शरद पूर्णिमा की रात — मंत्र सिद्धि, महालक्ष्मी अर्चन और दीपदान

शरद पूर्णिमा की रात: मंत्र सिद्धि और लक्ष्मी पूजा।

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Questions this answers

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01

जप से बनी ऊर्जा हम तक कैसे पहुँचती है?

जप की ऊर्जा, देवता का पिंड और सूक्ष्म शरीरों तक लौटता प्रवाह

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:44–02:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब हम किसी भी प्रकार के मंत्र का जप करते हैं, तो उससे बनी ऊर्जा किसी देव तत्व को आकर्षित करती है। देवता के पिंड में पिछले युगों से सहेजी ऊर्जा होती है। जहाँ विधि-विधान से पूरा पूजन और पाठ होता है, वहाँ यह ऊर्जा बढ़ती है। उसी पुण्य से ऊर्जा बहकर हमारे सूक्ष्म शरीर, कारण शरीर आदि तक पहुँचती है।

02

मंत्र-ऊर्जा के संचार का स्वामी कौन-सा ग्रह है?

आकर्षण और संचार का मुख्य कारक चंद्रमा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:25–02:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि संचार और आकर्षण के इस पूरे माध्यम में चंद्रमा का सबसे विशेष प्रभाव है, और वही इनमें मुख्य कारक है। इसी कारण जन्म कुंडली में चंद्रमा कहाँ बैठा है, इससे तय होता है कि मंत्र की सिद्धि कैसे होगी। बाद में मंत्र का प्रभाव कमजोर पड़े, तो उसकी जानकारी भी चंद्रमा से ही ली जाती है।

03

जब शिष्य की सिद्धि काम करना बंद कर दे, तो समर्थ गुरु क्या करते हैं?

सिद्धि की हानि, प्रायश्चित्त विधान और फिर से प्रभुत्व

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:58–03:38 · Also a question

समर्थ गुरु जब देखते हैं कि शिष्य को बार-बार हानि हो रही है और पहले मिली सिद्धि अब काम नहीं कर रही, तो वे समझते हैं कि जो देव तत्व उपस्थित था, वह या तो बाँध दिया गया है या चला गया है। कारण जो भी हो, पहले उस हानि के लिए प्रायश्चित्त विधान होता है, और उसके बाद ही फिर से उस पर प्रभुत्व पाने का प्रयास होता है। इन सब में चंद्रमा का बहुत बड़ा महत्व है।

04

उग्र और सौम्य मंत्रों का जप किस पक्ष में करना चाहिए?

उग्र मंत्र कृष्ण पक्ष में, पौष्टिक मंत्र पूर्णिमा के आसपास

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:39–03:57 · Also a question

वक्ता अपनी पिछली चर्चा याद दिलाते हैं: उग्रता देने वाले मंत्रों का जप कृष्ण पक्ष में अष्टमी से चतुर्दशी तक खूब किया जाए, तो वे अपना प्रभाव देते हैं। और सौम्य व पौष्टिक मंत्रों का जप शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा तिथि के आसपास किया जाए, तो बहुत अधिक प्रभाव मिलता है।

वक्ता कहते हैं कि इसके साथ यह भी चर्चा हुई थी कि उग्रता देने वाले मंत्रों का जप, उनके प्रभाव के लिए, कृष्ण पक्ष में अष्टमी से चतुर्दशी तक बड़ी मात्रा में करना चाहिए। और सौम्य व पौष्टिक मंत्रों का जप यदि शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा तिथि के आसपास किया जाए, तो बहुत अधिक प्रभाव मिलता है।

05

क्या दिव्य शक्तियाँ पुराने मंदिरों और तंत्र पीठों में आती हैं?

सौ वर्ष से पुराने मंदिर जहाँ नित्य आरती अखंड होती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:58–04:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तंत्र पीठों में, और ऐसे किसी भी मंदिर में जिसकी स्थापना को सौ वर्ष से अधिक हो गए हों और जहाँ सुबह-शाम की आरती अखंड नियम से रोज होती हो, यदि उस क्षेत्र में किसी देव शक्ति की उपस्थिति बन जाए, तो वहाँ उनका आना-जाना रोज अवश्य होता है। और पर्व काल के समय दिव्य लोक से आने वाली शक्तियाँ भी वहाँ अवश्य जाती हैं।

06

कौन-सी रातें ऊर्जाओं को धरती पर उतारती हैं?

श्रावण पूर्णिमा, दीपावली की रात और शरद पूर्णिमा की रात

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:22–04:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह सर्वविदित है कि श्रावण पूर्णिमा, दीपावली की रात या शरद पूर्णिमा की रात को जितनी भी ऊर्जाएँ हैं — उपदेव हों या देवता — सबका आगमन पृथ्वी लोक पर अवश्य होता है।

वक्ता कहते हैं कि जहाँ तक श्रावण पूर्णिमा, दीपावली की रात या शरद पूर्णिमा की रात की बात है, यह सर्वविदित है कि इस समय जितनी भी ऊर्जाएँ हैं, जितने भी उपदेव हैं, जितने भी देवता हैं — उन सबका आगमन पृथ्वी लोक पर अवश्य होता है।

07

क्या ऐसे स्थान हैं जहाँ उस रात नहीं रुकना चाहिए?

हिमाचल और उत्तराखंड के मंदिर, जोशीमठ और कालीमठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:39–05:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हिमाचल और उत्तराखंड क्षेत्र में कई मंदिर ऐसे हैं जहाँ यह प्रचलित है कि इस रात एक निश्चित समय के बाद कोई सामान्य मनुष्य उस स्थान पर न रुके। जोशीमठ और कालीमठ के बारे में ऐसी बहुत-सी बातें प्रसिद्ध हैं। उस समय वहाँ ऐसे देव तत्व आते हैं जिन्हें देखकर सामान्य व्यक्ति डर जाएगा, क्योंकि उन्हें देख पाना भी हमारी क्षमता से बाहर है।

08

यदि कोई अचानक ऐसी सत्ता को देख ले, तो क्या होता है?

बिना तैयारी के दर्शन से होने वाली परेशानी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:08–05:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि कोई अचानक ऐसी सत्ता को देख ले जिसका उसने कभी सामना नहीं किया, तो परेशानी होगी — शरीर में कष्ट अवश्य होगा। ऐसा नहीं कि वे हानि पहुँचाएँगे, पर केवल देखने से ही हमारे भीतर भय की उपस्थिति बन जाएगी। यह कहना बहुत आसान है कि हम यह करेंगे, वह करेंगे। आमने-सामने होना, और तब जानना कि यह कितनी शक्तिशाली शक्ति है, बिल्कुल अलग बात है।

09

क्या ऐसा दर्शन कभी आशीर्वाद भी बन सकता है?

देव कृपा में मिलने वाला दर्शन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:31–05:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपने किसी मंत्र का खूब जप किया है और आप पर देव कृपा है, तो उस कृपा के साथ ऐसी शक्ति का दर्शन होने का अर्थ है कि आपके आराध्य चाहते थे कि आप इस शक्ति को देखें। ऐसे समय न भय की उपस्थिति होगी, न कोई और कठिनाई। वे आपको आशीर्वाद भी अवश्य देंगे, और आपको कुछ दिव्य भी प्राप्त होगा।

10

यदि कोई इस रात मणिकर्णिका पर दत्त के एकाक्षरी का जप करे, तो क्या होता है?

मणिकर्णिका, दत्त पादुका मंदिर और योग शक्तियाँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:54–06:22 · Also a question

भगवान दत्त के एकाक्षरी का करोड़ों में जप कर चुके व्यक्ति का उदाहरण लेकर वक्ता कहते हैं कि यदि वह शरद पूर्णिमा की रात मणिकर्णिका के आसपास रुके, या वहाँ के दत्त पादुका मंदिरों के पास जप करे, तो बहुत संभव है कि बहुत-सी योग शक्तियाँ और बहुत-सी योगिनियाँ आएँगी, क्योंकि वह दिव्य क्षेत्र है। भगवान दत्त की पूजा के लिए हर तरह की शक्ति आती है — वहाँ की मसानिक शक्तियाँ, उग्र शक्तियाँ और देव शक्तियाँ भी।

11

आभामंडल में स्थित दत्त तत्व ही ऐसे साधक को अनुभूति दिलाता है

आभामंडल में दत्त तत्व और उससे मिलने वाली अनुभूति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:23–06:47

वक्ता कहते हैं कि इनमें से कोई भी प्रसन्न होकर उस साधक को दर्शन दे सकती है जिसने पहले ही इतना जप किया है, क्योंकि उसके आभामंडल में भगवान महागुरु दत्तात्रेय का तत्व उपस्थित होगा। इसलिए उनमें अपने-आप आकर्षण बनता है कि यह परम भक्त है, इस पर कृपा करनी चाहिए। वे जाने से पहले अपनी उपस्थिति का अनुभव करा देंगी, और वही अनुभूति साधक को मार्ग पर आगे ले जाती है।

12

एकाक्षरी बीज के करोड़ों जप का बताया गया प्रभाव क्या है?

आकाशचारी सिद्धों का दर्शन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:48–07:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एकाक्षरी बीज के जप का यह प्रभाव माना गया है कि जप करोड़ों तक पहुँच जाए, तो आकाशचारी सिद्धों का दर्शन सुलभ हो जाता है। वे जोड़ते हैं कि हम वह पात्रता पाते हैं या नहीं, यह अलग बात है — यह इस पर निर्भर है कि हमारा प्रारब्ध कितना घिसा और हमने अपना कितना बुरा प्रारब्ध नष्ट किया।

वक्ता कहते हैं कि एकाक्षरी बीज के जप का यह प्रभाव माना गया है कि यदि जप करोड़ों में किया जाए, तो आकाशचारी सिद्धों का दर्शन सुलभ हो जाता है। अब हम वह पात्रता पा सकते हैं या नहीं, यह अलग बात है। हमारा प्रारब्धपूर्व कर्मों द्वारा पहले से गतिमान भाग्य का वह अंश — साधना व सत्कर्म इसकी तीव्रता को घटा सकते हैं, किंतु पूर्णतः मिटा नहीं सकते। कितना घिसा, हमने अपना कितना बुरा प्रारब्ध नष्ट किया — प्रश्न यही है।

13

क्या ऐसी शक्ति को पहचानना उसे देखने से अलग बात है?

दर्शन से अलग है पहचान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:01–07:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एकाक्षरी मंत्र, वज्र कवच आदि के प्रभाव से पहचानना या न पहचानना अलग बात है — क्योंकि यह भी सच है कि वे हमारे सामने आ भी जाएँ, तो हम उन्हें कैसे पहचानेंगे? वे अपना काम और अपना कर्तव्य करके चली जाएँगी, और हमें पता भी नहीं चलेगा।

वक्ता कहते हैं कि पर एकाक्षरी मंत्र आदि के प्रभाव से, वज्र कवच आदि के प्रभाव से, पहचानना और न पहचानना बिल्कुल अलग विषय है। क्योंकि यह भी सच है: वे हमारे सामने आ भी जाएँ, तो हम उन्हें कैसे पहचानेंगे? वे अपना काम और अपना कर्तव्य करके चली जाएँगी, पर हमें इसका पता नहीं चलेगा।

14

क्या साधक ऐसी शक्तियों को देखने की बात बताते हैं?

दिव्य चक्षु और श्रोताओं के भेजे अनुभव

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:17–07:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अक्सर बहुत अधिक जप करने वाले साधकों को ऐसे दर्शनों के लिए दिव्य चक्षु मिलने लगते हैं — चाहे आकाशचारी सिद्धों के हों या जो भी आकाशचारी शक्तियाँ हैं। बहुत-से लोग उन्हें इस बारे में संदेश भेजते हैं — वे कहते हैं ऐसे कोई आठ-दस संदेश होंगे जिनके स्क्रीनशॉट वे रखते हैं — पर उन्हें डालना उन्हें ठीक नहीं लगता, क्योंकि लोग उनका मज़ाक ही ज़्यादा बनाएँगे।

15

आकाशचारी चीज़ें सबसे आसानी से कहाँ दिखती हैं?

कम बिजली वाले गाँव, खुले में सोना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:50–08:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो लोग ऐसे क्षेत्रों में रहे हैं या रहते हैं जहाँ बिजली के उपकरण और रोशनी कम हैं, वे इसे देखेंगे। गाँव के इलाकों में, जहाँ आज भी बिजली कम है, यदि आप शाम सात-आठ बजे के बाद बाहर खटिया पर या खुली जगह में सोएँ, तो कई बार आपको आकाशचारी चीज़ों का दर्शन होगा।

16

ये दृश्य कैसे दिखते हैं, और कितनी बार होते हैं?

तारे का टूटता-सा लगना, घर में प्रकाश का घुसना और बड़ों की मनाही

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:11–08:42 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आपको लगेगा जैसे कोई तारा टूटकर जा रहा है, या कोई पूरा प्रकाश अचानक किसी के घर में घुस गया। पुराने समय में यह बहुत होता था; अब बिजली की व्यवस्था के कारण पता नहीं चलता, क्योंकि रोशनी हर तरफ फैली है, पर अंधेरे में ये चीज़ें अवश्य दिखती हैं। यह रोज नहीं होता — पर साल में, दो साल में, बहुत बार होता है। और बड़े-बुज़ुर्ग बच्चों को उसकी ओर इशारा करके पुकारने से मना करते हैं।

17

क्या यह केवल पिछले दशकों में लोगों ने देखा था?

अस्सी-नब्बे के दशक तक जन्मे लोग, और अब यह दुर्लभ क्यों है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:43–09:07 · Also a question

वक्ता '89, '90 और '95 तक के लोगों से याद करने को कहते हैं — जिनके समय में गाँवों में ऐसी रोशनी नहीं आई थी, उन सबने इसे अवश्य देखा होगा। लोगों ने इसे बचपन में देखा हो, जवानी में या बुढ़ापे में, ऐसा नहीं कि वर्तमान समय में ये चीज़ें नहीं हो रहीं। बात बस इतनी है कि आज के समय में इसे देख पाना दुर्लभ है।

18

ऐसे अनुभवों के लिए किस तरह का स्थान बताया गया है?

एकांतवास, अरण्यवास और ऐसा शिव मंदिर जिसके बारह कोस में दूसरा न हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:08–09:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसे अनुभवों के लिए एकांतवास और अरण्यवास करने को कहा गया है — ऐसे शिव मंदिर पर जिसके बारह कोस के भीतर कोई दूसरा शिव मंदिर न हो, किसी एक-लिंग क्षेत्र में, या पर्वत की चोटी पर। पर अब, वे कहते हैं, चोटी पर करने कहाँ जाएँगे? किसी भी तीर्थ क्षेत्र की मुख्य चोटी के आसपास घर, दुकानें और होटल बन गए हैं, इसलिए कोई एकांत क्षेत्र नहीं बचा; वह वहाँ से दूर जाकर ही मिलेगा।

19

जब दिव्य दृष्टि खुलने लगती है, तो क्या खतरा होता है?

भ्रम का बढ़ना और सच-झूठ में भेद न कर पाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:36–10:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब साधक अधिक से अधिक जप, तप, हवन आदि कर रहा हो, तीर्थ क्षेत्रों की यात्रा कर रहा हो, और उसे दिव्य चक्षु मिलने लगें, तो उसकी भ्रम की क्षमता बहुत बढ़ने लगती है। वह भेद नहीं कर पाता कि क्या सच है और क्या झूठ। मन की अवस्था आधे में अटक जाती है — उसे हमेशा लगेगा कि वह आधी नींद में है — और शुरू में यह जानना बहुत कठिन होता है कि उसके सामने कौन आया, कौन गया, उनमें कौन मनुष्य था और कौन देव शक्ति से युक्त था।

20

दिव्य दृष्टि के खुलने को कौन संतुलित करता है?

देव कृपा, गुरु कृपा, मंत्र कृपा — और सबसे बढ़कर न्यास

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:07–10:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसे संतुलित करने के लिए देव कृपा, गुरु कृपा और मंत्र कृपा सब अनिवार्य और आवश्यक हैं — और इसमें सबसे बड़ा कारण बनने वाली चीज़ मंत्र का न्यास है। इसी कारण गुरु न्यास की प्रक्रिया, मुद्रा के साथ किया जाने वाला न्यास, सबसे अंत में सिखाते हैं।

वक्ता कहते हैं कि इस चीज़ को संतुलित करने के लिए भी देव कृपा, गुरु कृपा और मंत्र कृपा सब अनिवार्य और आवश्यक हैं। और इसमें सबसे बड़ा कारण बनने वाली चीज़ मंत्र का न्यास है। न्यास की प्रक्रिया, मुद्रापूजा या प्रतिमा-विज्ञान में प्रयुक्त एक प्रतीकात्मक हस्त-मुद्रा — जैसे वरद (वरदान देने वाली) या अभय (निर्भयता प्रदान करने वाली) — प्रत्येक का अपना विशिष्ट अर्थ होता है। के साथ न्यास करना — इसी कारण गुरु इसे अंत में सिखाते हैं।

21

शिष्य को शुरू में ही सब कुछ क्यों नहीं दिया जाता?

ऊर्जा को नियंत्रित करने वाली मुद्रा, और त्वष्टा का उदाहरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:25–10:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शुरू में सब कुछ एक साथ कभी नहीं दिया जाता। जब क्षमता आने लगती है, तब मुद्रा से ऊर्जा का नियंत्रण आता है — कौन-सी ऊर्जा ग्रहण करनी है और कौन-सी हटानी है। वे उदाहरण देते हैं कि भगवान सूर्यनारायण का ताप बहुत अधिक था, और भगवान विश्वकर्मा के रूप त्वष्टा ने अपनी खराद पर उसे काटकर सूर्य की ऊर्जा और उनका ताप कम किया, ऐसा कहा जाता है।

22

न्यास कितने प्रकार के होते हैं?

व्यक्ति की प्रकृति और आम्नाय के अनुसार बदलता न्यास

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:52–11:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मुद्राओं में वह प्रभाव होता है जो गुरु अपनी परंपरा से सिखाते हैं — कि इस मुद्रा के साथ यह बीज मंत्र बोलोगे, तो इतनी ऊर्जा घटेगी और इतनी बढ़ेगी। न्यास भी हर व्यक्ति के लिए उसकी प्रकृति के अनुसार अलग होता है; कम से कम चार प्रकार हैं, और उसके आगे न्यास की प्रक्रिया इस पर निर्भर है कि आपकी दीक्षा छह आम्नायों में से किस आम्नाय में हुई।

23

यदि ऊर्जा संतुलित न हो, तो क्या होता है?

विक्षिप्त अवस्था की ओर बढ़ना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:16–11:40 · Also a question

वक्ता इसे बिल्कुल अंत का विषय बताते हैं, जो तब आता है जब आप उस तरह की ऊर्जाओं से व्यवहार करने लगते हैं और ऐसे अनुभव होने लगते हैं। यदि यह न किया जाए — आप समझ रहे हों कि क्षमता आ रही है, पर संतुलन की कला न हो — तो व्यक्ति विक्षिप्त अवस्था की ओर बढ़ने लगता है, उसे समझ नहीं आता, और धीरे-धीरे उसका दिमाग कम काम करने लगता है।

24

मुद्रा और न्यास अलग-अलग क्या करते हैं?

मुद्रा से ऊर्जा का नियंत्रण, न्यास से उसकी स्थापना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:41–11:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उसी चीज़ को संतुलित करना होता है, और इसी में मुद्रा और न्यास का प्रभाव है। मुद्रा से ऊर्जा घटाने-बढ़ाने की क्षमता आती है — किसे ग्रहण करना है और किसे हटाना है — और न्यास से उसे अपने शरीर में स्थापित करना, देवता के समान हो जाना, ताकि देवता को देवता ही पहचान सके।

वक्ता कहते हैं कि उसी चीज़ को संतुलित करना होता है, और इसी में मुद्रा और न्यास आदि का प्रभाव है। मुद्रा से ऊर्जा को कम या अधिक करने की क्षमता — हाँ भाई, किसे ग्रहण करना है और किसे हटाना है। और न्यास से उसे अपने ही शरीर में स्थापित करना, देवता के समान हो जाना, ताकि देवता को देवता ही पहचान सके।

25

शरीर के मंत्रमय होने का क्या अर्थ है?

देवता को देखने के लिए स्वयं देवता बनना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:58–12:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब मुद्रा और न्यास से आप पूरा मंत्र अपने शरीर में स्थापित करते हैं, तो आपका शरीर मंत्रमय हो जाता है — और मंत्र देवता का ही रूप है। अर्थात आप स्वयं देवता बनकर उस देवता का जप करते हैं। और देवता बनकर, उस मंत्र की सिद्धि के बाद, जब आप मुद्रा के साथ न्यास करते हैं, तो उस देवता को अपने शरीर में बिठाते हैं और स्वयं देवता होकर उस देवता का, उनके गणों का और आकाशचारी सिद्धों का दर्शन कर पाते हैं।

26

बलवान या पीड़ित चंद्रमा इसमें क्या बदलता है?

उच्च का चंद्रमा बनाम ग्रहण दोष और विष दोष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:24–12:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इनमें भी जिनका चंद्रमा बहुत बलवान है, किसी ग्रहण दोष से ग्रस्त नहीं और उच्च का है, उन्हें ये प्रभाव और ये बातें जल्दी मिलने लगती हैं। जहाँ ग्रहण दोष हो, या जन्म कुंडली में विष दोष की उपस्थिति बने, वहाँ भी ये चीज़ें मिलती हैं, पर बात बिल्कुल अलग हो जाती है; उनके लिए चीज़ें सामान्य ढंग से नहीं होतीं, और यह एक तरह की उथल-पुथल बन जाती है।

27

क्या ग्रहण दोष साधक के लिए केवल श्राप है?

ग्रहण दोष और विष योग में छिपा वरदान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:47–13:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब दिखता नहीं, तो नहीं दिखता; पर जहाँ पता चलने लगता है, वहाँ बहुत बड़ी मात्रा में आता है। यदि कोई ग्रहण दोष को श्राप कहे, तो उसके साथ एक बहुत बड़ा वरदान भी है। और विष योग, जिसे दुख देने वाला कहा जाता है, उसी दुख के भीतर एक बहुत बड़ा मार्ग भी निकालता है — यदि व्यक्ति ठीक से साधना करे। वे कहते हैं कि यह स्थायी होता है; साधना के क्षेत्र में यह जो देता है, बहुत अच्छा देता है।

28

साधारण प्राप्ति और दोष पर जीतकर मिली प्राप्ति में क्या अंतर है?

अनुभव का अंतर और सुरक्षा का अंतर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:20–13:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ये योग — ग्रहण, विष योग आदि — जो देते हैं, यदि उससे कोई साधनात्मक प्राप्ति होती है, तो वह बहुत लंबे समय तक चलती है और आपका जीवन बदलने की क्षमता रखती है। सामान्य चंद्र बल वाला व्यक्ति, जिसके लिए सब पहले से ठीक था, जो पाता है — और जो व्यक्ति ग्रहण दोष को नष्ट करके या अपने तप के बल पर उस पर विजय पाकर पाता है — उन दोनों में बहुत बड़ा अंतर होता है: अनुभव का अंतर, और सुरक्षा का भी अंतर।

29

कौन-सी पूर्णिमाएँ दिव्य कहलाती हैं, और उन पर क्या करना चाहिए?

शरद, श्रावण, कार्तिक देव दीपावली और मार्गशीर्ष पूर्णिमा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:00–14:36 · Also a question

वक्ता दिव्य काल की पूर्णिमाओं के नाम लेते हैं — शरद पूर्णिमा, श्रावण, आने वाली कार्तिक पूर्णिमा जो देव दीपावली है, और मार्गशीर्ष की पूर्णिमा। कोई पूर्णिमा जिस देवता को समर्पित है, यदि आप उनसे जुड़े मंत्रों का जप कर रहे हैं, या उनसे जुड़े शक्ति पीठ या मंदिर में हैं, या ऐसे स्थान पर उपस्थित हैं और समर्पित साधक हैं, तो आपको दिव्य अनुभव अवश्य हो सकते हैं।

30

यदि कोई अनुभव न भी हो, तो क्या जप को लाभ मिलता है?

इन दिनों मंत्र की क्षमता में वृद्धि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:37–14:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अनुभूति हो या न हो, आप जो मंत्र जप कर रहे हैं, उसकी क्षमता में वृद्धि सामान्य दिनों की तुलना में बहुत अधिक होती है।

वक्ता कहते हैं कि अनुभूति हो या न हो। आप जो यह मंत्र जप कर रहे हैं — उसकी क्षमता में वृद्धि सामान्य दिनों की तुलना में बहुत अधिक हो जाती है।

31

शरद पूर्णिमा की रात के लिए कौन-से मंत्र बताए गए हैं?

कृष्ण, लक्ष्मी और जगदंबा के सौम्य रूप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:46–15:11 · Also a question

कल रात, शरद पूर्णिमा के लिए, वक्ता भगवान कृष्ण से जुड़े मंत्र, भगवती लक्ष्मी से जुड़े मंत्र, और भगवती जगदंबा के सौम्य रूपों से जुड़े मंत्र बताते हैं — अष्टोत्तर शतनाम, माला मंत्र, चाहे धनदा लक्ष्मी का हो, श्री लक्ष्मी का, महालक्ष्मी अष्टकम आदि।

32

क्या महाकाली और अघोर काली में श्री तत्व होता है?

श्री तत्व से अलग अघोर तत्व

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:12–15:35 · Also a question

मानो यह पूछे जाने पर कि क्या भगवती महाकाली या अघोर काली जैसी कोई अन्य शक्ति श्री तत्व से रहित है, वक्ता उत्तर देते हैं कि नहीं, उनका तत्व अलग प्रकार का है — वह अघोर तत्व से युक्त है। उनका विषय अलग है, और वे साफ़ कहते हैं कि एक सामान्य गृहस्थ व्यक्ति उन तत्वों को स्वीकार नहीं कर सकता।

33

इस रात पूजने पर सौम्य रूप क्या देते हैं?

पुष्टि, तुष्टि, दरिद्रता का नाश और स्थायी समृद्धि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:36–16:05 · Also a question

जो रूप सौम्य हैं, पौष्टिक हैं, धन-धान्य देने वाले हैं, जिन्हें देखते ही लगे कि यह रूप शांति देने वाला है — वक्ता कहते हैं कि कल ऐसे रूपों से जुड़े मंत्रों का जप किया जाए, तो वे हमारी पुष्टि और तुष्टि बढ़ाते हैं, धन-धान्य देते हैं, दरिद्रता हटाते हैं और समृद्धि को स्थायी बनाते हैं। इस कारण से भी शरद पूर्णिमा की रात अपने-आप में बहुत विशेष हो जाती है।

34

इस रात चंद्रमा के अमृत बरसाने का क्या अर्थ है?

खुले आकाश के नीचे जप से मंत्र का अमृत-तुल्य होना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:06–16:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जहाँ कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अमृत बरसाता है, वहाँ यह जानिए: यदि किसी दिव्य स्थान पर, मंडप-विहीन स्थान पर — अर्थात जहाँ छत न हो — बैठकर आप अपने इष्ट मंत्र का जप करें, तो वह मंत्र भी अमृत के समान हो जाता है।

35

क्या हर मंत्र में चंद्रमा की आकर्षण ऊर्जा होती है?

चंद्र रस और किसी भी मंत्र का बल बढ़ना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:30–16:50 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसा कोई मंत्र है ही नहीं जिसमें चंद्रदेव की आकर्षण ऊर्जा न हो — हर मंत्र में आकर्षण ऊर्जा है, आकर्षण अवश्य होता है। और यदि उस मंत्र का जप चंद्रदेव को देखते हुए किया जाए, या ऐसे स्थान पर बैठकर जहाँ उनका चंद्र रस बरसता हो, तो आपका मंत्र भी बहुत बलवान हो जाता है।

वक्ता कहते हैं कि अब ऐसा कोई मंत्र है ही नहीं जिसमें चंद्रदेव की आकर्षण ऊर्जा न हो। हर मंत्र में आकर्षण ऊर्जा है; आकर्षण अवश्य होता है। और यदि उस मंत्र का जप चंद्रदेव को देखते हुए किया जाए, या ऐसे स्थान पर बैठकर जहाँ उनका चंद्र रस बरसता हो, तो आपका मंत्र भी बहुत बलवान हो जाता है।

36

शरद पूर्णिमा पर बाहर रखी खीर की विधि क्या है?

गाय के दूध की खीर, छत पर, चाँदी के कटोरे में, लाल कपड़े से ढकी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:51–17:13 · Also a question

वक्ता प्रचलित मान्यता बताते हैं कि रात को गाय के दूध से बनी खीर चाँदी के कटोरे में छत पर रखनी चाहिए, लाल कपड़े से ढककर; और सुबह भोर में स्नान-पूजन के बाद सबको प्रसाद के रूप में खानी चाहिए। वे कहते हैं कि यदि आप साधक हैं और ऐसा करते हैं, तो यह और भी उत्तम है, क्योंकि यह विशेष है।

37

खीर को ढका क्यों जाता है?

ढकने वाले कपड़े का कारण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:14–17:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ढकना केवल इस कारण है कि उसमें कोई कीड़ा-मकोड़ा या पतंगा आदि न गिरे। यह भी अपने-आप में बहुत विशेष हो जाता है।

वक्ता कहते हैं कि ढकना केवल इस कारण है कि उसमें किसी भी प्रकार का कीड़ा या पतंगा आदि न गिरे। तो यह भी अपने-आप में बहुत विशेष हो जाता है।

38

शरद चंद्र की रात खप्परों के साथ क्या किया जाता है?

दैविक और सात्विक खप्परों की खप्पर सिद्धि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:24–17:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हमेशा याद रखिए कि तंत्र पद्धति में खप्पर चढ़ाने की एक कला है, साधारण खप्पर से लेकर विशेष खप्पर तक। शरद चंद्र की रात — कल शरद पूर्णिमा है — सभी दैविक और सात्विक खप्परों के लिए, और विशेषकर क्षेत्र और भगतवाल आदि से जुड़े कामों में, लोग खप्पर सिद्धि का विषय अवश्य उठाते हैं। कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ आप पाएँगे कि इसी रात खप्पर सिद्धि की जाती है।

39

इस समय की खप्पर सिद्धि किस काम आती है?

रोग हटाना और बीमार व्यक्ति को बल देना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:52–18:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस समय की जाने वाली खप्पर सिद्धि विशेषकर किसी भी प्रकार के रोग को उतारने, बीमार व्यक्ति को बल देने और रोग हटाने की क्षमता के लिए होती है।

वक्ता कहते हैं कि और इस समय जो यह खप्पर सिद्धि की जाती है, वह विशेषकर किसी भी प्रकार के रोग को उतारने के लिए, और बीमार व्यक्ति को बल देने के लिए होती है — रोग-हरण की, यानी रोग हटाने की क्षमता के लिए।

40

इस काम में सबसे अधिक कौन-से मंत्र प्रयोग होते हैं?

भगतवाल में शाबर महामृत्युंजय और नाथपंथी मंत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:11–18:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसमें सबसे अधिक प्रयोग भगतवाल में चलने वाले महामृत्युंजय मंत्र का होता है — शाबर में, शाबर महामृत्युंजय, जिसे वे बिल्कुल अलग बात कहते हैं। इसमें नाथपंथी मंत्र भी आते हैं, और लोग उनका जागरण करते हैं।

वक्ता कहते हैं कि इसमें सबसे अधिक प्रयोग उस मंत्र आदि का होता है जो महामृत्युंजय भगतवाल में चलता है — आप देखेंगे कि वह शाबर में है, शाबर महामृत्युंजय। तो वह बिल्कुल अलग बात है। इसमें नाथपंथी मंत्र भी आते हैं, और लोग इसमें उनका जागरण करते हैं।

41

धरन मंत्र क्या है, और उसे सिद्ध कैसे किया जाता है?

नाभि खिसकने पर धरन बिठाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:28–18:50 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गाँव के लोगों में रोग-हरण से जुड़ा एक बहुत प्रचलित मंत्र है, जिसे धरन बिठाना कहते हैं — जब किसी की नाभि खिसक जाए। शरद पूर्णिमा की रात लोग इसे मिट्टी के छोटे सकोरों पर, या फूल (एक धातु) के कटोरे पर सिद्ध करते हैं। फिर बस उस कटोरे पर पढ़कर, जैसे ही धरन यानी नाभि खिसकी हो, वहाँ बैठकर मंत्र फूँकते हैं, और धरन अपने-आप बैठ जाती है।

42

क्या ये प्रयोग केवल इसी एक रात तक सीमित हैं?

एक रात की सिद्धि, और पशुओं के रोगों के मंत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:51–19:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस तरह के प्रयोग इसी रात किए जाएँगे — केवल शरद पूर्णिमा की रात; एक ही रात में उनके लिए यह सिद्ध हो जाता है। ऐसे कई मंत्र भी हैं जिनमें पशुओं को कोई रोग हो, तो उन्हें ठीक करने के लिए ऐसे मंत्र प्रयोग होते हैं। और ऊँचे स्तर की साधना करने वालों में भी रोग-हरण से जुड़े मंत्र विशेष हैं।

43

वैद्यनाथ और महामृत्युंजय के माला मंत्र कहाँ सिद्ध करने चाहिए?

किसी पुराने बिना छत वाले शिव मंदिर में नंदी के पास बैठकर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:14–19:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बाबा वैद्यनाथ का माला मंत्र और भगवान महामृत्युंजय का माला मंत्र इस रात किसी शिव मंदिर के पास बैठकर सिद्ध किए जाते हैं — विशेषकर ऐसे शिव मंदिर में जहाँ नंदी जी बाहर मंडप-विहीन क्षेत्र में हों, विशेषकर यदि मंदिर पुराना हो। कला यह है कि नंदी जी के पास बैठकर इन्हें सिद्ध किया जाए।

44

ग्रंथ बताते हैं कि कितने धनुष की दूरी पर बैठना है और शिव पर त्राटक कैसे करना है

बैठने की दूरी और शिव पर त्राटक के बारे में ग्रंथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:32–19:44

वक्ता कहते हैं कि यह सब आपको ग्रंथों का अध्ययन करने पर भी पता चलेगा — विधि किस तरह बताई गई थी, कितने धनुष के भीतर बैठना है, और शिव जी को देखते हुए त्राटक करके इसे किस तरह करना है।

वक्ता कहते हैं कि यह सब आपको ग्रंथों का अध्ययन करने पर भी पता चलेगा। विधि किस तरह बताई गई थी: कितने धनुष के भीतर बैठना है, और शिव जी को देखते हुए, त्राटक करते हुए, इसे किस तरह करना है।

45

जब कोई मंत्र सिद्ध न हो, तो क्या किया जाता है?

मंत्र दोष निवारण के दस विधान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:45–20:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब मंत्र सिद्धि नहीं हो रही हो, तो उसके लिए दस प्रकार के विधान बताए गए हैं — श्रोताओं ने कई ग्रंथों में इनके बारे में पढ़ा और सुना भी होगा — कि अमुक विधान करने से मंत्र दोष का निवारण होता है, और उससे मंत्र सिद्ध होता है।

वक्ता कहते हैं कि इसके अलावा, जब हम आगे जाते हैं — जैसे जब मंत्र सिद्धि नहीं हो रही हो — तो उस संबंध में दस प्रकार के विधान बताए गए होंगे। आपने बहुत-से ग्रंथों में भी इनके बारे में पढ़ा होगा और सुना भी होगा, कि अमुक विधान करने से मंत्र दोष का निवारण होता है, और उससे मंत्र सिद्ध होता है।

46

जब कुछ भी काम न कर रहा हो, तो क्या उपाय है?

मंत्र को शिव को अर्पित करना और फिर चंद्रमा पर त्राटक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 20:01–20:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मान लीजिए हमारा दुर्भाग्य बहुत ही प्रबल है — हो नहीं रहा, हम कर रहे हैं पर हो नहीं रहा — तो ऐसी स्थिति में शरद पूर्णिमा की रात शिव जी के मंदिर के पास बैठिए, पहले वह मंत्र शिव जी को अर्पित कीजिए, और फिर चंद्रदेव का दर्शन करते हुए, एक तरह से त्राटक करते हुए, इसे कीजिए।

47

भावना यह है कि मंत्र चंद्रदेव के भीतर लिखा है, जो रात भर में जाग उठता है

चंद्रदेव के भीतर लिखा मंत्र, जो रात भर में जागता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 20:22–20:36

वक्ता कहते हैं कि उस मंत्र में भावना यह है कि चंद्रदेव के भीतर, उनके अंदर, वह मंत्र लिखा हुआ है। और जब तक चंद्रदेव दिखाई दें, तब तक उस मंत्र का जप किया जाए, तो वह मंत्र रात भर में जागृत होकर तुरंत फल देने वाला बन जाता है।

वक्ता कहते हैं कि और उस मंत्र की भावना यह है: कि चंद्रदेव के अंदर, उनके भीतर, वह मंत्र लिखा हुआ है। और जब तक चंद्रदेव दिखाई दें, तब तक यदि उस मंत्र का जप किया जाए, तो वह मंत्र पूरी रात में जागृत होकर तुरंत फल देने वाला बन जाता है।

48

संतुलन की क्षमता के बिना ऐसा त्राटक-जप काम, क्रोध और भूख के विकार बढ़ाता है

काम, क्रोध और भूख के विकारों का बढ़ना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 20:37–21:00

वक्ता चेतावनी देते हैं कि इसमें एक बात और होती है: जब इस तरह त्राटक करते हुए मंत्र का जप किया जाए और संतुलन की क्षमता न हो, तो व्यक्ति के काम और क्रोध से जुड़े विकार, या भूख से जुड़े विकार, बहुत बढ़ जाते हैं। वे इसे साइड इफ़ेक्ट कहते हैं। इसी कारण इसे अधिकतर वही लोग करते हैं जिनका पहले से योग अभ्यास आदि है, या जो पहले से जानते हैं कि यह होगा और इसे कैसे नियंत्रित करना है।

49

विंध्य क्षेत्र और गंगा का किनारा वे स्थान हैं जहाँ यह आम तौर पर किया जाता है

विंध्य क्षेत्र और गंगा का किनारा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 21:01–21:14

वक्ता कहते हैं कि विंध्य क्षेत्र इससे पूरा भरा है — वहाँ खाली ज़मीन खूब मिलती है, इसलिए लोग आराम से करते हैं, और बाद में बहुत बातें भी होती हैं, लोग कहते हैं कि हमने किया और ऐसा हुआ, तो छोड़ना पड़ा। वे इसे अनुभव की बात कहते हैं। गंगा के किनारे बैठकर भी यह किया जाता है।

वक्ता कहते हैं कि विंध्याचल क्षेत्र में यह पूरा भरा है। वहाँ खाली ज़मीन खूब मिलती है। लोग आराम से करते हैं, और फिर बहुत-सी बातें भी होती हैं। वे कहते हैं: अरे भाई, हमने किया और ऐसा हुआ, तो बाद में छोड़ना पड़ा। यह भी अनुभव की बात है। गंगा जी के किनारे बैठकर भी यह किया जाता है।

50

इन रातों में उपदेव श्रेणी की शक्तियों के साथ क्या किया जाता है?

रक्षा, जानकारी और शांति के लिए सौम्य उपदेवों को जगाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 21:15–21:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ठीक इसी तरह उपदेव श्रेणी की शक्तियों के लिए दीपावली की रात और ये सभी रातें उन उपदेवों को जगाने के काम आती हैं जो कुछ सौम्य हैं — जिनका प्रयोग रक्षा आदि के लिए होगा, किसी के बारे में जानकारी लेने के लिए होगा, या किसी उग्र शक्ति को शांत करने के लिए होगा।

51

क्या घर में पूजी जाने वाली किसी उग्र शक्ति को सौम्य बनाया जा सकता है?

गंगा घाट पर सौगंध देकर कुल शक्ति को मनाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 21:38–21:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बहुत-से लोग कहते हैं कि उनके घर में अमुक शक्ति पूजी जाती है और वे उसे उस तरह की पूजा नहीं देना चाहते, बल्कि चाहते हैं कि वह सौम्य हो जाए। इस रात गंगा जी के घाट पर उन्हें सौगंध देकर मनाने का प्रयास किया जाता है। वे कहते हैं कि यह पूरा भगतवाल का विषय है; प्रयास किया जाता है।

वक्ता कहते हैं कि बहुत-से लोग कहते हैं न कि हमारे घर में अमुक शक्ति पूजी जाती है। हम उसे इस तरह की पूजा नहीं देना चाहते; हम चाहते हैं कि वह सौम्य हो जाए। तो इस रात गंगा जी के घाट पर उन्हें सौगंध आदि देकर मनाने का प्रयास किया जाता है। यह पूरा भगतवाल का विषय है। यह प्रयास किया जाता है।

52

ऐसा मनाना किन महीनों में किया जाता है?

श्रावण, आषाढ़ और शरद — पर कार्तिक नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 21:52–22:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि श्रावण, आषाढ़, और तीसरा शरद। कार्तिक में यह नहीं किया जाएगा — कार्तिक में मनाने की बात नहीं बन पाती। इन सभी समयों का अच्छा उपयोग किया जाता है, और इन सभी समयों में ये चीज़ें इसी तरह चलती हैं।

वक्ता कहते हैं कि श्रावण, आषाढ़, और तीसरा शरद। कार्तिक में वे नहीं करेंगे। कार्तिक में मनाने की बात नहीं बन पाती। तो इन सभी समयों का अच्छा उपयोग किया जाता है। इन सभी समयों में ये चीज़ें इसी तरह चलती हैं।

53

अभी कोई पौष्टिक मंत्र सिद्ध करते समय कौन-सा नैवेद्य चढ़ाना अनिवार्य है?

तंत्रोक्त पर्व काल में गाय के दूध की खीर का नैवेद्य

· Reviewed Sep 14, 2026 · 22:06–22:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप किसी भी प्रकार की मंत्र सिद्धि कर रहे हों, सबसे अधिक ध्यान इस बात का रखना है: यदि मंत्र पुष्टिकर है और आप शरद पूर्णिमा जैसे दिव्य तंत्रोक्त पर्व काल में उसकी सिद्धि कर रहे हैं, तो संबंधित देवता को गाय के दूध से बनी खीर का नैवेद्य अवश्य चढ़ाइए।

54

इष्ट को सफ़ेद कमल की माला चढ़ाई जाती है, देवता कोई भी हो — लक्ष्मी की बात अलग है

इष्ट को चढ़ाई जाने वाली सफ़ेद कमल की माला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 22:30–22:55

वक्ता कहते हैं कि यदि आप यह करें, चाहे शिव जी के लिए कर रहे हों, हनुमान जी के लिए, या किसी अन्य देवता के लिए — और यदि लक्ष्मी जी के लिए, तो वह बिल्कुल अलग बात है। एक और विशेष बात: जिस इष्ट आराध्य के मंत्र का आप जप कर रहे हैं, उनके लिए सफ़ेद कमल की माला मिल सके, और न मिले तो कमल के फूलों की जो भी माला मिल सके, और आप उसे चढ़ाएँ, तो उस देवता की कृपा आपको अवश्य मिलती है।

55

यदि मंत्र सिद्धि न भी हो, तो क्या होता है?

देवता की कृपा, मार्ग का खुलना और स्वप्न में मार्गदर्शन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 22:56–23:11 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मंत्र सिद्धि हो या न हो, उस देवता की कृपा अवश्य होती है; आपके लिए आगे का मार्ग खुलता है। और यदि उस सिद्धि में आपसे कोई जाना-अनजाना अपराध हो रहा है — संभव है आप कोई अपराध कर रहे हों — तो उस दोष को हटाने के लिए भी वे स्वप्न आदि से मार्ग दिखाते हैं।

वक्ता कहते हैं कि मंत्र सिद्धि हो या न हो, पर उस देवता की कृपा अवश्य होती है। आपके लिए आगे का मार्ग खुल जाता है। और यदि आपसे कोई जाना-अनजाना अपराध हो रहा है — संभव है उस सिद्धि में आप कोई अपराध कर रहे हों — तो उस दोष को हटाने के लिए भी वे स्वप्न आदि से मार्ग दिखाते हैं।

56

क्या यह रात स्वप्न वाराही और स्वप्नेश्वरी दुर्गा के लिए अच्छी है?

स्वप्न से जुड़े मंत्र और इस रात उनकी शीघ्र सिद्धि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 23:12–23:29 · Also a question

स्वप्न के विषय पर वक्ता कहते हैं कि जो लोग स्वप्न वाराही, स्वप्नेश्वरी दुर्गा आदि के मंत्रों का जप करते हैं या उन्हें सिद्ध करना चाहते हैं, उनके लिए यह दिव्य काल है। विधि का ठीक ज्ञान होना चाहिए। यदि ऐसे मंत्रों का जप रात में किया जाए, तो इन मंत्रों की सिद्धि भी इस रात सबसे जल्दी होती है।

57

क्या इस रात मंत्र सिद्धि के लिए जागना अनिवार्य है?

पूरी रात का जागरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 23:30–23:50 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप मंत्र सिद्धि के लिए आगे बढ़ रहे हैं, तो इसमें एक बात बहुत अनिवार्य है: जागरण करना है, यानी पूरी रात जागना है। कौन जाग रहा है — यह पूरी रात जागकर ही होगा; यदि आप सो गए, तो गया।

वक्ता कहते हैं कि पर इसमें एक बात बहुत अनिवार्य है, यदि आप मंत्र सिद्धि के संबंध में आगे बढ़ रहे हैं। और वह यह है कि जागरण करना है, यानी पूरी रात जागते रहना है। कौन जाग रहा है? यह पूरी रात जागकर ही होगा। यदि आप सो गए, तो गया।

58

इस रात श्री कुल में सबसे श्रेष्ठ क्या है?

श्री विद्या अर्चन और श्री यंत्र का चक्रार्चन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 23:51–24:13 · Also a question

कौन-सी शक्तियाँ सबसे जल्दी चलती हैं, इस पर आते हुए और काली कुल से पहले श्री कुल को देखते हुए, वक्ता कहते हैं कि श्री विद्या में भगवती और श्री यंत्र का अर्चन सबसे श्रेष्ठ है। चाहे आप भगवती बाला के हों, भगवती की पंचदशी के हों या भगवती की षोडशी के — जिसमें भी आपकी दीक्षा हुई हो — यदि आप दीक्षित हैं और चक्रार्चन की विधि ठीक से जानते हैं।

59

चक्रार्चन कहाँ करना चाहिए?

घर, छत, चंद्रमा दिखने वाला एकांत स्थान, या चोटी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 24:14–24:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चक्रार्चन घर में, घर की छत पर, किसी ऐसे एकांत क्षेत्र में जहाँ चंद्रदेव का दर्शन हो रहा हो, या पर्वत की चोटी पर कीजिए। कहा गया है कि बहुत-सी शक्तियाँ वहाँ उपस्थित होकर भगवती के उस अर्चन में सहायता करती हैं, उसमें भाग लेती हैं, और सूक्ष्म रूप में आपको दर्शन भी देती हैं।

60

श्री विद्या की अंग विद्याओं के अर्चन से भी यही प्रभाव मिलता है

अंग विद्याएँ और उनका अर्चन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 24:36–24:47

वक्ता कहते हैं कि ठीक इसी तरह, उनसे जुड़ी, श्री विद्या से जुड़ी सभी अंग विद्याओं के अर्चन और पूजन का भी यही प्रभाव मिलता है।

वक्ता कहते हैं कि और ठीक इसी तरह, उनकी जितनी भी अंग विद्याएँ हैं, जो श्री विद्या से जुड़ी हैं — उनके अर्चन और पूजन से भी यही प्रभाव मिलता है।

61

इस रात काली कुल का काम कहाँ किया जाता है?

श्मशान के पास या गंगा किनारे का शिव मंदिर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 24:48–25:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब आप काली कुल से जुड़े काम की ओर जाते हैं, तो शिव जी का मंदिर आता है — श्मशान के पास का शिव मंदिर, गंगा जी के किनारे का शिव मंदिर, या भगवती देवी का मंदिर। इनमें से किसी भी स्थान पर किया जाए, तो उन दिव्यताओं की अनुभूति होती है।

और जब आप काली कुल से जुड़े काम की ओर जाते हैं, जब काली कुल से जुड़ा काम करते हैं, तब शिव जी का मंदिर आता है। श्मशान के पास का शिव जी का मंदिर, गंगा जी के किनारे का शिव मंदिर, या भगवती देवी का मंदिर। इन सभी स्थानों पर किया जाए, तो उन दिव्यताओं की अनुभूति होती है।

62

रुद्रगण साधना के बारे में क्या कहा गया है?

एक सामान्य मंत्र और एक विशेष मंत्र, दोनों चैनल पर दिए गए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 25:05–25:22 · Also a question

रुद्रगण साधना करने वालों का उदाहरण लेकर — जिन्होंने की है, जो करते हैं, जो मंत्रों का जप करते हैं — वक्ता कहते हैं कि एक सामान्य मंत्र है और एक विशेष मंत्र, और दोनों चैनल पर दिए गए हैं। इनमें किसी भी प्रकार के दोष की उपस्थिति नहीं है कि यह मंत्र करने से कोई दोष पैदा हो।

63

रुद्रगण मंत्र की उग्रता कैसे देखी जाती है?

ऐसी रात शिव मंदिर के पास जप, और दर्शन के बाद की स्थिति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 25:23–25:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि उस मंत्र की उग्रता बहुत बड़ी मात्रा में देखने की इच्छा हो — बिल्कुल उग्र रूप में देखने और जानने की — तो ठीक से संकल्प लेकर ऐसी रात शिव जी के मंदिर के पास उन मंत्रों का जप किया जाए, तो रात भर में कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में वह दर्शन होने लगता है। पर दर्शन हो जाने के बाद की स्थिति आप कैसे संभालेंगे, यह आपका अपना विषय है।

64

दर्शन दो सेकंड का भी हो सकता है और पंद्रह मिनट का भी, और हो सकता है पहचाना ही न जाए

दो सेकंड या पंद्रह मिनट — और पहचान होती है या नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 25:46–26:07

वक्ता कहते हैं कि हो सकता है हम जप करें और हमें केवल दो-चार सेकंड का दर्शन हो, वे गायब हो जाएँ, और हम उतने से ही प्रसन्न हो जाएँ — या बहुत विचलित हो जाएँ, और डर भी जाएँ। यह हमारा निजी विषय है। यह भी हो सकता है कि वे दस-पंद्रह मिनट दर्शन दें; हो सकता है आप उन्हें न पहचानें, या पहचान लें। यह सबके लिए अलग हो सकता है।

65

क्या ऐसी शक्ति साधक को कुछ दे सकती है?

शक्ति द्वारा दी गई प्रसादी, और गुरु का पहले से पोषण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 26:08–26:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपका पुण्य बल बहुत अधिक है, तो हो सकता है वे किसी रूप में आकर आपको कुछ देने लगें, कहें कि यह चीज़ लो; वे प्रसादी के रूप में कुछ देने लगें। ऐसी कई अनुभूतियाँ होती हैं। तो यह साधक का निजी विषय बन जाता है — गुरु ने उसका किस तरह पोषण किया है, क्या ज्ञान दिया है, कैसे पहचानना है, क्या जानना है।

66

इस रात शक्ति पीठ पर कितना जप किया जाता है?

सौ या दो सौ माला, या बिना गिने पूरी रात

· Reviewed Sep 14, 2026 · 26:28–26:52 · Also a question

पहचानने का एक छोटा उदाहरण लेते हुए वक्ता अपनी पिछली बात याद दिलाते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात सभी दिव्य शक्ति पीठों और ऐसे प्राचीन मंदिरों में शक्तियाँ अवश्य आती हैं। तो यदि हम ऐसे क्षेत्र में जाकर मंत्र जप करें — सौ माला, दो सौ माला, या बिना माला गिने पूरी रात बैठें, रात नौ बजे से या आठ बजे से, और भोर के तीन-चार बजे तक जप करते रहें, पैर दुखें, उठें और फिर बैठ जाएँ।

67

साधक को कैसे पता चलेगा कि कोई शक्ति पास आई है?

गंध से पहचान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 26:53–27:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वे अवश्य आएँगी, और आप उनकी नज़र में आ जाएँगे — कि यह जप कर रहा है। पर आप पहचानेंगे कैसे? पहचानने के लिए यह है: यदि वे आकर आपके पास बैठें, तो गंध से। वे कैसी गंध देंगी यह उन पर निर्भर है, पर गंध अवश्य आएगी।

वक्ता कहते हैं कि जब वे आएँगी, तो आप उनकी नज़र में आ ही जाएँगे — अच्छा, ठीक है, यह जप कर रहा है। पर आप पहचानेंगे कैसे? पहचानने के लिए यह है: कि यदि वे आकर आपके पास बैठें, तो यह गंध से होगा। अब वे कैसी गंध देंगी, यह उन पर निर्भर है। पर गंध अवश्य आएगी।

68

क्या गंध अप्रिय भी हो सकती है?

सुंदर उपस्थिति से दुर्गंध, एक परीक्षा के रूप में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 27:07–27:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हो सकता है वे आपको बहुत बुरी तरह की दुर्गंध देने लगें — देखने में वे बहुत सुंदर हैं, बहुत अच्छे लग रहे हैं, पर दुर्गंध भी आ रही है। वे कहते हैं कि यह भी आपकी परीक्षा की बात है।

वक्ता कहते हैं कि गंध अवश्य आएगी। हो सकता है वे आपको बहुत बुरी तरह की दुर्गंध देने लगें। देखने में वे बहुत सुंदर हैं, बहुत अच्छे लग रहे हैं, पर दुर्गंध भी आ रही है। यह भी आपकी परीक्षा की बात है।

69

यदि कोई बहुत विकृत रूप आकर पास बैठ जाए, तो क्या?

चिढ़, भ्रमित बुद्धि, और गुरु की पहले दी गई समझ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 27:21–27:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस पर आप चिढ़ें या प्रसन्न हों, यह अब आपका अपना अनुभव और आपके गुरु का ज्ञान है। कई बार ऐसा होता है कि बहुत विकृत चेहरों वाली, देखने में असुंदर चीज़ें उसी असुंदरता में आकर बैठ जाएँगी। तब आप चिढ़ जाते हैं — यह यहाँ आकर क्यों बैठ गया। उस समय बुद्धि पहले ही भ्रमित हो चुकी होती है। पर यदि गुरु ने पहले समझाया हो, तो कुछ क्षणों बाद आपके ध्यान में अवश्य आएगा कि यह कोई संबंधित शक्ति हो सकती है।

70

ऐसी उपस्थिति का संदेह होते ही क्या करना चाहिए?

उन्हें देखते हुए जप जारी रखना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 27:47–27:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि फिर मंत्र जप करते हुए उन्हें देखिए, देखते रहिए, और वे आपको अवश्य अनुभव करा देंगी कि हाँ, ऐसा ही है।

वक्ता कहते हैं कि फिर मंत्र जप करते हुए उन्हें देखिए; देखिए, देखिए। और वे आपको अवश्य अनुभव करा देंगी — कि हाँ, ठीक है।

71

आम तौर पर किस श्रेणी की शक्ति साधक के साथ घर आती है?

दिव्य नहीं, उपदेव श्रेणी की शक्तियाँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 27:56–28:17 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बहुत-से लोग ऐसे हैं जो इस तरह के क्षेत्र में जाकर साधना करते हैं और पाते हैं कि शक्तियाँ उनके साथ आती हैं — पर अधिक से अधिक ये उपदेव श्रेणी की शक्तियाँ होती हैं। दिव्य शक्तियाँ उस हद तक कभी साथ नहीं आएँगी। यदि किसी में वैसी क्षमता हो तो बात अलग होगी, लोकाचार के विषय से ऊपर, और ऐसा साधक दिव्य श्रेणी में होगा। पर जो शक्तियाँ घर आती हैं, वे अधिकतर यही होती हैं।

72

इस तरह की साधना में बंधन का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता?

दिशा बंधन और आसन बंधन से दर्शन का रुकना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 28:18–28:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कारण यह है कि इस काल में आप जो भी साधना करें, उसमें कोई बंधन प्रयोग नहीं करेंगे। यदि बंधन लगाकर करेंगे, तो वह दर्शन आपको होगा ही नहीं — यह भी जानिए। यदि आप दिशा बंधन करके, आसन बंधन करके बैठे रुद्रगण साधना कर रहे हैं ताकि कोई नकारात्मक शक्ति न आए, तो आप अपनी जगह सही हैं, गलत नहीं — पर तब कुछ दिखेगा नहीं, और अनुभव की बात हट जाती है।

73

इसके लिए साक्षात गुरु क्यों आवश्यक है?

बिना बंधन बैठना, और मनोबल की दृढ़ता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 28:38–29:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसी कारण साक्षात गुरु आवश्यक हो जाते हैं — ताकि गुरु आपको समझाएँ कि आसन पर बैठे हों तो हमारे पास वह कला हो कि बिना बंधन बैठने पर भी कोई नकारात्मक ऊर्जा हमारा कुछ बिगाड़ न सके। वह डरा सकती है, भयभीत कर सकती है, भ्रम पैदा कर सकती है, पर हानि नहीं पहुँचा सकती। अब आपका मनोबल इतना दृढ़ हो कि वे डराने का प्रयास करें तो आप पर कोई फ़र्क न पड़े।

74

केवल प्रेरणा के बल पर ऐसी साधना में उतरना ठीक नहीं; अपने अनुभव वाले प्रत्यक्ष गुरु चाहिए

केवल सुनकर ऐसी साधना में उतरना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 29:09–29:29

वक्ता कहते हैं कि यह अपने-आप पूरी तरह संभव नहीं है; यहाँ प्रत्यक्ष गुरु की आवश्यकता आती है, जिनका अपना अनुभव हो कि ऐसा हो सकता है। यदि आप केवल सुनकर और प्रेरित होकर सीधे इस तरह की साधना में उतर जाएँ, तो वहाँ बहुत कुछ हो सकता है — आदमी विक्षिप्त भी हो सकता है। इसलिए इसे केवल जानकारी के रूप में रखिए, और जब योग्य गुरु मिलें, तब इस तरह की साधना का प्रयास कीजिए।

75

तो इस रात गृहस्थ को घर पर क्या करना चाहिए?

घर पर लक्ष्मी साधना — माला मंत्र, धनदा कवच, जप या हवन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 29:30–29:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बाकी, क्योंकि घर में बात श्री तत्व से जुड़ी है, भगवती लक्ष्मी से जुड़ी साधना अवश्य कीजिए। चाहे उनका माला मंत्र करें, धनदा लक्ष्मी का कवच करें, धनदा लक्ष्मी का जप करें, या हवन आदि करें। पूर्णिमा के दिन, और विशेषकर शरद पूर्णिमा पर, पौष्टिक सामग्री से किया गया हवन बहुत उत्तम है।

76

रात की पूर्णिमा का पूजन एक रात पड़ता है और सुबह की पूजा उसके अगले दिन

रात की पूर्णिमा कल, सुबह की पूजा परसों

· Reviewed Sep 14, 2026 · 29:52–30:19

वक्ता कहते हैं कि जो लोग व्रत के साथ पूजन करना चाहते हैं, रात की पूजा करना चाहते हैं, या रात की पूजा के बाद प्रसाद लेना चाहते हैं, वे कल ही करेंगे, क्योंकि रात की पूर्णिमा कल ही मिलेगी। जिन्हें सुबह की पूजा करनी है — भगवान सत्यनारायण की पूजा, दिन में सहस्रार्चन आदि, सुबह हवन — वे परसों कर सकते हैं।

77

घर में पहले से स्थापित लक्ष्मी यंत्रों और विग्रहों का क्या?

कामाख्या की गुप्त लक्ष्मी, जो साल में एक बार निकलती हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 30:20–30:43 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके साथ एक और बात आती है: आपके घर में भगवती लक्ष्मी से जुड़े किसी भी प्रकार के यंत्र की पहले से स्थापना, कलश की स्थापना, श्री विग्रह की स्थापना — ज़रूरी नहीं कि आपने गृहस्थ तंत्र के माध्यम से स्वयं की हो, आपके माता-पिता ने पहले से रखा हो। वे उदाहरण देते हैं कि कामाख्या क्षेत्र में गुप्त लक्ष्मी की पूजा करने वाले लोग हैं: दीपावली की रात, लक्ष्मी जी पूरे साल में केवल एक बार बाहर आती हैं।

78

क्या अष्ट लक्ष्मी के अलावा भी लक्ष्मी के रूप हैं?

क्षेत्रीय लक्ष्मियाँ, और इस रात विग्रह का अभिषेक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 30:44–31:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसी तरह अन्य क्षेत्रों में अन्य प्रकार की लक्ष्मियों का पूजन भी होता है; अष्ट लक्ष्मी के अलावा अन्य लक्ष्मियों के रूप भी हैं, और उनका पूजन क्षेत्र के अनुसार होता है। क्योंकि यह श्री तत्व से जुड़ी रात है, इस रात लक्ष्मी जी का विग्रह — चाँदी का, सोने का, या जो भी आपने रखा हो, गुटका आदि — रात या संध्या को पूजन स्थान पर बिठाना चाहिए, और उनका अभिषेक अवश्य करना चाहिए।

79

श्री सूक्त का पाठ करें या महालक्ष्मी अष्टकम का?

यज्ञोपवीत ही विभाजन रेखा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 31:09–31:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप यज्ञोपवीत धारण करते हैं, तो श्री सूक्त आदि का पाठ कीजिए; और यदि नहीं, तो महालक्ष्मी अष्टकम — इंद्र-कृत महालक्ष्मी अष्टक, जिसका माहात्म्य वे अद्भुत बताते हैं।

वक्ता कहते हैं कि यदि आप यज्ञोपवीतवैदिक कर्मों में दीक्षा का प्रतीक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार — पीढ़ियों तक न होने पर, इसे पुनः आरंभ करने से पहले हर ज्ञात पीढ़ी के लिए प्रायश्चित आवश्यक है। धारण करते हैं, तो श्री सूक्त आदि का पाठ करके — और यदि नहीं, तो महालक्ष्मी अष्टकम्। इंद्र-कृत महालक्ष्मी अष्टक का माहात्म्य अद्भुत है।

80

इंद्र-कृत महालक्ष्मी अष्टक किसके लिए बताया गया है?

जिनकी लक्ष्मी छिन गई हो, उनके लिए इंद्र की स्तुति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 31:24–31:45 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि कहा गया है कि जिनका धन-संपत्ति हर ली गई हो, जिनकी लक्ष्मी छीन ली गई हो, जिन्हें लक्ष्मी जी छोड़कर चली गई हों, उनके लिए भगवान इंद्र ने अष्टक के रूप में यह स्तुति की थी। वे इसे इस तरह उद्धृत करते हैं: "नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥"। ये आठ श्लोक हैं; यह एक श्लोक था, और यदि इन आठ से भगवती की स्तुति की जाए, तो ये श्लोक दिव्यता से भरे हैं।

81

अष्टक की कितनी आवृत्तियाँ बताई गई हैं?

एक सौ आठ आवृत्तियाँ, फलश्रुति छोड़कर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 31:46–31:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवती अतुलनीय कृपा करती हैं; आपको बहुत कुछ करने की ज़रूरत नहीं। आठ श्लोकों की एक सौ आठ आवृत्तियाँ कीजिए। अंत में दो-चार श्लोक होंगे — वास्तव में केवल दो — जो फलश्रुति हैं; उन्हें छोड़ दीजिए। मूल अष्टक के आठ श्लोकों का एक सौ आठ बार पाठ कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि भगवती अतुलनीय कृपा करती हैं। आपको बहुत कुछ करने की ज़रूरत नहीं है। आठ श्लोकों की एक सौ आठ आवृत्तियाँ कीजिए। अंत में चार या दो श्लोक होंगे — वास्तव में केवल दो ही होंगे — जो आपकी फलश्रुति हैं; उन्हें छोड़ दीजिए। मूल अष्टक, जो आठ श्लोक हैं, उनका एक सौ आठ बार पाठ कीजिए।

82

अधिक दिव्य रूप में एक सौ आठ कमल, गुलाब, सफ़ेद फूल या बिल्व पत्र चढ़ाए जाते हैं

एक सौ आठ कमल, गुलाब, सफ़ेद फूल या बिल्व पत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 32:00–32:32

वक्ता कहते हैं कि यदि आप इसे बहुत दिव्य ढंग से करना चाहें, तो घर में स्थापित भगवती लक्ष्मी के श्री विग्रहों को लेकर उनका स्नान, अभिषेक और शृंगार कीजिए, और फिर — सामर्थ्य हो तो — एक सौ आठ कमल के फूलों से अर्पण कीजिए; वह न हो तो एक सौ आठ गुलाब; वह भी न हो तो एक सौ आठ सफ़ेद फूल; और वह भी न हो तो एक सौ आठ बिल्व पत्र, भगवती के एक सौ आठ पाठ करते हुए हर पाठ के साथ अर्पण कीजिए।

83

एक सौ आठ पाठों के दौरान हर अर्पण कैसे किया जाता है?

हाथ में एक फूल, एक पाठ, एक अर्पण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 32:33–32:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हाथ में एक कमल का फूल लीजिए, और फिर महालक्ष्मी अष्टक का एक पाठ करके उसे उन्हें अर्पित कीजिए; या बिल्व पत्र लेकर अर्पित कीजिए, या कमल के फूल से कीजिए, या गुलाब की पंखुड़ी लेकर अर्पित कीजिए, या गुलाब चढ़ाइए। इस तरह एक सौ आठ पाठ कीजिए — भगवती विशेष कृपा करती हैं।

वक्ता कहते हैं कि हाथ में एक कमल का फूल लीजिए, और उसके बाद महालक्ष्मी अष्टक का एक पाठ करके उसे उन्हें अर्पित कीजिए। या बिल्व पत्र लेकर अर्पित कीजिए, या कमल का फूल लेकर कीजिए, या गुलाब की पंखुड़ी लेकर अर्पित कीजिए, या गुलाब चढ़ाइए। इस तरह करते हुए एक सौ आठ पाठ कीजिए। भगवती विशेष कृपा करती हैं।

84

यह पाठ किस समय करना चाहिए?

चंद्रोदय के बाद, कम से कम आठ-नौ बजे के बाद

· Reviewed Sep 14, 2026 · 32:52–33:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह काम चंद्रमा के उदय के बाद करना है — चंद्रोदय शाम को ही हो रहा है, फिर भी कम से कम आठ-नौ बजे के बाद कीजिए। यदि आधी रात को करने की इच्छा हो, तो तब कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि यह काम आपको चंद्रमा के उदय के बाद करना है। यद्यपि चंद्रोदय शाम के समय ही हो रहा है, फिर भी कम से कम आठ-नौ बजे के बाद कीजिए। यदि आधी रात को करने की इच्छा हो, तो तब कीजिए।

85

क्या रात में पूजा करने में खतरा है?

महानिशा पर भूत-प्रेत का डर, और उसका उत्तर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 33:04–33:29 · Also a question

वक्ता उस डर की बात करते हैं जो लोग मन में बिठाए रखते हैं — कि रात में पूजा करेंगे तो कोई भूत-प्रेत पूजा ले लेगा। वे कहते हैं कि यह दिव्य रात है; ये महानिशा हैं, और इन सभी महारात्रियों में पूजन करने पर किसी भूत-प्रेत में आपकी पूजा लेने की क्षमता नहीं है। निजी बात अलग है — यदि आपके घर में पहले से कोई भूत बैठा है और आप वहाँ जो पूजा करते हैं वह ले रहा है, तो वह दूसरी बात है। पर इन दिव्य रातों में पूजन करने में कोई दोष नहीं है।

86

रात की पूजा के सामान्य होने का वे क्या उदाहरण देते हैं?

बंगाल की लखी पूजा और दीपावली की रात की लक्ष्मी पूजा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 33:30–33:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि महत्व तो रात की पूजा का ही है। बंगाल क्षेत्र में कल की लखी पूजा — वहाँ लक्ष्मी जी अपभ्रंश होकर लखी कहलाती हैं — रात की ही पूजा होगी, घर-घर में; अधिकतम लोग करते हैं, सौ में से अट्ठानवे घरों में, शायद दो की कोई अपनी मजबूरी हो। बाकी क्षेत्रों में लक्ष्मी पूजा दीपावली की रात, सुलोस बेला में होती है।

87

कोजागरी ठीक कब है और काली पूजा कब?

कोजागरी कल रात, काली पूजा दीपावली की रात

· Reviewed Sep 14, 2026 · 33:52–34:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उस समय ये लोग काली पूजा करेंगे, और पूरे बंगाल क्षेत्र में कल जो कोजागरी होगी, लखी पूजा, वह रात में ही होगी। कल ही होगी; परसों नहीं होने वाली, क्योंकि परसों रात में पूर्णिमा नहीं है।

वक्ता कहते हैं कि तो उस समय ये लोग काली पूजा करेंगे। और बाकी, पूरे बंगाल क्षेत्र में कल जो कोजागरी होगी, जो लखी पूजा होगी, वह रात में ही होगी। कल ही होगी। परसों नहीं होने वाली — परसों रात में पूर्णिमा नहीं है।

88

क्या रात की पूजा के लिए व्रत रखना अनिवार्य है?

खाना-पीना ठीक, पर पूजन से पहले स्नान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 34:07–34:17 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आपको भी कल ही और रात में ही करना है। अब यदि आप इसमें व्रत नहीं रख सकते, तो कोई कठिनाई नहीं — जाइए, खाइए। शाम को स्नान कीजिए; पूजन से पहले स्नान आदि करके शुद्ध और पवित्र हो जाइए।

वक्ता कहते हैं कि तो आपको भी जो करना है, कल ही करना है। परसों नहीं करना है, और रात में ही कीजिए। अब इसमें आप व्रत नहीं रख सकते — कोई कठिनाई नहीं; जाइए, खाइए। शाम के समय स्नान कीजिए। पूजन करने से पहले स्नान आदि कीजिए, शुद्ध हो जाइए, पवित्र हो जाइए।

89

बैठने से पहले स्वयं को पवित्र करने के लिए कौन-सा श्लोक प्रयोग होता है?

पुंडरीकाक्ष श्लोक और जल छिड़कना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 34:18–34:41 · Also a question

वक्ता श्लोक इस तरह देते हैं: "ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥"। वे समझाते हैं कि इससे हम भगवान पुंडरीकाक्ष का स्मरण करते हैं, जिनके केवल स्मरण से हम भीतर और बाहर दोनों ओर से शुद्धि पाएँ और अशुद्धि दूर हो। उन पुंडरीकाक्ष, उन भगवान नारायण के नाम में श्रद्धा रखिए; उस मंत्र का माहात्म्य समझिए; उसे पढ़कर जल छिड़किए, और फिर बैठकर कीजिए।

90

महालक्ष्मी अष्टक कहाँ मिल सकता है?

पाठ के लिए चैनल और इंटरनेट पर खोजना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 34:42–35:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अष्टक अवश्य कीजिए, अष्टक मत छोड़िए; यह सर्वत्र उपलब्ध है और इसकी संस्कृत बहुत आसान है। चैनल पर खोजिए — YouTube पर "इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र" और "महालक्ष्मी अष्टकम गृहस्थ तंत्र" इस तरह लिखकर खोजिए, आ जाएगा; इसकी PDF भी मिल जाएगी, या इंटरनेट पर कहीं से भी डाउनलोड कर लीजिए। इसके एक सौ आठ पाठ अवश्य कीजिए।

91

पूरा परिवार मिलकर यह पूजन कैसे करे?

स्नान, शुभ वस्त्र, चौकी और सहस्रनाम अर्चन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 35:09–35:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपका पूरा परिवार मिलकर, कल शाम या रात को, सब स्नान करके शुभ वस्त्र पहनें — लाल, सफ़ेद या पीला, सब पहनें — तो भगवती लक्ष्मी का श्री विग्रह चौकी पर स्थापित कीजिए और सहस्रनाम से उनका अर्चन कीजिए।

यदि आपका परिवार, पूरा परिवार मिलकर, कल शाम के समय या रात के समय सब स्नान आदि करके शुभ वस्त्र पहनें — लाल, सफ़ेद या पीला वस्त्र, सब पहनें — तो भगवती लक्ष्मी का श्री विग्रह चौकी पर स्थापित कीजिए, और सहस्रनामकिसी देवता के सहस्र नामों का पाठ — यह विभिन्न देवी-देवताओं के लिए रचित एक भक्ति विधा है, कोई एक निश्चित ग्रंथ नहीं। से उनकी अर्चना कीजिए।

92

परिवार को कैसे बैठना चाहिए, और विग्रह को स्नान कैसे कराया जाता है?

किसी का मुख दक्षिण की ओर नहीं, और अष्टक पढ़ते हुए स्नान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 35:29–35:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मान लीजिए परिवार में पाँच लोग हैं — पाँचों आराम से बैठ सकते हैं; बस इतना ध्यान रखना है कि किसी का मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो। पहले भगवती को स्नान कराइए और उनका शृंगार कीजिए। यदि मंत्र नहीं आते तो कोई कठिनाई नहीं: महालक्ष्मी अष्टक पढ़ते हुए उन्हें स्नान कराइए।

93

उपस्थित लोगों में अर्चन कैसे बाँटा जाता है?

पाँच द्रव्य, पाँच पुस्तकें या एक पाठ करने वाला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 35:45–36:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उसके बाद उन्हें ऊँचे सिंहासन पर बिठाकर वस्त्र पहनाइए। अब पाँच व्यक्ति हैं, तो पाँच अलग-अलग द्रव्यों से उनका अर्चन कीजिए: सहस्र अर्चन के लिए पाँच पुस्तकें लाइए, या पाँच जगह PDF के प्रिंटआउट निकालिए — या केवल एक निकालिए, एक व्यक्ति पढ़े और बाकी अर्चन करें।

वक्ता कहते हैं कि और उसके बाद उन्हें ऊँचे सिंहासन पर बिठाइए, और उन्हें वस्त्र आदि पहनाइए। अब पाँच व्यक्ति हैं, तो पाँच अलग-अलग द्रव्यों से उनका अर्चन कीजिए। सहस्र अर्चन के लिए पाँच पुस्तकें लाइए, या पाँच जगह PDF के प्रिंटआउट निकालिए; या केवल एक निकालिए, एक व्यक्ति पढ़े और बाकी अर्चन करें।

94

अर्चन के लिए कौन-से पाँच द्रव्य प्रयोग होते हैं?

गुलाब की पंखुड़ियाँ, मेवा, कुमकुम, हल्दी, कमल की पंखुड़ियाँ या बिल्व

· Reviewed Sep 14, 2026 · 36:05–36:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक व्यक्ति गुलाब की पंखुड़ियाँ इकट्ठी करे — चाहे गुलाबों पर आपकी जेब से पाँच सौ रुपये चले जाएँ। दूसरा किसी तरह के मेवे से उनका अर्चन करे, एक कुमकुम से, एक व्यक्ति हल्दी से, और एक व्यक्ति कमल की पंखुड़ियों से, कमल के फूलों से, या बिल्व से।

95

सहस्रनाम अर्चन वास्तव में कैसे पढ़ा जाता है?

एक पढ़ने वाला, सब मिलकर नमः कहते और अर्पण करते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 36:33–37:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अब एक व्यक्ति पाठ कर रहा है — "श्री महालक्ष्मी" — और सब मिलकर "नमः" बोलेंगे और जिसने जो द्रव्य लेकर बैठा है, उससे उनका अर्चन करेंगे। "श्री विष्णुप्रियायै नमः" — सब मिलकर "नमः" बोलते हैं और फिर अर्पण करते हैं। इस तरह भगवती का अर्चन कीजिए। भगवती लक्ष्मी जी का सहस्र अर्चन करें तो यह दिव्य हो जाता है, क्योंकि भगवती को अर्चन प्रिय है; जगदंबा के सभी रूपों को अर्चन बहुत प्रिय है।

96

यदि अर्चन से पहले भोजन कर लिया हो, तो क्या?

स्नान, धुला आसन, संकल्प और गुरु-गणपति का स्मरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 37:01–37:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप कल रात अर्चन करें और खा-पी लिया हो — वे फिर कहते हैं, कोई कठिनाई नहीं। खा-पी लिया था; स्नान आदि कीजिए, शुभ वस्त्र पहनिए, आसन धुला हो और सब ठीक-ठाक हो; अब संकल्प कीजिए और इस तरह अर्चन कीजिए, गुरु और गणपति का स्मरण करके, फिर साहित्य अर्चन कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि तो यदि कल रात आप अर्चन करें — आपने खा-पी लिया था; वे फिर कहते हैं, कोई कठिनाई नहीं। आपने खा-पी लिया था। स्नान आदि कीजिए, शुभ वस्त्र पहनिए, आसन धुला हो, सब कुछ बढ़िया हो। अब संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। कीजिए, और इस तरह अर्चन कीजिए: गुरु और गणपति का स्मरण करके, फिर साहित्य अर्चन कीजिए।

97

पाँच लोगों में एक सौ आठ पाठ कैसे बाँटे जाते हैं?

हर एक के बीस, और बाकी आठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 37:16–37:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अब महालक्ष्मी अष्टक के एक सौ आठ पाठ करने हैं, और आप पाँच व्यक्ति हैं — तो एक सौ आठ को पाँच से बाँटिए। हर एक बीस बार पढ़े तो सौ हो जाते हैं; फिर बाकी आठ के लिए हर एक एक बार और पढ़े, या कोई तीन बार पढ़े, कोई अधिक — और एक सौ आठ पाठ पूरे हो जाते हैं। पाठ कम करना पड़ा और समय कम लगा, पर जब पाठ सामूहिक होता है, तो उसकी क्षमता बढ़ जाती है।

98

अर्चन के बाद मुख्य चीज़ क्या आती है?

दीपदान, जिसे किसी भी दिव्य तिथि पर छोड़ना नहीं है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 37:39–37:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके बाद सबसे प्रमुख विषय आता है — दीपदान। दीपदान छोड़ना नहीं है। किसी भी स्थिति में हमेशा याद रखिए कि जीवन में कोई भी दिव्य तिथि आए, तो दीपदान अवश्य करना है, चाहे प्रदोष काल में करें या निशा काल में। तो शरद पूर्णिमा की रात भी दीपदान अवश्य हो।

वक्ता कहते हैं कि अब इसके बाद सबसे प्रमुख विषय आता है: दीपदान। दीपदान छोड़ना नहीं है। किसी भी स्थिति में। हमेशा याद रखिए कि जीवन में कोई भी दिव्य तिथि आए, तो दीपदान अवश्य करना है। चाहे प्रदोष काल में करें या निशा काल में करें। तो शरद पूर्णिमा की रात भी दीपदान अवश्य हो।

99

कितने दीपक जलाने चाहिए, और किससे?

गाय के घी के सोलह दीपक, या काले तिल के तेल के

· Reviewed Sep 14, 2026 · 37:50–38:20 · Also a question

कितना दीपदान करना है — वक्ता कहते हैं कि सोलह की संख्या भगवती को बहुत प्रिय है: षोडशोपचार उन्हीं का है, और सोलह कलाएँ भगवती को बहुत प्रिय हैं। तो कल, पूर्णिमा की रात, कम से कम सोलह दीपक गाय के घी के जलाइए; और गाय का घी संभव न हो, तो तिल के तेल का — जिसे मीठा तेल कहते हैं, काले तिल का। इन्हें अपने पूजन स्थान पर भगवती लक्ष्मी जी के नाम से अवश्य जलाइए और उन्हें अर्पित कीजिए।

100

दीपदान के समय कौन-सा संकल्प किया जाता है?

कि भगवती प्रसन्न होकर कुल में वास करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 38:21–38:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दीपदान में संकल्प कीजिए: "हे भगवती, सदा प्रसन्न होकर मेरे कुल में वास कीजिए"। संभव हो तो सोलह दीपक जलाकर फिर रात के समय उनका साहित्य अर्चन कीजिए — यह बहुत दिव्य है।

वक्ता कहते हैं कि दीपदान में संकल्प कीजिए कि: हे भगवती, सदा प्रसन्न होकर मेरे कुल में वास कीजिए। संभव हो तो सोलह दीपक जलाकर, तब उनका साहित्य अर्चन कीजिए। रात के समय किया जाए, तो बहुत दिव्य है।

101

एक-दो घंटे की पूजा से पूरे साल लक्ष्मी की कृपा बताई गई है, और दीपावली पर इसे दोहराना

एक-दो घंटे की पूजा, साल भर की कृपा, और दीपावली पर दोहराव

· Reviewed Sep 14, 2026 · 38:32–38:58

वक्ता कहते हैं कि यह एक-दो घंटे की पूजा होगी, पर भगवती लक्ष्मी की कृपा आपको पूरे साल मिलती रहेगी। वे इसे सबसे बड़े कर्ज़ के लिए बताते हैं, जहाँ कोई रास्ता नहीं मिल रहा। और यदि यही प्रयोग आप पाँच दिन के दीपावली पर्व में, धनतेरस से द्वितीया तिथि तक, फिर करें, तो यह बहुत उत्तम है।

102

क्या पूरे परिवार को पाँचों दिन करना अनिवार्य है?

एक दिन सब मिलकर, या पाँच दिन एक व्यक्ति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 38:59–39:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि किसी एक दिन परिवार के साथ कीजिए; सब हर दिन न कर सकें तो कोई कठिनाई नहीं — पर पाँच दिन एक व्यक्ति वहाँ भी करे। तब भगवती की कृपा अवश्य होती है, क्योंकि भगवती अर्चन-प्रिया हैं; अर्चना उन्हें बहुत प्रिय है। वे कृपा करेंगी और रास्ता निकालेंगी; कैसे निकालेंगी, यह उनका विषय है — हमारा काम केवल उनका अर्चन करना है, और यह कोई बहुत महँगी चीज़ भी नहीं है।

103

जब समस्या कर्ज़ या पैसे की हो, तो क्या अर्पित किया जाए?

दिव्य समय और माँ को प्रिय विधान, खीर और मेवे के साथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 39:22–39:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब कर्ज़ हो, या पैसे से जुड़ी कोई बहुत बड़ी समस्या हो, तो लोग कुछ बिल्कुल ठोस माँगते हैं ताकि भगवती तुरंत कृपा करें। दो ठोस चीज़ें हैं: पहली, ऐसा समय जो बहुत दिव्य है और भगवती के इसी रूप को समर्पित है; और दूसरी, यह विधान, जो माँ को बहुत प्रिय है। और कुछ और विशेष करना हो, तो काजू, किशमिश और मेवा मिलाकर गाय के दूध की खीर बनाइए और माँ को अर्पित कीजिए।

104

रात का पूरा कार्यक्रम किन चीज़ों से बनता है?

नैवेद्य, सोलह दीपक, सहस्र अर्चन, अष्टक और माला मंत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 39:48–40:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तो नैवेद्य हो गया, सोलह दीपक हो गए, उनका सहस्र अर्चन हो गया, महालक्ष्मी अष्टक का पाठ हो गया — और यदि और करना हो, तो महालक्ष्मी माला मंत्र कीजिए, ज़्यादा नहीं, बस पाँच बार। यदि आप इतना करें, तो पूरा समय भी लीजिए: शाम से रात तक कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि तो एक चीज़ नैवेद्य हो गई, सोलह दीपक एक हो गए, उनका सहस्र अर्चन एक हो गया, महालक्ष्मी अष्टक का पाठ एक हो गया। और यदि और करना हो, तो महालक्ष्मी माला मंत्र कीजिए — ज़्यादा नहीं, बस पाँच बार कीजिए। यदि आप इतना करें, तो पूरा समय भी लीजिए: शाम से लेकर रात तक कीजिए।

105

क्या बीच में उठ सकते हैं, और क्या दीपक जलते रहने चाहिए?

बैठकों के बीच उठना, और गाय के घी के दो अखंड दीपक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 40:05–40:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि एक बैठक में न हो रहा हो, तो उठ जाइए — अपना अर्पण करके उठिए, टहलिए, फिर दस-पंद्रह मिनट बाद बैठकर पूजन का अगला भाग कीजिए। बस दीपक जलता रहे: दीपक बुझने न दें, सोलह दीपक लगातार जलते रहें। यदि सोलह लगातार न जला सकें, तो कम से कम दो दीपक लगातार जलें — गाय के घी के।

106

सबको श्री की आवश्यकता क्यों है?

श्री के बिना कोई पूजन या यज्ञ संभव नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 40:22–40:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस तरह यह पूजन कीजिए, क्योंकि सबको लक्ष्मी जी की आवश्यकता है; हर किसी के जीवन में श्री चाहिए। यदि आपको और हमें श्री नहीं मिलेंगी, तो उनके बिना पूजन और यज्ञ कैसे हो पाएँगे? जीवन के सारे काम उन्हीं से पूरे होने हैं। तो कल के समय का इस तरह लाभ उठाइए।

वक्ता कहते हैं कि इस तरह पूजन कीजिए, क्योंकि सबको लक्ष्मी जी की आवश्यकता है; हर किसी के जीवन में श्री चाहिए। यदि आपको और हमें श्री नहीं मिलेंगी, तो उनके बिना पूजन और यज्ञ कैसे हो पाएँगे? जीवन के सारे काम उन्हीं से पूरे होने वाले हैं। तो कल के समय का इस तरह लाभ उठाइए।

107

अदीक्षित व्यक्ति को क्या करने का प्रयास नहीं करना चाहिए?

स्वर्णाकर्षण भैरव और अधिकार के बिना आकर्षण की सीमा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 40:41–40:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप किसी कुल परंपरा में दीक्षित नहीं हैं, तो विशेष रूपों की ओर आपका आकर्षण हो सकता है — पर यदि आप प्रयोग नहीं जानते, तो मत कीजिए। उदाहरण के लिए वे स्वर्णाकर्षण भैरव का नाम लेते हैं, जिनका प्रयोग वे स्वयं कल कर रहे हैं, और जिसे उन्होंने ग्रुप में पूरा लिखकर दिया है।

108

क्या इंटरनेट की एक PDF ऐसा प्रयोग करने के लिए काफ़ी है?

छपी पुस्तकों में पूरा विषय क्यों नहीं होता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 41:00–41:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप नहीं जानते, तो इंटरनेट पर आपको पुस्तक या PDF मिल जाती है — पर उसमें भी पूरा विषय नहीं दिया गया होता, या वह विषय करना आपके लिए संभव नहीं होता, कि कैसे, कहाँ और क्या किया जाता है; वहाँ बात बहुत संक्षेप में दी होती है। फिर उसमें क्या और कैसे करना है, पता नहीं चलता। इसलिए मत कीजिए, क्योंकि ये शक्तियाँ सौम्य होने के साथ उग्र भी हैं: उनके साथ उग्र शक्तियाँ चलती हैं, वे महाशक्तियाँ हैं।

109

ग्रुप अनुष्ठान में अंग विद्याओं सहित स्वर्णाकर्षण भैरव और स्वर्णाकर्षण गणपति शामिल हैं

अंग विद्याओं सहित स्वर्णाकर्षण भैरव और स्वर्णाकर्षण गणपति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 41:23–41:47

वक्ता कहते हैं कि यदि आपके पास इसका अधिकार नहीं है — यानी आपके गुरु ने यह नहीं सिखाया या बताया — तो ऐसा प्रयोग मत कीजिए। चाहें तो आप अनुष्ठान में जुड़ सकते हैं। स्वर्णाकर्षण भैरव का अनुष्ठान कल रात होगा, पर केवल उन्हीं का नहीं: उनकी सभी अंग विद्याओं के साथ। स्वर्णाकर्षण भैरव तो बस मुख्य रूप में लिखा है; उनके साथ स्वर्णाकर्षण गणपति भी होंगे।

110

साथ में अष्टलक्ष्मी और भगवती धनदा भी शामिल हैं

अष्टलक्ष्मी और भगवती धनदा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 41:48–42:01

वक्ता कहते हैं कि यदि आपने कभी इसके बारे में सुना है तो अच्छा है; नहीं तो खोजिए, PDF अवश्य मिल जाएगी — पर गुरु के आदेश के बिना मुख्य विषय मत कीजिए। उसके साथ अष्टलक्ष्मी हैं, जो प्रमुख हैं, और भगवती धनदा; भगवती धनदा का वह मूल रूप, जिसका अनुष्ठान आदि पिछले युग में भी हुआ था।

वक्ता कहते हैं कि यदि आपने कभी इसके बारे में सुना है, तो अच्छा है; नहीं तो खोजिए, PDF अवश्य मिल जाएगी। पर गुरु के आदेश के बिना मुख्य विषय मत कीजिए। और उसके साथ अष्टलक्ष्मी जो प्रमुख हैं, और भगवती धनदा — भगवती धनदा का वह मूल रूप, जिसका अनुष्ठान आदि पिछले युग में भी हुआ था।

111

क्या ग्रुप अनुष्ठान में जुड़ना अपनी घरेलू साधना की जगह ले ले?

वह न्यूनतम जो घर पर हर हाल में करना है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 42:02–42:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह सब कल होगा, और चाहें तो आप जुड़ सकते हैं — पर घर पर स्वयं जो करना है, उसे छोड़ना नहीं है। स्वयं महालक्ष्मी अष्टक कीजिए, लक्ष्मी जी का सहस्रार्चन, या लक्ष्मी नारायण का सहस्रार्चन; गणपति जी के साथ कीजिए, या केवल भगवती का स्वतंत्र रूप से। पर सहस्रार्चन कीजिए; और वह भी संभव न हो, तो महालक्ष्मी अष्टक के एक सौ आठ पाठ अवश्य करके उन्हें अर्पित कीजिए।

112

जो पहले से कोई लक्ष्मी पाठ कर रहा है, वह क्या करे?

धनदा कवच या माला मंत्र से बिल्व पत्र के साथ अर्पण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 42:27–42:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप पहले से धनदा लक्ष्मी का पाठ, धनदा कवच का पाठ, या भगवती के माला मंत्र, लक्ष्मी माला मंत्र आदि का पाठ करते आ रहे हैं, तो उससे भी अर्पण कीजिए: एक सौ आठ बिल्व पत्र लाइए और महालक्ष्मी माला मंत्र एक सौ आठ बार कीजिए। कल बुधवार है, तो कोई कठिनाई नहीं — आप आराम से बिल्व पत्र तोड़ सकते हैं। उन पर पढ़कर बिल्व पत्र अर्पित कीजिए, और खीर बनाकर अर्पित कीजिए।

113

यदि हवन कर रहे हैं, तो क्या व्रत अनिवार्य है?

हवन के लिए व्रत, और अगले दिन पारण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 42:58–43:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप हवन करने वाले हैं, यदि कल व्रत-हवन करना है, तो व्रत रखना ही होगा। हाँ, हवन के बाद आप अन्न ग्रहण कर सकते हैं — वह अलग बात है। पूरा व्रत रखें तो वह भी अच्छा है, कोई हानि नहीं; अगले दिन पारण कीजिए। पर यदि व्रत रखकर हवन करना चाहते हैं, तो व्रत रखिए।

114

लक्ष्मी हवन के लिए कौन-सा मंत्र और कितनी आहुतियाँ?

सतनाम, बीजाक्षर की दस माला, या अष्टक का कोई मंत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 43:16–43:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवती लक्ष्मी जी के पौष्टिक हवन के लिए दो सामग्रियाँ बहुत अद्भुत हैं। चाहे आप माँ का रात का हवन सतनाम से करना चाहें, उनके किसी बीजाक्षर से दस माला का हवन करना चाहें, या भगवती के महालक्ष्मी अष्टक के किसी मंत्र से करना चाहें — सौ आहुतियाँ देनी हों या हज़ार — सामग्री में, पौष्टिक सामग्री में, पंचमेवा रखिए।

115

हवन की पहली बताई गई सामग्री क्या है?

घी सहित खीर में पंचमेवा, बिल्व की लकड़ी और गोबर का कंडा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 43:36–44:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि खीर में पंचमेवा मिलाकर, घी मिलाकर, गाय का घी मिलाकर, उससे आहुति दीजिए — यह बहुत उत्तम है। यदि बिल्व की लकड़ी, बेल के पेड़ की समिधा, और गोबर का कंडा हो, तो इन्हें समिधा के रूप में प्रयोग कीजिए, और अग्नि का ठीक से आवाहन कीजिए। पूरा विधि-विधान दो साल पहले चैनल पर प्रसारित हो चुका है, और वे नए लोगों के लिए यह याद फिर दिलाते हैं।

116

आहुतियाँ देने से पहले क्या किया जाता है?

अग्नि स्थापन, पंचभूत संस्कार और क्रव्याद अंश निकालना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 44:02–44:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अग्नि स्थापन आदि करके, पंचभूत संस्कार करके, और क्रव्याद अंश को ठीक से निकालकर, जब दिव्य शुभ अग्नि में, वरद अग्नि में, भगवती महालक्ष्मी के नाम से खीर, गाय के घी और गुग्गुल की आहुति देते हैं, तब सबसे दिव्य प्रभाव मिलता है।

वक्ता कहते हैं कि तो अग्नि स्थापन आदि करके, पंचभूत संस्कार करके, और क्रव्याद अंश को ठीक से निकालकर — जब दिव्य शुभ अग्नि में, वरद अग्नि में, आप भगवती महालक्ष्मी के नाम से खीर की, गाय के घृत की, गुग्गुल आदि की आहुति देते हैं — तब सबसे दिव्य प्रभाव मिलता है।

117

आहुति के लिए मधु किस बर्तन में रखना चाहिए?

स्टील या पीतल, कभी ताँबा नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 44:20–44:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप उससे भी विशेष कुछ करना चाहें, तो मधु रखिए — केवल मधु। मधु स्टील के कटोरे में, या फिर पीतल के कटोरे में रखिए। जब मधु से आहुति करनी हो, तो उसे ताँबे में मत रखिए, इसका ध्यान रखिए।

वक्ता कहते हैं कि यदि आप उससे भी विशेष कुछ करना चाहें, तो मधु रखिए। केवल मधु। मधु स्टील के कटोरे में, या फिर पीतल के कटोरे में रखिए। ताँबे में मत रखिए — इसका ध्यान रखिए — जब मधु से आहुति करनी हो।

118

भगवती लक्ष्मी के लिए ताँबे का प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए?

ताँबे का बर्तन अघोर लक्ष्मी का

· Reviewed Sep 14, 2026 · 44:32–44:42 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि और जब भी कोई मीठा पदार्थ बने, खीर आदि, उसे भी भगवती लक्ष्मी की आहुति के लिए ताँबे में नहीं रखना है। जब अघोर लक्ष्मी का हो, तब ताँबे का बर्तन प्रयोग होता है। आहुति के लिए इसका ध्यान रखिए।

और जब भी कोई मीठा पदार्थ बने, खीर आदि भी — वक्ता कहते हैं कि उसे भी ताँबे में रखकर भगवती लक्ष्मी की आहुति के लिए प्रयोग नहीं करना है। जब अघोर लक्ष्मी का हो, तब ताँबे का बर्तन प्रयोग होता है। आहुति के लिए इसका ध्यान रखिए।

119

पौष्टिक रूपों के लिए कौन-से बर्तन प्रयोग होते हैं?

पीतल, फूल, चाँदी या स्टील — और पलाश के पत्तों की पत्तल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 44:43–45:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिस बर्तन में हम आहुति के लिए संग्रह रखते हैं — ताँबे का बर्तन अघोर लक्ष्मी आदि के लिए होगा, भगवती लक्ष्मी के उन रूपों के लिए जो उग्र हैं। पर पौष्टिक रूपों के लिए पीतल रखिए, फूल रखिए, चाहें तो चाँदी रखिए; स्टील भी चलेगा। और कुछ न हो, तो पत्तों से, पलाश के पत्तों से बनी पत्तल में रखिए; वह चलेगा।

120

स्रुवा किस चीज़ का होना चाहिए?

आहुति के लिए पीतल का स्रुवा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 45:07–45:25 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आहुति करने में जो स्रुवा प्रयोग होता है, उसमें भी संभव हो तो पीतल रखिए — तब यह बहुत उत्तम है। फिर जब आहुति करेंगे, तो घृत से आहुति करेंगे; खीर और घृत मिलाकर आहुति करेंगे। दोनों में यह पहली है।

वक्ता कहते हैं कि आहुति करने में जो स्रुवा प्रयोग होता है, उसमें भी संभव हो तो पीतल रखिए; तब यह बहुत उत्तम है। बाकी, जब आप आहुति करेंगे — फिर घृत से आहुति करेंगे; खीर और घृत मिलाकर आहुति करेंगे। तो यह पहली हो गई।

121

मधु की आहुति कैसे की जाती है?

मधु में डुबोए बिल्व पत्र, घी में कभी नहीं मिलाया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 45:26–45:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब मधु से आहुति करनी हो, तो मधु अकेले प्रयोग नहीं करना है — केवल मधु से नहीं होगी। एक सौ आठ या एक हज़ार आठ बिल्व पत्र लीजिए, एक-एक करके मधु में डुबोइए, और उनसे एक सौ आठ आहुतियाँ दीजिए। मधु में घी नहीं मिलाना है।

वक्ता कहते हैं कि जब मधु से आहुति करनी हो, तो मधु अकेले नहीं करना है; हम केवल मधु से नहीं करेंगे। एक सौ आठ या एक हज़ार आठ बेल के पत्ते, बिल्व पत्र — उन्हें डुबोकर, मधु में डुबोकर, फिर उनसे एक सौ आठ आहुतियाँ दीजिए। केवल मधु में घी नहीं मिलाना है।

122

यदि मधु की आहुति के दौरान अग्नि बार-बार बुझे, तो क्या?

बीच में अलग से घृत की आहुति, मधु में कभी नहीं मिलाई

· Reviewed Sep 14, 2026 · 45:39–46:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसा अवश्य हो सकता है कि एक व्यक्ति घृत की आहुति करे और दूसरा मधु में बिल्व पत्र डालता जाए। और यदि आप अकेले आहुति कर रहे हैं, तो मधु से आहुति करने पर अग्नि बार-बार बुझेगी — इसलिए बीच में घृत आदि से भी आहुति कर सकते हैं, पर वह स्वतंत्र होगी; मधु में मिलाई नहीं जाएगी। भगवती लक्ष्मी जी के विषय में इसका ध्यान रखिए।

123

और विशेष सामग्रियाँ मंत्र दीक्षा लेने के बाद ही आती हैं

मंत्र दीक्षा और उसके बाद आने वाली विशेष सामग्रियाँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 46:02–46:17

वक्ता कहते हैं कि यदि आपको कुछ और विशेष करना है, तो उसमें मंत्र दीक्षा आदि आती है; तब उसमें कुछ और विशेष सामग्रियाँ प्रयोग होती हैं। पर ये दोनों अपने-आप में श्रेष्ठ हैं, और इनसे भगवती लक्ष्मी की अतुलनीय कृपा आपको मिलती है। यदि आप हवन आदि कर रहे हैं, तो इसका प्रयोग कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि यह किया जाता है। और यदि आपको कुछ और विशेष करना है, तो उसमें मंत्र दीक्षा आदि है; तब उसमें कुछ और विशेष सामग्रियाँ प्रयोग होती हैं। पर ये दोनों अपने-आप में श्रेष्ठ हैं; इनसे भगवती लक्ष्मी की अतुलनीय कृपा आपको मिलती है। यदि आप हवन आदि कर रहे हैं, तो इसका प्रयोग कर सकते हैं।

124

हवन के बाद भस्म का क्या किया जाता है?

ठंडी भस्म को उस कलश में रखना जहाँ पैसा रखा जाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 46:18–47:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हवन के बाद, जब पूर्णाहुति आदि हो जाए, तो हवन की जो भस्म बचे — अग्नि ठंडी होने के बाद — उसे अपने किसी छोटे कलश में अवश्य इकट्ठा कीजिए और उसी स्थान पर रखिए जहाँ आप अपना पैसा आदि रखते हैं। यह बहुत उत्तम होगा। वे कहते हैं कि इस तरह शरद पूर्णिमा का लाभ लेना चाहिए।

125

परिवार में मृत्यु के बाद कितने समय बाद साधना शुरू कर सकते हैं?

सवा महीना, तेरहवीं के बाद पैंतालीस दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 47:08–47:23 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि परिवार में मृत्यु हुई हो, तो तेरहवीं समाप्त होने के कितने दिन बाद कोई साधना शुरू करनी चाहिए, वक्ता उत्तर देते हैं: सवा महीने के बाद कीजिए। पैंतालीस दिन बीतने के बाद ही कीजिए — वह अधिक उत्तम है।

प्रश्न लेते हुए वक्ता से पूछा जाता है: यदि परिवार में मृत्यु हुई हो, तो तेरहवीं समाप्त होने के बाद कितने दिन बाद कोई साधना शुरू करनी चाहिए। वे उत्तर देते हैं कि सवा महीने के बाद कीजिए। पैंतालीस दिन बीतने के बाद ही कीजिए। तब यह अधिक उत्तम है।

126

चतुर्थी का व्रत कैसे रखा जाता है?

गणपति की चतुर्थी पूरे वर्ष, चंद्रमा का ध्यान रखते हुए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 47:24–47:44 · Also a question

चतुर्थी व्रत कैसे रखा जाता है, यह समझाने को कहे जाने पर वक्ता कहते हैं कि इसे पूरे साल रखना है — चतुर्थी यानी गणपति जी की। वे जोड़ते हैं कि चतुर्थी में चंद्रदेव से जुड़ी बात भी देखनी और ध्यान में रखनी होती है।

चतुर्थी व्रत कैसे रखा जाता है, यह समझाने को कहे जाने पर वक्ता कहते हैं कि इसे पूरे साल रखना है। चतुर्थी, यानी गणपति जी की। वे कहते हैं, ठीक है। तो चतुर्थी में चंद्रदेव से जुड़ी बात भी देखनी और ध्यान में रखनी होती है।

127

गणपति दोष कैसे लगता है?

विनायक दोष और चोर गणपति वाला वीडियो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 47:45–48:07 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि गणपति दोष कैसे लगता है, वक्ता प्रश्नकर्ता को पहले से मौजूद लाइव, चोर गणपति वाले वीडियो की ओर भेजते हैं, जिसमें विनायक दोष से जुड़ा पूरा विषय बताया गया है — विनायक दोष कैसे लगता है और उसका निवारण कैसे होता है। वे कहते हैं कि छोटे बच्चों को भी यह दोष लगता है।

यह पूछे जाने पर कि गणपति दोष कैसे लगता है, वक्ता उत्तर देते हैं कि इसके लिए पहले से एक लाइव है — चोर गणपति वाला वीडियो। उसमें विनायक दोष से जुड़ा पूरा विषय बताया गया है: विनायक दोष कैसे लगता है, और उसका निवारण किस तरह किया जाता है। वे कहते हैं कि छोटे बच्चों को भी यह दोष लगता है।

128

दक्षिणेश्वरी काली के साथ पंचायतन कैसे बनता है?

पहले कुलदेवी, फिर पिंड-सहित पंचायतन या सामान्य चार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 48:08–48:32 · Also a question

दक्षिणेश्वरी काली जी के रूप पर वक्ता कहते हैं कि पंचायतन के बारे में सबसे पहला प्रश्न यह है कि भगवती दक्षिणेश्वरी आपकी कुलदेवी हैं या नहीं। यदि कुलदेवी हैं, तो उसके अनुसार और कौन पूजे जाते हैं — और फिर उनका पिंड-सहित पंचायतन बनेगा। और यदि ऐसा नहीं है, तो गणपति जी, बटुक भैरव जी, एक शिवलिंग, और उनके साथ नारायण: विशेष रूप से इन सबका स्थान रहेगा।

129

जो सुबह कुल शक्ति पूजन करते हैं, वे कब करें?

सुबह की पूजा परसों

· Reviewed Sep 14, 2026 · 48:33–48:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो लोग पूर्णिमा पर सुबह के समय कुल शक्तियों का पूजन करते हैं, उन्हें परसों करना है। सुबह की पूजा परसों है।

वक्ता कहते हैं कि जो लोग पूर्णिमा पर सुबह के समय कुल शक्तियों का पूजन करते हैं — उनके लिए कल, यानी परसों है। सुबह की पूजा परसों है।

130

स्वास्थ्य की समस्या वालों के लिए क्या छूट है?

जहाँ शरीर साथ न दे, वहाँ पूरी छूट

· Reviewed Sep 14, 2026 · 48:58–49:12 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि स्वास्थ्य की समस्या के कारण पूरी छूट है। तब जैसे भी कर सकें, कीजिए; कोई कठिनाई नहीं। यदि आपके हाथ-पैर ठीक से साथ नहीं दे रहे, तो जैसा आपको ठीक लगे, उस तरह अपना जप कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि देखिए, स्वास्थ्य की समस्या के कारण, भाई, पूरी छूट है। तब जैसे भी कर सकें, कीजिए। कोई कठिनाई नहीं है। यदि आपके हाथ-पैर आपको ठीक से साथ नहीं दे पा रहे, तो जिस तरह आपको ठीक लगे, उस तरह आप अपना जप कर सकते हैं।

131

धनतेरस और दीपावली के लिए महालक्ष्मी कलश और एक नया स्वर्णाकर्षण भैरव कलश तैयार हो रहा है

महालक्ष्मी कलश और नया स्वर्णाकर्षण भैरव कलश

· Reviewed Sep 14, 2026 · 49:13–49:47

वक्ता कहते हैं कि इस बार धनतेरस और दीपावली के लिए एक और विशेष कलश बनेगा। महालक्ष्मी कलश वे पहले ही चैनल पर दे चुके हैं — जो महालक्ष्मी कलश स्थापित करना चाहें, उसे देख सकते हैं, विधि-विधान बताया गया है और वे स्वयं कर सकते हैं। इस बार स्वर्णाकर्षण कलश, स्वर्णाकर्षण भैरव कलश स्थापित करने का प्रयास हो रहा है; उन्होंने कल से शुरू करने का सोचा था, पर एक-दो सामग्रियाँ तुरंत नहीं मिलेंगी, इसलिए यह धनतेरस से बनेगा।

132

पूरी विधि और सामग्री दिखाई जा चुकी है, इसलिए कलश स्वयं बनाया जा सकता है

स्वयं कीजिए — विधि पूरी दिखाई गई है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 49:48–50:10

वक्ता कहते हैं कि पूरा विषय करके दिखाया गया है, मंत्र विधि से लेकर कौन-सी सामग्री लगेगी तक; खोजिए, ऑनलाइन मँगाइए, बस देखिए कि सामग्री सही हो, और स्वयं स्थापित कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि पूरा विषय करके दिखाया गया है — मंत्र विधि से लेकर कौन-सी सामग्री लगेगी तक। खोजिए, ऑनलाइन मँगाइए। बस देखिए कि सामग्री सही हो, और स्वयं स्थापित कीजिए।

133

एक ही काली कौड़ी पाँच रुपये में भी बिकती है और तीन सौ में भी

पाँच रुपये और तीन सौ रुपये की काली कौड़ी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 50:11–50:30

वक्ता कहते हैं कि एक काली कौड़ी आपको पाँच रुपये में भी मिल जाती है, और एक काली कौड़ी ढाई सौ से तीन सौ रुपये में भी मिलती है।

वक्ता कहते हैं कि एक काली कौड़ी आपको पाँच रुपये में भी मिल जाती है, और एक काली कौड़ी ढाई सौ से तीन सौ रुपये में भी मिलती है।

134

सामग्री की गुणवत्ता का अंतर कैसे पता चलता है?

हाथ में लेकर, और उस पर किए जप से जानना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 50:31–50:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अंतर आपको तब पता चलेगा जब आप उसे हाथ में लेंगे। अंतर आपको तब पता चलेगा जब आप जप आदि करेंगे — तब देखेंगे कि उसकी दिव्यता कैसे बढ़ती या घटती है, और तब समझ आएगा। अपना कलश देखकर आप स्वयं समझ जाएँगे।

वक्ता कहते हैं कि अंतर आपको तब पता चलेगा जब आप उसे हाथ में लेंगे। अंतर आपको तब पता चलेगा जब आप जप आदि करेंगे; जब देखेंगे कि उसकी दिव्यता में कैसे वृद्धि या कमी होती है, तब आपको समझ आएगा। अपना कलश देखकर आप स्वयं समझ जाएँगे।

135

मोरंगी रुद्राक्ष की माला कितने की आती है?

एक सौ आठ मनकों की पूरी माला पच्चीस या चालीस रुपये में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 50:46–51:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक सौ आठ मनकों की पूरी रुद्राक्ष माला केवल चालीस रुपये में मिल जाती है — मोरंगी रुद्राक्ष, बस चालीस रुपये में; और अब यह पच्चीस पर आ गई है, गिर गई है। पच्चीस रुपये में इसके मनके इतने बड़े हैं कि आप कहेंगे, हे भगवान, पच्चीस रुपये में पूरे एक सौ आठ मनके।

वक्ता कहते हैं कि एक सौ आठ मनकों की पूरी रुद्राक्षशिव पूजा के दौरान धारण की जाने वाली एक पवित्र बीज-माला । माला केवल चालीस रुपये में मिल जाती है — मोरंगी रुद्राक्ष, बस चालीस रुपये में। अब यह पच्चीस रुपये पर आ गई है; गिर गई है। पच्चीस रुपये में इसका मनका इतना बड़ा है कि आप कहेंगे: हे भगवान, पच्चीस रुपये में पूरे के पूरे एक सौ आठ मनके।

136

तुलना में हिमगिरि रुद्राक्ष कितने का आता है?

एक मनके के ढाई से तीन हज़ार रुपये

· Reviewed Sep 14, 2026 · 51:02–51:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि और यदि आप पूरा असली वाला खरीदने जाएँ, पूरा तराई वाला जिसे हिमगिरि रुद्राक्ष कहते हैं, तो उसका एक अकेला रुद्राक्ष ढाई-तीन हज़ार रुपये का आता है — सबसे सामान्य गुणवत्ता का। उसके लिए जो ज़िद करे कि यह ठीक हिमगिरि का ही हो। जैसे-जैसे थोड़ा ऊपर जाते हैं, दाम भी बढ़ता जाता है। मोरंगी पर आएँ, तो यह स्थिति है।

137

अधिकतर लोग मोरंगी चाहते हैं क्योंकि सम्मानित बाबा उसे पहनते हैं, और कमाई कहीं और लगानी चाहिए

अधिकतर लोगों की पसंद मोरंगी, और कमाई कहाँ जाए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 51:27–51:50

वक्ता कहते हैं कि यह अद्भुत बात है कि लोग मोरंगी ही पसंद करते हैं — सबसे बड़ी बात यह है कि अच्छे-अच्छे सम्मानित बाबा लोग इसे गले में पहनकर घूम रहे हैं, मोरंगी लेकर घूम रहे हैं। कामाख्या जाइए, इन सब क्षेत्रों में जाइए, वे ऐसे ही खरीदते हैं, तुरंत पहन लेते हैं और फ़ोटो खिंचवाते जाते हैं कि बढ़िया है। तो यदि आप लाखों रुपये कमा रहे हैं, तो इन चीज़ों पर खर्च कीजिए।

138

पैसे की कमी हो, तो माला कैसे बनानी चाहिए?

साल-दो साल में एक-एक मनका

· Reviewed Sep 14, 2026 · 51:51–52:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह चीज़ हमेशा स्थायी होनी चाहिए। यदि आप रुद्राक्ष की कोई माला, या ऐसी कोई दिव्य वस्तु ले रहे हैं, या उसकी पूरी प्राण-प्रतिष्ठा ठीक से स्वयं कर रहे हैं, तो समय लीजिए। वे कहते हैं कि उनके पास भी पैसे की कमी है — वे एक बार में माला नहीं बनाते; शुद्ध माला में बहुत समय लगता है, साल में एक मनका लिया, कभी दो मनके, और तब जाकर अपने लिए एक माला बनती है।

139

माला अगली पीढ़ी को क्यों मिलनी चाहिए?

माला जितनी पुरानी, उसकी दिव्यता उतनी अधिक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 52:16–52:43 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तो यह भी कीजिए: यदि पैसे की कमी है, तो मनके धीरे-धीरे लेकर फिर बनाइए; वह स्थायी है। और ऐसे स्थायी हो कि केवल हम तक सीमित न रहे — हमारे बाद हमारी आने वाली पीढ़ी को भी वह दिव्य माला मिले, यह कहकर कि यह तुम्हारे पिता की माला है, इस पर इतना जप हुआ है, इतनी पूजा हुई है। वह माला जितनी पुरानी होगी, उसकी दिव्यता उतनी बढ़ेगी।

140

माला टूट जाए, तो क्या उसे बदल देना चाहिए?

माला न बदलना, और व्यर्थ जाने वाला जप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 52:44–52:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि फिर उसे बदलना नहीं है। पर आप जो यह काम करते हैं — नहीं भाई, यह टूट गई, तो अमुक ले लो, वह ले लो — तब उसका कोई उपयोग नहीं, और तब सारा जप-तप व्यर्थ चला जाता है।

वक्ता कहते हैं कि फिर उसे बदलना नहीं है। पर आप जो यह काम करते हैं — नहीं भाई, यह टूट गई, तो ऐसी ले लो, वैसी ले लो — तब उसका कोई उपयोग ही नहीं। तब सारा जप-तप व्यर्थ चला जाता है।

141

सरस्वती के ग्यारहवें अध्याय को जगाने के लिए कितने पाठ चाहिए?

पहले से जागृत — सिद्धि का प्रश्न नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 52:59–53:21 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि यदि कोई संकल्प लेकर सरस्वती के ग्यारहवें अध्याय से भगवती की प्रार्थना करे, तो उसे जगाने के लिए पहले कितने पाठ आवश्यक हैं, वक्ता उत्तर देते हैं: देखिए, यह पहले से जागृत है। जितना करेंगे, उतना फल मिलेगा। इसमें सिद्धि का कोई प्रश्न नहीं।

पूछा गया: यदि मैं संकल्प लेकर सरस्वती के ग्यारहवें अध्याय से भगवती की प्रार्थना करूँ, तो उससे पहले इसे जगाने के लिए कितने पाठ आवश्यक हैं — वक्ता उत्तर देते हैं कि देखिए, यह जागृत है। जितना आप इसे करेंगे, उतना फल मिलेगा। इसमें सिद्धि की कोई बात नहीं है।

142

अर्गला के पहले मंत्र के साथ किस पाठ को संपुट के रूप में प्रयोग कर सकते हैं?

सप्तश्लोकी को सिद्ध करके संपुट बनाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 53:22–53:43 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि अर्गला के पहले मंत्र का सरस्वती के किस अध्याय या मंत्र से संपुट किया जाए, वक्ता कहते हैं: धर्म-युक्त इच्छाओं के लिए सप्तश्लोकी को सिद्ध करके उससे संपुट कीजिए — यह वे कई बार बता चुके हैं। केवल सात श्लोक हैं; संपुट कीजिए और तुरंत होगा। और सप्तश्लोकी को अलग से सात सौ पाठ करके सिद्ध कीजिए, या ग्यारह सौ पाठ कीजिए। तब यह अद्भुत हो जाएगा।

143

जब घर में तीन महीने के बच्चे की आत्मा उपस्थित हो, तो क्या उपाय है?

दीपावली या काली चौदस पर काली मंदिर में दान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 53:44–53:58 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि घर में तीन महीने के बच्चे की आत्मा उपस्थित हो तो क्या उपाय है, और दीपावली या काली चौदस के दिन काली मंदिर में दान के बारे में जो साल भर पहले बताया गया था, वक्ता उत्तर देते हैं कि वह वीडियो चैनल पर उपलब्ध है — उसे देखिए और कीजिए।

यह पूछे जाने पर कि घर में तीन महीने के बच्चे की आत्मा उपस्थित हो तो क्या उपाय है, और दीपावली या काली चौदस के दिन काली मंदिर में दान के बारे में जो लगभग साल भर पहले बताया गया था — वक्ता उत्तर देते हैं कि वह वीडियो चैनल पर उपलब्ध है। उसे देखिए और कीजिए।

144

अपने-आप प्रकट हुए उस शिवलिंग का क्या, जिसका आकार शिवलिंग जैसा नहीं है?

ओडिशा का पाताल-फूटा शिवलिंग और नर्मदेश्वर का नियम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 53:59–54:29 · Also a question

एक प्रश्नकर्ता ऐसे शिवलिंग के बारे में पूछते हैं जो अपने-आप प्रकट हुआ पर जिसका आकार शिवलिंग जैसा नहीं — जिसे ओडिशा में पाताल-फूटा शिवलिंग कहते हैं। यह पूछते हुए कि वह कहाँ से प्रकट हुआ, वक्ता कहते हैं कि यह बात केवल नर्मदेश्वर जी पर लागू होती है: मूल शिवलिंगों का बहुत आकार नहीं होता। उन्हें घिसकर और रगड़कर आकार दिया जाता है, और उसमें भी कोई विशेष दोष नहीं; पर यदि आप उसे बिल्कुल ठीक प्राकृतिक रूप में रखना चाहें, तो वह आकार और माप में कभी ठीक-ठीक नहीं मिलेगा।

145

ओडिशा के पाताल-फूटा शिवलिंग पर वे बोलने से मना करते हैं, क्योंकि उसके पौराणिक माहात्म्य का उन्हें ज्ञान नहीं

जहाँ ज्ञान नहीं, वहाँ न बोलना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 54:30–54:45

प्रश्नकर्ता जिस ओडिशा के पाताल-फूटा शिवलिंग की बात करते हैं, उसके बारे में वक्ता कहते हैं कि वे नहीं कह सकते कि उनका कोई पौराणिक माहात्म्य या उनका कोई संदर्भ है या नहीं, क्योंकि उन्हें इसका ज्ञान नहीं है। वे केवल नर्मदेश्वर जी के बारे में जानते हैं।

वक्ता कहते हैं कि आप ओडिशा के जिस पाताल-फूटा शिवलिंग की बात करते हैं, उनका कोई पौराणिक माहात्म्य कहीं है या नहीं, उनका कोई संदर्भ — क्योंकि हमें इसका ज्ञान नहीं है, हम नहीं कह सकते कि वहाँ ऐसी कोई बात है। हम केवल नर्मदेश्वर जी के बारे में जानते हैं।

146

दीपदान पाँच दीपकों का है या सोलह का?

सोलह दीपक, रात आठ बजे के बाद सबसे अच्छा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 54:46–55:01 · Also a question

पंचदीप दान के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि सोलह दीप दान करना है। आप शाम के समय भी कर सकते हैं; रात में करें तो सबसे उत्तम है। आठ बजे के बाद कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि पंचदीप दान — सोलह दीप दान करना है। आप शाम के समय भी कर सकते हैं; यदि रात में करें, तो सबसे उत्तम है। आठ बजे के बाद कीजिए।

147

अपने बीजाक्षर के बारे में कैसे पता चलता है?

वीडियो में बताया गया बीजाक्षर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 55:02–55:08 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि बीजाक्षर के बारे में कैसे पता चलेगा, वक्ता उत्तर देते हैं कि यह वीडियो में बताया गया है — यदि मकर में करना है, तो उन्होंने बताया है।

यह पूछे जाने पर कि बीजाक्षर के बारे में कैसे पता चलेगा, वक्ता उत्तर देते हैं कि यह वीडियो में बताया गया है। यदि उन्हें मकर में करना है, तो बताया गया है।

148

क्या लोग आज भी आकाश मूर्ति देखते हैं?

बच्चों का अधिक देखना, और अब यह कितना कठिन हो गया है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 55:09–55:24 · Also a question

एक श्रोता के यह कहने पर कि उसने भी देखा है, वक्ता कहते हैं कि बहुत-से लोगों ने देखा होगा। कोई विश्वास करे या न करे, यह अलग बात है; बच्चे अधिक देखते हैं, और अब देख पाना कठिन है।

एक श्रोता आकाश मूर्ति के बारे में कहते हैं कि मैंने भी देखा है, और वक्ता उत्तर देते हैं कि बहुत-से लोगों ने देखा होगा। कोई विश्वास भी नहीं करेगा — विश्वास करना और न करना अलग बात है। बच्चे अधिक देखते हैं। और अब देख पाना कठिन है।

149

कालीमठ में रात रुका व्यक्ति तब से अशांत क्यों होगा?

ऐसे क्षेत्रों में मंत्र जप से उत्तेजित होने वाली शक्तियाँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 55:25–55:59 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उनका एक रिश्तेदार कालीमठ में रात रुका था और आज तक मानसिक अशांति से पीड़ित है, घर भी नहीं आता और इधर-उधर भटकता है। वक्ता कहते हैं कि वे टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को नहीं जानते, और सावधान करते हैं कि लोग यह न सोचें कि श्रोताओं को ऐसी टिप्पणी करने को कहा गया था — और फिर पुष्टि करते हैं: यह बात सच है। यदि आप यात्रा करके ऐसे क्षेत्रों में जाएँ और वहाँ अपनी उपस्थिति बनाएँ, तो जब शक्तियाँ आपके मंत्र जप से प्रभावित होंगी, वे उत्तेजित होंगी और आपको बहुत दिव्यता का अनुभव कराएँगी।

150

जो गुरु वास्तव में चमत्कारी हैं, उन्हें अपने शिष्यों को समर्थ बनाना चाहिए

चमत्कारी गुरु को शिष्यों को समर्थ बनाना चाहिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 56:00–56:30

वक्ता कहते हैं कि लोग कहते हैं कि दूसरे कर रहे हैं, कोई और कर रहा है, हमारे अमुक गुरुजी चमत्कारी व्यक्ति हैं, उन्होंने ऐसा किया। यदि आपके गुरुजी इतने चमत्कारी हैं और आप उनके इतने प्रिय शिष्य हैं, तो आपकी अपनी क्षमता में कमी कहाँ से आई? आपको उनसे समर्पण के साथ सीखना चाहिए था। वे केवल चमत्कार दिखाने वाले गुरु नहीं हैं — चमत्कार दिखाने वाले को अपने शिष्यों को महान बनाना चाहिए।

151

शिष्य को कितने समय में योग्य हो जाना चाहिए?

दो-तीन साल, और वह गुरु जो केवल मदारी है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 56:31–56:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आपने गुरु से कुछ नहीं सीखा — या तो आपमें योग्यता नहीं थी, और आप भ्रम में रहे, या गुरुजी ने आपको योग्य नहीं समझा और नहीं सिखाया। यदि आप सुन रहे हैं कि अमुक व्यक्ति के गुरु चमत्कारी हैं, या आपके अपने गुरु चमत्कारी हैं, तो कुछ समय बाद, दो-तीन साल बाद, वह समय आना चाहिए जब आप इतने योग्य हो जाएँ कि आपके गुरुजी आपको ऐसी विद्याएँ सिखाएँ। कम से कम यह मदारी का काम नहीं है कि गुरुजी तमाशा दिखा रहे थे — यह चमत्कार दिखाया, वह यंत्र दिखाया। तब लाभ क्या? तब वे केवल मदारी ही रह गए।

152

गुरु का ज्ञान और शिष्य का सीखना सार्थक कैसे होता है?

शिष्य में योग्यता पैदा होना, और ज्ञान का आगे जाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 56:53–57:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शिष्य के भीतर योग्यता पैदा होनी चाहिए थी। वे कहते हैं कि उन्हें गर्व है कि उनके गुरुजी ने जो सिखाया, वह आज वे समाज को दे रहे हैं। यदि हमने दीपदान करना सीखा, और हम उसे करके चैनल पर दिखाएँ, और उसे देखकर सौ लोग करें, तो हमारे गुरुजी का ज्ञान और हमारा ज्ञान दोनों सार्थक हो रहे हैं — और कहीं न कहीं हमारे माता-पिता का हमें जन्म देना सार्थक है।

153

अधिक दीपदान क्यों करना चाहिए?

उसी अनुपात में प्रसन्न होती शक्तियाँ, और देव शक्तियों का जानना कि अनुष्ठान चल रहा है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 57:17–57:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जितना अधिक दीपदान होगा, शक्तियाँ उतनी प्रसन्न होंगी और उतनी कृपा करेंगी। यदि आज वे शरद पूर्णिमा के बारे में कह रहे हैं कि शरद पूर्णिमा पर यह करना चाहिए, तो आप क्या सोचते हैं — वे कल बैठकर लाइव करेंगे? जब आप करेंगे, वे भी उस समय करेंगे। देव शक्तियों को पता चलना चाहिए कि हाँ, अनुष्ठान हो रहा है, मंत्रों का जप चल रहा है, और नए लोग इसमें जुड़ रहे हैं।

154

पहले शरद पूर्णिमा को कैसे समझा जाता था?

छत पर खीर, और यह धारणा कि यह बंगाली पर्व है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 57:41–57:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पहले ये बातें दब जाती थीं। शरद पूर्णिमा क्या है — बंगाली लोग पूजा कर रहे हैं, यही सुनने में आता था; यह बंगाली लोगों का पर्व है, ये लोग लखी पूजा कहते हैं, कौन जाने। बाकी लोग क्या कर रहे हैं? खीर बनाई और बस छत पर रख दी; सुबह खाएँगे, अमृत मिलेगा, हमारे रोग आदि इससे नष्ट होंगे — और इससे अधिक कोई अर्थ नहीं।

155

हर गृहस्थ और जन्मा हर सनातनी साधक है, कोई एक चुना हुआ व्यक्ति नहीं

हर गृहस्थ और जन्मा हर सनातनी साधक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 57:59–58:18

वक्ता कहते हैं कि आज वह समय है जिसमें हम चर्चा कर रहे हैं कि यह केवल एक साधक के लिए नहीं — हर गृहस्थ साधक है, जन्म लेने वाला हर सनातनी साधक है। उसका जन्म इसी कारण हुआ है कि उसे साधना करनी थी। वह भटक गया है, भाई, भूल गया है; उसे सही राह पर लाना है, जगाना है और कहना है: भाई, याद करो, जन्म साधना के लिए हुआ है, तो करो — सहस्रार्चन करो, महालक्ष्मी चक्र करो।

156

वैराग्य से पहले इच्छाओं की पूर्ति क्यों आवश्यक है?

श्री तत्व, कामनाओं की पूर्ति और चार पुरुषार्थ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 58:19–58:39 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि श्री तत्व मिलेगा, इच्छाएँ पूरी होंगी, और तब आपके भीतर वैराग्य आएगा — कि हाँ, हमें दिव्य मार्ग पर जाना है। यदि इच्छाएँ पूरी ही नहीं हो रहीं, तो हम वैरागी कहाँ से होंगे? यह भी सच है। इसलिए इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी साधना करनी होगी। मंत्र में वह क्षमता है कि वह सब कुछ दे सकता है — धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष; चारों पुरुषार्थ उससे मिलेंगे, पर तभी जब कोई करे।

157

क्या ज्ञान और सिद्धि को अपने तक रखना चाहिए?

गुरु की सिखाई बात आगे देना ताकि वह फैले

· Reviewed Sep 14, 2026 · 58:40–59:16 · Also a question

वक्ता पूछते हैं कि यह सार्थकता कहाँ से आ रही है — गुरु ने जो सिखाया, हमने सीखा, जो हम आपके सामने रख रहे हैं; आप सीखेंगे, अपने बच्चों को सिखाएँगे, और यह बढ़ेगा; जितना बढ़ेगा, जितना फलेगा-फूलेगा, हम सबका उतना कल्याण होगा। इसे अपने तक सीमित क्यों रखना, सिद्धि को अपने तक सीमित क्यों रखना, मानो केवल हम ही सब कुछ जानते हैं। कम से कम इतना दीजिए कि सामने वाले के जीवन में बदलाव आए।

158

नवरात्रि में सुबह तीन बजे ऊपर से गुज़रता जलता आग का गोला ऐसा ही दर्शन माना गया

एक श्रोता के नवरात्रि वाले दृश्य की पुष्टि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 59:17–59:27

एक श्रोता कहते हैं कि नवरात्रि में सुबह तीन बजे छत पर नहाते समय जलते आग के गोले जैसा कुछ ऊपर से गुज़र रहा था, और वह बहुत ऊँचा नहीं था, इसलिए विमान नहीं हो सकता था। वक्ता उत्तर देते हैं कि यह सही है।

एक श्रोता कहते हैं कि हमने नवरात्रि में देखा: सुबह तीन बजे छत पर नहाते समय जलते आग के गोले जैसा कुछ ऊपर से गुज़र रहा था। वह बहुत ऊँचा नहीं था, इसलिए यह संभव नहीं कि वह विमान आदि हो। वक्ता उत्तर देते हैं कि यह सही है।

159

क्या कमल के आसन पर बैठी काली एक मान्य रूप है?

कमल आसन पर माता काली

· Reviewed Sep 14, 2026 · 59:28–59:33 · Also a question

कमल के आसन पर बैठी माता काली के बारे में पूछे जाने पर वक्ता उत्तर देते हैं कि यह बिल्कुल उनका एक रूप है।

कमल के आसन पर बैठी माता काली — वक्ता उत्तर देते हैं कि वह भी बिल्कुल उनका एक रूप है।

160

संधि काल के बचे नारियलों का क्या करना है?

नौ कन्याओं को या मंदिर में देना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 59:34–59:45 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि संधि काल के नारियल बच गए हों और खाना संभव न हो, तो क्या करें, वक्ता कहते हैं कि उन्हें नौ कन्याओं को दे देना चाहिए। वे कहते हैं कि जब संधि काल में पूजन होता है, तो कन्या पूजन के लिए आने वाली नौ कन्याओं को दे देने चाहिए, या मंदिर में दे देने चाहिए। दे दीजिए।

संधि काल के नारियल बच गए हैं और खाना संभव नहीं है; क्या करना चाहिए — वक्ता कहते हैं कि उन्हें नौ कन्याओं को दे देना चाहिए। वे कहते हैं कि जब संधि काल में पूजन होता है, तो कन्या पूजन के लिए जो नौ कन्याएँ आती हैं, उन्हें दे दीजिए; मंदिर में दे दीजिए। उन्हें देते जाइए।

161

नहीं तो भगवती के भक्तों में बाँट दीजिए, या घर पर चटनी बना लीजिए

भक्तों में बाँटना, और घर पर चटनी बनाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 59:46–1:00:11

वक्ता कहते हैं कि अब यदि संभव नहीं हो रहा, तो बाँट दीजिए — और क्या कहा जाए। उन्हें ऐसे लोगों को दीजिए जो भगवती के भक्त हों; हर किसी को मत दीजिए। दे दीजिए। घर-परिवार में बाँटकर खाइए; उनकी चटनी बनाकर खाइए — वे कहते हैं कि वे स्वयं उनकी चटनी बनाकर खाते रहते हैं। वे इसमें एक और बात उठाने लगते हैं और फिर उसे छोड़ देते हैं, कहते हुए कि जो दो-चार नारियल वे रखते हैं, उनकी चटनी बनाकर खाते रहते हैं।

162

क्या माँ के स्वास्थ्य के लिए रात्रि सूक्त का पाठ किया जा सकता है?

स्वस्थ होने के लिए रात्रि सूक्त का पाठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:00:12–1:00:23 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपनी माँ के स्वास्थ्य के ठीक होने के लिए रात्रि सूक्त का पाठ कर सकती हैं, वक्ता उत्तर देते हैं: हाँ, आप बिल्कुल कर सकती हैं।

एक श्रोता पूछती हैं कि क्या मैं अपनी माँ के स्वास्थ्य के ठीक होने के लिए रात्रि सूक्तम् का पाठ कर सकती हूँ। वक्ता उत्तर देते हैं कि हाँ, बिल्कुल, आप कर सकती हैं।

163

क्या शिव की आवरण पूजा यंत्र के बजाय शिवलिंग पर की जा सकती है?

शिवलिंग का आवरण पूजन एक अलग विषय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:00:24–1:00:58 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि यंत्र के अलावा क्या शिव जी की आवरण पूजा शिवलिंग पर भी हो सकती है, वक्ता उत्तर देते हैं: नहीं। शिवलिंग पर आप पूरे संसार की पूजा कर लीजिए — पर आवरण पूजन की बात कुछ अलग है, और उसके लिए अलग बताया गया है। शिवलिंग का आवरण पूजन भी अलग है। और फिर यह भी देखना होगा कि शिवलिंग कौन-सा है: हरिहर शिवलिंग है या शक्ति शिवलिंग — तब आप कैसे करेंगे?

164

क्या माँ कमला के मंत्र का जप किया जा सकता है?

शर्त है दस महाविद्याओं में दीक्षा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:00:59–1:01:09 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या माँ कमला के मंत्र का जप किया जा सकता है, वक्ता उत्तर देते हैं: यदि आप दस महाविद्याओं में दीक्षित हैं, तो कीजिए। नहीं तो सहस्रनाम आदि का पाठ कीजिए, सतनाम कीजिए, महालक्ष्मी अष्टक कीजिए। वह कीजिए जिससे आपको जल्दी लाभ मिले।

क्या माँ कमला के मंत्र का जप किया जा सकता है — वक्ता उत्तर देते हैं कि यदि आप दस महाविद्या में दीक्षित हैं, तो कीजिए। नहीं तो सहस्रनामकिसी देवता के सहस्र नामों का पाठ — यह विभिन्न देवी-देवताओं के लिए रचित एक भक्ति विधा है, कोई एक निश्चित ग्रंथ नहीं। आदि का पाठ कीजिए, सतनाम कीजिए, महालक्ष्मी अष्टक कीजिए। वह कीजिए जिससे आपको जल्दी लाभ मिले।

165

अधिकार के बिना दी गई अनुमति से दोष केवल पूछने वाले को लगता है

अधिकार न होने पर लगने वाला दोष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:01:10–1:01:29

वक्ता कहते हैं कि वह नहीं करना है जिसका अधिकार न हो, ताकि दोष लेकर बैठना पड़े। हम कह देंगे कि हाँ, कीजिए — और उससे क्या होगा? आप प्रसन्न हो जाएँगे कि अरे भाई, उन्होंने मेरी बात मान ली, हाँ कह दिया। पर दोष तो आपको लगेगा न। इसलिए वह कीजिए जिससे दोष न लगे और कल्याण भी हो।

वक्ता कहते हैं कि वह नहीं करना है जिसका अधिकार न हो, जिससे दोष लेकर बैठना पड़े। हम कह देंगे कि हाँ, जाइए, कीजिए। उससे क्या होगा? आप प्रसन्न हो जाएँगे — अरे भाई, उन्होंने मेरी बात मान ली, हाँ कह दिया। पर दोष तो आपको लगेगा न। इसलिए वह कीजिए जिससे दोष न लगे और कल्याण भी हो।

166

कुलदेवी खप्पर विधान कब किया जा सकता है?

दिव्य पर्व पर पौष्टिक विधि, संध्या से आगे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:01:30–1:01:46 · Also a question

कुलदेवी खप्पर विधान, पौष्टिक विधि, के बारे में वक्ता कहते हैं कि आप इसे जब भी दिव्य पर्व काल हो, कल के समय, पूर्णिमा आदि पर कर सकते हैं। जप का समय संध्या काल से रखिए; और आठ बजे के बाद किया जाए, तो बहुत उत्तम है।

वक्ता कहते हैं कि कुलदेवी खप्पर विधान, पौष्टिक विधि — आप इसे जब भी दिव्य पर्व काल हो, कल के समय, पूर्णिमा आदि पर कर सकते हैं। जप का समय संध्या काल से रखिए। या यदि आठ बजे के बाद किया जाए, तो बहुत उत्तम है।

167

खप्पर उतारने की विधि बताने से मना किया गया, क्योंकि यह सिद्धि का विषय है

मना करना — यह सिद्धि का विषय है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:01:47–1:01:56

रोग और बाधा हटाने के लिए खप्पर उतारने की विधि समझाने को कहे जाने पर वक्ता मना कर देते हैं: भाई, वह सिद्धि का विषय है। सिद्धि के बिना इस तरह रोग उतारने की विधि करना ठीक नहीं — यदि वह उतारने वाले को लग जाए, तो समस्या किसी और पर आ पड़ेगी। जानकार लोग ही करें।

एक श्रोता पूछते हैं कि कृपया रोग और बाधा हटाने के लिए खप्पर उतारने की विधि समझाइए। वक्ता उत्तर देते हैं कि भाई, वह सिद्धि का विषय है। सिद्धि के बिना इस तरह रोग उतारने की विधि करना ठीक नहीं है। यदि वह उतारने वाले को लग जाए, तो समस्या किसी और पर आ पड़ेगी। वह जानकार लोग ही करें।

168

खप्पर उतारने की विधि के बजाय क्या किया जा सकता है?

जैसा दिया गया वैसा खप्पर चढ़ाना, और क्षेत्रपाल का उतारा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:01:57–1:02:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि खप्पर चढ़ाइए — चढ़ाने की विधि उतनी ही रखिए जितनी दी गई है। उतारने की विधि में क्षेत्रपाल आदि का उतारा रखिए, जिससे दोष लगने की जो भी संभावना बने, वह मिट जाए, कट जाए और हट जाए। वह मत कीजिए जिससे दोष लगने की संभावना बने। यदि आप परिपक्व नहीं हैं और कोई जानकार व्यक्ति आपके पास प्रत्यक्ष उपलब्ध नहीं है, तो मत कीजिए।

169

बाँधने और उतारने की विधियाँ सिद्ध शाबरी विद्या चैनल पर दी गई थीं, और उचित कारण से रोक दी गईं

सिद्ध शाबरी विद्या चैनल, और वक्ता ने बाँधने की विधियाँ सिखाना क्यों रोका

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:02:16–1:02:47

वक्ता कहते हैं कि सिद्ध शाबरी विद्या चैनल पर उन्होंने यह विषय छोटे-छोटे टुकड़ों में बहुत दिया है — कि इस मंत्र से घाट ऐसे बाँधा जाता है, रास्ता बाँधा जाता है, और फिर उतारा जाता है। उन्होंने ये विषय शुरू में इसलिए दिए कि सबको पता चलना चाहिए; बाद में उन्होंने पाया कि ये लोग इसे उठाकर, यह-वह करके, अपना ही नुकसान कर लेंगे, इसलिए आगे जाना रोक दिया। पर शुरू के जो वीडियो उन्होंने डाले थे, वे सब वहाँ हैं।

170

सुरक्षा पहले — इस क्षेत्र की हर बड़ी दुर्घटना सावधानी हटने के बाद हुई

सुरक्षा पहले

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:02:48–1:02:59

वक्ता कहते हैं कि सुरक्षा पहले। जहाँ सावधानी हटी है, वहाँ इस क्षेत्र में बहुत बड़ी दुर्घटना हुई है।

वक्ता कहते हैं कि सुरक्षा पहले। जहाँ सावधानी हटी है, वहाँ बहुत बड़ी दुर्घटना हुई है — इस क्षेत्र में।

171

कृष्ण और राधारानी के लिए क्या बताया गया है?

गोपाल सहस्रनाम, राधा अष्टक और राधा कवच

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:03:00–1:03:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण के लिए कृष्ण जी का सहस्रनाम, गोपाल सहस्रनाम, बहुत उत्तम, बहुत अद्भुत है। भगवती राधारानी के लिए जो कर सकें, कीजिए: राधा अष्टक का पाठ कीजिए, राधा कवच का पाठ कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण के लिए कृष्ण जी का सहस्रनाम, गोपाल सहस्रनाम, बहुत उत्तम, बहुत अद्भुत है। भगवती राधारानी के लिए जो कर सकें, कीजिए। राधा अष्टक का पाठ कीजिए; राधा कवच का पाठ कीजिए।

172

क्या काली का उपासक इस रात उनकी पूजा कर सकता है?

किसी क्षेत्र के लिए अधिकृत रूप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:03:20–1:04:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप कर सकते हैं — भगवती लक्ष्मी के एक सौ आठ पाठ कर सकते हैं, अष्टक का पाठ कीजिए। यदि आप भगवती काली की उपासना करते हैं, तो ऐसी कोई बात नहीं कि कल न कर सकें; कल महाकाली भी कर सकते हैं। पर भगवती का वह रूप है जिसे वह क्षेत्र दिया गया है, कि आपका यह रूप इस क्षेत्र के लिए अधिकृत है। तो यदि हम वही करें, तो उस क्षेत्र में ठीक से प्राप्ति होगी। पूरी बात यही है।

173

सप्तचंडी का आवरण पूजन चैनल वाले से कैसे अलग है?

हर आवरण के न्यास मंत्रों सहित विस्तृत पीठ पूजा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:04:01–1:04:23 · Also a question

सप्तचंडी के समय दुर्गा जी के आवरण पूजन के विधान के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि यह वही है जो चैनल पर दिया गया है — उसका कुछ विस्तृत रूप; कुछ नहीं, बहुत ही विस्तृत रूप। चैनल पर जो है, वह प्रारंभिक विषय है। और सप्तचंडी आदि में पीठ पूजा बहुत विस्तृत रूप में होती है, न्यास मंत्रों के साथ हर एक आवरण के पूजन का विधान होता है।

174

क्या पर्वत की चोटियाँ जंगली जानवरों से भरी नहीं होतीं?

विंध्याचल की चोटी, आसपास होटल, फिर भी पूरा फल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:04:24–1:04:49 · Also a question

एक श्रोता को उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि नहीं, ऐसा नहीं कि पर्वत की चोटी पर जंगली जानवर आते-जाते रहते हैं। विंध्याचल जाइए — माँ विंध्यवासिनी विंध्याचल की सबसे ऊँची चोटी पर विराजमान हैं, तो अब वहाँ जंगल कहाँ बचा; दोनों ओर होटल बन गए हैं। तो विंध्याचल परिसर में भगवती के मंदिर के आसपास कहीं भी बैठकर कीजिए; वह पर्वत की चोटी ही है। एकांत नहीं मिलेगा, पर दिव्यता है, और जो पूरा फल मिलना है, वह अवश्य मिलेगा।

175

क्या तीर्थ में होटल के कमरे में रात का जप करना ठीक है?

कठिनाई से सहमति, पर मंदिर परिसर में बैठने का निर्देश

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:04:50–1:05:10 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि पर्व काल में वे तीर्थ क्षेत्र के होटल में कमरा लेकर रात को जप करते हैं, और कोई दूसरा विकल्प नहीं दिखता। वक्ता कहते हैं कि वे इससे सहमत हैं, पर आपको मंदिर के परिसर में ही जाकर जप करना चाहिए; होटल में नहीं करना चाहिए।

एक श्रोता कहते हैं कि पर्व काल में मैं तीर्थ क्षेत्र में होटल में कमरा लेकर रात को जप करता हूँ; इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प दिखता भी नहीं। वक्ता उत्तर देते हैं कि इस बात से हम सहमत हैं। पर आपको मंदिर के परिसर में ही जाकर जप करना चाहिए; होटल में नहीं करना चाहिए।

176

क्या रामचरितमानस की चौपाई से रुद्रगण साधना की जा सकती है?

चौपाई, और आसन बंधन के भीतर पढ़ा गया कवच

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:05:11–1:06:05 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या रामचरितमानस की चौपाई से रुद्रगण साधना की जा सकती है, वक्ता कहते हैं हाँ, बिल्कुल की जा सकती है। यह पूछे जाने पर कि क्या आसन बंधन के भीतर पढ़ा गया कवच प्रयोग किया जा सकता है, वे कहते हैं हाँ, बिल्कुल — बंधन केवल आसन बाँधने के लिए नहीं है; जैसे ही आप कवच पढ़ेंगे, उसमें बंधन की जो भी बात है, वह सब पूरी हो जाएगी।

177

एकाक्षी नारियल को कब जगाया जा सकता है?

इस रात, या मार्गशीर्ष अष्टमी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:06:06–1:06:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि दिशा, आसन और शरीर सब सुरक्षित हो जाएँगे। ऐसे एकाक्षी नारियल के बारे में पूछे जाने पर जिसका कोई विधान नहीं हुआ, कि क्या उसे इस रात या मार्गशीर्ष अष्टमी पर जगाया जा सकता है, वे उत्तर देते हैं: हाँ, बिल्कुल, जाइए और कीजिए — यह बहुत उत्तम है।

वक्ता कहते हैं कि दिशा, आसन, शरीर — सब सुरक्षित हो जाएँगे। एक एकाक्षी नारियल है और उसका कोई विधान नहीं हुआ; क्या उसे इस रात, मार्गशीर्ष अष्टमी पर, जगाया जा सकता है — वे उत्तर देते हैं कि हाँ, बिल्कुल, जाइए और कीजिए; यह बहुत उत्तम है।

178

क्या सिंहवाहिनी अंबा का विग्रह मार्गशीर्ष अर्चन के लिए प्रयोग हो सकता है?

दुर्गा अर्चन, और मध्यम चरित्र का महालक्ष्मी ध्यान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:06:22–1:06:53 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि घर में रखे सिंहवाहिनी अंबाजी माँ के विग्रह को मार्गशीर्ष के अर्चन के लिए प्रयोग किया जा सकता है या नहीं, वक्ता कम करने को कहते हैं — दुर्गा अर्चन ही कीजिए। वे श्री दुर्गा सप्तशती की ओर ध्यान दिलाते हैं: मध्यम चरित्र में कौन-सा ध्यान मंत्र है? वह भगवती महालक्ष्मी का ध्यान मंत्र है — और उसमें भगवती कौन-सी महालक्ष्मी हैं? जो अष्टादश भुजा धारण करती हैं, अठारह भुजाओं वाली भगवती, उन्हें वहाँ महालक्ष्मी का रूप कहा गया है।

179

सिंहवाहिनी दुर्गा पर कौन-सा सहस्रनाम प्रयोग किया जा सकता है?

दुर्गा सहस्रनाम या महालक्ष्मी सहस्रनाम, दोनों फलदायी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:06:54–1:07:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तो यदि आप भगवती की सिंहवाहिनी दुर्गा जी पर दुर्गा सहस्रनाम से, या महालक्ष्मी सहस्रनाम से अर्चन करें, तो वह भी फलदायी होगा। बिल्कुल, आप कर सकते हैं।

वक्ता कहते हैं कि तो यदि आप भगवती की सिंह वाहिनी दुर्गा जी पर दुर्गा सहस्रनामकिसी देवता के सहस्र नामों का पाठ — यह विभिन्न देवी-देवताओं के लिए रचित एक भक्ति विधा है, कोई एक निश्चित ग्रंथ नहीं। से, या महालक्ष्मी सहस्रनाम से भी, अर्चन आदि करें, तो वह भी फलदायी होगा। बिल्कुल, आप कर सकते हैं।

180

महालक्ष्मी अष्टक को कैसे खोजना चाहिए?

पाठ खोजने के लिए शब्द

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:07:06–1:07:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि महालक्ष्मी अष्टक खोजिए — "महालक्ष्मी अष्टक गृहस्थ तंत्र" लिखने पर आ जाएगा।

वक्ता कहते हैं कि महालक्ष्मी अष्टक खोजिए। "महालक्ष्मी अष्टक गृहस्थ तंत्र" लिखने पर आ जाएगा।

181

अर्चन पंचाक्षरी यंत्र पर करें या विग्रह पर?

अभी श्री विग्रह पर, जब तक रूप आपके नित्य जप से मेल न खाए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:07:25–1:07:51 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि भगवती का अर्चन पंचाक्षरी यंत्र पर करें या उनके श्री विग्रह पर, वक्ता कहते हैं: श्री विग्रह पर कीजिए; अभी श्री विग्रह पर कीजिए। यदि आप जिस रूप का नित्य जप आदि करते हैं, उसी से जुड़े पंचाक्षरी यंत्र पर अर्चन करना चाहते हैं, तो उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है।

भगवती का अर्चन पंचाक्षरी यंत्र पर करें या उनके श्री विग्रह पर — वक्ता कहते हैं कि श्री विग्रह पर कीजिए। अभी श्री विग्रह पर कीजिए। यदि आप जिस रूप का नित्य जप आदि करते हैं, उससे जुड़े पंचाक्षरी मंत्र यंत्र पर अर्चन करना चाहते हैं, तो उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है।

182

क्या परिवार में मृत्यु के बाद अनुष्ठान में जुड़ सकते हैं?

सूतक के कारण भागीदारी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:07:52–1:08:01 · Also a question

एक श्रोता के यह बताने पर कि दशहरे के दिन उनके चाचा का देहांत हुआ, वक्ता कहते हैं: तब तो आप अभी सूतक में हैं न — अभी अनुष्ठान में भाग कैसे लेंगे? अभी भाग मत लीजिए।

एक श्रोता कहते हैं कि दशहरे के दिन मेरे चाचा का देहांत हो गया। वक्ता उत्तर देते हैं कि तब तो आप अभी सूतक में हैं न। अब आप अनुष्ठान में भाग कैसे लेंगे? अभी मत लीजिए।

183

क्या ब्राह्मण द्वारा स्थापित श्री यंत्र पर दुर्गा का आवरण पूजन हो सकता है?

श्री विद्या दीक्षा और ललितांबा का अर्चन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:08:02–1:08:25 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि जिस श्री यंत्र का पूजन और स्थापना किसी ब्राह्मण ने की, क्या उस पर माँ दुर्गा जी का आवरण पूजन हो सकता है, वक्ता उत्तर देते हैं: नहीं। जब वहाँ भगवती का श्री यंत्र विराजमान है, तो आप श्री विद्या में दीक्षित होकर केवल उन्हीं का अर्चन और पूजन करेंगे — आप भगवती ललितांबा का करेंगे।

पूजन और स्थापना एक ब्राह्मण ने की थी; क्या उस श्री यंत्र पर माँ दुर्गा जी का आवरण पूजन हो सकता है — वक्ता उत्तर देते हैं कि नहीं। जब वहाँ भगवती का श्री यंत्र विराजमान है, तो श्री विद्या में दीक्षित होकर आप केवल उन्हीं का अर्चन और पूजन करेंगे न। आप भगवती ललितांबा का करेंगे।

184

उस पर किसी भी देवी का सहस्रनाम अर्चन हो सकता है, पर आवरण पूजन केवल यंत्र के अपने देवता का

किसी भी देवी का सहस्र अर्चन, पर आवरण पूजन केवल यंत्र के अपने देवता का

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:08:26–1:08:55

वक्ता कहते हैं कि इस तरह आप दुर्गा जी का सहस्रनाम अर्चन कर सकते हैं, पर आवरण पूजन नहीं कर पाएँगे — उसमें आवरण कैसे करेंगे। आप दुर्गा जी का सहस्र अर्चन कर सकते हैं; काली जी का करने की इच्छा हो, तो काली जी का सहस्र अर्चन कीजिए; उस पर किसी भी देवी का अर्चन कीजिए, अर्चन करने में कोई समस्या नहीं, सबकी उपस्थिति वहाँ मानी गई है। पर आवरण पूजन आप केवल उसी देवता का करेंगे जिसका वह यंत्र है।

185

महालक्ष्मी का जप किस माला पर करना चाहिए?

नौमुखी माला, पंचमुखी भी संभव

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:08:56–1:09:07 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या महालक्ष्मी माई का जप नौमुखी माला पर किया जा सकता है, वक्ता कहते हैं हाँ, और पंचमुखी पर भी किया जा सकता है। जो भी आपके पास हो — नौमुखी पर कीजिए।

क्या महालक्ष्मी माई का जप नौमुखी माला पर किया जा सकता है — वक्ता कहते हैं कि किया जा सकता है, और पंचमुखी पर भी किया जा सकता है। जो भी आपके पास हो। नौमुखी पर कीजिए।

186

जो जीवन भर पाप करते हैं और काशी में मरते हैं, वे कहाँ जाते हैं?

भैरवी यातना, और उसके बाद की पोस्टिंग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:09:08–1:10:00 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि जो जीवन भर पाप करते हैं और अंतिम क्षणों में काशी यात्रा पर प्राण त्यागते हैं, वे कहाँ जाते हैं, वक्ता कहते हैं कि भैरव जी उन्हें पीटकर, काटकर बराबर कर देते हैं — उन्हें भैरव यातना, भैरवी यातना दी जाती है, जो यम यातना से हज़ारों गुना भयंकर मानी गई है। भैरव जी उन्हें नरक नहीं भेजते; काशी में मृत्यु पर यदि ऐसी बात आए, तो वह अकाल मृत्यु की नहीं, पूर्णायु की बात है। तो यदि पूरी आयु पर मृत्यु हुई, तो वहाँ भैरव जी उन्हें भैरवी यातना का लक्ष्य बनाकर दंड देते हैं — सोटे से पीटकर लाल चमड़ी उधेड़ते हैं: जीवन भर पाप करके क्या ऐसे ही छूट जाएँगे?

188

दिव्य कृपा शुरू होने से पहले कितना जप चाहिए?

तय नहीं — पर किसी सहस्रनाम के ग्यारह सौ पाठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:10:22–1:10:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह चीज़ आपके जप और तप पर निर्भर है; यह तय नहीं कि कितना करेंगे और हो जाएगा। पर यह अवश्य है कि जब सहस्रनाम आदि के ग्यारह सौ पाठ होने लगें, जब ग्यारह सौ से अधिक पाठ हो जाएँ, तब दिव्य कृपा अवश्य शुरू होती है।

वक्ता कहते हैं कि यह चीज़ आपके जप और तप पर निर्भर है। यह चीज़ तय नहीं है। कितना करेंगे, और हो जाएगा। पर यह अवश्य है कि जब सहस्रनामकिसी देवता के सहस्र नामों का पाठ — यह विभिन्न देवी-देवताओं के लिए रचित एक भक्ति विधा है, कोई एक निश्चित ग्रंथ नहीं। आदि के ग्यारह सौ पाठ होने लगें — जब ग्यारह सौ से अधिक पाठ हो जाएँ — तब दिव्य कृपा अवश्य शुरू होती है।

189

क्या मौली के धागे को बाती के रूप में प्रयोग किया जा सकता है?

पूरी मौली, लाल और पीली दोनों

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:10:39–1:10:55 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या मौली के धागे का पीला हिस्सा बाती है, वक्ता कहते हैं: बिल्कुल, आप प्रयोग कर सकते हैं; और केवल पीला ही क्यों — आप पूरी मौली का धागा, लाल और पीला, पूरा प्रयोग कर सकते हैं। कोई समस्या नहीं।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या मौली के धागे का पीला हिस्सा बाती है। वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल, आप प्रयोग कर सकते हैं। और केवल पीला ही क्यों — आप मौली का पूरा धागा, लाल और पीला, पूरा का पूरा प्रयोग कर सकते हैं। कोई समस्या नहीं है।

190

स्वर्णाकर्षण धनदा कलश में क्या विशेष है?

लक्ष्मी और कुबेर को भी धन देने वाले स्वर्णाकर्षण भैरव

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:10:56–1:11:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस बार दीपावली के समय महालक्ष्मी कलश और स्वर्णाकर्षण धनदा कलश बनेगा, और तैयारी इसे महालक्ष्मी कलश से अधिक विशेष बनाने की है, क्योंकि इसकी सामग्री बहुत अलग है — सामग्री महालक्ष्मी कलश से जुड़ी होगी, पर इसमें स्वर्णाकर्षण भैरव जी से जुड़ी बातें भी होंगी। और, जैसा सब जानते हैं, स्वर्णाकर्षण भैरव वह शक्ति हैं जो भगवती लक्ष्मी और कुबेर जी को भी धन देती है।

191

उस पूजन की सारी व्यवस्था साधक महाराज जी करेंगे

व्यवस्था करने वाले साधक महाराज

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:11:23–1:11:39

वक्ता कहते हैं कि यह बहुत दिव्य है, क्योंकि इस समय साधक महाराज जी उनके साथ होंगे; उन्होंने कहा है कि वे उन साधकों के लिए सारी व्यवस्था करेंगे जो चाहते हैं कि इस तरह की बातें उपस्थित हों। उन्हीं के माध्यम से वे यह सारा पूजन करेंगे।

वक्ता कहते हैं कि तो यह बहुत दिव्य है, क्योंकि इस समय साधक महाराज जी हमारे साथ होंगे। उन्होंने कहा है कि भाई, जो साधक चाहते हैं कि इस तरह की बातें उपस्थित हों, उनके लिए हम सारी व्यवस्था करेंगे। उन्हीं के माध्यम से हम यह सारा पूजन करेंगे।

192

गृह बंधन से पहले कवच का कितना जप चाहिए?

कवच का पाँच हज़ार या ग्यारह हज़ार जप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:11:40–1:11:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गृह बंधन के लिए पहले कम से कम कवच का पाँच हज़ार या ग्यारह हज़ार जप होना चाहिए; तभी उसका प्रयोग करना चाहिए, और तब पूरा घर दृढ़ता से बँधता है। स्वयं करने में काफ़ी खर्च आता है — वे कहते हैं कि खर्च स्वयं करने का लगभग दसवाँ हिस्सा आता है, तो आप स्वयं ही कर लीजिए।

वक्ता कहते हैं कि गृह बंधन के लिए पहले कम से कम कवच का पाँच हज़ार या ग्यारह हज़ार जप होना चाहिए। फिर उसका प्रयोग करना चाहिए; तब दृढ़ता से पूरा घर बँधता है। स्वयं करने पर काफ़ी खर्च आता है। आपका खर्च — स्वयं करने का — लगभग दसवाँ हिस्सा आता है। तो आप स्वयं ही कर लीजिए।

193

धनतेरस पर फ़ॉर्म वेबसाइट पर आएँगे, उसके बाद होने वाले पाँच दिन के अनुष्ठान के लिए

धनतेरस, और तब का पाँच दिन का अनुष्ठान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:12:00–1:12:17

वक्ता कहते हैं कि धनतेरस के समय वे सब कुछ वेबसाइट पर डाल देंगे, इसलिए उस समय आप सब उन सबको बताइए जिन्हें आवश्यकता हो; वहाँ भर दीजिए और सबको अवश्य मिलेगा। उस समय पाँच दिन का अनुष्ठान भी होगा, तो और अच्छा होगा। अभी केवल एक दिन का होने वाला है, और वह उसी समय किया जाएगा।

वक्ता कहते हैं कि धनतेरस के समय हम सब कुछ वेबसाइट पर डाल देंगे, इसलिए उस समय आप सब उन सबको बताइए जिन्हें इसकी आवश्यकता होगी। वहाँ भर दीजिए; सबको अवश्य मिलेगा। उस समय पाँच दिन का अनुष्ठान भी होगा, तो और भी अच्छा होगा। अभी केवल एक दिन का होने वाला है। तो हम उसे उसी समय करेंगे।

194

क्या नर्मदा के पत्थर को आकार देकर बनाया शिवलिंग स्वीकार्य है?

कंकर-कंकर शंकर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:12:18–1:12:29 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या नर्मदा जी के पत्थरों को आकार देकर शिवलिंग जैसा बनाना ठीक है, वक्ता उत्तर देते हैं: बिल्कुल, आप स्वीकार कर सकते हैं। हर कंकर को शंकर माना गया है, तो बिल्कुल आप स्वीकार कर सकते हैं।

एक श्रोता पूछते हैं कि वे नर्मदा जी के पत्थरों को आकार देकर शिवलिंग जैसा बनाते हैं — क्या यह ठीक है। वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल, आप स्वीकार कर सकते हैं। हर कंकर को शंकर माना गया है, तो बिल्कुल आप स्वीकार कर सकते हैं।

195

यदि चाटन की स्थिति बहुत बढ़ जाए, तो क्या करना चाहिए?

जन्म कुंडली में चंद्रमा देखना और चंद्र उपाय करना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:12:30–1:12:48 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि चाटन की स्थिति बहुत बढ़ जाए, तो सबसे पहला काम यह देखना है कि आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति क्या है। किसी ज्योतिष जी महाराज से दिखवाकर चंद्र के लिए ग्रह उपाय कीजिए, या दान आदि क्या हैं यह जानकर वह कीजिए। उससे पहले चाटन कम होगा।

वक्ता कहते हैं कि यदि चाटन की स्थिति बहुत बढ़ जाए, तो सबसे पहला काम यह देखना है कि आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति क्या है। किसी ज्योतिष जी महाराज से दिखवाकर चंद्र के लिए जो ग्रह उपाय हैं, वे कीजिए; या दान आदि क्या हैं, यह जानकर वह कीजिए। उससे पहले चाटन कम होगा।

196

कम से कम दही और गुड़ सिर से उतारकर किसी सुनसान जगह रख दिया जाता है

दही और गुड़ सिर से उतारकर सुनसान जगह रखना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:12:49–1:13:04

वक्ता कहते हैं कि नहीं तो, यदि और कुछ न हो, तो कम से कम दही और गुड़ सिर के ऊपर से उतारकर किसी सुनसान जगह ले जाकर रखना शुरू कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि नहीं तो, यदि और कुछ भी न हो, तो कम से कम दही और गुड़ सिर के ऊपर से उतारना शुरू कीजिए, और उन्हें किसी सुनसान जगह ले जाकर रख दीजिए।

197

नवरात्रि में प्रयोग किए मिट्टी के दीयों का क्या किया जा सकता है?

पान लगाने के लिए मिट्टी में प्रयोग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:13:05–1:13:13 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या नवरात्रि में प्रयोग किए मिट्टी के दीये मिट्टी में डालकर पान के पौधे उगाए जा सकते हैं, वक्ता उत्तर देते हैं: बिल्कुल, आप लगा सकते हैं।

एक श्रोता पूछते हैं कि नवरात्रि में हमने जो मिट्टी के दीये प्रयोग किए, क्या उन्हें मिट्टी में डालकर पान के पौधे उगाए जा सकते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल, आप लगा सकते हैं।

198

क्या घी साधना की पूर्णाहुति मंदिर में की जा सकती है?

मंदिर में पूर्णाहुति की अनुमति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:13:14–1:13:19 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या गर्म घी साधना की पूर्णाहुति मंदिर में की जा सकती है, वक्ता उत्तर देते हैं: आप कर सकते हैं, कोई कठिनाई नहीं।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या गर्म घी साधना की पूर्णाहुति मंदिर में की जा सकती है। वक्ता उत्तर देते हैं कि आप कर सकते हैं, कोई कठिनाई नहीं।

199

क्या सिंदूरदानी पकड़े बंगाल की लक्ष्मी एक अलग रूप हैं?

सब लक्ष्मी माँ के ही रूप, और कोजागरी पूजा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:13:20–1:13:34 · Also a question

एक श्रोता के यह बताने पर कि बंगाल में एक लक्ष्मी जी हैं जो हाथ में सिंदूरदानी पकड़ती हैं, वक्ता कहते हैं हाँ, बिल्कुल। इन्हीं को लक्ष्मी माँ कहा जाता है; सब लक्ष्मी माँ का ही रूप हैं — और अभी कोजागरी में माई की पूजा होगी।

एक श्रोता कहते हैं कि बंगाल में एक लक्ष्मी जी हैं जो हाथ में सिंदूरदानी पकड़ती हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि हाँ, बिल्कुल। इन्हीं को लक्ष्मी माँ कहा जाता है न; सब लक्ष्मी माँ का ही रूप हैं — जिनमें, अभी, कोजागरी में माई की पूजा होगी।

200

क्या काशी के अन्नपूर्णा और विशालाक्षी मंदिर एक ही हैं?

दो अलग मंदिर, और अठारह महाशक्ति पीठों में विशालाक्षी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:13:35–1:14:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नहीं, दोनों अलग हैं। अन्नपूर्णा मंदिर काशी विश्वनाथ जी के परिसर में, ठीक बगल में है। और विशालाक्षी मंदिर पीछे है, भगवती के शक्ति पीठों में: काशी विशालाक्षी अठारह प्रमुख महाशक्ति पीठों में से एक हैं, और थोड़ा बाहर, पाँच मिनट की दूरी पर पड़ती हैं। दोनों अलग हैं।

वक्ता कहते हैं कि नहीं, दोनों अलग हैं। अन्नपूर्णा मंदिर काशी विश्वनाथ जी के परिसर में, ठीक बगल में है। और विशालाक्षी मंदिर पीछे है, शक्ति पीठों में — भगवती का। अठारह प्रमुख महाशक्ति पीठों में काशी विशालाक्षी एक हैं, और वे थोड़ा बाहर, पाँच मिनट की दूरी पर पड़ती हैं। दोनों अलग हैं।

201

इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र की फलश्रुति क्या वचन देती है?

शत्रु नाश, अभिचार नाश, लक्ष्मी प्राप्ति और विजय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:14:01–1:14:22 · Also a question

यह पूछे जाने पर कि क्या वे कल इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र करें, वक्ता कहते हैं: बिल्कुल कीजिए — और उसकी फलश्रुति पढ़िए। एक पाठ करने से क्या मिलता है, दो से क्या मिलेगा, तीन से क्या होगा। भाई, इसमें शत्रुओं का नाश भी है। अभिचार का नाश भी है। लक्ष्मी की प्राप्ति भी है। विजय भी है। इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र में सब कुछ है।

202

क्या यह स्तोत्र केवल लक्ष्मी की कृपा के लिए पढ़ा जाता है?

शत्रुओं पर विजय भी, और कल का दिन महालक्ष्मी का

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:14:23–1:14:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसा नहीं कि केवल लक्ष्मी जी की कृपा आएगी — शत्रुओं पर विजय भी मिलेगी। और क्योंकि कल का दिन भगवती महालक्ष्मी के लिए है, इसे अवश्य कीजिए। वे एक श्रोता से कहते हैं कि अच्छी बात है कि दो साल पहले वे इसे केवल खीर पूर्णिमा समझते थे, और अब समझ गए हैं कि कुछ मिलने वाला है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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