श्री हनुमान बड़वानल सिद्ध विद्या के लाभ

हनुमान के बड़वानल स्तोत्र विद्या पर श्रृंखला का पहला भाग।

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The notes
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01

हनुमान बड़वानल विद्या का विस्तार: सिद्धि विधियाँ और प्रयोग

संक्षिप्त और बृहद सिद्धि, अनेक प्रयोग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:04–01:09

वक्ता कहते हैं कि श्री हनुमान की बड़वानल विद्या इतनी बृहद है कि उसे कम शब्दों में समेटना संभव नहीं। वे कहते हैं कि इसकी एक संक्षिप्त सिद्धि विधि है और एक बृहद विधि, दोनों का प्रभाव अलग-अलग है, और सिद्धि विधि तथा प्रयोग विधि उसके लाभों से अलग विषय हैं। वे इसके प्रयोग गिनाते हैं: अभिचार के विरुद्ध, पुराने पिशाच दोष में, ऋण मुक्ति हेतु, रोग निवारण हेतु, गृह बंधन और कवच सुरक्षा हेतु, हर एक का अपना विधान है।

02

जगदंबा के चार वीरों में से किसी एक की शरण लें: हनुमान, भैरव, नरसिंह या गणपति

बृहद विधान से एक वीर की विद्या

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:10–01:59

वक्ता कहते हैं कि जो श्री माँ जगदम्बा की सेवा पूजा करते हैं उन्हें उनके चार वीरों में से, जो चार महाशक्तियाँ वीर और गण रूप में स्थित हैं, किसी एक की शरण अवश्य लेनी चाहिए: हनुमान, भैरव, भगवान नरसिंह या गणेश। वे कहते हैं कि उस एक वीर की विद्या को बृहद विधि विधान से सिद्ध करने का प्रयास करना चाहिए, और हनुमान जी की बड़वानल विद्या ऐसा ही एक मार्ग है। वे कहते हैं कि जो हनुमान जी की शरणागति लेकर ये विधान करता है, उसके जीवन के जितने भी कष्ट और दोष हैं, सबकी निवृत्ति इस एक अनुष्ठान से हो सकती है, और इसे जीवन भर साथ रखने से अनेक लाभ हैं।

03

शारीरिक दुर्बलता और सदा बने रहने वाले अकारण भय के लिए बड़वानल

घर, कार्यस्थल और समाज में भय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:02–02:44

वक्ता कहते हैं कि पहला लाभ उस व्यक्ति के लिए है जिसके शरीर में बल और क्षमता की कमी है और जिसे सदैव भय लगा रहता है: कोई मार देगा यह भय, घर में, कार्यस्थल पर, मित्रों के साथ और समाज में भय, एक अनजाना भय जिससे वह उबर नहीं पाता, जिसे फोबिया कहा जाता है। वे कहते हैं कि इस भय की निवृत्ति के लिए अगर हनुमान जी के बड़वानल का पूरा अनुष्ठान कर लिया जाए तो अत्यंत लाभ होता है और भय कोसों दूर हो जाता है।

04

कुंडली दोष से आए रोग और सभी ग्रह दोषों के लिए बड़वानल

नौ ग्रहों के दोषों हेतु एक स्तोत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:45–03:21

वक्ता कहते हैं कि अगर जीवन में रोग शोक आ गया हो और किसी ज्योतिषी ने बताया हो कि कुंडली के अमुक दोष के कारण यह शारीरिक विकृति आ रही है, तो उसके निराकरण हेतु बड़वानल का अनुष्ठान किया जा सकता है। वे कहते हैं कि कुंडली के किसी भी दोष के निराकरण हेतु, चाहे दोष शारीरिक हो या किसी और प्रकार का, और हर प्रकार के ग्रह दोष के निवारण हेतु यह प्रयोग होता है। वे कहते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हनुमान जी महाशक्ति हैं और इस स्तोत्र के माध्यम से नवग्रह के दोष दूर किए जा सकते हैं।

05

श्राप निवृत्ति के लिए बड़वानल, उस श्राप सहित जो मंत्र सिद्धि रोकता है

इस या पूर्व जन्म में किया अहित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:22–03:54

वक्ता कहते हैं कि अगर जाने अनजाने, इस जन्म में या पूर्व जन्म में, किसी का अहित किया और उसके कारण शाप मिल गया, और उस श्राप के कारण शरीर और जीवन में रोग, कष्ट, दुख, विपत्ति, बाधा आ गई है, तो उस श्राप की निवृत्ति हेतु बड़वानल का प्रयोग किया जाता है। वे जोड़ते हैं कि बहुत बार लंबे समय के जाप अनुष्ठान के बाद भी मंत्र की सिद्धि नहीं होती, और कहा जाता है कि यह भी श्राप दोष के कारण होता है; उसकी निवृत्ति हेतु भी बड़वानल का प्रयोग किया जा सकता है।

07

असह्य ऋण से निकलने का मार्ग पाने के लिए बड़वानल

धन नहीं, मार्ग खुलता है; प्रयास न छोड़ें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:27–04:56

वक्ता कहते हैं कि जब ऋण जरूरत से बहुत अधिक हो गया हो, व्यक्ति निकल न पा रहा हो और मार्ग न सूझ रहा हो, तो उसे श्री हनुमान जी की शरणागति लेते हुए बड़वानल के माध्यम से अनुष्ठान करते जाना चाहिए, हनुमान जी अवश्य मार्ग निकाल देंगे। वे चेताते हैं कि पुरुषार्थ, प्रयास छोड़ना नहीं: जो मार्ग दिखना शुरू हो उसमें लग जाना। वे कहते हैं कि सामने धन प्रकट नहीं होगा, पर ऐसा मार्ग आ जाएगा जिससे ऋण से मुक्त हो जाएँ।

08

भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी, ब्रह्मराक्षस, बैताल और जल के उपदेवताओं के दोष के लिए बड़वानल

रास्ते या घर में लगे दोष

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:57–05:14

वक्ता कहते हैं कि अगर रास्ते घाट में चलते हुए, या घर में पहले से, या किसी भी कारणवश भूत, प्रेत, dakini, शाकिनी, ब्रह्मराक्षस या बैताल का दोष, या इस प्रकार के जल के देवताओं और उपदेवता का दोष शरीर पर उपस्थित है, तो उसकी निवृत्ति हेतु बड़वानल का अनुष्ठान किया जा सकता है।

09

विशेष स्थिति: खानदानी ब्रह्म पिशाच दोष एक वंशज के बड़वानल से हटना

एक सदस्य पूरे कुल की रक्षा करता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:15–05:32

वक्ता कहते हैं कि पुराने से पुराना ब्रह्म पिशाच दोष भी, जिसे खानदानी ब्रह्म कहा जाता है और जो कुल में लगा पड़ा है, पहली पुश्त गई, दूसरी आई, तीसरी आई, उसका भी उपाय है। वे कहते हैं कि उस कुल में अगर एक भी ऐसे व्यक्ति का जन्म हो जाए जो हनुमान जी की शरणागति लेकर इस स्तोत्र के माध्यम से उनकी उपासना करे, तो वह हनुमान जी की कृपा से अपने पूरे कुल की रक्षा करने में समर्थ हो जाता है।

10

शत्रुओं या किराये के तांत्रिकों के अभिचार को बाँधने और जड़ से मिटाने के लिए बड़वानल

उनकी विद्या और शक्ति का जड़ से बंधन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:33–06:03

वक्ता कहते हैं कि अगर किसी के ऐसे शत्रु हों जो बहुत निकृष्ट प्रवृत्ति के हों, बार-बार क्षुद्र तंत्र का प्रयोग करते हों, तांत्रिकों के माध्यम से उस पर प्रयोग करवाते हों या स्वयं करते हों, ऐसे दुष्ट और कपटी व्यक्ति जिनके द्वारा लगातार अभिचार किया जा रहा हो, तो वह हनुमान जी के बड़वानल का आश्रय ले सकता है। वे कहते हैं कि यह उनकी विद्याओं के बंधन के लिए, उनकी शक्तियों के बंधन के लिए, और पूरी विद्या और अभिचार को जड़ से नष्ट करने के लिए प्रयोग होता है।

11

बल, राजनीति, पुलिस या गुंडों के दम पर जमीन-संपत्ति हड़पने वाले शत्रुओं के विरुद्ध बड़वानल

जब सांसारिक सहायता पहुँच में न हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:04–06:45

वक्ता कहते हैं कि अगर शत्रु अपनी लाठी के दम पर, बल के दम पर, राजनीतिक पहुँच, पुलिस प्रशासन में पहुँच या गुंडों के दम पर किसी को परेशान करना चाहते हों, उसकी जमीन हड़पना या घर, मकान, दुकान पर कब्जा करना चाहते हों, और उसके पास ऐसे लोगों की सहायता लेने का कोई सामर्थ्य न हो, तो उसे इस अनुष्ठान के माध्यम से हनुमान जी की सहायता लेनी चाहिए। वे कहते हैं कि अगर हनुमान जी कृपा कर दें और अनुष्ठान अच्छे से हो जाए, तो ऐसा करने वाले के बुरे दिन अवश्य आरंभ हो जाएंगे।

12

शरीर पर खेल रहे प्रेत या पिशाच के लिए बड़वानल: घर के बाहर, जानकार के मार्गदर्शन में

पहले अनुष्ठान, फिर प्रयोग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:46–07:03

वक्ता कहते हैं कि अगर किसी के शरीर पर प्रेत या पिशाच खेल रहा हो, कितना भी बड़ा प्रेत या पिशाच हो, और यह अनुष्ठान घर के बाहर करके तब उसका प्रयोग किया जाए, तो उसकी निवृत्ति सौ प्रतिशत संभव है और उसे अवश्य छुटकारा मिल जाएगा। वे एक सावधानी जोड़ते हैं: प्रयोग विधि किसी जानकार के माध्यम से, या सब कुछ पूरी तरह जान-समझ कर ही करनी चाहिए।

13

सिफली तंत्र, सैयद, जिन्न और पीर दोष के विरुद्ध बड़वानल

जब अन्य उपाय से तंत्र का काट न हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:04–07:33

वक्ता कहते हैं कि जहाँ इस्लामिक तंत्र, मुसलमानी तंत्र का प्रयोग हुआ हो, चाहे सिफ्ली तंत्र हो, किसी पर सैयद हो, जिन्न जिन्नात हो, उस प्रकार का दोष हो, या पीर दोष हो, और स्थिति ऐसी हो गई हो कि व्यक्ति एकदम परेशान हो गया हो, या घर में ऐसा इस्लामिक दोष हो गया हो और तंत्र का काट ही न हो पा रहा हो, तो बड़वानल का अनुष्ठान करके फिर उसका प्रयोग करना चाहिए। वे कहते हैं कि इस स्तोत्र में इतनी क्षमता है कि बड़े से बड़े जिन्न जिन्नात का काम हो जाता है और सारे कर्म हो जाते हैं, बशर्ते विधियुक्त होकर किया जाए।

14

कष्टकारी प्रारब्ध और अपराध के बाद मानसिक बल के लिए बड़वानल

पाप क्षय; पहले प्रायश्चित, फिर अनुष्ठान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:34–08:03

वक्ता कहते हैं कि अगर हमारे पहले के किसी कर्म से ऐसा प्रारब्ध रचा गया हो जिससे परेशानी हो रही हो, तो उसकी निवृत्ति हेतु, यानी पाप क्षय हेतु भी यह अनुष्ठान किया जाता है। वे कहते हैं कि अगर किसी से ऐसा अपराध बन गया हो जिसकी मन में ग्लानि है, और मन कमजोर और भयभीत हो गया हो जैसा अपराध के बाद होता है, तो प्रायश्चित्त करने के बाद इस स्तोत्र का अनुष्ठान करना चाहिए; हनुमान जी मानसिक सबलता, बल और अपना सामर्थ्य देते हैं और व्यक्ति फिर सही प्रकार से अपने मार्ग पर चलता है। वे जोड़ते हैं कि अधर्म कार्य दोबारा नहीं करना चाहिए।

15

प्रतियोगिता परीक्षा, इंटरव्यू और अन्य असाध्य लगने वाले धर्मयुक्त कार्यों के लिए बड़वानल

कोई भी विषय, बस लक्ष्य धर्मयुक्त हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:04–08:33

वक्ता कहते हैं कि अगर कोई प्रतियोगिता परीक्षा में बैठना चाहता है और सफलता नहीं मिल रही, या कोई ऐसा काम सामने है जो असाध्य लगता है, चाहे प्रतियोगिता परीक्षा हो, इंटरव्यू क्रैक करना हो, या किसी भी विषय का कोई और बहुत जटिल और असाध्य काम हो, तो, बशर्ते वह कार्य धर्मयुक्त हो, उसके लिए भी यह अनुष्ठान किया जा सकता है। वे कहते हैं कि इससे अवश्य लाभ होगा और हनुमान जी अवश्य सहायता करते हैं।

16

बड़वानल सिद्ध होने पर सामर्थ्य: दूसरों के लिए कवच, गृह बंधन और भूमि दोष नाश

जिस भूमि के नीचे हड्डी गड़ी हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:34–09:04

वक्ता कहते हैं कि गिनाए गए लाभों के अलावा, अगर कोई इस विद्या को सिद्ध कर लेता है, तो बड़वानल में ऐसी-ऐसी विद्याएँ हैं कि वह किसी दूसरे व्यक्ति के लिए भी कवच इत्यादि का निर्माण कर सकता है। वे कहते हैं कि हनुमान जी वह सामर्थ्य दे देते हैं कि गृह बंधन, गृह रक्षण, और ऐसे भूमि दोष में उपस्थित होना जहाँ बड़े से बड़ा प्रेत पिशाच हो, जैसे जिस भूमि के नीचे हड्डी गड़ी हो; अगर अनुष्ठान सही से करके हनुमान जी की कृपा प्राप्त कर ली है तो व्यक्ति स्वयं ऐसे भूमि दोष को नष्ट करने में समर्थ हो जाता है।

17

भोजपत्र पर हनुमान जी के तंत्रोक्त कवच और यंत्र, बड़वानल स्तोत्र से अभिमंत्रित

विशिष्ट समय पर निर्मित, सोने-चांदी में धारण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:05–09:34

वक्ता कहते हैं कि हनुमान जी के बहुत सारे तंत्रोक्त कवच और यंत्र होते हैं। वे कहते हैं कि इन्हें विशिष्ट समय में भोजपत्र पर निर्मित करके, इसी बड़वानल के मंत्र और स्तोत्र से विशिष्ट नक्षत्र या पर्व काल में सिद्ध और अभिमंत्रित किया जाता है। वे कहते हैं कि ऐसे कवच को सोने या चांदी के कवच में भरकर पहनें या किसी को पहनाएँ तो अनेक प्रकार के विशेष लाभ मिलते हैं; यह सामर्थ्य भी इस अनुष्ठान को करने वाले को मिल सकता है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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