नींबू और तंत्र के गूढ़ प्रयोग — तंत्र काट, शरीर बंधन, गृह कीलन और कवच से रक्षा
कच्चे हरे नींबू के तंत्र प्रयोगों पर वक्ता की चर्चा — तंत्र काट, शरीर पर बलि, मंत्र जागरण, गृह बंधन और कीलन, इष्ट कवच विधि — तथा पीले नींबू, शांति से इतर प्रयोगों और नित्य बलि पर उनकी सावधानियाँ।
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तंत्र प्रयोगों में कौन सा नींबू प्रयोग करना चाहिए?
हर षट्कर्म और रक्षा प्रयोग के लिए हरा कच्चा "कुँवारा" नींबू
वक्ता कहते हैं कि नींबू हर गृहस्थ के घर की आवश्यकता है, क्योंकि एक बार सही से जान लें तो षट्कर्म से जुड़े हर प्रयोग और हर रक्षात्मक प्रयोग में इसका प्रयोग कर पाएँगे। नींबू की कई प्रजातियाँ हैं और तंत्र प्रयोगों में अलग-अलग नींबू प्रयोग होते हैं, पर जो एक नींबू षट्कर्म के किसी भी विषय — रक्षात्मक प्रयोग, बंधन आदि — में चलता है, वह हरा, कच्चा नींबू है, जिसे तंत्र की भाषा में प्रायः कुँवारा नींबू कहा जाता है; वे कहते हैं कि उसी का सर्वाधिक प्रयोग करें।
वक्ता इसे सभी गृहस्थों के लिए अति आवश्यक विषय कहते हैं — सबके घर में इसकी आवश्यकता पड़ती है। यदि लोग एक बार इसे सही प्रकार से जान लें, वे कहते हैं, तो षट्कर्म से संबंधित सभी प्रयोगों और सभी रक्षात्मक प्रयोगों में इसका प्रयोग कर पाएँगे। नींबू की, वे बताते हैं, कई प्रजातियाँ होती हैं, और तंत्र के प्रयोगों में अलग-अलग प्रकार के नींबुओं का प्रयोग किया जाता है; सब नींबू अलग-अलग हैं। लेकिन एक नींबू ऐसा है जो षट्कर्म से संबंधित किसी भी विषय में चल सकता है और जिसके माध्यम से बहुत से रक्षात्मक प्रयोग, बंधन आदि किए जा सकते हैं: हरा नींबू, कच्चा नींबू। तंत्र की भाषा में कच्चे नींबू को बहुत बार कुँवारा नींबू भी कहा जाता है। वे कहते हैं कि उसी का सर्वाधिक प्रयोग करें।
बिना किसी मंत्र के अपने देवता के नाम से नींबू की बलि द्वारा तंत्र काट
महाकाली की नित्य सात्विक पूजा का उदाहरण; 20-30% त्वरित लाभ
वक्ता कहते हैं कि सबसे सीधा तंत्र काट बिना किसी मंत्र के होता है: जो कोई, मान लीजिए, भगवती महाकाली की नित्य सात्विक दक्षिणाचारी पूजा करता है — उनके मंत्रों का जाप, धूप-दीप-नैवेद्य, आरती — और उसे लगे कि उस पर कोई तंत्र का प्रयोग है, तो उनका स्मरण करते हुए (भगवती को बलि प्रिय है) नींबू की बलि देकर उस प्रयोग को रोकने की प्रार्थना करे; कम से कम 20-30% लाभ त्वरित मिलता है और वह चीज़ रुक जाती है। वे ज़ोर देते हैं कि इसमें किसी देवी को बलि नहीं दी जा रही।
वक्ता सबसे पहले यह लेते हैं कि किसी भी तंत्र के तंत्र काट के लिए नींबू का प्रयोग कैसे हो। सीधा तरीका, वे कहते हैं, यह है कि नींबू में बिना किसी नाम-मंत्र के, बिना किसी प्रकार के मंत्र के, केवल देवता के नाम का स्मरण करते हुए। मान लीजिए, वे कहते हैं, हम भगवती महाकाली की सेवा-पूजा करते हैं: नित्य उनके मंत्रों का जाप, नित्य उनके नाम से धूप-दीप-नैवेद्य, नित्य आरती, सामान्य सात्विक दक्षिणाचार विधि से पूजा। यदि किसी प्रकार हम पर कष्ट आ गया और समझ आ रहा है कि कोई तंत्र का प्रयोग है, तो — भगवती को बलि प्रिय है — उनका स्मरण करते हुए निंबू बलि देकर उस संबंधित प्रयोग के निमित्त प्रार्थना की जाए तो कम से कम 20 से 30% लाभ त्वरित रूप से मिल जाता है; वे चीज़ें रुक जाती हैं। वे एक बात याद रखने को कहते हैं: इसमें किसी देवी को बलि नहीं दी जा रही है।
बलि को दोगुनी बलि से काटा जाता है
जिस गुनिया का प्रयोग अभी सक्रिय है, वह एक नींबू बलि को जोड़ा बलि से काट सकता है
वक्ता नींबू बलि से काट पर एक सावधानी जोड़ते हैं: जिस जानकार, गुनिया व्यक्ति का प्रयोग आपने बलि देकर रोका है, वह अभी भी सक्रिय हो सकता है और आपकी बलि का काट जोड़ा बलि देकर कर सकता है। बलि को डबल बलि से काटा जाता है — एक बलि दी तो दो बलि — और वे इसे सामान्य सा विषय कहते हैं।
वक्ता एक सावधानी जोड़ते हैं। हो सकता है कि जो प्रयोग आपने बलि देकर रोका है, उसे करने वाला जानकार, गुनिया व्यक्ति अभी भी एक्टिव हो — और वह आपकी बलि का काट जोड़ा बलि देकर कर दे। यानी बलि को डबल बलि से काटा जाता है, वे कहते हैं; यह सामान्य सा विषय है। एक बलि दी तो दो बलि।
एक नींबू की बलि किसी भी प्रयोग को क्यों काट सकती है
बलि प्रक्रिया से निकली ऊर्जा प्रयोग की ऊर्जा को काटती है — उस स्तर की भक्ति या जागृत मंत्र हो तो
वक्ता समझाते हैं कि सामान्यतः हम नींबू काटकर उसका रस पीते हैं, पर बलि की प्रक्रिया में उससे एक ऊर्जा निकलती है; वही ऊर्जा किसी देवता या मंत्र के माध्यम से प्रक्षेपित होकर किसी को परेशान करती है, और हम उसी ऊर्जा को दूसरी ऊर्जा से काटते हैं। जिसने भूत-प्रेत या प्रेत-पिशाच की शक्ति सिद्ध की है, वह उसे ऐसे ही नहीं चला देता — बलि देगा, नैवेद्य देगा, धूप देगा, कुछ तो देगा। उन सबका काट, वे कहते हैं, मात्र एक नींबू से हो सकता है, पर क्षमता अपने में होनी चाहिए: या तो उस स्तर की भक्ति, या जागृत मंत्र।
वक्ता समझाते हैं कि नींबू काम क्यों करता है। जब भी बलि दी जाती है, वे कहते हैं, सामान्य रूप से तो नींबू काटकर, गारकर, शरबत बनाकर पी लेते हैं। लेकिन जब हम बलि की प्रक्रिया करते हैं तो उससे एक ऊर्जा निकलती है — और वही ऊर्जा किसी देवता या मंत्र के माध्यम से प्रक्षेपित होकर किसी को परेशान करती है। हम उसी ऊर्जा को दूसरी ऊर्जा से काट रहे होते हैं। मान लीजिए किसी ने भूत-प्रेत की शक्ति सिद्ध की, प्रेत-पिशाच को सिद्ध किया: जब वह किसी पर उसे चलाएगा तो ऐसे ही सीधे नहीं चला देगा — बलि देगा, नैवेद्य देगा, धूप देगा, कुछ तो देगा। उन सभी का काट, वक्ता कहते हैं, मात्र एक नींबू से किया जा सकता है। लेकिन क्षमता अपने में होनी चाहिए: या तो भक्ति उस स्तर की हो, या मंत्र जागृत हो।
मंत्र से अभिमंत्रित नींबू का काट: जयंती मंगला काली का उदाहरण
11,000 जप पार कर चुका साधक कच्चे नींबू को 11 बार अभिमंत्रित कर, पीड़ित पर उतारकर काटता-निचोड़ता है
वक्ता का उदाहरण: जो कोई जयंती मंगला काली का रोज़ पाँच माला (या एक भी) जाप करता है — जिस मंत्र में 11 शक्तियाँ, महाशक्तियाँ और पितरों की समस्त शक्तियाँ चलती हैं — और 10-11,000 जप पार कर चुका है, वह देखता है कि परिवार के किसी सदस्य पर मंत्र या तंत्र का प्रयोग है और उसकी शारीरिक-मानसिक हानि हो रही है। वह कच्चा नींबू हाथ में लेकर उसी मंत्र से कम से कम 11 बार अभिमंत्रित करे, भगवती से प्रार्थना करे कि जो भी प्रयोग हुआ है उसे रोक दें और जिस सिद्ध इष्ट मंत्र का वह नित्य जाप करता है उसका मान रखें, नींबू को पीड़ित पर से उतारे या स्पर्श कराए, फिर बलि काटकर निचोड़ दे; संबंधित ऊर्जा केवल मंत्र और नींबू की ऊर्जा के प्रभाव से पूरी तरह नष्ट होने लगती है।
उदाहरण के लिए वक्ता ऐसे व्यक्ति को लेते हैं जो जयंती मंगला काली का नित्य जाप करता है। जयंती मंगला काली में, वे कहते हैं, 11 शक्तियाँ चलती हैं, महाशक्तियाँ चलती हैं, पितरों की समस्त शक्तियाँ चलती हैं। तो जो प्रतिदिन पाँच माला, या एक माला भी, जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी का जाप कर रहा है और उस मंत्र का कम से कम 11,000 जप कर चुका है — 10,000 पार, 11,000 पार — और फिर देखता है कि परिवार के किसी सदस्य पर कोई मंत्र का प्रयोग, कोई तंत्र का प्रयोग है और उसकी शारीरिक-मानसिक हानि हो रही है। ऐसी अवस्था में, वे कहते हैं, यह व्यक्ति — जो नियम से एक समय, एक स्थान पर दीप प्रज्वलित कर रोज़ पाँच माला जाप करता आ रहा है — कच्चा नींबू हाथ में लेकर उसी मंत्र से कम से कम 11 बार अभिमंत्रित करे, भगवती से प्रार्थना और दुहाई करते हुए: भगवती, इनके ऊपर जिस भी प्रकार का प्रयोग किया गया है उसे आप रोक दीजिए; हम आपसे निवेदन करते हैं, और हमारा जो सिद्ध मंत्र है, इष्ट मंत्र है जिसका हम नित्य नियम से जाप करते हैं, उससे इसे अभिमंत्रित कर रहे हैं — आप कृपया मान रखिए। इतना बोलकर नींबू को पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से उतारकर, या स्पर्श कराकर, फिर बलि काट दी जाती है और निचोड़ दिया जाता है। जो भी संबंधित ऊर्जा होगी, वह मात्र आपके मंत्र और नींबू की ऊर्जा के प्रभाव से पूरी तरह नष्ट होने लगेगी।
पेशेवर के सामने नींबू के काट से मिली राहत थोड़े समय की हो सकती है
दस मिनट से एक घंटा, फिर पेशेवर देखता है कि विद्या कटी और दूसरा प्रयोग कर देता है
वक्ता चेताते हैं कि मंत्र से अभिमंत्रित नींबू के काट के बाद पीड़ित को 10-15 मिनट, आधा घंटा या एक घंटा ही राहत मिल सकती है। आप अनप्रोफेशनल हैं; जिसने प्रयोग किया है वह प्रोफेशनल है, वह देखेगा कि उसकी विद्या काटी गई है और दूसरा प्रयोग कर देगा — और समस्या फिर ज्यों की त्यों बन जाएगी।
यहाँ भी, वक्ता कहते हैं, काट-बलि वाली पहले की बात लागू हो जाती है: पीड़ित व्यक्ति को 10-15 मिनट, आधा घंटा, एक घंटे के लिए राहत मिल सकती है। आप अनप्रोफेशनल हैं, वे कहते हैं; जो व्यक्ति प्रोफेशनल है वह देखेगा कि उसकी विद्या को काटा गया है और पुनः प्रयोग करेगा, कोई दूसरा प्रयोग कर देगा, और समस्या फिर ज्यों की त्यों बन जाएगी।
बंधन अपने ही मन के उच्चाटन का एक रूप
बँधी दुकान के ग्राहक छूटते हैं; बँधे व्यक्ति का दुकान बैठने, ऑफिस जाने का मन नहीं करता
जिसका शरीर "बाँध दिया गया" हो, उस विषय पर वक्ता कहते हैं कि बंधन एक तरह से उच्चाटन का दूसरा रूप है — षट्कर्म का उच्चाटन लगभग वही है जो बंधन। किसी की दुकान बाँध दी जाए तो ग्राहक उच्चाटित हो जाते हैं: बेचैनी, यह सोचना कि महँगा देता है, खराब सामान देता है, और वे आना छोड़ देते हैं; किसी व्यक्ति को बाँधा जाए तो वह अपने काम से उच्चाटित हो जाता है — दुकान पर बैठने, ऑफिस जाने, सही से काम करने का मन नहीं करता। बाँधा किसे गया है? आपके अपने मन को; इसमें सब कुछ मन से ही होता है।
दूसरा विषय, वक्ता कहते हैं, यह कि किसी के शरीर का बंधन कर दिया गया हो। बंधन से क्या होता है? सामान्यतः हम कहते हैं कि बाँध दिया गया है। एक तरीके से देखें, वे कहते हैं, तो यह उच्चाटन का दूसरा रूप है: षट्कर्म में जो उच्चाटन है, लगभग वही बंधन है। उच्चाटन में, जैसे किसी की दुकान बाँध दी गई तो ग्राहक उच्चाटित हो जाएँगे — जो वहाँ आते थे उनका मन उस जगह से हट जाएगा, बेचैनी रहेगी, सोचेंगे: छोड़ो, यहाँ से नहीं लेंगे, बहुत महँगा देता है, सामान खराब देता है। ठीक उसी प्रकार किसी व्यक्ति को बाँधा गया हो तो वह अपने काम से उच्चाटित हो जाएगा — दुकान है पर बैठने का मन नहीं, ऑफिस जाने का मन नहीं, वहाँ सही से काम करने का मन नहीं। यही उच्चाटन है, और इसी को कहते हैं कि बाँध दिया गया, काम नहीं बन रहा। बाँधा किसे गया? आपके अपने मन को; इसमें सब कुछ मन से ही हो रहा है।
जब कष्ट मेडिकल नहीं, अभिचारिक हो — शरीर पर बलि
सोखा द्वारा नई सिद्ध विद्या आज़माने का मामला भी; सावधानी रखें तो काटने से हानि नहीं
वक्ता कहते हैं कि जब बंधन या उच्चाटन किया गया हो, या समझ आ रहा हो कि परेशानी मेडिकल इशू नहीं बल्कि कोई अभिचारिक अवस्था है, तो शरीर पर ही बलि देनी होती है। इसमें वह मामला भी आता है जब कोई सोखा-ओझा कोई मंत्र विद्या सिद्ध करके किसी पर चलाकर देखता है कि सफल होगी या नहीं — ऐसे में भी बहुत बार किसी को घात लग जाता है। लोग डरते हैं कि कहीं कट जाएगा, रक्त निकलेगा, पर वे कहते हैं कि कोई विशेष हानि नहीं होती, बस सावधानी रखनी चाहिए कि कटना-फटना न हो।
यदि ऐसी बंधन की प्रक्रिया कर दी गई हो, वक्ता कहते हैं — या उच्चाटन के साथ-साथ यह समझ आ रहा हो कि हमारे ऊपर की परेशानी कोई मेडिकल इशू नहीं, किसी प्रकार की अभिचारिक अवस्था है — तो इन अवस्थाओं में शरीर के ऊपर बलि देनी होती है। कई बार लोग इससे थोड़े भयभीत हो जाते हैं — कहीं इधर-उधर कट जाएगा, रक्त निकल जाएगा तो हानि होगी। हानि ऐसी कोई विशेष नहीं होती, वे कहते हैं, लेकिन सावधानी रखनी चाहिए: कटना-फटना नहीं चाहिए। वे यहाँ वह मामला भी जोड़ते हैं जब कोई सोखा, ओझा जैसा जानने वाला व्यक्ति कोई मंत्र विद्या सिद्ध करके किसी पर चलाकर देखता है कि उसकी विद्या सफल होगी या नहीं; ऐसे में भी बहुत बार किसी को घात लग जाता है। ऐसी कोई समस्या उपस्थित हो गई हो तो शरीर के ऊपर ही बलि देनी होती है।
शरीर पर नींबू बलि के तीन स्थान: आज्ञा, अनाहत और नाभि
ललाट और छाती पर आसान, नरम नाभि पर अधिक सावधानी; अभिमंत्रित नींबू झट काटता है, 5-30 मिनट में राहत
वक्ता कहते हैं कि शरीर पर बलि आज्ञा चक्र पर दी जाती है; यदि समस्या इतनी अधिक हो कि उठने लायक स्थिति भी न बची हो, तो तीन जगह — ललाट पर आज्ञा चक्र, दोनों छाती के बीच हृदय जहाँ अनाहत माना जाता है और प्राण वायु का स्थान है, और नाभि के पास। छाती और ललाट पर काटना आसान है, पर नाभि के पास पेट पर अधिक सावधानी चाहिए क्योंकि वह कठोर जगह नहीं है। यदि नींबू अपने सिद्ध मंत्र से अभिमंत्रित है तो ये चीज़ें झट-झट कट जाती हैं, और 5 से 30 मिनट में रोगी को राहत महसूस होने लगती है।
साबर मंत्र जागरण में नींबू की बलि उग्र देवताओं को पुष्ट करती है
मंत्र जगाते समय सब नींबू की बलि देते हैं; देवता की शक्ति बढ़ती है, मंत्र तीव्र होता है
तीसरा, वक्ता उनकी बात करते हैं जो प्रोफेशनली किसी मंत्र को, विशेषकर साबर मंत्र को, जागृत कर रहे हैं: मंत्र जागरण की प्रक्रियाओं में, वे कहते हैं, व्यक्तिगत रूप से सभी नींबू की बलि देते हैं। उग्र देवताओं को बलि दी जाती है; नींबू से वे उग्र देवता पुष्ट होते हैं, उनकी सामर्थ्य और शक्ति बढ़ती है, और आपका मंत्र जागृत और तीव्र होता है।
तीसरा, वक्ता उन लोगों की बात लेते हैं जो प्रोफेशनली किसी मंत्र को जागृत कर रहे हैं, विशेष रूप से सबर मंत्र को। मंत्र जागरण की प्रक्रियाओं के निमित्त, वे कहते हैं, पर्सनली सभी निंबू बलि देते हैं। उग्र देवताओं की बलि दी जाती है; नींबू से वे उग्र देवता पुष्ट होते हैं, उनकी सामर्थ्य, उनकी शक्ति बढ़ती है, और आपका मंत्र जागृत होता है, तीव्र होता है।
नींबू बलि से जगाए मंत्र के प्रयोग में दो नींबू का नियम
प्रयोग पर एक व्यक्ति के सिर पर, कार्य सफल होते ही एक मंत्र के देवता को — महाभैरव का उदाहरण
वक्ता कहते हैं कि यह ध्यान रखना है कि जब भी नींबू की बलि से सिद्ध किया गया मंत्र बाद में किसी के तंत्र कार्य या किसी और चीज़ के लिए प्रयोग होगा, तो दो नींबू की बलि लगेगी: एक जिस व्यक्ति के निमित्त प्रयोग है उसके सिर के ऊपर (या पास में) काटकर, और दूसरी कार्य सफल या पूर्ण होने पर उस मंत्र के देवता को अलग से सेवा बलि — कार्य की बलि अलग, कार्य पूर्ण होने के बाद की बलि अलग। जैसे महाभैरव का प्रयोग करें और 1% भी सफलता मिले, तो पूर्ण होते ही उसी समय महाभैरव के नाम की बलि दे देनी है।
यह ध्यान रखना चाहिए, वक्ता कहते हैं: जब कभी किसी मंत्र को सिद्ध कर रहे हैं और उसमें नींबू की बलि दे रहे हैं, तो बाद में उस मंत्र का जब भी कहीं प्रयोग करेंगे — किसी के तंत्र कार्य के लिए या किसी और चीज़ के लिए — तो दो नींबू की बलि लगेगी। यह सिंपल सा, सामान्य सा उदाहरण है, वे कहते हैं। एक तो जिस व्यक्ति के निमित्त प्रयोग करेंगे उसके सिर के ऊपर काटकर, या पास में काटकर; यह एक तरीका हो गया। और दूसरी बलि तब देंगे जब कार्य सफल या पूर्ण हो जाए — प्रयोग के समय तो दी, उसके बाद उस मंत्र के देवता को अलग से बलि। यानी कार्य की बलि अलग हो गई, और कार्य पूर्ण होने के बाद की सेवा बलि अलग। यह सब, वे कहते हैं, साबर मंत्र के प्रयोग के निमित्त है। जैसे महाभैरव — महाभैरव का प्रयोग कर रहे हैं और 1% भी सफलता मिल रही है, तो बाद में महाभैरव के नाम की बलि दे देनी है, उसी समय, पूर्ण कर लेने के बाद। यह, वे कहते हैं, ध्यान रखना है।
प्रयोग का प्रभाव बहुत अधिक हो तो तीन नींबू से काट
सिर के ऊपर से काट का बढ़ा हुआ रूप
वक्ता कहते हैं कि सिर के ऊपर से नींबू काटने के अलावा, यदि प्रयोग का प्रभाव बहुत ज़्यादा हो तो तीन नींबू से काट करेंगे।
सिर के ऊपर से काटने के अलावा, वक्ता कहते हैं, यह भी: यदि प्रभाव बहुत ज़्यादा हो तो तीन नींबू से तंत्र काट करेंगे।
सिद्ध मंत्र से तीन चरणों में गृह कीलन: गंधक की धूनी, पीली सरसों, नींबू बलि सहित कील
शांति कर्म के भीतर रक्षा कर्म; पहले शरीर की निकारी; हनुमान, काली, गोरखनाथ या माला मंत्र
षट्कर्म में, वक्ता कहते हैं, शांति कर्म के भीतर रक्षा कर्म है — शरीर का बंधन और घर का बंधन, और इन दोनों से पहले शरीर की निकारी, उतारा। यदि गृह बंधन के लिए कोई मंत्र सिद्ध किया है — हनुमान जी का, काली जी का, गोरखनाथ बाबा का, माला मंत्र — तो कीलन के समय नींबू का सर्वश्रेष्ठ प्रयोग होता है। पहले घर को धूनी से खाली कराएँ: गोबर के सुलगते उपले पर गंधक की धूनी सबसे श्रेष्ठ है, सारी नकारात्मक ऊर्जाएँ निकल जाती हैं। दूसरे, बाँधने वाले मंत्र से पीली सरसों कम से कम 5 या 21 बार अभिमंत्रित कर पूरे घर में छींटें। तीसरे, उसी सिद्ध मंत्र से कील अभिमंत्रित कर ठोकें — जैसे मुख्य द्वार पर चौखट के पास, आगे या पीछे ज़मीन में तीन कील — और हर कील पर एक-एक नींबू की बलि अवश्य दें; इससे गृह बंधन पूर्ण हो जाता है।
वक्ता षट्कर्म के भीतर शांति कर्म पर आते हैं। शांति कर्म में रक्षा कर्म होता है: रक्षा के निमित्त हम शरीर का बंधन और घर का बंधन करते हैं, और इन दोनों से पहले शरीर की निकारी, उतारा। इसमें भी, यदि आपने कोई मंत्र सिद्ध किया है — मान लीजिए गृह बंधन के लिए मंत्र: हनुमान जी का, काली जी का, गोरखनाथ बाबा का, माला मंत्र आदि — और उससे अपने स्थान को कीलना चाहते हैं, तो उस कीलन के समय भी नींबू का सर्वश्रेष्ठ प्रयोग होता है। सबसे पहले घर को खाली कराना। घर खाली कराने के लिए जो धूनी दी जाती है, वह धूनी की प्रक्रिया अपनानी चाहिए; उससे पूरा घर खाली हो जाएगा। धूनी किससे देते हैं? गंधक की धूनी सबसे श्रेष्ठ होती है। गाय के गोबर के उपले को सुलगाकर, यदि घर का बंधन करना है तो सबसे पहले गंधक की धूनी दीजिए; जितनी भी नकारात्मक ऊर्जाएँ होंगी, सब उस समय निकल जाएँगी। जब वे बाहर निकल जाएँ, उसके बाद आपका जो इष्ट मंत्र है — जिससे घर बाँधने वाले हैं — उससे पीली सरसों अभिमंत्रित करके, कम से कम 5 या 21 बार मंत्र पढ़कर, पहले पूरे घर में अच्छे से छींटें। यह दूसरा चरण हो गया। तीसरे चरण में उसी सिद्ध घर-बाँधने वाले मंत्र से कील अभिमंत्रित करके ठोकेंगे। जब मुख्य द्वार पर कील ठोकेंगे तो दो नींबू की बलि लगेगी। मान लीजिए मुख्य द्वार पर चौखट के पास तीन कील ठोक दिए — चौखट के आगे या पीछे ज़मीन पर, भूमि पर। तो कील ठोकने के बाद — जैसे तीन कील ठोके — तीनों कील के ऊपर एक-एक नींबू की बलि अवश्य दें। उससे गृह बंधन पूर्ण रूप से हो जाएगा।
घर के कीलन के बाद गृह देवता और कुल भैरव की बलि
चौखट पर अपने गृह देवता को कपूर जलाकर बलि — परिसर के पास के किसी देवता को नहीं
घर को और मज़बूत करने के लिए, वक्ता कहते हैं, उस स्थान के देवी-देवता के नाम से बलि दी जाती है — यानी अपने गृह देवता, न कि परिसर के पास जो भी देवता हो: गृह देवता के नाम से चौखट पर नींबू की बलि दें, दोनों टुकड़े घर के दोनों ओर रखें और उन पर कपूर जलाएँ। दूसरी बलि कुल देवता, कुल के भैरव के नाम से — यदि भैरव जी पूजित हैं। इस प्रक्रिया को लेकर चलें तो, वे कहते हैं, गृह पूरी तरह बंधित हो जाता है।
दूसरा, घर को और मज़बूत करने के लिए, वक्ता कहते हैं, उस स्थान के देवी-देवता के नाम से बलि दी जाती है। स्थान के देवी-देवता का मतलब आपके गृह के गृह देवता। इसमें यह नहीं देखना है कि घर के परिसर के पास कौन सा देवता है या नहीं — उनसे संबंधित नहीं। गृह देवता के नाम से चौखट पर बलि देते हुए नींबू के दो टुकड़ों को घर के दोनों ओर रखकर उनके ऊपर कपूरकपूर, जिसे पूजन के अंत में जलाया जाता है। जलाएँगे। यह एक बलि हो गई। दूसरी बलि कुल के देवता, कुल भैरव के नाम से — यदि भैरव जी पूजित हैं तो। इस प्रक्रिया को लेकर चलें तो, वे कहते हैं, गृह पूरी तरह बंधित हो जाता है।
बंधित घर पर नींबू की बलि एक मुहर
मज़बूती मंत्र की क्षमता पर निर्भर; रोगी का कमरा भी इसी तरह बाँध सकते हैं
वक्ता कहते हैं कि गृह बंधन कितना मज़बूत है यह इस पर निर्भर करता है कि साधक ने जिस मंत्र से बंधन-कीलन किया उसमें कितनी क्षमता है; नींबू की प्रक्रिया स्टैंप है — बाँधने की प्रक्रिया के बाद नींबू की बलि दे दी तो मुहर लग गई कि घर बंध गया, कोई नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर सकती; तगड़ा बंधन हो जाता है। इसी तरह, वे जोड़ते हैं, किसी रोगी या परेशान व्यक्ति का कमरा भी बाँधा जा सकता है, और नींबू की बलि देकर बाँधना सर्वश्रेष्ठ है।
घर कितना बंधता है, वक्ता कहते हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि साधक ने जिस मंत्र से घर का गृह बंधन और उत्कीलन किया है उसमें कितनी क्षमता है। नींबू की प्रक्रिया, वे कहते हैं, स्टैंप है: घर बाँधने की जो प्रक्रिया आपने की, उसके बाद निंबू बलि दे दी तो स्टैंप लग गया — घर बंध गया, इसमें कोई नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर सकती। तगड़ा बंधन हो जाता है। तो यह एक प्रयोग हो गया: शांति कर्म में घर का बंधन ऐसे कर सकते हैं। बहुत बार, वे जोड़ते हैं, किसी के कमरे में कोई समस्या है, कोई रोगी है, किसी को बहुत दिक्कत है — उसके कमरे को भी इसी तरह बाँध सकते हैं। हाँ, नींबू आदि की बलि देकर बाँधें तो सर्वश्रेष्ठ होता है; बंधन की प्रक्रिया बहुत सही तरीके से हो जाती है। यह, वे कहते हैं, शांति कर्म का प्रयोग हो गया।
स्वयं सिद्ध मंत्रों और लौंग जैसी जड़ी-बूटियों से मोहन और वशीकरण
जड़ी-बूटियाँ जो वे सार्वजनिक नहीं बताते; 108 की एक माला से अधिकार; क्षुद्र मंत्र की आपत्ति
मोहन, आकर्षण और वशीकरण में, वक्ता कहते हैं, परिणाम फिर सिद्ध मंत्र पर निर्भर करता है; मोहिनी प्रक्रियाओं में लौंग के समान दिखने वाली कुछ जड़ी-बूटियों का भी प्रयोग होता है, जिनका प्रयोग सार्वजनिक रूप से बताना उचित नहीं। सबसे बड़ी बात स्वयं सिद्ध मंत्रों की है — विशिष्ट मंत्र जिन्हें सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं: किसी शुभ मुहूर्त में या किसी भी समय एक बार 108 की एक माला जप लें और अधिकार मिल गया। बहुत लोग इन्हें क्षुद्र श्रेणी का मंत्र कहते हैं और कहते हैं कि इतनी जल्दी प्रयोग से प्रारब्ध नहीं कटेगा, दिक्कत होगी — वह अलग विषय है, वे कहते हैं; पर इन मंत्रों और जड़ियों से आकर्षण-वशीकरण के सब प्रयोग संपन्न होते हैं।
अब आता है मोहन, वक्ता कहते हैं — mohan की प्रक्रिया, और आकर्षण-वशीकरण की। इनमें भी परिणाम सिद्ध मंत्र पर निर्भर करेगा। मोहिनी आदि प्रक्रियाओं में कुछ जड़ी-बूटियों का भी प्रयोग होता है — लौंग के समान दिखने वाली कुछ जड़ी-बूटियाँ विशेष रूप से प्रयोग होती हैं — और सार्वजनिक रूप से इनका प्रयोग बताना उचित नहीं, वे कहते हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह कि स्वयं सिद्ध मंत्रों का प्रयोग होता है। कुछ मंत्र ऐसे विशिष्ट होते हैं जो बड़े स्वयं सिद्ध होते हैं; उन्हें सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती। किसी भी शुभ मुहूर्त में या किसी भी समय मात्र एक बार एक माला, 108 बार उस मंत्र का जाप कर लीजिए, नाम मात्र के लिए, और अधिकार प्राप्त हो गया। हालाँकि बहुत से लोग यह भी कहते हैं कि ये क्षुद्र श्रेणी के मंत्र हैं — इस प्रकार इतनी जल्दी प्रयोग करने से हमारा प्रारब्धपूर्व कर्मों द्वारा पहले से गतिमान भाग्य का वह अंश — साधना व सत्कर्म इसकी तीव्रता को घटा सकते हैं, किंतु पूर्णतः मिटा नहीं सकते। नहीं कटेगा, दिक्कत होगी। वह, वे कहते हैं, एक अलग विषय है। लेकिन जब इन मंत्रों का और साथ में इन जड़ियों का प्रयोग किया जाता है, तो आकर्षण-वशीकरण के जितने प्रयोग हैं — किसी को मोहित करना, वशीकृत करना — वे संपन्न होते हैं।
वशीकरण, उच्चाटन और विद्वेषण में नींबू का रस: प्रयोग जिन्हें वक्ता प्रोत्साहित नहीं करते
उनका उद्देश्य ऐसे प्रयोगों को सेवा-पूजा और बलि से शांत करना है, कराना नहीं
वक्ता कहते हैं कि स्वयं सिद्ध मंत्रों से नींबू अभिमंत्रित करके, उस देवता के नाम की बलि देते हुए काटकर उसका रस पानी में मिलाया जाता है और जिसे वशीकृत या आकर्षित करना है उसे किसी भी तरह पिला दिया जाता है — और उसे दिक्कत होती है। उच्चाटन में भी नींबू का ऐसा प्रयोग होता है, जिसमें व्यक्ति घर से दूर भागता है, घर में रहने का मन नहीं करता, और विद्वेषण में, जिसमें लोग आपस में लड़ते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य, वे कहते हैं, ये प्रक्रियाएँ कराना नहीं, बल्कि ऐसा कुछ हुआ हो तो सेवा-पूजा और बलि देकर उसे शांत करना है — हालाँकि विद्वेषण आदि सब में नींबू का पूरा प्रयोग होता है।
इसमें और भी अनेक प्रक्रियाएँ हैं, वक्ता कहते हैं। इन्हीं स्वयं सिद्ध मंत्रों का प्रयोग करके नींबू को अभिमंत्रित कर दिया; उसी नींबू को काटकर उसका रस, उस देवता के नाम पर बलि देते हुए, पानी में मिलाकर, फिर जिसे भी वशीकृत या आकर्षित करना है उसे किसी भी तरह पिला देते हैं — तो उसे दिक्कत होती है। उच्चाटन में और विद्वेषण में भी इसका प्रयोग होता है: उच्चाटन में व्यक्ति उच्चाटित होकर घर से दूर भागेगा, घर में रहने का मन नहीं करेगा, तरह-तरह की परेशानियाँ होंगी; विद्वेषण में आपस में लड़ाई करेंगे। इन प्रक्रियाओं में भी नींबू का प्रयोग होता है। वक्ता का मुख्य उद्देश्य, वे कहते हैं, इन प्रक्रियाओं में प्रयोग कराना नहीं, बल्कि — यदि ऐसा कुछ हो गया है — तो सेवा-पूजा और बलि आदि देकर उसे शांत करना है। हालाँकि, वे कहते हैं, विद्वेषण आदि इन सभी चीज़ों में इसका पूरा प्रयोग होता है।
11,000 बार जपा गया कवच उस देवता को आपके साथ खड़ा कर देता है
इष्ट के कवच का न्यूनतम जो हर साधक के पास हो
वक्ता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रयोग अपने इष्ट मंत्र और कवच का है। जब परिवार का कोई सदस्य जो पूजा-पाठ नहीं करता (स्वच्छता रखे या न रखे) शरीर में कष्ट पाए, तो प्रश्न यह है कि आपने कौन सा मंत्र और कवच सिद्ध किया है। किसी एक देवता के कवच को 11,000 बार जप लें, वे कहते हैं, तो समझ लीजिए कि वह देवता प्रचंड रूप से आपका सहयोग और साथ देने के लिए खड़े हैं; इसलिए अपने इष्ट के किसी कवच का कम से कम 11,000 जप कर लेना चाहिए।
सर्वश्रेष्ठ प्रयोग, वक्ता कहते हैं, जो वे सबके सामने रखना चाहते हैं, वह अपने इष्ट मंत्र और कवच का प्रयोग है। जब भी परिवार के किसी सदस्य को शरीर में कोई दिक्कत हो, और आपको लगे कि वह व्यक्ति पूजा-पाठ नहीं करता — पर कम से कम स्वच्छता रखता है, या मान लीजिए वह भी नहीं रखता — तो प्रश्न है: आपने कौन सा मंत्र और कवच सिद्ध किया है? किसी एक देवता के कवच को 11,000 बार जप लेते हैं, वे कहते हैं, तो समझ लीजिए कि वह देवता प्रचंड रूप से आपका सहयोग और साथ देने के लिए खड़े हैं। तो अपने इष्ट, आराध्य के किसी भी कवच का कम से कम 11,000 जप तो कर लेना चाहिए।
कवच से अभिमंत्रित नींबू परिवार के सदस्य के शरीर पर बंधन के रूप में काटना
जो बीमार है और पूजा करने में असमर्थ; बंधन तब तक रहता है जब तक कोई तगड़े से न तोड़े
वक्ता कहते हैं कि यदि आपने जप करके कवच सिद्ध किया है और घर-परिवार में कोई बीमार पड़ रहा है जो पूरी तरह पूजा-पाठ करने में सक्षम नहीं, तो उसी कवच से नींबू अभिमंत्रित करके, जिसे सुरक्षित करना है उसके शरीर पर घुमाकर, बंधन के लिए बोलकर शरीर पर ही काट दें। जब तक कोई उस बंधन को तगड़े तरीके से तोड़ेगा नहीं, वह खुलेगा नहीं। इस प्रकार, वे कहते हैं, नींबू के अनेक प्रयोग हैं।
यदि आपने जप आदि करके कवच सिद्ध करके रखा है, वक्ता कहते हैं, और आपके घर-परिवार में कोई बीमार पड़ रहा है जो पूरी तरह पूजा-पाठ करने में सक्षम नहीं है, तो ऐसी स्थिति में जो कवच आपने सिद्ध किया है उसी से नींबू को अभिमंत्रित करें। फिर जिसे सुरक्षित करना है उसके शरीर पर घुमाकर, बंधन के लिए बोलकर, शरीर पर ही काट दें। जब तक कोई उस बंधन को तगड़े तरीके से तोड़ेगा नहीं, तब तक वह खुलेगा नहीं। इस प्रकार, वे कहते हैं, नींबू के अनेक प्रयोग हैं।
पीला पड़ा नींबू केवल अंतिम विकल्प
तंत्र के हर प्रयोग में नींबू हरा ही रहे
वक्ता कहते हैं कि विशेष रूप से यह ध्यान रखना है कि जो नींबू पीला हो गया है उसे सबसे अंतिम विकल्प मानें। नहीं तो अधिकतम प्रयास करें कि नींबू हमेशा हरा रहे, और तंत्र आदि के किसी भी प्रयोग में हरे, कच्चे नींबू का ही प्रयोग करें।
एक बात विशेष रूप से ध्यान रखनी है, वक्ता कहते हैं: जो नींबू पीला हो जाता है उसे सबसे लास्ट ऑप्शन मानिए। नहीं तो अधिकतम प्रयास करना चाहिए कि नींबू कभी भी हरा रहे, और तंत्र आदि के प्रयोगों के लिए हम हमेशा हरे नींबू, कच्चे नींबू का ही प्रयोग करें, किसी भी प्रकार से।
जब कोई गुनिया न मिले तो नींबू के प्रयोग स्वयं करना
बिना मंत्र, बिना किसी जानकार को बुलाए, उस शक्ति के लिए जो शांत नहीं हो रही
वक्ता कहते हैं कि इन सब प्रयोगों के सिवाय, यदि किसी पर कोई ऐसी शक्ति आ गई है जो शांत नहीं हो रही, समस्या बढ़ी हुई है और आसपास कोई जानकार व्यक्ति नहीं मिल रहा, और स्वयं ही उसे कम से कम शांत करना है — तो बिना किसी मंत्र के, बिना किसी गुनिया को बुलाए या आह्वान किए, यदि आप अपनी समस्या के लिए स्वयं इन सब चीज़ों का प्रयोग करते हैं तो उसका निराकरण आपके जीवन में हो जाता है।
इन सभी के सिवाय, वक्ता कहते हैं, यदि किसी के ऊपर कोई ऐसी शक्ति आ गई है जो शांत नहीं हो रही, कोई जानकार व्यक्ति नहीं मिल रहा, समस्या बढ़ी हुई है — आसपास कोई जानकार प्राप्त नहीं हो रहा और हमें स्वयं से ही इसे कम से कम शांत करना है — तो बिना किसी मंत्र के, बिना किसी गुनिया व्यक्ति का आह्वान किए, बुलाए, यदि आप अपनी समस्या के निमित्त स्वयं ही इन सब चीज़ों का प्रयोग करते हैं तो उसका निराकरण आपके जीवन में हो जाता है।
सावधानी: शांति कर्म के सिवाय अन्य कर्मों में नींबू
वहाँ दोष गंभीर विषय बन जाता है; प्रतीकात्मक बलि फिर भी सच्ची, तगड़ी सुरक्षा देती है
वक्ता दो बातें अलग करते हैं: शांति कर्म में बलि के जो प्रयोग बताए गए, जिनसे हमारी सुरक्षा होती है, और शांति कर्म के सिवाय अन्य कर्मों में नींबू का प्रयोग — जो ऐसा करते हैं उन्हें बड़ा सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि वहाँ कोई दोष उत्पन्न हो गया तो बहुत दिक्कत वाला विषय हो जाता है। बलि बलि होती है, वे कहते हैं: प्रतीकात्मक बलि देकर भी आप सुरक्षित हो सकते हैं, और बड़ी-बड़ी चीज़ों के सामने तगड़े हो सकते हैं।
नींबू में, वक्ता कहते हैं, इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए: दो प्रक्रियाएँ हैं। एक तो आज बलि को लेकर जो चर्चा हुई — शांति कर्म में कैसे प्रयोग करेंगे, जिससे हमारी सुरक्षा, सब होगा। लेकिन जो लोग शांति कर्म के सिवाय अन्य कर्मों में इसका प्रयोग करते हैं, उन्हें बड़ा सोच-समझकर इन सब चीज़ों का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि यदि किसी प्रकार का कोई दोष उत्पन्न हो गया तो बहुत दिक्कत वाला विषय हो जाता है। बलि बलि होती है, वे कहते हैं। प्रतीकात्मक बलि देकर आप किसी प्रकार सुरक्षित हो सकते हैं, और वह तगड़ा भी हो सकता है — बड़ी-बड़ी चीज़ों से तगड़े हो सकते हैं।
समस्या बार-बार लौटे तो: इष्ट को बलि और सुबह-दोपहर-शाम दोहराव
जब काट टिकता नहीं तब क्या करें
वक्ता कहते हैं कि जब समस्या बार-बार बन रही हो और कट न रही हो, बार-बार दिक्कत हो रही हो, तो दो बातें करनी हैं: पहली, आपने जो इष्ट मंत्र सिद्ध किया है उसके देवी-देवता को बलि; और दूसरी, इसी नींबू की प्रक्रिया को बार-बार दोहराना — सुबह, दोपहर, शाम। तब ऐसी समस्याएँ सुलझने लगती हैं।
यह ज़रूर है, वक्ता कहते हैं: जब कभी समस्या बन रही है और कट नहीं रही, बार-बार दिक्कत हो रही है, तो एक तो आपने जो इष्ट मंत्र सिद्ध किया है उसके देवी-देवता को बलि; और दूसरा, इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहराना — सुबह, दोपहर, शाम। तब, वे कहते हैं, ये समस्याएँ इस प्रकार सुलझने लगती हैं।
दुर्गा नाम की सिद्धि नाम जप से होती है
नवरात्र के लिए बताए दुर्गा नाम पर एक श्रोता को उत्तर
एक श्रोता के प्रश्न पर कि नवरात्र में जिस दुर्गा नाम का महत्व बताया था उसे कैसे सिद्ध करें, वक्ता उत्तर देते हैं कि भगवती के नाम का जप करके उसे सिद्ध किया जा सकता है।
नॉनवेज-शराब लेने वाला भगवती भक्त कौन सा कवच करे — साबरी या कामाख्या?
कोई भी कर सकते हैं; धारण के लिए अघोर शिव या अघोर काली कवच; कामाख्या अंतिम विकल्प
एक श्रोता, जो भगवती का भक्त है पर नॉनवेज और शराब लेता है, पूछता है कि साबरी कवच करे या कामाख्या कवच; वक्ता कहते हैं कि किसी को भी कर सकते हैं। शरीर पर धारण करने वाले कवच के लिए, अघोर कवच — अघोर शिव कवच, अघोर काली कवच — धारण करें तो चलेगा। कामाख्या कवच को, वे कहते हैं, अंतिम विकल्प रखें।
प्रश्नों में, वक्ता एक श्रोता को उत्तर देते हैं जो कहता है कि वह भगवती का भक्त है पर नॉनवेज और शराब लेता है, और पूछता है कि साबरी कवच और कामाख्या कवच में से किसे करे। किसी को भी कर सकते हैं, वक्ता कहते हैं। दूसरी बात, पहनकर रखने वाले कवच के बारे में: अघोर कवच — अघोर शिव कवच, अघोर काली कवच, वे सब — धारण करते हैं तो चलेगा। कामाख्या कवच को, वे कहते हैं, लास्ट ऑप्शन रखिए।
क्या नींबू या जायफल की बलि रोज़ दी जा सकती है?
रोज़ की बलि बाध्य नियम बन जाती है जिसका छूटना हानि करता है; वार या तिथि तय करें; लौंग-कपूर रोज़ ठीक
नहीं — वक्ता कहते हैं कि नींबू की बलि यदि कभी प्रतिदिन दी जाए तो वह नियमबद्ध हो जाती है, जैसे अन्य क्षेत्रों में जहाँ रोज़ बलि चढ़ती है तो चढ़ानी ही है। यदि आपने नित्य बलि आरंभ कर दी, चाहे जायफल की, चाहे नींबू की, तो वह समस्या वाला विषय हो जाता है, क्योंकि जो बलि कंटिन्यू दे रहे हैं वह देते रहनी है, बीच में छूटनी नहीं चाहिए; कहीं चले गए, बलि छूट गई, देने वाला कोई नहीं, तो हानिकारक प्रभाव बन जाता है। उनके अनुसार प्रतिदिन लौंग-कपूर की बलि ठीक है — वह अलग अग्नि बलि है, आरती, सुगंध, धूप में प्रयोग होती है — पर नींबू और जायफल हमेशा कंटिन्यू देना संभव नहीं, इसलिए साप्ताहिक वार या तिथि तय रखें।
प्रतिदिन बलि के प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि नींबू की बलि यदि कभी प्रतिदिन दी जाए तो वह नियमबद्ध हो जाती है। जैसे अन्य क्षेत्रों में वहाँ प्रतिदिन बलि चढ़ती है तो चढ़ानी ही है, वैसे ही यदि आपने नित्य बलि देना आरंभ कर दिया — चाहे जायफलजायफल, घी में डुबोकर पूर्णाहुति से पूर्व अर्पित — नवदुर्गाओं में से प्रत्येक हेतु एक-एक। की बलि, चाहे नींबू की — तो वह समस्या वाला विषय हो जाता है। समस्या इसलिए, वे समझाते हैं, कि यदि बलि कंटिन्यू दे रहे हैं तो देते रहिए; बीच में छूटनी नहीं चाहिए। अब आप कहीं चले गए, कोई विषय हुआ, बलि छूट गई, देने वाला कोई नहीं — तो हानिकारक प्रभाव बन जाएगा। उनके अनुसार प्रतिदिन की बलि में लौंग-कपूरकपूर, जिसे पूजन के अंत में जलाया जाता है। की बलि ठीक है — वह एक अलग अग्नि बलि है; आरती में प्रयोग हुई, सुगंध में, धूप में, उसमें कोई समस्या नहीं। लेकिन नींबू या जायफल देते हैं तो वह हमेशा कंटिन्यू देना संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए ध्यान रखिए: हाँ, साप्ताहिक या तिथि कुछ फिक्स रखिए और उस दिन दिया कीजिए।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।