भाद्रपद तिथि दर तिथि — देवी जयंती, हल षष्ठी, जन्माष्टमी, अघोर चतुर्दशी

भाद्रपद की तिथियों का कैलेंडर, और उसके बाद विस्तृत प्रश्नोत्तर।

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Questions this answers

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01

भाद्रपद किस दिन से शुरू होता है?

भाद्रपद कृष्ण द्वितीया — देवी जयंती

· 03:50–04:15 · Also a question

हल षष्ठी आ रही है। और आज ही योग माया जयंती है, भगवती माँ विंध्यवासिनी की जयंती। यह अनादि काल से विराजमान आदि शक्ति विंध्यवासिनी की नहीं, बल्कि उनके अवतरण की जयंती है। कुछ विशेष स्थानों पर इसे भाद्रपद कृष्ण द्वितीया को देवी जयंती के रूप में मनाया जाता है।

02

वे माँ यशोदा के गर्भ से जन्म लेंगी, विंध्याचल पर्वत पर निवास करेंगी और असुरों का नाश करेंगी।

यशोदा से जन्म और विंध्य पर निवास की भविष्यवाणी

· 04:16–04:49

कि वैवस्वत मन्वंतर में मैं माँ यशोदा के गर्भ से जन्म लूँगी, विंध्याचल पर्वत पर निवास करूँगी और असुरों का नाश करूँगी। कौन से असुर, यह पढ़ने पर आप समझ जाएँगे। यानी यह पहले से तय था।

03

जो देवी अनादि काल से हैं, उनकी जयंती क्यों होती है?

हज़ारवाँ अंश अवतरित हुआ, नौ में से तीन भागों में बँटा

· 04:50–05:30 · Also a question

क्योंकि कहा जाता है कि वे अंश रूप में प्रकट हुईं। उनकी हज़ार कलाओं में से एक कला, इतने अंश में वे अवतरित हुईं, और उसे भी तीन भागों में बाँटा। असल में वे नौ भागों में बँटी हैं। उस हज़ारवें अंश के बाकी छह भाग आम तौर पर लोग नहीं जानते।

04

यशोदा से जन्मी भगवती अष्टभुजा, कंस के पटकने पर आकाश मार्ग से विंध्याचल चली गईं।

यशोदा से जन्मा अष्टभुजा रूप, जिस पर कंस ने प्रहार किया

· 05:31–05:56

भगवती अष्टभुजा — जिनका जन्म माँ यशोदा के गर्भ से हुआ। जब कंस उन्हें पटकने गया, तो वे कृष्ण के जन्म की भविष्यवाणी करके आकाश मार्ग से विंध्याचल में अपने आदि शक्ति रूप में चली गईं।

05

उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण द्वितीया को हुआ, और बाकी दो रूप हैं जगन्नाथ पुरी में सुभद्रा और दिल्ली में योग माया।

भाद्रपद कृष्ण द्वितीया, और पुरी व दिल्ली के रूप

· 05:57–06:50

उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण द्वितीया को, यानी आज, हुआ — भगवान कृष्ण की बड़ी बहन के रूप में, अष्टभुजा रूप में। दूसरा रूप जगन्नाथ पुरी में भगवती सुभद्रा का है, विमला शक्तिपीठ के पास। तीसरा भगवती योग माया का है, जिनका मंदिर दिल्ली में है।

06

हल षष्ठी क्या है, और उस दिन गुरु के बिना क्या लिया जा सकता है?

जहाँ गुरु न मिले, वहाँ हल षष्ठी पर स्वयं ली जाने वाली दीक्षाएँ

· 06:51–07:06 · Also a question

हल षष्ठी बलराम जी का जन्म है, कृष्ण के जन्म से दो दिन पहले — शेष अवतार, अपने उग्र रूप में। उस दिन जिन्हें गुरु नहीं मिले, वे स्वयं सौर दीक्षा, देव दीक्षा, वेणी दीक्षा और ग्रंथ दीक्षा ले सकते हैं।

07

ग्रामीण भगतवाल धारा क्या है, और इस दिन वह क्या करती है?

तंत्र की ग्रामीण भगतवाल धारा, और उसका उपदेश द्वारा संचार

· 07:07–08:56 · Also a question

तंत्र में चली परंपराओं का एक हिस्सा ग्रामीण भगतवाल रहा है — एक सच्ची पर छोटे स्तर की शाखा। इसमें ज़्यादातर साबर विद्याएँ और देवता-संबंधी साधनाएँ हैं, जो सूक्ष्म और सीमित रूप में चलती हैं। हल षष्ठी पर इसके गुरु केवल उपदेश से विद्याएँ देते हैं।

08

षष्ठी का अखाड़ा क्या है?

गुप्त षष्ठी अखाड़ा, और पहलवान बाबा के थान

· 08:57–10:16 · Also a question

कई क्षेत्रों में षष्ठी को अखाड़ा लगता है, हमेशा गुप्त रूप से। इसमें केवल जानकार साधक, नए साधक और दीक्षा लेने वाले किसी तंत्र पीठ पर इकट्ठा होते हैं। वहाँ विधि से दीक्षा दी जाती है। और जो विद्याओं में पक चुके हैं, उनसे गुरु आपस में शक्ति-परीक्षा करवाते हैं।

09

हल दीक्षा खुद क्या है?

संचार के माध्यम के रूप में हल और छान

· 10:17–11:45 · Also a question

जैसे बलि पीठ बनता है, वैसे ही कुल देवता या परंपरा के देवता के स्थान के सामने हल पीठ बनाया जाता है। उस पर हल की पूजा छान के साथ होती है — छान यानी वह रस्सी जिससे दुहते समय एक रंग की गाय के पैर बाँधे जाते हैं। इन्हीं दोनों के माध्यम से गुरु संकल्प और व्रत के साथ अपना सब कुछ देते हैं।

10

षष्ठी देवी कौन हैं, और उनका अधिकार क्या है?

संतान देने और रक्षा करने वाली षष्ठी देवी के रूप में विंध्यवासिनी

· 11:46–12:44 · Also a question

भगवती विंध्यवासिनी का कात्यायनी या षष्ठी देवी रूप — पूरे संसार में ऐसा रूप केवल उन्हीं का है। वे पुत्र देती हैं, उसकी रक्षा करती हैं, संतान को दीर्घायु बनाती हैं। गर्भ में बीज देने के बाद कम से कम बारह वर्ष की आयु तक उसकी रक्षा का अधिकार उनके पास है।

11

संतान के लिए षष्ठी से क्या करना चाहिए?

सप्तशती के चारों ओर संतान गोपाल मंत्र का संपुट

· 12:45–13:21 · Also a question

षष्ठी को वहाँ जाकर पूजा करना सबसे अच्छा है। नहीं तो षष्ठी तिथि से भगवान कृष्ण के संतान गोपाल मंत्र के संपुट के साथ सप्तशती का पाठ करवाइए, संतान और वंश वृद्धि का संकल्प लेकर।

12

अगर पूरी सप्तशती का संपुट न हो सके तो?

केवल ग्यारहवें अध्याय का संपुट

· 13:22–13:46 · Also a question

तब केवल ग्यारहवें अध्याय का संपुट पाठ कीजिए — संपुट की विधि सीखकर षष्ठी तिथि को ऐसे कीजिए। या तो षष्ठी से शुरू करके लंबे समय तक रोज़ कीजिए, या फिर हर षष्ठी तिथि को ज़रूर कीजिए।

13

अपने क्षेत्र के अनुसार देवी के किस रूप की पूजा करनी चाहिए?

अपने क्षेत्र के रूप की पूजा करें

· 13:47–14:43 · Also a question

पुरुषोत्तम क्षेत्र में रहने वाले भगवती सुभद्रा की पूजा कर सकते हैं; दिल्ली क्षेत्र वाले भगवती योग माया की; उत्तर प्रदेश और बिहार वाले भगवती अष्टभुजा की। कम से कम इतना पता होना चाहिए, ताकि आप अपने बच्चों को बता सकें।

14

जन्माष्टमी किस दिन मनानी चाहिए?

अष्टमी व्यापिनी निशा — वह रात जिसमें आधी रात को अष्टमी हो

· 14:44–15:29 · Also a question

जिस रात बारह बजे अष्टमी मिले, उसी दिन जन्माष्टमी का व्रत रखिए। वक्ता इसे अपना और विंध्य क्षेत्र का मत बताते हैं: भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी व्यापिनी रात में, आधी रात को हुआ था।

15

संतान के लिए जन्माष्टमी पर क्या करना चाहिए?

संतान गोपाल संपुट सप्तशती, या आधी रात को गोपाल सहस्त्रनाम

· 15:30–16:05 · Also a question

अष्टमी तिथि से आप संतान गोपाल संपुट सप्तशती करवा सकते हैं — यह वक्ता की अपनी पहली पसंद है, क्योंकि इससे एक साथ इतनी शक्तियों की पूजा होती है और आपके सारे प्रारब्ध कटने का रास्ता खुलता है। अगर यह न हो सके, तो पौने बारह बजे से गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ कीजिए।

16

जहाँ गर्भधारण में ही कठिनाई हो, वहाँ क्या करना चाहिए?

यशोदा की गोद में कृष्ण, और वह चित्र कहाँ रखें

· 16:06–17:06 · Also a question

उस रात विशेष रूप से भगवती यशोदा की गोद में बैठे भगवान श्री कृष्ण की पूजा कीजिए। यशोदा की भी षोडशोपचार पूजा और श्रृंगार हो। फिर वह चित्र ऐसी जगह रखिए जहाँ आपकी पत्नी उसे हर समय देख सके, और हर साल अष्टमी तिथि को उसकी विशेष पूजा कीजिए।

17

यशोदा रूप का वर्णन कहाँ है, और गर्भ चंडी का उपाय क्या है?

गर्भ चंडी और राधा तंत्र — गर्भ के लिए अभिमंत्रित मक्खन

· 17:07–18:24 · Also a question

गुप्त गर्भ चंडी में, और राधा तंत्र में, जहाँ भगवती यशोदा के विशेष रूप का वर्णन गर्भ चंडिका के संपुट के साथ है। वहाँ उपाय यह है कि गाय के दूध से बना मक्खन उनके मंत्र से अभिमंत्रित करके गर्भवती स्त्री को खिलाया जाए, ताकि गर्भ की रक्षा हो।

18

जहाँ धन चला गया हो, वहाँ जन्माष्टमी की रात क्या करना चाहिए?

गोपाल सहस्त्रनाम परदेश गई लक्ष्मी को लौटाता है

· 18:25–18:54 · Also a question

उस रात गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ कीजिए। उसकी फलश्रुति कहती है कि परदेश गई लक्ष्मी भी लौट आती है — जो लक्ष्मी जा चुकी है, वह वापस आती है। इसलिए रात के समय सामर्थ्य भर विधि से इसका पाठ कीजिए।

19

कृष्ण की षष्ठी पूजा क्या है, और कैसे करें?

छठे दिन कृष्ण की षष्ठी, जैसे घर में जन्मे बच्चे की होती है

· 18:55–19:54 · Also a question

उत्सव के छठे दिन कृष्ण की षष्ठी पूजा करें — जैसे घर में जन्मे बच्चे का छठे दिन षष्ठी संस्कार होता है। सामर्थ्य के अनुसार पाँच, छह या बारह तरह के व्यंजन बनाकर भगवती यशोदा के साथ कृष्ण को भोग लगाएँ। उन्हें फिर से स्नान कराएँ, और नए वस्त्र, मुकुट और कुंडल दें।

20

अघोर चतुर्दशी में क्या करना ठीक है, और क्या नहीं?

अघोर शब्द घर में तामसिक पूजा की छूट नहीं है

· 19:55–20:50 · Also a question

अघोर शब्द सुनकर हमें कोई तामसिक पूजा नहीं करनी है, और यह नवरात्रि घर में नहीं मनाई जाती। इसे मनाने का अधिकार उन परंपराओं का है जिनमें यह मनाई जाती है, क्योंकि इसकी कई बातें घर में नहीं की जा सकतीं। हमें बस जिस रात चतुर्दशी हो, उस रात विशेष पूजा करनी चाहिए।

21

भाद्रपद का कैलेंडर किससे पूरा होता है?

गणपति नवरात्रि, चतुर्थी से चतुर्दशी तक

· 20:51–21:27 · Also a question

गणपति नवरात्रि — गणेश चतुर्थी से गणेश चतुर्दशी तक। इसे करने के अलग-अलग विधान हैं, और मूर्ति विसर्जित करनी चाहिए या नहीं, यह विषय अलग से बताया गया है।

वक्ता कहते हैं, अघोर चतुर्दशी के बाद गणपति नवरात्रि आती है — यानी गणेश चतुर्थी से गणेश चतुर्दशी तक। अलग-अलग विधान बताए गए हैं, जिनसे आप इसे किसी न किसी तरह कर सकते हैं। और मूर्ति विसर्जित करनी चाहिए या नहीं, और करने से क्या दिक्कत आती है, ये विषय अलग से बताए गए हैं।

22

क्या माँ काली को रोज़ दो लौंग चढ़ा सकते हैं?

काली को रोज़ लौंग-कपूर चढ़ाना तामसिक पूजा नहीं है

· 21:28–22:42 · Also a question

बिल्कुल चढ़ा सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं। यह सवाल इस दावे से आया है कि काली जी को रोज़ लौंग-कपूर चढ़ाना तामसिक पूजा में आता है — इस दावे को वे साफ़ नकारते हैं।

23

क्या सप्तशती के केवल एक चरित्र से हवन हो सकता है?

सप्तशती का हवन चंडी याग है, इसमें पूरा मंडल विधान चाहिए

· 22:43–23:58 · Also a question

पहले आपको सप्तशती दीक्षा या शाक्त दीक्षा मिली होनी चाहिए। और आप जो बता रहे हैं, वह चंडी याग में आता है — सभी चरित्रों से हवन के लिए आवरण और मंडल पूजा आनी चाहिए: सर्वतोभद्र, नवग्रह, चौंसठ योगिनी, षोडश मातृका, लोकपाल, दिक्पाल, और सारे कलश।

24

सप्तशती के कौन से सूक्त अलग से हवन में ले सकते हैं?

रात्रि सूक्त, चौथा अध्याय, देवी सूक्त और ग्यारहवाँ

· 23:59–25:19 · Also a question

स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकते। पर फिर भी करना चाहें तो: पहले तंत्रोक्त रात्रि सूक्त, केवल घी से या पान के पत्ते पर केले से, क्योंकि आहुति केवल आवाहन के मंत्रों से दी जा सकती है। फिर चौथा अध्याय, खास तौर पर लक्ष्मी के लिए; फिर तंत्रोक्त देवी सूक्त; फिर पूरा ग्यारहवाँ अध्याय।

25

सप्तशती पाठों के हवन में कौन सी सामग्री लें?

घी, शहद और खीर — साकल्य कभी नहीं, और महिलाओं के लिए घी नहीं

· 25:20–25:41 · Also a question

इन चार पाठों का हवन जब भी करें, घी से, शहद से, खीर से करें — खास तौर पर खाद्य पदार्थों से। कृपया साकल्य से हवन मत कीजिए। और अगर महिलाएँ कर रही हैं, तो वे घी से नहीं, उसकी जगह खाद्य पदार्थों से करेंगी।

वक्ता कहते हैं, अभी जो चार पाठ बताए, उनका हवन जब भी करें, घी से, शहद से, खीर से करेंगे — खास तौर पर खाद्य पदार्थों से। कृपया साकल्य से हवन मत कीजिए। अगर महिलाएँ कर रही हैं, तो वे घी से नहीं करेंगी। उसकी जगह वे केवल खाद्य पदार्थों से हवन करेंगी।

26

साईं बाबा इतने ज़्यादा क्यों पूजे जाने लगे?

दस साल पहले पर्चों से हुआ प्रचार

· 25:42–26:25 · Also a question

प्रचार के तरीके की वजह से। वक्ता दस-बारह साल पहले बँटने वाले पर्चे याद दिलाते हैं — इसे दस लोगों को दो, और न दिया तो उस व्यक्ति के साथ कुछ बुरा हुआ — और कहते हैं कि वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और संतोषी माता व्रत भी ठीक ऐसे ही बाँटे गए।

27

नांदी मुख श्राद्ध क्यों करना चाहिए?

किसी भी देवी पूजा से पहले पितरों को तृप्त करना

· 26:26–27:03 · Also a question

क्योंकि पहले अपने कुल के पितर तृप्त होने चाहिए। इन सबसे पहले — चंडी या सप्तशती से पहले, जैसा पिछले प्रश्नकर्ता ने पूछा — नांदी श्राद्ध करवाना बहुत ज़रूरी है। वे आपके घर के हैं; पहले उन्हें पूरी तरह प्रसन्न करें, फिर देवी पूजा करें। तभी पूरा फल मिलता है।

28

क्या व्रत में मंदिर का प्रसाद खा सकते हैं?

सिर से लगाएँ, शब्द कहें, और अगले दिन खाएँ

· 27:04–28:05 · Also a question

प्रसाद मिले तो सिर से लगाएँ और मन में दोहराएँ: हे भगवान, आप जिस भी रूप में हों, आज मेरा उपवास है, इसलिए इसे आदर से स्वीकार करता हूँ और माथे से लगाकर सम्मान करता हूँ — पर मैं व्रत में हूँ, इसका मान रखें, और मुझे कोई दोष न लगे। फिर इसे अगले दिन खाएँ, या घर में किसी को दे दें।

29

बेताल कौन हैं?

बेताल शिवलोक के उपदेव, जिनका एक महाभूत पर अधिकार है

· 28:06–29:39 · Also a question

शिवलोक के देवता, जो उपदेव श्रेणी में आते हैं। उनके मंदिर खास तौर पर दक्षिण की ओर मिलते हैं। पाँच महाभूतों में से एक पर उनका अधिकार स्थापित है, और उनके दिव्य शरीर में इतनी क्षमता है कि वे उस पर अधिकार करके वैसा काम कर सकें।

30

पुराने समय में बेताल साधना किस काम आती थी?

रूप बदलने की विद्या, और उसे सिखाने वाले राज तांत्रिक

· 29:40–30:37 · Also a question

कहा जाता है कि बेताल साधना से रूप बदलने की विद्या भी मिलती है। पहले के समय में सैनिकों और सेनापतियों से उनके कुलगुरु या राज तांत्रिक यह साधना करवाते थे — एक शक्तिशाली, वीर भाव श्रेणी की साधना, जिसके बाद युद्ध में जीत बहुत आसान हो जाती थी, और जिससे गुप्तचर सेवा वाले रूप बदलकर अपना काम करते थे।

31

क्या घर में भैरव को लगाया भोग परिवार खा सकता है?

घर के भैरव का भोग सब खा सकते हैं

· 30:38–31:20 · Also a question

हाँ, बिल्कुल — घर में भैरव जी को लगाया भोग सब खा सकते हैं। और भैरव तांडव और काल भैरव अष्टक घर में सामान्य तरीके से ज़रूर पढ़े जा सकते हैं, और भैरवम् विषम-कष्ट-हरम् और देवराज-सेव्यमान काल भैरवम् भी।

32

जप के समय तेज़ कंपन और आज्ञा चक्र पर खिंचाव का क्या अर्थ है?

प्रबल भाव, गुप्त रखें — और इसके पीछे कुल की किसी शक्ति की कृपा

· 31:21–32:04 · Also a question

कि आपका भाव बहुत प्रबल है और अनुभव बहुत अच्छा है — इसे गुप्त रखें, सार्वजनिक न करें। और भगवती का नाम पुकारने का मन हो, तो कभी-कभी पुकारें। वक्ता आंशिक रूप से जोड़ते हैं कि आपके कुल में कोई शक्ति विंध्यवासिनी की बड़ी भक्त रही होगी और आप पर कृपा कर रही है।

33

क्या गृहस्थों को धूमावती साधना करनी चाहिए?

धूमावती गृहस्थों के लिए नहीं, और सबको फल नहीं देती

· 32:05–33:09 · Also a question

नहीं — यह गृहस्थों के लिए नहीं है, और सबको फल नहीं देती। जहाँ किसी गृहस्थ को फल देती है, वक्ता कहते हैं उसके पीछे दो बातें होती हैं: उस कुल में कोई साधक जिस पर उनकी विशेष कृपा थी, या उस परिवार में किसी अंश रूप में स्थापित कोई योगिनी।

34

जिसका मन धूमावती की ओर हो, वह उसकी जगह क्या करे?

उसकी जगह कमला करें — क्या वे आपके शत्रु का नाश नहीं कर सकतीं?

· 33:10–34:02 · Also a question

अगर ऐसा कुछ करना ही है, तो कमला की साधना करें। धूमावती क्यों? क्या भगवती कमला आपके शत्रुओं का नाश करने में सक्षम नहीं हैं — और चाहें तो क्या वे खुद भगवती धूमावती से नहीं कह सकतीं कि मेरे बेटे की रक्षा करो?

35

जब दुर्गा प्रधान देवी हों, तो गणेश और शिव कहाँ रखें?

हनुमान दाएँ, बटुक बाएँ — और उनके बाहर गणपति और शिव

· 34:03–34:44 · Also a question

जब भगवती दुर्गा स्थापित हों, तो हनुमान जी दाएँ और बाल भैरव जी बाएँ रहते हैं। गणपति जी फिर हनुमान जी के दाएँ जाते हैं — यानी वे दुर्गा जी के भी दाएँ और हनुमान जी के भी दाएँ। और शिव जी भैरव जी के बाएँ, उनके बगल में। शिवलिंग भी ऐसे ही रखा जाता है।

36

घर में नई मूर्ति की प्रतिष्ठा कैसे करें?

चल प्रतिष्ठा, अचल कभी नहीं — और पाँच जगह अधिवास

· 34:45–35:54 · Also a question

अचल प्राण प्रतिष्ठा कभी न करवाएँ; चल प्रतिष्ठा करवाएँ। खुद करें तो: दूध और पंचामृत से अच्छी तरह अभिषेक; फिर चाँदी के चम्मच या कटोरी से देवता के नाम से 108 बार कच्चे दूध से; फिर जल से अभिषेक और अधिवास।

37

क्या बिल्व पत्र की डंडी तोड़नी चाहिए?

चढ़ाने से पहले गाँठ वाली डंडी तोड़ दें

· 35:55–36:10 · Also a question

डंडी तोड़ देनी चाहिए। जिस पर गाँठ होती है, वह डंडी तोड़कर फिर पत्र चढ़ाएँ।

पूछा गया कि शिवलिंग पर बिल्वभगवान शिव से संबद्ध पवित्र बेल वृक्ष — इसके नीचे साधना की जाती है, इसकी लकड़ी बंधन-मुक्ति अनुष्ठान में घी व तिल की आहुति के लिए हवन-सामग्री के रूप में प्रयुक्त होती है, तथा इसका त्रिदल पत्र (बिल्वपत्र) शिव को अर्पित किया जाने वाला मुख्य द्रव्य है। पत्र चढ़ाने से पहले उसके पीछे की डंडी तोड़नी चाहिए या नहीं, और क्या तोड़ने से पत्र खंडित होकर अयोग्य हो जाता है। वक्ता कहते हैं कि डंडी तोड़ देनी चाहिए। जिस पर गाँठ है, वह डंडी तोड़कर फिर पत्र चढ़ाना चाहिए।

38

बिना दीक्षा के भगवती विंध्यवासिनी की कौन-सी साधना की जा सकती है?

चालीसा, या ग्यारहवाँ अध्याय और देवी सूक्त

· 36:11–37:16 · Also a question

उनकी चालीसा की साधना बताई जा चुकी है। कुछ विशेष करना हो तो विंध्य धाम के किसी सक्षम साधक से दीक्षा लें। नहीं तो भगवती विंध्यवासिनी के नाम से संकल्प लेकर सामर्थ्य भर दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करें, और तंत्रोक्त देवी सूक्त का। इतना पर्याप्त है।

39

जिन्हें वैदिक मंत्रों का अधिकार नहीं, क्या उनके लिए पौराणिक मंत्रों की कोई पुस्तक है?

बिना अधिकार वालों के लिए वे जो पुस्तकें लिखना चाहते हैं

· 37:17–37:59 · Also a question

अभी नहीं — हर मौजूदा पुस्तक में कुछ न कुछ ऐसा है जिसके लिए कहा जाएगा कि आपको अधिकार नहीं। वे अगली दुर्गा पूजा से पहले कम से कम दो-तीन ऐसी पुस्तकें लिखने का वचन देते हैं, जिनमें ये विधान ऐसे मंत्रों के साथ होंगे जिन्हें कोई भी कर सके, और यह भी बताया जाएगा कि स्त्रियाँ कैसे करें और पुरुष कैसे।

40

गृहस्थ के लिए गणपति का कौन-सा रूप उचित है?

सिद्धि विनायक रूप, जिनके दोनों ओर ऋद्धि-सिद्धि हैं

· 38:00–38:32 · Also a question

अष्टविनायक के किसी भी रूप की पूजा की जा सकती है, और महागणपति की भी। वक्ता के मत से हर गृहस्थ को विशेष रूप से सिद्धि विनायक रूप की सेवा-पूजा करनी चाहिए — जो अष्टविनायक में से एक है, जिसमें दोनों ओर ऋद्धि और सिद्धि खड़ी हैं।

41

क्या साधना के अंत में माला टूटने का अर्थ है कि देवी नाराज़ हैं?

ज़्यादा जप से कमज़ोर हुआ धागा, नाराज़गी नहीं

· 38:33–38:59 · Also a question

ऐसा नहीं माना जा सकता। जब आप बहुत जप करते हैं तो कभी-कभी धागा कमज़ोर होकर टूट जाता है। इसे देवयोग मानकर समर्पित कर दें। भगवती नाराज़ नहीं हैं। अगर माला बार-बार टूटने लगे, तो वह कठिनाई की बात है।

42

क्या षष्ठी देवी और छठी मैया एक ही हैं?

छठी मैया की कई पहचानें, और मुख्य पहचान

· 39:00–39:57 · Also a question

हाँ। गंगा मैया को भी छठी मैया कहा जाता है; सूर्य की पत्नी उषा को भी वही माना जाता है; कार्तिकेय की माताएँ छह कृत्तिकाएँ षष्ठी देवी मानी जाती हैं; और कार्तिकेय की पत्नी देवसेना को भी छठी मैया कहा जाता है। पर मुख्य रूप से विंध्य पर बसने वाली माँ ही हैं, जिनकी वैदिक काल से षष्ठी देवी के रूप में पूजा होती है।

43

ज़मीन में दबी पुरानी मानव खोपड़ी के लिए क्या करना चाहिए?

पहले उसकी गति के लिए त्रिपिंडी, फिर वाराही या महाविद्या हवन

· 39:58–41:32 · Also a question

पहले उस जगह त्रिपिंडी श्राद्ध करवाएँ ताकि उसे गति मिले, या संकल्प के साथ गीता पाठ — पहले उसकी मुक्ति का प्रयास करें। अगर वह न माने, या परेशान कर रही हो, तब तंत्रोक्त क्रियाओं में जाएँ: वहाँ वराह या वाराही हवन, या सात, नौ या ग्यारह दिन का महाविद्या हवन।

44

चंडी कवच और रुद्र चंडी कवच में क्या अंतर है?

चंडी कवच ब्रह्मा जी का है और बहुत तीक्ष्ण है; रुद्र चंडी सबके लिए नहीं

· 41:33–42:57 · Also a question

सप्तशती का चंडी कवच स्वयं ब्रह्मा जी के मुख से कहा गया है और बहुत तीक्ष्ण है — पाठ करेंगे तो समझ जाएँगे। रुद्र चंडी कवच सबके लिए नहीं है: अगर आप शुरुआती साधक हैं तो वक्ता मना करेंगे। चंडी कवच करें।

45

शुद्ध घी न मिले तो कौन-सा घी इस्तेमाल करें?

हवन के लिए ब्रांडेड घी चल सकता है

· 42:58–43:41 · Also a question

अच्छा घी पाने का प्रयास करें। वक्ता के मत से अमूल जैसे ब्रांडेड घी में वैसी कठिनाई नहीं है, और उसे हवन आदि में इस्तेमाल किया जा सकता है।

46

क्या किसी देवता के लिए तिल के तेल का दीपक वर्जित है?

शिव के लिए त्रयोदशी की सावधानी, और बाकी सरसों का तेल

· 43:42–44:41 · Also a question

सामान्य रूप से इसका प्रयोग हो सकता है। कुछ जगह वर्णन मिलता है कि भगवान शिव के लिए तिल के तेल का दीपक नहीं जलाना चाहिए — वक्ता ने बड़ों से सुना है कि त्रयोदशी तिथि को शिव के आगे तिल के तेल का दीपक न जलाएँ, और कहते हैं कि इसका कारण उनके पास नहीं है।

47

गुरु मंत्र और इष्ट अलग हों तो कौन-सा मंत्र ज़्यादा जपें?

गुरु मंत्र कभी न छोड़ें, और इष्ट का नाम लेते रहें

· 44:42–45:22 · Also a question

गुरु मंत्र कभी नहीं छोड़ना चाहिए, और भगवती विंध्यवासिनी का नाम हमेशा लेते रहें। इसी क्रम में वक्ता यह भी कहते हैं कि रोग हमारे प्रारब्ध से आते हैं और कष्ट पूरा होकर प्रारब्ध कटने पर चले जाते हैं — हम उनसे बच नहीं सकते; उन्हें काटना ही पड़ेगा।

48

क्या वेदों के गणेश और जिन गणेश की हम पूजा करते हैं, वे अलग हैं?

एक टीवी पौराणिक कथाकार के ढंग पर उनकी आपत्ति

· 45:23–46:23 · Also a question

आपत्ति दावे पर नहीं, ढंग पर है: कि देवताओं का सम्मान नहीं किया जाता और उनके बारे में जैसा मन आए वैसा बोला जाता है। दावा मान भी लें — ठीक है, अलग हैं — फिर भी सनातन से जुड़े विषयों पर ढंग से, आदरसूचक शब्दों के साथ बोलना चाहिए।

49

सपने में किसी बुज़ुर्ग का सिर पर हाथ रखना क्या दर्शाता है?

पितृ प्रसन्न हैं और आशीर्वाद दे रहे हैं

· 46:24–47:23 · Also a question

अगर बुज़ुर्ग सिर पर हाथ रखें, तो पितृ प्रसन्न हैं और आपको आशीर्वाद दे रहे हैं।

50

क्या घर से गणपति का विसर्जन करना चाहिए?

गणपति विसर्जन के ढंग पर उनकी आपत्ति

· 47:24–48:42 · Also a question

वक्ता कहते हैं, बिलकुल उचित नहीं। उनकी आपत्ति वीडियो में दिखने वाली बातों पर है: दस दिन प्राण प्रतिष्ठित और पूजित प्रतिमा को फेंका जाता है, उस पर चढ़ा जाता है, जैसे-तैसे तोड़ा जाता है, बिलकुल सम्मान नहीं — जबकि अपने पिता और दादा की अस्थियों का सम्मान होता है और उन्हें गंगा तक ले जाया जाता है।

51

क्या चौरासी खाता वीडियो से सीखा जा सकता है?

आमने-सामने सीखें या न सीखें — और ज़्यादातर वहाँ तक पहुँचते ही नहीं

· 48:43–49:44 · Also a question

जानकारी दी जा सकती है, पर अगर ये विद्याएँ व्यवहार में सीखनी हैं, तो उस तरह के साधक से संपर्क करके आमने-सामने सीखें। यूट्यूब देखकर चौरासी खाता विद्या न सीखें। लोग इसे कर भी नहीं पाते — शुरू में जो थोड़ा आता है उसी से खेलने लगते हैं, और उसी में बहुत कुछ हो जाता है।

52

क्या शाबर या महाविद्या साधना से पहले बटुक भैरव साधना ज़रूरी है?

भैरव साधना हर घर में और हर शक्ति के साथ ज़रूरी है

· 49:45–50:39 · Also a question

बटुक भैरव की साधना हर घर में और हर शक्ति के साथ ज़रूरी है। माँ के किसी भी रूप की पूजा करें, बटुक भैरव की पूजा अत्यंत आवश्यक है — गुरु साधना के बाद गणपति, गणपति के बाद बटुक भैरव या भैरव का कोई रूप या कुल भैरव, और उसके बाद ही आपकी कुंडली के ग्रह।

53

सप्तशती या शाक्त दीक्षा कहाँ से लें?

शंकराचार्य परंपरा, गृहस्थों के लिए सबसे अच्छी

· 50:40–51:54 · Also a question

शंकराचार्य परंपरा में शंकराचार्य जी से निवेदन करें — उनके यहाँ दीक्षाएँ होती हैं, और देने का अधिकार उस पद पर जो विराजमान हैं उन्हीं का है। गृहस्थों के लिए यह सबसे अच्छा है, और इसमें कोई अजीब रकम नहीं लगेगी। किसी शक्तिपीठ के सक्षम साधकों से भी ले सकते हैं।

54

रक्षा के लिए ताँबे का कड़ा कैसे सिद्ध करें?

बारह दिन गंगोत्री के जल में, फिर मंत्र

· 51:55–53:15 · Also a question

पहले देखें कि ताँबे का कड़ा आपको सूट करता भी है या नहीं। फिर उसे कम से कम बारह दिन त्रिवेणी संगम के जल में या गंगाजल में डुबोकर रखें — सबसे बढ़कर गंगोत्री के जल में, क्योंकि केवल उसी से कड़े पर परत नहीं जमती — और जल भी ताँबे के बर्तन में रखें। फिर उसे किसी मंत्र से सिद्ध करें।

55

तांबे के कड़े को सिद्ध करने के लिए कौन-से मंत्र लिए जा सकते हैं?

मंगल, सूर्य, कार्तिकेय, पीतांबरा — या अपने इष्ट का अस्त्र मंत्र

· 53:16–54:13 · Also a question

रक्षा के लिए मंगल का जप, या सूर्य का जप। सूर्य कवच, मंगल कवच या कार्तिकेय जी का कवच ले सकते हैं। शक्तियों में जाना हो तो भगवती पीतांबरा के मंत्र, या उनकी साबर विद्याओं से जुड़े मंत्र। या अपने इष्ट के किसी भी अस्त्र मंत्र से सिद्ध करें।

56

बिना सिद्ध किए तांबे के कड़े के साथ भी कौन-से नियम लगते हैं?

किसी भी तांबे के कड़े पर लागू चार नियम

· 54:14–55:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं, चार नियम तो लगेंगे ही। इसे पहनकर शराब न पिएँ। किसी मीठी चीज़ का रस इस पर लगे और उसे चाट लें, ऐसा न हो — वह ज़हर जैसा हो जाता है। मांस, मछली, अंडा न खाएँ। और स्त्री का स्पर्श, चाहे अपनी विवाहित पत्नी ही हो, कड़ा उतारकर करें।

57

जहाँ पितरों को बाँध दिया गया हो, वहाँ क्या किया जा सकता है?

पहले काट करवाएँ; नहीं तो हनुमान चालीसा संपुट या गीता का ग्यारहवाँ अध्याय

· 55:34–57:09 · Also a question

अगर अभिचार के कारण पितर बँधे हैं, तो पहले किसी जानकार को घर बुलाएँ, क्रियाएँ दिखवाएँ, उसकी काट करवाएँ, फिर आगे बढ़ें। खुद करना हो और कोई खास विधि न आती हो, तो हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का संपुट पाठ करें, या गीता का ग्यारहवाँ अध्याय पढ़ें।

58

पितृ पक्ष में पितरों के लिए दान कहाँ दिया जा सकता है?

कोई भी तीर्थ, और सबसे बढ़कर गंगा क्षेत्र

· 57:10–58:13 · Also a question

किसी भी तीर्थ क्षेत्र में जाएँ — खासकर गंगा क्षेत्र ज़्यादा मान्य है। गया जा सकते हैं, विंध्य क्षेत्र, काशी, पुष्कर क्षेत्र जा सकते हैं। जहाँ चाहें, जाकर करें।

59

क्या कवच के मंत्रों से हवन हो सकता है?

कवच मंत्रों का हवन नहीं होता

· 58:14–59:31 · Also a question

नहीं। सप्तशती के कवच से हवन हो सकता है या नहीं, इस पर वक्ता कहते हैं नहीं; कवच मंत्रों से हवन पर भी वे फिर कहते हैं नहीं — कवच मंत्रों का हवन नहीं किया जाता।

सप्तशती के कवच से हवन हो सकता है या नहीं, यह पूछने पर वक्ता कहते हैं: नहीं। कवच मंत्रों से हवन हो सकता है या नहीं, इस पर भी वे कहते हैं: नहीं। कवच मंत्रों का हवन नहीं किया जाता।

60

आँखें बंद करने पर अनजान स्त्रियाँ और बच्चे दिखें तो क्या करें?

कृष्ण चतुर्दशी को भैरव याग और क्षेत्रपाल निकारी

· 59:32–1:00:40 · Also a question

घर पर भैरव याग करवाएँ और क्षेत्रपाल निकारी करवाएँ — कम से कम इतना। किसी थोड़े जानकार ब्राह्मण को ढूँढें जो काली मंदिर में पूजा करता हो और सप्तशती चंडी पाठ जानता हो; एक दिन, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को करवाएँ।

61

क्या घोड़े की नाल सनातन परंपरा का हिस्सा है?

यह तंत्र और आगम में है, और लाल किताब के उपायों में

· 1:00:41–1:00:55 · Also a question

सनातन परंपरा में, तंत्र में और आगम में इन विषयों का उल्लेख रहा है। और आजकल जो लोकप्रिय हुई है — लाल किताब के उपाय — उनमें ये सब विषय खास तौर पर बताए गए हैं।

सनातन परंपरा में घोड़े की नाल मान्य है या नहीं, और हो तो विधि क्या है — यह पूछने पर वक्ता कहते हैं कि सनातन परंपरा में, तंत्र में और आगमतांत्रिक शास्त्रोक्त विधि-विधानों का समूह (जैसे शिवागम), जो पूजा के नियम निर्धारित करता है, यह भी कि बलि कहाँ व कैसे विहित है — मात्र स्वाद या भोग हेतु इसके नियमों का उल्लंघन किसी भी उच्च आध्यात्मिक प्राप्ति को असंभव बना देता है। में इन विषयों का उल्लेख रहा है। और खासकर आजकल जो लोकप्रिय हुई है — लाल किताब के उपाय — उनमें ये सब विषय खास तौर पर बताए गए हैं।

62

सुदर्शन चक्र नारायण पाठ किसलिए किया जाता है?

बार-बार दोहराए जा रहे अभिचार को भेदना

· 1:00:56–1:01:42 · Also a question

इसका अनुष्ठान खासकर शत्रु नाश, अभिचार से रक्षा, अभिचार के नाश और दूसरे की विद्या भेदने के लिए होता है। अगर कोई आप पर बार-बार अभिचार कर रहा हो, तो उसे भेदने और रोकने के लिए किया जाता है।

63

क्या सपने में बेल का मतलब ब्रह्मराक्षस है?

बेल श्रीफल है — लक्ष्मी का रूप, ब्रह्मराक्षस नहीं

· 1:01:43–1:02:47 · Also a question

नहीं — वक्ता इस अर्थ को सीधे नकारते हैं। बेल श्रीफल है, साक्षात् भगवती लक्ष्मी का रूप; शिव और सारे देवता बेल के वृक्ष के पास हैं; पूरे सावन हमने बेल चढ़ाया। सपने में बेल देखना बहुत शुभ है, और कमल की तरह यह लक्ष्मी का प्रतीक है।

64

हवन में बेल फल का प्रयोग कैसे होता है?

गूदा शहद, शक्कर और घी के साथ — लक्ष्मी के लिए, और आकर्षण के लिए

· 1:02:48–1:03:23 · Also a question

बेल फल, यानी श्रीफल, का गूदा निकालकर उसमें शहद, मिश्री और शुद्ध घी मिलाया जाता है; इससे आहुति देना लक्ष्मी प्राप्ति का हवन है। षट्कर्म में आकर्षण के लिए यही सामग्री ली जाती है; इसमें सरसों मिलाने से यह शत्रु का स्तंभन बन जाता है।

65

साधक के जीवन का पहला अनुष्ठान क्या होना चाहिए?

एक कवच के ग्यारह सौ पाठ, फिर एक साल रोज़ पाठ

· 1:03:24–1:04:11 · Also a question

हर साधक के जीवन में किसी कवच के ग्यारह सौ पाठ होने चाहिए। जब भी यह साधना करने चलें, अपने आराध्य का, जिन पर आस्था हो, एक कवच लें, उसके कम से कम ग्यारह सौ पाठ करें, फिर एक साल रोज़ की पूजा में उसका पाठ करते रहें।

66

मंत्र जप से होने वाले कंपन को कैसे संतुलित करें?

सात्त्विक शक्तियाँ जाग रही हैं पर असंतुलित — कवच पाठ और अष्टमी का हवन

· 1:04:12–1:04:52 · Also a question

इसका मतलब है कि मंत्र असर कर रहा है और शरीर में सात्त्विक शक्तियाँ जाग रही हैं — पर यह अनियंत्रित है, संतुलित नहीं। इसके लिए कवच का पाठ करें, और हो सके तो अष्टमी के दिन हवन भी करें।

67

क्या किसी को इसलिए गुरु बनाना चाहिए कि देवता की सवारी आए?

धन, मान या सवारी के लिए कभी गुरु न बनाएँ

· 1:04:53–1:05:36 · Also a question

धन, मान या यश के लिए किसी को गुरु न बनाएँ। सेवा और पूजा करनी हो, तो गुरु बनाएँ। यह सोचकर कि सवारी आएगी — फिर सवारी का करेंगे क्या?

68

सपने में माला देने वाला रूप किसका है?

उस अवस्था में केवल कामाख्या की योगिनियाँ देती हैं

· 1:05:37–1:06:07 · Also a question

वक्ता पहले कहते हैं कि ऐसा सपना सबके सामने नहीं बताना चाहिए। वे कहते हैं, बताया गया रूप असल में योगिनी रूप में भगवती कामाख्या हैं — और उनका आपको देना मतलब वे आपसे प्रसन्न हैं। उस अवस्था में केवल कामाख्या की योगिनियाँ देती हैं; और कोई नहीं देता।

69

सालभर का व्रत चलते हुए क्या गणेश चतुर्थी की साधना शुरू कर सकते हैं?

सँभाल सकें तो दोनों साथ चल सकती हैं

· 1:06:08–1:06:25 · Also a question

हाँ। हल षष्ठी से सालभर की साधना शुरू की हो, और वह चलते हुए गणेश चतुर्थी से महीने की साधना भी शुरू कर सकते हैं या नहीं — वक्ता कहते हैं हाँ; सँभाल सकें तो कोई दिक्कत नहीं; दोनों साधनाएँ कर सकते हैं।

हल षष्ठी से सालभर की साधना शुरू करने वाले एक श्रोता पूछते हैं कि वह चलते हुए क्या महीने की गणेश चतुर्थी की साधना भी शुरू कर सकते हैं। वक्ता कहते हैं, हाँ, कर सकते हैं। सँभाल सकें तो कोई दिक्कत नहीं। दोनों साधनाएँ कर सकते हैं।

70

क्या शल्य दोष वाले घर में साधना की जा सकती है?

पहले वास्तु पुरुष; महाशक्तियों पर जगह का दोष नहीं लगता

· 1:06:26–1:07:04 · Also a question

दिक्कत हो सकती है। जहाँ शल्य दोष या वेध दोष हो, वहाँ पहले वास्तु पुरुष की साधना करवाएँ, या विधान से वास्तु यंत्र सिद्ध करवाएँ, या शास्त्र प्रमाण से जो उपाय हो, वह करवाएँ। महाशक्तियों की साधना पर किसी जगह का दोष नहीं लगता — दिक्कत अंग विद्याओं में आती है।

71

कुलदेवी या पितरों का बंधन किससे खुलता है?

अर्गला के मंत्रों से हवन

· 1:07:05–1:07:54 · Also a question

अर्गला के मंत्रों से हवन। अर्गला मंत्रों में कुलदेवी हैं, पितर हैं — वहाँ भगवती का स्वधा रूप में भी वर्णन है — इसलिए जो भी बंधन हो, खुल जाएगा।

72

संकेत के रूप में बार-बार त्रिकोण दिखे तो इसका क्या मतलब है?

ऊपर की ओर त्रिकोण बार-बार — भैरव की उपासना करें

· 1:07:55–1:08:24 · Also a question

जिस श्रोता को बार-बार ऊपर की ओर नोक वाला त्रिकोण बनता दिखता है — हाथ से गिरी चीज़ में, गिरे खून के सैंपल के इंजेक्शन में — उन्हें वक्ता एक ही बात कहते हैं: भैरव जी की उपासना करें।

73

गोमती चक्र किस काम आता है?

विष्णु चक्र, और जीवित व मृत प्रकार

· 1:08:25–1:09:39 · Also a question

इसे विष्णु चक्र भी कहते हैं। यह समुद्र से मिलता है। इसका प्रयोग खास तौर पर लक्ष्मी से जुड़े कामों में होता है — जहाँ बार-बार गर्भ गिरता हो, वहाँ गर्भ की रक्षा और उसे टिकाने के लिए, और जहाँ बार-बार अभिचार कर्म हो रहा हो। यह दो तरह का मिलता है: जीवित और मृत।

74

देवी के लिए प्रसाद चढ़ाया हो तो उसे कहाँ बाँटें?

भगवती के लिए, भगवती के मंदिर में बाँटें

· 1:09:40–1:11:21 · Also a question

हनुमान मंदिर में बाँट सकते हैं — पर अगर भगवती के लिए करना है, तो भगवती के मंदिर में करें; वह बहुत अच्छा रहेगा। अगर हनुमान जी ही कुल देवता हैं, तो वहाँ कर सकते हैं।

75

शीतला माता की कृपा कैसे मिलती है?

शीतला अष्टक, या कुल की अपनी परंपरा

· 1:11:22–1:11:47 · Also a question

अगर वे कुलदेवी हैं, तो कुल की जो परंपरा है, उसी से करें। अगर नहीं हैं, तो खास तौर पर भगवती शीतला का अष्टक पढ़ें। इसी क्रम में वक्ता जोड़ते हैं कि सब रूपों में भगवती पार्वती ही प्रधान रूप हैं — उन्हीं को मूल शक्ति कहते हैं।

76

क्या किन्नर को गुरु बनाना चाहिए?

उनकी नब्बे प्रतिशत साधनाएँ वामाचार की — गृहस्थ के लिए कठिनाई

· 1:11:48–1:12:49 · Also a question

वक्ता उनकी परंपराओं के बारे में एक बात कहने से मना करते हैं। वे कहते हैं कि उनकी मानसिकता हर जगह एक जैसी नहीं होती। पर वे बताते हैं कि जो किन्नर साधना करते हैं, उनमें लगभग नब्बे प्रतिशत वाम विद्या से, वामाचार से करते हैं — और वामाचार में जाने के बाद गृहस्थ के रूप में आपको कठिनाई होगी।

77

दुर्गा के साथ गणेश किस ओर होते हैं — दाएँ या बाएँ?

देवी के रूप के साथ स्थान बदलता है

· 1:12:50–1:13:57 · Also a question

भगवती दुर्गा चतुर्भुजी, द्विभुजी, अष्टभुजी, दशभुजी, षोडशभुजी, अष्टादशभुजी और सहस्रभुजी रूपों में हैं, और रूप के साथ स्थान बदलता है। गौरी-गणपति की स्थापना में भगवती गणपति के दाईं ओर होती हैं; अष्टभुजी दुर्गा के साथ गणपति उनके दाईं ओर आते हैं; दशभुजी के साथ वे बाईं ओर चले जाते हैं।

78

पितरों के उपाय में बार-बार बाधा आए तो क्या करें?

अमावस्या को गीता के ग्यारहवें अध्याय के ग्यारह पाठ

· 1:13:58–1:14:53 · Also a question

अमावस्या तिथि को संकल्प के साथ गीता के ग्यारहवें अध्याय के ग्यारह पाठ करवाएँ। बाधा का मतलब है कि पितरों में कोई क्षुद्र शक्ति घुस गई है, या कोई अभिचार घुस गया है, और काम पूरा नहीं होने दे रहा — पहले उसे बँधवाएँ, या भगवाएँ।

79

क्या गुरु मंत्र पर दोष लग सकता है?

गुरु मंत्र पर दोष नहीं लगता; दोष बताने में है

· 1:14:54–1:16:23 · Also a question

गुरु मंत्र ऐसा मंत्र है जिस पर कभी किसी तरह का दोष नहीं लगता। अगर आपको लगता है कि लगा है, तो वक्ता के हिसाब से आपने उसे किसी को बता दिया है — और बताने से जो दोष लगता है, वह लग चुका; यह भूल जाइए कि रुद्राष्टकम् के पाठ से वह हट जाएगा।

80

कुल भैरव की पहचान कैसे होती है?

कुलदेवी जानने से कुल भैरव का पता चलता है

· 1:16:24–1:17:41 · Also a question

अगर आप अपनी कुलदेवी जानते हैं, तो आपको कुल भैरव का पता चल जाएगा। और इसी क्रम में वक्ता जोड़ते हैं कि भगवान श्री राम की कुलदेवी भगवती विंध्यवासिनी हैं।

81

चौंतीसा यंत्र की विधि असल में कैसे चलती है?

एक सौ आठ लिखे जाते हैं, आटे की गोलियों में बहाए जाते हैं — ताबीज में एक भी नहीं

· 1:17:42–1:19:22 · Also a question

उन एक सौ आठ में से कोई भी ताबीज में नहीं जाता। भोजपत्र पर एक सौ आठ बार लिखें, यंत्रों को गेहूँ के आटे में भरकर एक सौ आठ गोलियाँ बनाएँ और बहती नदी या तालाब में डालें ताकि वे मछलियों तक पहुँचें — यह जल तत्व का विषय है, वरुण के आशीर्वाद से सिद्ध होता है। फिर पहनने के लिए नया यंत्र बनाएँ।

82

ब्रह्म को स्थान कहाँ दिया जाता है?

ब्रह्म क्षेत्र, पीपल का पेड़, तालाब का किनारा या तीर्थ

· 1:19:23–1:20:10 · Also a question

ब्रह्म क्षेत्र में, ब्रह्म धाम में, या पीपल के पेड़ पर — पर दो तरह से। या तो तांत्रिक प्रयोग से बाँधकर किसी सुनसान जगह छोड़ दिया जाता है ताकि वे लौट न सकें, और अगर कभी छूट गए तो बहुत परेशान करते हैं; या विधि-विधान से पीपल पर स्थान दिया जाता है, और फिर नियम से पूजा होती है।

83

साधना के दौरान क्रोध और नींद क्यों बढ़ते हैं?

जप से अस्थिर हुए चक्र, और शक्ति के मंत्र का दशांश

· 1:20:11–1:21:12 · Also a question

क्योंकि जब जप से मूलाधार पर स्पंदन होता है, तो कहीं न कहीं चक्र अस्थिर हो जाते हैं, जिससे क्रोध और काम दोनों बहुत बढ़ते हैं। एक उपाय कर सकते हैं: साथी शक्ति के मंत्र का दशांश जप करें — पुरुष देवता की उपासना हो तो स्त्री शक्ति का, और उलटा — और उसी से तर्पण और मार्जन करें।

84

तंत्र का काम सफल होने के बाद आए अहंकार से कैसे निपटें?

काम देवता की कृपा से हुआ; आप निमित्त थे

· 1:21:13–1:22:23 · Also a question

तंत्र का काम देवता की कृपा से सफल हुआ; आप और हम केवल निमित्त बनते हैं। अगर आप इस पर अहंकार करेंगे, तो अगली बार वह काम होगा ही नहीं। पश्चाताप के लिए, आपने जो प्रयोग किया, उससे जुड़े देवता से क्षमा माँगें, और उनके नाम से हवन, जप और प्रायश्चित करें।

85

जो बच्चे हकलाते हैं और धीरे सीखते हैं, उनके लिए क्या देखना चाहिए?

बुध, दूसरा भाव, और माता का कुल

· 1:22:24–1:23:25 · Also a question

बुध देव की उपासना। पर पहले अपनी और दोनों बच्चों की कुंडली किसी अच्छे ज्योतिषी से दिखवाएँ, ताकि बुद्धि की स्थिति पता चले — दूसरा भाव वाणी का भाव है। और तीसरा: अपने कुल में और माता के कुल में कोई कठिनाई देखें, या अपनी बहन या बुआ से जुड़ी, और उसका उपाय करने की कोशिश करें।

86

वीर गणपति बैताल क्यों धारण करते हैं?

प्रश्न का उत्तर नहीं दिया, जोड़ी वाले रूपों पर सामान्य बात

· 1:23:26–1:25:24 · Also a question

वक्ता इसे बहुत अच्छा प्रश्न कहते हैं और उत्तर देने से मना कर देते हैं — क्योंकि इन रूपों की चर्चा से सब उसी ओर भागेंगे। वे केवल सामान्य बात बताते हैं: हर विद्या के साथ भगवान गणपति के ऐसे रूप हैं, और हर एक के साथ गणपति और भैरव दोनों अलग-अलग रूप लेते हैं।

87

जहाँ साधना से उस स्थान पर कुछ भड़क जाए, वहाँ क्या करें?

उस स्थान पर दत्त माला मंत्र से धूनी

· 1:25:25–1:26:02 · Also a question

तब जिस स्थान पर आप हैं, वहाँ कुछ न कुछ आपकी साधना के असर से पीड़ित हुआ होगा, और उसी माध्यम से आपको कष्ट देने की कोशिश कर रहा है। आप अभी भगवान दत्तात्रेय की साधना कर रहे हैं, इसलिए वहाँ माला मंत्र से धूनी करें।

88

ठीक से पूजा शुरू करते ही सपने क्यों बंद हो जाते हैं?

दूर हों तो बुलाते हैं; पास आएँ तो रुक जाते हैं

· 1:26:03–1:28:22 · Also a question

वक्ता का उत्तर है कि भगवान भी वैसा ही करते हैं जैसा हम करते हैं। जब हम उनसे प्रेम नहीं कर रहे होते, या उनसे दूर जा रहे होते हैं, तो वे हमें अपने पास बुलाते हैं। जब हम आकर्षित होकर उनकी ओर जाते हैं, तो वे रुक जाते हैं — तुम बहुत समय मुझसे दूर रहे, अब मैं दिखाता हूँ। न सपना, न पास आना, न आकर्षण बढ़ना। विरह में बेचैन रहो।

89

सपने में मिले मंत्र के अनुष्ठान में बार-बार बाधा आए तो क्या करें?

पहले गणपति के संकट नाशन का अनुष्ठान

· 1:28:23–1:28:46 · Also a question

सपने में मिले मंत्र के अनुष्ठान से पहले भगवान गणपति के संकट नाशन स्तोत्र का अनुष्ठान करें — चाहे एक दिन का ही। जैसे, अगर मंत्र अनुष्ठान अष्टमी को शुरू करना है, तो चतुर्थी से सप्तमी तक तीन दिन गणपति अनुष्ठान करें।

90

रात के हवन में किस दिशा की ओर मुख करें?

पूर्णिमा की रात के हवन में गृहस्थों के लिए पूर्व और उत्तर

· 1:28:47–1:29:56 · Also a question

हवन करना चाहिए — और गृहस्थों को मुख्य रूप से पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए।

91

क्या हर गृहस्थ को अप्सरा और कामदेव की साधना करनी चाहिए?

इस दावे का खंडन — और कामदेव की साधना असल में कब बताई गई है

· 1:29:57–1:30:57 · Also a question

वक्ता इस दावे को नहीं मानते कि भगवान राम ने अप्सरा साधना की थी और हर गृहस्थ को सौंदर्य और कामदेव की उपासना करनी चाहिए। वे पूछते हैं कि इतना समय कहाँ से लाएँगे। कामदेव की साधना की जगह काम-दहन की साधना कीजिए, भगवान शिव की साधना कीजिए।

92

कामदेव की साधना असल में कब करनी चाहिए?

केवल जब शरीर संतान में साथ न दे — वरना अर्गला

· 1:30:58–1:32:47 · Also a question

केवल तब, जब शरीर में उस तरह के विकार बहुत कष्ट दे रहे हों। यानी धर्म के लिए संतान चाहिए और शरीर साथ नहीं दे रहा, कोई मेडिकल समस्या है। तब करनी चाहिए। योग्य और सुंदर पत्नी के लिए भगवती की साधना कीजिए: पत्नीं मनोरमां देहि।

93

ब्रह्मचर्य कैसे बना रहता है?

यौगिक अभ्यास, कपालभाति, हल्का भोजन और सूर्य उपासना

· 1:32:48–1:33:14 · Also a question

यौगिक क्रिया का अभ्यास, खासकर कपालभाति; गरिष्ठ भोजन का त्याग; और सुबह के समय सूर्य की उपासना।

94

माँ की पायल से बने कड़े को अभिमंत्रित कैसे करें?

अभिमंत्रित करने की ज़रूरत नहीं — माँ के शरीर ने ही कर दिया है

· 1:33:15–1:33:48 · Also a question

अभिमंत्रित करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। कड़ा बनवाइए। फिर शुक्ल पक्ष के सोमवार को गाय के कच्चे दूध से अच्छे से धोइए, और माँ से कहिए कि वे खुद आपको पहनाएँ। उन्होंने इसे इतने दिन अपने शरीर पर रखा है — यह पहले से ही बहुत अभिमंत्रित है।

95

गृहस्थ कौन-सा आसन अपनाए, और रोज़ कवच करें या पूरी सप्तशती?

पहले सुखासन; और दीक्षित हों तभी रोज़ सप्तशती

· 1:33:49–1:34:31 · Also a question

हर गृहस्थ साधक को सबसे पहले खास तौर पर सुखासन ही अपनाना चाहिए। रोज़ के पाठ पर: आपकी इच्छा है — दीक्षित हैं तो रोज़ सप्तशती कीजिए; दीक्षित नहीं हैं तो केवल कवच कीजिए।

96

दुर्गा हवन के लिए हवन कुंड में क्या लिख सकते हैं?

ह्रीं, त्रिकोण, देवता का बीज और अग्नि का बीज

· 1:34:32–1:34:56 · Also a question

हाँ — अगर वक्ता की विधि से कर रहे हैं तो ह्रीं लिखिए। यंत्र बना सकते हैं, त्रिकोण, दोनों त्रिकोण। भगवती के जिस रूप की पूजा कर रहे हैं उसका बीज मंत्र लिख सकते हैं, और अग्नि का बीज मंत्र, जो रं है।

97

धूनी के लिए कौन-सा मंत्र और कौन-सी सामग्री?

अपामार्ग की लकड़ी पर सरसों की धूनी, और शाम का छिड़काव

· 1:34:57–1:35:43 · Also a question

जैसा पहले बताया, अपामार्ग की लकड़ी पर सरसों वाली धूनी कीजिए। या तो सामग्री को एक बार मंत्र से अभिमंत्रित करके रोज़ धूनी कीजिए, या मंत्र पढ़ते हुए धूनी कीजिए। और हर शाम थोड़ा गोमूत्र गंगाजल में मिलाकर कुश से नृसिंह मंत्र के साथ छिड़किए — या रात में दत्तात्रेय माला मंत्र से।

98

जब आत्मविश्वास टूट गया हो तो क्या करें?

पूरी विधि से ग्यारह दिन का कवच अनुष्ठान

· 1:35:44–1:36:35 · Also a question

पूरी विधि-विधान से, ठीक से, कवच का ग्यारह दिन का अनुष्ठान कीजिए।

99

मारण करने वाले को क्या सज़ा मिलती है?

दाने-दाने को मोहताज, और मरने भी नहीं दिया जाता

· 1:36:36–1:37:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं, सज़ा ऐसी मिलती है कि वे दाने-दाने को मोहताज हो जाते हैं — और मरते भी नहीं। ऐसे लोगों को कीड़े पड़ते हैं।

100

शारीरिक बल के लिए कौन-सी साधना करें?

वीर भाव में पंचमुखी हनुमान और मरकटेश्वर भैरव

· 1:37:02–1:37:17 · Also a question

ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भगवान हनुमान जी से जुड़ी वीर भाव साधना कीजिए; पंचमुखी हनुमान की साधना कीजिए; मरकटेश्वर भैरव की साधना कीजिए। दीक्षा लेकर करें तो अति उत्तम है, और संपूर्ण साधना के साथ हनुमान चालीसा का संपुट पाठ भी अति उत्तम है।

101

जिस वार को कोई पूर्वज मरा हो, क्या उस दिन शुभ काम टालना चाहिए?

जब तक उस दिन कोई जन्म न हो, यह रीति माननी चाहिए

· 1:37:18–1:38:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं, यह रीति बहुत सारी जगहों में है — कि जब तक उस दिन कोई बच्चा जन्म न ले, उस दिन कोई शुभ कार्य नहीं होता — और उनके हिसाब से इसे मानना और निभाना चाहिए।

एक श्रोता लिखते हैं कि जहाँ कोई पूर्वज मंगलवार को मरा हो, वहाँ उस दिन कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता। कहा जाता है कि जब तक उस दिन कोई बच्चा जन्म न ले, तब तक कोई शुभ कार्य न हो। वक्ता कहते हैं, यह चीज़ बहुत सारी जगहों में है, और उनके हिसाब से इसे मानना चाहिए — यानी करना चाहिए।

102

अगर कोई भैरव कहें कि वे घर में बँधे हैं, तो क्या करें?

चतुर्दशी को कालिका पूजन और सप्तशती, क्षेत्रपाल निकारी के साथ

· 1:38:10–1:39:09 · Also a question

अगर भैरव जी बंधन में हैं, तो वे कुल भैरव होंगे, और किसी ने उस तरह की मन्नत या भोग किया होगा। चतुर्दशी को भगवती कालिका का पूजन और सप्तशती पाठ करवाइए, क्षेत्रपाल निकारी के साथ — इतना काफ़ी होगा। और भैरव जी की मुक्ति का संकल्प लें, तो पूरा काम हो जाता है।

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अगर कुल देवता मदिरा माँगें तो क्या करें?

पहले पता कीजिए कि उस कुल में किसकी पूजा होती है

· 1:39:10–1:39:54 · Also a question

पहले अपने मामा के कुल के बड़ों से पूछिए कि वहाँ किस देवता की पूजा होती है — भैरव की या किसी और की। सफ़ेद वस्त्र में बहुत कम देवता मदिरा माँगते हैं। पहले पता कीजिए; बिना जाने कुछ मत कीजिए। सात्त्विक मदिरा दे सकें तो कोई दोष नहीं; नहीं तो किसी जानकार को दिखाकर ही कीजिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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