साधना शुरू होते ही धन क्यों घटता है — अभिचार, उग्र मंत्र और लक्ष्मी का बंधन

अभिचार और ग़लत मंत्र घर की लक्ष्मी को कैसे बाँधते हैं।

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01

गृहस्थ का धन ठीक साधना शुरू करते ही क्यों घटने लगता है?

साधना शुरू करने के बाद आया धन अभाव

· 01:52–02:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि खास मुश्किल यह है कि हम साधना भी करना चाहते हैं और यह भी चाहते हैं कि धन की कमी न हो। अक्सर ऐसा होता है कि पहले व्यक्ति की हालत अच्छी होती है, और साधना शुरू करते ही उसके जीवन में धन अभाव आने लगता है। वे कहते हैं कि पूरा विषय एक-एक करके समझाया जाएगा।

02

साधना के लिए भी पैसा क्यों चाहिए?

हवन और साधना सामग्री का ख़र्च

· 02:17–03:00 · Also a question

हवन के लिए उसकी सामग्री चाहिए और साधना के लिए उसका सामान। वक्ता कहते हैं कि साधना के क्षेत्र में भी महँगाई आसमान छू रही है। साधनाओं पर लाखों रुपये ख़र्च होते हैं, इसलिए पैसे के बिना यह नहीं हो सकती — और गृहस्थ सकाम होते हैं, उनकी इच्छाएँ साधना से पूरी होनी होती हैं।

03

शत्रु किसी घर पर अभिचार असल में कैसे करता है?

दो साधन: मंत्र या सिद्ध की हुई क्षुद्र शक्तियाँ

· 03:01–03:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शत्रु जब भी अभिचार करता है — चाहे वह बड़ा तांत्रिक हो या छोटा — उसकी क्रिया दो में से एक होती है: या तो वह मंत्रों का प्रयोग करेगा, या अपनी सिद्ध की हुई क्षुद्र शक्तियों का, जैसे भूत, प्रेत, पिशाच, वेताल, ब्रह्म या मसान।

04

कैसे पता चले कि कौन आपके घर में अभिचारिक प्रयोग लेकर आ रहा है?

वह आगंतुक जिसके आते ही झगड़ा होता है

· 03:13–04:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप अभिचार से पीड़ित हैं और आपका घर अभी रक्षा में नहीं आया है, तो सबसे पहले यह देखें कि किस व्यक्ति के घर आने के बाद झगड़ा शुरू होता है। वे कहते हैं, मान लीजिए, उस व्यक्ति ने कुछ करवाया है और उसे पहुँचाने के लिए साथ लेकर आया है।

05

घर का झगड़ा लक्ष्मी की बढ़ोतरी को कैसे रोकता है?

कलह और खीज का काम और व्यापार तक पहुँचना

· 04:03–04:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो खीज और आपसी झगड़ा शुरू होता है, और जो कलह बनती है, उसका असर मन पर होकर काम की जगह, व्यापार, हर जगह पड़ता है — और इसी से आपकी लक्ष्मी की बढ़ोतरी रुक जाती है। जहाँ बार-बार कलह और क्लेश होता है, वहाँ घर में लक्ष्मी की बढ़ोतरी यूँ ही रुक जाती है।

वक्ता कहते हैं कि यही कारण बनता है। जो खीज शुरू होती है, आपस का झगड़ा, जो कलह बनती है — उसका असर मन पर होकर काम की जगह पर, व्यापार पर, हर जगह पड़ता है। इसी वजह से आपकी लक्ष्मी की बढ़ोतरी रुक जाती है। अगर बार-बार कलह और क्लेश होता रहे, तो आपके घर में लक्ष्मी की बढ़ोतरी यूँ ही रुक जाएगी।

06

उच्चाटन गृहस्थ की आमदनी पर कैसे वार करता है?

उच्चाटन — मन का एक जगह न टिकना

· 04:20–04:51 · Also a question

दूसरी चीज़ उच्चाटन है, जिसमें मन एक जगह टिकता नहीं। आप जानते हैं कि ग्राहक से अच्छे से बात करेंगे तो सौदा पक्का होगा, और आप जानते हैं कि अपने नीचे के लोगों से काम कैसे लेना है, फिर भी आप ठीक से बोल नहीं पाएँगे, क्योंकि मन उच्चाटित रहता है और आप इधर-उधर भागते रहते हैं।

07

अभिचारिक उच्चाटन के बाहरी लक्षण क्या हैं?

रूखापन, बोलने से घबराहट और अकेले रहने की इच्छा

· 04:52–05:06 · Also a question

आपका किसी से सीधे मुँह बात करने का मन नहीं करेगा, और करेंगे भी तो आपका तरीका काफ़ी रूखा होगा, जिससे लोग आपसे दूर भागेंगे। वक्ता लक्षण गिनाते हैं: मन का न टिकना, किसी से बात करने में घबराहट, लोगों से दूर भागने का मन, और एकांत में जाने की इच्छा।

08

क्या ऊँचा साधक उच्चाटन के लक्षणों को अपने ऊपर हमला मान ले?

चेतावनी: यह केवल निचले स्तर का असर है

· 05:07–05:10 · Also a question

वक्ता साफ़ कहते हैं कि यह तंत्र का ऊँचे स्तर का असर नहीं है; वे खास तौर पर उस असर की बात कर रहे हैं जो अभिचारिक प्रयोग से होता है। अगर आप ऊँचे स्तर के साधक हैं, तो वे कहते हैं कि इन बातों को अपने ऊपर न लें।

वक्ता कहते हैं कि तंत्र का यह असर ऊँचे स्तर का नहीं है। वे इस समय खास तौर पर उस असर की बात कर रहे हैं जो अभिचारिक प्रयोग से होता है, जो एक अलग बात है। वे कहते हैं कि अगर आप ऊँचे स्तर के साधक हैं, तो कृपया इन बातों को अपने ऊपर न लें।

09

धन की कमी के लिए कुंडली के कौन-से भाव देखे जाते हैं?

दूसरा और ग्यारहवाँ भाव और लग्नेश से उनका संबंध

· 05:11–05:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इन सबके अलावा कुंडली में दूसरा और ग्यारहवाँ भाव देखना होता है — वहाँ कौन-सा ग्रह और कौन-सी राशि बैठी है, और वे ग्रह लग्न और लग्नेश से क्या संबंध बनाते हैं। ये सब बातें देखना ज़रूरी हो जाता है।

10

चर्चा की गई कुंडली के दूसरे भाव में ग्रहण दोष, पितृ दोष और अंगारक योग एक साथ

दूसरे भाव में ग्रहण दोष, पितृ दोष और अंगारक योग

· 05:27–06:00

उस दिन जिस कुंडली पर उन्होंने चर्चा की थी, उसके दूसरे भाव में ही ग्रहण दोष, पितृ दोष और अंगारक योग एक साथ थे। जहाँ दूसरे भाव में ऐसा दोष हो — वहाँ राहु बैठा हो — और दूसरे भाव का स्वामी और लग्नेश आपस में ठीक न हों, वहाँ धन का काफ़ी नुकसान होता है।

11

क्या दूसरे भाव के दोष में पुरखों से मिली संपत्ति नष्ट होती है?

पैतृक संपत्ति का क्षय, और दूसरे के नाम से फ़र्म शुरू करना

· 06:01–06:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पुरखों से मिली संपत्ति का तो क्षय ज़रूर होता है, और उसे जिस भी तरह लगाएँ, क्षय शुरू हो जाता है। अगर पहले विश्लेषण करवा लें और उससे जुड़ा दान या जप करवा लें, और फिर व्यापार अपने नाम के बजाय पत्नी या बहन के नाम से शुरू करें, तो जोखिम कुछ कम हो जाता है।

12

ग्यारहवें भाव में दोष क्या करता है?

लाभ और आय का भाव, और उसके शमन की ज़रूरत

· 06:35–06:47 · Also a question

ग्यारहवाँ भाव लाभ का भाव और आय का भाव है, इसलिए अगर वहाँ कोई दोष बैठा है और हम उसका शमन नहीं करते, तो लंबे समय तक धन नहीं मिल पाता। वक्ता कहते हैं कि ज्योतिष के अनुसार यही स्थिति है।

वे कहते हैं कि दूसरी बात आती है ग्यारहवें भाव की स्थिति। क्योंकि ग्यारहवाँ भाव लाभ का भाव, आय का भाव है, अगर उसमें भी कोई दोष बैठा है, और हम उसका शमन नहीं करते, तो लंबे समय तक धन की प्राप्ति नहीं हो पाती। वे बताते हैं कि इतना ज्योतिष के अनुसार है।

13

साधना की तुलना में कुंडली आपको कहाँ तक ले जा सकती है?

एक तरफ़ कुंडली, दूसरी तरफ़ साधना का असर

· 06:48–07:24 · Also a question

बहुत से लोगों का जीवन देखकर वक्ता कहते हैं कि कुंडली एक सीमा तक ही साथ दे सकती है। वे मानते हैं कि शायद वे इसे बहुत गहराई से देखना न जानते हों, पर कहते हैं कि जो अच्छे ज्योतिषी भक्ति और तंत्र साधना के रास्ते पर चलते हैं, वे कहते हैं कि एक तरफ़ कुंडली है और दूसरी तरफ़ आपकी साधना का असर।

14

बिना जानकारी के उग्र या अस्त्र मंत्र पढ़ने से धन की कमी क्यों होती है?

उग्र और अस्त्र मंत्रों को बिना उनका प्रयोग जाने पढ़ना

· 07:25–07:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पहला और सबसे खास कारण यह है कि अभिचार से पीड़ित व्यक्ति किसी उग्र मंत्र के बारे में सुनता है — कोई शताक्षरी, कोई अस्त्र मंत्र, कोई प्रत्यंगिरा या बगला प्रत्यंगिरा मंत्र, जिसकी संस्कृत में कहा गया है कि शत्रु को खा जाओ, पी जाओ, फाड़ दो, बाँध दो, पटक दो, यहाँ मारो वहाँ मारो — और बिना यह जाने कि ऐसी विद्याओं का प्रयोग कैसे होता है, उसे शुरू कर देता है।

15

उग्र विद्या का पाठ करने से पहले क्या जानना ज़रूरी है?

सावधानियाँ, किस भैरव से आज्ञा ली जाती है, और भोग कहाँ दिया जाता है

· 08:00–08:14 · Also a question

वक्ता पूछते हैं कि क्या आप जानते हैं कि इन विद्याओं का प्रयोग कैसे होता है, पाठ से पहले क्या सावधानियाँ रखनी हैं, पाठ करने से पहले किस भैरव से आज्ञा ली जाती है, और आम तौर पर भोग कहाँ और कैसे देना चाहिए, और कौन-सी शक्ति आती है और कौन-सी नहीं।

16

बिना मार्गदर्शन के उग्र मंत्र का जप आमदनी पर क्या असर करता है?

आमदनी का आधा रह जाना या पूरी तरह रुक जाना

· 08:15–09:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो चार पैसे आ रहे थे, वे आने बंद हो जाएँगे। और अगर आना बंद न भी हो, तो ऐसे मंत्रों का जप करने पर हालत इतनी बिगड़ेगी कि जहाँ कोई धन का स्रोत बना था, जहाँ आप दस रुपये कमाते थे वहाँ सीधे पाँच पर आ जाएँगे, और आपकी स्थिति पूरी तरह डगमगा जाएगी।

17

छोटा भाई बड़े भाई के अभिचार का जवाब बिना गुरु और बिना जानकारी के बगला प्रत्यंगिरा प्रयोग से देता है

दो भाई, और उनमें से एक पर बगला प्रत्यंगिरा का प्रयोग

· 09:10–09:48

वे एक परिवार के दो सगे भाइयों का उदाहरण लेते हैं, बड़ा और छोटा। बड़े ने छोटे पर अभिचार किया है, और अब छोटा बिना किसी गुरु और बिना किसी जानकारी के बगलामुखी, यानी बगला प्रत्यंगिरा का प्रयोग करता है — भगवती की शरण में दीपक जलाकर एक बार पाठ करना नहीं, बल्कि 1100, 1100, 1100 पाठ करने बैठ जाता है, क्योंकि उसने पढ़ा है कि इतने पाठ से शत्रु नष्ट होता है।

18

अपने ही भाई पर किया प्रयोग उल्टा क्यों पड़ता है?

एक ही कुलदेवी और घर की एक ही लक्ष्मी

· 09:49–10:03 · Also a question

क्योंकि दोनों की कुलदेवी एक है, और घर में पूजी गई लक्ष्मी — जो कभी कुलदेवी के माध्यम से पूजी गई — दोनों के लिए एक ही है। वे कहते हैं, पहले यह सीखिए कि उन्हें किस तरह अलग किया जाता है; जहाँ यह जानकारी नहीं है और आप ये प्रयोग चला देते हैं, वहाँ भी लक्ष्मी का बंधन शुरू हो जाता है।

19

एक ही कुल के भीतर के प्रयोग को जानकार व्यक्ति कैसे सँभालता है?

सिद्ध पीठ पर आवाहन, और ज़बरदस्ती नहीं, विनती

· 10:04–10:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब ऐसा प्रयोग किसी जानकार व्यक्ति से करवाया जाता है और अपने घर की शक्तियाँ बंधन में आने लगती हैं — क्योंकि दोनों एक ही कुल के लोग हैं — तो शक्ति का उसके सिद्ध पीठ, सिद्ध स्थान या तंत्र पीठ पर आवाहन होता है, उन्हें जो धार, पूजा और भोग देना है वह दिया जाता है, और इस काम के लिए उनसे विनती की जाती है।

20

सिद्ध पीठ पर प्रयोग करते समय कुल शक्ति से क्या माँगा जाता है?

ग़लत करने वाले के बजाय धर्म के साथ खड़े होने की विनती

· 10:40–11:00 · Also a question

वक्ता जो विनती बताते हैं वह यह है: आप धर्म का साथ दीजिए। अगर बड़ा भाई ज़मीन-जायदाद लूट रहा है, तो आप उसका साथ क्यों दे रही हैं? उसे भी धर्म के रास्ते पर लाइए। मैं आपसे यही विनती करता हूँ — इस तरफ़ रहिए। वे कहते हैं कि इसकी एक विधि और एक विधान है।

वक्ता कहते हैं कि उनसे इन शब्दों में विनती की जाती है: कृपया धर्म का साथ दीजिए। अगर बड़ा भाई ज़मीन-जायदाद लूट रहा है, तो आप उसका साथ क्यों दे रही हैं? उसे भी धर्म के रास्ते पर लाइए। मैं आपसे यही विनती करता हूँ — कि आप इनकी तरफ़ रहें। वे कहते हैं कि इस चीज़ की एक विधि है, और एक विधान है।

21

दो भाइयों की कुल शक्तियाँ कैसे अलग की जाती हैं?

दो पिंड, और विवाह में होने वाले जोड़ का उल्टा

· 11:01–11:28 · Also a question

अगर वे कहें कि वे दोनों तरफ़ रहेंगी पर आप अलगाव कर सकते हैं, तो वक्ता कहते हैं कि यह विवाह का उल्टा करके किया जाता है: शादी में क्रियाएँ दो परिवारों को जोड़ती हैं, पितरों का, देवी-देवताओं का और कुलदेवी-देवताओं का मिलन होता है। यहाँ दो पिंड बनाए जाते हैं; जैसे प्रेत पिंड और पितृ पिंड जोड़े जाते हैं, वैसे ही तंत्र के क्षेत्र में यह जुड़ाव काटकर अलग किया जाता है।

22

संयुक्त परिवार से अलग होने वाला परिवार पुराने पूजा स्थान की मिट्टी उठाकर शुभ मुहूर्त में नए घर में स्थापित करता है

पुराने पूजा स्थान की मिट्टी नए घर में ले जाना

· 11:29–12:00

वक्ता बताते हैं कि गाँव में क्या होता है जब कोई परिवार बड़े संयुक्त परिवार से अलग होकर अपना घर बनाता है: वे पुराने घर के पूजा स्थान से ही मिट्टी उठाते हैं और शुभ मुहूर्त में ले जाकर नए घर में देवता का नया स्थान बनाते हैं।

23

इस जानकारी के बिना प्रत्यंगिरा प्रयोग करते रहें तो क्या होता है?

अस्त्र जप के ऊपर महाविपरीत, बगला और तारा प्रत्यंगिरा

· 12:01–12:12 · Also a question

जब इन बातों की जानकारी नहीं है और आप प्रत्यंगिरा, महाविपरीत प्रत्यंगिरा, बगला प्रत्यंगिरा, तारा प्रत्यंगिरा और अस्त्र मंत्रों का जप पर जप करते जाते हैं, तो वक्ता कहते हैं कि आपकी परेशानी और भी बढ़ेगी।

वक्ता कहते हैं कि जब इन विषयों की जानकारी नहीं है, और आप प्रत्यंगिरा करेंगे, महाविपरीत प्रत्यंगिरा करेंगे, बगला प्रत्यंगिरा करेंगे, तारा प्रत्यंगिरा करेंगे, और अस्त्र मंत्रों का जप पर जप करते रहेंगे — तो आपकी मुश्किल और भी बड़ी होगी।

24

तंत्र को दोधारी तलवार क्यों कहा जाता है?

बृहद् मंत्रों के प्रयोग पर लगी सीमा

· 12:13–12:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ठीक इसी कारण तंत्र को दोधारी तलवार कहा जाता है। वे कहते हैं कि बृहद् मंत्रों के प्रयोग के लिए हमेशा एक सीमा बताई जाती है — इतना करो, इस तरह करो — और तब समझ आने लगता है कि असर क्या है और क्या नहीं।

वक्ता कहते हैं कि इसीलिए कहा जाता है, और यही कारण है कि कहा जाता है कि तंत्र दोधारी तलवार है। बृहद् मंत्रों के प्रयोग के लिए दोनों तरफ़ की सीमा हमेशा दी जाती है: इतना करो, इस तरह करो। तब समझ आने लगता है कि असर क्या है और क्या नहीं।

25

जब एक से ज़्यादा शक्तियों का प्रयोग करना पड़े तो क्या होता है?

भक्त प्रह्लाद और नरसिंह का आवाहन

· 12:26–13:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर एक शक्ति काम नहीं कर रही, तो दूसरी का प्रयोग लीजिए। वे भक्त प्रह्लाद से शुरू करते हैं: जब हिरण्यकश्यप ने अपना अत्याचार बहुत बढ़ा दिया, तो प्रह्लाद ने भक्ति भाव से जप, साधना और पूजा करते हुए वहाँ भगवान नरसिंह को प्रकट करवाया।

26

क्या नरसिंह सौम्य शक्ति हैं?

परम वैष्णव शक्ति जो फिर भी महा उग्र हैं

· 13:06–13:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नरसिंह परम वैष्णव शक्ति होते हुए भी उनकी उग्रता देखिए — उन्होंने खून से स्नान किया और हिरण्यकश्यप की आँतें माला बनाकर गले में पहनीं, इतना क्रोध था उन्हें। वे पूछते हैं, क्या आपको लगता है कि वे सौम्य और शांत शक्ति हैं? वे उग्र नरसिंह हैं, महा उग्र शक्ति।

27

तंत्र के अनुसार नरसिंह असल में शांत कैसे हुए?

सर्वेश्वर भैरव, प्रत्यंगिरा, छिन्नमस्तिका और गंडभेरुंड

· 13:24–13:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि विष्णु पुराण में आप पढ़ते हैं कि भक्त प्रह्लाद ने स्तुति की और नरसिंह शांत हो गए; तंत्र के क्षेत्र में सच्चाई कुछ अलग है। नरसिंह अवतार से जुड़ी जिन और शक्तियों का प्राकट्य हुआ वे हैं सर्वेश्वर भैरव, भगवती प्रत्यंगिरा और छिन्नमस्तिका, और गंडभेरुंड जैसे रूप धारण किए गए।

28

प्रयोग को समेटना जानने का नियम क्या है?

उपसंहार — और उसे न जानने का ब्रह्महत्या जैसा दोष

· 13:45–14:17 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर शत्रु के नाश के लिए शक्ति का आवाहन करने के बाद आपको अपना प्रयोग शांत करना नहीं आता, तो आपसे बड़ा दोषी कोई नहीं। अगर आप किसी पर मारण विद्या चलाना जानते हैं, तो उसे निष्क्रिय करने की विधि भी जाननी होगी; अगर आप उपसंहार की विधि नहीं जानते, तो आपको बहुत बड़ा दोष लगता है, ब्रह्महत्या के बराबर दोष।

29

जब प्रह्लाद की स्तुति से नरसिंह शांत नहीं हुए तो क्या हुआ?

सर्वेश्वर रूप में सदाशिव और गंडभेरुंड रूप में विष्णु

· 14:18–14:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब भक्त प्रह्लाद से नरसिंह शांत नहीं हुए, तो भगवान सदाशिव ने सर्वेश्वर अवतार लिया; सर्वेश्वर अवतार के बाद भगवान विष्णु ने गंडभेरुंड अवतार लिया। तब भी दोनों में युद्ध चला, क्योंकि दोनों शक्तियाँ बहुत तेज़ और बहुत ऊर्जा से भरी थीं।

वक्ता कहते हैं कि जब भक्त प्रह्लाद से वे शांत नहीं हुए, तब भगवान सदाशिव ने सर्वेश्वर अवतार लिया। सर्वेश्वर अवतार के बाद भगवान विष्णु ने गंडभेरुंड अवतार लिया। उस समय भी दोनों में युद्ध चला। दोनों की शक्तियाँ परम थीं — यानी बहुत तेज़ चलने वाली, बहुत ऊर्जा से भरी।

30

शत्रु के नाश के लिए बुलाई गई शक्ति शांत नहीं हुई, तो दूसरी शक्ति का प्रयोग करना पड़ा

एक शक्ति शांत न हो तो दूसरी का प्रयोग करना होता है

· 14:34–14:53

वक्ता कहते हैं, यह देखिए: आपने शत्रु के नाश के लिए एक शक्ति बुलाई, और जब वह शांत नहीं हुई तो दूसरी शक्ति का प्रयोग करना पड़ा। आप यह नहीं कह सकते कि आप तंत्र के क्षेत्र में हैं इसलिए उसी शक्ति की सेवा करके ही उसे शांत करेंगे — जब वह शांत नहीं होगी, तो दूसरी शक्ति का प्रयोग करना पड़ेगा।

31

नरसिंह और गंडभेरुंड अपने मूल रूप में कैसे लौटे?

प्रत्यंगिरा, और दोनों का अपने मूल रूप में लौटना

· 14:54–15:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब वह शक्ति भी शांत नहीं हुई, तो भगवती प्रत्यंगिरा रूप में प्रकट हुईं। प्रत्यंगिरा रूप के बेहद विस्फोटक असर से दोनों अपने मूल रूप में आ गए; दोनों के बीच एक तरह का समझौता हुआ, और फिर सारी शक्तियाँ शांत हो गईं।

जब वह शक्ति भी शांत नहीं हुई, तब भगवती महाप्रत्यंगिरा रूप में प्रकट हुईं। और प्रत्यंगिरा रूप के महा — यानी, जैसा वे कहते हैं, बेहद विस्फोटक — असर से दोनों वहाँ अपने मूल रूप में आ गए। वहाँ दोनों के बीच एक तरह का समझौता हुआ। फिर सारी शक्तियाँ शांत हो गईं।

32

क्या एक ही प्रयोग आप पर किए गए सारे तंत्र एक बार में काट सकता है?

देव कोटि को भी कई प्रयोग लगे, तो मनुष्य एक की उम्मीद नहीं कर सकता

· 15:11–15:22 · Also a question

वक्ता पूछते हैं कि जब देव स्तर पर इतने प्रयोग हो रहे हैं, तो आप मनुष्य होकर कैसे सोच सकते हैं कि आप बस एक शक्ति का प्रयोग करेंगे और एक ही कोशिश में, लाखों ख़र्च करके, अपने ऊपर किए गए सारे तंत्र काट देंगे और फिर बहुत सुखी जीवन जिएँगे?

वक्ता पूछते हैं कि जब देव कोटि में इतने प्रयोग हो रहे हैं, तो आप मनुष्य होकर कैसे सोच सकते हैं कि आप बस एक शक्ति का प्रयोग करेंगे, और एक ही कोशिश में, लाखों रुपये ख़र्च करके, अपने ख़िलाफ़ किए गए सारे तंत्र काट देंगे और फिर बहुत सुखी जीवन बिताएँगे? वे कहते हैं, यह गृहस्थ जीवन है, साधारण जीवन।

33

समस्या एक बार में हमेशा के लिए क्यों नहीं सुलझ सकती?

जब तक शत्रु जीवित है, वह तंत्र करता रहेगा

· 15:23–15:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब तक शत्रु जीवित है, वह तंत्र करेगा। आज अपने सारे प्रयोग कटवा लीजिए; यह भी जान लीजिए कि कोई तांत्रिक पूरी ज़िंदगी आपके लिए खड़ा होकर जप नहीं करेगा। आपने एक बार, किसी समय, पैसा ख़र्च किया, और कोई भी एक हद तक ही साथ देता है।

वक्ता कहते हैं कि जब तक शत्रु जीवित है, वह तंत्र करेगा। आज अपने सारे प्रयोग कटवा लीजिए — और यह भी जान लीजिए कि कोई तांत्रिक पूरी ज़िंदगी आपके लिए खड़ा होकर जप नहीं करता रहेगा। आपने एक बार, किसी समय, पैसा ख़र्च किया; कोई भी एक समय तक ही आपका साथ देगा।

34

सहारा आपके अनुष्ठान और पुण्य को मज़बूत कर सकता है, पर फिर आपको अपने बल पर खड़ा होना है

सहारा लीजिए, पर खुद सक्षम बनिए

· 15:37–15:57

वक्ता कहते हैं, हाँ, किसी ने आपके अनुष्ठानों और पुण्य को मज़बूत किया और पीछे से आपको खड़ा किया — पर उसके बाद आपको भी मज़बूती से खड़ा होना है। अगर जीवन भर मज़बूत रहना चाहते हैं, तो सहारा लेकर खुद सक्षम बनिए, और जिस पर भरोसा है उस पर पूरा भरोसा रखिए। कुछ भी एक ही कोशिश में नहीं होता।

35

निरंतरता का अर्थ है कवच और उसका अनुष्ठान दोहराते रहना और उससे जुड़ी देव शक्ति का हवन करवाना

कवच अनुष्ठान दोहराना, उसका हवन, और शक्ति पीठ पर श्रृंगार

· 15:58–16:30

वक्ता कहते हैं कि निरंतरता बनाकर आगे बढ़ना होता है: अगर आपने कोई कवच शुरू किया है, तो वह कवच दोहराते रहिए, उसका अनुष्ठान करते रहिए, उससे जुड़ी देव शक्ति का हवन करवाते रहिए — और अगर करना नहीं आता, तो उनका जो भी शक्ति पीठ हो वहाँ उनका श्रृंगार और पूजा करवाइए।

36

कलियुग में शुक्र और चंद्र के महाश्राप से लगभग हर किसी से आचरण के दोष होते हैं

कलियुग में शुक्र और चंद्र का महाश्राप

· 16:31–16:49

वक्ता कहते हैं कि कलियुग में आचरण से जुड़े दोष लगभग हर किसी से होते हैं। वे अपने चैनल और वेबसाइट पर पहले की एक पोस्ट बताते हैं, जिसका नाम है शुक्र और चंद्र का महाश्राप, और कहते हैं कि उसे पढ़कर साफ़ हो जाएगा कि दोष कैसे लगता है; वह दोष किसी न किसी कारण से लगभग हर घर में है।

37

अनुष्ठान का शुरुआती समय कुछ भी देता क्यों नहीं लगता?

पहला जप पूरा पुराने दोष मिटाने में लगना

· 16:50–17:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उन दोषों का शमन इन्हीं मंत्र जपों से होता है, इसलिए जो अनुष्ठान आप शुरू करते हैं या कर चुके हैं, वे शुरू में पूरे के पूरे उन्हीं चीज़ों को हटाने में लग जाते हैं। पर आप सोचते हैं कि शत्रु ने अभिचार किया, उसे काट दिया, और काम ख़त्म।

वे कहते हैं कि उन दोषों का शमन इन सब मंत्रों के जप से होता है — जो मंत्र जप और अनुष्ठान आप शुरू करते हैं, या कहीं करवा चुके हैं। तो शुरू में वह सब उन्हीं चीज़ों को हटाने में चला जाता है। आप इस बीच सोचते हैं कि शत्रु ने अभिचार किया, उसे काट दिया, और काम हो गया।

38

ब्रह्म स्थान पर ब्रह्म बैठाने से अक्सर काम क्यों नहीं होता?

कारण बैठाने वाले की नहीं, अपनी ही ग़लती में होना

· 17:04–17:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बहुत से सुनने वाले जानते होंगे कि कितनी बार लोग ब्रह्म को ब्रह्म स्थान पर बैठाते हैं और काम बस नहीं होता। वे इसका कारण ढूँढते रहते हैं और कहते हैं कि जानकार ने ठीक से नहीं बैठाया; असली कारण कुछ और होता है, और उतनी गहराई में जाकर ही समझ आएगा कि आप खुद क्या ग़लती कर रहे हैं।

39

गृहस्थ जीवन में धन की कमी का पहला उपाय क्या है?

अपने इष्ट का मीठे जल से अभिषेक

· 17:31–18:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पहली बात यह है कि आपके इष्ट जो भी हों — आप जिनकी भी सेवा-पूजा कर रहे हैं, जिनकी भी तंत्र साधना कर रहे हैं — महीने में एक बार, या कम से कम हर पक्ष में एक बार, उनका मीठे जल से अभिषेक ज़रूर करना चाहिए। आप जिस भी शक्ति की साधना कर रहे हैं, पहले उन्हें शांत और सौम्य करना सीखिए।

40

अभिषेक के जल में कौन-सी चीज़ें डाली जा सकती हैं, और किसके लिए?

भगवती और नारायण के लिए हरिद्रा ठीक, महादेव के लिए नहीं

· 18:03–18:23 · Also a question

अगर देवता को हरिद्रा चढ़ती है तो उसका प्रयोग किया जा सकता है — पर महादेव को हरिद्रा उस तरह नहीं चढ़ती, इसलिए उन्हें हरिद्रा मिले जल से स्नान नहीं कराएँगे, जबकि भगवती के रूपों को और भगवान नारायण को चढ़ा सकते हैं। जल में तरह-तरह की दिव्य सुगंधित चीज़ें मिलाकर एक दिन अभिषेक किया जाता है; एकादशी को कीजिए, पूर्णिमा को कीजिए, जैसी इच्छा हो।

41

इष्ट के धन अभिषेक में कौन-सा संकल्प लिया जाता है?

देवता की शांति और प्रसन्नता, और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए

· 18:24–18:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसमें संकल्प लीजिए — उनकी शांति के लिए, उनकी प्रसन्नता के लिए, और लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए। आप कोई भी साधना कर रहे हों, लक्ष्मी के लिए सबसे पहले यही काम करना चाहिए।

वे कहते हैं कि इससे, इसमें संकल्प लीजिए — उनकी शांति के लिए, उनकी प्रसन्नता के लिए, और लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए। आप कोई भी साधना कर रहे हों, लक्ष्मी के लिए सबसे पहले यही काम करना चाहिए।

42

दान किसे कभी नहीं देना चाहिए?

अपात्र को कभी दान नहीं

· 18:33–18:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दूसरी बात यह है कि दान देते समय खास ध्यान रखना होता है। अपात्र को कभी भी, कभी भी दान न दें।

दूसरी बात यह है कि दान देते समय आपको खास ध्यान रखना है। वे कहते हैं, अपात्र को कभी दान न दें — कभी भी नहीं।

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कुंडली की जानकारी न हो तो क्या दान करना चाहिए?

सोना, चाँदी या बड़ी नकदी के बजाय साधारण दान

· 18:42–19:04 · Also a question

दान देते समय ध्यान रखिए कि आप कौन-सी वस्तु दान कर रहे हैं; कुंडली की जानकारी हो तो उसके अनुसार दान कीजिए, और न हो तो साधारण दान कीजिए, विशेष दान नहीं। विशेष दान का मतलब है सोना दान करना, चाँदी दान करना, या सीधे नकद में बहुत बड़ी रकम दान करना — और अगर उसके बाद और बड़ा नुकसान हो, तो वहीं मुश्किल है।

44

अपने ही लाभेश की वस्तु दान करने से दान करने वाले पर मुश्किल आती है

अपने लाभेश की वस्तु का दान

· 19:05–19:14

वक्ता कहते हैं कि अगर शुक्र आपका लाभेश है, लाभ भाव में बैठा है, और आप वही चीज़ दान करते रहते हैं — यानी पैसा दान करते रहते हैं — तो कहीं न कहीं आपको इससे मुश्किल होगी।

वक्ता कहते हैं, जैसे अगर आपकी कुंडली में लाभेश — लाभ भाव का स्वामी — शुक्र है, और आप वही चीज़ दान करते रहते हैं, पैसा दान करते रहते हैं, तो कहीं न कहीं वहाँ आपको मुश्किल होगी।

45

किस तरह का दान धन अभाव को कम करता है?

सामग्री का दान — अनाज, कंबल, कपड़ा

· 19:15–19:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सामग्री का दान करना चाहिए — अनाज आदि, कंबल, या वस्त्र और कपड़े का दान। कुंडली के अनुसार दान करें तो अच्छा है, और उससे धन अभाव कम होता है।

वे कहते हैं कि इससे जुड़ी सामग्रियों का दान करना चाहिए — कि आप अनाज आदि का दान कर रहे हैं, या कंबल, या वस्त्रों का, कपड़े का दान कर रहे हैं। कुंडली के अनुसार दान करें, तो अच्छा है; उससे धन अभाव कम होता है। वे कहते हैं, इन विषयों को देखना चाहिए।

46

जो मंत्र पहले ही असर दिखा चुका है, उसे फिर-फिर चलाना क्या हानिकारक है?

जागृत मंत्र का बार-बार प्रयोग दुरुपयोग कहलाता है

· 19:29–19:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मंत्र का बार-बार प्रयोग तो प्रयोग भी नहीं कहलाता — उसे दुरुपयोग कहना चाहिए। एक बार आपने मंत्र का प्रयोग किया और समझ गए कि वह जागृत है और पूरा असर देता है, तो उसे बार-बार प्रयोग करने से परेशानी होती है, और उससे भी धन अभाव होता है।

47

अन्न और धन की कमी का रोज़ का सबसे बड़ा कारण क्या है?

जो खाना खाते हैं उसका भोग न लगाना

· 19:48–20:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके बाद सबसे प्रमुख बात यह आती है: आप जो भी खाते-पीते हैं, अगर उसका भोग नहीं लगाते, तो अन्न की कमी और लक्ष्मी की कमी होती है।

वक्ता कहते हैं कि इसके बाद सबसे प्रमुख बात आती है। आप जो भी खाते-पीते हैं — अगर उसका भोग नहीं लगाते, तो वह अन्न की कमी है, लक्ष्मी की कमी है।

48

रोज़ का भोग कैसे लगाना चाहिए?

दिन में एक बार इष्ट के आगे साफ़, ताज़ा बना खाना

· 20:03–20:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दिन में कम से कम एक बार, आप जो भी खाना खा रहे हैं — पूरी सफ़ाई से बना, रात का रखा हुआ नहीं — उसका भोग अपने इष्ट और आराध्य के आगे ज़रूर लगाना और उन्हें अर्पित करना चाहिए, ताकि वे तृप्त हों और आपके अन्न में बढ़ोतरी हो।

49

क्या हर देवता का कोई रूप पैसे की परेशानी दूर करता है?

सबसे बड़े गृहस्थ, सबसे बड़े वैरागी और सबसे धनी सदाशिव

· 20:22–20:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप जिस भी शक्ति की साधना करें, उनका एक रूप ज़रूर होगा जो धन से जुड़ी हर मुश्किल दूर करने में मदद करे — उनका कोई स्तोत्र, कोई मंत्र, कोई रूप होगा। वे भगवान शिव का उदाहरण देते हैं: वे सबसे बड़े गृहस्थ भी हैं और सबसे बड़े वैरागी भी, और सबसे धनी भी।

50

दुर्गा उपासक के लिए धन का अभिषेक क्या है?

तंत्रोक्त देवी सूक्तम् या चौथे अध्याय के साथ अष्टमी का अभिषेक

· 20:58–21:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप भगवती दुर्गा की साधना और उपासना करते हैं, तो अष्टमी तिथि के दिन या तो तंत्रोक्त देवी सूक्तम् का पाठ करते हुए, या चौथे अध्याय का पाठ करते हुए उनका अभिषेक कीजिए। उनका अभिषेक भी आपको सुगंधित जल आदि से करना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि अगर आप भगवती दुर्गा की साधना और उपासना करते हैं, तो अष्टमी तिथि के दिन — चाहे तंत्रोक्त देवी सूक्तम् का पाठ करते हुए उनका अभिषेक करें, या चौथे अध्याय का पाठ करते हुए उनका अभिषेक करें — उनका अभिषेक भी आपको सुगंधित जल आदि से करना चाहिए।

51

अपने आराध्य का श्रृंगार क्यों करवाना चाहिए?

दिवाली या पंचमी पर आराध्य का श्रृंगार

· 21:14–21:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके अलावा दिवाली के समय या पंचमी के समय किसी मंदिर में अपने आराध्य का श्रृंगार करवाना चाहिए। कहा जाता है कि जब आप अपने आराध्य का श्रृंगार करते हैं, तो वे आपके जीवन का श्रृंगार करते हैं; श्रृंगार करवाने से बहुत से दोषों का शमन होता है।

52

आपके अपने ग़लत कामों को आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता

अपने ग़लत कामों को आपसे बेहतर कोई नहीं जानता

· 21:39–21:52

एक और बात आती है, चरित्र से जुड़ी। वक्ता कहते हैं कि जब हम अपना जीवन जाँचते हैं, तो देखते हैं कि हमने कितने ग़लत काम किए हैं — और इस बारे में आपसे ज़्यादा कोई नहीं जान सकता।

वे कहते हैं कि अब एक और बात आती है, चरित्र से जुड़ी। जब हम अपने जीवन को पलटकर देखते और जाँचते हैं, तो दिखता है कि हमने ऐसे कितने ग़लत काम किए हैं। इस बारे में आपसे ज़्यादा आपके बारे में कोई नहीं जान सकता।

53

क्या विवाह से पहले के संबंध चरित्र दोष हैं?

विवाह से पहले के संबंध, पच्चीस या अट्ठाईस की उम्र तक

· 21:53–22:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पच्चीस की उम्र तक, या पच्चीस से अट्ठाईस तक, व्यक्ति बहुत घूमता-फिरता है और बहुत से लोगों से संबंध बनाता है — पुरुष स्त्रियों से, स्त्रियाँ पुरुषों से — और आजकल ये सामान्य बातें हैं। इससे मंत्रों का जो दोष बनता है, उसकी वे आगे चर्चा करते हैं।

वक्ता कहते हैं कि अब इस वजह से मंत्रों का जो भी दोष है — पच्चीस की उम्र तक, जब तक आपकी उम्र पच्चीस, अट्ठाईस साल होती है, आप इधर-उधर बहुत घूमे हैं, आपने बहुत से लोगों से संबंध बनाए हैं: पुरुष हैं तो स्त्रियों से; स्त्री हैं तो पुरुषों से। वे कहते हैं, आजकल ये सामान्य बातें हैं।

54

जब प्रारब्ध पहले ही बन चुका हो तो मंत्र असर क्यों नहीं देता?

बन चुका प्रारब्ध भोगना ही पड़ता है

· 22:11–22:37 · Also a question

जब आपको जीवन का सच समझ आया और विवाह हुआ, और फिर परेशानियाँ शुरू हुईं, तो जो प्रारब्ध पहले ही बन चुका है वह भोगना पड़ता है — और उस समय मंत्र आपको अपना असर नहीं देगा। वक्ता कहते हैं कि आप अपना सच कभी नहीं बताएँगे, कोई नहीं बताता; पर जो बीत गया उसके सच और उसके प्रारब्ध को स्वीकार करना सीखिए।

55

एक मंत्र कितने समय तक और कितने जप के साथ पकड़ना चाहिए?

एक मंत्र पर तीन साल, पाँच-पाँच लाख के पुरश्चरण के साथ

· 22:38–22:56 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि कहा जाता है कि एक मंत्र की साधना कम से कम तीन साल करनी चाहिए। बीच में आप अलग-अलग रूपों की एक दिन या तीन दिन की साधना कर सकते हैं, पर एक मंत्र ऐसा होना चाहिए जिसमें आप दीक्षित हों, या जिसमें आपकी बहुत गहरी आस्था हो, जिसके आप पाँच-पाँच लाख के अनुष्ठान और पुरश्चरण करते रहें।

56

जब प्रारब्ध सच में कट जाता है तो क्या होता है?

जीवन की व्यथा का अंत

· 22:57–23:43 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तब प्रारब्ध सच्चे अर्थ में कटेगा; और जब वह कटेगा, तो आपके जीवन की पीड़ा भी ख़त्म हो जाएगी।

वे कहते हैं कि तब प्रारब्ध शब्द के सच्चे अर्थ में कटेगा। और जब वह कटेगा, तो आपके जीवन की व्यथा भी ख़त्म हो जाएगी।

57

कवच के अलावा कामाख्या का कौन-सा स्तोत्र पढ़ा जा सकता है?

कामाख्या के दूसरे स्तोत्र केवल विवाहित पुरुषों के लिए

· 23:44–24:16 · Also a question

जब पूछा गया कि कवच के अलावा कामाख्या माई का कौन-सा स्तोत्र पढ़ना चाहिए, तो वक्ता जवाब देते हैं कि उन्हें नहीं पता कि पूछने वाला स्त्री है या पुरुष, इसलिए नियम यह है: अगर आप पुरुष हैं, तो उनके दूसरे स्तोत्र तभी पढ़ें जब आप विवाहित हों। नहीं तो कवच पढ़ें, और उसके अलावा कुछ नहीं।

58

दुर्गा कवच कैसे जागृत किया जाता है?

चैनल पर दो विधियाँ — पूरा मंडल, या सबसे सरल रूप

· 24:17–24:46 · Also a question

दुर्गा कवच जागृत करने के सवाल पर वक्ता कहते हैं कि इस विषय पर चैनल पर दो वीडियो हैं — "दुर्गा कवच गृहस्थ तंत्र" खोजिए, दोनों आ जाएँगे। एक विधि में पूरा मंडल बनाकर बताया गया है कि इसे सिद्ध कैसे करना है; दूसरी सबसे सरल, सबसे आसान विधि है। किसी एक का पालन करके इस गुप्त नवरात्रि में इसे जागृत कीजिए।

59

लड़की के जल्दी विवाह के लिए क्या उपाय है?

कात्यायनी, तुलसी, या तीन पक्ष तक पार्वती सप्ताक्षरी

· 24:47–25:22 · Also a question

लड़कियों के जल्दी विवाह के लिए उपाय या अनुष्ठान पूछे जाने पर वक्ता भगवती कात्यायनी, या भगवती तुलसी, या भगवती पार्वती से जुड़ी साधना बताते हैं। वे चैनल पर शिव जी के साथ दिए गए भगवती पार्वती के सप्ताक्षरी साधना विधान की ओर इशारा करते हैं, और कहते हैं कि वह अनुष्ठान कम से कम तीन पक्ष तक कीजिए।

60

बटुक भैरव के रोज़ के दही-बड़े के भोग का क्या करना चाहिए?

भोग साधक स्वयं ग्रहण करे

· 25:23–25:37 · Also a question

जब पूछा गया कि बटुक भैरव जी के जप में रोज़ भोग लगाए गए दही-बड़े का क्या करें, तो वक्ता जवाब देते हैं कि बटुक भैरव जी को जो भी दही-बड़े का भोग लगता है, वह आपको खुद ग्रहण करना चाहिए — मज़े से खाइए।

जब पूछा गया कि बटुक भैरव जी के जप में रोज़ भोग लगाए गए दही-बड़े का क्या करना चाहिए, तो वक्ता जवाब देते हैं कि बटुक भैरव जी को जो भी दही-बड़े का भोग लगता है, वह आपको खुद ग्रहण करना चाहिए। वे कहते हैं, मज़े से खाइए।

61

भगवान नरसिंह की मूल शक्ति कौन हैं?

नरसिंही, आठ शक्तियाँ, और लक्ष्मी-नरसिंह की एक साथ पूजा

· 25:38–26:05 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि भगवान नरसिंह की मूल शक्ति नरसिंही ही कहलाती हैं। भगवान नरसिंह में और आगे जाएँ, तो उनकी आठ शक्तियों की बात होती है, और आठ तरह के नरसिंह रूप भी बताए गए हैं। जिन नरसिंह को हम आम तौर पर देखते हैं, उनकी पूजा लक्ष्मी-नरसिंह के रूप में साथ करनी चाहिए।

62

लगातार पूजा के बाद भी मन उच्चाट क्यों हो जाता है?

केवल मंत्र जप काफ़ी नहीं — स्तोत्र गायन और तीर्थ यात्रा

· 26:06–26:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह लगभग हर किसी के जीवन में आता है और सबके साथ होता है, और इसीलिए वे बार-बार कहते हैं कि अगर आप केवल मंत्र जप करेंगे तो परेशानी होगी। मंत्र जप के साथ स्तोत्र भी गाने चाहिए, और समय मिले और सामर्थ्य हो, तो तीर्थ यात्रा करनी चाहिए।

63

गिरनार जी जाने वाले साधकों का घर लौटने का मन नहीं करता

गिरनार में साधक जो घर लौटना नहीं चाहते

· 26:34–27:05

वे अपने साधक परिवार के साधकों — मनोज राज पुरोहित, प्रसाद क्षीरसागर, हितेश गोरी — का नाम लेते हैं, जिनका गिरनार जी जाने पर लौटने का मन नहीं करता। वहाँ से उनका संदेश आता है कि क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम यहीं रह जाएँ, घर-परिवार छोड़ दें, ये ज़िम्मेदारियाँ छोड़ दें। वे पूछते हैं, वहाँ उच्चाटन क्यों नहीं होता: यह तीर्थ क्षेत्र का असर है।

64

गृहस्थ को कितनी बार तीर्थ यात्रा करनी चाहिए?

साल में कम से कम एक बार, ताकि उच्चाट जैसे दोष मिटें

· 27:06–27:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पूजा-पाठ करना बहुत अच्छा है, पर संभव हो तो साल में कम से कम एक बार तीर्थ यात्रा ज़रूर करनी चाहिए, जिससे उच्चाट जैसे दोष अपने आप ख़त्म हो जाते हैं।

वे कहते हैं कि तो पूजा और पाठ करना बहुत अच्छा है, पर संभव हो, तो साल में कम से कम एक बार तीर्थ यात्रा ज़रूर करनी चाहिए। उससे उच्चाट आदि ये दोष अपने आप ख़त्म हो जाते हैं।

65

क्या साधना का फल साधक के अपने अधिकार में है?

फल का हमारे अधिकार क्षेत्र में न होना

· 27:11–27:33 · Also a question

फल न मिलने की शिकायत पर वक्ता जवाब देते हैं कि फल मिल रहा है, पर वह चीज़ आपको अपने जीवन में सीधे दिखाई नहीं देती — और वे कहते हैं कि वह चीज़ हमारे अधिकार क्षेत्र में आती ही नहीं। फल हमारे अपने अधिकार में है ही नहीं।

66

दूसरे मूर्तिकार के पहले ही वार से वह पत्थर टूट गया जो पहले ही सौ वार झेल चुका था

वह पत्थर जो पहले ही सौ वार झेल चुका था

· 27:34–28:24

एक मूर्तिकार मूर्ति के लिए पत्थर निकालने एक बड़े पहाड़ पर गया और हथौड़े से मारता रहा, जब तक थककर यह कहकर चला नहीं गया कि पत्थर नहीं टूटेगा। दूसरा मूर्तिकार उसी पहाड़ पर, उसी जगह गया, और पहले ही वार में पत्थर का एक टुकड़ा टूटकर गिर गया।

67

उच्चाटन में साधना ठीक तब छोड़ दी जाती है जब व्यक्ति पास पहुँच चुका था और कृपा मिलने वाली थी

कृपा आने से ठीक पहले साधना छोड़ देना

· 28:25–28:37

वक्ता कहते हैं कि मतलब यह है कि हो सकता है आप काफ़ी पास पहुँच गए थे, अब कृपा मिलने वाली थी — पर आप वहाँ उच्चाटित हो गए और छोड़ दिया। उच्चाटन एक साधारण बात है जो सबके साथ होती है।

वक्ता समझाते हैं कि यह कहने का मतलब यह है कि हो सकता है आप काफ़ी पास आ गए थे, अब आपको कृपा मिलनी थी — पर आप उस जगह उच्चाटित हो गए और उसे छोड़ दिया। तो उच्चाटित होना एक साधारण बात है; यह सबके साथ होता है।

68

साधना छोड़ने के बजाय उच्चाटन में क्या करना चाहिए?

संख्या घटाकर एक माला या ग्यारह बार कीजिए, पर कभी न तोड़िए

· 28:38–29:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ जीवन में उच्चाटन साधारण है और इसके कई कारण हैं, इसलिए इसकी चिंता न करें और अपना पूजा-पाठ न छोड़ें। आप इसे घटा सकते हैं: अगर ग्यारह माला जप करते थे और उच्चाट हो रहा है, तो कुछ समय एक माला कीजिए। अगर एक माला का भी मन न हो, तो उस मंत्र का ग्यारह बार जप कीजिए — पर उसमें बने रहिए, ताकि निरंतरता न टूटे।

69

कथाएँ तमाशे की तरह करवाई जाती हैं, ऐसे हाव-भाव के साथ जिनका अनुष्ठान से कोई लेना-देना नहीं

तमाशा बनी कथा, और भगवती का सद्बुद्धि न देना

· 30:07–30:36

वक्ता कहते हैं कि शायद भगवती की इच्छा नहीं है, और वे किसी को ऐसी सद्बुद्धि नहीं देतीं। करवाने वाले कथाएँ करवाते हैं — तरह-तरह के हाव-भाव, व्यासपीठ पर स्त्रियाँ बैठी हैं, किसी चीज़ से कोई लेना-देना नहीं, बस मज़े; भागवत कथा चलती है और कुछ नहीं होता। वे दोहराते हैं कि अत्याचारों का प्रतिकार पूरी तरह संभव है; करवाने वाला और करने वाला दोनों सही तरह के होने चाहिए।

70

क्या पीढ़ियों में दोहराता आठवें भाव का योग कुछ बताता है?

तीन पीढ़ियों में आठवें भाव में केतु-मंगल, राहु-मंगल और शनि-मंगल

· 30:37–31:21 · Also a question

एक श्रोता बताते हैं कि उनके पिता की कुंभ लग्न की कुंडली में आठवें भाव में केतु और मंगल हैं, उनकी अपनी सिंह लग्न की कुंडली में आठवें में राहु और मंगल, और उनके बेटे की कुंडली में आठवें में शनि और मंगल। वक्ता जवाब देते हैं कि यह बिल्कुल संयोग नहीं है; लग्न कुछ भी हो, पर आठवें में केतु-मंगल, फिर राहु-मंगल, फिर शनि-मंगल संयोग नहीं है।

71

क्या एक भाई की कुंडली में मिला दोष बाकियों में भी दिखता है?

भाई-बहनों की कुंडलियों में दोहराता पितृ दोष

· 31:22–32:31 · Also a question

वक्ता ज्योतिष का अभ्यास या विश्लेषण करने वालों से कहते हैं कि अगर घर में कुंडलियाँ सही बन रही हैं, और तीन-चार भाई हैं, तो अगर उनमें से किसी एक की कुंडली में पितृ दोष निकलता है, तो बाकियों की कुंडली में भी लगभग निकलता है — भले वह युति के बजाय दृष्टि से बना हो।

72

तांत्रिक अक्सर पैसे में कमज़ोर क्यों होते हैं?

शुरू में धन जमा होना, फिर तांत्रिक या उसकी अगली पीढ़ी का बर्बाद होना

· 32:32–33:52 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उन्होंने जितने तांत्रिक देखे सब पैसे में कमज़ोर हैं, उनके पास शक्तियाँ हैं पर धन के स्रोत बहुत कम, और उन्हें हमेशा दूसरों से मदद लेनी पड़ती है। वक्ता इसे बहुत सही अवलोकन कहते हैं, और जोड़ते हैं कि आपने ऐसे तांत्रिक भी देखे होंगे जो शुरू में बहुत तरक्की करते हैं, ढेरों पैसा आता है, जब तक ऐसा समय नहीं आता कि वे, या उनकी अगली पीढ़ी, पूरी तरह बर्बाद हो जाती है।

73

एक माला पर कितने मंत्र किए जा सकते हैं?

इष्ट मंत्र के लिए एक माला, बाकी सब मंत्रों के लिए दूसरी

· 33:53–34:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इष्ट मंत्र के जप के लिए, जो भी मुख्य इष्ट हों, एक माला रखनी चाहिए। अगर आप भगवती काली की साधना करते हैं, तो उनका मंत्र जप एक माला पर कीजिए — नौमुखी रुद्राक्ष माला, साधारण रुद्राक्ष माला, साधारण काली हकीक माला, या जो भी माला आप रखते हों। गणपति, भैरव और शिव मंत्र दूसरी माला पर करने चाहिए।

74

देवी खड्गमाला स्तोत्र कैसे सिद्ध किया जाता है?

स्वयंसिद्ध चक्र विद्या, 1100 पाठ, हवन नहीं

· 34:27–35:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि खड्गमाला स्तोत्र अपने आप में बहुत अचूक, दिव्य और तुरंत असर देने वाला है, और स्वयंसिद्ध है। उसकी फलश्रुति के अनुसार आप सिद्धि का प्रयास कर सकते हैं: कम से कम 1100 पाठ करने चाहिए, और क्योंकि खड्गमाला अपने आप में एक तरह की चक्र विद्या है, बहुत से नियमों का पालन करना होता है। इसका हवन नहीं करना चाहिए।

75

नवार्ण मंत्र का हवनात्मक प्रयोग करने के पाँच साल बाद एक श्रोता को लक्ष्मी की भारी हानि हुई

ऐसे प्रयोग के पाँच साल बाद एक श्रोता की लक्ष्मी हानि

· 35:27–36:24

एक श्रोता लिखते हैं कि लगभग पाँच साल पहले उन्होंने नवार्ण मंत्र का हवनात्मक प्रयोग किया और उन्हें लक्ष्मी की भारी हानि हुई। वक्ता जवाब देते हैं कि अगर वे यहाँ नवार्ण मंत्र को मना करें, तो दस लोग तुरंत लाइव में उन्हें गाली देने लगेंगे कि नवार्ण जप को मना कैसे किया।

76

दूसरे तंत्र चैनल नवार्ण और पंचाक्षरी मंत्रों में अतिरिक्त बीज ठूँस देते हैं

मंत्रों में डाले गए बीज, और नवार्ण से लोगों के बर्बाद होने पर आने वाला वीडियो

· 36:25–36:35

वक्ता कहते हैं कि तंत्र के वीडियो बनाने वाले दूसरे चैनलों ने नवार्ण मंत्र, पंचाक्षरी मंत्र, हर मंत्र ठूँस दिया है — करो, अच्छे से करो, ऐसे करो, ॐ लगाओ, दोनों तरफ़ ॐ लगाओ, बीच में यह बीज डालो, श्रीं बीज डालो। वे कभी नहीं कहते कि नवार्ण जप ऐसे या वैसे करो, क्योंकि नवार्ण अपने आप में महा-विस्फोटक है और बहुत ऊँचे दर्जे तक विज्ञान के अनुरूप है।

78

मंत्रों की गुप्तता लोकप्रियता के लिए नहीं तोड़ी जाएगी, जैसा असुर कुल चलाने वालों ने किया

लोकप्रियता के लिए मंत्रों की गुप्तता तोड़ने से इनकार

· 37:02–38:01

वक्ता कहते हैं कि कलियुग है: कोई भी कह देगा कि ऐसा नहीं है। वे एक व्यक्ति को याद करते हैं जो अपना अलग कुल, असुर कुल चला रहा था, जो सारे बीज ठूँसकर एक सौ एक मंत्र देता था, यह कहकर कि पैसा कमाएँगे। वे कहते हैं कि अगर वे चाहें, चैनल पर 30,000 लोगों के साथ, ऐसे वीडियो बनाए जा सकते हैं और व्यूज़ आराम से बढ़ेंगे — पर उनका मन इसे नहीं मानता।

79

कितना नवार्ण जप ठीक है?

एक-आध माला, सुबह-शाम 108 माला नहीं

· 38:02–38:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे अपनी तरफ़ से कोशिश करते हैं: नवार्ण कीजिए, एक माला कीजिए, एक-दो माला कीजिए — इतना करना चाहिए। पर आप बैठकर रोज़ इसकी 108 माला करते हैं, सुबह 108 और शाम 108। क्या आप जानते भी हैं कि नवार्ण जप में मंडल पूजन कैसे होता है, और कितनी शक्तियाँ आएँगी? कम से कम यह तो जानते हैं कि इसमें नवग्रह और नौ शक्तियाँ समाई हैं।

80

जब केवल एक लोटा जल और पाँच किशमिश चढ़ाई जाएँ, तो क्या भाव काफ़ी है?

एक लोटा जल, पाँच किशमिश, दो लौंग और एक कपूर

· 38:29–39:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप एक लोटा जल, गिनकर पाँच किशमिश, दो लौंग, एक कपूर रखते हैं — और फिर कहते हैं, वे प्रसन्न कैसे नहीं होंगे, काम कैसे नहीं होगा? फिर पाँच किशमिश में आप कहते हैं, मेरा भाव इतना है। वे पूछते हैं, अगर भाव है, तो इतना सब क्यों कर रहे हैं? भाव से हाथ जोड़िए और स्तुति गाइए।

81

क्या कुंडली से इष्ट जाना जा सकता है?

पाँचवाँ या नौवाँ भाव, और स्वामियों के बीच उलझन

· 39:42–39:59 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं, बिल्कुल: पाँचवें या नौवें भाव के अनुसार आप अपना इष्ट चुनकर साधना और पूजा कर सकते हैं। पर वे जोड़ते हैं कि लग्नेश भी ज़रूरी है, पंचमेश भी, भाग्येश भी, लाभेश भी — इसलिए किसकी पूजा करें, इस पर उलझन की स्थिति बन जाती है।

82

केवल पंचमेश के पीछे चलने में क्या जोखिम है?

आठवें भाव में बैठा पंचमेश, और ग़लत पहना रत्न

· 40:00–40:27 · Also a question

लोग मुख्य रूप से कहते हैं कि पंचमेश को हमेशा प्रसन्न रखना चाहिए और उसकी सेवा-पूजा करनी चाहिए। पर वक्ता कहते हैं, मान लीजिए आपकी कुंडली में पंचमेश आठवें भाव में जाकर बैठ गया है: अब आप उसकी सेवा-पूजा कर रहे हैं, और अगर ग़लती से उससे जुड़ा रत्न पहन लिया, तो कहीं न कहीं वे आपको कष्ट ज़रूर देंगे।

83

अपना इष्ट तय करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

ग्रहों से आगे देवताओं तक जाना, और सबसे अच्छा नक्षत्र से

· 40:28–41:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ग्रहों को छोड़कर देव शक्तियों तक जाना चाहिए: पाँचवें भाव में जो ग्रह बैठा है, उससे जुड़े देवता की सेवा-पूजा कीजिए। वे खुद कहते हैं कि नक्षत्र से चलना सबसे अच्छा है — अपने नक्षत्र के अधिपति देवता की सेवा और पूजा कीजिए।

84

मन शिव मंत्र और सप्तशती के बीच क्यों डोलता रहता है?

महामाया के ज्ञानियों को भी खींच लेने पर सप्तशती का श्लोक

· 41:07–41:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके पीछे कोई कारण है ही नहीं, और सप्तशती का श्लोक कहते हैं: "ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥" — वे महामाया हैं जो ज्ञानियों के मन को भी बलपूर्वक खींचकर माया में डाल देती हैं। ज्ञानी आसानी से माया में नहीं पड़ता, पर वे उसे बलपूर्वक खींच लेती हैं।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीदुर्गासप्तशती · तेरह अध्याय 1.55–56

Mahāmāyā forcibly drags even the minds of the wise into delusion.

मूल पाठ पढ़ें →
55

महामाया हरेश्चैषा तया सम्मोह्यते जगत् । ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा ॥ ५५ ॥

यह हरि की महामाया हैं, और इन्हीं से सारा जगत् मोहित होता है। वे भगवती देवी ज्ञानियों के चित्त को भी

56

बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति । तया विसृज्यते विश्वं जगदेतच्चराचरम् ॥ ५६ ॥

बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं। वही इस सम्पूर्ण चर-अचर जगत् को रचती हैं।

यह अध्याय अभी प्रकाशित नहीं हुआ है; लिंक आपके लिए इसे अभी खोल देता है।

85

अपने इष्ट से कैसे कहें कि वे आपको मोहित न करें?

अपने इष्ट से मोहित न करने की विनती

· 41:48–42:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस माया से पार पाने के लिए अपने इष्ट से कहिए, जो भी वे हों। अगर भगवान सदाशिव आपके इष्ट हैं, तो उन्हीं से कहिए: प्रभु, कृपया मुझे मोहित न करें, मैया को मना करने को कहिए। वहाँ थोड़ा बच्चे जैसा भाव लाइए, और उनसे कहिए।

वक्ता पूछते हैं कि अब इस माया के पार जाने के लिए आपको क्या करना होगा। आपके इष्ट जो भी हों — अगर भगवान सदाशिव आपके इष्ट हैं, तो उन्हीं से कहिए: प्रभु, कृपया मुझे मोहित न करें, मैया को मना करने को कहिए। वहाँ थोड़ा बच्चे जैसा भाव लाइए, और उनसे कहिए।

86

गृहस्थ को देवता का जप अकेले करना चाहिए या जोड़े में?

शिव के साथ भगवती की एक माला, और युगल नाम जप

· 42:02–42:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दूसरी बात यह है कि आप जिसकी भी साधना करें, अगर शिव की सौ या दस माला करते हैं, तो भगवती की एक माला ज़रूर होनी चाहिए। दोनों होने चाहिए; गृहस्थ जीवन में कभी अकेले नहीं करते — जोड़े में कीजिए। खास तौर पर नाम जप तो जोड़े में ही ज़रूर करना चाहिए: सीताराम, राधे श्याम, शिव-पार्वती, शिव-शक्ति।

87

भटकते मन को एक साधना में कैसे टिकाएँ?

सप्तशती पाठ को अष्टमी, चतुर्दशी, पूर्णिमा या अमावस्या से बाँधना

· 42:45–43:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब मन एक साधना में न टिके, तो नियम बनाइए। अगर आप शिव मंत्र का जप कर रहे हैं, तो शिव मंत्र का जप जारी रखिए; सप्तशती पाठ अष्टमी या चतुर्दशी को कीजिए, या पूर्णिमा या अमावस्या को। इससे आप नियम में बँधेंगे और आपकी स्थिति ठीक हो जाएगी।

88

क्या रावण की कुलदेवी निकुंभला और प्रत्यंगिरा एक ही हैं?

निकुंभला, भद्रकाली और रावण के कुल की बीस भुजाओं वाली देवी

· 43:12–44:08 · Also a question

माता निकुंभला क्या माँ प्रत्यंगिरा हैं, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं, हाँ: भगवती प्रत्यंगिरा को कहीं-कहीं भद्रकाली रूप माना गया है, और निकुंभला रूप भी माना गया है। फिर वे बताते हैं कि तंत्र ग्रंथ रावण के कुल में स्थापित रूप का क्या वर्णन करते हैं।

89

निकुंभला और प्रत्यंगिरा के वर्णन अलग क्यों हैं?

चार भुजाओं वाला ध्यान मंत्र, और एक गुप्तता जिसे वे नहीं खोलेंगे

· 44:09–44:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवती निकुंभला का रूप वहाँ वैसा ही माना जाता है; पर रूप के भेद में जाएँ, तो भगवती प्रत्यंगिरा का साधारण ध्यान मंत्र उन्हें चार भुजाओं वाली बताता है। इसलिए यहाँ थोड़ा मतभेद, या कहें एक गुप्तता, रखी गई है कि असली कौन-सा है — यह शायद गुरु परंपरा के भीतर ही सही से पता चल सकता है। वे कहते हैं कि वे भी इसे पूरा खोलना नहीं चाहेंगे।

90

अगर घर का मुखिया पाप में डूबा है, तो क्या उसके बेटों को फल भोगना पड़ता है?

विरासत में मिला कष्ट, और बेटे का अपना कर्म जो उसे उस कुल में लाया

· 44:32–45:20 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि यह बिल्कुल होता है: अगर घर का मुख्य व्यक्ति पाप कर्मों में डूबा है, तो जो भी बेटे हैं, जो भी आगे का कुल है, उन्हें भोगना पड़ता है। पर वे बेटे वह फल अपने कर्म के अनुसार भी भोग रहे होंगे।

91

राजनीति में जाने के लिए किस देवी को प्रसन्न करना चाहिए?

मुख्य रूप से बगलामुखी, हालाँकि सब देवियाँ सर्वसमर्थ हैं

· 45:21–45:33 · Also a question

राजनीति में जाने के लिए किस देवी को प्रसन्न करें, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं: भगवती बगलामुखी का कीजिए। वे जोड़ते हैं कि आप किसी का भी कर सकते हैं, क्योंकि सब देवियाँ सर्वसमर्थ हैं, पर मुख्य रूप से भगवती बगला का कीजिए।

राजनीति में जाने के लिए किस देवी को प्रसन्न करना चाहिए, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं: भगवती बगलामुखी का कीजिए। वे कहते हैं कि आप किसी का भी कर सकते हैं; सब देवियाँ सर्वसमर्थ हैं। पर मुख्य रूप से भगवती बगला का कीजिए।

92

भगवान की मानसिक पूजा का फल क्या है?

मानसिक षोडशोपचार पूजन, सबसे ऊँची भक्ति

· 45:34–46:18 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि यह सबसे उत्तम फल है। हम शरीर से कितने भी साफ़ हो जाएँ, अगर मन साफ़ नहीं और उसमें विचार गंदे हैं, तो ठीक से कोई फल नहीं मिलता। अगर आप मन से भक्ति करते हैं, चौबीस घंटे भगवान मन में बैठे हैं, जब चाहें मन में उनका षोडशोपचार पूजन करते हैं, उनके मंत्र गाते हैं, मन के भीतर ही उनका अभिषेक करते हैं — तो वही सबसे अच्छा है।

93

मंत्र जप के साथ होने वाले ध्यान के अलावा क्या अलग से ध्यान ज़रूरी है?

त्राटक एक वैकल्पिक जोड़

· 46:19–46:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आपके पास समय है, तो अलग से त्राटक आदि कर सकते हैं; नहीं तो उनके हिसाब से यह ज़रूरी नहीं है।

मंत्र जप के साथ होने वाले ध्यान के अलावा क्या अलग से ध्यान ज़रूरी है, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं कि अगर समय है तो अलग से त्राटक आदि कर सकते हैं। नहीं तो, उनके हिसाब से, यह ज़रूरी नहीं है।

94

असली सियार सिंगी और असली हत्था जोड़ी कैसे पहचानें?

जागृत वस्तुएँ जिनके पूरे नियम घर में रखने से पहले जानने चाहिए

· 46:34–47:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हत्था जोड़ी और सियार सिंगी अपने आप में जागृत वस्तु हैं। इन्हें उनकी पूरी जानकारी लेकर ही घर में रखना चाहिए। वे पूछने वाले से ग्रुप में संदेश भेजने को कहते हैं और कहते हैं कि वे हत्था जोड़ी और सियार सिंगी के नियमों पर अलग से एक पूरा वीडियो बनाएँगे — पाँच मिनट का वीडियो, जिसमें वे इन्हें दिखाने की भी कोशिश करेंगे।

95

गृहस्थ को सात्विक प्याला लेना चाहिए या अघोर प्याला?

गृहस्थ के लिए सात्विक; दूसरा केवल गृहस्थ जीवन छोड़ने पर

· 47:02–47:20 · Also a question

सात्विक प्याला लें या अघोर प्याला, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं कि अगर आप गृहस्थ हैं, तो सात्विक लीजिए। अगर आप गृहस्थ जीवन छोड़ रहे हैं, तो जो चाहें लेने के लिए आज़ाद हैं।

एक श्रोता पूछते हैं कि उन्हें सात्विक प्याला लेना चाहिए या अघोर प्याला, और वक्ता से बताने को कहते हैं। वक्ता जवाब देते हैं कि अगर आप गृहस्थ हैं, तो सात्विक लीजिए। अगर आप गृहस्थ जीवन छोड़ रहे हैं, तो आप उसे लेने के लिए आज़ाद हैं।

96

हनुमान जी का श्रृंगार कैसे किया जाता है?

शनि और मंगलवार को चोला श्रृंगार, नीचे से ऊपर की ओर

· 47:21–47:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हनुमान जी का मुख्य श्रृंगार चोला श्रृंगार है, जो शनिवार और मंगलवार को करना चाहिए। चोला नीचे से ऊपर की ओर चढ़ाया जाता है: पान के पत्ते पर केसरिया सिंदूर — जिसे भखरा सिंदूर, या नारंगी रंग का हनुमान सिंदूर कहते हैं — चमेली के तेल या देसी घी में भिगोया जाता है, और फिर राम जी या सीताराम जी का नाम लेकर चोला नीचे से ऊपर चढ़ाया जाता है।

97

हनुमान जी के श्रृंगार में चोले के बाद क्या चढ़ाया जाता है?

ग्यारह पान के पत्तों या बरगद के पत्ते पर लिखा राम नाम

· 48:00–48:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चोले के बाद पान के पत्तों पर राम नाम लिखना चाहिए — कम से कम ग्यारह पान के पत्ते — और उनकी माला बनाकर, या बरगद के पत्ते पर लिखकर, हनुमान जी के गले में पहनाना चाहिए। उसके बाद चाहें तो केले के फल या केले के पत्तों से श्रृंगार कर सकते हैं; ये सब चीज़ें हनुमान जी को बहुत प्रिय हैं।

98

क्या धन के लिए कोई ऐसा स्तोत्र है जिसका केवल पाठ काफ़ी हो, हवन के बिना?

अपने इष्ट का सहस्रनाम

· 48:30–49:04 · Also a question

धन के लिए ऐसा स्तोत्र पूछे जाने पर जिसका केवल पाठ काफ़ी हो, हवन, मार्जन आदि की ज़रूरत न हो, वक्ता कहते हैं कि आप अपने इष्ट से जुड़ा स्तोत्र देख सकते हैं — सहस्रनाम का पाठ सबसे अच्छा है।

धन के लिए क्या कोई ऐसा स्तोत्र है जिसका केवल पाठ ही काफ़ी हो, ताकि हवन, मार्जन आदि की ज़रूरत न पड़े, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं कि आप अपने इष्ट से जुड़ा स्तोत्र देख सकते हैं, जिसका सहस्रनामकिसी देवता के सहस्र नामों का पाठ — यह विभिन्न देवी-देवताओं के लिए रचित एक भक्ति विधा है, कोई एक निश्चित ग्रंथ नहीं। पाठ सबसे अच्छा है।

99

कमल गट्टे की माला इतनी जल्दी ख़राब क्यों होती है, और उसकी जगह क्या लें?

कमल गट्टे की माला की नाज़ुकता, और लक्ष्मी जप के लिए स्फटिक

· 49:05–50:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कमल गट्टे की माला सबसे जल्दी ख़राब होती है — उनकी अपनी तीन-चार महीने में ख़राब हो जाती है। या तो भगवती को पहनाकर स्नान कराने से धागा टूट जाता है, या उस पर सफ़ेद परत आ जाती है और दाना खोखला होकर घुन लग जाता है। वे कहते हैं कि भगवती लक्ष्मी के जप के लिए ढंग से स्फटिक माला लीजिए और उस पर जप कीजिए।

100

कुलदेवी की सिद्धि कैसे होती है?

चैनल पर दिए ध्यान मंत्र, आवाहन और नित्य पूजा

· 50:19–50:33 · Also a question

कुलदेवी की सिद्धि का रास्ता बताने को कहे जाने पर वक्ता कहते हैं कि यह पहले ही बताया जा चुका है और श्रोता से कुलदेवी से जुड़ा वीडियो देखने को कहते हैं: ध्यान मंत्र, आवाहन कैसे करना है, नित्य पूजा कैसे करनी है — सब समझाया गया है। वे जोड़ते हैं कि सिद्धि होती है या नहीं, यह उन पर है।

101

मंत्र की गिनती में कितनी आवृत्तियाँ मानी जाती हैं, और स्तोत्र की कितनी?

मंत्र के लिए पाँच लाख, और नवरात्रि में स्तोत्र के 1100

· 50:34–51:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मंत्र के लिए, उसकी गिनती में, पहली बार किसी भी मंत्र का कम से कम पाँच लाख करना चाहिए — साल के भीतर पाँच लाख पूरे कीजिए। स्तोत्र के लिए नवरात्रि आदि में 1100 तक पूरे कीजिए; उसके बाद जितना हो सके उसका नित्य पाठ कीजिए, और समय-समय पर उसका अनुष्ठान दोहराते रहिए।

102

सुबह तीन से पाँच के बीच आँखें क्यों खुल जाती हैं?

जिस शक्ति की उपासना हो रही है उसके गणों का काल

· 51:02–51:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसमें ज़्यादा चिंता की कोई बात नहीं। जब भी आप कोई साधना करते हैं, तो उससे प्रसन्न होने वाले गणों का अपना काल होता है, और उसी समय में उनका आना-जाना होता है, जिससे आपकी आँखें खुल जाती हैं। साधना के क्षेत्र में यह साधारण प्रक्रिया है, और कहीं न कहीं यह उस शक्ति की कृपा भी है।

103

क्या किसी शक्ति की कृपा का मतलब दुखों का अंत है?

पत्नी खोने की महादेव की अपनी लीला, हमारे प्रारब्ध के सामने

· 51:45–52:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे बार-बार कहते हैं कि प्रारब्ध अपनी जगह है; महादेव ने भी अपनी एक पत्नी को खोने की लीला रखी, तो हम क्या हैं कि हमारे जीवन में दुख नहीं आएँगे। यह मत सोचिए कि शक्ति की कृपा है तो आपको कोई दुख नहीं होगा — बिल्कुल होगा। पर यह भरोसा रखिए कि वे हैं।

104

जब कोई रिश्तेदार बार-बार परिवार पर अभिचार करे तो क्या करना चाहिए?

काली कवच का 1100 जप, भोजपत्र यंत्र, और उसकी प्राण प्रतिष्ठा

· 52:22–52:59 · Also a question

माता काली और भगवान शिव की पूजा करने वाले एक श्रोता बताते हैं कि विद्या सीखे हुए एक चाचा बार-बार अभिचार करते हैं — उन पर नहीं, पर उनके पिता बार-बार बीमार पड़ते हैं। वक्ता जवाब देते हैं: पहले गुप्त नवरात्रि में भगवती काली के कवच का कम से कम 1100 जप पूरा करने की कोशिश कीजिए, और उनके बीजाक्षर भोजपत्र पर यंत्र के रूप में लिखिए, किसी विद्वान से बनवाकर या खुद पवित्र अवस्था में पहले ही दिन, अच्छे चौघड़िया में, अमृत काल में, और अगर आती हो तो प्राण प्रतिष्ठा विधि के साथ।

105

हवन और सात्विक बलि से काली कवच कैसे जागृत किया जाता है?

काली और सदाशिव के मंत्रों से हवन, सात्विक बलि, और गृह बंधन

· 53:00–53:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि फिर भगवती काली और भगवान सदाशिव के मंत्रों से हवन कीजिए, बलि और भेंट दीजिए — सात्विक बलि, चाहे नींबू की हो या नारियल की — और यह सब करके कवच को पूरी तरह जागृत कीजिए, फिर पिता को पहनाइए। वे जोड़ते हैं कि घर का बंधन आदि भी करना चाहिए।

वक्ता आगे कहते हैं कि फिर भगवती काली और भगवान सदाशिव के मंत्रों से हवन करते हुए, और बलि और भेंट आदि देते हुए — सात्विक बलि, चाहे वह नींबू की हो या नारियल की — यह सब करके और इस तरह कवच को पूरी तरह जागृत करके, फिर पिता को पहनाइए। और घर का बंधन आदि भी कीजिए।

106

क्या धन के लिए सुलेमानी मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है?

इनकार, और उसकी जगह अष्टलक्ष्मी और महालक्ष्मी अष्टक

· 53:32–54:23 · Also a question

धन पाने के लिए सुलेमानी मंत्र करने के सवाल पर वक्ता मना करते हैं। वे पूछते हैं, आप सुलेमानी मंत्र क्यों करना चाहते हैं — क्या हिंदुओं के मंत्र कम पड़ जाएँगे, क्या सनातन संस्कृति में मंत्रों की कमी है? यहाँ करोड़ों-करोड़ों मंत्र सिद्ध किए गए हैं; सुलेमानी में आपको कहाँ जाना है? वे कहते हैं कि यह इच्छा ही दोषपूर्ण है और इसे बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

107

पाँच माला जप के साथ हृदय स्तोत्र के कितने पाठ करने चाहिए?

एक पाठ काफ़ी है

· 54:24–55:00 · Also a question

रोज़ विधि के अनुसार पाँच माला करने वाले एक श्रोता ने पूछा कि वे कम से कम हृदय स्तोत्र के कितने पाठ करें; वक्ता जवाब देते हैं: एक कीजिए। एक से ज़्यादा करने की ज़रूरत नहीं है।

एक श्रोता कहते हैं कि वे विधि के अनुसार रोज़ पाँच माला कर रहे हैं, और पूछते हैं कि हृदय स्तोत्र के कम से कम कितने पाठ करें। वक्ता जवाब देते हैं, एक कीजिए। एक से ज़्यादा करने की ज़रूरत नहीं है।

108

क्या गायत्री पाठ के साथ भैरव मंत्र किया जा सकता है?

गायत्री जप की शर्त: यज्ञोपवीत संस्कार

· 55:01–55:31 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि अगर आपका यज्ञोपवीत संस्कार हो चुका है, तो आप गायत्री जप कर सकते हैं। चाहें तो बटुक भैरव जी की मूर्ति भी रख सकते हैं, और गायत्री के साथ भैरव जी के मंत्र का जप किया जा सकता है — इसमें कोई परेशानी नहीं।

109

गायत्री की ताँबे की मूर्ति क्यों नहीं रखनी चाहिए?

ताँबे में मीठी चीज़ों का ज़हर बनना, और अभिचार में उनका प्रयोग

· 55:32–56:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि माँ गायत्री के लिए ताँबे की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए; ताँबे के बजाय पंचधातु की मूर्ति या पीतल की मूर्ति रखिए। ताँबा ताम्र है: अगर ताम्र की मूर्ति रखेंगे तो उन्हें कभी मीठे जल से स्नान नहीं करा पाएँगे, क्योंकि ताँबे में गुड़ या कोई भी मीठी चीज़ डालने पर वह ज़हर जैसी हो जाती है, और ऐसी चीज़ों का प्रयोग अभिचार कर्म में होता है।

110

क्या सपने में संकेत मिलने पर स्त्री गायत्री जप कर सकती है?

स्त्री के लिए गायत्री जप का अधिकार न होना बताया गया

· 56:16–56:48 · Also a question

नवार्ण जप करने वाली एक स्त्री बताती हैं कि उन्हें सपने में गायत्री मंत्र पढ़ने का संकेत मिला, और पूछती हैं कि क्या करें। वक्ता जवाब देते हैं कि अगर आप स्त्री हैं, तो गायत्री जप का अधिकार स्त्री का नहीं है; आपको गायत्री जप नहीं करना चाहिए। नवार्ण के बारे में, अगर आप उसका जप करती हैं और दीक्षित हैं, तो बहुत अच्छा; दीक्षित नहीं हैं, तो उसका जप सीमा में, सीमित मात्रा में करना चाहिए।

111

क्या पुरुष को पूजा करते समय सिर ढकना या टोपी पहननी चाहिए?

यह क्षेत्रीय परंपरा है, सब जगह का नियम नहीं

· 56:49–57:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह चीज़ क्षेत्र के अनुसार जगह-जगह अलग है। कश्मीर की ओर उस इलाके के ब्राह्मण सिर बाँधकर पूजा करते हैं, खास तौर पर उत्तरी इलाकों में; दूसरे इलाकों में ऐसा नहीं दिखेगा। उनकी अपनी जानकारी के अनुसार पूजा करते समय सिर पर कपड़ा या टोपी रखने की कोई ज़रूरत नहीं — अपने क्षेत्र के बड़ों ने जो कहा है, उसका पालन कीजिए।

112

अर्गला स्तोत्र की कितनी आवृत्तियाँ सवा लाख के लाभ के बराबर हैं?

गिनने से इनकार, और मन की संतुष्टि ही माप

· 57:21–57:35 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि जितना करें, जितना ज़्यादा उतना अच्छा — और पूछते हैं कि इसे गिनकर पढ़ना ही क्यों। जब आपका मन संतुष्ट हो जाए, तो समझिए कि आप उस स्तोत्र से जुड़ी सिद्धि पा रहे हैं।

सवा लाख जितना लाभ पाने के लिए अर्गला स्तोत्र का कितना जप करना चाहिए, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं कि आप जितना करें, जितना ज़्यादा करें, उतना है। वे पूछते हैं, गिनकर पढ़ना ही क्यों? जब आपके मन को संतुष्टि मिल जाए, तो समझिए कि आप उस स्तोत्र से जुड़ी सिद्धि पा रहे हैं।

113

उपासना के लिए माता लक्ष्मी का कौन-सा रूप सबसे अच्छा है?

ऐरावत के अभिषेक वाली कमला, और तंत्र में जाने वालों के लिए त्रिपुरसुंदरी

· 57:36–58:07 · Also a question

माता लक्ष्मी का कौन-सा रूप सबसे अच्छा है — ऐरावत से स्नान करती कमला, हाथी पर बैठी लक्ष्मी, चार भुजाओं वाली सुंदरी — यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं कि जिसका नाम लिया गया, ऐरावत के अभिषेक वाला कमला रूप, सबसे उत्तम है। वैसे ही हाथी पर बैठी या कमल पर बैठी लक्ष्मी जी। व्यापारी वर्ग को इस रूप में भगवती कमला की उपासना करनी चाहिए; जो तंत्र में जाना चाहते हैं, वे भगवती त्रिपुरसुंदरी, श्री विद्या की।

114

क्या अर्गला स्तोत्र के पहले मंत्र के और प्रयोग हैं?

अर्गला के भीतर ग्यारह प्रयोग, अभी रोके हुए

· 58:08–58:25 · Also a question

अर्गला स्तोत्र के पहले मंत्र के और प्रयोग या विधियाँ बताने को कहे जाने पर वक्ता कहते हैं कि अर्गला में ग्यारह प्रयोग आते हैं। वे कहना शुरू करते हैं कि वे सब बातें किसी कारण से नहीं बताई जातीं, फिर कहते हैं कि ठीक है, बताई जाएँगी — समय आने पर वह भी बताया जाएगा।

115

कोई भी जप शुरू करने से पहले क्या सोचना ज़रूरी है?

जप का उद्देश्य, और क्या उसे निभाया जा सकता है

· 58:26–58:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बहुत सारी बातें सोचनी होती हैं। सबसे पहले, जप करने में आपका उद्देश्य क्या है — देवता की कृपा पाना, या कुछ और? इसके अलावा बाकी सब भी देखिए: क्या आप लंबे समय तक जप पूरा कर पाएँगे या नहीं। मुख्य बात यह है कि आपकी ज़रूरत क्या है; उसी के अनुसार जप पर विचार कीजिए।

116

कथा का अपना स्थान है, पर केवल कथा से सद्गति नहीं होती

कथा का अपना स्थान, पर केवल कथा से सद्गति नहीं

· 58:58–59:55

एक श्रोता कहते हैं कि व्यासपीठ पर बैठे लोग कृष्ण जी का चरित्र बुरा दिखाते हैं, जबकि महाभारत में ऐसा कहीं नहीं है, और लोग ऐसी हरकतों से खुश होते हैं। वक्ता जवाब देते हैं कि आप सही कह रहे हैं; इसमें और क्या कहना, सब जानते हैं। कथा अपनी जगह सही है और उसका अपना मंच है, आपके और हमारे लिए ज़रूरी — पर केवल कथा सुनने से, जिस तरह आजकल चल रही है, सद्गति हो जाए, यह वे बिल्कुल नहीं मानते।

117

कृष्ण अपनी निंदा करने वालों पर कुछ क्यों नहीं करते?

रणछोड़, कलियुग, और पार्वती मंगल विवाह गीत

· 59:56–1:01:27 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि कृष्ण कुछ नहीं करेंगे; कृष्ण खुद वही हैं जिन्हें रणछोड़ कहते हैं, और कलियुग चल रहा है। भगवान के लिए क्या असंभव है? वे जब चाहें कर सकते हैं, पर वे लीला का आनंद ले रहे हैं — और हमें और आपको उनके साथ लीला का आनंद लेना चाहिए।

118

इस युग में किसकी उपासना अष्ट सिद्धि और महासिद्धि देती है?

कमला, दीक्षा के साथ, पंचांग और फिर जीवन भर दशांग सेवन

· 1:01:28–1:02:12 · Also a question

सौ महामंत्रों में से किसकी उपासना इस युग में अष्ट सिद्धि और महासिद्धि दे सकती है, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं: भगवती महाविद्या कमला की उपासना कीजिए। विधि से दीक्षित होकर उनका पंचांग सेवन और उसके बाद दशांग सेवन आदि कीजिए, और जीवन भर उनकी उपासना जारी रखिए।

119

क्या इस युग में शक्तियाँ सच में साकार रूप में आती हैं?

वामा खेपा की ज़िद, और तारा का वैदिक रूप

· 1:02:13–1:03:22 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि इस युग में वे बिल्कुल साकार रूप में आती हैं, पर रूप अक्सर वैदिक वर्णन के अनुसार नहीं होता, क्योंकि इस युग में हम में से किसी में वैदिक रूप का तेज सहने की क्षमता नहीं है। वे बताते हैं कि वामा खेपा ने भगवती तारा से ज़िद की थी कि अगर वैदिक ध्यान मंत्र में कल्पित रूप उनका असली रूप है, तो वे उन्हें वही दिखाएँ।

120

तो साधारण साधक को शक्तियाँ किस रूप में दर्शन देंगी?

साधारण मानव रूप में दर्शन, जिसका तेज सहा जा सके

· 1:03:23–1:04:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे साकार रूप में आएँगी और ज़रूर ठीक से आएँगी, और बहुत लोगों को इसका अनुभव है — पर आपको पता नहीं चलेगा; या पता चल भी जाए, तो वे साधारण मानव रूप में ही दर्शन देंगी, जिसका तेज हम सह सकें।

तो वे पूछते हैं, शक्तियाँ किस रूप में आएँगी? वे साकार रूप में आएँगी, और ज़रूर ठीक से आएँगी। कितने लोगों को अनुभव है — पर आपको पता नहीं चलेगा। या पता चल भी जाए, तो वे साधारण मानव रूप में ही दर्शन देंगी, जिसका तेज हम सह सकें।

121

क्या दत्तात्रेय की उपासना करते हुए देवी की उपासना करना ठीक है?

भगवान दत्तात्रेय के साथ भगवती की पूजा

· 1:04:01–1:04:25 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं, बिल्कुल: भगवान दत्तात्रेय के साथ भगवती की उपासना करनी चाहिए।

भगवान दत्तात्रेय की उपासना करते हुए देवी की उपासना करना ठीक है या नहीं, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं: बिल्कुल। भगवान दत्तात्रेय के साथ भगवती की उपासना करनी चाहिए।

122

एक नामित मसान साधना की विधि चैनल पर साफ़ मना कर दी जाती है

चैनल पर ऐसी जानकारी देने से साफ़ इनकार

· 1:04:26–1:04:53

खुद को माँ काली का भक्त बताने वाले और यह कहने वाले एक श्रोता कि माता के सात गण उनसे प्रसन्न हुए हैं, आने वाले नवरात्र में एक नामित मसान साधना करने के बारे में पूछते हैं। वक्ता पूछते हैं कि अगर भगवती काली के गण और सेवक उनसे प्रसन्न हैं, तो वह सिद्धि चाहिए ही क्यों — और साफ़ कहते हैं कि वे यहाँ इस तरह की कोई जानकारी नहीं देते, नाम तक नहीं लेते, और श्रोता जो चाहें करें।

123

योग विद्या में शुरुआत कैसे करें?

यूट्यूब से कभी नहीं, केवल किसी जानकार के सान्निध्य में

· 1:04:54–1:05:14 · Also a question

योग विद्या में जाने के लिए क्या करें और कैसे शुरू करें, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि योग विद्या आपको कभी यूट्यूब पर नहीं सीखनी चाहिए। इसे किसी सही जानकार के पास, उसके सान्निध्य में रहकर सीखना चाहिए।

योग विद्या में जाने के लिए क्या करना चाहिए, और इसे कैसे शुरू करें, यह पूछे जाने पर वक्ता साफ़ जवाब देते हैं। योग विद्या आपको कभी यूट्यूब पर नहीं सीखनी चाहिए। इसे किसी सही जानकार व्यक्ति की उपस्थिति में, उसके सान्निध्य में रहकर सीखना चाहिए।

124

क्या वही साधना अगली गुप्त नवरात्रि में दोहराई जा सकती है?

एक ही साधना को साल भर की नवरात्रियों में दोहराना

· 1:05:15–1:05:42 · Also a question

श्री काली चालीसा की सिद्धि आने वाली गुप्त नवरात्रि में फिर से दोहराई जा सकती है या नहीं, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं: बहुत अच्छा, बिल्कुल कीजिए। वे कहते हैं कि कम से कम एक साल तक एक ही साधना बार-बार दोहरानी चाहिए — यानी चारों नवरात्रियाँ, और हो सके तो शाकंभरी और घोर नवरात्रि में भी — और उसके बाद ही अगले साल दूसरी साधना शुरू करनी चाहिए।

125

जब ब्रह्म बाबा की सवारी आती है पर काम नहीं बनता, तो क्या करना चाहिए?

विंध्य कुंड, त्रिकोण यात्रा, और काली खोह गुफा के पास भैरव मंदिर

· 1:05:43–1:06:43 · Also a question

वक्ता पूछने वाले से कहते हैं कि पहले विंध्य क्षेत्र जाने की कोशिश कीजिए: वहाँ जाकर विंध्य कुंड से स्नान करवाइए — भगवती के स्थान का कुंड, जो भैरव जी के पास है, जिन पर भी सवारी आती है — त्रिकोण यात्रा कीजिए, और काली खोह की गुफा के पास भैरव बाबा के मंदिर जाइए, जहाँ सभी ब्रह्मों का स्थान दिया गया है।

126

जब कोई ब्रह्म विंध्यवासिनी का जयकारा लगाता है तो इसका क्या अर्थ है?

ऐसा ब्रह्म जो अपने समय में ऊँचा साधक या भक्त था

· 1:06:44–1:07:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर ब्रह्म विंध्यवासिनी का जयकारा लगा रहा है, तो इसका अर्थ है कि अपने समय में वह विंध्यवासिनी का बहुत ऊँचे दर्जे का भक्त या साधक रहा होगा। नहीं तो कोई ब्रह्म विंध्यवासिनी का नाम तक नहीं लेता — इतना डर होता है। तो वह धर्म पर चलने वाला ऊँचे दर्जे का सात्विक ब्रह्म है: उसका ठीक से सम्मान कीजिए, और विंध्याचल जाइए, जहाँ अगर वह गति चाहता है तो उसका भी कल्याण हो सकता है।

127

क्या धन पाने के लिए रुद्राष्टकम् का प्रयोग किया जा सकता है?

नागकेसर पर पाठ, सात दिन शिवलिंग पर चढ़ाना

· 1:07:59–1:08:17 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं, बिल्कुल। नागकेसर पर रुद्राष्टक का पाठ करके वह नागकेसर शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। यह धन पाने के अचूक उपायों में से है — पर यह काम कम से कम सात दिन लगातार करना चाहिए, शुक्ल पक्ष की तृतीया या पंचमी तिथि से शुरू करके।

128

मंत्र जप में शरीर भारी क्यों लगता है और काँपता क्यों है?

तीन संभावित कारण — असंतुलित ऊर्जा, प्रबल भाव, या बाधा

· 1:08:18–1:09:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दो कारण संभव हैं: पहला, मंत्र जप की ऊर्जा असंतुलित हो रही है; दूसरा, आपका भाव बहुत प्रबल हो रहा है, आपका मन इष्ट और आराध्य में टिक रहा है, और उनकी कृपा से उनकी अंश शक्तियों की कृपा आप पर ठीक से आ रही है। तीसरा कारण यह हो सकता है कि अगर कोई अभिचारिक प्रयोग है, या किसी तरह की वायु बाधा या भूत-प्रेत से जुड़ी बाधा है, तो तब भी शरीर काँपता है।

129

गृहस्थ को कौन-सा शिवलिंग रखना चाहिए, और क्या उसे हिलाने से दोष लगता है?

नर्मदेश्वर या रत्न का शिवलिंग, अरघी अलग

· 1:09:05–1:09:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर गृहस्थ के लिए घर में शिवलिंग ठीक है, तो रत्नों का बना शिवलिंग रखिए, या नर्मदेश्वर शिवलिंग रखिए। रत्न का रखें तो भी अरघी अलग होनी चाहिए और शिव जी का रूप, शिवलिंग का रूप, अलग होना चाहिए। दूसरा, शिवलिंग को हिलाने या खिसकाने से कोई दोष नहीं लगता।

130

क्या घर में रखे शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए?

शिवलिंग स्वयं दिव्य है, उसे विस्तृत प्रतिष्ठा की ज़रूरत नहीं

· 1:09:45–1:10:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि घर में शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा नहीं करनी चाहिए, और होती भी नहीं: किसी भी तरह के शिवलिंग का रूप, अचल हो या और, अपने भीतर ही दिव्य शक्तियाँ रखता है। साधारण प्रतिष्ठा आप करवा सकते हैं, पर उनके हिसाब से इसकी बहुत विस्तृत विधि बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। नर्मदेश्वर सबसे अच्छा है, और उसे प्राण प्रतिष्ठा की कोई ज़रूरत नहीं।

131

क्या चल रही साधना के बीच किसी दूसरे देवता की चालीसा या स्तोत्र पढ़ सकते हैं?

एक साधना के भीतर दूसरे देवता की कृपा चाहने का दोष

· 1:10:28–1:11:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक समय में एक साधना कीजिए। यह एक तरह का दोष है, और अपने आप में बहुत बड़ा दोष: कि आप साधना किसी एक की कर रहे हैं और उसके भीतर कृपा किसी और की चाहते हैं। तब इसका मतलब है कि आपको अपने आराध्य पर, अपने इष्ट पर, या जिस मंत्र का जप कर रहे हैं उसके देवता पर भरोसा नहीं — तो वे आपका काम कहाँ से करेंगे।

132

अगर किसी के पास सिद्धि है, तो उससे काम कैसे लिया जाता है?

जिस गुरु से सिद्धि मिली, उनसे पूछना

· 1:11:22–1:11:44 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि अगर सिद्धि है, तो उससे काम भी लेना होता है — और सिद्धि आपको बताई गई होगी, नहीं तो सिद्धि यूँ ही कैसे हो जाएगी। अगर आपको उससे काम लेने का तरीका नहीं पता, तो पहले उस गुरु से पता कीजिए जिनके माध्यम से सिद्धि मिली, कि यह किस तरह किया जाता है।

133

जब साधना से कोई लाभ न हो और शरीर दुखे, तो क्या करना चाहिए?

आगे बढ़ने से पहले जन्म कुंडली और तंत्र दोनों पक्ष जाँचना

· 1:11:45–1:12:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर साधना के दौरान शरीर दुखता है, तो सबसे पहले कोई दोष है। अगर आप खुद कर रहे हैं और लाभ नहीं मिल रहा, तो दोनों चीज़ें जँचवानी चाहिए — अपनी जन्म कुंडली, और ऊपरी परिवार, यानी तंत्र से जुड़ी चीज़ें। उसका निवारण और उतारा करवाइए; अगर ग्रह दोष है, या छठे, आठवें या बारहवें का कुछ चल रहा है, तो अंतर्दशा या सूक्ष्म दशा के अनुसार उसका जप और दान करवाना चाहिए, और तभी साधना करनी चाहिए।

134

क्या माँ तारा की उपासना का कोई सरल मार्ग है?

कोई सरल मार्ग नहीं; वशिष्ठ और पंचमकार

· 1:12:22–1:12:49 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि माँ तारा की उपासना का कोई सरल मार्ग नहीं है। साधारण धूप-दीप आप कर सकते हैं, या अगर आप उनके क्षेत्र के निवासी हैं तो कर सकते हैं। पर वे पूरी तरह तंत्र की छत्र शक्ति हैं, और उनकी पूरी पूजा तंत्रोक्त विधान से ही होती है। महर्षि वशिष्ठ को भी वैदिक तरीके से सिद्धि नहीं मिली; जब उन्होंने पाँचवें मकार के साथ, यानी तंत्रोक्त तरीके से, उनकी साधना और उपासना की, तभी सिद्धि मिली।

135

रावण संहिता में लिखे मंत्रों तक अभी नहीं पहुँचे हैं

एक विषय जहाँ अभी नहीं पहुँचे

· 1:12:50–1:12:53

रावण संहिता में लिखे कुछ मंत्रों की जानकारी देने को कहे जाने पर वक्ता कहते हैं कि वे अभी वहाँ तक नहीं पहुँचे हैं।

रावण संहिता में लिखे कुछ मंत्रों की जानकारी देने को कहे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं कि वे अभी वहाँ तक बिल्कुल नहीं पहुँचे हैं।

136

क्या नाग मणि सच में मिलती है?

जो दिखा नहीं सकते, उसकी पुष्टि से इनकार

· 1:12:54–1:13:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मिलती है या नहीं, यह अलग बात है; जो इसकी बात करते और दिखाते हैं, वे दिखा सकते हैं कि यह नाग मणि है, पर उसकी सच्चाई क्या है, यह जानने की बात है। अगर वे कहें कि हाँ, मिलती है, तो आप कहेंगे दिखाइए — और वे कहाँ से दिखाएँगे, उनके पास है ही नहीं। हाँ, उन्होंने ऐसी चीज़ें देखी हैं; वह सच में वही थी या नहीं, यह कहना अलग बात है।

137

पूजा के दौरान फ़ोन देखने की आदत कैसे छूटे?

फ़ोन बंद करना, और आत्म-संयम की ज़रूरत

· 1:13:21–1:14:39 · Also a question

पूजन के दौरान मोबाइल देखने की आदत कैसे छोड़ें, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं: मोबाइल बंद करके अलग रख दीजिए। वे थोड़ी झुंझलाहट में जोड़ते हैं कि चाहें तो मोबाइल ही अपने इष्ट को चढ़ा दीजिए और जैसे नारियल फोड़ते हैं वैसे फोड़ दीजिए, टेंशन ख़त्म। वे इसे बहुत बुरी आदत कहते हैं, कहते हैं कि उन्होंने देखा है कि पाठ चल रहा है और साथ में मोबाइल भी चल रहा है, और इन सब बातों में आत्म-संयम ज़रूरी है।

138

भगवान काल भैरव का वाहन कुत्ता क्यों है?

दो मुख्य कारण: रक्षक और पाप भक्षण

· 1:14:40–1:14:58 · Also a question

भगवान काल भैरव का वाहन श्वान क्यों है, यह पूछे जाने पर वक्ता दो मुख्य कारण बताते हैं: रक्षक, और पाप भक्षण — यानी पाप को खा जाना।

भगवान काल भैरव का वाहन श्वान, यानी कुत्ता, क्यों है, यह पूछे जाने पर वक्ता दो शब्दों में जवाब देते हैं: रक्षक, और पाप भक्षण। वे कहते हैं कि ये दो सबसे प्रमुख कारण हैं।

139

जब घर में किसी का विवाह नहीं हो रहा, तो क्या करना चाहिए?

पहले कुंडली विश्लेषण, फिर पितृ दोष, देव दोष या अभिचारिक बाधा

· 1:14:59–1:15:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चैनल पर विवाह से जुड़ी कुछ साधनाएँ और सिद्ध शाबर विद्याएँ दी गई हैं, पर सबसे पहले कुंडली का विश्लेषण होना चाहिए और जो भी दोष है उसे हटाना चाहिए। पितृ दोष, देव दोष, या अभिचारिक बाधा — जब ये सब ठीक से पता हों, तभी उसके अनुसार कोई उपाय या अनुष्ठान बताया जा सकता है।

140

क्या भोग और बलि देकर महाकाली को किसी के ख़िलाफ़ भेजा जा सकता है?

महाकाली को भेजने की सामर्थ्य किसी में नहीं, और असल में कौन चलता है

· 1:15:29–1:16:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि महाकाली को कोई नहीं भेज सकता; किसी में इतनी सामर्थ्य नहीं। यह कहने का ढंग है कि महाकाली चल रही हैं, चौराहे वाली चल रही हैं — वे इतनी खाली नहीं बैठीं कि एक लड्डू या कुछ मांस खाकर चल देंगी। वह अलग चीज़ है, और वे पहले ही वीडियो में यह विषय साफ़ कर चुके हैं कि कौन-सी शक्ति चलती है और वह असल में क्या है।

141

क्या हनुमान जी और भैरव जी तांत्रिक प्रयोग रोक सकते हैं?

सब कुछ रोका जा सकता है — यह करने वाले पर निर्भर है

· 1:16:11–1:16:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अधर्म पर जो भी चल रहा है उसे रोकने के लिए बड़ी चीज़ों का प्रयोग किया जा सकता है। वे कहते हैं कि वे किसी को गाली नहीं देना चाहते, पर जो लोग कहते हैं कि हनुमान जी और भैरव जी यह नहीं कर सकते, वह नहीं कर सकते, उन पर उनके मुँह से गाली निकल जाती है। ऐसा कुछ नहीं है: सब रुकता है, सब चलता है — करने वाला उस तरह का होना चाहिए, और अपने इष्ट और आराध्य पर भरोसा होना चाहिए।

142

क्या सुंदरकांड केवल शनिवार को पढ़ा जा सकता है?

एक तय दिन की अनुमति

· 1:16:38–1:16:45 · Also a question

क्या केवल शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने से चलेगा, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं: हाँ, बिल्कुल चलेगा।

क्या केवल शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने से चलेगा, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं: हाँ, बिल्कुल, चलेगा।

143

हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ें कि तंत्र प्रयोग असर न करे?

चालीस दिन सुबह-शाम हवनात्मक प्रयोग

· 1:16:46–1:17:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर तंत्र का प्रयोग ज़्यादा असर कर रहा है, तो हनुमान चालीसा का सुबह-शाम हवनात्मक प्रयोग कीजिए; विधान दिया गया है। ठीक उन्हीं सामग्रियों के साथ प्रयोग कीजिए जिनके नाम बताए गए हैं, और लगातार चालीस दिन कीजिए।

144

हनुमान चालीसा सिद्ध होने के बाद साधक के जीवन में क्या होता है?

जो तुलसीदास ने उसके भीतर बताया है

· 1:17:41–1:17:53 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि जो-जो बातें बताई गई हैं, वे होती हैं — वे सब बातें जो तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा के भीतर बताई हैं।

हनुमान चालीसा सिद्ध होने के बाद साधक के जीवन में क्या होता है, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं कि जो-जो बातें बताई गई हैं, वे सब बातें होती हैं — जो तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा के भीतर बताई हैं।

145

ऐसा गुरु कहाँ मिलेगा जिसे पैसे का लालच न हो?

योग्य गुरु के लिए अपने आराध्य से प्रार्थना

· 1:17:54–1:18:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके लिए अपने आराध्य से, अपने इष्ट से बार-बार प्रार्थना कीजिए और साधना कीजिए, कि आपको ऐसे योग्य गुरु मिलें। आपको ज़रूर मिलेंगे।

146

क्या गृहस्थ पारद शिवलिंग स्थापित कर सकता है?

पारद पर लागू नीति-नियम, और नर्मदेश्वर बेहतर

· 1:18:32–1:18:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर गृहस्थ पारद से जुड़ी कोई चीज़ स्थापित करता है, तो नीति और नियम का पालन ज़रूरी हो जाता है। उनकी अपनी राय में, अगर आप तंत्रोक्त साधनाएँ नहीं करते और साधारण गृहस्थ हैं, तो पारद शिवलिंग स्थापित करने से बेहतर नर्मदेश्वर शिवलिंग है; वही स्थापित करना चाहिए।

147

क्या 108 नाम वाले स्तोत्र के 1100 पाठ के बाद दशांश हवन और तर्पण ज़रूरी है?

हवन, तर्पण और मार्जन, हर नाम से 108 आहुतियाँ

· 1:18:59–1:20:03 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं, हाँ, बिल्कुल कीजिए — राजनीति के लिए कीजिए; करेंगे तो बेहतर होगा। आहुतियाँ देना ज़रूरी है; तर्पण, मार्जन सब कीजिए। और जब पूछने वाला इसे हर नाम से 108 आहुतियाँ बताता है, तो वक्ता कहते हैं कि उसने बिल्कुल सही समझा है।

148

क्या बच्चे माँ दुर्गा के 108 नामों का जप कर सकते हैं?

बच्चों को अनुमति, कोई दोष नहीं

· 1:20:04–1:21:32 · Also a question

वक्ता जवाब देते हैं कि बिल्कुल कर सकते हैं; बच्चे भगवती के 108 नामों का पाठ बिल्कुल कर सकते हैं, और इसमें कोई दोष नहीं।

क्या बच्चे माँ दुर्गा के 108 नामों का जप कर सकते हैं, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं: बिल्कुल कर सकते हैं। बच्चे भगवती के 108 नामों का पाठ बिल्कुल कर सकते हैं; इसमें कोई भी दोष नहीं है।

149

किसी जगह पर लगी बंदिश कैसे खोली जाती है?

अपने इष्ट के उग्र मंत्र, हवनात्मक प्रयोग और बलि

· 1:21:33–1:22:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर किसी जगह पर बंदिश की गई है, तो उस जगह पर अपने इष्ट और आराध्य के उग्र मंत्रों का प्रयोग करना चाहिए — शताक्षरी आदि। हवनात्मक प्रयोग करना चाहिए, और बलि आदि देनी चाहिए।

अगर किसी जगह पर बंदिश की गई हो, तो उसे कैसे खोलें, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं। अगर बंदिश की गई है, तो उस जगह पर अपने इष्ट के, अपने आराध्य के उग्र मंत्रों का प्रयोग करना चाहिए — शताक्षरी आदि। हवनात्मक प्रयोग करना चाहिए। बलि आदि देनी चाहिए।

150

जब परिवार के किसी सदस्य ने तंत्र किया हो, तो इलाज इतना मुश्किल क्यों होता है?

करने वाला परिवार के भीतर है, इसीलिए मुश्किल बार-बार आती है

· 1:22:01–1:22:19 · Also a question

जिस श्रोता ने कहा कि उसके बड़े भाई और चाची ने उस पर कुछ किया है और इलाज काम नहीं कर रहा, उसे वक्ता जवाब देते हैं कि जब परिवार के सदस्य करवाते हैं, तो यही मुश्किल आती है — जो आज का चर्चा का विषय है, कि जब एक ही परिवार के लोग एक-दूसरे पर तंत्र का प्रयोग करते हैं तो क्या-क्या होता है।

151

क्या बच्चे को माँ दुर्गा के 108 नामों का हवन भी करना होगा?

अभी केवल पाठ, हवन धीरे-धीरे सीखना

· 1:22:20–1:22:45 · Also a question

वक्ता पूछने वाले से कहते हैं कि अगर आप बहुत छोटे हैं और अभी इन सब विषयों की जानकारी नहीं है, तो केवल पाठ कीजिए। हवन धीरे-धीरे सीखिए; जब आपके लिए संभव हो, तब हवन भी ज़रूर कीजिए। अभी केवल पाठ कीजिए।

माँ दुर्गा के 108 नामों का हवन भी करना होगा या नहीं, यह पूछे जाने पर वक्ता जवाब देते हैं कि अगर पूछने वाला बहुत छोटा है और उसे अभी इन सब विषयों की जानकारी नहीं है, तो केवल पाठ कीजिए। हवन धीरे-धीरे सीखिए। जब आपके लिए संभव हो, तब हवन भी ज़रूर कीजिए। अभी बस पाठ कीजिए।

153

क्या हवन और अनुष्ठान के वीडियो केवल देखने या सुनने से लाभ होता है?

देखने से नकारात्मकता दूर होना, और पाठ न कर पाने वालों के लिए लाभ

· 1:23:07–1:23:36 · Also a question

सत्र समाप्त करते हुए वक्ता श्रोताओं से कहते हैं कि चैनल पर जो भी हवन और अनुष्ठान होते हुए दिखाए गए हैं — भगवती बगलामुखी के, भगवती प्रत्यंगिरा के, या भगवान नरसिंह के — उनके सारे वीडियो देखिए। वे कहते हैं कि देखने से भी बहुत नकारात्मकता दूर होती है; और वे जल्दी ही ऐसे वीडियो डालेंगे कि जो लोग खुद पाठ नहीं कर सकते, वे केवल सुनकर बहुत बड़ा लाभ ले सकें।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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