नवनाथ साधना, रक्षा कवच और तंत्र-ज्योतिष उपाय

नाथ परंपरा और तंत्र-ज्योतिष उपायों पर प्रश्नोत्तर

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The notes
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02

नाथ परंपरा से बाहर के गृहस्थ को सीमित विधान मिलता है; पूरा माँगने पर दोनों को दोष

साधना पर भी कॉपीराइट; देने वाला उतना ही बताता है जितना लाभ दे और दोष न लगे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:42–06:45

वक्ता कहते हैं कि परंपरा के शिष्यों को विधि पूरी बताई जाती है, लेकिन जो शिष्य नहीं बन सकता, या जिसकी अपनी मर्यादाएँ हैं और पूरी तरह नहीं आना चाहता, उसके लिए ऐसे विधान बताए गए हैं कि गृहस्थ रहते हुए इस-इस तरह करो, नवनाथ की कृपा पाओ और उन्नति करो। यदि ऐसा व्यक्ति चाहे कि सारा विधान मिल जाए, तो देने वाले को भी और करने वाले को भी दोष लगेगा, क्योंकि वह शेड्यूल से बाहर है — हर साधना पर कॉपीराइट है, और नाथ परिवार का यह कहना सही है कि मैं यह चीज़ अपनी परंपरा से बाहर क्यों दूँ; ऐसा मूर्खतापूर्ण काम कोई नहीं करेगा। इसलिए देने वाला उतना ही बताता है जितने से सामने वाले को लाभ हो और काम चल जाए — और फिर साधक को, अपने स्तर से नीचे की चीज़ मिलने पर, संशय होता है कि कुछ हुआ ही नहीं।

03

सबसे सुलभ साधनाएँ सबसे उपेक्षित: गायत्री, ओंकार, सोऽहम्

प्रचलित होने से साधना कमज़ोर नहीं होती

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:18–07:50

वक्ता कहते हैं कि लोग ठीक उसी मंत्र या साधना को सबसे अधिक नेगलेक्ट और इग्नोर करते हैं जो सबसे सुलभ होती है — चाहे गायत्री मंत्र हो, ओंकार हो या सोऽहम्-हंस। कोई साधना प्रचलित हो जाए तो लोग मान लेते हैं कि अब वह गुप्त नहीं रही, इसलिए फल नहीं देगी या प्रभाव नहीं पड़ेगा, और उसकी महत्ता कम आँकने लगते हैं। जबकि ओंकार साधना अपने आप में ऐसी है कि कोई कर ले तो फिर और कुछ करने की ज़रूरत ही नहीं।

04

नाथ परंपरा में आदेश और अलख का अर्थ

आदेश आदीश (शिव) का अपभ्रंश; अलख अनंत ज्योति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:51–08:54

वक्ता कहते हैं कि नाथ साधक जो शब्द बोलते हैं वह वास्तव में "आदेश" नहीं बल्कि "आदीश" है — आदि और ईश, पहले प्रभु, भगवान शिव — जो अपभ्रंश होकर आदेश हो गया। "अलख" का अर्थ है जिसका कोई अंत नहीं, जिसकी ज्योति सदैव जलती है; इसलिए "अलख आदेश"। अलख जगाने की अलग-अलग प्रक्रिया है और अलख देने की अलग-अलग, लेकिन साधारण रूप से जब हर कोई "आदेश, आदेश" बोलता है तो उसका अर्थ है कि हम भगवान शिव को याद कर रहे हैं और उन्हें प्रणाम कर रहे हैं।

05

ओंकार यंत्र के साथ ओंकार साधना

बीसा यंत्र जैसा चाँदी का यंत्र; अ-उ-म और अर्धमात्रा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:55–11:36

वक्ता कहते हैं कि ओंकार साधना के लिए ओंकार यंत्र अवश्य रखें, त्राटक या पूजन के लिए; यह बीसा यंत्र की तरह बनवाया जाता है और रजत यानी चाँदी पर सबसे अधिक फल देता है। यंत्र बनवाकर विधि-विधान से ओंकार का जप करें — चाहे अ, उ, म के पूरे उच्चारण वाला लंबा जप, या अधिक से अधिक संख्या — तो बहुत विशेष प्रभाव पड़ता है; उस यंत्र के माध्यम से बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है। त्राटक से क्या हो सकता है इसके उदाहरण में वे नाथूराम गोडसे का नाम लेते हैं, कहते हैं कि कॉलेज की लाइब्रेरी में पढ़ी जीवनी के अनुसार उनका त्रिनेत्र, पीनियल ग्रंथि, बचपन से जागृत था, वे सहज ध्यान में चले जाते थे, ओंकार का ध्यान और घर में पूजित श्री यंत्र पर त्राटक करते थे, और अपने समय के उच्च कोटि के साधक थे। अ-उ-म में, वे कहते हैं, हर कोई आ गया — ब्रह्मा, विष्णु, महेश — और ऊपर अर्धचंद्र और बिंदु भगवती हैं, तो उसमें सबकी पूजा हो गई।

06

उपाय चुनने से पहले प्रेत बाधा का आकलन: प्रेत या भूत, नई या पुरानी, जप पर उसकी प्रतिक्रिया

पुरानी बाधा साधारण पूजा से नहीं हिलती, उसे स्वयं ग्रहण कर सकती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:04–13:06

प्रेत बाधा के लिए मंत्र पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि यह इस पर निर्भर है कि बाधा कैसी है — प्रेत बाधा और भूत बाधा दो अलग चीज़ें हैं। प्रेत बाधा है तो किस स्तर की: स्वयं आई है या किसी ने अभिचार से पहुँचाई है, नई है या पुरानी, उसकी अवस्था क्या है, और पाठ-जप करने पर वह क्या प्रतिक्रिया देती है — चिल्लाती है, रोती है या हँसती है? इससे उसकी वस्तुस्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। यदि पुरानी है तो साधारण पूजन-पाठ से कोई फर्क नहीं पड़ेगा; वह आपके देवी-देवता की पूजा को स्वयं ग्रहण करने और रोकने भी लग सकती है — जिस पर वे अलग से बताने का वादा करते हैं। इसलिए पहले स्वयं या किसी अच्छे जानकार की सहायता से स्थिति का आकलन करें।

07

जहाँ बाधा से घर की पूजा रुक जाए वहाँ कवच और वज्र पंजर, शिव मंदिर में सिद्ध

कवच केवल कूटता है; वज्र पंजर बाँधकर कूटता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:07–15:09

वक्ता कहते हैं कि यदि स्थिति ऐसी हो कि घर में पूजन-पाठ नहीं कर पा रहे और बहुत अशांति है, तो किसी मंत्र या तंत्रोक्त कवच का कुछ दिन पाठ-जप करके उसे जागृत कर लेना चाहिए — कम से कम पंचमुखी हनुमान कवच, अघोर शिव कवच, इंद्र वज्र कवच, इंद्राक्षी कवच, भगवती दुर्गा या कामाख्या माँ से संबंधित कोई कवच, या अप्राजिता कवच; विपरीत महाप्रत्यंगिरा और महाविपरीत जैसे स्तोत्र भी हैं, और महाविद्याओं के अलग-अलग कवच और वज्र पंजर। वज्र पंजर में कवच का दस गुना बल है: पंजर यानी छाती की पसलियाँ, तो वह पूरा घेरा डाल देता है — कवच सिर्फ कूटता है, वज्र पंजर बाँधकर कूटता है, फिर उसकी आने की हिम्मत नहीं होती, और वह प्रेत बाधा को हटा ही नहीं, दंडित भी कर सकता है। किसी भी देवी-देवता का वज्र पंजर, कवच या महाविद्या स्तुति विधि-विधान से समझकर शिव मंदिर में सिद्ध करें — संकल्प लेकर, ब्रह्मचर्य और सभी नियमों का पालन करते हुए, और चाहे कितनी भी बाधा या कष्ट हो, छोड़ें नहीं — मंदिर में, घर में नहीं। एक निश्चित समय बाद एक शक्ति मिलती है या मार्गदर्शन मिलता है जिससे बाधाएँ दबने लगती हैं; केवल घर में करने से, बाधा बड़ी हो तो, कुछ फायदा नहीं होगा।

08

सावधानी: जिसकी कुंडलिनी जागृत है वह यूट्यूब पर उसकी प्रक्रिया नहीं बताता

वक्ता कुंडलिनी जागरण से इनकार करते हैं; उनका मार्ग मंत्रोक्त और गृहस्थ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:17–16:01

सोऽहम् से कुण्डलिनी जागरण पर वीडियो बनाने की माँग पर वक्ता साफ कहते हैं कि वे झूठ नहीं बोल सकते: उनकी कुंडलिनी जागृत नहीं है और न उन्हें उसका विधान पता है। जो यूट्यूब पर कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया खोज रहे हैं उनसे वे कहते हैं कि जिसकी कुंडलिनी वास्तव में जागृत हो जाएगी वह यूट्यूब पर आकर उसकी प्रक्रिया नहीं बताएगा। वे केवल इतना मानते हैं कि गुरु कृपा से उस मार्ग की कुछ अवस्थाएँ उन्होंने प्राप्त की हैं; बाकी उनका पूरा विधान मंत्रोक्त और सात्विक है, वे पूरी तरह गृहस्थ साधक हैं, और गृहस्थ साधनाओं पर बल देते हैं।

09

ज्योतिष और तंत्र एक-दूसरे के पूरक: वर्षों से रुके जीवन को पढ़ना

पहले दशा, तीसरा भाव, लग्नेश और नवम भाव; गुरु-परंपरा के साधक को कुंडली की ज़रूरत नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:53–19:26

जिसे बीस साल से जीवन रुका-सा लगता है उसके प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि ज्योतिष और तंत्र पूरक हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं — तंत्र को पाखंड कहने वाले ज्योतिषी और ज्योतिष को पाखंड कहने वाले तांत्रिक दोनों गलत हैं, और दोनों को मिलाकर चलने से हर समस्या का हल मिलता है। पहले किसी अच्छे ज्योतिषाचार्य से कुंडली का विवेचन करवाएँ: किस ग्रह की दशा-अंतर्दशा चल रही है; पराक्रम का तीसरा भाव किसी ग्रह की दृष्टि में तो नहीं जो सारा कार्य रोक दे; लग्नेश की स्थिति, जो सबसे महत्वपूर्ण है; और भाग्य का नवम भाव। अपने इष्ट देवता और कुल की शक्तियों के लिए भी कुंडली का विवेचन करवा रखना चाहिए। लेकिन यदि आप पहले से तंत्रोक्त विधान से नियमित पूजन करते हैं और किसी गुरु परंपरा से जुड़े हैं, तो जन्म कुंडली की आवश्यकता नहीं — गुरु पर पूरा विश्वास रखकर आगे बढ़ते रहिए। साधारण व्यक्ति हैं और परेशानियाँ हैं तो कुंडली के उपाय लें, और राहु-केतु या शनि के दोष ऊपरी बाधा या अभिचार का संकेत हैं, जिसके लिए तंत्रोक्त विधान से सहायता लें; दोनों को मिलाकर बीच का रास्ता निकालें।

10

गुरु मंत्र के बिना साधना: नौ गुरुओं के रूप में नवनाथ

गुरु न होना रुकने का कारण नहीं; गुरु पुष्य पर गुरु साबरी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:29–21:05

जिसके गुरु हैं पर गुरु मंत्र नहीं मिला उसके प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि यह बहुत टेंशन लेने की बात नहीं है। गुरु मंत्र आवश्यक है और गुरु बिल्कुल ज़रूरी हैं — लेकिन यह बात गलत है कि गुरु न हो तो भक्ति या पूजा-पाठ में कमी आए या उसका फल न मिले, और वे इससे सहमत नहीं हैं; जो ऐसा आक्षेप लगाकर लोगों की भक्ति में संशय पैदा करते हैं वे सबसे बड़ा गलत काम करते हैं। बिना गुरु की कौन सी साधनाएँ हो सकती हैं इस पर उनका वीडियो है। साबरी में जो नवनाथ उन्होंने समूह से जगवाए वे स्वयं गुरु हैं — नौ गुरु; 28 तारीख को गुरु पुष्य नक्षत्र में वे फिर गुरु साबरी करवाएँगे, और पहले भी तीन-चार गुरु संबंधी साधनाएँ दी हैं — इनसे आरंभ करें, रुकें नहीं। गुरु हैं और मंत्र नहीं दे रहे तो उनसे बात करें।

11

अचानक क्रोध के लिए उपाय: सिरहाने ताँबे के लोटे में मिश्री का जल

ताँबा मंगल, जल चंद्रमा, मिश्री सूर्य; रविवार को कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 22:27–24:17

छोटी-छोटी बातों पर अचानक क्रोध, जिससे घर का माहौल नकारात्मक हो जाए पर एक मिनट में शांत हो जाए, इस पर वक्ता पहले पूछते हैं कि क्या कुंभ लग्न है और लग्नेश सूर्य-मंगल लग्न में हैं — तब पारे की तरह चढ़ने और तुरंत उतरने वाला क्रोध स्वाभाविक है। लग्न कुछ और हो और यह दिक्कत हो, तो एक ही उपाय: रोज़ रात ताँबे के लोटे में जल भरकर थोड़ी गोटा मिश्री डालें, सिरहाने रखें, और सुबह तुलसी जी को अर्पित करें — पौधे पर नहीं, जड़ के पास डालें — रविवार छोड़कर छह दिन; कुछ दिनों में राहत मिलेगी। ज्योतिषीय कारण: सूर्य आत्मकारक हैं, मंगल क्रोध का सबसे बड़ा कारक, ताँबा मंगल का, जल चंद्रमा का और मिश्री सूर्य का प्रतिनिधि है, तो यह तीनों का एक तरह का उतारा है। साथ में वे कहते हैं: मेडिकल जाँच भी करवा लें — ब्लड प्रेशर आदि।

12

सरल साधना से जुड़ाव क्यों नहीं लगता: मयोंग और सिद्धि का मौखिक हस्तांतरण

तंत्र में असली काम दो मिनट का; विद्या चावल पर दी जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 24:28–26:54

एक प्रतिभागी ने कहा कि पिछली साधनाओं की तरह वह नवनाथ साधना से जुड़ नहीं पाया, तो वक्ता कहते हैं कि यह सबके साथ हुआ क्योंकि साधना इतनी सरल थी — और आज लोग सरल चीज़ों को हल्का समझते हैं, जबकि तंत्र में असली काम दो मिनट का होता है। वे असम के पास मायोंग का उदाहरण देते हैं, जो जादूगर-जादूगरनियों के लिए प्रसिद्ध है और जहाँ सबसे अधिक तंत्र-अभिचार के काम होते हैं: कोई भी जानकार बताएगा कि वह इतना सरल है और पूरा परंपरा में चलता है। जैसा उनके सिद्धि ट्रांसफर वाले वीडियो में है, परंपरागत विद्याएँ इतनी सरलता से दी जाती हैं कि निश्चित समय पर सिर्फ बोलना होता है — "आज से मेरी यह चीज़, फलाना इतर-योनि का भूत-प्रेत, यह आप लो" — चावल पर पढ़कर हाथ में दे दिया, हो गया; उसे बुलाने का नाम है और मुश्किल से दो-चार अक्षर का मंत्र। तो साधना जितनी सरल, उतना कम एंगेजमेंट — सिर्फ 21 बार मंत्र और भोग — और अनुभवी साधक को उतना कम जुड़ाव लगता है, जबकि जिन्होंने कभी साधना नहीं की थी उन्हें सजावट आदि में आनंद आया और आत्मबल मिला, जो ज़रूरी था।

14

सर्वश्रेष्ठ पूजा के रूप में मानसिक पूजा

मन का भाव किसी भी भौतिक अर्पण से बढ़कर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 28:13–28:52

वक्ता कहते हैं कि मानसिक पूजा को सर्वश्रेष्ठ पूजा कहा गया है: कोई उपचार उपलब्ध न हो तो मानसिक पूजन कर लेना चाहिए, और वह सबसे अधिक फल देता है। वैसे भी मानस का सबसे अधिक महत्व है — कितना भी भौतिक पदार्थ चढ़ा लें, लेकिन भगवती को गुलाब चढ़ाते हुए मन में सोच रहे हों कि काश यह अपनी प्रेमिका को दे दिया होता, तो मन कहीं और है, भाव किसी और का लग गया, और भगवती उसे स्वीकार कैसे करेंगी?

15

भूत-प्रेत के विरुद्ध सबसे प्रभावी कवच अपने इष्ट का

जिसका इष्ट हनुमान, उस साधारण साधक के लिए अकेली हनुमान चालीसा पर्याप्त

· Reviewed Sep 14, 2026 · 28:53–29:28

भूत-प्रेत प्रभाव से मुक्ति के लिए सबसे प्रभावी कवच पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं: अपने इष्ट देवता का कवच, जिन पर सबसे अधिक विश्वास हो और जिन पर संशय न हो। उनके अपने इष्ट हनुमान जी हैं, जिन पर पूरा भरोसा है, इसलिए उनके लिए हनुमान चालीसा है; अकेली भी करें तो सर्वश्रेष्ठ विधि है, और उसके बाद साधारण साधक को अन्य किसी कवच की ज़रूरत ही नहीं। तो अपने इष्ट के कवच का जागरण करें।

16

हर साँस के साथ देवता के नाम का अजपा जप पर्याप्त है

दिन भर "ॐ शिव गोरक्ष" का मानसिक जप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 29:29–29:40

"ॐ शिव गोरक्ष" का दिन भर, हर साँस के साथ मानसिक जप किया जा सकता है या नहीं, इस पर वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल किया जा सकता है। भगवान के नामों का जितना अजपा जप करें — यानी मानसिक रूप से जप — वह बहुत है।

एक श्रोता ने पूछा कि क्या "ॐ शिव गोरक्ष" का जप दिन-रात, हर साँस के साथ मानसिक रूप से किया जा सकता है। हाँ, वक्ता कहते हैं, बिल्कुल किया जा सकता है। भगवान के नामों का जितना अजपा जप करें — यानी मानसिक रूप से जप — वह बहुत है।

17

लंबी आर्थिक तंगी का उपाय: घर में शिवलिंग, नित्य जल और रुद्राष्टक

सामर्थ्य हो तो शिवरात्रि की रात्रि रुद्राभिषेक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 30:13–31:08

करीब बीस साल से गंभीर आर्थिक तंगी झेल रहे व्यक्ति के लिए वक्ता कहते हैं कि सबसे ठोस उपाय, यदि सक्षम हों, शिवरात्रि की रात्रि में रुद्राभिषेक करवाना है। आर्थिक रूप से सक्षम न हों और साधारण करना चाहें, तो घर में शिवलिंग हो तो अच्छा है — घर पर कर सकते हैं — और नियमित रूप से जल चढ़ाएँ और साथ में रुद्राष्टकम् का पाठ करें; इतना भी करेंगे तो बहुत होगा। वह व्यक्ति क्या-क्या करता है यह जाने बिना वे अधिक नहीं बताते, और टेलीग्राम ग्रुप में स्थिति बताने को कहते हैं ताकि बेहतर मार्गदर्शन कर सकें।

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काल सर्प दोष या भारी मंगल: हनुमान और शिव की साधना पर्याप्त

लय बनाए रखें; और कुछ नहीं चाहिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 32:18–32:28

काल सर्प दोष और भारी मंगल वाले, जो पहले से शिव साधना करते हैं, के यह पूछने पर कि क्या यह पर्याप्त है, वक्ता कहते हैं हाँ: हनुमान जी और शिव जी की साधना पर्याप्त है — बस लय से करते रहिए।

एक श्रोता ने कहा कि उसकी कुंडली में मंगल भारी है, काल सर्प दोष है, और वह शिव साधना करता है — क्या यह पर्याप्त है? वक्ता उत्तर देते हैं कि हनुमान जी और शिव जी की साधना पर्याप्त है। बस लय से करते रहिए, वे कहते हैं।

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स्तोत्र का देवता उच्चाटन नहीं करता, जब तक साधना कुल-शक्ति से न टकराए

शांत कुलदेवता बनाम महावीर या अस्त्र साधना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 32:56–34:11

क्या जिस स्तोत्र का पाठ कर रहे हैं उसका देवता स्वयं उच्चाटन कर सकता है, इस पर वक्ता कहते हैं नहीं — वह शक्ति ऐसा नहीं करेगी, जब तक आप कोई गलती न कर रहे हों। सबसे पहले व्यक्ति को देखना चाहिए कि उसकी कुल की शक्तियाँ कौन हैं — जिन्हें वह कुलदेवता के रूप में मानता है। जैसे कोई ब्रह्म आपके कुलदेवता हैं और आपने महाविद्या, महावीर या अस्त्र-मंत्र की साधना उठा ली, तो उन्हें कष्ट होगा, और उन्हें कष्ट होगा तो वे आपको कष्ट देंगे; साधना सफल नहीं होगी और आप उस पाठ-पूजा को दोष देंगे जो शुरू की, जबकि गलती मूल में है — गलत साधना उठा ली। पहले उन्हें देखिए, उनसे आदेश लीजिए, जानिए वे किस प्रकार के साधक थे या कोई पैशाचिक शक्ति थे जिन्हें शांत करके बैठाया गया है; तभी साधना आरंभ करें। इसके अलावा साधारण रूप से गलती के बिना उच्चाटन नहीं होता — देवता की परीक्षा अलग बात है और वह इतनी आसानी से नहीं होती।

20

विशाल स्तोत्र अनुष्ठान के दौरान घर की अशांति परीक्षा है, विफलता नहीं

हज़ारों गणपति अथर्वशीर्ष पाठ, हर सौ पर हवन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 34:12–36:18

वक्ता कहते हैं कि उच्चाटन तब होता है जब बहुत अधिक कर लिया हो। वे दो-तीन ऐसे लोगों को जानते हैं जो गणपति अथर्वशीर्ष का हज़ारों पाठ करते हैं — हज़ार पाठ का संकल्प लेकर, हर सौ पर हवन — और बताते हैं कि जीवन में कुछ परिवर्तन नहीं आ रहा। वे उन्हें पॉज़िटिव रहने को कहते हैं: वे उस स्तोत्र से, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह हर पुण्य देता है और बड़े से बड़े ग्रह दोष मिटाता है, बहुत बड़ी ऊर्जा बना रहे हैं, और वह ऊर्जा जब देने पर आएगी तो बहुत कुछ देगी; इतना बड़ा अनुष्ठान करने वालों को छोटा कुछ मिलेगा ही नहीं, इसलिए पहले परीक्षा ली जाती है कि वे किस स्तर तक जा सकते हैं, और उसी अनुसार प्राप्त होता है। उस परीक्षा की स्थिति में उच्चाटन होगा — शांति भंग होगी, घर में झगड़े होंगे — लेकिन यह साधना का नकारात्मक प्रभाव नहीं, उस स्तर से अगले स्तर पर जाने का विधान मात्र है। अलग से वे जोड़ते हैं कि पाठ से मन हटे तो कारण यह भी हो सकता है कि एक जगह ज़्यादा जाने से मन हट जाता है — शुरू में मज़ा आता है, बाद में हट जाता है — जो अलग मैटर है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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