गंगा दशहरा और बटुक भैरव जयंती — गंगा महात्म्य, कुल भैरव की स्थापना, और तंत्र के अनेक भैरव

गंगा दशहरा और बटुक भैरव जयंती पर प्रवचन।

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01

तंत्र शब्द-दर-शब्द लिखा हुआ क्यों नहीं मिलता?

आगम अनुभव का विषय है, पाठ का नहीं

· 05:52–06:54 · Also a question

क्योंकि तंत्र अनुभव का विषय है। आगम में प्रत्येक चीज़ वर्ड टू वर्ड नहीं लिखी रहती और एक-एक शब्द लिखा हुआ आपको नहीं मिलेगा। यह वह अनुभव है जो गुरु अपने शिष्य को देता है, शिष्य अपने शिष्य को देता है, और इस प्रकार विद्याएँ क्रम से चलती रहती हैं।

02

आलोचकों से पूछा गया कि गलती आखिर क्या है, और अपने साधकों के प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर वे मानते हैं कि सिद्धियाँ हैं

प्रत्यक्षं किं प्रमाणम्

· 06:55–07:59

वे आलोचकों से पूछते हैं कि जिस विषय पर वे बोलते हैं, उस विषय से संबंधित दिक्कत क्या है, कौन सा नुक्स आप निकालते हो। फिर कहते हैं कि अपने ही गृहस्थ तंत्र परिवार के कुछ साधक वहाँ गए हैं, पहले के भी और बाद के भी, उनके वीडियो उपलब्ध हैं; जितनी लिमिट तक हो सका, उन्होंने बताया है कि क्या पाया। तो इस बात को वे मानेंगे: प्रत्यक्षं किं प्रमाणम् — हम तो देखे हैं, उनके पास सिद्धियाँ हैं।

03

देवी भागवत के अनुसार गंगा जी के दर्शन और स्नान का महात्म्य क्या है?

दर्शन और जल का स्पर्श

· 08:00–08:37 · Also a question

गंगा जी में स्नान का महात्म्य हर पुराण में मिल जाएगा, वे कहते हैं। श्रीमद् देवी भागवत में महादेव जी गंगा जी के स्मरण, दर्शन और स्नान का महात्म्य बताते हैं: गंगा जी के दर्शन और अपने जल के स्पर्श मात्र से वे प्राणियों के महापाप का नाश कर देती हैं और मोक्ष प्रदान करती हैं। और जो मनुष्य सुबह उठकर अनिच्छा से भी गंगा का स्मरण कर लेता है, उसके लिए तीनों लोकों में अमंगल का कोई भय नहीं रहता।

04

बिना इच्छा के भी किया गया गंगा स्मरण घर में संपदा लाता है, विपत्तियाँ दूर करता है और पुण्य को अक्षय कर देता है

संपदा, विपत्तियों का नाश और अक्षय पुण्य

· 08:38–08:58

वे कहते हैं कि बिना इच्छा से भी स्मरण कर लिया तो उसके घर में संपदा आती है; क्षण भर में उसकी सभी विपत्तियाँ दूर हो जाती हैं; जन्म-जन्मांतर के किए पाप नष्ट हो जाते हैं और उसके पुण्य अक्षय हो जाते हैं। दुःस्वप्न देखने पर, विपत्ति काल में, दुर्गम स्थान पर एक बार भी गंगा का स्मरण कर लेने पर मनुष्य कष्टों से छुटकारा पा जाता है — इसमें संदेह नहीं है।

05

क्रिया के आरंभ में गंगा स्मरण अविधिपूर्वक हुई क्रिया को भी सफल कर देता है, और जप-होम में निकले अपशब्द का उपाय भी यही है

अविधिपूर्वक हुई क्रिया का सफल हो जाना

· 08:59–09:25

वे कहते हैं कि किसी क्रिया के आरंभ में यदि गंगा जी का स्मरण कर लिया जाए और वह क्रिया अविधिपूर्वक भी हो गई हो, तो क्रिया सफल हो जाती है। और जप, होम, अनुष्ठान में लगा प्राणी यदि अप्रासंगिक वचन का उच्चारण कर लेता है, तो उस समय उसे बार-बार गंगा जी का स्मरण कर लेना चाहिए।

06

मोक्ष की इच्छा रखने वाला जहाँ भी गंगा जी का स्मरण करे, गंगा स्वयं उसकी सन्निधि में निवास करती हैं

गंगा का उसकी सन्निधि में निवास

· 09:26–09:48

वे कहते हैं कि मोक्ष की इच्छा रखने वाला मनुष्य जहाँ भी गंगा जी का स्मरण कर ले, गंगा उसकी मुक्ति के लिए स्वयं उसकी सन्निधि में निवास करती हैं। गंगा समस्त कामनाओं को शुद्ध करने वाली और सभी अमंगलों को मिटाने वाली हैं — इसलिए पुराणोक्त वचन के अनुसार अगर हमें तिथि इत्यादि प्राप्त हो रही है, तो प्रयास करके गंगा जी तक अवश्य पहुँचना चाहिए।

07

गंगा साक्षात परा प्रकृति यानी भगवती का प्रकट रूप हैं, और उनके स्मरण से वह मिल जाता है जो सब तीर्थों, तपों और यज्ञों से भी नहीं मिलता

गंगा के रूप में प्रकट परा प्रकृति

· 09:49–10:20

कहते हैं, वे बताते हैं, कि साक्षात परा प्रकृति यानी भगवती ही गंगा जी के रूप में प्रकट होकर प्राणियों को स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करती हैं। कुछ लोगों का ऐसा दुर्भाग्य होता है कि गंगा जी के किनारे जाकर भी स्नान नहीं कर पाते; उनका जीवन ही व्यर्थ है। जो पुण्य सभी तीर्थों के स्नान, सभी देवताओं के पूजन, सभी प्रकार के तप-यज्ञ से प्राप्त नहीं हो पाता, वह गंगा जी के स्मरण और स्नान से प्राप्त हो जाता है।

08

गंगा स्मरण से कौन-कौन से पाप नष्ट होते हैं?

गलत वचन, पर-गमन, सुरापान और अवैध हिंसा

· 10:21–10:44 · Also a question

मुख से जितना भी गलत वचन बोल दें, पर-स्त्री गमन या पर-पुरुष गमन से जो पाप हो जाए, सुरापान यानी मदिरापान, और जो अवैध हिंसा लोग कर देते हैं — ये सब, वे कहते हैं, गंगा जी के स्मरण मात्र से ठीक हो जाते हैं।

09

गंगा स्नान के उद्देश्य से यात्रा करने का क्या फल है?

पग-पग पर अश्वमेध और सैकड़ों वाजपेय

· 10:45–11:05 · Also a question

वे पढ़कर बताते हैं कि जो मनुष्य गंगा जी में स्नान के उद्देश्य से यात्रा करता है, उसे पग-पग पर अश्वमेध और सैकड़ों वाजपेय का फल प्राप्त होता है। गंगा स्नान को जानने वाले मनुष्य के पितृगण प्रसन्न होकर नाचने लगते हैं और उसके महानिंदनीय पाप भी दूर भाग जाते हैं। और जो आसन्न-मृत्यु मनुष्य गंगा यात्रा करता है, उसे देखकर यमदूत भयभीत होकर दूर चले जाते हैं।

10

जिनका मारकेश चल रहा है, उन्हें क्या करना चाहिए?

गंगा स्नान और जल में खड़े होकर इष्ट मंत्र का जप

· 11:06–11:26 · Also a question

जो लोग कहते हैं कि मारकेश चल रहा है — पंडित जी बोले हैं, ज्योतिष महाराज बोले हैं कि मारकेश में गड़बड़ हो सकती है — उन्हें गंगा स्नान इत्यादि करना चाहिए, और गंगा जी में खड़े होकर इष्ट मंत्र इत्यादि का जप करना चाहिए जो-जो बताया गया है। उससे उनका मारकेश का दोष भी शांत होता है, और सभी नक्षत्रों और सभी ग्रहों की शांति होती है।

11

क्या गंगा यात्रा में या गंगा जी में मृत्यु होने से मुक्ति मिलती है?

प्राकृतिक मृत्यु से मुक्ति; आत्महत्या से नहीं

· 11:27–12:09 · Also a question

वे कहते हैं कि जो गंगा जी की यात्रा में निकल जाए और मार्ग में किसी कारणवश उसका देह छूट जाए, तो भी उसकी मुक्ति समझ लेनी चाहिए; और गंगा जी में मृत्यु हो जाने पर तो मुक्ति अवश्य होती है। लेकिन मृत्यु वह जो प्राकृतिक हो। कोई जाकर आत्महत्या कर ले तो उसकी मुक्ति नहीं होती। जो जानबूझकर अपनी हत्या कर रहा है, उसे गंगा जी में जाने से भी मुक्ति नहीं मिलती।

12

गंगा जी की ओर जा रहे यात्री का आतिथ्य करने वाले को भी गंगा स्मरण का पूरा फल मिलता है, और कई तीर्थों से पहले गंगा या नर्मदा स्नान की बात आती है

आतिथ्य से गंगा स्मरण का पूरा फल

· 12:10–12:44

वे कहते हैं कि जो लोग गंगा जी को उद्देश्य करके जा रहे होते हैं और मार्ग में कोई उनका आतिथ्य करता है, तो उसको भी गंगा जी के स्मरण इत्यादि का पूरा फल मिल जाता है। वे यह भी जोड़ते हैं कि गंगा जी का स्नान किए बिना ब्रह्महत्या इत्यादि से कभी छुटकारा नहीं मिलता, और कई तीर्थ ऐसे हैं जहाँ जाने से पहले गंगा जी या नर्मदा जी में स्नान करने की बात आती है।

13

गंगा दशहरा को दशहरा क्यों कहा गया है, और उसका योग क्या है?

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, मंगलवार और हस्त नक्षत्र

· 12:45–13:23 · Also a question

जैसा देवी भागवत महापुराण में महादेव जी द्वारा वर्णन है, गंगा जी जब पृथ्वी पर आईं तो वह समय ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, मंगलवार और हस्त नक्षत्र से युक्त था। वही तिथि, पूरा का पूरा वही योग इस बार मंगलवार के दिन प्राप्त हो रहा है। जो दस जन्मों के पाप हर ले, इसलिए इन्हें दशहरा कहा गया है।

14

उसी दिन बटुक भैरव जयंती भी है, और बिना बटुक भैरव के घर पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं होता

बटुक भैरव जयंती, और भैरव-रहित घर

· 13:24–13:52

उसी दिन, वे कहते हैं, बटुक भैरव बाबा की जयंती भी है। लगभग दो वर्षों से वे प्रयास कर रहे हैं कि जितने भी लोग सुन रहे हों, घर में भैरव जी को स्थान दें और बटुक भैरव जी की पूजा-पाठ करें, क्योंकि बिना बटुक भैरव के घर पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं होता।

15

क्या शैव परंपरा के बाहर भी भैरव जी की पूजा होती है?

वैष्णव और हर मंडल में भैरव पूजन

· 13:53–14:28 · Also a question

वे कहते हैं कि चाहे आप किन्हीं भी देवी-देवता की पूजा करते हों, भैरव जी की पूजा होती ही है। नारायण की पूजा करते हों, वैष्णव हों, या किसी अन्य शैव संप्रदाय में हों — भैरव जी की पूजा होती है। भगवान नारायण से संबंधित जितनी शक्तियाँ और अवतार हैं, उनमें भी भैरव जी का वर्णन है और उनके मंडल पूजन में भैरवों का पूजन होता है। और जहाँ भी अष्टमातृकाएँ पूजी जाती हैं, वहाँ अष्ट भैरवों का पूजन होता ही होता है।

16

भैरव कौन हैं?

साक्षात शिव और रक्षा-प्रधान देवता के रूप में भैरव

· 14:29–15:02 · Also a question

इसलिए भैरव जी प्रमुख देवता के रूप में, रक्षा-प्रधान देवता के रूप में साक्षात महादेव हैं। भैरव साक्षात शिव हैं और वे अनादि काल से हैं। काल भैरव और बटुक भैरव उनके प्रमुख स्वरूप माने गए हैं, जिनमें भगवान महादेव प्रकट हुए हैं, अवतार लिए हैं; और उनके सिवाय भी अनेक भैरव हैं जो शक्तिपीठों इत्यादि में रक्षण करते हैं।

17

कुल भैरव कौन होते हैं, और यह पद कैसे मिलता है?

कुलदेवी के भैरव, या भगवती के सेवक को मिला पद

· 15:03–15:54 · Also a question

हमारे घर के रक्षण-प्रधान प्रमुख देवता कुल के भैरव होते हैं। यह पद एक तो साक्षात इस प्रकार होता है कि जो महाशक्ति हमारे घर की कुलदेवी हैं, उनके भैरव ही कुल भैरव होते हैं। दूसरे, जो लोग हमारी कुल परंपरा में पहले के समय में माँ भगवती की सेवा करते रहे हों, उनकी जब गति होती है और उस प्रकार की इच्छा हो, तो उन्हें ऐसा पद दे दिया जाता है। लेकिन वे ज़ोर देकर कहते हैं कि इसका अर्थ कहीं भी यह नहीं है कि कोई भूत-प्रेत-पिशाच हो और उसे भैरव का स्थान मिला हो।

18

जिनके घर में भैरव जी नहीं हैं, वे गंगा जी से कुल भैरव की स्थापना कैसे करें?

गंगा में स्नान कराया त्रिशूल या श्री विग्रह, और हवन के साथ स्थापना

· 15:55–16:52 · Also a question

जिनके घर में बटुक भैरव जी की स्थापना नहीं है, वे अगर उस दिन गंगा जी जा रहे हैं तो वहीं से स्मरण करें — गंगा जी में खड़े होकर बटुक भैरव जी का, अपने कुल के भैरव का स्मरण कीजिए। एक त्रिशूल लेते जाइए, या बटुक भैरव जी का फोटो भी रख सकते हैं, या श्री विग्रह; उनके अनुसार श्री विग्रह मिल जाए तो उचित है, न मिले तो त्रिशूल ले जाना चाहिए।

19

मंडल में अष्ट भैरवों का पूजन कहाँ होता है?

अष्टदल कमल में अष्टमातृकाएँ, और अग्र भाग में भैरव

· 16:53–17:33 · Also a question

अष्ट भैरव अति प्रसिद्ध हैं, और उनका सामर्थ्य और स्वरूप हर प्रकार के तंत्र में देखने को मिलता है। जिस भी तंत्र में — दैवी शक्ति से संबंधित, शाक्त, शैव, और वैष्णव में भी परम वैष्णव, महा वैष्णव शक्तियाँ — जब भी उनका पूजन अष्टदल कमल में होता है, तो अष्टदल कमल में अष्टमातृकाएँ ही अलग-अलग रूप में पूजित होती हैं; मध्य में अष्टमातृकाएँ और बिल्कुल आगे अग्र भाग की ओर उनकी आठ शक्तियों के रूप में भैरव पूजित होते हैं।

20

अष्टमातृकाएँ कौन-कौन सी हैं?

ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी, चामुंडा, महालक्ष्मी

· 17:34–17:50 · Also a question

आठ भैरव प्रमुख रूप से वे हैं जिन्हें हम सभी जानते हैं, और वे उन अष्टमातृकाओं के अनुरूप हैं जिन्हें हम पूजते हैं: ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी, चामुंडा और महालक्ष्मी।

और आठ भैरव जो प्रमुख रूप से हम सभी जानते हैं, वक्ता कहते हैं, वे उन अष्टमातृका के अनुरूप हैं जिन्हें हम पूजते हैं: ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी, चामुंडा और महालक्ष्मी। इन सभी को हम लोग पूजते हैं। अब उसी प्रकार इनके भैरव कौन-कौन हो जाएँगे?

21

अष्टमातृकाओं में से प्रत्येक के साथ कौन सा भैरव पूजित होता है?

असितांग, रुरु, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाल, भीषण और संहार

· 17:51–18:35 · Also a question

ब्राह्मी के भैरव असितांग हैं; माहेश्वरी के भैरव रुरु; कौमारी के चंड भैरव; भगवती वैष्णवी के क्रोध भैरव — यही क्रोध भैरव माँ भगवती छिन्नमस्तिका के साथ भी पूजित होते हैं। उन्मत्त भैरव देवी वाराही के साथ, और इंद्राणी यानी इंद्राक्षी के साथ कपाल भैरव पूजित होते हैं। जिनकी कुलदेवी चामुंडा हैं, वे पूछते हैं कि चामुंडा के साथ कौन — प्रमुख रूप से बटुक भैरव तो सभी शक्तियों के साथ हैं, लेकिन ऐसे देखा जाए तो चामुंडा के साथ भीषण भैरव और लक्ष्मी के साथ संहार भैरव की पूजा होती है।

22

बहुत सारे आवरण पूजन ग्रंथों में भैरवों का पूजन क्यों नहीं दिया गया है?

आवरण वर्णनों से छूटा भैरव पूजन

· 18:36–19:04 · Also a question

ये प्रमुख आठ भैरव और अष्टमातृकाएँ — इनका पूजन प्रत्येक यंत्र में होता है: जितने भी देवी-देवता हैं, सभी के यंत्र मंडल में अष्टमातृकाओं की पूजा होती ही होती है और उनके साथ अष्ट भैरव होते ही होते हैं। हाँ, आवरण पूजन इत्यादि में विभिन्न प्रकार के भेद मिल जाएँगे, और बहुत सारी जगहों पर भैरवों के पूजन का वर्णन ही नहीं दिया जाता। कारण उन्हें पता नहीं; सबका अपना कोई कारण रहा होगा।

23

क्या जप में देव शक्ति और देवी शक्ति दोनों का पूजन आवश्यक है?

महामृत्युंजय और अमृतेश्वरी को जोड़ने वाला दशांश जप

· 19:05–19:41 · Also a question

वे कहते हैं कि भैरवों को छोड़ देना संभव ही नहीं है। जैसे महामृत्युंजय का जप कर रहे होते हैं तो बार-बार बोलते हैं कि देव शक्ति और देवी शक्ति दोनों का पूजन होना चाहिए। अगर महामृत्युंजय सवा लाख कर रहे हैं तो — ट्रांसक्रिप्ट के शब्दों में — 1250000 मंत्र भगवती अमृतेश्वरी का जप करना ही पड़ेगा, उनका दशांश जप; और अगर भगवती पीतांबरा जैसे स्वरूप का सवा लाख जप कर रहे हैं तो 12500 यानी दशांश जप महामृत्युंजय का करना ही पड़ेगा।

24

प्रपंचसार में अष्ट भैरवों के विषय में क्या कहा गया है?

आदि शंकराचार्य का प्रपंचसार और उसके भिन्न नाम

· 19:42–20:10 · Also a question

उसी प्रकार भगवान आदि गुरु शंकराचार्य महाराज के प्रसिद्ध तंत्र ग्रंथ प्रपंचसार में भी अष्ट भैरवों का वर्णन है। बस उसमें नाम थोड़ा सा बदल गया है, लेकिन भैरवों का स्वरूप लगभग वैसा ही माना गया है। उसमें भीषण भैरव तो हैं, लेकिन कालराज, रुरु भैरव इत्यादि का नाम अलग से आया है, और क्रोध, चंड, कपाल भैरव और भूतनाथ भैरव — इन चारों का नाम अलग से आया है।

25

आठ के सिवाय भी ग्रंथों में बहुत सारे भैरवों के नाम आते हैं — मंथान, फटकार, षटचक्र आदि

मंथान, फटकार, षटचक्र, हविर्भक्ष और भ्रमर भास्कर

· 20:11–20:23

इनके सिवाय भी बहुत सारे भैरव हैं — मंथान भैरव, फटकार भैरव, षटचक्र भैरव, हविर्भक्ष भैरव, भ्रमर भास्कर भैरव: ऐसे भैरवों का उल्लेख आपको प्राप्त होता है।

इनके सिवाय भी बहुत सारे भैरव हैं, वक्ता कहते हैं। मंथान भैरव, फटकार भैरव, षटचक्र भैरव, हविर्भक्ष भैरव, भ्रमर भास्कर भैरव — ऐसे आपको भैरवों का उल्लेख प्राप्त होता है।

26

52 वीरों का भैरव पूजन से क्या संबंध है?

बिना भैरव के 52 वीरों का संतुलन नहीं

· 20:24–20:42 · Also a question

जो 52 वीर हैं, जिनके विषय में हम सभी जानते हैं — वे प्रमुख रूप से जिस क्षेत्र में पूजित होते हैं, वहाँ भी बिना भैरव जी के पूजन के उन वीरों की पूजा या उनकी सही प्रकार से स्थिति नहीं हो सकती — उनका संतुलन नहीं हो सकता।

जो 52 वीर हैं, जिनके विषय में हम सभी जानते हैं, वक्ता कहते हैं: वे 52 वीर प्रमुख रूप से जिस क्षेत्र में पूजित होते हैं, वहाँ भी बिना भैरव जी के पूजन के उन वीरों की पूजा नहीं हो सकती, या उन वीरों की सही प्रकार से स्थिति नहीं हो सकती। उनका संतुलन नहीं हो सकता।

27

दस वीर भैरव कौन हैं, और उनका पूजन कहाँ होता है?

दसभुजी महादुर्गा के पूजन में सृष्टि, स्थिति, संहार, रक्त, यम, मृत्यु, भद्र आदि वीर भैरव

· 20:43–21:43 · Also a question

प्रमुख जो दस वीर भैरव आते हैं, उनका पूजन दसभुजी महादुर्गा — जो महिषासुर मर्दिनी हैं — के पूजन में होता है, जिनका विशिष्ट पूजन बंगाल इत्यादि के क्षेत्र में शारदीय नवरात्रि में होता है; वहाँ जो लोग तंत्रोक्त अनुष्ठान करते हैं, वे विशेष करके इन दस भैरवों का पूजन करते हैं। इनमें सृष्टि वीर भैरव, स्थिति वीर भैरव, संहार वीर भैरव, रक्त वीर भैरव, यम वीर भैरव, मृत्यु वीर भैरव, भद्र वीर भैरव नाम लिए गए हैं; अधिकांश श्मशान इत्यादि के क्षेत्र में वीर के लिए पूजित किए जाते हैं। इनका स्वतंत्र पूजन बहुत कम लोग करते हैं — या तो आवरण में दस भुजा में पूजन कर देते हैं, या किसी को जगाना, सिद्ध करना हो तब प्रयोग करते हैं।

28

स्वयं बटुक भैरव के कितने स्वरूप हैं?

स्कंद बटुक, चित्र बटुक और विरंचि बटुक

· 21:44–22:11 · Also a question

हम लोग केवल बटुक भैरव के विषय में जानते हैं कि भगवान बटुक भैरव हैं; लेकिन, वे कहते हैं, आपको शायद ही यह जानकारी होगी कि भगवान बटुक भैरव का स्वरूप भी तीन रूप में है। तीन बटुक भैरव हैं, और इसी तंत्र के विविध प्रकार में इन तीन भैरवों का उल्लेख मिलता है: स्कंद बटुक, चित्र बटुक और विरंचि बटुक।

29

देवी महालसा, मल्ल और मणि के साथ मार्तंड भैरव की कथा महाकाली टीवी सीरियल में पूरी दिखाई गई थी

देवी महालसा, मल्ल-मणि, और शंकर के दो रूप

· 22:12–22:52

दक्षिण की ओर, वे कहते हैं, हम भगवान मार्तंड भैरव इत्यादि की कथा सुनते हैं, देवी महालसा की, मल्ल और मणि की कथा — जो महाकाली टीवी सीरियल में दिखाई गई थी, जिसमें मार्तंड भैरव और भगवती का पूरा वर्णन था। उसमें भगवान शंकर ने जो रूप धारण किए, दो रूप धारण करने का बताया गया है; और मार्तंड भैरव के सिवाय तंत्र प्रपंचसार, तंत्र चिंतामणि इत्यादि में भी विभिन्न स्वरूप माने गए हैं, जिनमें बटुक भैरव का भी एक स्थान माना गया है।

30

रुद्रयामल के अनुसार भैरव कितने हैं?

64 योगिनियों के साथ चलने वाले 64 भैरव

· 22:53–23:12 · Also a question

सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ रुद्रयामल के अनुसार, वे कहते हैं, हम लोग ऐसे तो 52 भैरव सुनते हैं, 51 भैरव सुनते हैं, लेकिन उसके अनुसार 64 योगिनियों के साथ 64 भैरव चलते हैं। जिनका हम 64 योगिनियों के रूप में पूजन करते हैं — जया, विजया, अजिता, अपराजिता, जयंती — उन सभी योगिनियों के भैरव होते हैं।

31

64 योगिनियों के साथ 64 भैरवों का पूजन शायद ही कोई बताता है, जबकि एक समय के बाद उसका आदेश कर देना चाहिए

आवरण पूजन में जो नहीं बताया जाता, और क्यों बताना चाहिए

· 23:13–23:50

आपको आश्चर्य होगा, वे कहते हैं, कि कोई भी व्यक्ति सामने से यह नहीं बताता — यही सब विषय हैं जो लोग नहीं बताते — कि 64 योगिनियों के साथ आवरण पूजन में 64 भैरवों का भी पूजन करना है, जबकि एक समय के पश्चात इसके लिए आदेश कर देना चाहिए।

32

दुर्गा सप्तशती के यंत्र के भीतर क्या है, जो लोग देख नहीं पाते?

यंत्र के भीतर का विज्ञान, और वह क्यों कीमती है

· 23:51–24:18 · Also a question

आपको कोई छोटा सा यंत्र, चलिए दुर्गा सप्तशती का यंत्र दे दिया गया — क्या पता है आपको कि उसमें क्या है? लोग बोलेंगे हाँ ठीक है, फूल-पत्ती बनी हुई है, दुर्गा जी की पूजा होती है, कुछ नहीं होता, अक्षत-पुष्प-गंध। लेकिन जब आप उसके पूरे विज्ञान को भीतर से समझेंगे तब पता चलेगा कि वह आपके लिए कितना कीमती है — और तब पता चलेगा कि उसमें अष्टमातृकाओं के साथ आठ भैरव और 64 योगिनियों के साथ 64 भैरवों का पूजन होता है।

33

महादुर्गा के पूजन से ब्रह्म राक्षस का दोष क्यों शांत होता है?

64 भैरवों में एक का नाम ही ब्रह्म राक्षस है

· 24:19–24:49 · Also a question

कहा जाता है कि बड़ी दुर्गा यानी महादुर्गा का पूजन 64 योगिनियों के पूजन के बिना होगा ही नहीं; और कहा जाता है कि माँ भगवती महादुर्गा का पूजन किया जाए तो ब्रह्म राक्षस इत्यादि का दोष तुरंत शांत होता है। उसके पीछे कारण, वे कहते हैं, यह है कि 64 योगिनियों के पूजन में जो 64 भैरव होते हैं, उनमें एक भैरव का नाम ही ब्रह्म राक्षस है — भगवान भैरव को ब्रह्म राक्षस के रूप में भी माना गया है, और 64 भैरवों में एक यह भी आते हैं।

34

प्रेत भक्षणी और नर भोजिका नामों का क्या अर्थ है?

भक्षण का अर्थ दुष्टों का नाश है, मनुष्यों को खाना नहीं

· 24:50–25:49 · Also a question

प्रमुख 64 योगिनियों में एक का नाम प्रेत भक्षणी है और एक का नर भोजिका। नाम सुनकर ही लोग भागने लगेंगे कि अरे बाप रे, कितना खतरनाक नाम है। लेकिन इसका अर्थ कहीं भी यह नहीं है, वे कहते हैं, कि नर भोजिका अब नरों का भोजन कर रही है। जो दुष्ट हैं, उनका भक्षण तो भगवती करती ही हैं — लेकिन भक्षण का अर्थ यह नहीं कि उठाकर खा जाएँगी। ये सभी स्वरूप हैं; इनसे घबराना या भागना नहीं है।

35

यंत्र बनवाने से पहले यह पूछना चाहिए कि कौन बनाएगा और कैसे, क्योंकि जिन कारीगरों को यह काम सौंपा जाता है उनसे फर्क पड़ता है

यंत्र कौन बनाता है, यह पूछना

· 25:50–26:42

यंत्र को लेकर इतनी दुविधा फैली है कि क्या बोला जाए, वे कहते हैं। कुछ दिन पहले किसी ने चाँदी के यंत्र का पोस्ट डाला कि ऐसा यंत्र बनवाना हो तो बताइएगा। एक महाराज जी ने पता किया कि भाई, आप यंत्र कैसे बनाएँगे, क्या पैसा लगेगा — क्योंकि यंत्र को लेकर वे बहुत सचेत रहते हैं कि साधक के पास सही तरीके का हो। चर्चा में पता चला कि यंत्र बाहर के ऐसे कारीगर बना रहे थे जिन्हें बेचने वाला जानता तक नहीं था; कहा गया कि अपने पास वैसे कारीगर बचे ही नहीं जो पत्ता बनाने और तार मोड़ने का महीन काम करें, और कोई सीखना ही नहीं चाहता।

36

क्या बिना श्री विद्या दीक्षा के घर में श्री यंत्र रखना चाहिए?

बिना श्री विद्या दीक्षा के श्री यंत्र की मार्केटिंग

· 26:43–27:18 · Also a question

वे कहते हैं कि श्री यंत्र अब घर-घर में मिल जाएगा — इतनी गूढ़ चीज़, जिसका यंत्रार्चन इत्यादि बिना श्री विद्या दीक्षा के बड़ा क्लिष्ट होता है। लेकिन कितने घर मिल जाएँगे जिनमें श्री यंत्र रखा हो? श्री यंत्र की सबसे ज़्यादा मार्केटिंग हुई है। पूछ दीजिए कि श्री यंत्र में मध्य में किस-किसकी पूजा होगी — पता नहीं। श्री यंत्र कितने प्रकार के होते हैं — पता नहीं। बस इतना पता है कि लक्ष्मी जी का यंत्र है।

37

यंत्र किसे बनाना चाहिए, और किन शर्तों पर?

बनाने वाले का समय, उसका मंत्र, और आवरण का क्रम

· 27:19–28:23 · Also a question

यंत्र का पूरा विज्ञान है, वे कहते हैं, और वह बनाने वाले व्यक्ति के मुख्य समय पर निर्भर होता है। अभी पुष्य नक्षत्र गया — पुष्य नक्षत्र में कितने यंत्र बने होंगे? कौन बनाएगा? जो विधियुक्त बनाते हैं। लेकिन बनाने वाला व्यक्ति कैसा हो? जब यंत्र बनाए तो भगवती के नाम स्मरण इत्यादि करते हुए, या गुरु-प्रदत्त मंत्र का जप करते हुए, और जिस प्रकार आवरण बनता है उस क्रम के अनुसार बनाना शुरू करे। जो अनजान कारीगर से बनवाकर घर में पूज रहे हैं — वह क्या खाकर, क्या पीकर आया, यह भी पता नहीं — उससे बड़ा दोष लगता है।

38

आवरण विधि सीखने से पहले कितने समय तक अर्चन करना चाहिए?

आवरण से पहले छह महीने से साल भर का अर्चन

· 28:24–28:57 · Also a question

आरंभिक पूजन, वे कहते हैं, कम से कम सवा महीने का होता है; कुछ लोगों का तो साल-साल भर तक। पहले सूक्त इत्यादि कंठस्थ हों, नहीं तो शतनाम इत्यादि के द्वारा अर्चन छह-छह महीने, साल-साल भर तक पहले करना चाहिए। तब जाकर उसकी आवरण विधि भी सीख लेनी चाहिए।

39

आवरण पूजन तभी सीखें जब अर्चन का नित्य नियम बन जाए, और उसे धीरे-धीरे कई बार में सीखें; बीज मंत्र उसके बाद

आधे घंटे से सवा घंटे के अर्चन का बना हुआ नियम

· 28:58–29:25

जब आपको कंठस्थ हो जाए और एक नियम बन जाए — कि हम लगभग आधा घंटा, सवा घंटा बैठकर बढ़िया से अर्चन कर ले रहे हैं, सहस्र अर्चन, शत अर्चन कर ले रहे हैं, नियम में आ गया है, अपने देवी-देवता का कर ले रहे हैं — तब बैठकर आवरण पूजन सीखिए। एक बार में नहीं सीख पाइएगा; दस बार में, धीरे-धीरे सीखिए।

40

बीज मंत्रों के बाद मुद्राएँ, फिर आवरण विस्तार और पीठ पूजन सीखा जाता है

मुद्राएँ, फिर आवरण विस्तार और पीठ पूजन

· 29:26–29:55

जब वह सीख लेते हैं, तब मुद्राओं के साथ सीख लीजिए — एक-एक आवरण में कब कौन सी मुद्रा दिखानी है, कितने मंत्रों के बाद दिखानी है, सबकी अलग-अलग किस प्रकार से है, कहाँ ध्यान कैसे करना है। इन तीन-चार चीज़ों के बाद आवरण विस्तार सीख लीजिए — कि अभी हम नवम आवरण तक हैं, दशम और एकादश कैसे करेंगे, द्वादश-त्रयोदश कैसे करेंगे। वह सीख लीजिए, पीठ पूजन सीख लीजिए।

41

केवल घंटी बजाकर अगरबत्ती दिखाने वाली विधि माँगना, कि उतने से सारा काम हो जाए, बेवकूफी कही गई है

घंटी-अगरबत्ती वाली विधि

· 29:56–30:23

लोग इतने बेवकूफ हैं, वे कहते हैं: अरे ये बड़ा पूजन कराते हैं, बड़ा बताते हैं, इनसे नहीं होगा। घंटी बजाकर अगरबत्ती दिखाने वाली विधि कोई बता दीजिए, उतने से मेरा सारा काम हो जाए। इतने में ही सबका जीवन बना हुआ है — इससे ज़्यादा का मत बताइए। पंडित जी, इतना लंबा मत बताइए। उतना नहीं होगा।

42

क्षेत्रपाल पूजन के पीछे का विज्ञान क्या है?

उस स्थान की हर चीज़ उनके आसन के नीचे

· 30:24–31:10 · Also a question

मन में यह गलतफहमी भरने के खिलाफ कि क्षेत्रपाल के पूजन से अनिष्ट हो जाएगा, क्षेत्रपाल आपके घर प्रेत-पिशाच भेज देंगे, वे कहते हैं: इसके पीछे का विज्ञान समझिए, इधर भी परा विज्ञान क्या है। जब भी कहीं क्षेत्रपाल की स्थापना होती है — क्षेत्रपाल के रूप में, डेही के रूप में, ग्राम देवता के रूप में किसी शक्ति को बैठाया जाता है — तो जब वे उस क्षेत्र के अधिपति बनते हैं, उनके ही आसन के नीचे उस स्थान के जितने भी प्रेत-पिशाच होते हैं, वे सभी रहते हैं।

43

क्षेत्रपाल पूजन को अनिवार्य क्यों बताया गया है?

वे आपके क्षेत्र की नकारात्मकता रोके हुए हैं, इसलिए श्रद्धा देनी है

· 31:11–31:49 · Also a question

यही कारण है, वे कहते हैं, कि क्षेत्रपाल का पूजन अनिवार्य बताया गया है। कहा जाता है कि अगर क्षेत्रपाल का पूजन नहीं दीजिएगा तो आपके घर में — लोग बोलते हैं न — क्षेत्रपाल भूत भेज देंगे, साँप भेज देंगे, बिच्छू भेज देंगे। यह ऐसे ही नहीं कहा जा रहा, क्योंकि वे क्षेत्रपाल हैं और आपके घर की नकारात्मक शक्तियों को वहाँ रोके हुए हैं।

44

जब भगवान ही सब कुछ हैं, तो उन्हें कुछ अर्पण क्यों करें?

तेरा तुझको अर्पण — अन्न भी उन्होंने दिया और अर्पण की बुद्धि भी

· 31:50–32:22 · Also a question

वे कहते हैं कि रामपाल का कोई चेला झूठी बात लेकर आया है कि भगवान को कुछ क्यों दें, भगवान ही तो सब कुछ हैं। बिल्कुल हैं भगवान — तो सामर्थ्य है, तभी तो वे अन्न प्रकट भी कर रहे हैं और हमारे भीतर वह बुद्धि भी दे रहे हैं कि "तेरा तुझको अर्पण" हम कर सकें।

45

क्या क्षेत्रपाल पूजन से स्वयं कोई अनिष्ट होता है?

पूजन से अनिष्ट नहीं, पर गलत नीयत पर चेतावनी

· 32:23–32:45 · Also a question

इन बकवास बातों से निकलिए, वे कहते हैं — क्षेत्रपाल पूजन कीजिए, उनसे डरिए मत। क्षेत्रपाल पूजन करने से कोई अनिष्ट नहीं होता, बल्कि अनिष्टों का नाश होता है। हाँ, गलत विधि से करिएगा — और गलत विधि का अर्थ केवल विधि नहीं: अगर आप कोई उल्टा-सीधा काम करने के लिए, किसी को हानि पहुँचाने के लिए, किसी के कहने में आकर कोई मंत्र-वंत्र का प्रयोग करके कर रहे हैं, तो आपका भगवान मालिक है; वहाँ फिर कुछ नहीं कहा जा सकता।

46

अगर ग्राम देवता के रूप में भैरव की जगह किसी मृत व्यक्ति या ब्रह्म की स्थापना हुई हो तो क्या करें?

जहाँ ब्रह्म बैठाया गया हो, वहाँ के नियम जानना

· 32:46–33:10 · Also a question

नए समय में, वे कहते हैं, भैरव जी के सिवाय जिस प्रकार की शक्तियों की स्थापना की गई है — जहाँ क्षेत्रपाल, ग्राम देवता के रूप में भैरव बाबा की स्थापना न करके किसी मृत व्यक्ति को, ब्रह्म इत्यादि को स्थापित किया गया है — वहाँ का क्या नियम-कानून है, वह आपको जान लेना चाहिए, अगर वैसा स्थान दिया गया है तो। उनको क्या चढ़ता है, क्या नहीं चढ़ता — क्षेत्र के अनुसार जानकर तब देना चाहिए।

47

प्रधानमंत्री के पद की तरह, क्षेत्रपाल का पद अपनी गरिमा बनाए रखता है — चाहे उस पर कोई भी बैठे और उसकी विधि कैसी भी हो

पद की गरिमा, चाहे उस पर कोई भी हो

· 33:11–33:51

वे कहते हैं कि अभी प्रधानमंत्री मोदी जी हैं, उससे पहले जो भी थे — सब जब उस पद पर गए तो उस अनुसार अपने विधि-नियम में फेरबदल किए, लेकिन उनका सम्मान, वह पद सर्वश्रेष्ठ रहा, सर्वोच्च पद रहा। उस पद की गरिमा बनी रहती है। उसी प्रकार जिसको भी क्षेत्रपाल के पद पर बैठाया जाता है, वह अपना जो दायित्व है, उसका पालन करेगा — जो दायित्व दिया गया है, जो सामर्थ्य प्राप्त है, उसी अनुसार करेगा।

48

ग्राम देवता का दोष क्यों लगता है?

दोष आपकी अपनी गलती से लगता है

· 33:52–34:10 · Also a question

तो ये जो उल्टे-सीधे विचार लोग बोलते हैं — क्षेत्रपाल पूजन करने से ऐसा हो जाएगा, गलत करेंगे तो आपके ऊपर आ जाएँगे, ग्राम देवता आने लगे, ग्राम देवताओं का दोष लग गया — यह आपकी गलती के कारण लगता है, सबसे पहली बात। और जो लोग तंत्र विचार में इनको चला देते हैं, वहाँ उनके साथ भी अनिष्ट होता है; लेकिन यह एक अलग तंत्र का विषय हो गया।

49

ग्राम देवता के प्रति सामान्य रूप से क्या करना चाहिए?

होली, दीपावली का दीपक, और विवाह से पहले निमंत्रण

· 34:11–34:41 · Also a question

सामान्य पूजन में जाना चाहिए: होली के समय जाना चाहिए, दीपावली के समय दीपक वहाँ रखकर आना चाहिए, और घर में विवाह इत्यादि शुभ मांगलिक कार्य हो तो वहाँ निमंत्रण ज़रूर देना चाहिए। यहाँ लोग यह गलती कर देते हैं कि नहीं देंगे। नहीं देंगे तो क्या होगा? वहाँ दिक्कत हो जाती है, आगे बहुत परेशानी होती है; इसलिए यह गलती नहीं करनी चाहिए। भैरव जी का कोई भी स्वरूप हो, उनकी सेवा-पूजा कभी छोड़नी नहीं चाहिए।

50

दस महाविद्याओं में त्रिपुर भैरवी के भैरव कौन हैं?

त्रिपुर भैरव के भीतर बटुक भैरव

· 34:42–35:15 · Also a question

दस महाविद्याओं की बात करते हुए वे कहते हैं कि जानना चाहिए कि दस महाविद्याओं में जो भगवती त्रिपुर भैरवी हैं, उनके जो भैरव हैं — त्रिपुर भैरव जो स्वरूप कहा गया है — उनमें भी बटुक भैरव हैं। यानी महाविद्याओं में अगर हम बटुक भैरव का पूजन कर रहे हैं तो कहीं न कहीं उनके साथ भगवती त्रिपुर भैरवी भी पूजित होती हैं। इसलिए अपने घर में बटुक भैरव जी की पूजा ज़रूर करनी चाहिए।

51

काली, अमृतेश्वरी और बगलामुखी के भैरव कौन हैं?

महाकाल, और महामृत्युंजय अमृतेश्वर महादेव

· 35:16–35:40 · Also a question

उसके सिवाय काली जी के विषय में हम जानते हैं कि महाकाल उनके भैरव हैं, और पुष्पांजलि इत्यादि देते समय "महाकाल भैरव सहित" इत्यादि मंत्रों का उच्चारण भी करते हैं। भगवती अमृतेश्वरी या भगवती बगलामुखी — जिन्हें भगवती सुमुखी भी कहा जाता है — उनके भैरव महामृत्युंजय अमृतेश्वर महादेव होते हैं, जिनके विषय में वे दशांश तर्पण, मार्जन और जप के लिए बता रहे थे।

52

सिद्ध कुंजिका सबके लिए क्यों नहीं है?

कुंजिका मंत्रों के भीतर त्रिखंडी और त्रिकुटी विद्या

· 35:41–36:08 · Also a question

भगवती के अनेक मंत्र हैं, जिनमें सिद्ध कुंजिका के बहुत सारे प्रसिद्ध मंत्र हैं, जिन्हें अब वायरल कर दिया गया है — गुप्त कुछ रहा नहीं। उनमें त्रिखंडी विद्या, त्रिकुटी विद्या का प्रयोग होता है। इसीलिए कहा गया है कि भाई, सब कोई मत करिए — ये महाविद्याओं में आती हैं, परा विद्याओं में आती हैं। इसका प्रयोग करेंगे और विधि-निषेध का पालन नहीं करेंगे तो दिक्कत हो जाएगी — इसीलिए मना किया गया है।

53

त्रिकुटा मंत्र के साथ किस भैरव का जप करना चाहिए?

त्रिकुटा के साथ कामेश्वर भैरव

· 36:09–36:35 · Also a question

त्रिकुटा भैरव — जब हम त्रिकुटा मंत्र का प्रयोग करते हैं तो कामेश्वर भैरव का जप करना चाहिए। जो लोग सिद्ध कुंजिका, जितनी बड़ी-बड़ी गुप्त कुंजिकाएँ हैं — डामर वाली कुंजिका, डामर कुंजिका स्तोत्र, कुब्जिका का कुंजिका स्तोत्र, त्रिपुरा कुंजिका — का पाठ करने लगते हैं कि हमको प्राप्त हो गया, करेंगे, तुरंत सिद्धि मिलेगी — उन्हें पता ही नहीं कि जहाँ भूकुट विद्याओं, त्रिकुटा विद्याओं का प्रयोग हुआ है, वहाँ उनके भैरवों का जप भी करना है।

54

कुंजिका के मंत्र में भैरवों के मंत्र गर्भस्थ होने पर भी उनका अलग से दशांश जप करना पड़ता है

गर्भस्थ मंत्र के बाद भी अलग दशांश जप

· 36:36–36:47

कुंजिका के मंत्र में भैरवों के मंत्र को गर्भस्थ किया गया है — भीतर समाहित। लेकिन पुनः-पुनः यह बात जान लीजिए, वे कहते हैं, कि उनके भैरवों का अलग से दशांश जप करना पड़ता है।

कुंजिका के मंत्र में भैरवों के मंत्र को गर्भस्थ किया गया है, वक्ता कहते हैं। लेकिन पुनः-पुनः यह बात जान लीजिए कि उनके भैरवों का अलग से दशांशसाधना के चरणों को जोड़ने वाला दशमांश (एक-दसवां) अनुपात नियम — कुल जप संख्या के दसवें भाग जितना हवन, हवन के दसवें भाग जितना तर्पण, और तर्पण के दसवें भाग जितना मार्जन किया जाता है। जप करना पड़ता है।

55

भगवती शारदा के भैरव कौन हैं?

शारदा के भैरव के रूप में साक्षात शिव

· 36:48–37:46 · Also a question

अब भगवती शारदा, माँ भगवती शारदा — उनके भैरव साक्षात शिव कहे गए हैं। यह आपको जानने को मिलेगा, वे कहते हैं, और आगे जब भगवती शारदा से संबंधित भैरव चर्चा अलग से करेंगे, तब उसमें भी यह विषय बताएँगे।

अब भगवती शारदाविद्या और वाणी की अधिष्ठात्री देवी।, माँ भगवती शारदा — उनके भैरव साक्षात शिव कहे गए हैं, वक्ता कहते हैं। यह आपको जानने को प्राप्त होगा। आगे भी जब भगवती शारदा से संबंधित भैरव चर्चा अलग से करेंगे, तब उसमें भी यह विषय बताएँगे।

56

पूजन के दिन किसी की जयंती पड़ जाए तो पूजन में क्या जोड़ना चाहिए?

जिसकी जयंती है, उसके नाम की ग्यारह-ग्यारह आहुति

· 37:47–38:13 · Also a question

हम जब कोई विशेष पूजन कर रहे होते हैं, नित्य पूजन कर रहे होते हैं, जयंती-पर्व इत्यादि में — विशेष रूप से इतना ही करना चाहिए कि जिनकी जयंती पड़ी है — जैसे अभी आप भगवती का कर रहे हैं, लेकिन बटुक भैरव और भगवती गंगा की जयंती पड़ी — तो उनके नाम की भी ग्यारह-ग्यारह आहुति साथ में दे देनी चाहिए।

57

भैरव महामंत्र के 8000 जप के बाद संख्या बढ़ाते जाना चाहिए और उसी एक मंत्र को पकड़कर लंबा चलना चाहिए

बढ़ाते जाइए, और एक को पकड़कर लंबा चलिए

· 38:14–38:29

भैरव महामंत्र के 8000 जप हो जाने पर पूछे जाने पर वे कहते हैं: और बढ़ाइए। 8000 जप से क्या होगा? नहीं लग रहे हैं तो बढ़ाते जाइए। एकदम इसी को करिए; एक ही को पकड़कर लंबा चलिए।

भैरव महामंत्र के 8000 जप हुए हैं, एक श्रोता बताते हैं। और बढ़ाइए, वक्ता उत्तर देते हैं। 8000 जप से क्या होगा? नहीं लग रहे हैं तो बढ़ाते जाइए। एकदम इसी को करिए। एक ही को पकड़कर लंबा चलिए।

58

निर्धारित दिन शक्तिपीठ पर और बाकी दिन घर में साधना की जा सकती है

23 तारीख को शक्तिपीठ, बाकी दिन घर

· 38:30–38:57

हाँ, बिल्कुल — 23 तारीख को शक्तिपीठ पर, और बाकी दिन घर में कर सकते हैं।

हाँ, बिल्कुल, वक्ता उत्तर देते हैं: 23 तारीख को शक्ति पीठ पर, और बाकी दिन घर में कर सकते हैं।

59

सरस्वती यंत्र पर किस मंत्र से अभिषेक किया जा सकता है?

नमो भवाय, या जनेऊ धारण करने वालों के लिए रुद्र सूक्त

· 38:58–39:17 · Also a question

हाँ, वे उत्तर देते हैं, सरस्वती यंत्र पर इस मंत्र से अभिषेक कर सकते हैं — "नमो भवाय सर्ववाय रुद्राय" — कोई दिक्कत नहीं है। जनेऊ धारण करते हैं तो रुद्र सूक्त से भी कर सकते हैं।

हाँ, वक्ता उत्तर देते हैं: सरस्वती यंत्र पर इस मंत्र से अभिषेक कर सकते हैं — ट्रांसक्रिप्ट में यह "नमो भवाय सर्ववाय रुद्राय" के रूप में आया है। कोई दिक्कत नहीं है। रुद्र सूक्त से भी कर सकते हैं, अगर जनेऊ धारण करते हैं तो।

60

क्या नवग्रह कवच का पाठ किया जा सकता है?

नवग्रह कवच की अनुमति

· 39:18–39:26 · Also a question

नवग्रह कवच बिल्कुल कर सकते हैं, वे उत्तर देते हैं।

नवग्रह कवच के विषय में पूछे जाने पर वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल कर सकते हैं।

61

मंदिर में शिवलिंग की पूजा किस दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए?

शिव मंदिर में दिशा भेद नहीं

· 39:27–39:45 · Also a question

मंदिर में शिवलिंग की पूजा किस दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए, इस पर वे कहते हैं कि उनका मुख तो हर दिशा में है। प्रश्नकर्ता कहते हैं कि उनका प्रश्न विशेषतः दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से है। मंदिर में, और वह भी भगवान शिव के मंदिर में, वे उत्तर देते हैं, दिशा भेद करने की आवश्यकता ही नहीं है।

62

घर में गंगा स्नान का फल कैसे मिल सकता है?

स्मरण के साथ स्नान के जल में गंगाजल

· 39:46–40:03 · Also a question

घर में गंगा स्नान के फल के लिए — गंगा जी को पानी में मिलाकर, गंगा जी का स्मरण करते हुए स्नान कर लीजिए।

घर में गंगा स्नान के फल के विषय में वक्ता उत्तर देते हैं: गंगाजलगंगा नदी का जल, अशुद्धि के संपर्क में आई अनुष्ठान वस्तुओं को शुद्ध व पुनःप्रतिष्ठित करने हेतु प्रयुक्त। को पानी में मिलाकर, गंगा जी का स्मरण करते हुए स्नान कर लीजिए।

63

क्या देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाई जा सकती हैं?

मूर्तियाँ बनाने की अनुमति

· 40:04–40:10 · Also a question

बिल्कुल, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बना सकते हैं, वे उत्तर देते हैं।

बिल्कुल, वक्ता उत्तर देते हैं: देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बना सकते हैं।

64

जो भारत से बाहर रहते हैं, वे गंगा स्नान के लिए क्या करें?

जहाँ भी हों, पानी में गंगाजल

· 40:11–40:24 · Also a question

जो लोग भारत में नहीं हैं, उन्हें गंगा स्नान के लिए अपने स्थान पर ही गंगा जी को पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए और गंगा जी का स्मरण करना चाहिए।

जो लोग भारत में नहीं हैं, वक्ता कहते हैं, उन्हें गंगा स्नान के लिए अपने स्थान पर ही गंगाजलगंगा नदी का जल, अशुद्धि के संपर्क में आई अनुष्ठान वस्तुओं को शुद्ध व पुनःप्रतिष्ठित करने हेतु प्रयुक्त। को पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए, और गंगा जी का स्मरण करना चाहिए।

65

गंगा दशहरा पर गंगा जी के लिए क्या पाठ करना चाहिए?

गंगा जी का 108 नाम स्तोत्र

· 40:25–40:34 · Also a question

गंगा जी के 108 नाम स्तोत्र, शतनाम इत्यादि का पाठ करना चाहिए।

गंगा जी के 108 नाम स्तोत्र, शतनाम इत्यादि का पाठ करना चाहिए, वक्ता कहते हैं।

66

हनुमान चालीसा की एक पंक्ति मंत्र के संपुट के रूप में दी गई

हनुमान चालीसा से संपुट

· 40:35–40:46

भरत प्रजापति जी को वे इस मंत्र का संपुट करने को कहते हैं: "सब सुख लहे ही तुम्हारी शरणा तुम रक्षा काहू को डरना"।

भरत प्रजापति जी को वक्ता इस मंत्र का संपुट करने को कहते हैं — ट्रांसक्रिप्ट में यह "सब सुख लहे ही तुम्हारी शरणा तुम रक्षा काहू को डरना" के रूप में आया है।

67

क्या अनार के रस और घी से अभिषेक प्रभावी है?

अनार रस और घी का सकारात्मक प्रभाव

· 40:47–41:21 · Also a question

बिल्कुल — अनार के रस, घी, इन सभी से अभिषेक का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

बिल्कुल, वक्ता उत्तर देते हैं: अनार के रस, घी, इन सभी से अभिषेक का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

68

जप के समय स्पंदन और चींटियाँ चलने जैसी अनुभूति का क्या अर्थ है?

आरंभिक क्रियाएँ, जिन्हें सामान्य मानना चाहिए

· 41:22–41:46 · Also a question

अनिल मौर्य जी को वे कहते हैं कि यह सामान्य चीज़ है: मंत्र जप जब करते हैं तो स्पंदन इत्यादि क्रियाएँ होती हैं। इसमें इतना परेशान नहीं होना चाहिए। आरंभिक चीज़ें — चींटियाँ चलना, स्पंदन होना — इसको सामान्य रखकर आगे बढ़ना चाहिए। यह आरंभिक है और सही है।

अनिल मौर्य जी, यह सामान्य चीज़ है, वक्ता उत्तर देते हैं: मंत्र जप जब करते हैं तो स्पंदन इत्यादि क्रियाएँ होती हैं। इसमें इतना परेशान नहीं होना चाहिए। आरंभिक चीज़ें — चींटियाँ चलना, स्पंदन होना — इसको सामान्य रखकर आगे बढ़ना चाहिए। यह तो आरंभिक है और सही है।

69

नवनाथ साधना में रखे गेहूँ का क्या करना चाहिए?

मिला देना, या विसर्जन कर देना

· 41:47–42:00 · Also a question

नवनाथ साधना में जो गेहूँ पात्र में रखे थे, उसे आप मिला सकते हैं, विसर्जन भी कर सकते हैं।

नवनाथ साधना में जो गेहूँ आपने पात्र में रखे थे, वक्ता उत्तर देते हैं, उसे आप मिला सकते हैं; विसर्जन भी कर सकते हैं।

70

तारापीठ से अपमानित होकर लौटने के बाद क्या करना चाहिए?

पुनः जाना, क्योंकि माँ मान जाएँगी

· 42:01–42:39 · Also a question

अजय जी अपमानित होकर लौटे — गलती हुई। अब पुनः तारापीठ जाइए, वे कहते हैं। माँ हैं, मान जाएँगी।

अजय जी, अपमानित होकर लौटे — जो कि गलती हुई, वक्ता कहते हैं। अब पुनः तारापीठ जाइए। माँ हैं, मान जाएँगी।

71

रिश्तेदार बड़े लड्डू गोपाल ला रहे हों तो उनके पुराने लड्डू गोपाल लेने चाहिए या नहीं?

एक बार स्थापित विग्रह को आगे नहीं सौंपना चाहिए

· 42:40–43:32 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उनके रिश्तेदार अपने मंदिर के लड्डू गोपाल उन्हें दे रहे हैं क्योंकि वे बड़ी साइज़ के गोपाल ला रहे हैं, और पूछते हैं कि लेना चाहिए या नहीं। वक्ता इसे हाइपोथेटिकल प्रश्न कहते हैं जिसमें सबका अपना-अपना बुद्धि-विवेक और तर्क रहेगा — लेकिन कहते हैं कि यह ऐसा है जैसे किसी के घर में नया बच्चा जन्म लेने वाला हो तो पुराने बच्चे को किसी और को दे दो। उनके अनुसार यह उचित नहीं है: भगवान जी की स्थापना एक बार कर दी तो दूसरे के भरोसे क्यों देना?

72

कनाडा में, या जो जहाँ है वहीं, गंगाजल से स्नान करना गंगा स्नान के लिए पर्याप्त है

जहाँ भी हों, गंगाजल से स्नान

· 43:33–43:46

हाँ, कनाडा में आप गंगाजल से स्नान कीजिए, वे कहते हैं। जो जहाँ है, वहाँ भी कर सकते हैं।

हाँ, कनाडा में आप गंगाजलगंगा नदी का जल, अशुद्धि के संपर्क में आई अनुष्ठान वस्तुओं को शुद्ध व पुनःप्रतिष्ठित करने हेतु प्रयुक्त। से स्नान कीजिए, वक्ता उत्तर देते हैं। जो जहाँ है, वहाँ भी कर सकते हैं।

73

जो गंगा जी के आसपास हैं और सामर्थ्य रखते हैं, उन्हें प्रयास करके स्वयं गंगा स्नान कर लेना चाहिए; दूर वालों को ज़रूरत से ज़्यादा खर्च नहीं करना

जो पास हैं और सक्षम हैं

· 43:47–44:25

वे कहते हैं कि कुछ लोग ऐसी अवस्था में नहीं आ सकते; और ज़रूरत से ज़्यादा पैसा खर्च होगा, यह अलग विषय है। लेकिन अगर आप आसपास में हैं और आपके पास सामर्थ्य है, तो प्रयास करके सभी अपने पास के क्षेत्र में गंगा स्नान ज़रूर कर लीजिएगा।

देखिए, वह विशिष्ट है — अब ऐसी अवस्था में नहीं आ सकते, वक्ता कहते हैं। ज़रूरत से ज़्यादा पैसा खर्च होगा, यह अलग विषय है। लेकिन अगर आप आसपास में हैं और आपके पास सामर्थ्य है, तो प्रयास करके सभी अपने पास के क्षेत्र में गंगा स्नान ज़रूर कर लीजिएगा।

74

क्या महाभैरव मंत्र लिया जा सकता है?

सामर्थ्य के अनुसार महाभैरव मंत्र

· 44:26–44:32 · Also a question

महाभैरव मंत्र बिल्कुल कर सकते हैं, वे अनंत जी को कहते हैं — जितना आपका सामर्थ्य हो, जितना आप कर पाएँ।

महाभैरव मंत्र बिल्कुल कर सकते हैं, अनंत जी, वक्ता उत्तर देते हैं — जितना आपका सामर्थ्य हो, जितना आप कर पाएँ।

75

क्या माँ शीतला की पूजा नीम के पेड़ पर की जा सकती है?

बड़े-बुज़ुर्गों से पूछे बिना नई परंपरा न शुरू करना

· 44:33–45:17 · Also a question

माँ शीतला की पूजा नीम के पेड़ में हो सकती है या नहीं, इस पर वे कहते हैं कि नया-नया शुरू करने को तो वे नहीं बोलेंगे। अगर पहले से नहीं होता है तो घर के बड़े-बुज़ुर्गों से पूछकर करें।

माँ शीतला माता की पूजा नीम के पेड़ में कर सकते हैं क्या, एक श्रोता पूछते हैं। नया-नया तो हम शुरू करने को नहीं बोलेंगे, वक्ता उत्तर देते हैं। अगर पहले से नहीं होता है तो घर के बड़े-बुज़ुर्गों से पूछकर करें।

76

छठी से पहले नवजात शिशु को स्पर्श क्यों नहीं किया जाता?

लगा हुआ सूतक

· 45:18–45:23 · Also a question

सूतक लगा होता है, वे कहते हैं; इसलिए छठी होने से पहले बच्चे को स्पर्श की मनाही होती है।

सूतक लगा होता है, वक्ता उत्तर देते हैं — इसलिए chhathihar होने से पहले बच्चे को स्पर्श की मनाही होती है।

77

प्रतिदिन सरस्वती पाठ कैसे करना चाहिए?

चैनल पर दी गई विधि, और महाविद्या क्रम

· 45:24–45:38 · Also a question

प्रतिदिन सरस्वती पाठ की विधि चैनल पर दी गई है, वे कहते हैं; महाविद्या क्रम से कर सकते हैं।

प्रतिदिन सरस्वती पाठ की विधि चैनल पर दी गई है, वक्ता उत्तर देते हैं। महाविद्या क्रम से कर सकते हैं।

78

घर के भीतर पकड़े गए जीव का क्या करना चाहिए?

खेत में छोड़ देना, प्राण न जाए इतना ध्यान रखना

· 45:39–45:54 · Also a question

हित हरी बंसी जी को वे कहते हैं कि कोई दिक्कत नहीं होगी: पकड़कर खेत में छोड़ दीजिए। बस इतना ध्यान रखिएगा कि प्राण न जाए।

हित हरी बंसी जी, नहीं, कोई दिक्कत नहीं होगी, वक्ता उत्तर देते हैं। पकड़कर खेत में छोड़ दीजिए। प्राण न जाए, इतना ध्यान रखिएगा।

79

क्या पाँच उँगलियों से देखा गया भाग्य बदला जा सकता है?

लिखा हुआ केवल भगवान त्रिपुरारी मिटा सकते हैं

· 45:55–46:22 · Also a question

पाँच उँगली से देखा गया भाग्य भी बदला जा सकता है या नहीं, इस पर वे कहते हैं कि भाग्य में जो लिखा हुआ है, वह केवल भगवान त्रिपुरारी ही मिटा सकते हैं। आप-हम नहीं मिटा सकते। लिखा हुआ जो है, वह सब केवल भगवान शिव ही मिटा सकते हैं।

पाँच उँगली से देखा गया भाग्य भी बदला जा सकता है क्या, एक श्रोता पूछते हैं। भाग्य तो जो लिखा हुआ है, वक्ता उत्तर देते हैं, वह केवल भगवान त्रिपुरारी ही मिटा सकते हैं। आप-हम तो नहीं मिटा सकते। लिखा हुआ जो है, वह सब केवल भगवान शिव ही मिटा सकते हैं।

80

बटुक भैरव जयंती पर महाभैरव मंत्र किया जा सकता है

जयंती पर महाभैरव मंत्र

· 46:23–46:39

हाँ, अनंत जी, जयंती को महाभैरव मंत्र कर सकते हैं।

जयंती को महाभैरव मंत्र कर सकते हैं, अनंत जी, वक्ता उत्तर देते हैं।

81

निर्जला एकादशी में आचमन कैसे करना चाहिए?

जल जो मुख में ही रहे, कंठ तक न जाए

· 46:40–47:27 · Also a question

ज्योतिष पीठ के वर्तमान शंकराचार्य महाराज द्वारा बताई बात दोहराते हुए वे कहते हैं कि निर्जला एकादशी में जब आचमन किया जाए तो आचमन का जल इतना कम हो कि वह केवल मुख में ही रहे, कंठ में न जाए। क्योंकि आचमन की मुख्य विधि में जल पीते हैं तो कंठ तक जाना चाहिए, तभी एक तरह से उसे आचमन मानते हैं; और जल पीते समय सुरसुर की आवाज़ नहीं होनी चाहिए।

82

जिनके घर में बटुक भैरव का स्थान नहीं है, वे सभी उनकी स्थापना-पूजन करें और भगवान भैरव को स्थान दें

भैरव को स्थान देना और भय छोड़ना

· 47:28–47:45

समापन में वे कहते हैं: आप लोग ज़रूर गंगा जी स्नान कीजिए; और जिन-जिनके घर में बटुक भैरव का स्थान नहीं है, अपने घर में बटुक भैरव जी की स्थापना-पूजन कीजिए। आप सभी भगवान भैरव को, कुल भैरव को स्थान दीजिए। उनसे भयभीत होना छोड़िए; लोगों के प्रपंच को छोड़िए।

83

क्या भूत-प्रेत-पिशाच केवल भैरव के साथ रहते हैं?

गया में मसानी के रूप में स्वयं नारायण

· 47:46–48:20 · Also a question

इस आपत्ति पर कि भैरव के साथ भूत-प्रेत-पिशाच हैं, वे पूछते हैं कि कौन ऐसे देवता हैं जो भूत-प्रेत-पिशाच के साथ न रहते हों। आप भगवान नारायण को बोलते हैं — तो कभी गया चले जाइए। गया जाकर भगवान गदाधर को देखिए, जहाँ गया धाम को मुक्ति धाम कहा गया है; वहीं बगल में श्मशान है, और मसानी के रूप में वहाँ साक्षात नारायण विराजते हैं। दुनिया में हर जगह जहाँ भगवान शिव को देखते हैं, वहाँ भगवान नारायण स्वयं मसानी के रूप में उपस्थित हैं।

84

घर पर बटुक भैरव पूजन करने से क्या होता है?

अहितों का नाश और अरिष्टों का शमन

· 48:21–48:41 · Also a question

बटुक भैरव जी की पूजन घर पर करने से किसी प्रकार की कोई अहित नहीं होती, बल्कि अहितों का नाश होता है, अरिष्टों का नाश होता है, अरिष्टों का शमन होता है। बहुत सारी ऐसी विपत्तियाँ होती हैं जो भगवान भैरव के स्मरण मात्र से खत्म हो जाती हैं; इसलिए बटुक भैरव की पूजन ज़रूर करनी चाहिए।

85

जो दुष्ट चित्त के लोग आपको आपके इष्ट और घर के देवताओं से अलग करते हैं, उनकी न सुनें और अपने शास्त्र स्वयं पढ़ें

जो आपको घर के देवताओं से अलग करते हैं

· 48:42–49:07

इन पोंगा लोगों से बचिए, वे कहते हैं। ये दुर्बुद्धि, कुबुद्धि, दुष्ट चित्त के व्यक्ति जो आपको अपने इष्ट-आराध्य और अपने घर के मुख्य देवताओं से अलग करते हैं, उनकी बातों को मत सुनिए। अपने शास्त्रों को पढ़िए, अपने पुराणों को पढ़िए — समझ में आएगा कि कैसे उत्पत्ति हुई, क्या उनका महत्व है। आप-हम गलत बोल सकते हैं, लेकिन जो पुराण में लिखा है, जो शास्त्रों और तंत्र शास्त्र में उनके विषय में चर्चा है, वह गलत नहीं हो सकता।

86

भैरव के साथ प्रेत-पिशाच की बात क्यों जोड़ी जाती है?

साक्षात शिव के अंश से प्रकट, जो अनेक भी हैं और एक भी

· 49:08–49:26 · Also a question

जो साक्षात शिव के अंश से प्रकट हुए हैं, वे पूछते हैं, उनके साथ प्रेत-पिशाच वाली बात कहाँ से आ जाती है? उनका स्वरूप वैसा है तो यह कहा जाए कि उस जगह में भी वे वास करते हैं। और भैरव जी केवल एक तो नहीं हैं — उनके भेद को समझिए: वे अनेक होते हैं, एक भी होते हैं।

जो साक्षात शिव के अंश से प्रकट हुए हैं, वक्ता पूछते हैं, उनके साथ वह प्रेत-पिशाच वाली बात कहाँ से आ जाती है? उनका स्वरूप वैसा है, तो यह कहा जाए कि उस जगह में भी वे वास करते हैं। केवल भैरव जी एक तो नहीं हैं न? उनके भेद को समझिए। वे अनेक होते हैं, एक भी होते हैं।

87

भगवान में इच्छानुसार अनेक रूप धारण करने का सामर्थ्य है, और जो ऐसा न कर सके वह भगवान ही नहीं

जो भगवान रूप न ले सके, खा न सके, नाच न सके

· 49:27–50:15

यह उनका सामर्थ्य है और यह भगवान ही कर सकते हैं, वे कहते हैं; जो भगवान हैं उनके पास कुछ भी करने का सामर्थ्य है, वे अनेकों रूप धारण कर सकते हैं। और जिनके भगवान ऐसा नहीं कर सकते, वे फिर भगवान ही नहीं हैं। तुम्हारे भगवान कितने सक्षम हैं कि साकार रूप धारण नहीं कर सकते; कितने असक्षम हैं कि एक से अधिक रूप धारण नहीं कर सकते; कि किसी चीज़ को खा नहीं सकते, नाच नहीं सकते। हमारे भगवान तो हर कुछ करने में सक्षम हैं।

88

जिनके भगवान असक्षम हैं उन पर दया करनी चाहिए, और उनके भगवान को शरणागति लेकर शक्ति-सिद्धि प्राप्त करनी चाहिए

दया, और हमारे भगवान की शरणागति

· 50:16–50:38

जिनके भगवान ये सब करने में समर्थ नहीं हैं — उन पर दया करनी चाहिए, वे कहते हैं। उनके भगवान असक्षम हैं, और उनके भगवान को हमारे भगवान की शरणागति लेकर शक्ति-सिद्धि हासिल करनी चाहिए।

तो जिनके भगवान ये सब करने में समर्थ नहीं हैं, वक्ता कहते हैं, उन पर दया करनी चाहिए। उनके भगवान असक्षम हैं, और उनके भगवान को हमारे भगवान की शरणागति लेकर शक्ति-सिद्धि हासिल करनी चाहिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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