चैत्र नवरात्र की तैयारी — शनिचरी अमावस्या, संधि पूजा और विंध्याचल का त्रिकोण

चैत्र नवरात्र और विंध्याचल की तैयारी पर एक लाइव वार्ता।

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Questions this answers

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01

इस चैत्र नवरात्रि से ठीक पहले शनिचरी अमावस्या क्यों पड़ रही है?

चैत्र नवरात्रि से पहले शनिवार को शनिचरी अमावस्या

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:07–01:27 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि चैत्र नवरात्रि में अब दो-तीन दिन ही बचे हैं। शनिवार को शनिचरी अमावस्या पड़ रही है। यह रात्रि कालीन, निषिद्ध कालीन अमावस्या है। जहाँ भगवती काली की पूजा होती है, या जिस तंत्र पीठ में निषिद्ध काल का पूजन होता है, और जहाँ श्मशान आदि में बलि का विधान है, वहाँ यह अमावस्या मानी जाती है।

02

अमावस्या का पूजन शुक्रवार की रात करें या शनिवार को?

शुक्रवार की रात निषिद्ध व्यापिनी, शनिवार को उदया व्यापिनी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:28–01:50 · Also a question

जो लोग निषिद्ध काल की पूजा करते हैं, वे अमावस्या का पूजन शुक्रवार की रात को ही करेंगे। क्योंकि निषिद्ध व्यापिनी उसी दिन पड़ रही है। पर शनिवार को शाम लगभग सवा चार बजे तक अमावस्या है। इसलिए उदया व्यापिनी अमावस्या, यानी शनिचरी अमावस्या, भी उस पूरे दिन और रात मान्य है।

03

इस ग्रंथ में हर बात के साथ उस तंत्र ग्रंथ का संदर्भ दिया गया है जिससे वह ली गई है।

आचार्य शिवदत्त मिश्र शास्त्री की श्री दुर्गा अर्चन पद्धति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:51–02:30

वे श्री श्री आचार्य शिवदत्त मिश्र शास्त्री की लिखी श्री दुर्गा अर्चन पद्धति और उनके कई दूसरे ग्रंथों की ओर संकेत करते हैं। उनमें यह विषय संदर्भ के साथ बताया गया है, कि हर बात किस तंत्र ग्रंथ से ली गई है। बात यह है कि वार के अनुसार भगवती श्री जगदंबा का सप्तशती पाठ, या उनसे जुड़ा कोई भी अनुष्ठान, विशेष महत्व रखता है।

04

चंडी पाठ के लिए शनिवार को सबसे बड़ा दिन क्यों माना जाता है?

सप्ताह के क्रम का अंतिम दिन शनिवार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:31–02:49 · Also a question

वे कहते हैं, एक सामान्य मत यह है कि रविवार से शनिवार तक के क्रम में, जब हम पहले दिन से आरंभ करते हैं, तो शनिवार का चंडी पाठ सबसे अधिक महत्व का माना गया है। पर इसके पीछे भी एक विशेष कारण है।

वक्ता कहते हैं, सामान्य रूप से एक मत यह है: रविवार से शनिवार तक के क्रम में, जब हम पहले दिन से आरंभ करते हैं, तो शनिवार को किया गया चंडी पाठ बहुत बड़े महत्व का माना गया है। पर वे कहते हैं, इसके पीछे देखें तो इसका भी एक विशेष कारण है।

05

मंगलवार और शनिवार को विशेष दिन क्यों माना जाता है?

वीर रात्रि और क्रूर रात्रि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:50–03:12 · Also a question

मंगलवार और शनिवार दो विशेष दिन हैं। इनकी निषिद्ध काल की रात को विशेष रूप से वीर और क्रूर से जुड़ा कहा गया है — वीर रात्रि और क्रूर रात्रि। जब इनके साथ नक्षत्र और तिथि का योग भी बन जाए, तो यह विशेष, और फिर अति विशेष हो जाता है।

वे कहते हैं, मंगलवार और शनिवार दो विशेष दिन हैं। इनका निषिद्ध काल, खासकर रात, वीर और क्रूर से जुड़ा बताया गया है। वीर रात्रि और क्रूर रात्रि। पर उसमें भी अगर नक्षत्र और तिथि का योग बन जाए, तो वह विशेष हो जाता है, और उससे आगे अति विशेष। इसी तरह शनिचरी अमावस्या का महत्व है।

06

कौन-से वार और तिथि के योग पूजा का फल कई गुना बढ़ाते हैं?

फल बढ़ाने वाले वार-तिथि के योगों की सूची

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:13–04:15 · Also a question

रविवार को सप्तमी पड़े तो बहुत महत्व होता है। सोमवार को श्लोष या अमावस्या पड़े तो महत्व बहुत बढ़ जाता है। मंगलवार को अमावस्या, चतुर्दशी या अष्टमी पड़े तो विशेष महत्व है। बुधवार को अष्टमी बहुत विशेष है। और गुरुवार को पुष्य नक्षत्र या एकादशी तिथि हो तो बड़ा दिव्य महत्व हो जाता है।

07

अनुष्ठान शब्द में असल में क्या-क्या आता है?

अनुष्ठान का पूरा विधान, एक दिन का भी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:16–04:45 · Also a question

भगवती या भगवान के जिस भी रूप की पूजा करनी है, उसका षोडशोपचार पूजन। फिर स्तुति, जप, कवच आदि के पाठ। तय संख्या में जप, जैसे एक सौ आठ माला या कुछ माला। फिर दशांश हवन। और हवन के बाद तर्पण और मार्जन।

08

एक दिन का अनुष्ठान पूरा होने के बाद क्या करना चाहिए?

व्रत, दान, और उसके बाद ही भोजन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:46–05:17 · Also a question

जब आप इसे एक ही दिन में करते हैं, तो उस दिन व्रत रखते हैं। या अनुष्ठान पूरा होने पर दान करते हैं, और उसके बाद ही भोजन और अन्न ग्रहण करते हैं। वे कहते हैं, इससे कर्म का महत्व बहुत बढ़ जाता है।

वे कहते हैं, इसी तरह जब आप इसे एक दिन में भी करते हैं, तो उसके बाद उस दिन व्रत रखते हैं। या अनुष्ठान पूरा होने के बाद दान आदि करते हैं, और फिर भोजन करते हैं, अन्न ग्रहण करते हैं। इससे इसका महत्व बहुत बढ़ जाता है।

09

उस दिन शनि राशि बदलते हैं और ढाई साल मीन में रहते हैं।

बृहस्पति की राशि मीन में शनि का गोचर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:18–05:40

उसी दिन से शनि देव का गोचर भगवान बृहस्पति देव की राशि, मीन राशि में आरंभ हो रहा है — उस दिन वे राशि बदलते हैं। वक्ता कहते हैं, वहाँ उनके ढाई साल के समय में, अपने जीवन में आपका जो भी कर्तव्य और जिम्मेदारी है, उसे जितनी ईमानदारी से हो सके निभाइए। और पूरे अनुशासन से अनुष्ठान कीजिए। फल अवश्य मिलेगा।

10

शनि देव फल कैसे देते हैं?

धीरा ग्रह का धीमा, सूक्ष्म आकलन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:41–06:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं, शनि देव उस श्रेणी के दिव्य ग्रह हैं जो धीरा हैं। वे बहुत बारीकी और सूक्ष्मता से आकलन करते हैं, अवलोकन करते हैं, और उसके बाद ही फल देते हैं। वे बहुत धीरे देते हैं। यह धैर्य की चरम परीक्षा बन जाती है।

वे कहते हैं, शनि देव धीरा हैं — जो बहुत महीनता और सूक्ष्मता से आकलन करते हैं, अवलोकन करते हैं, और उसके बाद ही परिणाम देते हैं। वक्ता कहते हैं, शनि देव उसी श्रेणी के दिव्य ग्रह हैं। वे बहुत धीरे-धीरे देते हैं। यह धैर्य की पराकाष्ठा बन जाती है, उसकी परीक्षा।

11

परीक्षा के समय अनुष्ठान पर अनुष्ठान करने पर भी फल न दिखे, ऐसा हो सकता है।

अनुष्ठान जो बिल्कुल फलते नहीं दिखे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:05–06:34

इतनी परीक्षा होती है, और परीक्षा में इतना धैर्य चाहिए, कि अनुष्ठान पर अनुष्ठान करते हुए आप थक जाएँगे। वे कहते हैं, यह भगवान शनि देव की महादशा में उनके अपने जीवन का अनुभव है। उनके आसपास के साधक और गुरु भाइयों के अनुष्ठान बड़ी तेजी से फलते थे, पर एक समय उनके अपने अनुष्ठान फल ही नहीं रहे थे। वे कहते हैं, आपके और हमारे लिए नियम अलग नहीं हैं।

12

शनि कमाया हुआ फल कब देना शुरू करते हैं?

शनि के गोचर का अंतिम चरण, जब वे देना शुरू करते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:35–06:55 · Also a question

जब उनके जाने का समय आता है, जब वे अंतिम चरण में होते हैं, तब आपने जो भी अच्छे कर्म किए, जो भी अनुष्ठान और पुरश्चरण किए, वे देना शुरू करते हैं। और जब वे देना शुरू करते हैं, तो आपको हैरानी होगी कि इतनी आसानी से प्राप्ति कैसे हो रही है।

पर जब उनके जाने का समय आता है, जब वे अपने अंतिम चरण में होते हैं, तब आपने जो भी अच्छे कर्म किए, जो भी अनुष्ठान किए, जो भी पुरश्चरणनिर्धारित नियमों के अनुसार मंत्र की अनुष्ठानिक पुनरावृत्ति — तंत्र साधना में आवश्यक। किए — वे देना शुरू करते हैं। और जब वे देना शुरू करते हैं, तो आपको लगेगा: यह इतनी आसानी से कैसे मिल रहा है?

13

भौतिक फल भी समय आने पर मिलता है; यहाँ केवल आध्यात्मिक क्षेत्र की बात हो रही है।

भौतिक फल भी मिलता है, जब मिलना हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:56–07:43

वे कहते हैं कि वे खास तौर पर आध्यात्मिक क्षेत्र की बात कर रहे हैं, भौतिक की नहीं — भौतिक अलग विषय है। पर अगर उस श्रेणी में देना हो, तो वे अवश्य देंगे। ऐसा नहीं कि वहाँ नहीं देते।

वे कहते हैं, हम विशेष रूप से आध्यात्मिक क्षेत्र की बात करें, भौतिकता की नहीं — भौतिकता अलग विषय है। अगर उन्हें उस श्रेणी में देना हो, तो वे अवश्य देंगे। ऐसा नहीं कि वे उसमें नहीं देते; अवश्य देते हैं।

14

अगर अनुष्ठान पूरी तरह भौतिक कामना से किया जाए तो क्या होता है?

बिना विश्वासघात या देवघात के निष्ठा से अनुष्ठान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:44–07:59 · Also a question

अगर पूरा अनुष्ठान भौतिकता के लिए हो रहा है — धन और दान, भरपूर संपत्ति, ऐश्वर्य, वाहन, घर का सुख — तो समय आने पर, अगर आपने अपने अनुष्ठान निष्ठा और अनुशासन से किए हैं, बिना किसी विश्वासघात के, बिना देवघात के, देवताओं के प्रति बिना किसी प्रमाद के, तो वे ऐसा देंगे कि मिट्टी में भी हाथ डालेंगे तो सोना हो जाएगा।

15

नए साधकों को किस तरह के अनुभव होते हैं?

घटनाएँ जिन्हें नया साधक समझ पाए या न पाए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:00–08:33 · Also a question

अनुभव से बोलते हुए वे कहते हैं कि सामान्य नए साधकों के साथ ऐसे अनुभव होते हैं, ऐसी घटनाएँ होती हैं। वे उन्हें समझ पाते हैं या नहीं, यह अलग विषय है।

वे कहते हैं, अनुभव की बात ही देखें: सामान्य नए साधकों के साथ ऐसे अनुभव होते हैं, ऐसी घटनाएँ घटती हैं। वे उन्हें समझ पाते हैं या नहीं, यह बिल्कुल अलग विषय है। अनुभव में ऐसी बहुत सी बातें हैं।

16

क्या साधक के अनुभवों में स्वयं भगवती प्रकट होती हैं?

स्थान पर बैठी लोक योगिनियाँ प्रकट होती हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:34–08:58 · Also a question

भगवती का अंतिम अनुभव यह है कि जगदंबा वहाँ अपने साक्षात रूप में नहीं आ रहीं। पर उस स्थान पर जो भी लोक योगिनी बैठी है, वह कहीं न कहीं वहाँ प्रकट हो रही है। वे कहते हैं, लोक शक्तियाँ जीवन में किसी न किसी तरह हस्तक्षेप अवश्य करती हैं।

वे कहते हैं, भगवती का अंतिम अनुभव यह है: जगदंबा वहाँ अपने साक्षात रूप में नहीं आ रहीं। पर उस स्थान पर जो भी लोक योगिनी बैठी है, वह कहीं न कहीं वहाँ प्रकट हो रही है। लोक शक्तियाँ, एक तरह से कहें तो, जीवन में कहीं न कहीं हस्तक्षेप अवश्य करती हैं।

17

लोक शक्तियाँ साधक की मदद कब कर पाती हैं?

लोक शक्तियाँ प्रारंभिक परीक्षा पास होने के बाद ही मदद करती हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:59–09:44 · Also a question

उनके हस्तक्षेप के पहले चरण में, हमारे प्रारब्ध से जो भी कर्म बना हो, और उस समय जीवन में जो भी कठिनाई चल रही हो, उसमें वे तभी सहायता कर पाती हैं जब आप उनकी प्रारंभिक परीक्षा में सफल हो जाते हैं। वे कहते हैं, बिना परीक्षा के इस क्षेत्र में कोई आपको कुछ नहीं देने वाला।

18

शनिवार की अमावस्या पर अर्चन कितना अधिक फलदायी है?

सौ गुना फल, और कर्म जल्दी कटता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:45–10:16 · Also a question

अगर अमावस्या शनिवार को पड़ रही हो और कोई उस दिन भगवती का अर्चन करे, तो उसे सौ गुना अधिक फलदायी माना गया है। इसी तरह कर्म जल्दी कटता है: जो आठ साल में होना था, वह साढ़े सात या सात साल में हो सकता है।

19

यह चैत्र नवरात्रि किस दिन से आरंभ हो रही है?

रविवार को प्रतिपदा, और तृतीया-चतुर्थी एक साथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:17–10:43 · Also a question

चैत्र नवरात्रि रविवार से आरंभ हो रही है, और उस दिन की तिथि प्रतिपदा है। तृतीया और चतुर्थी एक साथ पड़ रही हैं। नवरात्र का अर्थ है नई रातें। और सूर्य वार से आरंभ होना — यानी सप्ताह के पहले दिन से, ग्रहों के राजा सूर्यदेव के दिन से — इस नए वर्ष को अपने आप में बहुत दिव्य बनाता है।

20

अनुमानित प्राकृतिक उथल-पुथल के साथ प्रकृति रास्ता भी देती है।

उथल-पुथल के साथ प्रकृति का दिया रास्ता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:44–11:29

ज्योतिषीय गणना के आधार पर जो प्राकृतिक उथल-पुथल होनी है, और सनातन के विरुद्ध षड्यंत्र रचने वालों का जो विषय दूसरे सम्माननीय साधक लोगों के सामने रख रहे हैं, वक्ता कहते हैं कि उसके सच होने में ज़रा भी संदेह नहीं है। पर प्रकृति साथ-साथ उन बातों से निपटने का रास्ता भी दे रही है।

21

जो नौ दिन उपवास नहीं कर सकते, वे क्या करें?

कम से कम प्रतिपदा और अष्टमी या नवमी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:30–12:11 · Also a question

इस बार नवरात्रि आठ दिन की है। वक्ता कहते हैं, जो नौ दिन का उपवास नहीं रख सकते, वे कम से कम प्रतिपदा का और अष्टमी या नवमी का उपवास ज़रूर रखें।

उस दिन से जब आप नवरात्रि का अनुष्ठान करेंगे — वक्ता कहते हैं, जो लोग नौ दिन का उपवास नहीं रख सकते, और इस बार तो यह आठ दिन की ही है — वे कम से कम प्रतिपदा का और अष्टमी का, या नवमी का उपवास ज़रूर रखें।

22

अष्टमी का व्रत किसे नहीं रखना चाहिए?

इकलौते पुत्र वाले के लिए नियम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:12–12:40 · Also a question

जिनका एक ही पुत्र है — न कोई और बेटी, न कोई और बेटा, बस एक ही पुत्र — वे अष्टमी का उपवास न रखें, नवमी का रखें। वक्ता कहते हैं कि इसका वर्णन कालिका पुराण और श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में है, और जब श्री रामचंद्र जी ने रावण वध के लिए जगदंबा की उपासना की, तब जगदंबा ने यह विषय उनके सामने रखा था।

23

प्रतिपदा रविवार से शुरू, तृतीया और चतुर्थी मंगलवार को साथ, और अष्टमी शनिवार को।

प्रतिपदा से अष्टमी तक दिन-वार क्रम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:41–12:59

प्रतिपदा सूर्य वार से शुरू हो रही है; द्वितीया सोमवार को; तृतीया और चतुर्थी मंगलवार को; पंचमी बुधवार को; षष्ठी गुरुवार को; सप्तमी शुक्रवार को; और अष्टमी शनिवार को पड़ रही है।

वक्ता क्रम बताते हैं: प्रतिपदा के दिन सूर्य वार से शुरुआत हो रही है। द्वितीया सोमवार को है। तृतीया और चतुर्थी मंगलवार को हैं। पंचमी बुधवार को है। षष्ठी गुरुवार को है, और सप्तमी शुक्रवार को। अष्टमी शनिवार को पड़ रही है।

24

उस अष्टमी को संधि पूजा कब है?

शाम लगभग सात से आठ, चालीस से पचास मिनट

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:00–13:25 · Also a question

अष्टमी शनिवार को पड़ रही है, और उसी अष्टमी को शाम लगभग सात बजे से — वक्ता कहते हैं कि पूरा समय भी डाला जाएगा — सात से आठ के बीच पचास या चालीस मिनट का संधि काल रहेगा। यानी शनिवार शाम सात से आठ के बीच संधि पूजन होगा।

वक्ता कहते हैं, अष्टमी शनिवार को पड़ रही है, और उसी अष्टमी को शाम लगभग सात बजे से — पूरा समय भी डाला जाएगा — सात से आठ के बीच जो समय है, वह संधि काल रहेगा, पचास मिनट का, चालीस मिनट का। यानी शनिवार शाम सात से आठ के बीच संधि पूजन होगा।

25

शनिवार की यह संधि पूजा विशेष दिव्य क्यों होगी?

क्रूर दिन और चामुंडा की अष्टमी-नवमी संधि का मेल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:52–14:11 · Also a question

क्योंकि एक ओर यह क्रूर दिन है — उग्रता का दिन, उग्र वार — और दूसरी ओर नवमी के साथ अष्टमी तिथि, यानी संधि का समय। उस समय जगदंबा का जो रूप प्रकट होता है, जिसकी ऊर्जा उन चालीस से बयालीस मिनटों में पूरे ब्रह्मांड में फैली रहती है, वह भगवती चामुंडा का है।

26

नवार्ण मंत्र में चामुण्डायै बीज क्यों है?

नवार्ण में स्थित चामुण्डायै बीज

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:12–14:44 · Also a question

वक्ता कहते हैं, भगवती चामुंडा अपने आप में देवियों में सबसे प्रखर, सबसे ओजस्वी, और कह सकते हैं सबसे उग्र हैं। नवार्ण में जो बीज अक्षर चामुण्डायै आया है, वह यूँ ही नहीं आया: जगदंबा का वह रूप उस मंत्र में साक्षात् उपस्थित रहता है।

वक्ता कहते हैं, भगवती चामुंडा अपने आप में देवियों में सबसे प्रखर, सबसे ओजस्वी, और कह सकते हैं सबसे अधिक उग्र हैं। नवार्ण में जो बीज अक्षर आया है — चामुण्डायै — वह यूँ ही नहीं आया। जगदंबा का वह रूप उस मंत्र में साक्षात् उपस्थित रहता है। यह भी एक कारण है कि यह समय अपने आप में बहुत दिव्य है।

27

नवरात्रि के संधि पूजन में कौन सी बलि दी जा सकती है?

कुष्मांडा, नारियल, नींबू, जायफल, लौंग, खीरा, केला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:45–15:09 · Also a question

उस संधि पूजन के समय आप बलि छेदन करेंगे: चाहे कुष्मांडा बलि दें, नारियल बलि, नींबू बलि, जायफल बलि, लौंग बलि, या खीरे की बलि, या कदली फलम — यानी केले की बलि — जिस भी पदार्थ की हो, उस समय एक सौ एक की बलि दी जाती है।

वक्ता कहते हैं, उस दिन उस समय, संधि पूजा के समय, आप बलि छेदन करेंगे। चाहे कुष्मांडा बलि दें, नारियल बलि, नींबू बलि, जायफल बलि, लौंग बलि, या खीरे की बलि। या कदली फलम, यानी केले की बलि आदि — जो भी पदार्थ लें, उस समय उनकी एक सौ एक की बलि।

28

संधि काल में दी गई बलि से क्या होता है?

शत्रुओं और कष्टों का नाश

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:10–15:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं, वह बलि आपके शत्रुओं के नाश और आपके कष्टों के नाश के लिए अपने आप में पूरी तरह पूर्ण होगी, क्योंकि उस दिन शनिवार के संधि काल में तिथि और वार का अद्भुत संयोग बन रहा है। इसके लिए तैयार रहिए।

वह बलि अपने आप में आपके शत्रुओं के नाश और आपके कष्टों के नाश के लिए बहुत पूर्ण होगी। क्योंकि उस दिन, शनिवार के संधि काल में, तिथि और वार का अद्भुत संयोग बन रहा है। तो तैयार रहिए, वक्ता कहते हैं।

29

नवमी राम नवमी है, और शाक्तों के लिए तारा नवमी, जिस दिन भगवती तारा का एक रूप प्रकट हुआ।

राम नवमी, और शाक्तों के लिए तारा नवमी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:33–15:59

बाद में पड़ने वाली नवमी राम नवमी है, और विशेषकर शाक्तों के लिए यह तारा नवमी है — वह दिन जब एक कल्प भेद के अनुसार भगवती तारा का एक रूप प्रकट हुआ था।

वक्ता कहते हैं, इसके बाद जो नवमी तिथि पड़ रही है: राम नवमी पड़ रही है, और विशेषकर शाक्तों के लिए यह तारा नवमी है — वह दिन जब उस कल्प भेद के अनुसार, एक कल्प में भगवती तारा का एक रूप प्रकट हुआ था।

30

पुष्य नक्षत्र, रविवार और शुक्ल पक्ष एक साथ पड़ते हैं, और गीता में कृष्ण पुष्य को अपना बताते हैं।

शुक्ल पक्ष में रविवार के साथ पुष्य नक्षत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:00–16:16

क्योंकि उस दिन पुष्य नक्षत्र है, रविवार है, और शुक्ल पक्ष है। वक्ता गीता के विभूति योग में भगवान श्री कृष्ण का कथन बताते हैं — नक्षत्रों में मैं पुष्य नक्षत्र हूँ।

31

नवरात्रि के अंतिम दिन क्या किया जाता है?

पूर्णता के समय के रूप में कन्या पूजन और हवन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:17–16:40 · Also a question

कन्या पूजन होगा, हवन होगा। एक तरह से यह पूर्णता का समय है: उस दिन हमारे नवरात्र का अंतिम चरण चल रहा होगा, जो इसे अपने आप में बहुत दिव्य और बहुत विशेष बनाता है।

वक्ता कहते हैं, कन्या पूजन होगा, हवन होगा। और वह समय एक तरह से पूर्णता का समय है। उस दिन हमारे नवरात्र का अंतिम चरण चल रहा होगा। इसलिए यह अपने आप में बहुत दिव्य, अपने आप में बहुत विशेष हो जाता है।

32

तारा नवमी को क्या किया जाता है, और गृहस्थ क्या कर सकता है?

लगभग दो वर्ष से चल रहा अलग एक दिन का अनुष्ठान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:41–17:09 · Also a question

तारा नवमी को वे एक अलग एक दिन का अनुष्ठान करते आ रहे हैं — उनके विचार से लगभग दो वर्ष से — और इस बार भी यह अलग से होगा। वक्ता श्रोताओं से कहते हैं कि वे भी अपने घर पर करें, और हो सके तो उस दिन हवन का विधान ज़रूर करें।

33

क्या भगवती की कृपा से कुंडली का लिखा बदल सकता है?

कुंडली जहाँ की तहाँ पड़ी रह जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:10–17:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं, ग्रह और नक्षत्र कुंडली में अपनी जगह हैं, पर जगदंबा चाहें तो शिव और शक्ति की कृपा से जन्म कुंडली की बात कुछ और हो जाती है — या यूँ कहें कि आपके जीवन में उसका प्रभाव पूरी तरह शुभ हो जाता है। कुंडली एक ओर पड़ी रह जाएगी, कष्ट और शत्रु दूसरी ओर।

34

पहली बार नवरात्रि करने वाले के लिए व्रत का नियम क्या है?

शरीर की क्षमता के अनुसार उपवास

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:33–17:59 · Also a question

शरीर की क्षमता के अनुसार व्रत रखें। फलाहार पर रहने की कोशिश करें — कुछ भक्त केवल जल पर या जूस पर भी रहते हैं — पर शरीर की क्षमता के अनुसार नवरात्रि का व्रत फलाहार पर या फलाहारी ढंग से रखें।

35

अगर फलाहार का व्रत भी संभव न हो तो?

एक समय भोजन, और हविष्य अन्न

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:00–18:25 · Also a question

अगर आप निभा न सकें, तो दिन में एक समय अन्न आदि ग्रहण करें। जो भी हविष्य अन्न संभव हो, वह ले सकते हैं।

वक्ता कहते हैं, अगर आप सह न सकें, तो एक समय अन्न आदि ग्रहण करें। जो भी हविष्य अन्न आदि संभव हो, वह ले सकते हैं; जो भी हो, वह लें।

36

क्या दस मसालों से बना साबूदाने का व्यंजन सच में व्रत है?

व्रत कहे जाने वाले व्यंजन में दस तरह के मसाले

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:26–18:41 · Also a question

यह साबूदाना जो लोग पकौड़ी बनाकर खाते हैं, और दस तरह के मसाले डालकर तरह-तरह के व्यंजन और चटनियाँ — तो भाई, वक्ता कहते हैं, व्रत रखिए ही मत। यह पाखंड मत करिए। वे कहते हैं, भाव के नाम पर लोगों ने तबाही मचा दी है।

यह साबूदाना जो लोग पकौड़ी बनाकर खाते हैं, और तरह-तरह के व्यंजन, चटनी और सब कुछ, दस तरह के मसाले डालकर — तो भाई, व्रत रखिए ही मत, वक्ता कहते हैं। यह पाखंड मत करिए। आजकल भाव के नाम पर लोगों ने पूरी तबाही मचा दी है।

37

कान्हा जी को स्कूल में दाखिला दिलाकर अक्षर सिखाना भाव के नाम पर की गई छेड़छाड़ है।

बाल-देवता का स्कूल में दाखिला और अक्षर-ज्ञान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:42–19:01

वक्ता कहते हैं कि उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो देखा जिसमें एक महिला ने कान्हा जी का स्कूल में दाखिला करा दिया था; उन्हें A B C D सिखाई जा रही है और स्कूल भेजा जा रहा है। वे कहते हैं, भाव के नाम पर आप किसी भी चीज़ से छेड़छाड़ कर सकते हैं, किसी भी चीज़ पर पर्दा डाल सकते हैं।

38

भगवान कहते हैं वेदोऽहम्, मैं वेद हूँ; अक्षर ही ब्रह्म है, और उसी ब्रह्म को A B C D सिखाई जा रही है।

वेदोऽहम् — अक्षर ब्रह्म को वर्णमाला सिखाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:02–19:24

वक्ता कहते हैं, योगेश नाम के एक टिप्पणीकार ने बहुत अच्छी टिप्पणी की: कि भगवान कहते हैं वेदोऽहम् — मैं स्वयं वेद हूँ; अक्षर ही ब्रह्म है, वही ब्रह्म है। और उन्हें आप A B C D सिखा रहे हैं, और उस पर पैसा खर्च कर रहे हैं।

वक्ता कहते हैं, योगेश जी ने इस पर बहुत बढ़िया टिप्पणी की है: कि भगवान कहते हैं वेदोऽहम् — मैं स्वयं वेद हूँ। अक्षर ब्रह्म — अक्षर ही ब्रह्म है, वही ब्रह्म है। और उन्हें आप A B C D सिखा रहे हैं। यह है आपका भाव। उन पर पैसा खर्च हो रहा है। तो जो दिखावे की यह नकली भक्ति चल रही है, उसका शिकार मत बनिए।

39

क्या यात्रा में अपने देवता को डोलची में लेकर घूमना ठीक है?

यात्रा में साथ ले जाए गए देवता, और वह शुद्धता जो रखी नहीं जा सकती

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:44–20:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि एक विषय पर वे हमेशा बोलते आए हैं — अपने देवी-देवताओं को डोलची में लेकर घूमना। हमारा शरीर और हमारी यात्रा कभी उस स्तर की शुद्ध नहीं हो सकती, जैसी इसके लिए चाहिए। लोग कान्हा जी को, या अपने आराध्य के किसी भी रूप को, जगह-जगह ले जाते हैं और वहाँ उन्हें स्नान कराते हैं। वे कहते हैं, ऐसा कभी नहीं करना चाहिए।

40

देवता के साथ यात्रा करना अपराध क्यों माना जाता है?

ट्रेन, बस या हवाई जहाज़ की सीट, और उस पर कौन बैठा था

· Reviewed Sep 14, 2026 · 20:20–20:41 · Also a question

वे कहते हैं कि जब ये अपराध लगेंगे, तो बहुत कठिनाई होगी। जिस ट्रेन, बस या हवाई जहाज़ में आप यात्रा करते हैं, जिस जगह आप उन्हें रखते हैं, वहाँ पता नहीं कौन मुर्गा लेकर आया, कौन मछली लेकर आया, कौन मांस आदि लेकर आ रहा है। किसका शरीर किस स्तर का है, कोई क्या गलत काम करके आ रहा है, किसका शरीर उस सीट को छुएगा, वहाँ कौन बैठा था।

41

भाव के नाम पर की गई अशोभनीयता देवताओं के प्रति अक्षम्य अपराध बन जाती है।

अक्षम्य अपराध, और फिर भुगतने वाले की शिकायत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 20:42–21:07

वे कहते हैं, ऐसी अशुद्धि कभी मत रखिए। भाव के नाम पर आप जो यह अशोभनीयता कर रहे हैं, वह देवताओं के प्रति अपराध है, और यह अक्षम्य हो जाता है। फिर लोग इसे भुगतते हैं और कहते हैं — हम इतने समर्पित साधक, इतने समर्पित भक्त थे कि भगवान को डोलची में लेकर घूमे — फिर भी हमारा नुकसान हो गया।

42

देवता के प्रति किए गए अपराध का दंड कौन देता है?

देवता नहीं, उनके गण — योगिनियाँ और भैरव

· Reviewed Sep 14, 2026 · 21:08–21:27 · Also a question

यह अपराध है, और फिर उनके गण दंड देते हैं। वक्ता कहते हैं, भगवान तो दंड देने आएँगे नहीं — पर उनके गण, जिनकी ज़िम्मेदारी है कि हमारे आराध्य का अपमान न हो, आपको दंड देते हैं; उन्हीं योगिनियों और उन्हीं भैरवों से आपको दंड मिलता है।

वे कहते हैं, यह अपराध है, और फिर उनके गण दंड देते हैं। भगवान तो दंड देने आएँगे नहीं। पर उनके गण, जिनकी यह ज़िम्मेदारी है — कि हमारे आराध्य का अपमान न हो — और जब आप ऐसा करते हैं, तो उन्हीं योगिनियों और उन्हीं भैरवों से आपको दंड मिलता है। वे पहले भी इन बातों पर बोल चुके हैं; इनसे बचा जाए।

43

नवरात्रि की कलश स्थापना में कौन-से मंडल होते हैं?

नवग्रह, षोडश मातृका, चौंसठ योगिनी, पंच क्षेत्रपाल, दश दिगपाल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 21:28–21:53 · Also a question

वे कहते हैं, कलश स्थापन पहले दिन सही समय पर करना चाहिए — समय पर अलग से चर्चा होगी और लिखकर भी दिया जाएगा। मंडल हैं — नौ ग्रहों का, षोडश मातृकाओं का, चौंसठ योगिनियों का, पाँच क्षेत्रपालों का, और दश दिगपालों का।

44

अगर कोई कलश स्थापना के मंडल न बना सके तो क्या करे?

कलश स्थापना की सरल विधि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 21:54–22:38 · Also a question

अगर आप इन्हें नहीं बना सकते, तो कोई कठिनाई नहीं, कोई समस्या नहीं। चैनल पर कलश स्थापना की एक बहुत साधारण विधि प्रसारित है; अगर आपको पूरा विधि विधान नहीं आता, तो सरल विधि से कलश स्थापना कीजिए।

वे कहते हैं, अगर आप इन्हें नहीं बना सकते, तो कोई कठिनाई नहीं, कोई समस्या नहीं। चैनल पर कलश स्थापना की एक बहुत साधारण विधि प्रसारित है। अगर आपको पूरा विधि विधान नहीं आता, तो सरल विधि से कलश स्थापना कीजिए।

45

अलग मंडल बनाए बिना सभी देवताओं का आवाहन कैसे हो?

मुख्य कलश में ही सभी देवताओं का आवाहन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 22:39–23:01 · Also a question

क्योंकि जब कलश का मंत्र पढ़ा जाता है, तो उसमें बताया गया है कि कलश के घट में कौन स्थापित है और उसके कुंभ में किस देवता का कहाँ स्थान है — सब उसमें आ जाते हैं, सबका आवाहन हो जाता है। इसलिए जिस कलश में आप जगदंबा का आवाहन कर रहे हैं, उसी में नवग्रह, षोडश मातृका और चौंसठ योगिनियों को नाम लेकर अक्षत और पुष्प चढ़ाइए।

46

अखंड ज्योत कब तक जलनी चाहिए?

दशमी तिथि के पारण तक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 23:02–23:37 · Also a question

अखंड ज्योत तब तक जलनी चाहिए जब तक आप दशमी तिथि पर पारण न कर लें। वे कहते हैं, इस पूरे विषय पर चैनल पर बहुत विस्तार से चर्चा हो चुकी है।

वे पूछते हैं, अखंड ज्योति कब तक जलनी चाहिए। यह पूरा विषय चैनल पर है और वहाँ बहुत विस्तार से चर्चा हो चुकी है। अखंड ज्योत जलाइए, प्रज्वलित कीजिए। और अखंड ज्योत तब तक जलनी चाहिए जब तक आप दशमी तिथि पर पारण न कर लें।

47

विसर्जन के समय लोग अखंड ज्योत के साथ क्या गलत करते हैं?

उसे अपने-आप पूरा होने देने के बजाय उस पर पानी डालना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 23:38–24:02 · Also a question

लोग कलश विसर्जन का मंत्र पढ़कर अक्षत छोड़ते हैं, और उसी समय अखंड ज्योत पर पानी डालकर उसे बुझा देते हैं। वे कहते हैं, इसके बजाय उसमें जो घी और तेल है, उसे निकालकर रख लीजिए — वह तिलक लगाने के काम आएगा — और थोड़ा तेल रहने दीजिए, ताकि पारण होते-होते वह अपने-आप पूरी हो जाए।

48

जिसका संस्कृत उच्चारण साफ़ नहीं है, वह क्या करे?

सप्तशती का पाठ हिंदी में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 24:03–24:23 · Also a question

वे कहते हैं, अगर संस्कृत नहीं आती, तो हिंदी में कीजिए। हिंदी में पाठ कैसे करें, इसका वीडियो आज फिर से साझा किया गया है; और महाविद्या क्रम भी है, जिससे सप्तशती का पाठ सात दिनों में बहुत आसानी से पूरा हो जाता है।

49

नवरात्रि में सात दिन का सप्तशती पाठ कैसे बाँटा जाता है?

आठवें दिन स्तुति और रहस्य, नौवें दिन हवन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 24:24–24:38 · Also a question

आठवें दिन स्तुति आदि कीजिए, रहस्यों का पाठ कीजिए; नौवें दिन हवन कीजिए। और अगर आठ दिन की हो, तो सात में पूरा करके आठवें दिन हवन आदि कीजिए। किस दिन कौन-सा अध्याय पढ़ा जाए, और सब कैसे हो, यह बताया जा चुका है।

वे कहते हैं, आठवें दिन आपको स्तुति आदि करनी चाहिए, रहस्यों का पाठ करना चाहिए, और नौवें दिन हवन करना चाहिए। और अगर आठ दिन की हो, तो सात दिनों में ही पूरा करके आठवें दिन हवन आदि कीजिए। यह पूरा विषय — किस दिन किस अध्याय का पाठ होगा, सब कैसे होगा — विस्तार से बताया जा चुका है।

50

क्या बिना दीक्षा वाला व्यक्ति नवार्ण मंत्र का जप कर सकता है?

एक मनाही जिसे वे कभी वापस नहीं लेते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 24:39–24:58 · Also a question

वे कहते हैं, जो दीक्षाधारी नहीं है, उसके लिए वे कभी नवार्ण मंत्र के पक्ष में नहीं बोलते — हमेशा मना करते हैं। भाव की बात करने वाले लोग इसका बहुत विरोध करते हैं: भाव से क्यों नहीं होगा, क्या माँ भाव नहीं देखतीं। वे लोगों से कहते हैं कि भाव के नाम पर छेड़छाड़ बंद कीजिए।

52

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के भीतर का मंत्र कैसे पढ़ें?

मन में पढ़ें, ज़ोर से चिल्लाकर नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 25:13–25:34 · Also a question

जहाँ भी कुंजिका पाठ करना हो, श्री सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के बीच में जो पूरा मंत्र आता है — कुंजिका का महानव मंत्र — उसे केवल मन में पढ़ना चाहिए, बोलकर नहीं, चिल्लाकर नहीं। वे कहते हैं, जो माइक पर इसे पढ़ते हैं, उन्हें छोड़िए; वह उनका विषय है।

53

क्या उस सही ज्ञान पर चलना गलत है जो गुरु ने नहीं दिया?

वे गुरु जो अपने नीति नियम से सब कुछ नहीं बताते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 25:35–26:20 · Also a question

वे कहते हैं, दीक्षा देने वाले सभी गुरु ये बातें मन-मुताबिक नहीं बताएँगे; वे अपने आचरण के नियमों से चलते हैं और इतना नहीं कहते। वह अलग मत है। पर अगर कहीं से भी सही ज्ञान आप तक पहुँच रहा है, जो मत के अनुसार है और जिससे हमारा भला होता है, तो उसमें कोई दोष नहीं — ऐसा नहीं कि गुरु कहेंगे तभी करेंगे। अगर संदेह हो, तो अपने गुरु से पूछिए।

54

अगर कोई गुरु द्वेष से सारी साधना को झूठा कह दे तो?

बलाद कृष्ण मोहाय — भगवती ने मोह में बाँध दिया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 26:21–27:11 · Also a question

अगर उसके बाद गुरु द्वेष से कहें कि सब झूठ है, सब पाखंड है, सब बेकार है, कुछ भी सच नहीं, ये लोग बस दिखावा कर रहे हैं — तो वक्ता कहते हैं, इतना ही कहा जा सकता है: बलाद कृष्ण मोहाय, भगवती ने उन्हें बलपूर्वक पकड़कर मोह में डाल दिया है। वे बड़े तपस्वी हों, बड़े तंत्र साधक हों, दिव्य साधनाएँ जानते हों, पर यही सब कारण है कि जगदंबा ने उन्हें ऐसे भ्रम में डाल दिया है कि उन्हें अपने सिवा सब झूठे और पाखंडी लगते हैं।

55

जगदंबा धन के साथ क्या देती हैं, और क्या रोक लेती हैं?

वह कलेजा जो हर साधक को नहीं मिलता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 28:05–29:05 · Also a question

जब जगदंबा आपको किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ाने लगेंगी, तो धन, मान और प्रतिष्ठा देंगी — पर वक्ता कहते हैं, याद रखिए कि क्या उसके साथ वे आपको कलेजा भी दे रही हैं: गरीबों और दुखियों की मदद करने का, अपने से कम जानने वालों के पीछे खड़े होकर उन्हें आगे बढ़ाने का, जिसने आपसे द्वेष रखा उसके भी कल्याण की बात करने का, धन से, वाणी से या शरीर से सहायता करने का। यह कलेजा जगदंबा हर साधक को नहीं देतीं।

56

जिसे धन तो मिले पर वह कलेजा न मिले, उसका क्या होता है?

जितना धन आता है, उतना वह कंजूस होता जाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 29:06–30:01 · Also a question

जितना धन उसके पास आता है, उतना वह कंजूस होता जाता है — कम खर्च करो, बचाओ, इसे एक लाख करो, दस लाख करो, पचास लाख करो। वे देती जाती हैं, और वह और कंजूस होता जाता है। वक्ता कहते हैं, यही माया है; वे उसे बाँध देती हैं।

वे कहते हैं, जितना धन उसके पास आएगा, उतना वह कंजूस होता जाएगा। कम खर्च करें, बचाएँ; इसे एक लाख करें, दस लाख करें, पचास लाख करें। वे दे रही हैं, और ज़्यादा दे रही हैं, और वह और कंजूस होता जा रहा है। यही माया है; वे उसे बाँध देती हैं।

57

साधक किन चरणों की परीक्षा से गुज़रता है?

पहले बढ़े हुए दुख से, फिर सुख से परीक्षा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 30:02–30:48 · Also a question

वे पिछले एक लाइव का ज़िक्र करते हैं, जिसमें उन्होंने परीक्षा के स्तर बताए थे: पहले, जब हम कष्ट में होते हैं, तो कष्ट और बढ़ाया जाता है और वही परीक्षा होती है; जब हम उससे निकलते हैं, तो सुख दिया जाता है, और फिर सुख की माया से परीक्षा होती है। ऐसे सुख दिए जाते हैं कि आपको लगेगा किसी भी तरह साधना छोड़ दी जाए।

58

शक्तिपीठ पर भक्त का अपमान हो तो क्या होता है?

जो आया है, वह भगवती में समाया है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 30:49–31:16 · Also a question

आप जिस जगदंबा के पास गए हैं, उनके प्रति आपकी श्रद्धा को परखा जाता है। चोट उसी पर पड़ती है। अपमान करने वाले लोग कहीं न कहीं भ्रम में हैं। ऐसा नहीं कि उन्हें दंड नहीं मिलता। क्योंकि वहाँ पहुँचा सेवक स्वयं भगवती में समाया है। वह उन्हीं का रूप बनकर पहुँचा है।

59

मंदिर में काम करने वाले सेवक की स्थिति क्या है?

स्वामिनी के घर में वेतन पाने वाला सेवक, मालिक नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 31:17–31:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं, आप स्वामिनी के घर में सेवक हैं और आपको वेतन मिल रहा है। आपकी मज़दूरी, आपका पारिश्रमिक जगदंबा दे रही हैं। आप करोड़पति हों या अरबपति, सोने-चाँदी में खेल रहे हों — उन्होंने आपकी क्षमता और योग्यता के अनुसार दिया है। पर आप फिर भी उनके सेवक हैं। आप खुद को सेवक कहते हैं। जब आप उस जगह खुद को मालिक मान लेते हैं और उसे हथियाने का काम शुरू करते हैं, तब मुसीबत शुरू होती है।

60

दिल्ली के प्राचीन बटुक भैरव मंदिर के सेवक मंदिर को अपना कहने लगे।

दिल्ली का प्राचीन बटुक भैरव मंदिर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 31:54–32:24

वक्ता याद करते हैं कि पिछले लाइव में उन्होंने बताया था कि दिल्ली के प्राचीन बटुक भैरव मंदिर के सेवक क्या करते हैं। वे कहने लगे: यह मेरा मंदिर है, जो मैं चाहूँगा वही होगा, बस। वे कहते हैं, जब कोई ऐसी बात कहे, तो समझिए कि उसका वह समय शुरू हो गया है जो नहीं आना चाहिए था। उसके पतन की शुरुआत हो चुकी है।

61

जमा धन रातों-रात नहीं जलता; घटने का क्रम शुरू होते ही वह रिसने लगता है।

अचानक जलना नहीं, धीरे-धीरे रिसना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 32:25–33:18

वक्ता कहते हैं, जिसने इतना धन जमा किया है, वह कल ही जलकर राख नहीं होगा। वह बैंक में पड़ा है, और बैंक बंद नहीं होगा। पर वह रिसेगा। उसके घटने का क्रम बना रहेगा, और शुरू हो जाएगा। वाणी ही बता देगी कि उनके पतन का समय आ गया है। और माध्यम किसे बनाया गया? आपको, भक्त को। भक्त भगवान का रूप है। भक्त को, यानी खुद को ही, माध्यम बनाकर वे उनका विनाश शुरू करती हैं।

62

भक्त का अपमान असल में किस पर पड़ता है?

उँगली स्वयं स्वामिनी पर उठती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 33:19–33:50 · Also a question

वे स्वामिनी हैं, वे स्वामी हैं। आप उनके सेवक हैं। जो व्यक्ति आया है, वह स्वामिनी के घर आया है, आपके घर नहीं। जब आप उसका अपमान करते हैं, तो दुखी कौन होता है, पीड़ा किसे होती है, अपमान किसका होता है, उँगली किस पर उठती है? उस स्वामिनी पर उठती है।

63

दुख में की गई पुकार जल्दी क्यों पहुँचती है?

दुख में एकाग्रता सुख से कहीं अधिक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 33:51–34:29 · Also a question

सुख में भाव शायद उस स्तर पर उनके चरणों तक न पहुँचे। पर जब आप कष्ट में हों, दुखी हों, उदास हों, तब आपका सीधा जुड़ाव उनके चरणों से हो जाता है। जब आप कष्ट में भगवान या जगदंबा को पुकारते हैं, तो आपकी एकाग्रता सुख की एकाग्रता से कई गुना अधिक होती है।

64

जो देवता के सबसे निकट हैं, क्या उन्हें क्षमा मिलती है?

जितना बड़ा पद, उतनी बड़ी ज़िम्मेदारी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 34:30–35:12 · Also a question

जितना बड़ा पद, जितनी उनसे निकटता, उतनी बड़ी ज़िम्मेदारी। और जहाँ गलती होती है, वहाँ क्षमा नहीं होती। वक्ता कहते हैं, वह मिलती नहीं। यह अनुभव की बात है, पर लोग सोचते हैं कि यह-वह कर लेने से बात निपट जाएगी।

65

सेवक से अपमानित अतिथि अपनी शिकायत घर के मालिक तक ले जाता है।

अतिथि, सेवक और घर का मालिक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 35:13–35:44

आप जिसके घर अतिथि बनकर जाएँ, अगर उस घर का सेवक आपका अपमान करे, तो दुनिया में हँसी किसकी होती है, अपमान किसका होता है? अतिथि कहेगा: मैं आपके घर आया था, देखिए आपका सेवक मेरा अपमान करता है। तब मालिक उस सेवक का क्या करेगा? उसे नौकरी से निकालेगा, बर्बाद करेगा, जितना हो सके दंड देगा।

66

शरणागत भक्त का अपमान देवी के अपने रूप का अपमान क्यों है?

शरणागत के रोम-रोम में उनकी शक्तियाँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 35:45–36:39 · Also a question

जब आप अतिथि, भक्त, दर्शनार्थी बनकर शरण लेकर जाते हैं, तो आपके रोम-रोम में जगदंबा का जितना भाव है, हर रोम से उनका जितना नाम निकलता है, आप जितना समर्पण लेकर जाते हैं — उस समर्पण में उनकी सारी शक्तियाँ उन रोमों में मौजूद रहती हैं। तो उन रोमों से निकलता उनका अपना रूप ही अपमानित होता है। अपमान उनका है, इसलिए स्वामिनी दंड देंगी। वक्ता कहते हैं, वे समझेंगी; यह आपको या मुझे नहीं समझना।

67

नवरात्रि में साधक तीर्थ पर अपने साथ क्या ले जाए?

घर पर की गई साधना और जप साथ जाते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 36:40–37:02 · Also a question

जब आप नवरात्रि में किसी भी तरह साधना या अनुष्ठान करते हैं, जो समर्पण लेते हैं और जो भी जप-तप करते हैं — समझिए कि जब आप तीर्थ स्थान पर, उन दिव्य क्षेत्रों में जाते हैं, तो वह आपके साथ जाता है। और वहाँ उसे ठीक उसी तरह अर्पित करना है।

वक्ता कहते हैं, यह पूरा विषय पकड़ लीजिए। जब आप नवरात्रि में किसी भी तरह साधना और अनुष्ठान करते हैं, जो समर्पण लेते हैं, जो जप-तप करते हैं — तो जब आप तीर्थ स्थान पर जाते हैं, उन दिव्य क्षेत्रों में जाते हैं, तो समझिए वह आपके साथ जा रहा है। और वहाँ उसे ठीक उसी तरह अर्पित करना है।

68

क्या नवरात्रि में साधना रात को करनी चाहिए?

रात्रि की साधनाएँ, और दिन में सोना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 37:03–37:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं, पहला विषय समय का था। नवरात्रि में जितनी हो सके उतनी रात्रिकालीन साधनाएँ करनी चाहिए। इसका मतलब बिल्कुल नहीं कि आप दिन में न सोएँ। दिन में पूरी तरह शरीर की सुविधा के अनुसार सोइए — दो, चार या पाँच घंटे, जितनी ज़रूरत हो।

69

देवी पूजन अधिकतर किस समय मान्य है?

निशीथ-व्यापिनी पूजन, या ब्रह्म मुहूर्त

· Reviewed Sep 14, 2026 · 37:47–38:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं, राम नवमी का विशेष पूजन दोपहर को होता है, तो वह अलग बात है। पर जगदंबा के रूपों की उपासना, देवी पूजन आदि के लिए अधिकतर निशीथ-व्यापिनी पूजन ही मान्य है, या फिर ब्रह्म मुहूर्त।

वक्ता कहते हैं, और राम नवमी का विशेष पूजन दोपहर के समय होता है, तो वह बात अलग है। पर जहाँ तक जगदंबा के रूपों के पूजन, देवी पूजन आदि की बात है, मुख्य रूप से निशीथ-व्यापिनी पूजन ही मान्य है। या फिर ब्रह्म मुहूर्त।

70

सिंह साधना या वीर साधना से उनका क्या अर्थ है?

सिंह की तरह साधना, फैलाए गए डरों से निडर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 38:05–38:44 · Also a question

अगर आप साधक हैं, और खासकर जगदंबा के साधक हैं, तो आपको सिंह साधना करनी है — यानी सिंह की तरह साधना कीजिए, वीर साधना कीजिए। वीर का मतलब है कि फैलाए गए इन सब भ्रमों से आप ज़रा-ज़रा सी बात पर न डरें।

71

क्या पत्नी या प्रेमिका देवी का साक्षात रूप है, जैसा कौल मार्ग दावा करता है?

देवी स्वयं माँग रही हैं, यह दावा और उसका खंडन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 38:45–39:54 · Also a question

वक्ता उदाहरण देते हैं उस नौटंकी का, जो कौल मार्ग के साधकों में चल रही है। वे बार-बार यह बात उठाते हैं कि नवरात्रि हो या कोई और समय, अगर आपकी पत्नी या प्रेमिका है, तो वह देवी का साक्षात रूप है। तो अगर वह उस समय शय्या-सुख माँगे, तो आपको देना चाहिए, क्योंकि देवी कह रही हैं। वे पूछते हैं, इससे बड़ी नीचता क्या होगी? ऐसा अनाचार करने वाला, ऐसी नीच मानसिकता से नवरात्रि में साधना करने वाला, रात को करे या दिन में — अगर उसे दंड न मिले, तो और क्या मिलेगा?

72

जो नवार्ण मंत्र का जप नहीं कर सकता, उसके लिए क्या दिया गया है?

अर्गला का पहला मंत्र, पूरे विनियोग और न्यास के साथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 39:55–40:13 · Also a question

अगर दीक्षा न होने से आप नवार्ण आदि का जप नहीं कर सकते, तो अर्गला का पहला मंत्र पूरी विधि के साथ चैनल पर प्रसारित है — पूरे विनियोग और न्यास के साथ। वक्ता कहते हैं, ऐसा न्यास उन्हें आज तक शायद ही किसी ग्रंथ में मिला है।

73

वे न्यास कहाँ से आए, और उनका उपयोग कौन कर सकता है?

अप्रकाशित पांडुलिपियाँ, गृहस्थ तंत्र परिवार के लिए दी गईं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 40:14–41:11 · Also a question

दुर्गा सप्तशती के तंत्रोक्त ग्रंथों में सातवें और तेरहवें अध्याय का न्यास मिलता है, पर कवच, अर्गला और कीलक के मंत्रों का नहीं। भगवती की कृपा से, ऐसी प्राचीन पुस्तकें और ग्रंथ रखने वाले समर्थ साधकों ने, जो अभी अप्रकाशित हैं, चर्चा के बाद जो उनके पास था वह गृहस्थ तंत्र परिवार के सदस्यों के कल्याण के लिए दिया। वक्ता कहते हैं, आप दीक्षित हों या नहीं, स्त्री हों या पुरुष, जनेऊ पहनते हों या नहीं — कोई कठिनाई नहीं।

74

भगवती की बत्तीस नामावली की चक्र विधि क्या है?

भगवती के बत्तीस नामों की चक्र विधि, उसकी PDF के साथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 41:57–43:09 · Also a question

भगवती की बत्तीस नामावली की चक्र विधि से साधना करने का तरीका चैनल पर प्रसारित है। YouTube पर "32 namavali chakra vidhi grihastha tantra" खोजिए, मिल जाएगा। पूरी PDF भी अपलोड है, ताकि आपको चक्र विधि खुद न बनानी पड़े। उसमें बत्तीस मंत्रों में से हर एक का अपना अलग अनुच्छेद बनाया गया है।

75

विंध्याचल त्रिकोण में पहली बार शत चंडी पाठ हो रहा है।

विंध्याचल त्रिकोण में पहली बार शत चंडी पाठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 43:10–43:33

वक्ता कहते हैं, सप्तशती से जुड़ी कई साधनाएँ चैनल पर प्रसारित हैं, जिन्हें आप स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं, और उनसे जुड़े अनुभव भी वहाँ हैं। अपने आराध्य के प्रति अपने समर्पण को और गति दीजिए। और इस वर्ष, इस चैत्र नवरात्रि में, पहली बार विंध्याचल त्रिकोण में भगवती के शत चंडी पाठ का आयोजन हो रहा है।

76

विंध्याचल को महाशक्तिपीठ और मणि द्वीप क्यों कहा जाता है?

एक महाशक्तिपीठ और मणि द्वीप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 43:34–44:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं, जो लोग नवरात्रि में विंध्याचल के त्रिकोण की परिक्रमा करने जा रहे हैं, वे अपने जीवन का सबसे विशेष काम करने जा रहे हैं — इससे विशेष कुछ नहीं हो सकता। विंध्याचल को महाशक्तिपीठ कहा गया है। यह भगवती का साक्षात रूप है, मणि द्वीप है, जहाँ माँ जगदंबा सृष्टि के आरंभ से नित्य विराजती हैं।

77

भगवती विन्ध्यवासिनी के केवल दर्शन से क्या मिलता है?

हर योनि से छुटकारा, और नित्य पार्षद बनना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 44:08–44:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि केवल दर्शन से हर योनि से छुटकारा मिल जाता है — बस भगवती विन्ध्यवासिनी के दर्शन हो जाएँ। इसका वर्णन दुर्गा कल्पद्रुम जैसे शाक्त मत के ग्रंथों में मिलेगा, और सिद्धों व साधकों के प्रवचनों में भी। जगदम्बा विन्ध्यवासिनी के केवल दर्शन से जीव किसी भी योनि में हो, उसे हर तरह की योनि से मुक्ति मिलती है। वह दुर्गा का नित्य पार्षद बन जाता है।

78

देवी के दर्शन का असली अर्थ क्या है?

उनका दर्शन और उनका दर्शन-भाव आपके भीतर उतरना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 44:47–45:23 · Also a question

जब आप दर्शन करेंगे, तो वे आपके भीतर उतरेंगी। उनका दर्शन, उनका दर्शन-भाव आपके भीतर उतरेगा। आप स्वयं उस रूप को धारण करेंगे — तभी छुटकारा मिलेगा। वक्ता कहते हैं कि ऊपर-ऊपर से देखकर यह कहना कि हमने दर्शन कर लिए, मुक्ति मिल जाएगी — तो वहाँ से यही उत्तर आएगा: अब हम तुम्हें ख़ास तौर पर देखेंगे कि तुम क्या करते हो।

79

एक बार उनके धाम में पैर रखने से क्या होता है?

सदा के लिए उनकी दृष्टि में आ जाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 45:24–45:56 · Also a question

एक बार आप वहाँ चले गए, तो समझ लीजिए कि उनकी दृष्टि सदा आप पर है। आप देखें या न देखें, आपने उनके धाम में पैर रखा है, यानी आप उनकी नज़र में आ गए हैं। अगर आप नियम, निष्ठा और संयम से आगे बढ़ रहे हैं, धर्म के अनुसार आचरण कर रहे हैं, तो वे कभी आपका अहित नहीं होने देंगी।

80

लघु त्रिकोण क्या है, और उसका क्या फल बताया गया है?

मंदिर के भीतर ही तीन कोने

· Reviewed Sep 14, 2026 · 45:57–46:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नवरात्र में त्रिकोण करने वालों को साधारण दिनों से हज़ार गुना फल मिलता है। लघु त्रिकोण मंदिर के भीतर ही होता है। तीन कोनों पर एक जगह भगवती विन्ध्यवासिनी हैं, और बाकी जगहों पर भगवती महाकाली और महासरस्वती। विन्ध्यवासिनी के दर्शन कीजिए। फिर सामने बलिपीठ पर भगवती काली के दर्शन कीजिए। फिर उस पार जाकर भगवती महासरस्वती के दर्शन कीजिए। लौटकर भगवती के दर्शन कीजिए और उनके कुंड का जल पीजिए — आपका त्रिकोण हो गया।

81

विन्ध्याचल के लघु त्रिकोण से क्या फल मिलता है?

सप्तशती के सौ सम्पुट पाठों का फल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 46:25–47:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसका भी पूरा फल है: केवल इतने से सप्तशती के सौ सम्पुट पाठों का फल मिलता है। और सोचिए कितना पाप है — कई पीढ़ियों से लोग अपराध करते आए हैं। आपके माता-पिता, भाई, पत्नी, प्रेमी, बेटे और बेटी का बोझ आप पर है। उसे काटना है, इसलिए समय लगेगा।

82

विन्ध्याचल का मूल त्रिकोण क्या है?

काली खोह में महाकाली, अष्टभुजा, और महाश्मशान में तारा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 47:01–47:59 · Also a question

जब आप मूल त्रिकोण करते हैं, तो यह चार मुख्य मंदिरों के दर्शन हैं। विन्ध्याचल से निकलकर आप सीधे काली खोह पहुँचते हैं — बाकी छोटे स्थान भी सब प्रधान स्थान हैं, पर मान लीजिए आप उन्हें छोड़ देते हैं। आप काली खोह में भगवती महाकाली के दर्शन करते हैं, अष्टभुजा के दर्शन करते हैं, और श्मशान में, महाश्मशान में विराजमान भगवती तारा के दर्शन करते हैं। फिर भगवती विन्ध्यवासिनी के मंदिर लौटकर वहाँ उनके दर्शन करते हैं। यही मूल त्रिकोण है।

83

बृहद् त्रिकोण में कितना समय लगता है, और यह कहाँ से होकर जाता है?

गिरवा तालाब, मुक्तेश्वर महादेव, और बजरंग तंत्र स्थान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 48:00–49:02 · Also a question

काली खोह से ऊपर चढ़कर, गिरवा तालाब पर भगवान श्री कृष्ण और साक्षी गोपाल जी के दर्शन करके, आप मुक्तेश्वर महादेव जाते हैं। ऋण मुक्तेश्वर महादेव के पास से विन्ध्य पर्वत पर बजरंग तंत्र स्थान का रास्ता है, जहाँ प्राचीन काल से श्री हनुमान जी साक्षात् रूप में विराजमान हैं। अभ्यास वालों को कम से कम बारह घंटे लगते हैं, नए लोगों को सोलह, और कुछ को चौबीस तक। आज भोर में शुरू करें, तो बृहद् त्रिकोण कल भोर में पूरा होता है।

84

नंदजा पर्वत और अष्टभुजा के रास्ते में क्या-क्या है?

तंत्रात्मक स्थान, सीताकुंड, भैरव कुंड, मच्छिंद्र कुंड

· Reviewed Sep 14, 2026 · 49:03–50:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उस रास्ते पर और भी कई विशेष तंत्रात्मक स्थान हैं, जिनका वर्णन कोई साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता। उनके दर्शन करके आगे नंदजा पर्वत जाते हैं। वह बहुत दूर है, और पैदल जाने में हालत ख़राब हो जाती है। नंदजा से लौटकर अष्टभुजा आते हैं। फिर मुक्तेश्वर महादेव वाले रास्ते पर थोड़ा आगे जाते हैं। सीताकुंड के रास्ते ऊपर चढ़कर अष्टभुजा माई के दर्शन करते हैं, फिर भैरव कुंड और मच्छिंद्र कुंड।

85

बृहद् त्रिकोण के श्मशान घाट वाले हिस्से में क्या है?

श्मशानेश्वर महादेव, महाश्मशान भैरव और तारा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 50:09–51:03 · Also a question

वहाँ से लौटकर, भैरव कुंड, मच्छिंद्र कुंड और मंगला गौरी होते हुए श्मशान घाट पहुँचते हैं। श्मशान घाट पर श्मशानेश्वर महादेव हैं, श्मशानेश्वर के महाश्मशान भैरव हैं, और वहाँ विराजमान देवता हैं। भगवती जगदम्बा महामाई तारा का पूजन करके लौटते हैं। फिर संकटा माँ, शीतला माँ और बड़े हनुमान जी के दर्शन करते हुए विन्ध्य पर्वत के शिखर पर भगवती विन्ध्यवासिनी के पास आते हैं।

86

विन्ध्याचल में कितने तंत्र स्थान हैं, और वे किसके सामने प्रकट होते हैं?

साठ-पैंसठ स्थान, जो कुछ ही साधकों के लिए खुलते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 51:04–52:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इनके अलावा लगभग साठ-पैंसठ दिव्य स्थान हैं, जो पूरी तरह तंत्र पीठ, तंत्र स्थान हैं। वे अपने आप केवल उसी को पता चलते हैं जो जगदम्बा के मंत्रों का पुरश्चरण कर रहा है या एक स्तर तक कर चुका है — जिसका जप एक तरह से करोड़ों में पहुँच गया हो। जिसने एक सौ आठ से अधिक त्रिकोण पूरे किए हों, जिसका मन शांत हो गया हो, जो अपने गुरु और मार्गदर्शक के प्रति समर्पित हो, और जिसमें द्वेष, जलन और ईर्ष्या न हो। वे कहते हैं कि काम और क्रोध तो निकल सकते हैं, पर द्वेष बहुत विनाशकारी है।

87

पहाड़ी पर चढ़ने का बीच वाला रास्ता, जिस पर तांत्रिक रात में जाते थे, अब मोड़ दिया गया है।

मोड़ा गया रास्ता, जिस पर तांत्रिक रात में जाते थे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 52:11–52:49

मुक्तेश्वर महादेव को छोड़ दें तो यह मूल त्रिकोण बन जाता है। उसके बाद अगर लोग कंकाल काली के दर्शन को जाते हैं — कई लोग नंदजा पर्वत से लौटते हुए कंकाल काली होकर अष्टभुजा जाते हैं — तो वह भी ठीक है। गंगा जी के घाट से पहाड़ी चढ़ने वाला बीच का रास्ता अब हर किसी के लिए संभव नहीं है। बहुत तोड़-फोड़ हुई है और लोगों ने रास्ता मोड़ दिया है, क्योंकि वह मुख्य रास्ता नहीं, साधकों का रास्ता था। उस ओर की यात्रा ज़्यादातर रात में होती थी, और अब भी होती है; बस रास्ता थोड़ा बदल गया है।

88

नवरात्र में एक त्रिकोण करने से क्या फल मिलता है?

श्री दुर्गा सप्तशती के हज़ार सम्पुट पाठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 52:50–53:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप कोई भी त्रिकोण करें, यह समझ लीजिए: नवरात्र के दिनों में एक त्रिकोण करने का सीधा अर्थ है कि आपको श्री दुर्गा सप्तशती के हज़ार सम्पुट पाठों का फल मिलता है।

89

शिखर पर सोने की पताका और सिंह ध्वज के दर्शन से भगवती के दर्शन का पूरा फल मिलता है।

स्वर्ण ध्वजा, और एक स्थान जो अभी तय होना है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 54:00–54:31

अगर शिखर पर लगी सोने की पताका, स्वर्ण पताका, वहाँ लगे सिंह ध्वज के दर्शन हो जाएँ, तो भगवती के दर्शन का पूरा फल मिलता है। और ऐसे समय में, इस त्रिकोण के बीच के क्षेत्र में, एक विशेष स्थान पर, एक तंत्र पीठ पर — स्थान अभी सौ प्रतिशत तय नहीं हुआ, कल-परसों तक तय होगा — विन्ध्याचल के उन्हीं स्थानों में से एक पर पहली बार श्री भगवती का सम्पुट शत चंडी हो रहा है।

90

हृदय त्रिकोण क्या है, जिसे सबसे बड़ा कहा गया है?

विन्ध्याचल, कामरूप कामाख्या और कन्याकुमारी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 54:32–55:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शाक्त परंपरा के अनुसार भारत का सबसे बड़ा त्रिकोण हृदय त्रिकोण कहलाता है। इसे केवल परम शाक्त कर सकते हैं — जिन्हें भगवती की अनन्य कृपा पूरी तरह मिल चुकी है, वही यह त्रिकोण पैदल कर सकते हैं। यह भगवती विन्ध्यवासिनी के स्थान से कामरूप कामाख्या, कामरूप कामाख्या से कन्याकुमारी, और कन्याकुमारी से फिर विन्ध्याचल पीठ तक है। इसे आप ट्रेन से, बस से या अपने वाहनों से कर सकते हैं। वे कहते हैं कि इसके फल का वर्णन नहीं हो सकता।

91

खेचर सिद्धि क्या है, और यह काली खोह वाले रूप से कैसे जुड़ी है?

काली खोह में खेचरी मुद्रा में विराजमान जगदम्बा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 55:39–56:01 · Also a question

और विन्ध्याचल में, काली खोह में, जगदम्बा का रूप खेचरी मुद्रा में विराजमान है। इन दोनों रूपों की कृपा से जो साधक खेचर सिद्धि पाते हैं, वे सिद्धों की, महासिद्धों की श्रेणी के होते हैं, जो यह त्रिकोण रोज़ करते हैं। और जब आप एक सौ आठ त्रिकोण पूरे करते हैं, चाहे मूल त्रिकोण ही, तब यह होता है।

92

ऐसे साधक दिव्य कृपा दिखाने लगते हैं; उनकी माया आगे-पीछे चलकर अनुभव कराने लगती है।

दिव्य कृपा का प्रकट होने लगना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 56:02–57:10

यही वे साधक हैं जो ख़ास तौर पर अपनी दिव्य कृपा दिखाने लगते हैं — या वक्ता कहते हैं, ऐसे कहिए: फिर उनकी माया आपके आगे-पीछे चलने लगती है और आपको अनुभव कराने लगती है।

वक्ता कहते हैं कि यही वे साधक बनते हैं जो ख़ास तौर पर अपनी दिव्य कृपा दिखाने लगते हैं। या ऐसे कहिए: फिर उनकी माया आपके साथ आगे-पीछे घूमने लगती है, और आपको अनुभव कराने लगती है।

93

पहले ही त्रिकोण में दिव्य अनुभव किसे होता है?

जो साधना में पहले से घिस चुके हैं, और यह भ्रम क्यों नहीं है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 57:54–58:40 · Also a question

जो पहले से साधनाएँ कर रहे हैं, जिन्होंने साधना में ख़ुद को पहले ही घिस दिया है — अपना तन, अपना मन, और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार अपनी गरीबी भी प्रसाद के रूप में अर्पित कर दी है — ऐसे समर्पित साधकों को पहले ही त्रिकोण में दिव्य अनुभव होगा। पहले ही त्रिकोण में वे समझ जाएँगे कि पूरे त्रिकोण में क्या व्यवस्था है, क्या प्रणाली है, और कहाँ कौन-सी शक्ति किस तरह कृपा कर सकती है।

94

क्या नवरात्र में अखंड ज्योत जलाना ज़रूरी है?

अनुष्ठान के समय तक कर्म साक्षी दीप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 59:09–59:46 · Also a question

नवरात्र में अखंड ज्योत जलाना ज़रूरी है या नहीं, इस प्रश्न पर वक्ता उत्तर देते हैं कि अगर आप नहीं जला सकते तो कोई दिक्कत नहीं। बस कर्म साक्षी दीप जलाइए, और जितने समय आप अनुष्ठान करेंगे, उतने समय अखंड ज्योत जलाए रखिए।

वक्ता कहते हैं कि एक प्रश्न यह है: क्या नवरात्र में अखंड ज्योत जलाना ज़रूरी है? अगर आप नहीं जला सकते, तो कोई दिक्कत नहीं। बस कर्म साक्षी दीप जलाइए। जितने समय आप अनुष्ठान करेंगे, उतने समय अखंड ज्योत जलाइए।

95

अखंड ज्योत किसे बिल्कुल नहीं जलानी चाहिए?

नियम कि इसे कभी अकेला न छोड़ा जाए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 59:47–1:00:41 · Also a question

ख़ास तौर पर वे लोग जो अकेले रहते हैं और जिन्हें अपना स्थान छोड़कर अलग-अलग जगह जाना पड़ता है — अखंड ज्योत का यह भी नियम है कि उसे कभी अकेला न छोड़ें। यह जगदम्बा का साक्षात् रूप है; उन्हें अकेला छोड़कर घर से, स्थान से नहीं जाना है। घर पर कोई न कोई रहेगा। इसलिए जो अकेले हैं, उन्हें इस तरह यह नहीं करना चाहिए।

96

तंत्र का विषय पूरी तरह पुस्तकों में क्यों नहीं मिलता?

तंत्र आगम है, श्रुति और स्मृति है, परंपरा में सुनकर दिया जाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:00:42–1:01:47 · Also a question

एक बात वे हमेशा देखते हैं: जो पूरी तरह व्यवस्थित किताबी तांत्रिक हैं, जो पुस्तक के एक-एक अक्षर पर चलते हैं। श्रुति और स्मृति की जो बात कही गई है — तंत्र का विषय, आगमोक्त विषय, श्रुति और स्मृति का विषय है, अपनी परंपरा में सुनने और देने का विषय है। लिखित बाद में आया। हजारों बातें लिखित में नहीं हैं, और जो लिखित में हैं, वे भी अपनी परंपरा में ही सुरक्षित हैं।

97

रजस्वला के प्रश्न पर पराशर सूत्र क्या कहता है?

एक लिखित सिद्धांत, जिसके होने से लोग इनकार करते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:01:48–1:02:46 · Also a question

वे रजस्वला के विषय को उदाहरण बनाते हैं: YouTube पर ऐसे लोगों के बहुत वीडियो मिलते हैं जो स्वयं को जबरदस्त, परम, सिद्ध तांत्रिक मानते हैं। इसी से पता चलता है कि उनकी मानसिकता किस स्तर की है और उनके पास कितनी सिद्धि होगी। वे कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति अनुशासन से चल रहे व्यक्ति की नाव भी डुबा देगा। ऐसे लोग कहते हैं कि रजस्वला के बारे में कहीं कोई लिखित सिद्धांत नहीं है — पर लोगों ने कई जगह प्रमाण दिया है कि लिखा है: व्यास मुनि के पिता पराशर मुनि जी के पराशर सूत्र आदि में पूरा वर्णन है कि जब स्त्री रजस्वला हो, उस समय वह पूजन और पाठ नहीं करेगी।

98

रजस्वला अवस्था में पाठ करने का क्या परिणाम होता है?

वह दोष जो स्त्री और उसके वंशज भोगते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:03:11–1:03:59 · Also a question

वे कहते हैं कि यह बात कोई भी संत, सिद्ध या महात्मा कह रहा हो, उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका विनाश किस तरह होगा। जब आप रजस्वला होकर पाठ करती हैं, तो सभी पितरों को कष्ट होगा, लोक-देव शक्तियों को कष्ट होगा; आप स्वयं अग्नि स्वरूप हैं, और वहाँ वायु स्वरूप और जल तत्त्व की शक्तियाँ भी हैं — उस स्पर्श से इन सबको जो कष्ट होता है, वह दोष बनकर लगता है। वह दोष आपको भोगना पड़ता है, आपके वंशजों को भोगना पड़ता है, आपके बेटों-पोतों को भोगना पड़ता है। वे कहते हैं कि फिर यही भुगतने वाले टिप्पणियों में चिल्लाने लगते हैं कि हमने तो कोई अपराध किया ही नहीं, फिर हम क्यों भुगत रहे हैं।

99

स्त्री के रजस्वला होने पर घर की सारी पूजा रोक देना दूसरी अति है।

पूरे घर का पूजा ऐसे बंद कर देना मानो सूतक लगा हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:04:00–1:04:14

वे कहते हैं कि ठीक इसी तरह कुछ लोगों ने रजस्वला के लिए बिल्कुल अलग ही स्थिति बना दी है: कि आप रजस्वला हैं तो आपके घर में कोई पूजा होगी ही नहीं। या तो इस तरफ रहो या उस तरफ, पर मूल विषय पर मत रहो। उस घर की एक माँ या एक बहन रजस्वला हुई है — एक व्यक्ति, एक स्त्री। उसका पति तो रजस्वला नहीं हुआ; वह पूजन-पाठ क्यों छोड़े, और पूरा परिवार सारी पूजा ऐसे क्यों बंद कर दे मानो सूतक लग गया हो?

100

स्त्री के रजस्वला होने पर घर को किन नियमों का पालन करना चाहिए?

स्पर्श नहीं, उसके हाथ का भोजन नहीं, नैवेद्य दूर से अर्पित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:04:15–1:05:15 · Also a question

वे कहते हैं कि उस हिसाब से तो अगर घर में एक सास और दो-चार बहुएँ हों, तो भगवान को हमेशा के लिए विदा करना पड़ेगा। जहाँ चार-पाँच स्त्रियाँ हों, वहाँ हर सप्ताह कोई न कोई रजस्वला होगी, तो पूजा कहाँ से होगी? उनके नियम: उसका स्पर्श न हो; उसके हाथ का भोजन खाए बिना सेवा-पूजा करें, और अगर खा रहे हैं तो स्नान करके, शुद्ध होकर, साफ वस्त्र पहनकर करें; पूजा स्थान की कोई वस्तु वह न छुए; उसका दिया जल या फूल इस्तेमाल न करें; अगर वह भोजन बना रही है, तो नैवेद्य भगवान के सामने ले जाएँ पर हाथ में थमाने के बजाय दूर से अर्पित करें। और अगर आपको मत्स्य मुद्रा दिखाना और अमृतीकरण की विधि आती हो, और प्राणायाम का पूरा विधि-विधान आता हो, तो दोष का निवारण भी हो जाता है।

101

साधना के दौरान कोई बच्चा या लड़की पुकारे तो इसका क्या अर्थ है?

अनदेखा करें और साधना में लगे रहें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:06:49–1:07:30 · Also a question

किसी ने पूछा कि साधना के दौरान एक बार एक छोटे बच्चे ने पुकारा और आज एक लड़की ने पुकारा, इसका क्या अर्थ है और इसे कैसे समझें। वे कहते हैं: इसका कोई अर्थ मत निकालिए; अनदेखा कीजिए और अपनी साधना में लगे रहिए। जिसे आपके सामने आना है, वह आएगा। बहुत कुछ होता है — आसपास की वायवीय चीज़ें हो सकती हैं, घर की चीज़ें हो सकती हैं; शुभ भी हो सकता है और अशुभ भी, यह ऐसे ही नहीं कहा जा सकता। पर अगर हो रहा है, तो खुश रहिए कि किसी को फर्क पड़ रहा है।

102

साधना में आने वाले अनुभवों पर साधक कैसी प्रतिक्रिया दे?

प्रतिक्रिया के बिना अवलोकन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:07:31–1:08:04 · Also a question

भूत-प्रेत आएँ या देवी-देवता आएँ, आपका अनुभव अच्छा हो या बुरा — अगर होने लगा है, तो समझिए कि आपकी साधना ने कहीं न कहीं पारलौकिक गतिविधियों में दखल दिया है, आप मायने रखते हैं, आप उनकी नज़र में हैं। इसका आनंद लीजिए, घबराइए मत, डरिए मत, भागिए मत। अनदेखा करने का अर्थ ध्यान न देना नहीं है: आप ध्यान देंगे, पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे; आपको पूरी तरह तटस्थ रहना है। अनुभव पर कभी प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए — चुपचाप अवलोकन कीजिए, यही अवलोकन आपको आगे ले जाएगा।

103

सपने में पिता की मृत्यु और माँ को बिना सिंदूर देखने का क्या उपाय है?

माता-पिता का, विशेषकर पिता का, तुलादान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:08:05–1:08:56 · Also a question

किसी ने पूछा कि सपने में पिता की मृत्यु और माँ को बिना सिंदूर देखा हो तो क्या उपाय है। वे उत्तर देते हैं कि सबसे पहले जितनी जल्दी हो सके माता-पिता का, और विशेषकर पिता का, तुलादान करवाना चाहिए।

वे प्रश्न पढ़ते हैं: सपने में अपने पिता की मृत्यु और अपनी माँ को बिना सिंदूर देखने का क्या उपाय है? वे कहते हैं कि अगर सपने में ऐसी बात हुई है, तो पहला काम यह करना चाहिए कि जितनी जल्दी हो सके अपने माता-पिता का तुलादान करवाइए। विशेषकर पिता का तुलादान करवाइए।

104

उस तुलादान के साथ कौन सा अनुष्ठान बताया गया है?

महामृत्युंजय कवच, हनुमान चालीसा या रुद्राभिषेक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:08:57–1:09:22 · Also a question

पिता के लिए महामृत्युंजय कवच का, या हनुमान चालीसा का, या जो भी आपके आराध्य हों उनके कवच का अनुष्ठान कीजिए या करवाइए। अगर उस तरह का कोई सक्षम विद्वान मिल जाए, तो महामृत्युंजय का लघु अनुष्ठान ही करवा लीजिए — पर करवाइए ज़रूर। या रुद्राभिषेक करवाइए, ताकि अल्पायु दोष आदि नष्ट हों।

105

बलि के लिए कौन सा जायफल लें, और उसे कैसे काटें?

छिलका उतरा जायफल, और तेज़ चाकू से एक ही वार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:09:23–1:10:01 · Also a question

किसी ने पूछा कि बलि में कौन सा जायफल देना है। वे कहते हैं कि बिना छिलके वाला जायफल, जो बड़ी सुपारी जैसा होता है। हरड़ की बात करने वाले से वे कहते हैं: हरड़ की बलि देने के बजाय जायफल की बलि दीजिए। ऊपर का छिलका उतारिए — उसे कूटिए मत। वे एक श्रोता का किस्सा बताते हैं जिसने वीडियो भेजा कि बलि के लिए जायफल कट नहीं रहा: वह धीरे-धीरे रेतता रहा, छिलका लगा होने से कटा नहीं, तो उसने लोढ़े से कूट दिया और पूछा, क्या यह भी बलि नहीं है। उन्होंने कहा, जय हो भगत जी — पहले उसका ऊपर का छिलका तोड़िए, जायफल निकल आएगा।

106

जायफल कैसे काटें, और बलि और किस तरह दी जा सकती है?

तेज़ चाकू का एक पक्का वार, या अग्नि बलि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:10:02–1:10:47 · Also a question

ज़रूरी नहीं कि जायफल पानी में भिगोने पर ही कटेगा: अगर आपके पास तेज़ चाकू है, तो उसे जायफल पर रखिए और हाथ से ज़ोर से एक ही वार कीजिए, वह दो टुकड़ों में हो जाएगा। बलि वैसे भी त्रिकोण और वैसा मंडल बनाकर दी जा सकती है; और नहीं तो अग्नि जलाकर उसमें जलाकर भी दी जा सकती है — वे कहते हैं कि अग्नि बलि सबसे दिव्य और अद्भुत है।

107

जगदंबा के अभिषेक और श्रृंगार से क्या फल मिलता है?

जितना श्रृंगार करेंगे, उतना वे आपका जीवन सँवारेंगी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:10:48–1:11:27 · Also a question

वे कहते हैं कि जगदंबा का अभिषेक कीजिए: जितना श्रृंगार करेंगे, उतना वे आपका जीवन सँवारेंगी — क्योंकि श्री देवी भागवत महापुराण पढ़ने पर आपको वर्णन मिलेगा कि जगदंबा की सेवा में किए गए हर काम का क्या फल है, चाहे फूलों का श्रृंगार हो, श्रृंगार सामग्री चढ़ाना हो, फूल चढ़ाना हो या वस्त्र चढ़ाना हो। और अर्चन भी कीजिए, चाहे सत्ताईस या अट्ठाईस नामों से, बत्तीस से, एक सौ आठ से या एक हज़ार आठ नामों से; अर्चना जगदंबा को अत्यंत प्रिय है।

108

एक सामान्य गृहस्थ साधक को किसे पकड़े रहना चाहिए?

सप्तशती, हिंदी में पढ़ी जाए, योग्यता के संकल्प के साथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:11:28–1:12:06 · Also a question

स्तुति भी उन्हें प्रिय है: जितना हो सके श्री दुर्गा सप्तशती और श्री चंडी पाठ कीजिए — सप्तशती जगदंबा का हृदय ही है, और माई की सबसे बड़ी प्रसन्नता इसी से होती है। YouTube पर बहुत से बड़े तांत्रिक मिलते हैं जो कहते हैं कि पहले वे सप्तशती करते थे, बाद में छोड़ दी, फिर यह-वह किया, तांत्रिक सिद्धि पाई, फिर श्मशान — वे कहते हैं कि वह उनका निजी मामला हो सकता है। सामान्य गृहस्थ साधक सप्तशती जी को पकड़कर चलते रहें, और हिंदी में ही करें।

109

जगदंबा को कौन सी आहुतियाँ सबसे प्रिय हैं?

नवग्रह समिधा, बेल की लकड़ी और गोबर के कंडे, घी या गुग्गल के साथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:12:07–1:12:41 · Also a question

वे कहते हैं कि मन में भाव रखिए, माँ ज़रूर सुनेंगी और पूरा भी करेंगी। नवग्रह समिधा, बेल की लकड़ी, और गोबर के कंडे-उपलों पर घी से, या गुग्गल और घी से आहुति जगदंबा को विशेष रूप से प्रिय है। जायफल आदि की आहुति के बारे में वे कहते हैं कि यह तंत्रोक्त विधि-विधान है और जायफल आदि का हवन सामान्यतः बिना आदेश के बहुत नहीं करना चाहिए — पर यह जगदंबा को अत्यंत प्रिय है; जब आहुति अग्नि में पड़ती है, तो भगवती स्वाहा अत्यंत प्रसन्न होती हैं।

110

भगवती का अनन्य प्रिय कौन बनता है?

कोई प्रिय या अप्रिय नहीं, फिर भी इन कर्मों को करने वाला प्रिय है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 1:12:42–1:13:02 · Also a question

नवरात्र में आप जो भी कर्म कर रहे हैं, ये सब कर्म जगदंबा को प्रिय हैं, और जो नवरात्र व्रत रखकर ये सब अनुष्ठान करता है, वह उनका अनन्य प्रिय बन जाता है। एक ओर भगवती गीता में कहती हैं कि मुझे न कोई प्रिय है न अप्रिय — पर वे कहते हैं कि जान लीजिए, वही श्रीमद् भागवत में कहती हैं कि जो इस प्रकार मेरी पूजा और अनुष्ठान, श्रृंगार, स्तुति, हवन आदि करता है, वह मेरा अनन्य प्रिय बन जाता है।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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