देवशयनी एकादशी से श्रावण पूर्णिमा तक — बिना गुरु की गुरु पूर्णिमा, साठ दिन का सावन और घर पर रुद्राभिषेक

देवशयनी एकादशी से श्रावण पूर्णिमा तक का मार्गदर्शन।

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Questions this answers

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01

गौ सेवा घर का पहला कर्तव्य क्यों है?

साल भर के कार्यों में पहला — गौ सेवा

· 03:02–03:52 · Also a question

रखे गए कार्यों में पहला है गौ सेवा। वक्ता कहते हैं कि गौ माता की सेवा हम सबकी ज़िम्मेदारी है।

02

जन्म तिथि पर गौ सेवा क्यों बताई जाती है?

जिसकी जन्म तिथि है वह जीव, और उसके पितर व देवता

· 04:56–05:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह बहुत बड़ी राशि नहीं है, पर इससे उस जीव का भी कल्याण होगा जिसका जन्मदिन और जन्म तिथि है। उसके पितर, पूर्वज और देवता प्रसन्न होंगे — क्योंकि गौ मैया की सेवा से मिले आशीर्वाद से देवता भी तर जाते हैं।

03

घर को किन-किनके जन्मदिन पर चारे की व्यवस्था करनी चाहिए?

परिवार के हर सदस्य के लिए एक-एक दिन

· 05:25–06:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कम से कम अपनी जन्म तिथि पर, और अपने सभी अपनों के जन्मदिन पर — माता-पिता, पति या पत्नी, बेटे-बेटी, भाई-बहन — एक-एक दिन अपने घर से, अपने परिवार की ओर से हरे चारे की व्यवस्था करवाइए।

वक्ता कहते हैं कि कम से कम इतना तो कीजिए। अपनी जन्म तिथि पर, और परिवार में जो भी आपका अपना है — आपके माता-पिता, पति या पत्नी, बेटा-बेटी, भाई-बहन — उन सबके जन्मदिन पर भी, बस एक-एक दिन, अपने घर से और अपने परिवार की ओर से हरे चारे की व्यवस्था करवाइए।

04

हमारे भरण-पोषण के लिए माँ ने स्वयं गाय के रूप में अवतार लिया है, इसलिए उनकी सेवा सबसे पहले है।

हमारे भरण-पोषण के लिए जगदंबा ने गाय रूप में अवतार लिया

· 06:04–06:50

वक्ता कहते हैं कि स्वयं जगदंबा ने हमारे भरण-पोषण के लिए इस जीव के रूप में, गाय के रूप में अवतार लिया है — इसलिए उनकी सेवा हमारा सबसे पहला कर्तव्य है।

05

देवशयनी एकादशी पर क्या करना चाहिए?

108 नामों से नारायण के नाम पर सूक्ष्म हवन

· 10:26–10:56 · Also a question

कल देवशयनी एकादशी है और इसी से चातुर्मास शुरू होता है। वक्ता कहते हैं कि दिन का पहला काम है भगवान नारायण के नाम पर सामर्थ्य अनुसार हवन — सूक्ष्म हवन ही सही, पर कीजिए — उनके 108 नामों से आहुति दीजिए।

06

देवशयनी एकादशी पर नारायण के साथ और किसे आहुति देनी चाहिए?

नारायण के बाद अपने इष्ट, और पुरुष व साधिकाएँ किससे आहुति दें

· 10:57–11:28 · Also a question

साथ में अपने इष्ट-आराध्य की भी कीजिए — हनुमान जी को पूजते हैं तो नारायण के बाद हनुमान जी; भगवती को पूजते हैं तो नारायण के बाद भगवती। पुरुष घी और गुग्गुल से करें; सभी साधिकाएँ, बहनें हवन सामग्री से करें।

07

सिद्धि और चमत्कार के लिए दुनिया के पागलपन में मत पड़िए।

जीवन का उद्देश्य तंत्र सीखना या चमत्कार करना नहीं

· 11:29–12:16

वक्ता कहते हैं कि वे गुरु का विषय फिर से साफ़ कर रहे हैं और साथ में निवेदन कर रहे हैं: जीवन का उद्देश्य केवल तंत्र सीखना और चमत्कार करना नहीं है — इन सबमें मत पड़िए। पूरी दुनिया सिद्धि पाने, कोई शक्ति पाने, दूसरों के बारे में जानने, दिव्य दृष्टि पाने के पीछे पागल है।

08

जो लोग गलत हाथों से तंत्र सिद्धि के पीछे भागते हैं, उनके साथ क्या होता है?

टूटा भरोसा, जिसकी भरपाई कभी नहीं होती

· 12:17–12:39 · Also a question

तंत्र सिद्धि के चक्कर में पड़कर लोग ऐसे-वैसे लोगों से जाकर मिलते हैं, और फिर उनके साथ जो छल होता है और जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। जो भरोसा टूटता है, वह कहीं जुड़ नहीं सकता।

09

क्या भगवान का नाम लेने के लिए दीक्षा चाहिए?

नाम के लिए दीक्षा नहीं, विशेष मंत्रों और पुरश्चरण के लिए दीक्षा

· 12:40–12:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान का नाम लेने के लिए किसी दीक्षा की ज़रूरत ही नहीं है। दीक्षा वैदिक मंत्रों के लिए, और उन विशेष व कठिन तांत्रोक्त और पौराणिक मंत्रों के लिए चाहिए, जो उनका विशेष पुरश्चरण करना चाहते हैं — वहाँ चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि आपको इसकी ज़रूरत नहीं है। भगवान का नाम लेने के लिए कोई दीक्षा बिल्कुल नहीं चाहिए। वैदिक मंत्र हैं, और तांत्रोक्त और पौराणिक आदि मंत्र हैं जो विशेष और कठिन हैं; उनके लिए ज़रूरत है, उनके लिए जो उनका विशेष पुरश्चरणनिर्धारित नियमों के अनुसार मंत्र की अनुष्ठानिक पुनरावृत्ति — तंत्र साधना में आवश्यक। करना चाहते हैं। वहाँ चाहिए।

11

बिना दीक्षा के दुर्गा का कौन-सा अनुष्ठान किया जा सकता है?

भगवती दुर्गा के बत्तीस नाम — नाम, बीज नहीं

· 13:09–13:24 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि आप कह सकते हैं कि आप भगवती दुर्गा की बत्तीस नामावली का अनुष्ठान करना चाहते हैं — उसमें भी नाम है। वहाँ बीज है, यहाँ नाम है। कीजिए। जीवन में बत्तीस लाख कीजिए; उससे भी आपकी गति होगी।

12

जिनका कोई गुरु नहीं, वे गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?

स्वयं दत्तात्रेय दीक्षा विधान करें

· 13:25–13:43 · Also a question

जिनका कोई गुरु नहीं — चाहे आप पचास साल के हों या बीस के — वे इस गुरु पूर्णिमा पर फिर से भगवान दत्तात्रेय का दीक्षा विधान करें, या उसी विधि से अपने इष्ट-आराध्य का विधान करें।

वक्ता कहते हैं कि इस बार जो गुरु पूर्णिमा पड़ रही है, उस दिन वे सभी लोग जिनका कोई गुरु नहीं है — चाहे आप पचास साल के हों या बीस साल के — फिर से भगवान दत्तात्रेय का दीक्षा विधान करें। या उसी विधान से, जो भी आपके इष्ट-आराध्य हैं, उनकी विधि कीजिए।

13

यही सवाल फेसबुक पर, दूसरे चैनलों पर और एक के बाद एक ग्रुप में पूछे जाते हैं।

जिन्हें भटकना है, उनके पास हज़ार बहाने हैं

· 13:44–14:16

वक्ता कहते हैं कि वे ये सवाल जगह-जगह पूछे जाते देखते हैं — फेसबुक पर, यूट्यूब के दूसरे चैनलों पर, जिन बहुत से ग्रुपों में वे हैं उनमें — और वहाँ चलता नाटक देखते रहते हैं। अगर आपको भटकना है तो आपके पास हज़ार बहाने हैं; लोग आपको उलझाते रहेंगे और आप उलझते रहेंगे।

14

एक नवरात्रि यहाँ और अगली किसी और के साथ करते-करते तीन साल बीत जाते हैं।

तीन साल बर्बाद — एक नवरात्रि यहाँ, अगली कहीं और

· 14:17–14:46

वक्ता कहते हैं कि वे ऐसे लोगों को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं — उन्हें समझाते-समझाते तीन साल बीत गए। एक नवरात्रि यहाँ करेंगे, अगली नवरात्रि किसी और के साथ, उन्हें छोड़ेंगे, फिर अगली नवरात्रि इनके साथ। ऐसे ही समय निकल जाता है; वे रुक नहीं सकते, धैर्य नहीं रख सकते, तुरंत चाहते हैं।

15

क्या शिव की दीक्षा स्वयं ली जा सकती है?

शिव पिता हो सकते हैं, तो गुरु क्यों नहीं

· 14:47–14:58 · Also a question

लोग हर जगह पूछते हैं कि क्या शिव जी की दीक्षा स्वयं से ली जा सकती है, और चालाक लोग जवाब देते हैं: क्या शिव जी ने आपसे कहा है कि उन्होंने आपको शिष्य बनाया है? वक्ता इसे नकारते हैं — जब हम शिव जी से कह सकते हैं कि आप ही हमारे पिता हैं, तो वे गुरु क्यों नहीं हो सकते? वे हमारे बंधु, मित्र, माता-पिता, सब कुछ हो सकते हैं।

16

शिव पूजन और पंचाक्षरी का अधिकार किसे है?

प्रणव सबके लिए नहीं, पर शिव पूजन और पंचाक्षरी जप सबके लिए

· 14:59–15:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि प्रणव का अधिकार सबके लिए नहीं है, पर शिव महापुराण की विद्येश्वर संहिता में कहा गया है, जैसा चैनल पर चर्चा हुई है, कि जब आपने शिव जी को गुरु बना लिया, तो उनके पंचाक्षरी मंत्र के जप का अधिकार सबको है — शूद्र को भी, स्त्रियों को भी, और शिव पूजन का अधिकार सबको है।

17

मनसा माँ की एक छोटी, सुंदर मूर्ति को दस अलग जगहों पर अशास्त्रीय कहा गया।

मनसा माता की मूर्ति, जिसे दस लोगों ने अशास्त्रीय कहा

· 16:00–16:12

एक चक्रवर्ती बाबू, जो सुंदर मूर्तियाँ बनाते हैं, उन्होंने मनसा माँ की बहुत छोटी, प्यारी मूर्ति बनाकर दस जगह भेजी। सबने कहा कि यह अशास्त्रीय मूर्ति है और इसकी पूजा से यह-वह होगा। वक्ता पूछते हैं कि इसमें क्या कठिनाई है — उन्होंने भाव-प्रधानता से बनाई; वे भगवती से उड़ने की सिद्धि या सर्प मणि नहीं माँग रहे।

18

क्या भक्ति और तंत्र को मिलाना चाहिए?

तंत्र क्रियात्मक विषय है, वह अपनी जगह पर है

· 16:13–16:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब आप भक्ति-भाव से चलना चाहते हैं, तो ऐसे लोगों से मत पूछिए। वे बार-बार दोहराते हैं: भक्ति और तंत्र को एक साथ मत मिलाइए। तंत्र क्रियात्मक विषय है; वह जहाँ है, वहीं है।

19

काली और बगला तांत्रोक्त कुंजिका की ज़िद इंसान को बर्बादी की ओर ले जाती है।

बात को ठीक से पकड़िए, और शिव की दीक्षा स्वयं लीजिए

· 16:39–16:54

जब लोग कहते हैं कि नहीं, हम तो केवल सिद्ध कुंजिका करेंगे, और काली तांत्रोक्त सिद्ध कुंजिका, और बगला तांत्रोक्त — तब मना करने के कारण वक्ता ही बुरे बन जाते हैं। वे कहते हैं कि इस तरह खुद को बर्बाद करने की ओर मत बढ़िए: बात को ठीक से पकड़िए। शिव जी की दीक्षा हर व्यक्ति ले सकता है, तो स्वयं से लीजिए।

20

दत्तात्रेय दीक्षा विधि को शिव के लिए कैसे अपनाया जाए?

दत्तात्रेय की जगह शिव को विराजमान करें और यंत्र पर पंचाक्षरी लिखें

· 16:55–17:15 · Also a question

अगर आप तंत्र मार्ग पर जाना चाहते हैं या किसी विशेष मंत्र की साधना करना चाहते हैं, तो इस गुरु पूर्णिमा पर हाथ जोड़कर दीक्षा विधान कीजिए। पहले दिए गए देव दीक्षा विधान में उसी विधि से भगवान दत्तात्रेय की जगह भगवान शिव को विराजमान कीजिए, और जहाँ दत्तात्रेय का यंत्र लिखा है, वहाँ शिव का पंचाक्षरी मंत्र लिखिए।

21

क्या यज्ञोपवीत धारण करने वाले पुरुषों को फिर से दीक्षा चाहिए?

यज्ञोपवीत में गायत्री दीक्षा पहले ही मिल चुकी

· 17:16–17:22 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिन पुरुषों का यज्ञोपवीत हो चुका है, उन्हें गायत्री की दीक्षा पहले ही मिल चुकी है — आपको दूसरी बार दीक्षा लेने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है।

वक्ता कहते हैं कि जिन पुरुषों का यज्ञोपवीतवैदिक कर्मों में दीक्षा का प्रतीक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार — पीढ़ियों तक न होने पर, इसे पुनः आरंभ करने से पहले हर ज्ञात पीढ़ी के लिए प्रायश्चित आवश्यक है। हो चुका है, उन्हें उसी तरह गायत्री की दीक्षा पहले ही मिल चुकी है। भाई, आपको दूसरी बार दीक्षा लेने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है।

22

जिनका यज्ञोपवीत नहीं हुआ, वे क्या लिखें और धारण करें?

भोजपत्र पर प्रणव रहित पंचाक्षरी — एक अर्पित, एक धारण

· 17:23–17:28 · Also a question

जिनकी दीक्षा नहीं हुई और जो यज्ञोपवीत बिल्कुल नहीं पहनते, वे प्रणव रहित पंचाक्षरी मंत्र भोजपत्र पर लिखें — एक शिव को अर्पित करें और एक अपने गले में धारण करें — और उसी मंत्र का जप करें।

वक्ता कहते हैं कि जिन लोगों की दीक्षा नहीं हुई, जो यज्ञोपवीत बिल्कुल नहीं पहनते, वे प्रणव रहित पंचाक्षरी मंत्र लिखें। भोजपत्रभोजपत्र, अनार की टहनी की कलम व लाल चंदन की स्याही से मंत्र या नाम लिखने हेतु प्रयुक्त — जैसे शिवलिंग के अर्घे पर नाम रखकर मधु-अभिषेक करने में। पर लिखकर एक उन्हें अर्पित करें और एक अपने गले में धारण करें, और उसी मंत्र का जप करें।

23

स्त्रियों और चौथे वर्ण के लिए लिखने में क्या अंतर है?

पहले शिवाय, बाद में नमः

· 17:29–18:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो चौथे वर्ण के हैं, और जो स्त्रियाँ हैं, वे सब "नमः" बाद में और "शिवाय" पहले लिखेंगी, और फिर समर्पित करके उसी से अपना पाठ और पूजा करेंगी।

शास्त्र क्या कहता है

ग्रंथ में स्पष्ट कहा गया है श्रीशिवमहापुराण · विद्येश्वरसंहिता 11.42

For the twice-born, "namaḥ" is placed first in the pañcākṣara; for others (the fourth varṇa) and for women, "namaḥ" is placed at the end instead.

The very next verse (11:43) records a dissenting view for brahmin women specifically — the text's general rule, not its only opinion.

मूल पाठ पढ़ें →
42

द्विजानां च नमः पूर्वमन्येषां च नमोऽन्तकम्। स्त्रीणां च केचिदिच्छन्ति नमोऽन्तं च यथाविधि॥ ४२

द्विजोंके लिये आदिमें नमः होता है, और दूसरोंके लिये अन्तमें नमः। स्त्रियोंके लिये भी कुछ लोग विधिपूर्वक अन्तमें नमःवाला मन्त्र चाहते हैं।

24

जैसे युद्ध भूमि में श्री कृष्ण ने किया, वैसे ही वे समझाकर चुनाव आप पर छोड़ते हैं।

प्रमाण स्पष्टता से रखना, निर्णय आपका

· 18:03–18:29

उनका विषय उनका अपना है, और उन्होंने सारे प्रमाण स्पष्टता से सुनने वालों के सामने रख दिए हैं। मानना या न मानना आपकी इच्छा है; निर्णय आपको लेना होगा। वे इसकी तुलना युद्ध भूमि में भगवान श्री कृष्ण से करते हैं, जिन्होंने सारा ज्ञान देकर कहा: तुम्हारी इच्छा, करो या न करो।

25

गुरु पूर्णिमा पर किसे गुरु मानना चाहिए?

दिव्य शक्तियों को ही सद्गुरु और परम गुरु मानें

· 18:30–18:46 · Also a question

अगर आप अपने मन का संशय दूर करना चाहते हैं, तो उसे दूर कीजिए, अंधकार हटाइए, और गुरु पूर्णिमा के दिन उन्हीं दिव्य शक्तियों को अपना सद्गुरु, अपना परम गुरु मान लीजिए, और उनके मंत्रों का जप कीजिए — खासकर जब पुरुषोत्तम मास चल रहा है।

वक्ता कहते हैं कि अगर आप अपने मन का संशय दूर करना चाहते हैं, तो उसे दूर करके, अंधकार हटाकर, गुरु पूर्णिमा के दिन उन्हीं दिव्य शक्तियों को अपना सद्गुरु, अपना परम गुरु मान लीजिए। और उनके मंत्रों का जप कीजिए, जब पुरुषोत्तम मास चल रहा है। वे कहते हैं कि उसकी महिमा पर भी वे आएँगे।

26

पंचाक्षरी ठीक दत्तात्रेय दीक्षा विधि से की जाती है, बस वहाँ शिव को रखा जाता है।

आकाश विश्वकर्मा जी ने दत्तात्रेय विधि से शिव को गुरु बनाया

· 18:47–19:07

एक श्रोता, आकाश विश्वकर्मा जी, का उदाहरण लेकर वक्ता समझाते हैं: उन्होंने भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र ठीक से किया, बिल्कुल उसी विधि से जो दत्तात्रेय दीक्षा के लिए बताई गई है, बस वहाँ भगवान शिव की प्रतिमा या घर में जो शिवलिंग है, वह रखा।

वक्ता कहते हैं कि उदाहरण के लिए — आकाश विश्वकर्मा जी को उदाहरण मानकर — इन्होंने भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र उचित तरीके से किया। ठीक जैसे दत्तात्रेय भगवान की दीक्षा विधि बताई गई है, उसी विधि-विधान से, बस वहाँ उन्होंने भगवान शिव की प्रतिमा, या घर में जो शिव जी का शिवलिंग आदि है, वह रखा।

27

मंत्र दो भोजपत्रों पर लिखा जाता है और दत्तात्रेय की जगह शिव-पार्वती का दीपक जलाया जाता है।

दो भोजपत्र, दीपक, षोडश उपचार और जप

· 19:08–19:26

उन्होंने दो भोजपत्रों पर पंचाक्षरी मंत्र लिखा, एक भगवान शिव को अर्पित किया और दूसरा अपने सामने रखा; जहाँ माता अनसूया, महर्षि अत्रि और भगवान दत्तात्रेय का दीपक था, वहाँ भगवान शिव, माँ पार्वती और गणपति जी का दीपक जलाया; और षोडश उपचार विधि से उनका पूजन और अभिषेक किया।

28

गुरु पूर्णिमा की दीक्षा विधि में कितना जप किया जाता है?

सत्ताईस या 108 माला, या करमाला, या तय समय तक बैठना

· 19:27–19:41 · Also a question

उसके बाद सामर्थ्य अनुसार उन्होंने भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र की सत्ताईस या 108 माला जप की। माला न हो तो करमाला से कीजिए; वह भी न हो सके तो सवा घंटा, या कम से कम पंद्रह मिनट ही बैठकर पंचाक्षरी का जप कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि उसके बाद सामर्थ्य अनुसार उन्होंने भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र की सत्ताईस माला या 108 माला जप की। अगर माला नहीं है, तो कर-माला से कीजिए। वह भी न हो सके, तो सवा घंटा बैठकर, या कम से कम पंद्रह मिनट ही बैठकर, पंचाक्षरी का जप कीजिए।

29

मंत्र वाले दूसरे भोजपत्र का क्या किया जाता है?

चाँदी के खोल में रखकर गले में धारण

· 19:42–19:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि उनमें से एक उन्होंने चाँदी के खोल में रखकर गले में धारण कर लिया — पूरे भाव से — और बात वहीं खत्म हो जाती है।

30

साठ दिन के सावन में रोज़ कितना जप करना चाहिए?

रोज़ 108 माला, या तीन घंटे

· 19:56–20:13 · Also a question

रोज़ सामर्थ्य अनुसार 108 माला पकड़िए — संकल्प कीजिए कि 108 माला करनी है। माला नहीं है, तो ठीक है: हम तीन घंटे करेंगे। एक बार में न हो सके, तो डेढ़ घंटा सुबह और डेढ़ घंटा शाम।

वक्ता कहते हैं कि रोज़ सामर्थ्य अनुसार 108 माला पकड़िए — कि 108 माला करनी है। माला नहीं है? ठीक है, कोई बात नहीं — हम तीन घंटे करेंगे। एक बार में नहीं हो सकता: डेढ़ घंटा सुबह, डेढ़ घंटा शाम।

31

क्या सावन में जप के समय पर कोई रोक है?

समय की कोई दिक्कत नहीं — और दो दीपक जलते रहें

· 20:14–20:23 · Also a question

सावन में समय की कोई दिक्कत नहीं — सुबह, दोपहर, शाम, रात, आधी रात, भोर, जब भी समय मिले, कीजिए। शुद्ध होकर भगवान शिव के सामने दो दीपक जलाइए।

वक्ता कहते हैं कि सावन में समय की बिल्कुल कोई दिक्कत नहीं है — सुबह कीजिए, दोपहर में कीजिए, शाम को कीजिए, रात को कीजिए, आधी रात को कीजिए, भोर में कीजिए, जब भी आपको समय मिले। शुद्ध होकर भगवान शिव के सामने दो दीपक जलाइए: एक घी का और एक सरसों के तेल का, या दोनों घी के जलाइए।

32

पूजा के दीपकों के लिए कौन-से तेल लिए जा सकते हैं?

घी, सरसों या तिल का तेल — पर सब शुद्ध हो

· 20:24–20:42 · Also a question

घी की व्यवस्था न हो सके, तो दोनों सरसों के तेल के, या तिल के — पर तिल का तेल शुद्ध हो। वक्ता कहते हैं कि सब कुछ शुद्ध होना चाहिए: घी हो या सरसों का तेल, जो भी आपकी सामर्थ्य में हो। और जब तक जप चले, दीपक जलता रहे।

वक्ता कहते हैं कि अगर घी नहीं कर सकते, तो दोनों सरसों के तेल के, या तिल का बनाइए। तिल का तेल — पर शुद्ध होना चाहिए। बस इतना ध्यान रखिए: सब कुछ शुद्ध हो। घी हो, सरसों का तेल हो, जो भी आपकी सामर्थ्य में हो। और जब तक जप चले, वह घी जलता रहे, वह दीपक जला रहे। जप शुरू कीजिए, जप करते रहिए।

33

जिसे अब भी भौतिक गुरु की इच्छा है, वह क्या करे?

साठ दिनों का सही उपयोग करें, शिव रास्ता निकालेंगे

· 20:43–20:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आपके मन में भौतिक गुरु की कोई इच्छा है, तो साठ दिनों का अच्छे से उपयोग करके देखिए: सौ प्रतिशत भगवान शिव कृपा करेंगे और आपके लिए सही रास्ता निकालेंगे। पर अगर आपको फँसना है, बहाना चाहिए, तो दुनिया बहानों से भरी है।

वक्ता कहते हैं कि जप करते रहिए। अगर आपके मन में भौतिक गुरु की कोई कामना है, तो साठ दिनों का अच्छे से उपयोग करके देखिए। सौ प्रतिशत भगवान शिव कृपा करेंगे। वे आपके लिए सही रास्ता निकालेंगे। पर अगर आपको फँसना है, बहाना चाहिए — तो भाई, बहानों के लिए तो दुनिया लबालब भरी है।

34

किस देवता को गुरु बनाया जा सकता है, और किस काम के लिए यह मान्य नहीं?

किसी भी इष्ट को गुरु बना सकते हैं — पर तंत्र विद्या के लिए नहीं

· 21:00–21:11 · Also a question

गुरु पूर्णिमा के दिन आपकी इच्छा है — अपनी समझ के अनुसार भगवान दत्तात्रेय, महादेव, भगवान नारायण, माँ जगदंबा, माँ काली को गुरु बना सकते हैं। पर तंत्र विद्या के लिए नहीं, वक्ता बार-बार कहते हैं: तंत्र शास्त्र के लिए, तंत्र विद्या के लिए इस तरह गुरु नहीं बनाया जाता।

35

और किसे बिना जाने गुरु दीक्षा पहले ही मिल चुकी है?

यज्ञोपवीत और विवाह में गुरु दीक्षा होती है

· 21:12–21:40 · Also a question

गुरु के रूप में ज़रूरत उनकी है जिनका यज्ञोपवीत नहीं हुआ। जिनका विवाह नहीं हुआ — विवाह के समय भी गुरु दीक्षा होती है; जब यज्ञोपवीत होता है, तब भी गुरु दीक्षा होती है, और वह इसी तरह दी जाती है।

36

जिसे भौतिक गुरु की इच्छा है, वह कौन-सा नाम जप करे?

शिव शिव, शिव पार्वती, दुर्गा दुर्गा — सीधा नाम जप

· 21:41–21:53 · Also a question

अगर भौतिक गुरु की ज़रूरत इतनी ज़्यादा है, तो पहले भगवान से निवेदन कीजिए और उनके नाम का जप शुरू कीजिए। पंचाक्षरी जप हो गया; अब भगवान शिव का जप कीजिए — शिव शिव शिव शिव शिव शिव।

वक्ता कहते हैं कि अगर भौतिक गुरु की ज़रूरत इतनी ज़्यादा है, तो पहले भगवान से अपना निवेदन कीजिए और उनके नाम का जप शुरू कीजिए। पंचाक्षरी जप हो गया। अब भगवान शिव का जप कीजिए: शिव शिव शिव शिव शिव शिव। और अगर कहा जाए कि माता पार्वती जी के बिना शिव का जप नहीं हो सकता, तो शिव पार्वती का जप कीजिए।

37

शिव शब्द में शक्ति पहले से कहाँ है?

"श" पर लगी इकार की मात्रा ही शक्ति है

· 21:54–22:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि "श" पर जो इकार की मात्रा है, वही शक्ति है — तो शिव-शक्ति की इकार मात्रा लगी है, इसलिए वह शिव है। साथ में स्वयं शिव का जप कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि अरे, 'श' में जो इकार की मात्रा है — वही तो शक्ति है न। तो वहाँ शिव-शक्ति की इकार मात्रा लगी है, और इसलिए वह शिव है। उसके साथ आप स्वयं शिव का जप कीजिए।

38

जगदंबा का नाम जप कैसे किया जाता है?

दुर्गा दुर्गा, और जयंती मंगला मंत्र

· 22:02–22:18 · Also a question

अगर जगदंबा का जप करना है, दुर्गा नाम का जप करना है, तो दुर्गा दुर्गा कीजिए। आप क्यों पढ़ते रहते हैं कि आगे प्रणव लगाएँ या श्री लगाएँ या न लगाएँ — केवल नाम जप करना है, तो कीजिए। या जयंती मंगला मंत्र कीजिए।

39

गुरु पूर्णिमा पर दान किसे देना चाहिए?

साल भर जो मार्गदर्शन देता है, उसे दान

· 22:19–22:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके अलावा, आपके आसपास जो रहते हैं और नवरात्रि में, एकादशी पर या दूसरे विशेष पर्व काल पर आपका पूजन करवाते हैं — उनसे जो भी मार्गदर्शन मिलता है, गुरु पूर्णिमा के दिन उन्हें सामर्थ्य अनुसार दान दीजिए।

40

जिसका कोई गुरु नहीं, वह गुरु दान किसे अर्पित करे?

गुरु तत्व शिव, दत्तात्रेय या माँ को अर्पित करें

· 22:50–23:19 · Also a question

जो भी आपके गुरु हैं, उन्हें दीजिए। कोई नहीं है, तो भगवान शिव की पूजा करके — प्रभु, आप ही हमारे गुरु हैं; भगवान दत्तात्रेय, प्रभु, आप ही हमारे गुरु हैं; मैया माँ, आप ही हमारी गुरु हैं — और माँ को अर्पित कीजिए।

41

जिस दिन सावन शुरू होता है, पहला काम ऐसा है जो केवल अपने लिए नहीं किया जाता।

4 जुलाई से सावन, 18 जुलाई से पुरुषोत्तम मास

· 23:20–23:59

4 जुलाई से सावन शुरू हो रहा है, और 18 जुलाई से पुरुषोत्तम मास लगने वाला है। वक्ता कहते हैं — जैसा उन्होंने दोपहर में भी कहा — कि जिस दिन सावन शुरू होता है, पहला काम यह है कि हमें कुछ केवल अपने लिए नहीं, अपने परिवार की ओर से भी करना है।

42

परिवार के बहुत से सदस्य खुद पूजा क्यों नहीं करते?

उन्हें सब कुछ बना-बनाया और तैयार चाहिए

· 24:00–24:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अपना रुद्राभिषेक तो हम करते ही हैं, पर परिवार में बहुत से सदस्य हैं जो आपकी बात नहीं सुनते और सेवा-पूजा या रुद्राभिषेक नहीं करना चाहते — क्योंकि उन्हें सब कुछ तैयार चाहिए। सब कुछ सेट हो, और वे आकर बस जल चढ़ा दें।

43

वह एक व्यक्ति ऐसी व्यवस्था करे कि बाकी परिवार वाले भी भाग ले सकें।

घर का वह एक व्यक्ति जिसे भगवान ने सद्बुद्धि दी है

· 24:16–24:40

अगर पूरे परिवार में भगवान ने एक व्यक्ति को भी सेवा-पूजा की सद्बुद्धि दी है, या जगदंबा की कृपा से घर में ऐसा एक व्यक्ति है, तो वही थोड़ी व्यवस्था करे ताकि इस साल परिवार के बाकी सदस्यों का भी कल्याण हो।

44

वे घर पर अभिषेक की कौन-सी व्यवस्था सुझाते हैं?

बड़ी थाली में स्टैंड सहित शिवलिंग

· 24:41–25:01 · Also a question

घर में जो भी शिवलिंग है — नर्मदेश्वर जी हों, स्फटिक का हो, जिस शिवलिंग पर भी आप पूजन करते हैं — एक बड़ी थाली में स्टैंड सहित, या स्टैंड न रखना चाहें तो उसके बिना, शिव जी को विराजमान कीजिए।

45

परिवार के अभिषेक के लिए जल के पात्र में क्या डालें?

थोड़ी रोली और अष्टगंध के साथ कपूर मसलकर

· 25:02–25:15 · Also a question

किसी एक बड़े कलश में, गगरे में, किसी बड़े बर्तन में जल रखिए। जल में कपूर मसलकर थोड़ी रोली और थोड़ा अष्टगंध आदि मिलाकर रखिए। और वहाँ एक लोटा रखिए।

वक्ता कहते हैं कि किसी एक बड़े कलश में, गगरे में, किसी बड़े बर्तन में जल रखिए। जल में कपूर मसलकर, थोड़ी रोली और थोड़ा अष्टगंधआठ सुगंधित द्रव्यों से बना लेप, उपाय व पूजा विधियों में सिंदूर से पूर्व तिलक के रूप में लगाया जाता है। आदि मिलाकर रखिए। और वहाँ एक लोटा रखिए।

46

परिवार के अभिषेक के लिए कौन-सा दीपक रखा जाए, और कब तक?

कम से कम दोपहर तक जलने वाला कर्म साक्षी दीपक

· 25:16–25:39 · Also a question

हो सके तो अपनी पूजा और अभिषेक सुबह सबसे पहले कीजिए, और उसके बाद परिवार के हर सदस्य को बताइए। वहाँ एक दीपक भी जलाइए — कर्म साक्षी दीपक, थोड़ा बड़ा, जो कम से कम दोपहर बारह बजे तक जले।

47

पाठ के लिए बारह ज्योतिर्लिंगों के कौन-से नाम दिए गए हैं?

लिखकर चिपकाने के लिए बारह नाम

· 25:40–25:50 · Also a question

उन्हें पंचाक्षरी बताइए, या फिर यह कीजिए: भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम — सोमनाथाय नमः, मल्लिकार्जुनाय नमः, महाकालेश्वराय नमः, ओंकारेश्वराय नमः, वैद्यनाथाय नमः, भीमशंकराय नमः, रामेश्वराय नमः, नागेश्वराय नमः, विश्वेश्वराय नमः, त्र्यंबकेश्वराय नमः, केदारनाथाय नमः, घुश्मेश्वराय नमः।

48

परिवार के लिए ये नाम कैसे लगाए जाएँ?

हाथ से लिखकर या प्रिंट करके सामने चिपकाएँ

· 25:51–25:57 · Also a question

इन्हें ऐसे लिखकर वहाँ सामने चिपका दीजिए। हाथ से लिखिए; नहीं तो प्रिंट-आउट निकालना हो तो एक फॉर्मेट बनाकर वहाँ सामने लगा दीजिए।

वक्ता कहते हैं कि इन्हें ऐसे लिखकर वहाँ सामने चिपका दीजिए। हाथ से ही लिखिए; नहीं तो प्रिंट-आउट निकालना हो, तो एक फॉर्मेट बनाकर वहाँ सामने लगा दीजिए। कहिए: बाबू, यह जो लिखा है — इसे देखते हुए पढ़ते रहो, और लोटे से जल चढ़ाते रहो।

49

अगर परिवार का कोई सदस्य जल चढ़ाते हुए नाम न पढ़ सके, तो क्या करे?

पहले शिव शिव कहकर जल चढ़ाएँ, फिर बारह नाम पढ़ें

· 25:58–26:15 · Also a question

अगर देखकर पढ़ नहीं सकते, तो पहले भगवान शिव का नाम लेते हुए शिव शिव कहकर लोटे से शिव जी पर जल चढ़ाइए, और उसके बाद लिखे हुए बारह नाम पढ़िए। बैठकर पढ़िए या खड़े होकर — कोई बात नहीं। बस इतना काम कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि अगर देखकर पढ़ नहीं सकते, तो पहले भगवान शिव का नाम लेते हुए, शिव शिव कहते हुए, लोटे से शिव जी पर जल चढ़ाइए, और उसके बाद ये लिखे हुए बारह नाम पढ़िए। बैठकर पढ़िए, खड़े होकर पढ़िए। कोई बात नहीं। बस इतना काम कीजिए।

50

परिवार के अभिषेक में जल के साथ और क्या चढ़ाया जाता है?

बेल पत्र, थोड़ी भांग, और दंडवत प्रणाम

· 26:16–26:29 · Also a question

बेल पत्र मिल सके तो वहाँ सजाकर रखिए; एक बेल पत्र चढ़ाया जाए। भांग हो तो भगवान शिव पर थोड़ी भांग चढ़ाई जाए। उसके बाद अपनी इच्छा अनुसार दंडवत प्रणाम, साष्टांग प्रणाम करें, और महादेव का नाम लेकर वहाँ से आ जाएँ।

वक्ता कहते हैं कि अगर बेल पत्र उपलब्ध हो, तो वहाँ बेल पत्र सजाकर रखिए। एक बेल पत्र चढ़ाया जाए। अगर भांग हो, तो भगवान शिव पर थोड़ी भांग चढ़ाई जाए। और उसके बाद अपनी इच्छा अनुसार दंडवत प्रणाम, साष्टांग प्रणाम करें — और प्रणाम करके, महादेव का नाम लेकर, वहाँ से आ जाएँ।

51

जो अच्छे से करना चाहें, उन्हें रुद्राष्टक पाठ बताया जाए और आरती करवाई जाए।

अतिरिक्त रूप से रुद्राष्टक पाठ और आरती

· 26:30–26:44

जो अच्छे से करना चाहते हैं, उन्हें रुद्राष्टक का पाठ भी बताइए, या अपने साथ करवाइए। आरती करना चाहें, तो उसकी भी व्यवस्था कीजिए। छोटा-सा सेटअप रखिए।

वक्ता कहते हैं कि जो अच्छे से करना चाहते हैं, उन्हें रुद्राष्टकम् आदि का पाठ भी बताइए, या अपने साथ करवाइए। अगर वे आरतीदेवता की प्रतिमा के समक्ष प्रज्वलित दीपक घुमाने का अनुष्ठान — दीपदान में जब दीपक बुझने लगते हैं, तब इसे किया जाता है। करना चाहें, तो उसकी भी व्यवस्था कीजिए। छोटा-सा सेटअप रखिए।

52

क्या शिव की पूजा केवल सावन के सोमवारों को ही करनी चाहिए?

केवल सोमवार से सोमवार शिव जी को परेशान मत कीजिए

· 27:17–27:30 · Also a question

जो लोग केवल सोमवार से सोमवार शिव जी का पूजन करने वाले हैं — आठ सोमवार हैं, आठों पर पूजा करेंगे और बाकी दिन नहीं — उनसे वक्ता पूछते हैं: यह कहाँ है कि हम केवल सोमवार से सोमवार शिव जी को परेशान करेंगे? सावन के सोमवार का बड़ा महत्व है, पर उसका यह अर्थ नहीं।

53

सावन के बाकी दिनों में कम से कम क्या करें?

बाकी हर दिन कम से कम एक अभिषेक

· 27:31–27:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसे बिल्कुल मत छोड़िए — कि हम केवल सावन सोमवार का व्रत रखेंगे और बाकी दिन शिव जी का हाल पूछने भी नहीं जाएँगे। ऐसा नहीं होना चाहिए। इसलिए बाकी दिनों में भी उनका अभिषेक कीजिए।

54

जो रुद्राष्टाध्यायी नहीं जानते, वे क्या पाठ करें?

रुद्राष्टक, 108 नाम, बारह ज्योतिर्लिंग नाम, कोई भी स्तोत्र

· 27:53–28:12 · Also a question

अगर घर पर आपको रुद्राष्टाध्यायी के मंत्र नहीं आते और अष्टाध्यायी पाठ नहीं कर सकते, और कोई विशेष पौराणिक मंत्र भी नहीं जानते — तो रुद्राष्टक आता हो तो उससे कीजिए, शिव जी के 108 नामों से कीजिए, बारह ज्योतिर्लिंग नामों से कीजिए, या कोई भी स्तोत्र या उनका अष्टोत्तर शतनाम पढ़ते हुए अभिषेक कीजिए।

55

पुरुषोत्तम मास के लिए क्या जोड़ना चाहिए?

गीता का पंद्रहवाँ अध्याय — पुरुषोत्तम योग

· 28:13–28:32 · Also a question

अगर आप इसे और दिव्य बनाना चाहते हैं और समय है, तो हो सके तो श्रीमद्भगवद्गीता के पंद्रहवें अध्याय, पुरुषोत्तम योग, का पाठ कीजिए — यह पुरुषोत्तम मास है। यह छोटा है, बहुत छोटा; चार-पाँच मिनट लगेंगे।

वक्ता कहते हैं कि अब इसी बीच पुरुषोत्तम मास है। अगर आप इसे और दिव्य बनाना चाहते हैं, कि प्रभाव पड़े, और आपके पास समय है — तो हो सके तो श्रीमद श्रीमद्भगवद्गीता के पंद्रहवें अध्याय, पुरुषोत्तम योग, का पाठ कीजिए — यह पुरुषोत्तम मास है। यह छोटा है, बहुत छोटा; चार-पाँच मिनट लगेंगे।

56

क्या वह पाठ संस्कृत की जगह हिंदी में किया जा सकता है?

भगवान आकर यह नहीं कहेंगे कि तुमने हिंदी में किया

· 28:33–28:48 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि संस्कृत में न कर सकें तो हिंदी में कीजिए — इसमें कोई दिक्कत नहीं। भगवान आकर यह नहीं कहेंगे कि अरे, तुमने हिंदी में किया, हम फल नहीं देंगे। भाव से करना है; हम तंत्र नहीं कर रहे, भक्ति कर रहे हैं।

वक्ता कहते हैं कि अगर संस्कृत में नहीं कर सकते, तो हिंदी में कीजिए। कोई दिक्कत नहीं है। भगवान आकर यह नहीं कहेंगे: अरे, तुमने तो हिंदी में किया था, हम तुम्हें फल नहीं देंगे। भाव से ही तो करना है न — हम तंत्र नहीं कर रहे, भक्ति कर रहे हैं। आराम से हो जाएगा।

57

यज्ञोपवीत धारण करने वाले हरिहर मास में क्या करें?

न्यास और विनियोग के साथ विष्णु सहस्रनाम

· 28:49–29:28 · Also a question

जो लोग यज्ञोपवीत आदि धारण करते हैं, वे विष्णु सहस्रनाम का पाठ उसके न्यास और विनियोग के साथ ठीक से करने का अभ्यास करें, ताकि इस साल का हरिहर मास व्यर्थ न जाए।

58

जिनकी इष्ट भगवती हैं, वे इस मास में क्या करें?

शिव और नारायण का संक्षिप्त पूजन, अपने इष्ट का विशेष पूजन

· 29:29–29:31 · Also a question

जिनकी इष्ट-आराध्य भगवती हैं, जो उनकी सेवा करते हैं, वे अपनी विशेष सेवा-पूजन करें — साथ में भगवान शिव और भगवान नारायण का संक्षिप्त पूजन, और समय अनुसार अपने इष्ट-आराध्य का विशेष पूजन।

वक्ता कहते हैं कि बाकी, जिनकी इष्ट-आराध्य भगवती हैं, जो उनकी सेवा करते हैं, वे उनकी विशेष सेवा और पूजन करें। भगवान शिव और भगवान नारायण के साथ, उनका संक्षिप्त-संक्षिप्त पूजन, और अपने इष्ट देवता का विशेष पूजन — समय के अनुसार जितना संभव हो, उतना कीजिए। पर प्रयास ज़रूर कीजिए।

59

श्रावण में कुलदेवी और कुलदेवता का पूजन कब होता है?

श्रावण सप्तमी और अष्टमी, जिस पक्ष में आपका परिवार मानता हो

· 30:37–30:45 · Also a question

श्रावण मास में कुलदेवी और कुलदेवता का पूजन विशेष रूप से सप्तमी और अष्टमी के दिन होता है। कहीं यह कृष्ण पक्ष में होता है, कहीं शुक्ल पक्ष में।

वक्ता कहते हैं कि इसके अलावा आता है श्रावण सप्तमी का कुलदेवी पूजन। श्रावण मास में ही कुलदेवी और कुलदेवता का पूजन विशेष रूप से सप्तमी के दिन और अष्टमी के दिन होता है। कहीं यह कृष्ण पक्ष में होता है, कहीं शुक्ल पक्ष में।

60

क्या पुरुषोत्तम मास में कुलदेवी पूजन किया जा सकता है?

अधिक मास में कुलदेवी या कुलदेवता का पूजन नहीं

· 30:46–31:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि पुरुषोत्तम मास के न कृष्ण पक्ष में, न शुक्ल पक्ष में कुलदेवी और कुलदेवता का पूजन होगा — यह ध्यान रखिए। यह अधिक मास है; इसमें नारायण और भगवान शिव का, या अपने इष्ट-आराध्य का नित्य पूजन और विशेष पूजन होगा।

वक्ता कहते हैं कि पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में कुलदेवी और कुलदेवता का पूजन नहीं होगा। यह बात ध्यान में रखिए। यह अधिक मास है, पुरुषोत्तम मास है; इसमें नारायण और भगवान शिव का, या अपने इष्ट-आराध्य का नित्य पूजन और विशेष पूजन ही होगा।

61

शुक्ल पक्ष वाले परिवार 16 अगस्त के बाद वाला पक्ष लें; कृष्ण पक्ष वाले 18 जुलाई से पहले करें।

शुक्ल पक्ष के लिए 16 अगस्त के बाद, कृष्ण पक्ष के लिए 18 जुलाई से पहले

· 31:07–31:28

अगर कुल देवी-देवता का भोग-पूजन विशेष रूप से शुक्ल पक्ष में होता है, तो शुक्ल पक्ष में कीजिए — यानी उस पक्ष में जो 16 अगस्त के बाद चलेगा। और अगर कृष्ण पक्ष में होता है, तो 18 जुलाई से पहले चलने वाले पक्ष में सप्तमी और अष्टमी कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि अगर कुल के देवी-देवता का भोग और पूजन विशेष रूप से होता है, अगर शुक्ल पक्ष में होता है, तो शुक्ल पक्ष में कीजिए — यानी उस पक्ष में करना है जो 16 अगस्त के बाद चलेगा। और अगर कृष्ण पक्ष में होता है, तो जो पक्ष 18 जुलाई से पहले चलेगा, उसमें सप्तमी और अष्टमी कीजिए।

62

कुलदेवी का पूरा अनुष्ठान कहाँ से सीखें?

कुलदेवता पूजन और अनुष्ठान पर अलग वीडियो पहले से बने हैं

· 31:29–31:41 · Also a question

कुलदेवी-देवता के विशेष पूजन के लिए, या जो केवल कुलदेवी-देवता के लिए कोई विशेष अनुष्ठान करना चाहे, उसके लिए पूरा अलग वीडियो पहले से बना है। वक्ता कहते हैं कि वह लाइव वीडियो और दूसरे वीडियो सुनिए, जिन्हें फिर से शेयर किया जाएगा।

63

शिव पूजन का तरीका किस पर निर्भर करता है?

उपासक के पास जो द्रव्य उपलब्ध हो

· 31:42–31:52 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कहा गया है कि भगवान शिव की पूजा विविध उपचारों से होती है। यह उपासक पर निर्भर है: उसके पास जो उपलब्ध हो, उसी द्रव्य से वह भगवान शिव का पूजन करे।

64

कपिला पंचगव्य और कुशोदक से शिव को स्नान कराने का क्या फल है?

कपिला गाय के पंचगव्य से अनंत फल

· 31:53–32:00 · Also a question

अगर कपिला गाय के पंचगव्य में कुशोदक — यानी कुश का जल — मिलाकर भगवान शिव को स्नान कराया जाए, तो उससे अनंत फल मिलता है।

वक्ता बताते हैं कि कपिला गाय के पंचगव्य में कुशोदक मिलाकर — कुशोदक यानी जो कुश है, वह मिलाकर — अगर भगवान शिव को उससे स्नान कराया जाए, तो उससे अनंत फल मिलता है।

65

कोल्हू से निकले तिल के तेल से अभिषेक का क्या फल है?

कोल्हू का तिल तेल, और शिव पद की प्राप्ति

· 32:01–32:07 · Also a question

कोल्हू से निकला तिल का तेल — उससे शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, जिससे शिव पद की प्राप्ति होती है।

वक्ता बताते हैं कि कोल्हू से निकला तिल का तेल: उससे शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, जिससे शिव पद की प्राप्ति होती है।

66

कपूर और अगरु वाले जल का क्या फल है?

सभी पापों से मुक्ति और शिव सायुज्य

· 32:08–32:21 · Also a question

जो कपूर और अगरु मिले जल से शिवलिंग को स्नान कराता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर शिव सायुज्य प्राप्त करता है।

वक्ता बताते हैं कि जो कपूर और अगरु मिले जल से शिवलिंग को स्नान कराता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है और शिव सायुज्य प्राप्त करता है।

67

जिस कष्ट का इलाज दवा से न हो, उसके लिए क्या करें?

पिछले जन्मों का प्रारब्ध, और आषाढ़ पूर्णिमा से रोज़ अभिषेक

· 32:22–32:30 · Also a question

अगर हमारे शरीर या जीवन में कोई बहुत विशेष दोष या रोग है जिसका कोई उपाय नहीं मिल रहा और जो चिकित्सा से संभव नहीं, तो कहीं न कहीं यह हमारे पिछले जन्मों का प्रारब्ध है — ऐसे पाप जो फल दे रहे हैं। ऐसे में आषाढ़ पूर्णिमा से ही शुरू करके श्रावण पूर्णिमा तक रोज़ कीजिए।

68

साठ दिन के अभिषेक के पात्र में क्या डालें?

कपूर, अगरु या चंदन जल, अष्टगंध, थोड़ी रोली

· 32:31–32:54 · Also a question

कपूर; अगरु मिल सके तो — चंदन जल को अगरु कहते हैं, और एक अलग भी होता है; न मिले तो चंदन जल, अष्टगंध आदि मिलाकर, और जो रोली कुमकुम है उसमें से थोड़ा। उससे खुद शिवलिंग का अभिषेक कीजिए और परिवार के लोगों से भी करवाइए।

69

कपड़े से छने जल का क्या फल है?

सभी कामनाएँ पूरी और वरुण लोक की प्राप्ति

· 32:55–33:04 · Also a question

जो कपड़े से छने जल से — यानी जल को शुद्ध करके — शिवलिंग को स्नान कराता है, उसकी सभी कामनाएँ पूरी होती हैं और वह वरुण लोक प्राप्त करता है।

वक्ता बताते हैं कि कपड़े से छना जल, यानी जल को शुद्ध करके — जो उससे शिवलिंग को स्नान कराता है, उसकी सभी कामनाएँ पूरी होती हैं और वह वरुण लोक प्राप्त करता है।

70

शिव को वस्त्र अर्पित करने का क्या फल है?

सुंदर रंगीन मुलायम वस्त्र और शिव लोक की प्राप्ति

· 33:05–33:13 · Also a question

अगर हम वस्त्र अर्पित करते हैं — भगवान शिव को सुंदर, रंगीन, मुलायम वस्त्र — तो उससे शिव लोक की प्राप्ति होती है।

वक्ता बताते हैं कि अगर हम वस्त्र अर्पित करते हैं — सुंदर रंगीन मुलायम वस्त्र जो भगवान शिव को अर्पित किया जाता है — तो उससे शिव लोक की प्राप्ति होती है।

71

शिव को यज्ञोपवीत कौन अर्पित करे, और उसका क्या फल है?

केवल धारण करने वाले ही अर्पित करें — और वेदांत का ज्ञान मिलता है

· 33:14–33:25 · Also a question

वक्ता स्पष्ट करते हैं कि सफेद और पीले धागे वाला जनेऊ, यज्ञोपवीत — जो उसे धारण करते हैं, वही उसे अर्पित करेंगे। कहा गया है कि उन्हें वेदांत का ज्ञान मिलता है।

वक्ता कहते हैं कि जो सफेद, पीले धागे वाला जनेऊ है, यज्ञोपवीतवैदिक कर्मों में दीक्षा का प्रतीक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार — पीढ़ियों तक न होने पर, इसे पुनः आरंभ करने से पहले हर ज्ञात पीढ़ी के लिए प्रायश्चित आवश्यक है। — जो यज्ञोपवीत धारण करते हैं, वही उसे अर्पित करेंगे। उन्हें वेदांत का ज्ञान मिलता है; ऐसा कहा गया है।

72

चंदन, अगरु, कपूर और कुमकुम से लेपन का क्या फल है?

करोड़ों कल्पों तक स्वर्ग में निवास

· 33:26–33:43 · Also a question

जो चंदन, अगरु, कपूर और कुमकुम से शिवलिंग का अर्चन और लेपन करते हैं — यानी भगवान शिव को सुगंधित द्रव्यों से लपेटकर चारों ओर से सजाते हैं — कहा गया है कि उन्हें करोड़ों कल्पों तक स्वर्ग में निवास मिलता है।

वक्ता बताते हैं कि जो लोग चंदन, अगरु, कपूर और कुमकुम से शिवलिंग का अर्चन करते हैं, लेपन करते हैं — यानी भगवान शिव को सुगंधित द्रव्यों से लपेटा जाए, चारों ओर से सजाया जाए — उनके बारे में कहा गया है कि उन्हें करोड़ों कल्पों तक स्वर्ग में निवास मिलता है।

73

ताज़े फूल और पत्ते अर्पित करने का क्या फल है?

केवल पत्ते और फूल से स्वर्ण दान का फल

· 33:44–33:55 · Also a question

बिल्कुल ताज़ा फूल, एक पत्ता — अगर हम उसे भगवान शिव को अर्पित करें, तो स्वर्ण दान, यानी सोने के दान का फल मिलता है। केवल एक पत्ता और एक फूल अर्पित करने से।

वक्ता बताते हैं कि बिल्कुल ताज़ा फूल, एक पत्ता — अगर हम उसे भगवान शिव को अर्पित करें, तो स्वर्ण दान, यानी सोने के दान का फल मिलता है। केवल एक पत्ता और एक फूल अर्पित करने से।

74

अपामार्ग और चतुर्दशी के बारे में क्या कहा गया है?

चतुर्दशी पर अपामार्ग से पूजा करने वाले को शिव सारूप्य

· 33:56–34:00 · Also a question

जो चतुर्दशी के दिन अपामार्ग से पूजा करता है, उसे शिव सारूप्य मिलता है।

वक्ता बताते हैं कि जो चतुर्दशी के दिन अपामार्गअपामार्ग (Achyranthes aspera) — एक पौधा जिसकी लकड़ी को धूनी में जलाकर घर से गंभीर नकारात्मक या तांत्रिक बाधाओं को दूर किया जाता है। से पूजा करता है, उसे शिव सारूप्य मिलता है।

75

पंचाक्षर मंत्र के साथ बेल पत्र अर्पित करने का क्या फल है?

शिव पद, यानी कैलाश की प्राप्ति

· 34:01–34:13 · Also a question

जो पंचाक्षर मंत्र के साथ शिव जी को बेल पत्र अर्पित करते हैं, उन्हें शिव जी का पद मिलता है, यानी कैलाश की प्राप्ति होती है। बेल पत्र लीजिए, मन में शिव जी का मंत्र बोलते हुए उसे शिवलिंग पर अर्पित कीजिए।

वक्ता बताते हैं कि जो पंचाक्षर मंत्र के साथ शिव जी को बेल पत्र अर्पित करते हैं, उन्हें शिव जी का पद मिलता है — यानी कैलाश की प्राप्ति होती है। बेल पत्र लेकर, शिव जी का मंत्र बोलते हुए, मन में कहते हुए, उसे शिवलिंग पर अर्पित कीजिए। इन सब बातों पर वे पहले भी बोल चुके हैं।

76

क्या सूखा और बासी बेल पत्र अर्पित किया जा सकता है?

धोकर अर्पित करने पर वह भी सभी पातकों से मुक्त करता है

· 34:14–34:34 · Also a question

बेल का पत्ता भगवान शिव को इतना प्रिय है कि अगर कोई सूखा और बासी बेल पत्र भी धोकर अर्पित करे, तो वह व्यक्ति भी सभी पातकों से मुक्त हो जाता है। इसलिए अगर रोज़ बेल पत्र नहीं मिल रहा, तो पुराना चढ़ा सकते हैं — बस वह टूटा न हो।

77

घी मिले गुग्गुल की धूप का क्या फल है?

रुद्र लोक और गणपति का पद

· 34:35–34:43 · Also a question

जो गुग्गुल में घी मिलाकर भगवान शिव को धूप अर्पित करता है, वह रुद्र लोक प्राप्त करता है और गणपति का पद पाता है।

वक्ता बताते हैं कि जो गुग्गुल में घी मिलाकर भगवान शिव को धूप अर्पित करता है, वह रुद्र लोक प्राप्त करता है और गणेश का पद पाता है।

78

शिव को दीपक अर्पित करने का क्या फल है?

सभी पापों से मुक्ति और सभी कामनाएँ पूरी

· 34:44–35:01 · Also a question

अगर शिव जी के नाम पर घी या तिल के तेल का दीपक अर्पित किया जाए, तो हर तरह के पाप से मुक्ति मिलती है और सभी कामनाएँ पूरी होती हैं।

79

घी, गुड़ और खीर के नैवेद्य का क्या फल है?

हज़ारों वर्षों तक रुद्र लोक, और दुर्गति नहीं

· 35:02–35:13 · Also a question

जो भगवान शिव को घी और गुड़ से बने पदार्थ, खीर, और ऐसे सभी नैवेद्य अर्पित करते हैं, उन्हें हज़ारों वर्षों तक रुद्र लोक मिलता है, और उनकी दुर्गति नहीं होती।

वक्ता बताते हैं कि जो भगवान शिव को घी और गुड़ से बने पदार्थ, खीर, ये सब नैवेद्यपूजा के दौरान देवता को अर्पित किया जाने वाला भोग, जिसके साथ जल अर्पण व समर्पण मंत्र होते हैं। के रूप में अर्पित करते हैं, उन्हें हज़ारों वर्षों तक रुद्र लोक मिलता है, और दुर्गति नहीं होती।

80

पाँच सुगंधों वाला अर्पण क्या है?

इलायची, कपूर और कंकोल वाला पान का बीड़ा

· 35:14–35:25 · Also a question

पाँच सुगंध — इलायची, कपूर, कंकोल, यानी जो पान का बीड़ा हम बनाते हैं — अगर वह बनाकर भगवान शिव को अर्पित किया जाए, तो उससे भी रुद्र लोक की प्राप्ति होती है।

वक्ता बताते हैं कि पाँच सुगंध — इलायची, कपूर, कंकोल, यानी जो पान का बीड़ा हम लोग बनाते हैं — अगर वह बनाकर भगवान शिव को अर्पित किया जाए, तो उससे भी रुद्र लोक की प्राप्ति होती है।

81

मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाने का क्या फल है?

सफेद, गेरुआ या लाल कपड़े की ध्वजा और शिव लोक

· 35:26–35:35 · Also a question

जो भगवान शिव को सफेद, गेरुआ या लाल कपड़े की ध्वजा अर्पित करते हैं और उसे उनके मंदिर के शिखर पर लगवाते हैं, उन्हें उससे शिव लोक मिलता है।

वक्ता बताते हैं कि जो भगवान शिव को सफेद या गेरुआ या लाल कपड़े की ध्वजा अर्पित करते हैं, और उसे उनके मंदिर के शिखर पर लगवाते हैं, उन्हें उससे शिव लोक मिलता है।

82

शिव मंदिर में बड़ा घंटा लटकाने का क्या फल है?

घंटाकर्ण गण जैसा बल और शिव लोक

· 35:36–35:58 · Also a question

जो शिव जी के मंदिर में लोहे की ज़ंजीर वाला विशाल घंटा लटकाता है — लोग जो घंटा दान करते हैं, मंदिर में बजने वाला बड़ा घंटा, लोहे की ज़ंजीर पर लटका — उसके बारे में कहा गया है कि वह घंटाकर्ण गण जैसा बलवान होता है और शिव लोक प्राप्त करता है।

83

घंटाकर्ण कौन हैं?

शिव के एक प्रमुख गण, जिन्हें घंटाकर्ण वीर, महावीर कहते हैं

· 35:59–36:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि घंटाकर्ण गण के बारे में वे आगे बताएँगे। घंटाकर्ण भगवान शिव के एक प्रमुख गण हैं, जिन्हें घंटाकर्ण वीर और महावीर कहा जाता है; घंटा दान करने वाला उनका पद पाता है और उनका स्वरूप प्राप्त करता है।

वक्ता कहते हैं कि घंटाकर्ण गण के बारे में वे आने वाले समय में भी बताएँगे। आजकल हर कोई ऐसे ही सिद्धियों के पीछे भागता है। घंटाकर्ण भगवान शिव के एक प्रमुख गण हैं; उन्हें घंटाकर्ण वीर, महावीर कहा जाता है। तो उनका पद मिलता है, उनका स्वरूप प्राप्त होता है।

84

वाद्य यंत्र अर्पित करने का क्या फल है?

डमरू, भेरी और मृदंग — और उन्हें बजाने वाला कोई

· 36:16–36:33 · Also a question

अगर हम भगवान शिव को डमरू, भेरी, मृदंग, संगीत बजाने के ऐसे सभी वाद्य अर्पित करें, तो रुद्र लोक की प्राप्ति होती है। वक्ता जोड़ते हैं कि हम अर्पित तो कर रहे हैं, पर कोई उन्हें बजाए तभी बात पूरी होगी।

वक्ता बताते हैं कि अगर हम भगवान शिव को डमरू, भेरी, मृदंग — संगीत बजाने के ये सब वाद्य — अर्पित करें, तो रुद्र लोक की प्राप्ति होती है। वे जोड़ते हैं कि हम अर्पित कर रहे हैं, पर कोई उन्हें बजाए — तभी बात बनती है।

85

शिव की प्रदक्षिणा के बारे में क्या कहा गया है?

प्रदक्षिणा और शिव लोक की प्राप्ति

· 36:34–36:37 · Also a question

फिर प्रदक्षिणा के बारे में कहा गया है: भगवान शिव की प्रदक्षिणा करने से शिव लोक की प्राप्ति होती है।

वक्ता बताते हैं कि फिर प्रदक्षिणादेवता या मंदिर की दक्षिणावर्त परिक्रमा, जिसमें देवता सदैव दाईं ओर रहते हैं। के लिए कहा गया है: भगवान शिव की प्रदक्षिणा करने से शिव लोक की प्राप्ति होती है।

86

शिव को दंडवत प्रणाम का क्या फल है?

सैकड़ों यज्ञों से भी अधिक

· 36:38–36:52 · Also a question

अगर शिव जी को दंडवत प्रणाम किया जाए, तो कहा गया है कि दंडवत प्रणाम से शिव जी की पूजा करने पर सैकड़ों यज्ञों से भी अधिक फल मिलता है, और दंडवत नमस्कार से सभी कामनाएँ पूरी होती हैं।

वक्ता बताते हैं कि अगर शिव जी को दंडवत प्रणाम किया जाए, तो कहा गया है कि दंडवत प्रणाम से शिव जी की पूजा करने पर सैकड़ों यज्ञों से भी अधिक फल मिलता है। दंडवत नमस्कार से सभी कामनाएँ पूरी होती हैं।

87

उस प्रणाम की तुलना तीर्थ यात्रा से कैसे की गई है?

सैकड़ों-हज़ारों तीर्थ उसके सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं

· 36:53–37:05 · Also a question

सैकड़ों और हज़ारों तीर्थ महादेव जी को किए प्रणाम की सोलहवीं कला के बराबर भी नहीं हैं — यानी जो भगवान शिव को प्रणाम करता है, उसे इतना फल मिलता है कि तीर्थ यात्रा से भी वह चीज़ नहीं मिल सकती।

88

रोग दूर करने के लिए रुद्र जप के कौन-से रूप किए जाते हैं?

लघु रुद्र, महारुद्र और अतिरुद्र

· 37:06–37:21 · Also a question

रुद्राभिषेक के लिए कहा गया है कि रोग दूर करने के लिए लघु रुद्र, महारुद्र और अतिरुद्र का जप या अभिषेक किया जाता है।

वक्ता बताते हैं कि अब रुद्राभिषेक के लिए कहा गया है कि रोग दूर करने के लिए लघु रुद्र, महारुद्र और अतिरुद्र का जप या अभिषेक किया जाता है। भगवान शिव ने रुद्राभिषेक का माहात्म्य बताया है: कि सारे कर्म छोड़कर शांत मन से रुद्राभिषेक करने से दुखों का नाश निश्चित रूप से होता है।

89

रुद्राभिषेक का हर द्रव्य क्या फल देता है?

जल, कुशोदक, दही, गन्ने का रस, शहद और घी, तीर्थ जल, खीर

· 37:22–37:38 · Also a question

जल से रुद्राभिषेक से वर्षा; कुशोदक से अभिषेक से व्याधि की शांति; दही से पशुओं की प्राप्ति; गन्ने के रस से श्रेय की प्राप्ति; शहद और घी से अभिषेक करने पर धन की प्राप्ति; तीर्थ जल से मोक्ष की प्राप्ति; और खीर से पुत्र की प्राप्ति।

जल से रुद्राभिषेक से वृष्टि; कुशोदक से अभिषेक से व्याधि की शांति; दही से पशुओं की प्राप्ति; गन्ने के रस से श्रेय की प्राप्ति; शहद और घी से अभिषेक करने पर धन की प्राप्ति; तीर्थ जल से मोक्ष की प्राप्ति; और खीर से पुत्र की प्राप्ति — वक्ता यह सूची इसी तरह बताते हैं।

90

रुद्र जप से रोग क्यों दूर होता है?

पिछले जन्म का पाप रोग का रूप लेता है

· 37:39–38:04 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि पुराने जन्म का, पिछले जन्म का पाप ही रोगों का रूप लेता है। रुद्र जप या अभिषेक से पाप का नाश निश्चित रूप से होता है; और पाप नष्ट होने पर हमारे शरीर के रोग भी अपने आप नष्ट हो जाते हैं।

वक्ता बताते हैं कि पुराने जन्म का, पिछले जन्म का पाप ही रोगों का रूप धारण करता है। रुद्र जप या अभिषेक से पाप का नाश निश्चित रूप से होता है। और पाप नष्ट होने पर हमारे शरीर के रोग भी अपने आप नष्ट हो जाते हैं। इसीलिए शतरुद्र आदि की बात कही गई है।

91

विधिवत रुद्राभिषेक करवाने में कितना खर्च आता है?

एक दिन के लिए भी कम से कम ₹3000-4000

· 38:05–38:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हर किसी के लिए रोज़ विशेष रुद्राभिषेक करवाना संभव नहीं। अगर आप एक दिन का रुद्राभिषेक भी करवाने जाएँ, तो कम से कम ₹3000 से ₹4000 खर्च होंगे। आप खुद कर सकते हैं — पर कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि अब हर किसी के लिए वह विशेष नित्य रुद्राभिषेक करवा पाना संभव नहीं है। अगर आप एक दिन का भी रुद्राभिषेक करवाने जाएँ, तो कम से कम ₹3-4000 तो खर्च होंगे ही। और आप खुद से कर सकते हैं — पर ज़रूर कीजिए।

92

क्या घर पर किया गया रुद्राभिषेक अपने आप में पर्याप्त है?

जब तक बहुत बड़ा कष्ट न हो, खुद कीजिए

· 39:20–39:34 · Also a question

नहीं तो घर पर करने की जो विधि बताई गई है, वही कीजिए। अगर कोई बहुत विशेष कष्ट है, बहुत बड़ा कष्ट है, और आप खुद प्रयास कर रहे हैं पर नहीं हो रहा, और इच्छा और सामर्थ्य है, तो उन्हें बताइए, व्यवस्था हो जाएगी। नहीं तो खुद कीजिए — कोई दिक्कत नहीं।

वक्ता कहते हैं कि नहीं तो घर पर करने की जो विधि बताई गई है — वह भी कीजिए। अगर कोई बहुत विशेष कष्ट है, बहुत बड़ा कष्ट है, और आप खुद से प्रयास कर रहे हैं और नहीं हो रहा, और इच्छा और सामर्थ्य है, तो बताइए, व्यवस्था हो जाएगी। नहीं तो खुद कीजिए; कोई दिक्कत नहीं है।

93

रुद्राष्टाध्यायी न जानने से क्या छूट जाता है?

पूरा विधि-विधान नहीं हो पाता, पर भाव हो सकता है

· 39:35–40:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इतना तो ज़रूर होगा: अगर रुद्राभिषेक करते समय आपको रुद्राष्टाध्यायी आदि का पाठ नहीं आता, तो आप वह पूरा विधि-विधान उतने अच्छे से नहीं कर पाएँगे। पर भाव से तो करेंगे — इतना कीजिए।

94

क्या शिवलिंग पर चौबीस घंटे जलधारी टपकती छोड़नी चाहिए?

या तो चौबीसों घंटे जल की आपूर्ति कीजिए, या स्टैंड हटा दीजिए

· 40:05–40:42 · Also a question

कुछ लोग चौबीस घंटे भगवान शिव के ऊपर लोटा टाँगकर जलधारी देते हैं, पर दिन भर वहाँ बैठना संभव नहीं। अगर आप पूरे सावन के लिए घर पर ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं, तो या तो ऐसी व्यवस्था कीजिए कि चौबीसों घंटे जल की आपूर्ति होती रहे; या फिर व्यवस्था केवल तभी तक रखिए जब तक आप पूजा-अभिषेक कर रहे हैं और वहाँ मौजूद हैं।

95

क्या शिवलिंग के ऊपर खाली लोटा टँगा छोड़ना ठीक है?

सिर के ऊपर खाली लोटा नहीं रखना चाहिए

· 40:43–40:49 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि रखने में भी कोई दिक्कत नहीं, पर उसे हटा ज़रूर दीजिए। सिर के ऊपर खाली लोटा ऐसे नहीं रखना चाहिए। या दोपहर के बाद हटा दीजिए।

वक्ता कहते हैं कि रखें तो भी कोई दिक्कत नहीं, पर उसे हटा ज़रूर दीजिए। सिर के ऊपर खाली लोटा ऐसे नहीं रखना चाहिए। या दोपहर के बाद हटा दीजिए।

96

परिवार के अभिषेक वाले दिन के बाद शाम को क्या करना चाहिए?

लगभग 5:30 या 6:00 बजे दूसरा अभिषेक और श्रृंगार

· 40:50–41:05 · Also a question

दिन में आप 5:00 बजे पूजा कर रहे होंगे और परिवार का कोई सदस्य 10:00 बजे भी आकर शिव जी का अभिषेक करेगा। तो शाम को यह कीजिए: लगभग 5:30 या 6:00 बजे भगवान शिव का फिर से अभिषेक करके उनका श्रृंगार कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि देखिए दिन में क्या होता है: अब आप 5:00 बजे पूजा कर रहे होंगे। परिवार का कोई एक सदस्य 10:00 बजे भी आकर शिव जी का अभिषेक करेगा। उसके बाद शाम के समय यह कीजिए — लगभग 5:30, 6:00 बजे, भगवान शिव का एक बार फिर अभिषेक करके उनका श्रृंगार कीजिए।

97

रात के लिए शिव को कैसे विराजमान करें?

त्रिपुंड्र, बिल्व पत्र, सारा जल हटाकर, विश्राम का स्थान

· 41:06–41:25 · Also a question

उनका त्रिपुंड्र आदि बनाइए, बिल्व पत्र रखिए, फूल सुखाइए, सारा जल हटाइए, और रात के विश्राम के लिए उन्हें एक जगह विराजमान कीजिए। उन्हें चौबीस घंटे जल में मत छोड़िए।

98

रुद्राभिषेक जिस भी समय पूरा हो, शाम को उनका पूरा श्रृंगार कीजिए।

शाम को सब साफ़ करके उन्हें ठीक से विराजमान करें

· 41:26–41:43

सुबह लोगों की सुविधा के अनुसार जो भी जिस समय रुद्राभिषेक पूरा कर रहा है — उसके बाद शाम को कम से कम सब हटाइए, पाँच-दस मिनट में जितना लगे, उनका पूरा श्रृंगार अच्छे से करवाइए, और फिर उन्हें विराजमान करवाइए। उन्हें ऐसे नहीं छोड़ना है।

वक्ता कहते हैं कि सुबह लोगों की सुविधा के अनुसार, जो भी जिस समय रुद्राभिषेक पूरा कर रहा है — उसके बाद शाम के समय कम से कम सब हटाइए, पाँच-दस मिनट में जितना लगे, उनका पूरा श्रृंगार अच्छे से करवाइए, और फिर उन्हें विराजमान करवाइए। उन्हें ऐसे नहीं छोड़ना है। यह बात ध्यान में रखिए।

99

क्या सभी देवताओं की रोज़ कपूर और लौंग से आरती की जा सकती है?

आरती के पात्र में पहले कपूर, फिर उस पर लौंग

· 41:44–42:16 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि हाँ, की जा सकती है। जिस पात्र में आरती दिखाई जाती है, उसमें पहले कपूर डालिए, उस पर लौंग रखिए, जलाइए और दिखाइए। कोई दिक्कत नहीं है।

अब श्रोताओं के प्रश्न लेते हुए वक्ता एक प्रश्न से शुरू करते हैं कि क्या सभी देवी-देवताओं के लिए रोज़ कपूर और लौंग से आरती की जा सकती है। वे उत्तर देते हैं कि हाँ, की जा सकती है। जिस पात्र में आरतीदेवता की प्रतिमा के समक्ष प्रज्वलित दीपक घुमाने का अनुष्ठान — दीपदान में जब दीपक बुझने लगते हैं, तब इसे किया जाता है। दिखाई जाती है, उसमें पहले कपूर डालिए; उस पर लौंग रखिए; जलाइए और दिखाइए। कोई दिक्कत नहीं है।

100

यह विधि लाइव करके दिखानी पड़ेगी, जैसे यज्ञोपवीत या शैव दीक्षा में गुरु करते हैं।

मुँह से बताई जा सकती है, पर करके दिखाना उचित नहीं

· 42:17–42:48

अघोर मंत्र से बेल की लकड़ी से भस्म बनाने की विधि समझाने को कहा गया, तो वक्ता कहते हैं कि वह लाइव करके दिखानी पड़ेगी। जब तक ऐसा विधि-विधान न हो — यज्ञोपवीत संस्कार या शैव दीक्षा में — गुरु सब कुछ करके दिखाते और बताते हैं। नहीं तो हम केवल मुँह से बता सकते हैं; करके दिखाना उचित नहीं।

101

क्या भैरवी साधना घर पर की जा सकती है?

तांत्रोक्त शक्ति, इसलिए न घर पर, न बिना दीक्षा के

· 42:49–43:28 · Also a question

पंकज जमवाल जी, जो घर पर भैरवी साधना करना चाहते हैं, उन्हें उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि भैरवी की सेवा-पूजा तांत्रोक्त शक्ति है और उनका स्वरूप तांत्रोक्त है — तो आप घर पर कैसे करेंगे? या तो ऐसी साधना के लिए विधिवत दीक्षा लीजिए, और तब भी घर पर नहीं, शिव मंदिर में कीजिए, या जैसा गुरु आदेश दें।

102

पहले आरती आती है, या पाठ और हवन?

नित्य पूजन में क्रम का प्रश्न

· 43:29–44:08 · Also a question

एक श्रोता पूछते हैं: कुछ लोग नित्य पूजन में पहले पूजन, पाठ और हवन करते हैं और अंत में आरती; कुछ पूजन के बाद आरती करते हैं और फिर पाठ और हवन। कौन-सा क्रम सही है?

प्रश्न यह है कि कुछ लोग नित्य पूजन में पहले पूजन, पाठ और हवन करते हैं और फिर अंत में आरती करते हैं। कुछ पूजन के बाद आरती करते हैं और फिर पाठ और हवन करते हैं। कौन-सा क्रम सही है? वक्ता कहते हैं कि देखिए, वे एक उदाहरण से बता रहे हैं।

103

नित्य पूजन में सही क्रम क्या है?

पूजन, पाठ, हवन, और हवन के बाद ही आरती

· 44:09–44:28 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि नित्य पूजन में ऐसा नहीं होना चाहिए। नित्य पूजन के क्रम में पूजन, पाठ और हवन करना चाहिए और उसके बाद ही आरती। पूजन के बाद आरती करके फिर पाठ और हवन करना उचित नहीं। आरती हवन के बाद ही कीजिए।

104

जब एक श्रोता लाल जवा फूल अर्पित करते हैं, तो उनकी माँ को दर्द क्यों होता है?

जवा फूल से आहुति मत दीजिए

· 44:46–45:13 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि जब भी वे हवन करते हैं या लाल जवा फूल से आहुति देते हैं, उनकी माँ के पेट में बहुत तेज़ दर्द होता है। वक्ता सीधा उत्तर देते हैं: अगर जवा फूल से आहुति देते हैं, तो जवा फूल से आहुति मत दीजिए। वे निखिल कटारिया जी से कहते हैं कि वे इसके पीछे का कारण समझते हैं, और अगर वे माँ के पास हों तो उस समय बिल्कुल न करें।

105

क्या यज्ञोपवीत में गायत्री देने वाले ही गुरु हैं?

वही व्यक्ति आपके पहले गुरु बन जाते हैं

· 45:14–45:39 · Also a question

लाखन सिंह जी पूछते हैं कि जिन्होंने उनके यज्ञोपवीत में उन्हें गायत्री दी, क्या वही उनके गुरु हैं या उन्हें दूसरा गुरु चुनना होगा। वक्ता उत्तर देते हैं कि जिन्होंने यज्ञोपवीत दिया और आपको गायत्री का उपदेश और दीक्षा दी, वे आपके पहले गुरु बन गए।

106

क्या यज्ञोपवीत से व्यक्ति पहले ही शाक्त बन जाता है?

शाक्त दीक्षा मिल चुकी, आगे की दीक्षा केवल तांत्रोक्त साधना के लिए

· 45:40–46:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शाक्त दीक्षा आपको ऐसे ही मिल चुकी है — यज्ञोपवीत मिल गया, यानी आप शाक्त बन चुके हैं। अब अगर आपको कोई विशेष तांत्रोक्त साधना करनी है, तो अलग दीक्षा चाहिए; गायत्री की साधना और उपासना के लिए अब आपको किसी विशेष दीक्षा की ज़रूरत नहीं।

107

क्या बिना माला के, जब याद आए तब किया गया जप किसी काम का है?

नाम जप कभी भी, माला वाले मंत्र चलते-फिरते नहीं

· 46:15–46:52 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि दो-तीन महीने से वे माला से मंत्र जप नहीं कर पाए, पर जब याद आता है तब जप करते हैं। वक्ता पूछते हैं कि कौन-सा मंत्र है: अगर माला वाला मंत्र ऐसे कर रहे हैं, तो वह उचित नहीं। हर चीज़ की मर्यादा है। नाम जप आप कभी भी कर सकते हैं।

108

ऐसी स्थिति को पहले घर के लिए बताए गए क्षेत्रपाल पूजन से दूर कीजिए।

पहले क्षेत्रपाल पूजन, फिर अमावस्या और पूर्णिमा पर सूक्ष्म हवन

· 46:53–47:28

आकाश विश्वकर्मा जी को उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि अगर ऐसी स्थिति बन रही है, तो सबसे पहले घर के लिए बताई गई विधि से क्षेत्रपाल पूजन करके उसे दूर कीजिए; और अमावस्या और पूर्णिमा के दिन सूक्ष्म हवन कीजिए — चैनल पर दी गई विधि से छोटा हवन, जयंती मंगला काली मंत्र से, घी और गुग्गुल से।

109

क्या शिव-पार्वती का संयुक्त मंत्र गुरु मंत्र के रूप में लिया जा सकता है?

शक्ति सहित शिव को गुरु स्वरूप में स्वीकार करना

· 47:29–47:42 · Also a question

पूछा गया कि वीडियो में बताए गए माँ पार्वती और शिव जी के संयुक्त मंत्र से क्या उन्हें गुरु स्वरूप में स्वीकार किया जा सकता है। वक्ता उत्तर देते हैं: बिल्कुल कर सकते हैं। बिल्कुल, शक्ति सहित शिव को, इस मंत्र से भी स्वीकार कर सकते हैं।

एक श्रोता पूछते हैं कि वीडियो में माँ पार्वती और शिव जी का जो संयुक्त मंत्र बताया गया था — क्या हम उस मंत्र से उन्हें गुरु स्वरूप में स्वीकार कर सकते हैं? वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल कर सकते हैं। बिल्कुल — शक्ति सहित शिव; इस मंत्र से भी आप उन्हें स्वीकार कर सकते हैं।

110

गुरु मंत्र के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

गुरु मंत्र कभी ज़ोर से नहीं बोला जाता और हमेशा गुप्त रखा जाता है

· 47:43–48:14 · Also a question

जो भी मंत्र गुरु मंत्र के रूप में लिया जाए — पंचाक्षरी लीजिए, शंभु शिव का मंत्र लीजिए, जिस भी विधि-विधान से बताया गया हो — वह मंत्र कभी मुँह से नहीं बोलना चाहिए; उसे हमेशा गुप्त रखना चाहिए। गुरु मंत्र सदा गुप्त है; उसका जप भी ज़ोर से बोलकर नहीं करना है।

111

क्या पंचाक्षरी या गायत्री को भजन की तरह गाना गलत है?

इन मंत्रों का भजन नहीं बनाया जाता

· 48:15–48:48 · Also a question

लोग जो भजन गाते हैं — "हर हर भोले नमः शिवाय", पूरा गाना — वक्ता कहते हैं कि जो पंचाक्षरी दीक्षा ले रहा है, या जिसका यज्ञोपवीत हुआ है, उसके लिए यह गाना गाना भी गलत है। यह मुँह से नहीं निकलना चाहिए। पंचाक्षरी का भजन नहीं होता; गायत्री का भजन नहीं होता।

112

क्या यह गोपनीयता शंभु शिव मंत्र पर भी लागू होती है?

कोई भी दीक्षा मंत्र, पंचाक्षरी हो या शंभु शिव, कभी बोला नहीं जाता

· 48:49–49:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह भी ध्यान रखिए: अगर आप पंचाक्षरी दीक्षा ले रहे हैं, तो उसे बोलना नहीं है। अगर आप शंभु शिव दीक्षा ले रहे हैं और उस मंत्र की विधि कर रहे हैं, तो वह मंत्र भी कभी मुँह से नहीं बोलना है। उसे हमेशा गुप्त रखना है। यह विषय सबके लिए है — गुरु मंत्र कभी बोला नहीं जाता।

वक्ता कहते हैं कि तो यह भी ध्यान में रखिए: अगर आप पंचाक्षरी दीक्षा ले रहे हैं, तो उसे बोलना नहीं है। ठीक है, अगर आप शंभु शिव दीक्षा ले रहे हैं और उस मंत्र की विधि कर रहे हैं, तो वह मंत्र भी कभी मुँह से नहीं बोलना है। उसे हमेशा गुप्त रखना है। यह विषय सबके लिए है। गुरु मंत्र कभी बोला नहीं जाता।

113

जो साल भर पूजा नहीं कर सकता, वह क्या करे?

धूप-दीप के बिना गीता और शिव गीता का पाठ

· 49:15–49:47 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि मनोज जी, आप श्रीमद्भगवद्गीता और शिव गीता का पाठ कर सकते हैं। अगर साल भर पूजा नहीं कर सकते, तो पाठ आदि कर सकते हैं — पर धूप-दीप मत जलाइए, या जैसा पंडित जी ने विधि-विधान से बताया है, वैसा कीजिए।

114

जिन क्षेत्रों में अमावस्या से गिनती होती है, वहाँ सावन कब शुरू करें?

पूर्णिमांत और अमावस्यांत गणना

· 49:48–50:19 · Also a question

गुजरात के एक श्रोता, जहाँ श्रावण अमावस्या से गिना जाता है, पूछते हैं कि कब से शुरू करें। वक्ता कहते हैं कि हाँ, यह एक मुद्दा है — आप लोग पूर्णिमांत और अमावस्यांत से अलग-अलग गिनते हैं। आप लोग जब से मानते हैं, तब से शुरू कीजिए।

115

क्या तांत्रोक्त रुद्राक्ष का अभिषेक किया जा सकता है?

कपूर मिले जल से छोटा-सा अभिषेक

· 50:20–50:34 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि आनंद जी, आप तांत्रोक्त रुद्राक्ष पर अभिषेक कर सकते हैं। आपको बताए गए विधान में कपूर मिले जल का छोटा लोटा रखकर छोटा अभिषेक कीजिए। और अगर पूरा रुद्राभिषेक भी करना चाहें, तो वह भी कीजिए — उससे कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।

वक्ता उत्तर देते हैं कि आनंद जी, आप तांत्रोक्त रुद्राक्षशिव पूजा के दौरान धारण की जाने वाली एक पवित्र बीज-माला । पर अभिषेक कर सकते हैं। आपको बताए गए विधान में कपूर मिले जल का छोटा-सा लोटा रखकर छोटा-सा अभिषेक कीजिए। और अगर पूरा रुद्राभिषेक भी करना चाहें, तो वह भी कीजिए — उससे उस पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।

116

रुद्राक्ष का अभिषेक करते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?

उसमें जल ठहरा नहीं रहना चाहिए

· 50:35–50:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बस इतना ध्यान रखिए: जब अभिषेक आदि हो जाए और धूप निकले, तो उन्हें थोड़ी देर धूप में भी रखिए। उनमें जल ठहरना नहीं चाहिए; जल के निकलने का रास्ता होना चाहिए। नहीं तो चौबीस घंटे जल में छोड़ेंगे, तो वह फूल जाएगा।

वक्ता कहते हैं कि बस इतना ध्यान रखिए: जब अभिषेक आदि पूरा हो जाए और धूप निकले, तो उन्हें थोड़ी देर धूप में भी रखिए। उसमें जल बस ठहरा न रहे। जल के निकलने का रास्ता होना चाहिए। नहीं तो अगर आप उसे चौबीस घंटे जल में छोड़ेंगे, तो वह फूल जाएगा।

117

अभिषेक के बाद रुद्राक्ष अच्छे से साफ़ किए जाते हैं और कभी जल में ठहरे नहीं छोड़े जाते।

आठ-दस साल से कर रहे हैं, एक भी नहीं टूटा

· 50:48–51:08

वक्ता कहते हैं कि वैसे वह टूटता नहीं — वे यह कम से कम आठ-दस साल से ज़्यादा से कर रहे हैं, और आज तक उनका खंडित नहीं हुआ। पर वे उन्हें जल में नहीं छोड़ते: अभिषेक के बाद अच्छे से साफ़ करते हैं, सुखाते हैं, सूती कपड़े से पोंछते हैं, और तब श्रृंगार करते हैं।

118

पति की मृत्यु या तलाक के बाद किसका गोत्र और कुलदेवता मान्य होता है?

पहला विवाह ही गोत्र, उपनाम, वर्ण और कुलदेवता तय करता है

· 51:09–52:00 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि विवाह हो चुका है। सनातन संस्कृति में एक बार विवाह हो गया, तो पति का गोत्र उसका गोत्र, पति का उपनाम उसका उपनाम, और उसका वर्ण उसका वर्ण है। और दूसरी बात, पति के कुल देवी-देवता ही उसके कुल देवी-देवता रहेंगे — चाहे आप तलाक लें या अलग हो जाएँ।

119

जो अनुष्ठान पूरा न हो सका, उसे फिर से कैसे शुरू करें?

कल से शुरू कीजिए, नहीं तो गुरु पूर्णिमा से

· 52:01–52:09 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि रवि जी, अनुष्ठान नहीं हो सका तो कोई बात नहीं — अब कल से शुरू कीजिए, नहीं तो गुरु पूर्णिमा से।

वक्ता उत्तर देते हैं कि रवि जी, अनुष्ठान नहीं हो सका तो कोई बात नहीं। अब कल से शुरू कीजिए, नहीं तो गुरु पूर्णिमा से।

120

बेल पत्र पर राम नाम लिखने का क्या फल है?

अनंत फल, और बेल पत्र से शिव लोक

· 52:10–52:19 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बेल पत्र पर भगवान राम जी का नाम लिखकर अर्पित करने का अनंत फल है। बेल पत्र से शिव लोक की प्राप्ति होती है।

वक्ता कहते हैं कि बेल पत्र पर भगवान राम जी का नाम लिखकर अर्पित करने का अनंत फल है। बेल पत्र से शिव लोक की प्राप्ति होती है।

121

क्या नवरात्रि में पाँच दिन पूजा छोड़ने में कोई दोष है?

मासिक धर्म में बिल्कुल कोई दोष नहीं

· 52:20–52:45 · Also a question

एक श्रोता कहती हैं कि नवरात्रि में पूजा करते समय उन्हें पाँच दिन पूजा छोड़नी पड़ती है। वक्ता नेहा जी को उत्तर देते हैं कि इसमें बिल्कुल कोई दोष नहीं लगता। नवरात्र हो या कोई और पर्व काल, मासिक धर्म के कारण जो पूजा छोड़नी पड़ती है, उसमें कोई दोष नहीं; यह प्रकृति है — इसमें क्या दोष।

122

क्या पूरे सावन एक ही पार्थिव शिवलिंग की पूजा की जा सकती है?

रोज़ बनाना और रोज़ विसर्जन, जैसा घुश्मेश्वर कथा में है

· 52:46–53:09 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि नहीं भाई, पार्थिव शिवलिंग के नियम के अनुसार विसर्जन हर दिन करना होगा। आप एक ही शिवलिंग का लंबे समय तक, पूरे सावन पूजन नहीं कर सकते। रोज़ बनाइए, रोज़ विसर्जन कीजिए। यही वर्णन घुश्मेश्वर कथा में मिलता है।

123

घर का रुद्राभिषेक कितने समय तक चलना चाहिए?

पूरा महीना, सभी साठ दिन

· 53:10–53:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि घर पर शिवलिंग का रुद्राभिषेक पूरे के पूरे महीने कीजिए। सभी साठ दिन कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि घर पर शिवलिंग का रुद्राभिषेक पूरे के पूरे महीने कीजिए। सभी साठ दिन कीजिए।

124

क्या पूजा से पहले रोज़ शिवलिंग उठाकर धोया जा सकता है?

हाँ, पर कहाँ धोते हैं, यह मायने रखता है

· 53:21–53:55 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि वे रोज़ पूजा से पहले शिवलिंग उठाकर जल से धोते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि हाँ, बिल्कुल धोइए — पर यह भी ध्यान रखिए कि कहाँ धोते हैं। ऐसा न हो कि धोने के लिए बेसिन पर ले जाएँ, या वॉशरूम में धोएँ। अपने पूजन स्थान पर ही कीजिए।

125

शिवलिंग को स्नान कराना धोना नहीं, अभिषेक क्यों कहलाता है?

यह धोना नहीं, अभिषेक है

· 53:56–54:26 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि लोग ऐसी गलतियाँ करते हैं, और नहीं करनी चाहिए — और यह "धोना" नहीं, उनका अभिषेक होगा। आप शिवलिंग को वस्तु मान रहे हैं, इसीलिए कहते हैं कि धोते हैं। अगर आपका भाव ऐसा है, तो कहिए कि हम शिव जी का अभिषेक करते हैं। और एक बार करें या चार बार, कोई दिक्कत नहीं। आप बिल्कुल उन्हें उठाकर कर सकते हैं।

126

जिनकी कुलदेवी बंदी माता हैं, वे क्या करें?

भद्रकाली ही बंदी माता का स्वरूप हैं

· 54:27–54:51 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि प्रीतम कुमार जी, अगर कुलदेवी बंदी माता हैं, तो आपको भद्रकाली का करना होगा। भद्रकाली कवच कीजिए, और भद्रकाली सहस्रनाम आदि का पाठ कीजिए। पर पक्का कर लीजिए कि आपकी कुलदेवी बंदी माता ही हैं, तभी। वही उनका स्वरूप है — भद्रकाली ही बंदी माता का स्वरूप हैं।

वक्ता उत्तर देते हैं कि प्रीतम कुमार जी, अगर कुलदेवी बंदी माता हैं, तो आपको भद्रकाली का करना होगा। भद्रकाली का कवच कीजिए, और भद्रकाली सहस्रनाम आदि का पाठ कीजिए। पर पक्का कर लीजिए कि आपकी कुलदेवी बंदी माता ही हैं, तभी। वही उनका स्वरूप है — भद्रकाली ही बंदी माता का स्वरूप हैं।

127

क्या शिव रक्षा स्तोत्र को कवच की तरह गले में पहना जा सकता है?

बेल की लकड़ी की कलम और अष्टगंध की स्याही से भोजपत्र पर लिखा

· 54:52–55:24 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल पहना जा सकता है। जो शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करते हैं, वे इस सावन में किसी भी दिन — सोमवार, पूर्णिमा, अमावस्या — बेल की लकड़ी की कलम से, अष्टगंध की या गंगाजल में घिसे केसर की स्याही से भोजपत्र पर पूरा कवच लिखें, फिर 108 बार पाठ करें, हवन आदि करें, और तब उसे चाँदी के खोल में रखकर धारण करें।

128

क्या पूरा श्रावण शिव मानस पूजा से निभाया जा सकता है?

जब भौतिक पूजा संभव न हो, तब मानस पूजा

· 55:25–55:48 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि अगर स्थिति ऐसी है कि हम भौतिक पूजा नहीं कर सकते — मान लीजिए किसी कारण से सावन के बीच कहीं जाना पड़ा, या ऐसी कोई बात है — तो आप बिल्कुल मानस पूजा कर सकते हैं, और उससे भी आपको फल मिलेगा।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या पूरे श्रावण मास शिव मानस पूजा से भी पूजा की जा सकती है? अगर स्थिति ऐसी है कि हम भौतिक पूजा नहीं कर सकते — मान लीजिए किसी कारण से सावन के बीच कहीं जाना पड़ा, या ऐसी कोई बात है — तो आप बिल्कुल मानसिक पूजा कर सकते हैं, और उससे भी आपको फल मिलेगा।

129

क्या पूरी विधि की जगह रोज़ सोलह मंत्रों की लघु रुद्री की जा सकती है?

हाँ, जब रोज़ पूरा रुद्री पाठ बहुत समय लेता हो

· 56:12–56:30 · Also a question

एक श्रोता कहते हैं कि उन्होंने रुद्री पाठ विधि से सीखा है, पर रोज़ पूरी विधि से करने में बहुत समय लगता है, और पूछते हैं कि क्या वे रोज़ सोलह मंत्रों की लघु रुद्री से अभिषेक कर सकते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि हाँ, बिल्कुल कर सकते हैं। और श्रावण में रोज़ पूजन के लिए शिव मानस पूजा का भी बिल्कुल उपयोग कर सकते हैं।

एक श्रोता पूछते हैं कि मैंने रुद्री पाठ विधि से सीखा है, पर रोज़ पूरी विधि से करने में बहुत समय लगता है — तो क्या मैं रोज़ लघु रुद्री, सोलह मंत्रों से अभिषेक कर सकता हूँ? वक्ता उत्तर देते हैं कि हाँ, बिल्कुल कर सकते हैं। और शिव मानस पूजा से भी, श्रावण में, आप बिल्कुल रोज़ पूजन कर सकते हैं।

130

यह केवल अनुभव से कहा गया है, इसलिए एक बार कुंडली का विश्लेषण भी करवाइए।

राहु का प्रभाव — पर कुंडली का विश्लेषण भी करवाइए

· 56:31–56:42

वक्ता कहते हैं कि प्रफुल्ल जी, आप जो बता रहे हैं वह राहु के प्रभाव से होता है। पर वे जोड़ते हैं कि यह वे केवल अनुभव के अनुसार कह रहे हैं — यह ज़रूरी नहीं; फिर भी किसी अच्छे ज्योतिषी से एक बार अपनी कुंडली का विश्लेषण भी करवाइए।

वक्ता कहते हैं कि प्रफुल्ल जी, आप जो बता रहे हैं — यह राहु के प्रभाव से होता है। हाँ, पर यह हम केवल अनुभव के अनुसार कह रहे हैं; यह ज़रूरी नहीं। फिर भी किसी अच्छे ज्योतिषी से एक बार कुंडली का विश्लेषण भी करवाइए।

131

रोज़ शिव मंदिर जाइए, या घर के शिवलिंग पर, और अभिषेक कीजिए।

पूरे श्रावण रोज़ सुगंधित जल से अभिषेक

· 56:43–57:02

वक्ता कहते हैं कि साथ में श्रावण मास में रोज़ एक छोटा-सा काम कीजिए। जैसा आज के वीडियो की शुरुआत में बताया गया कि शिव जी का अभिषेक कैसे करना है — शिव मंदिर जाइए, या घर में शिवलिंग है, तो कपूर, रोली, जल आदि मिलाकर सुगंधित जल से भगवान शिव का अभिषेक कीजिए।

वक्ता कहते हैं कि साथ में, श्रावण मास में रोज़ एक छोटा-सा काम कीजिए। आज के वीडियो में, शुरुआत में, हमने बताया कि शिव जी का अभिषेक कैसे करना है। शिव मंदिर जाकर, या घर में शिवलिंग है तो, कपूर, रोली, जल आदि मिलाकर सुगंधित जल से भगवान शिव का अभिषेक कीजिए।

132

अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बची रोली का क्या करें?

अनामिका उँगली से शिवलिंग से लिया गया तिलक

· 57:03–57:30 · Also a question

अभिषेक करने के बाद रोली, कपूर आदि शिवलिंग पर चिपके रह जाएँगे। वही रोली — अपनी अनामिका उँगली से शिवलिंग पर से पोंछकर — अपने माथे पर और गले पर तिलक लगाइए। यह काम कीजिए, और साथ में रुद्राष्टक का पाठ कीजिए।

133

सूतक के बाद पूजन-पाठ फिर शुरू होते ही दिल की परेशानी लौट आई।

इसका अर्थ है पितर मज़बूत हैं

· 57:46–58:02

एक श्रोता कहते हैं कि जन्म के सूतक में लगभग कोई दिक्कत नहीं थी, और जैसे ही उन्होंने पूजन-पाठ फिर शुरू किया, दिल की परेशानी फिर वैसे ही शुरू हो गई। वक्ता उत्तर देते हैं कि यानी सूतक काल में कोई परेशानी नहीं थी — इसका अर्थ है आपके पितर मज़बूत हैं। वे ठीक हैं।

एक श्रोता लिखते हैं कि जन्म के सूतक में लगभग कोई दिक्कत नहीं थी; जैसे ही पूजन-पाठ फिर शुरू किया, दिल की परेशानी फिर वैसे ही शुरू हो गई। वक्ता कहते हैं कि यानी सूतक काल में बिल्कुल कोई परेशानी नहीं थी। इसका अर्थ है आपके पितृ मज़बूत हैं। वे ठीक हैं।

134

पहले जब भैरव जी का पूजन हो रहा था, तब सब ठीक चल रहा था।

जो भैरव स्थान मिला था, वहाँ पूजन शुरू कीजिए

· 58:03–58:34

वक्ता याद दिलाते हैं कि जो भैरव जी का पूजन उन्होंने शुरू किया था, वह बीच में हुआ था और सब ठीक चल रहा था। वे शिवम जी से कहते हैं कि जो भैरव जी का स्थान खोजा गया था, जिसके बारे में उन्होंने खुद बताया था, वहाँ पूजन देना शुरू करें, और फिर से भैरव पाठ करें।

वक्ता कहते हैं कि तो भैरव जी का वह पूजन जो आपने शुरू किया था — आपने बीच में किया था, और वह ठीक चल रहा था। भैरव जी का जो स्थान हमने खोजा था, जिसके बारे में आपने हमें बताया था — शिवम जी, उस स्थान पर पूजन देना शुरू कीजिए, और फिर से भैरव पाठ कीजिए।

135

काली सहस्रनाम पाठ की विधि क्या है?

सहस्रनाम कई हैं — और इसके लिए सबसे अच्छा समय

· 58:35–58:56 · Also a question

काली सहस्रनाम पाठ की विधि पूछी गई, तो वक्ता पूछते हैं कि कौन-सा काली सहस्रनाम करना चाहते हैं — सहस्रनाम कई हैं; एक बार उनसे बात कीजिए, वे बताएँगे। सामान्य रूप से, अगर भगवती काली के सहस्रनाम का पाठ करना चाहते हैं, तो भोर के समय या रात के समय करना अधिक फलदायी है।

136

अंबुबाची के लाल कपड़े का क्या करना है?

आधा फाड़कर परिवार की रक्षा के लिए, बाकी धन रखने की जगह

· 58:57–59:34 · Also a question

अंबुबाची का जो लाल कपड़ा भगवती पर लिपटा था, उसका आधा कपड़ा फाड़कर परिवार के हर सदस्य के गले, बाँह या कलाई पर रक्षा कवच के रूप में बाँधिए; और बाकी कपड़ा वहाँ रख सकते हैं जहाँ आप अपना धन रखते हैं, शुद्ध, अच्छी जगह पर।

137

गंडमूल शांति कब करनी चाहिए?

जन्म के सत्ताईस दिन के भीतर — और छूट गई हो तो काशी

· 59:35–1:00:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गंडमूल की शांति जन्म के सत्ताईस दिन के भीतर होनी चाहिए। अगर उस समय नहीं हुई और अब जैसी स्थिति है, तो एक बार उनसे बात कीजिए। काशी में इन सब कामों के लिए एक मंदिर है।

138

पीतल के विग्रह को कैसे साफ़ करें?

दही या नींबू ले सकते हैं, पर ब्रश से मत रगड़िए

· 1:00:07–1:00:24 · Also a question

पूछा गया कि क्या पीतल के विग्रह को नए ब्रश से ठीक से साफ़ किया जा सकता है और क्या दही या नींबू का रस ले सकते हैं। वक्ता कहते हैं कि ले सकते हैं — पर ब्रश से इतना मत रगड़िए, नहीं तो किसी दिन वे आपको रगड़ देंगे। उन्हें सूती कपड़े से साफ़ करना चाहिए, ताकि बहुत देर तक रगड़ना न पड़े।

139

बीच में बहुत-सी बाधाएँ आईं और तीसरे दिन सूतक से साधना टूट गई।

बीच में बाधाएँ, और तीसरे दिन साधना खंडित

· 1:00:25–1:01:01

एक श्रोता बताते हैं कि पिछली बार उन्होंने संकट नाशन गणेश साधना की, बीच में बहुत-सी बाधाएँ आईं, और तीसरे दिन सूतक के कारण साधना खंडित हो गई।

एक श्रोता लिखते हैं कि पिछली बार मैंने संकट नाशन स्तोत्र गणेश साधना की; बीच में बहुत-सी बाधाएँ आईं, और तीसरे दिन सूतक के कारण साधना खंडित हो गई।

140

जब गणपति पूजन में बार-बार बाधा आए, तो क्या उपाय है?

घर का पूजन कम करके कम से कम एक पक्ष मंदिर में कीजिए

· 1:01:02–1:01:21 · Also a question

लाखन सिंह जी, अगर गणपति जी के पूजन में परेशानी आ रही है, तो सबसे पहले घर का पूजन थोड़ा कम करके मंदिर में गणपति जी का पूजन कीजिए — कम से कम एक पक्ष तो ज़रूर। उसके बाद घर पर शुरू कीजिए।

वक्ता उत्तर देते हैं कि लाखन सिंह जी, अगर गणेश जी के पूजन में परेशानी आ रही है — तो सबसे पहली बात यह कि घर पर पूजन थोड़ा कम करके मंदिर में गणपति जी का पूजन कीजिए। कम से कम एक पक्ष तो ज़रूर। उसके बाद घर पर शुरू कीजिए।

141

क्या श्रावण में शिव सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है?

यह किसी भी समय किया जा सकता है

· 1:01:22–1:01:30 · Also a question

वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है — वह तो किसी भी समय किया जा सकता है।

एक श्रोता पूछते हैं कि क्या श्रावण में शिव सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है? वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है। वह तो किसी भी समय किया जा सकता है।

142

अगर मासिक धर्म से नवरात्रि का संकल्प टूट जाए, तो उसे कैसे पूरा करें?

निवृत्ति के दिन बाल धोकर अर्पित कीजिए

· 1:01:41–1:02:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हाँ — अगर कभी इस कारण संकल्प बीच में अधूरा रह जाए, तो जिस दिन निवृत्ति हो और बाल धोए जाएँ, उस दिन भगवती का पूजन करके समर्पण करना चाहिए।

एक श्रोता पूछती हैं कि नवरात्रि में लिया गया नौ दिन का संकल्प अगर मासिक धर्म के कारण पूरा न हो, तो बाद में उसे कैसे पूरा करें? वक्ता उत्तर देते हैं कि हाँ — अगर कभी इस कारण संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। बीच में छूट जाए, तो जिस दिन निवृत्ति हो और बाल धोए जाएँ, उस दिन भगवती का पूजन करके समर्पण करना चाहिए।

143

महाविद्या क्रम का बीच में रुका सप्तशती पाठ कैसे पूरा करें?

उसी मास की पूर्णिमा को पूरा कीजिए

· 1:02:08–1:02:36 · Also a question

मान लीजिए आप महाविद्या क्रम में दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे थे और किसी तरह नवरात्रि के बीच ऐसी बात हो गई — तो जो पूर्णिमा पड़े: चैत्र नवरात्रि की थी तो चैत्र पूर्णिमा; आश्विन की थी तो आश्विन शरद पूर्णिमा।

144

क्या केवल सावन सोमवारों को पौराणिक पाठों से लघु रुद्र पूजा की जा सकती है?

पुराणोक्त रुद्राभिषेक स्तोत्र और पुरुष सूक्त

· 1:02:37–1:02:54 · Also a question

पूछा गया कि क्या पुराणोक्त रुद्राभिषेक स्तोत्र और पुराणोक्त पुरुष सूक्त से लघु रुद्र पूजा की जा सकती है, और क्या केवल सावन सोमवारों को की जा सकती है। वक्ता उत्तर देते हैं: हाँ, की जा सकती है।

145

यात्रा के दौरान पूजन का क्या करें?

नाम जप, और यात्रा में पूजा पर पहले से बना वीडियो

· 1:02:55–1:03:10 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब यात्रा पर जाएँ, तो नाम जप आदि। और एक वीडियो है कि यात्रा पर जाते समय पूजन-पाठ आदि कैसे करना चाहिए — उसे सुनिए, उससे भी आपको बहुत मदद मिलेगी।

वक्ता कहते हैं कि जब हम यात्रा पर जाते हैं, तो नाम जप आदि। और एक वीडियो है, कि जब आप यात्रा पर जाएँ, तो पूजन-पाठ आदि कैसे करना चाहिए — उसे सुनिए। उससे भी आपको बहुत मदद मिलेगी।

146

इन मंत्रों की एक-एक माला का हवन जारी रखना चाहिए।

बहुत सुंदर — इसे जारी रखिए

· 1:03:11–1:03:17

एक श्रोता कहते हैं कि वे महाभैरव मंत्र, सुदर्शन मंत्र और संपूर्ण नृसिंह माला मंत्र की एक-एक माला का हवन करते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि बहुत सुंदर — इसे जारी रखिए।

एक श्रोता लिखते हैं कि मैं महाभैरव मंत्र, सुदर्शन मंत्र और संपूर्ण नृसिंह माला मंत्र की एक-एक माला का हवन करता हूँ। वक्ता उत्तर देते हैं कि तब तो बहुत सुंदर है। इसे जारी रखिए।

147

जिसे पाप लगने का डर है, उसे कहा गया कि जो पहले बताया गया है, वह शुरू करें।

पाप लगने का डर, और परेशानी कहाँ से आती है

· 1:03:18–1:03:33

एक श्रोता लिखते हैं कि वे बागेश्वर धाम से जुड़े हैं, पर हनुमान जी से लेकर सभी देवी-देवताओं के बारे में उन्हें गंदे विचार आते हैं, और उन्हें डर है कि कहीं पाप तो नहीं लग गया। वक्ता कहते हैं कि जो उन्हें पहले बताया गया है, वह करना शुरू करें, और कहते हैं कि जो विचार हमें इतना परेशान करते हैं, खासकर देवताओं के प्रति, उनके पीछे दो-तीन विशेष कारण होते हैं।

148

क्षीण या खराब स्थिति वाले चंद्र से, या अभिचार से मन दूषित होता है।

कमज़ोर चंद्र, या अभिचार और पैशाचिक शक्ति का प्रभाव

· 1:03:34–1:04:07

पहली बात यह कि हमारा मन दूषित होता है अगर कहीं चंद्र क्षीण हो, नीच राशि में हो, नीच भाव में हो, या ग्रहण दोष आदि बन रहा हो, या चलित कुंडली में कुछ हो। और अगर अभिचार आदि के कारण शरीर पर किसी पैशाचिक शक्ति का प्रभाव पड़ने लगा हो, तब भी ऐसी बातें होती हैं।

वक्ता कहते हैं कि पहली बात यह है: हमारा मन दूषित होता है अगर कहीं चंद्र क्षीण हो, नीच राशि में हो, नीच भाव में हो, या ग्रहण दोष आदि बन रहा हो, या चलित कुंडली में कुछ हो। और अगर अभिचार आदि के कारण शरीर पर किसी पैशाचिक शक्ति का प्रभाव पड़ने लगा हो, तब भी इस तरह की बातें होती हैं।

149

क्या देवताओं के बारे में अशुद्ध विचार स्थायी स्थिति है?

स्थायी नहीं — पर कुछ भी न करने से समस्या बन जाती है

· 1:04:08–1:04:17 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि और यह हमेशा के लिए नहीं है, स्थायी नहीं है। पर अगर आप बिल्कुल कुछ नहीं करते, तो यह कठिनाई का कारण बन जाता है।

वक्ता कहते हैं कि और यह हमेशा के लिए नहीं है; यह स्थायी नहीं है। पर अगर आप बिल्कुल कुछ भी नहीं करते, तो यह परेशानी का कारण बन जाता है।

150

गृहस्थों के लिए कौन-सा काली सहस्रनाम सबसे उपयुक्त है?

दक्षिण काली सहस्रनाम

· 1:04:18–1:04:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ साधक के लिए, साधिकाओं के लिए दक्षिण काली सहस्रनाम सबसे उचित है।

वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ साधकों के लिए, साधिकाओं के लिए दक्षिण काली सहस्रनामकिसी देवता के सहस्र नामों का पाठ — यह विभिन्न देवी-देवताओं के लिए रचित एक भक्ति विधा है, कोई एक निश्चित ग्रंथ नहीं। सबसे उचित है।

151

भैरव अनुष्ठान में क्या करना होता है?

बटुक भैरव के अनुष्ठान का प्रश्न, और पहले क्या आता है

· 1:04:32–1:04:41 · Also a question

पूछा गया कि भैरव अनुष्ठान में क्या करना होता है और बटुक भैरव जी के अनुष्ठान की विधि क्या है, तो वक्ता कहते हैं कि पहले, शुरुआत में, वही बातें करनी चाहिए।

एक श्रोता पूछते हैं कि भैरव अनुष्ठान में क्या करना होता है — बटुक भैरव जी के अनुष्ठान की विधि बताइए। वक्ता उत्तर देते हैं कि पहले, शुरुआत में, वही बातें करनी चाहिए।

152

पार्थिव शिवलिंग की विधि ठीक से कैसे सीखें?

किसी ब्राह्मण को बुलाकर एक बार सामने सीखिए

· 1:04:42–1:05:09 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि देखिए समीर जी, पार्थिव शिवलिंग की विधि उचित विधि-विधान से हो तो बेहतर है — उनमें प्राण प्रतिष्ठा कैसे होती है, फिर अभिषेक कैसे होता है, किन मंत्रों से वज्र आदि स्थापित होता है। किसी ब्राह्मण को बुलाकर एक बार सीख लीजिए।

153

पार्थिव शिवलिंग की विधि सामने से क्यों सीखनी चाहिए?

एक बार सीखी, जीवन भर काम आती है

· 1:05:10–1:05:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आप सीख लेंगे, तो यह जीवन भर आपके काम आएगी। ऐसे पूरा विधि-विधान करना असंभव नहीं होगा, पर किसी को बुलाकर एक बार सामने से सीख लें तो बहुत बेहतर है। वे कहेंगे: अगर पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन करना ही है, तो सीखिए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब लाइव वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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