श्रावण की तैयारी — रुद्राभिषेक, 64 योगिनी बलि और संकट में घिरे घर के लिए तंत्रोक्त विधान

अलग-अलग संकटों के लिए श्रावण के तंत्रोक्त विधान।

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Questions this answers

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The notes
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01

तंत्र के दो भाग कौन-से हैं?

तंत्र दर्शन और क्रिया वाला पक्ष

· 01:20–02:39 · Also a question

तंत्र के दो भाग हैं। एक दार्शनिक भाग है, जिसे तंत्र दर्शन कहते हैं। इसमें हर प्रकार की शक्ति को एक सैद्धांतिक आधार पर समझाया जाता है। दूसरा तांत्रिक या क्रिया वाला भाग है। इसमें दर्शन नहीं है। इसमें षट्कर्म, मंत्र सिद्धियाँ, पुरश्चरण और अपने आराध्य का दर्शन है।

02

दस महाविद्याओं को शरीर की नाड़ियाँ बताना गलत क्यों है?

दर्शन और क्रिया वाले पक्ष को मिला देना

· 02:40–03:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक वीडियो बहुत वायरल हुआ। उसमें 52 या 56 कलवों को शरीर की अलग-अलग गाँठें और नाड़ियाँ बताया गया। वे कहते हैं कि यह दार्शनिक सिद्धांत है, क्रिया वाला पक्ष नहीं। इसे पकड़कर यह ज़िद करना कि ऐसी कोई चीज़ है ही नहीं, ये बस हमारी नाड़ियों के नाम हैं, उनके शब्दों में हद दर्जे की मूर्खता है।

03

आलोचक तांत्रिक साधना को नकारने के लिए दर्शन का सहारा कैसे लेते हैं?

दर्शन दिखाकर क्रिया वाले पक्ष को काट देना

· 03:48–04:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आजकल जब भी किसी को किसी सिद्धांत या शक्ति का खंडन करना होता है, वे दार्शनिक सिद्धांत आगे कर देते हैं। इससे वे क्रिया वाले पक्ष को सीधे नकार देते हैं। फिर ऐसे लोग माँग करते हैं कि अगर सिद्धि है, तो उनके सामने करके दिखाओ।

04

एक पूरे वीडियो में दावा है कि अनघा लक्ष्मी नाम की कोई शक्ति नहीं और शंकराचार्य नाम का कोई पद नहीं

सार्वजनिक दावा कि अनघा लक्ष्मी कोई शक्ति नहीं

· 05:44–06:05

वक्ता कहते हैं कि एक सज्जन ने पूरा वीडियो डाला है। उसमें दावा है कि अनघा लक्ष्मी नाम की कोई शक्ति नहीं है, शंकराचार्य नाम का कोई पद नहीं है, और किसी को शंकराचार्य कहलाने का अधिकार नहीं है।

05

क्या सूखी तुलसी दीपदान और हवन में ली जा सकती है?

सूखी तुलसी समिधा और दीपदान के लिए, और प्रक्षिप्त कहकर बचना

· 06:06–06:56 · Also a question

एक करीबी व्यक्ति ने उन्हीं सज्जन से पूछा कि बहुत लोग सूखी तुलसी से दीपदान की विधि बताते हैं, क्या यह ठीक है। उन्होंने साफ़ कह दिया कि यह मूर्खता है, ऐसा नहीं करना चाहिए। वक्ता जवाब देते हैं कि जिन्होंने सूखी तुलसी को हवन की समिधा या दीपदान के लिए लेने पर वीडियो बनाए, उन्होंने स्कंद पुराण आदि का संदर्भ दिया था। कम से कम वह संदर्भ देखा जा सकता था।

06

बाती में फूल बनने को लेकर क्या विवाद हुआ था?

बाती में फूल बनने पर देवताओं का आना

· 08:48–09:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उन पर सबसे ज़्यादा नकारात्मक प्रतिक्रिया दीपक और बाती वाले विषय पर आई। विषय था कि बाती में फूल बनने से देवता आते हैं। कई नियमित दर्शक, जो उनके बाकी विषय मानते हैं, खुलकर बोले कि यह वाला नहीं मानेंगे। उनका जवाब है कि किसी से मनवाना उनका काम नहीं है।

07

नया साधक अपने पूजन का स्तर किस क्रम में बढ़ाए?

नमो मंत्र से पौराणिक मंत्र, फिर श्री सूक्त और पुरुष सूक्त

· 11:16–12:00 · Also a question

कोई व्यक्ति अचानक पुरुष सूक्त से षोडशोपचार नहीं करेगा। पहले वह अपने ढंग से, धीरे-धीरे साधारण नमो मंत्र से करेगा। फिर पौराणिक मंत्र से। और जब श्री सूक्त और पुरुष सूक्त का अभ्यास हो जाएगा, तब उनसे करेगा। जो सच में करता है, उसकी चीज़ें धीरे-धीरे बढ़ती हैं।

08

श्रावण का विधान हर कष्ट के लिए है — भौतिक, आध्यात्मिक या दैविक, कोई भी रोग, शोक या दोष

हर प्रकार का कष्ट इस विधान का आधार है

· 13:56–14:13

वे जिस विषय से शुरू करते हैं, वह यह है: आपके जीवन में जो भी कष्ट हो — भौतिक, आध्यात्मिक या दैविक, कोई भी पीड़ा, कोई रोग या शोक, कोई भी दोष — श्रावण का विधान इसी के लिए है।

श्रावण मास में पहले क्या करना चाहिए, इस पर आते हुए वक्ता कहते हैं कि वे इस विषय से शुरू करते हैं: आपके जीवन में जिस भी तरह की परेशानियाँ हों — चाहे भौतिक हों, आध्यात्मिक हों, दैविक हों, कोई भी कष्ट हो, कोई रोग या शोक हो, कोई भी दोष हो।

09

64 योगिनी मंदिर कहाँ हैं, और किसकी परंपरा में बने?

शंकराचार्य परंपरा के 64 योगिनी मंदिर

· 14:14–14:59 · Also a question

64 योगिनी मंदिर, जहाँ भी हैं, आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा में बने हैं। वे कोलकाता क्षेत्र में हैं, और मध्य प्रदेश में भोपाल क्षेत्र में, जबलपुर के आसपास। इन सभी जगहों पर विशेष पूजन होता है।

10

पूरा तंत्रोक्त 64 योगिनी विधान कौन देख सकता है?

केवल दीक्षित साधक ही बैठकर पूरा विधान देखे

· 15:00–15:43 · Also a question

योगिनियों का साधारण अर्चन-पूजन करने में किसी के लिए कोई दोष या कठिनाई नहीं है। पर जहाँ हर योगिनी का पूरा तंत्रोक्त विधान हो रहा हो — जैसे भगवती ललिता त्रिपुर सुंदरी की 64 योगिनियों का — वहाँ कहा गया है कि केवल देखने का अधिकार भी सिर्फ़ दीक्षित साधक का है। वही वहाँ बैठकर देखे।

11

क्या श्मशान साधना और दीक्षा लाइव वीडियो में दिखानी चाहिए?

चिता पर बैठकर श्मशान साधना और दीक्षा का वीडियो बनाना

· 15:44–16:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आजकल लोग अघोर के नाम पर चिता पर बैठकर एक-एक श्मशान साधना के लाइव वीडियो करते हैं, दीक्षा तक देते हैं। वे कहते हैं कि यह उनका अपना मामला है, वे उन पर उँगली नहीं उठाते। पर ऐसी चीज़ें वे स्वयं नहीं दिखा सकते।

12

दर्शक किसी विधान का असल में कितना हिस्सा देखता है?

चक्रार्चन का दस प्रतिशत, और एक भी मुद्रा नहीं

· 16:26–17:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे एक मुद्रा भी दिखाने में सक्षम नहीं हैं, एक मुद्रा दिखाने में भी कंजूसी करते हैं। दर्शकों को दिखाए जाने वाले विषय बहुत कम हैं। आप केवल दस प्रतिशत देखते हैं, बाकी विधान पूरा रोक लिया जाता है। बड़ी चक्रार्चन विधि में दिखाई गई थोड़ी-सी चीज़ से कहीं अधिक होता है।

13

कुष्मांडी की बलि कैसे करनी चाहिए?

लाल वस्त्र, खड्ग का एक वार, और आँखें बंद

· 17:37–18:08 · Also a question

कई जगह कहा गया है कि जहाँ कुष्मांडी की बलि भी दी जा रही हो, वहाँ काटते समय नहीं देखना चाहिए। रखी हुई कुष्मांडी पर लाल वस्त्र डालिए, फिर काटिए — खड्ग का एक तेज़ वार, कि वह दो भागों में हो जाए। और काटते समय आपकी आँखें बंद होनी चाहिए।

14

क्या मुद्रा और बलि कभी कैमरे पर दिखानी चाहिए?

मुद्रा और बलि कभी दिखाने की चीज़ नहीं

· 18:09–19:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं, कभी नहीं। ये चीज़ें कभी दिखाने के लिए नहीं हैं। फिर भी महिष की बलि लाइव दिखाई जाती है, यह घोषणा करके कि अघोर काली की पूजा हो रही है, श्मशान काली को बलि दी जा रही है। उन्हें डर है कि खुद को तांत्रिक साबित करने वाले लोग आगे पंचमकार की मुद्रा और अपनी भैरवी को भी लाइव दिखाने लगेंगे।

15

साधक अपनी साधना को कितना गुप्त रखे?

कुलवधू की तरह सँभालकर

· 19:06–20:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तंत्र का विषय अत्यंत गुप्त है। कहा गया है कि अपने इष्ट और आराध्य के विधान — चाहे मुद्रा हो, बलि विधान हो, मंत्र हो या आपकी माला — कुलवधू की तरह छिपाकर रखने चाहिए। जैसे कुलवधू को छिपाकर रखा जाता है, जैसे गुप्तांग छिपाकर रखे जाते हैं कि सब कुछ दिखे पर वे न दिखें, वैसे ही ये सब चीज़ें गुप्त रखी जाती हैं।

16

विज्ञापन अब भी 24 घंटे में वशीकरण, तलाक या साथी की वापसी का वादा करते हैं, क्योंकि लोग अब भी फँसते हैं

24 घंटे में नतीजे का धंधा

· 20:19–20:58

वक्ता कहते हैं कि पहले भी और अब भी यह चलता है कि हमसे मिलिए, 24 घंटे में वशीकरण होगा, तलाक होगा, आपकी पत्नी या गर्लफ्रेंड 24 घंटे में लौट आएगी। ऐसे विज्ञापन अब भी चल रहे हैं, इसका मतलब लोग अब भी जा रहे हैं, और कहीं न कहीं बात गलत है।

17

"मेरे लिए वशीकरण करो, फलाने पर मारण करो" जैसे अनुरोध न कभी लिए जाते हैं, न कभी किए जाते हैं

"मेरा यह काम कर दो" वाला अनुरोध कभी नहीं लिया जाता

· 20:59–21:17

वे बहुत साफ़ कहते हैं कि "मेरा काम कर दो" वाला यह धंधा — मेरे लिए वशीकरण करो, फलाने पर मारण करो — न कभी लिया जाता है, न कभी किया जाता है।

वक्ता कहते हैं कि काम करवाने का यह धंधा — मेरा यह काम कर दो — बहुत अजीब धंधा है। और यह बात वे बहुत स्पष्टता से कहते हैं: मेरे लिए वशीकरण करो, फलाने पर मारण प्रयोग करो — यह बात न कभी ली जाती है, न कभी की जाती है।

18

जब कहीं और आपके लिए अनुष्ठान हो रहा हो, तब घर पर क्या करें?

अनुष्ठान चलते समय घर में दीपक और प्रार्थना

· 21:18–22:20 · Also a question

आप जहाँ भी अनुष्ठान करवा रहे हों — उनके यहाँ या कहीं और — वे हमेशा कहते हैं कि घर पर कम से कम उस देवी या देवता के सामने दीप और बाती जलाइए, और उनसे प्रार्थना कीजिए कि वे आप पर कृपा करें। वहाँ आपके लिए कोई बड़ा निजी व्यक्तिगत अनुष्ठान नहीं हो रहा। उसमें केवल दस-पंद्रह आहुतियाँ हैं।

19

जब हवन कोई और कर रहा हो, तब भी आपको स्वयं प्रार्थना क्यों करनी चाहिए?

अपना बनाया हुआ प्रारब्ध

· 22:21–22:59 · Also a question

लोग निश्चिंत हो जाते हैं कि कहीं और चल रहा हवन उन्हें ठीक कर देगा। पर वक्ता कहते हैं कि इस कष्ट का कारण वह प्रारब्ध है जो आपने स्वयं बनाया है। कोई दूसरा कितना भी करे, जब तक आप हाथ नहीं जोड़ते, वह चीज़ मुश्किल से ही फल देगी।

20

जिस घर पर संकट हो, उसके लिए श्रावण का मुख्य विधान क्या है?

श्रावण के पहले दिन से श्रावण पूर्णिमा तक रोज़ रुद्राभिषेक

· 23:00–23:40 · Also a question

अगर आपके घर में किसी तरह की उथल-पुथल चल रही है, या आप पर कोई अभिचार है जो साधना करते हुए भी नष्ट नहीं हो रहा, तो इस बार श्रावण के पहले दिन से श्रावण पूर्णिमा तक रोज़ भगवान शिव के मंदिर जाइए और रुद्राभिषेक कीजिए। मंत्र पाठ और अष्टाध्यायी पाठ के साथ पूरा विधि विधान करना न आता हो, तो कोई कठिनाई नहीं।

21

अगर पूरी रुद्राभिषेक विधि का पाठ न आए, तो कौन-सा मंत्र लें?

बारह ज्योतिर्लिंग स्तोत्र सर्वश्रेष्ठ मंत्र

· 23:41–24:10 · Also a question

वे कहते हैं कि बारह ज्योतिर्लिंग सर्वश्रेष्ठ मंत्र हैं। उस स्तोत्र में लिखा है कि केवल बारह ज्योतिर्लिंगों के स्मरण से सात जन्मों के संचित पाप नष्ट हो जाते हैं। और जब पाप नष्ट होता है, तो भूत, प्रेत और अभिचार भी नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि पाप के कारण ही वे पकड़ते हैं।

22

ताँबे के लोटे से दूध कभी क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?

ताँबे में दूध विष जैसा हो जाता है

· 24:11–24:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ताँबे के लोटे में दूध डालकर कभी अभिषेक मत कीजिए, चाहे कोई कितना भी ज़ोर देकर कहे कि इससे शिव प्रसन्न होंगे। ताँबे के लोटे में दूध विष जैसा हो जाता है, और भगवान शिव को इस तरह विष नहीं चढ़ा सकते। पीतल का लोटा, फूला लोटा लीजिए और उससे अभिषेक कीजिए।

23

शिव मंदिर में प्रवेश से पहले क्या किया जाता है?

कर्म साक्षी दीपक और द्वारपाल

· 24:57–25:30 · Also a question

पहले स्नान करके घर का पूजन पूरा कीजिए। फिर शिव मंदिर जाइए और सबसे पहले कर्म साक्षी दीपक जलाइए, जहाँ भी वहाँ दीपदान होता हो। फिर कीर्तिमुख जी और गणपति जी का स्मरण कीजिए, और द्वार पर बैठी शक्तियों का — महाकाल, कीर्तिमुख, नंदी जी, भृंगी जी, इन सब द्वारपालों का, भैरव जी के साथ — और तभी शिव मंदिर में प्रवेश कीजिए।

24

मंदिर के देवताओं को किस क्रम में स्नान कराया जाता है?

गणपति, नंदी, पार्वती, स्कंद, जलाधारी, फिर शिवलिंग

· 25:31–25:56 · Also a question

भीतर पहले नंदी जी को स्नान कराइए — पर अगर गणपति जी का विग्रह स्नान के लिए मिल रहा हो, तो पहले गणपति जी को, फिर नंदी जी को जल से स्नान कराइए। कर्म साक्षी दीपक पहले ही जल चुका होगा। उसके बाद भगवती पार्वती जी, स्कंद जी और कुमार जी को स्नान कराइए। फिर भगवान शिव की जलाधारी को स्नान कराकर शिवलिंग का अभिषेक कीजिए।

25

कितना जल साथ ले जाएँ, और शिवलिंग के ऊपर वाले कलश का क्या करें?

दो लोटे, एक बाल्टी, और कलश भरना

· 25:57–26:25 · Also a question

दो लोटे साथ ले जाइए। पहले से देख लीजिए कि मंदिर में जल की व्यवस्था है। वहीं से जल लेकर सबका अभिषेक कीजिए — एक बाल्टी जल लीजिए और उससे सबका अभिषेक कीजिए, एक-एक लोटा। और शिवलिंग के ऊपर स्थापित कलश में, जिससे उस पर जल गिर रहा है, जल ज़रूर डालिए।

26

शिवलिंग पर जल, दूध और भाँग किस क्रम में चढ़ाए जाते हैं?

जल, फिर ज्योतिर्लिंग नामों के साथ दूध, फिर विजया अभिषेक

· 26:26–26:44 · Also a question

पहले शिव जी को एक लोटा जल, उसके बाद दूध से अभिषेक, जिसमें आप बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम लेते जाइए — "सोमनाथाय नमः, मल्लिकार्जुनाय नमः, महाकालेश्वराय नमः" इत्यादि। उसके बाद अगर भाँग लाए हैं, तो भाँग को जल में मिलाकर उससे विजया अभिषेक कीजिए।

27

अभिषेक के लिए गंधोदक कैसे बनता है?

रोली, पिसा कपूर और अगरु वाला जल

· 26:45–27:07 · Also a question

गंधोदक यानी जल, जिसमें थोड़ी रोली और कपूर का चूर्ण डालें — कपूर हाथ से मसलकर — और अगरु मिलाकर सुगंधित कर दें। अगर गंधोदक बनाकर उससे शिव जी का अभिषेक करें, तो वह सर्वोत्तम है। और दूध न हो, तो यही लेना है।

28

श्रावण के रोज़ के अभिषेक के साथ कितना जप करें?

कम से कम दस माला

· 27:08–27:31 · Also a question

अगर आप जप नहीं कर रहे, और सौ माला का समय नहीं है, तो केवल पाँच माला कीजिए — वे कहते हैं, कम से कम दस माला कीजिए; पाँच माला से क्या होगा, कम से कम दस माला ज़रूर होनी चाहिए। और बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम से अभिषेक अवश्य कीजिए, दूध न हो तो गंधोदक से।

29

अभिषेक के बाद शिव को क्या अर्पित करें?

सिर पर त्रिपुंड, बिल्वपत्र और फूल

· 27:32–27:43 · Also a question

फिर शुद्ध जल से उनका अभिषेक करें। त्रिपुंड आदि बनाकर, जो बिल्वपत्र और फूल आप ले गए हैं, वे भगवान शिव के सिर पर चढ़ाएं।

वक्ता कहते हैं, फिर शुद्ध जल से उनका अभिषेक करें। त्रिपुण्ड्र आदि बनाकर, जो बिल्वपत्र, फूल आदि आप साथ ले गए हैं, वे भगवान शिव के मस्तक पर चढ़ाएं।

30

पूरे श्रावण शिव को कौन सी माला चढ़ाएं?

शिव के लिए नील अपराजिता की माला, और एक पार्वती के लिए

· 27:44–28:06 · Also a question

अगर सावन में रोज़ नील अपराजिता की माला मिल जाए — नीले अपराजिता के फूल की माला — तो वह माला भगवान शिव को ज़रूर पहनाएं। अगर आप दो माला ले जाने में आर्थिक रूप से सक्षम हैं, या आपके पास अपराजिता की बेल है, तो माला खुद बनाकर चढ़ाएं: पूरे श्रावण एक माला भगवान शिव को और एक माँ पार्वती को।

31

इस श्रावण विधान का संकल्प किन कामनाओं के लिए लिया जा सकता है?

कोई भी धर्मयुक्त कामना

· 28:07–28:32 · Also a question

वे कहते हैं, आपकी कोई भी कामना जो धर्मयुक्त हो — कोर्ट केस में जीत, सताने वाले शत्रुओं से रक्षा, प्राणों की रक्षा, धन की प्राप्ति, किसी भी क्षेत्र में विजय, कार्यस्थल की परेशानी, भूत-प्रेत की परेशानी, कोई भी परेशानी। जिस संकल्प से आप पूजन करेंगे, उसमें आपको अत्यधिक सफलता मिलेगी। भगवान शिव ज़रूर कृपा करेंगे।

32

अपराजिता के साथ एक मंडल के संकल्प से सिर्फ़ एक हफ़्ते में मील का पत्थर जैसी सफलता मिली

एक मंडल का संकल्प और एक हफ़्ते में पूरा हुआ काम

· 28:33–29:30

वे बताते हैं कि उन्हें जीवन में एक बहुत बड़ी सफलता मिली, जिसे वे मील का पत्थर मानते हैं। उसमें उन्होंने अपराजिता का बहुत दिव्य तरीके से प्रयोग किया, साथ में भगवती के कुछ विशेष प्रयोग भी। उन्होंने एक मंडल का संकल्प लिया था, और सिर्फ़ एक हफ़्ते बाद उनका काम हो गया — प्रतियोगिता के क्षेत्र में उनसे पहले गए लोगों को जो मिला, उसका दोगुना उन्हें मिला।

33

शिव के श्रृंगार में अपराजिता के कौन से फूल और पत्ते लगा सकते हैं?

नील अपराजिता सबसे श्रेष्ठ, सफ़ेद, गुलाबी और लाल भी चल सकते हैं

· 29:31–29:55 · Also a question

आप अपराजिता के फूलों से, बिल्वपत्र से और अपराजिता के पत्तों से भी उनका श्रृंगार कर सकते हैं। अपराजिता के पत्ते, बेल के पत्ते, और खासकर नील अपराजिता। सफ़ेद अपराजिता भी लगा सकते हैं। दूसरे रंग मिलें — गुलाबी, लाल — तो वे भी लगा सकते हैं, पर नील अपराजिता सबसे श्रेष्ठ है।

34

क्या यह सच है कि अविवाहित पुरुष को शिव पर नील अपराजिता नहीं चढ़ानी चाहिए?

एक रोक जिसे वक्ता प्रमाणहीन मानते हैं

· 29:56–31:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे इसे प्रामाणिक नहीं मानते। आज तक किसी तंत्र ग्रंथ में उन्हें यह प्रमाण के रूप में लिखा नहीं मिला, हालाँकि उनके अध्ययन में कमी हो सकती है। कुछ लोगों से सुनने में आता है कि अविवाहित पुरुष को शिव जी पर नील अपराजिता का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए, पर वे कहते हैं कि इसका उनके पास कोई आधार नहीं है।

35

नील अपराजिता की रोक के लिए शारदा तिलक, श्री विद्यार्णव या कुलार्णव से कोई संदर्भ नहीं दिया गया

शारदा तिलक, श्री विद्यार्णव, कुलार्णव — नील अपराजिता की रोक का कोई संदर्भ नहीं

· 31:40–32:51

वे बताते हैं कि उन्होंने तीन-चार दिन इस बात का पीछा किया, ताकि प्रमाण मिले और मेल खाए तो वे खुद भी लोगों को मना करें। उन्होंने शारदा तिलक से, श्री विद्यार्णव से, कुलार्णव से — कहीं से भी प्रमाण माँगा। कहीं से कुछ नहीं दिया गया। बस इतना कहा कि ऐसा नहीं होता, हमारे गुरुजी ने कहा है कि नहीं होता। कोई प्रमाण नहीं मिला।

36

घर में अपराजिता और पारिजात के पौधों का क्या महत्व है?

भगवती के फूल जो स्वर्ग से आए

· 32:52–33:14 · Also a question

अपराजिता का फूल सीधे भगवती का फूल है — पारिजात और अपराजिता स्वर्ग से आए। जिस घर में ये हों, वहाँ बात ही अलग है: वहाँ शिव और शक्ति के तत्व हमेशा रहते हैं, और योगिनियों का स्थान अपने आप बन जाता है।

37

ऐसे फूलों वाले पौधे उखाड़ने का क्या दोष है?

हरे पेड़ और बेलें उखाड़ने से वंश नष्ट होता है

· 33:15–33:53 · Also a question

ये फूल, ये बेलें, इस तरह के पेड़ कभी उखाड़कर नहीं फेंकने चाहिए — हरे-भरे पेड़ कभी उखाड़कर नहीं फेंकने चाहिए। वे कहते हैं, इसका बहुत बड़ा दोष लगता है: व्यक्ति नष्ट होता है, वंश नष्ट होता है, आर्थिक रूप से पूरा विनाश आ जाता है।

38

अगर मंदिर में और कुछ न कर सकें तो सबसे सरल उपाय क्या है?

रुद्राष्टकम का पाठ, और हो सके तो पंचामृत या दही-गुड़

· 33:54–34:11 · Also a question

जब आप श्रृंगार और बाकी सब कर लें, तो वहाँ सबसे सरल और साधारण विधान, अगर और कुछ न करें, रुद्राष्टकम का पाठ है। बाकी, अगर आप पंचामृत से पूरा अभिषेक कर सकें, या दही और गुड़ से अभिषेक कर सकें, तो जितना हो सके उतना कीजिए।

वक्ता कहते हैं, जब आप श्रृंगार और बाकी सब कर लें, तो वहाँ सबसे सरल और साधारण विधान रुद्राष्टकम् का पाठ है, अगर आप और कुछ भी न करें। बाकी, अगर आप पंचामृत से पूरा अभिषेक कर सकें, अगर दही और गुड़ से अभिषेक कर सकें, तो जितना हो सके उतना कीजिए।

39

एक लोटा जल को सभी समस्याओं का हल बताने वाली फ़ेसबुक पोस्ट को अलौकिक ज्ञान बताया गया

अलौकिक ज्ञान के दावे पर सवाल

· 34:12–34:44

वे कहते हैं कि ऐसे ज्ञान देने वाले आते रहते हैं। आज फ़ेसबुक पर एक आए, जिन्होंने पूरा विषय लिखा था कि एक लोटा जल सभी समस्याओं का हल है। इस पर वे यह भी पूछते हैं: अलौकिक ज्ञान से आपका क्या मतलब है — कि शरीर छोड़कर, यह संसार छोड़कर ज्ञान पाना है?

40

विस्तार से पूजा करने पर लोग ताना मारें तो क्या करें?

भक्ति दिखावे की चीज़ नहीं

· 34:45–35:22 · Also a question

जब आप श्रावण में पूजा और सेवा करेंगे, तो आपकी फूलों की डलिया भरी होगी, और लोग आपके पात्रों में जल, दूध, दही, शहद और घी देखेंगे। ईर्ष्या में वे पूछेंगे कि इतने दिखावे की क्या ज़रूरत है। इसीलिए कहा गया है कि भक्ति दिखावे की चीज़ नहीं है — इससे लोगों में ईर्ष्या पैदा होती है। इसे अनदेखा कीजिए और अपना काम पूरा कीजिए।

41

वे 64 योगिनियाँ कौन हैं जिनके स्तोत्र का पाठ करना चाहिए?

भगवती दुर्गा की प्रमुख 64 योगिनियाँ

· 35:23–36:01 · Also a question

भगवान शिव का पूजन पूरा करने के बाद भगवती की 64 योगिनियों का पूजन करना चाहिए। वे कहते हैं कि वे 64 योगिनी स्तोत्र PDF के रूप में अपलोड करेंगे, जिसमें भगवती दुर्गा की प्रमुख 64 योगिनियों के नाम होंगे — वही प्रमुख योगिनियाँ जिनका स्वरूप महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती और सभी दश महाविद्याओं में बदलता है।

42

64 योगिनियों को कितनी लौंग चढ़ाई जाती है, और किसके साथ?

खप्पर में 128 लौंग और कपूर

· 36:02–36:37 · Also a question

जीवन में किसी भी दैविक बाधा के लिए, शिव जी के पूजन के बाद 64 योगिनियों का पूजन और स्मरण कीजिए। फिर अगर आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं, तो पूरे सावन 64 योगिनियों को दो-दो लौंग चढ़ाइए — यानी 128 लौंग — और जितना हो सके कपूर, नीचे खप्पर में रखकर; कपूर गिनने की ज़रूरत नहीं।

43

शिव मंदिर में योगिनियों का अर्पण कहाँ रखें?

सौ धनुष के घेरे में, जो शिव क्षेत्र है

· 36:38–37:05 · Also a question

इसे शिव जी के अरघे के ठीक बगल में मत रखिए, जहाँ लोग चिल्लाएंगे कि आप उनके हाथ जला देंगे — इसे दूर, किनारे रखिए। जहाँ शिवलिंग स्थापित है, उसके चारों ओर सौ धनुष का पूरा घेरा शिव क्षेत्र कहलाता है। उस पूरे क्षेत्र में किनारे कहीं भी आप 64 योगिनियों के नाम से यह अर्पण कर सकते हैं।

44

योगिनियों का स्थान किस दिशा में है?

पूर्व की ओर मुख करें तो दक्षिण

· 37:06–37:53 · Also a question

अगर आप मंडल देखें कि किस तरफ़ होना चाहिए, तो वह दक्षिण में होगा। अगर हम पूर्व की ओर मुख करें, तो योगिनियों का स्थान दक्षिण की ओर है। इसलिए दक्षिण दिशा में, अगर वहाँ भगवती की योगिनियों के नाम से कोई स्थान हो, तो वहाँ 128 लौंग और कपूर जलाइए — योगिनियों का पाठ करने के बाद।

45

जब समस्या बहुत बड़ी हो और कोई रास्ता न दिखे, तो अष्टमातृकाओं के नाम से आठ जायफल की बलि दी जाती है

अष्टमातृकाओं को आठ जायफल

· 37:54–38:25

अगर आपकी समस्या बहुत बड़ी है और कोई रास्ता नहीं दिख रहा, तो बजट बनाइए: आठ महाशक्तियाँ, महादुर्गाएँ, अष्टमातृकाएँ। दुर्गा सप्तशती में दुर्गा कवच पढ़िए, आपको उनके नाम पता चल जाएंगे। उनके नाम से जायफल की बलि देनी है, उसी पात्र में — मिट्टी का बड़ा पात्र, जिसमें 128 लौंग, कपूर और आठ जायफल हों।

46

क्या अष्टमातृकाओं के लिए आठ अलग दीपक जला सकते हैं?

आठ दीपक, पर तीस दिन का बजट

· 38:26–38:31 · Also a question

वे कहते हैं, चाहें तो आप आठ अलग दीपक भी जला सकते हैं, पर आपका बजट बढ़ जाएगा — पूरा काम तीस दिन करना है। यह मंदिर में कीजिए।

वक्ता कहते हैं, चाहें तो आप उनके लिए आठ अलग दीपक भी जला सकते हैं। पर आपका बजट बढ़ जाएगा, क्योंकि यह सब तीस दिन करना है। यह मंदिर में कीजिए।

47

क्या यह सच है कि जायफल की बलि देने से नुकसान होता है?

जायफल बलि के ख़िलाफ़ डर फैलाने को नकारना

· 38:32–39:12 · Also a question

वक्ता पहले से यह आपत्ति सोचते हैं कि लोगों ने सुना है कि जायफल की बलि देने से नुकसान होता है, अपनी मनगढ़ंत चीज़ें नहीं करनी चाहिए, जायफल की बलि नहीं देनी चाहिए। वे जवाब देते हैं, ऐसे चलेंगे तो चलना ही मुश्किल हो जाएगा। फिर कहेंगे कि घी का दीपक मत जलाओ, सिर्फ़ तेल का; घर में शिव पूजा मत करो; शिवलिंग रखने से पैरों में लकवा हो जाता है। इतना अंधविश्वासी बनने की कोई ज़रूरत नहीं।

48

जो घर अपनी परंपरागत बलि छोड़ देते हैं, उनका क्या होता है?

बारह-पंद्रह साल बाद विनाश

· 39:13–40:03 · Also a question

वे कहते हैं, लोग धीरे-धीरे बकरे काटना, छाग बलि और महिष बलि बंद कर रहे हैं। दूसरे अपने घरों में आवाज़ उठाते हैं कि देवी-देवताओं का अपमान हो रहा है। बारह-पंद्रह साल ठीक चलने के बाद वे बर्बाद होने लगते हैं, और फिर दोष देते हैं कि अनुष्ठानों से कोई लाभ नहीं हो रहा।

49

बलि बंद होने के बाद कुल की शक्तियाँ कितना इंतज़ार करती हैं?

कम से कम बारह साल की क्षमा

· 40:04–40:37 · Also a question

सब कुछ मिल जाने के बाद कोई आपको यह विचार दे देता है कि गला नहीं काटना चाहिए, जीव हत्या नहीं करनी चाहिए, यह दोष लगेगा — जबकि एक व्यक्ति पचास साल से, दो-तीन पीढ़ियों से यह देता आ रहा है। छोड़ने के बाद वे शक्तियाँ बारह-पंद्रह साल इंतज़ार करेंगी; उनकी क्षमा कम से कम बारह साल चलेगी, और क्योंकि दो-तीन पीढ़ियों से आप पूजा करते आए हैं, कुछ पुण्य जमा होगा।

50

क्या इसकी जगह अपने खून की बलि दी जा सकती है?

विधि पता हो तो अपने खून की बलि दीजिए

· 40:38–40:48 · Also a question

कुछ लोग कहेंगे, तो अपने खून की बलि दो। अगर आपमें सामर्थ्य है और विधि पता है, तो उन्हें मनाइए और अपने खून की बलि देते रहिए, अपने हृदय से निकालकर दीजिए। वे कहते हैं, खून की बलि कीजिए — इसमें कोई मनाही नहीं है।

वक्ता बताते हैं, कुछ लोग कहेंगे कि अपने खून की बलि दो। अगर सामर्थ्य है, अगर विधि पता है, तो उन्हें मनाइए और अपने खून की बलि देते रहिए; अपने हृदय से निकालकर दीजिए। खून की बलि कीजिए — इसमें कोई मनाही नहीं है।

51

बलि छोड़ने के बाद जब कुल शक्तियों का रक्षा कवच हट जाता है, तब क्या होता है?

पूर्वजों की शक्तियों की रक्षा हटने पर रोग, और शरीर पर प्रेत-पिशाच

· 40:49–41:28 · Also a question

बाद में, जब आप नहीं देते, तो वे खुद आपके खून की बलि लेने लगती हैं। तब आपके घर में रोगों का पूरा आक्रमण होता है, रक्षा कवच पूरी तरह हट जाने पर प्रेत और पिशाच शरीर पर खेलने लगते हैं, और विनाश शुरू हो जाता है। फिर साधना करते रहिए; ओझा, सोखा, पंडित और तांत्रिकों को कोसते रहिए कि उनके पास कोई सिद्धि नहीं।

52

अगर कुल देवताओं को जान-बूझकर छोड़ दिया जाए तो क्या होता है?

आपकी रक्षा में कोई खड़ा नहीं होता

· 41:29–41:54 · Also a question

वे कहते हैं, अगर आपके रक्षक आपके पीछे खड़े नहीं हैं — अगर आपने जान-बूझकर अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा और सेवा बंद कर दी, अगर जान-बूझकर उनके रीति-रिवाज बदल दिए — तो आपकी रक्षा में कोई खड़ा नहीं होगा। आप बस बर्बाद हो जाएंगे।

वक्ता कहते हैं, अगर आपके रक्षक आपके पीछे खड़े नहीं हैं; अगर आपने जान-बूझकर अपनी कुलदेवी और कुल देवताओं की पूजा और सेवा बंद कर दी; अगर जान-बूझकर उनके रीति-रिवाज बदल दिए — तो आपकी रक्षा में कोई खड़ा नहीं होगा। आप बस बर्बाद हो जाएंगे।

53

क्या नींबू की बलि देने से आपके वंश को नुकसान होता है?

नींबू बलि और हिंसा पर दोहरा मापदंड

· 41:55–42:52 · Also a question

लोग अब श्मशान जाते हैं, चिता पर बैठकर जप करते हैं, वीडियो बनाते हैं, और वहाँ से कहते हैं कि अगर आप नींबू की बलि देंगे तो आपके वंश को नुकसान होगा। अनुभव वाले वीडियो बनते हैं कि किसी साधक ने रात को दी और सुबह तक उसके घर में किसी की जान चली गई — नींबू की बलि से। वहीं दुनिया मुर्गे और बकरे खरीदकर घर में काटती है, और उस पर कोई दोष नहीं बताया जाता।

54

इस अभियान का लक्ष्य बलि शब्द को ही बदनाम करना है, जिसके बाद बात ख़त्म

बलि शब्द को ही बदनाम करना

· 42:53–43:21

वे कहते हैं, यानी किसी भी तरह बलि शब्द को ही बदनाम कर दो। बलि शब्द को बदनाम कर दो और बात ख़त्म। और जो बड़े यूट्यूबर शास्त्र का प्रमाण देकर इस विषय का पूरा प्रचार करते हैं, वे वही कर रहे हैं जो उन्होंने वीडियो की शुरुआत में कहा था — दर्शन के सिद्धांत को क्रियात्मक सिद्धांत में ठूँसकर खिचड़ी पकाना, और आपको मना लेना कि यह मत करो।

55

जो शास्त्र का हवाला देते हैं, क्या वे खुद शास्त्र की कसौटी पर टिकेंगे?

चेकपॉइंट, और चीट कोड

· 43:22–44:21 · Also a question

वे पूछते हैं, शास्त्रोक्त दृष्टि से जितने भी प्रामाणिक विषय हैं, आपको क्या लगता है, ठीक उस विषय पर कौन चल रहा है? अगर उस स्तर से प्रतिवाद हो तो झगड़ा हो जाएगा। अगर हर विषय को चेकपॉइंट की तरह पूछा जाए — आप इस संप्रदाय में हैं, क्या यह विषय सिद्ध कर सकते हैं? — तो सिद्ध नहीं होगा। वहाँ वे चीट कोड लगाने लगेंगे, कहेंगे कि इसकी जगह हम यह करते हैं।

56

तंत्र के आलोचक वेदों का बचाव करते हुए तांत्रिक प्रमाण को क्यों नकारते हैं?

वे आलोचक जो वैदिक और पौराणिक प्रमाण मानते हैं पर तांत्रिक प्रमाण नहीं

· 44:22–44:52 · Also a question

वे कहते हैं, जब उनसे ऐसे सवाल पूछे जाते हैं, तो वे जवाब देते हैं कि पुराण हर कोई नहीं समझ सकता, वेदों और उपनिषदों के विषय ऐसे नहीं, वैसे हैं। वे यह भी मान लेते हैं — पर फिर वे तांत्रिक बातों को प्रमाण मानते ही नहीं, सीधे कह देते हैं कि यह विषय ठीक नहीं। वे कहते हैं, आगमोक्त विषय समय और परंपरा के साथ बदलते गए, और हटाए जाते रहे।

57

क्या आज की प्रथाएँ द्वापर युग में थीं?

सोखा और ओझा का काम बाद में आया

· 44:53–45:26 · Also a question

वे बताते हैं कि द्वापर युग में, श्री कृष्ण के समय, कहीं सोखा और ओझा का काम नहीं था। यानी किसी को भूत पकड़ ले और सोखा झाड़-फूंक करके उसे हटाए — ऐसा नहीं था। यह विषय वहाँ था ही नहीं। उस समय के तांत्रिक अलग थे, शक्तिशाली थे। उनकी क्षमता दूसरे स्तर की थी। आज के युग के साथ ये बातें धीरे-धीरे बदलीं।

58

बहू के घर आने पर चौखट पर बलि क्या है?

बहू का चौखट पर बलि लांघना

· 45:27–46:19 · Also a question

विधान यह जानिए: जब विवाह हो जाता है और बहू घर पर उतरती है, तो पहले बलि चढ़ती है। वह उस बलि को, उस रक्त को, चौखट पर लांघती है। वे कहते हैं कि वे तंत्र ग्रंथों से प्रमाण दे सकते हैं कि चौखट पर किन-किन शक्तियों का वास होता है — द्वार पूजन के समय चौखट के पास इतनी शक्तियाँ रहती हैं, हमेशा, रोज़।

59

64 योगिनी पूजन में दी जाने वाली बलि का सार क्या है?

लौंग-कपूर, जायफल, और ज़रूरत हो तो ही नींबू

· 46:20–46:52 · Also a question

वहाँ जो लौंग-कपूर आप जलाते हैं, वही बलि है, वही देनी है। अष्ट दुर्गा और अष्ट मातृकाओं के नाम से जायफल की बलि तब देनी है जब परेशानी ज़्यादा हो। और अगर और ज़्यादा असर चाहिए, तो सावन में नींबू की बलि भी दे सकते हैं। पर वे कहते हैं कि केवल जायफल की बलि ही काफ़ी से ज़्यादा है। इस बार सावन जो 29 या 30 दिन चलेगा, उसमें यह प्रयोग आपको उम्मीद से बढ़कर सफलता देगा।

60

अगर कुल देवता बंधन में हों या नाराज़ हों तो क्या करें?

कर्म साक्षी दीप के साथ कुल देवताओं के लिए दीपक

· 46:53–47:36 · Also a question

अगर किसी के कुल देवी-देवता बंधन में हैं, या उसे पता है कि कुल देवता प्रसन्न नहीं, नाराज़ हैं और बार-बार परेशानी आ रही है, या उसे उनके बारे में कुछ पता ही नहीं है — तो जिस समय आप शिव जी के अभिषेक के लिए कर्म साक्षी दीप जलाएँ, उसी समय कुल देवी-देवताओं के नाम से भी एक दीपक जलाएँ और प्रार्थना करें।

61

सावन में शिव मंदिर में जप इतना ज़्यादा फलदायी क्यों है?

सावन में सभी शक्तियाँ शिवलिंग के पास रहती हैं

· 47:37–48:19 · Also a question

सावन के महीने में सभी शक्तियाँ शिव क्षेत्र में वास करती हैं — कोई भी महाशक्ति, कोई भी उपशक्ति, किसी भी प्रकार के उपदेवता, सब शिवलिंग के पास, महाशिव के पास, उनके क्षेत्र के सबसे नज़दीकी हिस्से में रहते हैं। सब उनकी सेवा-पूजा करते हैं। इसीलिए सावन के माहात्म्य में कहा गया है कि सावन में शिव क्षेत्र में किसी भी मंत्र-तंत्र का जप, या किसी मंत्र का पुरश्चरण, दूसरे महीनों से अनंत गुना फल देता है। सिद्धि सबसे जल्दी मिलती है।

62

किस शिव मंत्र में विनियोग या न्यास की ज़रूरत नहीं?

शांभ शिव का मंत्र

· 48:20–48:39 · Also a question

शिव जी के पंचाक्षरी विधान के अलावा, जो चैनल पर पूरे माहात्म्य के साथ है, शांभ शिव का मंत्र है — "श्री शांभ शिवाय नमः" वाला मंत्र। वे कहते हैं कि इसमें आपको विनियोग या न्यास की कोई खास ज़रूरत नहीं है। आप सीधे इसका जप आदि कर सकते हैं।

63

सावन में पहले पंचाक्षरी मंत्र की सिद्धि, साथ में माला मंत्र भी चलाएँ

पहले पंचाक्षरी मंत्र की सिद्धि, साथ में माला मंत्र

· 48:40–49:11

वे दूसरी साधनाओं के लिए दो-तीन वीडियो और डालेंगे। कल माला मंत्र के कुछ विशेष अनुभवों का वीडियो, और माला मंत्र सिद्ध करने का विधान भी डालेंगे। जो पंचाक्षरी का बहुत ज़्यादा जप नहीं कर रहे, वे साथ में माला मंत्र भी चला सकते हैं। पर पहली प्राथमिकता पंचाक्षरी मंत्र को सिद्ध करने की रखें।

64

क्या दूसरे देवता की उपासना करने वाले गृहस्थ को भी श्रावण में शिव अभिषेक करना ज़रूरी है?

श्रावण में शिव अभिषेक अनिवार्य है

· 49:12–49:51 · Also a question

आप किसी भी महाशक्ति की उपासना करें — भगवान दत्त के एकाक्षरी का जप कर रहे थे तो वह करें, भैरव जी का अनुष्ठान कर रहे थे तो वह करें। पर साथ में भगवान शिव का अभिषेक ज़रूर होना चाहिए। वक्ता कहते हैं कि अगर कोई गृहस्थ सावन के महीने में भगवान शिव का अभिषेक नहीं करता, तो पूरे संसार में उससे ज़्यादा अभागा प्राणी कोई नहीं।

65

शिवलिंग का शीश कभी खाली क्यों नहीं छोड़ना चाहिए?

ब्रह्मांड का राजा बिना मुकुट के न रहे

· 49:52–50:31 · Also a question

वे कहते हैं कि एक मुख्य बात वे हमेशा बताते आए हैं: भगवान शिव का शीश, शिवलिंग का शीश, कभी खाली नहीं रखा जाता। जहाँ घर में शिवलिंग विराजमान है, वहाँ या तो चाँदी का मुकुट बनवा कर रखें, या चाँदी का बेलपत्र, या रोज़ उन पर फूल और बेलपत्र चढ़ाएँ। और कुछ न हो, तो अक्षत — पूजन वाले साबुत चावल — ज़रूर रखें।

66

क्या अपने आराध्य के सामने टोपी, हैट या पगड़ी पहननी चाहिए?

ज्योतिर्लिंग या शक्ति क्षेत्र में ढका सिर

· 50:32–51:17 · Also a question

वे कहते हैं कि उनके विचार में अपने आराध्य के सामने कभी पगड़ी या टोपी पहन कर नहीं जाना चाहिए। अगर आप इस भाव से रुद्राक्ष का मुकुट पहनें कि सिर पर रुद्राक्ष धारण कर रहे हैं, तो वह अलग बात है। पर पगड़ी बाँध कर, टोपी पहन कर, हैट पहन कर जाना — लोग तीर्थ क्षेत्रों में हैट पहनते हैं, कामाख्या में भी हैट पहन कर अंदर दर्शन को चले जाते हैं। कोई रोकता नहीं, पर यह अपराध है।

67

शिखा क्यों रखनी और बाँधनी चाहिए?

शिखा में गाँठ के बिना पुण्य नहीं रुकता

· 51:18–52:02 · Also a question

वे कहते हैं कि शिखा बंधी होनी चाहिए — स्त्री हो या पुरुष, सबकी शिखा बंधी होनी चाहिए। शायद दस प्रतिशत लोग ही शिखा रखते हैं। कहा जाता है कि शिखा के बिना सूक्ष्म व्यवस्था में पुण्य रुकता ही नहीं। आप पुण्य कर रहे हैं, पर उसे रोकने के लिए शिखा में गाँठ होनी चाहिए। अगर आप गाँठ नहीं लगाते और शिखा नहीं रखते, तो आपका पाँच लाख या पच्चीस लाख का अनुष्ठान कहाँ टिकेगा?

68

शिखा में कौन-सी शक्ति विराजमान होती हैं?

शिखा में भगवती अपराजिता

· 52:03–52:44 · Also a question

वे कहते हैं, शिखा का मंत्र देखिए: उसमें हम भगवती से कहते हैं कि माँ, शिखा में विराजमान हों। तंत्रोक्त रूप में शिखा में जो शक्ति मुख्य रूप से मानी जाती हैं, वे भगवती अपराजिता हैं — माँ अपराजिता शिखा में विराजमान होती हैं। अगर आप शिखा ही नहीं रखते, तो आपके पुण्य की रक्षा किससे होगी?

69

दर्शन के लिए स्त्रियाँ सिर कैसे ढकें?

सिर पर पल्लू

· 52:45–53:01 · Also a question

स्त्रियों, माताओं-बहनों को सिर पर पल्लू रख कर जाना चाहिए। उन्हें खुले सिर नहीं जाना चाहिए। पुरुष के लिए गमछे से सिर ढकना अलग बात है, और वह भी हर जगह ज़रूरी नहीं। पर किसी तरह का मुकुट या ऐसी कोई चीज़, और हैट नहीं पहनना चाहिए।

70

कुछ लोग क्यों कहते हैं कि तीर्थ यात्रा से उन्हें नुकसान हुआ?

अपराध लगता है, फिर दोष देवता पर डाला जाता है

· 53:02–53:42 · Also a question

वे कहते हैं, यही अपराध लगता है, और बाद में लोग कहते हैं कि हम तीर्थ यात्रा पर गए और फिर यह हुआ, वह हुआ, यह बेकार है, झूठ है, तुम पाखंड फैलाते हो। वे जवाब देते हैं कि पाखंड ऐसे लोग ही फैलाते हैं — जो ठीक से यात्रा नहीं करते, नियम-निषेध नहीं मानते, और बाद में देवी-देवताओं और नियम बताने वालों पर दोष डालते हैं।

71

पूरे साल के रक्षा वाले शिव प्रयोग, जैसे शिव रक्षा स्तोत्र प्रयोग, सावन में पूरे किए जा सकते हैं

साल के रक्षा प्रयोग सावन में करना

· 53:43–54:12

चैनल पर शिव जी से जुड़े कई प्रयोग दिए गए हैं — जैसे शिव रक्षा प्रयोग, शिव रक्षा स्तोत्र का प्रयोग, जो बहुत ज़्यादा परेशानी होने पर शिवलिंग के पास जाकर करना होता है। अगर पूरे साल में रक्षा के लिए वे प्रयोग करने का समय नहीं निकाल पाते, तो सावन के महीने में वह प्रयोग ज़रूर करें।

72

बटुक भैरव सतनाम के 40,000 जप से क्या मिलता है?

छाया रूप में बटुक भैरव का प्रकट होना

· 54:13–54:40 · Also a question

जिन्होंने भगवान बटुक भैरव जी के स्तोत्र और सतनाम को सिद्ध किया है, उसका पुरश्चरण किया है: माना गया है कि 40,000 पुरश्चरण से, 40,000 जप से, बटुक भैरव जी छाया रूप में प्रकट होते हैं। और वह दृष्टि देते हैं जिससे उनके उस रूप को देखने की क्षमता मिलती है जिसका तेज हम सह सकें। पर वे कहते हैं, केवल तभी जब ठीक से किया जाए।

73

जिन्होंने पाँच या ग्यारह हज़ार जप कर लिया है, वे पूरे सावन शिव मंदिर के पास रोज़ 108 करें

पूरे सावन शिव मंदिर के पास रोज़ 108

· 54:41–55:15

अगर आप 5,000 या 11,000 जप कर चुके हैं, तो सावन के महीने में शिव मंदिर के पास उनके नाम से दीपक आदि जला कर अपनी इच्छा के साथ वह जप करें — जो भी आपकी इच्छा हो: रक्षा के लिए कर रहे थे, शत्रु नाश के लिए, किसी जगह जीत के लिए। पूरे सावन रोज़ 108 करते जाइए, जिस भी समय — सुबह, शाम या रात — वहाँ आपका होना बन सके।

74

क्या घर में सजावट वाले शिवलिंग की भी सावन में पूजा करनी चाहिए?

शिवलिंग के आकार की कोई वस्तु बिना पूजा के न रहे

· 55:16–55:36 · Also a question

सावन के महीने में घर में शिवलिंग के आकार की कोई भी वस्तु बिना पूजा के नहीं रहनी चाहिए। किसी भी वस्तु से उनका मतलब है कि अगर आपने सजावट के लिए शिवलिंग रखा है और उसकी पूजा नहीं करते, तो कम से कम उसे धूप-दीप दिखाएँ। महाशिवरात्रि और सावन का बहुत बड़ा माहात्म्य है, इन्हें कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।

75

शनि महादशा जैसी ग्रह की समस्या में क्या करें?

शिव मंदिर में शनि का माला मंत्र या शनि अष्टक

· 55:37–56:01 · Also a question

अगर ग्रह से जुड़ी कोई समस्या चल रही है — आपको पता है कि शनि की महादशा चल रही है, वे मारकेश हैं और आपकी स्थिति बिगड़ने वाली है या बिगड़ चुकी है — तो ऐसे समय सावन में भगवान शिव के पूजन के साथ, उनकी प्रसन्नता के लिए शिव मंदिर में ही शनि देव के माला मंत्र या शनि अष्टक का जप करें।

76

शिव मंदिर में किए जप से शनि क्यों प्रसन्न होते हैं?

शनि शिव के शिष्य और महाकाल का रूप

· 56:02–56:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान शनि देव भगवान शिव के शिष्य हैं। उन्हें भी महाकाल का रूप माना गया है — कि काल ही शनि के रूप में है। इसलिए शिव मंदिर में किया गया आपका जप उनकी प्रसन्नता का कारण बनेगा। वे बहुत जल्दी अपनी क्रूर दृष्टि को सौम्य दृष्टि में बदल देंगे।

वक्ता कहते हैं, भगवान शनि देव भगवान शिव के शिष्य हैं। उन्हें भी महाकाल का रूप माना गया है — कि काल ही शनि के रूप में है। इसलिए शिव मंदिर में आपके द्वारा किया गया जप उनकी प्रसन्नता का कारण बनेगा। वे बहुत जल्दी अपनी क्रूर दृष्टि को सौम्य दृष्टि में बदल देंगे।

77

किसी भी ग्रह की बाधा के लिए श्रावण में क्या कर सकते हैं?

किसी भी ग्रह का कवच, स्तुति, सहस्रनाम और सतनाम

· 56:23–57:03 · Also a question

इसी तरह, अगर किसी और ग्रह की कोई बाधा है — मंगल देव की, शुक्र की, या किसी और ग्रह की — तो आप अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार उनके कवच, स्तुति, सहस्रनाम या सतनाम का, या चैनल पर पहले से प्रसारित उन ग्रहों के पौराणिक और तंत्रोक्त मंत्रों का जप कर सकते हैं। रोज़ 10 या 100 माला करना ज़रूरी नहीं। कम से कम पाँच या दस माला रखें, और वह भी न हो सके तो पूरे श्रावण कम से कम एक माला करें।

78

आठवें भाव में राहु के साथ चल रही राहु महादशा बहुत ज़्यादा भ्रम की स्थिति बनाती है

आठवें भाव में राहु और उससे होने वाला भ्रम

· 57:04–57:32

वे एक व्यक्ति के बारे में बताते हैं जिससे उस दिन बात हो रही थी: राहु आठवें भाव में था, और जहाँ तक उन्हें याद है, कुंडली शायद सिंह लग्न की थी। स्थिति बहुत ज़्यादा भ्रम की थी। ऐसी स्थिति में, जहाँ राहु की महादशा चल रही हो और वह भ्रम दे रही हो, शिव जी की पूजा अनिवार्य है — करनी ही है।

79

राहु को प्रसन्न करने के लिए किस शक्ति की पूजा होती है?

राहु की माता भगवती सिंहिका

· 57:33–57:59 · Also a question

राहु देव की प्रसन्नता के लिए, राहु की माता कही गई भगवती सिंहिका के मंत्र का विधान चैनल पर है। चाहें तो दोनों के मंत्रों का जप, एक-एक माला भी, शिव मंदिर में करें, और प्रार्थना करें कि उनकी दृष्टि सौम्य हो, उनकी शुभ कृपा मिले और यह भारी भ्रम दूर हो।

80

ग्रह की पूजा उनकी माता या पत्नी के साथ क्यों करें?

दस गुना असर

· 58:00–58:17 · Also a question

अगर आप किसी ग्रह की सेवा-पूजा उनकी माताओं के साथ, उनकी पत्नियों के साथ करते हैं, तो वे कहीं ज़्यादा जल्दी प्रसन्न होते हैं। वे कहते हैं, मान लीजिए कि वे दस गुना असर देंगे: जो असर दस माला में आना था, वह एक-एक माला में आने लगेगा। यह प्रयोग भी आप श्रावण के समय कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं, अगर आप किसी ग्रह की सेवा-पूजा उनकी माताओं के साथ, उनकी पत्नियों के साथ करते हैं, तो वे कहीं ज़्यादा जल्दी प्रसन्न होते हैं। मान लीजिए कि वे दस गुना असर देंगे। जो असर दस माला में मिलना था, वह एक-एक माला में मिलने लगेगा। तो यह प्रयोग भी आप श्रावण के समय कर सकते हैं।

81

अगर घर में पूजी जाने वाली कोई उग्र शक्ति नाराज़ हो तो क्या करें?

नाराज़ शक्ति को शांत करने के लिए दही-गुड़ अभिषेक और ज्योत

· 58:18–58:42 · Also a question

अगर आपके घर में कोई उग्र शक्ति पूजी जाती है और आपसे कोई अपराध हो गया है जिससे वे नाराज़ हैं और मान नहीं रहीं — तो श्रावण में भी दही और गुड़ से शिव जी का अभिषेक करके, बाकी सारा विधान करके, और ज्योत जला कर, आप उनके नाम मंत्र का जप, या जो भी जप-तप करते हैं, वह कर सकते हैं। उससे भी वे सौम्य होती हैं, उनकी उग्रता खत्म होती है, और वे प्रसन्न होती हैं।

82

नाग पंचमी और श्रावण सप्तमी के पूजन से पहले ही शिव जी के पूजन से उन्हें मना लेने पर समय रहते उनकी कृपा मिलती है

शिव पूजन से पहले ही उन्हें मना लेना

· 58:43–58:58

वे कहते हैं कि नाग पंचमी, श्रावण सप्तमी आदि के पूजन आएँगे, और उनमें विशेष पूजन ज़रूर देना है। पर अगर उससे पहले शिव जी का पूजन करके इन्हें मना लिया जाए, तो कोई काम बिगड़ रहा हो तो समय रहते उनकी कृपा भी मिल जाती है।

वक्ता कहते हैं, अब नाग पंचमी, श्रावण सप्तमी आदि के पूजन आएँगे, और उनमें विशेष पूजन ज़रूर देना है। पर अगर उससे पहले शिव जी का पूजन करके इन्हें मना लिया जाए, तो कोई काम बिगड़ रहा हो तो समय रहते उनकी कृपा भी मिल जाती है।

83

क्या बड़े अनुष्ठान के बाद रोज़ की सेवा-पूजा छोड़ देनी चाहिए?

बड़े अनुष्ठान के बाद नित्य पूजन कभी न छोड़ें

· 58:59–59:30 · Also a question

वे कहते हैं, कोई भी अनुष्ठान करवाने के बाद अपनी सेवा-पूजा कभी न छोड़ें। कभी यह नहीं कहना चाहिए कि अब तो महामृत्युंजय का सवा लाख जप करवा लिया, अब रोज़ शिव जी का अभिषेक करने की क्या ज़रूरत। यह गलती मत कीजिए। बड़े अनुष्ठान ने आपकी बड़ी विपत्तियाँ काट दीं, पर अगर आप नित्य पूजन छोड़ देंगे, तो आपके लिए बनी रक्षा की पूरी ऊर्जा को चलने का रास्ता नहीं मिलेगा।

84

रोज़ की पूजा छोड़ने पर आभामंडल का क्या होता है?

सूक्ष्म शरीर में शुभ ऊर्जा ही शुभ को खींचती है

· 59:31–1:00:06 · Also a question

आपके सूक्ष्म शरीर में शुभ ऊर्जाएँ होने से ही शुभ, शुभ को खींचता है। अगर आप पूजन-पाठ छोड़ देंगे, तो विचार अशुद्ध होने में देर नहीं लगती। फिर आपका आभामंडल नकारात्मक ऊर्जाओं से भर जाएगा, और आपने जो कुछ किया और करवाया, वह सब खत्म हो जाता है।

85

बटुक भैरव के त्रिशूल पर नींबू कैसे लगाएँ?

खड़ा लगाएँ, लिटाकर नहीं

· 1:00:07–1:00:23 · Also a question

पूछा गया कि क्या बटुक भैरव के त्रिशूल पर नींबू खड़ा लगाना है। वक्ता कहते हैं कि हाँ, खड़ा ही लगेगा। उन पर इसे लिटाकर नहीं लगाया जा सकता।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या बटुक भैरव के त्रिशूल पर नींबू खड़ा करके लगाना है। वक्ता कहते हैं कि हाँ, खड़ा ही लगेगा। उन पर इसे लिटाकर नहीं लगाया जा सकता।

86

क्या सरकारी आरक्षण की श्रेणी से किसी का वर्ण तय होता है?

वर्ण जन्म से पता होता है, सरकार तय नहीं करती

· 1:00:24–1:01:06 · Also a question

एक जाति राजस्थान में SC, मध्य प्रदेश में OBC और महाराष्ट्र में सामान्य है; क्या वे शूद्रों में गिने जाएँगे? वक्ता कहते हैं कि जिसके बारे में पूछ रहे हैं, उसे खुद पता होगा कि वह किस जाति में है। सरकार थोड़े ही तय करेगी कि आप ब्राह्मण हैं, क्षत्रिय हैं, वैश्य हैं या शूद्र। आप जन्म से जानते हैं कि आप किस जाति के हैं।

87

सेवा और पूजा में वर्ण क्यों मायने रखता है?

कौन-सा मंत्र, कौन-सी विधि — अपने ही लिए

· 1:01:07–1:02:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो सेवा-पूजा की जाती है, वह वर्ण के अनुसार होती है — कौन-सा मंत्र हो, क्या विधि हो — ताकि हमें लाभ मिले और दोष न लगे। यह अपने ही लिए है। अगर आप उल्लंघन करें तो कोई आपको रोकने नहीं जाएगा। कोई गला नहीं दबाएगा कि यह मंत्र मत करो। खूब कीजिए। पर जब शास्त्रोक्त विधान की मर्यादाओं का इतना खुला अपमान होता है और आप उन मर्यादाओं की सीमा लाँघते हैं, तो उसका बुरा फल भी उसी तरह आएगा।

88

श्रावण में दरिद्रता नाश के लिए कौन-सी साधना करें?

अखंड लक्ष्मी के लिए पंचाक्षरी का पुरश्चरण

· 1:02:27–1:03:00 · Also a question

पूछा गया कि श्रावण में दरिद्रता के नाश के लिए कौन-सी साधना करें। वक्ता कहते हैं: पंचाक्षरी का पुरश्चरण कीजिए। अखंड लक्ष्मी मिलती है। वे कहते हैं कि अगर महादेव प्रसन्न हों तो सोचिए — उनकी कृपा से कुबेर जी धन के स्वामी और देवताओं के वित्त मंत्री बने। उनकी प्रसन्नता से क्या असंभव हो सकता है?

89

घर में स्थापित शिवलिंग किस चीज़ का होना उचित है?

स्फटिक और नर्मदेश्वर, काँच नहीं

· 1:03:01–1:03:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि स्फटिक का शिवलिंग स्थापित कर सकते हैं। काँच का तो स्थापित करना ही नहीं चाहिए — काँच का स्थापित मत कीजिए। स्फटिक का कर सकते हैं, नर्मदेश्वर जी कर सकते हैं।

एक श्रोता को उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि स्फटिकस्फटिक की माला, जब साधक की कुंडली में शुक्र शुभ हो और छठे, आठवें या बारहवें भाव में न हो, तब रुद्राक्ष के स्थान पर चुनी जाती है। का शिवलिंग स्थापित कर सकते हैं। काँच का तो स्थापित ही नहीं करना चाहिए। काँच का स्थापित मत कीजिए। स्फटिक का कर सकते हैं, नर्मदेश्वर कर सकते हैं।

90

देवता का तर्पण विग्रह पर करें या यंत्र पर?

यंत्र या सुपारी पर तर्पण

· 1:03:11–1:03:44 · Also a question

पूछा गया कि देवी-देवताओं की शांति के लिए जो तर्पण होता है, क्या वह उसी देवता की प्रतिमा या विग्रह पर होता है। वक्ता कहते हैं कि यंत्र पर भी होता है — यंत्र पर तर्पण कीजिए, या सुपारी पर कीजिए। विग्रह पर करें तो नियम अलग हो जाता है, और यह सवाल आता है कि विग्रह कितना बड़ा हो।

91

अगर छिन्नमस्तिका का शक्तिपीठ पास में हो तो क्या करें?

उनका स्तोत्र, सतनाम, स्तुति और सहस्रनाम

· 1:03:45–1:04:05 · Also a question

अगर छिन्नमस्तिका माँ का शक्तिपीठ पास में है, तो उनके स्तोत्र, सतनाम और स्तुति का उपयोग कीजिए, सहस्रनाम का उपयोग कीजिए, और पाठ करके उन्हें प्रसन्न कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि अगर छिन्नमस्तिका माँ का शक्ति पीठ पास में है, तो उस स्थिति में उनके स्तोत्र, सतनाम, स्तुति आदि का उपयोग कीजिए, सहस्रनाम का उपयोग कीजिए, और पाठ करके उन्हें प्रसन्न कीजिए।

92

पंचाक्षरी के लिए किस रंग का आसन हो?

पीला, सफ़ेद या कुश का आसन; लाल भगवती के लिए

· 1:04:06–1:04:34 · Also a question

पूछा गया कि क्या पंचाक्षरी जप के लिए सफ़ेद आसन ज़रूरी है, और क्या वह लाल आसन चल सकता है जिस पर वे दूसरी दिव्य साधनाएँ करते हैं। वक्ता कहते हैं कि रंग के अनुसार साधना चुनने का विषय पहले से चला आ रहा है। इसलिए पीला आसन, सफ़ेद आसन या कुश का आसन ही लीजिए। लाल आसन भगवती के लिए है, और भगवती में भी उनके रूपों के भेद से रंग बदल जाते हैं।

93

रुद्रगण की साधना कब करें?

पहले दिन शिव मंदिर में, या सभी दिन

· 1:04:35–1:04:39 · Also a question

रुद्रगणों की साधना पहले दिन ही शिव मंदिर में कीजिए; और अगर सभी दिन करें तो सबसे उत्तम है।

वक्ता कहते हैं कि रुद्रगणों की साधना पहले दिन ही शिव मंदिर में कीजिए। और अगर सभी दिन, सभी दिन करें, तो सबसे उत्तम है।

94

क्या पंचाक्षरी विधि में काली का त्रिलोक विजयी कवच जोड़ सकते हैं?

पंचाक्षरी साधना में काली का कवच और 108 नामावली

· 1:04:40–1:05:06 · Also a question

पूछा गया कि माँ काली में अधिक श्रद्धा होने के कारण क्या पंचाक्षरी विधि के साथ रात में माँ काली के त्रिलोक विजयी कवच का जप कर सकते हैं, और क्या पंचाक्षरी साधना में माँ दुर्गा की जगह माँ काली की 108 नामावली पढ़ सकते हैं। वक्ता कहते हैं: बिल्कुल कीजिए। माँ काली के त्रिलोक विजयी कवच का जप कर सकते हैं, और 108 नामावली भी पढ़ सकते हैं।

95

क्या देवता का तर्पण उनके नामों से कर सकते हैं?

अष्टोत्तर शतनाम से तर्पण

· 1:05:07–1:05:53 · Also a question

पूछा गया कि क्या किसी देवता की शांति के लिए उनके नामों से, जैसे अष्टोत्तर सतनाम से, तर्पण हो सकता है। वक्ता कहते हैं: हाँ, बिल्कुल हो सकता है।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या किसी देवता की शांति के लिए उनके नामों से, जैसे अष्टोत्तरशतनामकिसी देवता के 108 नामों का पाठ — सहस्रनाम (1000 नाम) से छोटा, और प्रायः संगत हवन या दैनिक जप की गणना हेतु प्रयुक्त। से, तर्पणहवन व मार्जन के साथ किया जाने वाला जल आदि द्वारा देवता या पितरों को अर्पित तर्पण। हो सकता है। वक्ता कहते हैं, हाँ, बिल्कुल हो सकता है।

96

क्या जप के बाद जप माला गले में पहन सकते हैं?

पहनी हुई जप माला जूठन हो जाती है

· 1:05:54–1:06:40 · Also a question

पूछा गया कि क्या जप के बाद आसन पर बैठे-बैठे पाँच-दस मिनट माला गले में पहनकर दूसरा पाठ करें, फिर सुमेरु को पानी से धोकर वापस रख दें। वक्ता कहते हैं कि जीवन में यह गलती कभी मत कीजिए। जिसने यह सलाह दी, और इस पर जो वीडियो वायरल होते हैं — उन लोगों को इन बातों का कोई ज्ञान नहीं है।

97

पहनी हुई माला पर जप करके अर्पण करने का क्या दोष है?

अपना जूठा अर्पण करने जैसा ही दोष

· 1:06:41–1:07:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उसके बाद उस माला पर जप करके देवताओं को समर्पित नहीं कर सकते। वह माला जूठन हो गई; वह जूठी माला है। अगर आप देवता की प्रसन्नता के लिए, अपने देवता की सेवा के लिए जप कर रहे हैं, तो जप माला कभी गले में नहीं पहननी चाहिए। अगर पहन ली, तो आगे उसका उपयोग केवल पहनने के लिए ही होगा।

98

पहनी हुई माला की ऊर्जा कहाँ जाती है?

अपने सूक्ष्म शरीर को, रक्षा के लिए

· 1:07:21–1:07:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह आप ज़रूर कर सकते हैं: एक माला या दस माला जप करके फिर वह माला पहन लें। तब उसकी ऊर्जा देवता को समर्पित नहीं हो रही; उसकी ऊर्जा आपके अपने सूक्ष्म शरीर को, आपकी अपनी आत्मा को समर्पित हो रही है। वह रक्षा के लिए हो सकती है।

वक्ता कहते हैं कि यह आप ज़रूर कर सकते हैं: कि आपने एक माला या दस माला जप किया और फिर वह माला पहन ली। तब उसकी ऊर्जा देवता को समर्पित नहीं हो रही। उसकी ऊर्जा आपके अपने सूक्ष्म शरीर को, आपकी अपनी आत्मा को समर्पित हो रही है। वह रक्षा के लिए हो सकती है।

99

पूरे हुए अस्त्र मंत्र पुरश्चरण की माला का क्या करें?

अष्टाक्षरी सुदर्शन की माला वंशजों के लिए सँभालकर रखें

· 1:07:42–1:08:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं, अस्त्र मंत्रों को लीजिए, जैसे सुदर्शन चक्र का मंत्र — अष्टाक्षरी सुदर्शन मंत्र। किसी ने उसका महापुरश्चरण, आठ लाख, पूरा किया। जिस तुलसी की माला पर वह जप हुआ, वह अत्यंत दिव्य हो गई है। उसे बचाकर सुरक्षित रखना चाहिए, ताकि आगे आप और आपके वंश के लोग उसी माला पर जप करें। तुरंत सिद्धि मिलेगी, तुरंत कृपा मिलेगी।

100

रक्षा के लिए पहनने वाली माला कैसे तैयार करें और पहनें?

दूसरी माला, 5,000 या 11,000 जप, फिर रोज़ पहनें

· 1:08:09–1:08:40 · Also a question

तो किसी दूसरी माला पर फिर से 5,000 या 11,000 जप करके वह माला पहनिए, और रोज़ एक माला जप करते और पहनते रहिए। तब वह ऊर्जा आपके शरीर की रक्षा के लिए होगी, और जो मंत्र सिद्ध किया गया था वह माला को भी चैतन्य और सिद्ध कर देगा। वे कहते हैं कि इसका कुछ वर्णन राधा तंत्र में है।

101

अगर यंत्र हो तो जप कहाँ समर्पित करें?

प्रतिष्ठित यंत्र पर जप समर्पित करें

· 1:08:41–1:09:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप यंत्र पर समर्पण कर सकते हैं। जब भी कोई यंत्र आपके पास हो और प्रतिष्ठित हो, और आप उन पर जप आदि समर्पित करते हों, तो उन्हीं पर कीजिए।

वक्ता एक श्रोता से कहते हैं कि आप यंत्र पर समर्पण कर सकते हैं। जब भी कोई यंत्र आपके पास हो और प्रतिष्ठित हो, और आप उन पर जप आदि समर्पित करते हों, तो उन्हीं पर कीजिए।

102

क्या भगवान दत्तात्रेय की भी गीता है?

दत्त पुराण

· 1:09:26–1:10:07 · Also a question

पूछा गया कि क्या भगवान दत्तात्रेय की भी गीता है, और इसकी जानकारी किस पुराण में है। वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल है, और भगवान दत्तात्रेय का अपना दत्त पुराण है।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या भगवान दत्तात्रेय की भी गीता है, और इसकी जानकारी किस पुराण में है। वक्ता कहते हैं, बिल्कुल है। भगवान दत्तात्रेय का अपना दत्त पुराण है।

103

अपने आप की गई क्रोध भैरव साधना बिगड़ जाए तो क्या प्रायश्चित्त है?

सबसे ऊँचे स्तर की उग्र साधनाएँ और उनके लिए ज़रूरी तपोबल

· 1:10:08–1:10:45 · Also a question

एक श्रोता लिखते हैं कि उनकी एक मित्र ने इंटरनेट पर देखकर क्रोध भैरव साधना और सिद्ध कुंजिका की साधना की, और अब उन्हें बहुत मानसिक परेशानी है; साधना रुकवा दी गई है, अब प्रायश्चित्त के लिए क्या करें? वक्ता कहते हैं कि क्रोध भैरव साधना और दूसरी उग्र साधनाएँ क्रमागत साधनाओं में और अंग विद्याओं में सबसे ऊँचे स्तर की हैं। इन्हें सीधे किया ही नहीं जा सकता: तपोबल के बिना किसी व्यक्ति में इनकी ऊर्जा सहने की क्षमता नहीं होती, क्योंकि ये सबसे उग्र शक्तियाँ हैं।

104

मंत्र श्राप या देव श्राप का क्या उपाय है?

क्षमा के संकल्प के साथ रुद्री पाठ और रुद्राभिषेक

· 1:10:46–1:11:17 · Also a question

सबसे पहले, अगर समस्या बहुत बड़ी है, तो संकल्प लेकर रुद्री पाठ के साथ रुद्राभिषेक करवाइए। संकल्प यह हो कि जो भी मंत्र या देव श्राप या दोष लगा है, जो भी अपराध हुआ है, उसकी क्षमा मिले और क्रोध शांत हो। फिर रोज़ कर्म साक्षी दीप जलाकर दही और गुड़ से भगवान शिव का अभिषेक कीजिए, और उनसे क्षमा माँगते हुए रुद्राष्टकम का पाठ कीजिए।

105

शिव माला मंत्र में क्या है?

भैरव के सभी मुख्य रूप, और उन्हें सौम्य करने वाले बीज

· 1:11:18–1:12:59 · Also a question

लोग जिस शिव माला मंत्र का पाठ और जप करते हैं, उसमें भगवान शिव के सभी मुख्य भैरव रूपों का वर्णन है। यह सबसे उग्र माला मंत्रों में से है। पर उस माला मंत्र में भगवान शिव के ऐसे बीज और मंत्र भी दिए गए हैं जिनसे वे सब सौम्य हो जाते हैं, और जब परिस्थिति सबसे कठिन हो तब इसका जप और पाठ करना चाहिए।

106

क्या शालिग्राम या शिवलिंग गमले या बगीचे में रख सकते हैं?

पूजा स्थान में उचित जगह

· 1:13:00–1:13:33 · Also a question

एक श्रोता पूछते हैं कि कुछ लोग घर में शालिग्राम जी और शिवलिंग को गमले में जगह देते हैं, क्या यह उचित है। वक्ता कहते हैं कि यह बिल्कुल अनुचित है। हद यह है कि लोग शिवलिंग या शालिग्राम जी को बाहर बगीचे में, किनारे, झाड़-झंखाड़ में रख देते हैं और वहीं पानी डालते रहते हैं। यह पूरी तरह अनुचित है, नहीं करना चाहिए — उनकी जगह विधि से पूजन स्थान में होनी चाहिए।

107

मासिक धर्म के बीच स्त्री तीस दिन की पंचाक्षरी साधना कैसे पूरी करे?

चार दिन के अंतर के लिए अलग उपाय की ज़रूरत नहीं

· 1:13:34–1:14:11 · Also a question

पूछा गया कि पंचाक्षरी साधना के बीच रजस्वला हो जाएँ तो तीस दिन कैसे पूरे करें, और बीच के अंतराल में क्या करें। वक्ता कहते हैं कि जो चार-पाँच दिन पड़ेंगे, उनमें कोई दिक्कत नहीं। उस समय वही सामान्य नियम है — छूना नहीं, पूजा नहीं करनी। जो चार दिन छूटेंगे, उनकी चिंता मत कीजिए; थोड़ा कम होगा, पर और कुछ करने की ज़रूरत नहीं। अगर बहुत इच्छा हो तो साधना चार दिन और बढ़ा सकते हैं, वह और भी अच्छा होगा।

108

शिव महापुराण पंचाक्षरी पुरश्चरण के लिए कौन-से महीने बताता है?

भाद्रपद और माघ, सत्रहवें अध्याय में

· 1:14:12–1:14:34 · Also a question

भादो के महीने में और आषाढ़ के महीने में भी शिव जी का पूजन और पंचाक्षरी का जप होता है; और पंचाक्षरी पुरश्चरण के लिए भाद्रपद का मास और माघ का मास — ये दो मास — शिव महापुराण के सत्रहवें अध्याय में बताए गए हैं। वे कहते हैं कि विद्येश्वर संहिता का सत्रहवाँ अध्याय पढ़िए, वहाँ मिल जाएगा।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीशिवमहापुराण · विद्येश्वरसंहिता 17.35

The Vidyeshwar Samhita names Māgha and Bhādrapada as the two most excellent months for undertaking the Panchakshari mantra's purashcharan.

Verse reads "māghaṃ bhādraṃ viśiṣṭaṃ tu sarvakālottamottamam" inside chapter 17, whose subject is exactly the japa/purashcharan of the Panchakshari.

मूल पाठ पढ़ें →
35

गुरूपदेशं सङ्गम्य सुखवासे सुभूतले। पूर्वपक्षे समारभ्य कृष्णाभूतावधि द्विजाः॥ ३५

हे द्विजो! गुरुसे उपदेश पाकर वह किसी सुखद स्थानमें, अच्छी भूमिपर रहे। शुक्ल पक्षमें आरम्भ करके कृष्ण पक्षकी चतुर्दशीतक जप करे।

109

कृष्ण पक्ष के प्रदोष पर शिववास देखकर, उचित हो तो रुद्राभिषेक यज्ञ करवा सकते हैं

शिववास देखना

· 1:14:35–1:15:03

वक्ता कहते हैं कि 30 अगस्त को कृष्ण पक्ष का प्रदोष रहेगा। अगर शिववास उचित है तो आप करवा सकते हैं — शिववास के दिन देखकर करवा सकते हैं। पर अगर आप किसी ज्योतिर्लिंग क्षेत्र के आसपास हैं, तो शिववास देखने की ज़रूरत नहीं।

110

क्या स्तोत्र स्पीकर पर सुन सकते हैं, और क्या बिना दीपक के पाठ अनुचित है?

सुनना ठीक है, पर रुद्री पाठ स्पीकर पर नहीं

· 1:15:04–1:15:31 · Also a question

पूछा गया कि क्या सुबह उठकर बटुक भैरव स्तोत्रम, रुद्री पाठ और महिषासुर मर्दिनी स्पीकर पर सुन सकते हैं, और क्या बिना दीपक के केवल पाठ करना अनुचित है। वक्ता कहते हैं कि स्पीकर पर सुन सकते हैं — लोग सुन ही रहे हैं, और सुनने में कोई दोष नहीं। पर रुद्री पाठ के लिए स्पीकर उचित नहीं होगा।

111

क्या क्षेत्रपाल निकारी का विधान कर सकते हैं?

क्षेत्रपाल निकारी

· 1:15:32–1:15:41 · Also a question

क्षेत्रपाल निकारी के लिए दिए गए विधान के बारे में पूछा गया कि क्या उसका पाठ करके क्षेत्रपाल निकारी कर सकते हैं। वक्ता कहते हैं: बिल्कुल कीजिए।

एक श्रोता क्षेत्रपाल निकारी के लिए दिए गए विधान के बारे में पूछते हैं — क्या उसका पाठ करके क्षेत्रपाल निकारी कर सकते हैं? वक्ता कहते हैं, बिल्कुल कीजिए।

112

क्या बटुक भैरव का साबर मंत्र ध्यान मंत्र की तरह ले सकते हैं?

"करकलित कपाला" से शुरू होने वाला सात्विक ध्यान मंत्र

· 1:15:42–1:16:05 · Also a question

पूछा गया कि क्या बटुक भैरव साबर मंत्र को ध्यान मंत्र की तरह ले सकते हैं। वक्ता कहते हैं कि ऐसा भी कर सकते हैं, उसमें कोई दिक्कत नहीं। पर ध्यान मंत्र का अपना ध्यान मंत्र होता है: "करकलित कपाला" वाला जो ध्यान मंत्र है, बटुक भैरव जी का सात्विक ध्यान मंत्र — वह कीजिए, वह बेहतर होगा।

113

मंदिर में पंचाक्षर मंत्र कितनी ज़ोर से बोलें?

उपांशु जप — केवल होंठ हिलें

· 1:16:06–1:16:43 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सावन के महीने में रोज़ रात को शिव मंदिर में पंचाक्षर मंत्र सिद्धि का विधान बिल्कुल कर सकते हैं। और जप करते समय मंत्र बिल्कुल सुनाई नहीं देना चाहिए — सब यह ध्यान रखें। किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि आप किस मंत्र का जप कर रहे हैं। मंत्रों का जप ज़ोर से मत कीजिए; केवल होंठ हिलें, थोड़ा बुदबुदाते हुए, उपांशु जप की तरह। बहुत ज़ोर से या तेज़ी से नहीं करना है।

114

कौन-सा पेशा धर्म से जुड़ा है?

हर काम धर्म-संगत है; उसे वैसा रखना आप पर है

· 1:16:44–1:17:43 · Also a question

धर्मशास्त्र में गहरी रुचि रखने वाले एक श्रोता ने पूछा कि कौन-सा काम करें। वक्ता कहते हैं कि अपनी रुचि के अनुसार चुनिए। सभी काम धर्म के अनुकूल हैं; कोई काम ऐसा नहीं जो न हो। अगर कोई पेशे से डॉक्टर बनता है तो वह वैद्य बन रहा है, और वैद्य के रूप में भगवान धन्वंतरि, भगवान वैद्यनाथ, भगवान पशुपतिनाथ महादेव और अश्विनी कुमार उपस्थित हैं।

115

इंजीनियर के काम के पीछे कौन-से देवता हैं?

विश्वकर्मा, और कामाख्या में उनका स्थान

· 1:17:44–1:19:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो इंजीनियर हैं, वे भगवान विश्वकर्मा जी का पूजन करते हैं। कामाख्या में जाने पर सौभाग्य कुंड वाले मार्ग में दूसरे द्वार के पास विश्वकर्मा जी स्थापित हैं; कामदेव ने विश्वकर्मा जी को बुलाकर मंदिर बनवाया था। माना जाता है कि उन्हीं की कृपा से कोई सफल इंजीनियर बनता है और काम में महारत पाता है।

116

अधर्म के मामले में सबसे ज़्यादा बदनाम कौन है?

तांत्रिक और पंडित बदनाम, जबकि हर क्षेत्र वैसा ही है

· 1:19:11–1:19:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अधर्म के मामले में सबसे ज़्यादा बदनाम तांत्रिक, पंडित, इस पेशे के लोग हैं, जिन्हें पाखंडी कहा जाता है। पर दूसरी तरह से देखिए: किसी भी क्षेत्र में चले जाइए, हर जगह हाल वैसा ही है।

117

भैरव और प्रशासनिक पद का क्या संबंध है?

काशी के कोतवाल, और हर क्षेत्र का रक्षक

· 1:19:56–1:21:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान भैरव काशी के कोतवाल, रक्षक हैं, और हर प्रशासन में हर प्रशासनिक अधिकारी का कर्तव्य है कि वह भगवान भैरव के रूप में रक्षा करे। अपने क्षेत्र की रक्षा करने वाले क्षेत्रपाल भगवान भैरव हैं, और सभी प्रशासनिक अधिकारी, चाहे इंस्पेक्टर हों या कोई और, उनके अनुयायी हैं; अगर वे अपने क्षेत्र की रक्षा कर रहे हैं तो वह भैरव जी का रूप है, और वह भी धर्म से जुड़ा काम है।

118

क्या पूजन की गलती और प्रयोग की गलती एक जैसी मानी जाती हैं?

पूजन में क्षमा, प्रयोग में बड़ी परेशानी

· 1:21:09–1:21:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पूजन-पाठ करते हुए कोई चूक हो जाए तो क्षमा माँगने से क्षमा मिल जाती है। पर अगर कोई प्रयोग करता है, तो उसमें परेशानी ज़्यादा होती है। और जहाँ पूजन में जान-बूझकर अपराध किए जाते हैं, वहाँ परेशानी होती है।

119

क्या परिवार में मृत्यु वाले वर्ष में सावन का अनुष्ठान कर सकते हैं?

पहले वार्षिक श्राद्ध होना चाहिए

· 1:21:40–1:22:21 · Also a question

एक श्रोता बताते हैं कि उनके पिता का देहांत मई 2024 में हुआ। नया संवत्सर तब तक शुरू हो चुका था, इसलिए मृत्यु इसी संवत्सर में हुई। वक्ता कहते हैं कि उनका वार्षिक श्राद्ध हो गया हो, तभी सावन का अनुष्ठान कीजिए; वरना शिव जी के अभिषेक पर कोई रोक नहीं — शिव जी का अभिषेक कीजिए, सूर्य भगवान को अर्घ्य दीजिए, और सहस्रनाम आदि का पाठ कीजिए।

120

पंचाक्षरी के साथ प्रणव कौन बोल सकता है?

प्रणव संन्यासियों के लिए, षडक्षरी दीक्षितों के लिए

· 1:22:22–1:22:53 · Also a question

एक श्रोता लिखते हैं कि प्रणव के साथ पंचाक्षरी जप के बारे में कहा गया है कि प्रणव का उच्चारण केवल संन्यासी करें, इसलिए उन्हें केवल पंचाक्षरी करनी चाहिए। वक्ता सहमत हैं: षडक्षरी का जप तभी कीजिए जब कोई गुरु दीक्षा दे और दीक्षा व उपदेश देकर जप करने की आज्ञा दे। वरना अगर आप दीक्षित नहीं हैं तो केवल पंचाक्षरी का जप कीजिए — और उसमें भी, अगर यज्ञोपवीत नहीं पहनते, तो नमः बाद में रखकर जप कीजिए।

121

घर में स्थापित शिवलिंग के साथ क्या होना चाहिए?

शिवलिंग के साथ शिव परिवार

· 1:22:54–1:23:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि घर में स्थापित शिवलिंग में शिव परिवार होना चाहिए: शिवलिंग, उसकी अरघी, त्रिशूल, नंदी जी, सर्प वासुकी जी। इसके सिवाय आप शिव परिवार का ऐसा श्री विग्रह भी रख सकते हैं जिसमें स्कंद जी और गणपति जी भी हों; और अगर उनकी मूर्तियाँ पहले से अलग हैं, तो दोबारा रखने की ज़रूरत नहीं।

122

महीनों की यात्रा पर जाते समय घर के शिवलिंग का क्या करें?

लौटने तक जलने वाली अखंड ज्योत कभी न जलाएँ

· 1:23:23–1:24:00 · Also a question

पूछा गया कि अगर सात महीने घर से बाहर रहना हो और घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग हो तो नित्य सेवा का क्या करें। वक्ता कहते हैं: अगर नर्मदेश्वर जी, शालिग्राम जी, देवी शिला, सोनभद्र शिला, चक्रार्चन के लिए स्फटिक शिला आदि हैं, तो जाने से पहले जो दीपक चल रहा है, उसे पूरा कर देना चाहिए। कई लोग अखंड ज्योत जला देते हैं कि लौटने तक जलती रहे — यह गलती मत कीजिए।

123

क्या यात्रा पर जाने पर पूजित शक्तियाँ पीछे रह जाती हैं?

वे साथ जाती हैं; कलियुग में अपूज्य का विषय नहीं

· 1:24:01–1:24:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप जा रहे हैं, तो आपकी पूजित शक्तियाँ भी सब आपके साथ जाएँगी। आप वहाँ प्रणाम करेंगे, उन्हें सूक्ष्म रूप से बताएँगे, और वे जाएँगी; आपके साथ चलेंगी। कलियुग में, आज के समय में, यहाँ अपूज्य का कोई विषय नहीं।

124

लंबी यात्रा पर जाने से पहले सेवा का विधान क्या है?

नैवेद्य, सूखे मेवे का भोग, ढकना, प्रणाम और निवेदन

· 1:24:57–1:25:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कोई दोष नहीं लगेगा। अगर आप कहीं जा रहे हैं, तो नैवेद्य अर्पित करके, सूखे मेवे का भोग लगाकर, ढककर, प्रणाम करके भगवान से निवेदन कीजिए: कि हम इस जगह जा रहे हैं और इतने दिनों में लौटेंगे, इसलिए निवेदन है कि हम मानसिक रूप से आपका स्मरण और पूजन करेंगे, आप हमारा वही पूजन स्वीकार करें और प्रसन्न हों; और आप भी हमारे साथ चलें, हमारे काम में सहायता करें, और लौटते समय हमारे साथ वापस आएँ। यह कहकर जाइए — सेवा विधान बस इतना रखिए।

125

क्या पार्वती का सप्ताक्षरी मंत्र जीवन भर कर सकते हैं?

सप्ताक्षरी का आजीवन जप

· 1:25:27–1:25:34 · Also a question

एक श्रोता लिखते हैं कि उनकी प्रीति माँ दुर्गा के स्वरूप में है, और पूछते हैं कि क्या वे माँ पार्वती के सप्ताक्षरी मंत्र का जप आजीवन कर सकते हैं। वक्ता कहते हैं: बिल्कुल कर सकते हैं।

एक श्रोता लिखते हैं कि उनकी प्रीति माँ दुर्गा के स्वरूप में है, और पूछते हैं कि क्या वे माँ पार्वती के सप्ताक्षरी मंत्र का जप आजीवन कर सकते हैं। वक्ता कहते हैं, बिल्कुल कर सकते हैं।

126

क्या श्रावण में हनुमान जी का अभिषेक कर सकते हैं?

हनुमान जी का अभिषेक, पर शिव को छोड़ना नहीं

· 1:25:35–1:26:00 · Also a question

पूछा गया कि हनुमान जी रुद्र अवतार हैं, तो क्या श्रावण मास में उनका अभिषेक कर सकते हैं। वक्ता कहते हैं कि इसमें कोई संदेह रखना ही नहीं: हनुमान जी का अभिषेक, पूजा, शृंगार सब बिल्कुल कर सकते हैं, चोला चढ़ाना आदि भी। पर एक बात ध्यान रखिए — साथ में शिव जी का अभिषेक और पूजन ज़रूर होना चाहिए। श्रावण मास में शिव जी को कभी मत छोड़िए; उनकी जगह किसी को मत रखिए।

127

गाणपत्य, सौर, शाक्त या वैष्णव — हर संप्रदाय और पंथ को श्रावण में शिव अभिषेक करना है

गाणपत्य, सौर, शाक्त या वैष्णव — सबको अभिषेक करना है

· 1:26:01–1:27:00

जैसे कहा जाता है कि आप शैव हों, शाक्त हों, वैष्णव हों या किसी भी संप्रदाय या पंथ के, सबको नवरात्रि का व्रत रखना चाहिए और भगवती की पूजा करनी चाहिए, और सबको उनके दर्शन-पूजन के लिए कामाख्या क्षेत्र और विंध्य क्षेत्र जाना चाहिए — ठीक उसी तरह श्रावण मास में, आप गाणपत्य हों, सौर हों, शाक्त हों या वैष्णव, भगवान शिव के शिवलिंग का अभिषेक और शृंगार ज़रूर कीजिए। इसे छोड़ना नहीं है, और एक दिन भी नहीं छूटना चाहिए।

128

पर्व काल में पहले किसकी पूजा हो?

अपने आराध्य की, और पर्व के देवता की भी

· 1:27:01–1:27:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सच यह है कि पर्व काल में हमें हमेशा अपने मुख्य आराध्य की पूजा करनी चाहिए, जिनकी जीवन भर सेवा की है; और साथ में, जिनका समय है, जिनका पर्व काल है, उनकी भी पूजा करनी चाहिए। शिव-शक्ति ऐसी महाशक्ति हैं जिनकी पूजा छोड़ी नहीं जा सकती: श्रावण मास में मुख्य रूप से उनका पूजन होगा, और साथ में चलने वाला आराध्य का पूजन भी चलेगा — पर उन्हें छोड़ना नहीं है।

129

भगवान शिव को कौन-सी चीज़ें अर्पित नहीं करनी चाहिए?

केवल केतकी का फूल वर्जित है

· 1:27:42–1:27:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान शिव को आप केवल केतकी का फूल अर्पित नहीं कर सकते। इसके सिवाय दूर्वा ज़रूर चढ़ा सकते हैं, बिल्व पत्र ज़रूर चढ़ा सकते हैं, फल, फूल और मिठाई चढ़ा सकते हैं।

पूछा गया कि भगवान शिव को कौन-सी चीज़ें अर्पित नहीं करनी चाहिए। वक्ता कहते हैं कि भगवान शिव को आप केवल केतकी का फूल अर्पित नहीं कर सकते। इसके सिवाय दूर्वादेवताओं — विशेषकर गणेश जी — को अर्पित की जाने वाली पवित्र घास, नए स्थान पर जाने से पूर्व देवता को औपचारिक निमंत्रण देने की सामग्री में सम्मिलित होती है। ज़रूर चढ़ा सकते हैं, बिल्व पत्र ज़रूर चढ़ा सकते हैं, फल, फूल और मिठाई चढ़ा सकते हैं।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीशिवमहापुराण · विद्येश्वरसंहिता 8.15

Shiva himself curses and permanently bars the ketakī flower from his own worship, which is why it alone is withheld from Shiva puja even though other flowers are offered freely.

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15

रे रे केतक दुष्टस्त्वं शठ दूरमितो व्रज। ममापि प्रेम ते पुष्पे माभूत्पूजास्वितः परम्॥ १५

अरे दुष्ट केतक! हे शठ! यहाँसे दूर चले जाओ। अबसे आगे मेरी पूजामें तुम्हारे फूलमें मेरा प्रेम भी न रहे।

130

क्या शिवलिंग के ऊपर फल और मिठाई रख सकते हैं?

उनके सिर पर रखी चीज़ वे स्वीकार नहीं कर सकते

· 1:28:00–1:28:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप उनके सिर पर फल रखें, शिवलिंग पर मिठाई रखें, तो वे उसे स्वीकार नहीं कर सकते — यह ध्यान रखना है।

वक्ता कहते हैं कि अगर आप उनके सिर पर फल रखें, शिवलिंग के ऊपर मिठाई रखें, तो वे उसे स्वीकार नहीं कर सकते। यह ध्यान रखना है।

131

स्तोत्र संग्रह से षट गायत्री मंत्र क्यों हटाया गया?

बीजों वाला तांत्रिक मंत्र, सबके लिए नहीं

· 1:28:12–1:28:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि श्रोता जिस षट गायत्री मंत्र की बात कर रहे हैं, उसे उन्होंने हटा दिया है, क्योंकि वह मंत्र बीजों से जुड़ा तांत्रिक मंत्र है और हर कोई उसका जप नहीं कर सकता; इसी कारण उन्होंने उसे स्तोत्र संग्रह में नहीं डाला। यह सबसे ज़रूरी मंत्रों में से है और अलग विषय है: उपदेश और आदेश के बिना इसे बिल्कुल नहीं करना चाहिए। जब किसी की आयु क्षीण हो रही हो, तब विधि से पुरश्चरण करके इसका उपयोग होता है।

132

भगवान शिव के हवन के लिए कौन-सी लकड़ी सबसे अच्छी है?

सूखी बिल्व की लकड़ी

· 1:28:41–1:29:04 · Also a question

भगवान शिव के हवन के लिए बिल्व की लकड़ी सबसे उत्तम है — सूखी बेल की लकड़ी।

वक्ता कहते हैं कि भगवान शिव के हवन के लिए बिल्व की लकड़ी सबसे उत्तम है — सूखी बेल की लकड़ी।

133

मँगवाया हुआ कवच कब पहनें?

श्रावण में कभी भी, गुप्त नवरात्रि में, या पूर्णिमा पर

· 1:29:05–1:29:22 · Also a question

पूछा गया कि मँगवाया हुआ कवच कब पहनना है। वक्ता कहते हैं: श्रावण मास में कभी भी पहनिए। अभी गुप्त नवरात्रि चल रही है, तो उसमें कभी भी पहनिए। पूर्णिमा पर पहनिए — समय ही समय है।

एक श्रोता पूछते हैं कि उन्होंने जो कवच मँगवाया है, उसे कब पहनना है। वक्ता कहते हैं, श्रावण मास में कभी भी पहनिए। अभी गुप्त नवरात्रि चल रही है, तो कभी भी पहनिए। पूर्णिमा पर पहनिए — समय ही समय है।

134

क्या भीमसेनी कपूर दीपक में डाल सकते हैं?

दीपक में भीमसेनी कपूर

· 1:29:23–1:29:28 · Also a question

पूछा गया कि क्या भीमसेनी कपूर दीपक में डाल सकते हैं। वक्ता कहते हैं: बिल्कुल डाल सकते हैं।

पूछा गया कि क्या भीमसेनी कपूर दीपक में डाल सकते हैं। वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल डाल सकते हैं।

135

क्या पंचाक्षरी साधना शिव मंदिर में करना बेहतर है?

मंदिर में पंचाक्षरी उपासना

· 1:29:29–1:29:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप शिव मंदिर में पंचाक्षरी मंत्र की साधना करें तो सबसे उत्तम है — बिल्कुल कीजिए, इसमें पूछने की कोई बात नहीं। भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र की उपासना शिव मंदिर में बिल्कुल कर सकते हैं।

वक्ता एक श्रोता से कहते हैं कि अगर आप शिव मंदिर में पंचाक्षरी मंत्र की साधना करें तो सबसे उत्तम है; बिल्कुल कीजिए — इसमें पूछने की क्या बात है? भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र की उपासना शिव मंदिर में बिल्कुल कर सकते हैं।

136

अगर कुल के पितरों के कारण साधना के समय झगड़े बढ़ें तो क्या करें?

कुल के पितरों के लिए त्रिपिंडी

· 1:29:47–1:30:19 · Also a question

अगर आपके कुल के पितरों के कारण बात ऐसी हो कि बार-बार होती रहे — और खासकर साधना, पूजा या अनुष्ठान के समय यह झगड़ा बढ़ता हो — तो अपने कुल के पितरों के नाम से त्रिपिंडी आदि करवाइए।

वक्ता एक श्रोता से कहते हैं कि अपने कुल के पितृों के कारण, अगर विषय ऐसा है कि बार-बार आता है — और खासकर साधना, पूजा या अनुष्ठान के समय यह झगड़ा बहुत बढ़ जाता है — तो अपने कुल के पितरों के नाम से त्रिपिंडी श्राद्ध आदि करवाइए।

137

देव दीक्षा और गुरु नाम के बाद कौन-सी साधना करें?

संकट नाशन गणपति स्तोत्रम की PDF, और अभी शिव की

· 1:30:20–1:30:50 · Also a question

एक श्रोता पूछते हैं कि देव दीक्षा और गुरु नाम के बाद साधना के क्षेत्र में आने के लिए क्या वे गणेश जी की साधना करें; एक पुरश्चरण हो चुका है और दूसरा पूनम को है। वक्ता कहते हैं कि संकट नाशन गणपति स्तोत्रम पहले ही दिया हुआ है — उसकी PDF डाउनलोड कीजिए, जिसमें हर विषय पूरा दिया है, गुरु का, गणपति जी का, भैरव जी का — उसी तरह कीजिए, पर अभी शिव जी का कीजिए।

138

क्या 64 योगिनी का लौंग-कपूर अर्पण किसी भी देवी मंदिर में कर सकते हैं?

किसी भी देवी मंदिर में अर्पण

· 1:30:51–1:30:58 · Also a question

पूछा गया कि क्या 64 योगिनियों के लिए लौंग और कपूर का अर्पण किसी भी देवी मंदिर में कर सकते हैं। वक्ता कहते हैं: बिल्कुल कर सकते हैं।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या 64 योगिनीयों के लिए लौंग और कपूर का यह अर्पण देवी के किसी भी मंदिर में कर सकते हैं। वक्ता कहते हैं, बिल्कुल कर सकते हैं।

139

पति और पत्नी पंचाक्षरी कैसे बोलें?

यज्ञोपवीत के अनुसार नमः और शिवाय का क्रम

· 1:30:59–1:31:31 · Also a question

अगर पति यज्ञोपवीत पहनते हैं, तो वे पहले नमः और बाद में शिवाय बोलेंगे। और अगर यज्ञोपवीत नहीं पहनते, और पत्नी के लिए, तो वे नमः बाद में और शिवाय पहले बोलेंगे।

पूछा गया कि पति और पत्नी के लिए शिव जी का कौन-सा पंचाक्षरी मंत्र है। वक्ता कहते हैं कि वे पहले ही बता चुके हैं। अगर पति यज्ञोपवीतवैदिक कर्मों में दीक्षा का प्रतीक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार — पीढ़ियों तक न होने पर, इसे पुनः आरंभ करने से पहले हर ज्ञात पीढ़ी के लिए प्रायश्चित आवश्यक है। पहनते हैं, तो वे पहले नमः और बाद में शिवाय बोलेंगे। और अगर यज्ञोपवीत नहीं पहनते, और आप, यानी पत्नी — तो वे नमः बाद में और शिवाय पहले बोलेंगी।

140

जप के समय मन कैसे स्थिर होता है?

मन को अपना काम करने दें; पुरश्चरण से वह शांत होता है

· 1:31:32–1:32:29 · Also a question

एक श्रोता लिखते हैं कि ज़बरदस्ती रोकने पर भी मन स्थिर नहीं होता, और कुछ देर बाद विचार फिर आ जाते हैं। वक्ता कहते हैं कि कोई दिक्कत नहीं — अपना प्रयास करते रहिए, और मन को अपना काम करने दीजिए। उस पर बहुत लगाम लगाने की कोशिश मत कीजिए, वरना वह स्थिर नहीं होगा। अपने आराध्य की कृपा से, जब मंत्र का जप बार-बार और लगातार चलता है, तो एक पुरश्चरण, फिर दो, फिर तीन के बाद वह अपने आप शांत होने लगेगा।

141

पंचाक्षरी जप किस माला पर करें?

पंचाक्षरी के लिए रुद्राक्ष की माला

· 1:32:30–1:33:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पंचाक्षरी का जप केवल रुद्राक्ष की माला पर ही करना है। और रुद्राक्ष पर भैरव और भैरवी का अभिषेक बिल्कुल किया जा सकता है।

वक्ता कहते हैं कि पंचाक्षरी का जप केवल रुद्राक्षशिव पूजा के दौरान धारण की जाने वाली एक पवित्र बीज-माला । की माला पर ही करना है। रुद्राक्ष पर भैरव और भैरवी के अभिषेक के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं कि यह बिल्कुल किया जा सकता है।

142

क्या गंजा व्यक्ति पूजा और दर्शन के समय टोपी पहन सकता है?

महाकाल, वैद्यनाथ और देवी क्षेत्रों में सिर खुलवाया जाता है

· 1:33:13–1:34:07 · Also a question

एक श्रोता लिखते हैं कि सुबह बाबा का जलाभिषेक करते समय वे अपना गंजापन टोपी में छिपाए रखते हैं और दिन भर उसे पहने रहते हैं। पूछने पर उनके पंडित जी ने कहा कि पूजा के समय सिर ढकना जरूरी है और टोपी को सही बताया। वक्ता कहते हैं कि वे पंडित जी की जय बोलने से ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे। पर वे बताते हैं कि ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में, महाकाल में, वैद्यनाथ में सिर तुरंत खुलवा दिया जाता है। और भगवती के क्षेत्रों में तुरंत कहा जाता है कि सिर खुला रखकर जाइए, टोपी पहनकर मत जाइए।

143

क्या योगिनियों की बलि घर पर दी जा सकती है?

शिव मंदिर में देना बेहतर

· 1:34:08–1:34:47 · Also a question

योगिनियों के नाम की बलि घर पर देने के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं है, पर शिव मंदिर में करें तो बेहतर होगा। शिव मंदिर में करना ज्यादा सही है।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या योगिनीयों के नाम की बलि घर पर दी जा सकती है। वक्ता कहते हैं, देखिए, ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं है, पर शिव मंदिर में करें तो बेहतर होगा। शिव मंदिर में करें तो वह ज्यादा सही है।

144

अधूरी रह गई मन्नत का क्या करें?

बाकी मन्नत जल्द से जल्द पूरी करें

· 1:34:48–1:35:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि छिन्नमस्तिका माता की जो भी मन्नत बाकी है, और शिव जी की जो भी बाकी है, उसे पूरा कीजिए। मन्नत क्या है, यह वे नहीं जान सकते — पर जैसी भी है, उसे जल्द से जल्द पूरा कीजिए। अगर काम पूरा हो गया है, तो मन्नत बाकी मत छोड़िए।

वक्ता कहते हैं कि इसमें छिन्नमस्तिका माता की जो भी मन्नत बाकी है, और शिव जी की जो भी बाकी है — उसे पूरा कीजिए। मन्नत क्या है, यह वे नहीं जान सकते। जैसी भी है, उसे जल्द से जल्द पूरा कीजिए। अगर काम पूरा हो गया है, तो मन्नत बाकी मत छोड़िए।

145

क्या पूजा से पहले क्रोध आए तो पूजा टाल देनी चाहिए?

क्रोध में या उपहास में आहुति कभी नहीं दी जाती

· 1:35:06–1:35:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हवन के बारे में कहा गया है कि क्रोध में कभी आहुति नहीं देनी चाहिए। और अगर उस समय उपहास की स्थिति बन रही हो, तो उपहास करते हुए हवन में आहुति नहीं डाली जाती। पर जब आपकी पूजा के समय क्रोध आए, तो थोड़ी देर रुक जाइए — पूजा छोड़ देना जरूरी नहीं है।

146

पारस शिवलिंग के नियम क्या हैं?

गृहस्थ के लिए बिल्कुल अलग विषय

· 1:35:37–1:35:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उन्होंने लाइव में कई बार बताया है कि पारस शिवलिंग का नियम ऐसा है कि गृहस्थ के लिए पूरा विषय ही अलग हो जाता है। आपने जिससे भी शिवलिंग लिया है, उन्होंने जो विधि और नियम बताए हैं, वैसा ही कीजिए।

वक्ता कहते हैं, देखिए, पारस शिवलिंग का नियम उन्होंने लाइव में और दूसरी जगह कई बार बताया है: गृहस्थ के लिए पारस शिवलिंग का पूरा विषय ही अलग हो जाता है। अब आपने जिससे भी शिवलिंग लिया है — उन्होंने जो विधि और नियम बताए हैं, उसी के अनुसार चलिए।

147

क्या कर्ण पिशाचिनी करवाई या किसी को ट्रांसफर की जा सकती है?

न सिद्ध की, न करवाते हैं, न ट्रांसफर करते हैं

· 1:36:00–1:36:16 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि वे कर्ण पिशाचिनी के बारे में बात करने के लिए कॉल करेंगे। वक्ता कहते हैं, कॉल जरूर कीजिए, पर उन्होंने न कर्ण पिशाचिनी सिद्ध की है, न वे इसे करवाते हैं, न इसका कोई ट्रांसफर दे सकते हैं। इसके अलावा कोई और विषय हो, तो बताइए।

एक श्रोता लिखते हैं कि वे कॉल करेंगे और कर्ण पिशाचिनी से जुड़ी बातें करेंगे। वक्ता कहते हैं, ठीक है, कॉल जरूर कीजिए। पर उन्होंने न कर्ण पिशाचिनी सिद्ध की है, न वे इसे करवाते हैं, न इसका कोई ट्रांसफर दे सकते हैं। इसके अलावा कोई विषय हो, तो बताइए।

148

शिव जी का अभिषेक कितने बजे तक करना उचित है?

सुबह जितना जल्दी हो सके

· 1:36:17–1:36:29 · Also a question

शिव जी का अभिषेक कितने बजे तक करना उचित है, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं: सुबह जितना जल्दी कर सकें, उतना ही उचित है।

शिव जी का अभिषेक कितने बजे तक करना उचित है, यह पूछे जाने पर वक्ता उत्तर देते हैं कि सुबह जितना जल्दी कर सकें, उतना ही उचित है।

149

क्या देव दीक्षा वाली रुद्राक्ष माला पर दूसरे मंत्रों का जप हो सकता है?

केवल शिव, गणपति, हनुमान और भैरव

· 1:36:30–1:36:51 · Also a question

देव दीक्षा में मिली रुद्राक्ष माला पर पंचाक्षरी और दूसरे मंत्रों का जप करने के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि कर सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं है; दूसरी माला न हो तो उसी पर कर सकते हैं। पर उस पर केवल शिव जी, गणपति जी, हनुमान जी और भैरव जी का ही जप कीजिए — उस पर भगवती के मंत्र का जप मत कीजिए।

150

महाभैरव अनुष्ठान के बाद माला का क्या करें?

एक माला रोज पहनी जाए, दूसरी माला पर जीवन भर जप

· 1:36:52–1:37:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक बार महाभैरव का अनुष्ठान करने के बाद, अनुष्ठान पूरा होने पर वह माला पहननी है। रोज उस पर एक माला जप करना है और फिर अपनी रक्षा के लिए उसे गले में पहनना है। जीवन भर का जप दूसरी माला पर करना है, और उसके बाद माला नहीं बदलनी है।

वक्ता कहते हैं कि एक बार महाभैरव का अनुष्ठान करने के बाद, अनुष्ठान पूरा होने पर वह माला पहननी है। रोज एक माला जप करना है और अपनी रक्षा के लिए उसे गले में पहनना है। जीवन भर का जप दूसरी माला पर करना है, और फिर माला नहीं बदलनी है।

151

बृहद हवन कौन कर सकता है?

बताई गई विधि से आगे, केवल दीक्षित अधिकारी

· 1:37:24–1:37:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बृहद हवन का वीडियो बन चुका है। अगर आप पूरे अधिकार के साथ, पहले से डाली गई विधि से बड़ा बृहद हवन करना चाहते हैं, तो दीक्षा लीजिए और पूरी विधि सीखिए। बहुत लोगों ने अपने चैनल पर वैदिक विधि डाली है, जिसमें पूजन का हर विधान बताया गया है, मेखला पूजन कैसे होता है यह भी। आप वह देखकर कर सकते हैं — पर केवल तभी, जब आप दीक्षित अधिकारी हों।

152

घर में शालिग्राम पूजा का अधिकार किसे है?

यज्ञोपवीतधारी, और विशेषकर ब्राह्मण

· 1:37:56–1:38:36 · Also a question

घर में गणपति शालिग्राम की पूजा हो सकती है या नहीं, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि शालिग्राम पूजन का अधिकार यज्ञोपवीत धारण करने वालों का है, और विशेषकर ब्राह्मणों का — यही रहे तो उचित है, वही करें। भगवान शिव के पूजन में कोई दोष नहीं है, पर शालिग्राम पूजन में चूक से दोष लगता है।

153

क्या एक ही जप माला गणेश और भगवती दोनों के लिए चल सकती है?

देवताओं के लिए एक माला, भगवती के लिए एक

· 1:38:37–1:39:06 · Also a question

एक ही जप माला पर गणेश जी और भगवती के मंत्रों का जप करने के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि अगर कोई विकल्प नहीं है, तो कोई बात नहीं, कर लीजिए। पर अगर विकल्प और सामर्थ्य है, तो एक माला केवल देवताओं के लिए रखिए और एक माला भगवती के लिए।

एक ही जप माला पर गणेश जी के मंत्र और भगवती के मंत्र का जप करने के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं: अगर कोई विकल्प नहीं है, तो कोई बात नहीं, कर लीजिए। पर अगर विकल्प है, सामर्थ्य है, तो एक माला केवल देवताओं के लिए रखिए और एक माला भगवती के लिए।

154

पंचाक्षर और शिव-दुर्गा में कौन सा मंत्र ज्यादा विशेष है?

कोई तुलना नहीं की जा सकती

· 1:39:07–1:39:34 · Also a question

पंचाक्षर और शिव-दुर्गा में कौन सा मंत्र ज्यादा विशेष है, यह पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि ऐसी तुलना कभी नहीं की जा सकती। दोनों अपनी-अपनी जगह बहुत ही विशेष हैं।

155

क्या शिव जी के अभिषेक में पंचानन मंत्र का प्रयोग हो सकता है?

अभिषेक के समय पंचानन मंत्र

· 1:39:35–1:39:42 · Also a question

शिव जी का अभिषेक करते समय, अभिषेक के लिए आप पंचानन मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि शिव जी का अभिषेक करते समय, अभिषेक के लिए आप पंचानन मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं।

156

अगर घर में विग्रहों की पूजा करने वाला कोई न हो तो क्या करें?

कम से कम धूप और दीप जलते रहें

· 1:39:43–1:40:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह सच है कि घर में पूजा करने वाला कोई न हो तो विग्रहों की चिंता होती है — पर विग्रहों की चिंता मत कीजिए। बस इतना होना चाहिए कि कम से कम धूप और दीप जलते रहें।

वक्ता कहते हैं कि यह सच है कि घर में पूजा करने वाला कोई न हो तो विग्रहों की चिंता होती है। विग्रहों की चिंता मत कीजिए। बस इतना होना चाहिए कि कम से कम धूप और दीप जलते रहें।

157

क्या साधना के दौरान नर्स डिलीवरी करवा सकती है?

पवित्रता रखनी है, रोज स्नान और बाल धोना

· 1:40:05–1:40:29 · Also a question

एक नर्स पूछती हैं कि क्या यह सच है, जैसा उन्होंने सुना है, कि साधना में रहते हुए मरीजों की डिलीवरी नहीं करवा सकते। वक्ता कहते हैं कि आपका पेशा ही ऐसा है, सेवा के लिए है, तो इससे परेशान मत होइए — वह काम कीजिए। पर पवित्रता रखनी है: रोज स्नान करना होगा, और साधना के समय बाल भी धोने होंगे, रोज-रोज, और यह थोड़ी कठिन बात है।

158

क्या पहले से पहनी हुई माला पर जप करना चाहिए?

नई माला पर जप, फिर उसे पहनना

· 1:40:30–1:41:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पहले से पहनी हुई माला पर जप करके उसे पहनना नहीं है — नई माला पर जप कीजिए, और फिर उसे पहनिए।

वक्ता कहते हैं कि पहले से पहनी हुई माला पर जप करके उसे पहनना नहीं है। नई माला पर जप कीजिए, और फिर उसी को पहनना है।

159

क्या बटुक भैरव का ब्रह्म कवच अष्टमी से सिद्ध किया जा सकता है?

अष्टमी से ब्रह्म कवच आरंभ करना

· 1:41:03–1:41:06 · Also a question

बटुक भैरव जी का ब्रह्म कवच अष्टमी से सिद्ध किया जा सकता है या नहीं, यह पूछे जाने पर वक्ता उत्तर देते हैं: बिल्कुल, किया जा सकता है।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या बटुक भैरव जी का ब्रह्म कवच अष्टमी से शुरू करके सिद्ध किया जा सकता है। वक्ता उत्तर देते हैं, बिल्कुल किया जा सकता है।

160

धातु का कवच किसमें पहनना चाहिए?

चाँदी या सोने की चेन, कभी धागा या ताँबा नहीं

· 1:41:07–1:41:30 · Also a question

अगर आपका कवच चाँदी का है, तो धागे के साथ वह शुद्ध नहीं रहेगा — धागा मत रखिए। तब कवच को चाँदी की चेन या सोने की चेन में पहनिए, अगर आपका कर्तव्य और काम ऐसा है। ताँबे में रखा तो वह तुरंत अशुद्ध हो जाएगा और फिर किसी काम का नहीं रहेगा। अपना कवच चाँदी या सोने में रखिए, और चेन भी चाँदी या सोने की रखिए; किसी भी तरह का धागा पहना तो सब अशुद्ध हो जाता है।

161

जन्म और मृत्यु के बीच काम करने वाले क्या पहनें?

कमर बंद, और गले में धातु का मजबूत कवच

· 1:41:31–1:41:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसी स्थिति में आपको कमर बंद जरूर पहनना चाहिए; कमर खाली नहीं रखनी चाहिए। जो लोग जन्म और मृत्यु की जगह पर काम करते हैं, उनकी कमर और हाथ की कलाई — कलाई पर हर कोई कुछ नहीं पहन सकता, पर कमर बिल्कुल खाली नहीं रहनी चाहिए — और गले में एक अच्छा मजबूत कवच हो, धातु का, सोने या चाँदी का, ताकि उस पर अशुद्धि न लगे।

162

क्या भगवती मातंगी या सारिका की पूजा बिना दीक्षा के घर पर हो सकती है?

भगवती मातंगी या सारिका की पूजा के लिए दीक्षा और तांत्रिक विधि चाहिए

· 1:41:57–1:42:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बिना दीक्षा लिए ऐसी पूजा घर पर भी नहीं कर सकते — ऐसा पूजन दीक्षा लेने के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि भगवती का यह स्वरूप अलग है। और अगर कोई कहे कि भगवती दुर्गा पाँच रूपों में मानी जाती हैं, जिनमें एक भगवती सारिका और भगवती मातंगी हैं, तो वे उत्तर देते हैं कि वह सब पूजन दीक्षा लेने के बाद तांत्रिक विधि से ही होता है।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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