नवरात्र के विशेष तंत्र काल — रात्रि काल, महा अष्टमी की मध्य रात्रि और संधि पूजा

नवरात्र का शेड्यूल, नियम और एक लंबा प्रश्नोत्तर सत्र।

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Questions this answers

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The notes
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01

क्या हर नवरात्र में अनुष्ठान बदलते रहना चाहिए?

बहुत सारे अनुष्ठान बिखेरने के बजाय एक ही को बार-बार करें

· 01:27–02:00 · Also a question

नहीं। आप भले दीक्षित न हों, पर जब किसी अनुष्ठान या साधना को पकड़ें तो एक ही प्रकार के अनुष्ठान, एक ही प्रकार की साधना को बार-बार करें। जिसने पिछले नवरात्र में 32 नामावली के 1100 पाठ कर लिए हैं, उसे इस बार प्रयत्न करना चाहिए कि वही चक्र विधि से कर ले।

02

अभ्यास बन जाने पर साथ में एक कवच जुड़ता है, और उसके बाद बीजाक्षर, अर्गला या रात्रि सूक्त

फिर एक कवच, फिर बीजाक्षर, अर्गला या रात्रि सूक्त

· 02:01–02:36

जब अभ्यास हो जाए और आप बहुत कम समय में उसे पूरा कर ले रहे हों, तब उसके साथ में एक कवच कर लीजिए। कवच आदि हो जाए तो बीजाक्षर पर चले जाइए; या भगवती के अर्गला के प्रथम मंत्र के पूरे बृहद विधान पर; या यदि मंत्र नहीं, स्तोत्र चाहिए तो तंत्रोक्त रात्रि सूक्त पर। लेकिन एक बेस को पकड़ कर चलिए।

03

हर नवरात्र में क्या चीज़ फिक्स रहनी चाहिए?

एक मंत्र, एक कवच या एक स्तोत्र जो कभी नहीं बदलता

· 02:37–03:04 · Also a question

हर नवरात्र में आपकी एक चीज़ फिक्स होनी चाहिए — कि और जो भी करें, एकाक्षरी बीज का कम से कम सवा लाख जप अवश्य करेंगे; या 32 नामावली के कम से कम 1100 पाठ, या 3200 पाठ; या कामाख्या कवच का पाठ अवश्य; या जयंती मंगला का 10000 जप। उस एक चीज़ को कभी मत छोड़िए।

04

जिसने अब तक कुछ भी नहीं किया है, वह किससे शुरुआत करे?

क्रमगत साधना अभी से शुरू करें — नवरात्र को खाली मत जाने दीजिए

· 03:05–03:46 · Also a question

यदि आपने कुछ नहीं किया — न गणपति जी की साधना, न देव दीक्षा विधान, न भगवन दत्त का कुछ, न किसी गुरु परंपरा में हैं, न बटुक भैरव जी का कुछ — तो भी कम से कम भगवती के अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कर सकते हैं। संस्कृत में नाम पढ़ने भी न आते हों तो दुर्गा चालीसा का चक्र विधि से पाठ कर लीजिए, या केवल दुर्गा चालीसा ही कर लीजिए।

05

गुरु, गणपति, बटुक भैरव, पंचाक्षरी — ये मूलभूत साधनाएँ महीने-महीने करते हुए साल भर में पूरी हो जाती हैं

एक साल, महीने में एक मूलभूत साधना

· 03:47–04:30

एक साल। साल भर के भीतर आप आराम से मूलभूत साधनाएँ — गुरु, गणपति, बटुक भैरव, पंचाक्षरी — महीना-महीना करके पूरी कर सकते हैं: श्रावण में पंचाक्षरी, चैत्र नवरात्र में कोई साधना, मार्गशीर्ष में बटुक भैरव जी, माघ में गणपति जी — आगे-पीछे देखकर।

06

इतने सारे विकल्प आपकी सुविधा के लिए हैं, इसलिए नहीं कि एक से फल मिलता है और दूसरे से नहीं

विकल्प सुविधा के लिए हैं, फल के भेद के कारण नहीं

· 04:31–05:28

इसलिए कि आपको जो सुविधाजनक लगे, वह आप कर सकें। ऐसा नहीं है कि 32 नामावली करेंगे तो फल मिलेगा और कवच करेंगे तो नहीं मिलेगा, या आपके कार्य सिद्ध नहीं होंगे — जगदंबा का स्वरूप हर जगह वही है, मूल में वही है, वहाँ से भी पूर्ण होगा।

07

इस बार जगदंबा का आगमन गज पर है — जो धन-धान्य से भरपूर करता है और समृद्धि बढ़ाता है

गज पर आगमन — धन, धान्य और समृद्धि

· 05:29–06:06

गज पर। और जब जगदंबा गज पर आती हैं तो धन-धान्य से भरपूर करती हैं, सुख-संपदा प्रदान करती हैं और समृद्धि की वृद्धि करती हैं — वे सुख-सौभाग्य देने वाली हैं।

वक्ता कहते हैं कि परसों, सोमवार से नवरात्र आरंभ हो रहा है। और भगवती का आगमन इस बार गज पर है। और गज पर जब जगदंबा आती हैं, तो धन-धान्य से भरपूर करती हैं, सुख-संपदा प्रदान करती हैं और समृद्धि की वृद्धि करती हैं। तो जगदंबा सुख-सौभाग्य देने वाली हैं।

08

नवरात्र में प्रतिदिन कितने कमल पुष्प अर्पित करने चाहिए?

कमल का अर्पण — 108, या नौ, या एक

· 06:07–06:52 · Also a question

विधान 108 कमल पुष्प प्रतिदिन का है; उतना न हो पाए तो एक या नौ, जितने आपको मिल जाएँ। उन्हें स्तुति से अभिमंत्रित कीजिए — तंत्रोक्त देवी सूक्त, या कोई एक मंत्र 11 या 27 बार, या "देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता" — और कलश पर, श्री विग्रह के पास, छाया-छत्र के पास या अखंड ज्योत के पास समर्पित कर दीजिए।

09

कमल का पुष्प ही विशेष रूप से क्यों चढ़ाया जाए?

वे पहले से ही श्री की वृद्धि करने वाले स्वरूप में आ रही हैं

· 06:53–07:21 · Also a question

क्योंकि जगदंबा पहले से ही ऐसी ऊर्जा और ऐसे स्वरूप के साथ आ रही हैं जिसमें वे समृद्धि देने वाली हैं — और कमल पुष्प से किया गया पूजन-अर्चन श्री की वृद्धि करने वाला हो जाता है। तो समर्पण करते ही आपके मनोभाव वहाँ परिलक्षित हो जाएँगे और शीघ्र ही भगवती की कृपा प्राप्त हो जाएगी।

10

नवरात्र का व्रत किस प्रकार रखा जाए?

इस बार दस दिन, और व्रत शरीर की क्षमता के अनुसार

· 07:22–07:55 · Also a question

इस बार नवरात्र दस दिन का है; साधकों को दस दिन व्रत रखना है और ग्यारहवें दिन पारण होगा। व्रत अपने शरीर की क्षमता के अनुसार कीजिए — फलाहार रहकर, या एक समय अन्न खाकर, जैसा शरीर साथ दे। लेकिन यदि आप शरीर से हष्ट-पुष्ट हैं और खाना खाकर व्रत कर रहे हैं तो वह उचित नहीं है।

11

नवरात्र में पूजन न करने के विषय में सप्तशती क्या कहती है?

जो चंडिका का पूजन नहीं करता, उसके पुण्यों का भक्षण

· 07:56–08:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस विषय को बोलने से लोग तुरंत कंट्रोवर्सी में पड़ जाते हैं, पर लिखित विषय की चर्चा कर रहे हैं: भगवती कहती हैं कि जो चंडिका का पूजन नहीं करता, उसके समस्त पुण्यों का भी वे भक्षण कर जाती हैं, भस्म कर देती हैं और कष्ट देती हैं। इसके पीछे कारण है।

12

देवी अथर्वशीर्ष से क्या प्राप्त होता है?

अकेले देवी अथर्वशीर्ष से पाँचों अथर्वशीर्ष का फल

· 08:33–09:30 · Also a question

उसकी फलश्रुति में आता है कि पाँचों अथर्वशीर्ष के अध्ययन से जो फल प्राप्त होता है, वह मात्र देवी अथर्वशीर्ष के पाठ से प्राप्त हो जाता है — और उसके साथ भगवती और भी बहुत कुछ प्रदान करती हैं, जिसमें नवार्ण तथा पंचदशी विद्या का महात्म्य भी है।

13

क्या अथर्वशीर्ष हर स्वरूप के लिए अलग-अलग करना पड़ता है?

एक ही पाठ हर स्वरूप के लिए पर्याप्त — यज्ञोपवीत धारियों के लिए और उत्तम

· 09:31–09:55 · Also a question

नहीं — ऐसा नहीं है कि भगवती का अथर्वशीर्ष कर रहे हैं तो हर स्वरूप के लिए अलग करना है। एक बार सही से किया गया पाठ पर्याप्त है। जो यज्ञोपवीत धारण करते हैं, वैदिक हैं, वे करें तो और उत्तम है — पर जहाँ गुरु का आदेश है और आप उस स्तर के समर्पित साधक हैं, वहाँ विषय ही अलग हो जाता है।

14

घट स्थापना कब करनी चाहिए?

भोर का समय अभिजीत से बेहतर — पूरा दिन हाथ में रहता है

· 09:56–11:10 · Also a question

हो सके तो सुबह लगभग 5:35 से 7:25 के बीच — भोर का समय ले लीजिए। जहाँ केवल अभिजीत मुहूर्त मिलता है, वहाँ आधा दिन कलश स्थापना में बीत जाता है, पहले दिन की साधना हैंपर होती है और शरीर थक जाता है। इस बार भोर का समय मिल रहा है, तो अति उत्तम है।

15

क्या शक्ति पीठ में मुहूर्त देखना पड़ता है?

सिद्ध पीठ या ज्योतिर्लिंग में मुहूर्त नहीं — दीक्षा के लिए भी नहीं

· 11:11–11:57 · Also a question

नहीं। जो शक्ति पीठ क्षेत्र हैं, तंत्र पीठ और भगवती के सिद्ध पीठ क्षेत्र हैं जहाँ जगदंबा नित्य विराजमान रहती हैं — जैसे द्वादश ज्योतिर्लिंग, स्वयंभू प्रकट लिंग, और काश्यादि क्षेत्र जहाँ शिव ने नित्य उपस्थिति बताई है — वहाँ मुहूर्त देखने की विशेष आवश्यकता नहीं पड़ती। दीक्षा तक के लिए नहीं।

16

इस बार तृतीया दो दिन पड़ रही है, जिससे महासप्तमी और कालरात्रि पूजन सोमवार को आ रहा है

तृतीया की वृद्धि, और सोमवार को महासप्तमी

· 11:58–12:40

द्वितीया मंगलवार को है; तृतीया इस बार दो दिन पड़ रही है — बुधवार और गुरुवार — क्योंकि तिथि की वृद्धि हुई है। शुक्रवार को चतुर्थी, शनिवार को पंचमी, रविवार को षष्ठी; और सप्तमी, यानी कालरात्रि पूजन, महासप्तमी, 29 सितंबर सोमवार को प्राप्त हो रही है।

17

नवरात्र का जप दिन के किस समय करना चाहिए?

रात 9 से 1 के बीच — और "रात में सप्तशती नहीं" का खंडन

· 12:41–13:18 · Also a question

नवरात्र है, तो विषय रात्रि काल का है। रात में की गई साधना अति उत्तम है — नवरात्र में भी वीराचारी साधक बनकर रात में साधना करने का प्रयत्न कीजिए। प्रतिदिन रात के 9:00 से रात के 1:00 बजे के बीच अपना अनुष्ठान कीजिए; जो भी पाठ करें, इसी बीच करें तो अति उत्तम है।

18

यदि जप दिन का विषय है तो नवरात्र को नौ रात्रि क्यों कहा गया?

दिन का ही विषय होता तो माई नव दिन कहतीं

· 13:19–14:05 · Also a question

लिखा हुआ है कि रात के समय सप्तशती का पाठ नहीं करना है, और जिस कारण से लिखा गया है उसकी चर्चा कोई नहीं कर रहा — पर लिखा है इसलिए नहीं करेंगे। वक्ता पूछते हैं: भाई, फिर नवरात्र नव दिन क्यों नहीं है? माई बोल देतीं कि नव दिन है, दिन में ही करो, रात में मत करो।

19

रात्रि सूक्त के पंद्रह श्लोकों में से हर श्लोक की अपनी अधिष्ठात्री शक्ति महाविद्याओं में है

हर श्लोक की अपनी अलग अधिष्ठात्री शक्ति

· 14:06–14:45

चैनल पर एक वीडियो प्रकाशित है जिसमें रात्रि सूक्त के सभी श्लोकों — विशेष रूप से पंद्रह श्लोकों — का पूरा विधान प्रत्येक महाविद्या के अनुसार स्पष्ट किया गया है, क्योंकि उसमें भगवती तारा, भगवती काली सभी का विशेष स्थान है। हर श्लोक की अपनी अलग अधिष्ठात्री शक्ति है। उनका अनुष्ठान रात में, 9 बजे के बाद करें।

20

महा अष्टमी मंगलवार को है, पर निशीथ-व्यापिनी महा अष्टमी सोमवार की रात में प्राप्त होगी

सोमवार की रात — उसे खाली मत जाने दीजिए

· 14:46–15:31

महा अष्टमी सभी के लिए है और वह मंगलवार 30 तारीख को है — लेकिन निशीथ-व्यापिनी महा अष्टमी, जो मध्य रात्रि में व्याप्त रहती है, वह हमें सोमवार की रात में प्राप्त होगी। तो सोमवार की रात को खाली मत जाने दीजिए।

21

महा अष्टमी की मध्य रात्रि इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

अनेक ग्रंथों की फलश्रुति उसी मध्य रात्रि को चुनती है

· 15:32–16:28 · Also a question

क्योंकि अनेक फलश्रुतियों में आपको पढ़ने को मिलेगा कि जो शारदीय नवरात्र में महा अष्टमी की मध्य रात्रि में पाठ करता है, उस पर भगवती बहुत प्रसन्न होती हैं। बगलामुखी का कवच देख लीजिए, उनकी पाँचों अंग विद्याएँ देख लीजिए, ललितांबा का देख लीजिए; देवी गीता और पार्वती गीता में भी यही है।

22

उस रात का मुख्य पाठ और जप लगभग ग्यारह बजे शुरू होकर एक या डेढ़ बजे तक पूरा होता है

मुख्य पाठ ग्यारह बजे आरंभ करके एक बजे तक ले जाएँ

· 16:29–17:22

29 सितंबर सोमवार की रात में लगभग 11:00 बजे से अपना मुख्य पाठ और जप शुरू कर दीजिए, और रात में कम से कम 1 से 1:30 बजे तक उसे पूरा कर लीजिए। चाहे पार्वती गीता करें, चाहे देवी गीता, चाहे अपने मंत्रों का अनुष्ठान, कवच का, सप्तशती जी का — कीजिए।

23

संधि पूजा क्या है और कब पड़ रही है?

वह काल जिसमें भगवती चामुंडा प्रकट होती हैं

· 17:23–18:12 · Also a question

देवी भक्तों के लिए सबसे प्रमुख काल — वह क्षण जिसमें भगवती चामुंडा प्रकट होती हैं। इस बार वह 30 सितंबर मंगलवार को शाम 5:42 से 6:30 तक है। इसी काल में भगवती के लिए 108 का दीपदान, बलि, विशेष स्तुति और जप करना है। इस काल को कभी जाने नहीं देना है।

24

शरद नवरात्र की बलि में कोई त्रुटि हो जाए तो?

उस समय वे भाव देखती हैं, त्रुटि का दंड नहीं देतीं

· 18:13–19:08 · Also a question

ध्यान रखिए कि शरद नवरात्र में जो बलि पूजन और दीपदान आप करते हैं, उनमें कोई त्रुटि हो जाए तो भगवती उसका दंड आपको कभी नहीं देतीं — क्योंकि उस समय, सच कहें तो, वे भाव देखती हैं। जो जान-बूझकर अपराध करते हैं, उनकी बात वे नहीं कर रहे।

25

हवन कब है, और नवरात्र का समापन कैसे होता है?

महानवमी को हवन, उसी दिन आयुध पूजन, 2 अक्टूबर को पारण

· 19:09–20:35 · Also a question

यदि आपका अनुष्ठान पूर्ण हो चुका है तो हवन 30 सितंबर को संधि पूजन के बाद भी कर सकते हैं, पर सबसे विशेष समय महानवमी, 1 अक्टूबर बुधवार है — चौघड़िया देख लीजिए, शुभ और अमृत लीजिए, राहु काल छोड़ दीजिए। आयुध पूजन उसी दिन है; अपराजिता और शमी पूजन 2 अक्टूबर को, फिर विसर्जन और पारण।

26

महाविद्या क्रम का पाठ कोई गढ़ी हुई बात नहीं — वह श्री दुर्गा अर्चन पद्धति में है

यह श्री दुर्गा अर्चन पद्धति में है, यहाँ गढ़ा नहीं गया

· 20:36–21:28

भगवती से संबंधित तंत्र ग्रंथों में सप्तशती पाठ की जो विविध विधियाँ दी गई हैं, उन्हें देख लीजिए; और कुछ नहीं तो आचार्य सुदत्त मिश्र शास्त्री जी द्वारा संकलित श्री दुर्गा अर्चन पद्धति देख लीजिए — यह विधान वहाँ भी मिलेगा। हमने कोई गढ़ा हुआ विधान आप पर नहीं थोपा है।

27

तृतीया दो दिन पड़ने पर महाविद्या क्रम कैसे चलेगा?

तिथि नहीं, दिन के अनुसार चलिए — अष्टमी तक पूरा हो जाता है

· 21:29–22:08 · Also a question

दिन के अनुसार ही अपना पाठ बढ़ाते जाइए। पहले दिन प्रथम चरित्र; दूसरे दिन दो अध्याय, जैसा बताया गया है; इसी तरह आगे बढ़िए और तिथि को छोड़ दीजिए। सब कुछ अष्टमी तिथि तक पूरा हो जाता है — सात दिन में पूरा हो जाता है — और अष्टमी को केवल रहस्य आदि करना रहता है।

28

नवरात्र में किसकी शरण लेनी चाहिए?

योगिनी मातृकाओं की शरण लीजिए — कार्य वही करती हैं

· 22:09–22:51 · Also a question

भगवती से संबंधित आप जो भी अनुष्ठान कर रहे हों, और चाहे आप यह चैनल सुनते हों या न सुनते हों: जिस प्रकार समय चल रहा है और पूरे विश्व पर जैसी विपदा आ रही है, उसे देखते हुए इस समय हमें भगवती की योगिनी मातृकाओं की विशेष शरण लेनी चाहिए — क्योंकि हर क्षेत्र में भगवती का कार्य योगिनियाँ ही निष्पादित करती हैं।

29

64 योगिनियों के नामों का पाठ किस प्रकार करना है?

प्रतिदिन रात्रि में 64 नामों की नौ आवृत्ति, फिर नौ लौंग की बलि

· 22:52–24:24 · Also a question

नामावली अपने पास रख लीजिए, डाउनलोड कर लीजिए, और प्रतिदिन रात्रि काल में 64 योगिनियों के नामों की कम से कम नौ बार आवृत्ति कीजिए — एक से 64 तक एक बार, पुनः एक से 64 तक, इस प्रकार नौ बार — और फिर नौ लौंग तथा कपूर की बलि दे दीजिए।

30

क्या 64 योगिनी नामावली संपुट के साथ की जा सकती है?

R&D मत कीजिए — पहले 64 का स्वतंत्र पूजन कीजिए

· 24:25–25:40 · Also a question

अभी नहीं। यह पूछे जाने पर कि क्या दुर्गा बीज मंत्र या 64 योगिनी नामावली का जप जयंती मंगला के साथ संपुट में किया जा सकता है, वक्ता कहते हैं: अभी इसमें मत जाइए। ये विधान अभी-अभी दिए गए हैं; अभी R&D मत कीजिए। पहले 64 योगिनियों का स्वतंत्र पूजन कीजिए। संपुट का समय आएगा।

31

क्या लोहे के कुंड में हवन किया जा सकता है?

लोहे में कभी नहीं — लोहे के पात्र में मारण कर्म होता है

· 25:41–26:42 · Also a question

बिल्कुल नहीं। चाहे आपके तथाकथित कोई महासंत या जगद्गुरु ही क्यों न बोल रहे हों कि लोहे के हवन कुंड में हवन कर लीजिए, एलुमिनियम में कर लीजिए — मत कीजिएगा। लोहे के पात्र में मारण कर्म, निषिद्ध कर्म होता है। वह आपको क्षुद्रता प्रदान करेगा और पुण्यों का नाश करेगा।

32

यदि मंदिर तक भी न जा सकें तो?

भाव पर्याप्त है; और कुब्जिका कवच के लिए केवल जप

· 26:43–27:01 · Also a question

यदि आपके पास कुछ भी नहीं है तो कोई दिक्कत नहीं; मंदिर भी नहीं जा सकते तो कोई दिक्कत नहीं। यदि आपका भाव है तो पाठ आदि अवश्य कर लीजिए। और कुब्जिका कवच सिद्ध करने के लिए कोई हवन नहीं चाहिए — केवल जप कर लीजिए, बहुत है।

33

क्या पहनी हुई रत्न की अंगूठी कलश में डाली जा सकती है?

एक बार धारण कर लिया तो कितना भी धो लें, नहीं डाल सकते

· 27:02–27:33 · Also a question

नहीं। एक बार आपने उस रत्न या अंगूठी को धारण कर लिया है, तो अब उसे कितना भी धो लीजिए, धोकर कलश में नहीं डाल सकते। उसे मत डालिए। नया है तो डालिए; नहीं है तो मत डालिए।

34

दस दिन के नवरात्र में सतचंडी की जाए तो?

हर चंडी का अपना उत्कीलन और श्राप विमोचन

· 27:34–28:18 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप सतचंडी अकेले करना चाहते हैं तो वह बड़ा बृहद विषय हो जाएगा। और उत्कीलन के विषय में: पूरी विधि और नियम हर बार रहेंगे। हर चंडी का अपना अलग श्राप विमोचन होगा; पूरे छह अंग सबके अलग रहेंगे।

35

संपुट पाठ में विनियोग किस प्रकार होगा?

विनियोग एक ही बार; शिव उवाच बार-बार

· 28:19–29:27 · Also a question

नहीं — विनियोग एक ही बार होगा। आप शिव उवाच से आरंभ करेंगे, और शिव उवाच को ही बार-बार दोहराना है; विनियोग एक ही बार किया जाता है।

37

क्या नवरात्र में साबुन और शैंपू का प्रयोग किया जा सकता है?

ऊपर केवल जल, कमर से नीचे हर्बल

· 29:50–30:15 · Also a question

सामान्यतः शरीर की शुद्धि जल से ही करनी होती है। कमर से नीचे शुद्धता के निमित्त हर्बल शैंपू या हर्बल साबुन का प्रयोग कर सकते हैं, क्योंकि कई बार उसके बिना मन नहीं मानता। बाकी फिर भी आपकी अपनी इच्छा, या आपके गुरुजी का आदेश।

38

जो मांसाहार करते हैं वे कौन सी साधना कर सकते हैं?

कामाख्या की कीजिए, और अपने निकट के शक्ति पीठ का ध्यान रखिए

· 30:16–30:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि लगभग कोई भी साधना करने में कोई दिक्कत नहीं है — फिर भी आप भगवती कामाख्या की कीजिए। और यदि आप लोग नॉनवेज खाते हैं, तो अपने पास के जो शक्ति पीठ आदि हों उनका विशेष ध्यान रखें, उनकी सेवा-पूजा करें।

39

शनि की महादशा और राहु की अंतर्दशा में क्या करना चाहिए?

तंत्रोक्त रात्रि सूक्त और महाकाली की शरण

· 30:46–31:41 · Also a question

आँख मूँदकर तंत्रोक्त रात्रि सूक्त की शरण लीजिए; भगवती काली की शरण लीजिए। इसी नवरात्र से महाकाली की साधना और उपासना आरंभ कर दीजिए।

40

जिस घर में कलश स्थापना नहीं होती, वहाँ योगिनी अर्चन किया जा सकता है?

अर्चन अवश्य — पर लहसुन-प्याज नहीं

· 31:42–32:43 · Also a question

64 योगिनियों का अर्चन और नाम जप बिल्कुल कीजिए। लेकिन लहसुन-प्याज वाला भोजन नहीं कर सकते। जिस घर में नवरात्र का मान है, वहाँ तो और भी बढ़िया से मान मानना चाहिए।

41

क्या श्री विद्या का सहस्रनाम किसी विशेष अभीष्ट के लिए प्रयोग किया जा सकता है?

यह केवल आपके गुरुजी बता सकते हैं — अधिकार गुरु का ही है

· 32:44–33:30 · Also a question

यह विषय लीक से हटकर है और केवल आपके गुरुजी ही आपको बता सकते हैं। इन सभी का अधिकार केवल गुरु को होता है। वक्ता बस इतना कहते हैं: जो भी आपका अभीष्ट है उसका संकल्प लेकर पाठ कीजिए।

42

क्या 32 नामावली पंचाक्षरी के साथ संपुट में की जा सकती है?

तभी, जब पंचाक्षरी का पाँच लाख जप पहले हो चुका हो

· 33:31–34:18 · Also a question

तभी, जब आप पंचाक्षरी का पाँच लाख जप पहले कर चुके हों — और ठीक से देखा जाए तो चार गुना, यानी बीस लाख। 32 नामावली स्वयं में एक जागृत विषय है; उसकी ऊर्जा पूर्णतः अनुकूल हो और धर्म के भीतर की इच्छा पूर्ण हो, इसके लिए तीस हज़ार जप का विधान है।

43

क्या सूर्य के मंत्रों का पाठ रात में किया जा सकता है?

सामान्य व्यक्ति के लिए रात्रि में निषिद्ध

· 34:19–35:03 · Also a question

सामान्यतः वैदिक आदि के लिए रात में यह निषिद्ध है। तंत्रोक्त में भी जाएँ तो, यदि रात में करना ही है तो भोर में तीन बजे के बाद — जिस समय आपके लिए अभी लगभग रात्रि ही है। लेकिन निर्धारित रात्रि काल में, मुख्य काल में, यह नहीं करना चाहिए।

44

क्या 64 योगिनियों का कोई पुरश्चरण होता है?

पुरश्चरण नहीं — पर हवनात्मक विधान सबसे महत्वपूर्ण

· 35:04–35:48 · Also a question

इसमें पुरश्चरण का कोई विषय नहीं है। जितना करते हैं उतना कीजिए; यह केवल नामावली है, भगवती की प्रसन्नता के लिए। आपका तपोबल जितना बढ़ेगा, वे उतनी प्रसन्न होंगी। इसमें सबसे बड़ा महत्व हवनात्मक विधान का है — यदि आप उनके नामों से अर्चना करते हैं और महीने में एक बार भी 64 नामों से हवन कर लेते हैं, तो उसका अपना महत्व है।

45

क्या स्त्री शिवलिंग का स्पर्श कर सकती है?

शिवलिंग स्पर्श का अधिकार सभी को है

· 35:49–36:53 · Also a question

शिवलिंग को स्पर्श करने का अधिकार सभी को है — स्त्री हो या पुरुष, किसी भी वर्ण का हो। भगवान शिव ने कहीं इसका निषेध नहीं किया है। स्पर्श पर कोई रोक नहीं है, और जिसने ऐसा कहा है उसकी जानकारी गलत है।

46

चौखट का दीपक किस ओर रखा जाए?

चौखट पर, और बाहर की ओर मुख करके अपनी दाईं ओर

· 36:54–37:45 · Also a question

चौखट पर दीपक अवश्य रखा जा सकता है — वहाँ पूजन भी करेंगे, दीपक रखे जाएँगे, पुष्प समर्पित होंगे, गंध-सुगंध सब कुछ। किस ओर रखना है यह इस पर निर्भर करता है कि वह किस देवता के लिए है; पर सामान्यतः घर के भीतर खड़े होकर बाहर की ओर देखते हुए उसे अपनी दाईं ओर रखिए।

47

बलि के लिए बनाया जाने वाला त्रिकोण अलग-अलग क्यों होता है?

तीन विभाजन — विंध्य के उत्तर, दक्षिण, और कामाख्या

· 37:46–39:53 · Also a question

क्योंकि बलि में त्रिकोण का विषय लगभग तीन भागों में बँटा है: विंध्याचल पर्वत के उत्तर के क्षेत्र के लिए एक विषय, उसके दक्षिण के क्षेत्र के लिए दूसरा, और कामाख्या क्षेत्र के लिए तीसरा — और इन तीनों के मध्य क्षेत्र काशी जी के लिए अलग। अश्वक्रांता, रथक्रांता और विष्णुक्रांता में यह फिर अलग हो जाता है।

48

यदि कन्या पूजन अष्टमी को है तो पारण कब करें?

दशमी को, अपराजिता पूजन के बाद — कन्या पूजन के तुरंत बाद नहीं

· 39:54–41:29 · Also a question

कन्या पूजन के तुरंत बाद पारण कर लेना उचित नहीं है — कि अष्टमी का पूजन हो गया, कन्या पूजन हो गया, तो पारण कर लें। हम भगवती का कन्या पूजन नवमी को करते हैं और उसके बाद पारण नहीं करते; फिर नवमी का फल कैसे प्राप्त होगा? पारण दशमी को, अपराजिता पूजन के बाद करना चाहिए।

49

चंडिका यंत्र के साथ कौन सा रुद्राक्ष रखा जाए?

अकेला नवमुखी चंडिका रुद्राक्ष ही पर्याप्त

· 41:30–42:13 · Also a question

भगवती चंडिका के साथ नवमुखी चंडिका रुद्राक्ष एक हो, बस वही काफ़ी है। इसके आगे यदि आप मंडल रखना चाहते हैं या पंचायतन रखना चाहते हैं, तो वह विषय अलग है।

50

सूतक लगा हो तो क्या नवरात्र का व्रत रखना चाहिए?

सूतक में व्रत नहीं — सूतक के नियम का पालन करें

· 42:14–43:18 · Also a question

जहाँ सूतक लगा हुआ है, वहाँ उपवास करने की आवश्यकता नहीं है। सूतक के नियम का पालन करें।

51

घर से बाहर रूम शेयरिंग में रहते हुए क्या किया जा सकता है?

कालिका कवच कीजिए; और महाविद्या क्रम के बाद का हवन

· 43:19–44:22 · Also a question

कालिका कवच कीजिए — कोई दिक्कत नहीं है। और सप्तशती महाविद्या क्रम पूरा करने के बाद वक्ता तेरह अध्याय का हवन करने को नहीं कहते: भगवती के किसी स्तोत्र या सतनामावली से सामान्य हवन कर लीजिए।

52

रास्ते में दो बार सफ़ेद उल्लू दिखने का क्या अर्थ है?

अत्यंत शुभ — 64 योगिनियों का अर्चन पुनः कीजिए, और सार्वजनिक रूप से कहना बंद कीजिए

· 44:23–45:38 · Also a question

बिना विलंब, इसी नवरात्र में भगवती की 64 योगिनियों की अर्चना और पूजन पुनः कीजिए, अनुष्ठान कीजिए। बार-बार दर्शन हो रहे हैं तो यह बहुत शुभ है। और, वक्ता जोड़ते हैं, आपने यहाँ चर्चा कर ली — पर अब इस विषय को बार-बार मत बोलिए।

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शत्रु का प्रयोग एक अनुभवी साधिका तक पहुँचा — तंद्रा की अवस्था में चिल्लाती हुई शक्ति ने उनकी माला खींची

तंद्रा की अवस्था में माला खिंची और टूटी

· 45:39–46:38

एक साधिका, जो बहुत अच्छे स्तर की थीं और जिन्हें बहुत अनुभव प्राप्त हो रहे थे, उन पर शत्रु ने इस स्तर का प्रयोग किया कि तंद्रा की अवस्था में उन्हें लगा कि कोई आया है — और जब वह शक्ति चिल्लाती हुई उनकी माला खींची, तो तंद्रा टूटने पर माला भी वास्तव में टूटी हुई थी, मानो किसी ने खींच दी हो।

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अनुष्ठान पूरा करने के बाद के संशय का क्या करें?

यदि विधिवत किया है तो कृपा हो चुकी है

· 46:39–47:38 · Also a question

यह जान लीजिए और मान लीजिए: यदि आपने विधिवत कर लिया है तो आपके ऊपर कृपा हो चुकी है। अब आप उन्हें अपने जीवन में किस प्रकार लाते हैं और वे कैसे प्रकट होती हैं, यह आपके अपने कर्म पर निर्भर करेगा। ऐसा तो होगा नहीं कि आपने आज किया और आज ही प्रकट हो गईं।

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64 योगिनियों की आहुति किस तिथि को दी जाए?

64 योगिनी की आहुति के लिए एक निश्चित तिथि, गुग्गल और घी से

· 47:39–48:28 · Also a question

नवरात्र में कम से कम अष्टमी या नवमी को हवन अवश्य कर लीजिए। उसके बाद एक तिथि फिक्स कर लीजिए — हर अष्टमी, या चतुर्दशी, या अमावस्या — और उन दिनों 64 योगिनियों की आहुति दीजिए। गुग्गल और घी से अवश्य दीजिए।

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साधक को अपने निकटतम शक्ति पीठ कितनी बार जाना चाहिए?

अपने निकटतम शक्ति पीठ साल में एक-दो बार अवश्य जाइए

· 48:29–49:03 · Also a question

नाम से अनुमान लगाते हुए वक्ता कहते हैं कि श्रोता महाराष्ट्र क्षेत्र से लगते हैं — तो जो भी शक्ति पीठ आपके पास हो, मुंबा देवी का हो, सप्तशृंगी माता का हो, या कोई भी शक्ति पीठ या सिद्ध पीठ हो, वहाँ जाइए। वहाँ नामावली का पाठ करके समर्पित कीजिए; संभव हो तो वहाँ हवन कीजिए। साल में कम से कम एक-दो बार अवश्य जाइए।

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अखंड दीपक, गणेश दीपदान और कर्म साक्षी दीपक के क्या नियम हैं?

अखंड दीपक, गणेश दीपदान और कर्म साक्षी दीपक

· 49:04–49:43 · Also a question

अखंड दीपक पर: निर्णय स्वयं लीजिए — निभा पाएँगे तो रखिए, और अव्यवस्था की स्थिति में मत रखिए। गणेश दीपदान घी से कीजिए। कर्म साक्षी दीपक सभी देवताओं के नाम पर रहता है, क्योंकि ज्योत साक्षात् उन्हीं का स्वरूप है। गणेश तर्पण में कुश की संख्या बारह या नौ रख सकते हैं।

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सर्वपितृ अमावस्या को क्या करना चाहिए?

खीर-पूरी बनाकर अपने हाथ से गौ माता को खिलाइए

· 49:44–50:38 · Also a question

कल पितृ पक्ष की अंतिम तिथि है। और कुछ करें या न करें, पूरी और खीर बनाकर अपने हाथ से गौ माता को खिला दीजिए। इतना अवश्य कीजिए — पाठ करें या न करें, पूजन करें या न करें, पर भगवती गौ को नैवेद्य अवश्य अर्पित कीजिए।

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यदि आप बाहर हैं और भोजन नहीं बना सकते तो सर्वपितृ अमावस्या को क्या करें?

पत्ते के प्लेट पर दूध की मिठाई, और अपनी बात स्पष्ट कहकर

· 50:39–51:49 · Also a question

दूध से बनी मिठाई ले लीजिए — आधा किलो, पाव भर, जितना सामर्थ्य हो — और उसे पत्ते वाले प्लेट पर रख दीजिए, ताकि गौ माता प्लेट भी खा लें तो हानि न हो। फॉर्म या प्लास्टिक वाला नहीं। और स्पष्ट कहिए: मेरे पास यही सक्षमता है, यही मेरी श्रद्धा है; आप इसी से प्रसन्न हो जाइए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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