श्री हनुमान बड़वानल सिद्ध विद्या के लाभ
हनुमान के बड़वानल स्तोत्र विद्या पर श्रृंखला का पहला भाग।
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हनुमान बड़वानल विद्या का विस्तार: सिद्धि विधियाँ और प्रयोग
संक्षिप्त और बृहद सिद्धि, अनेक प्रयोग
वक्ता कहते हैं कि श्री हनुमान की बड़वानल विद्या इतनी बृहद है कि उसे कम शब्दों में समेटना संभव नहीं। वे कहते हैं कि इसकी एक संक्षिप्त सिद्धि विधि है और एक बृहद विधि, दोनों का प्रभाव अलग-अलग है, और सिद्धि विधि तथा प्रयोग विधि उसके लाभों से अलग विषय हैं। वे इसके प्रयोग गिनाते हैं: अभिचार के विरुद्ध, पुराने पिशाच दोष में, ऋण मुक्ति हेतु, रोग निवारण हेतु, गृह बंधन और कवच सुरक्षा हेतु, हर एक का अपना विधान है।
वक्ता कहते हैं कि श्री हनुमान की badvanal-stotra विद्या अत्यंत बृहद है और उसे कम से कम शब्दों में समेटना संभव नहीं, इसलिए वे इसे भागों में ले रहे हैं। वे कहते हैं कि पहला भाग केवल यह बताता है कि बड़वानल से क्या-क्या लाभ मिलते हैं। वे कहते हैं कि इस विद्या की सिद्धि की एक संक्षिप्त विधि है और एक बृहद विधि, और कितना प्रभाव मिलेगा यह इस पर निर्भर है कि कौन सी की जाती है। वे कहते हैं कि यह लाभों से अलग विषय है। वे कहते हैं कि प्रयोग पक्ष फिर अलग और बड़ा है: अगर समस्या अभिचारिक है तो क्या करना है; पुराना पिशाच दोष है तो कैसे प्रयोग करना है; ऋण मुक्ति हेतु कैसे प्रयोग करना है; रोग निवारण हेतु कैसे प्रयोग करना है; और गृह बंधन, कवच सुरक्षा जैसे अनेक विधान। वे कहते हैं कि इनमें से हर एक का अपना विधान है।
जगदंबा के चार वीरों में से किसी एक की शरण लें: हनुमान, भैरव, नरसिंह या गणपति
बृहद विधान से एक वीर की विद्या
वक्ता कहते हैं कि जो श्री माँ जगदम्बा की सेवा पूजा करते हैं उन्हें उनके चार वीरों में से, जो चार महाशक्तियाँ वीर और गण रूप में स्थित हैं, किसी एक की शरण अवश्य लेनी चाहिए: हनुमान, भैरव, भगवान नरसिंह या गणेश। वे कहते हैं कि उस एक वीर की विद्या को बृहद विधि विधान से सिद्ध करने का प्रयास करना चाहिए, और हनुमान जी की बड़वानल विद्या ऐसा ही एक मार्ग है। वे कहते हैं कि जो हनुमान जी की शरणागति लेकर ये विधान करता है, उसके जीवन के जितने भी कष्ट और दोष हैं, सबकी निवृत्ति इस एक अनुष्ठान से हो सकती है, और इसे जीवन भर साथ रखने से अनेक लाभ हैं।
वक्ता कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति हनुमान जी की शरणागति लेकर इन विधानों को करना चाहता है, तो जीवन में जितने भी प्रकार के कष्ट हैं, दोष हैं, उन सबकी निवृत्ति इस एकमात्र अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। से हो सकती है। वे जोड़ते हैं कि अगर इस अनुष्ठान को जीवन में सदैव के लिए लेकर चलते हैं तो अनेक प्रकार के लाभ हैं। फिर वे व्यापक नियम बताते हैं। वे कहते हैं कि जो श्री माँ जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम। की सेवा पूजा करते हैं, उन्हें उनके चार वीरों में से किसी एक का आश्रय लेना ही चाहिए। इन चारों को वे महाशक्तियाँ कहते हैं जो वीर के रूप में, गण के रूप में स्थित होती हैं। चाहे हनुमान जी का लें, या भैरव जी का, या भगवान श्री नरसिंह जी का, या गणेश जी का। वे कहते हैं कि उस एक चुने हुए वीर की विद्याओं को बृहद विधि विधान से सिद्ध करने का प्रयास करना चाहिए। वे कहते हैं कि हनुमान जी की बड़वानल विद्या इसी क्रम में है, और चाहें तो हनुमान जी की इस विद्या की सिद्धि की जा सकती है।
शारीरिक दुर्बलता और सदा बने रहने वाले अकारण भय के लिए बड़वानल
घर, कार्यस्थल और समाज में भय
वक्ता कहते हैं कि पहला लाभ उस व्यक्ति के लिए है जिसके शरीर में बल और क्षमता की कमी है और जिसे सदैव भय लगा रहता है: कोई मार देगा यह भय, घर में, कार्यस्थल पर, मित्रों के साथ और समाज में भय, एक अनजाना भय जिससे वह उबर नहीं पाता, जिसे फोबिया कहा जाता है। वे कहते हैं कि इस भय की निवृत्ति के लिए अगर हनुमान जी के बड़वानल का पूरा अनुष्ठान कर लिया जाए तो अत्यंत लाभ होता है और भय कोसों दूर हो जाता है।
वक्ता कहते हैं कि पहला मामला उस व्यक्ति का है जिसके शरीर में बल की कमी रहती है, शारीरिक बल और शारीरिक क्षमता काफी कम है, और जिसे सदैव भय लगा रहता है। ऐसे व्यक्ति को लगता है कि कोई आकर मार जाएगा, कोई पीट देगा। वह अकारण भयभीत रहता है और मन में भय बना रहता है। वे इस भय को हर जगह का बताते हैं: घर में, कार्यस्थल पर, मित्रों के साथ, समाज में। एक अनजाना सा भय मन में सदैव बना रहता है और व्यक्ति उससे उबर नहीं पाता। वे कहते हैं कि इसी को फोबिया कहा जाता है, और उनके पास ऐसे कॉल आते हैं जिनमें लोग कहते हैं कि पता नहीं क्यों पर हमेशा भय सा बना रहता है। वे कहते हैं कि इस भय से निवृत्ति के लिए अगर हनुमान जी के बड़वानल का पूरा अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। कर लिया जाए तो अत्यंत लाभ प्राप्त होता है और भय कोसों दूर चला जाता है।
कुंडली दोष से आए रोग और सभी ग्रह दोषों के लिए बड़वानल
नौ ग्रहों के दोषों हेतु एक स्तोत्र
वक्ता कहते हैं कि अगर जीवन में रोग शोक आ गया हो और किसी ज्योतिषी ने बताया हो कि कुंडली के अमुक दोष के कारण यह शारीरिक विकृति आ रही है, तो उसके निराकरण हेतु बड़वानल का अनुष्ठान किया जा सकता है। वे कहते हैं कि कुंडली के किसी भी दोष के निराकरण हेतु, चाहे दोष शारीरिक हो या किसी और प्रकार का, और हर प्रकार के ग्रह दोष के निवारण हेतु यह प्रयोग होता है। वे कहते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हनुमान जी महाशक्ति हैं और इस स्तोत्र के माध्यम से नवग्रह के दोष दूर किए जा सकते हैं।
वक्ता कहते हैं कि दूसरा लाभ उस स्थिति के लिए है जब किसी के जीवन में रोग शोक आ गया हो, उसने किसी ज्योतिषी से परामर्श लिया हो, और ज्योतिषी ने बताया हो कि कुंडली में फलाने दोष के कारण यह शारीरिक विकृति और यह रोग उपस्थित हुआ है। वे कहते हैं कि उसके निराकरण हेतु, यानी कुंडली के किसी भी दोष के निराकरण हेतु, बड़वानल का अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। किया जा सकता है। चाहे शारीरिक दोष हो या किसी अन्य प्रकार का दोष, वे कहते हैं कि हर प्रकार के ग्रह दोषजन्मकुंडली में गंभीर ग्रह-पीड़ा — अपने इष्ट देवता की शरण तथा गहन साधना (जैसे निरंतर पंचाक्षरी जप, मंदिर दर्शन, आर्द्रा जैसे शुभ नक्षत्रों में दीपदान) द्वारा इसका निवारण किया जाता है। के निवारण हेतु यह प्रयोग किया जाता है। वे कारण बताते हैं: हनुमान जी महाशक्तिमहाशक्ति — वक्ता इसे सामान्य शक्ति साधना से पृथक् बताते हैं। हैं, और इस स्तोत्र के माध्यम से, इस बड़वानल के माध्यम से नवग्रह के दोषों को दूर किया जा सकता है।
श्राप निवृत्ति के लिए बड़वानल, उस श्राप सहित जो मंत्र सिद्धि रोकता है
इस या पूर्व जन्म में किया अहित
वक्ता कहते हैं कि अगर जाने अनजाने, इस जन्म में या पूर्व जन्म में, किसी का अहित किया और उसके कारण शाप मिल गया, और उस श्राप के कारण शरीर और जीवन में रोग, कष्ट, दुख, विपत्ति, बाधा आ गई है, तो उस श्राप की निवृत्ति हेतु बड़वानल का प्रयोग किया जाता है। वे जोड़ते हैं कि बहुत बार लंबे समय के जाप अनुष्ठान के बाद भी मंत्र की सिद्धि नहीं होती, और कहा जाता है कि यह भी श्राप दोष के कारण होता है; उसकी निवृत्ति हेतु भी बड़वानल का प्रयोग किया जा सकता है।
वक्ता कहते हैं कि किसी ने जाने अनजाने, चाहे इस जन्म में या पूर्व के किसी जन्म में, किसी का अहित किया हो और उसके कारण शाप प्राप्त हो गया हो। उस श्राप के कारण शरीर में, जीवन में रोग, कष्ट, दुख, विपत्ति, बाधा आ गई है। वे कहते हैं कि इसके निराकरण हेतु, यानी श्राप की निवृत्ति हेतु, बड़वानल का प्रयोग किया जाता है। फिर वे एक जुड़ा हुआ मामला बताते हैं। वे कहते हैं कि बहुत बार मंत्र की सिद्धि नहीं हो रही होती: व्यक्ति लंबे समय से किसी मंत्र का जाप अनुष्ठान कर रहा है पर सिद्धि नहीं हो रही। वे कहते हैं कि कहा जाता है कि श्राप दोष के कारण भी सिद्धि नहीं होती। वे कहते हैं कि उसकी निवृत्ति हेतु भी बड़वानल का प्रयोग किया जा सकता है।
झूठे मुकदमे या राजकीय मुकदमे में विजय के लिए बड़वानल
दोषी को भी दंड मिलता है
वक्ता कहते हैं कि अगर किसी ने व्यक्ति को झूठे मुकदमे में फंसा दिया हो, चाहे राजद्रोह जैसा या राजकीय मुकदमा हो, जिसे पहले राज दरबार में प्रस्तुत होना कहते थे और आज न्यायालय में प्रस्तुत होना, तो बड़वानल की साधना से वहाँ विजय मिलती है। वे कहते हैं कि व्यक्ति न सिर्फ झूठे मुकदमे से निकल जाएगा, बल्कि जो वास्तव में अपराधी है, दोषी है, उसे भी विधिवत उचित दंड मिलेगा। वे कहते हैं कि श्री हनुमान जी अवश्य रक्षा करेंगे।
वक्ता कहते हैं कि मामला यह है कि किसी व्यक्ति ने आपको झूठे मुकदमे में फंसा दिया है। इसमें वे राजद्रोह जैसा मुकदमा, राजकीय मुकदमा भी गिनते हैं, जिसे लोग राज दरबार में जाकर प्रस्तुत होना कहते थे और जिसका अर्थ आज न्यायालय में जाकर प्रस्तुत होना है। वे कहते हैं कि वहाँ आपको विजय प्राप्त होगी। आप केवल झूठे मुकदमे से निकलेंगे ही नहीं; जो व्यक्ति अपराधी है, जो दोषी है, उसे भी विधिवत उचित प्रकार का दंड प्राप्त होगा। वे कहते हैं कि इस स्तोत्र के माध्यम से बड़वानल की साधना करने पर यही प्राप्त होता है: आप विजय पाते हैं, झूठे मुकदमे से निकल जाते हैं, और श्री हनुमान जी अवश्य आपकी रक्षा करेंगे।
असह्य ऋण से निकलने का मार्ग पाने के लिए बड़वानल
धन नहीं, मार्ग खुलता है; प्रयास न छोड़ें
वक्ता कहते हैं कि जब ऋण जरूरत से बहुत अधिक हो गया हो, व्यक्ति निकल न पा रहा हो और मार्ग न सूझ रहा हो, तो उसे श्री हनुमान जी की शरणागति लेते हुए बड़वानल के माध्यम से अनुष्ठान करते जाना चाहिए, हनुमान जी अवश्य मार्ग निकाल देंगे। वे चेताते हैं कि पुरुषार्थ, प्रयास छोड़ना नहीं: जो मार्ग दिखना शुरू हो उसमें लग जाना। वे कहते हैं कि सामने धन प्रकट नहीं होगा, पर ऐसा मार्ग आ जाएगा जिससे ऋण से मुक्त हो जाएँ।
वक्ता उस स्थिति का वर्णन करते हैं जब बहुत अधिक ऋण, जरूरत से ज्यादा कर्ज हो गया हो, व्यक्ति निकल ही नहीं पा रहा और मार्ग ही नहीं सूझ रहा। वे कहते हैं कि तब श्री हनुमान जी की शरणागति लेते हुए इस बड़वानल के माध्यम से अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। करते जाइए, और देखिए हनुमान जी अवश्य मार्ग निकाल देंगे। वे एक शर्त रखते हैं: पुरुषार्थ करना मत छोड़िए, प्रयास करना मत छोड़िए। जो काम कर रहे हैं, जो मार्ग दिखना शुरू हो, उसमें लग जाइए। वे कहते हैं कि सामने धन तो प्रकट नहीं हो सकता, लेकिन सामने ऐसा मार्ग आ जाएगा जिससे आप अपने ऋण से मुक्त हो जाएँ।
भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी, ब्रह्मराक्षस, बैताल और जल के उपदेवताओं के दोष के लिए बड़वानल
रास्ते या घर में लगे दोष
वक्ता कहते हैं कि अगर रास्ते घाट में चलते हुए, या घर में पहले से, या किसी भी कारणवश भूत, प्रेत, dakini, शाकिनी, ब्रह्मराक्षस या बैताल का दोष, या इस प्रकार के जल के देवताओं और उपदेवता का दोष शरीर पर उपस्थित है, तो उसकी निवृत्ति हेतु बड़वानल का अनुष्ठान किया जा सकता है।
वक्ता शरीर पर लगने वाले एक वर्ग के दोष गिनाते हैं। ये रास्ते घाट में चलते हुए लग सकते हैं, घर में पहले से हो सकते हैं, या किसी भी कारणवश आ सकते हैं। वे भूत, प्रेत, dakini, शाकिनी, ब्रह्मराक्षस और बैताल का नाम लेते हैं, और इस प्रकार के जल के देवताओं और उपदेवता का दोष भी जोड़ते हैं। वे कहते हैं कि अगर ऐसा कोई दोष शरीर पर उपस्थित है तो उसकी निवृत्ति हेतु बड़वानल का अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। किया जा सकता है।
विशेष स्थिति: खानदानी ब्रह्म पिशाच दोष एक वंशज के बड़वानल से हटना
एक सदस्य पूरे कुल की रक्षा करता है
वक्ता कहते हैं कि पुराने से पुराना ब्रह्म पिशाच दोष भी, जिसे खानदानी ब्रह्म कहा जाता है और जो कुल में लगा पड़ा है, पहली पुश्त गई, दूसरी आई, तीसरी आई, उसका भी उपाय है। वे कहते हैं कि उस कुल में अगर एक भी ऐसे व्यक्ति का जन्म हो जाए जो हनुमान जी की शरणागति लेकर इस स्तोत्र के माध्यम से उनकी उपासना करे, तो वह हनुमान जी की कृपा से अपने पूरे कुल की रक्षा करने में समर्थ हो जाता है।
वक्ता पुराने से पुराने ब्रह्म पिशाच दोष का वर्णन करते हैं, जिसे लोग खानदानी ब्रह्म कहते हैं: कहा जाता है कि वह कुल में लगा पड़ा है, पहली पुश्त गई, दूसरी आ गई, तीसरी आ गई, और वह अब भी है। वे कहते हैं कि ऐसे कुल में भी अगर किसी ऐसे व्यक्ति का जन्म हो जाए जो हनुमान जी की शरणागति ले ले और इस स्तोत्र के माध्यम से उनकी उपासना करे, तो वह हनुमान जी की कृपा से अपने कुल की रक्षा करने में समर्थ हो जाता है।
शत्रुओं या किराये के तांत्रिकों के अभिचार को बाँधने और जड़ से मिटाने के लिए बड़वानल
उनकी विद्या और शक्ति का जड़ से बंधन
वक्ता कहते हैं कि अगर किसी के ऐसे शत्रु हों जो बहुत निकृष्ट प्रवृत्ति के हों, बार-बार क्षुद्र तंत्र का प्रयोग करते हों, तांत्रिकों के माध्यम से उस पर प्रयोग करवाते हों या स्वयं करते हों, ऐसे दुष्ट और कपटी व्यक्ति जिनके द्वारा लगातार अभिचार किया जा रहा हो, तो वह हनुमान जी के बड़वानल का आश्रय ले सकता है। वे कहते हैं कि यह उनकी विद्याओं के बंधन के लिए, उनकी शक्तियों के बंधन के लिए, और पूरी विद्या और अभिचार को जड़ से नष्ट करने के लिए प्रयोग होता है।
वक्ता एकदम निकृष्ट प्रवृत्ति के शत्रुओं का वर्णन करते हैं: ऐसे लोग जो बार-बार क्षुद्र तंत्र का प्रयोग करते हैं, तांत्रिकों के माध्यम से आप पर प्रयोग करवाते हैं, या स्वयं करते हैं। वे उन्हें दुष्ट और कपटी व्यक्ति कहते हैं, और कहते हैं कि स्थिति यह है कि उनके द्वारा लगातार आप पर अभिचार किया जा रहा है। वे कहते हैं कि तब उनकी विद्याओं का बंधन करने के लिए, उनकी शक्तियों का बंधन करने के लिए, और इस पूरी विद्या को, इस अभिचार को जड़ से नष्ट करने के लिए हनुमान जी के बड़वानल का आश्रय लिया जा सकता है।
बल, राजनीति, पुलिस या गुंडों के दम पर जमीन-संपत्ति हड़पने वाले शत्रुओं के विरुद्ध बड़वानल
जब सांसारिक सहायता पहुँच में न हो
वक्ता कहते हैं कि अगर शत्रु अपनी लाठी के दम पर, बल के दम पर, राजनीतिक पहुँच, पुलिस प्रशासन में पहुँच या गुंडों के दम पर किसी को परेशान करना चाहते हों, उसकी जमीन हड़पना या घर, मकान, दुकान पर कब्जा करना चाहते हों, और उसके पास ऐसे लोगों की सहायता लेने का कोई सामर्थ्य न हो, तो उसे इस अनुष्ठान के माध्यम से हनुमान जी की सहायता लेनी चाहिए। वे कहते हैं कि अगर हनुमान जी कृपा कर दें और अनुष्ठान अच्छे से हो जाए, तो ऐसा करने वाले के बुरे दिन अवश्य आरंभ हो जाएंगे।
वक्ता दूसरे प्रकार के शत्रु का वर्णन करते हैं: ऐसे लोग जो अपनी लाठी के दम पर, अपने बल के दम पर, राजनीतिक पहुँच के दम पर, पुलिस प्रशासन में पहुँच के बल पर, या गुंडों के बल पर आपको परेशान करना चाहते हैं। वे आपकी जमीन हड़पना चाहते हैं, कहीं न कहीं अतिक्रमण करने की क्षमता उनके पास है, आपके घर, मकान, दुकान इत्यादि पर कब्जा करना चाहते हैं। वे कहते हैं कि ऐसे प्रयास करने वाले दुष्ट लोगों के विरुद्ध, जब आपके पास ऐसा कोई सामर्थ्य नहीं कि आप ऐसे लोगों की सहायता ले सकें, तब हनुमान जी की सहायता लीजिए। इस अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। के माध्यम से उनकी सहायता लेने का प्रयास कीजिए। वे कहते हैं कि अगर हनुमान जी कृपा कर दें और आप यह अनुष्ठान अच्छे प्रकार से कर लें, तो अवश्य ही उस व्यक्ति के बुरे दिन आरंभ हो जाएंगे, अगर कोई व्यक्ति सचमुच ऐसा कर रहा है तो।
शरीर पर खेल रहे प्रेत या पिशाच के लिए बड़वानल: घर के बाहर, जानकार के मार्गदर्शन में
पहले अनुष्ठान, फिर प्रयोग
वक्ता कहते हैं कि अगर किसी के शरीर पर प्रेत या पिशाच खेल रहा हो, कितना भी बड़ा प्रेत या पिशाच हो, और यह अनुष्ठान घर के बाहर करके तब उसका प्रयोग किया जाए, तो उसकी निवृत्ति सौ प्रतिशत संभव है और उसे अवश्य छुटकारा मिल जाएगा। वे एक सावधानी जोड़ते हैं: प्रयोग विधि किसी जानकार के माध्यम से, या सब कुछ पूरी तरह जान-समझ कर ही करनी चाहिए।
वक्ता उस स्थिति का वर्णन करते हैं जब किसी के शरीर पर प्रेत या पिशाच खेल रहा हो। वे कहते हैं कि प्रेत या पिशाच कितना भी बड़ा हो, फर्क नहीं पड़ता। वे कहते हैं कि अगर आप यह अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। घर के बाहर करके तब इसका प्रयोग करते हैं, तो उसकी निवृत्ति सौ प्रतिशत संभव रहेगी और उसे अवश्य छुटकारा मिल जाएगा। वे शर्त जोड़ते हैं कि प्रयोग विधि किसी जानकार के माध्यम से, अथवा सब कुछ जान-समझ कर ही करनी चाहिए।
सिफली तंत्र, सैयद, जिन्न और पीर दोष के विरुद्ध बड़वानल
जब अन्य उपाय से तंत्र का काट न हो
वक्ता कहते हैं कि जहाँ इस्लामिक तंत्र, मुसलमानी तंत्र का प्रयोग हुआ हो, चाहे सिफ्ली तंत्र हो, किसी पर सैयद हो, जिन्न जिन्नात हो, उस प्रकार का दोष हो, या पीर दोष हो, और स्थिति ऐसी हो गई हो कि व्यक्ति एकदम परेशान हो गया हो, या घर में ऐसा इस्लामिक दोष हो गया हो और तंत्र का काट ही न हो पा रहा हो, तो बड़वानल का अनुष्ठान करके फिर उसका प्रयोग करना चाहिए। वे कहते हैं कि इस स्तोत्र में इतनी क्षमता है कि बड़े से बड़े जिन्न जिन्नात का काम हो जाता है और सारे कर्म हो जाते हैं, बशर्ते विधियुक्त होकर किया जाए।
वक्ता उस स्थिति पर आते हैं जहाँ इस्लामिक तंत्र, जिसे वे मुसलमानी तंत्र कहते हैं, का प्रयोग किया गया हो। वे सिफ्ली तंत्र, किसी पर बैठा सैयद, जिन्न जिन्नात, उस प्रकार का दोष, और पीर दोष का नाम लेते हैं। वे कहते हैं कि स्थिति ऐसी बन सकती है कि व्यक्ति एकदम परेशान हो गया हो। वे उस स्थिति को भी गिनते हैं जब घर में ऐसा इस्लामिक दोष हो गया हो और तंत्र का काट ही न हो पा रहा हो। वे कहते हैं कि तब इस बड़वानल स्तोत्र का अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। करके उसके बाद उसका प्रयोग करना चाहिए। वे कहते हैं कि बड़े से बड़े जिन्न जिन्नात का सब हो जाता है, सारे कर्म हो जाते हैं, क्योंकि इस स्तोत्र में इतनी क्षमता है, अगर विधियुक्त होकर किया जाए तो।
कष्टकारी प्रारब्ध और अपराध के बाद मानसिक बल के लिए बड़वानल
पाप क्षय; पहले प्रायश्चित, फिर अनुष्ठान
वक्ता कहते हैं कि अगर हमारे पहले के किसी कर्म से ऐसा प्रारब्ध रचा गया हो जिससे परेशानी हो रही हो, तो उसकी निवृत्ति हेतु, यानी पाप क्षय हेतु भी यह अनुष्ठान किया जाता है। वे कहते हैं कि अगर किसी से ऐसा अपराध बन गया हो जिसकी मन में ग्लानि है, और मन कमजोर और भयभीत हो गया हो जैसा अपराध के बाद होता है, तो प्रायश्चित्त करने के बाद इस स्तोत्र का अनुष्ठान करना चाहिए; हनुमान जी मानसिक सबलता, बल और अपना सामर्थ्य देते हैं और व्यक्ति फिर सही प्रकार से अपने मार्ग पर चलता है। वे जोड़ते हैं कि अधर्म कार्य दोबारा नहीं करना चाहिए।
वक्ता कहते हैं कि हमारे पहले के किसी कर्म से ऐसा प्रारब्धपूर्व कर्मों द्वारा पहले से गतिमान भाग्य का वह अंश — साधना व सत्कर्म इसकी तीव्रता को घटा सकते हैं, किंतु पूर्णतः मिटा नहीं सकते। रचित हुआ हो सकता है कि अब परेशानी हो रही है। वे कहते हैं कि उसकी निवृत्ति हेतु, यानी पाप क्षय हेतु भी इस स्तोत्र का अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। किया जाता है। फिर वे उस स्थिति को लेते हैं जब किसी से कोई अपराध बन गया हो और उसकी मन में ग्लानि हो। वे कहते हैं कि जब हम किसी प्रकार का अपराध कर देते हैं तो मन कमजोर हो जाता है और भयभीत होने लगते हैं। उसके लिए भी, वे कहते हैं, प्रायश्चित्तकिसी भारी कर्म — जैसे शत्रु की मृत्यु में परिणत होने वाला षट्कर्म — के कर्मभार को संतुलित करने हेतु किया जाने वाला प्रायश्चित्त अनुष्ठान। करने के पश्चात इस स्तोत्र का अनुष्ठान करना चाहिए, जिससे हनुमान जी मानसिक सबलता, बल और अपना सामर्थ्य प्रदान करते हैं और हम फिर सही प्रकार से अपने मार्ग पर चलते हैं। वे इस बात को एक नियम से समाप्त करते हैं: अधर्म कार्य फिर दोबारा नहीं करना चाहिए।
प्रतियोगिता परीक्षा, इंटरव्यू और अन्य असाध्य लगने वाले धर्मयुक्त कार्यों के लिए बड़वानल
कोई भी विषय, बस लक्ष्य धर्मयुक्त हो
वक्ता कहते हैं कि अगर कोई प्रतियोगिता परीक्षा में बैठना चाहता है और सफलता नहीं मिल रही, या कोई ऐसा काम सामने है जो असाध्य लगता है, चाहे प्रतियोगिता परीक्षा हो, इंटरव्यू क्रैक करना हो, या किसी भी विषय का कोई और बहुत जटिल और असाध्य काम हो, तो, बशर्ते वह कार्य धर्मयुक्त हो, उसके लिए भी यह अनुष्ठान किया जा सकता है। वे कहते हैं कि इससे अवश्य लाभ होगा और हनुमान जी अवश्य सहायता करते हैं।
वक्ता कहते हैं कि अगर आप किसी प्रतियोगिता परीक्षा में बैठना चाहते हैं और उसमें सफलता नहीं मिल पा रही, और लग रहा है कि यह असाध्य कार्य है, तो ऐसे असाध्य कार्यों के हेतु भी यह अनुष्ठान किया जा सकता है। इसमें वे प्रतियोगिता परीक्षा, कहीं इंटरव्यू क्रैक करना, या कोई अन्य काम जो काफी जटिल और काफी असाध्य हो, सब गिनते हैं। वे कहते हैं कि वह किसी भी विषय से संबंधित हो सकता है, लेकिन धर्मयुक्त होना चाहिए, और आप चाहते हैं कि यह कार्य हो। तो उसके हेतु भी यह अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। करें। वे कहते हैं कि इससे अवश्य लाभ प्राप्त होगा, और हनुमान जी अवश्य सहायता करते हैं।
बड़वानल सिद्ध होने पर सामर्थ्य: दूसरों के लिए कवच, गृह बंधन और भूमि दोष नाश
जिस भूमि के नीचे हड्डी गड़ी हो
वक्ता कहते हैं कि गिनाए गए लाभों के अलावा, अगर कोई इस विद्या को सिद्ध कर लेता है, तो बड़वानल में ऐसी-ऐसी विद्याएँ हैं कि वह किसी दूसरे व्यक्ति के लिए भी कवच इत्यादि का निर्माण कर सकता है। वे कहते हैं कि हनुमान जी वह सामर्थ्य दे देते हैं कि गृह बंधन, गृह रक्षण, और ऐसे भूमि दोष में उपस्थित होना जहाँ बड़े से बड़ा प्रेत पिशाच हो, जैसे जिस भूमि के नीचे हड्डी गड़ी हो; अगर अनुष्ठान सही से करके हनुमान जी की कृपा प्राप्त कर ली है तो व्यक्ति स्वयं ऐसे भूमि दोष को नष्ट करने में समर्थ हो जाता है।
वक्ता कहते हैं कि अब तक गिनाई गई सब बातें परिणाम हैं, पर इस विद्या को सिद्ध कर लेने पर और भी है। वे कहते हैं कि बड़वानल में ऐसी-ऐसी विद्याएँ हैं कि इसके माध्यम से किसी दूसरे व्यक्ति के लिए भी कवच इत्यादि का निर्माण किया जा सकता है। वे कहते हैं कि हनुमान जी आपके भीतर वह सामर्थ्य प्रदान कर देते हैं: गृह बंधन, गृह रक्षण, और ऐसे भूमि दोषभूमि से जुड़ा गंभीर दोष — जैसे दबी हड्डियों या दुष्ट शक्तियों से दूषित भूमि — जिसे बड़वानल सिद्धि प्राप्त साधक निवारित कर सकता है। में उपस्थित होना जहाँ बड़े से बड़ा प्रेत पिशाच हो, जहाँ नीचे हड्डी गड़ी हुई हो, या कोई वैसी चीज हो। वे कहते हैं कि अगर आपने अनुष्ठान इत्यादि करके सही से हनुमान जी की कृपा प्राप्त कर ली है तो आप स्वयं ही भूमि दोष को नष्ट करने में समर्थ हो जाते हैं।
भोजपत्र पर हनुमान जी के तंत्रोक्त कवच और यंत्र, बड़वानल स्तोत्र से अभिमंत्रित
विशिष्ट समय पर निर्मित, सोने-चांदी में धारण
वक्ता कहते हैं कि हनुमान जी के बहुत सारे तंत्रोक्त कवच और यंत्र होते हैं। वे कहते हैं कि इन्हें विशिष्ट समय में भोजपत्र पर निर्मित करके, इसी बड़वानल के मंत्र और स्तोत्र से विशिष्ट नक्षत्र या पर्व काल में सिद्ध और अभिमंत्रित किया जाता है। वे कहते हैं कि ऐसे कवच को सोने या चांदी के कवच में भरकर पहनें या किसी को पहनाएँ तो अनेक प्रकार के विशेष लाभ मिलते हैं; यह सामर्थ्य भी इस अनुष्ठान को करने वाले को मिल सकता है।
वक्ता कहते हैं कि गृह बंधन के अलावा हनुमान जी के ऐसे बहुत सारे तंत्रोक्त कवच होते हैं, और उनके यंत्र होते हैं। वे कहते हैं कि इन्हें विशिष्ट समय में भोजपत्रभोजपत्र, अनार की टहनी की कलम व लाल चंदन की स्याही से मंत्र या नाम लिखने हेतु प्रयुक्त — जैसे शिवलिंग के अर्घे पर नाम रखकर मधु-अभिषेक करने में। पर निर्मित किया जाता है। वे कहते हैं कि फिर इन्हें इसी बड़वानल के मंत्र से, स्तोत्र से, विशिष्ट नक्षत्रअनुष्ठानों का समय निर्धारित करने हेतु प्रयुक्त 27 चंद्र नक्षत्रों में से एक — हंडी प्राप्ति जैसी कुछ तांत्रिक प्रक्रियाएँ किसी विशेष नक्षत्र की अवधि में ही संपन्न करनी होती हैं। इत्यादि में, पर्व काल इत्यादि में सिद्ध और अभिमंत्रित किया जाता है। वे कहते हैं कि ऐसे कवच को सोने या चांदी के कवच में भरकर पहनें या किसी को पहनाएँ, तो उससे विशेष प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, अनेक-अनेक प्रकार के लाभ। वे कहते हैं कि यह सामर्थ्य भी आपको प्राप्त हो सकता है अगर आप यह अनुष्ठान करते हैं।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।