हैं, तो कल से देवप्रबोधिनी एकादशी यानी तुलसी विवाह के दिन तक रोज़ अपनी क्षमता अनुसार नरसिंह कवच का पाठ करने से, इस चातुर्मास व्रत के प्रभाव से, आपको बहुत कुछ मिल सकता है।

03

तंत्र बाधा से पीड़ित व्यक्ति को, जिसे कहीं से राहत नहीं मिल रही, क्या करना चाहिए?

नरसिंह कवच और नरसिंह यंत्र की स्थापना

· 03:59–04:58 · Also a question

जो लोग पर्सनल मैसेज भेजते हैं कि परिवार में बहुत तंत्र बाधाएँ हैं, जो हर जगह भटक रहे हैं, YouTube पर सुने कई लोगों से बात कर रहे हैं, और कई अनुष्ठान कर रहे हैं पर किसी एक को भी दोहरा नहीं पाते — उन्हें वक्ता एक सुझाव देते हैं: भटकने के बजाय, यदि आपकी आस्था भगवान नरसिंह में है, तो देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक हर दिन नरसिंह कवच के एक सौ आठ पाठ करें, और यदि संभव हो तो किसी जानकार साधक, किसी वैष्णव साधक, या इस विषय का ज्ञान रखने वाले किसी व्यक्ति से घर में नरसिंह यंत्र स्थापित करवाएँ।

04

सबसे प्रसिद्ध तांत्रिकों के पास से भी लोग बिना ठीक हुए क्यों लौटते हैं?

सिद्धि कितनी भी बड़ी हो, हर मनुष्य की एक सीमा है

· 05:00–05:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तंत्र कितना भी बड़ा हो, यदि आप यह नरसिंह कवच अनुष्ठान पूरे चार महीने पूरा करते हैं, तो इन चार महीनों में ही आपको अपने जीवन का सबसे बड़ा बदलाव दिखने लगेगा। वे कहते हैं कि वे किसी का नाम नहीं लेना चाहते, पर आज तंत्र के विषय में भारत के सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति से भी — जिसकी सबसे बड़ी फैन फॉलोइंग है, जिसकी क्षमता पूरी दुनिया देख रही है — लोग लौटकर मैसेज करते हैं कि वह सब कुछ बता देता है पर काट नहीं हो रही, परेशानी वैसी ही है। इन सबसे उनका निवेदन है कि कोई कितना भी बड़ा हो, वह एक सामान्य मनुष्य है और हर किसी की एक क्षमता होती है।

05

नरसिंह कवच के रोज़ कितने पाठ करने चाहिए?

एक सौ आठ, या चौवन, या सत्ताईस

· 05:36–06:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के द्वारा आपके तंत्र की काट नहीं हो रही, तो अपने प्रयास से कोशिश करें। नरसिंह कवच काफी छोटा है: यदि आप सक्षम हैं तो एक सौ आठ पाठ करें; नहीं तो चौवन करें; उससे भी कम करना चाहें तो सत्ताईस पाठ करें। पर कल से शुरू करें तो पूरा का पूरा देवप्रबोधिनी एकादशी के दिन तक चलाना होगा।

06

क्या चार महीने के पाठ को पितृ पक्ष या नवरात्रि में रोकना चाहिए?

पितृ पक्ष या नवरात्रि में कोई विराम नहीं

· 06:14–07:12 · Also a question

बीच में पितृ पक्ष पड़े तो रोकने की जरूरत नहीं, और नवरात्रि आए तो भी रोकने की जरूरत नहीं। आप नवरात्रि का पूजन पूरा कर सकते हैं, और पितृ पक्ष में पितरों के लिए जो अनुष्ठान करना चाहें वह अलग से कर सकते हैं — पर कल जो नियम उठाएँगे, उसे तुलसी विवाह के दिन तक पूरा का पूरा निभाना होगा।

07

तंत्र से परेशान व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या क्या है?

सबसे पहले बुद्धि कुंठित होती है

· 07:13–07:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तंत्र से परेशान व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब भी किसी पर तंत्र का विशेष प्रभाव पड़ता है, उसकी बुद्धि कुंठित हो जाती है। आप किसी की क्षमता को सही से परख नहीं पाते। आप भूत, प्रेत, पिशाच से पीड़ित हो सकते हैं, तंत्र बाधा से आपको शारीरिक और आर्थिक परेशानियाँ हो सकती हैं — पर सबसे बड़ी परेशानी यह है कि आप मानसिक रूप से पीड़ित होते हैं।

08

आप पर तंत्र करने वाले के पास वास्तव में कितनी शक्ति होती है?

सीमित शक्ति, और डर से होने वाला नुकसान

· 07:48–08:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप पर तंत्र करने वाले की शक्तियाँ एक सीमित मात्रा तक ही होती हैं: वह अपनी विद्याओं से आप पर श्मशान के प्रेत आदि प्रोजेक्ट कर रहा होता है। आप उसकी क्षमता को उससे कहीं ज़्यादा आँकते हैं। कहा जाता है कि यदि रणभूमि में शत्रु को देखकर आप डर गए, तो आप वहीं युद्ध हार गए — और वे कहते हैं कि आज यही सबसे बड़ी समस्या है, और इसी का फायदा दूसरे लोग और आपके शत्रु उठाते हैं।

09

क्षुद्र विद्या का जानकार व्यक्ति निश्चित रूप से क्या सिद्ध करता है?

हरकारे का काम करने वाला मसान

· 08:21–09:07 · Also a question

वक्ता इसे एक रोचक विषय बताते हैं: जब भी कोई चालाक व्यक्ति किसी पर तंत्र करवाता है, और क्षुद्र शक्तियाँ सिद्ध करने वाला जानकार व्यक्ति उसे करता है, तो उसने मसान अवश्य सिद्ध किया होगा — यह सौ प्रतिशत है, मसान अवश्य सिद्ध होगा। इसलिए जब भी वह किसी पर प्रयोग करता है, तो हरकारा या डाकिया — यानी किसी की पूरी जानकारी तुरंत पहुँचाना — यह सब इन्हीं शक्तियों के माध्यम से होता है।

10

शत्रु को कैसे पता चलता है कि आप किससे डरते हैं?

आपके डर की खबर पहुँचाई जाती है और उसे मोहरा बनाया जाता है

· 09:08–09:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप यहाँ जिन चीज़ों से डरते हैं, वह सारी जानकारी उधर जाती है; जिसने प्रयोग किया है, उसी तक पहुँचाई जाती है कि यह व्यक्ति उस व्यक्ति से डर रहा है, इसे इस चीज़ का भय है। और उसी चीज़ को मोहरा बनाकर वे आपके जीवन में उन बातों को बहुत बढ़ा देते हैं।

11

षट्कर्म का प्रयोग किस क्रम में एक घर को नष्ट करता है?

पहले विद्वेषण, फिर कुल शक्ति और पितरों का अपमान

· 09:58–10:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि केवल भगवती बगलामुखी ही बुद्धि का स्तंभन नहीं करतीं। जब तंत्र में कोई शत्रु आप पर षट्कर्म का प्रयोग करता है, तो सबसे पहले आपस में विद्वेषण, परिवार में विद्वेषण आता है — पहले झगड़े होंगे। झगड़े शुरू होंगे तो आप पूजा पाठ छोड़ देंगे; गुस्से और झगड़े में आप एक-दूसरे का अपमान करेंगे, और कुल शक्तियाँ नाराज़ होने लगेंगी। धीरे-धीरे आप पितरों का भी अपमान करेंगे, और गुस्से में अपने पूर्वजों को कठोर शब्द कहेंगे।

12

घर के देवी-देवता नाराज़ होने के बाद शत्रु किसके मन पर हमला करता है?

घर के मुख्य पूजा करने वाले का उच्चाटन

· 10:32–11:12 · Also a question

जब आपके द्वारा आपके कुल देवी देवता का अपमान हो चुका होता है और आपके और उनके बीच श्रद्धा की कमी आ जाती है, तो शत्रु ठीक उसी दरार का फायदा उठाकर अपना मुख्य प्रयोग करता है। पहले विद्वेषण, उसके बाद बाकी सब, और फिर घर के मुख्य व्यक्ति — जो सबसे ज़्यादा पूजा पाठ करता है, जिसके कारण घर के देवी-देवता प्रसन्न रहते हैं — उसके मन का उच्चाटन किया जाता है।

14

अंत में एक हमला किसी व्यक्ति की आस्था को कैसे कम करता है?

पैसा, अहंकार, और एक जगह न टिक पाना

· 12:01–12:54 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब बार-बार चोट लगती है, तो आप अपना पूजा पाठ कम कर देंगे, क्योंकि आपको लगेगा कि आय का कोई साधन नहीं है, या है भी तो सारा पैसा पूजा में जा रहा है — कि आप हज़ारों-हज़ारों खर्च कर रहे हैं, इतनी महँगी सामग्री खरीद रहे हैं, पूजा में सबसे अच्छी क्वालिटी का घी दे रहे हैं। यह आपके अहंकार पर भी चोट करता है, और फिर आप पूजा छोड़ने लगते हैं, या आपकी श्रद्धा में कमी आ जाती है।

15

भटकाव का अंत क्यों होना चाहिए?

वह भटकाव जिसे तंत्र-पीड़ित व्यक्ति रोक नहीं पाता

· 12:55–13:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब तक उस परम शक्ति की कृपा आप पर नहीं आती, तब तक आप बहुत भटक चुके होंगे — और वह भटकाव खत्म नहीं होगा। भटकाव का खत्म होना बहुत ज़रूरी है, जो तंत्र-पीड़ित व्यक्ति जल्दी नहीं कर पाता। ऐसे व्यक्ति को समझाया भी नहीं जा सकता; उसके सामने कितना भी बड़ा सिद्ध हो, प्यार से बोले या गाली से, प्रभाव आपको वहाँ से हटा देगा — और यदि आप नहीं हटे, तो आपके अपने परिवार के द्वारा हटाए जाएँगे।

16

तंत्र-पीड़ित लोग साधकों और गुरुओं से झगड़ा क्यों कर बैठते हैं?

शत्रु मनोवैज्ञानिक रूप से खेलता है

· 13:33–14:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब तक आप समझेंगे, तब तक आप दो-चार तांत्रिकों से, गुरुओं से, किसी से झगड़ा कर चुके होंगे; आपका भला चाहने वाले किसी भगतवाल साधक से झगड़ चुके होंगे; किसी को ढोंगी, ठग, कुछ भी कह चुके होंगे। सच यह है कि आप ऐसा करना भी नहीं चाहते थे — पर वे दोहराते हैं कि शत्रु पक्ष, जो क्षुद्र विद्याओं से दूसरों को कष्ट देता है, मन से खेलना जानता है, और आपके साथ मनोवैज्ञानिक रूप से, बहुत सही ढंग से खेलता है।

17

क्या कोई व्यक्ति तंत्र की समस्या का सौ प्रतिशत समाधान दे सकता है?

सच बताना एक विद्या है; समाधान करना दूसरी

· 14:21–15:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप कितना भी कर लें, कोई जादू की छड़ी नहीं घुमाने वाला। किसी के बारे में सौ प्रतिशत सच बताना एक विद्या है — पर उस समस्या का समाधान करना, सौ प्रतिशत निराकरण करना, लिखकर रख लीजिए: वह किसी व्यक्ति के हाथ में बिल्कुल नहीं है। केवल महाशक्ति ही यह कर सकती है, और उनके लिए, उन्हें प्रसन्न करने के लिए, आप स्वयं अनुष्ठान कर सकते हैं या किसी और से करवा सकते हैं।

18

तांत्रिकों के हाथों आर्थिक रूप से लुट चुके व्यक्ति को क्या करना चाहिए?

किसी को एक रुपया न दें; एकादशी से स्वयं बैठें

· 15:02–15:56 · Also a question

जो बहुत भटक चुके हैं, जो परेशान किए गए हैं, जिनका तांत्रिकों और साधकों ने आर्थिक शोषण किया है, जिन्हें लगता है कि उनसे इतना पैसा ले लिया गया और उन्होंने ज्योतिषियों और तांत्रिकों को हज़ारों और लाखों-लाखों दिए पर कोई कल्याण नहीं हुआ — उनसे वक्ता कहते हैं: आधा आना भी खर्च न करें, किसी को एक रुपया न दें। कल से स्वयं बैठें।

19

चार महीने के पाठ के साथ कैसा आचरण रखना चाहिए?

ब्रह्मचर्य, असत्य से बचना, और कहीं और मोहित न होना

· 15:57–16:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि और कुछ न भी हो, यदि इन चार महीनों में आप सही ढंग से चले, ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए और कम से कम असत्य न बोलते हुए — वे मानते हैं कि सौ प्रतिशत सच बोलना संभव नहीं, जीवन ऐसा ही है और वे भी यह जानते हैं — पर कम से कम कोशिश करें कि असत्य न बोलना पड़े। गृहस्थ अवस्था में रहते हुए भी इस तरह चलकर, कुछ हद तक ब्रह्मचर्य का ठीक से पालन करके, नारायण की कृपा से इन चार महीनों के बाद आपके जीवन में ज़मीन-आसमान का अंतर होगा।

20

जिनके गुरु शरीर छोड़ चुके हैं, वे गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?

गुरु परंपरा के अपने विधान का पालन करें

· 16:40–17:02 · Also a question

गुरु पूर्णिमा पर आते हुए वक्ता कहते हैं कि जिन सबके अपने गुरु, अपने सद्गुरु हैं — यदि वे गुरु गुरु मंडल में, अपने धाम, अपने निज धाम जा चुके हैं — तो उनकी गुरु परंपरा में उनके लिए पूजन पाठ, हवन यज्ञ और दान पुण्य का जो भी नियम है, उसका पालन करें।

सावन की तैयारी से आगे बढ़कर गुरु पूर्णिमा पर आते हुए वे कहते हैं कि जिन सबके अपने गुरु, अपने सद्गुरु हैं, और जिनके गुरु गुरु मंडल में, अपने निज धाम जा चुके हैं, वे अपनी गुरु परंपरा में उनके लिए पूजन पाठ, हवन यज्ञ और दान पुण्य का जो भी नियम है, उसका पालन करें।

21

जिसने कभी गुरु दीक्षा नहीं ली, वह गुरु पूर्णिमा पर क्या करे?

सदाचारी वृद्ध पुजारी का सम्मान करें

· 17:03–17:33 · Also a question

जिन्होंने आज तक गुरु दीक्षा नहीं ली, उनके लिए वक्ता पिछली बार कही बात दोहराते हैं: सबसे अच्छा यह है कि नारायण मंदिर, भगवती मंदिर या शिव मंदिर के किसी वृद्ध पुजारी को खोजें — चाहे उन्हें चारों वेदों का ज्ञान हो या एक का भी नहीं, बस वे वृद्ध हों, सदाचारी हों, या त्रिकाल गायत्री करने वाले पुजारी हों — और उस दिन श्रद्धा भाव से उन्हें यथाशक्ति दान पुण्य और दक्षिणा दें, और प्राणायाम करें। गुरु की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

22

जो भौतिक गुरु चाहते हैं, उनके लिए दोनों चैनलों पर चार-पाँच गुरु प्राप्ति साधनाएँ पहले से दी गई हैं

दोनों चैनलों पर दी गई गुरु प्राप्ति साधनाएँ

· 17:34–18:14

वक्ता कहते हैं कि तीसरा कार्य उनके लिए है जो भौतिक रूप से गुरु प्राप्त करना चाहते हैं: इसके लिए चार से पाँच साधनाएँ इसी चैनल पर और सिद्ध साबरी विद्या चैनल पर दी गई हैं। उनमें से कोई एक अनुष्ठान उस दिन से, उसमें जितने दिन बताए गए हैं उतने दिनों के लिए, शुरू किया जा सकता है।

23

क्या सावन में शिव पर दूध चढ़ाना ज़रूरी है?

सामर्थ्य हो तो गाय का दूध, न हो तो जल

· 18:15–18:48 · Also a question

सावन पर आते हुए वक्ता कहते हैं कि दूध को लेकर हज़ारों प्रश्न होते हैं — क्या दूध चढ़ाना ज़रूरी है, क्या उसके बिना शिव प्रसन्न नहीं होंगे? पहली बात: यदि आपका सामर्थ्य है तो गाय के दूध से शिव का अभिषेक करें। सामर्थ्य नहीं है तो न करें; कोई दिक्कत नहीं, जल से अभिषेक करें।

24

सावन में जलाभिषेक क्यों ज़रूरी है?

विषपान के बाद महादेव को शीतल करना

· 18:49–19:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जलाभिषेक इसलिए ज़रूरी है कि पुराणों में वर्णन है कि यही वह समय था जब भगवान महारुद्र, महाशिव ने विष पिया था, और उसकी गर्मी से उनके शरीर में ऐसी अग्नि उठी कि उन्हें शीतल रखने के लिए, शीतल करने के लिए, पूरे श्रावण मास विभिन्न देवताओं और भगवती ने अभिषेक किया, जिससे उनका विष शांत हुआ, उनका शरीर सौम्य रूप में आया, और वे सृष्टि का कल्याण कर सके।

25

दूध को पीने के बजाय शिव को क्यों चढ़ाना चाहिए?

बरसात के तीन महीनों में दूध विषैला हो जाता है

· 19:48–20:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसका बहुत अच्छा कारण बताया गया है: आषाढ़, श्रावण और भादों के तीन महीनों में जिन गायों और ऐसे सब पशुओं का दूध आप पीते हैं, वे घास चरते हैं, और इन महीनों में बारिश के कारण ज़हरीले पौधे भी उगते हैं, जिन्हें खाने से इन सब जीवों का दूध ज़हरीला, विषैला हो जाता है और शरीर पर गलत प्रभाव देता है। इसीलिए इन तीन महीनों में दूध से बने सभी खाद्य पदार्थ खाना भी मना है — दही नहीं खाना, दूध से बनी दूसरी चीज़ें इस समय नहीं लेनी।

26

क्या शिव पर चढ़ाया दूध गरीबों को दिया जा सकता है?

वक्ता चढ़ाया हुआ दूध बाँटने के फैशन को नकारते हैं

· 20:29–21:01 · Also a question

अगला प्रश्न यह है कि क्या शिव पर चढ़ाया दूध किसी को दिया जा सकता है। वक्ता कहते हैं कि आजकल एक फैशन चल पड़ा है यह दिखाने का कि दूध चढ़ाकर गरीबों में बाँटना चाहिए। उनके मत में यह बात सही नहीं है, और आपको ऐसा नहीं करना चाहिए।

27

शिवलिंग के लिए अर्थिंग का उदाहरण क्या है?

शिव धनात्मक और भगवती ऋणात्मक धरती के रूप में

· 21:02–22:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि विज्ञान कितना भी आगे बढ़ गया हो, बिजली से चलने वाली जो भी मशीन आप प्रयोग करते हैं, उसे ग्राउंड, अर्थिंग चाहिए; अर्थिंग के बिना वह नहीं चल सकती — उसे वह ऋणात्मक शक्ति चाहिए, और सूखेपन में ऋणात्मक शक्ति जल्दी नहीं मिलती। उस क्षेत्र के इंजीनियर जानते हैं कि अर्थिंग वाली जगह का वातावरण गीला रखा जाता है ताकि करंट के प्रवाह में जल्दी कोई रुकावट न आए। ठीक उसी तरह भगवान सदाशिव के शिवलिंग को प्रतीक रूप में धनात्मक और भगवती को ऋणात्मक माना जाता है।

28

धरणीगर्भसम्भूतं का क्या अर्थ है?

धरती के गर्भ से जन्मे मंगल, जिनके पिता सदाशिव हैं

· 22:11–22:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब हम पौराणिक मंत्र पढ़ते हैं, तो उसमें धरणीगर्भसम्भूतं पढ़ते हैं। धरणी गर्भ का अर्थ क्या है? जिनका जन्म धरती के गर्भ से हुआ, वे मंगल ग्रह हैं, जिनके पिता सदाशिव हैं। तो सदाशिव धनात्मक हैं और भगवती नीचे ऋणात्मक रूप में, ऋणात्मक शक्ति के रूप में उपस्थित हैं, जिन पर शिव स्थित हैं।

29

शिवाभिषेक में धरती में जाने वाले जल का क्या प्रभाव है?

पिंड की शक्ति और नकारात्मक शक्तियों का बंधन

· 22:35–23:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसे एक माप के रूप में माना गया है कि शिवाभिषेक से जितना जल धरती में जाता है, उतनी मात्रा में धरती का भीतरी भाग तरल रहता है, जिससे उस पिंड की — एक तरह से शिवलिंग की — शक्ति काफी बढ़ी हुई रहती है।

30

शिवलिंग पर चढ़ाई गई चीज़ पर किसका अधिकार होता है?

चंड का अधिकार, और बाणलिंग का अपवाद

· 23:46–24:25 · Also a question

एक बार शिवलिंग पर कुछ चढ़ा दिया, तो उस पर किसी मनुष्य का अधिकार नहीं रहता — केवल भगवान शिव के एक गण चंड का उस पर अधिकार होता है। तो जब आप फल चढ़ाते हैं, उस पर चंड का अधिकार हो जाता है; पर जब दूध चढ़ाते हैं तो जाकर किसी को भी पीने को दे देते हैं। ऐसा क्यों? वक्ता कहते हैं कि यह दोष लगने वाली बात है, इसलिए नहीं देना चाहिए। बाणलिंग, यानी नर्मदेश्वर, में माना जाता है कि उस पर चढ़ाया हुआ किसी को दिया जा सकता है — यद्यपि इसमें भी मतभेद हैं, और उनके मत में नहीं देना चाहिए।

31

यदि कोई गरीबों की सेवा दूध से ही करना चाहे, तो कौन-सा दूध दे?

चरने वाली गाय का नहीं, शुद्ध किया हुआ दूध दें

· 24:26–25:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपकी इच्छा गरीबों की सेवा करने की है, कि आप नर में नारायण देखेंगे, और आपका सामर्थ्य है, तो कम से कम विषैली चीज़ न दें। आजकल शुद्ध किया हुआ दूध मिलता है; यदि इतना सामर्थ्य है तो गरीबों को वैसा दूध दें। पर यदि चरने जाने वाली गाय को चरकर लौटने के बाद दुहकर वह दूध गरीबों को देंगे, तो उनका नुकसान होगा — आप नर नारायण सेवा नहीं कर रहे, बल्कि कहीं न कहीं उन्हें कष्ट दे रहे हैं।

32

सावन में कौन-से मंत्र करने चाहिए, और स्त्रियों के लिए क्या बदलता है?

दीक्षित और अदीक्षित का जप, और प्रणव का नियम

· 25:09–25:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो गृहस्थ दीक्षित हैं, वे अपने गुरुजी से मिले मंत्रों की साधना करें; पंचाक्षरी के बारे में वे पिछले लाइव में बता चुके हैं। यदि दीक्षा नहीं मिली, तो पुरुष प्रणव के बिना जप करें। स्त्रियाँ नमः बाद में लगाएँ, पहले लगाकर जप न करें, और प्रणव का उच्चारण न करें।

33

गृहस्थ को सावन में किस ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए?

बारह में से सबसे नज़दीकी, नाम मंत्र से

· 26:19–26:47 · Also a question

पिछले वर्ष के श्रावण में बताई एक साधना दोहराते हुए वक्ता कहते हैं कि बारह ज्योतिर्लिंग हैं, और उन बारह में से जो ज्योतिर्लिंग क्षेत्र आपके घर के सबसे नज़दीक पड़ता है, उसके नाम से पूजा करें। जैसे, यदि आप गुजरात क्षेत्र में हैं, तो सोमनाथ महादेव का मंदिर सौराष्ट्र में है; सोमनाथ को पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है, तो घर पर उनके नाम से अभिषेक करें।

34

घर पर रोज़ के अभिषेक के साथ कौन-सा संकल्प लें?

आपका जो भी संकल्प हो, दूध अर्पित करते हुए लें

· 26:48–27:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आपका जो भी संकल्प हो वह लें — रोग नाश के लिए लेना चाहें तो वह लें; कोई और संकल्प हो तो वह लें — और उसी संकल्प के साथ दूध अर्पित करें। बाहर नहीं जाना चाहते तो घर पर कर सकते हैं; जिन साधकों ने घर में शिवलिंग स्थापित किया है वे उस पर अभिषेक कर सकते हैं, या मंदिर जा सकते हैं।

35

जीवन में कोई विशेष काम अटका हो तो क्या करना चाहिए?

सबसे नज़दीकी ज्योतिर्लिंग के नाम मंत्र का सवा लाख जप

· 27:29–28:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि कोई ऐसा काम है जिसके बिना आपका जीवन आगे नहीं बढ़ सकता — किसी का विवाह अटका है, किसी की नौकरी या व्यापार से जुड़ी समस्या है — तो जो क्षेत्र आपके सबसे नज़दीक पड़ता है, उसके नाम मंत्र का कम से कम सवा लाख जप, यथाशक्ति, करें। जैसे, यदि आप काशी क्षेत्र में रहते हैं, या भगवान विश्वनाथ का क्षेत्र सबसे नज़दीक पड़ता है, तो विश्वनाथाय नमः मंत्र — दीक्षित हों या जनेऊ पहनते हों तो प्रणव सहित, और नहीं तो कोई दिक्कत नहीं, केवल उनके नाम के साथ नमः लगाकर — रुद्राक्ष की माला से सवा लाख करें।

36

यदि कोई माला पर जप गिनना न चाहे तो क्या करे?

प्रतिपदा से रक्षाबंधन तक रोज़ एक घंटा जप

· 28:04–28:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप माला से जप नहीं करना चाहते, तो बस पूरे श्रावण मास, प्रतिपदा से लेकर रक्षाबंधन के दिन तक, रोज़ एक घंटा जप करें। और यदि संभव हो, तो गुरु पूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा के दिन तक करें।

यदि आप माला से जप नहीं करना चाहते, तो बस पूरे श्रावण मास, प्रतिपदा से लेकर रक्षाबंधन के दिन तक, रोज़ एक घंटा जप करें। और वे कहते हैं, यदि संभव हो, तो गुरु पूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा के दिन तक करें।

37

जो विशेष सिद्धियाँ चाहते हैं, वे सावन में क्या करें?

बारहों ज्योतिर्लिंगों में से हर एक का बारह हज़ार जप

· 28:33–28:49 · Also a question

इसके अलावा, जो विशेष प्रकार की सिद्धियाँ चाहते हैं, जिनकी इच्छा किसी देव कृपा में, सिद्धि में है, उनके लिए वक्ता कहते हैं कि समय मिला तो वे पूरा विधि विधान अलग से समझाने का प्रयास करेंगे। संक्षेप में: बारह ज्योतिर्लिंग हैं, और पूरे श्रावण मास में हर ज्योतिर्लिंग के नाम का बारह हज़ार जप करें। वे कहते हैं कि यह अद्भुत लाभ देता है — आप सोच भी नहीं सकते कि कितना लाभ देता है।

38

सोमनाथ की महिमा क्या है, और उनका जप किसके लिए है?

चंद्रमा का क्षय रोग और महामृत्युंजय

· 28:50–29:30 · Also a question

यदि शरीर में कई तरह के रोग हैं जिनसे छुटकारा नहीं मिल रहा, या घर में कोई पीड़ित है, तो भगवान सोमनाथ — जिनकी महिमा, वक्ता कहते हैं, आपको इससे पता चलेगी कि चंद्रमा को शाप मिलने पर क्या हुआ। चंद्रमा को क्षय रोग से ग्रस्त होने का शाप मिला; तब सौराष्ट्र क्षेत्र में भगवान चंद्रदेव ने वहाँ शिवलिंग स्थापित कर तपस्या की। महामृत्युंजय मंत्र उस समय कीलित माना गया था; मार्कंडेय मुनि वहाँ उपस्थित थे और उनके द्वारा कहा गया — फिर भी विशेष मंत्रों के द्वारा, जो तब तंत्रोक्त मंत्र हो जाता है, चंद्रदेव ने आराधना की, सदाशिव प्रकट हुए, और सदा के लिए उस ज्योतिर्लिंग में स्थित हो गए।

39

कौन-सा ज्योतिर्लिंग रोग के लिए है, और कौन-सा भूत प्रेत और पितृ दोष के लिए?

रोग के लिए सोमनाथ, अभिचार और पितरों के लिए महाकालेश्वर

· 29:31–30:02 · Also a question

जिन्हें बहुत रोग, कष्ट और पीड़ा है, वे पूरे श्रावण मास सोमनाथ महादेव का कम से कम बारह हज़ार जप, या सवा लाख जप करें। जिन्हें भूत, प्रेत, पिशाच और अभिचार से जुड़ी समस्याएँ हैं, या जिन्हें काफी पितृ संबंधी दोष है, वे महाकालेश्वर महादेव का जप करें — सवा लाख, या कम से कम बारह हज़ार जप।

40

विवाह न हो रहा हो तो कौन-सा ज्योतिर्लिंग सहायक है?

विवाह बाधा के लिए वैद्यनाथ और काशी विश्वनाथ

· 30:03–30:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि विवाह नहीं हो रहा, विवाह में बहुत बड़ा कष्ट और बहुत बड़ी कठिनाई है, तो इसमें आप भगवान वैद्यनाथ की सहायता लेकर उनके नाम मंत्र का जप कर सकते हैं, या काशी विश्वनाथ की सहायता लेकर उनके नाम मंत्र का भी जप कर सकते हैं।

41

तीर्थ क्षेत्र में रहने वाले क्या करें, और शिव महापुराण का क्या?

स्थानीय महादेव, और शिव महापुराण का पाठ

· 30:32–30:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके अलावा जो तीर्थ क्षेत्र में रहते हैं, वे उस स्थान पर महादेव का जो भी रूप है, उस स्थान के अनुसार उसकी साधना और पूजा करें। और शिव महापुराण का पाठ — यदि आप श्रावण मास में पूरा शिव महापुराण पढ़ें — अद्भुत लाभ देता है।

इसके अलावा जो तीर्थ क्षेत्र आदि में रहते हैं, वे उस स्थान पर महादेव का जो भी रूप है, उस स्थान के अनुसार उसकी साधना और पूजा करें। वे कहते हैं कि शिव महापुराण का पाठ — यदि आप श्रावण मास में पूरा शिव महापुराण पढ़ें — अद्भुत लाभ देता है।

42

यदि पूरा शिव महापुराण न पढ़ सकें तो क्या पढ़ें?

हर पक्ष में रुद्र संहिता का एक पारायण

· 30:57–31:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप पूरा पाठ नहीं कर सकते, तो वे दो संहिताएँ पढ़ने को कहेंगे। पहली, रुद्र संहिता पढ़ें — चाहे एक पारायण करें या दो। इसका अर्थ है: कृष्ण पक्ष में पूरी रुद्र संहिता एक बार पढ़ें, फिर शुक्ल पक्ष में भी पूरी रुद्र संहिता एक बार पढ़ें। यदि वह न कर सकें, तो उसकी जगह कैलास संहिता पढ़ सकते हैं; इन दोनों में से एक संहिता का पूरा पाठ हर पक्ष में एक बार होना चाहिए।

43

शिव पुराण स्वयं रुद्र संहिता के बारे में क्या कहता है?

सूत जी: ऐसा कोई पाप नहीं जिसे इसका पाठ न जला दे

· 31:35–32:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पहले शिव पुराण में ही शिव पुराण का माहात्म्य पढ़ें: उसमें सूत जी कहते हैं कि इस पूरे संसार में उन्होंने ऐसा कोई पाप नहीं देखा, ऐसा कोई दोष नहीं देखा, जो रुद्र संहिता के पाठ से खत्म न हो, जलकर भस्म न हो। यानी सभी दोषों की शांति होगी।

44

जप के समय भगवान के प्रति अपशब्द के विचार क्यों उठते हैं?

गुरु चांडाल योग और पीड़ित चंद्रमा

· 32:57–33:49 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि जप करते समय उसके मन में भगवान को अपशब्द कहने के विचार क्यों आते रहते हैं और कभी-कभी सच में अपशब्द निकल जाता है; वक्ता कहते हैं कि वे समझ सकते हैं और इससे परेशान नहीं होना चाहिए, ऐसा बहुत बार होता है। उनके अपने मत और अवलोकन में, प्रश्नकर्ता की जन्म कुंडली में दो दोष हो सकते हैं: पहला, उनके बृहस्पति अवश्य किसी ऐसे भाव में या किसी ऐसे प्रभाव में होंगे — गुरु चांडाल योग, भले केवल गोचर में — जिसके कारण ऐसे विचार आते हैं; और दूसरा, यदि चंद्रमा पीड़ित हो, भले गोचर में, तो भी ऐसे भाव उठते हैं।

45

पूजा के समय मुँह से अपशब्द निकल जाए तो क्या उपाय है?

भगवती गंगा का नाम ग्यारह बार लेना

· 33:50–34:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पूजन पाठ के समय जब भी मन में कोई गलत भाव आए — और यह सबके लिए है, उनके साथ भी कभी-कभी होता है, क्योंकि गृहस्थ अवस्था में रहने वाले संसारी लोगों को यह समस्या होती है — तो उस अवस्था में शांत होकर बार-बार भगवती गंगा का नाम लें। यदि एक बार अपशब्द निकल गया, तो भगवती गंगा का नाम ग्यारह बार लें।

46

गंगा का नाम लेने से मानसिक पाप क्यों धुलता है?

जहाँ पाप उठा, वहीं शुद्धि

· 34:19–34:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि क्योंकि यह मानसिक पाप है — अपशब्द आपके मन से, आपके हृदय से निकला, या विचार आपके मस्तिष्क में आया — तो धुलाई भी उसी जगह करनी होगी, शुद्धि उसी जगह करनी होगी; और गंगा जी के नाम से वह चीज़ पूरी तरह साफ हो जाएगी। बाद में यह विचार मन में नहीं आना चाहिए कि आपने अपशब्द कहा: जैसे अपशब्द का भाव उठा था, वैसे ही भगवती गंगा की पवित्रता का भाव लाएँ।

47

फ्लैट न बिक रहा हो और कर्ज़ चढ़ गया हो तो क्या करें?

नरसिंह ऋण मोचन, या संकल्प के साथ शिव अभिषेक

· 36:06–36:42 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उनका फ्लैट नहीं बिक रहा, पैसा अटका है और सिर पर बहुत भारी कर्ज़ है। वक्ता उन्हें भगवान नरसिंह के ऋण मोचन की ओर इंगित करते हैं, इन सब बातों का संकल्प लेकर, एकादशी से एकादशी तक; या यदि वे भगवान सदाशिव से जुड़ी साधना करना चाहें, तो घर पर चाँदी के चम्मच से दूध का अभिषेक जो बताया गया है — मंदिर में करें तो उत्तम है, पर मंदिर में बहुत भीड़ हो और संभव न हो, तो घर पर अभिषेक करें और मंदिर जाकर भी संकल्प के साथ दूध चढ़ाएँ।

48

कर्ज़ से मुक्ति और पितृ दोष के लिए कौन-सा ज्योतिर्लिंग सबसे अच्छा है?

कर्ज़ के लिए वैद्यनाथ, पितृ और नाग दोष के लिए नागेश्वर

· 36:43–37:19 · Also a question

प्रश्नकर्ता ने जो कुछ लिखा है उस सबके लिए, कर्ज़ से मुक्ति के लिए, वक्ता कहते हैं कि यदि आप यह विशेष रूप से भगवान वैद्यनाथ के नाम से करें तो बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। और यदि पितृ दोष आदि है, तो बारह ज्योतिर्लिंगों में भगवान नागेश्वर — यद्यपि जिस भी ज्योतिर्लिंग का करें लाभ मिलेगा, पर नागेश्वर के नाम से शिवार्चन करने से पितृ दोष में, नाग दोष में, और जिनके पाँचवें भाव में राहु है उन्हें विशेष लाभ मिलता है।

49

कौन-सा विधान शिव शक्ति के साथ सांभविक बनाता है और रक्षा भी देता है?

शिव शक्ति मंत्र की रोज़ सौ माला

· 37:20–38:08 · Also a question

एक श्रोता ने ऐसा विधान पूछा जिससे शिव शक्ति के साथ सांभविक हुआ जाए और रक्षा भी हो; वक्ता कहते हैं कि पिछले वर्ष सावन शुरू होने से पहले उन्होंने इसी प्रश्नकर्ता से कहा था कि हर दिन शिव मंत्र का जप करें, रोज़ सौ माला। यदि एक वर्ष तक वे रोज़ शिव शक्ति मंत्र की सौ, एक सौ आठ, एक सौ एक माला करते, तो ऐसा कौन-सा चमत्कार है जो भगवती अब तक न कर चुकी होतीं?

50

हर परिस्थिति में साधना में मन स्थिर कैसे रखें?

अपने इष्ट की गीता, और शिव महापुराण

· 39:10–39:40 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि हर परिस्थिति में साधना में मन स्थिर कैसे रखें; वक्ता उत्तर देते हैं: गीता पाठ। किसकी गीता? यदि आप मुख्य रूप से भगवान सदाशिव की उपासना करते हैं, तो शिव गीता पढ़ें — आपके हर प्रश्न का उत्तर उसमें मिलेगा। जो भी आपके इष्ट हों, उन्हीं इष्ट की गीता पढ़ें; नहीं तो भगवद्गीता तो है ही। शिव महापुराण पढ़ें तो आपके बहुत से प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे; रोज़ एक अध्याय, या आधा अध्याय पढ़ें।

51

क्या साधना कभी छोड़नी चाहिए?

किसी भी स्थिति में साधना नहीं छोड़नी

· 39:41–40:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि साधना किसी भी स्थिति में बिल्कुल नहीं छोड़नी है, और फिर आगे के श्रोताओं का नाम लेकर अभिवादन करते हैं।

वे कहते हैं कि साधना किसी भी स्थिति में बिल्कुल नहीं छोड़नी है।

52

शनि के अशुभ प्रभाव के लिए कौन-सा पाठ और उपाय है?

दशरथकृत शनि स्तोत्र और तेरह दीपक

· 40:02–40:40 · Also a question

एक श्रोता ने शनि के अशुभ प्रभाव के लिए पाठ और स्वतंत्र उपाय पूछे; वक्ता कहते हैं कि आप शनि, शनैश्चर महाग्रह से जुड़ा पाठ कर सकते हैं: दशरथकृत शनि स्तोत्र। मंदिर में जो शमी का पेड़ है, वहाँ दीपदान कर सकते हैं। दीपक कैसे जलाएँ? जब भी शनिश्चर या अमावस्या पड़े, उस दिन भगवान शनि के निमित्त तेरह दीपक जलाने चाहिए — सरसों के तेल का दीपक, सरसों के तेल में काले तिल डालकर।

53

क्या सूक्ष्म शरीर को स्थूल शरीर से अलग किया जा सकता है?

पूरी तरह केवल योग सिद्ध ही कर सकता है

· 40:41–41:21 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि क्या हम सूक्ष्म शरीर को स्थूल शरीर से अलग करके उस रूप में बाहर घूम सकते हैं, और ऐसा करें तो क्या कोई हमें बाँध सकता है; वक्ता इसे बहुत ऊँचे स्तर का योग संबंधी प्रश्न बताते हैं। वे कहते हैं कि सूक्ष्म शरीर को स्थूल शरीर से अलग करना केवल योग सिद्ध व्यक्ति ही कर सकता है। हम स्वयं कुछ क्षणों के लिए ये चीज़ें देख सकते हैं: जब आप बहुत मंत्र जप करते हैं, जब श्वास नियंत्रित करने की विधि आ जाती है, तब आप क्षण भर के लिए यह क्रिया कर सकते हैं — पर इसे पूरी तरह करने के लिए योग सिद्ध होना ज़रूरी है।

54

श्रावण में कुलदेवी की कृपा कैसे प्राप्त करें?

पक्ष के अनुसार कुलदेवी सप्तमी, और पंचमी पर नाग पूजन

· 41:22–42:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पूरे श्रावण मास सदाशिव के साथ विशेष रूप से कुलदेवी की सेवा करें। श्रावण शुक्ल पक्ष सप्तमी कुलदेवी सप्तमी है: जिनकी कुलदेवी पूजा कृष्ण पक्ष में होती है वे कृष्ण पक्ष में करें, और जिनकी शुक्ल पक्ष में होती है वे शुक्ल पक्ष की सप्तमी को कुलदेवी पूजा करें। कुल पितरों के निमित्त, नाग रूप में स्थित सभी पितरों के निमित्त, पंचमी तिथि को विशेष नाग पूजन करें; इसका पूरा विधि विधान चैनल पर अलग से बनाया गया है, और इसका खर्च दो सौ से तीन सौ रुपये है।

55

क्या सावन में बजरंग बाण सिद्ध किया जा सकता है?

हाँ, पर साथ में छोटा शिव पूजन भी

· 42:01–42:34 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि क्या सावन में बजरंग बाण सिद्ध करने का विधान किया जा सकता है; वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है। उसके साथ एक छोटा शिव पूजन भी अवश्य करें: कम से कम शिव जी के बारह नाम, बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम लेते हुए अभिषेक करें। इतना साथ में अवश्य करें, और उसके बाद बजरंग बाण सिद्ध करें।

56

क्या कोई ऐसा मंत्र है जिसे कभी पढ़ना या गाना नहीं चाहिए?

एक श्रोता का लिखा मंत्र, सीधे मना

· 42:35–43:02 · Also a question

एक श्रोता ने एक मंत्र लिखकर भेजा; उसका उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि लिखा गया मंत्र कभी पढ़ना नहीं है, कभी बोलना नहीं है, और भजन कीर्तन में भी उसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह अत्यंत विशेष मंत्र है। वे उनसे कहते हैं, हर हर महादेव बोलिए।

57

चंद्रमा के लिए चाँदी की अंगूठी या कड़ा कैसे पहनें?

पहले कुंडली का विश्लेषण, फिर मंत्र

· 43:03–43:20 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि चंद्र ग्रह के लिए चाँदी की अंगूठी या कड़ा कैसे अभिमंत्रित करके पहनें, और चंद्रमा के लिए कौन-सी पूजा या साधना करें; वक्ता उलटा प्रश्न करते हैं: चंद्रमा किस स्थिति में हैं कि आपको चाँदी की अंगूठी या कड़ा पहनना चाहिए? इसके लिए पहले किसी अच्छे ज्योतिषी या किसी साधक से अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाएँ, और तभी पहनें। उसके अनुसार मंत्र है — तंत्रोक्त मंत्र भी है, और साबर मंत्र भी हैं।

58

क्या नया शरीर ले चुके गुरु से अब भी संपर्क हो सकता है?

गुरु मंडल की कृपा सूक्ष्म रूप में बनी रहती है

· 43:21–43:55 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि यदि गुरु ने नया शरीर पा लिया है, तो क्या उनके पुराने रूप में उनसे संपर्क करना और मार्गदर्शन लेना अब भी संभव है, या यह भ्रम है; वक्ता कहते हैं: गुरु कोई भी हों, जब आपने किसी परंपरा में दीक्षा ली है, तो अपने कर्म की गति के कारण गुरु ने नया शरीर पा भी लिया हो, तब भी गुरु मंडल की कृपा आप पर सदा बनी रहती है। सूक्ष्म रूप में गुरु कृपा करते रहते हैं। पुराने रूप में संपर्क बिल्कुल किया जा सकता है; मार्गदर्शन लेना संभव है या नहीं, यह गुरु मंडल पर निर्भर करता है।

59

पारंपरिक परंपरा में दीक्षा वास्तव में कौन देता है?

परम गुरु, और शाक्त मार्ग के आदि गुरु के रूप में नारायण

· 43:56–44:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ध्यान रखें, जब दीक्षा होती है — यदि आप पारंपरिक दीक्षा ले रहे हैं — तो जो व्यक्ति वहाँ शरीर में बैठकर आपको दीक्षा देता है, वह वास्तव में देने वाला नहीं होता; बल्कि परम गुरु देते हैं, यानी वे जो उस पंथ के, उस मार्ग के पहले प्रवर्तक थे। वे कहते हैं कि हम जिस मार्ग में हैं, हम शाक्त परंपरा में, शाक्त मार्ग में हैं — पर इस मार्ग में भी हमारे पहले गुरु भगवान नारायण हैं; जिन आदि गुरु की सबसे पहले पूजा होती है, वे भगवान नारायण हैं। यानी हमारी परंपरा में माना जाता है कि शाक्त दीक्षा आपको नारायण दे रहे हैं।

60

क्या तंत्र के विरुद्ध चार महीने शिव कवच पढ़ा जा सकता है?

अमोघ शिव कवच, और उसे कब शुरू करें

· 44:33–45:12 · Also a question

एक श्रोता ने तंत्र से लड़ने के लिए मंदिर में चार महीने शिव कवच पढ़ने के बारे में पूछा; वक्ता कहते हैं कि यह बिल्कुल किया जा सकता है: आप अमोघ शिव कवच का पाठ शुरू कर सकते हैं। कल से, या गुरु पूर्णिमा से, या श्रावण की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से शुरू कर सकते हैं। संकल्प स्पष्ट रखें — शिव जी की कृपा के लिए, और उनकी कृपा से शत्रुओं द्वारा किए जा रहे सभी अभिचार के नाश के लिए।

61

तंत्र में गैंडे के सींग से बने कड़े का क्या उपयोग है?

गृहस्थ के लिए वर्जित

· 45:13–46:00 · Also a question

गैंडे के सींग से बने कड़े के उपयोग के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि तंत्र में इसका प्रयोग विशेष ढंग से होता है, और इसका पहला प्रयोग साबर विद्याओं आदि में है — पर कहीं न कहीं गृहस्थ के लिए यह प्रयोग वर्जित किया गया है। वे कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि प्रश्नकर्ता इसके साथ किस पंथ का पालन कर रहे हैं, और बहुत-सी चीज़ें हैं जिन्हें घर में रखना गृहस्थ के लिए वर्जित है।

62

क्या गैंडे का सींग घर में रखना चाहिए?

जिसने दिया उससे पूछें; जब तक जीवन पर न बन आए, न रखें

· 46:01–46:29 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि यह श्रोता पहले भी यही प्रश्न पूछ चुके हैं और बार-बार पूछ रहे हैं। वे कहते हैं, यदि आपके पास है, तो जिस व्यक्ति से लिया है उससे उसके प्रयोग ठीक से सीखें। उनके अपने मत और ज्ञान के अनुसार, गृहस्थ को इसे घर में तब तक प्रयोग नहीं करना चाहिए जब तक यह बिल्कुल ज़रूरी न हो और जीवन ही दाँव पर न हो।

वे बताते हैं कि श्रोता यह प्रश्न पहले भी पूछ चुके हैं और बार-बार पूछ रहे हैं। यदि आपके पास है, तो जिससे लिया है उससे उसके प्रयोग ठीक से सीखें। उनके अपने मत और प्राप्त ज्ञान के अनुसार, गृहस्थ को इसका प्रयोग घर में तब तक नहीं करना चाहिए जब तक यह बिल्कुल ज़रूरी न हो, जब तक जीवन ही दाँव पर न हो।

63

गुरु साधना के बाद साधनाओं का क्रम क्या है?

गुरु, गणपति, भैरव, फिर ग्रह, फिर कुल देवता

· 46:30–46:59 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि दत्तात्रेय की, यानी गुरु की, साधना के बाद अगले चरण में गणेश जी और हनुमान जी की कौन-सी साधनाएँ की जा सकती हैं; वक्ता क्रम बताते हैं: गुरु, गणपति, फिर भैरव जी; उसके बाद आपकी जन्म कुंडली के अनुसार पाँचवें और नौवें भाव से जुड़े ग्रहों की साधना, या लग्नेश की साधना, जिसे भी मज़बूत करने की ज़रूरत हो; फिर कुल देवी देवता की साधना; और फिर मुख्य साधना।

64

क्या बिना दीक्षा के पाशुपतास्त्र की साधना की जा सकती है?

बिना दीक्षा कोई अस्त्र मंत्र नहीं

· 47:00–47:23 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि पाशुपतास्त्र क्या है और क्या बिना दीक्षा उसकी साधना की जा सकती है; वक्ता कहते हैं कि सभी अस्त्र मंत्र — चाहे पाशुपतास्त्र हो, नीलकंठ अघोर अस्त्र, माहेश्वर अस्त्र, अघोर अस्त्र — बिना दीक्षा नहीं करने चाहिए। वे कहते हैं कि यह उनका अपना मत है; आप अपने लिए निर्णय लेने को स्वतंत्र हैं। उनके मत में मुख्य साधना के बिना कभी अस्त्र साधना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अस्त्र एक अंग विद्या है।

65

मुख्य विद्या के बिना अस्त्र साधना खतरनाक क्यों है?

जो ऊर्जा आप जगाते हैं, उसे सँभाल नहीं सकते

· 47:24–48:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आपने मुख्य विद्या की, अस्त्र धारण करने वाले की, सेवा पूजा नहीं की, और आपको दीक्षा नहीं मिली। यदि आप पाशुपतास्त्र के मंत्र जगाते हैं, तो क्या वहाँ उठने वाली ऊर्जा को सँभाल पाएँगे, क्या उसका लक्ष्य साध पाएँगे? कैसे सँभालेंगे? चाहे एक सौ आठ पाठ करें — एक सौ आठ छोड़िए, रोज़ ग्यारह पाठ भी करें — यदि आप उसके अधिकारी नहीं हैं, तो कहीं न कहीं आपका अपना ही विनाश होगा।

66

अपने ऊपर किए गए तंत्र प्रयोग को कैसे नष्ट करें?

मैदान में खड़े रहने का सामर्थ्य और मनोबल

· 48:11–48:45 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि किसी भी तंत्र प्रयोग को कैसे नष्ट किया जाता है; वक्ता कहते हैं कि चैनल पर कई वीडियो पहले से तंत्र नाश के लिए अलग-अलग विद्याओं का प्रयोग सिखाते हैं। आप विद्याओं के द्वारा स्वयं तंत्र नष्ट कर सकते हैं — आपमें सामर्थ्य होना चाहिए, और आपका मनोबल ऐसा होना चाहिए कि आप मैदान में डटकर खड़े रह सकें। तभी आप अपने ऊपर किए गए प्रयोगों को नष्ट कर पाएँगे।

67

जब कोई गुरु न हो तो क्या किसी देवी या देवता को गुरु माना जा सकता है?

ज्ञान, शक्ति और तपोबल; और देवता को गुरु मानना

· 48:46–49:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब आपमें ज्ञान आएगा और शक्ति आएगी, तो आप स्वयं को इतना प्रेरित रखेंगे कि किसी के भी सामने खड़े हो सकें — इसलिए आपके पास उतनी जानकारी होनी चाहिए। यह पूछे जाने पर कि गुरु न हो तो क्या किसी देवी या देवता को गुरु माना जा सकता है, वे कहते हैं: बिल्कुल, ऐसा किया और माना जा सकता है; ऐसी कोई दिक्कत नहीं। प्रणव के उच्चारण में विशेष सावधानी रखें और धीरे-धीरे आगे बढ़ें।

68

कौन-से स्तोत्र शिव की विशेष कृपा देते हैं, और किस क्रम में?

पहले द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र, रोज़ एक सौ आठ

· 49:21–49:50 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि कौन-से स्तोत्र पाठ भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाते हैं और किस क्रम में; वक्ता कहते हैं कि श्रावण मास में वे सबसे अच्छा यह मानते हैं कि आप पहले द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र, छोटा वाला, लें — सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥ — और यह पूरा पाठ रोज़ एक सौ आठ बार करना चाहिए।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीशिवमहापुराण · कोटिरुद्रसंहिता 1.21–24

The Śiva Purāṇa names the twelve Jyotirliṅgas, from Somanātha in Saurāṣṭra to Ghuśmeśa, and says reciting the twelve names on rising at dawn frees one from all sins.

The speaker recites the popular reading ओङ्कारममलेश्वरम्; the printed verse 21 reads ओंकारे परमेश्वरम्.

मूल पाठ पढ़ें →
21

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोंकारे परमेश्वरम्॥ २१

सौराष्ट्रमें सोमनाथ, श्रीशैलपर मल्लिकार्जुन, उज्जयिनीमें महाकाल, ओंकारमें परमेश्वर,

22

केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकिन्यां भीमशंकरम्। वाराणस्यां च विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे॥ २२

हिमालयपर केदार, डाकिनीमें भीमशंकर, वाराणसीमें विश्वेश, गौतमीके तटपर त्र्यम्बक,

23

वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारुकावने। सेतुबंधे च रामेशं घुश्मेशं च शिवालये॥ २३

चिताभूमिमें वैद्यनाथ, दारुकावनमें नागेश, सेतुबन्धमें रामेश और शिवालयमें घुश्मेश — (ये बारह ज्योतिर्लिंग हैं)।

24

द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्। सर्वपापविनिर्मुक्तः सर्वसिद्धिफलं लभेत्॥ २४

जो सवेरे उठकर इन बारह नामोंका पाठ करता है, वह सब पापोंसे छूटकर सब सिद्धियोंका फल पाता है।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

69

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र से क्या होता है?

इस जन्म और पिछले सात जन्मों के हल्के पाप

· 49:51–50:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इससे यह होता है कि सबसे पहले, सभी कायिक, मानसिक और वाचिक पापों में से — इस जन्म के और पिछले सात जन्मों के — जो सबसे कम प्रबल हैं, यानी जिनका दंड आपको कम भोगना है, या जिनमें कुछ काट संभव है, जहाँ आपको कुछ राहत मिल सकती है, वे जड़ से पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीशिवमहापुराण · कोटिरुद्रसंहिता 1.24

Reciting the twelve Jyotirliṅga names on rising at dawn frees one from all sins and gives the fruit of every success.

The verse says nothing of seven past births or of the lesser sins the speaker distinguishes.

मूल पाठ पढ़ें →
24

द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्। सर्वपापविनिर्मुक्तः सर्वसिद्धिफलं लभेत्॥ २४

जो सवेरे उठकर इन बारह नामोंका पाठ करता है, वह सब पापोंसे छूटकर सब सिद्धियोंका फल पाता है।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

70

ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के बाद क्या आता है?

शिव महिम्न या रुद्राष्टक, फिर रक्षा कवच

· 50:16–50:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उसके बाद शिव महिम्न स्तोत्र गाना आना चाहिए, या शिव जी का रुद्राष्टक पढ़ना आना चाहिए। रुद्राष्टक यह है कि यह शीघ्र काम करता है: अभी आपको जिस भी चीज़ की ज़रूरत है, उसे पाने के लिए रुद्राष्टक अमोघ है। रक्षा के लिए, आगे बढ़कर, यदि विशेष रूप से ज़रूरत हो, तो अमोघ शिव कवच या शिव रक्षा कवच में से कोई एक करें।

71

कौन-सा शिव सहस्रनाम पढ़ना चाहिए?

ऐसा चुनें जिसकी फलश्रुति में दीक्षा की शर्त न हो

· 50:47–51:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इन सबके अलावा, यदि आप आगे बढ़ना चाहते हैं, तो शिव सहस्रनाम पढ़ें। शिव सहस्रनाम कई प्रकार के हैं: उनमें से जो चाहें करें, पर यह देखें — यदि फलश्रुति में लिखा है कि बिना दीक्षा इसे पढ़ने से कठिनाई होगी, तो वह न करें; सामान्य वाला करें।

इन सबके अलावा, यदि आप और आगे बढ़ना चाहते हैं, तो शिव सहस्रनाम पढ़ें। शिव सहस्रनाम कई प्रकार के हैं। उनमें से जो चाहें करें — पर यह देखें: यदि फलश्रुति में लिखा है कि बिना दीक्षा इसे पढ़ने से कठिनाई होगी, तो वह न करें। सामान्य वाला करें।

72

क्या किसी महाविद्या को सिद्ध किया जा सकता है?

हमसे नहीं; केवल उनकी योगिनियाँ और परिचारिकाएँ सिद्ध होती हैं

· 51:08–51:49 · Also a question

एक श्रोता ने भगवती अपराजिता की उत्पत्ति के बारे में और यह पूछा कि उन्हें सिद्ध क्यों नहीं किया जा सकता; वक्ता कहते हैं कि कोई भी महाविद्या कभी भी आपसे या उनसे सिद्ध नहीं हो सकती। उन्हें नहीं पता कि कोई महाविद्या की सिद्धि की बात करके क्या मतलब रखता है। किसकी सिद्धि होती है? उनकी योगिनियाँ भी कृपा करती हैं। उप-योगिनियों की सेविकाओं, परिचारिकाओं में इतनी क्षमता होती है कि ऐसा कुछ नहीं जो वे न कर सकें — सिद्ध वही होती हैं, और वह भी बहुत सूक्ष्म रूप में, बड़ी सीमाओं में रहते हुए।

73

भगवती अपराजिता की उपासना कैसे की जा सकती है?

विशेष कृपा के लिए दीक्षा के साथ, या दुर्गा सप्तशती के माध्यम से

· 51:50–52:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दूसरी बात यह है कि यदि आप विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो दीक्षा लेकर उनकी विशेष साधना करनी चाहिए। फिर भी भगवती अपराजिता की स्वतंत्र रूप से भी सेवा पूजा की जा सकती है। उनका शक्तिपीठ बंगाल क्षेत्र में है, और अन्य रूपों में उनका शक्तिपीठ बांग्लादेश में भी है। तो यदि आप विशेष रूप से उनकी कृपा चाहते हैं, तो दीक्षा लेकर साधना कर सकते हैं, या दुर्गा सप्तशती के माध्यम से भी उनकी सेवा पूजा कर सकते हैं।

74

किराए के घर में जप करते समय क्या ध्यान रखें?

गोपनीयता रखें; कोई आपको जप करते न देखे

· 52:25–52:49 · Also a question

एक श्रोता किराए के घर में रहने और वहाँ मंत्र जप करते समय किसी और के आ जाने के बारे में पूछते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं: जप के समय कोई न आए, कोई आपको जप करते न देखे, गोपनीयता रखें।

एक श्रोता किराए के घर में रहने और वहाँ मंत्र जप करते समय किसी और के अंदर आ जाने के बारे में पूछते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि जप के समय कोई नहीं आना चाहिए, कोई आपको जप करते न देखे; गोपनीयता रखें।

75

नया साधक गुरु प्राप्ति के लिए सावन में क्या कर सकता है?

उसी संकल्प के साथ रोज़ ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के एक सौ आठ पाठ

· 52:50–53:13 · Also a question

तंत्र में नई एक श्रोता ने पूछा कि गुरु प्राप्ति के लिए सावन में क्या किया जा सकता है और कब शुरू करें; वक्ता कहते हैं: गुरु पूर्णिमा से शुरू करके श्रावण की पूर्णिमा तक, यदि आपकी यही इच्छा है, तो इसी संकल्प के साथ रोज़ भगवान सदाशिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के एक सौ आठ पाठ करें।

76

क्या स्त्रियाँ शिवलिंग पर भस्म चढ़ा सकती हैं?

कई जगह स्त्रियों के लिए भस्म लेपन वर्जित

· 53:14–53:51 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि क्या स्त्रियाँ शिवलिंग पर भस्म चढ़ा सकती हैं; वक्ता कहते हैं कि भस्म लेपन में कुछ जगह सामान्य रूप से भी निषेध है, कि हर व्यक्ति को हर समय और हर अवस्था में भस्म नहीं चढ़ानी चाहिए। पर स्त्रियों द्वारा भस्म चढ़ाने के विषय में बहुत-सी जगह निषेध है। स्त्रियों को भस्म नहीं चढ़ानी चाहिए, न माथे पर भस्म लेपन करना चाहिए; वे गले आदि पर भस्म लगा सकती हैं।

77

क्या स्त्रियाँ शिवलिंग छू सकती हैं, और क्या भटकता मन दोष है?

छूना कहीं वर्जित नहीं; भटकना केवल अभ्यास की कमी है

· 53:52–54:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि स्त्रियाँ शिवलिंग पर भस्म चढ़ा सकती हैं या नहीं, इस पर वे प्रमाणों के साथ अवश्य एक अलग वीडियो बनाएँगे। यह पूछे जाने पर कि मंत्र जप में भटकता मन क्या किसी दोष का संकेत है, वे उत्तर देते हैं कि भटकता मन कोई दोष नहीं — जब तक अभ्यास नहीं आता, मन भटकेगा। और शिवलिंग छूने के बारे में वे कहते हैं कि कहीं कोई निषेध नहीं: स्त्रियाँ शिवलिंग बिल्कुल छू सकती हैं, उसका शृंगार बिल्कुल कर सकती हैं, और इसमें निषेध जैसी कोई बात नहीं।

78

क्या शरीर छोड़ चुके संत की गुरु रूप में पूजा की जा सकती है?

हाँ; भौतिक गुरु दो-तीन कारणों से ज़रूरी है

· 54:20–54:55 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि क्या शरीर छोड़ चुके संत-महात्माओं की गुरु रूप में पूजा की जा सकती है; वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल की जा सकती है; कोई दिक्कत नहीं, और उनकी कृपा भी मिलेगी। वे दोहराते हैं कि भौतिक रूप में गुरु दो-तीन कारणों से चाहिए: जब आप विशेष रूप से किसी मंत्र की पूर्ण सिद्धि, या पूरे विधि विधान के साथ उसका जप चाहते हैं; और दूसरा, जब आप षट्कर्म प्रयोग आदि करना चाहते हैं।

79

रात दस बजे शुरू हुई पूजा बारह के बाद खत्म हो तो क्या दोष लगता है?

सुबह आठ बजे तक सबसे अच्छा; रात में काम करने वाले समय बदल सकते हैं

· 54:56–55:29 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि दस बजे शुरू हुआ पूजा पाठ बारह के बाद खत्म हो तो क्या दोष लगता है; वक्ता कहते हैं कि यदि आप सुबह दस बजे पाठ करते हैं — क्योंकि प्रश्नकर्ता ने तारकासुर नाम लिखा है — तो उसी तरह उसे राक्षसी कर्म माना गया है। हो सके तो सुबह करने का प्रयास करें; वह बहुत अच्छा होगा, और कम से कम आठ बजे तक पूरा कर लेना चाहिए। पर यदि आपकी व्यवस्था ऐसी है कि आप नाइट शिफ्ट की नौकरी करते हैं, जिनमें से बहुत-सी में सारा काम हमेशा रात में करना पड़ता है और फिर आप सुबह पूजा नहीं कर पाते, तो शाम को, कम से कम समय पर, करने का प्रयास करें।

80

नाम जप के समय शरीर बहुत क्यों हिलता है?

या तो नकारात्मक शक्ति या ऊर्जा का असंतुलन

· 55:30–56:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मजबूरी हो तो आप दस बजे कर सकते हैं, पर शाम की पूजा समय पर होनी चाहिए, और देश, काल और परिस्थिति के अनुसार आप अपना समय तय कर सकते हैं — यह अनिवार्य नहीं, और यदि आपका जीवन ही ऐसा है कि आप सुबह नहीं कर पाते, तो कोई दोष नहीं। यह पूछे जाने पर कि नाम जप के समय शरीर में बहुत हलचल क्यों होती है कि आसन पर ठीक से बैठा नहीं जाता, वे कहते हैं कि इसके दो कारण हैं: या तो कोई नकारात्मक शक्ति, या ऊर्जा का असंतुलित होना। इनमें से कौन-सा है, यह आप ही जानेंगे।

81

दक्षिणमुखी घर का स्थायी समाधान क्या है?

केवल दक्षिणमुखी होने से कुछ तय नहीं होता; पीला बंधनवार

· 56:10–56:49 · Also a question

एक श्रोता ने दक्षिणमुखी घर के वास्तु दोष का स्थायी समाधान पूछा; वक्ता कहते हैं कि केवल दक्षिणमुखी होने से यह नहीं कहा जा सकता: दक्षिणमुख के साथ बाकी सभी विषय भी देखने पड़ते हैं, और वे श्रोता से टेलीग्राम मैसेज पर एक सरल नक्शा भेजने को कहते हैं। दक्षिणमुख के लिए एक बहुत छोटे सामान्य उपाय के रूप में वे कहते हैं कि घर के मुख्य द्वार को सजाने के लिए जो बंधनवार लगता है, वह पीले कपड़े का बनाएँ, या जितना हो सके पीले रंग से सजाएँ।

82

सावन में रोज़ कितना पंचाक्षरी जप करें, और क्या न्यास ज़रूरी है?

विनियोग और न्यास के साथ इक्यावन माला

· 56:50–57:20 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि वे रोज़ बाबा के पंचाक्षरी मंत्र की इक्यावन माला कर रहे हैं और पूछते हैं कि सावन में कितना करें और क्या विनियोग और न्यास ज़रूरी है। वक्ता कहते हैं कि यदि आप दीक्षित हैं, तो विनियोग, न्यास आदि करके इक्यावन माला जप करें। और दीक्षित न भी हों, पर इतना जप करते हों, तो न्यास आदि के साथ करना बहुत अच्छा है।

83

जब सपने में कोई आपकी गलतियाँ बताए पर बताने वाला दिखे नहीं, तो इसका क्या अर्थ है?

विशेष कृपा; न दिखने का अर्थ है तपोबल बढ़ाना है

· 57:21–57:59 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि जब सपने में किसी की गलतियाँ बताई जाएँ और उनका उपाय भी दिया जाए पर बताने वाला न दिखे, तो इसका क्या संकेत है; वक्ता उत्तर देते हैं कि आप पर किसी शक्ति की बहुत विशेष कृपा है, क्योंकि आपकी गलतियाँ बताई जा रही हैं और उपाय भी दिया जा रहा है। दिखने या न दिखने में न उलझें: आपको इतनी कृपा मिली है कि आपको बताया जा रहा है। पर यदि वे नहीं दिखते, तो इसका अर्थ है कि आपको अपना तपोबल और बढ़ाना है।

84

क्या भोलेनाथ को गुरु और पंचाक्षरी को गुरु मंत्र मानना उचित है?

आप स्वतंत्र हैं; पर षट्कर्म न करें, न वरदान दें न शाप

· 58:00–58:36 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उन्होंने भोलेनाथ को गुरु बनाया है, शिव मंदिर जाकर विधि से उन्हें गुरु स्वीकार किया और संकल्प लिया है, और पूछते हैं कि क्या पंचाक्षरी मंत्र का गुरु मंत्र के रूप में जप करना उचित है। वक्ता कहते हैं कि आप अपने अनुसार यह करने को स्वतंत्र हैं; इसमें उचित-अनुचित की कोई बात नहीं। बहुत लोग इसे अनुचित कह सकते हैं और बहुत लोग समर्थन कर सकते हैं। उनके मत में, आपके भीतर जो भी भाव है, किसी के कुछ कहने से उसे न बदलें: यदि आपका समर्पण सदाशिव में है, यदि आप उन्हें गुरु मानकर चल रहे हैं और सब अच्छा चल रहा है, तो चलते रहें। बस षट्कर्म न करें, कभी किसी को वरदान न दें और कभी शाप न दें। शिव में डूबे रहें।

85

तंत्र प्रयोग में पीड़ित को कुछ कैसे खिलाया जाता है?

विसर्जन पर, होलिका दहन के बाद, दीवाली की रात खिलाया गया

· 58:37–59:19 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि तंत्र और बीमारी से कम उम्र में अकड़ गए और कमज़ोर हो गए शरीर को फिर से कैसे ठीक करें, और कायाकल्प कैसे होता है; वक्ता समझाते हैं कि जब तंत्र से शरीर में कोई रोग लगता है, तो पहली बात यह है कि कुछ खिलाया गया है — और खिलाना केवल एक बार नहीं होता। यह किसी विशेष नक्षत्र में, किसी विशेष समय पर किया जाता है: जैसे दुर्गा पूजा में विसर्जन के समय, जब कलश आदि विसर्जन के लिए घर से निकलते हैं, यदि उस समय मिठाई के बहाने कुछ खिला दिया गया हो। या होलिका दहन के बाद — वे कहते हैं कि होलिका के समय उन्होंने कम से कम दस वीडियो बनाकर हर बात साफ समझाई थी। या दीवाली की रात मिठाई कहकर, प्रसाद कहकर कुछ खिला दिया गया हो, तो यह बहुत कठिन हो जाता है।

86

खिलाए गए तंत्र की उम्र से क्या अंतर पड़ता है?

बारह दिन, बारह महीने, बारह वर्ष

· 59:20–59:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं: बारह दिन, बारह महीने, या बारह वर्ष — इतनी देरी। यदि बारह दिन की देरी हुई, तो वह तंत्र कटेगा, बाहर निकलेगा, पर परेशान करेगा। यदि बारह महीने बीत गए, तो वह बीच से ऊपर चला गया, उसने अपनी जड़ फैला ली, और अब आपका कष्ट बड़ा होगा: आपकी बुद्धि उखड़ जाएगी और आप समझ नहीं पाएँगे। यदि बारह वर्ष बीत गए, तो उसकी काट किसी सिद्ध और ऊँचे स्तर के साधक द्वारा ही ठीक से होती है, या केवल देव कृपा से ही वह ठीक से सुधरता है।

87

तंत्र से बिगड़े शरीर का कायाकल्प कैसे होता है?

पहले काट, बंधन और रक्षा; तभी कायाकल्प

· 59:54–1:00:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कायाकल्प के लिए पहली बात यह है कि तंत्र की काट — जड़, जो भी खिलाया या पिलाया गया, या तंत्र में जो कुछ और किया गया — पूरी तरह जड़ से नष्ट होनी चाहिए, बंधन होना चाहिए, और शरीर की रक्षा होनी चाहिए। तभी आप अलग से कायाकल्प का प्रयास कर सकते हैं। वे साफ कहते हैं कि वर्तमान समय में सौ प्रतिशत असंभव है; ऐसा बहुत बार होता है, पर तभी जब तपोबल और ऊर्जा उस तरह की हो और कुंडली में ग्रह भी ऐसे योग बना रहे हों।

88

गाँव की देवियाँ बासंती और कंठी कौन हैं?

जानकारी के बिना वे उत्तर देने से मना करते हैं

· 1:00:40–1:01:07 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि उनके गाँव में पूजी जाने वाली माता बासंती और माता कंठी भगवती का कौन-सा रूप हैं, और क्या वे कोई शक्ति हैं; वक्ता कहते हैं कि उन्हें उनके बारे में कोई जानकारी नहीं, इसलिए वे बिल्कुल नहीं बोल सकते। वे लोक देवियाँ हो सकती हैं, या किसी और रूप में हो सकती हैं — वे ऐसे ही कैसे कह दें? इसे देखना पड़ेगा। वे श्रोता से पूरा विवरण भेजने को कहते हैं ताकि वे पता कर सकें और तभी बोलें; अपने आप कैसे बोलें?

89

आम की लकड़ी न मिले तो हवन में कौन-सी लकड़ी प्रयोग करें?

आम वर्जित है; साल की लकड़ी प्रयोग करें

· 1:01:08–1:01:36 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि आम की लकड़ी न मिले तो क्या हवन में उपलब्ध दूसरी लकड़ी प्रयोग कर सकते हैं; वक्ता कहते हैं कि इस विषय की सबसे बड़ी बात यह है कि हवन की लकड़ी हर जगह आसानी से मिल जाती है, इसीलिए लोग हवन में आम की लकड़ी प्रयोग करते हैं। पर यदि आप शास्त्रोक्त विधानों में जाएँ, तो हवन में आम की लकड़ी पूरी तरह वर्जित है। हवन में आम की लकड़ी बिल्कुल प्रयोग नहीं करनी चाहिए।

90

साल की लकड़ी कहाँ से लाएँ और कैसे तैयार करें?

लकड़ी की टाल से, एक-एक बित्ता काटकर; या गोबर के उपले

· 1:01:37–1:02:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जहाँ लकड़ी रखी जाती है, लकड़ी की टाल जहाँ दरवाज़े आदि बनते हैं, ऐसी जगह से जितनी हो सके साल की लकड़ी लाकर रख लें। उसके छोटे-छोटे टुकड़े करें, हर एक एक बित्ता, एक हाथ की बालिश्त का, और उससे हवन करें; या मुख्य रूप से गाय के गोबर के उपलों का प्रयोग करें।

91

गुरु पूर्णिमा पर कौन-सी विशेष साधना करें?

गोरखनाथ, गुरु गोरख साबर नवनाथ, और दत्तात्रेय

· 1:02:07–1:02:34 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि क्या गुरु पूर्णिमा पर विशेष साधना करनी चाहिए; वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल कर सकते हैं। जिन सबने विशेष रूप से भगवान गोरखनाथ की साधना की है, वे उस दिन फिर से गुरु गोरख साबर नवनाथ साधना आदि एक दिन के अनुष्ठान के रूप में करें। जिन्होंने भगवान दत्तात्रेय की की है, वे भगवान दत्तात्रेय की साधना करें। यह आप कर सकते हैं।

92

क्या तंत्र से मुक्ति के लिए सहस्राक्षरी स्तोत्र सिद्ध किया जा सकता है?

शताक्षरी को छोड़कर नहीं

· 1:02:35–1:03:05 · Also a question

एक श्रोता पूछते हैं कि श्रावण में श्री सहस्राक्षरी स्तोत्र कैसे सिद्ध करें कि तंत्र से मुक्ति मिले। वक्ता उत्तर देते हैं कि सहस्राक्षरी स्तोत्र को सिद्ध करने के लिए भी — पर प्रश्नकर्ता ने अब शताक्षरी को छोड़ दिया है और सीधे सहस्राक्षरी में चले गए हैं। वे कहते हैं कि उनके अनुसार आप ऐसा नहीं कर सकते। अपने निर्णय के लिए आप स्वतंत्र हैं; उनके अनुसार आप इस तरह सहस्राक्षरी का प्रयोग नहीं कर सकते।

93

क्या सूतक और पातक में पूजा पाठ फिर से शुरू किया जा सकता है?

पूरा होने तक पूरी तरह वर्जित

· 1:03:06–1:03:39 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उनके घर में सूतक और पातक दोनों लगे हैं — सूतक के इक्कीस दिन और पातक के अठारह दिन बीत चुके हैं — और पूछते हैं कि क्या वे श्रावण में शिव पुराण पढ़ सकते हैं और गुरु पूर्णिमा से पूजा और जप फिर शुरू कर सकते हैं। वक्ता कहते हैं कि यदि सूतक और पातक लगे हैं और पूरे नहीं हुए, तो पूजा पाठ, धूप, दीप और श्री विग्रहों को छूना पूरी तरह वर्जित रखना चाहिए; ये नहीं करने चाहिए।

94

सूतक और पातक में क्या पढ़ा जा सकता है?

शिव गीता, और बिना दीप-धूप के शिव महापुराण

· 1:03:40–1:04:15 · Also a question

कौन-सा पाठ किया जा सकता है? शिव महापुराण पढ़ने पर वक्ता कहते हैं कि वे पूरे निश्चय से नहीं कहेंगे, पर इस अवस्था में आप शिव गीता पढ़ सकते हैं। यदि पूरा शिव महापुराण भी पढ़ना चाहें, तो शुद्ध होकर, बिना धूप-दीप जलाए, अच्छे कपड़े पर और अच्छे आसन पर रखकर पढ़ सकते हैं। पर धूप, दीप और वह सब नहीं करना है, और पूजा कक्ष में या उपासना के स्थान पर नहीं करना है।

95

घर या शरीर पर लगी मसानी शक्ति कैसे शांत की जाती है?

बामथ मसान, और काली और दुर्गा की योगिनियाँ

· 1:04:16–1:04:56 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि घर या शरीर पर लगी मसानी शक्ति कैसे शांत की जाए; वक्ता कहते हैं कि उसे शांत करने के बहुत-बहुत प्रयोग हैं, और यह इस पर निर्भर है कि वह कौन-सी शक्ति है, और फिर उसी के अनुसार। एक श्रोता के "वैवत" या "भवत तामसिक शक्तियाँ" लिखने पर वे कहते हैं कि शायद शब्द का हेरफेर है: जिसे वैवत लिखा गया है, उसे मसान में हम बामथ कहते हैं। उसे शांत करने के लिए विशेष रूप से भगवती काली और भगवती दुर्गा की योगिनियों की सहायता ली जाती है।

96

क्षेत्रपाल निकारी कितने दिन टिकती है, और उसके बाद क्या करना चाहिए?

तीन दिन, और उसके बाद ज़रूरी तेज बंधन

· 1:04:57–1:05:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि क्षेत्रपाल निकारी में यह चीज़ तीन दिन के लिए हटती है। इसे तीन दिन से तेरह दिन तक माना गया है, पर तीसरे या चौथे दिन तक चीज़ें लौटने लगती हैं। इसलिए निकारी के बाद जो तीन दिन का समय मिलता है, उसमें बार-बार क्षेत्रपाल पूजा देते हुए घर का पूरा और ठीक तेज बंधन करना चाहिए, और चीज़ को रोककर उसका बंधन करना चाहिए।

97

शिव पुराण का कौन-सा प्रकाशन लें, और अशोक के पत्तों का प्रयोग कैसे करें?

ठाकुर प्रसाद या गीता प्रेस; द्वार पर अशोक के पत्ते

· 1:05:26–1:06:05 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि पाठ के लिए किस प्रकाशन का शिव पुराण लें; वक्ता कहते हैं कि आप ठाकुर प्रसाद का, या गीता प्रेस का ले सकते हैं, जो दो पूरे भागों, पूर्वार्ध और उत्तरार्ध, में आता है, जिसमें आप पूरा शिव महापुराण पढ़ सकते हैं; यह बहुत अच्छा रहेगा, और संक्षिप्त संस्करण से बचें। अशोक के पत्तों के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं कि इनका प्रयोग घर में सजावट के लिए होता है — मुख्य द्वार पर बंधनवार के लिए जिस जगह हम आम के पत्ते लगाते हैं, वहीं अशोक के पत्ते भी लगाने चाहिए, और घर के मंदिर को सजाने में भी इनका प्रयोग करना चाहिए।

98

किसी रिश्तेदार को कैंसर हो तो परिवार क्या करे?

पहले चिकित्सा, साथ में रुद्राभिषेक

· 1:06:06–1:06:45 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि किसी रिश्तेदार को कैंसर हो और घर में सब परेशान हों तो क्या करें; वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले जो चिकित्सा चल रही है, वह ठीक से चलनी चाहिए। उसके साथ, यदि आप सक्षम हैं, तो योग्य और विद्वान आचार्यों से रुद्राभिषेक का विधि विधान करवाएँ। वे कहते हैं कि कैंसर में शरीर में विष बनता है — इसे विषघाती रोग कहा गया है — और विष की शांति केवल भगवान सदाशिव के द्वारा ही संभव है।

99

एकादशनी करें या शतरुद्रीय?

किसी विद्वान की सलाह लें; कुछ लाभ अवश्य होगा

· 1:06:46–1:07:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चिकित्सा तो आपको करवानी ही है, पर उसके साथ किसी विद्वान व्यक्ति से सलाह लें कि रुद्राभिषेक कैसे किया जाए — एकादशनी करनी है या शतरुद्रीय। उनकी सलाह लेकर ठीक से करें; आपको कुछ न कुछ अवश्य प्राप्त होगा।

वे कहते हैं कि चिकित्सा तो आपको करवानी ही है, पर उसके साथ किसी विद्वान व्यक्ति की सलाह लें कि रुद्राभिषेक कैसे किया जाए, और करें। एकादशनी करनी है या शतरुद्रीय — उनकी सलाह लेकर ठीक से करें। आपको कुछ न कुछ अवश्य प्राप्त होगा।

100

भजन, भोजन और भोग को सदा गुप्त क्यों रखना चाहिए?

भजन, भोजन और भोग सदा गुप्त रखे जाते हैं

· 1:07:11–1:07:50 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि वे रोज़ कितना जप या कितनी माला करते हैं, ताकि श्रोताओं को भी प्रेरणा मिले, वक्ता कहते हैं कि यह निर्भर करता है, और पूछते हैं कि वे क्यों बताएँ कि वे कितना करते हैं और क्या करते हैं। वे कहते हैं कि भजन, भोजन और भोग सदा गुप्त रखने चाहिए। इनके साथ आपका धन, आपका मंत्र, आपके गुरु, और — मुख्य रूप से कहें तो — आपके कुल की बहू, चाहे आपकी अपनी पत्नी हो या आपकी बेटी की बहू, ये सब सदा गुप्त रखने चाहिए और प्रकट नहीं करने चाहिए।

101

यदि हमारे साथ की सकारात्मक शक्ति मदद न कर रही हो तो क्या करें?

हनुमान जी के उचित अनुष्ठान से उस शक्ति को बढ़ाएँ

· 1:07:51–1:08:30 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि किसी के साथ कोई शक्ति हो फिर भी नकारात्मक ऊर्जा परेशान करे तो क्या करें; वक्ता कहते हैं कि यह देखने की बात है: आपके साथ जो भी सकारात्मक शक्ति है, उस शक्ति को बढ़ाएँ। मान लीजिए हनुमान जी का कोई गण आपके साथ है पर आपका सहयोग नहीं कर पा रहा — तो आपको हनुमान जी के किसी एक रूप, एकमुखी, पंचमुखी, सप्तमुखी या एकादशमुखी, का पूरे विधि विधान के साथ अनुष्ठान करना चाहिए। उसके साथ राम दरबार सहित भगवान श्री राम और सीता जी की सेवा पूजा होनी चाहिए।

102

क्या तुलसी जी के पास, विशेषकर कार्तिक में, अखंड दीपक जलाया जा सकता है?

हाँ, वहाँ शालिग्राम स्थापित करके, और बारिश का ध्यान रखकर

· 1:08:31–1:09:08 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि क्या तुलसी जी के पास, विशेषकर कार्तिक में, अखंड दीपक जलाया जा सकता है; वक्ता कहते हैं कि जब भी आप तुलसी जी के पास अखंड दीपक जलाएँ, उस समय वहाँ शालिग्राम शिला भी स्थापित करें, या भगवान श्री नारायण का श्री विग्रह स्थापित करके करें। यदि आप बाहर अखंड ज्योत जलाते हैं और बारिश हो जाए, तो दिक्कत होगी, इसलिए जब भी निर्णय लें, सोच-समझकर लें।

103

राम या कृष्ण से जुड़े व्यक्ति को सावन में क्या पढ़ना चाहिए?

शिव रक्षा कवच, जो स्वप्न में उपदेश रूप में मिला

· 1:09:09–1:09:49 · Also a question

शिव जी के लिए सावन में श्री राम या कृष्ण जी से जुड़ा क्या किया जा सकता है, इस प्रश्न का उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि शिव रक्षा कवच भगवान नारायण ने एक ऋषि को सिखाया था। शिव रक्षा कवच स्वप्न में उपदेश रूप में दिया गया था, और जब आप राम जी और कृष्ण जी से जुड़ा कुछ करना चाहें, तो यही पढ़ना चाहिए।

104

नारायण ने स्वयं कौन-सा शिव सहस्रनाम पढ़ा था?

सुदर्शन चक्र पाने पर पढ़ा गया सहस्रनाम

· 1:09:50–1:10:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप सब जानते हैं कि शिव जी के सहस्रनाम का पाठ भगवान श्री नारायण ने तब किया था जब उन्हें सुदर्शन चक्र प्राप्त हुआ। तो शिव महापुराण में भगवान श्री नारायण द्वारा किया गया जो शिव सहस्रनाम पाठ वर्णित है — उसका पाठ करें।

105

जप के समय रीढ़ और कनपटियों में उठने वाली झनझनाहट की लहरों का क्या अर्थ है?

शरीर में जप की ऊर्जा का संचय

· 1:10:06–1:10:45 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि जप के समय रीढ़ में और सिर के ऊपर कनपटियों में गुदगुदी जैसी लहरें उठती हैं, और कभी-कभी जप के समय हल्का मीठा दर्द होता है, और जप करते हुए कई दिन बीत चुके हैं। वक्ता कहते हैं कि ऐसे साधकों के लिए यह अनुभव बिल्कुल चिंता की बात नहीं: जब आप जप करते हैं, तो जप की ऊर्जा आपके शरीर में कहीं संचित हो रही होती है, इसीलिए ऐसा हो रहा है। घबराएँ नहीं और डरें नहीं; अपना जप जारी रखें।

106

शरीर में ऊर्जा जमा हो तो जप के बाद क्या करना चाहिए?

इष्ट को समर्पण, और इष्ट मंत्र से प्राणायाम

· 1:10:46–1:11:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यहाँ मुख्य बात यह है कि जब आप जप करें, तो बाद में उसे अपने इष्ट को समर्पित करें। और जहाँ तक संभव हो, शुरुआत में जिस इष्ट मंत्र का जप कर रहे हैं उसी के द्वारा प्राणायाम भी अवश्य करें। प्राणायाम करने से यह चीज़ कुछ संतुलित हो जाती है।

वे कहते हैं कि यहाँ मुख्य बात यह है कि जब जप किया जाए, तो बाद में उसे अपने इष्ट को समर्पित करना चाहिए। और शरीर में, जहाँ तक संभव हो, शुरुआत में अपने इष्ट मंत्र के द्वारा, जिसका आप जप कर रहे हैं, प्राणायाम भी अवश्य करना चाहिए। प्राणायाम करने से यह चीज़ कुछ संतुलित हो जाती है।

107

हम भगवान की भक्ति की ओर क्यों खिंचते हैं?

पहले कष्ट, फिर अच्छे कर्म

· 1:11:30–1:12:03 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि हमारे कौन-से कर्म हमें भगवान की भक्ति की ओर आकर्षित करते हैं; वक्ता कहते हैं कि भक्ति की ओर आकर्षण सबसे पहले तब होता है जब जीवन में कष्ट आता है। जब जीवन में कष्ट आता है तो हम तंत्र मंत्र देखने लगते हैं, कथा और पुराण की ओर जाते हैं, हवन सीखने और बलि देने और ये सब विधि विधान जानने का प्रयास करते हैं। पहले यही होता है। जब भगवान हमें अपने पास बुलाना चाहते हैं तो कष्ट देने लगते हैं, और तब हम उनकी ओर जाते हैं। दूसरी बात कर्म है: जब कर्म अच्छे होते हैं, तब भी।

108

क्या सप्तशती की तरह शिव पुराण पढ़ने का भी कोई विशेष विधान है?

इसका विधान शुरुआत में है, और सप्तशती से कम कठोर है

· 1:12:04–1:12:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपने सनातन संस्कृति में, सनातन धर्म में जन्म लिया है, तो आपने सनातन की ओर जाने के लिए ही जन्म लिया है; और सनातन का स्वरूप ही शिव है, इसलिए जन्म शिव की ओर जाने के लिए ही लिया है। यह पूछे जाने पर कि क्या सप्तशती की तरह शिव पुराण पढ़ने का भी कोई विशेष विधान है, वे कहते हैं कि उसका विधान बिल्कुल शुरुआत में दिया गया है — एक बार पढ़कर देखें कि कैसे करना चाहिए। वे कहते हैं कि आप उसके हर नियम का पालन नहीं कर पाएँगे, पर सप्तशती जैसा कोई जटिल नियम नहीं है, क्योंकि यह पुराण है।

109

शिव महापुराण पढ़ते समय फिर भी क्या पालन करना ज़रूरी है?

शौच और अशौच, और रोज़ एक अध्याय

· 1:12:40–1:13:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए शौच और अशौच का पूरा ध्यान रखना है। सप्तशती में यदि आप एक बैठक में संस्कृत में पूरा पाठ कर रहे हैं, तो कई क्रम निकलते हैं; और शिव महापुराण में भी उसका अपना बहुत सारा क्रम है, पर आप सामान्य पाठ कर सकते हैं। आप रोज़ एक अध्याय पढ़ सकते हैं, या उससे ज़्यादा भी कर सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वे दीक्षा देते हैं, वे उत्तर देते हैं: नहीं।

110

क्या गाय को डंडे से चोट पहुँचाने से पाप लगता है?

वंश को, धन को हानि, और ब्रह्महत्या का दोष

· 1:13:16–1:13:51 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि गाय को डंडे या लकड़ी से कष्ट देने पर क्या पाप लगता है; वक्ता कहते हैं कि हाँ, बिल्कुल लगता है। गाय को कष्ट देने से वंश पर आघात होता है; धन और लक्ष्मी की हानि होती है; और ब्रह्महत्या का दोष भी लगता है। इसलिए सामान्य रूप से गाय को कष्ट नहीं देना चाहिए।

111

क्या अधिक रजोगुण वाले व्यक्ति को साधना में सफलता में कठिनाई होती है?

कठिनाई नियमों के पालन में होती है

· 1:13:52–1:14:29 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि जिस व्यक्ति में रजोगुण अधिक हो, क्या उसे साधना की सफलता में कठिनाई होती है; वक्ता पूछते हैं कि रजोगुण का अर्थ क्या है और सफलता में क्या कठिनाई होगी। जब भी आप साधना करते हैं, उस समय आपको नियम लेने पड़ते हैं: ब्रह्मचर्य का पूरा पालन, सात्विक आचरण, विचार, व्यवहार, भोजन आदि। इन पूरे नियमों में, पूरा अनुशासन बनाए रखते हुए चलने में कठिनाई आती है — इसीलिए आप कहते हैं कि सफलता नहीं मिलेगी। पर ऐसा नहीं कि सफलता नहीं मिलेगी; कठिनाई यह है कि आपको अपने नियमों के पालन में कुछ परेशानी होगी।

112

गुरु साधना के बाद गणपति की कौन-सी साधना करें?

संकटनाशन गणेश स्तोत्र, छह महीने या चतुर्थी से चतुर्थी

· 1:14:30–1:15:06 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि गुरु के बाद गणपति करनी हो तो गणपति की कौन-सी साधना करें; वक्ता कहते हैं: सबसे पहले संकटनाशन गणेश स्तोत्र करें। वह साधना छह महीने अवश्य करनी चाहिए। यदि छह महीने भी न कर सकें, तो चतुर्थी से चतुर्थी, एक महीना, पाठ करना चाहिए।

113

अपनी साधना को सुरक्षित कैसे रखें?

साधनाएँ अपने नियमों से सुरक्षित रहती हैं

· 1:15:07–1:15:43 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि अपनी साधना को, या जप की ऊर्जा को, सुरक्षित कैसे रखें; वक्ता उत्तर देते हैं कि साधनाएँ नियम से सुरक्षित रहती हैं। अलग से यह पूछे जाने पर कि पारद माला पर किन देवी देवताओं का जप किया जा सकता है, वे कहते हैं कि पारद से सबका जप किया जा सकता है।

एक श्रोता ने पूछा कि अपनी साधना को कैसे सुरक्षित रखना चाहिए — या जप आदि की ऊर्जा को कैसे सुरक्षित रखना चाहिए; वे उत्तर देते हैं कि साधनाएँ नियम से सुरक्षित रहती हैं। यह पूछे जाने पर कि पारद माला से किन देवी देवताओं का जप किया जा सकता है, वे कहते हैं कि पारद से सबका जप किया जा सकता है।

114

जिसे विंध्य त्रिकोण के लिए कोई जानकार व्यक्ति न मिले, वह क्या करे?

त्रिकोण यात्रा के लिए किसी की ज़रूरत नहीं; स्वयं जाएँ

· 1:15:44–1:16:29 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उन्हें विंध्य त्रिकोण करने को कहा गया पर कोई जानकार व्यक्ति नहीं मिल रहा, और मार्गदर्शन माँगते हैं। वक्ता कहते हैं कि विंध्य त्रिकोण यात्रा करने के लिए वास्तव में किसी की ज़रूरत नहीं — आप स्वयं कर सकते हैं। दूसरा, यदि कोई जानकार व्यक्ति नहीं मिल रहा, तो जब भी विंध्याचल जाएँ, वहाँ भगवती के सामने अपने कष्ट और कठिनाई के लिए मन्नत माँगें, और घर पर बार-बार उनकी सेवा पूजा करें।

115

विंध्याचल जाने वाले बहुत कष्ट में पड़े व्यक्ति के लिए कौन-सा छोटा उपाय सहायक है?

विंध्यवासिनी के नाम वाली ठोस चाँदी की सुपारी

· 1:16:30–1:17:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उनसे बड़ा कुछ नहीं; जब जीवन के सारे द्वार बंद हो जाते हैं और लगता है कि कोई मनुष्य साथ नहीं देगा, तब वे देवी शक्तियाँ ही साथ देती हैं। इसलिए जब भी आप विंध्याचल जाएँ और कोई व्यक्ति न मिल रहा हो, और आपके जीवन में बहुत कष्ट और तंत्र से जुड़ी परेशानी हो, तो यह छोटा-सा काम करें: जाने से पहले चाँदी की एक सुपारी बनवाएँ, ठोस, खोखली नहीं, चाँदी की पत्ती पर। उस पर या तो भगवती विंध्यवासिनी का नाम लिखवाएँ, या कुछ लिखवाना न हो तो ॐ, त्रिशूल का चिह्न, या भगवती का मुख बनवाएँ। यह एक तरह की चाँदी की बुटिका बन जाती है।

116

विंध्याचल में चाँदी की सुपारी को कैसे सिद्ध करें?

भगवती के चरणों में स्पर्श, या भैरव कुंड में स्नान

· 1:17:16–1:18:00 · Also a question

जब आप विंध्याचल जाएँ, तो वहाँ जो भी पंडित जी या पंडा दर्शन करवाते हैं, उनसे पहले ही बात कर लें, और कहें कि इसे भगवती के चरणों में स्पर्श कराकर, या भगवती से स्पर्श कराकर, आपको वापस दें। यदि वे स्पर्श कराकर दें तो उत्तम है। नहीं तो भगवती का जो स्नान रोज़ होता है — भगवती विंध्यवासिनी को जीवित प्रतिमूर्ति माना जाता है और जगदंबा रोज़ स्नान करती हैं; उनके शरीर से मैल भी निकलता है, और उस मैल की भी तंत्र में अपनी असीम महिमा है, और वह हर किसी को नहीं मिलता, यद्यपि बहुत लोगों के पास है। वह स्नान का जल भैरव कुंड के पास होता है।

117

भैरव कुंड पर क्या प्रार्थना करनी चाहिए?

जगदंबा से परिवार की रक्षा के लिए कोई सौम्य योगिनी भेजने की विनती

· 1:18:01–1:18:27 · Also a question

कुंड भगवती विंध्यवासिनी के मंदिर के ठीक पीछे, विंध्य भैरव के पास है; कोई निषेध नहीं और कोई भी उसे छू सकता है। उसमें सुपारी को स्नान कराएँ, और भगवती से बार-बार प्रार्थना करें: हे जगदंबा, इसमें अपनी शक्तियाँ समाहित करें, और अपनी कोई एक सौम्य रूप योगिनी स्थापित करके हमारे परिवार की रक्षा के लिए इसके साथ भेजें। पूरी तरह समर्पित होकर, विनम्र भाव से जगदंबा से बार-बार प्रार्थना करें।

118

चाँदी की सुपारी को घर में कैसे स्थापित करें?

लाल कपड़े पर रोली का त्रिकोण, धूप और दीप के साथ

· 1:18:28–1:18:56 · Also a question

इसे कैसे स्थापित करें: लाल कपड़े के एक टुकड़े पर रोली से त्रिकोण बनाएँ और बीच में उन्हें स्थापित करें। उनके सामने उनके नाम से धूप और दीप अर्पित करें। रास्ता खुलेगा, और जगदंबा अवश्य कृपा करेंगी। वक्ता कहते हैं कि यह केवल संजय मिश्रा जी के लिए है।

इसे कैसे स्थापित करें: लाल कपड़े के एक टुकड़े पर रोली से त्रिकोण बनाएँ, और उसके बीच में उन्हें स्थापित करें। उनके सामने उनके नाम से धूप और दीप अर्पित करें। रास्ता खुलेगा; जगदंबा अवश्य कृपा करेंगी। वे साफ कहते हैं कि यह केवल संजय मिश्रा जी के लिए है।

119

जिस शक्ति को किसी ने बाँध दिया हो, उसे कैसे मुक्त करें?

किसी जानकार की सहायता लें; शिव या भैरव का हवन उसे बल देता है

· 1:18:57–1:19:36 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि किसी ने किसी शक्ति को बाँध दिया हो तो उसे कैसे मुक्त करें; वक्ता कहते हैं: किसी जानकार व्यक्ति की सहायता लें। यदि आपको स्वयं ज्ञान है, तो संबंधित शक्तियों के अनुसार — जैसे वह भगवती दुर्गा की कोई सेविका, कोई योगिनी है — तो भगवान सदाशिव से जुड़ा हवन करने से उसे बल और सामर्थ्य मिलेगा। यदि आप भैरव जी से जुड़ी साधना करके हवन करें, तो उससे उसे सामर्थ्य मिलेगा।

120

क्या अविवाहित कन्या शनि देव की पूजा कर सकती है?

हाँ; और सातवें भाव पर शनि की दृष्टि से विवाह में देरी

· 1:19:37–1:20:16 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि क्या अविवाहित कन्या शनि देव की पूजा कर सकती है; वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल कर सकती है; ऐसी कोई बात नहीं। और यदि शनि देव के कारण विवाह में देरी हो रही है — जैसे जब शनि की दृष्टि सातवें भाव पर पड़ती है, जिसके बारे में कहा जाता है कि विवाह देर से होता है — तो उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए, यद्यपि कुंडली देखे बिना कुछ नहीं कहा जा सकता, पहली बात यह है कि उनसे जुड़े दान करने चाहिए।

121

सांवली दुल्हन को उसके अपने विवाह में प्रयोग के लिए उपहार देना दूसरा उपाय है

सांवली दुल्हन को उसके विवाह में प्रयोग के लिए उपहार

· 1:20:17–1:20:54

वक्ता कहते हैं कि दूसरी बात यह है कि जब भी आपकी किसी सहेली का, या आपके जान-पहचान, रिश्तेदारों या पड़ोसियों में किसी सांवले रंग की लड़की का विवाह हो रहा हो, तो उसे — अपनी क्षमता अनुसार, यथाशक्ति — कोई ऐसी वस्तु दें जिसका वह अपने विवाह के समय प्रयोग करे। यदि वह विवाह में उसका प्रयोग करती है, तो आपको बहुत शीघ्र प्रभाव मिलेगा।

122

जब घर में नकारात्मक शक्तियाँ सीधे दिखाई दें तो क्या करें?

पाँच सप्ताह तक मंगलवार से शनिवार संपुटित सुंदरकांड

· 1:20:55–1:21:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि घर में कोई नकारात्मक शक्ति सीधे दिखाई दे रही है, तो इसका अर्थ है कि उसकी ऊर्जा काफी प्रबल हो रही है, कि जिस व्यक्ति के द्वारा प्रोजेक्शन किया गया वह बहुत बलि आदि का प्रयोग कर रहा है, और आपके घर में सकारात्मक शक्तियों का स्तर बहुत नीचे गिर गया है। आपको पहले, यदि संभव हो, अपने घर पर सुंदरकांड का संपुटित पाठ करवाना चाहिए; और संभव हो तो मंगलवार से शनिवार तक, कम से कम पाँच सप्ताह लगातार, हर दिन हवन के साथ करवाएँ।

123

सुंदरकांड के संपुट के रूप में हनुमान जी की कोई चौपाई लगाई जाती है, और रोज़ ग्यारह बजरंग बाण पढ़े जाते हैं

संपुट के रूप में हनुमान जी की चौपाई, और रोज़ ग्यारह बजरंग बाण

· 1:21:36–1:22:15

वक्ता कहते हैं कि यदि इतना न करवा सकें, तो स्वयं करें, पर हर मंगलवार या हर शनिवार संपुटित सुंदरकांड का पाठ करवाएँ। संपुट मंत्र के लिए, पाठ करने वालों को बताएँ कि नकारात्मक ऊर्जा इस तरह की है, और हनुमान जी के आवाहन और उनकी कृपा पाने के लिए जो भी चौपाई काम आती है उसे संपुट के रूप में लगवाएँ। आपको बहुत शीघ्र लाभ मिलेगा। उसके साथ घर में स्वयं रोज़ कम से कम ग्यारह बार पूरे बजरंग बाण का पाठ करें, और उसकी ध्वनि करें।

124

जीवन में कितने गुरु बनाए जा सकते हैं, और क्या बच्चे दत्तात्रेय का जप कर सकते हैं?

गुरुओं की कोई सीमा नहीं; बच्चों के लिए श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा

· 1:22:16–1:22:51 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि जीवन में हम कितने गुरु बना सकते हैं, वक्ता कहते हैं कि ऐसी कोई सीमा नहीं। यह पूछे जाने पर कि क्या बच्चे गुरु दत्तात्रेय के मंत्र का जप कर सकते हैं, वे कहते हैं हाँ, कर सकते हैं — ऐसा नहीं कि भगवान दत्तात्रेय का जप नहीं किया जा सकता। वे कहते हैं, उनसे "दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा" का जप करवाएँ; भजन के रूप में इस मंत्र का जप बच्चों के लिए अत्यंत लाभदायक है।

125

रुद्राक्ष पहनने के नियम क्या हैं?

पहले भोजन के नियम; मांस खाते समय नहीं पहनना

· 1:23:30–1:24:05 · Also a question

एक श्रोता ने जनेऊ और रुद्राक्ष पहनने के नियम पूछे, और केवल रुद्राक्ष के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि गृहस्थों के लिए पहला नियम यह है कि जब भी रुद्राक्ष पहनें, भक्ष्य-अभक्ष्य का ध्यान रखें। यदि आप मांसाहारी हैं और रुद्राक्ष पहनते हैं, तो मांस खाने के समय — वे कहते हैं अभी कलियुग है, और वे जानते हैं कि शुरुआत में नियम पूरी तरह नहीं निभेंगे — फिर भी यदि शिव की कृपा आई है, तो प्रयास करें कि मांसाहार न हो। और फिर भी मांस और शराब का सेवन हो, तो जब भी करें, उन्हें पहने हुए न करें; स्नान के बाद फिर पहन सकते हैं।

126

गृहस्थ कार्य के समय रुद्राक्ष शरीर पर नहीं होना चाहिए, और घर से बाहर यात्रा में ढका होना चाहिए

गृहस्थ कार्य के समय शरीर पर नहीं, और यात्रा में ढका हुआ

· 1:24:06–1:24:45

वक्ता कहते हैं कि वह पहला था। दूसरी बात यह है कि गृहस्थ कार्य करने से पहले रुद्राक्ष शरीर पर नहीं होना चाहिए। जब भी घर से बाहर यात्रा करें और माला पहनें, तो वह ढकी होनी चाहिए ताकि कभी दिखाई न दे; उस समय उसे शरीर से अलग करने की ज़रूरत नहीं — पर फिर से, यदि आप मांस और शराब का सेवन करते हैं, तो वह शरीर पर नहीं होनी चाहिए। कम से कम इतना नियम निभाना चाहिए।

127

क्या जिस शक्ति की पूजा हो रही है, उसके अलावा किसी और शक्ति से कृपा आ सकती है?

पिछले वीडियो में उत्तर दिया गया; और श्रावण में कौन-सी साधना सबसे अच्छी

· 1:24:46–1:25:18 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि क्या ऐसा हो सकता है कि हम एक देवता की पूजा करें और कृपा और आशीर्वाद किसी और शक्ति से आए; वक्ता कहते हैं कि उन्होंने तीन-चार दिन पहले के एक वीडियो में यह पूरा विषय समझाया है, और श्रोता से उसे एक बार सुनने को कहते हैं। यह पूछे जाने पर कि श्रावण में पंचाक्षरी मंत्र या गुरु मंत्र में से कौन बेहतर फल देता है, वे कहते हैं: जिसमें आपकी श्रद्धा है वही करें — वही सबसे अच्छा फल देता है। श्रावण सभी देवताओं को प्रिय है, क्योंकि यह देवों के महादेव का महीना है, इसलिए सभी कृपा करते हैं।

128

यदि बच्चा दाँतों के साथ जन्म ले तो इसका क्या अर्थ है?

तुलसीदास जी के जन्म के समय बत्तीस दाँत थे

· 1:25:19–1:25:59 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि उनके ममेरे भाई के बेटे के जन्म के समय दाँत थे, इससे क्या परेशानियाँ आ सकती हैं, और क्या कोई दोष या उपाय है; वक्ता कहते हैं कि लोक में सब जानते हैं कि तुलसीदास जी जब जन्मे तो उनके बत्तीस दाँत थे, और उन्हें जन्म देने के बाद उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई, इसलिए इसे अशुभ माना गया। फिर भी वही तुलसीदास थे जिन पर स्वयं भगवती जगदंबा ने कृपा की: भगवती पार्वती माँ के रूप में उनके साथ रहीं और युवावस्था तक उनका मार्गदर्शन किया। तो ऐसा बिल्कुल नहीं कि इससे कोई बहुत बड़ा दोष आने वाला है — फिर भी यदि आप इसे दोष मानते हैं, तो अपने पास के विद्वानों से इसका उपाय करवा सकते हैं।

129

जागृत कुंडलिनी को कैसे शांत करें?

पूरी तरह व्यावहारिक विषय, जिसमें योग गुरु का पास होना ज़रूरी है

· 1:26:00–1:26:41 · Also a question

एक श्रोता कहती हैं कि उनकी कुंडलिनी जागृत हो गई है और पूछती हैं कि उसे कैसे शांत करें, क्योंकि वह दिन भर चलती रहती है। वक्ता कहते हैं कि यह पूरी तरह व्यावहारिक विषय है: वे यहाँ समझाएँ और बोलें भी, तो भी समझ नहीं आएगा — किस स्तर पर है, कहाँ क्या हो रहा है और क्या नहीं। यह पास के किसी योग गुरु के द्वारा, और अपने अभिभावक के साथ, करना चाहिए, क्योंकि, जैसा वे उनसे कहते हैं, आप स्त्री हैं और इस विषय को समझें।

130

देवी मंत्र के जप को क्या संतुलित करता है?

साथ में शिव मंत्र का जप

· 1:26:42–1:27:04 · Also a question

वक्ता उनसे कहते हैं कि आप मंत्र जप करती हैं, यह उत्तम है। आप जिसके भी मंत्र का जप कर रही हैं — जैसे यदि दुर्गा जी का कर रही हैं — तो साथ में शिव मंत्र का जप होना चाहिए, जिससे संतुलन आता है। यह पूछे जाने पर कि साधना से कोई लाभ न मिले तो क्या करें, वे कहते हैं कि जब शिव जी की पूजा और साधना से लाभ न मिल रहा हो, तो जो द्वादश ज्योतिर्लिंग अनुष्ठान बताया गया है, वह विशेष रूप से श्रावण मास में करना चाहिए।

131

नर और नारायण का व्याख्यान टाल दिया जाता है, और पितरों के साथ चल रहे प्रेत के लिए तीन पीढ़ियों को देखा जाता है

व्याख्यान टला; तीन पीढ़ियों की जाँच

· 1:27:05–1:27:33

यह पूछे जाने पर कि नर और नारायण कौन हैं, वक्ता कहते हैं कि इसकी व्याख्या बहुत उत्तम है पर आज वे और नहीं बोलेंगे; किसी और समय। यह पूछे जाने पर कि जब किसी के भेजे प्रेत तीन पीढ़ियों से किसी घर में पितरों के साथ चल रहे हों, तो निवारण कैसे करवाया जाए कि वह हमेशा के लिए चला जाए, वे पहले कहते हैं कि यदि तीन पीढ़ियाँ हुई हैं तो उसने तीन पीढ़ियों को परेशान रखा होगा; और दूसरा, कि यदि वह पितरों के साथ है तो दो-तीन प्रश्न उठते हैं — यदि तीन पीढ़ियाँ हो गईं, तो क्या उसमें सामर्थ्य नहीं है?

132

पितरों के साथ चल रहे प्रेत को कैसे हटाया जाता है?

निकारी, स्वयं पितर, या दत्तात्रेय साधना

· 1:27:34–1:28:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपका वंश बढ़ रहा है, तो उसमें सामर्थ्य नहीं है। आप निकारी आदि प्रयोग करवाकर विधि विधान से उसे हटवा सकते हैं। यदि वह पितरों के साथ है, तो — यदि पितरों को कोई दोष नहीं लग रहा, या आपके पितर अभी भी मज़बूत हैं — उनके द्वारा भी हटाया जा सकता है। और भगवान दत्तात्रेय के द्वारा, उनकी विशेष साधना से — जिससे केवल पितर तृप्त होते हैं और प्रेतों को कष्ट मिलता है — भी हटाया जा सकता है।

133

"एकं ब्रह्म द्वितीयं नास्ति" का विष्णु द्वारा शिव की पूजा से मेल कैसे बैठता है?

केवल सनातन ही अनेक ईश्वरवाद को मानता है

· 1:29:00–1:29:45 · Also a question

एक श्रोता ने पूछा कि "एकं ब्रह्म द्वितीयं नास्ति" होते हुए भी हमारा सनातन धर्म कभी विष्णु जी को शिव जी की पूजा करते और कभी शिव जी को राम जी का ध्यान करते क्यों दिखाता है; वक्ता कहते हैं कि उनमें आपस में सामंजस्य है: सनातन संस्कृति ही ऐसी है, यह धर्म ही ऐसा है, जिसमें अनेक ईश्वरवाद की उपस्थिति मानी गई है। वे कहते हैं, कोई भी पुराण पढ़ें — आपके जो भी इष्ट हों उनसे जुड़ा पुराण पढ़ें — और आप यह विषय समझ जाएँगे।

134

मूल ग्रंथों को सीधे क्यों देखना चाहिए?

विरोधी टीकाकारों द्वारा अनुवाद में डाली गई त्रुटियाँ

· 1:29:46–1:30:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बाद के समय में ऐसे बहुत लोग हुए जो सनातन को नुकसान पहुँचाने के लिए उठे — एक तरह से टीकाकार, जिन्होंने संस्कृत को हिंदी में बदला। लिखने में उनसे त्रुटियाँ हुईं; उन्होंने कुछ बातें गलत लिखीं। जब आप मूल ग्रंथों को ठीक से देखेंगे, तो आपको बहुत-सी बातें पता चलेंगी।

135

शक्ति एक है या अनेक?

एक शक्ति, जिसने अलग-अलग रूप धारण किए

· 1:30:32–1:31:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दूसरी बात यह है कि शक्ति एक ही है और उसने अलग-अलग रूप धारण किए हैं; यही हमारे सनातन की व्यापकता है। और इसी कारण वे बार-बार कहते हैं: अपने इष्ट की गीता पढ़ें। हर शक्ति में, हर रूप में यही एक बात कही गई है।

136

हर पुराण के सृष्टि-वर्णन की जड़ में क्या है?

निराकार ईश्वर का अपना साकार रूप चाहना

· 1:31:14–1:31:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप जिसे भी मानें, उन्हें सुनें; उन्होंने वही बात कही है — सबकी वाणी एक जैसी है। रूप अलग हो रहा है पर सब कहीं न कहीं एक हैं। जब आप सबकी शुरुआत देखें: श्रीमद् देवी भागवत पढ़ें तो वहाँ बताया गया है कि सभी देवी देवता भगवती से प्रकट हो रहे हैं; शिव महापुराण में सब शिव जी से प्रकट हो रहे हैं; दूसरे वैष्णव पुराण पढ़ें तो सभी देवी देवता विष्णु जी से प्रकट हो रहे हैं। पर सबकी जड़ में एक बात आती है — कि पहले ईश्वर निराकार था, उसमें इच्छा उठी, और उसने अपना साकार रूप प्रकट किया।

137

जिसका शरीर स्वस्थ न रहता हो, वह साधना के लिए क्या करे?

नाम जप और स्तुति गायन

· 1:32:00–1:32:35 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उनका शरीर स्वस्थ नहीं रहता और वे साधना करना चाहते हैं। वक्ता कहते हैं कि यदि आप अस्वस्थ रहते हैं और साधना करना चाहते हैं, तो नाम जप और स्तुति गायन आदि का सहारा लें। वे जोड़ते हैं कि सबका समय आता है, और समय से पहले कुछ नहीं होता।

एक श्रोता कहते हैं कि उनका शरीर स्वस्थ नहीं रहता और वे साधना करना चाहते हैं। वक्ता कहते हैं कि यदि आप अस्वस्थ रहते हैं और साधना करना चाहते हैं, तो नाम जप और स्तुति गायन आदि का सहारा लें। वे कहते हैं कि सबका समय आता है; समय से पहले कुछ नहीं होता। इसी कारण वे बार-बार पुराण पढ़ने को कहते हैं।

138

राक्षसों और शापों के बारे में पुराण क्या कहते हैं?

नारद के शाप से जय और विजय रावण और कुंभकर्ण बने

· 1:32:36–1:33:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पुराणों में आप पाएँगे कि जो भी राक्षस हुए, उन्हें किसी न किसी ने शाप दिया था। रावण इतना बड़ा अहंकारी, इतना बड़ा कुकर्मी था, उसके भीतर हज़ार बुराइयाँ थीं — पर वह कौन था? भगवान श्री नारायण के द्वारपाल जय और विजय, जिन्होंने रावण और कुंभकर्ण के रूप में जन्म लिया; उन्हें जन्म लेना पड़ा, क्योंकि नारद जी ने दोनों को शाप दिया था।

139

रावण का ब्राह्मण वंश कर्म और जन्म के बारे में क्या दिखाता है?

बुरे कर्म से शाप और वैसा ही जन्म मिलता है

· 1:33:19–1:34:06 · Also a question

वक्ता पूछते हैं कि जब रावण को राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा — पर उसके पिता कौन थे? उसके परदादा ब्रह्मा जी हैं, जिनके ब्रह्म कुल में उसका जन्म हुआ। ब्राह्मण होते हुए भी उसे शाप के कारण राक्षस जैसे कर्म करने पड़े। ठीक उसी तरह जब कर्म बुरे होते हैं, तो ऐसा शाप मिलेगा, और ऐसे घर और ऐसे वंश में जन्म लेकर वैसे ही कर्म करने पड़ेंगे, और वह कष्ट मिलेगा।

140

क्या किसी का दिया गैंडे के सींग का कड़ा पहना जा सकता है, और श्रावण में कितना रुद्राष्टक पढ़ें?

देने वाले के निर्देश से पहनें; रुद्राष्टक के आठ या नौ पाठ

· 1:34:07–1:34:25 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि गैंडे के सींग की वह वस्तु उन्हें एक गिरीश जी ने भेंट की थी, जिन्होंने उसे केवल पहनने के लिए दिया। वक्ता कहते हैं, तो पहनें; कोई दिक्कत नहीं, और क्योंकि उन्होंने दिया है, उन्हीं से निर्देश लें। यह पूछे जाने पर कि श्रावण में कितना रुद्राष्टक पढ़ना चाहिए, वे कहते हैं: रोज़ आठ पाठ करें, या नौ पाठ करें।

141

गुरु महाराज के नाम पर क्या दान करना चाहिए?

कपड़े, अनाज, जो भी आप चाहें

· 1:34:26–1:34:59 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि गुरु महाराज के नाम पर क्या दान करें या दें, वक्ता कहते हैं: जो भी आप चाहें — कपड़े, अनाज आदि दान करने चाहिए। एक श्रोता, जो कहते हैं कि उन्हें सुनकर उन्होंने पाशुपतास्त्र का पाठ बंद कर दिया, यद्यपि वे उसे केवल शिव कृपा पाने के लिए पढ़ते थे और उन्हें ऐसा संकल्प लेना पड़ा था, और अब शिव कवच शुरू किया है — उनसे वे कहते हैं कि वे एक बात बार-बार दोहराते हैं: हर कोई अपना निर्णय लेने को स्वतंत्र है।

142

ऐसा अनुष्ठान अपने पास के उस शक्तिपीठ पर करवाया जा सकता है जिसकी ओर मन राज़ी हो

पास के शक्तिपीठ पर, जहाँ मन राज़ी हो

· 1:36:30–1:37:06

वक्ता कहते हैं कि यदि आप चाहें, तो अपने घर के सबसे नज़दीक पड़ने वाले किसी शक्तिपीठ पर ऐसे साधकों के द्वारा इस तरह का अनुष्ठान करवा सकते हैं। मन राज़ी हो, क्योंकि जब मन में श्रद्धा होती है तभी फल मिलता है। शनि की दृष्टि दसवें भाव पर पड़ने के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं कि यह पूरी कुंडली देखकर ही पता चलेगा — लग्न क्या है, भाव क्या है।

143

कौन-सा गोमूत्र लाभदायक है, और उसका प्रयोग कैसे होता है?

एक रंग की, गिरनारी या देसी गाय का, दुहने के समय

· 1:37:07–1:37:59 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि जो खिलाया या पिलाया गया है क्या वह गोमूत्र से ठीक होता है, और किस गोमूत्र से, वक्ता कहते हैं: एक रंग की गाय, गिरनारी गाय, देसी गाय। जब सुबह देसी गाय को दुहा जा रहा हो — जिस समय दूध निकाला जा रहा हो — उस समय गाय जो मूत्र करती है। यदि उस गोमूत्र को मंत्रों से अभिमंत्रित करके, चाहे किसी साधक के द्वारा या कोई सामान्य व्यक्ति स्वस्तिवाचन आदि पढ़कर, मुख्य रूप से सेवन किया जाए, तो उससे बहुत बड़ा लाभ होता है।

144

सपने में हरे साँप का पीछा करना क्या दर्शाता है?

देव दोष, और इक्कीस दिन तंत्रोक्त रात्रि सूक्तम्

· 1:38:35–1:39:07 · Also a question

एक श्रोता सपने में एक अजीब हरे साँप के बारे में बताते हैं जो तीन बार गुस्से में उन्हें काटने दौड़ा, जिससे वे बच गए और फिर हवा में उड़ने लगे, और जिसके बाद डरकर उन्होंने ग्राम भगवती की पूजा की। वक्ता कहते हैं कि हरे साँप का काटने दौड़ना देव दोष दर्शाता है — कि किसी देवी देवता से जुड़ी कोई गलती हुई है, जिसके कारण यह बार-बार दिख रहा है। यदि ऐसा है, तो एक बार इसकी जाँच करें; और यदि पता न चले कि कौन-सी गलती या कौन-सा दोष था, तो कम से कम इक्कीस दिन तंत्रोक्त रात्रि सूक्तम् का पाठ करें।

145

क्या सावन में बिना दीक्षा के महामृत्युंजय किया जा सकता है?

वैदिक मंत्र, जिसके लिए यज्ञोपवीत और दीक्षा ज़रूरी है

· 1:39:08–1:39:49 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या सावन में महामृत्युंजय करना है और क्या उसमें मंडल पूजन ज़रूरी है, वक्ता उत्तर देते हैं कि महामृत्युंजय वैदिक मंत्र है: इसे यज्ञोपवीत धारण करके और दीक्षित होकर ही करना चाहिए। एक श्रोता, जो कहते हैं कि पिछली बार बताया गया जप कभी कम कभी ज़्यादा होकर चल रहा है, और वे सूर्य का नित्य नियम कर रहे हैं, और एक बच्चे की छोटी-सी चूक के लिए क्षमा माँगते हैं — उनसे वे कहते हैं कि कोई चूक नहीं है और आराम से सेवा करें।

146

खाना बनाने के लिए वास्तव में कौन-सी साधना लागू होगी?

कोई विद्याधर, या भगवती अन्नपूर्णा की कोई अंग विद्या

· 1:40:35–1:41:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप इसके बारे में पूरी तरह गंभीर हैं — यदि आप मास्टर शेफ बनना चाहते हैं या इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं और ऐसी कोई साधना करना चाहते हैं — तो उन्हें एक बार इसे देखना पड़ेगा, क्योंकि यह प्रश्न पहली बार आया है और वे तुरंत नहीं कह सकते। इसमें विद्याधर साधना की जा सकती है, पर कौन-सा विद्याधर, यह देखना पड़ेगा; इसमें भगवती अन्नपूर्णा से जुड़ी कोई अंग विद्या करनी पड़ेगी। उन्हें देखना पड़ेगा कि भगवती अन्नपूर्णा के मंडल पूजन में कौन-सी अंग विद्या सामान्य रूप से कोई भी कर सकता है, ताकि हाथ में ही स्वाद आ जाए।

147

ब्रह्मराक्षस के लिए काल भैरव अनुष्ठान करें या विपरीत प्रत्यंगिरा?

दोनों उचित हैं

· 1:41:20–1:41:58 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि ब्रह्मराक्षस हटाने के लिए काल भैरव अनुष्ठान करवाना उचित होगा या विपरीत प्रत्यंगिरा, वक्ता कहते हैं कि दोनों उचित हैं: आप दोनों में से कोई भी करवा सकते हैं — काल भैरव भी करवा सकते हैं, और विपरीत प्रत्यंगिरा भी करवा सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या घर की दीवार पर महाकालेश्वर बाबा की फोटो लगाई जा सकती है, वे कहते हैं कि बिल्कुल लगाई जा सकती है।

148

अत्यधिक काम पीड़ा और टूटे ब्रह्मचर्य के लिए क्या करें?

सदाशिव की शरण लें; पंद्रह मिनट की पूजा

· 1:41:59–1:42:27 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि वे नौ वर्षों से बुरी संगत और अशुद्ध आचरण में फँसे हैं, ब्रह्मचर्य नहीं रख पाते, और सब कुछ बर्बाद हो गया है। वक्ता कहते हैं कि जब काम ज्वर और काम पीड़ा बहुत अधिक हो, तो काम के नाश के लिए भगवान सदाशिव की शरण लें। क्या करें? आपको पंद्रह मिनट की पूजा करनी है। वे जोड़ते हैं कि श्रोता का शुक्र अवश्य गिरी हुई अवस्था में होगा, कुंडली में चंद्रमा अवश्य पीड़ित होगा, और पंचमेश राहु हो सकता है, जिसके कारण यह अवस्था आई है।

149

काम के नाश के लिए पंद्रह मिनट की पूजा क्या है?

द्वादश लिंग स्तोत्र के साथ पीतल के सात लोटे जल

· 1:42:28–1:43:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपको ऐसा कष्ट बहुत हो रहा है, तो सबसे पहले, श्रावण मास में, गुरु पूर्णिमा से शुरू करके श्रावण की पूर्णिमा तक, रोज़ पीतल के लोटे से भगवान सदाशिव पर कम से कम सात लोटे जल चढ़ाएँ — वे कहते हैं पीतल के लोटे से करें, क्योंकि उन्हें नहीं पता प्रश्नकर्ता कौन हैं — द्वादश लिंग स्तोत्र पढ़ते हुए, और उसके बाद भस्म से सदाशिव का शृंगार करें।

150

अरघी से ली गई भस्म गले, माथे और नाभि पर लगाई जाती है

अरघी से, गले, माथे और नाभि पर

· 1:43:10–1:43:49

वक्ता कहते हैं कि जो भस्म आप अरघी पर लगाते हैं, उसे अपने गले पर, माथे पर और नाभि आदि जगहों पर लगाएँ। इसके साथ एक बार अपनी कुंडली का विश्लेषण भी करवाएँ, ताकि वास्तव में पता चल सके कि आपको कहाँ चोट करनी है।

जो भस्म आप अरघी पर लगाते हैं — उसे अपने गले पर, अपने माथे पर, और नाभि आदि जगहों पर लगाएँ। वे कहते हैं कि इसके साथ एक बार अपनी कुंडली का विश्लेषण भी करवाएँ, ताकि वास्तविकता पता चल सके: कि आपको किस पर चोट करनी है।

151

साधना के दौरान स्त्री के सपनों का क्या अर्थ है?

बहुत सामान्य; पर सामान्य, तंत्र, दोष, स्थान या भोजन कुछ भी हो सकता है

· 1:43:50–1:44:23 · Also a question

साधना के समय में स्त्री से जुड़े सपनों के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि यह बहुत सामान्य बात है, और उन्होंने इस विषय पर अलग वीडियो बनाया है। यह पूरी तरह जाँच का विषय है कि यह सामान्य बात है, या किसी तरह का तंत्र प्रयोग है, या आप जो साधना कर रहे हैं उसमें कुछ आ रहा है। इस पूरी चीज़ को देखना पड़ता है; यह निर्भर करता है। यह हर किसी के लिए अलग हो सकता है, और सामान्य भी हो सकता है। जब शरीर बहुत थक जाता है तब भी ऐसा होता है; और इसमें तंत्र आदि के दोष, देव दोष, स्थान का दोष और भोजन का दोष होते हैं।

152

बीज मंत्र कब शुरू करें, और क्या यह गुरु मंत्र हो सकता है?

गुरु पूर्णिमा से शुरू करें; हाँ, गुरु मंत्र के रूप में काम कर सकता है

· 1:44:24–1:45:09 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि मंत्र की पलट क्या है, वक्ता कहते हैं कि उनके मत में प्रश्न अधूरा है। यह पूछे जाने पर कि बीज मंत्र का जप कब शुरू करें और क्या उसे गुरु मंत्र के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, वे कहते हैं हाँ, कर सकते हैं — गुरु पूर्णिमा के दिन से शुरू करें। एक श्रोता, जो माँ काली से पूरी तरह जुड़ना और सपने में उनके दर्शन पाना चाहती हैं, उनसे वे कहते हैं कि दर्शन देना उन पर निर्भर है; पर यदि आप उनकी सेवा पूजा करना चाहती हैं, तो शुभ समय पर उनके स्तोत्र और स्तुति का गायन और उनकी आरती शुरू करें।

153

गायत्री मंत्र में कितनी शक्ति है?

हर गीता कहती है: मंत्रों में मैं गायत्री हूँ

· 1:45:10–1:45:49 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि गायत्री मंत्र में कितनी शक्ति है, वक्ता आश्चर्य प्रकट करते हैं, और कहते हैं कि वे स्वयं मंत्र नहीं बोलेंगे, पर वेद में गायत्री सर्वोपरि हैं, और जितनी भी गीताएँ हैं उन सबमें कहा गया है कि मंत्रों में मैं गायत्री हूँ — शिव गीता में शिव जी, शिव महापुराण में भी शिव जी, और गीता में स्वयं श्री कृष्ण। तो उनकी महिमा असीम है।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10.35

Kṛṣṇa says that among metres he is the Gāyatrī.

The verse says among metres (छन्दसाम्), where the speaker says among mantras.

मूल पाठ पढ़ें →
35

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् । मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥ ३५ ॥

सामों में मैं बृहत्साम हूँ, छन्दों में गायत्री हूँ। महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ, और ऋतुओं में फूलों वाला वसन्त हूँ।

154

दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करना चाहिए?

चैनल पर बताए गए महाविद्या क्रम से

· 1:45:50–1:46:35 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें, वक्ता कहते हैं: दुर्गा सप्तशती का पाठ महाविद्या क्रम से करें, जो इसी चैनल पर बताया गया है — जिसमें किसी दिन एक अध्याय, किसी दिन दो अध्याय, और किसी दिन तीन अध्याय पढ़ने होते हैं। इसमें आपको शाप विमोचन आदि भी नहीं करना पड़ेगा। दुर्गा सप्तशती के पाठ पर एक लाइव भी है; उसे पूरा सुनें और आपकी हर शंका उसमें दूर हो जाएगी।

155

जिस बेटी को शिवलिंग पूजा के सपने आते हैं, उसे क्या सिखाएँ?

शिव पूजन और रुद्राष्टक गायन के लिए प्रोत्साहित करें

· 1:46:36–1:47:16 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उनकी बेटी को हमेशा शिवलिंग या उससे जुड़ी पूजा के सपने आते हैं और पूछते हैं कि कौन-सी साधना करनी चाहिए। वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले, आपकी बेटी को इतना अच्छा सपना आ रहा है: उसे शिव पूजन करने के लिए प्रेरित करें। उसे रुद्राष्टक की स्तुति गाना सिखाएँ — पढ़ना नहीं, गाना, और अच्छे से गाना। वह रोज़ शिवलिंग का अभिषेक करे, उसका शृंगार करे, और साथ में रुद्राष्टक पढ़े। उसे यहीं से शुरू करवाएँ।

156

किसके दर्शन करने चाहिए, और विंध्याचल में क्या करें?

दर्शन उसके होते हैं जिसके भीतर कुछ हो; विंध्याचल त्रिकोण यात्रा

· 1:47:17–1:47:59 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि किसके दर्शन करने चाहिए, वक्ता कहते हैं: दर्शन का अर्थ क्या है? दर्शन उसके होते हैं जिसके भीतर कुछ हो। वे कहते हैं, भगवती के दर्शन करें; विंध्याचल आइए, उनके लिए वहाँ सब कुछ है। भगवती विंध्यवासिनी के दर्शन करें, त्रिकोण यात्रा करें; अब वहाँ घूमने की भी बहुत-सी जगहें हैं, तो आराम से आइए और घूमिए, आपको कुछ न कुछ प्राप्त होगा।

157

पूजा का सबसे अधिक प्रभाव कहाँ होता है?

घर, गुरु का घर, बारह वर्ष से पुराना मंदिर, तीर्थ

· 1:48:00–1:48:39 · Also a question

महावतार बाबाजी और उनका आशीर्वाद कैसे पाएँ, इस बारे में पूछे जाने पर वक्ता इसे बहुत अच्छा प्रश्न बताते हैं और कहते हैं कि उन्हें सभी सिद्ध गुरुओं के लिए अलग वीडियो बनाने होंगे — चाहे महावतार बाबाजी हों, श्री श्यामाचरण लाहिड़ी महाशय हों, या तैलंग स्वामी जैसे दूसरे सिद्ध पुरुष। यह पूछे जाने पर कि किस स्थान पर पूजा का सबसे अधिक प्रभाव होता है, वे कहते हैं कि उनके मत में गृहस्थ अपने घर में पूजा करे तब भी प्रभाव होता है; गुरु के घर पर करे तब भी प्रभाव होता है; सबकी महिमा अलग है। बारह वर्ष से अधिक पुराने शिव मंदिर में, जिसकी स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा हुई हो, पूजा करने का अधिक प्रभाव होता है; और तीर्थ क्षेत्र में, गंगा में, नर्मदा क्षेत्र आदि में पूजा का असीम प्रभाव होता है।

158

क्या श्री विद्या दीक्षा के बिना ललिता सहस्रनाम पढ़ा जा सकता है?

नहीं, उनके मत में और दीक्षित ऊँचे साधकों के मत में

· 1:48:40–1:49:12 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या श्री विद्या दीक्षा के बिना ललिता सहस्रनाम नहीं किया जा सकता, वक्ता कहते हैं कि उनके अनुसार नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसमें मूल विद्या, मूल मंत्र और ऐसे मंत्र हैं जिनका उच्चारण बिना दीक्षा नहीं करना चाहिए; लोग उसके अधिकारी नहीं होते, और उसमें न्यास आदि की प्रक्रिया है। वे कहते हैं कि श्री विद्या में दीक्षित ऊँचे स्तर के साधकों ने भी यही कहा है — कि इसे नहीं करना चाहिए।

159

क्या गृहस्थ घर में काल भैरव की पूजा कर सकता है?

घर में बटुक भैरव, बाहर काल भैरव

· 1:49:13–1:49:55 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि हनुमान जी का कौन-सा स्तोत्र या पाठ हर तरह की स्थिति के लिए अच्छा है, वक्ता कहते हैं: बड़वानल करें। यह पूछे जाने पर कि क्या गृहस्थ काल भैरव की पूजा कर सकते हैं, वे कहते हैं कि घर में काल भैरव का मंत्र जप, पूजा और स्थापना करने के बजाय बटुक भैरव का करना चाहिए; काल भैरव की पूजा घर के बाहर, शिव मंदिर आदि में करनी चाहिए।

160

क्या अघोरी या तामसिक गुरु पाने की कोई साधना है?

उसी इच्छा को मन में रखकर गुरु साधना करें

· 1:49:56–1:50:19 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि नहाने के पानी में क्या मिलाएँ, वे कहते हैं कि यह निर्भर करता है — गंगाजल मिलाकर नहाएँ। यह पूछे जाने पर कि क्या गुरु प्राप्ति की साधना उनके लिए भी काम करती है जो तामसिक या अघोर साधना के लिए अघोरी गुरु या तामसिक गुरु चाहते हैं, वे कहते हैं: बिल्कुल, उसी इच्छा को मन में रखकर करें — कि हमें तामसिक साधना के लिए ऐसे गुरु चाहिए, कि हमें अघोरी गुरु चाहिए — और ऐसे गुरु मिलेंगे।

161

मंदिर बनवाने से कौन-सा पुण्य मिलता है, और अकाल मृत्यु के लिए क्या किया जाता है?

असीम पुण्य; अकाल मृत्यु के लिए नारायण नागबलि

· 1:50:20–1:50:59 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि मंदिर बनवाने से कौन-सा पुण्य मिलता है, वक्ता कहते हैं कि असीम पुण्य मिलता है; कहा जाता है कि मंदिर बनवाने वाले लोग कई पीढ़ियों को तार देते हैं। एक श्रोता, जिनके बड़े भाई की दो वर्ष पहले अकाल मृत्यु हुई और जो अब बहुत परेशान किए जा रहे हैं, उनसे वे कहते हैं कि यह इस पर निर्भर है कि उनकी उम्र क्या थी — यदि उनकी मृत्यु अभिचार आदि से, अकाल मृत्यु में हुई, तो वे बहुत ज़्यादा परेशान करेंगे। यदि अकाल मृत्यु दुर्घटना से हुई, तो नारायण नागबलि आदि करवाकर, और विधि विधान से उनके लिए श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करवाकर, उन्हें गति दी जा सकती है।

162

क्या बहुत ज़्यादा बजरंग बाण पढ़ने से हनुमान जी नाराज़ होते हैं?

सिद्ध करके रखें; केवल कष्ट आने पर प्रयोग करें

· 1:51:30–1:51:54 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या बहुत ज़्यादा बजरंग बाण पढ़ने से हनुमान जी नाराज़ होंगे — मानो कह रहे हों, तुम कौन हो जो मुझे राम जी की सौगंध दे रहे हो — वक्ता कहते हैं: आपको इसे सिद्ध करके रखना चाहिए, और बार-बार प्रयोग नहीं करना चाहिए; प्रयोग तब करना चाहिए जब कोई कष्ट आए। यदि आपके जीवन में कोई कष्ट नहीं है, तो बजरंग बाण पढ़ने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं।

163

शक्तिशाली स्तोत्र की तुलना असली ज़रूरत के लिए रखी तलवार से क्यों की जाती है?

सेब काटने के लिए चाकू लाते हैं, तलवार नहीं

· 1:51:55–1:52:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं: एक बात बताइए — यदि आपको सेब काटकर खाना है, तो क्या उसे काटने के लिए तलवार लाएँगे, या चाकू? वहाँ आप चाकू का प्रयोग करेंगे। तीर और तलवार रखने की चीज़ें हैं — जैसे उनके साथ जिन्होंने पहले पाशुपतास्त्र के बारे में पूछा: पाशुपतास्त्र पढ़ने की ज़रूरत कब पड़ेगी? जब ऐसी समस्या हो, और जब आपके भीतर उतना सामर्थ्य हो। बजरंग बाण अपने आप में अत्यंत शक्तिशाली चीज़ है; जब ऐसी ज़रूरत हो तब उसका प्रयोग करें। नहीं तो हनुमान चालीसा।

164

घूंघट मसानी क्या है?

ऐसी मसानी जो बिल्कुल भेद नहीं देती

· 1:52:17–1:52:42 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि घूंघट मसानी क्या है, वक्ता कहते हैं कि यह ऐसी मसानी है जो भेद नहीं देती — इसीलिए उसे घूंघट मसानी कहा जाता है। वह मुँह भी नहीं खोलेगी; आप चौकी का भेद नहीं पा सकेंगे। यदि किसी भगतवाल साधक ने घूंघट मसानी के साथ प्रयोग किया है, तो अगले व्यक्ति को कितना भी मारा-पीटा जाए, वह बताएगा ही नहीं कि उस पर कौन-सी शक्ति है, क्या है, क्या नहीं। वे कहते हैं कि भगतवाल में लोग उसे बुलवाने में थक जाते हैं; बराटी आदि का प्रयोग भी बहुत बार विफल हो जाता है।

165

घूंघट मसानी के विरुद्ध क्या चाहिए, और बजरंग बाण में सप्त मृतिका का क्या?

ऊँचे स्तर का तंत्र और महाविद्याएँ; सप्त मृतिका वैकल्पिक

· 1:52:43–1:52:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसमें ऊँचे स्तर की तंत्र साधनाओं का सहारा लेना पड़ता है; महाविद्याओं का सहारा लेना पड़ता है। यह पूछे जाने पर कि बजरंग बाण के समय प्रयोग होने वाले पाँच तरह के अनाज के आटे में क्या सप्त मृतिका मिलानी है, वे कहते हैं: मिलाएँ तो उत्तम है; और न मिलाएँ तो भी कोई बात नहीं।

वे कहते हैं कि इसमें ऊँचे स्तर की तंत्र साधनाओं का सहारा लेना पड़ता है; महाविद्याओं का सहारा लेना पड़ता है। यह पूछे जाने पर कि बजरंग बाण के समय जो पाँच तरह के अनाज का आटा प्रयोग होता है, उसमें क्या सप्त मृतिका मिलानी है, वे कहते हैं: मिलाएँ तो उत्तम है; और न मिलाएँ तो भी कोई बात नहीं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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