गुरु पूर्णिमा का तंत्रोक्त गुरु पूजन — गुरु मंत्र के षोडशोपचार पूजन सहित

गुरु तत्व के पूजन के लिए गुरु पूर्णिमा की विधि।

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01

गुरु वालों और बिना गुरु वालों — दोनों के लिए गुरु पूर्णिमा पूजन

गुरु पूर्णिमा का पूजन उनके लिए है जिनके गुरु हैं, जिनके नहीं हैं, या दोनों के लिए?

· Reviewed Sep 2026 · 02:09–02:38 · Also a question

दोनों के लिए। जो दीक्षित हैं वे अपने गुरु के पास जाकर उनका पूजन करेंगे। जिन्होंने देव दीक्षा विधान किया है और जिनके गुरु नहीं हैं — प्रश्न यही है कि वे गुरु तत्व के निमित्त किस प्रकार पूजन करें।

02

सहस्रार में सद्गुरु और गुरु मंडल का निवास

गुरु तत्व इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:39–03:34 · Also a question

क्योंकि यह अति आवश्यक और महत्वपूर्ण समय है — सबसे प्रथम गुरु ही होते हैं। हमारे सहस्रार चक्र के स्थान पर हमारे सद्गुरुदेव और गुरु मंडल का निवास होता है। अगर गुरु तत्व की कृपा नहीं मिलती तो किसी भी साधना में कभी पूर्ण सफलता नहीं मिल सकती।

03

इस जन्म में भौतिक गुरु न होने का अर्थ पूर्व जन्मों में गुरु न होना नहीं

अगर इस जन्म में गुरु नहीं मिले तो?

· Reviewed Sep 2026 · 03:35–04:09 · Also a question

इस जन्म में भौतिक गुरु की प्राप्ति न होने का यह अर्थ कहीं से नहीं निकलता कि पूर्व जन्मों में हमारे गुरु नहीं होंगे। यह सदैव स्मरण रखिए — और निश्चिंत होकर अपने गुरु से संबंधित विषय को पूर्ण कीजिए।

दूसरा विषय, वक्ता कहते हैं, यह है: जिस प्रकार हमारा यह जन्म है, अगर इस जन्म में हमें भौतिक गुरु की प्राप्ति नहीं हुई है, तो इसका यह अर्थ कहीं भी नहीं निकलता कि हमारे पूर्व जन्म में गुरु नहीं होंगे। यह सदैव स्मरण रखिएगा। इसलिए निश्चिंत होकर अपने गुरु से संबंधित जो विषय है, उसे पूर्ण करना चाहिए।

04

गुरु, परम गुरु और परमेष्ठी गुरु — तीन कुल

गुरु मंडल की कितनी पीढ़ियां जाननी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 04:10–05:03 · Also a question

तीन, जैसे अपने कुल में पिता, दादा, परदादा। गुरु मंडल में भी: गुरु, गुरु के गुरु, और उनसे ऊपर के गुरु। यही गुरु, परम गुरु और परमेष्ठी गुरु हैं। तभी जाकर तंत्रोक्त मंडल में गुरु मंडल का पूजन कर पाएंगे, जिसमें तीन मंडल का तर्पण आवश्यक होता है।

05

भगवान शिव, भगवान दत्त, या अपने पंथ का गुरु तत्व धारण करने वाला स्वरूप

सामान्य जन गुरु पूर्णिमा पर किस गुरु स्वरूप का पूजन करें?

· Reviewed Sep 2026 · 05:04–05:49 · Also a question

या तो भगवान शिव को या भगवान दत्त को, या आप जिस भी पंथ-परंपरा को मानते हैं — वैष्णव, शैव आदि — उससे संबंधित गुरु तत्व को धारण करने वाली कोई शक्ति या महाशक्ति। वक्ता का अपना कहना है कि भगवान दत्त का पूजन अवश्य करें, क्योंकि हर गुरु मंडल में उनकी उपस्थिति है।

06

उस दिन घर पर देव दीक्षा विधान कर लें

जिसके गुरु नहीं हैं, वह गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करे?

· Reviewed Sep 2026 · 05:50–06:30 · Also a question

जिन्होंने गुरु दीक्षा विधान या देव दीक्षा विधान नहीं किया है, वे गुरु पूर्णिमा के दिन अपने घर पर आराम से देव दीक्षा विधान कर लें। जो कर चुके हैं, उनका कर्तव्य है उस दिन अपने गुरु के स्थान पर जाना — न जा पाएं तो अपने निज स्थान पर उनका मानसिक आवाहन करें।

07

पादुका, श्री विग्रह, या छायाचित्र के सामने सुपारी

गुरु पूजन किस पर किया जाए?

· Reviewed Sep 2026 · 06:31–06:58 · Also a question

अगर अपने सद्गुरुदेव की पादुका, या उनका श्री विग्रह, या छायाचित्र स्थापित है, तो उसी पर पूर्ण पूजन करें। छायाचित्र है तो उस पर अभिषेक आदि नहीं होगा — इसलिए उनके सामने एक सुपारी स्थापित करके उस पर कर सकते हैं, या पुष्प पर।

08

सावन अगले दिन से — तैयारी गुरु पूर्णिमा से

गुरु पूर्णिमा से अगले दिन सावन आरंभ होता है, और सावन की साधनाओं की तैयारी यहीं से शुरू होती है

· Reviewed Sep 2026 · 06:59–07:53

गुरु पूर्णिमा के अगले दिन से सावन आरंभ हो रहा है, और चैनल पर पहले से दी गई कम से कम तीन सावन की साधनाएं विधिवत क्रम से दी जाएंगी। लेकिन इसका आरंभ गुरु पूर्णिमा से ही होगा — प्रथम पूजन अपने गुरु जी का कर लेना है।

09

पीले अक्षत की ढेरी पर बड़ी सुपारी, गुरु मां के लिए लाल ढेरी

अगर कोई विग्रह या छायाचित्र ही न हो तो?

· Reviewed Sep 2026 · 07:54–08:52 · Also a question

तो उस दिन चावल की ढेरी पर पीला अक्षत कर लीजिए — चावल को पीला कर लीजिए — और उसके ऊपर बड़ी वाली सुपारी स्थापित कीजिए। अगर परंपरागत रूप से गुरु जी के साथ उनकी शक्ति यानी गुरु मां हैं, तो दो ढेरी पर दो सुपारी स्थापित करें, दूसरी ढेरी लाल अक्षत की।

10

पीले पर गुरु, लाल पर गुरु मां — भगवान दत्त के साथ अनघा लक्ष्मी

गुरु जी पीली ढेरी पर, गुरु मां लाल पर — दत्त के लिए अनघा लक्ष्मी

· Reviewed Sep 2026 · 08:53–09:34

पीली ढेरी पर गुरु जी और लाल ढेरी पर गुरु मां। जिन्होंने भगवान दत्त का देव दीक्षा विधान किया है, उनके लिए पीली ढेरी पर बड़ी सुपारी और पीला कलावा भगवान दत्त गुरु के निमित्त, और उसके बाईं ओर लाल ढेरी पर लाल कलावे वाली सुपारी गुरु मां भगवती अनघा लक्ष्मी के निमित्त।

11

आचमन, हस्त प्रक्षालन और पवित्री धारण

पूजन आरंभ होने से पहले के प्रारंभिक कार्य क्या हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 09:35–11:49 · Also a question

स्थान दे देने के बाद पूजन का पहला कार्य आवाहन है। उससे पहले: दो लोटा और आचमनी रखें, गंगा-यमुना-सरस्वती मंत्र से जल अभिमंत्रित करके आचमन करें; फिर हस्त प्रक्षालन; फिर पवित्री यानी कुशा की अंगूठी धारण करें।

12

आसन के नीचे पुष्प, त्रिकोण, जल और पृथ्वी देवी का मंत्र

आसन शुद्धिकरण कैसे होता है, और यह क्यों आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 11:50–12:18 · Also a question

आसन के नीचे पुष्प रखना, त्रिकोण बनाना, जल डालना और पृथ्वी देवी के मंत्र का उच्चारण — यानी पृथ्वी स्वरूपा भगवती जगदंबा को नमस्कार, ताकि आसन सुरक्षित हो और उस पर बैठकर किया गया कर्म सिद्ध हो। अगर आसन को सम्मान नहीं देते, तो कोई सिद्धि मिलने वाली नहीं है।

13

दूसरे के आसन पर कभी न बैठें, अपनी पवित्री किसी को न दें

क्या आसन, पवित्री या आचमन पात्र किसी और के साथ साझा किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 12:19–13:18 · Also a question

नहीं। जब आप किसी मंत्र का अनुष्ठान या पुरश्चरण कर रहे हैं, तो आपके आसन पर कभी कोई दूसरा न बैठे, न आप किसी अन्य के आसन पर बैठें — यह नहीं देखना है कि वह ब्राह्मण है, गुरु जी हैं, विद्वान हैं या ऊंच-नीच कुल के। और पवित्री का कभी अदला-बदली नहीं होता।

14

आसन, पवित्री और पात्र — अपने आराध्य के पार्षद

आसन, पवित्री और आचमन पात्र को इतना सम्मान क्यों देना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 13:19–14:47 · Also a question

क्योंकि ये सभी चीज़ें — आचमन का पात्र, पवित्री, अपना आसन — जिनकी हम साधना कर रहे हैं उन आराध्य के पार्षद मानी गई हैं। यह सम्मान हमारे लिए नहीं है: जिस शक्ति को हम अपने शरीर में आवाहित कर रहे हैं, जो अपनी ऊर्जा हम पर प्रक्षेपित करेंगी और हमारे आभामंडल में उपस्थित होंगी, यह उनके सम्मान के निमित्त है।

15

नियम से चलने को कहना प्रताड़ना लगता है

ब्रह्मचर्य पालन और आसन-पवित्री का ध्यान रखने को कहना ही लोग प्रताड़ना कहते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 14:48–15:27

वक्ता शिकायत को सीधे उठाते हैं कि वे बहुत प्रताड़ित करते हैं। प्रताड़ना का अर्थ लोगों ने यह समझा है कि हम नियम से चलने को कहते हैं — ब्रह्मचर्य पालन करो, आसन का ध्यान रखो, पवित्री का ध्यान रखो। अगर हम कह देते जैसे थे वैसे रहो, खाओ-पियो, ऐश करो, तो वह उचित रहता।

16

शिखा बंधन और स्वस्तिवाचन

पवित्री के बाद शिखा बंधन और स्वस्तिवाचन — कम से कम मंगलम भगवान विष्णु

· Reviewed Sep 2026 · 15:28–16:07

शिखा बंधन; उसके बाद पहले स्वस्तिवाचन। स्वस्तिवाचन में बहुत विशेष मंत्र नहीं आता — कम से कम मंगलम भगवान विष्णु कर लीजिए, जो सबको आता होगा और सभी कर सकते हैं। मंगलम भगवान महादेव का भी मंत्र है।

17

संस्कृत या हिंदी में, हाथ में अक्षत, जल और पुष्प लेकर

संकल्प कैसे लिया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 16:08–17:00 · Also a question

संकल्प अवश्य लें। संस्कृत क्लिष्ट लग रही है और आप नए हैं तो हिंदी में लें। हाथ में अक्षत, जल, पुष्प रखें। गुरु पूर्णिमा के लिए बोलें: हमारे सद्गुरुदेव महाराज और गुरु मंडल की कृपा हमें प्राप्त हो, गुरुदेव प्रसन्न हों — इस निमित्त यथाशक्ति, यथा बुद्धि उनका पूजन करने का संकल्प ले रहे हैं।

18

गुरु का स्मरण, फिर पहले गौरी-गणपति का पूजन

पहले पूजन किसका — गुरु का या गणपति का?

· Reviewed Sep 2026 · 17:01–17:45 · Also a question

उस समय गुरु का केवल स्मरण करें — एक बार, गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरुदेवो महेश्वरः से। फिर गणपति जी का पूजन करें। क्योंकि उस दिन गुरु मंडल और गुरुदेव प्रमुख देवता हैं, और प्रमुख देवता का पूरा पूजन सबसे पहले नहीं किया जा सकता।

19

देव दीक्षा न कर रहे हों तो कलश नहीं; पहले से दो दीप

क्या गुरु पूर्णिमा पर कलश स्थापना आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 17:46–18:22 · Also a question

बिल्कुल अनिवार्य नहीं, अगर उस दिन देव दीक्षा विधान नहीं कर रहे हैं। सामान्य कीजिए, बहुत क्लिष्ट मत कीजिए — क्लिष्टता से लोग भागने लगते हैं। हां, दीप प्रज्वलन पहले ही कर लेना है — कम से कम दो दीप, एक समस्त देवी-देवताओं के लिए और एक घी का गुरु मंडल के लिए।

20

गुरु पूर्णिमा पर पंचोपचार और संकट नाशन स्तोत्र

गुरु पूर्णिमा पर गणपति पूजन कितना करें?

· Reviewed Sep 2026 · 18:23–18:54 · Also a question

घर में गणेश जी का जो श्री विग्रह पहले से है, उसी पर कर लें। ज़्यादा नहीं तो पंचोपचार पूजन — आवाहन, आसन, अर्घ आदि देकर नैवेद्य, धूप, दीप दिखा दें। फिर संकट नाशन गणपति स्तोत्र का पाठ, जिसमें उनके 12 नाम हैं। इतना पर्याप्त है।

21

कम से कम दशोपचार, वृहद विधि से षोडशोपचार

गुरु जी का स्वयं कितना पूजन होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 18:55–19:46 · Also a question

कम से कम दशोपचार पूजन; और वृहद विधि से करना चाहें तो षोडशोपचार। पूर्ण विधि नित्य कर्म पूजा प्रकाश में मिल जाएगी। मंत्र नहीं आता या उच्चारण क्लिष्ट लगे तो भाव पूर्वक भी कर सकते हैं — श्री गुरुदेवाय गुरु मंडल सहिताय नमः से।

22

पुष्प से आवाहन, फिर आसन, पाद्य, मधुपर्क, स्नान और वस्त्र

गुरु जी के षोडशोपचार का क्रम क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 19:47–20:53 · Also a question

हाथ में पुष्प लेकर गुरुदेव और गुरु मां का ध्यान करके दोनों सुपारी के सामने एक-एक पुष्प छोड़ें, इस भाव से कि वे आ चुके हैं। फिर आसन; फिर पाद्य, चरण धुलाने के लिए जल; मधुपर्क; फिर आचमन, स्नान, और वस्त्र-यज्ञोपवीत — और सामर्थ्य हो तो दोनों को वस्त्र अवश्य अर्पित करें।

23

किसी भी षोडशोपचार पूजन में दक्षिणा अनिवार्य

क्या दक्षिणा अनिवार्य है?

· Reviewed Sep 2026 · 20:54–21:10 · Also a question

हां। गुरुदेव और गुरु मां को दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए — किसी भी देवी-देवता के पूजन में, षोडशोपचार पूजन के समय दक्षिणा अनिवार्य रूप से होती है।

दक्षिणा, वक्ता कहते हैं, गुरुदेव और गुरु मां को अवश्य चढ़ानी चाहिए। किसी भी देवी-देवता के पूजन में, षोडशोपचार पूजन आदि के समय, दक्षिणा अनिवार्य रूप से आवश्यक है। तो यह, वे कहते हैं, सामान्य रूप से षोडशोपचार पूजन हो गया।

24

गुरु मंत्र का ही पूजन — कभी उच्चारण नहीं

तंत्रोक्त विधि का प्रमुख विषय है स्वयं अपने गुरु मंत्र का पूजन — जो कभी बोलकर नहीं कहा जाता

· Reviewed Sep 2026 · 21:11–21:48

अपने मंत्र का पूजन। दीक्षा में गुरु जी से जो भी मंत्र लिया हो, या देव दीक्षा विधान में जो एकाक्षरी जीवन पर्यंत गुरु मंत्र के स्वरूप में स्वीकार की हो — उस मंत्र का वहां पूजन होगा। यही सबसे प्रमुख पूजन है। और गुरु मंत्र एक बार प्राप्त होने के बाद कभी बोलकर उच्चारित नहीं किया जाता, भौतिक गुरु के समक्ष भी नहीं।

25

स्तोत्र बोलकर पढ़ें, संपुट मौन रहकर मन में

स्तोत्र पाठ करते समय संपुट बोलकर लगाना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 21:49–22:18 · Also a question

उस स्थिति में भी संपुट कभी उच्चारण करके नहीं लगाना है। आपको दुनिया को थोड़ी दिखाना है। मूल स्तोत्र का पाठ कीजिए; जहां एकाक्षरी का संपुट लगाना है, वहां मौन होकर मन में ही उसका उच्चारण कर लीजिए।

26

परंपरा का अपना मंत्र, उसमें दीक्षित सभी का एक ही

गुरु मंत्र वास्तव में क्या होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 22:19–23:18 · Also a question

हर कुल — श्री कुल, काली कुल, कोई भी — का अपना गुरु मंत्र होता है: वह मंत्र जिसका, जब से वह गुरु परंपरा चली, उस परंपरा में गुरु स्वरूप में वर्चस्व रहा है। उसमें उस गुरु मंडल की संपूर्ण कृपा होती है, और उस परंपरा में दीक्षित सभी का गुरु मंत्र एक ही होता है।

27

अष्टगंध की स्याही, अनामिका उंगली, चांदी या पीतल का पात्र

पूजन के लिए गुरु मंत्र कैसे लिखा जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 23:19–24:42 · Also a question

विधान है चांदी की थाली, जिस पर अनामिका उंगली से अष्टगंध की स्याही में पूरा मंत्र लिखा जाता है। चांदी न हो तो फूल धातु या पीतल में — पीतल सबसे उत्तम। तांबे में कभी नहीं, स्टील में कभी नहीं।

28

सीधे धरती पर कभी नहीं — डाकिनी शक्ति मंत्र की पूरी सामर्थ्य हर लेती है

लिखा हुआ मंत्र कहां रखा जाए?

· Reviewed Sep 2026 · 24:43–26:07 · Also a question

किसी ऊंचे स्थान पर, सीधे धरती पर कभी नहीं। वर्णन मिलता है कि सीधे पृथ्वी से स्पर्श करा देने पर हमारे लिए उस मंत्र के तेज का हरण हो जाता है। तंत्र में यह भी विवरण है कि डाकिनी — भगवती की डाकिनी शक्ति — उस मंत्र की पूरी सामर्थ्य हर लेती है, और जितना प्रोक्षण किया था वह नीलबट्टा सन्नाटा हो जाता है।

29

गुरु मंत्राय नमः — मंत्र ही देवता का स्वरूप

मंत्र का षोडशोपचार पूजन कैसे किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 26:08–27:47 · Also a question

मंत्र का मन में उच्चारण करके गुरु मंत्राय नमः बोलें — गुरु से मिला हो तो गुरु प्रदत्त मंत्राय नमः — और आवाहयामि, आवाहनार्थे पुष्पम् समर्पयामि कहकर थाल में पुष्प रखें। फिर आसन के लिए पुष्प, फिर पाद्य, आचमन, स्नान, और पूरा क्रम पुनः मंत्र के लिए।

30

तैयार शिष्य से गुरु प्रसन्न होंगे — पर अहंकार कभी न दिखाएं

गुरु पहले से तैयार शिष्य को जल्दी आगे बढ़ाते हैं, शर्त एक ही कि ज्ञान अहंकार में प्रदर्शित न हो

· Reviewed Sep 2026 · 27:48–28:57

क्योंकि गुरु भाग्य से मिलते हैं और शिष्य भी भाग्य से मिलता है। इतना सीखकर जाएंगे तो गुरु देखेंगे कि शिष्य अच्छा जानता है, उन्हें ढालने में आसानी होगी, और वे जल्दी-जल्दी आगे बढ़ाएंगे। एक ही शर्त: गुरु के सामने अहंकार प्रदर्शित करते हुए यह न दिखाएं कि हमें यह आता है — निवेदित करना होता है।

31

सात तिथियां, जिनमें गुरु पूर्णिमा सबसे विशेष

मंत्र का पूजन किन तिथियों पर किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 28:58–29:47 · Also a question

महाशिवरात्रि की रात; चैत्र शुक्ल अष्टमी-नवमी की रात; दीपावली की चतुर्दशी; पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय की जयंती। शरद पूर्णिमा और माघ पूर्णिमा को भी माना गया है। और सातवीं, गुरु पूर्णिमा, सबसे विशिष्टतम।

32

उस मंत्र से संबंधित हर दोष समाप्त

मंत्र के पूजन से क्या प्राप्त होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 29:48–30:27 · Also a question

अगर किसी भी कारण से उस मंत्र से संबंधित हमारा कोई अपराध बन गया हो, दोष लग गया हो, तो सभी प्रकार के दोष विमुचित हो जाते हैं — दोष की हानि हो जाती है, दोष ही समाप्त हो जाता है — और मंत्र हम पर अनंत कृपा करने वाला हो जाता है, क्योंकि वह मंत्र साक्षात देव स्वरूप है।

33

दो नदियों के संगम पर मंत्र तत्काल फल देने वाला

मंत्र सिद्ध न हो रहा हो तो क्या किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 30:28–31:23 · Also a question

हां — अन्य सिद्ध काल में भी इसका विधान है, जब अमुक तिथि को अमुक नक्षत्र, दिन, पक्ष पड़ जाए। एक उदाहरण: मंत्र सिद्ध नहीं हो रहा है, तो जहां कम से कम दो नदियां मिलती हों, उस संगम पर इसी विधि को मानसिक रूप से किया जाए तो मंत्र तत्काल फल देने वाला हो जाता है।

34

गौ पूजन — इसके बिना गुरु पूजन का पूर्ण फल नहीं

गुरु पूजन किससे पूर्ण होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 31:24–32:11 · Also a question

गौ पूजन से। गौ पूजन के बिना गुरु पूजन का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा। गुरु जी के पूजन के बाद गौ माता को भोजन आदि अवश्य निवेदित करें। जिनके प्रत्यक्ष गुरु हैं, वे उन्हें सामने से नैवेद्य अर्पण करें और उनका जूठन प्रसाद स्वरूप में स्वीकार करें।

35

पीपल की लकड़ी पर गुग्गल-घी की 108 आहुति

गुरु पूर्णिमा पर हवन कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 32:12–32:51 · Also a question

चाहें तो उस दिन अधिकतम मात्रा में पौष्टिक सामग्री और विशेष करके गुग्गल-घी का प्रयोग करें — पीपल की लकड़ी पर 108 आहुति अति उत्तम है। फिर गुरु मंत्र से ही कम से कम एक माला आहुति और पूर्णाहुति।

36

अनिवार्य नहीं — मूल कर लें, विधि बढ़ाएं नहीं

क्या गुरु पूर्णिमा पर क्षेत्रपाल या दिक्पाल बलि आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 32:52–33:26 · Also a question

नहीं। उस दिन यह अनिवार्यता नहीं रहेगी कि क्षेत्रपाल बलि या दस दिक्पालों की बलि करनी है। करेंगे तो अति उत्तम, नहीं करेंगे तो कोई क्लिष्टता नहीं। चिंता मत कीजिए — क्योंकि विधि ज़्यादा बढ़ जाएगी तो लोग भागेंगे।

37

नैवेद्य में कुछ पीला — और कुंडली मत देखिए

गौ माता को क्या अर्पण करें, और क्या कुंडली देखनी है?

· Reviewed Sep 2026 · 33:27–34:19 · Also a question

गौ माता के लिए जो भोजन निकालें उसमें पीली सामग्री से संबंधित वस्तु ज़रूर हो — खीर-पूरी बना रहे हैं तो खीर में थोड़ा केसर डाल दें। और अपनी जन्म कुंडली देखने मत बैठिए कि गुरु मेरे लिए शुभ ग्रह हैं, यह दान है या नहीं।

38

एक हाथ लंबी सफेद कनेर की लकड़ी, पीले धागे में लपेटी

गुरु दंड क्या है, और कैसे बनाया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 34:20–35:33 · Also a question

गुरु पूर्णिमा के दिन पूजन के बाद लाई गई कम से कम एक हाथ लंबी सफेद कनेर की लकड़ी — निमंत्रण एक दिन पहले। उस पर गाय के दूध से अभिषेक करके पंचोपचार पूजन, फिर गुरु मंत्र बोलते हुए पूरी लकड़ी पर ऊपर से नीचे तक पीला सूती धागा लपेटें।

39

अभिमंत्रित कील ठोकना, और हर पुरश्चरण की एक माला का समर्पण

गुरु दंड में चांदी की कील और उस पर एक माला का समर्पण

· Reviewed Sep 2026 · 35:34–36:39

चांदी की एक कील लेकर गुरु मंत्र की कम से कम एक माला से अभिमंत्रित करें, दूध से धोकर लकड़ी के एक सिरे में लगाएं। इसे गुरु दंड के स्वरूप में स्थापित करें; और गुरु मंत्र या किसी भी मंत्र का पुरश्चरण करें तो उसका समर्पण कम से कम एक माला इस गुरु दंड पर अवश्य करें।

40

पुण्य अपने तक सीमित रखें, तीर्थ के बाद संशय न रखें

क्या तीर्थ से मिले पुण्य का सार्वजनिक वर्णन करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 36:40–37:37 · Also a question

पुण्य की प्राप्ति होती है तो उसका सार्वजनिक रूप से बहुत अधिक वर्णन कभी नहीं करना चाहिए। हम क्या कर रहे हैं, क्या प्राप्त हुआ — अपने तक सीमित रखें। और उत्तम-मध्यम-निम्न सोचने की आवश्यकता ही नहीं — किसी तीर्थ के लिए एक पग भी चल गए तो उसका भी पुण्य है।

41

एक सप्ताह गाय के दूध से दही जमाएं; दही-गुड़ का कोई विकल्प नहीं

अभिषेक के लिए शुद्ध दही न मिले तो?

· Reviewed Sep 2026 · 37:38–38:17 · Also a question

कम से कम एक सप्ताह के लिए गाय के दूध की व्यवस्था करके जोरन डालकर दही जमा लें — एक-एक पाव दूध भी काफी है। दही का इसमें कोई विकल्प नहीं है। दही-गुड़ का ही सबसे उत्तम प्रयोग है, जिससे क्षमा तुरंत मिलती है और किसी भी देव दोष, मंत्र दोष का तुरंत निराकरण हो जाता है।

42

ग्यारह हज़ार पर अकाट्य प्रभाव

लक्ष्मी माला मंत्र कितने अनुष्ठान में पूर्ण फल देता है?

· Reviewed Sep 2026 · 38:18–38:57 · Also a question

पूर्ण फल कितने में मिलेगा, यह सबके लिए अलग-अलग हो सकता है। सामान्य रूप से माला मंत्र, कवच आदि 11000 कर लेने पर उसका प्रभाव जीवन में आना आरंभ हो जाता है — अकाट्य प्रभाव। उसके बाद नित्य नियम से 11 बार भी जाप करते रहेंगे तो कृपा-प्रभाव बना रहेगा।

43

मंदिर या तीर्थ जाइए — वहां प्रारब्ध तुरंत कटता है

केवल घर में किया गया जाप सीमित प्रभाव क्यों देता है?

· Reviewed Sep 2026 · 38:58–39:37 · Also a question

घर में कितना भी जाप कीजिए, बड़ा सीमित प्रभाव मिलेगा। अगर लंबे समय से साधना कर रहे हैं, केवल घर में, और प्रभाव नहीं मिल रहा — तो वह घर में नहीं होगा। मंदिर जाइए, तीर्थ क्षेत्र जाइए, स्नान-दान कीजिए — प्रयाग में, त्रिवेणी में स्नान से हमारा प्रबलतम प्रारब्ध तुरंत कटता है।

44

दस बच्चे पास हो रहे हों तो टीचर को दोष नहीं दे सकते

सालों जाप करके कुछ न हो तो दोष किसका?

· Reviewed Sep 2026 · 39:38–40:27 · Also a question

वक्ता की उपमा: बार-बार एग्ज़ाम में फेल हो रहे हैं तो दोष टीचर को नहीं दे सकते कि ठीक से नहीं पढ़ाया। उनके पढ़ाने से 10 बच्चे पास हो रहे हैं, टॉप कर रहे हैं, और हम हर बार फेल — तो कुछ हमारी भी गलती हो रही होगी। उस गलती को सुधारना है, अपनी लगन और मेहनत बढ़ानी है।

46

दीवार पर पीपल अंधविश्वास का विषय नहीं

घर की दीवार पर पीपल उग आए तो क्या इसका कोई अर्थ है?

· Reviewed Sep 2026 · 41:33–42:06 · Also a question

इसमें इतना अंधविश्वास करने वाला विषय नहीं है। कई बार दीवार पर पीपल उग ही जाता है। शुभ तिथि — पर्व काल आदि — छोड़कर बाकी समय में, ज़्यादा बड़ा हो गया हो तो उसे किसी दूसरी जगह ले जाकर लगा सकते हैं। इसमें प्रेत-पिशाच जोड़ने की आवश्यकता नहीं है।

47

108 नाम, या नाम मंत्र से आहुति

कामाख्या कवच अनुष्ठान का हवन कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 42:07–43:06 · Also a question

भगवती कामाख्या के 108 मंत्र से, 108 नाम से, या उनके नाम मंत्र से आहुति दे सकते हैं — श्री कामाख्या देव्यै स्वाहा बोलकर। 108 नामावली ऑनलाइन न मिले तो उनके एक नाम से ही 108 आहुति दे सकते हैं।

48

मिट्टी की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा

क्या मिट्टी की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की जा सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 43:07–43:15 · Also a question

बिल्कुल कर सकते हैं। होता ही है।

पूछा गया कि क्या मिट्टी की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा विधान कर सकते हैं — वक्ता कहते हैं: बिल्कुल कर सकते हैं; होता ही है।

49

ग्रहण भर शिव सहस्रनाम का पाठ

पुराना और प्रबल अभिचार किससे नष्ट होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 43:16–44:21 · Also a question

भगवान शिव का सामान्य सहस्रनाम, जो आप नित्य पढ़ते हैं — वही सहस्रनाम ग्रहण के आरंभ से अंत तक कर दीजिए। अभिचार कितना भी प्रबल हो, डिग जाएगा — नष्ट होने के कगार पर पहुंच जाएगा।

50

गुप्त नवरात्रि में नहीं; संधि बलि का महत्व शारदीय और चैत्र में

क्या गुप्त नवरात्रि के संधि काल में बलियारी विधान आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 44:22–45:02 · Also a question

गुप्त नवरात्रि के संधि काल में बलियारी विधान करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसमें उपवास-नियम आदि वह सब नहीं कर रहे हैं और ऐसे करने की आवश्यकता भी नहीं है। शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में उसका विशेष महत्व है।

51

नमः जहां लगाते हैं वहीं रखें, और स्वाहा जोड़ें

पंचाक्षरी मंत्र से हवन कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 45:03–46:02 · Also a question

अगर पहले नमः लगाकर मूल पंचाक्षरी कर रहे हैं, तो ठीक उसी तरह उच्चारण करके स्वाहा कहें। अगर नमः बाद में लगाकर कर रहे हैं, तो नमः बाद में ही लगाकर उसी प्रकार स्वाहा कहकर आहुति दें।

पूछा गया कि पंचाक्षरी मंत्र से हवन कैसे करें — वक्ता नमः के स्थान का नियम बताते हैं। मान लीजिए पहले नमः लगाकर जो मूल पंचाक्षरी है, उस अनुसार कर रहे हैं: तो ठीक उसी तरीके से उच्चारण करके स्वाहा कहेंगे। अगर नमः बाद में लगाकर कर रहे हैं, तो नमः बाद में ही लगाकर उसी प्रकार स्वाहा कहकर आहुति देंगे।

52

दूर से छेड़छाड़ उचित नहीं — सामने से सहायता लें

आवेश की स्थिति में क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 46:03–46:32 · Also a question

आसपास के किसी जानकार व्यक्ति की सहायता लीजिए। जैसा आप बता रहे हैं कि उस श्रेणी पर इस तरह आवेशित होता है, तो इसे दूर से छेड़छाड़ करना उचित नहीं होगा — न किसी से ऐसे कराइए। ऐसा व्यक्ति खोजें जो सामने से आकर काट करके हटाए।

53

कार्तिकेय अकेले या शक्ति सहित, कठोर ब्रह्मचर्य के साथ

क्या घर में पंचदेव के विग्रह रखें, और कार्तिकेय जी की पूजा कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 46:33–47:26 · Also a question

घर में पंचदेव के विग्रह बिल्कुल रखने चाहिए। कार्तिकेय जी का या तो अकेले का श्री विग्रह या उनकी शक्ति से संयुक्त श्री विग्रह स्थापित करके फिर उनका पूरा विधान, पंचांग सेवा उसी अनुसार करें। लेकिन उनके पूजन में, हनुमान जी की तरह, पूर्ण ब्रह्मचर्य पालन की अनिवार्यता कठोरता से होती है।

54

दत्त हर पंथ में उपस्थित हैं, कोई परंपरा बंद नहीं

क्या भगवान दत्त की देव दीक्षा से आगे अन्य परंपराएं बंद हो जाती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 47:27–48:00 · Also a question

नहीं। भगवान दत्तात्रेय की देव दीक्षा विधि कर रहे हैं तो आगे किसी भी परंपरा में जा सकते हैं। ऐसा नहीं कि शाक्त के लिए अलग, शैव के लिए अलग, वैष्णव के लिए अलग — भगवान दत्त हर पंथ, हर परंपरा में उपस्थित हैं।

55

अपने शरीर की लंबाई जितना, सांस रोककर गांठ

रक्षा सूत्र कितना लंबा हो, और कैसे बांधा जाए?

· Reviewed Sep 2026 · 48:01–49:55 · Also a question

हमारे शरीर की जितनी लंबाई है, उतना लंबा रक्षा सूत्र होना चाहिए। दोनों हाथ पूरे फैला दीजिए; एक हाथ की मध्यमा उंगली के अग्र भाग से दबाकर दूसरे हाथ की मध्यमा तक ले जाएं — यही शरीर की लंबाई है। वहां तोड़ लें, फिर रक्षण मंत्र जपते हुए कलाई पर लपेटें और सांस रोककर गांठ मारें।

56

ठोकनी है

गुरु दंड में कील ठोकनी है या बांधनी है?

· Reviewed Sep 2026 · 49:56–50:02 · Also a question

ठोकनी है।

पूछा गया कि गुरु दंड में कील को ठोकना है या बांधना है — वक्ता का उत्तर: ठोकना है।

57

इससे प्रहार कभी नहीं — सारा तपोबल खत्म

गुरु दंड का प्रयोग कभी किसलिए नहीं करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 50:03–52:06 · Also a question

किसी को हानि पहुंचाने के लिए कभी प्रयोग मत कीजिए। जितना तपोबल अर्जित किया है, सब खत्म हो जाएगा। गुरु दंड से प्रहार तंत्र के यंत्र-प्रहार से 100 गुना अधिक प्रभाव देगा — लेकिन आप अपना सर्वनाश कर लेंगे, क्योंकि जब गुरु मंत्र ही चला गया तो आपके पास बचा क्या।

58

नए साधक भाद्रपद में गणपति से आरंभ

बिल्कुल नए साधक भाद्रपद मास में गणपति जी से आरंभ करेंगे

· Reviewed Sep 2026 · 52:07–52:39

भादो का मास आएगा — और भाद्रपद मास में जो नए साधक हैं, बिल्कुल स्टार्टिंग से करना चाहते हैं, वे उस समय गणपति जी से शुरू करेंगे।

59

केवल सफेद कनेर — कोई विकल्प नहीं

सफेद कनेर की जगह कोई और लकड़ी प्रयोग कर सकते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 52:40–52:54 · Also a question

नहीं। इसमें सफेद कनेर ही चाहिए होता है।

पूछा गया कि सफेद कनेर की जगह किसी और पेड़ की लकड़ी का प्रयोग कर सकते हैं — वक्ता साफ कहते हैं: नहीं कर सकते। इसमें सफेद कनेर ही चाहिए होता है।

60

पंचाक्षरी पहले से कर रहे हैं तो अलग दीक्षा की आवश्यकता नहीं

क्या शिव जी को इष्ट के साथ गुरु रूप में भी मान सकते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 52:55–53:58 · Also a question

हां। और अगर पंचाक्षरी पहले से कर रहे हैं, तो अलग से कुछ और करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मानसिक रूप से गुरु स्वरूप में उनका पूजन करिए, या सामने से प्रत्यक्ष पूजन, जब तक भौतिक गुरु की प्राप्ति नहीं होती। पुनः दीक्षा विधान करने की आवश्यकता नहीं।

61

गाय के दूध से तीन बार

भैंस के दही का जोरन प्रयोग के लिए शुद्ध कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 53:59–55:34 · Also a question

पहले दिन जोरन गाय के दूध में डालिए; अगले दिन उस जमे दही का जोरन फिर गाय के दूध में डालिए; तीसरी बार जब गाय के दूध में पड़ जाएगा तो वह शुद्ध हो जाएगा। तीन बार जोरन डालना पड़ेगा।

62

वीर भाव के मंत्र बिना दीक्षा के उग्रता बढ़ाते हैं

क्या हनुमान जी का मंत्र बिना दीक्षा के कर सकते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 55:35–56:29 · Also a question

दीक्षा लेकर करेंगे तो उत्तम रहेगा। वीर भाव के जितने भी देवता हैं, उनके मंत्रों का बिना दीक्षा के जाप करने से उग्रता काफी बढ़ जाती है। जब तक दीक्षा नहीं, तब तक अष्टोत्तर शतनाम का अनुष्ठान या कवच कीजिए — चालीसा, बजरंग बाण तो सभी करें।

63

असली धुंधला होता है; सबसे चमकदार असली नहीं

असली स्फटिक की पहचान नकली से कैसे करें?

· Reviewed Sep 2026 · 56:30–57:25 · Also a question

यह सत्य है कि स्फटिक को अंधेरे में रगड़ने से चिंगारी निकलती है — लेकिन नकली, यानी क्रिस्टल, रगड़ने पर असली से ज़्यादा चमकेगा। असली स्फटिक अधिकतर धुंधला और बेकार सा दिखता है। जो बहुत स्वच्छ असली स्फटिक है, वह इंडिया का नहीं, बाहर का है; और बीच का जो सबसे ज़्यादा मार्केट में है, वह दोनों से ज़्यादा चमकता है।

64

स्वयं प्रकट मूर्ति कभी नहीं हटाई जाती, कितनी भी जीर्ण हो

शक्ति पीठ की मूर्ति जीर्ण या भग्न हो जाए तो क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 57:26–58:33 · Also a question

कभी नहीं। जो स्वयं प्रकट मूर्ति है, शक्ति पीठ, सिद्ध पीठ के श्री विग्रह — कितने भी जीर्ण हो जाएं, कोई भी अवस्था बन जाए — उन्हें कभी हटाया नहीं जा सकता। हां, श्रृंगार के लिए स्वर्ण की परत चढ़ाई जा सकती है, ग्राम देवता हों तो रजत का प्रयोग।

65

सहयोग लें; स्वयं उपाय करने से दिक्कत बढ़ेगी

कर्ण पिशाचिनी से छुटकारा कैसे पाएं?

· Reviewed Sep 2026 · 58:34–59:35 · Also a question

किसी साधक की सहायता लीजिए — जो महाविद्याओं का प्रचंड साधक हो, या भगवती वन दुर्गा का साधक हो, या पशुपतास्त्र मंत्र का पुरश्चरण करने वाला पशुपतिनाथ महादेव का साधक हो। इसमें उपाय नहीं हो सकता: अगर वास्तव में लगी है तो उपाय करने से वह और दिक्कत बढ़ाएगी।

66

दक्षिणामूर्ति का अपना देव दीक्षा विधान

क्या दक्षिणामूर्ति को गुरु रूप में ले सकते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 59:36–1:00:30 · Also a question

प्रत्यक्ष गुरु नहीं हैं तो दक्षिणामूर्ति जी का भी देव दीक्षा विधान है — उसी प्रकार कीजिए। समय न होने से वक्ता लाइव में मंत्र नहीं बताते।

67

पहले सुरक्षा का विधान — पलटा हुआ अभिचार तीन गुना लौटता है

प्रत्यंगिरा पाठ से पहले क्या होना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 1:00:31–1:03:16 · Also a question

सुरक्षा-रक्षण का विधान पहले करके अवश्य रखना चाहिए। क्योंकि प्रत्यंगिरा आप करेंगे, और अगर अभिचार की स्थिति पलट गई, सामने वाला शत्रु जानकार रहा और उसने पुनः पलट दिया — तो सोचिए, तीन गुना अधिक प्रभाव से आपको मिलेगा।

68

दीक्षित होइए, फिर मंदिर में पंचमुखी हनुमान कवच के 11000

तांत्रिक से पीड़ित परिवार क्या करे?

· Reviewed Sep 2026 · 1:03:17–1:04:33 · Also a question

सबसे पहले परंपरा में दीक्षित होइए, फिर अपने आराध्य की शरणागति लीजिए। हनुमान जी में श्रद्धा है तो पंचमुखी हनुमान कवच का आश्रय लीजिए — शत्रुओं को फाड़कर रख देंगे। 11000 का पुरश्चरण हनुमान जी के मंदिर में कीजिए, घर पर मत करिए।

69

दत्त माला मंत्र में घी का दीपक अति उत्तम

दत्त माला मंत्र के साथ घी का दीपक

· Reviewed Sep 2026 · 1:04:34–1:04:54

भगवान दत्त का माला मंत्र कर रहे हैं तो घी का दीपक रहे तो अति उत्तम रहेगा। दीपक की बाती डबल होनी चाहिए।

एक श्रोता के प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि भगवान दत्त का माला मंत्र कर रहे हैं तो घी का दीपक रहेगा तो अति उत्तम रहेगा। दीपक की बाती डबल होनी चाहिए, वे जोड़ते हैं। बाती के बारे में उनका अगला शब्द ट्रांसक्रिप्ट में स्पष्ट नहीं है।

70

कीलित शिष्य — सिद्धि है पर प्रयोग नहीं कर सकता

गुरु ने वचन से विद्या रोक दी हो तो क्या होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:04:55–1:05:57 · Also a question

दुरुपयोग के भय से गुरु विद्या को कीलित कर देते हैं — वचन ले लेते हैं कि तुम इसका ऐसा प्रयोग नहीं करोगे, केवल रक्षा के निमित्त करोगे। आदमी के पास सब कुछ है, लेकिन प्रयोग नहीं कर सकता। ऐसे गुरु पिता तुल्य होते हैं, नहीं चाहते कि शिष्य का कर्म बंधन बढ़े; कहते हैं केवल अपने आराध्य की सेवा करो, प्रयोग मत करो।

71

उसी शक्ति की अंग विद्या लें — नई दीक्षा की आवश्यकता नहीं

उसी शक्ति का दूसरा मंत्र लेने के लिए नई दीक्षा चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 1:05:58–1:07:25 · Also a question

अगर दीक्षित होकर मंत्र का पुरश्चरण पहले से किया है और मंत्र सिद्धि हो चुकी है, तो दोबारा कहीं दीक्षा लेने की आवश्यकता नहीं। संबंधित विद्या का ही कोई अन्य मंत्र, या उनकी अंग विद्याएं — पशुपतिनाथ से संबंधित बहुत सी विद्याएं हैं, खड्ग रावण आदि — उनका पुरश्चरण करके शिव मंदिर में प्रयोग करें।

72

अगले काट अनुष्ठान में वही चीज़ दोबारा लिखें

एक कटा और एक बचा दिखाया गया हो तो अगले काट अनुष्ठान में वही विषय फिर लिखें ताकि उसी संकल्प से आहुति पड़े

· Reviewed Sep 2026 · 1:07:26–1:08:02

अगर आपको बताया जा रहा है कि एक कट गया और एक रह गया, तो दोबारा जब कभी काट अनुष्ठान हो, सेम विषय, सेम चीज़ को पूरा लिख दीजिए, ताकि उसी संकल्प के साथ आहुति पड़ जाए। तो जो बचा है, वह भी कट जाएगा।

73

दावा अस्वीकार, पराशर स्मृति के प्रमाण से

क्या रजस्वला स्त्री मंत्र जाप कर सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:08:03–1:10:07 · Also a question

वक्ता इसे सिरे से अस्वीकार करते हैं। पॉडकास्ट के एक बहुत प्रसिद्ध तांत्रिक का कहना है कि स्त्री रजस्वला हो तो भी मंत्र जाप, महाविद्याओं का जाप कर सकती है, किसी शास्त्र में मना नहीं है। कई लोग पराशर स्मृति आदि का प्रमाण दे चुके हैं — पहले दिन ब्रह्मघातिनी, दूसरे दिन चांडालिनी, तीसरे दिन रज की।

74

सूतक गृह का जाप पूर्ण दीक्षित शाक्तों का, गृहस्थों का नहीं

सूतक गृह में जाप कौन कर सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:10:08–1:10:47 · Also a question

सूतक गृह में, या जहां मृत्यु हुई हो उस स्थान पर जाप करने का विषय शाक्तों के लिए है, जिन्हें पूर्ण उस प्रकार की दीक्षा प्राप्त है, या जो वैश्य मंत्र का जाप करते हैं — सामान्य जनों के लिए नहीं। जो गृहस्थ हैं, सामान्य दीक्षा प्राप्त व्यक्ति हैं, वे सूतक गृह में बैठकर जाप नहीं करते।

75

लोग दूसरों की गलतियों से नहीं सीखते — अपनी बुद्धि का प्रयोग करें

वीडियो में अनुभवों सहित नियम स्पष्ट करने पर भी लोग भाग-भागकर करते हैं, इसलिए रोक को अपनी बुद्धि से परखें

· Reviewed Sep 2026 · 1:10:48–1:11:46

क्योंकि वे लोग कोई रोक नहीं लगाते। नवार्ण मंत्र को सबसे बुरा उदाहरण बताते हैं — कि उसमें कोई नियम-निषेध नहीं। और वीडियो में अनुभवों सहित नियम स्पष्ट करने पर भी लोग अंधों जैसे भाग-भागकर करते हैं। उनका निवेदन: अपनी बुद्धि का प्रयोग करना सीखिए।

76

मूंगफली या चावल की भूसी का तेल नहीं — घी

सरसों के तेल की जगह कौन सा तेल?

· Reviewed Sep 2026 · 1:11:47–1:12:29 · Also a question

मूंगफली का तेल प्रयोग करने के लिए वक्ता नहीं बोलेंगे। चावल की भूसी का तेल, मूंगफली का तेल — सरसों न हो तो घी का प्रयोग कीजिए।

सरसों की जगह मूंगफली के तेल के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि मूंगफली का तेल प्रयोग करने के लिए वे नहीं बोलेंगे। चावल की भूसी का तेल, मूंगफली का तेल — सरसों न हो तो घी का यूज़ कीजिए।

77

साधक के आगे बढ़ने पर सामान्य स्थिति

साधना के समय जीव शरीर से बाहर निकल जाए तो इसका क्या अर्थ है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:12:30–1:13:21 · Also a question

सामान्य सा विषय है। जब साधक आगे बढ़ना शुरू करता है, तो इस प्रकार की परिस्थिति-स्थिति आती-जाती रहती है। इससे परेशान नहीं होना चाहिए, और इतने से अनुभव के लिए रुकना नहीं चाहिए, न इसकी आशा करनी चाहिए। आगे बढ़ें।

78

असली तांत्रिक अपने आप को पूर्ण रूप से गुप्त रखता है

असली तांत्रिक स्वयं को गुप्त क्यों रखता है?

· Reviewed Sep 2026 · 1:13:22–1:15:06 · Also a question

क्योंकि तंत्र का सबसे बड़ा नियम है गुप्त रहना। वास्तव में कोई तांत्रिक श्मशान साधना आदि करता होगा, तो कभी बताएगा ही नहीं। उपदेश देते हैं, चेहरा दिखाइए; कथावाचक हैं, चेहरा दिखाइए — लेकिन तंत्र मार्ग पर चलने वाला साधक अपने आप को पूर्ण रूप से गुप्त रखे।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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