हनुमान जी का सामर्थ्य और चांदी का वर्क — भेंट, बिगाड़े गए ग्रंथों और साधकों के प्रश्नों पर लंबा लाइव सत्र

हनुमान जी को चांदी का वर्क चढ़ाने के विरुद्ध चेतावनी, और उसका कारण।

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01

आपमें सौ किलो उठाने की ताकत है, पर वह वज़न तक पहुँचने के रास्ते में ही खर्च हो जाती है

वज़न उठाने की ताकत, पर रास्ते की नहीं

· 02:09–03:31

आपके भीतर बहुत बल है — सौ किलो उठाने जितना। आपको चुनौती दी जाती है कि आओ, उठाकर अपना बल दिखाओ। पर वज़न तक पहुँचने से पहले रास्ते में आग जला दी जाती है और गरम लोहे का टुकड़ा रख दिया जाता है, जिस पर न आप चल सकते हैं, न उसे लांघ सकते हैं। इसलिए आप वज़न कभी नहीं उठा पाते, और सामने वाला कहता है कि आपमें कोई ताकत थी ही नहीं।

02

यह उदाहरण हनुमान जी पर चढ़ाए जाने वाले चांदी के वर्क के बारे में है

हनुमान जी पर चढ़ाया जाने वाला चांदी का वर्क

· 03:32–04:00

वक्ता कहते हैं कि यह लोगों की सबसे बड़ी गलती है: वे हनुमान जी पर चांदी का वर्क चढ़ाते हैं और फिर कहते हैं कि हनुमान जी उनका दुख और कष्ट दूर करने नहीं आते।

03

क्या अब ऐसी फैक्ट्रियाँ नहीं हैं जो चांदी का वर्क ठीक तरह से बनाती हैं?

गलती यह है कि लोग नहीं जानते वर्क कैसे बनता है

· 04:01–04:24 · Also a question

वक्ता मानते हैं कि आजकल कुछ फैक्ट्रियाँ हैं जहाँ चांदी का वर्क बिल्कुल सही तरीके से बनता है। पर गलती यह है कि लोगों को पता ही नहीं कि जो वर्क वे खरीदते हैं वह कैसे बना है — उन्हें बस इतना पता है कि चांदी चढ़ाएँगे तो हनुमान जी प्रसन्न होंगे, और वे पाँच-दस रुपये की चांदी से उन्हें प्रसन्न करते हैं।

04

अगर कोई हनुमान जी को चांदी चढ़ाना चाहे, तो क्या चढ़ाए?

चांदी का कड़ा, राम लॉकेट, मुकुट

· 04:25–04:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं, थोड़ा ज़्यादा पैसा खर्च कीजिए: हनुमान जी के चरणों में चांदी का कड़ा चढ़ाइए; चांदी के राम बनवाइए, राम जी का लॉकेट बनवाकर उनके गले में डालिए। वे जीवन भर आपसे प्रसन्न रहेंगे। इसकी जगह लोग दूसरों की देखा-देखी दस रुपये का चांदी का वर्क चढ़ाते हैं।

वक्ता कहते हैं, थोड़ा ज़्यादा पैसा खर्च कीजिए। हनुमान जी के चरणों में चांदी का कड़ा चढ़ाइए। चांदी के राम बनवाइए, राम जी का लॉकेट बनवाइए और उनके गले में डालिए। वे जीवन भर आपसे प्रसन्न हो जाएँगे। पर आप दूसरों को देखकर हनुमान जी पर बस दस रुपये का चांदी का वर्क चढ़ाना चाहते हैं।

05

वक्ता के अनुसार चांदी का वर्क कैसे बनता है?

चमड़े की परतों के बीच पीटकर पतला किया जाता है

· 04:45–06:20 · Also a question

कहीं दिखाया गया है कि चांदी को भेड़ की खाल में रखा जाता है, और कहीं कि गाय की आँत की थैली में रखकर पीटा जाता है। जो चीज़ बहुत लंबी और फैलानी हो, वह सीधे पीटने पर टूट जाएगी, इसलिए जिसके भीतर उसे रखा जाए वह चोटों से फटनी नहीं चाहिए — चमड़े की पतली परतें इसी काम के लिए होती हैं।

06

सनातन पहले से विद्यमान है, फिर भी आधुनिकता के चक्कर में अब घर में कब्र पूजी जाती है

घर में कब्र-पूजा, और सनातन का पहले से होना

· 07:51–08:20

सनातन पहले से विद्यमान है — सत्य सनातन वैदिक धर्म — पर आधुनिकता के चक्कर में लोग अब नए-नए देवताओं के पीछे चलते हैं, और साईं को अपना बाबा बनाकर घर में कब्र पूजते हैं, कहते हैं कि उन पर काली आती है और साईं बाबा उनके गुरु हैं।

07

नैवेद्य का नियम क्या है, और लोग उसकी जगह क्या चढ़ाते हैं?

शुद्ध देसी गाय के दूध की मिठाई, केमिकल नहीं

· 08:21–08:50 · Also a question

नैवेद्य का नियम है कि शुद्ध देसी गाय, वेद-लक्षणा गाय के दूध से बनी मिठाई देवता को चढ़ाई जाए। आज लोग कैडबरी डेयरी मिल्क चढ़ाते हैं; और वेद-लक्षणा गाय की बात छोड़ भी दें, तो जो मिलता है वह भेड़, बकरी या भैंस के दूध का होता है, या केमिकल से बनी चीज़ होती है, और वही भोग में चढ़ता है।

08

मारवाड़ी दुकानदार आज भी मंगलवार और शनिवार का लड्डू पुराने नियम से रखते हैं

मारवाड़ी दुकानदार और मंगल-शनि का लड्डू

· 08:51–09:20

वक्ता मारवाड़ी दुकानदारों की बात करते हैं। राजस्थान, जम्मू, पूरब और थोड़ा दक्षिण घूमकर, उन्हें हर जगह ऐसे लोग मिले हैं — खासकर मारवाड़ी समाज के — जो मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा के लिए लड्डू की अलग, बिल्कुल ताज़ी व्यवस्था रखते हैं, और मिठाई देने से पहले पूछते हैं कि क्या यह हनुमान जी के लिए है।

09

चांदी का वर्क चढ़ाने की प्रथा क्यों शुरू की गई?

हनुमान जी का सामर्थ्य रोकने के लिए, जैसे भैरव को रोका गया

· 09:21–10:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं, उसी सामर्थ्य को रोकने के लिए — कहीं न कहीं यह प्रथा इसी उद्देश्य से चलाई गई। इसी तरह भैरव को घर से निकाला गया, लोग कहने लगे कि भैरव की पूजा मत करो; और आज भी लोग घरों से कृष्ण, कान्हा, लड्डू गोपाल को निकलवा रहे हैं, और यह कहकर हनुमान जी की पूजा रुकवा रहे हैं कि बालाजी की पूजा मत करो।

10

हनुमान जी की पूजा इतनी व्यापक क्यों हुई?

उनकी सेवा-पूजा सबसे सरल थी, और चालीसा सबको याद थी

· 10:01–10:37 · Also a question

क्योंकि उनकी सेवा-पूजा सबसे सरल थी, और हनुमान चालीसा सबको याद थी। और हनुमान जी की साधना की पहली शर्त है कि ब्रह्मचर्य रखना बहुत ज़रूरी है — और जब ब्रह्मचर्य रखा जाता है, तो शरीर में तेज और बल बढ़ना निश्चित है।

11

पुराने समय में हनुमान जी की साधना कौन करता था?

पहलवान, और उनके वीरों को सिद्ध करने वाले

· 10:38–11:20 · Also a question

पहले जो भी लोग पहलवानी सीखते थे, वे हनुमान जी की पूजा खास तौर पर करते थे — अखाड़े में, कुश्ती में, और युद्ध के मैदान में जाने के लिए, उनकी पूजा और साधना विशेष रूप से करते थे, वीर भाव में साधना करते थे। और ऐसे लोग भी थे जो हनुमान जी के वीरों की, उनके मुख्य गणों की सिद्धि करते थे।

12

आक्रांताओं ने अपनी हारों का विश्लेषण किया और सीधा वार करने की जगह वर्क चलाया

उन्होंने हारों का विश्लेषण कर वर्क चलाया

· 11:21–11:44

वक्ता कहते हैं, ऐसा नहीं था कि आक्रांता आए और एक ही झटके में सब खत्म कर दिया। जब वे हारे, तो उन्होंने विश्लेषण किया कि यह ताकत कहाँ से आ रही है; और जिस तरह भैरव की पूजा रुकवाई गई, उसी तरह इसे भी रोकने के लिए उन्होंने वर्क का इस्तेमाल किया। देखिए, वे कहते हैं: चांदी के वर्क का प्रयोग पहले था ही नहीं — इतने पतले वर्क उस तरह बनाए ही नहीं जाते थे।

13

चांदी का प्रयोग पहले किस रूप में होता था?

भस्म और चूर्ण, जैसे च्यवनप्राश में — वर्क नहीं

· 11:45–12:40 · Also a question

च्यवनप्राश बहुत प्राचीन है और उसका वर्णन पौराणिक ग्रंथों में मिलता है; उसमें सोना और चांदी दोनों डाले जाते थे, पर भस्म के रूप में, वर्क के रूप में नहीं। भस्म के ऊपर आता है चूरा — जैसा चूर्ण हम खाते हैं। वर्क नहीं आता था। वर्क उनके द्वारा लाया गया, और उसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह था कि चमड़े के बीच रखकर इस चीज़ को अशुद्ध किया जाए।

14

वर्क चढ़ाना बहुत बड़ा पाप है, और कोई शास्त्र इसका समर्थन नहीं करता

बहुत बड़ा पाप, और कोई शास्त्र साथ नहीं देता

· 12:41–14:40

वक्ता कहते हैं, सोचिए कि आप कितना बड़ा पाप कर रहे हैं। आज फैक्ट्री का बना वर्क मिलता है, पर फैक्ट्रियाँ भी पूरी विधि नहीं दिखा रहीं — जर्मन सिल्वर और चाइनीज़ सिल्वर का नाम आता है, पर कोई प्रामाणिक स्रोत नहीं मिलता। अगर स्रोत पक्का हो जाए कि यह सच में 100% शाकाहारी है और ऐसी चीज़ें इसमें नहीं लगीं, तभी इसका प्रयोग कीजिए।

15

वर्क की जगह हनुमान जी को क्या चढ़ाया जा सकता है?

रामनामी लॉकेट, आभूषण, मुकुट, तुलसी माला, पत्ते पर राम

· 15:25–16:50 · Also a question

अगर चांदी चढ़ाने की इतनी इच्छा है और चांदी आपकी सामर्थ्य से बाहर नहीं है — तो हनुमान जी को रामनामी लॉकेट चढ़ाइए; सोने या चांदी का कोई आभूषण बनवाकर चढ़ाइए; मुकुट पहनाइए; तुलसी की माला; पान के पत्ते पर राम लिखकर, पीपल के पत्ते पर राम लिखकर। ये चढ़ाइए। किस भक्त ने कभी कहा कि चांदी का वर्क चढ़ाओ?

16

इस प्रथा का कहीं कोई वर्णन नहीं है — इसकी जगह सूखा सिंदूर या अष्टगंध चढ़ाइए

कहीं वर्णन नहीं — सूखा सिंदूर या अष्टगंध चढ़ाइए

· 16:51–17:40

क्योंकि यह प्रश्न बार-बार आता रहा, वक्ता ने इसे ठीक से देखा, और कहीं इसका कोई वर्णन नहीं है, कहीं नहीं कहा गया कि ऐसा करो। शुद्ध सिंदूर, शुद्ध तेल, शुद्ध देसी घी लाइए — और अगर घर पर खुद घी बनाते हैं, तो वही चढ़ाइए। अगर न मिले, तो सूखा सिंदूर चढ़ाइए; कोई दिक्कत नहीं, हनुमान जी प्रसन्न होंगे। अष्टगंध चढ़ाइए।

17

तिल का तेल अपनी आँखों के सामने निकलवाकर लेना चाहिए, खासकर नवरात्र के आसपास

अपनी आँखों के सामने निकला तेल लीजिए

· 17:41–18:26

तिल का तेल सोच-समझकर इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि नवरात्र के आसपास इसके बहुत से ब्रांड आते हैं, बाहर की पैकिंग बढ़िया और अंदर की चीज़ ठीक नहीं; वह तिल का तेल जलाएँगे तो बस नुकसान ही देगा। अगर अपनी आँखों के सामने निकला तेल मिल सके तो वही लीजिए; नहीं तो शुद्ध सरसों का तेल, जो आजकल जगह-जगह लगी मशीनों से निकाला जाता है। पचास-सौ रुपये ज़्यादा लगेंगे, पर वह शुद्ध है, और उससे देवताओं का पोषण होगा।

18

गौ मांस में बना वर्क चढ़ाने का दोष किसे लगता है?

चढ़ाने वाले को, हनुमान जी को नहीं, जो राममय हैं

· 19:00–19:29 · Also a question

आपको। जब आप गौ मांस के भीतर बना चांदी का वर्क चढ़ाते हैं, तो चूँकि आप खुद चढ़ा रहे हैं, दोषी आप ही बनते हैं। हनुमान जी का इसमें क्या — हनुमान जी राममय हैं; उन्हें क्या दोष लगेगा? उनके साथ यह आप ही कर रहे हैं।

वक्ता कहते हैं, जब आप गौ मांस लगाकर बना चांदी का वर्क चढ़ाते हैं, तो चूँकि आप खुद चढ़ा रहे हैं, दोषी आप ही बनते हैं। हनुमान जी का इसमें क्या? वे राममय हैं। उन्हें क्या कष्ट, क्या दोष लगने वाला है? उनके साथ इस तरह यह आप ही कर रहे हैं।

19

संकट में फँसा व्यक्ति हनुमान जी को पुकारे तो क्या होता है?

उनका सामर्थ्य शत्रु से करोड़ों गुना अधिक है

· 19:30–19:56 · Also a question

आप कहीं भी हों, जब संकट में फँसकर हनुमान जी को पुकारते हैं — सामने कितना भी बड़ा म्लेच्छ शत्रु खड़ा हो, उसने कितना भी नीच तंत्र और कैसी भी क्षुद्र शक्तियाँ लगाई हों — हनुमान जी का सामर्थ्य करोड़ों गुना अधिक है। वह तो बस प्रेत और पिशाच का प्रयोग कर सकता है; हनुमान जी स्वयं भगवान हैं, कोई छोटी दिव्यात्मा नहीं। पर आपके भीतर उन्हें उस तरह आवाहित करने की क्षमता होनी चाहिए।

20

हनुमान जी पर सुंदरकांड, और 'अतुलितबलधामं' से शुरू होने वाला ध्यान पढ़ना चाहिए

सुंदरकांड, और 'अतुलितबलधामं' से शुरू होने वाला ध्यान

· 19:57–20:29

सुंदरकांड — जो भी इसका पाठ करे, वह साल में कम से कम एक-दो बार ज़रूर करे। सुंदरकांड में हनुमान जी के बारे में बहुत सी बातें पता चलती हैं, कि उनमें कितना सामर्थ्य है। और जब हनुमान जी का ध्यान किया जाता है, तो सबसे पहले आता है "अतुलितबलधामं" — जिनका बल तौला नहीं जा सकता, जिनकी ताकत की कोई सीमा ही नहीं।

21

दुख में लोग प्रेत शक्ति की ओर क्यों मुड़ते हैं?

प्रेत पहले दुख हरता है ताकि आपको अपना भक्त बना ले

· 20:30–21:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं, यह सच है कि अगर आप प्रेत शक्ति की शरण में जाएँ तो वह सबसे पहले दुख दूर करती है। अगर आप दुख में गए हैं, बहुत पूजा-पाठ करते हैं और फिर भी आपकी शक्ति की कृपा आप पर नहीं हुई, तो आप प्रेत और पिशाच की शरण ले लेते हैं। और वे कृपा दिखाते भी हैं — क्योंकि उन्हें भी याद रहता है: इसे अपना भक्त बनाओ, अपना सामर्थ्य दिखाओ, इसे अपना बना लो।

22

जब हनुमान जी बाली के सामने गए तो क्या हुआ?

बाली का वरदान और ब्रह्मा जी का हस्तक्षेप

· 21:07–21:36 · Also a question

बाली को वरदान था कि जो भी उसके सामने आएगा, उसका आधा बल बाली में चला जाएगा। जब बाली हनुमान जी से झगड़ने, लड़ने गया और हनुमान जी उसके सामने आए, तो बाली में इतना बल भर गया कि उसका शरीर फटने को हो गया — वह तेज सह नहीं पाया। ब्रह्मा जी प्रकट हुए और बोले: बाली, यहाँ से चले जाओ; तुममें इनका तेज सहने का सामर्थ्य नहीं है।

23

हनुमान जी के एक रोम की ताकत कितनी मानी जाती है?

एक रोम इंद्र के दस हज़ार वज्रों के बराबर

· 21:37–21:57 · Also a question

हनुमान जी के शरीर के एक रोम का बल इंद्र के दस हज़ार वज्रों के बराबर माना जाता है। इसीलिए जब लोग हनुमान जी के साक्षात्कार की बात करते हैं, तो वे कभी पूरे तेज के साथ प्रकट नहीं होते — कलियुग में कभी नहीं।

वक्ता कहते हैं, हनुमान जी के शरीर पर जितने रोम हैं, उनमें से एक रोम का बल इंद्र के दस हज़ार वज्रों के बराबर माना जाता है। इसीलिए जब लोग हनुमान जी के साक्षात्कार की बात करते हैं, तो वे कभी पूर्ण तेज के साथ प्रकट नहीं होते। कलियुग में कभी नहीं।

24

हनुमान जी के उतरते ही अर्जुन का रथ जल गया, और उनकी गर्जना से कर्ण मूर्छित हो गया

जलता रथ, और गर्जना से कर्ण की मूर्छा

· 21:58–22:40

हनुमान जी अर्जुन के रथ के ऊपर ध्वजा पर बैठे थे; युद्ध खत्म होने पर कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि आखिरी बार रथ को देख लो, यह नहीं बचेगा — और जैसे ही हनुमान जी ध्वजा से हटे, रथ वहीं राख हो गया। और जब कृष्ण को बाण लगा, तो हनुमान जी क्रोधित होकर गरजे; सामने खड़ा कर्ण डर से मूर्छित हो गया, और कृष्ण ने कहा कि यह त्रेता नहीं, द्वापर है, ये आपका तेज नहीं सह पाएँगे — काम के बीच में मत आइए, ध्वजा पर बैठे रहिए।

25

युद्ध में उनका सामर्थ्य यमराज, इंद्र, विष्णु और कुबेर के बराबर है

युद्ध में यमराज, इंद्र, विष्णु और कुबेर

· 22:41–23:19

बाली और रावण का बल सचमुच बहुत बड़ा था। और युद्ध में यमराज, इंद्र, विष्णु और कुबेर का जितना सामर्थ्य है — हनुमान जी का सामर्थ्य उतना है।

26

नालंदा प्रामाणिक ग्रंथों के साथ जल गया, और उनके पीछे कोई छापाखाना नहीं था

नालंदा जला, और पीछे कोई छापाखाना नहीं

· 23:20–23:59

मध्यकाल में जब नालंदा विश्वविद्यालय जलाया गया, तो हमारे सारे प्रामाणिक ग्रंथ और शास्त्र उसके साथ जल गए। पहले के समय में वहाँ कोई प्रिंटिंग प्रेस नहीं बैठी थी कि आज छपी किताब की सौ या हज़ारों प्रतियाँ बनें और हर जगह बँटें। वह एक जगह, गुरुकुल में रहता था; व्यक्ति जाकर अपने गुरु से एक शास्त्र सीखता था।

27

ज्ञान गुरु के मुख से सुनकर स्मृति में रखा जाता था

गुरु के मुख से सुना और स्मृति में रखा

· 24:00–24:50

गुरु के मुख से सुनकर और स्मृति में बिठाकर — जैसे आपके बचपन की स्कूल की प्रार्थना दो-तीन-चार महीने बस सुनते-सुनते आपको याद हो गई। सारे मंत्र और श्लोक विद्यार्थियों के मन में याद रहते थे, और मूल कहीं सुरक्षित रहता था; जो इस तरह विद्वान बनता, वह बाद में, अगर प्रभु की कृपा होती, उसे लिखकर अपनी परंपरा में रखता और अपने शिष्यों को देता।

28

सबसे पहले कौन से केंद्र नष्ट किए गए, और इसका महत्व क्या है?

तक्षशिला, और 64 योगिनी मंदिर

· 24:51–25:22 · Also a question

सबसे पहले जड़ मिटाई गई: ये सारी जगहें जलाई गईं, तक्षशिला खत्म कर दी गई। 64 योगिनी मंदिर, जो तंत्र साधना का मुख्य केंद्र था, उसके साथ ऐसा किया गया कि वहाँ पहुँचने लायक कोई नहीं रहा — आज लोग यूट्यूब और फेसबुक देखकर वहाँ जाते हैं। वक्ता कहते हैं, आपकी जड़ पहले हिलाई गई, इसीलिए आपकी बुद्धि कुंठित हो जाती है।

29

पीर और फकीर सनातन गुरुओं के शिष्य बनकर सीखे — यह एक अलग तरह का जिहाद था

सनातन गुरुओं के शिष्य, और एक अलग तरह का जिहाद

· 25:23–26:08

जितने भी पीर और फकीर हुए, ये लोग सनातन संस्कृति के किसी बड़े गुरु या धर्म-धुरंधर के शिष्य बने। वक्ता यह नहीं कहते कि सबने ऐसा किया, पर मानते हैं कि कहीं न कहीं उनके द्वारा इस तरह का जिहाद किया गया — यह भी जिहाद का एक रूप रहा है। वे शागिर्द बने, सारा ज्ञान लिया, और अपने ही किसी शिष्य को दे दिया।

30

मूल को नष्ट किया जाता है और बदलाव टीका में घुसा दिए जाते हैं

मूल नष्ट करो, और बातें टीका में घुसाओ

· 26:09–26:48

जिसने किसी राम भक्त से सीखा, उसे शिक्षा उस राम भक्त के भक्ति भाव के साथ मिली, पर वह उसे ठीक वैसी ही अपने शिष्य को नहीं दे पाया; और जब उस शिष्य के पास उसे सुरक्षित रखने का काम आया, तो किया यह गया: पहले मूल ग्रंथ नष्ट करो, और जितना हो सके टीका में घुसा दो। उसमें ऐसी बातें घुसाई गईं जो इंद्र को सबसे बड़ा दोषी, ब्रह्मा को दोषी बनाएँ, और ब्रह्मा के सामर्थ्य पर लांछन लगाएँ।

31

शिव और सती के विवाह में उनचास मरुद्गणों की कथा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है

शिव-सती के विवाह में उनचास मरुद्गण

· 26:49–27:00

वक्ता श्रोताओं से एक प्रश्न पूछते हैं: यह बात आप दस जगह पढ़ते हैं — शिव के विवाह के समय, शिव और सती के विवाह के समय, उनचास मरुद्गणों की कथा किस तरह है। उस जगह टीकाकार बात बहुत गलत ढंग से लिखते हैं, और फिर लिखते हैं कि विस्तार भय के कारण बात पूरी नहीं बताई जा रही। वे कहते हैं, इस पर गुस्सा आता है — बात डालिए, क्योंकि साधारण व्यक्ति पढ़कर उसे बस बेतुका समझेगा, बस गलत समझेगा।

32

इक्कीस दिन का ब्रह्मचर्य एक साधारण साधक को स्थिर कर देता है — इसकी तुलना करोड़ों वर्षों के तप से कीजिए

इक्कीस दिन का ब्रह्मचर्य बनाम करोड़ों वर्षों का तप

· 27:01–28:03

आप एक साधारण साधना करते हैं, इक्कीस दिन ब्रह्मचर्य रखते हैं, और इक्कीस दिन बाद, बाईसवें दिन, आपके भीतर कोई काम भावना नहीं उठती। और वे तो स्वयं ब्रह्मा हैं, इस जगत के पिता, जिन्होंने सृष्टि रची, जो पाँच कल्पों से अग्रणी हैं और हर कल्प में करोड़ों-करोड़ों वर्ष भगवान सदाशिव के पाँच महारूपों की आराधना से सामर्थ्य पाते रहे — और आप कहते हैं कि उनके भीतर काम भावना आई, कि अपनी मानस पुत्री सरस्वती को देखकर वे बच नहीं पाए।

33

शास्त्र खुद पढ़िए — प्रत्यक्षं किं प्रमाणम्

शास्त्र खुद पढ़िए — प्रत्यक्षं किं प्रमाणम्

· 28:04–28:40

जब सनातन संस्कृति पर उँगली उठे, तो चुप और कुंठित होकर यह न सोचते रहिए कि सच में ऐसा कैसे हुआ होगा। जानने की कोशिश कीजिए, तब पता चलेगा कि यह कैसे हुआ। खोजिए। अगर लगे कि सामने वाला अपने उत्तर से आपको संतुष्ट नहीं कर पा रहा, तो शास्त्र खुद पढ़िए, खोजने की कोशिश कीजिए, किसी महापुरुष से सीखने की कोशिश कीजिए — तब तक खोजिए जब तक संतोष देने लायक उत्तर न मिल जाए। "प्रत्यक्षं किं प्रमाणम्" — प्रमाण देखिए।

34

रुद्राष्टाध्यायी का तीसरा अध्याय स्वयं इंद्र को पुकारता है

रुद्राष्टाध्यायी का तीसरा अध्याय इंद्र को पुकारता है

· 28:41–29:05

इतने नीच काम के लिए इंद्र को हमेशा निंदा का पात्र बना दिया गया है। पर जब शुक्ल यजुर्वेद का पाठ होता है, रुद्राष्टाध्यायी का पाठ होता है — अगर आपने कभी रुद्राभिषेक करवाया हो — तो सुनिए कि तीसरे अध्याय के पहले श्लोक में भगवान शिव से क्या कहा जाता है: वह इंद्र को पुकारता है, कि हे इंद्र, मेरे सब शत्रुओं का नाश करो, वज्र लेकर मेरे सब शत्रुओं के पीछे दौड़ो। यह क्यों कहा गया है?

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है शुक्लयजुर्वेदसंहिता · अध्याय 17.33

The opening verse of the Apratiratha hymn praises Indra as the sole hero who conquers a hundred armies at once.

The speaker paraphrases it as a plea to Indra to destroy one's enemies; this verse praises his conquest, and the call to strike enemies comes in the verses that follow.

मूल पाठ पढ़ें →
33

आशुः शिशानो वृषभो न भीमो घनाघनः क्षोभणश्चर्षणीनाम् । संक्रन्दनोऽनिमिष एकवीरः शतꣳ सेना अजयत्साकमिन्द्रः ॥ ३३ ॥

तेज़, शस्त्र तीखे करता हुआ, बैल जैसा भयंकर, प्रहार करने वाला, प्रजाओं को हिलाने वाला, गर्जन करने वाला, अपलक, अकेला वीर: इन्द्र ने एक साथ सौ सेनाएँ जीतीं।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

35

इंद्र, वरुण, यम और कुबेर वेदोक्त देवता हैं, कहानियों के पात्र नहीं

इंद्र, वरुण, यम और कुबेर

· 29:06–29:18

इंद्र, वरुण, यम, कुबेर — ये सब वेदोक्त देवता हैं। और आप उन्हें यूँ ही तरह-तरह की कहानियों में घसीट लेते हैं।

वक्ता कहते हैं, इंद्र, वरुण देव, यम, कुबेर — ये सब वेदोक्त देवता हैं। और आप उन्हें एकदम से ऐसी-ऐसी कहानियों में घसीट लेते हैं।

36

पुराणों की रचना आखिर क्यों हुई?

वेद सुलभ नहीं; फिर उपनिषद, और फिर कथा

· 29:19–29:58 · Also a question

क्योंकि कलियुग में आपके पास वेद पढ़ने का समय नहीं है, और पुराण इसलिए बना कि कलिकाल में आपकी मुक्ति हो। आप वेद का एक मंत्र नहीं पढ़ेंगे; अब आप वेद नहीं सीखेंगे। वेद सबको आसानी से सुलभ नहीं होते। इसलिए वेद को समझने के लिए उपनिषद बना, और वेद और उपनिषद की बातों को कथा और लीला के माध्यम से समझाने के लिए महर्षि वेदव्यास ने पुराणों की रचना की, ताकि हम उन बातों को आसानी से समझ सकें और उनसे जुड़ सकें।

37

इन ग्रंथों के अंत में फलश्रुति क्यों लिखी जाती है?

शिव सायुज्य, शिव पद, विष्णु लोक — और यह क्यों लिखा गया

· 29:59–30:34 · Also a question

वक्ता श्रोताओं से सोचने को कहते हैं कि अंत में बार-बार यह क्यों लिखा जाता है कि यह पूरा पाठ पूरा होने पर भगवान शिव का धाम मिलेगा, कि आप शिव लोक पाएँगे, शिव सायुज्य पाएँगे, शिव पद पाएँगे; और कहीं-कहीं कि आप विष्णु लोक पाएँगे। वे कहते हैं, इन सब बातों पर विचार कीजिए — बस फँस मत जाइए।

38

हनुमान जी का श्मशानी रूप कौन सा है?

मसानी हनुमान के रूप में पंचमुखी हनुमान

· 30:35–30:59 · Also a question

पंचमुखी हनुमान को मुख्य रूप से श्मशानी रूप, मसानी हनुमान के रूप में माना जाता है; और उसके ऊपर जो भी रूप है, उसका अपना अलग ध्यान स्वरूप है, और उसकी पूजा भी उसी तरह की जाती है।

पूछे जाने पर कि हनुमान जी का श्मशानी रूप कौन सा है, वक्ता कहते हैं कि पंचमुखी हनुमान को मुख्य रूप से हनुमान जी का श्मशानी रूप, मसानी हनुमान के रूप में माना जाता है। और उसके ऊपर जो भी रूप है, उसके अपने अलग ध्यान स्वरूप हैं, और उसी तरह उनकी पूजा भी की जाती है।

39

मर्कटेश्वर कौन हैं और उनके साधक से क्या अपेक्षित था?

श्मशान में कोई विरला, और जीवन भर ब्रह्मचर्य

· 31:00–31:52 · Also a question

श्मशान में भी कोई विरला ही व्यक्ति दक्षिणाचार या वामाचार विधि से मर्कट जी को, मर्कटेश्वर को प्रसन्न करता है। पहले के समय में मर्कट वीर, मर्कटेश्वर, को प्रसन्न कर सिद्ध किया जाता था; कहा जाता है कि जिसे मर्कटेश्वर की कृपा मिली, उसमें अकेले सौ लोगों को मारने का सामर्थ्य आ गया। पर सबसे बड़ी बात यह थी कि ऐसे व्यक्ति को पूर्ण ब्रह्मचर्य रखना होता था और पूरी निष्ठा से जीवन भर मर्कटेश्वर और हनुमान जी की सेवा-पूजा करनी होती थी।

40

गुरु मंत्र का कितने वर्ष जप करने पर गुरु शक्तियाँ सिद्ध होती हैं?

गुरु मंत्र पहले से सिद्ध है — सिद्ध साधक को होना है

· 31:53–32:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं, गुरु मंत्र पहले से सिद्ध है — वह स्वयं सिद्ध है। गुरु मंत्र को सिद्ध नहीं किया जाता; स्वयं को सिद्ध किया जाता है। और यह बात गुरु मंत्र देते समय ही बता दी जाती है।

41

क्या मंत्र सिद्धि से बंधन, रक्षा घेरा और षट्कर्म, और गुरु मंत्र से शक्तिपात किया जा सकता है?

पहले सीखिए, तपोबल बढ़ाइए, किसी देव की कृपा पाइए — फिर गुरु की आज्ञा से

· 32:15–33:27 · Also a question

वक्ता प्रश्नकर्ता से कहते हैं कि वह इस क्षेत्र में बिल्कुल नया लगता है। पहले चीज़ें सीखिए, अपना तपोबल बढ़ाइए, किसी देव की कृपा पाइए, अपना पुण्य बढ़ाइए, और फिर इस क्षेत्र में उतरिए। आप यह काम ज़रूर कर सकते हैं — पर गुरु की आज्ञा से कीजिए। रही शक्तिपात की बात: आपको खुद सिद्ध होना चाहिए और उसे करने का सामर्थ्य होना चाहिए। आपके पास दस लाख रुपये होंगे तभी आप किसी को पचास हज़ार दे सकेंगे। यह इस पर भी निर्भर है कि आपके गुरु में कितना सामर्थ्य है।

42

क्या दतिया में हुआ बगलामुखी हवन म्लेच्छों के नाश के लिए किया जा सकता है?

किया जा सकता है, आज भी

· 33:28–33:43 · Also a question

पूछे जाने पर कि अगर दतिया में हुआ माँ बगलामुखी का हवन धर्म की रक्षा और म्लेच्छों के नाश के लिए किया जाए तो क्या चमत्कार हो सकता है, वक्ता उत्तर देते हैं: क्यों नहीं हो सकता? बिल्कुल हो सकता है। आज के समय में भी हो सकता है।

एक श्रोता माँ बगलामुखी के उस हवन के बारे में पूछता है जो दतिया में हुआ था — अगर उसे धर्म की रक्षा के लिए, म्लेच्छों के नाश के लिए किया जाए, तो क्या चमत्कार हो सकता है? क्यों नहीं हो सकता, वक्ता उत्तर देते हैं। पूरी तरह हो सकता है। आज के समय में भी हो सकता है।

43

क्या गृहस्थ को महामृत्युंजय मंत्र की साधना करनी चाहिए?

वैदिक मंत्र है — इसकी जगह पंचाक्षरी लीजिए

· 33:44–34:26 · Also a question

नहीं, वक्ता कहते हैं: आपको महामृत्युंजय मंत्र की साधना नहीं करनी चाहिए। महामृत्युंजय वैदिक मंत्र है, और उसकी साधना वैदिक लोगों को ही करनी चाहिए। इसकी जगह भगवान सदाशिव के उस पौराणिक मंत्र की साधना कीजिए जिसे गायत्री के बराबर माना गया है — पंचाक्षरी मंत्र, जिसमें अंत में "नमः" आता है। उससे भी आप महामृत्युंजय की कृपा पा सकते हैं।

44

क्या बजरंग बाण के 108 पाठ का अनुष्ठान किया जा सकता है?

कीजिए — 11 दिन का, 108 पाठ का अनुष्ठान

· 34:27–34:50 · Also a question

एक श्रोता कहता है कि वह बजरंग बाण के 108 पाठ का अनुष्ठान करना चाहता है और वक्ता के बताए अनुसार ग्यारह दिन पहले ही पूरे कर चुका है। बहुत अच्छा, वक्ता उत्तर देते हैं — ज़रूर कीजिए, ग्यारह का, 108 पाठ का अनुष्ठान।

एक श्रोता लिखता है कि उसे बजरंग बाण के 108 पाठ का अनुष्ठान करना है, अनुमति माँगता है, और कहता है कि वक्ता के बताए अनुसार वह ग्यारह दिन पहले ही कर चुका है। यह बहुत अच्छी बात है, वक्ता उत्तर देते हैं। ज़रूर कीजिए — ग्यारह का, 108 पाठ का अनुष्ठान।

45

जो व्यक्ति सदा हनुमान जी की पूजा करता है, वह फिर भी संकट में क्यों फँसा है?

कारण आपका अपना कर्म और उसका प्रारब्ध है

· 34:51–35:57 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि वे कारण नहीं बता सकते — कारण आपका अपना कर्म और उसका प्रारब्ध है, कि आप संकट में फँसे हैं। और आप हनुमान जी की पूजा इसलिए कर रहे हैं कि वे आपको संकट से निकालें। क्या आप माता-पिता की सेवा सिर्फ इसलिए करते हैं कि आप पर कोई संकट न आए? बुढ़ापे में उन्हें सिर्फ इसीलिए खिलाते हैं? इतना स्वार्थ? कि हमारे जीवन में दुख है इसलिए हम पूजा करते हैं, यह कोई तर्क नहीं; यह बेमेल बात है, उस तरह की जो कहती है कि आपकी सारी समस्याएँ एक मिनट में हल होंगी — श्मशानी इल्म के माहिर बाबा बंगाली से मिलिए। ऐसी कोई बात अपने भीतर मत आने दीजिए।

46

संकट में फँसा व्यक्ति जो गुरु-दीक्षित नहीं है, क्या करे?

41 दिन, सुबह-शाम, हनुमान चालीसा से नित्य हवन

· 35:58–36:38 · Also a question

अगर आप गुरु-दीक्षित हैं तो अच्छी बात है; नहीं तो कम से कम हनुमान चालीसा से ही नित्य हवन कीजिए। संकट के अनुरूप हवन कीजिए, दोनों समय, सुबह और शाम। ज़्यादा खर्च नहीं है: गाय के गोबर का उपला लाइए, जलाइए, और उस पर घी की आहुति दीजिए — और अगर घी संभव न हो, तो साधारण हवन सामग्री से आहुति दीजिए। 41 दिन साधना कीजिए; परम कृपा प्राप्त होगी। साथ में राम नाम का जप भी कीजिए और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कीजिए।

47

किन दिनों तुलसी को जल नहीं देना या तोड़ना नहीं चाहिए?

रविवार को जल नहीं, गुरुवार या अमावस्या को तोड़ना नहीं

· 36:39–37:01 · Also a question

एक श्रोता कहता है कि माना जाता है रविवार को तुलसी जी को जल नहीं देना चाहिए। वक्ता कहते हैं कि इस पर भी वे अलग वीडियो बनाएँगे — कि रविवार को जल क्यों नहीं दिया जाता, गुरुवार को क्यों नहीं तोड़ा जाता, और अमावस्या को क्यों नहीं तोड़ा जाता।

एक श्रोता लिखता है कि कहा जाता है रविवार को तुलसी जी को जल नहीं देना चाहिए। इसके लिए भी एक अलग वीडियो बनाया जाएगा, वक्ता कहते हैं। रविवार को जल क्यों नहीं दिया जाता; गुरुवार को क्यों नहीं तोड़ा जाता; अमावस्या को क्यों नहीं तोड़ा जाता।

48

नित्य पूजन के कितनी देर बाद भोग उठाना चाहिए?

प्राणाय स्वाहा, या अन्नपूर्णे मंत्र, और पाँच बार जल

· 37:02–37:19 · Also a question

पूजन पूरा करके "प्राणाय, व्यानाय, उदानाय, समानाय स्वाहा" पूरा कीजिए; और अगर यह न कर सकें, तो इस मंत्र का एक बार पाठ कीजिए — "अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥" वहाँ पाँच बार जल छोड़िए, और उसके बाद भोग प्रसाद उठाइए। यानी पूजा पूरी करने के बाद।

49

मंदिर में और घर में हनुमान जी को कौन सा दीपक देना चाहिए?

एकमुखी दीपक, और हो सके तो घी का

· 37:20–37:41 · Also a question

मंदिर में हनुमान जी के लिए एकमुखी दीपक जलाना सबसे अच्छा है; अगर घी का दीपक जलाएँ तो सबसे उत्तम। घर में आप एकमुखी या पंचमुखी हनुमान, किसी की भी सेवा-पूजा कर सकते हैं — इसमें कोई दिक्कत नहीं।

50

देवी की 32 नामावली के अनुष्ठान में कितना जप चाहिए?

महासिद्धि के लिए बत्तीस लाख, कम से कम बत्तीस हज़ार

· 37:42–38:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं, स्रोत त्रिपुरा रहस्य है, और त्रिपुरा रहस्य में आगे यह भी बताया है कि इसका कितना जप करना है। 32 नाम हैं, तो 32 लाख में महासिद्धि है। अगर 32 लाख संभव न हो, तो कम से कम 32,000 जप कीजिए। दो-तीन हज़ार में क्या होगा?

51

वक्ता क्यों कहते हैं कि हमारी वाणी से पुण्य घटता है?

हर शब्द पुण्य खर्च करता है; जप उसे लौटाता है

· 38:14–38:23 · Also a question

दिन भर में हम कितने शब्द बोलते हैं, और हर शब्द के साथ हमारा पुण्य घटता है। वक्ता कहते हैं, यहाँ वे जो बोल रहे हैं उसमें भी उनका अपना पुण्य जा रहा है। उसे बढ़ाया कैसे जाएगा? ज़्यादा से ज़्यादा माला जप, ज़्यादा से ज़्यादा मंत्र जप करके।

वक्ता कहते हैं, पूरे दिन में हम कितने शब्द बोलते हैं। हर शब्द के साथ हमारे पुण्य का क्षय होता है। यहाँ जो बोला जा रहा है, उसमें भी उनका अपना पुण्य जा रहा है। उसे बढ़ाया कैसे जाएगा? ज़्यादा से ज़्यादा माला जप, ज़्यादा से ज़्यादा मंत्र जप करके।

52

जिसने शिव पूजा से पहले जल न पीने का नियम लिया हो, वह आचमन कैसे करे?

इतना कम जल कि गले तक न पहुँचे

· 38:24–39:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं, यह बहुत अच्छी बात है कि आप बाबा की पूजा किए बिना जल नहीं पीते — और आप आचमन कर सकते हैं। आचमन में बस इतना कम जल लेना है कि वह गले तक न जाए। वे बताते हैं कि यही प्रश्न बद्रीनाथ पीठ के वर्तमान शंकराचार्य से निर्जला एकादशी व्रत के बारे में पूछा गया था, जिनके वीडियो को वे प्रमाण मानते हैं: आचमन करना है, पर जल इतना कम हो कि नाम मात्र को मुँह में जाए और गले तक न पहुँचे।

53

क्या शिव पूजा में शंख बजाया जा सकता है?

बजाना वर्जित नहीं; केवल दक्षिणावर्ती शंख का पूजन वर्जित है

· 39:19–39:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं, क्यों नहीं बजाया जा सकता — शंख बिल्कुल बजाया जा सकता है। उनके लिए जो वर्जित किया गया है वह दक्षिणावर्ती शंख की पूजा है; शंख बजाना वर्जित नहीं है। घर में भगवान शिव की पूजा गृहस्थ स्वरूप में होती है, और घर में आप केवल शिव पूजा नहीं, पंचायतन पूजा करते हैं। आप गृहस्थ हैं — आप अघोर परंपरा में नहीं चले गए; वहाँ तो आपको शंखिनी बजानी पड़ती, और शंखिनी बजाने से जितनी भी नकारात्मक शक्तियाँ हैं, वे आती हैं।

54

आज दीक्षा और कल अघोरी — अब घर-घर में एक है

आज दीक्षा, कल अघोरी

· 40:00–40:15

उस तरह का अघोरी अब हर कोई है — घर-घर में अघोरी है, और अघोर शब्द बोलने में भी अब अटपटा लगने लगा है। जिसे देखो वह अघोरी बन रहा है; वीडियो आते हैं जिनमें लोग श्मशान में स्वाहा कहते हुए अपनी फोटो और वीडियो खींचते हैं, सीधे चिता पर हवन करते हैं, और बाबा बन गए हैं। आज दीक्षा हुई और कल अघोरी बन गए। ऐसा नहीं करना चाहिए।

55

भुजंग स्तोत्र क्या है, और कब किया जाता है?

हर देवता का एक होता है; छंद तय करता है कि कैसे गाया जाए

· 40:16–41:01 · Also a question

हर देवता का अपना भुजंग स्तोत्र होता है। स्तोत्र का अर्थ है कि जो स्तुति बनाई गई है उसकी एक लय, एक ढंग है; और जब हम उस ढंग से स्तुति करते हैं — जब उसका पाठ होता है — तो वह उस छंद में होता है जिसमें गाने को कहा गया है, छंद विनियोग में बताया जाता है, जैसे कहते हैं अनुष्टुप छंद, गायत्री छंद। हर छंद का गाने और बोलने का अपना ढंग है। वक्ता कहते हैं, ठीक यहीं गुरु की ज़रूरत होती है।

56

क्या शुरू करने से पहले सबको छंद सीखने चाहिए?

वर्णाश्रम सही है, पर बोझ से लोग भाग जाते हैं

· 41:02–41:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शंकराचार्य महाराज की सारी बातें सही हैं, कि वर्णाश्रम धर्म के अनुसार चलना चाहिए। पर वे बस इतना जानते हैं कि अभी अपने सनातनियों को बचा लेना ही बहुत बड़ी बात है। अगर कर्मकांड का इतना बोझ डाल दिया जाए — अब छंद सीखो, सीखो कि हर एक कैसे गाया जाता है, और सीखने के बाद ठीक वैसा ही करना है — तो लोग भाग जाना बेहतर समझते हैं। नुकसान उनका है, पर वे इसे अपनी ज़िम्मेदारी मानते हैं कि उन्हें रोकें, रखें, थामें; और बाद में, जब उनका मन वैसा हो जाएगा और वे सनातन में रम जाएँगे, तो ये सब बातें खुद सीख लेंगे। तब उस ढंग से गाया भुजंग स्तोत्र फलश्रुति के अनुसार विशेष कृपा देगा।

57

पीतांबरा शतनाम के 11,000 के अनुष्ठान को किस दिन से शुरू करें?

शुक्ल पक्ष का गुरुवार, मंगलवार, अष्टमी या चतुर्दशी, या पुष्य नक्षत्र

· 41:31–41:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं, शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरू कीजिए; या मंगलवार से शुरू कीजिए; या शुक्ल पक्ष की अष्टमी या चतुर्दशी तिथि से शुरू कीजिए; या जब गुरु पुष्य या रवि पुष्य नक्षत्र हो, तब शुरू कीजिए।

58

एक सवारी घर में आई, खुद को घर की देवी बताया और बकरे की बलि ली — यह क्या है?

षड्यंत्र के रूप में तंत्र, और "खिलाने" का अर्थ

· 41:56–42:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं, यह बहुत सावधान रहने की बात है। जब घर तोड़ने के लिए विचारों में ऐसी बातें चलती हैं, तो यह बहुत बड़ा षड्यंत्र है। यह जानिए: तंत्र बहुत बड़ा षड्यंत्र है। इसीलिए कहा जाता है कि तंत्र में लोग आपको कुछ खिला देते हैं — "खिलाना" ठीक यही है। सामने वाला तांत्रिक क्या बुद्धि लगाएगा, और कैसे खिलाएगा, यह कहना बहुत कठिन है।

59

दूसरों को माता दुर्गा की भक्ति की ओर कैसे प्रेरित करें?

उनके अपने दुख से राहत के ज़रिए — और दंभी पर गीता

· 42:41–43:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं, आज के समय में एक ही तरीका है: व्यक्ति को उसके दुख से निकालने के ज़रिए प्रेरित कीजिए — उससे कहिए, यह काम करो तो तुम्हें दुख से छुटकारा मिलेगा। एक बार उसे थोड़ा भी अनुभव हो गया तो उसे अच्छा लगने लगेगा, और फिर वह वह भक्ति करेगा। नहीं तो आज लोग अपने फायदे के बिना कुछ नहीं करना चाहते। और भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं कि इस तरह के दंभी लोगों से शास्त्रोक्त बातें कभी करनी ही नहीं चाहिए; उनसे यह करो, वह मत करो कहने की ज़रूरत नहीं। छोड़ दीजिए।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18.67

Kṛṣṇa says this teaching must never be spoken to one without austerity or devotion, to one unwilling to hear, or to one who finds fault with him.

The speaker's "dambhī" is a loose gloss of the hearers this verse excludes.

मूल पाठ पढ़ें →
67

इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन । न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ॥ ६७ ॥

यह उपदेश तुम्हें कभी तपरहित को नहीं कहना चाहिए, न भक्तिरहित को, न सुनना न चाहने वाले को, और न उसको जो मुझमें दोष देखता है।

60

कौन सी साधना ग्रहों को अनुकूल करती है और शत्रुओं से रक्षा करती है?

अपने इष्ट के कवच या अष्टोत्तर शतनाम का 11,000 जप

· 43:41–44:48 · Also a question

जैसा बगलामुखी के शतनाम के 11,000 जप वाले पिछले प्रश्न में बताया: आपके जो भी आराध्य हैं, उनके कवच का या अष्टोत्तर शतनाम का 11,000 जप कीजिए। ग्यारह हज़ार एक साथ नहीं होगा — कम से कम तीन, चार, छह महीने लगेंगे। उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार रोज़ उसके 11 पाठ जीवन भर करते रहिए। आपको और कुछ खास करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी; और अगर ज़रूरत पड़ी भी, तो बहुत थोड़े से आपका काम हो जाएगा।

61

काल भैरव मंदिर में मंत्र जप के बाद सिरदर्द क्यों हुआ?

ऊर्जा और थकान — हर चीज़ को तंत्र से मत जोड़िए

· 44:49–45:54 · Also a question

वक्ता कहते हैं, आपने मंत्र जप नया-नया, पहली बार किया होगा, तो ऊर्जा का थोड़ा असर है — और थकान का भी असर है; शरीर थकता है। अब आप कहेंगे कि चार घंटे जप से पैर दुखा, कमर दुखी, बैठने से एसिडिटी हो गई। शरीर में क्षमता ही नहीं है। आप योग नहीं करेंगे, व्यायाम नहीं करेंगे, और फिर चार घंटे पूजा में बैठेंगे — तो अभ्यास होने तक कुछ दर्द होगा। इसमें डरने की कोई बात नहीं। हर एक चीज़ को तंत्र से मत जोड़िए; शरीर की भी अपनी क्षमता है।

62

चंद्रमा बलवान होने पर भी केमद्रुम योग बने तो पक्का उपाय क्या है?

शिव पूजा, और मामा का आशीर्वाद

· 45:55–46:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं, शिव जी की पूजा सबसे पक्का उपाय है। और अगर मामा हैं, तो मामा का आशीर्वाद सबसे ज़रूरी है।

पूछे जाने पर कि जब कुंडली में चंद्रमा बलवान हो और नीच का न हो, फिर भी केमद्रुम योग बने, तो पक्का उपाय क्या हो सकता है, वक्ता उत्तर देते हैं: शिव जी की पूजा सबसे पक्का उपाय है। और अगर मामा हैं, तो मामा का आशीर्वाद सबसे ज़रूरी चीज़ है।

63

बच्चे शिवलिंग पर चॉकलेट चढ़ा रहे हैं — दोष किसका है?

अभिभावक वही संस्कार दे रहे हैं

· 46:09–46:54 · Also a question

वक्ता कहते हैं, बच्चे यह अपने आप नहीं करते। बच्चे सुनते नहीं, और ऊपर से बड़े भी यही कर रहे हैं; उनके अभिभावक उन्हें वही संस्कार दे रहे हैं। पितृ पक्ष में पितरों के आने का मज़ाक उड़ाते हैं और फिर हैलोवीन पर भूत बनकर घूमते हैं, विदेशी संस्कृति अपनाते हैं — तो ऐसे बच्चे क्या करेंगे? चॉकलेट खाएँगे और चॉकलेट चढ़ाएँगे। माता-पिता की ज़िम्मेदारी है कि ऐसी गलत चीज़ों को बढ़ावा न दें, और बच्चों को समझाएँ; अच्छे से समझाइए और करके दिखाइए, फिर बच्चे क्यों नहीं करेंगे?

64

नवरात्र में खरीदे नारियल बार-बार खराब निकले — इसका क्या अर्थ है?

देव योग हो सकता है, या बस पुराना नारियल

· 46:55–47:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं, यह बचपन की बात है, और उस समय परिस्थितियाँ क्या थीं यह अब नहीं बताया जा सकता। ऐसा देव योग से भी हो सकता है। अगर नारियल पुराना है तो भी खराब निकल सकता है। और अगर आप उसे घर लाकर तोड़ रहे हैं, तो उससे भी कुछ दिक्कत हो सकती है।

65

कैसे पता करें कि घर के मंदिर का भोग भूत-प्रेत तो नहीं ले रहे?

जहाँ देवता भोग लेते हैं वह मंदिर भव्य दिखता है; देव दोष उसे सूना छोड़ देता है

· 47:35–49:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं, अपने पूजा मंदिर को देखकर बताइए। अगर देवी-देवता पूजा और भोग लेते हैं, तो भव्यता होगी — एक दीपक भी जलाइए तो मंदिर भव्य दिखेगा। जहाँ विचार उस तरह का हो गया है, या जहाँ देव दोष है, वहाँ आप कितना भी सजाइए और हज़ारों रुपये खर्च कीजिए, मंदिर में पूरा फीकापन लगेगा; बिल्कुल नहीं लगेगा कि वहाँ देव शक्तियाँ विराजमान हैं। देखकर सूनेपन का भाव आता है।

66

पंचगंध में कृष्ण पृष्ठ क्या है?

एक चीज़ के कई नाम, और गंध देवता और पुराण के अनुसार बदलते हैं

· 49:20–50:48 · Also a question

चंदन, कुमकुम, कृष्ण पृष्ठ, कपूर — शिवलिंग का लेपन इन पंचगंधों से किया जाता है। कृष्ण पृष्ठ किसे कहते हैं, इस पर वक्ता कहते हैं कि एक ही चीज़ के अलग-अलग नाम होते हैं; अगर यह पंचगंध के संदर्भ में कहा जा रहा है, तो देखना होगा कि आपने इसे कहाँ पढ़ा है। जैसे देवताओं का अष्टगंध अलग है और देवियों का अष्टगंध अलग, वैसे ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के त्रिगंध और पंचगंध भी अलग-अलग हैं; और इससे भी बड़ी बात, पुराणों के अनुसार देखें तो हर पुराण में इसकी कोई न कोई एक चीज़ बदल जाती है। इसलिए बिना देखे, वे कहते हैं, बताना उनके लिए थोड़ा कठिन होगा।

67

शीतला माता की सात बहनें कौन हैं?

शीतला माता, सायर शीतला, फूलमती, अंगार, पनेसा

· 50:49–51:19 · Also a question

सात बहनों के साथ दो और के बारे में पूछे जाने पर — जिससे नौ हो जाएँगी — वक्ता सात बहनों के नाम बताते हैं: शीतला माता, सायर शीतला, फूलमती, अंगार, पनेसा और ये। अगर इनके अलावा दो और हैं, तो सामान्य रूप से ऐसा नहीं है, और प्रश्नकर्ता किसी खास क्षेत्र की बात कर रहा होगा।

68

पीपल पर कौन सी शक्ति बैठती है जिसे हटाने से हनुमान जी के साधक ने भी मना कर दिया?

पीपल पर ज़्यादातर ब्रह्म होता है, और वह भी खूनी ब्रह्म

· 51:20–51:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं, अगर पीपल के पेड़ से हटाना था और वह नहीं हटा, तो इसके बहुत से कारण हो सकते हैं; और रही शक्ति की बात, तो पीपल पर ज़्यादातर ब्रह्म होता है। वह खूनी ब्रह्म होगा — किसी ने लाकर बिठाया हो, या अपने आप हो — और उसे हटाने में बहुत ही बड़ा जोखिम है।

69

क्या आवरण पूजा में चावल की जगह तिल का प्रयोग हो सकता है?

चावल चावल ही रहेगा; तिल तर्पण का है, अर्चन का नहीं

· 51:48–52:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं, चावल की जगह तिल का प्रयोग क्यों करेंगे — चावल की जगह चावल ही लगेगा, तिल नहीं। दूसरी सामग्री के लिए चाहें तो फूल ले सकते हैं, पर तिल का इस तरह प्रयोग नहीं करना चाहिए। तिल का प्रयोग तर्पण के समय कर सकते हैं — जब आप यंत्र पर तर्पण कर रहे हों — अर्चन के समय नहीं।

70

माता काली का विग्रह जल जाए तो क्या करना चाहिए?

नौ दिन अभिषेक, क्षान्तिरूपेण श्लोक का 108 जप, और जीव सेवा

· 52:21–53:48 · Also a question

वक्ता कहते हैं, विग्रह आपकी अपनी लापरवाही से जला होगा। सबसे पहले कम से कम नौ दिन लगातार माता का अभिषेक कीजिए — पंचगव्य से, पंचामृत से और शुद्ध गंगाजल से, रोज़, नौ दिन बिना रुके, आज से या कल से शुरू करके। नौ दिन रोज़ पूरे मंत्र "या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥" का 108 जप कीजिए। साथ में जीव सेवा ज़रूर हो — गाय, कौआ, कुत्ता, किसी को भी खिलाइए; आपके पेट में जाने से पहले उनके पेट में जाए — और बार-बार क्षमा माँगने का भाव रखिए: हे भगवती, जाने-अनजाने हुए अपराध को क्षमा करो। अंतिम दिन अपनी शक्ति के अनुसार अन्नदान कीजिए।

71

दुर्गा उपासना के भीतर उपासना का क्रम क्या है?

गणपति, फिर बटुक भैरव, फिर हनुमान, फिर नरसिंह

· 53:49–55:01 · Also a question

दुर्गा उपासना में सबसे पहले गणपति हैं; फिर बटुक भैरव; फिर हनुमान; और फिर अंत में भगवान नरसिंह। और भगवान नरसिंह की सीधी उपासना बहुत कम लोग करते हैं — कहीं सीधे ढंग से कोई बताएगा कि दुर्गा उपासना में चार वीरों में नरसिंह वीर की पूजा भी होती है। वक्ता कहते हैं, यह सब उस तरह करने की ज़रूरत नहीं; लोग इतना करना चाहेंगे भी नहीं। जिन्हें ज़रूरत है वही करें — जो चाहते हैं कि यहाँ जो है वह पूर्ण हो, जब उस तरह का समर्पण हो, और जब भगवती क्षमता दें।

72

तंत्रोक्त विधि में पंचांग सेवन का क्रम क्या है?

पहले कवच सिद्ध करें; फिर शतनाम, हृदय, सहस्रनाम, कवच

· 55:02–55:59 · Also a question

जिस इष्ट की साधना आप कर रहे हैं, पंचांग सेवन की जितनी चीज़ें हैं — कवच, सहस्रनाम, शतनाम, स्तोत्र, स्तुति — उनमें सबसे पहले कवच सिद्ध करना चाहिए। सिद्ध करने के बाद रोज़ पंचांग करना और भी अच्छा होगा। पहले शतनाम करना चाहिए, फिर हृदय, फिर सहस्रनाम, फिर कवच, और उसके बाद ही उनके नाम का जो मंत्र जप और स्तुति करनी हो।

73

पाँचवें अंग का क्रमिक पुरश्चरण कितना ज़रूरी है?

गुरु के बिना हृदय का पुरश्चरण हार्ट अटैक तक ला सकता है

· 56:00–56:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं, ज़रूरी है, पर अगर पुरश्चरण करने जाएँ तो जानिए कि यह चीज़ गुरु कृपा से ही संभव होती है। कवच तो आप कर लेंगे, पर हृदय का पुरश्चरण करने में हार्ट अटैक तक की संभावना बन जाती है। यह अतिशयोक्ति नहीं: ऊर्जा बहुत ज़्यादा हो जाती है। गुरु कृपा और सही मार्गदर्शन के बिना ऊर्जा इतनी बढ़ेगी कि आपको समझ नहीं आएगा कि दिल कहाँ से धड़क रहा है — दिल में चौबीस घंटे धड़कन बनी रहेगी।

74

पुरश्चरण ठीक से हो, इसके लिए गुरु को क्या देना होता है?

अर्पण, तर्पण, मंडल, यंत्र और सही मुद्रा

· 56:30–57:16 · Also a question

ठीक वहीं गुरु की ज़रूरत होती है कि उस तरह आपका मार्गदर्शन करें — अर्पण, तर्पण, मंडल और यंत्र सिखाएँ, इन सब चीज़ों का विधिवत ज्ञान दें, और बताएँ कि हृदय का जप किस मुद्रा में करना है। तभी बात ठीक से होगी। अगर बिना मुद्रा जप करेंगे, तो ऊर्जा इतनी बनेगी कि जहाँ पुरश्चरण में मान लीजिए 11,000 जप चाहिए, वहाँ ग्यारह जप में आपकी हालत खराब हो जाएगी। और शताक्षरी माला और सहस्राक्षरी माला तो बिल्कुल अलग बात है — उन्हें छोड़िए; बहुत से हृदयों में पहले से शताक्षरी होती है, तो ऊर्जा और बढ़ जाती है।

75

हनुमान पंजर, हनुमान बड़वानल और तंत्रोक्त अनुष्ठान अभी बताए जाने हैं

हनुमान पंजर, हनुमान बड़वानल और तंत्रोक्त अनुष्ठान

· 57:17–57:56

हनुमान जी की पूरी पूजा विधि पूछे जाने पर वक्ता बताने को राज़ी होते हैं, और जल्दी — हनुमान पंजर, हनुमान बड़वानल, तंत्रोक्त अनुष्ठान।

हनुमान जी की पूरी, संपूर्ण पूजा विधि पूछे जाने पर वक्ता मान जाते हैं: ठीक है, वे बताएँगे, और जल्दी बताएँगे। हनुमान पंजर, हनुमान बड़वानल, तंत्रोक्त अनुष्ठान।

76

सिर कटवा या मुंडी कटवा बाबा कौन होते हैं?

गाँव के थान की पूजा, ब्राह्मण की हत्या, और डाकुओं की तंत्रोक्त साधनाएँ

· 57:57–58:55 · Also a question

सिर कटवा बाबा, यानी मुंडी कटवा बाबा, गाँवों में थान पर, बाग में पूजे जाते हैं। आज के लोगों को बड़ों से ज़्यादा जानकारी नहीं मिली होगी, इसलिए वे उसी नाम से रह गए हैं। मुख्य रूप से यह वहाँ होता है जहाँ किसी ब्राह्मण की हत्या हुई हो। और मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाकों में — हालाँकि ऐसा हर जगह हुआ — एक समय ऐसा भी था जब शादियों के समय डाकू हमला करते थे; डाकू किसी एक समुदाय के नहीं, हर तरह के होते थे, और अगर किसी लड़ाई में किसी का सिर कट गया, तो वह भी ऐसी चीज़ बन गया, क्योंकि डाकू कभी बिना पूजा-पाठ और तैयारी के नहीं जाते थे, और तंत्रोक्त साधनाएँ करते थे।

77

गोरखपुर की तरकुलहा देवी इसका सकारात्मक स्वरूप हैं — उनके भक्तों को फाँसी नहीं लग सकी

गोरखपुर की तरकुलहा देवी और वे भक्त जिन्हें फाँसी नहीं लगी

· 58:56–1:00:01

वक्ता गोरखपुर की तरकुलहा देवी — वहाँ की भगवती — को इसका सकारात्मक स्वरूप बताते हैं। वे कहते हैं, उनके भक्तों ने इतने अंग्रेज़ों के सिर काटकर वहाँ चढ़ाए कि एक कुआँ भर गया। और भगवती ने उन्हें ऐसी सिद्धि दी कि जब अंग्रेज़ों ने उन्हें फाँसी दी तो वे मरे ही नहीं: कितनी भी बार लटकाया गया, वे जीवित रहे, और उतारे जाने पर भी जीवित थे, और उन्हें मृत्यु प्राप्त ही नहीं हुई।

78

घर में साधना कक्ष बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

देवताओं का स्थान, पूर्व मुख, और हवन के धुएँ के लिए खिड़की

· 1:00:02–1:00:44 · Also a question

सबसे अच्छा ध्यान यह रखना है कि देवी-देवताओं का स्थान सही जगह पर हो। जब आप साधना करने बैठें, अगर आपका मुख पूर्व की ओर पड़े तो सबसे अच्छा। प्रतिमाओं और श्री विग्रहों को जिस क्रम में रखना है उसके अनुसार पहले से स्थान बनाइए। और अगर उस जगह हवन करना है, तो खिड़की की व्यवस्था हो, ताकि धुआँ पूरी तरह बाहर जाए।

79

क्या घर की हनुमान मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाया जा सकता है?

घर में भी, कोई दिक्कत नहीं

· 1:00:45–1:00:56 · Also a question

पूछे जाने पर कि क्या घर में रखी हनुमान मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाया जा सकता है, या यह केवल मंदिर की मूर्ति पर करना चाहिए, वक्ता कहते हैं: घर में भी चढ़ा सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं।

एक श्रोता पूछता है कि क्या घर में रखी हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाया जा सकता है, या यह केवल मंदिर की मूर्ति पर ही करना चाहिए। घर में भी चढ़ा सकते हैं, वक्ता उत्तर देते हैं। कोई दिक्कत नहीं।

80

क्या वर्क लगी मिठाई खाने पर घर की रोक सही है?

नहीं खानी चाहिए, और खाने वाले को दोष लगता है

· 1:00:57–1:01:19 · Also a question

एक श्रोता कहता है कि उसके घर में वर्क वाली मिठाई खाने पर रोक है। बहुत सही बात, वक्ता उत्तर देते हैं — इसे खाना ही नहीं चाहिए। वर्क इस गलत तरीके से बन रहा है, बार-बार चमड़े की थैली में रखा जाता है; और उसके बाद जो इसे खाएगा, क्या उसे दोष नहीं लगेगा? वह भी गौ मांस में, भैंस के मांस में, भेड़ के मांस में।

81

अपराजिता और कुंजिका स्तोत्र गुप्त क्यों रखे जाते हैं?

क्षमता सबमें नहीं, और बीज मंत्रों का उच्चारण सब नहीं कर सकते

· 1:01:20–1:01:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं, केवल अपराजिता स्तोत्र ही नहीं, कुंजिका स्तोत्र भी, और बहुत सी शताक्षरी और बहुत से हृदय — इनमें से किसी पर वे वीडियो नहीं बनाते, सबको गुप्त रखते हैं। इसके पीछे कारण यह है कि वह काम करने की क्षमता सबमें नहीं होती। अगर वे पूरी विधि बताएँ, तो लोग वैसा नहीं करेंगे; आधा-अधूरा करेंगे और फिर परेशान होंगे — और वे नहीं चाहते कि उनके कारण कोई परेशान हो, किसी को भटकाना नहीं चाहते। अपराजिता में इतने बीज मंत्र हैं कि उनका उच्चारण सबसे नहीं निकलेगा।

82

अगर अपराजिता की साधना की जाए, तो घर के अपने देवताओं का क्या होता है?

ज़्यादातर घरों के देवता स्थापित पूर्वज हैं, ऊँची शक्तियाँ नहीं

· 1:02:00–1:02:14 · Also a question

अपराजिता करने के बाद उनके घर के देवताओं पर संकट आएगा — क्योंकि आजकल सबके घर के देवी-देवता ऊँचे स्तर की स्थापित शक्तियाँ नहीं हैं। बहुत से लोगों ने कुल के किसी पूर्वज को पितृ के रूप में घर में स्थापित किया है, देवता के रूप में बिठाया है; किसी घर में मरी माता पूजी जाती हैं, किसी में कोई और। अब अगर उनसे अपराजिता साधना करवाइए, तो व्यक्ति बस बैठकर रोएगा। इसीलिए वे ये सब बातें नहीं बता सकते।

83

कुंजिका के साथ पचास शक्तियाँ आती हैं, और शुरुआती आनंद के बाद विपत्ति आती है

पचास शक्तियाँ आती हैं, और शुरुआती सुख के बाद विपत्ति

· 1:02:15–1:03:06

वक्ता कहते हैं, लोग कुंजिका करवाएँगे। कुंजिका करने से पचास शक्तियाँ आती हैं। शुरू में बहुत आनंद आएगा। कुछ दिन बाद घर में ऐसी विपत्तियाँ पड़ने लगेंगी, परेशानी इतनी बढ़ेगी, कि बाद में पूछेंगे कि हमसे क्या गलती हुई। और जो कहते हैं कि उन्हें कुछ नहीं हुआ, इतना किया, वे अपनी पूरी बात नहीं बताएँगे — उनके घर में साधना कैसे होती है, और कौन वहाँ साधनाएँ करता है, उनके घर में कौन सी देवी पूजी जाती हैं, क्या भोग देते हैं। बस कहेंगे कि दो साल से कर रहे हैं और कुछ नहीं हुआ। करने से पहले पूरा विषय समझना चाहिए।

84

घर के मंदिर में पूजा ले रहे भूत-प्रेत को कैसे हटाया जाए?

उग्र देवताओं से जुड़ा हवन रूपी प्रयोग — और अपामार्ग की समिधा

· 1:03:07–1:03:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं, जब भी ऐसा लगे — और उन्होंने दो वीडियो में स्पष्ट किया है कि भूत-प्रेत कैसे आते हैं और आप कैसे जान सकते हैं कि प्रेत-पिशाच ले रहे हैं — तो हमारी सनातन संस्कृति के उग्र देवताओं से जुड़ा हवन रूपी प्रयोग खास तौर पर करना चाहिए। और हवन रूपी प्रयोग में भी यह बात है कि किस तरह की चीज़ों का प्रयोग हो। जहाँ घर में विचार वाली परेशानी हो, वहाँ हवन में सबसे बड़ी चीज़ जो लगनी चाहिए वह अपामार्ग की लकड़ी है — अपामार्ग की समिधा।

85

अस्त्र मंत्रों में अपामार्ग का प्रयोग किसलिए होता है?

अभिचार नाश के लिए सबसे समर्थ वनस्पति

· 1:04:00–1:04:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं, यह जानिए: अभिचार के नाश के लिए जितने भी अस्त्र मंत्र हैं, जब भी उनका हवन होता है — कुछ नष्ट करने के लिए, किसी अभिचार को नष्ट करने के लिए — यह सामान्यतः घर में नहीं होता, इसकी अपनी विधि है; और इसमें अपामार्ग की समिधा अत्यंत आवश्यक वस्तु है। जब वे लोगों को अपामार्ग के बारे में बताते हैं तो लोग सोचते हैं यह कुछ खास नहीं; वे बात समझ नहीं रहे। पर यह बहुत बड़ी चीज़ है: अगर अभिचार नाश में कोई वनस्पति सबसे समर्थ है, तो वह अपामार्ग की लकड़ी है।

86

एक दिन किया और अगले दिन संदेश कि कुछ नहीं हुआ

एक दिन किया और अगले दिन संदेश कि कुछ नहीं हुआ

· 1:04:38–1:05:19

वक्ता कहते हैं, आप लोगों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि एक दिन करते हैं और अगले दिन संदेश आने लगते हैं — कुछ नहीं हुआ, परेशानी बढ़ गई। यह रोना छोड़िए। अगर आपके पास बहुत पैसा है तो किसी व्यक्ति को, किसी साधक को, किसी अच्छे आदमी को घर बुलाकर करवाइए। अगर सामर्थ्य नहीं है, तो खुद कीजिए। क्या होगा — लगता है मर जाएँगे? तो अगर भगवान का नाम लेते हुए मरें, तो उसमें भी कोई दिक्कत नहीं। यही डर जिसमें आप हैं, आपको मारता है; आप भगवान का नाम लेने से भी डरते हैं।

87

अपराजिता ठीक से की जाए तो क्या कर सकती है, और गलत की जाए तो क्या?

महा वैष्णवी महाविद्या — और गलती करने वाले के लिए घातक

· 1:05:20–1:06:23 · Also a question

अपराजिता महा वैष्णवी महाविद्याओं की श्रेणी में आती हैं। अगर उनका पाठ ठीक से हो, तो भूत-प्रेत ने जो भी किया है उसकी स्थिति तक बिगड़ जाएगी; और भूत-प्रेत के साथ वहाँ क्या नहीं होगा — ऐसी पिटाई होगी कि वे जीवन में उस घर के पास नहीं आएँगे। पर अगर आप वही अपराजिता पाठ में गलत करें, उच्चारण में, मंत्रों आदि में गलती करें, तो वही अपराजिता आपके लिए घातक बन जाती हैं।

88

क्या महाविद्याएँ वह पराशक्ति हैं जिन्हें किसी आलंबन की ज़रूरत नहीं?

आठ, दस और अठारह भुजाएँ भूलिए — क्या लोक देवता के लिए भी सामर्थ्य है?

· 1:06:24–1:07:27 · Also a question

एक श्रोता पूछता है कि क्या महाविद्याएँ वह पराशक्ति हैं जिन्हें आलंबन नहीं चाहिए, और अठारह भुजा, दस भुजा और आठ भुजा वाली देवियों के बारे में; वक्ता बस इतना कहते हैं: आपमें और मुझमें कितना सामर्थ्य है? क्या आपमें एक साधारण लोक देवी-देवता को भी प्रसन्न करने का सामर्थ्य है? आठ, अठारह, दस भुजाओं को अभी भूल जाइए। उनकी सेवा-पूजा से क्या मिलेगा, क्या हो सकता है और क्या नहीं, क्या बातें हैं — आप जिस स्थिति में हैं, उसमें देवता बदलने की जगह जिन पर आपका ध्यान है उनकी सेवा-पूजा ठीक से कीजिए, और साधना अच्छे से कीजिए। सारा आधार आपको पहले ही दिया जा चुका है; आप चिंतित क्यों हैं?

89

साधक को अपनी साधना के भीतर मंत्र कैसे मिलता है?

अष्टमी से चतुर्दशी की भैरव साधना में मिला मंत्र

· 1:07:28–1:08:36 · Also a question

वक्ता एक श्रोता का अनुभव बताते हैं: सतपाल जी का एक मित्र, जो खुद तंत्र का अच्छा जानकार है, साधनाएँ करता है और भगतवाल का साधक भी है, अष्टमी से चतुर्दशी तक की बताई गई भैरव साधना कर रहा था; साधना के भीतर उसे एक मंत्र मिला, इस आदेश के साथ कि इसी मंत्र का जप करना है। उसने वॉइस रिकॉर्डिंग भेजी, और वक्ता ने उसे एक वीडियो लिंक भेजा जिसमें मंत्र और विधि के साथ पूरा उत्तर है। जब आप सबसे उग्र साधना करते हैं, या कोई रक्षा साधना, और उस स्थान के देवी-देवता प्रसन्न हो जाते हैं, तो आपको क्या चाहिए? आप निकलेंगे कैसे? वे खुद आपको देंगे — स्वप्न के ज़रिए, या ध्यान में, किसी न किसी माध्यम से वह मंत्र सुना देंगे।

90

अगर बाद की पीढ़ियाँ किसी महाशक्ति की सेवा भूल जाएँ, तो क्या पूरे कुल को उनका कोप झेलना पड़ता है?

महाशक्ति परेशान नहीं करतीं — उनके गण करते हैं

· 1:08:37–1:09:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं, इसमें सच्चाई है, पर एक भेद के साथ। अगर आप महाशक्ति की सेवा नहीं करते, तो महाशक्ति आपको परेशान करने नहीं आने वालीं। महाशक्ति यानी परम सत्ता के भीतर की प्रमुख शक्तियाँ; वे परेशान नहीं करेंगी। हम उनके भीतर हैं और वे हमारे भीतर; उन्हीं से हम चल रहे हैं। पर उनके गण परेशान करते हैं — लोक गण खास तौर पर परेशान करते हैं। वे प्रश्नकर्ता को इसी चैनल पर भगतवाल नाम से बनी प्लेलिस्ट की ओर भेजते हैं, जो पूरे प्रश्न का क्रम से उत्तर देती है: अगर किसी पर कृपा हो और बाद के लोग वह न करें तो क्या होता है, और पहले वाले भगत के मरने पर क्या करना चाहिए।

91

क्या रत्न पहनने से पहले उस पर जप ज़रूरी है?

कोई भी रत्न पहनने से पहले बिल्कुल ज़रूरी

· 1:09:40–1:10:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं, बिल्कुल ज़रूरी है। कोई भी रत्न पहनने से पहले यह बिल्कुल ज़रूरी है।

पूछे जाने पर कि क्या ग्रहों के रत्न पहनने से पहले उन पर जप ज़रूरी है, वक्ता उत्तर देते हैं: बिल्कुल ज़रूरी है। कोई भी रत्न पहनने से पहले यह बिल्कुल ज़रूरी है।

92

रावण के परिवार में से हनुमान जी ने किस-किस को हराया?

अक्षय कुमार मारा गया, मेघनाद, कुंभकर्ण और रावण पिटे

· 1:10:25–1:10:45 · Also a question

उन्होंने अक्षय कुमार को सीधे मार डाला। मेघनाद को भी पीटा था। कुंभकर्ण की भी पिटाई की। और रावण पर भी एक घूँसा जमाया — यानी उस पूरे कुल को पीटा।

हनुमान जी ने अक्षय कुमार को सीधे मार डाला, वक्ता कहते हैं। मेघनाद को भी पीटा था। कुंभकर्ण की भी पिटाई की। और रावण पर भी एक घूँसा जमाया। यानी इस पूरे कुल को पीटा।

93

रामचरितमानस मेघनाद के हनुमान जी से बचने के बारे में क्या कहता है?

बार-बार पचार हनुमाना, निकट न आव मरमू सो जाना

· 1:10:46–1:11:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं, रामचरितमानस में वर्णन है कि हनुमान जी के घूँसे का मर्म जान लेने के बाद मेघनाद हमेशा उनके सामने खुद को हारा हुआ मानता था; हनुमान जी के बार-बार ललकारने पर भी वह उनके पास नहीं जाता था, और बड़ी सावधानी से उनसे दूर रहता था। पंक्ति है: "बार-बार पचार हनुमाना, निकट न आव मरमू सो जाना" — हनुमान जी उसे बार-बार आने की ललकार दे रहे हैं, और मेघनाद पास नहीं जा रहा।

94

निकुंभिला सप्तशती क्या है?

शूलेन पाहि नो देवि के संपुट वाली सप्तशती

· 1:12:00–1:12:35 · Also a question

यह वही मेघनाद है जिसने देवी निकुंभिला की कृपा से इंद्र को बाँधा। जो सिद्ध कुंजिका और निकुंभिला शक्ति से जुड़ी सप्तशती की विधि पढ़ना चाहते हैं: "शूलेन पाहि नो देवि" के संपुट के साथ इसे निकुंभिला सप्तशती कहा जाता है। वक्ता कहते हैं, सोचिए — उसे वह सिद्धि थी, और ऐसी सिद्धि कि उसने इंद्र को बाँध लिया; और वह हनुमान जी से बचता फिरता है।

95

रत्न पहनने से पहले क्या जाँचना चाहिए?

ग्रह अस्त न हो, और वज़न सवा के हिसाब से

· 1:12:36–1:14:02 · Also a question

शुक्र का उदाहरण लीजिए: अगर आप शुक्र का रत्न, हीरा — या उसका उपरत्न, ज़िरकॉन — पहनने वाले हैं, तो सबसे पहले ध्यान दीजिए कि शुक्र अस्त न हो। पंडित जी से पूछिए कि क्या शुक्र अस्त चल रहा है; अगर अस्त है, तो पहनने का कोई असर नहीं होगा। शुक्र उदित होना चाहिए। और अपने वज़न के अनुसार: अगर आप 70 किलो हैं तो सवा सात रत्ती या उससे ज़्यादा; अगर सवा में, सवैया में बनवाना है, तो सवा सात रत्ती, सवा छह रत्ती — क्योंकि हमारे यहाँ सवा शुभ माना जाता है।

96

शुक्र का रत्न किस दिन और किस पक्ष में सिद्ध किया जाए?

दानव गुरु के लिए कृष्ण पक्ष का शुक्रवार, देव गुरु के लिए शुक्ल पक्ष

· 1:14:03–1:14:50 · Also a question

शुक्रवार को, और सबसे पहले कृष्ण पक्ष का शुक्रवार। अगर देवता से जुड़ा ग्रह होता तो अलग होता: बृहस्पति देव गुरु हैं, उनका शुक्ल पक्ष में पड़ता है; शुक्राचार्य दानव गुरु हैं, उनका कृष्ण पक्ष में पड़ता है। कृष्ण पक्ष के शुक्रवार को, ठीक उस समय जब शुक्र उदित हो, पंचगव्य और पंचामृत से विधिवत उनका अभिषेक कीजिए — पूरा अवतरण संभव नहीं होगा, पर कम से कम अभिषेक कीजिए — और करके फिर शुद्ध गंगाजल से अभिषेक कीजिए। चौघड़िया पूजन के समय नहीं, पहनने के समय देखना है।

97

शुक्र के रत्न की पूरी तंत्रोक्त विधि क्या है, और जप संख्या कितनी?

शुक्र यंत्र, कलश स्थान पर अंगूठी, और कलियुग में चौगुना जप

· 1:14:51–1:15:06 · Also a question

अगर पूरी तंत्रोक्त विधि में जाएँ: शुक्र का तंत्रोक्त यंत्र बनाइए, और मूल में, जहाँ शुक्र के नाम का कलश स्थापित है, वहाँ अंगूठी स्थापित कीजिए; और फिर शुक्र का जितना जप है, कलियुग में उसका चार गुना जप करना चाहिए। इतना विस्तार न भी करें, तो कम से कम 8,000 या 9,000 जप ज़रूर करना चाहिए; शुक्र के लिए कम से कम 6,000 जप ज़रूर करना चाहिए।

98

अगर वह जप संभव न हो तो कम से कम क्या करना चाहिए?

नवग्रह स्तोत्र का पौराणिक मंत्र, एक सप्ताह रोज़ 108 बार

· 1:15:07–1:15:57 · Also a question

तो पौराणिक मंत्र लीजिए — नवग्रह स्तोत्र वाला, जिसकी हम स्तुति करते हैं — और एक सप्ताह रोज़ कम से कम 108 बार उसका जप कीजिए। और अगले सप्ताह भी देखना है कि पहनने के समय शुक्रवार कृष्ण पक्ष में पड़ रहा हो, और चौघड़िया शुभ हो; तब आप सुबह पहन सकते हैं। नहीं तो शाम को भी, जब शुक्र उदित हो — अगर वह एक तारा दिख रहा हो तो और भी अच्छा। यंत्र का काम भले न हो, पर पत्थर को सामने रखकर जप ज़रूर करना चाहिए।

99

क्या सात्विक अनुष्ठान के दौरान घर के खाने में प्याज़-लहसुन चल सकता है?

नहीं चलता — सब्ज़ी छोड़िए और दूध-रोटी खाइए

· 1:15:58–1:16:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं, नहीं चलता। पर अगर घर के लोग नहीं मान रहे, तो एक काम कर सकते हैं: जितने दिन साधना चले, सब्ज़ी छोड़ दीजिए। दूध और रोटी खाइए। घर वाले रोटी तो बनाएँगे ही; दूध, गाय का दूध लाइए, और उसके साथ दूध-रोटी लीजिए।

100

पूजा या जप के लिए बैठते ही रोना क्यों आता है?

यह आपका भाव और उनकी कृपा है

· 1:16:38–1:17:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं, ये आपके भाव हैं। अगर आप अपने आराध्य के प्रति समर्पित हैं, तो आँसू आएँगे। यह अच्छी बात है। इसे इस तरह कहने की ज़रूरत नहीं कि रोना क्यों आता है — यह उनकी कृपा है कि आप उनके सामने रोते हैं। जहाँ समर्पण का भाव हो, वहाँ आँसू बार-बार आएँगे। नहीं तो यहाँ बड़े-बड़े लोग साधना करते हैं और फिर भी अपने इष्ट और आराध्य को देखकर कभी आँसू नहीं आते।

101

क्या दीपक के लिए कोल्ड-प्रेस्ड तिल का तेल ठीक है?

वे यह शब्द नहीं जानते — सामने निकला तेल, और कोई केमिकल नहीं

· 1:17:22–1:17:59 · Also a question

वक्ता साफ कहते हैं कि वे नहीं जानते कोल्ड-प्रेस्ड क्या है, तो बताएँ कैसे। वे इतना जानते हैं कि तेल निकालने की एक मशीन होती है और उसे सामने निकलवाकर लिया जाता है; उनके साधक मित्र माँगने पर उन्हें निकाला हुआ तेल भेज देते हैं। कोल्ड-प्रेस्ड और हॉट-प्रेस्ड क्या हैं, वे नहीं जानते — वे इतने पढ़े-लिखे नहीं। वे श्रोता से कहते हैं कि एक बार प्रक्रिया बताइए ताकि वे देख सकें; बस किसी केमिकल का प्रयोग नहीं होना चाहिए।

102

क्या भैरव जी के त्रिशूल पर मिट्टी का नींबू लगाया जा सकता है?

असली नींबू लगाइए, हफ्ते में एक बार बदलिए — या गेंदा

· 1:18:00–1:18:45 · Also a question

वक्ता इसे मना करते हैं। मिट्टी का नींबू कहाँ से, वे पूछते हैं — असली चढ़ाइए; क्या नींबू की कोई कमी है? नींबू रोज़-रोज़ नहीं बदलना है; हफ्ते में एक दिन कम से कम एक नींबू उसमें लगाइए। और अगर नींबू न मिले, तो नींबू के अभाव में कम से कम गेंदे का फूल लगाइए, जो ज़रूर मिल जाएगा।

103

स्त्री दोष क्या है?

पिछले जन्म में सताई गई स्त्री का शाप

· 1:18:46–1:19:21 · Also a question

स्त्री दोष वह है जो कुंडली में तब बनता है जब, कहा जाता है, पिछले जन्म में हमने अपनी पत्नी, अपनी माँ, अपनी बहन को दुख दिया; उनके दिल से जो आह निकलती है, दुखी स्त्री जो शाप देती है — वही अगले जन्म में फल देता है।

पूछे जाने पर कि स्त्री दोष क्या है, वक्ता कहते हैं कि अगर कुंडली में बन रहा है तो वह स्त्री दोष है। कहा जाता है कि अगर पिछले जन्म में हमने अपनी पत्नी को, अपनी माँ को, अपनी बहन को दुख दिया — तो उनके दिल से जो आह निकलती है, दुखी स्त्री जो शाप देती है, वही अगले जन्म में फलित होता है।

104

पंचमुखी हनुमान कवच साधना और हवन से पहले क्या जानना चाहिए?

बहुत उग्र मूल मंत्र, और उसके बाद आने वाली परीक्षा

· 1:19:22–1:20:01 · Also a question

वक्ता साफ कहते हैं: मंत्र बहुत उग्र है। और जितनी उग्रता है, उतनी परीक्षा की भी अपेक्षा रखिए। सबसे बड़ी बात यह है कि लोग डर जाते हैं। वे साधना माँगते हैं और वक्ता डाल देते हैं; बाद में ऐसे अनुभव आते हैं कि वे खुद हँसते हैं। साधना के पहले दिन वे डर जाएँगे — पर डरना नहीं है। पंचमुखी हनुमान का मूल मंत्र अत्यंत उग्र है।

105

पंचमुखी हनुमान की पूजा में गलती हो जाए तो क्या होता है?

वीर गण नींद में लात मारने में देर नहीं करते

· 1:20:02–1:20:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं, यह भी जानिए: हनुमान जी मारते भी हैं। अगर आप पंचमुखी हनुमान की पूजा में ज़रा भी गलती करते हैं, चाहे आप केवल कवच साधना कर रहे हों, तो पंचमुखी हनुमान के वीर गण नींद में आप पर लात-घूँसे बरसाने में देर नहीं करते। और फिर डर के मारे अगले दिन सोचते हैं कि घर में प्रेत है, उसने मुझे मारा, ऐसा हो गया — यह सारा डर नहीं खाना है।

106

पंचमुखी हनुमान के जप के साथ क्या करना चाहिए?

पहले राम रक्षा स्तोत्र सिद्ध करें, कम से कम 108 पाठ

· 1:20:26–1:20:47 · Also a question

साथ में राम नाम का जप या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करना होगा। पंचमुखी हनुमान के जप से पहले अगर आप राम रक्षा स्तोत्र सिद्ध कर लें तो अच्छा होगा — कम से कम 108 पाठ कीजिए। इससे बहुत मदद मिलेगी; ऊर्जा का स्तर बना रहेगा, संतुलन रहेगा, भले कोई गलती हो जाए।

दूसरी बात, वक्ता कहते हैं, यह है कि इसके साथ राम नाम का जप या रामरक्षा स्तोत्रम् का पाठ करना होगा। पंचमुखी हनुमान के जप से पहले अगर आप राम रक्षा स्तोत्र सिद्ध कर लें तो अच्छा होगा — उसके कम से कम 108 पाठ कीजिए। इससे बहुत मदद मिलेगी। ऊर्जा का स्तर बना रहेगा। संतुलन रहेगा — भले कोई गलती हो जाए।

107

जब पूजा बँधी हो, तो भगवान प्रार्थना कैसे सुनेंगे?

भगवान और देवता एक नहीं — देवता एक योनि है

· 1:20:48–1:21:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं, इस पर ध्यान दीजिए: भगवान और देवता में अंतर है। देवता एक योनि है, और भगवान परम महाशक्ति, परम सत्ता हैं। जैसे मनुष्य एक योनि है और पशु एक योनि है, वैसे ही देवता भी एक भोग योनि है। केवल मनुष्य कर्म योनि है: यहाँ आप जो कर्म करते हैं, और उसका जो फल आता है, वह तय करता है कि अगली कौन सी योनि मिलेगी। नीच कर्म कीजिए, गलत काम कीजिए, तो निचली योनियों में जाएँगे — पशु, पक्षी, जड़, चेतन; ऊँचे कर्म कीजिए तो यक्ष, किन्नर, गंधर्व, देवता में जाएँगे। ये योनियाँ हैं; भगवान नहीं। भगवान भगवान हैं — आदि, अविनाशी, जिनका न कोई रूप है न आकार, हालाँकि वे हमारे लिए साकार रूप में आए।

108

वर्तमान दुख के पीछे किसका कर्म है, और किस उम्र से गिना जाता है?

बारह वर्ष तक कुछ दर्ज नहीं होता — सिलेबस से बाहर

· 1:21:57–1:22:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं, प्रश्न उस जगह गलत है — वह भगवान तक पहुँच रहा है। पर अभी हम जो भोग रहे हैं, जो दुख मिल रहा है, उसके पीछे हमारे पहले के कर्म हैं। और पहले के कर्म का मतलब ज़रूरी नहीं कि पाँच साल पहले या बचपन में किया हुआ। बारह वर्ष की उम्र तक हम जो भी करते हैं उसका कोई हिसाब ही नहीं रखा जाता — वह हिसाब से बाहर की चीज़ है, सिलेबस से बाहर। भगवान चित्रगुप्त उसे कहीं नहीं लिखते; कहते हैं, वह बच्चा है, बालक है। इसके पीछे माण्डव्य ऋषि की कथा है। पर तेरह वर्ष की उम्र से, बाकी जीवन में हम जो अच्छे-बुरे काम करते हैं, उनका हिसाब रखा जाता है।

109

जब हमें अपना कोई पाप याद नहीं, तब भी दुख क्यों आता है?

विशेष समय में कई गुना हुआ पुण्य भी भोगना पड़ता है, और पाप अपनी बारी से पकता है

· 1:22:46–1:23:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं, इसे ऐसे समझिए। आप ग्रहण के समय जप करते हैं; कहा जाता है कि ग्रहण के समय किसी भी मंत्र का जप हज़ार गुना फल देता है। इसी तरह, किसी भी जन्म में और किसी भी समय, जब आप किसी विशेष समय पर कोई पुण्य काम करते हैं — तीर्थ यात्रा में जप करना, ग्रहण के समय करना, नदी किनारे, एकलिंग शिवालय में — तो आपका पुण्य बहुत बढ़ जाता है। अब बढ़ गया, तो उसे भोगना भी पड़ता है। तो आपको मनुष्य योनि मिली, आपका पुण्य कर्म उदय में है, जीवन में सुख है। और आपने कभी पाप भी किया है। हम जो पहले करते हैं वह खत्म होता है, उसका पुण्य खत्म होता है; फिर कुछ समय पाप चलता है; वह खत्म होता है, फिर पुण्य चलता है। जब पाप उदय होता है, जब उसके फल के उदय का समय आता है, तभी जीवन में परेशानियाँ आती हैं।

110

इसका उत्तर गीता के चौथे से सातवें अध्याय में है, हिंदी में पढ़िए

गीता के चौथे से सातवें अध्याय, हिंदी में

· 1:24:00–1:24:35

वक्ता कहते हैं, आपके प्रश्न का उत्तर भगवद गीता में बहुत अच्छे से मिलेगा। गीता के कर्म योग और भक्ति योग, ये दो अध्याय एक बार पढ़िए; चौथे अध्याय से सातवें तक। ज्ञान योग, कर्म योग और भक्ति योग, ये तीन-चार चीज़ें हिंदी में पढ़िए — संस्कृत में मत जाइए; उन्होंने समझने के लिए पढ़ने को कहा है। आपके पूरे प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा।

111

क्या भगवान नहीं, बल्कि देवताओं तक पहुँचना रोका जा सकता है?

तंत्र विद्या से बँधा देवता अलग विषय है

· 1:24:36–1:24:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं, ऐसा कभी नहीं होता कि हम जो पूजन-पाठ करते हैं वह भगवान तक नहीं पहुँच रहा — सब चीज़ें उनकी दृष्टि में हैं। देवताओं तक नहीं पहुँच रहा, यह तंत्र का विषय है; देवता मदद करने में असमर्थ हो रहे हैं, कि उन्हें तंत्र विद्या से बाँध दिया गया है, यह अलग विषय है। भगवान तक बिल्कुल पहुँच रहा है, और उन्हें हमारे साथ जो हो रहा है और जो होगा, सबका ज्ञान है। और कृपा वही करते हैं, जब इसका भी समय आता है।

112

भगवान सुनते हैं या नहीं, यह पूछने की जगह क्या पूछना चाहिए?

पूछिए कि देवता पर लगा तंत्र बंधन कैसे टूटे

· 1:25:00–1:25:53 · Also a question

ऐसा नहीं कि दस दिन किया और परेशानी नहीं गई तो करना छोड़ देंगे। कहीं न कहीं हमारे पाप कर्म उदय हुए हैं और हम उनका फल भोग रहे हैं, और उसका भी एक समय है; जब वह भी खत्म होता है, हमारे पुण्य उदय होते हैं और हम आगे बढ़ते हैं — और उसके लिए भी कृपा भगवान ही करते हैं। तो यह मत सोचिए कि भगवान तक नहीं पहुँचेगा। इसकी जगह पूछिए: देवता पर तंत्र में बंधन है, वह कैसे टूटेगा, कैसे हटाया जाए — वह वे बताएँगे।

113

जब शुद्ध मिठाई न मिले तो क्या चढ़ाया जा सकता है?

काजू, बादाम और किशमिश

· 1:25:54–1:26:33 · Also a question

एक श्रोता कहता है कि शुद्ध मिठाई नहीं मिलती, वह अमूल की कोई मिठाई खरीदता है, और भोग में ज़्यादातर काजू, बादाम और किशमिश चढ़ाता है। यह बहुत अच्छी बात है, वक्ता उत्तर देते हैं। और यह बताए जाने पर कि यह सब — पैकेट में बिस्किट, और वर्क — मंदिरों में ही चल रहा है, वे मानते हैं कि मंदिरों में भी लोग चांदी का वर्क चढ़ा रहे हैं।

114

मेहंदीपुर में तंत्र क्यों नहीं कटता?

लिया गया संकल्प जो कभी पूरा नहीं हुआ

· 1:27:42–1:28:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं, क्यों नहीं कटा, इसके पीछे कारण है। लोग मेहंदीपुर जाते हैं, संकल्प लेते हैं, और फिर उसके लिए कुछ नहीं करते — और वे आपको आकर बताने वाले नहीं कि संकल्प पूरा नहीं कर पाए। यहाँ एक आदमी ने दस साल गलत काम किए; चरस-गांजा पिया, शराब पी, घर वालों की नहीं सुनी, देवी-देवताओं पर ध्यान नहीं दिया। फिर जब उस पर तंत्र आया तो उसने बालाजी को पकड़ा, और बाद में कहा कि बालाजी उसका तंत्र ठीक नहीं कर पाए, कि बालाजी में कमी है — और अपनी कमी कभी नहीं देखी। साथ ही, वे जोड़ते हैं, तीर्थ धामों के लोग भी वैसे हो गए हैं, और यह कलियुग का चलता समय है, तो कुछ कठिनाई तो होगी।

115

यह गयासुर वाली सोच है — खुलकर पाप करो, फिर मोक्ष के लिए दर्शन कर लो

गयासुर की कहानी — खुलकर पाप करो, और मोक्ष के लिए दर्शन करो

· 1:28:26–1:28:46

वक्ता कहते हैं, आदमी किसी का धन हड़प ले, किसी का पैसा ले ले, किसी के साथ गलत करे, किसी लड़की के साथ गलत करे, और फिर जब किसी शत्रु द्वारा उस पर तंत्र प्रयोग हो, तो बालाजी की शरण में भागे और शिकायत करे कि बालाजी कुछ नहीं कर पाए। यह गयासुर की कहानी बन गई है: गयासुर ने वरदान लिया, तो चलो, पाप करो, गयासुर के दर्शन करो और मोक्ष मिल जाएगा। लोगों ने ऐसा ही समझ लिया है — पर भगवान भी बहुत चतुर हैं; जिन्हें ठीक करते हैं उन्हें ठीक करते हैं, और जो ठीक नहीं होते वे नहीं होते।

116

बच्चे के रूप में जंजीर से बँधा हाथी बड़ा होकर रस्सी तोड़ने की कोशिश ही नहीं करता

बच्चे में जंजीर से बँधा, और बड़ा होकर फिर कोशिश नहीं

· 1:28:47–1:29:38

जब हाथी छोटा होता है, बच्चा होता है, तो उसे बड़ी भारी, मोटी जंजीरों से बाँधकर रखा जाता है, ताकि वह तोड़ न सके। पर वही हाथी बड़ा होने पर कभी जंजीर से नहीं बाँधा जाता — उसके पास एक छोटी पतली रस्सी लपेटकर छोड़ दी जाती है, और हाथी उसे तोड़ने की कोशिश तक नहीं करता। कारण यह है कि बचपन से उसके मन में भर दिया गया है कि वह इसे नहीं तोड़ पाएगा। बड़ा होने पर वह जानता है कि कोशिश करने में कोई फायदा नहीं, वह नहीं तोड़ेगा। जब हाथी पागल हो जाता है, तब तोड़ता है।

117

क्या भैरव को नींबू बलि का नींबू नीचे से जुड़ा रहना चाहिए?

दो टुकड़े, दो जगह रोली का तिलक

· 1:30:09–1:30:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं, इसे टुकड़ों में काटा जाता है; जुड़ा रहने की ज़रूरत नहीं। दो टुकड़े कीजिए, और फिर उस पर बिंदी लगाइए — और बिंदी से लोग वह बिंदी न समझें: रोली लेकर उस पर दो जगह तिलक लगाना है।

पूछे जाने पर कि भैरव जी को बलि में दिया जाने वाला नींबू बलि के रूप में नीचे से जुड़ा रहना चाहिए, या दोनों अलग होने चाहिए, वक्ता कहते हैं: टुकड़े करके — जुड़ा रहने की ज़रूरत नहीं। दो टुकड़े कीजिए, और फिर उस पर बिंदी लगाइए। और बिंदी से लोग वह बिंदी न समझें: रोली लेकर उस पर दो जगह तिलक लगाना है।

118

कमज़ोर सूर्य के लिए तांबे का कड़ा कैसे सिद्ध करें?

रवि पुष्य नक्षत्र, भोर में सूर्योदय के समय, सूर्य कवच से

· 1:30:27–1:30:47 · Also a question

किस दिन: रवि पुष्य नक्षत्र के दिन कीजिए। किस तरह: बिल्कुल भोर में, जिस समय सूर्य उदय हो रहा हो, कवच का पाठ करके।

119

क्या भैरव हृदय का अनुष्ठान केवल लौंग बलि से किया जा सकता है?

किया जा सकता है, पर मंदिर में कीजिए, घर में नहीं

· 1:30:48–1:31:24 · Also a question

एक श्रोता कहता है कि काले तिल के लड्डू का हवन बहुत महँगा है और पूछता है कि क्या भैरव हृदय का अनुष्ठान केवल लौंग बलि से हो सकता है। लौंग से पूरा कीजिए, वक्ता कहते हैं — अगर इतना कर सकते हैं तो कीजिए। पर इसकी भी ऊर्जा बहुत ज़्यादा बनेगी और असर बहुत तेज़ पड़ेगा। इसलिए अगर इस तरह का अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो मंदिर में कीजिए; घर में मत कीजिए, क्योंकि उन्हें नहीं पता आपके घर की स्थिति क्या है।

120

दक्षिण में चामुंडेश्वरी मंदिर में स्त्रियाँ नींबू के रस से दीपक क्यों बनाती हैं?

नकारात्मक ऊर्जा भगाने में नींबू सबसे तेज़ है

· 1:31:25–1:32:04 · Also a question

हाँ, यह चीज़ की जाती है, वक्ता कहते हैं, और वे भी जल्दी इसे करवाएँगे — जैसे आँवले वाला और नारियल वाला करवाया जाता है, वैसे ही नींबू वाला भी करने को बताएँगे। इसे करने के पीछे कारण यह है कि नींबू नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने में अत्यंत समर्थ है; यह सबसे तेज़ काम करता है। जैसे अपामार्ग की लकड़ी, अपामार्ग की समिधा नकारात्मक ऊर्जा को चूर-चूर करती है — शूल की तरह, वज्र की तरह प्रहार करती है — उसी तरह नींबू भी सबसे तेज़ असर डालता है। लौंग और कपूर भी बहुत तेज़ हैं।

121

क्या माँ विंध्यवासिनी को नमक वाला भोजन चढ़ाना चाहिए?

क्षेत्र की मान्यता अलग है; उनके घर में नमक वाला भोजन चढ़ता है

· 1:32:05–1:32:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं, सबकी अपनी श्रद्धा है। आपके क्षेत्र में एक मान्यता है और ऐसा हो सकता है, और वे इसे मान सकते हैं। उनके अपने यहाँ मान्यता यह है, और वे बचपन से देखते आए हैं: वे विंध्यवासिनी माई को कुछ चढ़ाए बिना नहीं खाते, और वे नमक वाला भोजन खाते हैं, क्योंकि बिना नमक के भोजन नहीं बना सकते। सेंधा नमक सबसे ज़्यादा लगता है, और साधारण नमक भी लगता है — वे झूठ क्यों बोलें? और भोग ज़रूर चढ़ता है; वे भोग चढ़ाए बिना नहीं खाते।

122

क्या अपामार्ग और चिरायता एक ही चीज़ हैं?

एक सुधार — अपामार्ग चिरचिरा या ऊँगा है, चिरायता अलग है

· 1:32:53–1:33:26 · Also a question

अपामार्ग लीजिए, वक्ता कहते हैं, और गलती मानते हैं: उनके बोलने में शायद भ्रम हुआ, और वे यह दोष स्वीकार करते हैं कि बहुत से वीडियो में उन्होंने चिरायता कहा। चिरायता का भी मुख्य रूप से प्रयोग होता है, पर अंतर के साथ — चिरायता की लकड़ी के प्रयोग से चीज़ों के असर में बस कमी आती है; वे जाती नहीं, उनका असर कम हो जाता है। वे और उनके लोग दोनों चीज़ों का प्रयोग करते हैं।

123

चिरायता का प्रयोग किसलिए होता है?

नज़र दोष के लिए चिरायता; तंत्र नाश के लिए अपामार्ग

· 1:33:27–1:34:13 · Also a question

चिरायता का मुख्य प्रयोग वहाँ होता है जहाँ नज़र दोष लगा हो। ऐसे लोग होते हैं जिन्होंने उस तरह की चीज़ें सीखी हैं और बस आकर देखना काफी है — जैसे किसी लड़की के बाल बहुत लंबे हों और वह देखने में बहुत सुंदर हो, और वे टिप्पणी करें कि कितने लंबे बाल हैं, गाय की पूँछ जैसे, ज़मीन छूते; बस कह देंगे, और सामने वाले की सेहत बिगड़ जाएगी। ठीक इसी जगह चिरायता का मुख्य प्रयोग होता है। अपामार्ग तंत्र के नाश के लिए प्रयोग किया जा रहा है। तो अपामार्ग की लकड़ी लीजिए — जिसे चिरचिरा, ऊँगा और कई और नामों से जाना जाता है।

124

भैरव पूजा में त्रिकोण सीधा हो या उल्टा?

बस त्रिकोण बनाइए — भेद बहुत हैं

· 1:34:14–1:35:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं, एक सरल बात ध्यान में रखिए: अगर आप इसके भीतर जाएँ, तो त्रिकोण को बस इतना लीजिए कि त्रिकोण होना चाहिए, और इतना ही मानिए। कारण यह है कि बलि देते समय का त्रिकोण अलग है, हवन के समय का अलग; यंत्र पूजन कर रहे हों तो उसका त्रिकोण अलग; भैरव के स्वरूप में त्रिकोण अलग; काशी क्षेत्र का त्रिकोण अलग — बहुत से भेद बनते हैं। तो त्रिकोण बनाइए; त्रिकोण भगवती और भैरव का प्रतीक रूप है। त्रिकोण बनाकर कीजिए; इतना काफी होगा और कोई दोष नहीं लगेगा।

125

हत्था जोड़ी या सूकर दंत की ज़रूरत किसे होती है?

जिन पर मारण प्रयोग हुआ हो, या जो दूसरों के घर निकारी करते हैं

· 1:35:50–1:36:43 · Also a question

हत्था जोड़ी मत पहनिए, वक्ता प्रश्नकर्ता से कहते हैं। हत्था जोड़ी और सूकर दंत सबके लिए नहीं हैं — आप कौन सा मारण प्रयोग झेलने वाले हैं? जिन पर खास तौर पर मारण प्रयोग हुआ हो, या जो तंत्र क्षेत्र में ऐसी चीज़ों से निपटते हैं — जो दूसरों के घर जाकर निकारी करते हैं, उतारा करते हैं, तंत्र प्रयोग नष्ट करते हैं — उन्हें इन चीज़ों की ज़रूरत होती है। क्योंकि यह जीवित चीज़ है: जब आप पर मारण प्रयोग आएगा तो यह उस ऊर्जा को सोख लेगी और खुद मृत्यु को प्राप्त होगी। हालाँकि इसे भगवती चामुंडा का रूप माना जाता है। वे जोड़ते हैं कि अभी हत्था जोड़ी पर प्रतिबंध है, कि मोदी जी ने इन सब चीज़ों पर प्रतिबंध लगाया है, और अगर असली मिले तो ये चीज़ें ठीक हैं।

126

क्या पीतल की थाली में हवन किया जा सकता है?

नहीं — तांबे का छोटा हवन कुंड लीजिए

· 1:36:44–1:37:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं, पीतल की थाली में हवन मत कीजिए। उसकी जगह तांबे का छोटा हवन कुंड लीजिए।

पूछे जाने पर कि क्या पीतल की थाली में हवन किया जा सकता है, वक्ता उल्टा पूछते हैं कि क्या प्रश्नकर्ता पीतल की थाली में हवन कर रहा है। भाई, पीतल की थाली में हवन मत कीजिए। अपनी थाली में इस तरह करने की जगह तांबे का छोटा हवन कुंड लीजिए।

127

क्या श्मशान काली की पूजा घर में की जा सकती है?

नए सिरे से मत कीजिए — प्रतीक रूप में आद्या काली को पूजिए

· 1:37:01–1:37:31 · Also a question

नहीं, वक्ता कहते हैं — मत कीजिए। अगर श्मशान काली आपकी कुलदेवी हैं, तो प्रतीक रूप में आद्या काली की ही पूजा कीजिए; और नहीं तो, अगर आपके घर का विधि-विधान पहले से चला आ रहा है, तो वही कीजिए। नई पूजा शुरू मत कीजिए। माता की पूजा काली जी के रूप में कीजिए; प्रतीक रूप में उनकी पूजा कीजिए।

128

कृष्ण की स्तुति में काली को श्मशान वासिनी, गृह देवी और ग्राम देवी, तीनों कहा गया है

श्मशान वासिनी, गृह देवी और ग्राम देवी एक ही हैं

· 1:37:32–1:37:54

वक्ता बताते हैं कि यह बात स्वयं भगवती काली कहती हैं। जब काली जी भगवान श्री कृष्ण के सामने प्रकट हुईं, तो उस समय उन्होंने जो स्तुति की उसमें कहा: आप ही श्मशान वासिनी काली हैं; घर-घर में आप गृह देवी के रूप में भी हैं; गाँव-गाँव में आप ग्राम देवी के रूप में भी हैं। तो जो श्मशान काली हैं, उन्हें घर में सौम्य रूप में पूजा जाए।

129

क्या 41 दिन सुबह हनुमान जी और शाम को काल भैरव का जप किया जा सकता है?

समय हो तो हाँ — पर विशेष सिद्धि के लिए केवल एक

· 1:37:55–1:38:09 · Also a question

हाँ, किया जा सकता है, वक्ता कहते हैं — बशर्ते आपके पास इतना समय और क्षमता हो। कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि आप दोनों की पूजा सात्विक ढंग से करेंगे, और वह चलेगा। पर अगर आप कोई विशेष सिद्धि करने जा रहे हैं, तो उनमें से केवल एक की कीजिए; वह बेहतर होगा।

130

रात भर बाहर रखी क्षेत्रपाल निकारी का क्या करना है?

दूर ले जाकर किसी अच्छी जगह विसर्जित कीजिए

· 1:38:10–1:38:23 · Also a question

अगर वह भोग किसी ने भी नहीं खाया — न कुत्ते ने, न गाय ने, किसी ने नहीं — तो उसे दूर ले जाकर किसी अच्छी जगह विसर्जित कीजिए।

पूछे जाने पर कि घर के बाहर रखी गई क्षेत्रपाल निकारीक्षेत्रपाल को अर्पित एक विसर्जन-अनुष्ठान — सुरक्षा तथा क्षेत्र में निवास करने वाली दुष्ट शक्तियों (डाकिनी, शाकिनी, भूत, प्रेत, पिशाच, वेताल) की शांति हेतु प्रार्थना, जो घर की देहरी पर व्याप्त दुष्ट ऊर्जाओं को कम-से-कम 24 घंटे हेतु शुद्ध कर देती है। का अगले दिन क्या करें, वक्ता कहते हैं: अगर वह भोग किसी ने नहीं खाया — न कुत्ते ने, न गाय ने, किसी ने नहीं — तो उसे दूर ले जाकर किसी अच्छी जगह उसका विसर्जन कीजिए।

131

साईं बाबा किसके शिष्य थे, और क्या इससे वे पूजनीय हो जाते हैं?

स्वामी समर्थ, और गुरु और शिष्य का अंतर

· 1:38:24–1:39:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं, प्रश्नकर्ता जो नाम याद करने की कोशिश कर रहा है वह स्वामी समर्थ है; कहा जाता है कि साईं स्वामी समर्थ के शिष्य थे। ठीक है, मान लेते हैं। महा स्वामी समर्थ अपने आप में अक्कलकोट के महा स्वामी हैं, एक महाशक्ति — ऐसा माना जाता है। पर बाद के समय में लोगों ने सब गलत कर दिया। साईं सच्चरित्र पढ़िए और देखिए उन्होंने क्या किया: एकादशी के दिन एक ब्राह्मण के मुँह में गौ मांस ठूँसा, और आप कहते हैं उन्हें मानना चाहिए। वे, अपनी ओर से, उन्हें मानने वाले नहीं।

132

क्या गुरु की महानता से शिष्य पूजनीय हो जाता है?

रावण और परशुराम, दोनों शिव के शिष्य थे

· 1:39:01–1:39:48 · Also a question

जो लोग शिव पूजा से रोकते हैं, उनसे वक्ता कहते हैं: आप कितने भी बड़े संत के शिष्य हों, संत संत है और गुरु गुरु; गुरु कोई भी हो, आप शिष्य बने हैं, और आप यहाँ गलती कर रहे हैं — आपको कैसे माना जाएगा? रावण को लीजिए: रावण भगवान महादेव का शिष्य है। भगवान परशुराम भी शिष्य हैं, स्वयं शिव जी के। आप घर में किसकी पूजा करते हैं? भगवान परशुराम की पूजा करते होंगे; रावण की पूजा तो नहीं करते। गुरु के कारण शिष्य को नहीं पूजा जाता — गुरु को पूजिए।

133

साईं मंदिर के सामने वे स्वामी समर्थ को याद करते हैं और भीड़ के लिए सद्बुद्धि माँगते हैं

वे स्वामी समर्थ को याद करते हैं और भीड़ के लिए सद्बुद्धि माँगते हैं

· 1:39:49–1:40:29

वक्ता अपना अभ्यास बताते हैं: अगर साईं मंदिर के सामने लोगों की भीड़ देखकर कोई ऐसा भाव उमड़ता है, तो वे स्वामी समर्थ को याद करते हैं। वहीं, उस मंदिर के ठीक सामने, स्वामी समर्थ का नाम लेते हैं। और इसलिए लेते हैं कि इन लोगों को सद्बुद्धि मिले — क्योंकि उनमें वहाँ खड़े होकर किसी को सद्बुद्धि देने का, उन्हें यह कहने का सामर्थ्य नहीं कि वे गलत कर रहे हैं। आखिर वे सब हिंदू हैं।

134

शाबर मंत्रों में छेड़छाड़ हुई है, और सूर्य के नियम निभाना बहुत कठिन है

शाबर मंत्रों में छेड़छाड़, और सूर्य साधना से पहले योग

· 1:40:30–1:41:02

वक्ता कहते हैं, शाबर मंत्रों में भी सचमुच छेड़छाड़ हुई है। और सूर्य के नियम बहुत कठिन हैं — सूर्य के नियम न मानने पर बहुत कठिनाई होगी। वे बताएँगे, पर उसमें सच कहेंगे: अगर आप सूर्य का विधि-विधान करना चाहते हैं, तो पहले बहुत व्यवस्थित ढंग से योग साधना करनी चाहिए। जब योग में दक्षता आएगी, तो सूर्य की, भगवान सूर्य की कृपा जल्दी मिलेगी।

135

किस ग्रंथ में बताया गया है कि सीता काली का अवतार कैसे हैं?

अनेक रामायणों में से एक में यह कथा है

· 1:41:03–1:41:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं, बहुत सी रामायण हैं; उनमें एक रामायण है जिसमें यह कथा मिलती है। उन्होंने उस समय एक वीडियो भी डाला था, या शायद लाइव में बताया था — उन्हें याद नहीं; पर एक बार उन्होंने यह बात बताई थी। वे देखकर फिर से विस्तार से बताएँगे: सीता जी किस तरह काली जी का अवतार हैं, और इसका वर्णन कहाँ है।

136

भगवती को काली का रूप क्यों लेना पड़ा?

हज़ार मुख वाला रावण

· 1:41:42–1:41:51 · Also a question

हज़ार मुख वाले रावण के कारण भगवती को काली का अवतार, काली का स्वरूप लेना पड़ा। आजकल यह टीवी धारावाहिकों में भी दिखाया जा रहा है।

हज़ार मुख वाले रावण के कारण ही भगवती को काली का अवतार, काली का स्वरूप लेना पड़ा, वक्ता कहते हैं। आजकल यह टीवी धारावाहिकों में भी दिखाया जा रहा है।

137

क्या तुलसी के गणेश पर क्रोध की कहानी सच्ची है?

ब्रह्मा और सरस्वती की तरह — गलत प्रचलित बात

· 1:41:52–1:42:14 · Also a question

एक श्रोता कहता है कि ब्रह्मा और सरस्वती वाली बात की तरह एक और गलत बात प्रचलित है — कि तुलसी जी गणेश जी को देखकर क्रोधित हुईं और उन्हें शाप दिया। देखिए, वक्ता कहते हैं: जो बातें प्रचलित हैं वे बहुत अलग तरह की हैं। कथाकारों और टीकाकारों ने मूल बात समझे बिना उसे जैसा है वैसा लिख दिया है — और बस यही है।

138

मसानी गणपति क्या हैं, और क्या गृहस्थ उनकी पूजा कर सकता है?

हेरंब और उच्छिष्ट गणपति, नील तारा के साथ पूजित — कभी अकेले नहीं

· 1:42:15–1:43:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं, मसानी गणपति वही हैं जो हेरंब गणपति, और मसानी गणपति की पूजा की ज़रूरत सामान्यतः नहीं पड़ती। जिन्हें आप मसानी गणपति कह रहे हैं — हेरंब गणपति, उच्छिष्ट गणपति — यही उनका सही रूप है; भगवती नील तारा के साथ उच्छिष्ट गणपति पूजे जाते हैं, और मसानी गणपति वही स्वरूप हैं। और उन्हें नहीं लगता कि किसी गृहस्थ को कभी उस स्वरूप की सेवा-उपासना करनी चाहिए। अगर गृहस्थी में की जाए, तो पत्नी कर रही हो तो पति के साथ करेगी, और पति कर रहा हो तो पत्नी के साथ — पूजा केवल दंपति के रूप में हो सकती है। तंत्र का यह क्षेत्र ऐसा है: हेरंब गणपति और उच्छिष्ट गणपति की साधना कभी अकेले नहीं करनी चाहिए; या फिर आपको जीवन भर पूर्ण ब्रह्मचारी रहना होगा।

139

आज कुलदेवी पूजा का क्या हाल हो गया है?

श्रद्धा और निष्ठा की जगह दिखावा और औपचारिकता

· 1:43:37–1:43:46 · Also a question

एक श्रोता लिखता है कि पहले लोग पूरी श्रद्धा और निष्ठा से कुलदेवी की आराधना करते थे, और आज के समय में कुलदेवी पूजन दिखावा और औपचारिकता पूरी करना भर रह गया है। यह सही बात है, वक्ता सहमत होते हैं।

एक श्रोता लिखता है कि पहले के समय के लोग कुलदेवी माँ की आराधना पूरी श्रद्धा और निष्ठा से करते थे। आज के समय में कुलदेवी पूजन के नाम पर सब दिखावा और औपचारिकता पूरी करने की बात रह गई है। सही बात है, वक्ता सहमत होते हैं।

140

एक बूढ़ी स्त्री का अपने खून से "काली" लिखते हुए सपना आने का क्या अर्थ है?

एक योगिनी अधूरी मन्नत दिखा रही है

· 1:43:47–1:44:13 · Also a question

आप बहुत खतरनाक सपना देख रही हैं, वक्ता उनसे कहते हैं। मंदिर जाकर काली जी की पूजा दीजिए। कोई मन्नत होगी जो पूरी नहीं हुई, इसलिए उनकी योगिनी आकर सीधे अपने खून से लिखा "काली" दिखा रही है — सोचिए वह कितनी समर्पित योगिनी है। जाकर काली जी की पूजा दीजिए।

141

बंदी हनुमान की साधना कैसे करनी चाहिए?

केवल पुरुषोत्तम क्षेत्र में — इसकी जगह बंदी मोचन कीजिए

· 1:44:14–1:44:27 · Also a question

आप बंदी हनुमान की साधना क्यों करना चाहते हैं, वक्ता पूछते हैं — इसकी जगह बंदी मोचन की कीजिए। अगर बंदी हनुमान की साधना करनी ही है, तो पुरुषोत्तम क्षेत्र चले जाइए। केवल उसी जगह उनकी साधना होती है; केवल उसी जगह करनी चाहिए।

142

क्या हनुमान जी के चरणों का सिंदूर अपने माथे पर लगाना चाहिए?

जिन पर तंत्र प्रयोग हो उनके लिए; नहीं तो माँ अंजना के नाम पर

· 1:44:28–1:45:04 · Also a question

जिन पर तंत्र का प्रयोग हुआ हो, उन्हें सामान्य रूप से लगाना चाहिए। और नहीं तो माँ अंजना के नाम पर — अगर किसी स्त्री की बहुत इच्छा हो, तो हनुमान जी के पास रखा सिंदूर लाकर लगा सकती है; और अगर कोई विवाहित स्त्री तंत्र प्रयोग में है तो वह भी लगा सकती है। हनुमान जी रक्षा करेंगे। सामान्य रूप से यह भगवती अंजना मैया के नाम पर है।

143

क्या माँ काली मोक्ष नहीं दे सकतीं?

अगर वे नहीं दे सकतीं, तो कोई महाविद्या नहीं दे सकती

· 1:45:05–1:45:25 · Also a question

अगर माँ काली मोक्ष नहीं दे सकतीं, वक्ता उत्तर देते हैं, तो दस महाविद्याओं में से एक भी मोक्ष नहीं दे सकतीं। वे टिप्पणी करते हैं कि किसी बड़े विद्वान ने प्रश्नकर्ता को इस तरह का ज्ञान दिया है — और वे क्या कहें।

पूछे जाने पर कि क्या माँ काली मोक्ष नहीं दे सकतीं, वक्ता उत्तर देते हैं: अगर माँ काली मोक्ष नहीं दे सकतीं, तो दस महाविद्या में से एक भी देवी मोक्ष नहीं दे सकतीं। किसी बड़े विद्वान ने प्रश्नकर्ता को इस तरह का ज्ञान दिया है, वे टिप्पणी करते हैं। और वे क्या कहें।

144

ग्रहण के दौरान पाठ किया गया — अब सवारी को कैसे छुड़ाया जाए?

वही पाठ, संकल्प के साथ, हनुमान मंदिर में अनुष्ठान के रूप में

· 1:45:26–1:45:49 · Also a question

सवारी छुड़ाने के लिए, हनुमान मंदिर में, संकल्प लेकर, उसी चीज़ का लगातार अनुष्ठान कीजिए जिसका आपने पाठ किया है।

145

सूक्ष्म शरीर के प्रकार पिछले लाइव में बताए गए, और यंत्र के लिए पहले मूल बातें चाहिए

पिछले लाइव में बताया गया; और यंत्र के लिए पहले मूल बातें

· 1:45:50–1:46:18

सूक्ष्म शरीर के प्रकारों वाला प्रश्न उन्होंने पिछले लाइव में बहुत अच्छे से बताया है: कितने प्रकार हैं, और साथ में कौन कितना शक्तिशाली है, शरीर में आने पर किस तरह के असंतुलन होते हैं, और कैसे क्या करना चाहिए। बटुक भैरव यंत्र बनाने की विधि के बारे में: आप बनाएँगे कैसे, वे पूछते हैं — पहले यंत्र की शुरुआती बातें सीखनी होंगी, और उसके बाद ही।

146

क्या मंदिर में हनुमान जी का मुख दक्षिण की ओर हो सकता है?

दक्षिणमुखी हनुमान, और नैऋत्य कोण

· 1:46:19–1:46:39 · Also a question

हाँ — दक्षिणमुखी हनुमान होते हैं; ऐसा होता है। नैऋत्य कोण मुख्य है: हनुमान जी का मुख मुख्य रूप से नैऋत्य कोण में होता है, यानी वह कोना जो दक्षिण और पश्चिम के बीच पड़ता है। और इस तरह दक्षिणमुखी हनुमान भी होते हैं।

147

क्या घर में हनुमान जी के लिए चमेली के तेल का दीपक चलेगा?

पूरी तरह चलेगा

· 1:46:40–1:46:48 · Also a question

पूछे जाने पर कि क्या घर में हनुमान जी के लिए चमेली के तेल का दीपक चलेगा, वक्ता उत्तर देते हैं: पूरी तरह चलेगा।

पूछे जाने पर कि क्या घर में हनुमान जी के लिए चमेली के तेल का दीपक चलेगा, वक्ता उत्तर देते हैं: पूरी तरह चलेगा।

148

शनि की साढ़े साती का उपाय क्या है?

पहले देखिए कुंडली में शनि क्या हैं — फिर द्वादश नाम, चालीसा, नारायण

· 1:46:49–1:47:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं, साढ़े साती से बस डरिए मत। आपकी कुंडली में शनि क्या हैं, कैसे हैं, आपके लिए अच्छे हैं या बुरे — पहले यह देखिए। अगर बुरे हैं, तो शनि देव के द्वादश नाम का पाठ, हनुमान चालीसा का पाठ, और नारायण का पाठ आपको सबसे ज़्यादा राहत देगा।

149

वे पाठ शनि को शांत क्यों करते हैं?

नारायण उनके आराध्य, हनुमान को उनका वरदान, शिव उनके गुरु

· 1:47:15–1:48:00 · Also a question

क्योंकि भगवान शनि के आराध्य नारायण हैं: उन्होंने कृष्ण जी की पूजा की, कृष्ण जी की सेवा की, और गोलोक जाकर शांति पाई; वे कृष्ण की सेवा-पूजा विशेष रूप से करते हैं, इसलिए कृष्ण के नाम से वे शांति पाएँगे और शांत होंगे। उन्होंने हनुमान जी को वरदान दिया है, तो हनुमान जी की सेवा-पूजा करेंगे तो शांति मिलेगी। वे शिव जी के शिष्य हैं, तो शिव पूजन करेंगे तो शांति मिलेगी। और इन सबसे ऊपर, अगर आप जगदंबा की सेवा करें तो कोई ग्रह आपको इस तरह परेशान नहीं करेगा; प्रारब्ध का होना अलग बात है, पर ग्रहों से आने वाली पीड़ा नहीं आएगी।

150

क्या स्त्रियाँ शंख बजा सकती हैं?

दो मत; उनका अपना मत है कि केवल गर्भवती स्त्री न बजाए

· 1:48:01–1:49:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं, दो मत प्रचलित हैं। कहीं कहा जाता है बजा सकती हैं, कहीं कि नहीं; न बजाने के पीछे तर्क यह दिया जाता है कि गर्भाशय पर असर पड़ता है। पर वे कहते हैं, यहाँ सबसे सच्ची बात यह है: अगर ऐसा होता, तो बंगाल क्षेत्र में तो सबसे ज़्यादा स्त्रियाँ ही शंख बजाती हैं। उनका अपना मत बस इतना है — कि गर्भवती स्त्री को कभी शंख नहीं बजाना चाहिए, क्योंकि गर्भ पर असर, दबाव पड़ सकता है। बाकी, सामान्यतः कोई भी शंख बजा सकता है। और पांचजन्य जैसे शंख के लिए निषेध रहता है, क्योंकि उसमें ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है।

151

भैरव पूजन कुलदेवी पूजन से पहले हो या बाद में?

पहले भैरव, बाद में कुलदेवी

· 1:49:03–1:49:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं, पहले भैरव पूजन कीजिए। उसके बाद कुलदेवी का पूजन कीजिए। भैरव जी का पूजन पहले होगा। अलग से पूछे जाने पर कि क्या मंत्र तंत्र नाम का कोई ग्रंथ है, वे कहते हैं कि बहुत से ग्रंथ हैं।

पूछे जाने पर कि क्या मंत्र तंत्र नाम का कोई ग्रंथ है, वक्ता कहते हैं कि बहुत से ग्रंथ हैं। पूछे जाने पर कि भैरव पूजन कुलदेवी से पहले करना चाहिए या कुलदेवी के पूजन के बाद, वे उत्तर देते हैं: पहले भैरव पूजन कीजिए। उसके बाद कुलदेवी का पूजन कीजिए। भैरव जी का पूजन पहले किया जाएगा।

152

अगर स्त्री को ॐ नहीं बोलना चाहिए, तो उन मंत्रों का क्या जो ॐ से शुरू होते हैं?

जप वर्जित है; उच्चारण चलेगा — देवी प्रणव का प्रयोग कीजिए

· 1:49:28–1:50:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं, बहुत अच्छा प्रश्न है। जिस मंत्र का आप पाठ कर रहे हैं उसके आरंभ में जहाँ भी ॐ है — अपने वीडियो में उन्होंने यह कहा है: देवी प्रणव का जप कीजिए। जप वर्जित है; उच्चारण चलेगा। पर अगर आपको बार-बार ज़्यादा करना है, तो देवी प्रणव लगाकर कीजिए। उसका पाठ देवी प्रणव के साथ कीजिए।

153

भैरव देवदान में आठ स्थानों के प्रसाद का क्या किया जाए?

आठ स्थानों का परिवार में बाँटिए, दीपक के नीचे वाला कुत्ते को

· 1:50:10–1:50:34 · Also a question

आठ स्थानों का प्रसाद परिवार के साथ सबमें बाँटना है। और जो प्रसाद दीपक के नीचे है, वह कुत्ते को जाता है।

154

क्या बटुक हृदय का हवन तिल के लड्डू की जगह घी और गुग्गुल से हो सकता है?

हाँ, हृदय के लिए हो सकता है

· 1:50:35–1:51:11 · Also a question

हाँ, कीजिए, वक्ता कहते हैं — हृदय का घी और गुग्गुल से हो सकता है। वे यह भी बताते हैं कि भगवान शिव के अमोघ कवच का वीडियो चैनल पर है।

भगवान शिव के अमोघ कवच के वीडियो के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि अमोघ कवच का वीडियो चैनल पर है। बटुक हृदय वाले वीडियो में, तिल के लड्डू के हवन की जगह, क्या घी और गुग्गुल से किया जा सकता है, यह पूछे जाने पर — हाँ, कीजिए, वे कहते हैं। हृदय का घी और गुग्गुल से किया जा सकता है।

155

क्या गोबर के उपलों पर घी से हनुमान चालीसा का हवन हो सकता है, और गीता दान का क्या?

हवन हाँ; और गीता दान करने से अच्छा, एक श्लोक आगे भेजिए

· 1:51:12–1:52:24 · Also a question

गोबर के उपलों पर घी से हनुमान चालीसा का हवन बिल्कुल किया जा सकता है। एक श्रोता के इस आह्वान पर कि आने वाली गीता जयंती पर सब 108 गीता दान करें: दान क्यों, वक्ता पूछते हैं — दी गई गीता कौन पढ़ता है? आप गीता दान करेंगे और सामने वाला पढ़ेगा। इससे अच्छा होगा कि गीता जयंती पर कोई एक श्लोक ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को भेजिए, या खुद एक श्लोक गाकर आगे भेजिए, या अपने फेसबुक पर डालिए। यह कहीं अच्छा होगा। अगर आप गीता दान में देंगे, तो कोई ले लेगा और जीवन में कभी नहीं पढ़ेगा; ज़्यादा से ज़्यादा रखकर घंटी बजाएगा और उसकी पूजा करने लगेगा।

156

दिन में बारह घंटे काम करने वाला व्यक्ति क्या करे जब रोज़ जप संभव न हो?

हनुमान जी के बारह नामों का स्तोत्र, सुबह-शाम बारह बार

· 1:52:25–1:53:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं, बस दो काम कीजिए। हनुमान जी का एक स्तोत्र है जिसमें उनके बारह नाम बताए गए हैं — वे बारह नाम याद कर लीजिए। सुबह उठते ही उसका बारह बार पाठ कीजिए; या नहाकर, सुबह, बारह बार पाठ कीजिए। इसमें दो-तीन मिनट लगेंगे। शाम को या रात को, जब भी घर आएँ, हाथ-पैर धोकर, कपड़े बदलकर और तरोताज़ा होकर, दीपक जलाइए और फिर से उस स्तोत्र का बारह बार पाठ कीजिए। बस इतना कीजिए।

157

ऐसे व्यक्ति को खाली समय मिले तो क्या करना चाहिए?

ज़्यादा जप, अनुष्ठान, और नींद तक नाम दोहराना जब तक अजपा जप शुरू न हो

· 1:53:31–1:54:11 · Also a question

और जब भी छुट्टी मिले, जब भी कोई खास समय मिले, उसी स्तोत्र का जितना हो सके जप कीजिए — 108 कीजिए, और ज़्यादा करना चाहें तो ज़्यादा कीजिए, अनुष्ठान कीजिए। जब भी संभव हो, उन बारह नामों को मन में बार-बार कहने का अभ्यास कीजिए। सोते समय, जब बिस्तर पर जाएँ, उसी नाम को बोलते हुए सो जाइए। जीवन में ऐसा समय आए कि आपके मन में अपने आप उनके नाम का अजपा जप शुरू हो जाए।

158

किराए के घर में कुलदेवी की सेवा कैसे करें?

नित्य सेवा-पूजा हाँ; प्रतिष्ठा नहीं

· 1:54:12–1:54:51 · Also a question

आप नित्य सेवा-पूजा कर सकते हैं, वक्ता कहते हैं। बस प्रतिष्ठा मत कीजिए — इतना ही।

एक श्रोता पूछता है कि उसके किराए के घर में जो कुलदेवी महारानी जी और महाराज जी हैं, उनकी नित्य सेवा-पूजा कैसे करे। आप नित्य सेवा-पूजा कर सकते हैं, वक्ता कहते हैं। बस प्राण प्रतिष्ठा मत कीजिए — बस इतना।

159

जब पाँच देवियाँ सवारी बनकर आएँ और हटाई न जा सकें तो क्या करना चाहिए?

सोखा-ओझा का चक्कर छोड़िए और किसी साधक से कवच अनुष्ठान करवाइए

· 1:54:52–1:55:35 · Also a question

वक्ता श्रोता से कहते हैं: अगर ऐसी स्थिति है और आप उसे उतरवाना चाहते हैं, तो सोखा और ओझा का यह सारा चक्कर छोड़िए; और अगर देवियाँ आप पर ऐसी स्थिति में हैं, तो किसी कवच का जप अनुष्ठान करवाइए — और केवल किसी साधक से ही करवाइए। वह सब करवाइए। सोखैती और ओझैती के चक्कर में, आप जो कुछ कह रहे हैं उससे, एक दिन आपका जीवन खतरे में पड़ जाएगा; यह कठिनाई की बात बन जाएगी।

160

क्या चामुंडा के लिए भेंट काली मंदिर में दी जा सकती है?

काली मंदिर में चामुंडा के नाम पर दी जा सकती है

· 1:55:36–1:56:06 · Also a question

एक श्रोता, जिसकी कुलदेवी चामुंडा हैं, पूछता है कि उसके भैरव कौन होंगे, और क्या बड़ी दुर्गा मंदिर की जगह काली मंदिर में चामुंडा के नाम पर भेंट दी जा सकती है — दी जा सकती है, वक्ता कहते हैं। दी जा सकती है।

एक श्रोता लिखता है कि उसकी कुलदेवी चामुंडा हैं, और पूछता है कि उसके भैरव कौन होंगे। पूछे जाने पर कि क्या बड़ी दुर्गा मंदिर की जगह काली मंदिर में चामुंडा के नाम पर दिया जा सकता है — दिया जा सकता है, वक्ता कहते हैं। दिया जा सकता है।

161

पेठा कैसे चढ़ाया जाता है, और क्या हनुमान जी को लौंग बलि दी जा सकती है?

सामान्य विधि, पर मंदिर में करना बेहतर

· 1:56:07–1:56:14 · Also a question

अगर पेठा चढ़ाना है, तो उसकी विधि सामान्य ही रहेगी; पर अगर किसी मंदिर में करवाएँ तो बेहतर है।

पूछे जाने पर कि क्या हनुमान जी के लिए लौंग बलि की जा सकती है, और पेठा किस तरह चढ़ाया जाता है और मंत्र जप किया जाता है, वक्ता उत्तर देते हैं: अगर पेठा चढ़ाना है, तो उसकी विधि सामान्य ही रहेगी। पर अगर किसी मंदिर में करवाएँ, तो वह बेहतर है।

162

कैसे पता चले कि जप सही दिशा में जा रहा है?

जब नहीं जा रहा, तो उथल-पुथल बढ़ती है

· 1:56:15–1:56:27 · Also a question

अगर जप सही दिशा में नहीं जाता, वक्ता कहते हैं, तो उथल-पुथल ज़्यादा होगी। जब मंत्र जप गलत जाने लगता है, तब उथल-पुथल ज़्यादा होने लगती है।

पूछे जाने पर कि कैसे पता चलेगा कि जप सही दिशा में जा रहा है या नहीं, वक्ता उत्तर देते हैं: अगर जप सही दिशा में नहीं जाता, तो उथल-पुथल ज़्यादा होगी। जब मंत्र जप गलत जाने लगता है, तब उथल-पुथल बढ़ने लगती है।

163

क्या जहाँ शिवलिंग या रुद्राक्ष हो, वहाँ प्रेत और पिशाच की पकड़ छूट जाती है?

वे शिव के गण हैं — वहाँ पूजा नहीं ले सकते

· 1:56:28–1:57:14 · Also a question

हाँ, बिल्कुल, वक्ता कहते हैं। जहाँ नर्मदेश्वर शिवलिंग हो, भगवान शिव से जुड़ा जो कुछ भी हो, जहाँ रुद्राक्ष हो और रुद्राक्ष धारण करने वाला हो — क्योंकि जितने भी भूत, प्रेत और पिशाच हैं, वे शिव जी के गण हैं; वास्तव में वे सभी देवताओं के गण हैं — तो वे वहाँ पूजा नहीं ले पाएँगे। उन्हें वहाँ शांति मिलेगी; वे शांत हो जाएँगे। न वे ले पाएँगे, न कुछ कर पाएँगे। पर प्रयास अलग-अलग तरीकों से चलेगा: अगर वे नहीं ले सकते, तो और भी चीज़ें हैं, और तांत्रिक उनका प्रयोग करेंगे। बहुत सी चीज़ें हैं।

164

बावन प्रकार के वीरों से रक्षा किससे होती है?

सर्वेश्वर भैरव, अघोर रूप, हनुमान के रूप, प्रत्यंगिरा, काली, अग्नि गायत्री

· 1:57:15–1:58:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं, बावन प्रकार के वीर बताए गए हैं; और अगर किसी पर बावन प्रकार के वीर लगा दिए जाएँ, तो उसका बचना कठिन है। अगर सच में ऐसा है, तो सर्वेश्वर भैरव की कृपा से रक्षा हो सकती है। भगवान महादेव के अघोर स्वरूप से रक्षा हो सकती है। पंचमुखी, सप्तमुखी, एकादशमुखी हनुमान के प्रयोग से रक्षा हो सकती है। भगवती प्रत्यंगिरा से रक्षा हो सकती है। काली जी के सबसे उग्र रूपों की सहायता से रक्षा हो सकती है। और गायत्री के भीतर अग्नि गायत्री के जप से — यानी मूल गायत्री की अग्नि गायत्री — शांति भी हो सकती है और रक्षा भी।

165

काल संकर्षण तंत्रोक्त स्तोत्र के कितने पाठ करने चाहिए?

एक सावधानी — वहाँ अष्टोत्तर में केवल 105 नाम हैं, और गुरु कृपा चाहिए

· 1:58:02–1:59:05 · Also a question

काल संकर्षण तंत्रोक्त के लिए वे कुछ नहीं कह सकते, वक्ता उत्तर देते हैं, क्योंकि वही बात फिर खड़ी होगी: उसमें भी बीज मंत्र है, उसके भीतर मूल बीज दिया है। और इस पर ध्यान दीजिए — अलग-अलग करने पर 108 नाम नहीं, केवल 105 हैं। अगर मूल स्तोत्र मिले तो उसमें 108 मिलेंगे: काल संकर्षण तंत्रोक्त बटुक भैरव स्तोत्र। एक बार पढ़कर देखिए; केवल 105 होंगे। अगर आपके पास मूल किताब, मूल ग्रंथ हो, तो उसमें 108 मिलेंगे। नहीं तो इसे अष्टोत्तर कहा जाता है, पर वहाँ तीन नाम कम मिलते हैं। और चूँकि इसमें मूल मंत्र और बाकी सब दिया है, वहाँ गुरु कृपा ज़रूरी हो जाती है।

166

नकारात्मक विचारों का आध्यात्मिक उपाय क्या है?

शिव पूजा से चंद्रमा को बलवान कीजिए

· 1:59:06–1:59:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं, भगवान शिव की पूजा कीजिए और चंद्रमा को बलवान कीजिए। शिव पूजा से चंद्रमा बलवान होगा।

नकारात्मक विचारों का आध्यात्मिक उपाय पूछे जाने पर वक्ता उत्तर देते हैं: भगवान शिव की पूजा कीजिए; चंद्रमा को बलवान कीजिए। शिव पूजा से चंद्रमा बलवान होगा।

167

क्या पितरों को जल अलग से देना ज़रूरी है?

तुलसी को दिया जल पितरों और देवों, दोनों को तृप्त करता है

· 1:59:19–1:59:39 · Also a question

पितरों के लिए अलग से जल देने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, वक्ता श्रोता से कहते हैं। तुलसी जी को जल दीजिए, पितर अपने आप तृप्त हो जाएँगे। तुलसी जी का स्वरूप, जो भगवती का स्वरूप है, पितरों और देवों दोनों को तृप्त करता है। अलग से कुछ कहने की ज़रूरत नहीं; बस उनका मंत्र बोलना है — "महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्य दायनी आधि व्याधि जरा मुक्ति तुलसी त्वम नमस्तुते"। बस इतना बोलकर जल दीजिए। पितरों के लिए तिल और गुड़ का अलग प्रयोग मत कीजिए।

168

रविवार को जल सूर्य को जाता है, जो पिता के कारक हैं, और उससे पितर तृप्त होते हैं

सूर्य को दिया जल भी पितरों को तृप्त करता है — वे पिता के कारक हैं

· 1:59:40–2:00:11

रविवार को आप नहीं देंगे, वक्ता कहते हैं — तो आप सूर्य को जल देंगे। सूर्य को जल देने से भी पितर तृप्त होते हैं। सूर्य पिता के कारक ग्रह हैं। और अच्छी नौकरी के लिए: सूर्य पूजन से अच्छी नौकरी, ईशान शिव की पूजा से अच्छी नौकरी, अपनी कुलदेवी की पूजा से अच्छी नौकरी; हनुमान जी की सेवा-पूजा कीजिए, उससे और भी अच्छी नौकरी।

169

जब पूजा में मन बिल्कुल न लगे तो क्या करना चाहिए?

उच्चाटन ज़्यादा हो तो कुछ दिन पूजा छोड़िए और तीर्थ यात्रा कीजिए

· 2:00:12–2:00:51 · Also a question

अगर उच्चाटन बहुत हो रहा है, तो कुछ दिन पूजन-पाठ छोड़ दीजिए, वक्ता कहते हैं। नाम जप आदि कीजिए। और हो सके तो किसी तीर्थ की यात्रा कीजिए — ज़रूरी नहीं कि दूर जाएँ; आपके आसपास भी कोई अच्छी जगह होगी, वहाँ जाइए, वहाँ पूजा दीजिए। अगर कोई शक्ति पीठ पास हो और संभव हो, तो वहाँ जाकर पूजा दीजिए। उच्चाटित मन शांत हो जाएगा।

170

संहार करती नरसिंह मूर्ति के सपने का क्या अर्थ है?

कोई संकट आने वाला है जिस पर नरसिंह की कृपा से विजय मिलेगी

· 2:00:52–2:01:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं, कोई संकट आने वाला है, जिस पर भगवान नरसिंह की कृपा से आप विजय पा सकते हैं।

171

क्या अर्गला का पहला मंत्र प्रणव के साथ बोलना है?

जनेऊ पहनते हैं तो प्रणव के साथ, नहीं तो बिना

· 2:01:24–2:01:36 · Also a question

अर्गला का पहला मंत्र: अगर आप जनेऊ पहनते हैं तो प्रणव के साथ, और नहीं पहनते तो बिना प्रणव के। इसे देवी प्रणव के साथ भी किया जा सकता है।

अर्गला स्तोत्र के पहले मंत्र के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं: अगर आप यज्ञोपवीतवैदिक कर्मों में दीक्षा का प्रतीक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार — पीढ़ियों तक न होने पर, इसे पुनः आरंभ करने से पहले हर ज्ञात पीढ़ी के लिए प्रायश्चित आवश्यक है। पहनते हैं, तो प्रणव के साथ; अगर नहीं पहनते, तो बिना प्रणव के। इसे देवी प्रणव के साथ भी किया जा सकता है।

172

जो हाथ से निकल गया उसे भगवती पर छोड़िए, और फिर खड़े होइए

उलझी बातें भगवती पर छोड़िए, और फिर खड़े होइए

· 2:01:37–2:02:41

उलझन में मत रहिए, वक्ता कहते हैं — सब सुलझ जाएगा, घबराइए मत। जब बातें उलझ जाएँ और अपने हाथ में न रहें, तो उन्हें ईश्वर के हाथ में, भगवती के हाथ में छोड़ देना चाहिए। अगर आप घबराएँगे, रोएँगे और चिंता करेंगे, तो बस और परेशान होंगे। जो होना था हो गया; जो अभिचार तंत्र करके परेशान करना चाहते थे, उन्होंने अपनी कर ली। अब आपको खड़ा होना है। हारना ठीक है — जैसा उन्होंने पिछले दिन भी कहा था, हार मानकर बैठ नहीं जाना है। रोइए मत। हम फिर खड़े होंगे, फिर चलेंगे, फिर जीतेंगे।

173

मंत्र जप में ध्यान स्थिर न रहे तो क्या करना चाहिए?

त्राटक, और देखने के लिए एक सुंदर फोटो या विग्रह

· 2:02:42–2:03:09 · Also a question

उसके लिए थोड़ा त्राटक करना चाहिए, वक्ता कहते हैं। थोड़ा अभ्यास कीजिए — पंद्रह-बीस दिन का भी, और स्थिर होने लगेगा। अपने आराध्य की मूर्ति को देखते हुए, उनके चरणों, उनके हाथों, उनकी आँखों को देखते हुए, ध्यान करके फिर पाठ कीजिए — होने लगेगा। और इसके लिए ज़रूरी है कि एक सुंदर फोटो या विग्रह स्थापित हो।

174

घर में और मंदिर में कौन सा दीपक और बत्ती प्रयोग करनी चाहिए?

लंबी बत्ती जलानी है; खड़ी बत्ती प्रयोग के समय

· 2:03:10–2:03:29 · Also a question

लंबी बत्ती से करना चाहिए; लंबी बत्ती जलानी चाहिए। खड़ी बत्ती प्रयोग के समय जलानी चाहिए। आरती के समय आप खड़ी बत्ती, लंबी गोल वाली, लंबी वाली प्रयोग कर सकते हैं।

175

विंध्यवासिनी मंदिर की आरती में क्या प्रयोग होता है?

चार पहर की आरती, और जमे घी और कपूर का रुआ — मोमबत्ती नहीं

· 2:03:30–2:04:21 · Also a question

विंध्यवासिनी मंदिर में चार पहर की आरती होती है, वक्ता कहते हैं; और चारों आरतियों की सजावट और श्रृंगार पूरी तरह प्राकृतिक, शुद्ध वस्तुओं से होता है। रुआ भी वहाँ के पंडित खुद बनाते हैं — आप उन्हें मंदिर के पीछे, माता के खज़ाने पर, बैठकर तैयार करते देख सकते हैं। शुद्ध घी में घी डुबोकर, जमाकर, कपूर आदि मिलाया जाता है; यह मोमबत्ती नहीं, रुआ है। इसे जमाया जाता है ताकि यह धीरे-धीरे जले। और इसका प्रयोग केवल विंध्यवासिनी मंदिर में नहीं, दूसरे मंदिरों में भी होता है।

176

बूढ़ी माई कौन हैं, और बन्नी माता कौन हैं?

एक लोक देवी और लोक योगिनी; और भगवती भद्रकाली

· 2:04:22–2:04:30 · Also a question

बूढ़ी माई एक लोक देवी, एक लोक योगिनी हैं, वक्ता कहते हैं। और बन्नी माता, जैसा वे पहले बता चुके हैं, भगवती भद्रकाली हैं।

पूछे जाने पर कि बूढ़ी माई कौन सी देवी हैं, वक्ता कहते हैं कि वे एक लोक देवी, एक लोक योगिनी हैं। अलग से पूछे जाने पर कि बन्नी माता कौन हैं, वे कहते हैं कि वे पहले ही बता चुके हैं: वे भगवती भद्रकाली हैं।

177

क्या चमड़े का बटुआ या चमड़े के जूते नहीं रखने चाहिए?

हो सके तो कीजिए, पर फैक्ट्री के सेफ्टी शू में संभव नहीं

· 2:04:31–2:04:58 · Also a question

आज के समय में क्या यह संभव है, वक्ता पूछते हैं — पहले के लोगों के लिए संभव था। अभी जूता ज़्यादातर चमड़े का ही मिलेगा; स्पोर्ट्स शू एक चीज़ है जिसमें यह सब चमड़ा नहीं मिलता। तो अगर आपके लिए संभव है, अगर आप उस तरह का काम नहीं करते, तो बिना चमड़े का जूता पहनिए; बहुत अच्छा होगा। बिना चमड़े का पर्स मिलता है — वह रखिए। पर अगर आप किसी फैक्ट्री आदि में काम करते हैं, तो सेफ्टी शू चमड़े का ही बनता है, और वहाँ यह आपके लिए संभव नहीं होगा।

178

अगर लहसुन और प्याज़ वर्जित हैं, तो क्या हींग और अदरक प्रयोग कर सकते हैं?

छोड़ दीजिए — हींग तीखी है और साधना में परेशान करेगी

· 2:04:59–2:06:00 · Also a question

आप जीभ के इतने लालची क्यों हो रहे हैं, वक्ता प्रश्नकर्ता से पूछते हैं। अगर वर्जित है तो छोड़ दीजिए — हींग भी काफी तेज़ और तीखी है। तीखा खाएँगे तो गैस की समस्या होगी; साधना में बैठेंगे तो पेट दर्द, कमर दर्द, सिरदर्द होगा। फिर आप कहेंगे कि साधना का बुरा असर हो रहा है, और ये सब बातें नहीं बताएँगे। रही अदरक: अगर कोई समस्या है तो खा सकते हैं; कोई समस्या नहीं है तो छोड़िए, त्याग दीजिए, सादा भोजन खाइए।

179

क्या लहसुन-प्याज़ खाकर हनुमान जी का जप करना चाहिए, और क्या कोई मंदार तंत्र है?

नहीं; और मंदार विद्या और मंदार तंत्र दो अलग चीज़ें हैं

· 2:06:01–2:06:40 · Also a question

लहसुन और प्याज़ खाने के बाद हनुमान जी का जप नहीं करना चाहिए, वक्ता कहते हैं। और पूछे जाने पर कि क्या मंदार तंत्र नाम का कोई ग्रंथ है — हाँ है; मंदार विद्या भगवती की एक अंग विद्या है, जिसका अपना अलग मंत्र है, और मंदार तंत्र बिल्कुल अलग चीज़ है।

लहसुन और प्याज़ खाने के बाद हनुमान जी का जप नहीं करना चाहिए, भाई, वक्ता कहते हैं। पूछे जाने पर कि क्या मंदार तंत्र नाम का कोई ग्रंथ है: हाँ, है। मंदार विद्या भगवती की एक अंग विद्या है, और उसका अपना अलग मंत्र है। और मंदार तंत्र बिल्कुल अलग चीज़ है।

180

घर से साईं की मूर्ति कैसे हटाई जाए?

फेंकिए मत — सफेद कपड़े में लपेटकर, मिठाई देकर, विदा करके विसर्जित कीजिए

· 2:06:41–2:07:58 · Also a question

बस ले जाकर जल में दे दीजिए, वक्ता कहते हैं। फेंकिए मत — आप कभी श्रद्धा से लाए होंगे। सनातन संस्कृति में कभी किसी शक्ति का अनादर करना नहीं सिखाया गया; हमने कभी किसी का अनादर नहीं किया। चूँकि आप उन्हें लाए हैं, तो यह कीजिए: पूरे सम्मान के साथ उन्हें विदा कीजिए — बाबा, आप अपने स्थान को प्रस्थान करें। उन्हें सफेद कपड़े में लपेटिए, साथ में कुछ मिठाई आदि रखिए, उन्हें बाय-बाय, गुडबाय, टा-टा कहिए, और फिर विसर्जित कर दीजिए।

181

विंध्याचल शक्ति पीठ के भैरव कौन हैं?

एक नहीं, कई — लाल भैरव, बटुक भैरव, और भैरवी के साथ भैरव

· 2:07:59–2:08:39 · Also a question

जानिए कि विंध्याचल शक्ति पीठ में एक भैरव नहीं हैं, वक्ता कहते हैं। आपका लाल भैरव के दर्शन करना बहुत अच्छी बात है; लाल भैरव भी भैरव हैं। विंध्याचल मंदिर के ठीक बाहर, एक तरफ भगवती शीतला हैं और दूसरी तरफ बटुक भैरव जी — वे माई के प्रमुख लाल हैं, जिन्हें हम चंडी हृदय नंदन कहते हैं। और मंदिर के ठीक सामने वाली सड़क पर, जो कोतवाली की ओर जाती है, आपको दुनिया का एकमात्र मंदिर मिलेगा जहाँ भैरव और भैरवी साथ हैं; उसका अपना माहात्म्य है, और वह पौराणिक युग का है — सृष्टि के आरंभ से माना जाता है। वह भी पुराना पीठ है, और वहाँ भैरव के रूप में मुख्य रूप से वही पूजे जाते हैं।

182

विंध्याचल में उस भैरव मंदिर तक कैसे पहुँचें?

सीढ़ियों से नीचे, सीधी सड़क, और कोतवाली के भैरव पूछिए

· 2:08:40–2:09:24 · Also a question

जब दर्शन करके बाहर आएँ, सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं; वहाँ से जो सड़क सीधी जाती है — किसी से भी पूछिए कि कोतवाली के भैरव कहाँ हैं, और उधर जाइए।

पूछे जाने पर कि मंदिर के ठीक सामने किस तरफ से निकलते हैं, वक्ता कहते हैं: जब आप दर्शन करके बाहर आते हैं, सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं। वहाँ से जो सड़क सीधी जाती है — किसी से भी पूछिए कि कोतवाली के भैरव कहाँ हैं, और उधर जाइए।

183

उनकी अपनी कहानी सुनने लायक नहीं — इसकी जगह भगवती की कहानी सुनी जाए

इसकी जगह भगवती की कहानी सुनिए

· 2:09:25–2:10:07

पूछे जाने पर कि वे इस लाइन में कैसे आए, और यह कहे जाने पर कि उनकी कहानी बहुतों के लिए प्रेरणा होगी, वे कहते हैं: मेरी कहानी से क्या मिलेगा? भगवती की कहानी सुनी जाए — उससे कुछ प्राप्त होगा।

एक श्रोता लिखता है, पूछता है कि वे इस लाइन में कैसे आए, कहता है कि वे उसके जैसे बहुत से लोगों के लिए प्रेरणा हैं, और उनसे अपनी कहानी वीडियो में बताने को कहता है। मेरी कहानी से क्या मिलेगा, वक्ता उत्तर देते हैं। भगवती की कहानी सुनी जाए; उससे कुछ प्राप्त होगा।

184

जहाँ शत्रु बार-बार मसानी क्रियाएँ करते हों, वहाँ क्या करना चाहिए?

हनुमान चालीसा से हवन, और नरसिंह कवच

· 2:10:08–2:10:54 · Also a question

अगर आपके घर में यह सब बहुत हो रहा है, वक्ता कहते हैं, तो सबसे पहले हनुमान चालीसा से हवन, और अपनी शक्ति के अनुसार नरसिंह कवच का पाठ — ये दो चीज़ें अपने जीवन में उतारिए। अगर आप ये चीज़ें दो महीने भी लगातार ठीक से करें, तो शत्रु कितना भी बड़ा हो, वह रास्ते पर आ जाएगा।

185

क्या काली को नींबू की माला चढ़ाई जा सकती है, और पंचमुखी हनुमान क्यों रोके गए हैं?

नींबू की माला हाँ; तंत्रोक्त चीज़ें देने से पहले सोचना पड़ता है

· 2:10:55–2:11:18 · Also a question

काली जी को नींबू की माला बिल्कुल चढ़ाई जा सकती है, वक्ता कहते हैं। पंचमुखी हनुमान के मंत्र और कवच के पूरे विधान के बारे में: राम रक्षा वे पहले ही दे चुके हैं; पंचमुखी हनुमान देने होंगे। पर तंत्रोक्त चीज़ें देने से पहले थोड़ा सोचना पड़ता है — सबके लिए आम तौर पर क्या बताया जाए कि सब कर सकें? क्योंकि सब उसका पालन नहीं करेंगे।

186

तंत्रोक्त माला क्या है?

निष्कासन से लेकर पूर्ण अभिमंत्रण तक, तंत्रोक्त विधि से

· 2:11:19–2:11:29 · Also a question

जो माला तंत्रोक्त विधि से सिद्ध की जाती है: उसके निष्कासन से लेकर उसे पूरी तरह अभिमंत्रित करने तक, जो पूरी प्रक्रिया है, वह तंत्रोक्त विधि-विधान से की जाती है।

जो माला तंत्रोक्त विधि से सिद्ध की जाती है, वक्ता कहते हैं — उसके निष्कासन से लेकर उसे पूरी तरह अभिमंत्रित करने तक, जो प्रक्रिया है — वह तंत्रोक्त विधि-विधान से की जाती है।

187

क्या दरबारी रूप में माँ दुर्गा के साथ काल भैरव की पूजा की जा सकती है?

हाँ; और क्षेत्रपाल निकारी अगले दिन ठंडी की जाती है

· 2:11:30–2:11:54 · Also a question

दरबारी रूप में माँ दुर्गा के साथ काल भैरव की पूजा बिल्कुल की जा सकती है। और क्षेत्रपाल निकारी को अगले दिन ठंडा करना है — अगर किसी ने नहीं खाई हो।

दरबारी रूप में माँ दुर्गा के साथ काल भैरव की पूजा बिल्कुल की जा सकती है, वक्ता कहते हैं। और क्षेत्रपाल निकारी को अगले दिन ठंडा करना है, अगर किसी ने उसे नहीं खाया हो।

188

क्या हनुमान और भैरव की साधना एक साथ की जा सकती है?

साधना साथ नहीं — सेवा-पूजा साथ करना अलग बात है

· 2:11:55–2:12:02 · Also a question

हनुमान जी और भैरव जी की साधना साथ मत कीजिए, वक्ता कहते हैं। उन्हें अलग-अलग कीजिए; सेवा-पूजा साथ कीजिए।

हनुमान जी और भैरव जी की साधना साथ मत कीजिए, वक्ता कहते हैं। उन्हें अलग-अलग कीजिए। सेवा-पूजा साथ कीजिए।

189

अपने माथे पर किसका तिलक लगाना चाहिए?

श्रृंगार के बाद देवता का ही तिलक — अपने लिए अलग से घिसा हुआ कभी नहीं

· 2:12:03–2:12:43 · Also a question

आप लगा सकते हैं, वक्ता कहते हैं। वास्तव में विधान यह है कि देवता का श्रृंगार करने के बाद जो तिलक बचे, वही अपने माथे पर लगाना है। अपने लिए अलग तिलक बनाकर नहीं लगाना चाहिए। आचमन या अभिषेक करते समय उन पर जो भी रोली, कुमकुम, अष्टगंध आदि चढ़ाया जाता है — वही उठाकर, इकट्ठा करके रखना चाहिए, और वही माथे पर लगाना चाहिए। उन पर जो चढ़ा है वही है; अपने लिए अलग तिलक नहीं घिसना है। वे कहते हैं, यही शास्त्रोक्त विधान है।

190

सपने में अपने सारे दाँत टूटने का क्या अर्थ है?

पितरों से जुड़ा कारण — सूर्य उपासना कीजिए

· 2:12:44–2:13:24 · Also a question

दाँत टूटने के पीछे का कारण कहीं न कहीं पितरों से जुड़ा है, वक्ता कहते हैं। थोड़ी सूर्य उपासना कीजिए। और जहाँ बारह वर्ष से अधिक पुराना शिवलिंग हो, उस मंदिर में अपनी शक्ति के अनुसार शिव जी की थोड़ी पूजा कीजिए, अगर लगे कि कठिनाई है।

191

दारिद्र्य दुख दहन शिव स्तोत्र कहाँ बताया गया है, और शिव कवच का वीडियो कहाँ है?

शिवरात्रि के आसपास; और शिव कवच का वीडियो अनलिस्टेड लगता है

· 2:13:25–2:14:04 · Also a question

पूछे जाने पर कि दारिद्र्य दुख दहन शिव स्तोत्र के पाठ का प्रयोग कैसे करें, वक्ता कहते हैं कि उन्होंने शिवरात्रि के आसपास यह बताया था और वीडियो होगा। यह बताए जाने पर कि शिव कवच का वीडियो नहीं मिल रहा, वे कहते हैं कि अब लगता है वह अनलिस्टेड है, और वे देखेंगे।

पूछे जाने पर कि दारिद्र्य दहन स्तोत्र के पाठ का प्रयोग कैसे करना है, वक्ता कहते हैं कि उन्होंने शिवरात्रि के आसपास यह बताया था; वीडियो होगा। यह बताए जाने पर कि शिव कवच का वीडियो नहीं मिल रहा, वे कहते हैं: तो लगता है वह अनलिस्टेड है। वे उसे देखेंगे।

192

क्या घर में भैरव का विग्रह रखा जा सकता है?

बटुक भैरव का विग्रह रखा जा सकता है

· 2:14:05–2:15:14 · Also a question

पूछे जाने पर कि घर में भैरव जी का विग्रह रखने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, वक्ता कहते हैं कि बटुक भैरव का विग्रह रखा जा सकता है।

पूछे जाने पर कि घर में भैरव जी का विग्रह रखने से पहले किस बात का ध्यान रखें, वक्ता कहते हैं: बटुक भैरव का विग्रह रखा जा सकता है।

193

क्या बिना किसी मन्नत के, केवल आशीर्वाद के लिए पशु बलि दी जा सकती है?

ज़रूरत नहीं; कोई इच्छा या कारण हो तभी दीजिए

· 2:15:15–2:15:59 · Also a question

इस तरह उसकी कोई ज़रूरत नहीं, वक्ता कहते हैं। और अगर कोई इच्छा हो, कोई ऐसा कारण हो, तभी दीजिए — वह बेहतर होगा। आशीर्वाद पाने के लिए बलि देने की क्या ज़रूरत है? वे जोड़ते हैं कि उस कर्म के बाद ऊर्जा का क्षय होता है, घिसाव होता है, और इसलिए ऊर्जा नीचे जाती है।

194

दीपक की बत्ती में बनने वाला "फूल" क्या है?

जहाँ तेल बत्ती के ऊपर तक नहीं पहुँचता, वहाँ जमा कार्बन

· 2:16:00–2:17:01 · Also a question

यह कार्बन है, वक्ता कहते हैं। गोल बत्ती में बत्ती ऊपर की ओर थोड़ी छोटी होती है और तेल भरा रहता है; बार-बार जलने से उसमें कालिख बनना तय है — 99% संभावना है कि बनेगी। जब तेल बत्ती के ऊपरी हिस्से तक ठीक से नहीं पहुँच रहा, तभी वहाँ कार्बन जमने लगता है, और तभी आप कहते हैं कि बत्ती में फूल बन गया। इसमें कुछ खास नहीं। नवरात्र में सबका बनता है, ज़्यादातर लोगों का बनता है; जो इसे साफ नहीं करते उनका बड़ा फूल बनता है, और जो ढक्कन से ढकते हैं उनका और भी बड़ा। एक बड़ा दीपक लीजिए, बत्ती थोड़ी पतली रखिए और तेल भर दीजिए, तो पूरे दिन उस बत्ती में तरह-तरह के फूल बनते रहेंगे।

195

दीपक की बत्ती का फूल कालिख और कचरा है, और नवरात्र व्रत विधि इसे हटाने को कहती है

कालिख और कचरा — और नवरात्र व्रत विधि इसे हटाने को कहती है

· 2:17:02–2:17:56

वक्ता कहते हैं, यह बस अपने मन को संतोष देने वाली चीज़ है, और एक वीडियो वायरल हुआ और हज़ारों लोगों ने वही वीडियो बनाकर डाल दिया। फूल वहाँ नहीं बना — आप मूर्ख बन रहे हैं; मूर्ख मत बनिए। अगर बत्ती में फूल बन रहा है, तो इसका अर्थ है कि आप जो भोजन खा रहे हैं उसमें अशुद्धि है; फूल अशुद्धि है। नवरात्र व्रत की पौराणिक बातों में पढ़िए कि दीपक और बत्ती को कैसे ठीक करना है, जमी कालिख कब हटानी है और कौन सा मंत्र बोलना है। अगर वह चीज़ शुभ होती, तो उसमें यह कहा जाता: फूल बन रहा है, बहुत अच्छा है, बनने दो। पर यह कालिख जम रही है; यह कचरा है।

196

अगर दाँत टूटने का सपना बार-बार आए तो क्या करना चाहिए?

शिव का अभिषेक — हो सके तो रुद्राभिषेक

· 2:17:57–2:18:30 · Also a question

अगर लगे कि दाँत टूट गए हैं, सपने में जो भी देखा हो, और अगर आप एक से ज़्यादा बार देख रहे हैं, तो शिव जी का अभिषेक ज़रूर कीजिए। अगर आप रुद्राभिषेक करवाएँ, तो बहुत ही अच्छा — पूरे साल इस तरह की जो भी चीज़ें आपके पास आएँगी, सब ठीक हो जाएँगी। नहीं तो अपनी शक्ति के अनुसार खुद शिव जी के किसी पुराने, कम से कम बारह वर्ष पुराने मंदिर में जाइए, और उस मंदिर में अभिषेक कीजिए।

197

ऐसे लोगों ने भैरवी नाम को बदनाम किया है — साफ समझिए कि उनका इससे क्या मतलब है

समझिए उनका इससे क्या मतलब है — उन्होंने भैरवी नाम को बदनाम किया है

· 2:18:31–2:19:46

समझिए भैरवी पूजा का अर्थ क्या है, वक्ता कहते हैं: वे सीधे उनसे अपने साथ गलत, अनुचित काम करने को कह रहे हैं। और ऐसे कपटी लोग, जो दूसरों से इस तरह की चीज़ें करने को कहते हैं, उन्हें जूतों से ही पीटना चाहिए। उन्होंने भैरवी नाम को ही बदनाम कर दिया है। वे साफ कहते हैं कि उनके शरीर पर एक नकारात्मक ऊर्जा है, एक क्षुद्र चीज़, एक नीच और सड़ी हुई चीज़ जो उनके शरीर पर गलत काम कर रही है। वे जोड़ते हैं, लड़कों को भी यह समस्या होती है, पर लड़के जल्दी नहीं बोलते और उनमें अलग डर पनपता है; लड़कियाँ जब इससे बहुत परेशान हो जाती हैं, किसी पर भरोसा करके बोलती हैं, और फिर ये दुष्ट इसे "भैरवी पूजा" का नाम दे देते हैं — कामी, कपटी लोग, जिन्हें गाली देने का मन करे।

198

क्षुद्र/नकारात्मक ऊर्जा से परेशान स्त्री के लिए वक्ता कौन सी अपामार्ग धूनी बताते हैं?

सरसों, लाल गुंजा, काली मिर्च, कपूर और गुग्गुल, गोबर के उपले पर

· 2:19:47–2:21:01 · Also a question

पहला काम: अपामार्ग की समिधा घर में लाइए। और रोज़ सरसों, लाल गुंजा, काली मिर्च और कपूर — सरसों लेनी है, काली मिर्च लेनी है, रक्त गुंजा लेनी है, और कपूर, साथ में थोड़ा गुग्गुल। इन सबको मिलाकर कूटिए। कूटने के बाद गोबर का उपला जलाइए; दस मिनट अच्छे से जलने और दहकने दीजिए; फिर अपामार्ग की लकड़ी सरसों के तेल या घी, किसी एक में डुबोकर आग पर रखिए ताकि वह थोड़ी जले। जब जलने लगे, तो जल्दी-जल्दी हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए उस पर मिश्रण डालते रहिए। स्वाहा कहने की ज़रूरत नहीं — हनुमान चालीसा का साधारण पाठ कीजिए और बनाई हुई सारी सामग्री डालते जाइए। जब पूरा धुआँ उठने लगे और हनुमान चालीसा का पाठ पूरा हो, तो वह धुआँ पूरे घर में दिखाइए, और जहाँ वे सोती हैं, वहाँ रखकर छोड़ दीजिए।

199

(नकारात्मक ऊर्जा की पीड़ा के लिए) अपामार्ग धूनी कितने समय तक करनी चाहिए, और अगर कुछ दिन न कर पाएँ तो?

लगातार, सुबह-शाम; चार-पाँच दिन छोड़े जा सकते हैं

· 2:21:02–2:21:48 · Also a question

यह काम लगातार कीजिए, वक्ता कहते हैं। महीने के जिन चार-पाँच दिनों में आप नहीं कर पाएँगी, उस कठिनाई का तनाव नहीं लेना है — चाहें तो किसी और से करवा सकती हैं, और कोई न करे तो उन दिनों छोड़ दीजिए; बाकी समय आराम से कीजिए। एक महीने, डेढ़ महीने में पहले दिन से ही आपको इसका शुभ असर मिलने लगेगा; और एक महीना, इकतालीस दिन पूरे होते-होते यह चीज़ हमेशा के लिए आपके शरीर के पास से चली जाएगी, और कम से कम इस तरह की परेशानी नहीं होगी। दोनों समय, सुबह और शाम, कीजिए।

200

पीड़ित व्यक्ति अकेले निकारी नहीं कर सकता, इसलिए घर के किसी अभिभावक को बताना होगा

पीड़ित स्वयं निकारी नहीं कर सकती

· 2:21:49–2:22:41

दूसरी बात यह है कि अगर कभी संभव हो तो उनके घर के किसी अभिभावक से बात करवाई जाए, और वे उन्हें बताएँगे — क्योंकि उनके लिए अकेले सब करना संभव नहीं होगा, और वक्ता को नहीं पता कि उनकी उम्र क्या है या वे क्या करती हैं। तो अगर उनका कोई भाई हो, या पिता, या अगर वे विवाहित हैं तो पति, और उनके बीच अच्छी समझ हो, तो वह व्यक्ति उनसे पाँच मिनट बात करे और वे उन्हें समझा देंगे; क्योंकि निकारी आदि की प्रक्रिया वे खुद नहीं कर पाएँगी, और उन्हें करनी भी नहीं चाहिए, क्योंकि वे खुद पीड़ित हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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