तांत्रिक बंधन — स्तंभन, उच्चाटन और गृहस्थ उसका विमोचन कैसे करे

तांत्रिक बंधन, उसके कारण और उपाय समझाते हैं।

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01

बंधन यानी स्तंभन — स्तंभित कर दिया जाना

क्या बंधन का अर्थ केवल किसी चीज को बांध देना ही है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:29–02:03 · Also a question

नहीं। वक्ता कहते हैं कि बंधन का अर्थ केवल और केवल किसी चीज को बांध देना ही नहीं होता। यहाँ बांध देने का तात्पर्य सीधे स्तंभन से है — स्तंभित कर दिया जाना।

02

स्तंभन की मूल शक्ति के रूप में भगवती पीतांबरा

जगत में स्तंभन का मूल सामर्थ्य भगवती पीतांबरा का है

· Reviewed Sep 2026 · 02:04–02:32

वक्ता कहते हैं कि स्तंभन करने का सामर्थ्य जगत में जो सबसे मूल शक्ति को है, वह भगवती पीतांबरा को है। बंधन शब्द से श्रोता अनभिज्ञ नहीं होंगे, पर इसके पीछे का पूरा विधि विधान और सिस्टम क्या है — वही समझाना है।

03

महाविद्या से स्तंभन सामर्थ्य प्राप्त करने वाली उपशक्तियाँ

अन्य सभी उपशक्तियाँ बांधने का सामर्थ्य महाविद्या से ही प्राप्त करती हैं

· Reviewed Sep 2026 · 02:33–03:04

वक्ता भगवती के तत्व को स्तंभन शक्ति को एकत्रित करके बना ऊर्जा का एक प्रबल समूह बताते हैं, जिनके सामर्थ्य के कारण ही हर चीज अपने स्थान पर स्तंभित होती है, रुकती है। अन्य सभी उपशक्तियाँ इसी महाविद्या से सामर्थ्य प्राप्त करके ही स्तंभन से संबंधित कार्य पूर्ण करती हैं।

04

पीतांबरा की स्तंभन और निग्रह शक्ति के धारक बृहस्पति

बृहस्पति देव पीतांबरा की उसी स्तंभन और निग्रह शक्ति से पृथ्वी को संतुलित रखते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 03:05–03:56

वक्ता कहते हैं कि जिस संतुलन के कारण हम खड़े होकर गिरते नहीं, और जो पृथ्वी का संतुलन है, वह इसी पर टिका है। भगवान बृहस्पति देव अपने अक्ष पर घूमते हुए पूरे ब्रह्मांड में परिक्रमा करते हुए पृथ्वी को संतुलित रखते हैं, और पृथ्वी की ओर आने वाले किसी भी आकाशीय पिंड या उल्का को उसके आभा मंडल में पहुँचने से पहले नष्ट कर देने का सामर्थ्य रखते हैं — और वे भगवती पीतांबरा की उन्हीं स्तंभन महाशक्ति और निग्रह शक्ति से युक्त हैं।

06

नकारात्मक और सकारात्मक प्रयोग के मूल में एक ही तत्व

शक्ति का प्रयोग नकारात्मक हो या सकारात्मक, स्तंभन की यही ऊर्जा उसमें उपस्थित रहती है

· Reviewed Sep 2026 · 04:12–04:35

हाँ। वक्ता कहते हैं कि चाहे कोई इन शक्तियों का नकारात्मक प्रयोग करने का प्रयत्न करे या सकारात्मक, उसमें मूल रूप से यह ऊर्जा उपस्थित होती ही होती है।

मूल रूप से, वक्ता कहते हैं, चाहे कोई नकारात्मक रूप से चाहे सकारात्मक रूप से, किसी भी प्रकार से इन शक्तियों का प्रयोग करने का प्रयत्न करे, उसमें मूल रूप से यह ऊर्जा उपस्थित होती ही होती है।

07

बंधन के लिए शिव से वरदान लेने वाले असुरों की उपमा

जैसे असुर शिव के वरदान से शक्तिशाली होते हैं, वैसे ही हर स्तंभनी प्रक्रिया में यह तत्व रहता है, मूल स्वरूप कोई भी हो

· Reviewed Sep 2026 · 04:36–04:49

वक्ता उपमा देते हैं कि भगवान शिव से ही वरदान प्राप्त करके असुर भी शक्तिशाली होते हैं और इंद्रत्व प्राप्त करने का प्रयास करते हैं या छीन लेते हैं। ठीक उसी प्रकार हर स्तंभनी और बंधन की प्रक्रिया में यह तत्व उपस्थित होता ही है — चाहे वहाँ भगवती का मूल स्वरूप दश महाविद्याओं में से कोई हो या कोई अन्य।

08

परिवार की उन्नति का बंधन

बंधन का पहला प्रकार — खुशहाल परिवार के आय के स्रोत को बंधित कर देना

· Reviewed Sep 2026 · 04:50–05:13

पहला प्रकार जो वे लेते हैं वह है किसी भी परिवार की उन्नति का बंधन — जहाँ परिवार पहले बहुत खुशहाल था, धन धान्य से संपन्न था, लेकिन आय का स्रोत बंधित हो गया।

विषय के आरंभ पर आते हुए वक्ता कहते हैं कि बंधन के प्रकार में कई प्रकार के बंधन और स्तंभन आते हैं। सबसे पहले वे लेते हैं किसी भी परिवार की उन्नति का बंधन कर देना। विषय इस तरह आता है: पहले परिवार बहुत खुशहाल था, धन धान्य से संपन्न था, लेकिन आय का स्रोत बंधित हो गया।

09

आय के स्रोत यानी ग्राहकों को रोक देना

किसी व्यापारिक प्रतिष्ठान को व्यवहार में कैसे बांधा जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 05:14–05:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि केवल बंधित हो जाने भर से काम नहीं होता। व्यापारिक प्रतिष्ठान का उदाहरण लें: जब वहाँ बंधन से संबंधित कोई तांत्रिक क्रिया की जाएगी, तो सबसे पहले जो भी ग्राहक वहाँ आते होंगे, जिनके कारण आय का स्रोत होगा, उन्हें रोका गया होगा।

10

दुकान की लक्ष्मी पर लगाया गया सिद्ध देवता और मंत्र

प्रयोग करने वाला अपने सिद्ध देवता या मंत्र को दुकान की लक्ष्मी पर लगाता है, और स्वयं वहाँ जाता है

· Reviewed Sep 2026 · 05:41–06:07

वक्ता कहते हैं कि प्रयोग करने वाला अपने सिद्ध किए गए देवताओं का — उनके मंत्र की प्रक्रिया, या नाम का प्रभाव, या जिस भी प्रकार उसने मंत्र या देवता को जागृत किया है — उस स्थान पर प्रयोग करता है कि वहाँ की लक्ष्मी बंधित हो जाए, उन्नति बंधित हो जाए। और वह उस प्रतिष्ठान में स्वयं जाएगा अवश्य।

11

ग्राहक बनकर जाना, या अभिमंत्रित सामग्री भेजना

वह ग्राहक या मित्र बनकर आता है, या अभिमंत्रित सामग्री भिजवाता है — और सारी प्रक्रिया चौखट पर होती है

· Reviewed Sep 2026 · 06:08–06:32

वक्ता कहते हैं कि चाहे वह ग्राहक बनकर जाए, मित्र बनकर जाए, किसी भी प्रकार से जाए — वह वहाँ जाएगा, क्योंकि उसे अपनी प्रक्रिया पूर्ण करनी है; या अपनी सामग्री अभिमंत्रित करवाकर किसी को भेजेगा। और इसमें, वे कहते हैं, चौखट सदैव अति महत्वपूर्ण होती है।

12

प्रतिष्ठान के देवताओं को रुक जाने की शपथ देना

चौखट पर खड़े होकर प्रयोग करने वाला उस प्रतिष्ठान के सहयोगी देवी-देवताओं को स्तंभित होने की शपथ देता है

· Reviewed Sep 2026 · 06:33–07:05

उस प्रतिष्ठान की चौखट पर खड़े होकर, वहाँ पैर रखकर, और अपने जागृत मंत्रों और देवताओं के माध्यम से जो प्रक्रियाएँ वह चलाता है, उनके द्वारा वह उस स्थान के देवताओं को — और उसके स्वामी का साथ देने वाले, लक्ष्मी और सामर्थ्य देने वाले सभी देवी-देवताओं को — कहीं न कहीं शपथ देगा कि वे स्तंभित हो जाएँ, रुक जाएँ।

13

ग्राहकों का उच्चाटन

शपथ के बाद उच्चाटन आता है — किसी ग्राहक का मन दुकान में नहीं लगता और वे बिना लिए चले जाते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 07:06–07:42

दूसरा विषय, वक्ता कहते हैं, उच्चाटन का है: वहाँ जो भी ग्राहक आएगा, कोई पुरुष या स्त्री कुछ लेने, उनका मन वहाँ नहीं लगेगा और ग्राहक भागेंगे। उन्हें अच्छा नहीं लगेगा, लगेगा चलो कहीं और चलते हैं, बाहर से ही भाग जाएँगे, भीतर नहीं आएँगे, और भीतर आएँगे तो रुकेंगे नहीं।

14

श्री का जाना और चेहरे की आकर्षक कांति का हटना

जिस स्थान से श्री हटती हैं, वहाँ के लोग भी श्री-कांति विहीन हो जाते हैं और आकर्षण चेहरे से हट जाता है

· Reviewed Sep 2026 · 07:43–08:16

वक्ता कहते हैं कि जब कोई स्थान श्री विहीन होता है — चाहे तांत्रिक प्रक्रिया से, चाहे किसी अपने दोष से — तो वहाँ उपस्थित लोग भी श्री-कांति विहीन हो जाते हैं। गद्दी पर बैठने वाले स्वामी और वहाँ काम करने वालों के भीतर की आकर्षण क्षमता भी स्तंभित हो जाती है और उनके शरीर और चेहरे के आभा मंडल को छोड़कर हट जाती है।

15

चलते प्रतिष्ठान के आकर्षक विक्रेता और सम्मोहन

खूब चलने वाली दुकान में देखने में अच्छे, बातचीत में चतुर विक्रेता होते हैं और एक सम्मोहन ग्राहक को रोके रखता है

· Reviewed Sep 2026 · 08:17–08:54

वक्ता कहते हैं कि बहुत चलने वाली दुकान में दो चीजें देखने को मिलती हैं। पहली — वहाँ के सेल्समैन या सेल्स लड़कियाँ देखने में बहुत अच्छे, बात करने वाले, वाक् चातुर्य से युक्त और आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं; आप स्वतः सम्मोहित होकर उनकी बात मान लेते हैं, और कई बार जो सामान लेने की इच्छा भी नहीं थी वह भी वे कन्विंस कर देते हैं, क्योंकि उनके पास अपनी टेक्निक है।

16

पुण्य बल, अनुष्ठान का प्रभाव, या किसी देवता की उपस्थिति

जहाँ दुकानदार रूखा व्यवहार करता है, वहाँ भी ग्राहक सामान क्यों ले लेते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 08:55–09:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कई जगह दुकानदार को कोई मतलब नहीं होता, बहुत रूड बिहेव करते हैं, फिर भी आप सामान ले लेते हैं और पता नहीं चलता क्यों — और दुकान भरी पड़ी है, सेल चल रही है। यह, वे कहते हैं, कहीं न कहीं पुण्य बल है, या अनुष्ठान का प्रभाव, या उस देवता और शक्ति की उपस्थिति जो बांधकर रख रही है: उनकी ऊर्जा वहाँ उपस्थित ग्राहकों की ऊर्जाओं पर प्रबल पड़ रही है, और दबने के कारण ग्राहक उसकी बात मान ले रहे हैं।

17

नकारात्मक को भी शांत कर देने वाली सौम्य, आकर्षक, शुभ्र ऊर्जा

दूसरी ओर सौम्य, आकर्षक, शुभ्र ऊर्जा नकारात्मक व्यक्तियों को भी शांत करके अपनी ओर खींच लेती है

· Reviewed Sep 2026 · 09:20–09:56

दूसरी ओर, वक्ता कहते हैं, सौम्य ऊर्जा है, आकर्षक ऊर्जा है, शुभ्र ऊर्जा है, बहुत अधिक सकारात्मक ऊर्जा है। वह नकारात्मक व्यक्तियों पर भी प्रभाव डालती है, उन्हें शांत कर देती है, अपनी ओर सम्मोहित और आकर्षित कर लेती है, और फिर अपना कार्य सिद्ध कर देती है।

दूसरी ओर, वक्ता कहते हैं, सौम्य ऊर्जा है, आकर्षक ऊर्जा है, शुभ्र ऊर्जा है, बहुत अधिक सकारात्मक ऊर्जा है। वह नकारात्मक व्यक्तियों के ऊपर भी प्रभाव डाल रही है, उन्हें भी शांत कर दे रही है, उन्हें अपनी ओर बहुत सम्मोहित कर ले रही है, आकर्षित कर ले रही है, और फिर अपने कार्य को सिद्ध कर दे रही है।

18

लोक संभाषणी या समूह वशीकरण की ऊर्जा

लोक संभाषणी या समूह वशीकरण की ऊर्जा — बंधन प्रयोग असल में इसी को बांधता है

· Reviewed Sep 2026 · 09:57–10:19

इसे लोक संभाषणी ऊर्जा कहिए, समूह वशीकरण की ऊर्जा कहिए, या समूह आकर्षणीय ऊर्जा — वक्ता कहते हैं कि भगवती का यह तत्व वहाँ इस प्रकार प्रकाशित होकर, मंत्र बल और तंत्र बल से युक्त होकर, कार्य सिद्ध करवा रहा है। जब बंधन की प्रक्रिया होगी और कोई मंत्र बल का प्रयोग करेगा, तो वह इन्हीं चीजों को बांधेगा।

19

उच्चाटन का मिश्रण पहले स्थापित देव शक्ति को हटाता है

ऐसे प्रयोगों में श्मशान की भस्म क्यों छिड़की जाती है?

· Reviewed Sep 2026 · 10:20–10:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि लोग कहते हैं श्मशान की भस्म छिड़क दी — वह भस्म ऐसे ही नहीं है। उच्चाटन की प्रक्रिया में जिन-जिन चीजों को मिलाकर करना है, जब प्रयोग करने वाला उन्हें मिलाकर करेगा, तो जो देव शक्ति समूह वहाँ समूह वशीकरण के निमित्त स्थापित है — चाहे कोई भी हो — उसे वह सबसे पहले उच्चाटित करेगा।

20

स्वामी के अधिकार की सीमा, और उसकी जगह क्या स्थापित होता है

जहाँ तक स्वामी का अधिकार था वहाँ तक की शक्ति हट जाती है, और उसकी जगह दूसरी ऊर्जा स्थापित कर दी जाती है

· Reviewed Sep 2026 · 10:52–11:33

वक्ता कहते हैं कि उस पूरे स्थान पर जहाँ तक बैठे स्वामी का अधिकार था, वहाँ तक उस शक्ति और ऊर्जा का प्रभाव भी था। अब वहाँ तक वह ऊर्जा उपस्थित नहीं है, और उसकी जगह उसके विपरीत स्थापित कर दिया गया है — उच्चाटनी ऊर्जा, श्मशानी ऊर्जा, ऐसी ऊर्जा कि जो भी आए वह स्वयं भाग जाए, उसकी बुद्धि-विवेक डिस्टर्ब हो, वह चिड़चिड़ा हो जाए और झगड़ा होने लगे।

21

संकल्प और सौगंध से भेजी गई प्रयोगकर्ता की अपनी सिद्ध ऊर्जा

जिसे बंधन कहते हैं वह असल में उच्चाटनी प्रक्रिया है — अपनी सिद्ध ऊर्जा को संकल्पित करके सौगंध देकर भेजना

· Reviewed Sep 2026 · 11:34–12:00

वक्ता कहते हैं कि हम बोले तो बंधन, लेकिन वहाँ विशेषतः उच्चाटनी प्रक्रिया की गई। बंधन की जगह होता यह है कि किसी शक्ति को सिद्ध करने के बाद उसके प्रयोग से — जिस पर प्रभाव डालना है या जिसे बांधना है — अपनी सिद्ध की हुई ऊर्जा को संकल्पित करके, सौगंध देकर, पूरे विधि विधान से सामने वाले के स्थान से उन चीजों को हटाया जाता है।

22

परिवार में कलह, क्लेश और विद्वेषण के लिए क्षुद्र प्रक्रियाएँ

द्वेषी अपना ही व्यक्ति खुशहाल घर में कलह, क्लेश और विद्वेषण के लिए क्षुद्र प्रक्रियाएँ करता है

· Reviewed Sep 2026 · 12:01–12:33

वक्ता कहते हैं कि सेम इसी प्रकार, जब किसी के घर में बहुत सुख, संपदा, ऐश्वर्य, वैभव है और सब मिलजुल कर रहते हैं, और कोई द्वेषी व्यक्ति — अक्सर अपना ही कोई — ऐसे परिवार से द्वेष कर बैठता है, तो परिवार में कलह-क्लेश हो जाए, विद्वेषण हो जाए, इसके लिए वह अनेक प्रकार की क्षुद्र प्रक्रियाएँ करता है।

23

देव कृपा और पितृ कृपा पर जीना, सुरक्षा का प्रबंध न होना

सबसे बड़ी नकारात्मक चीज — देव कृपा और पितरों की कृपा से रहना पर सुरक्षा का कोई प्रबंध न करना

· Reviewed Sep 2026 · 12:34–12:58

वक्ता कहते हैं कि सबसे बड़ी नकारात्मक चीज यह है कि आप देव कृपा और पितरों की कृपा से बहुत अच्छे से रह रहे थे, लेकिन सुरक्षा का प्रबंध नहीं कर रखा था। जब तक लोगों पर इस प्रकार की दुविधा और दुख नहीं आते, वे इसको लेकर सचेत नहीं होते।

24

वशिष्ठ, विश्वामित्र का प्रयोग, और उग्रतारा, एकजटा, कामाख्या

ऋषि वशिष्ठ तंत्र के क्षेत्र में क्यों उतरे?

· Reviewed Sep 2026 · 12:59–13:20 · Also a question

वक्ता इसे अपना स्थायी पौराणिक उदाहरण बताते हैं: ऋषि वशिष्ठ, जो पहले केवल वैदिक मार्ग में थे, भगवती उग्रतारा, तारा, एकजटा और भगवती कामरूप कामाख्या की साधना के लिए तंत्र के क्षेत्र में उतरे। तंत्र की प्रक्रिया में उतरने का सबसे बड़ा कारण था ऋषि विश्वामित्र के द्वारा किए गए तांत्रिक प्रयोग और उनसे हुई हानि; उसके बाद प्रतिकार के निमित्त वे इस क्षेत्र में आए।

25

नशे से बर्बाद होते सभ्य बच्चे

सभ्य परिवार पर आभिचारिक प्रयोग — सभ्य बच्चे बिना नशे के रह नहीं पाते

· Reviewed Sep 2026 · 13:21–13:52

वक्ता कहते हैं कि पहले कोई ध्यान नहीं देता; जब कलह-क्लेश और फूट पड़ जाती है, बर्बादी हो जाती है, तब देखते हैं कि यहाँ क्या हुआ। वे ऐसे परिवारों की ओर इशारा करते हैं जहाँ बहुत सभ्य बच्चे थे, कभी कोई नशा-पानी नहीं, और परिवार पर ऐसा प्रयोग हो जाता है कि बच्चे बिना नशा किए रह नहीं सकते और परिवार बर्बाद, पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है। यह, वे कहते हैं, आभिचारिक प्रयोग है।

26

मानसिक उच्चाटन, विद्वेषण, श्मशानी शक्तियाँ और असंतुष्ट देव शक्ति

मानसिक उच्चाटन, विद्वेषण और श्मशानी या असंतुष्ट देव शक्तियाँ क्षुद्र शक्ति के साथ मिला दी जाती हैं

· Reviewed Sep 2026 · 13:53–14:24

मानसिक उच्चाटन, मन का उच्चाटन, दो बहुत प्रेम करने वालों के बीच विद्वेषण — और इन प्रक्रियाओं के साथ-साथ बाह्य शक्तियाँ: कोई श्मशानी शक्ति, आपके घर की कोई शत्रु शक्ति, या घर में उपस्थित कोई असंतुष्ट देव शक्ति। इन्हें प्रयोगकर्ता की सिद्ध की हुई क्षुद्र शक्ति के साथ मिलाकर आपकी ही चीज आपके विपरीत प्रयोग कर दी जाती है।

27

देर से मानना, और हल्के प्रयोगों का असफल होना

जब तक लोग मानते हैं कि ऐसा हो सकता है, तबाही इतनी हो चुकी होती है कि छोटे-मोटे प्रयोग काम नहीं करते

· Reviewed Sep 2026 · 14:25–14:59

वक्ता कहते हैं कि जब तक आप इस पूरे विधान को, तंत्र को समझेंगे और मानेंगे कि हाँ ऐसा हो सकता है, और प्रतिकार का सोचेंगे, तब तक वह इस स्तर तक तबाही दे चुकी होगी कि आप फिर उठ नहीं पाएँगे। हानि बहुत ऊँचे स्तर पर पहुँच जाए तो छोटे-मोटे या हल्के-फुल्के प्रयोगों से नहीं होता, और व्यक्ति और नकारात्मक होता जाता है — कि ऐसी चीजें होती नहीं, और होती हैं तो हम कर रहे हैं तो क्यों नहीं हो रहा।

28

विवाह के समय कोख का बंधन

कोख बंधन सबसे अधिक कब किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 15:00–15:12 · Also a question

घर पर लगाए गए तांत्रिक बंधन के बाद आता है कोख बंधन, जो वंश वृद्धि के निमित्त कोख को ही स्तंभित कर देना है। इसमें सबसे अधिक जो प्रयोग होता है, वक्ता कहते हैं, वह लोग विवाह के समय ही कर देते हैं। कुँवारी लड़कियों पर भी करते हैं, विवाह के समय भी करते हैं; इसीलिए कहा जाता है कि दूल्हा-दुल्हन को बहुत सचेत रहना चाहिए।

29

यह भ्रांति कि केवल स्त्री की कोख बांधी जाती है

क्या केवल स्त्री का ही बंधन किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 15:13–15:45 · Also a question

वक्ता इसे भ्रांति कहते हैं कि केवल स्त्री का ही बंधन किया जाता है, उसकी ही कोख बंधित होती है। ऐसा नहीं है — कई बार पुरुष का बंधन कर दिया जाता है। तब पुरुष सक्षम होते हुए भी, जब तक उसके भीतर देव कृपा नहीं होगी, संतान उत्पत्ति नहीं हो सकती।

30

साध्य रोग — घर बना चुका तांत्रिक रोग

अगर तांत्रिक प्रयोग से देह में रोग उत्पन्न हो जाए तो क्या होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 15:46–16:30 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब किसी पर तांत्रिक बंधन या प्रयोग हो और वह भौतिक रूप से देह के भीतर रोग उत्पन्न कर दे, तब उसे नष्ट कर पाना बहुत मुश्किल विषय होता है। अगर आरंभिक चरण में है और कोई दैहिक रोग नहीं हुआ है, तो काट करके निवृत्त हो गए, देव कृपा से रोग भी नष्ट हो जाएगा। लेकिन दो-चार-पाँच-दस साल हो गए और रोग अपना घर बना चुका है, तो वह तांत्रिक रोग जल्दी नष्ट नहीं होगा, क्योंकि वह साध्य रोग हो जाएगा।

31

मिसकैरेज, गर्भ न ठहरना, और द्वेष के कारण

गर्भ न ठहरना या मिसकैरेज जो दवा से ठीक न हो, और द्वेष अच्छाई देखकर ही क्यों उगता है

· Reviewed Sep 2026 · 16:31–17:01

वक्ता कहते हैं कि स्त्री या तो गर्भ धारण ही नहीं कर पाएगी, या करेगी तो मिसकैरेज हो जाएगा; और कितनी भी दवा करा लीजिए, ठीक नहीं होगा। द्वेष किससे होता है — कुछ अच्छाई होगी तो ही द्वेष होगा: आप किसी भी कारण से ऊँचे बढ़ रहे हैं, आगे हैं, धन-धान्य संपन्न हैं। और जिसका कोई पुत्र-पुत्री नहीं, जो निसंतान है, वह भी द्वेष करके कुछ करा देता है।

32

खिलाकर, स्पर्श से, या बैठाकर बंधन

कुँवारी कन्या का बंधन उसे पता चले बिना कैसे हो सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 17:02–17:16 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि द्वेष के कारण अगर किसी कुँवारी कन्या का भी बंधन करा दिया गया तो उसे पता नहीं चलेगा। खिलाकर भी हो सकता है, स्पर्श के माध्यम से हो सकता है, बैठाकर हो सकता है — अनेक विधान हैं।

तो द्वेष के कारण, वक्ता कहते हैं, अगर किसी कुँवारी कन्या का भी बंधन करा दिया गया, तो उसे पता नहीं चला होगा। खिला-पिलाकर भी हो सकता है, स्पर्श के माध्यम से हो सकता है, बैठाकर भी हो सकता है। अनेक विधान हैं।

33

मासिक धर्म के समय के प्रतिबंधों के पीछे का कारण

रजस्वला कन्या को एकांत में रहने को क्यों कहा जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 17:17–17:40 · Also a question

वक्ता पूछते हैं कि रजस्वला कन्या को क्यों कहा जाता है कि एकांत में रहे, किसी से मिले नहीं, स्पर्श आदि से बचे — यहाँ तक कि चरण स्पर्श तक की मनाही होती है। इसके पीछे कारण है, वे कहते हैं: द्वेष करने वाले को पता चल ही जाता है कि इस समय मासिक धर्म में है, इतना तो सबको सेंस है, और ऐसे समय में इस प्रकार की प्रक्रियाएँ करवाकर उसके शरीर से स्पर्श मात्र करा दिया जाता है।

34

विवाह के बाद गर्भ न ठहरना, और विवाह मंडप में बंधन

ऐसे बांधी गई कन्या को विवाह के बाद गर्भ नहीं ठहरता, और विवाह मंडप में भी यही बंधन फिर लगाया जाता है

· Reviewed Sep 2026 · 17:41–18:06

वक्ता कहते हैं कि आगे चलकर उसे ऐसी दिक्कत हो जाएगी कि विवाह के पश्चात गर्भ ठहरेगा ही नहीं। और उसके बाद विवाह के समय, विवाह मंडप में, शुरू से अंत तक की पूरी विवाह प्रक्रिया के दौरान भी इस अशुद्ध तंत्र में ऐसे कई विधान हैं जिनमें कन्या के गर्भ का स्तंभन, बंधन कर दिया जाता है।

35

मस्तिष्क, विवेक और बुद्धि का स्तंभन

बुद्धि का बंधन क्या होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 18:07–18:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि मस्तिष्क, विवेक और बुद्धि को बांधने और स्तंभित करने की एक विद्या होती है, जिससे व्यक्ति विक्षिप्त हो जाता है। वह भी, वे कहते हैं, अपने आप में एक उच्च स्तर का उच्चाटनी प्रयोग ही है: व्यक्ति की बुद्धि इतनी डिस्टर्ब हो जाती है कि वह जरा भी एकाग्र नहीं हो पाता, स्थिर ही नहीं हो पाता — तो विचार क्या करेगा?

36

सेंटर में न रहने वाली पुतलियाँ, और उच्चाटित रहती निद्रा

इस प्रकार के बंधन वाले व्यक्ति की आँखों में क्या लक्षण दिखता है?

· Reviewed Sep 2026 · 18:37–19:21 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अस्थिरता इतनी बढ़ जाती है कि ऐसे व्यक्ति की आँखों की काली पुतलियाँ कभी सेंटर में नहीं होंगी। सामान्य व्यक्ति की पुतली बिल्कुल सेंटर में होती है, आँख से आँख मिलाइए तो लगता है एक-दूसरे के नेत्र में देख रहे हैं। लेकिन जो ऐसी उच्चाटनी प्रक्रिया से मानसिक रूप से विक्षिप्त होने लगता है, उसकी पुतलियाँ सेंटर में नहीं रहेंगी — भेंगा जैसा लगेगा, टेढ़ी हो जाएँगी, बिना चोट लगे।

37

पूरे कुनबे में पुत्र नहीं, संतान नहीं, सारे विवाह रुके

जब कुनबे के किसी भाई को पुत्र न हो और सबका विवाह रुका हो, तो प्रयोग पिता या दादा के समय का है

· Reviewed Sep 2026 · 19:22–20:17

वक्ता पूरे परिवार पर बंधन का वर्णन करते हैं — चार भाइयों का परिवार है तो किसी को पुत्र ही नहीं हो रहा, केवल पुत्रियाँ हो रही हैं; या कई बार संतान ही नहीं; या पूरे कुनबे में विवाह ही रुक गया है, चार भाई और चारों का विवाह रुका, सारे मांगलिक कार्य रुके। जब चारों-पाँचों का रुक गया हो, वे कहते हैं, तो जान लीजिए कि यह इस पीढ़ी के तंत्र प्रयोग का असर नहीं, बल्कि पिता या दादा के समय का प्रभाव है जो अब किसी कारण बहुत प्रबल हो गया है और चरम पर चल रहा है।

38

कुल देवताओं के स्थान पर लगाया गया समग्र बंधन

मूल देवताओं के स्थान पर किया गया बंधन समग्र रूप से हर चीज बांध देता है, और इसे घर के भीतर के लोग करते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 20:18–20:40

अगली प्रक्रिया, वक्ता कहते हैं, आपके मूल देवताओं के स्थान पर ही ऐसा बंधन कर देना कि समग्र रूप से हर चीज का बंधन हो जाए। और यह प्रक्रिया करने वाले लोग, वे कहते हैं, बिल्कुल परिवार के भीतर के ऐसे लोग होते हैं जिनका आपके घर में आना-जाना, उठना-बैठना सब कुछ हो। अति विद्वेषी लोग।

39

जीवित शव — मृत्यु नहीं, पर पूर्ण आर्थिक और मानसिक क्षय

क्या बंधन प्रयोग से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है?

· Reviewed Sep 2026 · 20:41–21:17 · Also a question

नहीं। वक्ता कहते हैं कि यह ध्यान रखिए: बंधन चाहे किसी भी प्रकार का हो, तांत्रिक घात हो चुका हो, बंधन की प्रक्रिया में किसी की मृत्यु नहीं होती — मृत्यु से संबंधित विषय इसमें कभी नहीं होगा। सबसे बड़ा विषय यह होगा कि व्यक्ति मृत्यु के स्तर तक पहुँच जाएगा: आर्थिक हानि इतनी, मानसिक क्षय इतना कि वह स्वयं को जीवित शव के समान मानेगा, और सामर्थ्य, बुद्धि-विवेक होते हुए भी उनका सदुपयोग नहीं कर पाएगा। शरीर में अति आलस्य बना रहना इन चीजों का प्रतीक हो जाता है।

40

भगवती ललिता त्रिपुरसुंदरी की सेना पर विघ्नासुर का यंत्र

ललिता की सेना पर विघ्नासुर का विघ्नराज गणपति यंत्र — प्रयोग से आए आलस्य का पौराणिक उदाहरण

· Reviewed Sep 2026 · 21:18–21:45

वक्ता मानते हैं कि ग्रह-नक्षत्रों का भी अपना प्रभाव है, लेकिन तांत्रिक प्रयोग के लिए वे यह उदाहरण देते हैं: विघ्नासुर ने भगवती ललिता त्रिपुरसुंदरी की सेना के ऊपर भगवान विघ्नराज गणपति का यंत्र बनाकर रख दिया, जिससे पूरी सेना में आलस्य उपस्थित हो गया — और ऐसे ही तांत्रिक प्रयोग के कारण भगवती ललिता त्रिपुरसुंदरी को महागणपति का आवाहन करना पड़ा।

41

चौखट के पास, ब्रह्म स्थान पर, तुलसी जी के पास

घर में ऐसी चीजें कहाँ रखी जाती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 21:46–22:22 · Also a question

वक्ता यह नहीं कह रहे कि आज के प्रयोग इतने उच्च कोटि के होंगे, लेकिन इस प्रकार की प्रक्रियाएँ हैं, जो किसी की चौखट के पास, चौखट के भीतर, ब्रह्म स्थान पर, तुलसी जी के पास या ऐसे देव स्थानों पर कर दी जाती हैं। क्योंकि हमारे शरीर के भीतर की दैवीय ऊर्जा के कारण ही हम चलते-बोलते, हँसते-खेलते हैं — और उस ऊर्जा का जितना क्षय होगा, हम उतना ही झुकते जाएँगे, विवेक उतना ही कमजोर होगा, और भीतर से उतने ही नकारात्मक होते जाएँगे।

42

जो जप, कवच प्रसारण और हवन नहीं करते

जो जप-तप, कवच का प्रसारण और हवन नहीं करते, उन पर ये चीजें सबसे आसानी से असर करती हैं

· Reviewed Sep 2026 · 22:23–22:43

विशेष करके, वक्ता कहते हैं, अगर कोई जप-तप नहीं करता, कवच का प्रसारण नहीं करता, कोई विशेष हवन-पूजन-पाठ नहीं कर रहा, तब ये चीजें उस पर बड़ी आसानी से प्रभाव देने लगती हैं। और यह, वे कहते हैं, आजकल का बिल्कुल सामान्य विषय है।

43

भगवान शिव की शरणागति, और कच्चे दूध से अभिषेक

बंधन विमोचन के लिए सबसे पहला काम क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 22:44–23:28 · Also a question

जब कभी ऐसा विषय हो — कोई बोले या समझ में आए कि बंधन की प्रक्रिया की गई है और आपका या परिवार के किसी सदस्य का उच्चाटन हो रहा है — तो बंधन विमोचन के लिए सबसे पहला काम, वक्ता कहते हैं, भगवान शिव की शरणागति अवश्य लेना है। हर प्रकार के श्राप से विमुक्त करने में जो सर्व समर्थ हैं वे भगवान महादेव सदाशिव हैं। फिर शिव मंदिर में कच्चे दूध से अभिषेक करते हुए, अपने अधिकार के अनुसार पंचाक्षरी का जप करते हुए अभिषेक कीजिए — पहले दिन से ही शरीर का भारीपन हल्का होने लगता है।

44

त्रुटियों की क्षमा, और शिव के निर्माल्य से आरंभ होता विमोचन

हर शुरुआत भगवान शिव के अभिषेक से क्यों करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 23:29–23:59 · Also a question

जब भी शुरुआत करें — चाहे तंत्र के क्षेत्र में कर रहे हों या कोई विपदा आई हो और कर रहे हों — उसमें भगवान शिव का अभिषेक अवश्य रखिए, वक्ता कहते हैं। क्योंकि आज के समय में संभव नहीं कि आप एकदम नए होकर पूरे विधि विधान से हर चीज कर लेंगे; बहुत सारी त्रुटियाँ होंगी। उन सभी त्रुटियों को भगवान शिव ऐसे भी क्षमा कर देंगे, और विमोचन की जो प्रक्रिया आरंभ होनी है वह भगवान शिव के निर्माल्य से ही होगी।

45

गद्दी पर प्रयोग होने वाली विद्याएँ, अधिकतर श्मशानी

बंधे हुए व्यापारिक प्रतिष्ठान का उपाय क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 24:00–24:30 · Also a question

व्यापारिक प्रतिष्ठान पर लौटते हुए वक्ता कहते हैं कि पहला विषय है ग्राहकों के आकर्षण का बंद हो जाना — या चौखट पर कोई तांत्रिक प्रक्रिया कर दी गई है, जिससे ग्राहक उच्चाटित होते हैं और नहीं आते। आपकी गद्दी पर भी कुछ किया जा सकता है; ऐसी बहुत सी विद्याएँ हैं, अभी भी हैं, और अधिकतर उनमें श्मशानी होती हैं।

46

मुख्य द्वार पर गौ माता को सही भोजन खिलाना

गौ माता को खिलाना सबसे अचूक उपाय क्यों कहा गया है?

· Reviewed Sep 2026 · 24:31–25:05 · Also a question

ऐसी प्रक्रिया में, वक्ता कहते हैं, सदैव स्मरण रखिए कि इसमें सबसे अचूक होती हैं गौ माता। गौ माता को अपनी चौखट पर खाना खिलाएँ — उनके लिए समय का कोई बंधन नहीं, सुबह, दोपहर, शाम, रात, जब भी। लेकिन संभव हो तो अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर खिलाएँ, और सही भोजन खिलाएँ, अपना जूठन नहीं: मीठी रोटी, खीर या खीर-रोटी जैसी सामग्री, अपने हाथ से, गुड़ मिलाकर।

47

चौखट पर थाली, और गौ माता का वहीं मूत्र विसर्जन

थाली चौखट पर रखें, और अगर गौ माता स्वतः वहाँ मूत्र विसर्जन कर दें तो 99% कल्याण उसी क्षण हो जाता है

· Reviewed Sep 2026 · 25:06–25:32

चौखट के ऊपर, या अपने यहाँ उससे संबंधित जो स्थान हो उस पर, थाली रखकर खिलाएँ — वक्ता कहते हैं कि उनकी वहाँ उपस्थिति और खाने मात्र से उस स्थान पर की गई तांत्रिक प्रक्रिया बहुत हद तक नष्ट होने लगती है। और खाना खाने, पानी पीने के बाद अगर गौ माता स्वतः वहाँ मूत्र विसर्जन कर दें, तो जान लीजिए, वे कहते हैं, 99% कल्याण उसी क्षण हो जाता है। न तिथि देखनी, न नक्षत्र, न मुहूर्त — वह सब भी वे कर देती हैं, अगर स्वयं से होने लगे।

48

केवल तब जब पितृ साथ छोड़ देते हैं

तांत्रिक बंधन वास्तव में कब सफल होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 25:33–26:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि तांत्रिक बंधन आदि सफल तभी होता है जब आपके पितृ साथ नहीं देते। पितृ स्वतः कभी साथ नहीं छोड़ सकते: उनके साथ छोड़ने के लिए आपके द्वारा, या आपके माता-पिता या उनसे बड़े समय के लोगों द्वारा बहुत सारे अपराध किए गए होंगे। पितृ जब साथ छोड़ेंगे तभी आपके ऊपर इन सभी चीजों का प्रभाव आरंभ होगा।

49

पितरों का कल्याण और उनकी उपस्थिति का पुनः बनना

गौ सेवा पितरों के लिए क्या करती है?

· Reviewed Sep 2026 · 26:07–26:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब आप गौ माता की सेवा-पूजा करेंगे और उस प्रकार का विषय वहाँ उपस्थित होगा, तो उससे इन सभी का कल्याण हो जाएगा और इन सभी की उपस्थिति भी सही प्रकार से बन जाएगी। वे जोड़ते हैं कि यही चीज आप घर पर भी करते हैं, और चौखट इतनी आवश्यक चीज है कि हर लाइव में वे इस विषय को टच करते हैं, ताकि गलती से भी न भूलें।

50

चौखट को स्नान, सुगंध, दीप — फिर अपना जप

घर की चौखट पर नित्य क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 26:33–27:00 · Also a question

जीवन में और कुछ न कर पाएँ, वक्ता कहते हैं, तो घर की चौखट हो, चौखट की नित्य सेवा-पूजा हो, नित्य स्नान कराइए, सुगंधित रखिए, दीप प्रज्वलित कीजिए — और उसके बाद जो पूजन करते हैं वह कीजिए, चाहे पंचाक्षरी का जप हो, जयंती मंगला का जप, साम्ब शिव का जप, या 32 नामावली का जप। प्रतिदिन का जो नियम उठाएँ, चौखट का पूजन करने के बाद उसे निभाइए। चौखट अगर मजबूत, सुरक्षित, पूजित है तो 50% समस्याएँ वह ऐसे ही सोख लेती है, नष्ट कर देती है; और नहीं करते तो फिर पूरी समस्या आप झेलिए।

51

संकल्प के साथ किया गया महाविद्या पाठ और प्रयोग

कोख बंधन या बुद्धि के बंधन के लिए संकल्प के साथ महाविद्या पाठ और प्रयोग चाहिए

· Reviewed Sep 2026 · 27:01–27:26

कोख बंधन, बुद्धि का भ्रमित होना, या उस प्रकार का बंधन — उसमें, वक्ता कहते हैं, आपको दैविक ऊर्जाओं का पूरा अच्छे से प्रयोग करना या करवाना होगा: महाविद्याओं से संबंधित पाठ, प्रयोग, महाविद्या का इस प्रकार का काम। जब संकल्प करवाकर ये चीजें करवाएँगे, तो इन चीजों का काट-कटान बहुत जल्दी होगा।

52

साबर मंत्र की विद्याएँ और असंतुलन व पलटने का जोखिम

क्या साबर मंत्रों से ये चीजें काटी जा सकती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 27:27–28:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बहुत सारी साबर मंत्र की विद्याएँ हैं जिनका प्रयोग करके इन चीजों को काटा जा सकता है। लेकिन उसमें एक असंतुलन का विषय आ सकता है: इस प्रकार की चीजों से जब काट-कटान होता है, तो वे पलटकर पुनः आपके ऊपर प्रभाव, दुष्प्रभाव भी डाल सकती हैं।

बहुत सारी साबर मंत्र की विद्याएँ हैं, वक्ता कहते हैं, जिनका प्रयोग करके इन चीजों को काटा जा सकता है। लेकिन उसमें एक असंतुलन का विषय उपस्थित हो सकता है: इस प्रकार की चीजों से जब काट-कटान होता है, तो उनका पलटकर पुनः आपके ऊपर प्रभाव, दुष्प्रभाव भी पड़ सकता है।

53

हनुमान जी का जंजीरा, और पास कोई कन्या या बालक न हो

काट का कोई भी प्रयोग हो, हनुमान चालीसा ही क्यों न हो, व्यक्ति के पास कोई कन्या या बच्चा खड़ा न हो

· Reviewed Sep 2026 · 28:09–28:46

वक्ता हनुमान जी के जंजीरे का उदाहरण देते हैं: मान लीजिए किसी की बुद्धि बहुत भ्रमित है, जंजीरा सिद्ध करके आप जल अभिमंत्रित करके प्रयोग कर रहे हैं। तब एक बात ध्यान रखिए — किसी भी प्रकार के बंधन का काट करने के लिए आप संकल्प लेकर प्रयोग करते हैं, चाहे हनुमान चालीसा ही कर रहे हों, तो जिस व्यक्ति पर प्रयोग कर रहे हैं उसके पास कोई कुँवारी कन्या या कोई बालक-बालिका खड़े न हों।

54

जो कटता है वह पास के संवेदनशील आभामंडल पर चिपकता है — लाग

उतारे के पास कोई संवेदनशील व्यक्ति क्यों नहीं खड़ा होना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 28:47–29:16 · Also a question

वक्ता उदाहरण देते हैं: एक बच्ची को कोई समस्या है, आप उस पर उतारा कर रहे हैं, काट-कटान का मंत्र चला रहे हैं, और बगल में दूसरी बच्ची खड़ी है। कहीं न कहीं उस पर प्रभाव पड़ेगा ही, क्योंकि जब कटेगा, जब वे चीजें बिखरना शुरू होंगी, तो आसपास जिसका भी संवेदनशील आभामंडल मिलेगा उस पर चिपकेंगी। तो ये लोग अकारण प्रभावित हो जाते हैं। इसे भी, वे कहते हैं, लाग लगने से संबंधित विषय समझ लीजिए।

55

बगल में दूसरी बच्ची बैठाकर कोख पर लात मारना

गाँव में बगल में दूसरी बच्ची बैठाकर कोख पर लात मारने का विधान — बहुत गलत कार्य

· Reviewed Sep 2026 · 29:17–29:47

कोख से संबंधित किसी भी विषय में, वक्ता कहते हैं, बहुत सारी विद्याएँ हैं, और गाँव में लोग कोख पर लात मारने वाला विधान भी चलाते हैं। बड़ा गलत काम करते हैं: बगल में किसी अच्छी बच्ची को मित्र-सखी कहकर बैठा देते हैं और इधर लात मार देते हैं — दूसरी बच्ची का जीवन बर्बाद हो जाता है। इसका बन गया, उसका चला गया, वे कहते हैं। इन सभी चीजों से बचें, ध्यान रखें।

56

बच्चे दूर, और शरीर हर जगह बंद

प्रयोग के समय बच्चों को दूर रखें और प्रयोग करने वाले का शरीर हर जगह बंद हो

· Reviewed Sep 2026 · 29:48–30:27

घर में ऐसी प्रक्रिया हो रही हो, वक्ता कहते हैं, तो छोटे बच्चों को और विशेष करके कुँवारी कन्याओं को दूर रखें। स्वयं जब ऐसी प्रक्रियाएँ करें तो कवच आदि का पाठ करके सुरक्षित रहें, और शरीर पूरा बंद होना चाहिए: शिखा बंधन हो, गले में बंद हो, माला या कवच हो, मणिबंध हो, हाथ में और कमर में बंद हो। पैर में कम से कम धागा बांधें; कड़ा पहनते हैं तो, लड़की है तो पायल पहनेगी, पुरुष है तो कड़ा आदि पहने तो उत्तम — ताकि ऐसे विषय करते समय आप पर किसी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव न पड़े।

57

पूर्णिमा या अमावस्या पर हर सदस्य द्वारा गौ माता को खीर

जब परिवार का कलह-क्लेश शांत न हो रहा हो तो क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 30:28–30:57 · Also a question

अगर परिवार में बहुत अधिक कलह-क्लेश है जहाँ पहले प्रेम था, और ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं पर हो नहीं रहा, हवन-पूजन का भी प्रयोग कर रहे हैं पर नहीं हो रहा — तब ऐसी अवस्था में, वक्ता कहते हैं, उस परिवार का प्रत्येक सदस्य पूर्णिमा के दिन या अमावस्या के दिन खीर बनाए, और सभी सदस्य अपने हाथ से गौ माता को खीर खिलाएँ, बहुत प्रेम से खिलाएँ।

58

अपने दरवाजे पर खिलाएँ, पर पशु घर का अपना न हो

संभव हो तो अपने दरवाजे पर खिलाएँ, लेकिन पशु अपने घर का नहीं होना चाहिए

· Reviewed Sep 2026 · 30:58–31:20

संभव हो तो अपने दरवाजे पर खिलाएँ, वक्ता कहते हैं — लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना है कि पशु अपने घर का नहीं होना चाहिए। अमावस्या पर यह करने से बहुत शीघ्र लाभ होगा।

संभव हो तो अपने दरवाजे पर खिलाएँ, वक्ता कहते हैं — लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना है कि पशु अपने घर का नहीं होना चाहिए। तो भी अमावस्या पर यह करने से बहुत शीघ्र ही लाभ होगा।

59

सप्तम, नवम या एकादश अध्याय का सामूहिक पाठ

घर के कलह के लिए गीता का कौन सा पाठ बताया गया है?

· Reviewed Sep 2026 · 31:21–31:38 · Also a question

और साथ में, वक्ता कहते हैं, अगर श्रीमद्भगवद्गीता के सप्तम, नवम या एकादश — इन तीनों में से किसी एक अध्याय का सामूहिक पाठ होने लगे, तो पहले दिन से प्रभाव दिख जाएगा और यह कलह-क्लेश तुरंत मिटने लगेगा। अगर 10 सदस्य हैं और उनमें से कोई पाँच यह करना शुरू कर दें, तो बाकी पाँच की बुद्धि भी स्वतः सही हो जाती है और इन सभी चीजों का प्रभाव नष्ट हो जाता है।

60

विश्वरूप का अध्याय अपने आप में ब्रह्मास्त्र

गीता का एकादश अध्याय अपने आप में ब्रह्मास्त्र क्यों कहा गया है?

· Reviewed Sep 2026 · 31:39–32:04 · Also a question

एकादश अध्याय, वक्ता कहते हैं, अपने आप में ब्रह्मास्त्र है — भगवान के विश्वरूप का अध्याय। जीवन की कितनी भी बड़ी जटिल समस्या हो और हल न हो रही हो, उसका पाठ आरंभ कर दीजिए, कंठस्थ कर लीजिए। जो विषय कठिन और असंभव लग रहा हो, उसे भी भगवान स्वयं सिद्ध कर देते हैं।

एकादश अध्याय, वक्ता कहते हैं, अपने आप में ब्रह्मास्त्र है। भगवान के विश्वरूप का जो अध्याय है। जीवन की कितनी भी बड़ी, जटिल समस्या हो और हल न हो रही हो, उसका पाठ आप आरंभ कर दीजिए, कंठस्थ कर लीजिए। भगवान स्वयं आपके उस विषय को भी, जो लग रहा हो कि कठिन है, नहीं हो सकता, सिद्ध कर देते हैं।

61

घर के बाहर शांति और चौखट लांघते ही अशांति

घर पर लगे उच्चाटन के लक्षण क्या हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 32:05–32:48 · Also a question

अगर घर की चौखट आदि का बंधन कर दिया गया है, वक्ता कहते हैं, तो उच्चाटन लगता है: सबको लगता है कहीं भाग जाओ। घर में रहने का मन नहीं करता। बाहर — मित्र के घर, स्कूल-कॉलेज, ऑफिस, मार्केट में — मन बहुत अच्छा, शांत, खुश, तबीयत भी ठीक; लेकिन घर के भीतर आते ही, चौखट लांघते ही लगता है बाप रे क्या हो गया। बिना मतलब की मारपीट, गाली-गलौज, एक-दूसरे पर टोंटिंग; घर से भागते रहते हैं, कोई शांति नहीं, अजीब सा उच्चाटन बना रहता है।

62

शिव या भगवती के मंदिर में जागृत किए गए उग्र देवता

उच्चाटन वाले घर के लिए किन देवताओं का मंत्र बताया गया है?

· Reviewed Sep 2026 · 32:49–33:07 · Also a question

जब विषय इस अवस्था तक पहुँच जाए, वक्ता कहते हैं, तो उग्रात्मक देवताओं का मंत्र लीजिए — चाहे हनुमान जी का बटवानर हो, पंचमुखी हनुमान जी का कवच, बटुक भैरव जी का स्तोत्र या सतनाम, या महाभैरव जी के पाठ की प्रक्रिया — किसी एक चीज को, चाहे सप्ताह भर के लिए ही सही, पहले शिव मंदिर या भगवती के मंदिर में बैठकर जागृत कीजिए या सिद्ध कीजिए।

63

सिद्धि के लिए बताई गई न्यूनतम संख्या

पाठ सिद्ध करने के लिए एक न्यूनतम संख्या कही गई है, पर वाक्य से संख्या स्पष्ट नहीं होती

· Reviewed Sep 2026 · 33:08–33:13

सामान्य रूप से सिद्ध करने में, वक्ता कहते हैं, कम से कम "एक स्वार्थ पाठ" तो कीजिएगा — उससे कम क्या ही होगा। ट्रांसक्रिप्ट में वाक्य इसी रूप में है और अभिप्रेत संख्या स्पष्ट नहीं है, इसलिए यहाँ कोई संख्या नहीं दी गई है।

64

क्षेत्रपाल निकासी, कपूर के साथ अभिमंत्रित नारियल, और चौखट पर बलि

घर में क्षेत्रपाल निकासी कैसे की जाती है?

· Reviewed Sep 2026 · 33:14–33:30 · Also a question

उतना करने के बाद, वक्ता कहते हैं, घर में से क्षेत्रपाल निकासी करनी है: नारियल को अभिमंत्रित करके, कपूर जलाकर उसके साथ पूरे घर से निकालना — और सबसे विशेष, चौखट पर नींबू-नारियल की बलि देना।

उतना करने के बाद, वक्ता कहते हैं, उसके पश्चात घर में से क्षेत्रपाल निकासी करना: नारियल को अभिमंत्रित करके, कपूर जलाकर उसके साथ पूरे घर से निकालना। और सबसे विशेष, चौखट पर नींबू-नारियल की बलि देना।

65

उलटंत भेद पलटंत काया, और उसका ऐसे ही प्रयोग क्यों नहीं होता

प्रयोग को पलटने का प्रचलित मंत्र कौन सा है?

· Reviewed Sep 2026 · 33:31–34:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि घात को पलटने की सामान्य प्रक्रिया का एक बहुत प्रचलित मंत्र है: "उलटंत भेद पलटंत काया" — सब लोग जानते हैं, जो तंत्र के क्षेत्र में थोड़ी भी रुचि रखते हैं वे पढ़े होंगे। लेकिन इन चीजों का प्रयोग ऐसे नहीं होता, वे कहते हैं; यह बात ध्यान में रखिए।

घात को पलटने की जो सामान्य प्रक्रिया है, वक्ता कहते हैं, उसका एक बहुत प्रचलित मंत्र है। वे इसे "उलटंत भेद पलटंत काया" वाला बताते हैं — सब लोग जानते हैं, जो तंत्र के क्षेत्र में थोड़ी भी रुचि रखते हैं वे सब पढ़े होंगे। बट इन चीजों का प्रयोग ऐसे नहीं होता, वे कहते हैं। यह बात ध्यान में रखिएगा।

66

पलटने से पहले तपोबल बढ़ाना

सामूहिक उच्चाटन को एक-एक व्यक्ति का उतारा करके पलटना आसान नहीं — पहले तपोबल बढ़ाइए, और एक सुरक्षित व्यक्ति परिवार के लिए खड़ा हो

· Reviewed Sep 2026 · 34:02–34:47

जब सामूहिक उच्चाटन कर दिया गया हो, पूरे घर का उच्चाटन हो, और आप हर व्यक्ति का उतारा करके काटने और उलटने के मंत्र चला रहे हों कि उलट देंगे — यह प्रक्रिया, वक्ता कहते हैं, इतनी आसान नहीं है। करेंगे और कहीं कुछ गड़बड़ हो गई, तो फिर लेने के देने पड़ जाएँगे। इसलिए पहले तपोबल की वृद्धि कीजिए, उसके बाद ऐसे प्रयोगों में आगे बढ़ने का प्रयत्न कीजिए।

67

12 राशि, 12 गणपति, 12 भाव और द्वादश नाम

संकट नाशन का पाठ छह महीने क्यों बताया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 34:48–35:36 · Also a question

एक श्रोता के प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि वे तो संकट नाशन के लिए बोलते हैं, और इसलिए बोलते हैं: 12 राशियाँ हैं और संकट नाशन के 12 गणपति हैं, प्रत्येक राशि में एक-एक गणपति; और आपके 12 भाव हैं, हर भाव का एक अधिपति। तो अगर आप गणपति जी के द्वादश नाम का पाठ कर रहे हैं, इसीलिए उसमें छह महीना कहा गया है — छह महीने 12 नाम का पाठ अधिकाधिक करना है। तब जाकर वे प्रभाव देते हैं; उससे बड़ा कोई विषय नहीं, बहुत तगड़ा प्रभाव देने वाली चीज है।

68

पंचोपचार और दशोपचार में दीपक का प्रयोग

क्या कर्म साक्षी दीपक से ही देवता को दीप दिखाया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 35:37–35:52 · Also a question

पंचोपचार, दशोपचार के प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि अगर आप कर्म साक्षी दीपक से ही दिखाना चाहते हैं तो दिखा सकते हैं। लेकिन अच्छा होगा, वे कहते हैं, कि दीपक अलग से रखें और देवता को बाद में अलग दीप दिखाएँ।

पंचोपचार, दशोपचार में, वक्ता कहते हैं, अगर आप कर्म साक्षी दीपक से ही दिखाना चाहते हैं तो भी दिखा सकते हैं। लेकिन अच्छा होगा कि दीपक अलग से रखें और देवता को बाद में अलग दीप दिखाएँ।

69

सत्य, स्नान, सोना और शौच

तुलसी माला धारण करने के नियम क्या हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 35:53–36:28 · Also a question

तुलसी माला कैसे धारण करें, इस पर वक्ता कहते हैं कि गले में धारण करनी है। माला धारण करने के बाद का सामान्य नियम है कि झूठ नहीं बोलना, असत्य आचरण नहीं करना, असत्य संभाषण नहीं करना; अगर असत्य बोलने की आवश्यकता पड़ ही रही है तो माला हटा देना उत्तम रहेगा, और प्रयास करें कि धारण करके न बोलना पड़े। स्नान के समय उतारकर रख दीजिए; स्नान के बाद उसे अलग से स्नान कराकर धारण कर लीजिए। पहनकर सोना है तो सो सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं — लेकिन शौच आदि की क्रिया से पहले उतार देना चाहिए।

70

ललिता सहस्रनाम, न्यास और दीक्षा का प्रश्न

ललिता सहस्रनाम के न्यास और दीक्षा पर पुरी के शंकराचार्य का मत, यूट्यूब के परस्पर विरोधी दावों के सामने

· Reviewed Sep 2026 · 36:29–37:16

वक्ता कहते हैं कि यूट्यूब पर बहुत कुछ बोला जा रहा है, किस-किस चीज को गलत साबित करेंगे — सबके पास अपना-अपना मनोमुखी प्रमाण है। वे पुरी के शंकराचार्य महाराज का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने कहा — और उनके अनुसार सत्य ही कहा — कि भगवती ललिता त्रिपुरसुंदरी के सहस्रनाम के विषय में अगर पूरे विधान में जाएँ, शोधन की प्रक्रिया, न्यास, बृहद न्यास आदि के साथ, तो अनधिकृत व्यक्ति वे प्रक्रियाएँ कैसे कर सकता है? त्रिकूट से संबंधित मंत्रों का न्यास — बिना आपकी दीक्षा हुए आप उनका न्यास कैसे कर सकते हैं, पता कैसे चलेगा?

71

बिना न्यास के पाठ पर उनका अपना सशर्त मत

क्या ललिता सहस्रनाम बिना न्यास के पढ़ा जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 37:17–37:28 · Also a question

वक्ता के अनुसार शंकराचार्य जी ने गलत नहीं कहा है। लेकिन फिर भी, अगर बिना न्यास आदि की प्रक्रिया के आप उतना सामर्थ्य रखते हैं और नियम आदि का पालन अनुशासन के साथ करते हैं, तो पाठ कीजिए।

तो उनके अनुसार, वक्ता कहते हैं, वे गलत नहीं कहे हैं। लेकिन फिर भी, बिना न्यास आदि की प्रक्रिया के अगर आप उतना सामर्थ्य रखते हैं, नियम आदि का पालन अनुशासन के साथ करते हैं, तो पाठ कीजिए।

72

भगवती तारा का स्वरूप श्मशान में क्यों बैठा है

क्या भगवती तारा की साधना किसी और साधना की तरह घर में की जा सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 37:29–38:08 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अब भगवती तारा की साधना भी लोग ऐसे पूछते हैं जैसे कितनी आसान हो; सबको पता है कि नहीं करनी चाहिए, लेकिन कन्विंस किया जा रहा है कि भगवती तो बहुत सौम्य हैं, ममतामयी हैं, तो घर में क्यों नहीं कर सकते। उनका उत्तर: अगर ऐसा ही होता कि सब कोई इस स्वरूप को घर में कर सकते, तो भगवती फिर क्यों जाकर श्मशान में बैठतीं? उनका वह स्वरूप श्मशान से संबंधित क्यों रखा है? तब पार्वती जी क्यों नहीं श्मशान में बैठतीं, दुर्गा जी क्यों नहीं, तारामयी ही क्यों श्मशान में बैठी हैं?

73

शव आसन, कमल बने ब्रह्मा, और द्व्यक्षरी-त्र्यक्षरी मंत्र

हर स्वरूप के पीछे कोई न कोई कारण है, और तंत्र की हर चीज को फिलॉसफी में डालकर सही साबित नहीं किया जा सकता

· Reviewed Sep 2026 · 38:09–38:42

कारण है, वक्ता कहते हैं: शव आसन शिव आसन कैसे बन जाता है? ब्रह्मा जी कमल कैसे बन जाते हैं, कब बनते हैं, भगवती किनके लिए कब बनाती हैं, और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? जगदंबा दो अक्षरी, त्रय अक्षरी की ओर क्यों गई हैं? इसके पीछे कारण है, और हर चीज को केवल यह फिलॉसफी देकर सही साबित नहीं कर सकते। तंत्र की हर चीज को फिलॉसफी में डाल देना — कि नहीं, यह तंत्र फिलॉसफी है, इसके अनुसार यह, इसके अनुसार वह — यह, वे कहते हैं, सही नहीं है। हर स्वरूप के पीछे कुछ न कुछ कारण है।

74

महल या रत्न सिंहासन नहीं, श्मशान

जगदंबा अक्षोभ्य शिव को गोद में लेकर चिता पर क्यों बैठी हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 38:43–39:29 · Also a question

जगदंबा जब अक्षोभ्य शिव को गोद में ली हैं, वक्ता पूछते हैं, तो श्मशान में बैठकर क्यों ली हैं? महल में, रत्न सिंहासन पर बैठकर क्यों नहीं? चिता के पास ही जाकर क्यों बैठी हैं, चिता पर ही क्यों बैठी हैं? इस स्वरूप के पीछे कारण है, इसलिए उसे नहीं किया जा सकता। जो नहीं मानेंगे, वे अपना प्रचुर प्रमाण ला सकते हैं कि बिल्कुल कर सकते हैं — तो बिल्कुल कीजिए, वे कहते हैं।

75

हर स्तोत्र, मंत्र और कवच अपने आप में सक्षम है

ब्रह्मांड के सभी रहस्य जानने के लिए कौन सा स्तोत्र या अनुष्ठान है?

· Reviewed Sep 2026 · 39:30–39:59 · Also a question

इस प्रश्न पर कि ऐसा कौन सा स्तोत्र या अनुष्ठान है जिससे ब्रह्मांड के सभी रहस्य जान सकें, वक्ता कहते हैं कि इसके लिए जितने भी स्तोत्र, मंत्र, कवच हैं, सभी अपने आप में सक्षम हैं। सदैव स्मरण रखिए: जब आपके आराध्य को आपको योग्य बनाना होता है, तो क्या देना है, कहाँ देना है, कैसे देना है — यह उनका अपना तरीका है। रहस्य के उद्बोधन के लिए आपको अलग से कुछ विशेष करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

76

एकाक्षरी जप, तपोबल और देवताओं की अपनी परीक्षा

क्या एक अक्षर का मंत्र भी सब कुछ प्रकट कर सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 40:00–40:19 · Also a question

अगर आप एकाक्षरी का भी जप कर रहे हैं, वक्ता कहते हैं, तो जितना बढ़ाते जाएँगे, जितना तपोबल बढ़ता जाएगा, और जब तक सत्कर्म करते रहेंगे, अनुशासन में रहेंगे, किसी का अपमान नहीं करेंगे — देवता परीक्षा लेते जाएँगे और आपको देते जाएँगे। रहस्य का उद्बोधन मात्र एक अक्षर के मंत्र से भी हो जाएगा — लेकिन आप अड़े रहेंगे तो धैर्य रखना पड़ेगा।

77

प्रयोग से पहले 12 वर्ष का पुष्टिकरण

पहले गुरु सिद्धि के बाद 12 वर्ष की शपथ देते थे — सामर्थ्य पुष्ट होने तक कोई प्रयोग नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 40:20–40:52

साल-दो साल पहले के समय में, वक्ता कहते हैं, सिद्धि पूर्ण होने के उपरांत गुरुओं द्वारा 12-12 वर्षों के लिए शपथ दे दी जाती थी कि आप किसी को न देखेंगे, न सुनेंगे, न कोई तांत्रिक प्रयोग करेंगे। 12-12 सालों तक सामर्थ्य पुष्ट करवाते थे — जो भी मंत्र बल के कारण सिद्धि प्राप्त हुई है, उसे 12 वर्ष पुष्ट कराते थे। तब जाकर वे चीजें प्रयोग में आती थीं, इसलिए उनका प्रभाव अकाट्य होता था, और वे अकारण जहाँ-तहाँ प्रयोग नहीं करते थे।

78

आगे का मार्ग खोलते एकाक्षरी के देवता

एक अक्षर के देवता ही एक से तीन और तीन से पाँच तक का मार्ग निकाल देते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 40:53–41:12

तो आप एक अक्षर के मंत्र से भी सारे रहस्य प्राप्त कर सकते हैं, वक्ता कहते हैं। एक से तीन पर कैसे ले जाना है, तीन से पाँच में कैसे — यह आपके देवता का अपना विषय है; आपके उस एक अक्षर के जो देवता होंगे वही मार्ग निकाल देंगे, और उसी से आपको रहस्यादि की जानकारी भी हो जाएगी।

तो आप एक अक्षर के मंत्र से भी सारे रहस्यों को प्राप्त कर सकते हैं, वक्ता कहते हैं। अब एक से तीन पर कैसे ले जाना है, तीन से पाँच में कैसे ले जाना है — वह आपके देवता ही तय करेंगे। आपके उस एक अक्षर के जो देवता होंगे, वही मार्ग निकाल देंगे। और उसी से आपको रहस्यादि की जानकारी भी हो जाएगी।

79

कवच का धागा बदलना, और माला फिर से गुथवाने के बजाय अग्नि स्पर्श

सूतक-पातक के बाद रुद्राक्ष की माला को शुद्ध कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 41:13–42:16 · Also a question

सूतक-पातक पड़ने पर, वक्ता कहते हैं, किसी भी कवच का धागा बदलिए। पूरी रुद्राक्ष की माला — 109, 108, 107, 54 दाने, जो भी हो — का हर दाना फिर से नई माला में गुथवाना नहीं पड़ेगा। सूतक-पातक पूर्ण होने, शुद्धिकरण और घर में पूजन-पाठ होने के बाद एक-आध दिन और रुककर माला को गाय के कच्चे दूध से अच्छे से धोना है, भगवान शिव से संबंधित या तांत्रोक्त देवी सूक्त का पाठ करते हुए अभिषेक कराना है, फिर कपूर की अग्नि प्रज्वलित करके माला को तेजी से अग्नि से पार करा देना है। अग्नि स्पर्श से वह शुद्ध हो जाती है; जलाना नहीं है। माला काटकर फिर से गुथवाना, वे कहते हैं, कभी करना भी नहीं चाहिए।

80

पशु-पक्षियों की आत्माओं को जप और गीता पाठ का अर्पण

क्या पशु-पक्षियों की आत्माओं को जप या गीता पाठ अर्पण किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 42:17–42:44 · Also a question

बिल्कुल कर सकते हैं, वक्ता कहते हैं — उसमें कोई मनाही ही नहीं है। जीव-जंतु को भी जप आदि अर्पण कर सकते हैं, और उस अर्पण के प्रभाव से वे बहुत दिव्य स्वरूप धारण कर सकते हैं। गीता पाठ भी बिल्कुल कर सकते हैं और अर्पित कर सकते हैं।

81

औरस पुत्र का अर्थ

औरस पुत्र का अर्थ है स्वयं के वीर्य से उत्पन्न पुत्र

· Reviewed Sep 2026 · 42:45–42:55

वक्ता समझाते हैं कि औरस पुत्र का अर्थ हुआ स्वयं के वीर्य से उत्पन्न पुत्र — औरस वीर्य को कहा जाता है।

औरस पुत्र का अर्थ पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि इसका अर्थ हुआ स्वयं के वीर्य से उत्पन्न पुत्र। औरस, वे कहते हैं, वीर्य को कहा जाता है।

82

दीक्षा से पहले सवा लाख से दस लाख तक पंचाक्षरी जप

शैव परंपरा में दीक्षा लेने से पहले क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 42:56–43:34 · Also a question

शिव संप्रदाय में दीक्षा लेने जा रहे 17 वर्ष के श्रोता से वक्ता कहते हैं कि अगर दीक्षा देने वाले गुरु उस परंपरा के दीक्षा देने वाले हैं, तो अधिकार के अनुसार पंचाक्षरी का पहले से अधिकारिक जप कर लें तो बहुत अच्छा है। कम से कम सवा लाख जप कीजिए; अधिक से अधिक 5 लाख, 10 लाख, जितना हो सके।

83

स्तर के अनुसार पितृ दोष, और योगिनी मातृका के नाम से आहुति

पितृ दोष का उपाय उसके स्तर के अनुसार होता है, और हवन में योगिनी मातृकाओं के नाम से आहुति दी जाती है

· Reviewed Sep 2026 · 43:35–44:22

कुलदेवी के रक्षण-कृपा और पितृ दोष शांति के प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि पितृ दोष के निमित्त पहले देखना होगा कि किस स्तर का पितृ दोष है, फिर वैसी प्रक्रिया करें। एक अन्य प्रश्न पर वे पुष्टि करते हैं कि हवन में योगिनी मातृका के नाम से बिल्कुल आहुति दी जाती है।

एक श्रोता कुलदेवी के रक्षण-कृपा और पितृ दोष शांति के बारे में पूछते हैं। पितृ दोष के निमित्त, वक्ता कहते हैं, यह देखना है कि किस स्तर का पितृ दोष है — फिर वैसी प्रक्रिया आदि करें। एक अलग प्रश्न पर वे कहते हैं कि हवन में योगिनी मातृका के नाम से बिल्कुल आहुति दी जाती है।

84

ग्रहों की स्थिति चाहे जो हो, छह महीने लगातार संकट नाशन पाठ

नौकरी न मिल रही हो और शनि या नीच के गुरु को कारण बताया जा रहा हो तो क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 44:23–44:54 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि नौकरी नहीं मिल रही, शनि की दिक्कत है और गुरु नीच का है। वक्ता कहते हैं कि कोई भी ग्रह किसी भी स्थिति में हो, वह एक अलग विषय है। सबसे पहले संकट नाशन का 6 महीने तक लगातार पाठ कीजिए, जितनी शक्ति-सामर्थ्य हो और जितना अधिकाधिक हो।

एक श्रोता लिखते हैं कि नौकरी नहीं मिल रही है, शनि की दिक्कत है, गुरु नीच का है। कोई भी ग्रह किसी भी स्थिति में हो, वक्ता कहते हैं, वह तो एक अलग विषय है। लेकिन सबसे पहले संकट नाशन का 6 महीने तक लगातार पाठ कीजिए — जितनी शक्ति-सामर्थ्य हो, और जितना अधिकाधिक हो।

85

बिना गुरु के बड़वानल

अगर हनुमान बड़वानल करने को बताया गया है तो बिना गुरु के भी कर सकते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 44:55–45:06

जिस श्रोता को हनुमान बड़वानल करने को बताया गया है और उनके कोई गुरु नहीं हैं, उनसे वक्ता कहते हैं कि कर सकते हैं — कोई समस्या नहीं है।

एक श्रोता कहते हैं कि उन्हें हनुमान बड़वानल करने को बताया गया है पर उनके कोई गुरु नहीं हैं। अगर आपको करने के लिए बताया गया है, वक्ता कहते हैं, और आपके कोई गुरु नहीं हैं, तो आप कर सकते हैं — कोई समस्या नहीं है।

86

एक मंत्र की संख्या पूरी करके समर्पित करना, फिर दूसरा शुरू करना

एक देवता के एक से अधिक मंत्रों का जप करें तो क्या हर जप अलग से समर्पित करें?

· Reviewed Sep 2026 · 45:07–45:51 · Also a question

हाँ। अगर दो प्रकार के मंत्र का जप करना है, वक्ता कहते हैं, तो पहले मंत्र का जप पूरा कीजिए — जितनी माला करनी थी, मान लीजिए 10 माला — और समर्पित कर दीजिए। फिर दूसरे का कीजिए, 10, 15, 20, 100 माला, जो करना है, फिर उसे समर्पित कीजिए। ऐसा नहीं कर सकते कि एक मंत्र की 10 माला, फिर दूसरे की 10 माला, और अंत में एक साथ समर्पण।

87

स्वप्न में मिले मंत्र — थोड़ी मानसिक संख्या हाँ, पर बिना परामर्श पुरश्चरण नहीं

स्वप्न में मिले बीज मंत्र या महाविद्या मंत्र का जप किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 45:52–46:25 · Also a question

डिपेंड करता है, वक्ता कहते हैं। सामान्यतः जो भी मंत्र स्वप्न में प्राप्त होते हैं, उनका सामान्य जप मानसिक रूप से कुछ हद तक संख्या में अवश्य करना चाहिए — 11, 21 बार तो अवश्य। लेकिन अगर पुरश्चरण करने का विषय आ रहा है, तो वह किसी सामर्थ्यवान व्यक्ति से, जिस पर आप विश्वास करते हों और जिसे जानकारी हो, एक बार चर्चा करने के बाद ही करना चाहिए — क्योंकि कई बार गड़बड़ करने के लिए भी विषय उठाया जाता है।

88

ऐसे जप से पहले पूजित डाकिनी या योगिनी मातृका को संकल्प से मुक्त करना

डाकिनी पूजने वाले घर को बटुक भैरव का जप "दिलवाना" उसी घर की पूजित शक्ति को बिगाड़ सकता है

· Reviewed Sep 2026 · 46:26–47:37

गड़बड़ करने के लिए उठाए गए विषय का वक्ता का उदाहरण: मान लीजिए किसी के यहाँ डाकिनी पूजित है — गाँव-देहातों में डाकिनी माता के रूप में बिल्कुल पूजित होती है, और वे अपनी पूज रहे हैं। अब अगर किसी को उनका घर भ्रष्ट करना है, तो वह बटुक भैरव जी के मंत्र का विधान बता देता है, "हाँ, तुम बटुक भैरव का जप करो" — और अगर सामने वाला स्वप्न के माध्यम से मिला समझकर वह जप करने लगे, तो पूजित शक्ति की स्थिति खराब हो जाएगी। सही प्रक्रिया, वे कहते हैं, यह है कि जब मंडल पूजन हो, तब जो जानकार मंत्र देंगे वे सबसे पहले उन डाकिनी को, या उन योगिनी रूप मातृका को, संकल्प करके मुक्त करेंगे — कि जो भी यह पूजन करेगा, उसके जप का कोई प्रभाव आप पर नहीं पड़ेगा।

89

गायत्री और पंचाक्षरी, और प्रणव

गायत्री और पंचाक्षरी अपनी-अपनी जगह हैं, और पंचाक्षरी बिना प्रणव के करना अति उत्तम है

· Reviewed Sep 2026 · 47:38–48:05

गायत्री दीक्षित हो या न हो, वक्ता कहते हैं, गायत्री अपनी जगह है और पंचाक्षरी अपनी जगह है। पंचाक्षरी बिना प्रणव के करें तो अति उत्तम है; बाकी आपका अपना विवेक जैसा कहे।

गायत्री और पंचाक्षरी के बारे में पूछने वाले श्रोता से वक्ता कहते हैं: गायत्री दीक्षित हो या न हो, गायत्री अपनी जगह में है, पंचाक्षरी अपनी जगह में है। पंचाक्षरी बिना प्रणव के करें तो अति उत्तम है, वे कहते हैं। बाकी आपका अपना विवेक जैसा कहे।

90

श्रद्धा वाला साधक रक्षा करे; अश्रद्धा वाले चुप बैठें, या पहले उनकी पूजा कर दें

अश्रद्धा वाले घर की रक्षा कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 48:06–48:49 · Also a question

जो श्रद्धा वाले साधक हैं वे घर की रक्षा करेंगे, वक्ता कहते हैं; जो अश्रद्धा रखने वाले सदस्य हैं वे चुपचाप बैठे रहेंगे। ज्यादा टेंटा करेंगे तो पहले उनकी पूजा कर दीजिए, फिर अपनी पूजा कीजिए। अश्रद्धा रखने वालों को भी कष्ट हो ही रहा होगा — ऐसा नहीं कि वे सुखी हों और श्रद्धा वाले साधक को ही कष्ट हो। तो उन्हें समझाइए: अच्छे से शांति से बैठो, तुम्हें कुछ नहीं करना, हम जो कर रहे हैं करने दो, सुरक्षित होगा। न मानें तो पहले उनकी पूजा-आरती कर दीजिए, और क्या किया जाएगा। एक आदमी बचाने का प्रयास कर रहा है, वे बचाने भी नहीं देंगे।

91

देवताओं में उचित-अनुचित नहीं; प्रश्न है आप किनके प्रति समर्पित हो पाते हैं

दूर से रक्षा के लिए महाभैरव और वामती काली दोनों अपनी-अपनी जगह श्रेष्ठ हैं — तुलना बंद कीजिए

· Reviewed Sep 2026 · 48:50–49:41

दूर से रक्षा हो तो महाभैरव की जगह वामती काली उचित हैं क्या — इस प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि डिपेंड करता है कि आप किस प्रकार की पूजा-सेवा करते हैं। दोनों अपनी-अपनी जगह श्रेष्ठ हैं; उचित-अनुचित का यहाँ विषय ही नहीं है। तुलना करना बंद कीजिए, वे कहते हैं — तुलना मत किया कीजिए कि कौन उचित है, कौन अनुचित। प्रश्न यह है कि आप किनके प्रति समर्पित हो पा रहे हैं।

92

गति पुण्य और प्रारब्ध तय करते हैं, मेहनत की कमी नहीं

एक ही गुरु से एक ही मंत्र मिलने पर एक शिष्य को जल्दी सिद्धि और दूसरे को देर से क्यों?

· Reviewed Sep 2026 · 49:42–50:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ऐसा सदैव होता है: एक ही गुरु से एक ही मंत्र दो शिष्यों को मिला, एक को जल्दी सिद्धि हो रही है, दूसरे को नहीं। इसका कहीं भी यह तात्पर्य नहीं कि दूसरे ने मेहनत कम की या उसे सिद्धि नहीं मिलेगी। जिसका पुण्य ज्यादा था, जिसके प्रारब्ध पहले से कट चुके थे, जिसने पहले मेहनत की थी, उसे जल्दी प्रभाव मिलेगा; किसी को देर से। सबके लिए सभी मंत्र अलग-अलग प्रभाव देते हैं, इसलिए इतनी चिंता नहीं करनी चाहिए।

93

नदी में आसन नहीं चाहिए; मंदिर में चाहिए, नीचे बैठकर जप नहीं हो सकता

मंदिर में या नदी में बैठकर जप करने के लिए आसन जरूरी है?

· Reviewed Sep 2026 · 50:19–50:42 · Also a question

नदी में बैठने के लिए, वक्ता कहते हैं, आसन की जरूरत नहीं — वहाँ सीधे बैठेंगे। मंदिर के लिए आसन की जरूरत है। अब बहुत से मंदिरों में आसन भी नहीं ले जाने दे रहे, यह, वे कहते हैं, बड़ा सोचनीय विचारणीय विषय है — क्योंकि नीचे बैठकर तो जप नहीं कर सकते।

94

धागे के बजाय पैर में धातु

पैर में धागा बांधने के बजाय धातु की चीज पहनिए

· Reviewed Sep 2026 · 50:43–50:52

वक्ता कहते हैं कि पैर में धातु की चीजें पहनिए तो ज्यादा बढ़िया है; धागा-वागा बांधने वाली प्रक्रिया कम किया करें।

पैर में धातु की चीजों को पहनिए तो ज्यादा बढ़िया है, वक्ता कहते हैं। धागा-वागा बांधने वाली प्रक्रिया कम किया करें।

95

दांपत्य के लिए भगवती, शिव-शक्ति का पूजन और शांभ शिव का जप

पति-पत्नी का संबंध अच्छा हो इसके लिए क्या पूजन करें?

· Reviewed Sep 2026 · 50:53–51:19 · Also a question

हस्बैंड-वाइफ का रिलेशनशिप अच्छा हो, इसके लिए, वक्ता कहते हैं, भगवती का पूजन करें, शिव-शक्ति का पूजन करें, शांभ शिव का जप करें — भगवती और शिव जी का जितना पूजन हो सकता है करें।

हस्बैंड-वाइफ का रिलेशनशिप अच्छा हो, उसके लिए, वक्ता कहते हैं, भगवती का पूजन करें, शिव-शक्ति का पूजन करें, शांभ शिव का जप करें। भगवती और शिव जी का जितना पूजन हो सकता है, करें।

96

पहले मुख्य द्वार ठीक करें, फिर सहस्रनाम, अभिमंत्रित जल और शांति मंत्र

घर में चिड़चिड़ापन और अकारण क्रोध हो गया हो तो क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 51:20–52:18 · Also a question

अगर बहुत चिड़चिड़ापन हो गया है, अकारण ही क्रोध आदि बन रहा है, तो, वक्ता कहते हैं, घर में सबसे पहला काम यह कीजिए कि मुख्य द्वार की स्थिति क्या है वह देखिए। मुख्य द्वार गंदा न हो, आसपास जूता-चप्पल न खोला जाता हो — इन सब चीजों को पहले ठीक कीजिए। फिर घर में आप जिस देवता का पूजन-पाठ करते हैं उनका सहस्रनाम आदि का पाठ कीजिए, अभिमंत्रित जल घर में छिड़किए, शांति मंत्र का पाठ कर सकते हैं तो कीजिए। धीरे-धीरे, वे कहते हैं, अवश्य रिलीफ होगा।

97

बिना बीज मंत्र के पंचमुखी हनुमान कभी नहीं

बीज मंत्र के साथ पंचमुखी हनुमान दीक्षित होकर ही करें — और बिना बीज के कभी नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 52:19–52:44

दीक्षित होकर पंचमुखी हनुमान को बिना बीज मंत्र के कर सकते हैं क्या — इस पर वक्ता कहते हैं कि ऐसा करना ही नहीं है। करना है तो बीज मंत्र के साथ ही करेंगे।

एक श्रोता पूछते हैं कि दीक्षित होकर पंचमुखी हनुमान को बिना बीज मंत्र के कर सकते हैं क्या। ऐसा, वक्ता कहते हैं, करना ही नहीं है। करना है तो बीज मंत्र के साथ ही करेंगे।

98

ब्राह्मण के लिए भी बिना प्रणव

ब्राह्मण हों, जनेऊ हुआ हो, तब भी प्रणव के साथ नहीं करना चाहिए — शिव महापुराण देखिए

· Reviewed Sep 2026 · 52:45–52:59

जो श्रोता कहते हैं कि वे ब्राह्मण हैं, जनेऊ हुआ है, उनसे वक्ता कहते हैं कि फिर भी प्रणव के साथ नहीं करना चाहिए। बिना प्रणव के शिव महापुराण का अवलोकन कीजिए, वे कहते हैं, आपको पता चल जाएगा।

एक श्रोता कहते हैं कि वे ब्राह्मण हैं, जनेऊ हुआ है। फिर भी, वक्ता कहते हैं, प्रणव के साथ नहीं करना चाहिए। बिना प्रणव के शिव महापुराण का अवलोकन कीजिए, वे कहते हैं — आपको पता चल जाएगा।

99

अपने ही घर की अपूज्य उपस्थिति से हानि

घर की अपूज्य उपस्थिति, जिसे न गति मिल रही हो न जगह और कोई दूसरा जिसका दुरुपयोग कर रहा हो, स्वयं कष्ट देगी

· Reviewed Sep 2026 · 53:00–53:34

वक्ता कहते हैं कि औघड़ स्वयं श्मशान रूप से हानि कर सकता है — और वह आपके अपने ही घर की अपूज्य उपस्थिति के प्रयोग से ही करेगा। अगर आप उसे अपूज्य रखेंगे — घर में उपस्थित है, उसकी गति नहीं हो पा रही, कोई जगह नहीं दी जा रही, और कोई अन्य उसका प्रयोग, दुरुपयोग कर रहा है — तब वह कष्ट देगा।

100

तपोबल से सवारी का सामर्थ्य इतना बढ़ाना कि कोई बांध न सके

कोई बार-बार सवारी का बंधन करवाने का प्रयास कर रहा हो तो क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 53:35–54:17 · Also a question

अगर कोई बार-बार सवारी का बंधन करवाने का प्रयास कर रहा है, वक्ता कहते हैं, तो सवारी का सामर्थ्य तपोबल के द्वारा बढ़ाना चाहिए। सामर्थ्य इस स्तर तक ले जाइए कि बंधन करने वाला व्यक्ति फटकर चार हो जाए। वे कहते हैं कि उन्होंने ऐसी-ऐसी साधिकाएँ देखी हैं जिन पर भगवती की प्रचंड शक्तियाँ आ जाती हैं तो अच्छे-अच्छे जानकार, कामाख्या साधक लोग बांधने में फट जाते हैं, बांध नहीं पाते — बाल हाथ में लेकर बोल देते हैं कि हम नहीं बांध पाएँगे, बंध नहीं पा रही है। यह तब होता है जब साधिका या साधक में सामर्थ्य हो, जप-तप करने वाला हो, भगवती में श्रद्धा हो: तब जगदंबा जिस स्वरूप, जिस तत्व के साथ जो योगिनी उपस्थित हैं, उनमें इतना सामर्थ्य रहेगा कि उन्हें कोई बांध नहीं सकेगा।

101

भगत और सवारी वाली संस्कृति की आलोचना, और शक्ति से एकाकार होने का आदर्श

तपोबल इतना बढ़ाइए कि प्रयोग करने वाले के अपने देवता उसी पर पलटें, और सवारी को आकर बोलना न पड़े

· Reviewed Sep 2026 · 54:18–57:43

जो बांधने वाले, खिलाने वाले और अहित करने वाले ऊर्जाओं से छेड़छाड़ करते हैं, उनके लिए, वक्ता कहते हैं, बहुत अच्छा "ऑफर" है: जप-तप करके अपना तपोबल इतना कर लीजिए कि जब सामने वाला प्रयास करे तो उसी के देवता उसे फाड़ दें — वह बिना देखे कि सामने कौन है, मरवाने के लिए भेज रहा है। आपके देवता कमजोर हों, आप तपोबल न बढ़ाएँ, केवल खेलने-खिलाने में रहें, तो यही होगा। भगत वाले और सवारी खेलने वाले लोगों की सबसे नकारात्मक चीज उन्हें यह लगती है कि मैक्सिमम लोग कभी बृहद जप नहीं करते; सवारी आ रही है, खेल रही है, जो बोल रही है बोल रही है, और दिन भर उसी में लगे रहकर मजाक बना देते हैं — यूट्यूब पर भी यही सब होता है। आसन शुद्ध कीजिए, आसन पर बैठिए, मंत्रों का जप कीजिए, कवच का पुरश्चरण कीजिए। सवारी आने के समय ऐसी स्थिति हो कि सवारी को आपके शरीर पर आकर बोलना न पड़े: एकाकार हो जाएँ, आँख बंद करें, उनके नेत्र और आपके नेत्र एक हो जाएँ, उनके नेत्र से आप दिव्य चीजें देख सकें। तभी साधक अपनी शक्तियों का प्रॉपर सही यूज कर पाएगा।

102

किसी भी प्रति-प्रयोग से पहले 5 लाख जप और कवच

जब कन्फर्म हो जाए कि आप पर मसान का प्रयोग हो रहा है तो करने से चूकिए मत — पर पहले सामर्थ्य हो

· Reviewed Sep 2026 · 57:44–58:20

एक श्रोता कहते हैं कि उन पर मसान का प्रयोग हो रहा है, पता नहीं कौन कर रहा है, महाभैरव कर चुके हैं। जब एकदम कन्फर्म हो जाए, वक्ता कहते हैं, कि तंत्र का प्रयोग किया जा रहा है, बार-बार किया जा रहा है, जब आभास हो जाए — तो भैया करने से चूकिए मत। वे खोलकर इसलिए नहीं बोल सकते क्योंकि द्वेषी लोग तुरंत आपको ही चढ़ाने लगेंगे कि अरे कुछ हो जाएगा; इसलिए ओपनली नहीं बोलते, लेकिन एक बात ध्यान में रखिए: सामर्थ्यवान होने के लिए क्या-क्या होना चाहिए? पंचाक्षरी का, या अपने इष्ट-आराध्य के मंत्रों का 5 लाख तक जप किए हों, और कवच अवश्य किए हों।

103

सुरक्षा का बंधन — घर बंधा हुआ, चौखट की सुबह-शाम सेवा, और बलि से मजबूत

तांत्रिक बंधन का सकारात्मक पक्ष क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 58:21–59:13 · Also a question

अभी तक तांत्रिक बंधन का नकारात्मक पक्ष देखा, वक्ता कहते हैं; सकारात्मक पक्ष का बंधन होता है सुरक्षा का बंधन। आपका घर बंधा हुआ होना चाहिए। चौखट सकारात्मक शक्तियों के द्वारा सुरक्षित होनी चाहिए: सुबह-शाम उनकी सेवा हो, नरसिंह भगवान के निमित्त वहाँ दीप दान हो, कुल भैरव और कुल शक्ति के निमित्त वहाँ दीप दान होता रहे। चौखट पर बलि देने की भी प्रक्रिया है — नींबू-नारियल की बलि देकर मजबूत रखिए, जायफल की बलि देकर मजबूत रखिए। ताकि जब आप पर कोई तंत्र का प्रयोग कर भी दे और आप महाभैरव, वामती काली या जंजीरा के द्वारा उसे पलटें, और सामने वाला तैयार बैठा हो कि आओ तुम पलटो हम भी पलटेंगे, तो उसके पलटने से आप पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े।

104

भौतिक कवच, प्रयोग के समय हवन, और दोष से बचाने वाला पूजन

परिवार के हर सदस्य के गले में भौतिक कवच, हर प्रयोग के साथ हवन, और सफलता के बाद विशेष पूजन

· Reviewed Sep 2026 · 59:14–1:00:01

परिवार के प्रत्येक सदस्य के शरीर में कवच होना चाहिए, वक्ता कहते हैं — भौतिक कवच, केवल तांत्रिक विद्या वाला कवच नहीं, क्योंकि उसे किसी ने खंडित कर दिया तो गड़बड़ हो जाएगी। सबके गले में भौतिक कवच हो, सबका शरीर बंधित, सुरक्षित हो; वे लोग पूजन-पाठ भी करें तो अति उत्तम। उसके बाद गृह बंधन हो, चौखट की सुरक्षा हो। पहले मजबूत हों, फिर ये प्रक्रियाएँ करें, और करने के बाद भगवान शिव का पूजन-हवन करें। कभी भी तांत्रिक प्रयोग करें तो हवन अवश्य करें — प्रयोग के समय हवन से शक्तियों का बल हजारों-हजार गुना बढ़ा रहता है। और प्रयोग सफल होने के बाद भी देवता का उस निमित्त विशेष पूजन अवश्य करें; इससे दोष नहीं लगता।

105

पंचाक्षरी सबके लिए, और बिना यज्ञोपवीत वालों के लिए लघु गायत्री

क्या बिना गुरु के पंचाक्षरी का जप कर सकते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 1:00:02–1:00:43 · Also a question

बिल्कुल, वक्ता कहते हैं — लिखित है कि बिना गुरु के पंचाक्षरी जप कर सकते हैं। चैनल पर बृहद रूप से वीडियो है कि पंचाक्षरी का जप किसको कैसे करना है, चारों वर्ण का कैसे होगा, जिनका यज्ञोपवीत नहीं हुआ वे कैसे करेंगे, माताएँ-बहनें कैसे करेंगी, विनियोग-न्यास सहित; उसे अच्छे से देख-सुन लीजिए, फिर कीजिए। पंचाक्षरी सबके लिए है। गायत्री यज्ञोपवीत धारण करने वालों के लिए है; जो यज्ञोपवीत धारण नहीं करते उनके लिए लघु गायत्री पंचाक्षरी ही है। तो या तो 10 माला गायत्री करो, या 10 माला पंचाक्षरी, या 10 माला जिस संप्रदाय-पंथ-परिवार में आपकी दीक्षा हुई है उनका करो।

106

दैनिक न्यूनतम, पर्व काल, और शिव के पाँचों मुखों से उद्भूत पंचाक्षरी

रोज दीक्षा मंत्र की 10 माला, और पंचाक्षरी को गायत्री-समकक्ष पंचाननी विद्या क्यों कहा गया

· Reviewed Sep 2026 · 1:00:44–1:01:26

वे स्वयं महादुर्गा कुल के हैं, वक्ता कहते हैं, तो महादुर्गा मंत्र की प्रतिदिन मिनिमम 10 माला अवश्य करनी चाहिए। दीक्षा हो गई, शुरू में बस माला मिली और अब कुछ कर ही नहीं रहे, तो कुछ होगा नहीं — जो मिला उसे कीजिए, और नहीं मिला तो पंचाक्षरी कीजिए। जहाँ तीन दिन का भी पूजन पूर्ण कर लेते हैं, कई ऐसे पर्व काल होते हैं जिनका पता भी नहीं चलता और उनमें जप-तप हो जाता है, तो वह विद्या बढ़ेगी। पंचाक्षरी विद्या, पंचाननी विद्या, अपने आप में सर्व समर्थ विद्या है, गायत्री की समकक्ष: दोनों एक ही समय एक ही प्रकार से उद्भव हुई हैं, भगवान शिव के पाँचों मुखों से। और सबसे बड़ी बात, इसे करने का अधिकार सबको है — तो निश्चिंत होकर कीजिए।

107

नारायण उपस्थित हों तो उन्हें, नहीं तो शिव को, जिन्होंने पहले गीता सुनाई

पितरों के निमित्त गीता का 11वाँ अध्याय शिव मंदिर में कर सकते हैं, और समर्पित किसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 1:01:27–1:02:00 · Also a question

हाँ, वक्ता कहते हैं: पितरों के निमित्त गीता का 11वाँ अध्याय शिव मंदिर में कर सकते हैं, और वहीं समर्पित कीजिए। लेकिन वहाँ नारायण की उपस्थिति हो तो उन्हें समर्पित करें तो ज्यादा बढ़िया; नहीं है तो शिव जी को समर्पित कीजिए — क्योंकि पूर्व काल में भगवान शिव जी के द्वारा ही श्रीमद्भगवद्गीता सुनाई गई थी। माहात्म्य पढ़िए तो पता चलेगा; तो उन्हें भी बिल्कुल समर्पित कर सकते हैं।

108

कुंभ की बगला माला

कुंभ में मिली बगला माला पहनने के लिए है, जप के लिए नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 1:02:01–1:02:20

कुंभ की बगला माला के बारे में पूछने वाले श्रोता से वक्ता कहते हैं कि जाप के लिए तो नहीं मिली होगी — पहनने के लिए मिली होगी।

एक श्रोता कुंभ में मिली बगला माला के बारे में पूछते हैं। जाप के लिए तो नहीं मिली होगी, वक्ता कहते हैं; पहनने के लिए मिली होगी।

109

हर बार मानसिक समर्पण, और अंत में एक बार समर्पण

समर्पण के लिए आसन से उठना पड़े, या मंदिर में कई मंत्र कर रहे हों, तो समर्पण कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 1:02:21–1:02:45 · Also a question

वक्ता इसे सही प्रश्न कहते हैं: जब समर्पण के लिए आसन से उठना पड़ता है, या मंदिर में या कहीं एक से अधिक मंत्र कर रहे हैं, तो वहाँ हर बार समर्पण कैसे होगा? उसमें मानसिक रूप से समर्पित करते रहिए, वे कहते हैं, और लास्ट में एक बार समर्पित कीजिए।

एक श्रोता पूछते हैं कि समर्पण के लिए आसन से उठना पड़ता है तो ऐसे में समर्पण कैसे करें। हाँ, वक्ता कहते हैं, यह प्रश्न सही है — एक से अधिक मंत्र मंदिर में या कहीं कर रहे हैं, तो वहाँ हर बार समर्पण कैसे होगा? उसमें, वे कहते हैं, आप मानसिक रूप से समर्पित करते रहिए, और लास्ट में एक बार समर्पित कीजिए।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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