आपके कुल भैरव कौन हैं — कुल देवता, कुल देवी और काल भैरव अष्टमी पर सदस्यों का लाइव

काल भैरव अष्टमी से पहले कुल भैरव पर लाइव प्रश्नोत्तर।

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Questions this answers

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01

क्या किसी परिवार के कोई कुल भैरव ही न हों, ऐसा हो सकता है?

बिना कुल भैरव के परिवार का होना असंभव

· 00:15–00:36 · Also a question

नहीं। वक्ता कहते हैं कि लोग इस भ्रम में पड़ते हैं कि कुल भैरव केवल वहीं होते हैं जहाँ घर में भगवती की पूजा कुल शक्ति के रूप में होती है। और यह मानना बहुत बड़ा भ्रम है कि कुल भैरव होते ही नहीं। ऐसा हो ही नहीं सकता।

वक्ता शुरुआत में वह भ्रम बताते हैं जिसे वे दूर करना चाहते हैं: क्या कुल भैरव केवल उसी घर में होते हैं जहाँ भगवती की पूजा होती है, जहाँ उनके किसी स्वरूप की पूजा कुल शक्ति के रूप में हो रही है। वे कहते हैं कि एक और बहुत बड़ा भ्रम है — कि कभी-कभी कुल भैरव होते ही नहीं। ऐसा हो ही नहीं सकता।

02

गृहस्थ को अक्सर यह क्यों पता नहीं होता कि उसके कुल भैरव कौन हैं?

स्वरूपों का ज्ञान खो जाता है, पर रक्षा करने वाला गण नहीं

· 00:37–01:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ को उन स्वरूपों का ज्ञान न हो, यह बिल्कुल हो सकता है। पर जब भी कोई विशेष संकट आने वाला होता है, और आप घर की किसी शक्ति को समर्पित साधना और सेवा-पूजा कर रहे होते हैं, तब उस विपत्ति से बचाने के लिए जो शक्ति सबसे पहले तैयार रहती है, वह उस आराध्य का, उस कुल शक्ति का सबसे समर्पित गण होता है — और वे भैरव के रूप में खड़े होते हैं।

03

कुल भैरव का काल भैरव और बटुक भैरव से क्या संबंध है?

कुल भैरव महान भैरवों के अंशात्मक रूप हैं

· 01:09–01:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जैसे काल भैरव, बटुक भैरव और बाल भैरव हैं, जो महाशक्तियाँ हैं, वैसे ही उनके अंशात्मक रूप में ऐसी शक्तियाँ हैं जिन्हें कुल भैरव का स्थान दिया गया है।

वक्ता कहते हैं कि कुल भैरव इस प्रकार के होते हैं: जैसे काल भैरव हैं, बटुक भैरव हैं, बाल भैरव हैं — ये महाशक्तियाँ हैं। उन्हीं के अंशात्मक रूप में, उनके एक अंश के रूप में, ऐसी शक्तियाँ हैं जिन्हें किसी परिवार में कुल भैरव का स्थान दिया गया है।

04

जब घर में किसी पर देवी की सवारी आती है, तो सबसे पहले कौन सी शक्ति आती है?

किसी भी सवारी पर सबसे पहले कुल भैरव आते हैं

· 01:24–02:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब भी घर की देवी की या घर की किसी शक्ति की सवारी सच में किसी पर आ रही होती है, तो उन पर सबसे पहले कुल के भैरव, यानी रक्षक आते हैं। वे कहते हैं कि यह बात ऐसे हर व्यक्ति पर सौ प्रतिशत लागू होती है, और सुनने वाले इसे मानने या न मानने के लिए स्वतंत्र हैं।

05

देवी के आने से पहले भैरव का आना क्यों ज़रूरी है?

शक्ति के आने से पहले पंचतत्व के शरीर को संतुलित करना होता है

· 02:04–02:35 · Also a question

क्योंकि शरीर पंचतत्व से बना है। वक्ता कहते हैं कि अगर आप पूजन-पाठ करते हैं, तो उस शरीर के तत्व सही अनुपात में होने चाहिए, ताकि जब कुल शक्ति या कोई देवी आप पर आए, तो शरीर में कोई अशुद्ध असंतुलन न रहे और आपको कोई कष्ट न हो। इसी के लिए कुल भैरव सबसे पहले आते हैं — चाहे एक पल के लिए, एक-दो मिनट के लिए, या पाँच-दस मिनट के लिए।

06

कैसे पता चले कि कुल भैरव आ गए हैं?

आते ही लगाया जाने वाला जयकारा

· 02:36–03:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उनका सबसे बड़ा प्रभाव, या उसे देखने का तरीका यह है कि आते ही वे जयकारा लगाते हैं। आप घर में उन्हें किसी भी रूप में पूज रहे हों — वीर के रूप में, किसी देव शक्ति के रूप में, शायद ब्रह्म के नाम से भी — पर देव शक्ति के रूप में सबसे पहले कुल के भैरव ही आते हैं, और यही देखने वाली बात है।

07

शक्ति आने पर कवच का पाठ शरीर पर क्या असर करता है?

कवच पाठ से बँधे दस द्वार

· 03:03–03:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब आप पूजन-पाठ करते हैं, तो शरीर बँध जाता है। अगर आप कवच का पाठ करते हैं, तो सब कुछ बँध जाता है और आपके दसों द्वार बंद हो जाते हैं; और जब दसों द्वार बंद हों, तो न सकारात्मक शक्ति और न नकारात्मक शक्ति बहुत तेज़ वेग से आ सकती है।

वक्ता कहते हैं कि दूसरी बात यह है कि जब आप पूजन-पाठ कर रहे होते हैं, तो आपका शरीर बँधा होता है। अगर आप कवच का पाठ करते हैं, तो सब कुछ बँध जाता है। आपके दसों द्वार बँध जाते हैं। जब दसों द्वार बंद हों, तो चाहे सकारात्मक शक्ति हो या नकारात्मक शक्ति, वे बहुत तेज़ वेग से नहीं आएँगी।

08

जो लोग कोई कवच पाठ नहीं करते, उनके साथ क्या होता है?

आने का वेग और उससे होने वाला असंतुलन

· 03:32–03:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो लोग न कवच पाठ करते हैं, न कोई विशेष पाठ, उन पर जब कोई शक्ति आती है, तो बहुत तेज़ वेग से आती है; और जब इतने वेग से आती है, तो कठिनाई होती है — शरीर असंतुलित हो जाता है और शरीर में बहुत बुरी तरह पीड़ा होती है।

पर वक्ता कहते हैं कि जो लोग कोई कवच नहीं पढ़ते, कोई विशेष पाठ नहीं करते — उन लोगों पर जब कोई शक्ति आती है, तो बहुत तेज़ वेग से आती है। और जब वेग से आएगी, तो कठिनाई होगी। कठिनाई क्या है? शरीर का असंतुलित होना, और शरीर में बहुत बुरी तरह पीड़ा होना।

09

क्या नियमित पूजा-पाठ करने वालों पर भी बड़ी शक्तियाँ तेज़ वेग से आती हैं?

बड़ी शक्तियाँ: महायोगिनियाँ और त्रिनेत्र स्वरूपा, उपदेव नहीं

· 03:53–04:32 · Also a question

हाँ, वक्ता कहते हैं — पूजा-पाठ करने वालों के साथ भी ऐसा होता है, जब उन पर बड़ी शक्तियाँ आती हैं: भगवती की प्रमुख योगिनियाँ और महायोगिनियाँ, त्रिनेत्र स्वरूपा, यानी ऊँचे स्तर की, ऊँचे कुल की शक्तियाँ, कोई शक्तिपीठ या महाशक्ति, कोई बहुत प्राचीन शक्ति जो उपदेव श्रेणी की नहीं है और जिसका मूल तत्व शुरू से ही शक्ति है।

10

मृत्यु के बाद व्यक्ति का क्या होता है, उसके पूजे हुए देवता के अनुसार?

पूजा के पुण्य से मिलने वाला लोक या पद

· 04:33–08:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे यह पहले स्पष्ट कर चुके हैं: जब हम मनुष्य शरीर पाकर पूजन-पाठ करते हैं, तो जो भी पुण्य कमाते हैं, और जिस देवता को समर्पित होकर पूजा करते हैं, मृत्यु के बाद हमें उस देव या देवी का लोक मिलेगा — या उस स्वरूप को पाकर यहीं इसी लोक में वह पद मिलेगा।

11

पूजा से मृत्यु के बाद मिले दिव्य पद के कर्तव्य क्या होते हैं?

अधिकार मिलने के बाद अपना-पराया नहीं रहता

· 08:07–08:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक बार वह पद और वे अधिकार मिल जाएँ, तो उस समय आप अपना-पराया नहीं देख सकते। जीवित अवस्था में आप कौन थे, आपके माता-पिता और भाई-बहन कौन थे, आपके बेटे-पोते कौन हैं — आप उसी अधिकार के अनुसार चलेंगे जो आपको मिला है।

12

पूजा से मृत्यु के बाद मिला दिव्य पद आत्मा कितने समय तक रखती है?

एक तय अवधि, फिर पुण्य खत्म होता है और नया जन्म होता है

· 08:27–09:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वहाँ भी समय तय होता है — सौ साल हो सकते हैं, पाँच सौ साल हो सकते हैं, बहुत लंबे समय तक भी हो सकता है। पर एक समय आएगा जब वह पद छोड़कर आप या तो नया जन्म लेंगे या आपकी कोई और गति होगी, और आपकी जगह कोई नया आएगा। जब पुण्य खत्म हो जाता है, तो फिर से जन्म लेना पड़ता है।

13

क्या भगवती के लोक की बड़ी योगिनियाँ कभी जन्म लेती हैं?

दिव्य लोक की महातत्व शक्तियाँ

· 09:05–09:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि महातत्व से युक्त शक्तियाँ — भगवती के लोक की योगिनियाँ — इस लोक की हैं ही नहीं, इस ब्रह्मांड के मृत्यु लोक की नहीं हैं। वे दिव्य लोक की हैं, और वे कभी जन्म नहीं लेंगी। यह असंभव है; केवल किसी कारण से, लीला से, उन्हें जन्म लेना पड़े तो पड़े, वरना नहीं लेंगी।

14

क्या किसी बड़े अनुष्ठान के दौरान कोई दिव्य शक्ति साधक के साथ जुड़ सकती है?

गोवर्धन पर नौचंडी अनुष्ठान और प्रसन्न हुई दिव्य शक्ति

· 09:38–10:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब कोई मनुष्य बहुत बड़ा अनुष्ठान करता है — जैसे उन्होंने अभी गोवर्धन पर्वत पर, गायों के बीच, श्री कृष्ण के स्थान पर नौचंडी अनुष्ठान किया था — तो उस क्षेत्र की कोई दिव्य शक्ति प्रसन्न होकर उस साधक के साथ चलना चाह सकती है, उससे पूजा पाना और उसके साथ जन-कल्याण का काम करना चाह सकती है।

15

अनुष्ठान से प्रसन्न हुई दिव्य शक्ति साधक को अपना परिचय कैसे देती है?

साधना के समय दिव्य शक्ति का परिचय, और बाद में बनने वाला मंदिर

· 10:24–11:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब वह प्रसन्न होकर आती है और सामने वाला व्यक्ति साधक है, और गुरु कृपा से कुछ मिला हुआ है, तो वह साधना के समय अपना परिचय देगी: मैं इस स्वरूप में आई हूँ; अगर तुम चाहो तो मुझे स्थान दो, मैं इस तरह के काम में अपना योगदान देना चाहती हूँ और तुमसे सेवा और पूजन चाहती हूँ।

16

बड़ी शक्ति के आने पर शरीर क्यों जलता है और भारी हो जाता है?

शक्ति का अग्नि तत्व शरीर के पृथ्वी तत्व से मिलता है

· 11:03–11:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसी शक्ति का वेग बहुत तेज़ होता है और उसका भार काफ़ी होता है, क्योंकि वह कभी वायु तत्व से युक्त नहीं होगी, बल्कि अग्नि तत्व से युक्त होगी। चूँकि वह मनुष्य शरीर पर आ रही है, जिसमें सबसे ज़्यादा पृथ्वी तत्व है, तो पृथ्वी और अग्नि के मिलने से शरीर बहुत गर्म और बहुत भारी हो जाता है — और ऐसी शक्तियों के जाने के बाद भी दो-तीन दिन शरीर दुखता है।

17

अनुष्ठान से प्रसन्न दिव्य शक्ति का आना अपने पीछे क्या छोड़ जाता है?

दिव्य बना शरीर, और उसके बाद माँगा जाने वाला आचरण

· 11:45–11:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह जान लीजिए: जब भी इस तरह की शक्ति किसी शरीर पर आती है, तो वह उस शरीर को अत्यंत दिव्य बनाकर जाती है — और फिर शरीर को उसी तरह रखना पड़ता है। अगर आप अपना आचरण, चाल-चलन और व्यवहार उसी तरह नहीं रखते, तो वह भी आपका साथ नहीं देती।

पर यह जान लीजिए, वक्ता कहते हैं: जब भी इस तरह की शक्ति किसी शरीर पर आ रही होती है, तो वह उस शरीर को अत्यंत दिव्य बनाकर जाती है। और उसी तरह अपना शरीर भी रखना पड़ता है। अगर आप अपना आचरण, अपना चाल-चलन और अपना व्यवहार उस तरह नहीं रखते, तो वे भी अपना साथ नहीं देतीं।

18

कभी-कभी शक्ति शरीर पर आती है पर बोलती क्यों नहीं?

शरीर में असंतुलित ऊर्जा बोलने नहीं देती

· 11:59–12:25 · Also a question

वक्ता, केवल सकारात्मक शक्तियों की बात करते हुए — कुल शक्ति, लोक शक्ति, किसी स्थान की शक्ति — कहते हैं कि अगर आपके शरीर की ऊर्जा संतुलित नहीं है, आपके पंचतत्व संतुलित नहीं हैं, तो उस अवस्था में वह बोलने में सक्षम नहीं होगी। वह आएगी, रोएगी और चली जाएगी।

19

किसी तांत्रिक का लगाया बंधन, या वचनबद्धता, शक्ति को शरीर से बोलने से रोक सकती है।

तांत्रिक का लगाया बंधन, और वचनबद्धता

· 12:26–12:57

वक्ता कहते हैं कि दूसरा कारण यह है कि आप पर भगतवाल के किसी साधक ने, किसी तांत्रिक ने, या किसी और कारण से बंधन लगा दिया हो; या किसी को पता चल गया हो कि आप पर देव शक्ति आती है, और उसने किसी तरह का बंधन या वचन लेकर और चित्रपाल का पूजन देकर रोक लगा दी हो। तब वह उस वचनबद्धता के कारण बोलने में सक्षम नहीं होगी।

20

भैरव शब्द का असल में क्या अर्थ है?

भरण-पोषण करने वाले के रूप में भैरव

· 12:58–13:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भैरव का अर्थ है जो भरण-पोषण करे, जो रक्षा करे। इसलिए हनुमान जी भी भैरव हो जाते हैं — ऐसा नहीं है कि भैरव का अर्थ केवल वही भैरव हैं जिन्हें हम आमतौर पर जानते हैं।

21

क्या भैरव जी के अलावा दूसरे देवता भी भैरव का पद सँभाल सकते हैं?

कई स्थानों पर हनुमान जी और शिव भैरव के रूप में

· 13:27–13:48 · Also a question

हाँ। वक्ता कहते हैं कि भैरव का स्वरूप ऐसा नहीं है कि भैरव का अर्थ केवल वही भैरव जी हैं जिन्हें हम जानते हैं। भैरव का अर्थ है जो भरण-पोषण करे, जो रक्षा करे। बहुत से स्थानों पर हनुमान जी भैरव जी के रूप में हैं, और बहुत से स्थानों पर स्वयं शिव जी भैरव के रूप में हैं — इसके अलावा भैरव जी के अपने मूल स्वरूप, अलग-अलग तरह के भैरव, तो हैं ही।

22

अगर घर में केवल हनुमान जी की पूजा होती है, तो कुल भैरव कौन हैं?

कुल भैरव के रूप में हनुमान जी, और बटुक भैरव की सांकेतिक पूजा

· 13:49–14:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आपके यहाँ हमेशा भगवती की सेवा-पूजा हुई है और साथ में हनुमान जी पूजे जाते हैं, किसी और देव की पूजा नहीं होती, तो सूक्ष्म, सांकेतिक रूप में बटुक भैरव की पूजा कीजिए, क्योंकि चौकी में सब विराजमान होते हैं — पर मुख्य भैरव वही हनुमान जी होंगे जो पहले से पूजे जा रहे हैं: वही आपके कुल भैरव बन गए हैं।

23

उत्तर प्रदेश और बिहार में देवी के साथ सती और ब्रह्म का होना क्या बताता है?

कुल देवी के रूप में सती और कुल देवता के रूप में ब्रह्म

· 14:11–14:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग बताते हैं कि किसी पर देवी खेल रही हैं और देवी के साथ सती माँ हैं, और उनके साथ कोई ब्रह्म हैं। अगर सती और ब्रह्म दोनों पूजे जाते हैं और दोनों सात्विक और देव गुण से युक्त हैं, तो सती आपकी कुल देवी बन गई हैं और उनके साथ वाले ब्रह्म आपके कुल देवता बन जाते हैं — पर वे देव होने चाहिए, पिशाच और राक्षस नहीं।

24

देव श्रेणी के ब्रह्म को पिशाच या राक्षस से कैसे अलग पहचानें?

देव श्रेणी के ब्रह्म के लक्षण

· 14:40–15:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि देव श्रेणी के ब्रह्म हमेशा गायत्री और जनेऊ से बलवान होंगे, सात्विकता से व्यवहार करेंगे, अपनी बात के बहुत पक्के होंगे, कभी गलत काम को बढ़ावा नहीं देंगे, और आपको देवी-देवताओं की पूजा की ओर ज़ोर देकर ले जाएँगे — बार-बार शिव जी और दुर्गा जी की पूजा करने को कहेंगे, गलत रास्ते पर जाने पर रोकेंगे, शिखा और जनेऊ के नियम रखने को कहेंगे, और हमेशा आपके साथ खड़े रहेंगे।

25

अगर किसी नकारात्मक शक्ति को केवल शांत करने के लिए घर में बिठा दिया जाए तो क्या होता है?

पिशाच को देव मानकर पूजना

· 15:13–15:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर वे नकारात्मक हैं और आपने उन्हें केवल शांत करने के लिए पूजा है — किसी ने कहा और आपने बिठा दिया — तो बाद में वे बहुत परेशानी देंगे। अगर वे राक्षस तत्व नहीं छोड़ पाए हैं, अगर वे पिशाच हैं और आप उन्हें देव मानकर पूज रहे हैं, तो उस अवस्था में उन्हें पहचानने के लिए कोई समर्पित भक्त चाहिए।

26

क्या ब्रह्म को देव या भैरव के रूप में स्वतंत्र स्थान दिया जा सकता है?

भैरवत्व देवी द्वारा दिया गया अधिकार है

· 15:31–15:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अपनी सोच से कभी ब्रह्म को देवता या भैरव के रूप में स्वतंत्र स्थान न दें — कुछ भी करें या समझें, तो उनकी बात पूरी तरह समझकर ही, यह भी कि कौन भैरव हो सकता है और कौन नहीं। ऐसा नहीं है: भैरव का अधिकार देवी देती हैं।

27

जब ब्रह्म किसी की नहीं सुनते, तो उन्हें कौन मना सकता है?

केवल बड़ी भवानी, जगदंबा स्वरूप, की बात मानी जाती है

· 15:58–16:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब ब्रह्म किसी की बात नहीं मानते, तब वे बड़ी भवानी की सुनते हैं — यानी वे जो बिल्कुल इस लोक की देवी नहीं हैं, दिव्य लोक की महाशक्ति, जगदंबा भगवती दुर्गा। काली जी के सेवक उन्हें तरह-तरह की मंत्र विद्या या तामसिक विद्या से परेशान कर सकते हैं, पर किसी देव शक्ति का दिल से मानना केवल और केवल दुर्गा जी, बड़ी भवानी, जगदंबा स्वरूप, त्रिनेत्र की कृपा से होता है, जिनकी कृपा से वे रुकते हैं।

28

अगर ब्रह्म का पिंड बिना किसी देवता के ऊपर रहे स्थापित कर दिया जाए तो क्या होता है?

स्वतंत्र रूप से बिठाए गए ब्रह्म का जाल

· 16:28–16:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर ज़िद में आकर किसी ब्रह्म ने परिवार को इतना परेशान किया कि वे किसी देवी-देवता के अधीन नहीं रहे — न शंकर जी का मंदिर बनवाया, न दुर्गा जी का, कुछ नहीं, हनुमान जी भी नहीं, और सीधे उस ब्रह्म का पिंड बिठा दिया — तो यहाँ आप फँस जाएँगे। अब वे आपको अपनी मर्ज़ी से चलाएँगे।

29

परिवार में किस तरह की गलती ब्रह्म को भड़काती है?

कुल की प्रकृति के विरुद्ध विवाह

· 16:58–17:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि प्रेम विवाह आम बात है, और दूसरे कुल में विवाह शायद माफ़ भी हो जाए; पर घर की प्रकृति के विरुद्ध विवाह — जहाँ लहसुन-प्याज़ नहीं खाया जाता और मांस, मछली या शराब का सवाल ही नहीं, और ऐसे घर से लड़की कुल में आए जहाँ ये सब होता है — तो ब्रह्म उपद्रव करेंगे, और उन दोनों के साथ कुछ हो या न हो, आपके कुल और परिवार में परेशानी होगी।

30

अगर ब्राह्मण लड़की ऐसे कुल में विवाह करे जिसके रीति-रिवाज उसके परिवार की प्रकृति के विरुद्ध हों, तो क्या होता है?

ब्रह्म के होने पर लगने वाला दोष

· 17:42–18:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ठीक इसी तरह, जब ब्राह्मण कुल की लड़की किसी दूसरे कुल में जाती है और वहाँ इस तरह के काम होते हैं, तो ब्रह्म के होने से दोष ज़रूर लगता है। वे पूरे परिवार को अच्छी तरह परेशान करते हैं; और जितना मनाना है, मनाया जा रहा है, पर यह उन पर निर्भर है।

31

ब्रह्म के बारे में सबसे बड़ी नकारात्मक बात क्या है?

ब्रह्म को मनाने की कोई तय व्यवस्था नहीं

· 18:20–18:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ब्रह्म की सबसे नकारात्मक बात उन्हें मनाने की व्यवस्था ही है। गलती छोटी हो या बड़ी, आप अपने हिसाब से हाथ जोड़े खड़े रह सकते हैं — पर वे कब मानेंगे, यह किसी के हाथ में नहीं।

वक्ता कहते हैं कि ब्रह्म की सबसे नकारात्मक बात वह व्यवस्था है जिससे उन्हें मनाया जाता है। गलती छोटी हो, गलती बड़ी हो — अपने हिसाब से आप हाथ जोड़े खड़े रह सकते हैं। पर वे कब मानेंगे? यह किसी के हाथ में नहीं है।

32

क्या कोई तांत्रिक ब्रह्म को ज़बरदस्ती मना सकता है?

तंत्र विद्या से ज़बरदस्ती मनाना और एक प्रतिशत चूक का खतरा

· 18:29–18:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऊँचे स्तर के सेवक और साधक, तंत्र के जानकार, तंत्र विद्या से उन्हें ज़बरदस्ती बाँधकर और खींचकर मना सकते हैं। पर अगर एक प्रतिशत भी चूक हो, और ज़बरदस्ती ऐसा काम करने में दोष उन्हीं का रहा हो, तो वे तुरंत उस व्यक्ति पर, जिसने ज़बरदस्ती मनाया, या उसके परिवार पर वार करते हैं। यह खेलने की चीज़ नहीं है।

33

अगर हनुमान जी कुल देवता हैं पर कुल देवी का पता नहीं, तो क्या करना चाहिए?

सेवा-पूजा में हनुमान जी के साथ भगवती को बिठाना

· 18:58–19:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आपके घर में हनुमान जी पूजे जाते हैं, तो वे कुल देवता बन गए हैं; और अगर आपको कुलदेवी का नाम पता है तो ठीक है, पर अगर आपको केवल इतना पता है कि कुल में हनुमान जी पूजे जाते हैं, तो ऐसे समय में सेवा-पूजा में हनुमान जी के साथ भगवती को स्थान दीजिए।

34

अगर कोई पता न हो तो हनुमान जी के साथ किन भगवती की पूजा करें?

सबसे पास के शक्तिपीठ की भगवती

· 19:56–20:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर घर में हनुमान जी पूजे जाते हैं, तो उनके साथ उस शक्तिपीठ की भगवती की पूजा कीजिए जो आपके घर के पास है, अगर आपको नहीं पता कि कुलदेवी कौन हैं।

तो अगर घर में हनुमान जी पूजे जाते हैं, वक्ता कहते हैं — उन्होंने थोड़ी देर के लिए लाइव रोका था — तो हनुमान जी के साथ, आपके घर के पास जो भी शक्ति पीठ है, उन भगवती की पूजा कीजिए, अगर आपको नहीं पता कि वे कौन हैं।

35

अगर देवी पूजी जाती हैं पर भैरव का पता नहीं, तो किसकी पूजा करें?

स्वाभाविक रूप से कुल भैरव के रूप में बटुक भैरव

· 20:10–20:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर देवी पूजी जाती हैं और आपको नहीं पता कि भैरव जी कौन हैं, तो कुल भैरव के रूप में बटुक भैरव जी की पूजा कीजिए।

अगर देवी पूजी जाती हैं, वक्ता कहते हैं, और आपको नहीं पता कि भैरव जी कौन हैं, तो कुल भैरव के रूप में बटुक भैरव जी की पूजा कीजिए।

36

क्या आप स्वयं देवी से पूछ सकते हैं कि भैरव कौन हैं?

सवारी के समय पूछना, और यह उत्तर कि स्थान अभी खाली है

· 20:17–20:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर किसी पर भगवती की या आपके घर की देवी की सवारी आ रही है, तो उनसे साफ़ पूछिए कि भैरव के रूप में किसकी पूजा करें। अगर वे कहें कि अभी तक भैरव के पद पर किसी को स्थान नहीं दिया गया है, तो बटुक भैरव कीजिए।

अगर किसी पर भैरव जी की, भगवती की, आपके घर की देवी की सवारी आ रही है, वक्ता कहते हैं, तो उनसे साफ़ पूछिए: भैरव के रूप में किसकी पूजा करनी है? अगर वे कहें कि अभी तक भैरव के पद पर किसी को स्थान नहीं दिया गया है, तो आपको बटुक भैरव करने चाहिए।

37

क्या घरों में पूजे जाने वाले वीर भैरव गिने जाते हैं?

लोक वीर जो भैरव के स्थान पर हो भी सकते हैं और नहीं भी

· 20:31–20:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बहुत से घरों में लोक वीरों की सेवा-पूजा होती है, और वीर को भी भैरव का स्थान दिया जाता है, क्योंकि भैरव का स्थान उन देवों का है जो रक्षा करते हैं। तो जो वीर देवी के साथ हैं, वे भी भैरव के रूप में हैं — और बहुत बार नहीं भी होते।

वीर, वक्ता कहते हैं — लोक वीर — बहुत से घरों में सेवित और पूजित होते हैं। वीर को भी भैरव का स्थान दिया जाता है, क्योंकि भैरव का स्थान उन देवों का है जो रक्षा करते हैं। तो जो वीर देवी के साथ हैं, वे भी भैरव के रूप में हैं — और बहुत बार नहीं भी होते।

38

क्या कभी मसान को कुल भैरव के रूप में पूजा जा सकता है?

मसान को भैरव का स्थान देने पर पूरी रोक

· 20:46–20:59 · Also a question

नहीं। वक्ता कहते हैं कि कभी भी, गलती से भी नहीं — अगर आपके घर में भगतवाल की चीज़ें हैं और उनमें कोई मसान या इस तरह की चीज़ें हैं, और आपने उन्हें भैरव के रूप में पूजा — तो यह गलत हो जाएगा। इन सब बातों का ध्यान रखना पड़ता है।

कभी भी, गलती से भी नहीं, वक्ता कहते हैं — अब अगर आपके घर में भगतवाल की चीज़ें हैं, और उनमें कोई मसान या इस तरह की चीज़ें हैं, और आपने उन्हें भैरव के रूप में पूजा, तो यह गलत हो जाएगा। इन सब बातों का भी आपको ध्यान रखना है।

39

जो नया साधक पता न लगा पाए कि उसके कुल भैरव और कुलदेवी कौन हैं, वह क्या करे?

सुरक्षित रास्ता: भगवती, महादेव और बटुक भैरव

· 21:00–21:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप नए-नए साधना कर रहे हैं और यह नई जानकारी ले रहे हैं कि आपके कुल भैरव और कुल देवी कौन हैं, और यह स्पष्ट नहीं हुआ है, तो कोई कठिनाई नहीं: भगवती और महादेव की सेवा-पूजा कीजिए, बटुक भैरव की सेवा-पूजा कीजिए, और भैरव जी के रूप में दी गई पूजा उसी को मिलेगी जिसे मिलनी है।

40

क्या कोई नकारात्मक शक्ति शिवलिंग पर चढ़ाई गई पूजा ले सकती है?

कौन से शिवलिंग सुरक्षित हैं — नर्मदेश्वर या प्राण-प्रतिष्ठित

· 21:23–21:48 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शिवलिंग पर की गई पूजा कोई नकारात्मक शक्ति कभी नहीं ले सकती — पर केवल नर्मदेश्वर शिवलिंग या मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठित शिवलिंग। अगर आप खुद कोई पत्थर उठाकर रख दें और उसकी पूजा करें, तो वहाँ कुछ नहीं कहा जा सकता; वहाँ कुछ भी हो सकता है।

41

काल भैरव अष्टमी 16 दिसंबर को है, सुबह 5:30 बजे से उस पूरे दिन।

16 दिसंबर की अष्टमी और उसका समय

· 21:49–22:09

वक्ता कहते हैं कि इस बार काल भैरव अष्टमी 16 दिसंबर को है; अष्टमी सुबह 5:30 बजे भोर से अगले दिन तक रहेगी, इसलिए पूरा 16 दिसंबर भैरव अष्टमी है। अगर आपको अपने कुल के भैरव के बारे में जानकारी नहीं है, तो बटुक भैरव के रूप में उनकी सेवा-पूजा कीजिए, या जैसा उन्होंने अब तक समझाया है।

42

भैरव का विधि-विधान कितनी बार करना चाहिए?

हर अष्टमी, वरना घर का कोई रक्षक नहीं

· 22:10–23:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उनका विधि-विधान हर अष्टमी को ज़रूर करना चाहिए, उसी तरह जैसे हम रोज़ भगवती की पूजा करते हैं। अगर आप भैरव की पूजा नहीं करते, तो घर में रोकने और रक्षा करने वाला कोई नहीं है। रक्षा पाने के लिए भैरव जी की पूजा ज़रूरी है।

43

सोखा बाबा और गौरैया बाबा कौन हैं?

सोखा बाबा के रूप में पूजे जाने वाले वीरभद्र, और गौरैया बाबा के रूप में उनके दूसरे गण

· 23:11–23:38 · Also a question

सोखा बाबा, गौरैया बाबा और बन्नी परमेश्वरी कौन हैं, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि शिव जी के प्रमुख गणों में एक वीरभद्र महाराज हैं, और वीरभद्र ही बाद के समय में उत्तर प्रदेश और बिहार क्षेत्र में सोखा बाबा के रूप में पूजे जाने लगे; और गौरैया बाबा के रूप में उनके दूसरे गण — पर ये दो रूपों में पूजे जाते हैं।

आपने पूछा है, वक्ता कहते हैं, गौरैया बाबा के बारे में। शिव जी के प्रमुख गणों में एक गण वीरभद्र महाराज हैं। वीरभद्र ही बाद के समय में उत्तर प्रदेश और बिहार क्षेत्र में सोखा बाबा के रूप में पूजे गए। और गौरैया बाबा के रूप में उनके दूसरे गण — पर ये दो रूपों में पूजे जाते हैं।

44

अलग-अलग क्षेत्रों में कुल शक्तियों की पूजा इतनी मिलती-जुलती क्यों है?

एक ही तरीका, अलग नाम, और अक्सर कोई नाम ही नहीं

· 23:39–24:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप कहीं भी जाएँ — राजस्थान, उत्तराखंड, बिहार, ये पूर्वी और उत्तरी क्षेत्र — कुल की शक्ति की पूजा का तरीका लगभग हर जगह एक जैसा है, बस उन्नीस-बीस का फ़र्क है। ज़्यादा से ज़्यादा नाम पता होता है, और बहुत बार नाम भी नहीं; छत्तीसगढ़ में भी ऐसा ही है। स्वरूप थोड़ा बदलता है और नाम बदलता है, पर पूजा का तरीका लगभग एक जैसा हो जाता है।

45

क्या गौरैया बाबा और बन्नी माता के लिए मंत्र सहित पूरी विधि उपलब्ध है?

गौरैया बाबा और बन्नी माता की मंत्र सहित कोई नियमित विधि नहीं

· 24:15–24:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर उनकी पूरी, नियमित जानकारी मंत्र सहित माँगी जाए, तो वह उस स्वरूप में नहीं मिलेगी — न गौरैया बाबा की, न बन्नी माता की। पर उनके मुख्य स्वरूपों में जाया जा सकता है: सोखा बाबा का वीरभद्र पर आता है।

इनकी, वक्ता कहते हैं, अगर मंत्र सहित पूरी विधिवत जानकारी माँगी जाए, तो वह उस स्वरूप में नहीं मिलेगी। न गौरैया बाबा की, और न बन्नी माता की। पर अगर आप उनके मुख्य स्वरूप में जाएँ, तो सोखा बाबा का वीरभद्र पर आता है।

46

गौरैया बाबा और बन्नी माता के मूल रूप क्या हैं?

भृंगी, और उत्तराखंड से लाया गया कालिका स्वरूप

· 24:29–24:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गौरैया बाबा का स्वरूप भृंगी का है; और बन्नी परमेश्वरी के दो स्वरूप हैं। एक बन्नी माता हैं, जिन्हें उत्तराखंड से लाया गया था, और उनके उस क्षेत्र में आने की पूरी कथा है — वह कालिका का स्वरूप है, भगवती का वही स्वरूप जिसकी कालिका योगिनी साधना उन्होंने दी है।

47

बन्नी परमेश्वरी और बंदी परमेश्वरी में क्या अंतर है?

पाताल कालिका और भद्रकाली के रूप में बंदी माता

· 24:56–25:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यहाँ अंतर करना पड़ेगा, क्योंकि नामों से भ्रम होता है: बंदी माता पाताल कालिका हैं, और वे भद्रकाली के रूप में भी हैं।

दूसरी, वक्ता कहते हैं, बंदी माता हैं; अब यहाँ आपको अंतर करना होगा। बन्नी परमेश्वरी है या बंदी परमेश्वरी? नाम के कारण थोड़ी गड़बड़ हो जाती है। बंदी माता पाताल कालिका हैं। और वे भद्रकाली के रूप में भी हैं।

48

जहाँ सोखा बाबा पूजे जाते हैं, वहाँ कुल देवी कौन हैं?

जोड़े के रूप में कुल देवता वीरभद्र और कुल देवी भद्रकाली

· 25:11–26:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वीरभद्र, यानी सोखा बाबा, के साथ लोगों ने अब सती माँ की भी पूजा करवाई है, या बाद के समय में वे पूजी जाने लगीं; पर सोखा बाबा के साथ मुख्य पूजा भद्रकाली की होगी, क्योंकि भद्रकाली वीरभद्र की शक्ति, उनकी विवाहित पत्नी हैं। जहाँ सोखा बाबा पूजे जाते हैं, वहाँ भद्रकाली कुलदेवी बन जाती हैं; जहाँ बंदी परमेश्वरी पूजी जाती हैं, वहाँ सोखा बाबा अपने आप कुल देवता बन जाते हैं।

49

गुड़गाँव की देवियों की पूजा किस क्रम में होती है?

शीतला माता से पहले कौशांबी माता, बाद में मसानी माता

· 26:12–26:25 · Also a question

गुड़गाँव की शीतला माता के बारे में पूछे जाने पर वक्ता सुनने वाले की बात की पुष्टि करते हैं: उनसे पहले गुड़गाँव की कौशांबी माता पूजी जाती हैं, और शीतला माता के बाद उसी स्थान की मसानी माता पूजी जाती हैं। वे कहते हैं कि उस स्थान का नियम वैसा ही है जैसा सुनने वाले ने बताया, और कुलदेवी सच में शीतला माता ही हैं।

गुड़गाँव की शीतला माता हैं; उनसे पहले गुड़गाँव की कौशांबी माता पूजी जाती हैं, और शीतला माता के बाद उसी स्थान की मसानी माता पूजी जाती हैं। हाँ, यह ठीक है, वक्ता कहते हैं — आप उस स्थान के नियम के अनुसार पूछ रहे हैं, और यह सही है। कुलदेवी शीतला माता ही हैं।

50

जब तीन कुल देवियाँ जुड़ी हों, तो रोज़ की पूजा क्या हो?

विग्रह स्थापित किए बिना, नाम से पूजा

· 26:26–26:55 · Also a question

एक सुनने वाले ने पूछा, जो घर में दुर्गा माता का विग्रह रखते हैं और सबसे ज़्यादा उन्हीं की पूजा करते हैं। वक्ता कहते हैं कि जब तक आपने श्री विग्रह नहीं रखा है, उसे रखना ज़रूरी नहीं; जिन पर आप पूजा कर रहे हैं, उसी पर उनके नाम से पूजा कीजिए। विग्रह रखने के बाद नियम बदल जाते हैं — जैसे गुड़गाँव की मसानी को घर में नहीं रखा जा सकता, हालाँकि शीतला माता को रखा जा सकता है।

51

कोल्हापुर की महालक्ष्मी के भैरव कौन हैं?

सप्तशती में अठारह भुजा और दस भुजा वाले रूप

· 26:56–27:49 · Also a question

कोल्हापुर की महालक्ष्मी माता के बारे में पूछे जाने पर वक्ता दुर्गा सप्तशती से शुरू करते हैं: महिषासुर वध के समय भगवती को अठारह भुजाओं वाली दिखाया गया है, और वे वहाँ दो स्वरूपों में थीं। कोल्हासुर राक्षस के वध के समय, जिससे कोल्हापुर का नाम है, वे महालक्ष्मी स्वरूप में, अठारह भुजाओं वाली महिषासुर मर्दिनी हैं; पर जब दूसरे कल्प में उन्होंने महिषासुर का वध किया, तो वे उसी स्थान पर दस भुजाओं वाले रूप में तुलजा भवानी के रूप में स्थापित हैं।

52

दस भुजाओं वाली तुलजा भवानी के भैरव कौन हैं?

तंत्र में नीलकंठ भैरव, व्यवहार में काल भैरव

· 27:50–28:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप दस भुजाओं वाली तुलजा भवानी की ओर जाएँ, तो दस भुजा वाले रूप के भैरव नीलकंठ भैरव हैं। पर वहाँ मुख्य रूप से काल भैरव की पूजा होती है; तंत्र के अनुसार नीलकंठ भैरव की पूजा तब होती है जब उस रूप का मंडल पूजन किया जाता है।

तो इस रूप के अनुसार, वक्ता कहते हैं, अगर आप दस भुजाओं वाली तुलजा भवानी में जाएँ, तो दस भुजा वाले रूप के भैरव नीलकंठ भैरव हैं। पर वहाँ मुख्य रूप से केवल काल भैरव की ही पूजा होती है। तंत्र के अनुसार नीलकंठ भैरव की पूजा तब होती है जब उनका मंडल पूजन होता है।

53

कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर में भैरव के रूप में कौन खड़े हैं?

भैरव और द्वारपाल के रूप में गणपति, और स्वरूप-भेद से नारायण

· 28:09–28:54 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप तंत्र ग्रंथों के अनुसार चलें, तो यह जानकर हैरान होंगे कि वहाँ गणपति भैरव के रूप में, द्वारपाल के रूप में हैं; और अगर स्वरूप-भेद से चलें, तो नारायण उनके भैरव निकलते हैं। पुराणों के अनुसार गणेश जी स्वयं नारायण का स्वरूप हैं, इसलिए थोड़ा अंतर आ जाता है। वे जोड़ते हैं कि यह जानकारी उन्हें महालक्ष्मी मंदिर के पुजारियों से मिली, जब सुनने वाले ने पहले पूछा था।

54

मंडप पूजन में द्वार पर किसकी पूजा होती है?

देवी मंडप के द्वार पर गणपति और भैरव दोनों

· 28:55–29:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि किसी के भी, किसी भी देवी के मंडप पूजन में वहाँ गणपति और भैरव दोनों पूजे जाते हैं। महालक्ष्मी मंदिर में दोनों ओर दो गणपतियों का पूजन होता है; वे दोनों नाम नहीं बता सकते, पर वहाँ भैरव के रूप में गणपति ही स्थापित हैं।

किसी के भी, किसी भी देवी के मंडप पूजन में, वक्ता कहते हैं, वहाँ गणपति और भैरव दोनों पूजे जाते हैं। महालक्ष्मी मंदिर में दोनों ओर दो गणपतियों का पूजन होता है। वे कहते हैं कि वे दोनों के नाम नहीं बता सकते। तो वहाँ भैरव के रूप में गणपति ही स्थापित हैं।

55

क्या शास्त्र गणपति के भैरव के स्थान पर होने का समर्थन करते हैं?

देवी लोकों के वर्णन में द्वार पर गणपति

· 29:17–29:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब भी आप किसी ग्रंथ या पुराण में देवी के लोक का वर्णन पढ़ें, तो वहाँ भी यह बात दिखती है: भगवती के अनगिनत स्वरूप और अनगिनत लोक हैं, और जिस भी लोक का वर्णन पढ़ें, बहुत बार द्वार पर भैरव की जगह गणपति विराजमान दिखते हैं। वे कहते हैं कि इससे उनकी पहले कही बात की पुष्टि होती है — कि ज़रूरी नहीं कि भैरव के रूप में केवल भैरव जी ही हों; हनुमान जी हो सकते हैं, गणपति हो सकते हैं।

56

जो खंडोबा को पूजते हैं, क्या उनके कुल भैरव खंडोबा हैं?

भैरव जी के रूप में खंडोबा

· 29:53–30:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तुलजा भवानी की बात बताई जा चुकी है; और खंडोबा सच में कुल भैरव हैं — भैरव जी के रूप में खंडोबा ही पूजे जाते हैं, क्योंकि खंडोबा स्वयं भैरव जी का एक रूप हैं।

तुलजा भवानी का, वक्ता कहते हैं, बताया जा चुका है। खंडोबा कुल भैरव हैं ही। भैरव जी के रूप में खंडोबा ही पूजे जाते हैं। खंडोबा, वक्ता कहते हैं, स्वयं भैरव जी का एक रूप हैं।

57

महाभैरव मंत्र में क्या-क्या आता है?

कुल, बटुक, काल और कपाल भैरव के लिए एक मंत्र

· 30:09–30:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चैनल पर डाला गया महाभैरव मंत्र ठीक इसी काम के लिए है: महाभैरव मंत्र से कुल भैरव, बटुक भैरव, काल भैरव और कपाल का पूजन सब पूरा हो जाता है, और इससे आप किसी भी भैरव की, भैरव जी के किसी भी स्वरूप की पूजा कर सकते हैं।

58

क्या तिल के तेल का दीपक लंबे समय तक जलाने से बीमार होते हैं?

एक दावा जिसे वक्ता बिना प्रमाण का मानकर नकारते हैं

· 30:58–31:20 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या यह सच है कि तिल के तेल का दीपक लंबे समय तक जलाने से बीमार पड़ते हैं, वक्ता कहते हैं कि उन्होंने अब तक ऐसी बात न कहीं सुनी है न पढ़ी है, और उन्हें इसका कोई शास्त्रीय आधार नहीं पता। अगर ऐसा है, तो यह उनकी जानकारी में नहीं है और उन्हें पता करना होगा; पर ऐसा होना नहीं चाहिए। तिल के तेल से कोई बीमार क्यों पड़ेगा? अशुद्धि हो, तभी बीमार पड़ सकते हैं।

ऐसी बात, वक्ता कहते हैं, उन्होंने अब तक न कहीं सुनी है न पढ़ी है, और इसका कोई शास्त्रोक्त आधार भी उन्होंने अब तक नहीं सुना। अगर ऐसा है, तो यह उनकी जानकारी में नहीं है; इसे देखना पड़ेगा। ऐसा होना नहीं चाहिए। तिल के तेल से कोई बीमार क्यों पड़ेगा? अगर अशुद्धि हो, तभी बीमार पड़ सकते हैं।

59

सरसों के तेल और लाल बट के तेल के बारे में भी ऐसे ही प्रचार वाले दावे किए जाते हैं, जिनके पीछे कोई स्रोत नहीं।

सरसों के तेल और लाल बट के तेल पर प्रचार वाले दावे

· 31:21–31:40

वक्ता कहते हैं कि कुछ दिन पहले एक टिप्पणी आई थी कि सरसों के तेल का दीपक जलाने से शरीर दुखता है, और भगवान जाने ये सब कहाँ से आ रहा है। उससे कुछ दिन पहले लोग लाल बट के तेल का प्रचार करने के लिए कह रहे थे कि और कुछ मत जलाइए — जबकि लोगों को शायद पता भी न हो कि लाल बट के तेल की ज़रूरत कब और कहाँ पड़ती है। वे कहते हैं कि प्रचार के लिए लोग कुछ भी कहेंगे।

60

विंध्य क्षेत्र के बहुत से घरों में पीढ़ियों से तिल के तेल पर अखंड ज्योति जल रही है।

विंध्य क्षेत्र में तिल के तेल पर जलती अखंड ज्योति

· 31:41–32:05

वक्ता कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि यह कहीं लिखा है, और उन्होंने ऐसी बात कभी नहीं सुनी; और जहाँ तक तिल का तेल जलाने की बात है, विंध्य क्षेत्र में जाइए — बहुत से घरों में लंबे समय से अखंड ज्योति जल रही है, और वह तिल के तेल पर ही जल रही है। उन्हें वहाँ कोई बीमार पड़ता नहीं दिखता।

61

सिद्ध चानो बाबा बली कौन हैं?

रजकों के प्रमुख लोक देवता

· 32:06–32:33 · Also a question

लोक देव सिद्ध चानो बाबा बली कौन हैं, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि ये मुख्य रूप से उन लोगों के प्रमुख देवता हैं जो रजक हैं, और उनके घरों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कुल देवता के रूप में इन्हीं की पूजा होती है।

मुख्य रूप से, वक्ता कहते हैं, जो रजक हैं — ये उनके प्रमुख देवता हैं। उनके घरों में कुल देवता के रूप में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, इन्हीं की पूजा होती है। सिद्धो चानो बाबा बली। (वे बाद में समझाते हैं कि रजक वे हैं जो कपड़े धोते हैं।)

62

माता बामती कौन हैं, और बामत कैसे बनती है?

गर्भ में या कुँवारी अवस्था में मरने वाली लड़कियाँ; 52 ब्रह्म का समकक्ष

· 32:34–33:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जैसे ब्रह्म बावन प्रकार के होते हैं — ब्राह्मण परिवारों के लड़के ब्रह्म बने — वैसे ही जो लड़कियाँ किसी कारण से गर्भ में मर जाती हैं, या कुँवारी अवस्था में मर जाती हैं, वे दो तरह की योनि में जाती हैं; और उन दो में से एक बामत है।

63

बामत क्या कर सकती है, और क्या घर में उसकी पूजा करनी चाहिए?

ब्रह्म तक को बाँधना, और सबसे पहले लक्ष्मी को बाँधना

· 33:21–34:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बामत में इतनी क्षमता होती है कि वह ब्रह्म को भी बाँध देती है, और ये बरकत में बहुत बाधा डालती हैं; नाराज़ होने पर, क्योंकि वह बेटी के रूप में रहती है, सबसे पहले लक्ष्मी को बाँधती है। उनके अनुसार, अगर आप मजबूरी में ऐसी शक्तियों को घर में पूज भी रहे हैं, तो उन्हें मुक्त करने की कोशिश होनी चाहिए — पूजा देकर आप उन्हें केवल बाँधते हैं, और लोग मजबूरी में उन्हें घर में बिठा लेते हैं।

64

क्या भगवान का नाम लेने से बुरे कर्म कट सकते हैं?

महाकाल स्तोत्र और कर्मों का कटना

· 34:03–34:15 · Also a question

महाकाल स्तोत्र के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि इसे ज़रूर किया जा सकता है, और अगर आप भगवान का नाम लेंगे तो बुरे कर्म ज़रूर कटेंगे।

ज़रूर, वक्ता कहते हैं, आप महाकाल स्तोत्र कर सकते हैं। बुरे कर्म — अगर आप भगवान का नाम लेंगे, तो कर्म ज़रूर कटेंगे।

65

घर के ब्रह्म स्थान का क्या महत्व है?

वास्तु पुरुष की नाभि के रूप में ब्रह्म स्थान

· 34:16–35:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ब्रह्म स्थान का बहुत बड़ा महत्व है — उस स्थान का नाम ही ब्रह्म स्थान है। वास्तु पुरुष के चित्र में ब्रह्म स्थान नाभि वाला भाग है; और जैसे किसी भी शरीर की नाभि उसका सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जिससे भरण-पोषण होता है, वैसे ही ब्रह्म स्थान आपके घर की नाभि है। अगर इसका पोषण ठीक से हो, तो घर का विकास ठीक से होगा।

66

क्या केवल ब्रह्म स्थान को अच्छा रखना काफ़ी है?

घर के कोने, और वास्तु उपाय की सीमा

· 35:01–35:39 · Also a question

नहीं। वक्ता कहते हैं कि आप ब्रह्म स्थान को बहुत अच्छा रखें — वहाँ तुलसी का पौधा हो, पुराने घरों की तरह वहाँ हनुमान जी की पूजा हो — और ईशान कोण में गंदगी रखें और अग्नि कोण में वॉशरूम बना दें, तो फिर भी परेशानी होगी। वास्तु के अनुसार हर चीज़ अपने सही स्थान पर होनी चाहिए; और उसके बाद भी अगर आप जानबूझकर झगड़ा करें, तो उसका कोई उपाय नहीं।

67

क्या मंत्र अनुष्ठान का जप एक ही बैठक में करना ज़रूरी है?

दिन का जप सुबह और शाम में बाँटना

· 35:40–36:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप कर सकते हैं — दस माला पाँच और पाँच करके की जा सकती हैं। पर अगर आप कोई विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं, तो आपके खाने-पानी की व्यवस्था क्या होगी? सुबह आप उपवास में कर सकते हैं; शाम को खाना खाकर, नमक खाकर, जप कैसे करेंगे? वे कहते हैं कि यह काम केवल नवरात्रि में हो सकता है; बाकी समय में भी हो सकता है, पर तब संकल्प उसी के अनुसार होना चाहिए।

68

क्या जिन स्थानीय देवियों को पुए का भोग दिया जाता है, वे कुलदेवी के ही रूप हैं?

क्षेत्रीय प्रचलन के अनुसार चलना

· 36:15–36:39 · Also a question

एक घर के बारे में पूछा गया जहाँ भ्रामरी और महिषासुर मर्दिनी के अलावा दिवाली, होली पर, और जब बच्चा गर्भ में हो, बाहर की बाहरली को, चौक-चौराहे की शक्ति को और बसंती माता को पुए का भोग दिया जाता है — क्या ये देवियाँ कुलदेवी के ही रूप हैं। वक्ता कहते हैं कि यह चीज़ क्षेत्र के अनुसार चलती है, और वहाँ जो प्रचलन में है, उसी के अनुसार करना चाहिए।

69

माता शाकंभरी के भैरव कौन हैं, और क्या नाहर सिंह भैरव हैं?

भैरव के रूप में सदाशिव; रक्षक और वीर के रूप में नाहर सिंह

· 36:40–37:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर शाकंभरी माता कुलदेवी हैं, तो उनके भैरव केवल सदाशिव होंगे; वह महादेव का एक स्वरूप होगा। वे कहते हैं कि नाहर सिंह भैरव के रूप में नहीं हैं, पर अगर वे घर में रक्षक और वीर के रूप में पूजे जाते हैं — कोई लोक देवता जिसे बाद में किसी कारण से वहाँ बिठाया गया — तो वह अलग बात है।

70

क्या किसी देवता की शक्ति शरीर पर आए बिना भी काम करती है?

सवारी के बिना मिलने वाली कृपा

· 37:26–38:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब आप भरपूर मात्रा में साधना और पूजा करते हैं, तो ये सब चीज़ें अपने आप आपको रास्ता देती हैं; शरीर पर आना ज़रूरी नहीं। यह उनकी इच्छा है — किसी कारण से वे शरीर पर आएँगे, या प्रसन्न होकर, या अगर आप चाहें, या अगर उन्हें कोई काम पूरा करना हो। उनके अपने विचार में, शरीर पर आए बिना उनकी कृपा पाना सबसे बड़ी बात है।

71

क्या संकल्प से किसी देवता की कृपा अपने लिए चुनी जा सकती है?

संकल्प से चुनना और उसे पूरा करना

· 38:13–38:30 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या इन चीज़ों को खुद छुआ या चुना जा सकता है, वक्ता कहते हैं कि आप क्यों नहीं चुन सकते — अपनी इच्छा के अनुसार संकल्प लीजिए और उसे पूरा कीजिए।

और क्या अपने लिए चुना जा सकता है, वक्ता कहते हैं, यह निर्भर करता है। आप क्यों नहीं चुन सकते? जैसी आपकी इच्छा हो, उसी के अनुसार संकल्प लीजिए और उसे पूरा कीजिए।

72

क्या घर के पूजा स्थान पर मूर्ति रखनी चाहिए या यंत्र?

मूर्तियों की पंचायतन व्यवस्था

· 38:31–39:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मूर्ति हमेशा पंचायतन में रखनी चाहिए — एक मुख्य देवी-देवता और उनके साथ बाकी शक्तियाँ। जैसे, अगर आप घर में मुख्य रूप से नारायण की पूजा करते हैं, तो नारायण बीच में होंगे और चारों कोनों में एक ओर भगवती, शिव जी, गणपति जी और सूर्य नारायण: यही पंचायतन है।

73

पंचायतन के देवताओं की रोज़ पूजा कैसे करनी चाहिए?

रोज़ एक मुख्य देवता, बाकी सांकेतिक रूप से और अपने-अपने दिन

· 39:31–39:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबको पूरा पंचायतन रखना चाहिए, एक देवता की मुख्य रूप से पूजा करते हुए और बाकी की सांकेतिक रूप से, और जब उनका अपना मुख्य दिन आए तब उनका विशेष पूजन करते हुए। हनुमान जी का एकमुखी या पंचमुखी विग्रह भी घर में रखा जा सकता है।

इस तरह, वक्ता कहते हैं, आप सबको पूरा पंचायतन रखना चाहिए। एक देवता का मुख्य रूप से पूजन कीजिए, और बाकी का सांकेतिक रूप से; और उनका प्रधान दिन, उनका मुख्य दिन, जब आए, तब उनका विशेष पूजन कीजिए। इन सबका — हनुमान जी का भी — विग्रह, एकमुखी या पंचमुखी हनुमान जी का विग्रह, घर में रखा जा सकता है।

74

किसका यंत्र रखना चाहिए, और कैसा?

आराध्य का एक ठीक से बना यंत्र, बीस रुपये वाला नहीं

· 39:47–40:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मुख्य देवता का यंत्र रखना चाहिए — आपके लिए जो भी देव मुख्य हैं, उनका यंत्र, पूरे विधि-विधान से बना हुआ, ताकि पीढ़ियों तक उसकी पूजा हो सके। बीस रुपये वाला यंत्र नहीं, जो बच्चे की ड्रॉइंग की तरह रंगा हो, और जिस दिन नहलाने ले जाएँ उस दिन रंग उतर जाए। किसी जानकार से अच्छा यंत्र बनवाइए, उसका नियमित अनुष्ठान करवाइए, उसे सिद्ध करवाइए, और केवल उसी एक यंत्र की, अपने आराध्य की, पूजा कीजिए।

75

घर में रखी जाने वाली मूर्ति कितनी बड़ी हो सकती है?

छह इंच की सीमा और बड़ी मूर्ति के साथ आने वाले नित्य नियम

· 40:31–41:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मूर्ति की ऊँचाई छह इंच तक होनी चाहिए; घर में छह इंच से बड़ी मूर्ति रखना मना किया गया है, क्योंकि बड़ी मूर्ति के साथ आपका नियम फिर नित्य का हो जाता है, और घर के सब लोग रोज़ का नियम नहीं निभा सकते। मंदिर का नियम मंदिर में ही ठीक रहता है; घर में रखने पर कठिनाई की संभावना है।

76

अगर फिर भी घर में बड़ी मूर्ति रख लें तो क्या होता है?

बड़ी मूर्ति के साथ शास्त्र के सब नियम जुड़ जाते हैं

· 41:10–41:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप बड़ी मूर्ति रखते हैं, तो आपको उस मूर्ति के साथ शास्त्र में बताए गए सब नियम मानने होंगे। आजकल मंदिरों में जो दिखता है — कहीं भी मंदिर बन गया, उसका नियम चला गया, शिव जी का मंदिर बना और एक लोटा जल चढ़ाया, एक दीपक जलाया और मान लिया कि पूजा हो गई — वह असलियत नहीं है।

77

शिव जी के नित्य पूजन में असल में क्या-क्या होता है?

शिव महापुराण और वायु महापुराण में बताया गया पूरा क्रम

· 41:39–42:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप शिव महापुराण, लिंग महापुराण या वायु महापुराण पढ़ें — शिव महापुराण वायु महापुराण का ही एक भाग है — तो वहाँ ये सब बातें बहुत विस्तार से बताई गई हैं: नित्य पूजन कर्म का द्वार पूजन कैसे होगा, मंडप पूजन कैसे, सांकेतिक शिखर पूजन कैसे, पहले नंदी जी का पूजन कैसे, फिर मंदिर में विराजमान शिव जी के सब गणों का पूजन कैसे — रिंगी, भृंगी, नागराज वासुकी, भैरव जी, महाकाल — फिर भगवती पार्वती, स्कंद जी, गणपति जी, उनका त्रिशूल, उनका डमरू, और उनका पंचानन स्वरूप।

78

शिव महापुराण में बताया गया शिव का पूरा नित्य पूजन क्रम असल में कहाँ होता है?

केवल ज्योतिर्लिंग क्षेत्रों में

· 42:13–42:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इतना पूजन नियमित रूप से होना चाहिए — पर यह पूजन हो कहाँ रहा है? यह केवल वहीं होता है जहाँ ज्योतिर्लिंग क्षेत्र है। बाकी सब जगह लोग बस एक लोटा जल चढ़ाते हैं और उसी में समझते हैं कि पूरा पूजन हो गया। वे कहते हैं कि घर की मूर्ति की जो लंबाई तय की गई है, वह ठीक इसीलिए है कि आपको कोई विशेष विधि-विधान वाला पूजन न करना पड़े।

79

क्या अकाल मृत्यु कुंडली और कर्मों में लिखी होती है?

अकाल मृत्यु टाला जा सकने वाला योग है, लिखा हुआ फ़ैसला नहीं

· 42:34–43:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अकाल मृत्यु का एक योग होता है, और वह योग टाला जा सकता है। उसका नाम ही अकाल है — यानी काल नहीं आया, समय अभी पूरा नहीं हुआ, वह अधूरा है। पर अगर आप उसे टाल नहीं पाए, तो वह फलित होता है; और क्योंकि वह अकाल है और उसका समय पूरा नहीं हुआ था, तो जितना समय बचा है, उतने समय आप प्रेत योनि में रहते हैं। जब आपका समय पूरा होगा, तब आप आगे की गति की ओर जाएँगे।

80

कुंडली में मारक काल दिखता ही क्यों है?

कुंडली एक चेतावनी है, फ़ैसला नहीं

· 43:23–44:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अकाल मृत्यु कुंडली और कर्म में लिखी नहीं होती — वह एक योग है, और ज़रूरी नहीं कि वह इसी कर्म का, आपके इसी जन्म का हो। जब मारकेश की महादशा चल रही हो और कोई ज्योतिषी कहे कि मृत्यु संभव है या ऐसी दुर्घटना हो सकती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि लिखा है कि यह होगा ही: कुंडली ठीक इसीलिए है कि आप सावधान हो जाएँ और उसे सुधार सकें।

81

क्या स्त्रियाँ हनुमान जी के विग्रह को छू सकती हैं?

दक्षिणमुखी और पंचमुखी हनुमान को छूने पर रोक

· 44:13–44:59 · Also a question

सुनने वाले ने मंदिर में एक स्त्री को हनुमान जी के चरणों में तेल लगाते देखा था, इसलिए पूछा। वक्ता कहते हैं कि दक्षिणमुखी हनुमान जी के अलावा पंचमुखी हनुमान जी को छूना भी मना है; और जहाँ मंदिर में हनुमान जी का मुख दक्षिण दिशा की ओर हो, वहाँ छूना मना है। पंचमुखी हनुमान जी की स्थापना में विधि जानने वाले आचार्य उनका आसन, भले सांकेतिक रूप से, प्रेतासन बनाते हैं — और इसी कारण स्त्री का स्पर्श मना है।

82

स्त्री हनुमान जी के किन रूपों को छू सकती है?

बाकी स्वरूपों को छूना खुला है

· 45:00–45:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बाकी — हनुमान जी के दूसरे स्वरूप — स्त्रियाँ छू सकती हैं।

बाकी, वक्ता कहते हैं, जहाँ तक हनुमान जी की बात है, हनुमान जी का जो स्वरूप है — उनमें आप उन्हें छू सकती हैं।

83

जहाँ कामाख्या देवी कुलदेवी हैं, वहाँ कुल भैरव कौन हैं?

उमानंद भैरव और कामेश्वर महादेव

· 45:24–45:51 · Also a question

एक सुनने वाले ने लिखा कि वे सिकरीवाल राजपूत हैं, उनकी कुलदेवी कामाख्या देवी हैं और उनके आँगन में शंकर भगवान पूजे जाते हैं। वक्ता कहते हैं कि अगर भगवती कामाख्या आपकी कुलदेवी हैं, तो आपके भैरव उमानंद भैरव होंगे, और दूसरे, महादेव, कामेश्वर महादेव हैं — तो कामेश्वरी भगवती, कामेश्वर महादेव, और भैरव के रूप में उमानंद।

अगर भगवती कामाख्या आपकी कुलदेवी हैं, वक्ता कहते हैं, तो आपके भैरव उमानंद भैरव होंगे। और दूसरे, महादेव, कामेश्वर महादेव हैं। तो कामेश्वरी भगवती, कामेश्वर महादेव, और भैरव उमानंद हो जाते हैं।

84

क्या भोग चढ़ाते समय दीपक जलता होना चाहिए?

पूजा में सबसे पहले दीपक जलाना

· 45:52–46:29 · Also a question

बिल्कुल, वक्ता कहते हैं। जब आप पहली बार पूजन स्थान पर जाते हैं और उसे धोकर सब ठीक करके पूजन शुरू करने वाले होते हैं, तो पहले दीपक को धोइए, उस पर चंदन-तिलक कीजिए, रोली और कुमकुम लगाइए, फूल चढ़ाइए, और फिर दीपक जलाइए — पंचोपचार पूजन करके फिर जलाइए। दीपक जलने के बाद ही देव विग्रह को स्नान कराइए, उनका श्रृंगार कीजिए, और उनके लिए दीपक जलाइए।

85

हर पूजा कर्म का साक्षी दीपक क्यों होना चाहिए?

शिव और पार्वती की पुत्री के रूप में ज्योति

· 46:30–47:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो ज्योति जलती है, उसे भगवती पार्वती और भगवान शिव की पुत्री कहा जाता है। तो ज्योति के रूप में वहाँ उसी को साक्षी होने का अधिकार और आशीर्वाद मिला है — कि वह हर कर्म की साक्षी होगी, कि उसके सामने किया हर काम शिव को और आराध्य को स्वीकार होगा, और यह उनकी जानकारी में रहेगा: हाँ, तुमने यह काम मेरी बेटी के सामने किया।

86

क्या आहुति देते समय स्त्रियों को बीज मंत्रों में प्रणव लगाना चाहिए?

स्त्रियों के लिए प्रणव नहीं; उसकी जगह माया बीज या लक्ष्मी बीज

· 47:07–47:44 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या स्त्रियों को नवग्रहों के बीज मंत्रों, अर्गला के पहले मंत्र और देवताओं के अष्टोत्तर शतनाम से आहुति देते समय प्रणव लगाना चाहिए, वक्ता कहते हैं कि नहीं लगाना चाहिए। अगर बहुत इच्छा हो तो माया बीज लगाया जा सकता है।

87

इत्र से कालिका पूजन का विधान क्या है?

एक प्रश्न जिसका उत्तर वक्ता सार्वजनिक रूप से नहीं देते

· 47:45–47:54 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि इत्र से कालिका के पूजन का विधान क्या है, वक्ता कहते हैं कि पूछने वाले अब दूसरी लाइन में जा रहे हैं, और उन्हें भी पता है कि इत्र से किस कालिका का पूजन होता है — और वे इसे खोलकर नहीं बताते।

अब आप दूसरी लाइन में जा रहे हैं, वक्ता पूछने वाले से कहते हैं। आपको भी पता है कि इत्र से किस कालिका का पूजन होता है। वे बात वहीं छोड़ देते हैं।

88

प्रत्यंगिरा क्या हैं, और क्या हर शक्ति की अपनी प्रत्यंगिरा होती है?

हर शक्ति की अपनी क्रम विद्या के रूप में प्रत्यंगिरा

· 47:55–48:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि प्रत्यंगिरा एक क्रम विद्या है, और हर शक्ति की अपनी प्रत्यंगिरा होती है। इंटरनेट पर खोजेंगे तो भगवती बगला और भगवती तारा की प्रत्यंगिरा मिलेगी, और ज़्यादा से ज़्यादा भगवती काली की; भगवती दुर्गा का मूल मंत्र आपको मिल जाएगा। भगवती कामाख्या की भी अपनी प्रत्यंगिरा है, और भगवान शिव की भी अपनी।

89

प्रत्यंगिरा कितनी हैं?

मूल, विपरीत और महाविपरीत प्रत्यंगिरा, और अपराजिता

· 48:30–49:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मूल प्रत्यंगिरा है, फिर प्रत्यंगिरा, फिर विपरीत प्रत्यंगिरा, फिर महाविपरीत प्रत्यंगिरा — चार हैं। वे कहते हैं कि अपराजिता भी एक तरह से प्रत्यंगिरा की ही शक्ति हैं, बाद के समय के तंत्र-भेद से।

मूल प्रत्यंगिरा है, वक्ता कहते हैं, फिर प्रत्यंगिरा। फिर विपरीत प्रत्यंगिरा, फिर महाविपरीत प्रत्यंगिरा। चार हैं। अप्राजिता भी एक तरह से प्रत्यंगिरा की ही शक्ति हैं — बाद के समय के तंत्र-भेद से।

90

प्रत्यंगिरा के शुरुआती कवच से ऊँचे स्तर पर कैसे जाएँ?

दीक्षा, और पहले काली के मूल स्वरूप की उपासना

· 49:01–49:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कवच की शुरुआती साधना को ऊँचे स्तर पर ले जाने के लिए क्रम-भेद से चलना चाहिए: दीक्षा लेकर फिर क्रम से आगे बढ़ना, जिस भी प्रत्यंगिरा की साधना आप करने जा रहे हैं। अगर प्रत्यंगिरा का अर्थ सीधे कहें तो वह भगवती काली का स्वरूप बन जाता है, क्योंकि क्रोध तत्व से पहली महाविद्या का स्वरूप उन्हीं का है — इसलिए पहले उनके मूल स्वरूप की साधना करनी होगी, और तभी मुख्य स्वरूपों की साधना होगी।

91

घर में कितनी शालिग्राम शिलाएँ रखनी चाहिए?

एक शालिग्राम, और परम वैष्णव का नियम

· 49:28–49:57 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या जितने तुलसी के गमले हों उतने शालिग्राम होने चाहिए, वक्ता कहते हैं कि तुलसी के गमलों जितने शालिग्राम उन्होंने नहीं सुने; परम वैष्णव लोग जो इतनी सेवा कर सकते हैं, वे रखते हैं। एक शालिग्राम शिला होनी चाहिए — सबसे पहले यह। और नियम परम वैष्णव की तरह रहने का है: जैसे शिवलिंग को रोज़ स्नान कराना चाहिए, वैसे ही शालिग्राम शिला का नित्य अभिषेक होना चाहिए।

92

शालिग्राम पर तुलसी का क्या नियम है, और किन दिनों तुलसी तोड़ना मना है?

एकादशी, रविवार, द्वादशी, ग्रहण और अमावस्या के लिए पहले से तुलसी तोड़ना

· 49:58–50:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तुलसी जी रोज़ चढ़ानी चाहिए; और जिन दिनों तुलसी जी का पत्ता तोड़ना मना है — एकादशी, रविवार, द्वादशी, ग्रहण, अमावस्या — उनके लिए पहले से तोड़कर रख लेना चाहिए। अगर ताज़ा न मिले, तो पुराने पत्ते ही धोकर उन पर ज़रूर चढ़ाने चाहिए। शालिग्राम शिला को कभी बिना तुलसी के नहीं रखना चाहिए: यही मुख्य नियम है।

93

जहाँ शीतला माता कुलदेवी हैं, वहाँ कुल भैरव कौन हैं?

शीतला माता के लिए काल भैरव

· 50:32–50:42 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शीतला माता के साथ कुल भैरव काल भैरव हैं। अगर गुड़गांव वाली हैं, तो आप उस स्थान का अपना देख सकते हैं; जब आप किसी शक्तिपीठ से लेते हैं, तो फिर उसी के अनुसार चलना चाहिए।

हाँ, वक्ता कहते हैं, शीतला माता के साथ कुल भैरव काल भैरव हैं। अगर गुड़गांव वाली हैं, तो आप देख सकते हैं कि उस स्थान का क्या है। जब आप किसी शक्तिपीठ से लेते हैं, तो फिर उसी के अनुसार चलना चाहिए।

94

जब भैरव स्पष्ट न हों, तो कुल देवता के हवन के लिए कौन सा मंत्र लें?

महाभैरव मंत्र, बिना प्रणव के, सबके लिए खुला

· 50:43–51:15 · Also a question

कुल देवता और कुलदेवी के लिए सत्ताईस दिन का हवन करना चाहने वाले एक व्यक्ति के पूछने पर वक्ता कहते हैं कि अगर कुलदेवी भगवती शीतला हैं तो उनका कीजिए; और जहाँ लगे कि कुल भैरव ठीक से पहचाने नहीं जा रहे, वहाँ चैनल पर दिया गया महाभैरव मंत्र लीजिए। इसमें प्रणव नहीं लगा है, और इसमें भैरव जी का बीज मंत्र है — इसलिए स्त्री-पुरुष सब कर सकते हैं, जनेऊ पहनते हों या नहीं, किसी तरह की कोई कठिनाई नहीं।

95

घर से पुराने, ज़िद्दी, खूनी ब्रह्म को हटाने के लिए सबसे अच्छा क्या है?

प्रत्यंगिरा, महाविद्या और बगलामुखी सभी सक्षम हैं

· 51:16–52:04 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि अभिचार से घर में बिठाए गए पुराने, ज़िद्दी, खूनी ब्रह्म को हटाने के लिए प्रत्यंगिरा, महाविद्या या माता बगलामुखी में से कौन बेहतर है, वक्ता कहते हैं कि अगर पूछने वाली यह खुद करने जा रही हैं, तो बेहतर उन्हें होना चाहिए। "बेहतर" छोड़िए, वे कहते हैं: उन्हें हटाने के लिए तो एक साधारण लोक देवता भी बेहतर होगा — कितने भी शक्तिशाली हों, वे केवल ब्रह्म हैं। पर अगर आप खुद कोशिश करने जा रही हैं, तो आपको बेहतर होना होगा। प्रत्यंगिरा सक्षम हैं, महाविद्या सक्षम हैं, और भगवती बगला सक्षम हैं; तीनों सक्षम हैं और तीनों बेहतर हैं।

96

खूनी ब्रह्म को हटाने में क्या खतरा है?

एक साधक की सच्ची घटना जो घर नहीं पहुँचे

· 52:05–52:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जहाँ खूनी ब्रह्म की बात हो, वहाँ किसी को भी इतना बड़ा काम पूरी सावधानी से ही करना चाहिए, क्योंकि वहाँ थोड़ी सी चूक पर भी उसकी माया बहुत चलती है — थोड़ी सी चूक और जान गई। वे एक सच्ची घटना बताते हैं: इस साधक परिवार के एक बहुत पुराने साधक ने बताया कि उनके परिवार के एक करीबी सदस्य, जो ब्राह्मण और साधक थे, ने कहा कि वे दिल्ली के एक घर से ऐसे खूनी ब्रह्म को हटाएँगे; वे गए और हटाया, और घर नहीं पहुँच पाए, या उस स्थान तक नहीं पहुँच पाए जहाँ उसे ले जाना था, और रास्ते में ही पूरी कहानी खत्म हो गई।

97

कुंडली की आठ योगिनियों की रोज़ की पूजा कैसे होती है?

जिस योगिनी की महादशा चल रही हो, उसकी पूजा

· 52:59–53:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कुंडली के अनुसार चलने वाली आठों योगिनियों की रोज़ पूजा करने की कोई ज़रूरत नहीं। केवल उसी की पूजा करें जिसकी महादशा आप पर चल रही है, तो वह ठीक है।

देखिए, वक्ता कहते हैं, कुंडली के अनुसार चलने वाली आठों योगिनीयों की रोज़ पूजा करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। अगर आप केवल उसी की पूजा करें जिसकी महादशा आप पर चल रही है, तो वह ठीक है।

98

कुल देवता और कुल भैरव में क्या अंतर है?

कुल देवता ही कुल भैरव हो सकते हैं, या अलग भी

· 53:33–53:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कुल देवता ही कुल भैरव हो सकते हैं, और कुल भैरव और कुल देवता अलग भी हो सकते हैं — यह निर्भर करता है, और उन्होंने शुरुआत में ही बता दिया है कि इसे कैसे देखना है। वे जोड़ते हैं कि जहाँ एक सुनने वाले लिखते हैं कि कुलदेवी माँ मनसा हैं और उनके साथ के भैरव मकरध्वज हैं, वे बिल्कुल हो सकते हैं: जो पहला पूजन कर रहे हैं, वे जिस शक्ति को स्थान देते हैं, वही पूजित हो जाती है।

99

अजपा और योग का क्या संबंध है?

योग के साथ अजपा जप सौ गुना फल देता है

· 53:58–54:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अजपा जप हमेशा चलने वाली चीज़ है; और अगर आप योग के साथ अजपा जप करें, तो वह सौ गुना ज़्यादा फल देने वाला हो जाता है।

अजपा जप जप, वक्ता कहते हैं, हमेशा चलने वाली चीज़ है। अगर आप योग के साथ अजपा जप करें, तो वह सौ गुना ज़्यादा फल देने वाला हो जाता है।

100

अगर एक ही हो सके, तो हवन और जप में कौन ज़्यादा तीव्र है?

जप का पूरा फल हवन से मिलता है

· 54:24–54:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दोनों का अपना महत्व है, और जप का पूरा फल हवन से मिलता है। अगर एक ही हो सके, तो अपने देश, काल और परिस्थिति के अनुसार चुनिए; हवन कर सकते हैं, जप कर सकते हैं — दोनों का अपना महत्व है।

दोनों का, वक्ता कहते हैं, अपना महत्व है, हवन का भी और जप का भी। जप का पूरा फल हवन से मिलता है। अगर एक ही हो सके, तो जैसी देश, काल और परिस्थिति हो, उसके अनुसार चुनिए। आप हवन भी कर सकते हैं, जब चाहें कर सकते हैं; दोनों का अपना महत्व है।

101

क्या योग्य और आध्यात्मिक पत्नी पाने के लिए कोई साधना है?

अर्गला का अंतिम मंत्र — पत्नीं मनोरमां देहि

· 54:46–55:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ज़रूर कर सकते हैं — मुख्य रूप से अपनी मैया दुर्गा की, अर्गला के अंतिम मंत्र से, "पत्नीं मनोरमां देहि" से। वे बताते हैं कि यह उन्होंने पिछले लाइव में कहा था, अगर पूछने वाले ने नहीं सुना।

बिल्कुल कर सकते हैं, वक्ता कहते हैं — मुख्य रूप से अपनी मैया दुर्गा की। अर्गला स्तोत्र के अंतिम मंत्र से। "पत्नीं मनोरमां देहि" से। वे जोड़ते हैं कि यह उन्होंने पिछले लाइव में बताया था, अगर पूछने वाले ने नहीं सुना।

102

जो माँ दुर्गा की कृपा पाना चाहे, वह शुरुआत कैसे करे?

पहले सतनाम साधना, फिर चक्र विधि से 32 नामावली

· 55:11–55:43 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवती दुर्गा की सेवा शुरू कीजिए, और अगर पहले कोई साधना नहीं की है तो सतनाम साधना से शुरू कीजिए। पहले 1100 सतनाम कीजिए, और उसके बाद चक्र विधि से 32 नामावली शुरू कीजिए। अगर अभी संस्कृत पढ़ने में कठिनाई है, तो चालीसा से शुरू कीजिए, जिसकी विधि भी उन्होंने दी है। इतने से ही आपकी शुरुआती ऊर्जा ऐसी हो जाएगी कि आगे बढ़ने का रास्ता खुलने लगेगा।

103

घर में माँ दुर्गा को स्थायी रूप से कौन सी माला चढ़ाई जा सकती है?

जो भी माला ठीक लगे — मोती, मूंगा, रुद्राक्ष, स्फटिक

· 55:44–56:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो भी आपको सबसे अच्छा लगे — मोती, मूंगा, रुद्राक्ष, स्फटिक, जो भी चाहें — उसकी माला चढ़ाई जा सकती है। वे खुद जो माला सुंदर और अच्छी लगे, उसे चाँदी में बनवाकर भगवती को चढ़ाते हैं, हमेशा उनका कोई नया श्रृंगार करते रहते हैं। एक से ज़्यादा चढ़ाइए; कभी मोती से कीजिए, कभी रुद्राक्ष, कभी स्फटिक। इसमें कोई कठिनाई नहीं।

104

क्या देवता को चढ़ाई माला का रत्न पूजने वाले की कुंडली पर असर करता है?

ज्योतिषी का एक दावा जिसे वक्ता सीधे नकारते हैं

· 56:21–56:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप तथाकथित बहुत बड़े ज्योतिषियों के चक्कर में पड़ें, तो जब उनके पास विषय खत्म हो जाते हैं तो वे इस तरह की बातें डालते हैं — कि अगर आपने घर की मूर्ति पर मूंगे की माला चढ़ाई है और आपका लग्न मकर है, तो शनि आपसे नाराज़ होंगे क्योंकि आपने मंगल की माला चढ़ाई है। भाई, वे कहते हैं, हमने नहीं पहनी; हमने माई को पहनाई है। शनि और मंगल माई का कुछ नहीं कर सकते — शनि देव भागते फिरते थे, वे माई से भागते हैं। उन्होंने उन्हें वह अधिकार दिया, यह अलग बात है। पर ऐसा नहीं है: भगवती को जो चाहें चढ़ाइए; ऐसा नहीं कि हर चीज़ आपको खुद पहननी है।

105

पुरी की माता विमला के भैरव कौन हैं?

पुरी क्षेत्र के भैरव के रूप में बंदी हनुमान

· 56:59–57:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि माता विमला के भैरव — उस क्षेत्र के भैरव — बंदी हनुमान जी हैं, वे हनुमान जी जिन्हें वहाँ बीड़ी वाले हनुमान जी कहा जाता है; वहाँ भैरव के रूप में मुख्य पूजन उन्हीं का है। चाहे विमला माता हों या भगवान जगन्नाथ, उस स्थान की पूरी ज़िम्मेदारी हनुमान जी पर है, इसलिए वहाँ भैरव के रूप में मुख्य रूप से उन्हीं की पूजा होगी।

106

खंडोबा और महालसा की पूजा उस क्षेत्र के साधकों पर छोड़ी गई है, और इसके लिए अलग वीडियो का वादा है।

अपनी जानकारी से बाहर बोलने के बजाय क्षेत्र के साधकों पर छोड़ना

· 57:48–58:22

कुल देवता खंडोबा की पूजा पर प्रकाश डालने को कहे जाने पर वक्ता कहते हैं कि वे खंडोबा और महालसा पर अलग वीडियो बनाएँगे। वे कहते हैं कि वे उस क्षेत्र के नहीं हैं, इसलिए उस क्षेत्र का जो भी विधि-विधान है, उसके लिए साधक परिवार में उस क्षेत्र के बहुत अच्छे साधक हैं जिन्होंने पूरी बात समझाई थी और जिनका पूरा संदेश उनके पास है; वे उनसे फिर बात करके पूरी जानकारी के साथ वीडियो बनाएँगे। वे कहते हैं कि जो उनकी जानकारी में नहीं है, उसके बारे में वे कुछ भी नहीं बताएँगे।

107

घर के लिए धूनी कितने प्रकार की होती है?

एक शांति-पौष्टिक के लिए, एक तंत्र प्रयोग काटने के लिए

· 58:23–58:37 · Also a question

हनुमान बाबा के लिए धूनी कैसे होती है और कितने प्रकार की होती है, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि घर में करने के लिए धूनी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: पहली शांति और पौष्टिक काम के लिए, और दूसरी काटने के लिए, जहाँ घर में कोई तंत्र विचार चलाया गया हो।

देखिए, वक्ता कहते हैं, मुख्य रूप से धूनीविशेष लकड़ियों व बीजों को जलाकर घर या स्थान से नकारात्मक या तांत्रिक ऊर्जा दूर करने हेतु की जाने वाली धूनी। दो प्रकार की होती है। घर में करने के लिए। पहली, शांति और पौष्टिक काम के लिए धूनी। दूसरी, जहाँ घर में कोई तंत्र विचार चलाया गया हो — तो उसे काटने के लिए।

108

तंत्र प्रयोग काटने वाली धूनी में क्या-क्या सामग्री जाती है?

काली मिर्च, पीली सरसों, काली राई, चिरमी, गुग्गुल, गंधक

· 58:38–58:55 · Also a question

तंत्र विचार काटने के लिए, वक्ता कहते हैं, मुख्य रूप से काली मिर्च, पीली सरसों, वह काली वाली जिसे काली राई कहते हैं, चिरमी, गुग्गुल और गंधक लेते हैं — ये सब चीज़ें एक खास मात्रा में ली जाती हैं, और कुछ और चीज़ें भी मिलाई जाती हैं। वे बताते हैं कि यह उन्होंने एक-दो वीडियो में भी बताया है।

तंत्र विचार में काटने के लिए, वक्ता कहते हैं, मुख्य रूप से आपको काली मिर्च, पीली सरसों, वह काली वाली जिसे काली राई कहते हैं, चिरमी, गुग्गुल, गंधक चाहिए। ये सब चीज़ें एक खास मात्रा में लगाई जाती हैं, और कुछ और चीज़ें भी मिलाई जाती हैं। वे जोड़ते हैं कि यह उन्होंने एक-दो वीडियो में भी समझाया है।

109

शांति के लिए किए जाने वाले धूने में क्या लगता है?

कूटा हुआ गंधक, उसमें गुग्गुल मिलाकर

· 58:56–59:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर दूसरा, यानी शांति वाला काम करना है, तो गंधक से धूना बना सकते हैं — गंधक को कूटकर उससे धूना बनाइए, और उसमें गुग्गुल मिलाइए। यह पौष्टिक है, शांति देने वाला है, और दिव्यता बढ़ाता है।

दूसरा, अगर आपको शांति के लिए करना है, वक्ता कहते हैं, तो आप गंधक से धूना बना सकते हैं। गंधक को कूटकर उससे धूना बनाइए। उसमें गुग्गुल मिलाइए। यह पौष्टिक है, शांति देने वाला है, और दिव्यता बढ़ाता है।

110

क्या जौनपुर के बाबा करार वीर कुल भैरव की श्रेणी में आते हैं?

एक मामला जो वे नहीं जानते, और पहले से बताया गया तरीका

· 59:15–59:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह उनकी जानकारी में नहीं है — जौनपुर की इस बात के बारे में उन्हें पूछना पड़ेगा। वे जोड़ते हैं कि तरीका क्या है, यह वे पहले ही बता चुके हैं, और अच्छा होता अगर पूछने वाले ने उसी के अनुसार देखा होता।

यह उनकी जानकारी में नहीं है, वक्ता कहते हैं; जौनपुर की इस बात के बारे में उन्हें पूछना पड़ेगा। और तरीका क्या है, यह वे पहले ही बता चुके हैं। अच्छा होता, वक्ता कहते हैं, अगर आप उसी के अनुसार देखते।

111

आठ भुजा और दस भुजा वाली दुर्गा के भैरव कौन हैं?

नीलकंठ भैरव, और जहाँ कुछ पता न हो वहाँ स्वयं शिव

· 59:34–59:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर भगवती दुर्गा आठ भुजा वाली हैं तो नीलकंठ भैरव, और अगर दस भुजा वाली हैं तो भी नीलकंठ भैरव। और अगर इस तरह पता न हो, तो स्वयं शिव जी भैरव हैं — शिव साक्षात भैरव हैं।

अगर भगवती दुर्गा अष्टभुजा हैं, वक्ता कहते हैं, तो नीलकंठ भैरव; अगर दशभुजा हैं, तो भी नीलकंठ भैरव। और अगर आपको इस तरह पता नहीं है, तो स्वयं शिव भैरव हैं। शिव साक्षात भैरव हैं।

112

क्या सोखा बाबा और श्रृंगी दोनों की पूजा साथ करनी चाहिए?

भैरव अष्टमी पर वीरभद्र और श्रृंगी की साथ पूजा

· 59:48–59:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दोनों की पूजा करनी पड़ेगी: सोखा बाबा वीरभद्र होंगे और ये श्रृंगी होंगे, इसलिए दोनों की पूजा साथ होगी। भैरव अष्टमी पर, वे कहते हैं, मुख्य रूप से सोखा बाबा की पूजा कीजिए।

दोनों की पूजा करनी पड़ेगी, वक्ता कहते हैं। सोखा बाबा वीरभद्र होंगे, और ये श्रृंगी होंगे, इसलिए दोनों की पूजा साथ होगी। भैरव अष्टमी पर मुख्य रूप से सोखा बाबा की पूजा कीजिए।

113

क्या पहले से पूजे जा रहे विग्रह का अधिवास दोबारा हो सकता है?

अग्नि तारण विधि के बाद अधिवास केवल एक बार होता है

· 1:00:00–1:00:40 · Also a question

नहीं। यह पूछे जाने पर कि अगर पहली बार अधिवास की प्रक्रिया ठीक से नहीं हुई, तो क्या दूसरी बार करवाई जा सकती है, वक्ता कहते हैं कि नहीं — अधिवास जब भी होता है, पहली बार ही होता है। सबसे पहले अग्नि तारण विधि होती है: विग्रह को शुद्ध गाय के घी में अच्छी तरह डुबोकर, पान के पत्ते पर रखकर, फिर गाय के कच्चे दूध से या पंचामृत से अभिषेक करते हुए पाठ होता है। उसके बाद पाँच, सात या नौ — जितना सामर्थ्य हो — अधिवास होता है। दूसरा अधिवास नहीं होता।

114

जहाँ डीह की पूजा होती है, वहाँ क्षेत्रपाल कौन हैं?

क्षेत्रपाल के रूप में डीह

· 1:00:41–1:00:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जहाँ वहाँ डीह ही पूजे जाते हैं, तो क्षेत्रपाल के रूप में जो पूजे जाते हैं, वे वही होंगे।

जहाँ यहाँ डीह ही पूजे जाते हैं, वक्ता कहते हैं, तो क्षेत्रपाल के रूप में जो पूजे जाते हैं, वे वही होंगे।

115

शिव जी के अभिषेक के साथ नंदी जी की पूजा कैसे करनी चाहिए?

पहले नंदी, जैसे भगवती के आगे भैरव और लंगूर वीर चलते हैं

· 1:00:46–1:01:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब भी शिव जी की पूजा हो, सबसे पहले नंदी जी का पूजन होना चाहिए — जैसे भगवती के आगे सबसे पहले भैरव जी और लंगूर वीर चलते हैं। वे कहते हैं कि भगवती के दाईं ओर हनुमान जी हैं; बाईं ओर कुल भैरव या बटुक भैरव; और आगे और पीछे दो और वीर हैं। उसी तरह शिव जी के आगे पहले नंदी जी चलते हैं, इसलिए पहले नंदी जी का पूजन और अभिषेक होना चाहिए और तभी शिव जी का।

116

अगर उस दिन समस्या हो, तो स्त्री काल भैरव अष्टक कैसे करे?

अपने नाम से किसी और से करवाना

· 1:01:31–1:01:43 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि अगर किसी स्त्री को वह समस्या हो तो काल भैरव अष्टमी के दिन काल भैरव अष्टक कैसे करें, वक्ता कहते हैं कि अगर ऐसी स्थिति आए, तो आप अपने नाम से किसी और से पूजन करवा सकती हैं। खुद मत कीजिए।

अगर ऐसी स्थिति आए, वक्ता कहते हैं, तो आप अपने नाम से किसी और से पूजन करवा सकती हैं। खुद मत कीजिए।

117

घर में किन देवताओं की पूजा अनिवार्य है?

गणपति, नारायण, शिव, भगवती, हनुमान, तुलसी, ध्वजा — और भैरव

· 1:01:44–1:02:48 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या पंच देवों और कुलदेवी के साथ हनुमान जी का पूजन भी अनिवार्य है, वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल — घर में हनुमान जी की ध्वजा के बिना क्या होने वाला है। गणपति जी की पूजा पूरी तरह अनिवार्य है; आप लक्ष्मी-गणेश की पूजा करेंगे; नारायण के किसी एक स्वरूप की पूजा ज़रूर करेंगे; शिव जी की पूजा, भगवती की पूजा, हनुमान जी की पूजा ज़रूर करेंगे; तुलसी का पौधा और हनुमान जी की ध्वजा ज़रूर होनी चाहिए।

118

कुल देवता के रूप में हर्षु ब्रह्म बाबा की पूजा कैसे होती है?

लाठी, जनेऊ, खड़ाऊँ, सफ़ेद धोती और गमछा चढ़ाना, पहले दुर्गा की पूजा

· 1:02:49–1:03:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि क्योंकि हर्षु ब्रह्म बाबा ब्रह्म स्थान के देवता हैं और ब्रह्म हैं, उन्हें क्षेत्र के अनुसार वहाँ आने-जाने के नियम पता हैं, पर घर में उनकी पूजा कैसे होगी, यह वही बता सकते हैं जो उनकी सेवा-पूजा करते हैं। आमतौर पर, जो भी लोक देवता या लोक ब्रह्म हों, साल में एक बार उनकी तिथि या दिन पर वहाँ जाना चाहिए; और घर की पूजा में उन्हें लाठी, जनेऊ, खड़ाऊँ, सफ़ेद धोती और गमछा चढ़ाया जाता है। क्योंकि वे भगवती दुर्गा के सेवक थे, इसलिए मुख्य रूप से उनसे पहले दुर्गा का पूजन होता है।

119

जीवन में एक बार कौन से अनुष्ठान करने चाहिए, और किस क्रम में?

दत्तात्रेय या गणपति, फिर भैरव, फिर हनुमान, फिर भगवती

· 1:03:50–1:04:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उनके दिए मंत्र का अनुष्ठान भैरव अष्टमी के दिन ज़रूर किया जा सकता है, और वे सबको महामंत्र का अनुष्ठान करने को कह रहे हैं। जहाँ तक भगवान दत्तात्रेय की बात है: अगर उनमें श्रद्धा है और आप महाराष्ट्र या गुजरात की तरफ़ के हैं और मुख्य रूप से उनकी सेवा-पूजा करते हैं, तो जीवन में उन्हें पकड़िए। उसके बाद गणपति जी — गणपति की जो साधनाएँ दी गई हैं, और कुछ न हो तो संकट हरण गणेश स्तोत्र का अनुष्ठान। फिर भैरव जी, जिनमें भैरव हृदय सहित दो-तीन चीज़ें दी गई हैं; फिर हनुमान जी, और फिर भगवती या जो भी आपके मुख्य देव-देवता हों।

120

क्या जीवन में एक से ज़्यादा गुरु हो सकते हैं?

पहले गुरु की अनुमति से, उस मार्ग के साधक से दीक्षा जिसमें आप जाना चाहते हैं

· 1:04:52–1:05:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गुरु करना कभी मना नहीं किया गया। दीक्षा के लिए कहा गया है कि आप जिस भी क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उस क्षेत्र के जिन साधकों या सिद्ध पुरुषों से आप प्रभावित हैं और जिनके साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, उनसे दीक्षा ले सकते हैं। अगर आपके पहले गुरु, आपके भौतिक गुरु जीवित हैं, तो उनकी अनुमति लेकर आगे बढ़ सकते हैं; अगर नहीं, तो मन ही मन उनसे आज्ञा की प्रार्थना करके, एक पक्ष के बाद आगे बढ़ सकते हैं।

121

दूसरा गुरु कब खोजना चाहिए?

भीतर का असंतोष आपकी गति रोक देता है

· 1:05:45–1:07:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि संतोष होना चाहिए। अगर लगे कि आपके अभी के गुरु ज्ञान से या अपनी बातों से आपको संतुष्ट नहीं कर पा रहे, और अगर आपको लगता है कि वे सक्षम हैं, तो कहीं न कहीं हो सकता है कि वे नहीं बल्कि हम खुद अक्षम हों — गुरु को परखना इतना आसान नहीं। पर जहाँ भीतर असंतोष हो, वहाँ गति नहीं होगी; इसलिए उनसे निवेदन और प्रार्थना करके आगे बढ़ना चाहिए। अपने देश, काल और परिस्थिति के अनुसार जीवन में एक से ज़्यादा गुरु चुने जा सकते हैं।

122

नई लाई गई शालिग्राम शिला कहाँ रखनी चाहिए, और रोज़ पूजा कैसे करें?

पूजा स्थान पर पीले कपड़े पर, रोज़ अभिषेक और तुलसी के साथ

· 1:07:21–1:08:25 · Also a question

तुलसी विवाह एकादशी पर शालिग्राम शिला लाने वाले एक व्यक्ति के पूछने पर वक्ता कहते हैं कि उन्हें पूजा स्थान पर ही रखिए। अगर शालिग्राम शिला बाहर रखेंगे और वह छोटी है, तो बहुत बार पक्षी उसे उठाकर ले जाते हैं, और फिर आप विष्णु जी को खोजते रह जाएँगे। उन्हें पूजा स्थान पर पीले कपड़े पर या किसी थाली में रखिए; जैसे शिवलिंग के लिए स्टैंड आता है, वैसे शालिग्राम के लिए भी आता है, आप उन्हें उस पर रख सकते हैं, वरना पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान शालिग्राम को स्थापित कीजिए।

123

भुजंग क्या है, और भुजंग विद्या क्या है?

सर्प का पर्याय भुजंग, और पाश विद्या

· 1:08:26–1:09:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सर्प को भुजंग कहते हैं; और अगर आप भुजंग विद्या के बारे में पूछ रहे हैं, तो पाश विद्या को भुजंग विद्या कहते हैं। जैसा आप कथाकारों से इधर-उधर सुनेंगे, जब शिव जी किसी से, किसी देव से या किसी कारण से नाराज़ हुए और उसे बंधन में डाला, तो उसे वासुकी से बाँधा, भुजंग से बाँधा — तो वासुकी भी उनका पाश हैं। वे कहते हैं कि भुजंग सर्प का पर्याय है।

124

क्या घर के नर्मदेश्वर शिवलिंग पर दूसरे देवताओं की पूजा हो सकती है?

शिवलिंग में सब देवता स्थापित हैं

· 1:09:07–1:09:23 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि अगर घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग पूजा जाता है, तो क्या लिंग मूर्ति पर भैरव जी और दत्त महाराज के साथ माँ काली की पूजा भी की जा सकती है, वक्ता कहते हैं कि वैसे भी शिवलिंग में सब देवी-देवता स्थापित हैं, तो आप किसी के लिए भी कर सकते हैं; इस तरह की कोई कठिनाई नहीं।

शिवलिंग में, वक्ता कहते हैं, वैसे भी सब देवी-देवता स्थापित हैं, तो आप किसी के लिए भी कर सकते हैं। ऐसी कोई कठिनाई नहीं है।

125

माँ काली को बीच में रखकर पंचायतन कैसे सजाएँ?

आगे गणपति और सूर्य, दाईं ओर विष्णु और बाईं ओर शिव

· 1:09:24–1:09:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि माँ काली बीच में रहेंगी; और उनके चारों ओर, उनके आगे दोनों तरफ़, एक ओर गणपति और दूसरी ओर सूर्य; पीछे दोनों तरफ़ — उनके दाएँ भाग की ओर विष्णु जी और बाएँ भाग की ओर शिव जी। वे पूछने वाले के लिए पंचायतन की एक फ़ोटो बनाकर देने का प्रस्ताव देते हैं।

126

उपदेव योनि के प्राणी को पूजने के बजाय मुक्त क्यों करना चाहिए?

भोग योनि, और कैसे भोग ही उन्हें बाँधता है

· 1:09:56–1:10:58 · Also a question

वक्ता इसे बहुत अच्छा प्रश्न कहते हैं। वे कहते हैं कि उपदेव श्रेणी की सब शक्तियाँ — जो भी उस योनि में जाता है — भोग योनि में हैं, और वे कष्ट भोगती हैं। वे उस योनि के अनुसार माया से बँधी रहती हैं: जैसे जीवित अवस्था में किसी को जलेबी बहुत पसंद थी तो वह जलेबी खा सकता था, वैसे ही मृत्यु के बाद वह सच में नहीं खाएगा, पर उसकी सुगंध से पोषित होगा, इसलिए कहेगा मुझे जलेबी चढ़ाओ। वह वहाँ बँध जाता है।

127

उपदेव श्रेणी की शक्तियों से करवाए जाने वाले काम में भोग कैसे काम करता है?

एक भोग से चले काम को हटाने के लिए दोगुना भोग

· 1:10:59–1:11:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो भी देव भोग पर काम करता है, वह उस भोग के लिए कुछ भी करेगा। भगतवाल की शक्तियाँ भोग लेकर जाती हैं: जैसे कोई शक्ति भोग लेकर गई और किसी पर मारण हुआ; और अगले आदमी को उतारने के लिए दोगुना भोग देकर शरीर से हटवाते हैं। अगर एक मुर्गा दिया गया, तो दो मुर्गे देकर उसे शरीर से हटाया गया। वे कहते हैं, ये लोग मुर्गा-मुर्गा खेल रहे हैं। इसी कारण वह प्राणी मंत्र से और भीतर जगे लोभ से बँधा है, और इसी कारण उस योनि में गया है।

128

ऐसे प्राणी को असल में मुक्त कैसे किया जाता है?

शिव महापुराण में बिंदु पिशाच का उदाहरण, और मना करने पर क्या करें

· 1:11:29–1:11:44 · Also a question

वक्ता शिव महापुराण का वह उदाहरण याद करते हैं जो वे पहले दे चुके हैं: बिंदु नाम के पिशाच को मुक्त करने के लिए पहले साधारण प्रयास हुआ, और बाद में, उसे बाँधकर — ऐसा करने का सामर्थ्य रखते हुए — तुंबुरु गंधर्व ने पूरा शिव महापुराण गाकर उसे सुनाया। उसी तरह, या तो जिनकी गति करवानी है वे खुद मान जाएँ कि हाँ, मेरी गति करवाओ; या अगर न मानें, तो कोई पर्याप्त समर्थ साधक अपनी शक्ति से पाश विद्या आदि से उन्हें बाँधकर मनाए; या अगर फिर भी न मानें, तो उन्हें किसी ब्रह्म स्थान, किसी अलग स्थान को दे देना चाहिए। उन्हें घर में कभी स्थान नहीं देना चाहिए।

129

बँधे हुए पिशाच या उपदेव प्राणी को, जो मान गया हो, मुक्त करने के लिए तीर्थ क्षेत्र में क्या किया जाता है?

गया या त्र्यंबकेश्वर, गायत्री जप, श्राद्ध, त्रिपिंडी, नारायण बलि और नाग बलि

· 1:11:45–1:12:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर वे मान जाएँ, तो उन्हें किसी तीर्थ क्षेत्र में ले जाइए — गया, या त्र्यंबकेश्वर, या जो भी तीर्थ क्षेत्र वे बताएँ — और वहाँ उनकी ओर से ज़रूरत के अनुसार गायत्री जप, श्राद्ध क्रम, त्रिपिंडी, नारायण बलि और नाग बलि करवाकर उन्हें मुक्त कीजिए। बाद में घर में सुंदरकांड का पाठ या अखंड रामायण आदि करवाकर घर को फिर से पूरी तरह शुद्ध करना चाहिए।

130

क्या वास्तु समस्या के लिए घर में अचल प्राण-प्रतिष्ठित बजरंगबली स्थापित करने चाहिए?

वास्तु दोष के लिए घर में अचल प्रतिष्ठा गलत है

· 1:12:17–1:12:56 · Also a question

एक घर के बारे में पूछा गया जिसके आँगन का दरवाज़ा दक्षिण की ओर है, जहाँ किसी ने वास्तु शास्त्र के लिए प्राण-प्रतिष्ठित अचल बजरंगबली स्थापित किए, और क्या इससे मुख्य मंदिर की पूजा में कोई अंतर पड़ता है। वक्ता पूछते हैं कि इतना बड़ा काम किसने किया। वे कहते हैं कि किसी भी कारण से वास्तु के नियमों के अनुसार घर में कोई कठिनाई थी भी, तो उसकी शुद्धि के लिए घर में अचल प्रतिष्ठा कभी नहीं करनी चाहिए थी।

131

बटुक भैरव के लिए स्थापित त्रिशूल किस धातु का होना चाहिए?

पीतल, चाँदी, सोना, प्लैटिनम तक — पर टिन या स्टील कभी नहीं

· 1:12:57–1:13:24 · Also a question

एक व्यक्ति ने बटुक भैरव जी के लिए त्रिशूल स्थापित करने वाला उनका वीडियो देखा पर लोहे का नहीं मिला और पीतल का रखा। वक्ता कहते हैं कि कोई कठिनाई नहीं। पीतल का त्रिशूल, चाँदी का त्रिशूल, और अगर सामर्थ्य हो तो सोने का त्रिशूल; और अगर सामर्थ्य हो तो हीरा जड़ा प्लैटिनम का त्रिशूल — जो चाहें रखिए। बस टिन का मत रखिए, और स्टील का मत रखिए।

कोई कठिनाई नहीं है, वक्ता कहते हैं। पीतल का त्रिशूल, चाँदी का त्रिशूल; अगर सामर्थ्य हो, तो सोने का त्रिशूल। और अगर सामर्थ्य हो, तो हीरा जड़ा प्लैटिनम का त्रिशूल — जो चाहें रखिए। बस टिन का मत रखिए। स्टील का मत रखिए।

132

क्या संकल्प में कहा जा सकता है कि साधना के दौरान प्याज़-लहसुन नहीं छोड़ सकते?

कठिनाई आपके शरीर में है, देवी को नहीं

· 1:13:25–1:14:12 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि जब कोई साधना करे पर उन दिनों प्याज़-लहसुन न छोड़ पाए, तो क्या यह संकल्प में साफ़ कहा जा सकता है, वक्ता कहते हैं कि मैया को प्याज़-लहसुन से कोई कठिनाई नहीं — कठिनाई आपके शरीर में है। मैया तो दूर हैं; उन्हें क्या कठिनाई होगी? आप उनके बेटे हैं। पर जब आप मंत्र जप करेंगे, तो उसकी ऊर्जा आपके शरीर में उस तरह अपना असर नहीं देगी; इसलिए उनके अनुसार तब उसका कोई फ़ायदा नहीं, और ऊपर से यह तामसिकता बढ़ाएगा, क्योंकि ये सब चीज़ें गर्मी बढ़ाती हैं।

133

साधना के दौरान प्याज़-लहसुन क्यों मना है?

ये शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं; केवल दवा के रूप में अनुमति

· 1:14:13–1:14:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि लहसुन और प्याज़ खाने से इसलिए मना किया गया है कि सबसे पहले ये शरीर में गर्मी बढ़ाएँगे; बदबू अलग बात है, वह सब छोड़ दीजिए। इन्हें केवल दवा के लिए लेने को कहा गया है — आपको इन्हें केवल दवा के रूप में, दवा के कारण लेना चाहिए, और किसी और कारण से छोड़ देना चाहिए।

पर लहसुन और प्याज़, वक्ता कहते हैं, इसी कारण खाने से मना किए गए हैं। यह शरीर में गर्मी बढ़ाएगा; यह पहली बात है। बदबू अलग बात है — वह सब छोड़ दीजिए। केवल औषधि के लिए इन्हें लेने को कहा गया है। दवा के कारण, आपको इन्हें केवल दवा के रूप में लेना चाहिए। किसी और कारण से इन्हें छोड़ देना चाहिए।

134

संचित तेज के बिना ऊर्ध्व गति नहीं होती, इसलिए ब्रह्मचर्य को गैर-ज़रूरी नहीं माना जा सकता।

संचित तेज के बिना ऊर्ध्व गति नहीं

· 1:14:53–1:15:24

वक्ता कहते हैं कि संकल्प में कहने से कोई फ़ायदा नहीं — क्या कहेंगे, कि हम लहसुन-प्याज़ समेत सब खाएँगे पर आपकी पूजा करेंगे? उनके अनुसार यह ठीक नहीं है। वे कहते हैं कि आजकल बहुत से चैनलों पर तथाकथित बड़े लोग यह सब कहते हैं, और उनके अनुसार ब्रह्मचर्य का पालन भी ज़रूरी नहीं — पर जब तेज संचित ही नहीं होगा, तो ऊर्ध्व गति कहाँ से आएगी, और फिर मंत्र जप की ज़रूरत ही क्या है? तो फिर वैसे ही जीजिए, वे कहते हैं; इस पर दाग क्यों लगाते हैं?

135

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को कौन सा कवच या रुद्राक्ष पहनना चाहिए?

काल भैरव कवच, चाँदी या सोने में पहना जाए, धागे में कभी नहीं

· 1:15:25–1:15:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि परिवार के जो सदस्य पोस्टमार्टम डॉक्टर हैं, उन्हें भैरव जी का कवच, काल भैरव का कवच, विधि से उसका जप ठीक से करवाकर पहनाना चाहिए। उसे कभी धागे में मत पहनवाइए — अपने सामर्थ्य के अनुसार वे जो पहनते हैं, उस चाँदी या सोने में पहनवाइए, ताकि वे जहाँ भी जाएँ, सूतक आदि से कोई कठिनाई न हो।

136

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को कौन सा रुद्राक्ष पहनना चाहिए?

कालाग्नि रुद्राक्ष या भैरव रुद्राक्ष, 27 या 54 मनकों की माला में

· 1:16:00–1:17:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर वे रुद्राक्ष पहनना चाहें, तो असली पहनवाइए, डस्टिंग वाला नहीं — अच्छे रुद्राक्षों में कालाग्नि रुद्राक्ष पहनवाइए, जो सबसे उत्तम रहेगा; या फिर काल कालाग्नि रुद्राक्ष, या भैरव रुद्राक्ष। इन दोनों में से एक की, या दोनों की मिलाकर, 27 या 54 मनकों की माला, जैसी वे पहन सकें, और कवच विधि से ठीक से करवाइए: उनकी आध्यात्मिक उन्नति भी होगी, पेशे में भी ये चीज़ें काम करेंगी, और तीसरा, उन्हें प्रेत, भूत, पिशाच आदि से कभी कोई परेशानी नहीं होगी।

137

अगर गौरैया बाबा कुल देवता हैं, तो कुल देवी और कुल भैरव कौन हैं?

कुल देवता ही कुल भैरव बने रहते हैं

· 1:17:19–1:17:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर कुल देवता गौरैया बाबा हैं, तो कुल भैरव के रूप में वही रहेंगे। कुल देवी को खोजना पड़ेगा, अगर बाद में कोई नहीं बिठाई गईं। वे कहते हैं कि हुआ यह है कि आज के समय में बड़ी शक्तियों के साथ लोक शक्तियाँ बिठा दी गई हैं, तो वे किसी नई के बारे में कैसे बोलें।

138

क्या स्त्रियाँ पवित्री पहन सकती हैं?

तंत्रोक्त गृहस्थ कर्म में शुद्धि के लिए पहनी जाने वाली पवित्री

· 1:17:54–1:18:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि क्यों नहीं — कहाँ मना किया गया है? पवित्री शुद्धि के लिए, पवित्रता के लिए पहनी जाती है, और इसमें कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। वैदिक कर्म में बताए गए कर्मकांड के अनुसार, जो भी हो, तंत्र क्षेत्र में, आप जो भी तंत्रोक्त गृहस्थ काम कर रहे हों, पूजन में इसे पहना जा सकता है।

139

योगिनी साधना भी उठाने से कहीं बेहतर है कि एक साधना पकड़कर उसी में चलते रहें।

कई साधनाओं के बजाय एक साधना पकड़ने की सलाह

· 1:18:25–1:19:05

भगवती दुर्गा की योगिनी साधना समझाने को कहे जाने पर वक्ता पूछने वाले से कहते हैं कि कहीं बेहतर होगा अगर वे एक साधना पकड़कर उसी में चलते रहें। इसमें दो राय नहीं कि वे बहुत साधना करते हैं और बड़ी तीव्रता से करते हैं, पर एक साधना पर टिकते नहीं। वे कहते हैं कि यह वे बार-बार दोहराते हैं: लोग उनके बारे में पूछते हैं, और वे लंबे समय से एक ही साधना कर रहे हैं। वे सब देते हैं ताकि आप चुन सकें — केवल एक चुनिए।

140

क्या साबर साधना के लिए यंत्र चाहिए?

विग्रह के साथ साबर मंत्र, और विशेष सिद्धि के लिए ज़रूरी यंत्र

· 1:19:06–1:19:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिनका विग्रह है और जिनके लिए वैदिक मंत्र पढ़े जाते हैं, उन्हें साबर मंत्र बिल्कुल अर्पित किए जा सकते हैं। और अगर आपको कोई विशेष सिद्धि चाहिए, तो विधि-विधान से बना तंत्रोक्त साबर यंत्र, साबरी देवी का यंत्र आदि चाहिए होगा।

क्या साबर मंत्र उन्हें अर्पित किए जा सकते हैं जिनका विग्रह है, जिनके लिए वैदिक मंत्रों का जप होता है — बिल्कुल किए जा सकते हैं, वक्ता कहते हैं। और अगर आपको कोई विशेष सिद्धि चाहिए, तो विधि-विधान से बना तंत्रोक्त सबर मंत्र यंत्र, साबरी देवी का यंत्र आदि चाहिए होगा।

141

साबर साधना बड़े पैमाने पर नहीं सिखाई जाती क्योंकि यह अत्यंत तेज़ है और लोग इसे केवल परखने के लिए उठाते हैं।

साबर अत्यंत तेज़ है, और लोग इसे परखने के लिए उठाते हैं

· 1:19:33–1:19:59

वक्ता कहते हैं कि वे ज़्यादा साबर नहीं करवाते, क्योंकि साबर अत्यंत तेज़ है; और अगर वे यंत्र विधान और ये सब बताएँ, तो जिन्हें ज़रूरत है उनके लिए इसका असर ठीक है, पर बहुत से लोग इसे परखने के उद्देश्य से करने लगते हैं। वहीं कठिनाई आती है। अगर आप सच में बहुत समर्पित हैं, तो कर सकते हैं, और इसमें मिलने वाला फल भी अच्छा है।

142

भैरव अष्टमी पर कौन सी साधना करनी चाहिए?

मुख्य रूप से महाभैरव मंत्र, बाद में आसान विकल्प

· 1:20:00–1:20:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मुख्य रूप से, अगर दिया गया महाभैरव मंत्र लेकर किया जाए, तो वह सबसे उत्तम है। वे दूसरी साधनाएँ भी बताएँगे जो छोटी और आसान होंगी; और अगर कोई साबर से करना चाहे, तो वह भी बताएँगे।

भैरव साधना, वक्ता कहते हैं: मुख्य रूप से, अगर दिया गया महाभैरव मंत्र लेकर किया जाए, तो वह सबसे उत्तम है। दूसरी साधनाएँ भी वे बताएँगे, जो छोटी और आसान भी होंगी। अगर आप साबर से करना चाहें, तो वह भी बताएँगे।

143

कुंडली में बड़ी दुर्घटना का योग कैसे कटता है?

ज़िम्मेदार ग्रह का उपाय, और रक्षक ग्रहों की चीज़ें पहनना

· 1:20:13–1:20:59 · Also a question

वक्ता इसे सीधी बात कहते हैं: जो भी ग्रह दुर्घटना का योग दिखा रहा है, जिस भी मारकेश की महादशा चल रही है — उसके लिए, उसी के अनुसार, पहले उपाय करना चाहिए। अगर वह मारकेश है, तो दान और जप करवाकर उसे शांत कीजिए। और दूसरा, अगर वह आपका योगकारक भी है और दुर्घटना का कारण भी, तो उससे जुड़ा जप और कवच जप कीजिए और उसे पहनिए भी; और जो ग्रह आपके रक्षक हैं, उनसे जुड़ा रत्न, रुद्राक्ष, यंत्र और कवच पहन सकते हैं।

144

स्त्री को वैदिक मंत्र छोड़कर अपने इष्ट के तंत्रोक्त या साबर मंत्र का जितना हो सके जप करना चाहिए।

इष्ट के तंत्रोक्त और साबर मंत्र, वैदिक नहीं

· 1:21:00–1:21:19

वक्ता कहते हैं कि इसके अलावा, क्योंकि आप स्त्री हैं, वैदिक मंत्र छोड़कर अपने इष्ट के, अपने आराध्य के तंत्रोक्त मंत्र या साबर मंत्र का, या उनके कवच का जितना हो सके जप कीजिए — साधारण उदाहरण के रूप में, शिव रक्षा कवच या शिव रक्षा स्तोत्र, और भगवती से जुड़ा कामाख्या कवच। इन सबका जितना हो सके जप कीजिए।

145

जप बड़ी चोट को खरोंच में बदल देता है; दुर्घटना को पूरी तरह मिटाता नहीं।

बड़ी चोट खरोंच में बदलती है, मिटती नहीं

· 1:21:20–1:21:47

वक्ता कहते हैं कि दुर्घटना का योग कितना भी बड़ा हो, वह जितना होना चाहिए था उससे बहुत कम होगा — ऐसा नहीं कि बिल्कुल नहीं होगा; कुछ न कुछ ज़रूर होगा। हो सकता है दुर्घटना से बहुत बड़ी चोट आनी थी, और वहाँ आपको छोटी चोट, एक खरोंच लगे। इतने में वह कट जाएगा, आपका वह ग्रह। वे कहते हैं कि सबसे बड़ी ज़रूरत कवच का ज़्यादा से ज़्यादा जप है।

146

वाहन खरीदने के लिए अच्छा दिन और समय कैसे चुना जाता है?

चंद्र कुंडली और वर्तमान गोचर से

· 1:21:48–1:21:56 · Also a question

नई कार खरीदना चाहने वाले भाई के लिए इस महीने अच्छा दिन और समय पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि यह देखकर ही बताना पड़ेगा — आपके भाई की चंद्र कुंडली के अनुसार, और अभी गोचर क्या है।

यह देखकर बताना पड़ेगा, वक्ता कहते हैं। आपके भाई की चंद्र कुंडली के अनुसार। और अभी गोचर क्या है।

147

क्या घर में पंचमुखी हनुमान जी की फ़ोटो की पूजा करना ठीक है?

फ़ोटो पूरी तरह स्वीकार्य है

· 1:21:57–1:22:17 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह पूरी तरह ठीक है — गलत क्यों होगा। घर में हनुमान चालीसा के हवन की पूरी प्रक्रिया अलग से पूछे जाने पर वे कहते हैं कि जितना पहले दिखाया जा चुका है, उससे पहले वाली शुरुआती प्रक्रिया भी वे डालेंगे।

यह पूरी तरह ठीक है, वक्ता कहते हैं; गलत क्यों है? एक व्यक्ति, जो घर में हनुमान चालीसा का हवन करना चाहते हैं पर पूरी प्रक्रिया नहीं जानते, हवन की पूरी प्रक्रिया पूछते हैं; वक्ता कहते हैं कि जितना दिखाया गया है, उससे पहले की शुरुआती प्रक्रिया भी वे डालेंगे।

148

जब कुलदेवी का नाम बिल्कुल अनजाना हो, तो भैरव का अंदाज़ा लगाने के बजाय क्षेत्र पूछा जाता है।

अंदाज़ा लगाने के बजाय क्षेत्र पूछना

· 1:22:18–1:22:37

माँ विष नाम की कुलदेवी के भैरव कौन होंगे, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि उन्हें सबके बारे में पता नहीं — नाम अक्सर ऐसा होता है जो वे पहली बार सुन रहे होते हैं, और उन्हें हर क्षेत्र की जानकारी नहीं है। वे पूछने वाले से पूछते हैं कि वे कहाँ से हैं, और कहते हैं कि अगर वे बताएँ तो वे भी खोजने की कोशिश करेंगे।

देखिए, वक्ता कहते हैं, उन्हें सबके बारे में पता नहीं है। नाम बहुत बार ऐसा होता है जो वे पहली बार सुन रहे होते हैं। उन्हें हर क्षेत्र की जानकारी नहीं है। आप कहाँ से हैं? वह भी बताइए, तो वे भी खोजने की कोशिश करेंगे।

149

बनारस की माता शीतला के भैरव कौन हैं?

बनारस क्षेत्र के भैरव के रूप में काल भैरव

· 1:22:38–1:22:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बनारस के भैरव केवल काल भैरव ही होंगे।

बनारस के भैरव, वक्ता कहते हैं, केवल काल भैरव ही होंगे।

150

जब कुंडली में सिद्धा योगिनी चल रही हो तो इसका क्या अर्थ है?

आठ योगिनियाँ और जिसकी महादशा चल रही हो उसका फल

· 1:22:48–1:23:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सिद्धा योगिनी आठ योगिनियों में से है, जिनकी बात ऊपर हुई थी: जिस योगिनी की महादशा चल रही हो, उसी के अनुसार फल आता है। आठों योगिनियों का अपना अलग फल है, और योगिनियों का भी पूरा प्रभाव होता है।

सिद्धा योगिनी, वक्ता कहते हैं — आठ योगिनीयाँ; इसकी बात ऊपर हुई थी। जिसकी महादशा चल रही है, उसी के अनुसार फल मिलता है। आठों योगिनियों का अपना अलग फल है। योगिनियों का भी पूरा प्रभाव होता है।

151

घर में माता का श्रृंगार और सेवा कैसे होती है?

स्नान, गंधानुलेपन, फिर दिन और उनकी इच्छा के अनुसार श्रृंगार

· 1:23:06–1:23:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जैसे होता है वैसे होता है: भगवती को स्नान कराकर, उसके बाद उनका गंधानुलेपन होता है; फिर जो भी उचित दिन चल रहा हो, उसके अनुसार अलग-अलग तरह से उनका श्रृंगार होता है — कपड़े से, गहनों से, कभी रुद्राक्ष से। जैसी इच्छा वे मन में जगाती हैं, वैसा उनका श्रृंगार होता है; जिस रूप की इच्छा वे जगाती हैं, उसी रूप का श्रृंगार होता है।

152

तंत्र प्रयोग कटने से पहले कितने सतनाम पाठ चाहिए?

1100 का संकल्प — ग्यारह दिन, रोज़ 108 पाठ

· 1:23:42–1:24:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब आप किसी भी चीज़ का पाठ करें, तो 1100 का — यानी ग्यारह दिन का — संकल्प लीजिए और रोज़ 108 पाठ कीजिए। एक बार करने पर असर में कमी ज़रूर आएगी, तंत्र कितना भी बड़ा हो; और अगर आप बार-बार जप करें, तो काट हो जाएगी। ज़रूरी नहीं कि एक बार में हो या दो बार में: यह इस पर निर्भर करेगा कि आप कौन से नियम रख रहे हैं और किस तरह पाठ-पूजा कर रहे हैं। आपके लिए दो बार में हो सकता है, किसी और के लिए तीन बार में। वे जोड़ते हैं कि भैरव के 108 नामों का विधान काल भैरव अष्टमी पर दिया जाएगा।

153

अगर विग्रह का अधिवास ठीक से नहीं हुआ और अब उसकी पूजा हो रही है तो क्या?

कुछ नहीं किया जा सकता — अधिवास शुरुआत का काम है

· 1:24:23–1:24:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर नहीं हो पाया और विग्रह अब पूजित हो गया है, तो दूसरी बार नहीं करवाया जा सकता। यह चीज़ केवल शुरुआत में ही करवाई जाती है।

अगर नहीं हो पाया, वक्ता कहते हैं, और विग्रह अब पूजित हो गया है, तो दूसरी बार नहीं करवाया जा सकता। यह चीज़ केवल शुरुआत में ही करवाई जाती है।

154

क्या स्त्री शालिग्राम को छू सकती है?

स्त्री के शालिग्राम शिला छूने पर कोई रोक नहीं

· 1:24:50–1:25:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल छू सकती है — शालिग्राम शिला को क्यों न छुएँ।

वे बिल्कुल छू सकती हैं, वक्ता कहते हैं। शालिग्राम शिला को क्यों न छुएँ?

155

जब आकर्षण बदल जाए, तो क्या बगलामुखी और काली साथ-साथ की जा सकती हैं?

तीन से छह महीने एक ही साधना पर टिके रहना

· 1:25:01–1:25:29 · Also a question

एक सुनने वाले ने पूछा, जो लंबे समय से बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम कर रहे थे, फिर काली योगिनी साधना और वैरी नाशन, और अब काली माता की ओर आकर्षण महसूस करते हैं। वक्ता कहते हैं कि अगर आप अब भगवती काली का कर रहे हैं, तो केवल उन्हीं का करते रहिए। कुछ समय उनका कीजिए — तीन महीने, छह महीने। ऐसा नहीं कि आप नहीं कर सकते, पर एक ही कीजिए; जो आप कर रहे हैं उसे लंबे समय तक करेंगे, तो बेहतर होगा।

अगर आप अब भगवती काली का कर रहे हैं, वक्ता कहते हैं, तो केवल उन्हीं का करते रहिए। कुछ समय उनका कीजिए — तीन महीने, छह महीने। ऐसा नहीं कि आप नहीं कर सकते, पर एक ही कीजिए। जो आप कर रहे हैं, उसे लंबे समय तक करेंगे, तो बेहतर होगा।

156

भगवती मदानंद का सार्वजनिक वर्णन गलत सुनने वाले को ऐसी शक्ति की ओर खींचेगा जिसकी सेवा हर कोई नहीं कर सकता।

वर्णन गलत सुनने वाले को ऐसी शक्ति की ओर खींचता है जिसकी सेवा हर कोई नहीं कर सकता

· 1:25:30–1:26:40

वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ के लिए ये ऐसी शक्तियाँ हैं कि अगर इनका पूरा तंत्रोक्त विवरण बताया जाए, तो जिन्हें पहले से जानकारी है उनके लिए ठीक है; पर नए लोग वैसे ही हैं जैसे पहले पूछने वाले थे — अगर वे भगवती मदानंद के स्वरूप पर प्रकाश डालें और उनका वर्णन करें, तो लोग उधर आकर्षित होंगे। भगवती मदानंद की सेवा-पूजा हर कोई नहीं कर सकता, और लोग यह नहीं मानेंगे; अगर वे बिना पूछे बात बता दें, तो लोगों को यहाँ से प्रक्रिया न मिले तो कहीं और से मिल जाएगी, क्योंकि उनका सामर्थ्य ऐसा है, और फिर वे करने लगेंगे और कठिनाई आएगी। वे कहते हैं कि कुछ बातें सीमित मात्रा में ही बतानी चाहिए।

157

अगर स्फटिक शिवलिंग पहले से है, तो क्या नर्मदेश्वर शिवलिंग लाना चाहिए?

जो पहले से स्थापित है, उसी की पूजा तब तक करें जब तक वह खंडित न हो

· 1:26:41–1:27:11 · Also a question

बिल्कुल नहीं, वक्ता कहते हैं: अगर स्फटिक शिवलिंग पहले से है, तो केवल उसी का पूजन कीजिए। नर्मदेश्वर क्यों लाना? जब तक भगवान उस रूप में विराजमान हैं, जब तक उनकी कृपा है, केवल उन्हीं की सेवा-पूजा होने दीजिए। केवल अगर — भगवान न करे — वे कभी खंडित हो जाएँ, या किसी विशेष ग्रह या नक्षत्र का प्रभाव अपने ऊपर ले लें, तभी कोई और शिवलिंग लाइए।

158

क्या विग्रह उम्र के साथ ज़्यादा शक्तिशाली होता जाता है?

विग्रह, यंत्र या अस्त्र जितना पुराना, उतना प्रभावी

· 1:27:12–1:27:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे जितने पुराने होते जाएँगे, उनका प्रभाव उतना बढ़ता जाएगा। अपने देवी-देवताओं का श्री विग्रह, उनका यंत्र, उनका अस्त्र — जितना पुराना, उतना प्रभावी। घर के दीपक भी, जितने पुराने, उतने प्रभावी। हर चीज़ सिद्ध हो जाती है: चीज़ जितनी पुरानी होती जाती है, उसमें उतनी सिद्धियाँ रहती हैं।

159

वास्तु समस्या के लिए पहले नक्शा देखना ज़रूरी है, और वास्तु वीडियो 15 दिसंबर को साधना का समय खत्म होने के बाद आएँगे।

वास्तु के लिए नक्शा चाहिए, और साधना का समय 15 दिसंबर के बाद खत्म होता है

· 1:27:31–1:28:24

वक्ता कहते हैं कि जहाँ वास्तु की समस्या है, उसे पहले देखना होगा — आपका नक्शा देखकर ज़रूर बताया जा सकता है। वे कहते हैं कि चैनल पर वास्तु से जुड़े वीडियो भी डाले जाएँगे, पर अभी नहीं, जब तक कुछ साधना पूरी न हो: 15 दिसंबर के बाद साधना का मुख्य समय फिर साधारण हो जाता है, और उस समय कोई विशेष साधना नहीं करनी होगी, इसलिए तब वे सुनने वालों से इन सब विषयों पर चर्चा करेंगे, और सब नए अनुभव भी डालेंगे।

160

विशेष कृपा के लिए सोखा बाबा जैसे लोक देवता की पूजा कैसे होती है?

सीमित विधि, पुरुष सूक्त और श्री सूक्त, या मूल वीरभद्र-भद्रकाली स्वरूप

· 1:28:25–1:29:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उन्होंने ऊपर बताया था और फिर बताते हैं कि मुख्य रूप से वीरभद्र और भद्रकाली पूजे जाते हैं। अगर आपको विशेष कृपा और विशेष पूजन चाहिए, तो जैसा उन्होंने पहले कहा है, लोक देवी-देवताओं की पूजा का तरीका सीमित मात्रा में है — वहाँ कोई विशेष मंत्र नहीं होते। पंडित जी बहुत प्रसन्न होकर पुरुष सूक्त और श्री सूक्त से पूजन करवाते हैं; और अगर आप अपने स्थान के किसी अच्छे पंडित जी से, यानी जानकार कुल पुरोहित से करवाएँ। पर अगर आपको कुछ विशेष चाहिए, तो उनके मूल स्वरूप में जाना होगा — सोखा बाबा यानी वीरभद्र, और उनकी परमेश्वरी यानी भगवती भद्रकाली।

161

क्या अपनी कुंडली सबको दिखानी चाहिए?

सबसे पहले बृहस्पति नाराज़ होते हैं

· 1:29:10–1:29:59 · Also a question

वक्ता पूरी तरह सहमत हैं कि कुंडली सबको नहीं दिखानी चाहिए, और कहते हैं कि इससे सबसे पहले बृहस्पति देव नाराज़ होते हैं। वे बताते हैं कि फ़ेसबुक पर क्या दिखता है: कोई लिखता है कि अगर बृहस्पति देव लग्न में हैं तो आपका जीवन देवता जैसा बीतेगा और आप विद्वान होंगे, या अगर राहु लग्न में है तो आप शेयर बाज़ार में बहुत कमाएँगे — और फिर लोग नीचे अपनी कुंडली डालकर पूछते हैं, देखिए, मेरे तीसरे घर में राहु है, मैं क्या कमाऊँगा।

162

मुफ़्त ज्योतिष परामर्श दोनों पक्षों के लिए नुकसानदेह क्यों है?

दक्षिणा, और केवल देवज्ञ के सामने दिखाने का नियम

· 1:30:00–1:31:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह मना है और इसे गुप्त रखना चाहिए; कहा गया है कि इसे देवज्ञ के सामने, देवज्ञ ज्योतिषी के सामने दिखाया जाए। जब कोई कहता है कि वह विवरण भेज रहा है, तो वे कहते हैं: निजी रूप से, कभी सार्वजनिक रूप से नहीं। अगर आपमें श्रद्धा और विश्वास है, तो इसका एक नियम है। डॉक्टर के पास जाते हैं तो फ़ीस देते हैं। यहाँ बात इतनी खुली हो गई है कि लोग फ़ीस लेते ही नहीं और अपनी प्रैक्टिस के लिए कहते हैं भेजिए, हम देखेंगे — और दोनों का बुरा होता है: पढ़ने वाले को शायद परवाह न हो, पर दिखाने वाला बर्बाद हो जाता है।

163

कन्या लग्न किस तत्व का है?

पृथ्वी तत्व, और पूरा प्रश्न पूछने की माँग

· 1:31:22–1:31:50 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि कन्या लग्न वायु, जल, पृथ्वी आदि में से क्या है, वक्ता कहते हैं कि प्रश्न अधूरा है — अगर कन्या लग्न का तत्व जानने का कोई खास कारण है, तो बताइए और वे उत्तर देंगे; तत्व का आप क्या करेंगे? पूरा प्रश्न पूछिए। वे जोड़ते हैं कि वैसे भी तत्व पृथ्वी तत्व से जुड़ा है।

अगर कन्या लग्न में तत्व जानने का कोई खास कारण है, वक्ता कहते हैं, तो बताइए और वे बताएँगे। क्योंकि यह प्रश्न अधूरा है: तत्व का आप क्या करेंगे? पूरा प्रश्न पूछिए। वैसे भी, वक्ता कहते हैं, तत्व पृथ्वी तत्त्व से जुड़ा है।

164

नई साधना उठाने के बजाय एक पुरानी साधना ही क्यों दोहरानी चाहिए?

कालिका योगिनी के परिणाम उन्हें मिले जिनका जप पहले से मज़बूत था

· 1:31:51–1:32:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे बार-बार कहते हैं कि एक साधना पकड़कर उसे बार-बार दोहराना चाहिए। वे कहते हैं कि वे जो भी अनुभव डालते हैं, वे किसी के तुरंत के अनुभव नहीं हैं: कालिका योगिनी साधना के जो अनुभव वे डाल रहे हैं, उनमें भी, क्योंकि परिणाम उन्हें अभी आया, वे लोग वह साधना पहले से कर रहे थे। चैनल पर डाले तीन वीडियो में से किसी में भी ऐसा कोई नहीं जिसने आज वीडियो देखा, कल साधना की और परसों कालिका योगिनी उसके सामने प्रकट हो गईं। कुछ एक साल या उससे ज़्यादा से जुड़े हैं, कुछ जनवरी या फ़रवरी से; उन्होंने तय मात्रा में कई साधनाएँ की हैं, और फल उन्हें अभी आया — उनका जप और पूजा पहले से मज़बूत थे, उनका तपोबल पहले से बढ़ा हुआ था, और इस साधना ने उन्हें तुरंत फल दिया।

165

व्यूज़ के लिए गढ़ी गई दर्शन की कहानियाँ ऐसे स्टंट हैं जो वे करने से मना करते हैं।

वे स्टंट जो वे करने से मना करते हैं

· 1:32:53–1:33:00

वक्ता कहते हैं कि अगर उन्हें व्यूज़ बढ़ाने होते, अगर उन्हें वैसे करना होता, अगर यह सब स्टंटबाज़ी करनी होती, तो वे कहते कि दिन में कालिका योगिनी साक्षात प्रकट होकर उनके सामने आईं और बोलीं, खप्पर लो, तुम मुझे मेवे, काजू और किशमिश खिला रहे हो, अब तुम खाओ, हम दोनों खाते हैं और तुम्हें भी खिलाते हैं। वे कहते हैं कि लोग ऐसे वीडियो डालेंगे।

166

वाम देवी का एक वीडियो व्यूज़ चाहने वाले चैनलों ने मंत्रों सहित कॉपी कर लिया, जबकि वह लोक देवी साधना हर कोई नहीं कर सकता।

मंत्रों सहित कॉपी की गई एक लोक देवी साधना, जिसे हर कोई नहीं कर सकता

· 1:33:01–1:33:31

वक्ता कहते हैं कि उन्होंने वाम देवी का एक वीडियो डाला था। लोक देवी की साधना इस तरह हर कोई नहीं कर सकता। अब इसे मना भी नहीं किया जा सकता; लोगों को व्यूज़ चाहिए और वे कुछ भी करेंगे।

वाम देवी का एक वीडियो उन्होंने डाला है, वक्ता कहते हैं। लोक देवी की साधना इस तरह हर कोई नहीं कर सकता। अब इसे मना भी नहीं किया जा सकता। लोगों को व्यूज़ चाहिए; वे कुछ भी करेंगे।

167

बड़े चैनलों से कहा गया है कि वे आम साधनाएँ दें और इन सामग्रियों का उपयोग लोक कल्याण के लिए करें।

आम साधनाएँ दें, और इन सामग्रियों का उपयोग लोक कल्याण के लिए करें

· 1:33:32–1:33:59

वक्ता कहते हैं कि चैनल पर हमेशा आम साधना दी जानी चाहिए। उन्होंने जो अनुभव डाले हैं — हनुमान जी के हवन के, झंझीरा के और बाकी सब के — उनमें उन्होंने खुलकर कहा है कि वे जानते हैं कि दूसरे चैनलों के लोग, बड़े चैनल वाले, उन्हें सुनते हैं: कृपया इन चीज़ों का उपयोग लोक कल्याण के लिए कीजिए। अगर ऐसे लोग इस तरह की कठिनाई लेकर आपके पास आएँ, तो उनसे ये सामग्रियाँ इस्तेमाल करवाइए, फ़ायदा होगा।

168

क्या नाड़ी दोष से संतान होने में कठिनाई होती है?

अष्टकूट मिलान में नाड़ी दोष

· 1:34:00–1:34:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर अष्टकूट मिलान में नाड़ी दोष है — और वह दोनों का होगा, इसलिए दोनों का है — तो संतान होने में कठिनाई होती है। वे कहते हैं कि केवल उसी को लेकर यह नहीं कहा जा सकता; फिर भी, अगर एक शब्द में कहें, तो मुख्य कठिनाई ठीक वहीं है। क्या करना चाहिए, यह पूरी कुंडली देखकर ही बताया जा सकता है।

169

माता मदानंद जैसी लोक शक्तियों के भोग और भेंट के तरीके इसलिए नहीं बताए जाते क्योंकि गलत सुनने वाला बाकी उपाय के बिना केवल भोग की नकल करेगा।

गलत सुनने वाला बाकी उपाय के बिना माता मदानंद के भोग की नकल करेगा

· 1:34:58–1:35:50

एक सुनने वाले लिखते हैं कि उनसे मिलने से पहले वे माँ काली के साथ माता मदानंद को गोबर के कंडे पर केवल गुड़ का भोग दे रहे थे, क्योंकि पड़ोसी दिन-रात तंत्र करते हैं, और उस भोग से काफ़ी राहत मिली। वक्ता कहते हैं कि ठीक इसीलिए वे ऐसी बातें नहीं बताते: अगर वे अभी यह बताएँ, तो लोग पूछेंगे। आप उस क्षेत्र के हैं और पहले से देखते-सुनते-करते आए हैं; पर एक नया व्यक्ति, जिसके घर में पता नहीं कौन सी शक्ति है, यह पढ़-सुनकर खुद करेगा। अगर उसे तंत्र बाधा है, तो वक्ता उसे हनुमान जी की धूनी करने को कहेंगे, कि यह तरीका है, झंझीरा कीजिए — और वह नहीं करेगा। वह कहेगा, नहीं, रानू कुमार साहू ने कहा था कि गोबर के कंडे पर हमने केवल गुड़ का भोग दिया और वे ठीक हो गए, तो हम भी माता मदानंद को देंगे। और वहीं कठिनाई आएगी।

170

ऐसे वीडियो से लाखों व्यूज़ आएँगे, पर हर दस में से आठ सुनने वालों का नुकसान होगा।

लाखों व्यूज़ बनाम दस में से आठ सुनने वालों का नुकसान

· 1:35:51–1:36:26

वक्ता कहते हैं कि वे जानते हैं कि इससे उन्हें बहुत व्यूज़ मिलेंगे — कि अगर वे इस तरह के वीडियो बनाएँ तो रातों-रात लाखों पार कर जाएँगे। पर सुनने वालों में से दस में से आठ का नुकसान होगा, और यह वे कभी नहीं चाहते। वे पूछने वाले से कहते हैं: आपको राहत मिल रही है, आप कर रहे हैं; इसे बिल्कुल अपने तक सीमित रखिए, यही अच्छा है।

171

क्या हर क्षेत्र में लोग लोक शक्तियों से परेशान होते हैं?

देहरादून में मदानंद, और दूसरे क्षेत्रों के उनके समकक्ष

· 1:36:27–1:37:46 · Also a question

एक सुनने वाले लिखते हैं कि उनके यहाँ, उत्तराखंड के देहरादून में, माता मदानंद का इस्तेमाल होता है, और साफ़ कहें तो इन्हीं से लोग परेशान होते हैं। वक्ता सहमत होते हैं: बाबा का नाम लिया जाए — कहीं लोग इनसे परेशान हैं, कहीं चानन बली से, कहीं लोग गूंगड़ से परेशान हैं, कहीं मेलोडी से। वे कहते हैं कि हर क्षेत्र में लोग किसी न किसी ऐसे अजीब प्राणी से परेशान होते हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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