दीपावली की पाँच रातें — गृहस्थ के लिए अभिचार, रक्षा और सिद्धि

दीपावली की पाँच रातों के रक्षात्मक उपाय।

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01

पाँच दिन के दीपावली महापर्व को अत्यंत महत्वपूर्ण क्यों कहा गया है?

दीपावली का पाँच दिवसीय महापर्व

· 00:51–01:00 · Also a question

पाँच दिन का दीपावली महापर्व, जो अगले दिन से शुरू होता है। वक्ता इस विषय को अत्यंत महत्वपूर्ण कहते हैं, क्योंकि जिन पर महाकाल रात्रि की इन पाँच रातों का नकारात्मक असर पड़ता है, वे जानते हैं कि उसका परिणाम क्या होता है।

वक्ता कहते हैं कि आज का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि कल से दीपावली का पाँच दिवसीय महापर्व शुरू हो रहा है। वे कहते हैं, मानें या न मानें, जिन लोगों पर महाकाल रात्रि के इस पाँच दिन के पर्व का नकारात्मक असर पड़ता है, वे भली-भाँति जानते हैं कि उसका परिणाम क्या होता है।

02

किन पर्व कालों को कभी खाली नहीं जाने देना चाहिए?

सबसे प्रमुख पर्व काल के रूप में दीपावली

· 01:01–01:25 · Also a question

साल में कुछ पर्व काल ऐसे होते हैं जिन्हें कभी खाली नहीं जाने देना चाहिए, और उनमें दीपावली सबसे प्रमुख है।

वक्ता कहते हैं कि साल में कुछ पर्व काल ऐसे हैं जिन्हें कभी खाली नहीं जाने देना चाहिए। इनमें दीपावली सबसे प्रमुख है।

03

सनातन धर्म में जन्म साधना के लिए क्यों है, केवल भोग के लिए क्यों नहीं?

कर्तव्य कर्म से बँधा भोग

· 01:26–02:07 · Also a question

वे कहते हैं कि यह बात पूरी तरह ध्यान में रखनी चाहिए कि यदि हमारा जन्म सनातन धर्म में हुआ है, तो साधनाओं के लिए हुआ है। यदि केवल भोग के लिए होता, तो ऐसे बहुत से स्थान और देश हैं जहाँ भोग की भरमार और प्रधानता है।

04

कर्तव्य को खोखला मानकर छोड़ देना व्यक्ति को अपनी ही दुर्गति का कारण बना देता है — अभिचारिक दोष, दंड और शत्रु इसके रूप हैं, जो वरदान भी बन सकते हैं।

अपनी ही दुर्गति का कारण बनना

· 02:08–02:47

वक्ता कहते हैं कि यह विषय आपके सामने बार-बार आता रहेगा; जब आप यह कहकर उसे छोड़ देते हैं कि इसमें कुछ नहीं है, तो आप स्वयं अपनी दुर्गति का कारण बन जाते हैं। इसका एक रूप अभिचारिक दोष, अभिचारिक दंड और अभिचारिक शत्रु है, जो उनके अनुसार वरदान भी साबित हो सकता है।

05

किन दो पर्वों में सबसे अधिक तांत्रिक प्रहार होते हैं?

अभिचारिक आक्रमण के समय के रूप में होली और दीपावली

· 02:48–03:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि होली और दीपावली वे दो पर्व काल हैं जिनमें सबसे निकृष्ट विद्याओं का प्रयोग करके तांत्रिक प्रहार करने का सबसे अधिक प्रयास होता है। ऐसे समय में अकाल मृत्यु के मामलों में — दुर्घटना से मृत्यु या ऐसी ही कोई बात, जैसे ग्रहण के समय — लगभग हमेशा कहीं न कहीं अभिचारिक उपस्थिति होती है।

06

घर-परिवार प्रायः समय रहते अभिचार को क्यों नहीं पहचान पाता?

देर से स्वीकार करना, और कुल में जन्मा साधक

· 03:26–04:00 · Also a question

बहुत कम लोग विपत्ति को उसके असली रूप में स्वीकार करते हैं; वे बर्बाद होते रहते हैं, और बहुत समय बाद जाकर बात साफ होती है — तब तक वह चीज अपनी जड़ें फैला चुकी होती है। यदि किसी भी कारण से कुल में कोई साधक जन्म ले और इन सब बातों के प्रति जागरूक हो, तो आगे की पीढ़ियाँ सुरक्षित हो सकती हैं।

07

क्या साधना केवल इसलिए करनी चाहिए कि अभिचार हुआ है?

आक्रमण पर अटकने के बजाय पर्व कालों और तीर्थों का लाभ लेना

· 04:01–04:32 · Also a question

नहीं। वक्ता कहते हैं कि यदि आप किसी भी कारण से इन विषयों के प्रति सजग हैं, तो यह न सोचें कि साधना केवल इसलिए करनी है कि आप पर अभिचार हुआ है। अभिचार जितना पुराना और मजबूत हो और आप जितने नए हों, उतना अधिक समय लगता है — पर इन दिव्य समयों का, पर्व कालों का और तीर्थ स्थानों का लाभ लें, तो वे चीजें टूटकर हट जाएँगी।

08

माया और परीक्षा सबके पास क्यों आती हैं?

आराध्य के चरणों के प्रति अनुशासन

· 04:33–05:09 · Also a question

वे कहते हैं कि माया सबके साथ है, परीक्षाएँ सबकी होती हैं, और व्यक्ति को तोड़ने की व्यवस्था पूरी है। जब तक हम अपने आराध्य के चरणों के प्रति अनुशासन में कठोर नहीं होते, माया हम पर काम करती रहती है और हम पीछे हटते रहते हैं; पर एक बार वह स्थान मिल जाए और देव कृपा आ जाए, तो इन सबसे निकलने के बहुत अवसर आते हैं, और बहुत सहजता से।

09

साधक को समाज में कैसे रहना चाहिए?

स्वयं को शून्य रखना, द्वेष से दूर रहना

· 05:10–05:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उस स्तर की देव कृपा के लिए सेवा में शरीर को घिसना पड़ता है। यदि आप साधक हैं, तो समाज के बीच स्वयं को शून्य रखें और द्वेष की स्थिति में न पड़ें। आप जितना कटे रहेंगे, उतना अपने आराध्य के चरणों से जुड़े रहेंगे; समाज से जितना जुड़े रहेंगे, उन चरणों से उतना कटे रहेंगे।

10

अच्छे लोगों में भी द्वेष क्यों उठता है?

कलिकाल, और क्षणिक तथा वास्तविक देव कृपा का अंतर

· 05:54–06:36 · Also a question

आप कितने भी अच्छे हों, द्वेष आता है, क्योंकि यह कलिकाल है; जो विषय नहीं उठने चाहिए वे मन में आते हैं और पतन का कारण बनते हैं। यदि आपको केवल क्षणिक कृपा या किसी एक काम की सिद्धि चाहिए, तो बात अलग है — सामान्य जीवन जिएँ और जन्म लेते रहें। पर वास्तविक देव कृपा के लिए हृदय, मन और विचारों पर नियंत्रण करना पड़ता है।

11

अभिचार के कारण साधना में आए व्यक्ति के लिए माया के दो प्रकार कौन से हैं?

स्वयं अपना गुरु बन जाने की बीच की अवस्था

· 06:37–07:32 · Also a question

पहला यह कि शरीर और परिवार पर अभिचार था, कोई उसे हटा नहीं सका, तो व्यक्ति स्वयं साधक बना, विधि विधान से मेहनत की और देव कृपा पाई। दूसरा बीच की अवस्था है: उसके बाद आने वाली परीक्षा में असफल होना, अपनी समस्या हल न कर पाना, पर इतना ज्ञान पा लेना कि दूसरों को सलाह देने लगे और स्वयं गुरु बन जाए — जिसे वक्ता ऐसा प्रारब्ध कहते हैं जो आपका भला नहीं चाहता।

12

बीच की अवस्था से आगे, गुरु कृपा के साथ देव सेवा में रहकर और गुरु आदेश पर चलकर अभिचार का असली रूप दिखता है — और साधक के लिए यह बहुत लाभकारी है।

गुरु आदेश में रहते हुए देव सेवा में बने रहना

· 07:33–08:03

उस बीच की अवस्था से आगे निकलकर सही अवस्था में पहुँचना, जहाँ आप अपने देवता की सेवा में रहते हैं, गुरु कृपा पाते हैं और गुरु आदेश पर चलते हैं — तब बात अलग है। अपने ऊपर बहुत बोझ नहीं लेना चाहिए। उसी अवस्था तक जाना है, और तब अभिचार का असर उसके असली रूप में दिखता है: साधकों के लिए यह बहुत लाभकारी है।

13

देवता साधक के जीवन में पिशाच को क्यों आने देते हैं?

साधक की क्षमता के अनुसार बाधा की शक्ति

· 08:04–08:48 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब तक कोई भूत आपके कान में न बोले, आप उग्र साधना करेंगे ही नहीं। जिसे कोई बाधा नहीं, वह कभी हनुमान जी की साधना नहीं करेगा, न उन्हें समझेगा। देवताओं में भूत-प्रेत को रोकने की शक्ति अवश्य है, पर वे चाहते हैं कि आप सक्षम बनें, इसलिए वे उन्हें आपके जीवन में लाते हैं — और आपमें जितना उग्र साधक बनने की क्षमता है, उतना ही उग्र पिशाच आपके जीवन में आता है।

14

जीवित मनुष्यों में क्षमता की कमी नहीं: अभिचार से टूटा शरीर ठीक हो सकता है और एक स्तर तक पहुँचा जा सकता है, यदि साधना की जाए।

अभिचार से टूटा शरीर ठीक हो सकता है

· 08:49–09:25

वक्ता कहते हैं कि हम जीवित मनुष्यों में क्षमता की कोई कमी नहीं है। हाँ, अभिचार के कारण शरीर टूटा हुआ है और अभी उतनी शक्ति नहीं है — पर यह ठीक हो सकता है, और यदि आप साधना करें तो एक स्तर तक पहुँचा जा सकता है।

वक्ता कहते हैं कि हममें, जीवित मनुष्यों में, क्षमता की कोई कमी नहीं है। हाँ — अभिचार के कारण हमारा शरीर टूटा हुआ है, और अभी हममें उतनी शक्ति नहीं है। पर यह ठीक हो सकता है। एक स्तर तक पहुँचा जा सकता है, यदि आप साधना करें।

15

वर्षों की साधना के बाद भी शत्रु में कोई नुकसान क्यों नहीं दिखता?

पीछे से चिथड़े-चिथड़े हुआ शत्रु

· 09:26–09:59 · Also a question

वक्ता इसकी तुलना साउथ इंडियन फिल्मों से करते हैं: सामने से पूरा गेटअप, पर पीछे से व्यक्ति के चिथड़े उड़े हुए। तंत्र में प्रायः आपके शत्रुओं की यही हालत होती है। आप साल-दो साल एक के बाद एक पुरश्चरण करते हैं और सोचते हैं कि शत्रु को छींक तक नहीं आई — पर वह दिखा नहीं रहा; उसके चिथड़े उड़ रहे हैं। क्योंकि वह पहले बहुत शक्तिशाली था, इसलिए अभी वह सामने से स्वयं को जाहिर नहीं करता।

16

एक आगंतुक को नया iPhone संभालकर पकड़ने की बात बुरी लगी, वह "रखो, तुम्हारे पास बहुत है" कहकर चला गया — और परिवार की बर्बादी एक-दो साल चली, तब जाकर उसका स्रोत दिखा।

iPhone वाली घटना

· 10:47–11:53

वक्ता अपने सामने हुई एक घटना सुनाते हैं, उन दिनों की जब iPhone 7 या 8 नया था। एक संपन्न व्यक्ति ने अपने बेटे को iPhone दिलाया था; एक बहुत ईर्ष्यालु आगंतुक ने उसे देखने को माँगा, और लड़के ने कहा कि ऐसे मत पकड़िए क्योंकि प्रोटेक्टर महँगा है और मुश्किल से मिलता है। इतनी छोटी बात पर आगंतुक को इतना बुरा लगा कि उसने कहा "रखो, तुम्हारे पास बहुत है" और चला गया — और परिवार की बर्बादी शुरू हुई, जो कम से कम एक-दो साल चली, जब तक सबको समझ नहीं आ गया कि यह कहाँ से आ रहा है।

17

अभिचार करने वाले शक्तिशाली शत्रु से व्यक्ति की रक्षा क्या करता है?

धर्मयुक्त जीवन

· 11:54–12:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आपका शत्रु कितना भी शक्तिशाली हो और आप पर कितना भी अभिचार करे, यदि आप धर्म के साथ चल रहे हैं तो देव शक्तियाँ कहीं न कहीं आप पर कृपा करेंगी और आपको सक्षम बनाएँगी।

वक्ता कहते हैं कि यह ध्यान रखें: आपका शत्रु कितना भी सक्षम हो, और आप पर कितना भी अभिचार करे, यदि आप धर्म से जुड़कर चल रहे हैं तो कहीं न कहीं देव शक्तियाँ आप पर कृपा करेंगी और आपको सक्षम बनाएँगी।

18

कुछ लोग सुने हुए प्रयोग कभी कर क्यों नहीं पाते?

अंतिम क्षण में सुनने वाले को भटका देने वाला प्रारब्ध

· 12:05–12:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिनके भाग्य में होगा, वही वे बातें सुनेंगे, हृदय में थोड़ा बल लाएँगे और सच में करेंगे। यदि प्रारब्ध चाहता है कि आप न कर पाएँ, तो आप सामग्री जुटा लेंगे, पर उसी समय YouTube पर कोई वीडियो आ जाएगा जिसे देखकर आप कहेंगे कि इतना करने की जरूरत नहीं, बस यह कर लो — और आप वह काम नहीं करेंगे।

19

जिसने कुछ अनुष्ठान किए हैं उसके लिए यह शुरुआती स्तर की बात है, फिर भी दोनों उद्देश्यों के लिए दिव्य है — शत्रुओं का नाश, और धर्म, अर्थ तथा लक्ष्मी की प्राप्ति।

शुरुआती अवस्था का प्रयोग, शत्रु नाश और लक्ष्मी दोनों के लिए दिव्य

· 12:37–12:57

वे कहते हैं कि यह पूरी तरह शुरुआती विषय है — जो योग में गया है, प्रयोग में पारंपरिक बातों में गया है, और कुछ अनुष्ठान कर चुका है, उसके लिए यह बिल्कुल शुरुआती स्तर की बात है। पर यह दोनों उद्देश्यों के लिए बहुत दिव्य है: शत्रुओं के नाश के लिए, और धर्म और अर्थ की प्राप्ति के लिए, और लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए।

20

कष्ट खत्म होने के बाद व्यक्ति देवताओं को भूल जाए तो क्या होता है?

फल गँवाने के बाद लौटता देव कोप

· 12:58–13:34 · Also a question

देवता आपको सक्षम बनाते हैं, विवेकी बनाते हैं, अभिचारिक अवस्था से निकालते हैं और जब तक आप धर्म के मार्ग पर चलते हैं तब तक सक्षम रखते हैं। पर यदि बाधा मिटते ही आप भोग में लग जाएँ, देवताओं को भूल जाएँ, धर्म के मार्ग से गिरने लगें और जो कुछ देव कृपा से, अपनी साधना से और अपने तपोबल से मिला उसे गँवाने लगें, तो वही दंड फिर आता है और आपको फिर देव कोप का पात्र बनना पड़ता है।

21

दीपावली के समय में पहला कर्तव्य क्या है?

अपनी और परिवार की रक्षा की व्यवस्था

· 13:35–14:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले अपनी और अपने परिवार की रक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। यही सबसे पहला कर्तव्य है, और इसी कारण वे हमेशा कहते हैं कि एक रक्षात्मक अनुष्ठान अवश्य करना चाहिए और जीवन में बनाए रखना चाहिए।

22

जिसने कुछ भी नहीं किया, उसके लिए भी दीपावली की पाँच रातों में क्या विशेष है?

ऊर्जा अपने सबसे ऊँचे स्तर पर, इसलिए सिद्धि जल्दी मिलती है

· 14:06–14:37 · Also a question

मान लें कि आपने रक्षा के लिए कोई अनुष्ठान नहीं किया, कोई कवच नहीं, कुछ भी नहीं, और अभिचार पहले से मौजूद है — तब भी दीपावली की इन पाँच रातों में शक्ति, ऊर्जा, चाहे नकारात्मक हो या सकारात्मक, अपने सबसे ऊँचे स्तर पर रहती है। इसी कारण कहा जाता है कि इस काल में सिद्धि जल्दी मिलती है।

23

सबसे पहले कुल पितरों को अनुकूल किया जाता है — जो कभी त्रिपिंडी, गीता या पंचबलि नहीं करते उनके लिए कठिन, पर इन पाँच दिनों में विशेष रूप से करना चाहिए।

कुल पितर

· 14:38–15:02

सबसे पहले कुल पितरों के लिए — कुल पितरों को अपने अनुकूल करना चाहिए। जो कभी त्रिपिंडी नहीं करते, कभी भगवद्गीता नहीं पढ़ते, कभी पंचबलि नहीं करते, कभी कुछ नहीं करते, उनके लिए यह थोड़ा कठिन है; पर इन पाँच दिनों में विशेष रूप से कुल पितरों के लिए यह करना चाहिए।

24

इन पाँच दिनों में गौशाला में या गायों के लिए क्या करना चाहिए?

दीप प्रज्वलन, गुग्गुल धूनी और गौ पूजन

· 15:03–15:49 · Also a question

यदि पास में या घर में गौशाला है, तो वहाँ दीपक जलाएँ, गुग्गुल की धूनी दें और गौ पूजन करें। यदि पास में गौशाला या गाय नहीं है, तो कम से कम पास में जो भी गौ माता मिले, उसे इन पाँच दिनों में अपने घर में बना बिल्कुल ताजा नैवेद्य अपनी क्षमता के अनुसार खिलाएँ; और मुख्य द्वार पर, यदि संभव हो, गोबर के उपले पर धूनी दें — सुबह और शाम।

25

मुख्य द्वार पर कितने दीपक जलाने चाहिए?

कम से कम दो, हालत गंभीर हो तो पाँच

· 15:50–16:06 · Also a question

दूसरा काम: यदि अभिचार की अवस्था है तो इसे अवश्य करें; यदि नहीं है, तो रक्षा के लिए सामान्य रूप से करें। मुख्य द्वार पर पाँच दीपक जलाने चाहिए — कम से कम दो, और यदि हालत बहुत बढ़ी हुई है तो पाँच।

वक्ता कहते हैं कि दूसरा काम: यदि अभिचार की अवस्था है तो इसे अवश्य करें; यदि नहीं है, तो रक्षा के लिए सामान्य रूप से करें। मुख्य द्वार पर पाँच दीपक जलाने चाहिए। कम से कम दो, और यदि हालत बहुत गंभीर है, तो पाँच।

26

जब बाधा के बारे में कुछ भी पता न हो, तब कौन सा दीपक सबसे अच्छा है?

सरसों के तेल और पाँच बत्तियों वाला सूखे गोबर का दीपक

· 16:07–16:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबसे अच्छा उस स्थिति के लिए है जहाँ हमने कभी कुछ नहीं किया, अभिचार की अवस्था है, और हमें यह भी नहीं पता कि घर में देवी-देवता हैं, या भूत-प्रेत, या अभिचार, या पितर — कौन है, क्या है। उस अवस्था में पहले से गोबर सुखा लें, उससे दीपक बनाकर सूखने दें, उसमें सरसों का तेल और पाँच बत्तियाँ डालें, और अपने मुख्य द्वार के दोनों ओर जलाएँ।

27

जहाँ गोबर न मिले, वहाँ गोमूत्र और गंगाजल मिली भारत की मिट्टी से दीपक बनता है — कच्चा, पक्का कभी नहीं, और ऐसे दो दीपक जलाए जाते हैं।

गोमूत्र और गंगाजल मिली भारत की मिट्टी से बना कच्चा दीपक

· 16:34–17:02

यदि आप ऐसी जगह हैं या विदेश में हैं और गोबर नहीं मिल सकता, तो गोमूत्र की व्यवस्था करें। और भारत भूमि की कुछ मिट्टी, जरूरत हो तो ऑनलाइन, मँगा लें — पवित्र मिट्टी, गंगा क्षेत्र आदि की — और उस मिट्टी में गोमूत्र, गंगाजल आदि मिलाकर उसी से दीपक बनाएँ। वह कच्चा दीपक हो, पक्का नहीं। ऐसे दो दीपक जलाएँ।

28

एक दीपक कुल भैरव के लिए — नाम न पता हो तो बटुक भैरव — और एक भगवान नरसिंह के लिए, इतना गहरा कि तीन-चार घंटे जले, पाँच पतली बत्तियाँ मिलाकर एक ही लौ।

कुल भैरव और भगवान नरसिंह, पाँच पतली बत्तियों की एक लौ

· 17:03–17:30

एक दीपक आपके कुल भैरव के नाम से — और यदि आपको अपने कुल भैरव का नाम नहीं पता, तो कोई कठिनाई नहीं, तब बटुक भैरव जी के नाम से — और दूसरा भगवान नरसिंह के नाम से। दीपक इतना गहरा और इतना बड़ा हो कि कम से कम तीन-चार घंटे जल सके। पाँच पतली बत्तियाँ मिलाकर एक ही लौ बनाई जाती है; पाँच अलग लौ नहीं जलानी हैं।

29

द्वार के दीपक कब जलाने चाहिए और उनका मुख किस ओर होना चाहिए?

गोधूलि में जलाना, और बाहर की ओर मुख

· 17:31–17:59 · Also a question

इन्हें शाम को गोधूलि के समय जलाएँ। यदि ये दस-ग्यारह बजे तक जलते रहें तो बहुत अच्छा है, और यदि आधी रात के बाद भी जल रहे हों तो सबसे अच्छा। इनका मुख घर के बाहर की ओर होगा।

वक्ता कहते हैं कि इन्हें शाम को गोधूलि के समय जलाएँ। यदि ये दस-ग्यारह बजे तक जलते रहें, तो बहुत उत्तम है। और यदि आधी रात के बाद भी जल रहे हों, तो वह सबसे अच्छा है। इसका मुख किस ओर होगा? घर के बाहर की ओर होगा।

30

दक्षिणमुखी घर में इन पाँच दिनों में दीपक का मुख बाहर की ओर किया जा सकता है; बाकी दिनों में उन्हें आमने-सामने, पूर्व और पश्चिम की ओर रखा जाता है।

इन पाँच दिनों में दक्षिण की ओर मुख वाला दीपक मान्य

· 18:00–18:15

यदि घर दक्षिणमुखी है — यानी घर से बाहर कदम रखते ही सामने दक्षिण दिशा पड़ती है — तो यह पूछे जाने पर कि दीपक का मुख उधर करें या नहीं, वक्ता कहते हैं कि करें। इन पाँच दिनों में कोई कठिनाई नहीं; उसे बाहर की ओर किया जा सकता है। बाकी दिनों में उन्हें आमने-सामने रखें, जिससे वे पूर्व और पश्चिम की ओर हो जाते हैं।

31

रक्षात्मक धूनी में कौन सी सामग्री जाती है?

गोबर के उपले पर राल, पीली सरसों, लाल चिरमी, गुग्गुल और काली मिर्च

· 18:16–18:42 · Also a question

सुबह और शाम धूनी दें; विशेषकर शाम को अवश्य देनी चाहिए। गोबर के उपले पर राल, पीली सरसों, मिल सके तो लाल चिरमी, और गुग्गुल मिलाएँ; इन सबको काली मिर्च आदि के साथ मिलाकर रक्षात्मक धूनी बनानी चाहिए।

32

धूनी और दीपक अभिचार के विरुद्ध असल में क्या करते हैं?

अभिचारिक ऊर्जा को आसन न जमाने देना

· 18:43–19:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह धूनी और यह दीपक ऐसी अवस्था बनाते हैं कि यदि कोई आप पर अभिचार कर रहा है, यदि आपके विरुद्ध कृत्या प्रयोग या अभिचारिक प्रयोग हुआ है, यदि वहाँ उस ऊर्जा का आना-जाना है, तो उसी क्षण ये चीजें उसे नष्ट करने लगती हैं। ये उसे वहाँ आसन नहीं जमाने देतीं, और उसका असर नहीं पड़ पाता।

33

पहले से जमे अभिचार का धागा किससे टूटता है?

यम दीपदान और क्षेत्रपाल निकारी

· 19:09–19:31 · Also a question

यदि अभिचार की अवस्था पहले से है, तो जब आप वहाँ यम दीप दान करते हैं और क्षेत्रपाल आदि के लिए निकारी निकालते हैं, तो उनकी जो भी माया है वह इससे टूटती है; अभिचार के लिए जो रास्ता बनाया गया था वह टूटता है, वह धागा टूटता है, और उसके बाद वे कमजोर होते जाते हैं। पर इसके बाद आपको अपना अनुष्ठान करना चाहिए।

34

इस काल में घर में जितना जप, तप और हवन होता है, वह घर के देवी-देवताओं और अपने आराध्य को पुष्ट करता है — और अभिचारिक शक्ति को उतना ही कमजोर करता है।

घर के देवता पुष्ट, अभिचारिक शक्ति कमजोर

· 19:32–19:49

इस काल में आप वहाँ जितनी सकारात्मक ऊर्जा उपस्थित कराते हैं, जितना जप, तप, हवन आदि होता है, उतना ही आपके घर के देवी-देवता पुष्ट होंगे और वहाँ आपके आराध्य की ऊर्जा पुष्ट होगी — और उतनी ही अभिचारिक शक्ति कमजोर होती जाएगी।

वक्ता कहते हैं कि इन समयों में आप वहाँ जितनी सकारात्मक ऊर्जा उपस्थित कराते रहेंगे, जितना जप, तप, हवन आदि होता रहेगा, उतना ही आपके घर के देवी-देवता पुष्ट होंगे, उतनी ही वहाँ आपके आराध्य की ऊर्जा पुष्ट होगी, और उतनी ही यह अभिचारिक शक्ति कमजोर होती जाएगी।

35

यदि अभिचार का प्रहार हो और आपने कभी कोई साधना न की हो, तो क्या करना चाहिए?

सबसे अच्छे उपाय के रूप में क्षेत्रपाल निकारी

· 19:50–20:31 · Also a question

मान लें किसी पर अभिचार का प्रयोग हुआ है, किसी का स्वास्थ्य बिगड़ गया है, अब आपको समझ आ रहा है कि यह अभिचारिक अवस्था है, और आपने अब तक कुछ नहीं किया — न कोई सिद्ध मंत्र, न जप, कुछ नहीं। ऐसी अवस्था में क्षेत्रपाल निकारी सबसे अच्छी है। जब आप सामान्य तरीके से क्षेत्रपाल के लिए नैवेद्य आदि निकालते हैं — चैनल पर इसका वीडियो है — तो बहुत राहत मिलती है; कम से कम अभिचारिक शक्ति तुरंत वापस जाती है, और इसमें कोई दोष भी नहीं लगता।

36

अभ्यासी साधक को अपनी साधना से पहले रक्षा के लिए क्या करना चाहिए?

सरसों, लौंग और कपूर वाला द्वार का बड़ा दीपक

· 20:32–21:03 · Also a question

जो साधना और अनुष्ठान करते आ रहे हैं, यदि कोई और विषय ज्ञात न हो, तो पहले रक्षा के लिए मुख्य द्वार पर दीपक जलाएँ, उसमें सरसों और लौंग, कपूर आदि डालकर वहाँ जलाएँ। दीपक बड़ा हो और देर तक जलता रहे — नरसिंह भगवान और भगवान बटुक भैरव जी के नाम से। उसके बाद अपनी साधनाएँ करें।

37

यदि अभिचार के कारण किसी पर आवेश आ रहा हो, तो क्या करना चाहिए?

अकेले करने के बजाय किसी की सहायता लेना

· 21:04–21:38 · Also a question

यदि हालत ऐसी हो गई है कि अभिचार के कारण किसी के शरीर पर आवेश आता है और आवेश के कारण आपका पूजन-पाठ नहीं हो पाता, तो ऐसी अवस्था में किसी की सहायता लेनी चाहिए। यदि आपको ज्ञान नहीं है और अभी तक किसी मंत्र का पुरश्चरण नहीं किया है, तो इस अवस्था में स्वयं बहुत कुछ नहीं करना चाहिए — क्योंकि आपको नहीं पता कि आपका शत्रु, जो अभिचार में इन शक्तियों को चला रहा है, अपनी ओर से क्या कर रहा है, और यदि आपसे कोई गलती हुई तो यहाँ परेशानी होगी।

38

दीपावली पर किए गए गणांत प्रयोगों का क्या असर होता है?

शरीर के संबंधित अंग में परेशानी

· 21:39–22:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दीपावली के समय किए जाने वाले प्रयोगों से — अभिचार में गणांत आदि के प्रयोग से — शरीर का संबंधित अंग परेशानी देता है। वे पिछले एक-दो दिन में सुनी खबरों की ओर इशारा करते हैं कि किसी को लकवा हो गया, अचानक ऐसी कोई कठिनाई आ गई: दीपावली के आसपास अचानक शुरू होने वाली बातें कहीं न कहीं इस बात का संकेत हैं कि परीक्षा शुरू हो गई है।

39

क्या अभिचारिक आक्रमण का प्रत्यक्ष रूप से अलौकिक दिखना जरूरी है?

कारण सामान्य रूप लेता है, पर असर उन्हीं का होता है

· 22:11–22:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बहुत से कारण बनते हैं। कोई न कोई कारण बनेगा — ऐसा नहीं कि कोई भूत-प्रेत आपके सामने गला दबाएगा और उससे होगा। वे लोग ऐसी अवस्था बनाएँगे, और उसका असर पड़ता है।

वक्ता कहते हैं कि इसमें बहुत से कारण बनते हैं। कोई न कोई कारण बनेगा। पर ऐसा नहीं है कि कोई भूत-प्रेत आपके ठीक सामने गला दबाएगा और उससे होगा। वे लोग ऐसी अवस्था बनाएँगे, और उसका असर पड़ता है।

40

रक्षा के देवताओं के लिए दीपदान बढ़ाया जाता है और जोड़े में दिया जाता है — हनुमान, नरसिंह, भैरव और भगवती के लिए दो-दो दीपक।

रक्षा के देवताओं के लिए जोड़े में दीपदान

· 22:23–22:44

जब भी ऐसी अवस्था बने, रक्षा के अधिष्ठाता देवताओं के लिए दीपदान की मात्रा बढ़ानी चाहिए, और दीपदान जोड़े में करना चाहिए। चाहे हनुमान जी के लिए करें, उनके दो दीपक होंगे; नरसिंह भगवान के लिए, उनके भी दो; भैरव जी के लिए, उनके भी दो; भगवती के लिए, उनके भी दो।

41

भगवती महाकाली इस समय उपस्थित सबसे उग्र ऊर्जा हैं, क्योंकि यह उन प्रमुख कल्पों में से एक है जिनमें वे प्रकट हुईं — संधि काल जैसा ही एक प्रमुख समय।

भगवती महाकाली

· 22:45–23:18

वक्ता कहते हैं कि इस समय उपस्थित तंत्र की इष्ट देवी — अभी उपस्थित सबसे उग्र ऊर्जा — भगवती महाकाली हैं, क्योंकि भगवती अलग-अलग समय पर अलग-अलग दैत्यों के वध के लिए जिन कल्पों में प्रकट हुईं, उनमें यह भी एक प्रमुख समय है। जैसे जिस संधि काल में भगवती प्रकट हुईं वह उनका प्रमुख समय है, वैसे ही यह भी एक प्रमुख समय है।

42

दीपावली पर गृहस्थ पहले से किन देवताओं की पूजा कर रहा होता है?

लक्ष्मी, गणपति और कुबेर

· 23:19–23:46 · Also a question

दीपावली के समय लक्ष्मी और गणपति जी का पूजन हो रहा होता है, और कुबेर जी का पूजन हो रहा होता है। वक्ता कहते हैं कि कुबेर जी के पूजन के लिए अलग वीडियो डाले गए हैं और बार-बार साझा किए गए हैं — कुबेर जी का पूजन न छोड़ें।

43

एक देवता को छोड़ देने से पूजन अधूरा क्यों रह जाता है?

उदाहरण के रूप में नवरात्रि में बटुक भैरव और शिव का अभिषेक

· 23:47–24:09 · Also a question

जैसे नवरात्रि में बटुक भैरव जी का पूजन आवश्यक है — ऐसा नहीं कि केवल भगवती का पूजन कर लेना काफी है — और जैसे लोग गणेश जी और भगवती का पूजन करते हैं पर शिव जी का अभिषेक छोड़ देते हैं, जो वे रोज नहीं करते, तो पूजन कहीं न कहीं अधूरा रह जाता है। उसी तरह दीपावली के समय कुबेर जी का पूजन बहुत आवश्यक है।

44

धनतेरस पर कुबेर की पूजा क्यों अवश्य करनी चाहिए?

धन की रक्षा करने वाले यक्षराज और कोषाध्यक्ष

· 24:10–24:59 · Also a question

कुबेर जी महाराज यक्ष हैं, यक्षों के राजा और भगवान शिव के मित्र। आपके घर में जो भी धन आता है और जो भी धन वृद्धि होती है, उसकी रक्षात्मक समृद्धि की जिम्मेदारी उनकी है। वे कोषाध्यक्ष हैं, इसलिए आपका कोष कभी खाली नहीं होने देंगे, और यक्ष तथा यक्षराज उसमें कोई सेंध न लगने देने की रक्षा करते हैं। इसलिए धनतेरस के दिन उनका पूजन अवश्य करना चाहिए।

45

दीपावली पूजन के लिए भगवती का कौन सा स्वरूप चुनना चाहिए?

वर्तमान आवश्यकता के अनुसार शक्ति का चयन

· 25:00–25:25 · Also a question

भगवती का पूजन भी कल से शुरू करना है। आप जो भी प्रधान पूजन करें — भगवती महालक्ष्मी के लिए, भगवती महाकाली के लिए, या किसी और शक्ति के लिए — आप अपने जीवन की वर्तमान आवश्यकता के अनुसार शक्ति का चयन करेंगे, और फिर उनका अनुष्ठान करेंगे।

46

दीपावली के सभी प्रयोगों में सबसे प्रमुख कर्म कौन सा है?

सबसे ऊपर दीपदान

· 25:26–25:53 · Also a question

दीपदान सबसे प्रमुख है — जितना हो सके उतना दीपदान करें; उससे बढ़कर कुछ नहीं। दीपावली में जितना दीपदान होगा, चाहे आप आँवले का दीपदान करें, नींबू का या नारियल का, उतना ही उत्तम फल आपको मिलने वाला है।

47

अभिचार के नाश के लिए कौन सी शक्तियाँ चुननी चाहिए?

उग्र शक्तियाँ — पीताम्बरा, महाकाली, दुर्गा के उग्र रूप

· 25:54–26:14 · Also a question

कल के दो विषय रोग नाश और धन प्राप्ति के लिए थे। आज जोर अभिचार के नाश, रक्षा और सिद्धि की प्राप्ति पर है। अभिचार नाश का प्रयास करने वाले साधकों को उग्र शक्तियाँ चुननी चाहिए: भगवती पीताम्बरा, भगवती महाकाली, भगवती दुर्गा के उग्र रूप और मंत्र, जिन पर चैनल पर पहले ही सामग्री प्रसारित हो चुकी है, और भगवान महाभैरव।

48

क्या एक परिवार के सभी सदस्य एक ही शक्ति की पूजा कर सकते हैं?

पहले शाम का पूजन, मुख्य साधना दस-ग्यारह बजे से

· 26:15–26:54 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य एक ही शक्ति की पूजा नहीं कर सकते। तो ध्यान रखें कि यदि, मान लें, कोई महाभैरव कर रहा है, तो ऐसा नहीं कि वह शाम से ही शुरू कर देगा। दीपावली का जो पूजन शाम को होना है वह अवश्य होना चाहिए — चाहे भगवान कुबेर जी का हो या भगवती के उन प्रमुख रूपों का जिनका आप पूजन करेंगे, कुलदेवी और कुलदेवता के साथ। उसके बाद आप रात में दस-ग्यारह बजे से मुख्य साधना करेंगे।

49

दीपावली अमावस्या को पड़ती है, तो पितरों के लिए क्या करना चाहिए?

पंचबलि और पशु-पक्षियों को खिलाना

· 26:55–27:24 · Also a question

क्योंकि यह अमावस्या का पर्व है, उस दिन कम से कम पितरों के लिए क्षमता के अनुसार पंचबलि करनी चाहिए, और जो भी नैवेद्य है वह पशु-पक्षियों को खिलाना चाहिए, और कुछ दान देना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि और क्योंकि यह अमावस्या का पर्व है, उस दिन पितरों के लिए कम से कम क्षमता के अनुसार पंचबलि करनी चाहिए, और जो भी नैवेद्य आदि है वह पशु-पक्षियों को खिलाना चाहिए, और कुछ दान देना चाहिए।

50

दीपावली के दिन कामाख्या कवच और आँवले का प्रयोग कब करना चाहिए?

सिद्धि का काम निशा काल का है

· 27:25–27:56 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या दीपावली के दिन कामाख्या कवच की साधना हो सकती है और उस दिन आँवले का प्रयोग और कामाख्या कवच का जप साथ में कैसे करें, वक्ता कहते हैं कि यह आपके अपने समय की बात है — कब और कितनी देर करेंगे। शाम का पूजन आदि पूरा होने के बाद, रात में सिद्धि का पूरा काम — आप जिस भी कवच की सिद्धि कर रहे हों, जिस भी मंत्र की सिद्धि कर रहे हों — वह सब आपको निशा काल में करना है, दस बजे से, या नौ बजे से, रात के एक-दो बजे तक।

51

साधक को किस रात पूरी रात जागना चाहिए?

सोमवार का महानिशा जागरण, हवन और अगली सुबह

· 27:57–28:55 · Also a question

सोमवार की रात, जब महानिशा पूजन होता है — उस रात कोई साधक या साधिका न सोए; पूरी रात जागना चाहिए। दिन में सो लें और आराम कर लें ताकि रात को नींद न आए। रात में अपना जप और तप करें, जो प्रसारण करना है वह पूरा करें, अंतिम प्रहर में हवन करें, ब्रह्म मुहूर्त में 4:30 या 5:00 तक फिर स्नान करें, सुबह का पूजन और आरती करें, और तभी आराम करें। उस सुबह झाड़ू भी नहीं लगानी है।

52

क्या पिता की मृत्यु के बाद बड़ी साधना की जा सकती है, और कब तक नहीं?

होलिका दहन और नए संवत की प्रतीक्षा

· 28:56–29:21 · Also a question

एक सुनने वाले के पूछने पर, जिनके पिता का देहांत हो गया है, कि क्या वे कोई बड़ी साधना नहीं कर सकते और कब तक, वक्ता कहते हैं: जब तक होलिका दहन नहीं हो जाता, उसके बाद नए संवत में आप फिर नया अनुष्ठान करेंगे। तब तक आप श्रीमद्भगवद्गीता के जितने पाठ हो सकें कर सकते हैं — किसी एक अध्याय की आवृत्ति करें; बहुत अच्छा रहेगा।

53

वास्तु खराब हो, तो अपना घर पाने के लिए कौन सी साधना है?

पिछले दिन के अनुष्ठान के साथ संकल्प

· 29:22–30:00 · Also a question

अपनी बुआ के फ्लैट में रहने वाले एक सुनने वाले ने, जहाँ पूरा वास्तु उल्टा है और ईशान कोण में शौचालय है, ऐसी साधना पूछी जिससे उनका अपना अलग घर हो जाए; वक्ता कहते हैं: यही संकल्प लेकर कल बताए गए अनुष्ठान करें।

54

लक्ष्मी अष्टक के साथ लक्ष्मी माला मंत्र की कितनी आवृत्तियाँ करनी चाहिए?

108, और विष्णु सहस्रनाम का संपुट

· 30:01–30:15 · Also a question

लक्ष्मी अष्टक के साथ माला मंत्र करना चाहने वाले के पूछने पर कि कितना करें, वक्ता कहते हैं 108 करें। यह पूछे जाने पर कि क्या विष्णु सहस्रनाम के चौथे अध्याय से संपुट बनाकर महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ हो सकता है, वे कहते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है।

लक्ष्मी अष्टक के साथ माला मंत्र करना चाहने वाले एक सुनने वाले के पूछने पर कि कितना करें, वक्ता उत्तर देते हैं: 108 करें। यह पूछे जाने पर कि क्या विष्णु सहस्रनाम के चौथे अध्याय से संपुट बनाकर महालक्ष्मी अष्टकम् का पाठ किया जा सकता है, वे उत्तर देते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है।

55

यम दीपदान कब जलाना है और कितने दिन?

अपने क्षेत्र की परंपरा का पालन करें

· 30:16–31:06 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि यम दीपदान किस समय जलाना है, दीपक में सिक्का या काले तिल डालने हैं या नहीं, और कितने दिन जलाना है, वक्ता उत्तर देते हैं कि यह इस पर निर्भर है कि आप जिस क्षेत्र में रहते हैं वहाँ की परंपरा क्या है। कहीं यह धनतेरस के दिन होता है और कहीं चतुर्दशी को — तो जब आपके क्षेत्र में होता है तब करें। उनके अपने क्षेत्र में यह प्रायः तब होता है जब परिवार के सभी लोग, जिन्हें रात का भोजन करना है, खा चुके हों; कहीं नियम है कि यह शाम को ही होता है। अपनी ओर के विधान के अनुसार करें; शाम के बाद आप किसी भी समय कर सकते हैं।

56

क्या कोई पंडित आपके लिए भगवान दत्तात्रेय का देव दीक्षा विधान कर सकता है?

स्वयं करनी पड़ने वाली देव दीक्षा

· 31:07–31:29 · Also a question

एक सुनने वाले के पूछने पर, जो भगवान दत्तात्रेय का देव दीक्षा विधान करना चाहते हैं और वहाँ करवाने के लिए कोई पंडित जी नहीं हैं, वक्ता कहते हैं कि आपको स्वयं करना पड़ेगा।

57

क्या पाँच दिन के आँवले के प्रयोग के साथ 64 योगिनी का प्रयोग किया जा सकता है?

परिवार की रक्षा के लिए नित्य अभ्यास के रूप में 64 योगिनी

· 31:30–32:07 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या पाँच दिन के आँवले के प्रयोग के साथ 64 योगिनी का प्रयोग भी हो सकता है, वक्ता कहते हैं कि 64 योगिनी को कभी न छोड़ें। उन्होंने यह कई बार दोहराया है: परिवार की रक्षा के लिए 64 योगिनी का पूरा पाठ और प्रयोग अपने नित्य अभ्यास में रखें।

58

हनुमान या राम की बीजाक्षर साधना अभी नहीं दी जा सकती — ऐसी अवस्था में जहाँ दवा भी नहीं ली जा सकती, क्योंकि तब नींद साधना को खत्म कर देगी।

एक मना करना, और दवा क्यों नहीं ली जा रही

· 32:08–32:28

वक्ता कहते हैं कि हनुमान जी या राम जी की बीजाक्षर साधना अभी देना संभव नहीं है। दवा भेजने की पेशकश करने वाले एक सुनने वाले से वे कहते हैं कि अभी उनकी अवस्था ऐसी भी नहीं कि दवा ली जा सके — दवा ली तो नींद आएगी, और फिर साधना कैसे होगी? वह भी एक बात बन जाती है।

59

दुर्गा पूजा से रखे कुछ अवलोकन नहीं लिखे गए, क्योंकि सीधी सच्चाई लोगों को डराती है और उसे अंधविश्वास समझा जाता।

सब कुछ बताकर डर न फैलाना

· 32:29–32:56

वे कहते हैं कि वे एक विषय लिखना चाहते थे, फिर सोचा कि लोग उसे अंधविश्वास समझने लगेंगे, इसलिए नहीं लिखा। एक बात यह है कि सब कुछ बताकर लोगों में डर नहीं फैलाना चाहिए; असली सच्चाई बोलने से लोग डर जाते हैं। इसलिए उन्होंने वह विषय नहीं लिखा — वरना साधकों के लिए कुछ बातें हैं जो वे दुर्गा पूजा से अब तक देख रहे हैं। यह कुछ हद तक शोध का विषय है।

60

क्या योगिनी नामावली से अभिमंत्रित अनार के दाने या काले अंगूर प्रसाद के रूप में खाए जा सकते हैं?

अर्चन के बाद ग्रहण

· 32:57–33:11 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या योगिनी नामावली दो-दो अनार के दानों या काले अंगूरों पर पढ़ी जा सकती है और फिर पूरा घर उन्हें प्रसाद के रूप में खा सकता है, वक्ता कहते हैं कि खा सकते हैं; इसमें कोई कठिनाई नहीं, यदि आप अर्चन करके खाना चाहते हैं।

एक सुनने वाले पूछते हैं कि क्या योगिनी नामावली दो-दो अनार के दानों पर, या काले अंगूरों पर पढ़ी जा सकती है, और क्या घर के सभी सदस्य फिर उन्हें प्रसाद के रूप में खा सकते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि खा सकते हैं; इसमें कोई कठिनाई नहीं, यदि आप अर्चन करके खाना चाहते हैं।

61

क्या वामाचार अपनाने वाले ब्राह्मण को मांस और मदिरा ग्रहण करना जरूरी है?

जिस कुल में जाएँ, वहाँ गुरु का आदेश

· 33:12–33:33 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि वामाचारी साधना करना चाहने वाले ब्राह्मण को क्या मांस और मदिरा ग्रहण करना पड़ेगा, वक्ता कहते हैं: आप जिस भी कुल में जाएँगे, आपको वही करना पड़ेगा जो आपके गुरु आदेश देंगे। यदि आप नहीं करेंगे, तो उस कुल में न जाएँ।

यह पूछे जाने पर कि यदि कोई ब्राह्मण वामाचार साधना करना चाहे, तो क्या उसे मांस और मदिरा ग्रहण करना पड़ेगा, वक्ता उत्तर देते हैं: भाई, आप जिस भी कुल में जाएँगे, आपको वही करना पड़ेगा जो आपके गुरु आदेश देंगे। यदि आप नहीं करेंगे, तो उस कुल में न जाएँ।

62

यदि महालक्ष्मी अष्टकम बिना संपुट के किया जाए, तो फलश्रुति कब पढ़ी जाती है?

केवल अंतिम आवृत्ति पर फलश्रुति

· 33:34–33:49 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या महालक्ष्मी अष्टकम बिना संपुट के करना है और फलश्रुति हर बार पढ़नी है या अंतिम बार, वक्ता कहते हैं: हाँ, बिना संपुट के करना है, और फिर फलश्रुति केवल अंतिम बार पढ़ी जाएगी। वे कहते हैं कि वैसे भी फलश्रुति केवल अंतिम बार ही पढ़ी जाती है।

यह पूछे जाने पर कि क्या महालक्ष्मी अष्टकम बिना संपुट के करना है, और फलश्रुति हर बार पढ़नी है या केवल अंतिम आवृत्ति पर, वक्ता उत्तर देते हैं: हाँ, बिना संपुट के करना है, इसलिए फलश्रुति केवल अंतिम बार पढ़ी जाएगी। वे जोड़ते हैं कि वैसे भी फलश्रुति केवल अंतिम बार ही पढ़ी जाती है।

63

यदि भगवती पार्वती मूल शक्ति हैं, तो चंडी पाठ इतना व्यापक क्यों हुआ?

एक प्रश्न जिसे वक्ता गलतफहमी पर टिका मानकर खारिज करते हैं

· 33:50–34:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उन्हें इस प्रश्न का कोई आधार या अर्थ नहीं दिखता। इसका अर्थ यह होगा कि आप भगवती पार्वती और चंडी को समझ ही नहीं पा रहे — आपके लिए चंडी कोई और हैं और पार्वती कोई और। इसीलिए आप ऐसा कह रहे हैं; आपके लिए चंडी कोई और हो गई हैं। यदि इतना भी स्पष्ट नहीं है, तो प्रश्न का कोई अर्थ ही नहीं हो सकता।

64

दीपावली के दिन भैरव पूजन की विधि क्या है?

प्रचलित विधि, जिसमें दीपदान विशेष

· 34:21–34:35 · Also a question

दीपावली के दिन भैरव पूजन की विधि बताने को कहा जाने पर, वक्ता कहते हैं कि भैरव पूजन की जो पूरी विधि प्रचलित है, जो सामान्यतः दी जाती है, वही है; उसमें दीपदान विशेष होगा।

दीपावली के दिन भैरव पूजन की विधि कृपया समझाने को कहा जाने पर, वक्ता उत्तर देते हैं कि भैरव पूजन की जो पूरी विधि प्रचलन में है, जो बताई जाती है, वही है। उसमें दीपदान विशेष होगा।

65

क्या मासिक धर्म में कामाख्या कवच किया जा सकता है?

दुर्गा पूजा के लाइव में दिया गया वही विधान

· 34:36–34:58 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या कामाख्या कवच किया जा सकता है, वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है। यदि मासिक धर्म में हैं, तो कामाख्या कवच की विधि याद होगी यदि आपने दुर्गा पूजा के समय का लाइव सुना है — वही विधान लागू होगा। इसके पीछे की तांत्रिक बात उन्होंने वहाँ काफी विस्तार से समझाई है, तो उसे एक बार सुनें; यह बहुत काम की चीज है।

66

जयंती मंगला मंत्र के 51,000 पूरे करने के बाद क्या करना चाहिए?

इसे सवा लाख तक ले जाएँ

· 34:59–35:31 · Also a question

एक सुनने वाले बताते हैं कि 51,000 पूरे हो गए। यह सुधारते हुए कि यह महालक्ष्मी अष्टकम का नहीं है, वक्ता कहते हैं कि जब 51,000 हो गए हैं, तो इसे सवा लाख तक ले जाएँ। जब 51 कर लिए हैं, तो आगे और भी करें।

एक सुनने वाले बताते हैं कि जयंती मंगला के 51,000 पूरे हो गए हैं। वक्ता स्पष्ट करते हैं कि महालक्ष्मी अष्टकम का नहीं — भाई, यदि 51,000 हो गए हैं, तो इसे सवा लाख तक ले जाएँ। वे पूछने वाले से कहते हैं कि इसे सवा लाख तक ले जाएँ। जब 51 कर लिए हैं, तो और भी करें।

67

क्या घर के मंदिर में दो शालिग्राम रखे जा सकते हैं, और क्या स्त्री उन्हें छू सकती है?

दो मत दर्ज — कई जगह वर्जित, गुरु आदेश में मान्य

· 35:32–36:07 · Also a question

शालिग्राम रखने पर वक्ता कहते हैं कि विधि और नियमों में यह है कि यदि आप नीति और नियम से रहते हैं, और विशेषकर यदि गुरु का आदेश है, तो रखना चाहिए। फिर वे दूसरा पक्ष सीधे बताते हैं: कई जगह स्त्री के लिए शालिग्राम का स्पर्श वर्जित है — पर यदि परिवार उस अवस्था का है, तो आप रख सकते हैं। वे कहते हैं कि बेहतर होगा कि पहले अपने घर और परिवार को देखें और तभी रखें; और यदि नया रख रहे हैं, तो अपने परिवार के अनुसार किसी विद्वान की सलाह लें, और उसके बाद रखें।

68

क्या आँवले का दीपक हाथ में जलाकर फिर थाली में रखा जा सकता है?

घर वालों को आपत्ति हो तो दीपक नीचे रख देना

· 36:08–36:41 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या आँवले का दीपक हाथ में लेकर जलाया और फिर थाली में रखा जा सकता है, क्योंकि हाथ में देखकर घर वाले झगड़ा कर सकते हैं, वक्ता कहते हैं कि उन्होंने यह बात आज काटकर डाले गए वीडियो में कही है और कल भी कही थी: ऐसा अवश्य हो सकता है कि वे हाथ में आँवले का दीपक देखकर डर जाएँ और सोचें कि कौन सी तंत्र विद्या की जा रही है। यदि ऐसी अवस्था बने, तो आप उसे नीचे रख सकते हैं; इसमें कोई कठिनाई नहीं, और ऐसा नहीं कि हाथ से नीचे रखने पर कोई परेशानी होगी।

69

दीपावली की सुबह भगवती महासरस्वती की पूजा कैसे करनी चाहिए?

सारा पूजन महारात्रि काल का है

· 36:42–36:56 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि दीपावली की सुबह भगवती महासरस्वती का पूजन कैसे करें, वक्ता कहते हैं कि सबका पूजन रात में, महारात्रि काल में ही होगा। यदि आप सुबह-सुबह अलग से कुछ करना चाहते हैं, तो वह अलग बात है।

यह पूछे जाने पर कि दीपावली की सुबह भगवती महासरस्वती का पूजन कैसे करना चाहिए, वक्ता उत्तर देते हैं: सबका पूजन रात में, महारात्रि काल में ही होगा। यदि आप सुबह-सुबह अलग से करना चाहते हैं, तो वह अलग बात है।

70

नवरात्रि में 64 योगिनी करने के बाद एक छोटी बच्ची दिखने का क्या अर्थ है?

एक दर्शन जिसका वक्ता स्वागत करते हैं

· 36:57–37:14 · Also a question

एक सुनने वाली कहती हैं कि नवरात्रि में 64 योगिनी करने के बाद से जंगल में और पहाड़ों में एक छोटी बच्ची दिखती है। वक्ता कहते हैं कि यह बहुत अच्छी बात है, और उनसे इसे और भी अच्छे से करने को कहते हैं।

एक सुनने वाली लिखती हैं कि जब से उन्होंने नवरात्रि में 64 योगिनी की है, एक छोटी बच्ची दिखती है — जंगल में, पहाड़ों में। वक्ता उत्तर देते हैं कि यह बहुत अच्छी बात है, और उनसे इसे और भी अच्छे से करने को कहते हैं।

71

रात्रि जागरण के बाद कब तक झाड़ू नहीं लगानी है?

दोपहर तक झाड़ू नहीं

· 37:15–37:25 · Also a question

एक सुनने वाले की बात की पुष्टि करते हुए, जिन्हें याद है कि शिवरात्रि पर बताया गया था कि बारह बजे तक झाड़ू नहीं लगानी है, वक्ता कहते हैं: बिल्कुल — जब भी आप महानिशा पूजन करें और रात्रि जागरण करें, सुबह-सुबह दोपहर के समय तक झाड़ू न लगाएँ।

एक सुनने वाले याद करते हैं कि महाशिवरात्रि पर बताया गया था कि बारह बजे तक झाड़ू नहीं लगानी है। वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल: जब भी आप महानिशा पूजन करें और रात्रि जागरण करें, तो सुबह-सुबह दोपहर के समय तक झाड़ू न लगाएँ।

72

यदि घर में लक्ष्मी का विग्रह न हो तो क्या करना चाहिए?

श्री तत्व से युक्त विग्रह या चित्र

· 37:26–37:54 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उन्होंने कई बार लिखा और कहा है: इस दीपावली से घर में भगवती लक्ष्मी का, जो श्री तत्व से युक्त पूर्ण श्री रूप वाली शक्ति हैं, एक विग्रह या सुंदर चित्र रखें। और यदि फिर भी इच्छा न हो, तो देवी के जिस श्री तत्व युक्त रूप को आप पहले से रखते हैं, उसी का पूजन करें। कोई कठिनाई नहीं।

73

कालका योगिनी और शाबरी साधनाएँ बहुत तीखी हैं, और जब वे ऊर्जाएँ उतरती हैं तो हर कोई संतुलित नहीं रह पाता — पहले पंचाक्षरी के पाँच लाख।

तीखी साधनाएँ, और पहले पंचाक्षरी के पाँच लाख की शर्त

· 37:55–38:30

वे कहते हैं कि कालका योगिनी या अन्य शाबरी साधनाओं पर वे ज्यादा जोर नहीं देते, और उनकी ज्यादा चर्चा नहीं करते, क्योंकि वे चीजें बहुत तीखी हैं। उन्हें नहीं पता कि सुनने वाले ने कम से कम कुछ बुनियादी साधनाएँ की हैं या नहीं। यदि वे केवल उसी की चर्चा करते रहें, तो बहुत से लोग वे साधनाएँ कर ही लेंगे, पर जब ऊर्जाएँ उपस्थित होती हैं और उनका असर पड़ता है, तो हर कोई संतुलित नहीं रह पाता। इसलिए वे कहते हैं कि बेहतर है कि उन सबमें जाने वालों ने कम से कम पंचाक्षरी के पाँच लाख किए हों।

74

जिस साधना का फल तुरंत आता है, उसमें क्या खतरा है?

बार-बार करना, फल का आनंद, और दुरुपयोग

· 38:31–39:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यद्यपि कालका योगिनी में ऐसी कोई समस्या नहीं है, पर जब काम बनने लगते हैं और बुद्धि खुलती है, तो जो आनंद आता है वह व्यक्ति को इसे बहुत अधिक दोहराने की ओर ले जाता है — और उस प्रयोग में फल तुरंत आता है। दुरुपयोग की बात कोई स्पष्ट रूप से नहीं बताएगा: जब तक कुछ नहीं हो रहा, मेल और संदेश आते हैं कि कुछ नहीं हुआ; जब उसके काम करने का आनंद शुरू होता है, कोई कुछ नहीं कहता; और केवल जब उस आनंद में कोई गलती हो जाती है, तब एक-डेढ़ साल बाद खबर आती है।

75

देव कृपा से जिसे यह मिलना है, उसके सामने यह आ जाएगा, और उसका विचार उसके अपने हृदय में बनेगा।

देव कृपा पर छोड़ा गया

· 39:05–39:17

वक्ता कहते हैं कि इसी कारण वे इस पर आगे चर्चा नहीं करेंगे: देव कृपा से, वे जिससे यह करवाना चाहते हैं, उसके सामने यह आ जाएगा, उसके हृदय में इसका विचार बनेगा, और उसी के माध्यम से वे इसे करवा लेंगे।

वक्ता कहते हैं कि इसी कारण, जहाँ तक इस पर आगे चर्चा की बात है: देव कृपा से, वे जिससे यह करवाना चाहते हैं, उसके सामने यह आ जाएगा। उस व्यक्ति के हृदय में इसका विचार बनेगा, और उसी के माध्यम से वे इसे करवा लेंगे।

76

नरक चतुर्दशी पर कामाख्या पूरी तरह जाग्रत क्यों रहती हैं?

नरकासुर, उसका वध, और तिथि का नामकरण

· 39:18–40:02 · Also a question

दीपावली के समय जो माताएँ और बहनें मासिक धर्म में होंगी, उन सबसे वक्ता कहते हैं कि इस काल को सीधे देखें: नरक चतुर्दशी, नरकासुर का वध, और नरकासुर का संबंध कहाँ है। कथा फिर से सुनें — कैसे भगवान श्री हरि नारायण ने कृष्ण जी के अवतार में इस समय वध किया, और उनकी शक्ति के माध्यम से नरकासुर का वध किस प्रकार हुआ। तो चतुर्दशी नरकासुर से जुड़ी है, और उसी से नरक चतुर्दशी नाम पड़ा; और भगवती कामाख्या इस समय पूरी तरह जाग्रत रहती हैं, क्योंकि वे तंत्र की इष्ट शक्ति हैं।

77

मासिक धर्म में स्त्री को इन रातों में क्या करना चाहिए?

लाल वस्त्र, अपना आसन, और मूल कामाख्या कवच के 108 पाठ

· 40:03–40:30 · Also a question

इस समय जो भी स्त्री, जो भी माता या बहन रजस्वला हो रही है, वह यदि और कुछ न करे, तो अपने बिस्तर पर बैठे, लाल कपड़ा बिछाए, और पहनने के लिए भी लाल वस्त्र रखे — पूरी तरह लाल। वे कहते हैं, पूरी तरह तांत्रिक बन जाएँ। पूजन स्थान पर जाए बिना, उस अवस्था में अपनी जगह पर बैठकर, यदि कामाख्या कवच कंठस्थ है तो उत्तम है: उसकी आवृत्ति शुरू करें, और रात में निशा काल में मूल कवच का 108 बार पाठ करें।

78

उस जप के समय न धूप, न दीप, न दीपक — और किसी को न वरदान, न श्राप, न क्रोध का कोई शब्द, क्योंकि उस अवस्था में चिड़चिड़ापन अधिक होता है।

किसी को न वरदान न श्राप

· 40:31–40:50

आपको कोई धूप, दीप या दीपक नहीं जलाना है, और कहीं कुछ नहीं करना है; बस बार-बार उसका जप करें। और उस अवस्था में ध्यान रखें: न किसी को वरदान, न किसी को श्राप, और क्रोध में किसी से कुछ न कहें — क्योंकि उस समय ऐसी अवस्था होती है कि बहुत चिड़चिड़ापन आता है और बहुत कुछ होता है। पर यदि आप जप कर रही हैं, तो किसी से कुछ भी नहीं कहना है।

79

रजस्वला अवस्था के जप को किस परंपरा के लिए वरदान बताया गया है?

शाक्त के लिए हाँ, वैष्णव के लिए वक्ता कुछ नहीं कहते

· 40:51–41:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो वैष्णव परंपरा में हैं, उनके लिए वे नहीं कह सकते; उनके लिए कुछ कहना उचित नहीं होगा। पर जो शाक्त परंपरा में हैं और देवी पूजन करते हैं, उनके लिए यह वरदान है, यदि ऐसी अवस्था आई है।

वक्ता कहते हैं कि और एक बार ऐसी अवस्था आ गई, तो विशेषकर जो वैष्णव परंपरा में हैं उनके लिए वे नहीं कह सकते। उनके लिए कुछ कहना उचित नहीं होगा। पर जो शाक्त परंपरा में हैं, जो देवी पूजन करते हैं — उनके लिए यह वरदान है, यदि ऐसी अवस्था आई है।

80

क्या स्त्री को चतुर्दशी या अमावस्या पर पूजा न कर पाने की चिंता करनी चाहिए?

कोई शंका न रखें — घर का पूजन कोई और करेगा

· 41:07–41:32 · Also a question

यदि आप विशेषकर चतुर्दशी पर ऐसी अवस्था में हैं, या दीपावली की अमावस्या पर ऐसी अवस्था में हैं, तो मन में यह शंका न रखें और यह चिंता न करें कि आप पूजा नहीं कर पा रहीं; कोई कठिनाई नहीं। घर में कोई न कोई सभी देवी-देवताओं का पूजन करेगा। आपको कुछ नहीं करना: अपने लाल वस्त्र आदि पहनें, अपने आसन पर बैठें, और आराम से कामाख्या कवच के 108 पाठ करें — और इसे अपने जीवन में उतारें।

81

रजस्वला अवस्था में कामाख्या कवच का जप कहाँ नहीं करना चाहिए?

पूजन स्थान पर नहीं — नियम जैसा है वैसा है

· 41:33–41:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह वे स्वयं कहते हैं: जो माताएँ और बहनें ऐसी अवस्था में, दुर्गा पूजा के समय भी, और इस नियम के अनुशासन के अनुसार कामाख्या कवच के 108 पाठ करती हैं — ऐसा नहीं कि अब पूजन स्थान पर बैठकर करें; वहाँ गड़बड़ हो जाएगी। नियम ठीक वैसा ही है जैसा है। वे कहते हैं कि वे भी ऐसी स्त्रियों की कृपा और आशीर्वाद चाहते हैं।

82

रजस्वला अवस्था की ऊर्जा को इतना तीव्र क्यों बताया गया है?

मातृत्व धारण करने वाली में स्थित उग्र शक्ति

· 42:00–42:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि क्योंकि उस समय यह ऊर्जा इतनी तीव्र होती है, इतनी अत्यंत उग्र अवस्था में रहती है, और वह उसके शरीर में स्थापित होती है जो वास्तव में स्वयं मातृत्व धारण करने वाली शक्ति है। वे पूछते हैं कि उनकी कृपा और आशीर्वाद से क्या नहीं हो सकता?

वक्ता कहते हैं कि क्योंकि उस समय यह ऊर्जा इतनी तीव्र होती है, और इतनी अत्यंत उग्र अवस्था में रहती है, और वह उसके शरीर में स्थापित हो सकती है जो वास्तव में स्वयं मातृत्व धारण करने वाली शक्ति है — तो उनकी कृपा और आशीर्वाद से ऐसा क्या है जो नहीं हो सकता?

83

आँवले के कितने दीपक हाथ में रखे जाते हैं?

केवल एक, बड़े आँवले और घृत के साथ

· 42:29–42:49 · Also a question

आँवले का केवल एक दीपक हाथ में जलाया जाएगा। हाथ में जलता रखना केवल वही एक दीपक है; बाकी दीपदान आदि की विधि है। एक बार दीपदान हो गया और पूरा हो गया, तो उस आँवले वाले को फिर जलाने की जरूरत नहीं। हाथ में रखा आँवला बड़ा हो, और उसके लिए घृत के साथ बैठना है।

84

पहले संख्या कम रखी जाती है, क्योंकि 108 का बृहद दीपदान हाथ में नहीं रखा जाता — और जहाँ एक ही शक्ति की लंबे समय तक पूजा होती है वहाँ दीपक नहीं बदला जाता।

108 दीपकों का बृहद दीपदान हाथ में नहीं रखा जाता

· 42:50–43:10

वक्ता कहते हैं कि जब तक संभव न हो जाए, दीपकों की संख्या कम रखें, क्योंकि यदि आप 108 दीपकों का बृहद दीपदान करते हैं, तो वह हाथ में नहीं रखा जाता। वे नियम जोड़ते हैं: जहाँ एक ही शक्ति की लंबे समय तक पूजा हो रही हो, वहाँ दीपक नहीं बदला जाता।

वक्ता कहते हैं कि तो जब तक संभव न हो जाए, दीपकों की संख्या कम रखें, क्योंकि यदि आप 108 दीपकों का बृहद दीपदान करने जा रहे हैं, तो उसमें ऐसा नहीं होता। दीपक किस स्थिति में नहीं बदला जाता? उसमें जहाँ एक ही शक्ति की लंबे समय तक पूजा हो रही हो।

85

नवरात्रि के दीपक दोबारा क्यों काम आ सकते हैं, पर दीपावली के दीपदान के दीपक क्यों नहीं?

अंतर विसर्जन का है

· 43:11–43:33 · Also a question

नवरात्रि में आरती में घटते क्रम में नए दीपक जलाने की जरूरत नहीं — क्योंकि प्रतिपदा के दिन स्थापित शक्ति वास्तव में नवमी तक रहेंगी; उनका विसर्जन कभी नहीं होता। पर यदि दशमी को कुछ करना है, तो उन दीपकों से नहीं कर सकते। इसके विपरीत दीपदान में आप उन्हें रोककर नहीं रख रहे — उनका विसर्जन होता है — इसलिए वही दीपक फिर उपयोग नहीं हो सकता। केवल वही बार-बार उपयोग होते हैं जिनका विसर्जन नहीं होगा।

86

क्या पाँच दिन की साधना में मिट्टी की सामग्री हर दिन नई होनी चाहिए?

अखंड ज्योत दिन-प्रतिदिन की साधना से अलग है

· 43:34–44:19 · Also a question

यदि धनतेरस के दिन से, जब आप साधना शुरू करने वाले हैं, कोई अखंड ज्योत जला रहा है और उस दिन से जलाए रखी है, तो बात अलग है। पर यदि आप दिन-प्रतिदिन की साधना कर रहे हैं, या बीच में एक दिन छोड़कर कर रहे हैं, या साप्ताहिक कर रहे हैं, तो हर चीज — मिट्टी की बनी सारी सामग्री — हर बार नई होगी।

87

किसी के दीपदान को घूरना हिंदुओं की सबसे बड़ी कमी क्यों है?

हिंदुओं की सबसे बड़ी कमी

· 44:20–44:33 · Also a question

एक सुनने वाले बताते हैं कि गौशाला में दीपदान करते समय पच्चीस-तीस लोग देख रहे थे, सोच रहे थे कि कौन सा तंत्र चल रहा है। वक्ता इसे हिंदुओं की सबसे बड़ी कमी कहते हैं; इन लोगों के साथ ठीक यही परेशानी है।

एक सुनने वाले बताते हैं कि जब वे गौशाला में दीपदान कर रहे थे, पच्चीस-तीस लोग उस तरह देख रहे थे, सोच रहे थे कि कौन सा तंत्र चल रहा है। वक्ता उत्तर देते हैं कि यही हिंदुओं की सबसे बड़ी कमी है। इन लोगों के साथ ठीक यही कठिनाई है।

88

क्या दीपक में आँवले का कोई विकल्प है?

अमृत का कोई विकल्प नहीं

· 44:34–44:50 · Also a question

एक सुनने वाले से, जिनका स्वास्थ्य खराब है और जिन्हें बहुत राहत मिल रही है, वक्ता कहते हैं कि कल का लाइव एक बार सुनें, जिसमें बृहद विधान पूरा बताया गया है, और उसमें से जितना हो सके करें। आँवले के बारे में वे कहते हैं कि आँवले का कोई विकल्प नहीं; अमृत का कोई विकल्प नहीं।

एक सुनने वाले से, जिनका स्वास्थ्य खराब है और जिन्हें बहुत राहत मिल रही है, वक्ता कहते हैं: कल का लाइव एक बार सुनें। बृहद विधान पूरा वहाँ बताया गया है। उसमें से जितना कर सकें, करें। वे कहते हैं, भाई, आँवले का कोई विकल्प नहीं। अमृत का कोई विकल्प नहीं।

89

कालिका योगिनी के खप्पर की तरह काटा गया नारियल भी दीपक रख सकता है, पर इससे इस स्तर का फल मिलेगा या नहीं, कहा नहीं जा सकता।

खप्पर की तरह उपयोग किया गया कटा नारियल

· 44:51–45:32

वक्ता कहते हैं कि एक विकल्प लिया जा सकता है, पर इससे इस स्तर का फल मिलेगा या नहीं, यह नहीं कहा जा सकता। जैसे कालिका योगिनी के अभ्यास में आप खप्पर भरते हैं, उसी तरह नारियल काटकर उसमें भी दीपक जला सकते हैं। उस तरह का दीपदान दीपावली में वैसे भी करना है, तो आप ऐसा दीपक जलाकर उसके साथ बैठ सकते हैं।

90

जहाँ आँवला न मिले, वहाँ घृत और हरिद्रा चूर्ण से भरा कटा हुआ गरी — सूखा खोपरा — काम करता है।

घृत और हरिद्रा चूर्ण वाला सूखे खोपरे का दीपक

· 45:33–45:56

जिन्हें आँवला नहीं मिल रहा, वे गरी — सूखे खोपरे — से करें। उसे काटें, उससे अपना दीपक बनाएँ, उसमें घृत भरें, हरिद्रा चूर्ण डालें, फिर जलाएँ और फिर पाठ करें। यह किया जा सकता है।

वक्ता कहते हैं, ठीक है: जिन्हें आँवला नहीं मिल रहा, वे गरी से करें। जो सूखी गरी होती है — उसे काटें, और उससे अपना दीपक बनाएँ। उसमें घृत भरें। और घृत भरकर उसमें हरिद्रा आदि डालें — हरिद्रा चूर्ण — और उसके बाद जलाएँ, और फिर पाठ करें। यह किया जा सकता है।

91

वृत्ति के रूप में यह किया जा सकता है, जप कम से कम 10,000 तक ले जाकर।

कम से कम 10,000

· 45:57–46:05

वृत्ति के रूप में करने के बारे में पूछे जाने पर, वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है, और इसका जप कम से कम 10,000 होना चाहिए।

वृत्ति के रूप में करने के बारे में पूछे जाने पर, वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है। इसका जप कम से कम 10,000 होना चाहिए।

92

क्या चौखट के देवताओं को नए घर में ले जाना पड़ता है?

पहले पूजन में उनका आवाहन अपने आप होता है

· 46:06–46:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चौखट के देवी-देवताओं को कहीं ले जाने की जरूरत नहीं। जब आप नई जगह जाकर वहाँ पहला पूजन करेंगे, तो उनका आवाहन अपने आप हो जाएगा। उन्हें पुरानी जगह से नई जगह ले जाने के लिए और कुछ करने की जरूरत नहीं।

वक्ता कहते हैं कि चौखट के देवी-देवताओं को कहीं ले जाने की जरूरत नहीं। जब आप नई जगह जाकर वहाँ पहला पूजन करेंगे, तो उनका आवाहन अपने आप हो जाएगा। उन्हें पुरानी जगह से नई जगह ले जाने के लिए और कुछ करने की जरूरत नहीं।

93

दीपावली के पाँच दिनों में साधक को क्या खाना चाहिए?

दिन में फलाहार, शाम के पूजन के बाद एक बार भोजन

· 46:25–47:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कल मध्याह्न काल से आपका धनतेरस है। क्योंकि दीपावली के पाँच दिनों में शाम के समय के पूजन का विशेष महत्व है, साधक — विशेषकर जो साधना करने वाले हैं — दिन में फलाहार लें। शाम का पूजन आठ-नौ बजे तक पूरा होने के बाद एक बार भोजन लें। वे जोड़ते हैं कि वे अपनी ओर से सब बता रहे हैं पर सुनने वाले अपने शरीर की सुविधा के अनुसार करें, और वे यह नहीं कह रहे कि अक्षरशः कठोरता से करना ही है।

94

क्या पूरे पाँच दिन फल पर रहना चाहिए?

रात को एक बार भोजन, और महानिशा के दिन पूरा उपवास

· 47:02–47:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसा नहीं कि लोग अब पूरे पाँच दिन फल पर रहें; वह भी गलत होगा। शाम के पूजन का अर्थ है कि रात को एक बार भोजन लेना है। पर दीपावली की महानिशा के दिन — इस बार सोमवार — आप जिस भी साल सुन रहे हों, जिस दिन दीपावली का महानिशा पूजन होगा, उस दिन पूरा उपवास रखें और फलाहार पर रहें, जितना शरीर साथ दे।

95

धनतेरस की शाम का पूजन किस क्रम में करना चाहिए?

गणपति और पार्वती, फिर बटुक भैरव, फिर कुबेर, फिर लक्ष्मी — 13 दीपदान के साथ

· 47:25–47:46 · Also a question

कल सुबह का पूजन करें और सारी तैयारी कर लें। शाम को पहले गणपति जी और भगवती पार्वती जी का पूजन करें, फिर भैरव जी का, बटुक भैरव जी का पूजन, और उसके बाद भगवान कुबेर जी का पूजन अवश्य करें। भगवती लक्ष्मी का पूजन भी शाम के समय शुरू करें। और कल 13 दीपदान अवश्य करें।

96

धनतेरस पर घर में क्या लाना चाहिए पर उपयोग नहीं करना चाहिए?

नई झाड़ू, मोर पंख और हरा धनिया

· 47:47–48:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उस दिन झाड़ू लाने की परंपरा है: झाड़ू लानी चाहिए, पर उसका उपयोग नहीं करना चाहिए। पुरानी झाड़ू भी नहीं हटानी है — नई झाड़ू लानी है, और उसका भी उपयोग नहीं करना है। आप अवश्य लाएँ; यह सुख का प्रतीक है। मोर पंख, मिल सके तो, वह भी ला सकते हैं, और हरा धनिया ला सकते हैं।

97

धनतेरस पर पूजन में क्या रखना चाहिए?

धनिया और सेंधा नमक

· 48:06–48:22 · Also a question

पूजन में धनिया रखना चाहिए, और सेंधा नमक रखना चाहिए; उसके बाद उसका उपयोग करें। इसका उपयोग घर के बंधन में होता है। वक्ता सुनने वालों को पुराने वीडियो और पूरी दीपावली प्लेलिस्ट की ओर भेजते हैं, जहाँ यह सब बहुत विस्तार से बताया गया है।

98

जहाँ वास्तु दोष हो, वहाँ सेंधा नमक का उपयोग कैसे होता है?

कटोरी में अर्पित, फिर सफेद कपड़े में बाँधकर दोष वाली दिशा में लटकाया

· 48:23–48:54 · Also a question

जिनका वास्तु खराब है — नैऋत्य कोण भारी होना चाहिए पर हल्का है, या ईशान कोण में कुछ गड़बड़ है — उनके लिए इस पूजन में सेंधा नमक का उपयोग कुछ हद तक सहायता करता है। सेंधा नमक बस एक कटोरी में रखकर अर्पित किया जाता है, और कुछ नहीं। फिर वही सेंधा नमक सफेद कपड़े में बाँधकर उस दिशा में लटकाएँ जिसमें वास्तु दोष है। कुछ हद तक कहीं न कहीं नकारात्मक ऊर्जा घटती है, और वास्तु कुछ समय के लिए मानो संतुलित हो जाता है; आपको कुछ सुधार करवाने का अवसर मिलता है, और सद्बुद्धि आती है।

99

निशा काल का पूजन कब शुरू किया जा सकता है?

शाम से ही, आधी रात जरूरी नहीं

· 48:55–49:19 · Also a question

कल से आप निशा काल का पूजन शुरू करेंगे। निशा काल के पूजन के लिए आप संध्या काल से ही शुरू कर सकते हैं; ऐसा नहीं कि बारह या एक बजे से ही करना है। यदि आप कोई पाठ शुरू करने वाले हैं, या जो भी जप शुरू करने वाले हैं, वह कल से कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि और कल से ही अब आप निशा काल का पूजन शुरू करेंगे। निशा काल के पूजन के लिए आप संध्या काल से ही कर सकते हैं। ऐसा नहीं कि बारह या एक बजे से ही करना है। तो आप कर सकते हैं। यदि आप कोई पाठ शुरू करने वाले हैं, या जो भी जप शुरू करने वाले हैं, वह कल से कर सकते हैं। यह कल का विशेष पूजन है।

100

पंचबलि क्यों नहीं छोड़नी चाहिए?

गौ, कुत्ते, कौए, चींटी और मनुष्य को भोजन

· 49:20–49:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पंचबलि अवश्य होगी, और साधकों के लिए यह किसी भी हालत में नहीं छूटनी चाहिए। जैसे ही आप अपने शरीर से जीवों को भोजन देते हैं — जब आप गौ माता, कुत्ते, कौए, चींटी और मनुष्य को खिलाते हैं — आपके शरीर से हुए बहुत से जाने-अनजाने पाप और दोष तुरंत नष्ट होते हैं, और आपके मंत्र जप का फल भी आपको मिलने लगता है।

101

चतुर्दशी पर क्या करना है?

शाम को यम दीपदान और हनुमान जन्मोत्सव

· 49:48–50:19 · Also a question

चतुर्दशी पर, रविवार को, आप हमेशा की तरह सुबह का पूजन करेंगे। शाम के समय उस दिन यम दीपदान विशेष होगा। उस दिन हनुमान जन्मोत्सव भी है, इसलिए शाम को भगवान हनुमान जी का विशेष पूजन किया जा सकता है — चोला चढ़ाना, दीपदान करना, हनुमान मंदिर में चालीसा के साथ हवन करना।

102

चतुर्दशी की शाम कितने दीपक जलाए जाते हैं?

चौदह दीपक, साथ में रोज का आँवला दीपदान

· 50:20–50:40 · Also a question

शाम के समय चौदह दीपकों के माध्यम से पूजन करके, आप वे चौदह दीपक अलग-अलग जगहों पर जलाएँगे। रोज आँवले का दीपदान अलग से होता रहेगा — चाहे आप 11 करें, 14 करें या 27, या तिथि के अनुसार करें। इसे अवश्य करें; कम से कम दो करें, और यदि बहुत ज्यादा नहीं कर सकते, तो लगातार दो आँवलों का दीपदान करते रहें।

103

एक दीपक तुलसी जी के पास और एक मुख्य द्वार पर लगातार जलता रहता है।

तुलसी के पास और मुख्य द्वार पर

· 50:41–50:56

तुलसी जी के पास एक दीपक अवश्य जलता रहेगा, और मुख्य द्वार पर एक दीपक अवश्य जलता रहेगा। जो व्रत रखना चाहते हैं — चाहे चतुर्दशी का हो या हनुमान जन्मोत्सव मना रहे हों — वे लोग सोमवार को करेंगे।

वक्ता कहते हैं कि तुलसी जी के पास एक दीपक अवश्य जलता रहेगा। मुख्य द्वार पर एक दीपक अवश्य जलता रहेगा। जो लोग व्रत रखना चाहते हैं — चाहे वह चतुर्दशी का हो, या चाहे वे हनुमान जन्मोत्सव मनाने वाले हों — वे लोग सोमवार को ही करेंगे।

104

अमावस्या निशीथ-व्यापिनी है और चतुर्दशी उदया से ली जा रही है, इसलिए दोनों पर्व अच्छे पड़ते हैं — तो हनुमान व्रत और जन्मोत्सव पूजन सोमवार को रखे जाते हैं।

अमावस्या निशीथ-व्यापिनी और चतुर्दशी उदया से

· 50:57–51:31

वक्ता कहते हैं कि इसके प्रमाण के लिए आप उन दिव्य क्षेत्रों को देख सकते हैं जहाँ हनुमान जी का पूजन होने वाला है और जहाँ जन्मोत्सव मनाया जाने वाला है; उनके अनुसार भी, जहाँ-जहाँ उन्होंने देखा है, यही किया जा रहा है। क्योंकि अमावस्या निशीथ-व्यापिनी है और चतुर्दशी उदया के अनुसार ली जा रही है, दोनों पर्व आपके लिए बहुत लाभकारी हो रहे हैं। तो जिनके कुलदेवता हनुमान जी हैं, या जो उनका जन्मोत्सव मनाने वाले हैं, या जिनके वे इष्ट आराध्य हैं, या जो उनके लिए व्रत रखते हैं, या जो चतुर्दशी पूजन करने वाले हैं — वे सब सोमवार को व्रत रखेंगे और उसी दिन अपना विशेष पूजन करेंगे।

105

जो पाँच दिन का पूजन तिथि के अनुसार कर रहे हैं, वे चतुर्दशी और हनुमान पूजन रविवार की शाम करें, संभव हो तो हनुमान चालीसा से हवन के साथ।

रविवार की शाम चतुर्दशी और हनुमान पूजन

· 51:32–51:53

पर जो तिथि के अनुसार पाँच दिन का पूजन करने वाले हैं, जो हर दिन का पूजन करने वाले हैं, वे विशेष रूप से रविवार की शाम चतुर्दशी पूजन करें और हनुमान जी का पूजन भी करें। अगले दिन भी करने में कोई कठिनाई नहीं, पर उस दिन शाम को कम से कम संक्षिप्त पूजन अवश्य करें। घर में उस दिन हनुमान जी के लिए पूजन अवश्य होना चाहिए; संभव हो तो हनुमान चालीसा से हवन करें।

106

नरक चतुर्दशी होने के कारण दीपक कहाँ जलाया जाता है?

जहाँ घर का कचरा फेंका जाता है — केवल पुराने दीपक से

· 51:54–52:14 · Also a question

और उसी दिन, क्योंकि नरक चतुर्दशी है, जहाँ आप अपने घर का कूड़ा-कचरा फेंकते हैं, वहाँ भी एक दीपक जलाना चाहिए। पर वहाँ हमेशा पुराना दीपक जलाया जाता है; वहाँ नया दीपक नहीं जलाना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि और उसी दिन, क्योंकि नरक चतुर्दशी है — उस दिन, जहाँ आप अपने घर का कूड़ा-कचरा फेंकते हैं, वहाँ भी एक दीपक जलाना चाहिए। पर वहाँ हमेशा पुराना दीपक जलाया जाता है; वहाँ नया दीपक नहीं जलाना चाहिए। तो वह भी करें।

107

दीपावली के दिन का क्रम क्या है?

सुबह से महानिशा तक उपवास, स्थिर लग्न में लक्ष्मी, एक बजे के बाद हवन

· 52:15–52:44 · Also a question

उसके बाद दीपावली आती है, जिसमें आपको सुबह से महानिशा तक पूरा उपवास रखना है, और अपनी सुविधा के समय पर अपना पूजन करना है। सुबह के पूजन में, जो स्थिर लग्न मिल रहा है उसमें विशेष रूप से भगवती लक्ष्मी की पूजा करें। उसके बाद अपनी साधना करें, जो भी जप और तप करना है, और महानिशा में एक या डेढ़ बजे के बाद या सुविधा के अनुसार आपका हवन होगा, और रात्रि जागरण।

108

पूर्णाहुति दीपावली की महारात्रि में ही हो सकती है, या द्वितीया तक — पर दीपावली की महानिशा में हवन छूटना नहीं चाहिए।

दीपावली की महारात्रि में, या बुधवार को द्वितीया तक

· 52:45–53:08

जागरण सोमवार की रात से मंगलवार की सुबह तक चलता है। उसके बाद अगले दो दिन अपनी साधना करें। पूर्णाहुति आप चाहें तो दीपावली की महारात्रि में ही कर सकते हैं; या यदि आगे और हवन आदि करना है, तो अपनी सुविधा के अनुसार बुधवार को द्वितीया तिथि तक कर सकते हैं। पर इतना अवश्य करें: दीपावली की महानिशा में हवन करें।

109

इस दावे पर कि दीपावली की रात हवन से भूत, प्रेत और राक्षस आते हैं: प्रणाम — और इस महारात्रि में सबको हवन करना चाहिए।

दावे का खंडन

· 53:09–53:29

अब कोई दिव्य आत्मा अवतार लेकर YouTube पर वीडियो डाल सकती है कि दीपावली की रात हवन करने से भूत-प्रेत और राक्षस आएँगे, और नहीं करना चाहिए। वक्ता कहते हैं, उन्हें प्रणाम — और आपको भी प्रणाम। उनके अनुसार इस महारात्रि में सबको हवन आदि करना चाहिए।

अब कोई दिव्य आत्मा अवतार लेकर YouTube पर वीडियो डाल सकती है कि यदि दीपावली की रात हवन किया गया तो भूत और प्रेत आएँगे, राक्षस आएँगे, और यह नहीं करना चाहिए। तो वक्ता कहते हैं, भाई, उन्हें प्रणाम, और आपको भी प्रणाम। उनके अनुसार इस महारात्रि में सबको हवन आदि करना चाहिए।

110

दीपावली की महानिशा साधारण रात क्यों नहीं है?

जगदंबा के दिव्य रूप पूर्ण रूप से उपस्थित

· 53:30–53:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह साधारण दिन नहीं; यह महानिशा का पूजन है। यही वह समय है जब जगदंबा के दिव्य रूप — चाहे रक्षा करने वाला रूप हो या धन देने वाला रूप — सब पूर्ण रूप से उपस्थित होते हैं। यदि आप ठीक उसी समय सो जाएँ और कुछ न करें, तो क्या लाभ? इतना डरने की जरूरत नहीं।

वक्ता कहते हैं कि यह साधारण दिन नहीं; यह महानिशा का पूजन है। यही वह समय है जब जगदंबा का दिव्य रूप — चाहे वह रक्षा करने वाला रूप हो या धन देने वाला रूप — सब पूर्ण रूप से उपस्थित होते हैं। और यदि आप ठीक उसी समय सो जाएँ और कुछ न करें, तो क्या लाभ है? इतना डरने की जरूरत नहीं।

111

गरी का दीपक हाथ जलाने लगे तो उसे कैसे संभालें?

घृत डालते रहें, और नीचे रख दें

· 53:56–54:09 · Also a question

गरी वाले में घृत डालते रहें, और जब वह उस तरह जलने लगे, तो नीचे रख दें। वक्ता कहते हैं कि ऐसा नहीं कि हाथ जलने लगे तो भी हाथ में ही पकड़े रहना है; वह नहीं करना है।

वक्ता कहते हैं कि गरी वाले में घृत डालते रहें, और जब वह उस तरह जलने लगे, तो उसे नीचे रख दें। ऐसा नहीं कि हाथ जलने लगे तो भी हाथ में पकड़े रहें — वह नहीं करना है।

112

सफेद गुंजा की माला के प्रयोग का सबसे उग्र रूप क्या है?

आठ दिशाओं में अपामार्ग की लकड़ी, फिर उस पर धूनी

· 54:10–54:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कल एक प्रयोग बताया गया था — वनस्पति तंत्र के अनुसार माला का उपयोग, कुछ विचारों के नाश के लिए सफेद गुंजा की माला का उपयोग कैसे करें। यह पूछे जाने पर कि इसका विधान कितना उग्र होगा, वे याद दिलाते हैं कि उन्होंने आठ दिशाओं में अपामार्ग की लकड़ी रखने को कहा था, हाथ में ही; उस अपामार्ग की लकड़ी पर बाद में आप धूनी दे सकते हैं।

113

रोगों के लिए अपामार्ग प्रोक्षण कैसे और कब किया जाता है?

मंगलवार की सुबह, क्योंकि सुबह की अमावस्या तब पड़ती है

· 54:29–54:44 · Also a question

जिसके शरीर में आधि या व्याधि है, उस पर अपामार्ग से प्रोक्षण करना है, और उसे सुबह-सुबह फेंक देना है। यह पूछे जाने पर कि इस बार यह कब करना है, वक्ता कहते हैं कि यह मंगलवार की सुबह होगा, क्योंकि सुबह की अमावस्या मंगलवार को पड़ती है।

वक्ता कहते हैं कि जिसके शरीर में आधि या व्याधि है, उसका प्रोक्षण करना है, और उसे सुबह-सुबह फेंक देना है। यह पूछे जाने पर कि इस बार हम यह कब करने वाले हैं, वे कहते हैं कि इस बार यह मंगलवार की सुबह होगा, क्योंकि सुबह की अमावस्या मंगलवार को है। तो, मंगलवार की सुबह।

114

शरीर पर तिल का तेल, अपामार्ग की लकड़ी से प्रोक्षण करके उसे बाहर फेंकना, और तभी स्नान — कहा गया है कि इससे दरिद्रता नष्ट होती है।

शरीर पर तिल का तेल, अपामार्ग प्रोक्षण, फिर स्नान

· 54:45–55:55

शरीर पर तिल का तेल लगाकर, अपामार्ग की लकड़ी से प्रोक्षण करें और उसे बाहर फेंक दें; तभी स्नान आदि करें। वक्ता कहते हैं कि यह अवश्य करना चाहिए: यहाँ ऐसा करने से दरिद्रता नष्ट होती है।

वक्ता कहते हैं कि शरीर पर तिल का तेल लगाकर, अपामार्ग की लकड़ी से प्रोक्षण करें और उसे बाहर फेंक दें। फिर स्नान आदि करें। यह अवश्य करना चाहिए। यहाँ ऐसा करने से दरिद्रता नष्ट होती है। वे कहते हैं कि उन्हें आशा है कि उन्होंने पूरा क्रम बता दिया है, और यह सब आपको अवश्य करना है।

115

यज्ञोपवीत संस्कार क्यों आवश्यक है, और शिक्षक इस पर बार-बार जोर क्यों देते हैं?

द्विजों के लिए आवश्यक

· 55:56–56:26 · Also a question

वे कहते हैं कि वे यज्ञोपवीत के लिए बार-बार कहते हैं — इसे करवाना ही है, और यह द्विजों के लिए आवश्यक है। वे लगभग बीस-बाईस लोगों के एक समूह का उदाहरण देते हैं, जो विंध्य क्षेत्र से ही एक आचार्य जी को लाए और सबका वहीं यज्ञोपवीत संस्कार हुआ; इसका वीडियो चैनल पर है। वे कहते हैं कि कम से कम वे अपने मार्ग पर धर्म से चलने का इतना प्रयास कर रहे हैं, और सुनने वाले, विशेषकर युवा, प्रेरित होकर वैसा ही करें।

116

क्या आँवले के दीपक में केसर, चंदन और इलायची डाली जा सकती है?

केवल घृत — जगह नहीं बचेगी

· 56:27–56:48 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या आँवले के दीपक में केसर, चंदन और इलायची डाली जा सकती है, वक्ता कहते हैं कि उसमें जगह ही नहीं बचेगी। यदि आप केसर, चंदन और इलायची डालेंगे, तो उसके लिए उसे इतना गहरा बनाना पड़ेगा कि आपका हाथ तुरंत जलने लगेगा। उसमें इतना न डालें — केवल घृत डालें; वही काफी है।

यह पूछे जाने पर कि क्या आँवले के दीपक में केसर, चंदन और इलायची डाली जा सकती है, वक्ता उत्तर देते हैं कि उसमें जगह ही नहीं बचेगी। यदि आप केसर, चंदन और इलायची डालेंगे, तो उसके लिए उसे इतना गहरा बनाना पड़ेगा कि आपका हाथ तुरंत जलने लगेगा। उसमें इतना न डालें। केवल घृत डालें — वही काफी है।

117

क्या किसी भी भगवती का सप्ताक्षरी मंत्र किया जा सकता है?

अनुमति है

· 56:49–57:06 · Also a question

एक सुनने वाले के पूछने पर, वक्ता कहते हैं कि किसी भी भगवती का सप्ताक्षरी मंत्र बिल्कुल किया जा सकता है।

एक सुनने वाले के पूछने पर, वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल, किसी भी भगवती का सप्ताक्षरी मंत्र किया जा सकता है।

118

क्या इन रातों में एकदंत स्तोत्र या बगलामुखी के 108 नामों का अनुष्ठान किया जा सकता है?

दोनों की अनुमति

· 57:07–57:22 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या महानिशा की रात एकदंत स्तोत्र किया जा सकता है, वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या चौदस की रात भगवती बगलामुखी के 108 नामों का अनुष्ठान अवश्य किया जा सकता है, वे अलग से उत्तर दिए बिना आगे बढ़ जाते हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या महानिशा की रात एकदंत स्तोत्र किया जा सकता है, वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है। एक सुनने वाले यह भी पूछते हैं कि क्या चौदस की रात भगवती बगलामुखी के 108 नामों का अनुष्ठान अवश्य किया जा सकता है; वक्ता अलग से उत्तर दिए बिना आगे बढ़ जाते हैं।

119

सरस्वती मैया की दीक्षा किस रूप में होती है?

सरस्वती के विधान और प्रकार के अनुसार दीक्षा

· 57:23–57:33 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि सरस्वती मैया की दीक्षा का प्रारूप कैसा है, वक्ता कहते हैं कि यह केवल आदेश की बात नहीं; इसमें बहुत कुछ है। जैसे सरस्वती के विधान और प्रकार हैं, वैसी ही उनकी दीक्षा भी है।

यह पूछे जाने पर कि सरस्वती मैया की दीक्षा किस प्रकार के प्रारूप में होती है, वक्ता कहते हैं कि यह केवल एक आदेश की बात नहीं; इसमें बहुत कुछ है। जैसे सरस्वती के विधान और प्रकार हैं, वैसी ही उनकी दीक्षा भी है।

120

परिवार में किसी की मृत्यु को एक साल न हुआ हो, तो क्या घर में हवन किया जा सकता है?

हवन नहीं, पर पाठ, दीप और दान किए जा सकते हैं

· 57:34–59:27 · Also a question

एक सुनने वाली के पूछने पर, जिनके ससुराल के दादा जी का देहांत एक साल से कम पहले हुआ है, कि क्या घर में कोई हवन नहीं हो सकता, वक्ता कहते हैं कि हवन के बारे में वे भी नहीं कह सकते, क्योंकि पता नहीं कि उनकी वार्षिकी हुई है या नहीं। पर पाठ, दीप, दान आदि अवश्य किए जा सकते हैं।

121

बुधवार तक चलने वाला पूरा अनुष्ठान grihasthapujansamagri साइट पर, समूह में, और वीडियो के विवरण में लिखित रूप में दिया गया है।

सामग्री साइट, समूह और वीडियो का विवरण

· 59:28–59:47

जो दीपावली अनुष्ठान अब शुरू होना है, वह कल से बुधवार तक चलेगा, और सब कुछ grihasthapujansamagri साइट पर और समूह में लिखित रूप में दिया गया है। वक्ता कहते हैं कि इसे पढ़ें और यदि अपनी सुविधा के अनुसार भाग लेना चाहें तो विवरण दें; पूरा विषय इस वीडियो के विवरण में भी लिखा है।

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मंदार विद्या अनुष्ठान की तंत्रोक्त रुद्राक्ष माला कौन पहन सकता है?

साधक नहीं — यह भगवती के विग्रह पर जाती है

· 59:48–1:00:06 · Also a question

वक्ता सुनने वालों को याद दिलाते हैं कि वन दुर्गा और भगवती बगलामुखी की मंदार विद्या के बृहद अनुष्ठान में भगवती के लिए जो रुद्राक्ष की तंत्रोक्त माला बनाई जानी है, वह आपको नहीं पहननी है; वह भगवती के श्री विग्रह पर रहेगी। उसे श्री कुल से जुड़ी हर शक्ति को पहनाया जा सकता है, और यदि भगवती दुर्गा जी का श्री विग्रह है, तो उस पर भी पहनाया जा सकता है।

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मंदार विद्या की रुद्राक्ष माला किन देवता विग्रहों पर कभी नहीं रखनी चाहिए?

श्मशान कालिका और तारा को छोड़कर

· 1:00:07–1:00:33 · Also a question

भगवती काली के मामले में, यदि दक्षिणा कालिका आदि हैं, तो उन्हें पहनाई जा सकती है। पर यदि आपके घर में श्मशान कालिका का श्री विग्रह है और आप उनका पूजन कर रहे हैं, या आप भगवती तारा की पूजा करते हैं और उनका श्री विग्रह है, तो यह माला उन पर न पहनाएँ। तब यह गड़बड़ हो जाएगी और बात अलग हो जाती है। वक्ता कहते हैं कि आपको कोई हानि नहीं होगी, फिर भी देव दोष की बात बनती है, क्योंकि माला मंदार विद्या कल्प आदि से अभिमंत्रित चीज होगी, और उसे अन्य महाविद्याओं पर इस तरह नहीं रखना है।

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इसके बजाय मंदार विद्या की रुद्राक्ष माला किन रूपों पर रखनी चाहिए?

सौम्य शक्ति — लक्ष्मी का विग्रह या चित्र

· 1:00:34–1:01:02 · Also a question

इसे सौम्य शक्ति पर रखें — भगवती के, देवी के रूप पर — और विशेषकर यदि भगवती लक्ष्मी जी का विग्रह या चित्र है, तो उस पर रखें। यदि कोई नहीं है, तो कुछ लाना नहीं है; कोई कठिनाई नहीं। उन्हें किसी सुंदर पात्र में, या मिलने वाले ताँबे के टिफिन में, लाल कपड़ा बिछाकर विराजमान करें, और रोज धूप-दीप दिखाएँ। इतना भी बहुत है।

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इन रूपों की पूजा से बहुत कुछ पाने का मार्ग खुलता है — और जहाँ विग्रह है, वहाँ माला उस पर रखी जाती है।

बहुत कुछ पाने का खुलता मार्ग

· 1:01:03–1:01:26

वक्ता कहते हैं कि इन सबका पूजन करने से आपके लिए बहुत कुछ पाने का मार्ग खुलता है। यह आवश्यक नहीं, पर यदि विग्रह है, तो उन पर रखें।

वक्ता कहते हैं कि इन सबका पूजन करने से भी आपके लिए बहुत कुछ पाने का मार्ग खुलता है। यह आवश्यक नहीं — पर यदि विग्रह है, तो उन पर रखें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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