तंत्र में सूर्य उपासना — सूर्य परिवार, अर्घ्य, और मंत्र को बल कैसे मिलता है

तंत्र में सूर्य के महत्व और उनकी उपासना पर एक लाइव वार्ता।

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01

मंत्रों के लिए सूर्य को महत्वपूर्ण क्यों कहा जाता है?

सूर्य चंद्रमा के बल का स्रोत, और चंद्रमा मंत्रों का कारक

· 03:07–03:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान सूर्यनारायण के बिना इस पृथ्वी पर जीवन की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि सारे ग्रह उन्हीं से चलते हैं और सारी औषधियाँ और वनस्पतियाँ उनकी किरणों से पोषित होती हैं। चंद्रमा को मंत्रों का कारक और मंत्रों का बल माना गया है, और चंद्रमा का प्रकाश सूर्य से आता है — इसलिए सूर्य जो बल चंद्र को देते हैं, उसी से हमारे मंत्र अधिक पुष्ट और अधिक शक्तिशाली होते हैं।

02

क्या तंत्र सिद्धि के लिए केवल शनि, राहु और केतु देखना काफी है?

नवग्रहों के राजा सूर्य, जिन्हें तांत्रिक ज्योतिष में छोड़ दिया जाता है

· 03:57–04:48 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आज सब लोग मंत्र सिद्धि और तंत्र सिद्धि के लिए कुंडली में शनि, राहु और केतु देखते हैं — और यह ठीक भी है, क्योंकि तंत्र की गुप्त शक्तियाँ और गुप्त विद्याएँ वहीं से देखी जाती हैं। पर यदि हम सूर्य को छोड़ दें, तो यह सही नहीं, उचित नहीं, क्योंकि सूर्य नवग्रहों के राजा और अधिपति हैं, और राजा की बात सबको माननी पड़ती है।

03

सामान्य कर्मकांड में सूर्य पूजन कहाँ-कहाँ आता है?

हर याग और कलश यात्रा का अनिवार्य अंग सूर्य पूजन

· 04:49–05:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पूरा सूर्य पूजन किए बिना किसी भी मंत्र का पूरा फल पाना संभव ही नहीं है। किसी भी देवता का याग हो, वहाँ सूर्य पूजन जरूरी हो जाता है और अर्घ्य हमेशा दिया जाता है; नवग्रह पूजन में पहला पूजन सूर्य का होता है; और नदी किनारे कलश यात्रा में पहला अर्घ्य सूर्य को, फिर देव नदी को, फिर देव भूमि को दिया जाता है।

04

संकल्प लेते समय साक्षी कौन होते हैं?

संकल्प के दो साक्षी: सूर्यनारायण और अग्निदेव

· 05:38–06:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब भी हम संकल्प लेते हैं, या किसी बात का साक्षी बनाते हैं, तो साक्षी कर्म में दो महत्वपूर्ण होते हैं — पहले सूर्यनारायण और दूसरे अग्निदेव। सूर्यनारायण की साक्षी जरूरी हो जाती है।

05

सूर्यनारायण के माता-पिता कौन हैं, और इससे क्या तय होता है?

महर्षि कश्यप और अदिति, और ऋषि ऋण

· 06:14–07:06 · Also a question

सूर्य के पिता महर्षि कश्यप हैं और माता अदिति। वक्ता कहते हैं कि सूर्यनारायण की पूजा करने से ऋषियों से जुड़ा जो भी ऋण है, वह उतर जाता है — देव ऋण, ऋषि ऋण और अन्य जो तीन मुख्य ऋण बताए गए हैं, उनमें ऋषि ऋण इस तरह भी उतर जाता है।

06

सूर्य के ससुर कौन हैं, और इसका वास्तु से क्या संबंध है?

भगवान विश्वकर्मा, जिन्हें त्वष्टा कहा जाता है, और वास्तु दोष की शांति

· 07:07–07:59 · Also a question

सूर्य के ससुर देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा हैं, जिन्हें त्वष्टा भी कहा जाता है। वक्ता कहते हैं कि ससुर की कृपा के बिना हमारे पूरे भवन का वास्तु दोष कभी समाप्त नहीं होगा, और हवन कुंड की तीन मेखलाओं के बीच में विश्वकर्मा का पूजन होता है।

07

विश्वकर्मा के माता-पिता और पुत्रियाँ कौन हैं?

वास्तुदेव और भुवना; संज्ञा, ऋद्धि और सिद्धि

· 08:00–09:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि विश्वकर्मा के पिता वास्तुदेव हैं और माता भुवना, जो देवगुरु बृहस्पति की बहन हैं। विश्वकर्मा की तीन पुत्रियाँ हैं: संज्ञा, जिनका विवाह सूर्यनारायण से हुआ, और ऋद्धि और सिद्धि, जिनका विवाह गणपति से हुआ।

08

सूर्य उपासक को ऋद्धि और सिद्धि से क्या मिलता है?

सूर्य के संबंध से ऋद्धि और सिद्धि की प्राप्ति

· 09:05–09:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक बार आपने सूर्यनारायण की पूजा शुरू कर दी, तो उनका मंडल पूजन हो या न हो, और हम केवल उन्हीं की पूजा कर रहे हों तब भी, ऋद्धि और सिद्धि आपको ऐसे ही मिलेंगी — ऋद्धि-सिद्धि की पूजा नहीं, बल्कि ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति।

09

संज्ञा ने छाया को क्यों बनाया?

सूर्य का तेज न सह पाना, और छाया का निर्माण

· 09:24–09:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कथा आती है कि संज्ञा भगवान सूर्य का तेज सहन नहीं कर पाती थीं और उन्हें ठीक से देख नहीं पाती थीं। इसलिए उन्होंने कहा कि वे तपस्या करने जा रही हैं, और अपनी सामर्थ्य से ठीक अपने ही रूप वाली, दिव्य गुणों से युक्त एक दूसरी स्त्री उत्पन्न की, जिसका नाम छाया था — रूप, चाल और बोली में बिलकुल एक जैसी — और उसे अपनी जगह छोड़ गईं।

10

संज्ञा से कौन-सी संतानें हुईं, और हर एक के पूजन से क्या मिलता है?

वैवस्वत मनु, यम और यमी

· 09:57–10:32 · Also a question

पहले, संज्ञा से जो संतानें हुईं, वे हैं वैवस्वत मनु, यम, और यमी — यानी यमुना नदी, कालिंदी। वक्ता कहते हैं कि वैवस्वत मनु के पूजन से घर में ऐसे ही समृद्धि आती है, यम के पूजन से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, और यमुना की पूजा से पितरों को तृप्ति और गति मिलती है।

11

छाया से कौन-सी संतानें हुईं?

सावर्णी मनु और शनिदेव

· 10:33–10:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि छाया से सावर्णी मनु हुए — उनसे भी एक मनु हैं — और फिर शनिदेव, जिन्हें लोग आज के समय में बहुत महत्व देते हैं और शनिश्चर के रूप में जिनसे लोग सबसे अधिक डरते हैं।

12

सूर्य परिवार की इस दृष्टि से मकर संक्रांति का क्या अर्थ है?

पिता का पुत्र के घर जाना

· 10:59–11:46 · Also a question

जब सूर्यनारायण धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब हम मकर संक्रांति मनाते हैं — वक्ता कहते हैं, यह पिता का पुत्र के घर जाना है। यह दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर मुड़ना है और पर्व काल के रूप में माना जाता है: उस दिन पितरों का श्राद्ध और देवताओं का पूजन बड़े स्तर पर होता है, और दान-पुण्य का बड़ा महत्व है।

13

ताप्ती कौन हैं, और वे और यमुना पितरों की सेवा कैसे करती हैं?

विंध्य के उत्तर में यमुना, दक्षिण में ताप्ती

· 11:47–12:12 · Also a question

शनि की बहन ताप्ती हैं, जो वरदान पाकर नदी रूप में हैं। यमुना विंध्य क्षेत्र के उत्तरी भाग में बहती हैं और ताप्ती दक्षिणी भाग में; ये दोनों बहनें हैं, और जब सूर्यनारायण की पूजा होती है, तो दोनों की प्रसन्नता से हमारे पितरों को गति और तृप्ति मिलती है।

14

सूर्य की पुत्रियों में और किसकी गिनती होती है?

भद्रा, और पूरे परिवार की गिनती

· 12:13–12:40 · Also a question

इसके बाद एक और बहन हैं जिनका नाम भद्रा है। वक्ता कहते हैं कि भद्रा का महत्व सब जानते हैं — लोग कहते हैं भद्रा लग गई है, भद्रा की प्रसन्नता जरूरी है, भद्रा काल में कुछ नहीं करना चाहिए। भद्रा अलग-अलग स्थानों पर वास करती हैं, और रक्षाबंधन के समय लोग यही देखते हैं।

15

अश्विनी कुमारों का जन्म कैसे हुआ?

घोड़ी रूप में संज्ञा के पास सूर्य का जाना; दस मुख्य संतानें और रेवंत

· 12:41–13:17 · Also a question

पहली पत्नी के बाद सूर्यनारायण संज्ञा के पास गए, जो घोड़ी का रूप — अश्व, अश्विनी — धारण करके तपस्या कर रही थीं। उस समय उनके गर्भ से दो संतानें हुईं, जो अश्विनी कुमार बने। इस तरह सूर्यनारायण की दस मुख्य पुत्र-पुत्रियाँ हैं, और इनके अलावा संज्ञा से एक और पुत्र, रेवंत।

17

भगवान श्रीकृष्ण से सूर्य का क्या संबंध है?

यमुना का कृष्ण से विवाह, जिससे सूर्यनारायण ससुर बने

· 13:42–14:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवती यमुना का विवाह परम नारायण भगवान श्रीकृष्ण से हुआ। जब यमुना जी का विवाह कृष्ण जी से हुआ, तो सूर्यनारायण नारायण के ससुर हो गए। तो फिर कृपा कैसे नहीं आएगी? यदि हम सूर्य पूजन करें, तो दुखों से मुक्ति क्यों नहीं मिलेगी?

18

यज्ञोपवीत संस्कार में कौन-सा संकल्प दिलाया जाता है?

सूर्य को जीवन भर अर्घ्य देने का संकल्प

· 14:27–14:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब भी किसी व्यक्ति का यज्ञोपवीत संस्कार होता है, तो गायत्री का मंत्र उपदेश दिया जाता है, और उस समय उससे अवश्य कहा जाता है, और संकल्प दिलाया जाता है, कि वह जीवन भर सूर्य को अर्घ्य देगा।

19

सूर्य लोक में कौन-सी तांत्रिक देवियाँ स्थित हैं?

सूर्य मंडल में भगवती कूष्मांडा और भगवती बगलामुखी

· 14:53–15:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नवदुर्गाओं में भगवती कूष्मांडा का जो क्षेत्र माना गया है — जहाँ वे वास करती हैं — वह सूर्य लोक माना गया है। इसके अलावा तंत्र क्षेत्र में मुख्य रूप से पूजी जाने वाली भगवती बगलामुखी का जो स्वरूप और स्थान माना गया है, वह भी सूर्य मंडल में माना गया है। इसलिए तंत्र में पूरी निपुणता और मंत्र के पूरे प्रभाव के लिए सूर्य पूजन अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

20

सामान्य व्यक्ति सूर्य पूजन कैसे करे?

पौराणिक जपा कुसुम मंत्र, बारह बार पाठ

· 15:32–16:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गायत्री सबके लिए नहीं है — अधिकार और अनधिकार की बात आती है — पर तांत्रोक्त सूर्य मंत्र और पौराणिक मंत्र हर जगह उपलब्ध हैं। वे मंत्र इस तरह बताते हैं: "जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥", जिसे कोई भी बोल सकता है, और कहते हैं कि इसे रोज सूर्यनारायण के सामने खड़े होकर बारह बार भी पढ़ें।

21

पौराणिक सूर्य मंत्र का पाठ कौन कर सकता है, और यह किसलिए बताया गया है?

न यज्ञोपवीत की शर्त, न स्त्री-पुरुष का भेद; सरकारी नौकरी के लिए बारह पाठ

· 16:03–16:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आज के समय में सब सरकारी नौकरी चाहते हैं, और उसके लिए रोज सूर्यनारायण को देखते हुए इस मंत्र का बारह बार पाठ अवश्य करना चाहिए। इसके लिए, वे कहते हैं, यज्ञोपवीत की जरूरत नहीं है, और यह देखने की भी जरूरत नहीं कि पुरुष है या स्त्री: यह पौराणिक मंत्र है, वेदव्यास जी का रचा हुआ।

22

शरीर में भारी कष्ट हो तो क्या बताया गया है?

सूर्य के सामने बारह बार सूर्य कवच या बारह नाम

· 16:53–17:08 · Also a question

यदि आपके शरीर में किसी भी कारण से बहुत बड़ा कष्ट है — देवताओं की दी हुई, पितरों की, राक्षस, प्रेत या पिशाच की, या अभिचार से उत्पन्न बाधा — जिसमें कोई इलाज काम नहीं कर रहा या डॉक्टरी इलाज से लाभ नहीं हो रहा, तो वक्ता कहते हैं कि सुबह सूर्यनारायण के सामने खड़े होकर कम से कम बारह बार सूर्य कवच का पाठ करें। सूर्य कवच काफी छोटा कवच है। या भगवान सूर्यनारायण के बारह नाम बारह बार बोलें।

23

क्या अलग-अलग महीनों के अलग-अलग आदित्य होते हैं?

बारह महीनों के बारह आदित्य, और दीक्षा वाले महीने का आदित्य

· 17:09–17:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बारह महीनों के लिए अलग-अलग आदित्य माने गए हैं, और हर महीने अलग आदित्य की पूजा होती है। जब आप किसी गुरु परंपरा में जाते हैं, विशेषकर दीक्षा के समय, तो उन सब आदित्यों से जुड़े कुछ विशेष संकल्प भी करवाए जाते हैं, और जिस महीने आपकी दीक्षा हुई, उस महीने के आदित्य की पूजा का विशेष महत्व आपको बताया जाता है।

24

तांत्रिक दोष लगने पर सूर्य साक्षी क्यों होते हैं?

सूर्य कभी सोते नहीं, इसलिए हर दोष के साक्षी हैं

· 17:36–18:13 · Also a question

यदि आप तंत्र में कहीं फँस जाते हैं — खासकर वे लोग जो कुछ तंत्र व्यावहारिक रूप से करते हैं, षट्कर्म से जुड़ा कुछ तंत्र करते हैं — और उसका दोष लग जाता है, या किसी और मंत्र का दोष लग जाता है, या उच्चारण की गलती हो जाती है, या बिना अधिकार के किसी मंत्र का जप हो जाता है जिससे देवता रुष्ट हो गए, या किसी शक्तिपीठ या तीर्थ पर कोई अपमान हो गया: वक्ता कहते हैं कि इन सबके साक्षी सूर्यदेव हैं, क्योंकि सूर्यनारायण कभी सोते नहीं।

25

सूर्य को अर्घ्य देने से साधक का क्या दूर होता है?

साधना के दौरान स्वप्नदोष जैसे दोषों का उपाय अर्घ्य

· 18:14–18:39 · Also a question

सूर्य को अर्घ्य देना उस स्थिति के लिए बताया गया है जो साधना के दौरान पुरुषों में आती है, और स्त्रियों में भी — स्वप्नदोष आदि, किसी भी कारण से, चाहे विचार का कारण हो या सामान्य प्राकृतिक कारण। वक्ता कहते हैं कि सुबह स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देने से वह दोष दूर होता है; सूर्य को अर्घ्य देने से कई दोष टल जाते हैं।

26

जब कोई मंत्र प्रभाव देना बंद कर दे, तो क्या किया जा सकता है?

तारण सहित आठ तांत्रिक विधियाँ, और मार्तंड तंत्र की बारह और

· 18:40–19:06 · Also a question

जो मंत्र प्रभाव नहीं दे रहा, उसके लिए वक्ता कहते हैं कि तंत्र में आठ प्रकार की विधियाँ बताई गई हैं — तारण इत्यादि प्रक्रियाएँ, जिनसे मंत्र को जागृत किया जाता है — पर वह गुरु की देखरेख में होता है। उनके अलावा बारह और प्रकार बताए गए हैं, जो मार्तंड तंत्र के अंतर्गत आते हैं, जिनकी कुछ विधियाँ काल संकर्षण तंत्र में दी गई हैं, और जो सूर्यनारायण के सामने की जाती हैं।

27

मंत्र को चैतन्य करने की भोजपत्र विधि क्या है?

जपा पुष्प के पेड़ की जड़ में लाल भोजपत्र पर बारह बार मंत्र लिखना

· 19:07–19:40 · Also a question

सूर्य का प्रिय फूल जपा पुष्प है, जिसे हम गुड़हल का फूल कहते हैं। वक्ता कहते हैं कि जब मंत्र चैतन्य नहीं रहा, तब गुरु की आज्ञा से लाल भोजपत्र पर लाल चंदन की कलम और रक्त चंदन की स्याही से, भगवान सूर्य के तांत्रोक्त बीज का संपुट लगाकर, मंत्र बारह बार लिखा जाता है; पेड़ को गोबर से अच्छी तरह लीपा जाता है, सूर्य कलश स्थापित करके उसकी जड़ में मंत्र स्थापित किया जाता है, और उस मंत्र का 12,000 जप किया जाता है।

28

ऐसे पुष्ट किए गए मंत्र का दुरुपयोग हो तो क्या होता है?

सौ गुना प्रभाव, और दुरुपयोग पर स्वयं सूर्य का श्राप

· 19:41–20:05 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि कहा जाता है, तब वह मंत्र सौ गुना अधिक प्रभावशाली हो जाता है — पर उस मंत्र का दुरुपयोग करने पर स्वयं सूर्य श्राप देते हैं। सूर्य के श्राप से शरीर में अपस्मार जैसे रोग, चर्म रोग, और विशेष रूप से विकलांगता उत्पन्न होती है।

29

बगलामुखी अनुष्ठान प्रभाव न दे रहा हो तो क्या बताया गया है?

पीले वस्त्र में, कुश आसन पर, उगते सूर्य के सामने छत्तीस पाठ

· 20:06–20:36 · Also a question

यदि आप भगवती बगला के किसी मंत्र का अनुष्ठान कर रहे हैं, विशेषकर भगवती महापीतांबरा का, और मंत्र प्रभाव नहीं दे रहा — हालाँकि इसके कई कारण हो सकते हैं — तो वक्ता कहते हैं कि पीले वस्त्र पहनकर, कुश के आसन पर खड़े होकर, दिखाई देने वाले उगते सूर्य को देखते हुए छत्तीस बार पाठ करें, और फिर सूर्य को अर्घ्य दें। इससे मंत्र बहुत तेजी से काम करते हैं।

30

क्या सामान्य व्यक्ति काली मिर्च वाला तांत्रोक्त अर्घ्य दे सकता है?

द्रव्य मिलाए तांत्रिक अर्घ्य पर रोक

· 20:37–21:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तांत्रोक्त विधानों में आता है कि सूर्य को काली मिर्च और अन्य प्रकार के द्रव्य मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए — पर सामान्य व्यक्ति को यह क्रिया नहीं करनी चाहिए, क्योंकि तब मंत्र जरूरत से ज्यादा प्रभावशाली हो जाएँगे और हो सकता है उनका तेज ही आपको कष्ट दे। केवल सादे जल से अर्घ्य दें, पर छत्तीस पाठ के साथ।

31

क्या संतान प्राप्ति के लिए सूर्य उपासना बताई गई है?

सूर्य लोक में कात्यायनी, षष्ठी, उषा और प्रत्यूषा

· 21:02–21:57 · Also a question

यदि पुत्र या पौत्र नहीं हो रहा, या संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है, चाहे डॉक्टरी कारण हो या कोई और, तो सूर्यनारायण वह भी देने में समर्थ हैं। भगवती कात्यायनी, भगवती षष्ठी, उषा और प्रत्यूषा भगवान सूर्यनारायण के साथ रहती हैं, और इस संसार के जो भी जीव संतान पाते हैं, उन्हीं की कृपा से पाते हैं; कहा जाता है कि वे बारह वर्ष की आयु तक रक्षा करती हैं।

32

क्या इंद्र और विष्णु बारह आदित्यों में गिने जाते हैं?

कल्प भेद, जिसमें इंद्र और विष्णु आदित्य रूप हैं

· 21:58–22:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कल्प भेद के अनुसार दो रूप आदित्य के रूप माने गए हैं: एक इंद्र और दूसरे विष्णु। इन दोनों देवताओं को बारह आदित्यों में से एक-एक का रूप माना गया है — कल्प भेद के अनुसार एक-एक आदित्य रूप। हर कल्प में नाम अलग होते हैं, और एक कल्प में विष्णु और इंद्र भी उसमें आते हैं।

33

सूर्यनारायण की पूजा करने पर किन-किन की कृपा एक साथ आती है?

सूर्य उपासना से प्रजापति, इंद्र और विष्णु तक पहुँच

· 22:36–23:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब हम नारायण की, सूर्यनारायण की उपासना कर रहे होते हैं, तो यहाँ प्रजापति की कृपा भी मिलती है, इंद्र की कृपा भी मिलती है, और साथ में भगवान विष्णु की कृपा भी हमें मिलती है। नारायण शब्द तो जुड़ा ही है, और सीधे-सीधे वे भगवान श्रीकृष्ण के ससुर हैं, इसलिए उनकी कृपा अवश्य आएगी।

34

सूर्य से जुड़ी पूजा में सबसे ज्यादा किस बात का ध्यान रखना चाहिए?

सूर्य लोक की शक्तियों की पूजा में शुचिता

· 23:04–23:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान सूर्य, भगवती षष्ठी, भगवती बगलामुखी, भगवती कूष्मांडा और भगवती कात्यायनी — सूर्य लोक से जुड़ी शक्तियों — के पूजन में शुचिता का, साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। शुचिता हर देव प्रक्रिया में मायने रखती है, पर यहाँ विशेष रूप से, क्योंकि सूर्यनारायण प्रत्यक्ष देव हैं और बहुत जल्दी फल देते हैं।

35

सूर्य अनुष्ठान में कौन-से नियम लागू होते हैं?

ब्रह्मचर्य, कम से कम बारह दिन, और सात्विक भोजन

· 23:53–24:25 · Also a question

किस तरह की गलतियाँ? वक्ता उत्तर देते हैं — सबसे पहले ब्रह्मचर्य का पालन — ब्रह्मचर्य मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में पालन होना चाहिए। इनकी पूजा सामान्य रूप से कम से कम बारह दिन करनी चाहिए, हालाँकि आप चाहें तो एक दिन भी कर सकते हैं। यदि आपने इसे अपने नित्य नियम में ले लिया है तो वहाँ यह जरूरी नहीं, पर यदि अनुष्ठान का संकल्प लिया है, तो सात्विक भोजन और अन्य सामान्य नियमों के साथ नियमों का पालन करना होगा।

36

चाक्षुषी विद्या किस काम आती है?

आँख के दोषों और बंधन के विरुद्ध नेत्रोपनिषद और चाक्षुषी विद्या

· 24:26–25:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चाक्षुषी विद्या सामान्य रूप से आँख के किसी दोष या विकार को दूर करने के लिए जानी जाती है। अपने एक वीडियो का हवाला देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि गुरु द्वारा बंधन लगाया जा सकता है, वे कहते हैं कि यदि आँखें बंधन से बंधी हों, तो भगवान सूर्य के सामने खड़े होकर, रोज उगते सूर्य पर त्राटक करते हुए चाक्षुषी विद्या का पाठ करने से वह बंधन टूट सकता है — यदि पुण्य इतना प्रबल हो तो एक ही दिन में, वरना उसके लिए माने गए बारह दिनों में।

37

मकर संक्रांति आने वाली है, और चैनल पर आगे तांत्रोक्त सूर्य साधनाएँ आएँगी।

मकर संक्रांति निकट, और आगे आने वाली तांत्रोक्त सूर्य साधनाएँ

· 25:23–25:53

वे कहते हैं कि यह इसलिए बता रहे हैं क्योंकि मकर संक्रांति आ रही है, और उस समय भगवान सूर्य से जुड़ी कुछ विशेष तांत्रोक्त साधनाएँ चैनल पर अवश्य आएँगी — ताकि जिन्हें लगता है कि वे जो साधनाएँ और मंत्र कर रहे हैं उनका फल नहीं मिल रहा, या धीरे-धीरे मिल रहा है, उनके लिए सूर्य की कृपा सबसे उत्तम है।

38

यदि कुंडली में सूर्य मारक हो तो क्या फर्क पड़ता है?

कुंडली से कोई बाधा नहीं; रवि पुष्य नक्षत्र

· 25:54–26:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कुंडली के अनुसार सूर्य आपके लिए मारक हों या कुछ और, इससे कोई कठिनाई नहीं है: पूजा-पाठ करने से कोई कठिनाई नहीं होने वाली। सूर्य की कृपा ठीक से मिले, इसके लिए जब भी रवि पुष्य नक्षत्र पड़े, उस समय सूर्यनारायण का एक दिन का भी विशेष पूजन या अनुष्ठान उनकी कृपा दिलाता है।

39

सूर्य पूजा दिन में किस समय करनी चाहिए?

केवल सूर्योदय के समय, जब तक सूर्य को देखा जा सके

· 26:14–26:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सूर्य पूजा सुबह उगते सूर्य के अलावा कभी नहीं करनी चाहिए। एक बार वे ऊपर चढ़ गए — यदि आप सात-आठ बजे करने जाएँ, जब हम उन्हें देख नहीं पाते — तो कोई फल नहीं मिलेगा। इसलिए मंत्रों का पाठ उनके उगते समय उन्हें देखते हुए किया जाता है, दो मिनट, बारह मिनट, या जितनी देर उन्हें देख पाने की क्षमता हो।

40

जिन्हें गायत्री का अधिकार है, उनके लिए क्या बताया गया है?

सूर्य के सामने रोज कम से कम एक माला गायत्री

· 26:38–27:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिन्हें गायत्री का अधिकार है, उन्हें रोज भगवान सूर्यनारायण को देखते हुए कम से कम एक माला गायत्री जप अवश्य करना चाहिए। इससे विशेष कृपा मिलती है, अत्यंत विशेष कृपा: जो काम आपके लिए एक साल में होना था, वह एक महीने में पूरा हो जाएगा, चाहे वह भौतिक काम हो या आध्यात्मिक कृपा।

41

कौन-सा आदित्य किस महीने का है?

चैत्र में विष्णु, वैशाख में अर्यमा, ज्येष्ठ में विवस्वान, आषाढ़ में अंशुमान, फाल्गुन में त्वष्टा

· 27:09–28:05 · Also a question

बारह सूर्यों में महीने-दर-महीने चलते हुए वक्ता नाम बताते हैं: चैत्र महीने में विष्णु बारह आदित्यों में से एक माने गए हैं; वैशाख महीने में अर्यमा; ज्येष्ठ महीने में विवस्वान; आषाढ़ में अंशुमान; और फाल्गुन महीने में ऋषि त्वष्टा की आदित्य रूप में पूजा होती है। इस तरह बारह आदित्य अलग-अलग चलते हैं।

42

बच्चों को किस तरह के स्कूल में दाखिला दिलाना चाहिए?

अकादमिक शिक्षा स्कूल से, बौद्धिक शिक्षा घर से

· 28:06–28:47 · Also a question

जब पूछा गया कि आज बच्चों को किस तरह के स्कूल में दाखिला दिलाना चाहिए, और किस उम्र में कौन-सी शिक्षा दें ताकि बच्चे भौतिक के साथ आध्यात्मिक रूप से भी आगे बढ़ें, तो वक्ता कहते हैं कि कॉन्वेंट स्कूलों में किस तरह की शिक्षा दी जा रही है, यह सब जानते हैं। कोशिश करें कि उसमें न जाएँ; और यदि ऐसी मजबूरी हो कि बच्चे को उसी स्कूल में डालना पड़े, तो वहाँ से केवल अकादमिक शिक्षा लें और घर से बौद्धिक शिक्षा इस तरह दें कि बच्चा सुरक्षित निकल सके।

43

कुंडली देखने के लिए कोई सॉफ्टवेयर उपयोग नहीं होता, हालाँकि ऐप ऑनलाइन मिल जाते हैं।

कोई सॉफ्टवेयर उपयोग नहीं

· 28:48–29:02

जब पूछा गया कि कुंडली देखने के लिए वे कौन-सा सॉफ्टवेयर उपयोग करते हैं और कोई ऐप बताएँ, तो वक्ता कहते हैं कि ऐप ऑनलाइन देखे जा सकते हैं, पर वे स्वयं अभी कोई सॉफ्टवेयर उपयोग नहीं करते।

जब पूछा गया कि कुंडली देखने के लिए वे कौन-सा सॉफ्टवेयर उपयोग करते हैं, और कोई ऐप सुझाने को कहा गया, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि आप ऑनलाइन ऐप देख सकते हैं। वे स्वयं, वे कहते हैं, अभी कोई सॉफ्टवेयर उपयोग नहीं करते।

44

आसन पर बैठकर चालीसा या जप करने का क्या प्रभाव होता है?

ऊर्जा की ऊर्ध्व गति

· 29:03–29:17 · Also a question

जब पूछा गया कि कोई भी पूजन करते समय — जैसे चालीसा का जप करते समय — आसन पर बैठकर करने से ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ता है, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि ऐसा किया जा सकता है, और इससे ऊर्ध्व गति, यानी ऊपर की ओर गति होती है।

एक श्रोता पूछते हैं कि कोई भी पूजन करते समय — जैसे यदि कोई चालीसा का जप कर रहा है — आसन लगाकर करने से ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ता है। आप कर सकते हैं, वक्ता उत्तर देते हैं: ऊर्ध्व गति होती है।

45

नवरात्रि में 32 नाम वाले कवच को फिर से ऊर्जित कैसे करें?

नया 32 गाँठ का धागा, कच्चे दूध से स्नान, और देवी अथर्वशीर्ष या देवी सूक्तम् से अभिषेक

· 29:18–29:51 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या 32 नाम वाले कवच को उतारकर, नामावली का जप करके, नवरात्रि के समय उसकी ऊर्जा बढ़ाने के लिए उस पर फिर से अर्पण किया जा सकता है, तो वक्ता कहते हैं कि यह किया जा सकता है। पहले, यदि आप उसे धागे में पहन रहे हैं, तो धागा हटा दें; फिर बत्तीस गाँठ का नया धागा बनाएँ, उसे फिर से कच्चे दूध से स्नान कराएँ, और देव अथर्वशीर्ष या देवी सूक्तम् का पाठ करते हुए उसका अभिषेक करें — और फिर उस पर अर्पण करें।

46

क्या गुप्त नवरात्रि में रोज हवन किया जा सकता है?

दुर्गा नामावली से रोज हवन

· 29:52–30:16 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या आने वाली गुप्त नवरात्रि में रोज हवन किया जा सकता है, तो वक्ता उत्तर देते हैं: बिलकुल। जब पूछा गया कि क्या यह माँ दुर्गा की नामावली से किया जा सकता है, तो वे कहते हैं हाँ, बिलकुल, किया जा सकता है।

47

माँ मनसा की साधना विशेष रूप से भाद्रपद महीने में होती है।

माँ मनसा की साधना विशेषकर भाद्रपद में

· 30:17–30:27

वक्ता कहते हैं कि क्योंकि माँ मनसा की साधना विशेष रूप से भाद्रपद महीने में होती है, इसलिए वे इसे नवरात्रि तक देने की कोशिश करेंगे — वे इसे नवरात्रि से पहले देंगे।

क्योंकि माँ मनसा की साधना विशेष रूप से भाद्रपद महीने में होती है, वक्ता कहते हैं, वे इसे नवरात्रि तक देने का प्रयास करेंगे। वे इसे नवरात्रि से पहले देंगे।

48

नित्य पूजा के अंगों को किस क्रम में करना चाहिए?

गुरु स्मरण, गणपति, भैरव, हनुमान, जगदंबा, और अंत में शिव

· 30:28–30:52 · Also a question

एक श्रोता अपना रोज का क्रम बताते हैं: गुरु स्मरण, दत्त मंत्र की माला, फिर संकट नाशन गणपति स्तोत्र, फिर भगवती का सतनाम कवच स्तोत्र, फिर रुद्राष्टक, फिर बजरंग बाण। वक्ता उत्तर देते हैं कि पहले दत्त माला के साथ गुरु स्मरण आता है; उसके बाद गणपति; गणपति के बाद भैरव; फिर हनुमान जी; फिर जगदंबा, या लक्ष्मी नारायण; और शिव जी बिलकुल अंत में करने चाहिए।

49

क्या माता दुर्गा की भी अप्सराएँ होती हैं?

दुर्गा की अप्सराएँ, और लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र

· 30:53–31:05 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या माता दुर्गा की भी अप्सराएँ होती हैं, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि बिलकुल होती हैं। एक और श्रोता से वे कहते हैं कि लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र का पाठ बिलकुल किया जा सकता है।

जब पूछा गया कि क्या माता दुर्गा की भी अप्सराएँ होती हैं, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि बिलकुल होती हैं। एक और श्रोता से वे कहते हैं कि लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र का पाठ बिलकुल किया जा सकता है।

50

शनि की साढ़ेसाती में क्या मार्गदर्शन है?

यदि शनि लग्नेश के मित्र हों तो साढ़ेसाती का बुरा होना जरूरी नहीं

· 31:06–31:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शनिदेव की कृपा से आध्यात्मिक और भौतिक दोनों विकास होते हैं, और यदि उनकी साढ़ेसाती चल रही है तो जरूरी नहीं कि वह आपको कष्ट ही देगी। यदि कुंडली के अनुसार शनि आपके लग्नेश के लिए मित्र ग्रह हैं — लग्न ग्रह के मित्र हैं — तो सामान्य रूप से वे बुरे प्रभाव नहीं देते। फिर भी कुंडली का विश्लेषण करवाएँ, और यदि उनके लिए कुछ उचित करना चाहें, तो कर सकते हैं।

51

व्यवहार में सूर्य को अर्घ्य कैसे दें?

गीले कपड़े आदर्श हैं पर जरूरी नहीं; जल के छींटे आप पर न पड़ें

· 31:56–32:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक मत यह है कि सूर्य को अर्घ्य केवल गीले कपड़ों में ही देना चाहिए, पर यह सबके लिए संभव नहीं, क्योंकि सब नदी में स्नान नहीं करते; और जहाँ गीले कपड़ों में टाइल वाली छत या बालकनी पर निकलना पड़े, वहाँ फिसलकर गिर सकते हैं। इसलिए अच्छी तरह स्नान करें, पूजा स्थान पर जाएँ, और जो कपड़े पहने हैं उन्हीं में अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय जल के छींटे आप पर नहीं पड़ने चाहिए।

52

अर्घ्य का जल किसमें गिरना चाहिए?

बालू या मिट्टी भरा पात्र, या गुड़हल का पौधा

· 32:42–33:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके लिए ऐसे पात्र का उपयोग करना चाहिए जिसमें बालू — जिसे रेत कहते हैं — या मिट्टी भरी जा सके। या उसमें कोई पौधा लगाएँ, विशेषकर गुड़हल के फूल का पेड़, जिसे जपा कुसुम कहते हैं। सूर्यनारायण के नाम से, उन्हें देखते हुए, उसी में अर्घ्य दें; यही उचित है।

इसके लिए, वक्ता कहते हैं, ऐसे पात्र का उपयोग करना चाहिए जिसमें आप बालू भर सकें, जिसे रेत कहते हैं, या जिसमें आप मिट्टी भर सकें। या उसमें कोई पौधा लगा दीजिए, विशेषकर गुड़हल के फूल का पेड़, जिसे जपा कुसुम कहते हैं। सूर्यनारायण के नाम से, उन्हें देखते हुए, उसी में अर्घ्य दीजिए — यही उचित है।

53

संक्षेप में सूर्य पूजन कैसे किया जाता है?

अर्घ्य और पौराणिक मंत्र के बारह पाठ

· 33:03–33:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप विधिवत पूजन में जाएँ तो वैदिक और तांत्रोक्त, बहुत बड़ा विधान है; सामान्य रूप से उनकी बताई दो विधियाँ कीजिए। पौराणिक मंत्र — जिसे वे यहाँ "जपा कुसुम संकासम कास्यपेयं महाद्युतिम" के रूप में बताते हैं — सूर्यनारायण को देखते हुए बारह बार पढ़ना चाहिए। अर्घ्य दें और फिर उन्हें देखते हुए बारह बार पाठ करें। इतना ही बहुत होगा।

54

क्या चर्म रोग के लिए सूर्य उपासना की जा सकती है?

चर्म रोग का विशेष उपाय सूर्य उपासना

· 33:47–33:54 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या चर्म रोग के लिए सूर्य उपासना की जा सकती है, तो वक्ता कहते हैं बिलकुल की जा सकती है — चर्म रोग के लिए तो विशेष रूप से सूर्य उपासना ही करनी चाहिए।

जब पूछा गया कि क्या चर्म रोग के लिए भी सूर्य उपासना की जा सकती है, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि बिलकुल की जा सकती है। चर्म रोग के लिए तो विशेष रूप से सूर्य उपासना ही करनी चाहिए।

55

माता दुर्गा का पौराणिक मंत्र क्या है?

पूरी सप्तशती ही पौराणिक मंत्र

· 33:55–34:09 · Also a question

जब पूछा गया कि पौराणिक सूर्य मंत्र की तरह माता दुर्गा का पौराणिक मंत्र क्या होगा, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि पूरी सप्तशती ही पौराणिक मंत्र है — वह इनसे भरी हुई है।

एक श्रोता पूछते हैं कि जैसे वक्ता ने सूर्य के पौराणिक मंत्र की बात की, वैसे माता दुर्गा का पौराणिक मंत्र क्या होगा। पूरी सप्तशती ही पौराणिक मंत्र है, वे उत्तर देते हैं। वह इनसे भरी हुई है।

56

तीसरे भाव में रवि और राहु साथ हों तो क्या संकेत है?

तुला लग्न से पितृ दोष का विचार

· 34:10–34:26 · Also a question

एक श्रोता, जो कहते हैं कि उनका लग्न तुला है और रवि और राहु तीसरे स्थान पर धनु राशि में हैं, उन्हें वक्ता उत्तर देते हैं कि तीसरे स्थान पर होने से पूर्ण रूप से पितृ दोष है।

एक श्रोता बताते हैं कि उनका लग्न तुला है और रवि और राहु तीसरे स्थान पर, धनु राशि में हैं। क्योंकि यह तीसरे स्थान पर है, वक्ता उत्तर देते हैं, इसलिए पूर्ण रूप से पितृ दोष है।

57

आदित्य हृदय स्तोत्र क्या है, और क्या इसका पाठ किया जा सकता है?

श्रीराम को अगस्त्य का उपदेश, और देवता का हृदय पाठ

· 34:27–35:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ बिलकुल किया जा सकता है। कथा आती है कि भगवान श्रीराम के रावण वध से पहले महर्षि अगस्त्य ने उन्हें आदित्य हृदय स्तोत्र का उपदेश दिया था। हर देवता का अपना हृदय पाठ होता है — श्रीराम का, कृष्ण जी का, जगदंबा के किसी भी रूप का — और वह फल देने में अत्यंत शीघ्र और रक्षा देने में बहुत समर्थ होता है।

58

सूर्य को अर्घ्य कितने बजे तक दिया जा सकता है?

केवल तब तक, जब तक सूर्य में लालिमा हो

· 35:12–35:25 · Also a question

जब पूछा गया कि सूर्य को अर्घ्य कितने बजे तक दिया जा सकता है, तो वक्ता कहते हैं: सुबह जितनी जल्दी हो सके। जब तक उनमें लालिमा रहती है, तब तक ही अर्घ्य देना उचित है।

जब पूछा गया कि सूर्य को अर्घ्य कितने बजे तक दिया जा सकता है, तो वक्ता उत्तर देते हैं: सुबह जितना संभव हो। जब तक उनमें लालिमा रहती है, तब तक ही अर्घ्य देना उचित होता है।

59

यदि कोई साढ़े पाँच बजे उठकर अर्घ्य न दे पाए तो क्या करे?

पूजा स्थान पर मंत्र जप, और कम से कम रवि पुष्य और रविवार

· 35:26–36:05 · Also a question

जब पूछा गया कि जो सुबह 5:30 बजे न उठ पाए वह क्या करे, तो वक्ता कहते हैं कि यदि आपका काम ऐसा है कि आप जल्दी नहीं उठ पाते, तो बात अलग है। तब कम से कम पूजा स्थान पर उनके नाम से मंत्र का जप कीजिए। पर कोशिश कीजिए, क्योंकि यदि आप अर्घ्य दें तो बहुत उत्तम होगा। और कुछ नहीं तो जब भी पुष्य नक्षत्र पड़े, विशेषकर रवि पुष्य नक्षत्र, उनका पूजन कीजिए, और कम से कम रविवार को उन्हें अर्घ्य और जल देने की कोशिश कीजिए।

60

शारीरिक कष्ट के लिए सूर्य हवन कैसे किया जाता है?

आक की लकड़ी; पुरुषों के लिए घी और गुग्गुल, स्त्रियों के लिए हवन सामग्री

· 36:06–36:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चर्म और शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए सरल तरीके से सूर्य उपासना बिलकुल की जा सकती है, और उनका हवन भी किया जा सकता है — इसी पौराणिक मंत्र से। यदि आक, यानी मदार की लकड़ी पर आहुति दी जाए, तो पुरुष घी और गुग्गुल से आहुति दें, और स्त्रियाँ विशेष रूप से हवन सामग्री से; इससे सूर्यनारायण की विशेष कृपा मिलती है।

61

सूर्य उपासना के लिए कौन-से दिन अधिक फल देते हैं?

सूर्य सप्तमी, अचला सप्तमी और सूर्य षष्ठी

· 36:29–36:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सूर्य सप्तमी, अचला सप्तमी और सूर्य षष्ठी — इन सभी दिनों में विशेष रूप से सूर्य उपासना करने से और अधिक फल मिलता है।

सूर्य सप्तमी, अचला सप्तमी, सूर्य षष्ठी — इन सभी दिनों में विशेष रूप से, वक्ता कहते हैं, सूर्य उपासना करने से और अधिक फल मिलता है।

62

क्या उत्तरायण और दक्षिणायन में सूर्य के साथ नाभि दर्शना और तिलोत्तमा होती हैं?

हर आदित्य का अपना मंडल पूजन, मार्तंड तंत्र का विषय

· 36:37–37:15 · Also a question

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या उत्तरायण में सूर्यदेव के साथ नाभि दर्शना अप्सरा देवी होती हैं और दक्षिण में तिलोत्तमा देवी। वक्ता कहते हैं कि यह विषय पूरी तरह तांत्रोक्त हो गया है: जैसा उन्होंने समझाया, हर महीने का आदित्य अलग है, बारह महीनों के बारह आदित्य हैं, और हर आदित्य का अपना मंडल पूजन है। जब हम त्वष्टा के साथ पूजन करेंगे, तब आपकी नाभि दर्शना या तिलोत्तमा वहाँ नहीं होंगी — उनका मंडल पूजन बिलकुल अलग हो जाता है। यह अलग से मार्तंड तंत्र का पूरा विषय बन जाता है।

63

क्या अमावस्या हवन में पितृ गायत्री की आहुति दी जा सकती है?

अर्गला का पहला मंत्र बेहतर, क्योंकि उसमें स्वधा शक्ति है

· 37:16–37:58 · Also a question

जब पूछा गया कि सब प्रकार के पितरों की मुक्ति और शांति के लिए अमावस्या हवन में क्या "पितृ देवाय विद्महे जगत धारणाय धीमहि" मंत्र से एक माला आहुति दी जा सकती है, तो वक्ता उत्तर देते हैं: उनके अपने मत में, यदि आप हमेशा से करते आ रहे हैं, तो कर सकते हैं। पर सामान्य रूप से, यदि आप पितरों के लिए कुछ करना भी चाहें, तो वे कहते हैं कि इसे स्वतंत्र रूप से न करें, बल्कि अर्गला के पहले मंत्र से दें, जिसमें स्वधा शक्ति उपलब्ध है — स्वधा शक्ति के माध्यम से उनकी तृप्ति होगी, उसमें कोई गलती नहीं होगी, और उनकी गति भी होगी। वे साफ कहते हैं: पितृ गायत्री की आहुति स्वतंत्र रूप से न दें।

64

सूर्यनारायण के माध्यम से पितरों के लिए क्या अर्पित किया जा सकता है?

पितरों के लिए पौराणिक जपा कुसुम मंत्र

· 37:59–38:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पितरों के लिए, और सूर्यनारायण की कृपा के लिए, पौराणिक जपा कुसुम मंत्र से किया जा सकता है — उससे भी प्राप्ति होगी।

पितरों की ओर से, सूर्यनारायण की कृपा के लिए, वक्ता कहते हैं, यदि आप जपा कुसुम मंत्र से करें, जो पौराणिक मंत्र है, तो उससे भी प्राप्ति होगी।

65

पंचाक्षरी प्रणव के साथ करें या बिना प्रणव के?

प्रणव केवल दीक्षितों के लिए

· 38:07–38:37 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उन्होंने भगवान शिव को गुरु माना है, हनुमान जी की पूजा करते हैं, चालीसा पढ़ते हैं, और पंचाक्षरी का जप करते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि यदि आप दीक्षित हैं तो प्रणव के साथ करें; यदि दीक्षित नहीं हैं, तो प्रणव लगाए बिना शिव मंत्र का जप करें।

एक श्रोता कहते हैं कि उन्होंने भगवान शिव को गुरु माना है, हनुमान जी की पूजा करते हैं, चालीसा पढ़ते हैं, और पंचाक्षरी का जप करते हैं। यदि आप दीक्षित हैं, वक्ता उत्तर देते हैं, तो प्रणव के साथ कीजिए। यदि आप दीक्षित नहीं हैं, तो प्रणव लगाए बिना शिव मंत्र का जप कीजिए।

66

लोग घर में बगलामुखी और भैरव की पूजा से क्यों डरते हैं?

इनकी पूजा वैदिक काल से है; रोज पाँच मिनट सूर्य के लिए

· 38:38–39:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इतना कुछ कहे जाने के बाद भी आज के समय में लोग घर में भगवती बगलामुखी और भगवान भैरव का पूजन करने से डरते हैं। पर सबको समझना चाहिए कि असली बात क्या है: इनके पूजन का महत्व वैदिक काल से रहा है। कम से कम इनकी इतनी पूजा हमें अवश्य करनी चाहिए — और सूर्यनारायण को पाँच मिनट अवश्य देने चाहिए।

67

क्या अनुष्ठान में होने वाली शारीरिक समस्याओं में सूर्य उपासना से राहत मिल सकती है?

त्वष्टा की कृपा, और हर प्रकार के दोष को काटने की सूर्य की शक्ति

· 39:01–40:25 · Also a question

जब पूछा गया कि मंत्र अनुष्ठान के दौरान होने वाली शारीरिक समस्याओं में क्या सूर्य उपासना से राहत मिल सकती है, तो वक्ता कहते हैं हाँ, बिलकुल मिल सकती है। सूर्यनारायण के ससुर भगवान विश्वकर्मा, जिन्हें एक रूप में त्वष्टा कहा जाता है, इसी काम के लिए हैं; और उनकी कृपा से भगवान सूर्य में यह सामर्थ्य है कि इस शरीर में जो भी कष्ट हो — दैविक, भौतिक, प्रेत या पिशाच का, ब्रह्मराक्षस का, किसी भी तरह का दोष — वे उसके माध्यम से उसे काटकर साफ कर देते हैं।

68

अप्सराएँ वास्तव में क्या हैं?

जगदंबा के रूप अप्सराएँ, समुद्र मंथन में उत्पन्न

· 40:26–40:59 · Also a question

जब पूछा गया कि अप्सरा साधना से पहले कौन-सी क्रियाएँ और साधनाएँ की जाती हैं, तो वक्ता पहले कहते हैं कि श्रोता जिस तरह इसे समझ रहे हैं, उस तरह अप्सरा साधना होती ही नहीं। वे कहते हैं कि अप्सराएँ जगदंबा का ही रूप हैं; उनकी उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय, नर और नारायण की कृपा से मानी गई है। तो ऐसी अप्सरा किसी सामान्य मनुष्य द्वारा इस तरह सिद्ध कैसे की जा सकती है?

69

क्या सामान्य व्यक्ति को अप्सरा का प्रत्यक्ष दर्शन मिल सकता है?

कृपा संभव है; माँ, बहन या पत्नी के रूप में साक्षात्कार सरल नहीं

· 41:00–41:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सामान्य मनुष्य को उनकी कृपा की प्राप्ति हो सकती है। पर जैसा लोग आज के समय में सोचते हैं — कि वह प्रकट हो जाएगी, दिव्य दृष्टि देगी, या हम उसे माँ, बहन या पत्नी के किसी रूप में साक्षात पा लेंगे — वह सामान्य मनुष्य के लिए इतना सरल नहीं है।

70

अप्सरा साधना में वास्तव में क्या प्राप्त हो सकता है?

केवल दर्शन और कृपा संभव; उससे आगे के नियम निभाए नहीं जा सकते

· 41:35–41:50 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो लोग इस साधना में केवल कृपा की प्राप्ति के लिए, केवल दर्शन के लिए सफल होते हैं — उन्हें दर्शन बिलकुल होते हैं और कृपा बिलकुल मिलती है। पर उसके अलावा बहुत सारी बातें हैं जिनके नियम सामान्य मनुष्य नहीं निभा सकता। इसलिए यह केवल और केवल कृपा की प्राप्ति के लिए है।

71

अप्सरा सिद्धि पाना आसान क्यों नहीं है?

न हलवा है, न दो मिनट की मैगी

· 41:51–42:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप अप्सरा की सिद्धि चाहते हैं, तो पहले महाशक्तियों की कृपा चाहिए। वे उन सब लोगों के नाम नहीं लेना चाहते जिनके कारण ये बातें लोगों के सामने इतनी आसानी से आईं, मानो बहुत आसान हो — एक ही रात में हो जाएगा, यह होगा, वह होगा। वे कहते हैं, यह इतना हलवा नहीं है। यह दो मिनट की मैगी नहीं है।

72

यदि अप्सरा साधना करनी हो, तो पहले क्या करना चाहिए?

पहले महादेव की उपासना, इतने मंत्र बल और तपोबल के साथ कि शक्ति को सँभाला जा सके

· 42:26–43:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली बात यह है कि यदि अप्सरा साधना करनी है, तो सबसे पहले महादेव की उपासना आती है। करोड़ों मंत्रों की उपासना की जाती है, ताकि मंत्र बल और तपोबल बहुत अधिक हो — ताकि जब वह उपस्थित हो, जब हम शक्ति साधना करें और वह प्रकट हो, तो हमारे भीतर इतनी ऊर्जा हो कि उससे उत्पन्न ऊर्जा को सँभाल सकें, और उसे देखने में समर्थ हों। भीतर इतनी दिव्यता होनी चाहिए, और वैचारिक शुद्धि होनी चाहिए।

73

यक्षिणी या अप्सरा साधना से पहले क्रोध भैरव क्यों बताए गए हैं?

क्रोध भैरव अप्सरा को नियंत्रित करते हैं, और भगवती क्रोध भैरव को

· 43:01–43:34 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसमें क्रोध भैरव की साधना अत्यंत आवश्यक हो जाती है: कहा जाता है कि क्रोध भैरव करने चाहिए, और क्रोध भैरव किए बिना यक्षिणी या अप्सरा की साधना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि क्रोध भैरव उसे नियंत्रित करते हैं। पर फिर क्रोध भैरव को कौन नियंत्रित करेगा? उनके नियंत्रण के लिए भी हमें भगवती की शरण लेनी होगी — तब भगवती की साधना चाहिए। ये एक-दूसरे से जुड़ी कड़ियाँ हैं।

74

महादेव, पार्वती और कुल की अपनी अप्सरा की पूजा किस क्रम में होनी चाहिए?

पहले महादेव और पार्वती, फिर कुल की अपनी यक्षिणी या अप्सरा

· 43:35–44:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप महादेव और भगवती पार्वती की साधना करें, तो आपको और कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। फिर भी यदि आप क्रम से चलना चाहें, तो जिस कुल में आप दीक्षित हैं, उस कुल की यक्षिणी, उसी कुल की अप्सरा जो आपके लिए उचित हो, गुरु आपको देंगे। यदि आपने, मान लीजिए, भगवती के मंत्र का 12 लाख जप किया है, तो उनसे जुड़े भैरव या महादेव के जिस भी रूप का सवा लाख होगा, और उसके बाद उस कुल के भैरव का जप — हालाँकि भैरव का जप और गणपति का जप तो पहले आते ही हैं।

75

अप्सरा साधना से पहले की तैयारी वाली उपासना कितनी लंबी होती है?

तीन से पाँच वर्ष, जब तक बुद्धि स्थिर न हो जाए और साधक अपने स्थान से न गिरे

· 44:12–44:50 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ये सब आरंभिक चीजें करवाई जाएँगी, और आपसे कम से कम तीन साल, पाँच साल उपासना करवाई जाएगी। जब आप यह सब पूरा कर लेंगे, तब आपके भीतर यह सामर्थ्य होगी कि आपके साथ कुछ गलत न हो। तब तक आपकी बुद्धि भी स्थिर हो चुकी होगी; आप डिगेंगे नहीं, यानी अपने स्थान से गिरेंगे नहीं, और आपके भीतर केवल वैचारिक शुद्धि रहेगी।

76

कुछ लोगों को अप्सरा सिद्धि आसानी से क्यों मिल जाती है?

परंपरा के किसी पूर्व गुरु का वचन से शक्ति को बाँध देना

· 44:51–45:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह भी सच है कि प्राप्ति होती है — पर कैसे? इसके पीछे कारण यह है कि ऐसा व्यक्ति जिस गुरु परंपरा में दीक्षित है, उस परंपरा के किसी साधक ने, जो उनके गुरु रहे होंगे, किसी समय उसका साक्षात्कार किया था और अपने वचन से उसे अपने कुल में, अपनी गुरु परंपरा के कुल में स्थापित किया था, यह कहकर कि मेरी गुरु परंपरा में जो भी शिष्य बनेगा, उस पर तुम कृपा करोगी। ऐसे में वह केवल दृष्टि से, शक्तिपात से सिद्धि दे सकती है। उनके लिए यह आसान हो गया — पर आपके लिए यह कभी आसान नहीं होगा, क्योंकि आप उसकी साधना स्वतंत्र रूप से कर रहे हैं।

77

विधिवत अप्सरा साधना के लिए पूरा विधान क्या है?

इंद्र और शची की उपासना, दिग्पाल पूजन और दिग्पालों का बलिदान

· 45:27–45:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके अलावा भगवान इंद्र की उपासना और भगवती शची की उपासना जरूरी हो जाती है — केवल उपासना नहीं, बल्कि पूरे विधि-विधान से उनकी संपूर्ण साधना और पूजा, दिग्पाल पूजन, दिग्पालों का बलिदान; ये सब चीजें होने के बाद ही अंत में वह साधना आती है।

इसके अलावा, वक्ता कहते हैं, भगवान इंद्र की उपासना और भगवती शची की उपासना जरूरी हो जाती है। केवल उपासना नहीं — पूरे विधि-विधान से उनकी संपूर्ण साधना और पूजा, दिग्पाल पूजन, दिग्पालों का बलिदान। ये सब चीजें होने के बाद ही, बिलकुल अंत में, वह साधना आती है।

78

क्या अच्छी पत्नी के संकल्प से अप्सरा साधना की जा सकती है?

साधना के मार्ग पर चलने वाली जीवनसंगिनी का संकल्प

· 45:41–45:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सामान्य रूप से, यदि आप अपने जीवन में चाहते हैं — जैसे प्रश्नकर्ता के मामले में — कि आपको एक सुंदर और अच्छी धर्मपत्नी मिले, साधना के मार्ग पर चलने वाली जीवनसंगिनी, तो यदि आप उसके लिए संकल्प लेकर अप्सरा साधना करें, तो वह कृपा होगी। कृपा की प्राप्ति में कोई कठिनाई बिलकुल नहीं है।

79

अप्सरा के युवती रूप में प्रकट होकर धन देने की तंत्र-कथा वाली अपेक्षा को नकारा गया है।

तंत्र कथाओं वाली अपेक्षाओं की पुष्टि से इनकार

· 46:00–46:23

वक्ता कहते हैं कि पर यदि आप साक्षात प्रकट होने और इन सब बातों की सोच रहे हैं — कि वह युवती के रूप में आएगी, और जो आपने तंत्र कथाओं में पढ़ा है, कि वह धन देगी, संपत्ति देगी, प्रेमिका बनेगी — तो उन गढ़ी हुई कहानियों को सुनकर आपकी सोच पहले ही बिगड़ चुकी है। इतनी सामर्थ्य नहीं होती। बोलने को तो हम भी कुछ भी कह सकते हैं, क्योंकि आप में से कौन देखने आ रहा है — पर वे कहते हैं, हम आपको भ्रमित नहीं कर सकते; क्षमा करें।

80

पहले किया हुआ पूजा विधान फिर से शुरू किया जा सकता है, या भगवती शाकंभरी की पूजा की जा सकती है।

पहले की हुई साधना दोहराना, या भगवती शाकंभरी

· 46:24–46:51

जब पूछा गया कि 30 दिसंबर से आने वाले नवरात्र के लिए कोई पूजा विधान है क्या, तो वक्ता कहते हैं हाँ — जो पूजा विधान आप पहले कर चुके हैं, जिसे वे बार-बार दोहराते रहते हैं, उसे आप उस समय फिर से शुरू कर सकते हैं। भगवती की कोई भी साधना या भैरव जी की कोई भी साधना जो आपने पहले की है, वह आप शाकंभरी नवरात्र में कर सकते हैं, या भगवती शाकंभरी की उपासना भी कर सकते हैं। मकर संक्रांति के लिए वे अलग से कुछ देंगे, और एक दिन की साधना बताएँगे।

81

भैरव जी के स्मरण के लिए कौन-सा मंत्र उपयोग करें?

ध्यान मंत्र, बटुकनाथ वाला श्लोक, और दस नाम

· 46:52–47:27 · Also a question

जब पूछा गया कि भैरव जी के स्मरण के लिए कौन-सा मंत्र उपयोग करें, तो वक्ता कहते हैं कि उनका ध्यान मंत्र — "करकलितकपालः कुण्डली दण्डपाणिः" — उपयोग करें और उसी से उनका स्मरण करें। या यह मंत्र उपयोग करें: "क्रतुसमयसपर्याविघ्नविच्छेदहेतुर्जयति बटुकनाथः सिद्धिदः साधकानाम्"। या उनके दस नाम बोलें: "कपाली कुण्डली भीमो भैरवो भीमविक्रमः"।

82

क्या काली हृदय स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है?

हृदय यानी सबसे निकट, इसलिए अनुभव उग्र होगा

· 47:28–47:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि काली हृदय स्तोत्र किया जा सकता है, पर वे चेताते हैं: हृदय का अर्थ है सबसे निकट, इसलिए यदि आप इसे करेंगे तो अनुभव कुछ विकट और विकराल होगा। यदि आप शिव पूजन अच्छी तरह करते हैं, तो शिव पूजन करते हुए इसे करें — शायद प्रश्नकर्ता शिव पूजन और उनका अभिषेक अच्छी तरह करते भी हैं। यदि करना चाहें, तो काली मंदिर में ही करें, और अधिक मात्रा में न करें।

83

क्या दैनिक साधना में दुर्गा वज्र पंजर किया जा सकता है?

नित्य साधना में वज्र पंजर की अनुमति

· 47:57–48:08 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या दैनिक साधना में दुर्गा का वज्र पंजर किया जा सकता है, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि किया जा सकता है।

जब पूछा गया कि क्या दैनिक साधना में दुर्गा का वज्र पंजर किया जा सकता है, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि आप कर सकते हैं।

84

क्या कभी डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है?

केवल कार्तिक शुक्ल षष्ठी, सूर्य षष्ठी पर

· 48:09–48:43 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है, तो वक्ता कहते हैं कि कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को — जिसे हम सूर्य षष्ठी के रूप में मनाते हैं, जिसमें भगवती छठी मैया का पूजन होता है — केवल उसी में डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

जब पूछा गया कि क्या डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है, तो वक्ता उत्तर देते हैं: कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को, जिसे हम सूर्य षष्ठी के रूप में मनाते हैं, जिसमें भगवती छठी मैया का पूजन होता है। केवल उसी में, और सिर्फ उसी में, डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

85

क्या मोबाइल फोन से पाठ पढ़ना ठीक है?

जानकारी के लिए ठीक, फल के लिए नहीं

· 48:44–48:53 · Also a question

मोबाइल से पढ़ने के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि वैसे कोई कठिनाई नहीं है: यदि आप जानकारी के लिए पढ़ रहे हैं, तो बात अलग है — पर यदि आप फल की प्राप्ति चाहते हैं, तो उसके लिए विधि-विधान से पढ़ना चाहिए।

मोबाइल फोन से पढ़ने के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि ऐसी कोई कठिनाई नहीं है। यदि आप जानकारी के लिए पढ़ रहे हैं, तो बात अलग है। पर यदि आप फल की प्राप्ति चाहते हैं, तो उसके लिए विधि-विधान से पढ़ना चाहिए।

86

सपने में काली गायत्री मंत्र सुनाई देने का क्या अर्थ है?

संकेत कि साधनाएँ फल दे रही हैं

· 48:54–49:12 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उन्हें सपनों में काली गायत्री मंत्र आधा-अधूरा सुनाई देता है, कानों में बहुत तेज आवाज में गूँजता है, और पूछते हैं ऐसा क्यों। वक्ता उत्तर देते हैं कि आपकी साधनाएँ फल दे रही हैं; भगवती की कृपा आ रही है। यदि आपको भगवती का गायत्री मंत्र सुनाई दे रहा है, और वह भी भगवती काली का, तो यह अच्छा है — यह बहुत शुभ संकेत है।

87

रोज का अर्घ्य बैठकर देना चाहिए या खड़े होकर?

खड़े होकर, और स्वयं सूर्यनारायण के सामने

· 49:13–49:20 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या नित्य पूजा में सूर्यनारायण को अर्घ्य बैठकर देना चाहिए, तो वक्ता कहते हैं नहीं — खड़े होकर, और सूर्यनारायण के सामने जाकर देना चाहिए।

जब पूछा गया कि क्या नित्य पूजा में सूर्यनारायण को अर्घ्य बैठकर देना चाहिए, तो वक्ता उत्तर देते हैं: नहीं, खड़े होकर देना चाहिए, और सूर्यनारायण के सामने जाकर।

88

सूर्य हवन सुबह होता है या शाम को?

केवल सुबह, जैसे हर सूर्य पूजन

· 49:21–49:58 · Also a question

जब पूछा गया कि सूर्यदेव का हवन सुबह होता है या शाम को भी किया जा सकता है, तो वक्ता कहते हैं कि केवल सुबह करें — जो भी सूर्य पूजन करना है, वह बिलकुल सुबह-सुबह ही है।

जब पूछा गया कि सूर्यदेव का हवन सुबह किया जाता है या शाम को भी किया जा सकता है, तो वक्ता उत्तर देते हैं: केवल सुबह कीजिए। जो भी सूर्य पूजन करना है, वह बिलकुल सुबह-सुबह ही किया जाता है।

89

किस तिथि पर रात में हवन नहीं करना चाहिए?

तय साप्ताहिक या मासिक हवन में अग्निवास देखने की जरूरत नहीं

· 49:59–50:29 · Also a question

वक्ता वही बात दोहराते हैं जो वे बार-बार कहते हैं: यदि आप साप्ताहिक हवन कर रहे हैं — जैसे हर मंगलवार हवन करते हैं — तो कोई तिथि या नक्षत्र देखने की जरूरत नहीं; कीजिए। यदि आप मासिक हवन करते हैं, जैसे अमावस्या, पूर्णिमा या अष्टमी पर, जो भी एक तिथि आपका नियम है, वहाँ भी कुछ देखने की जरूरत नहीं। पर यदि आप किसी और तिथि पर कर रहे हैं, तो करने से पहले अग्निवास आदि देखना चाहिए। पर्व काल में अग्निवास देखने की जरूरत नहीं है।

90

किसी दिवंगत संबंधी की मुक्ति और शांति के लिए क्या करना चाहिए?

परंपरा की विधि, और सूतक भर गीता का सातवाँ अध्याय

· 50:30–50:51 · Also a question

जब पूछा गया कि दिवंगत हुई चाची की मुक्ति और शांति के लिए क्या करें, तो वक्ता कहते हैं कि परंपरा में जो विधि-विधान है, वह अवश्य करना चाहिए, और उसके साथ श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करवाना चाहिए। और यदि पाठ करवा न सकें, तो जब तक सूतक-पातक लगा है, पूरे समय स्वयं सातवें अध्याय का पाठ करें।

91

क्या किसी मित्र का अप्सरा साधना सिद्ध करने जाना उचित है?

पहले की चर्चा का हवाला; उचित निर्णय लेना है

· 50:52–51:07 · Also a question

एक परिचित के बारे में पूछा गया, जिन्होंने एक मंत्र साधना पूरी की है और अब उसे सिद्ध करने के लिए अप्सरा साधना करने जाने की योजना बना रहे हैं, और क्या अप्सरा साधना करना उचित है। वक्ता कहते हैं कि इस विषय पर उन्होंने अभी पहले चर्चा की है — वह व्यक्ति उचित निर्णय लेकर जा सकता है।

एक श्रोता कहते हैं कि उनके एक परिचित ने एक मंत्र साधना पूरी की है और अब उसे सिद्ध करने के लिए अप्सरा साधना करने जाने की योजना बना रहे हैं, और पूछते हैं कि क्या अप्सरा साधना करना उचित है। इस विषय पर हमने अभी-अभी चर्चा की है, वक्ता उत्तर देते हैं। उचित निर्णय लेकर वे जा सकते हैं।

92

चाक्षुषी विद्या दी जाएगी, जब उसे चाहने का उद्देश्य बताया जाए।

दी जाएगी, पर पहले उद्देश्य बताना होगा

· 51:08–51:36

जब चाक्षुषी विद्या का, और बसंत पंचमी के लिए भगवती सरस्वती के बारह नाम वाले स्तोत्र का विधान देने को कहा गया, तो वक्ता कहते हैं कि चाक्षुषी विद्या दी जाएगी, पर एक बार उद्देश्य बताया जाए — उस उद्देश्य के अनुसार वे फिर बताएँगे।

एक श्रोता अनुरोध करते हैं कि चाक्षुषी विद्या का, और बसंत पंचमी के लिए भगवती सरस्वती के बारह नाम वाले स्तोत्र का विधान अवश्य दिया जाए। ठीक है, वक्ता कहते हैं: चाक्षुषी विद्या तो दी जाएगी। पर एक बार बताइए कि उद्देश्य क्या होगा, और फिर उस उद्देश्य के अनुसार हम उसी में बताएँगे।

93

विवाह के विषय में साधक को भगवती से क्या प्रार्थना करनी चाहिए?

साधना और पूजा में सहायक अच्छी धर्मपत्नी

· 51:37–52:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो साधक हैं, उन्हें भगवती से अवश्य प्रार्थना करनी चाहिए कि उन्हें ऐसी अच्छी धर्मपत्नी मिले जो साधना और पूजा में उनकी सहायता करे। वरना आप कितनी भी साधना और आराधना करें, यदि ऐसी मिली जो केवल सोती रहे, तो अगरबत्ती, धूप और दीप भूल जाइए — वह अपनी ही पूजा करवाएगी और अपनी ही आरती उतरवाएगी, और कठिनाई खड़ी होगी।

94

शिष्य को सपनों में गुरु का अनुभव क्यों होता है?

गुरु साधना का प्रभाव और भगवान दत्त की कृपा

· 52:24–52:35 · Also a question

एक श्रोता, जो लिखते हैं कि उन्हें कई बार सपनों में वक्ता का अनुभव होता है, उन्हें वक्ता उत्तर देते हैं कि यह उनकी की हुई गुरु साधना के प्रभाव से, और भगवान दत्त की कृपा से, अनुभव हो रहा है — वे कहते हैं, हमारी क्या सामर्थ्य है?

एक श्रोता लिखते हैं कि उन्हें कई बार अपने सपनों में वक्ता का अनुभव होता है। आपने जो गुरु साधना की है, उसके प्रभाव से, और भगवान दत्तात्रेय की कृपा से, आपको यह अनुभव हो रहा है, वक्ता उत्तर देते हैं। हमारी भला क्या सामर्थ्य है?

95

कालका जी जाते समय क्या ले जाना चाहिए?

गुलाब और गुड़हल की मालाएँ, चुनरी और भोग, और शनिवार हो तो नींबू की माला

· 52:36–54:03 · Also a question

जब पूछा गया कि 24 दिसंबर को कालका जी जाते समय क्या ले जाएँ, तो वक्ता कहते हैं कि भगवती के श्रृंगार पूजन के लिए मिल सके तो गुलाब का फूल और गुड़हल के फूलों की माला, चुनरी और श्रृंगार का वस्त्र, और वहाँ जो भी भोग चढ़ता है, वह ले जाना चाहिए। और यदि 24 दिसंबर को शनिवार पड़ रहा हो, तो अपने हाथ से नींबू की माला बनाएँ — 27 नींबू की, या 54, या 108, जितनी संभव हो — बीच-बीच में गेंदे के फूल डालकर, ताकि वह और सुंदर और आकर्षक लगे। पुजारी उसे पहना देंगे, और जब तक वह भगवती के गले में रहेगी, आपको विशेष कृपा मिलेगी।

96

क्या भागवत और शिव महापुराण के पाठ से कष्ट दूर होते हैं?

पुराणों की फलश्रुति और रोज एक अध्याय का नियम

· 54:04–54:32 · Also a question

जब पूछा गया कि क्या श्रीमद्भागवत कथा और श्री शिव महापुराण के पाठ से कष्ट कटते हैं, तो वक्ता कहते हैं कि बिलकुल कटते हैं। पुराणों में लिखी फलश्रुति देखिए, वे कहते हैं — अनंत गुना पुण्य मिलता है; बस उसे उचित तरीके से, विधि-विधान से करना चाहिए। पर उचित तरीके का अर्थ यह नहीं कि आप पानी छोड़ दें: सुबह स्नान करके, भगवान के सामने आसन पर बैठकर, यदि आप रोज एक अध्याय भी पढ़ें, तो आपको और किसी चीज की विशेष जरूरत नहीं होगी।

97

शिव महापुराण के पारायण की योजना कैसे बनाएँ?

पूरे पुराण के बजाय एक समय में एक संहिता

· 54:33–55:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसका पारायण किया जाता है — कि हम इतने दिनों में शिव महापुराण का पूरा पाठ पूरा करेंगे, या कि पूरे जीवन में इसे बारह बार या ग्यारह बार करेंगे; इसे इसी तरह धीरे-धीरे करना चाहिए, यह देखते हुए कि आपको कितना समय लगता है। इसमें संहिताएँ हैं: देखिए एक संहिता पूरी करने में आपको कितने दिन लगेंगे, और उसी हिसाब से कीजिए। और यदि आप केवल एक संहिता का पाठ करना चाहें, तो वायु संहिता कीजिए, या रुद्र संहिता — कि हम रुद्र संहिता का ही अनुष्ठान बार-बार करेंगे। पूरे पुराण का पाठ करना जरूरी नहीं है।

98

शेषनाग और बैद्यनाथ धाम का पंचशूल अलग वीडियो के लिए टाल दिए गए हैं।

अलग वीडियो के लिए टाले गए विषय

· 55:13–56:45

जब भगवान शेषनाग और उनकी शक्ति के बारे में बताने को कहा गया, तो वक्ता कहते हैं कि शेषनाग के बारे में वे अलग से बताएँगे। जब पूछा गया कि वे कहाँ से हैं, तो वे कहते हैं बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर। पंचशूल के बारे में वे कहते हैं कि उन्होंने पहले पूरी बात फेसबुक पर डाली थी और लिखी थी, पर कॉपी-पेस्ट और झगड़े के कारण उसे हटाना पड़ा; वे फिर से वीडियो बनाकर बताएँगे कि बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर खड़े पंचशूल का रहस्य क्या है, और बैद्यनाथ धाम में त्रिशूल नहीं, पंचशूल क्यों है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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