नींबू और तंत्र के गूढ़ प्रयोग — तंत्र काट, शरीर बंधन, गृह कीलन और कवच से रक्षा

कच्चे हरे नींबू के तंत्र प्रयोगों पर वक्ता की चर्चा — तंत्र काट, शरीर पर बलि, मंत्र जागरण, गृह बंधन और कीलन, इष्ट कवच विधि — तथा पीले नींबू, शांति से इतर प्रयोगों और नित्य बलि पर उनकी सावधानियाँ।

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01

तंत्र प्रयोगों में कौन सा नींबू प्रयोग करना चाहिए?

हर षट्कर्म और रक्षा प्रयोग के लिए हरा कच्चा "कुँवारा" नींबू

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:24–02:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नींबू हर गृहस्थ के घर की आवश्यकता है, क्योंकि एक बार सही से जान लें तो षट्कर्म से जुड़े हर प्रयोग और हर रक्षात्मक प्रयोग में इसका प्रयोग कर पाएँगे। नींबू की कई प्रजातियाँ हैं और तंत्र प्रयोगों में अलग-अलग नींबू प्रयोग होते हैं, पर जो एक नींबू षट्कर्म के किसी भी विषय — रक्षात्मक प्रयोग, बंधन आदि — में चलता है, वह हरा, कच्चा नींबू है, जिसे तंत्र की भाषा में प्रायः कुँवारा नींबू कहा जाता है; वे कहते हैं कि उसी का सर्वाधिक प्रयोग करें।

02

बिना किसी मंत्र के अपने देवता के नाम से नींबू की बलि द्वारा तंत्र काट

महाकाली की नित्य सात्विक पूजा का उदाहरण; 20-30% त्वरित लाभ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:33–03:26

वक्ता कहते हैं कि सबसे सीधा तंत्र काट बिना किसी मंत्र के होता है: जो कोई, मान लीजिए, भगवती महाकाली की नित्य सात्विक दक्षिणाचारी पूजा करता है — उनके मंत्रों का जाप, धूप-दीप-नैवेद्य, आरती — और उसे लगे कि उस पर कोई तंत्र का प्रयोग है, तो उनका स्मरण करते हुए (भगवती को बलि प्रिय है) नींबू की बलि देकर उस प्रयोग को रोकने की प्रार्थना करे; कम से कम 20-30% लाभ त्वरित मिलता है और वह चीज़ रुक जाती है। वे ज़ोर देते हैं कि इसमें किसी देवी को बलि नहीं दी जा रही।

03

बलि को दोगुनी बलि से काटा जाता है

जिस गुनिया का प्रयोग अभी सक्रिय है, वह एक नींबू बलि को जोड़ा बलि से काट सकता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:27–03:49

वक्ता नींबू बलि से काट पर एक सावधानी जोड़ते हैं: जिस जानकार, गुनिया व्यक्ति का प्रयोग आपने बलि देकर रोका है, वह अभी भी सक्रिय हो सकता है और आपकी बलि का काट जोड़ा बलि देकर कर सकता है। बलि को डबल बलि से काटा जाता है — एक बलि दी तो दो बलि — और वे इसे सामान्य सा विषय कहते हैं।

वक्ता एक सावधानी जोड़ते हैं। हो सकता है कि जो प्रयोग आपने बलि देकर रोका है, उसे करने वाला जानकार, गुनिया व्यक्ति अभी भी एक्टिव हो — और वह आपकी बलि का काट जोड़ा बलि देकर कर दे। यानी बलि को डबल बलि से काटा जाता है, वे कहते हैं; यह सामान्य सा विषय है। एक बलि दी तो दो बलि।

04

एक नींबू की बलि किसी भी प्रयोग को क्यों काट सकती है

बलि प्रक्रिया से निकली ऊर्जा प्रयोग की ऊर्जा को काटती है — उस स्तर की भक्ति या जागृत मंत्र हो तो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:50–04:32

वक्ता समझाते हैं कि सामान्यतः हम नींबू काटकर उसका रस पीते हैं, पर बलि की प्रक्रिया में उससे एक ऊर्जा निकलती है; वही ऊर्जा किसी देवता या मंत्र के माध्यम से प्रक्षेपित होकर किसी को परेशान करती है, और हम उसी ऊर्जा को दूसरी ऊर्जा से काटते हैं। जिसने भूत-प्रेत या प्रेत-पिशाच की शक्ति सिद्ध की है, वह उसे ऐसे ही नहीं चला देता — बलि देगा, नैवेद्य देगा, धूप देगा, कुछ तो देगा। उन सबका काट, वे कहते हैं, मात्र एक नींबू से हो सकता है, पर क्षमता अपने में होनी चाहिए: या तो उस स्तर की भक्ति, या जागृत मंत्र।

05

मंत्र से अभिमंत्रित नींबू का काट: जयंती मंगला काली का उदाहरण

11,000 जप पार कर चुका साधक कच्चे नींबू को 11 बार अभिमंत्रित कर, पीड़ित पर उतारकर काटता-निचोड़ता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:33–06:05

वक्ता का उदाहरण: जो कोई जयंती मंगला काली का रोज़ पाँच माला (या एक भी) जाप करता है — जिस मंत्र में 11 शक्तियाँ, महाशक्तियाँ और पितरों की समस्त शक्तियाँ चलती हैं — और 10-11,000 जप पार कर चुका है, वह देखता है कि परिवार के किसी सदस्य पर मंत्र या तंत्र का प्रयोग है और उसकी शारीरिक-मानसिक हानि हो रही है। वह कच्चा नींबू हाथ में लेकर उसी मंत्र से कम से कम 11 बार अभिमंत्रित करे, भगवती से प्रार्थना करे कि जो भी प्रयोग हुआ है उसे रोक दें और जिस सिद्ध इष्ट मंत्र का वह नित्य जाप करता है उसका मान रखें, नींबू को पीड़ित पर से उतारे या स्पर्श कराए, फिर बलि काटकर निचोड़ दे; संबंधित ऊर्जा केवल मंत्र और नींबू की ऊर्जा के प्रभाव से पूरी तरह नष्ट होने लगती है।

06

पेशेवर के सामने नींबू के काट से मिली राहत थोड़े समय की हो सकती है

दस मिनट से एक घंटा, फिर पेशेवर देखता है कि विद्या कटी और दूसरा प्रयोग कर देता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:06–06:33

वक्ता चेताते हैं कि मंत्र से अभिमंत्रित नींबू के काट के बाद पीड़ित को 10-15 मिनट, आधा घंटा या एक घंटा ही राहत मिल सकती है। आप अनप्रोफेशनल हैं; जिसने प्रयोग किया है वह प्रोफेशनल है, वह देखेगा कि उसकी विद्या काटी गई है और दूसरा प्रयोग कर देगा — और समस्या फिर ज्यों की त्यों बन जाएगी।

07

बंधन अपने ही मन के उच्चाटन का एक रूप

बँधी दुकान के ग्राहक छूटते हैं; बँधे व्यक्ति का दुकान बैठने, ऑफिस जाने का मन नहीं करता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:34–07:37

जिसका शरीर "बाँध दिया गया" हो, उस विषय पर वक्ता कहते हैं कि बंधन एक तरह से उच्चाटन का दूसरा रूप है — षट्कर्म का उच्चाटन लगभग वही है जो बंधन। किसी की दुकान बाँध दी जाए तो ग्राहक उच्चाटित हो जाते हैं: बेचैनी, यह सोचना कि महँगा देता है, खराब सामान देता है, और वे आना छोड़ देते हैं; किसी व्यक्ति को बाँधा जाए तो वह अपने काम से उच्चाटित हो जाता है — दुकान पर बैठने, ऑफिस जाने, सही से काम करने का मन नहीं करता। बाँधा किसे गया है? आपके अपने मन को; इसमें सब कुछ मन से ही होता है।

08

जब कष्ट मेडिकल नहीं, अभिचारिक हो — शरीर पर बलि

सोखा द्वारा नई सिद्ध विद्या आज़माने का मामला भी; सावधानी रखें तो काटने से हानि नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:38–08:13

वक्ता कहते हैं कि जब बंधन या उच्चाटन किया गया हो, या समझ आ रहा हो कि परेशानी मेडिकल इशू नहीं बल्कि कोई अभिचारिक अवस्था है, तो शरीर पर ही बलि देनी होती है। इसमें वह मामला भी आता है जब कोई सोखा-ओझा कोई मंत्र विद्या सिद्ध करके किसी पर चलाकर देखता है कि सफल होगी या नहीं — ऐसे में भी बहुत बार किसी को घात लग जाता है। लोग डरते हैं कि कहीं कट जाएगा, रक्त निकलेगा, पर वे कहते हैं कि कोई विशेष हानि नहीं होती, बस सावधानी रखनी चाहिए कि कटना-फटना न हो।

09

शरीर पर नींबू बलि के तीन स्थान: आज्ञा, अनाहत और नाभि

ललाट और छाती पर आसान, नरम नाभि पर अधिक सावधानी; अभिमंत्रित नींबू झट काटता है, 5-30 मिनट में राहत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:14–09:06

वक्ता कहते हैं कि शरीर पर बलि आज्ञा चक्र पर दी जाती है; यदि समस्या इतनी अधिक हो कि उठने लायक स्थिति भी न बची हो, तो तीन जगह — ललाट पर आज्ञा चक्र, दोनों छाती के बीच हृदय जहाँ अनाहत माना जाता है और प्राण वायु का स्थान है, और नाभि के पास। छाती और ललाट पर काटना आसान है, पर नाभि के पास पेट पर अधिक सावधानी चाहिए क्योंकि वह कठोर जगह नहीं है। यदि नींबू अपने सिद्ध मंत्र से अभिमंत्रित है तो ये चीज़ें झट-झट कट जाती हैं, और 5 से 30 मिनट में रोगी को राहत महसूस होने लगती है।

10

साबर मंत्र जागरण में नींबू की बलि उग्र देवताओं को पुष्ट करती है

मंत्र जगाते समय सब नींबू की बलि देते हैं; देवता की शक्ति बढ़ती है, मंत्र तीव्र होता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:07–09:30

तीसरा, वक्ता उनकी बात करते हैं जो प्रोफेशनली किसी मंत्र को, विशेषकर साबर मंत्र को, जागृत कर रहे हैं: मंत्र जागरण की प्रक्रियाओं में, वे कहते हैं, व्यक्तिगत रूप से सभी नींबू की बलि देते हैं। उग्र देवताओं को बलि दी जाती है; नींबू से वे उग्र देवता पुष्ट होते हैं, उनकी सामर्थ्य और शक्ति बढ़ती है, और आपका मंत्र जागृत और तीव्र होता है।

11

नींबू बलि से जगाए मंत्र के प्रयोग में दो नींबू का नियम

प्रयोग पर एक व्यक्ति के सिर पर, कार्य सफल होते ही एक मंत्र के देवता को — महाभैरव का उदाहरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:31–10:26

वक्ता कहते हैं कि यह ध्यान रखना है कि जब भी नींबू की बलि से सिद्ध किया गया मंत्र बाद में किसी के तंत्र कार्य या किसी और चीज़ के लिए प्रयोग होगा, तो दो नींबू की बलि लगेगी: एक जिस व्यक्ति के निमित्त प्रयोग है उसके सिर के ऊपर (या पास में) काटकर, और दूसरी कार्य सफल या पूर्ण होने पर उस मंत्र के देवता को अलग से सेवा बलि — कार्य की बलि अलग, कार्य पूर्ण होने के बाद की बलि अलग। जैसे महाभैरव का प्रयोग करें और 1% भी सफलता मिले, तो पूर्ण होते ही उसी समय महाभैरव के नाम की बलि दे देनी है।

12

प्रयोग का प्रभाव बहुत अधिक हो तो तीन नींबू से काट

सिर के ऊपर से काट का बढ़ा हुआ रूप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:27–10:34

वक्ता कहते हैं कि सिर के ऊपर से नींबू काटने के अलावा, यदि प्रयोग का प्रभाव बहुत ज़्यादा हो तो तीन नींबू से काट करेंगे।

सिर के ऊपर से काटने के अलावा, वक्ता कहते हैं, यह भी: यदि प्रभाव बहुत ज़्यादा हो तो तीन नींबू से तंत्र काट करेंगे।

13

सिद्ध मंत्र से तीन चरणों में गृह कीलन: गंधक की धूनी, पीली सरसों, नींबू बलि सहित कील

शांति कर्म के भीतर रक्षा कर्म; पहले शरीर की निकारी; हनुमान, काली, गोरखनाथ या माला मंत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:35–12:08

षट्कर्म में, वक्ता कहते हैं, शांति कर्म के भीतर रक्षा कर्म है — शरीर का बंधन और घर का बंधन, और इन दोनों से पहले शरीर की निकारी, उतारा। यदि गृह बंधन के लिए कोई मंत्र सिद्ध किया है — हनुमान जी का, काली जी का, गोरखनाथ बाबा का, माला मंत्र — तो कीलन के समय नींबू का सर्वश्रेष्ठ प्रयोग होता है। पहले घर को धूनी से खाली कराएँ: गोबर के सुलगते उपले पर गंधक की धूनी सबसे श्रेष्ठ है, सारी नकारात्मक ऊर्जाएँ निकल जाती हैं। दूसरे, बाँधने वाले मंत्र से पीली सरसों कम से कम 5 या 21 बार अभिमंत्रित कर पूरे घर में छींटें। तीसरे, उसी सिद्ध मंत्र से कील अभिमंत्रित कर ठोकें — जैसे मुख्य द्वार पर चौखट के पास, आगे या पीछे ज़मीन में तीन कील — और हर कील पर एक-एक नींबू की बलि अवश्य दें; इससे गृह बंधन पूर्ण हो जाता है।

14

घर के कीलन के बाद गृह देवता और कुल भैरव की बलि

चौखट पर अपने गृह देवता को कपूर जलाकर बलि — परिसर के पास के किसी देवता को नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:09–12:43

घर को और मज़बूत करने के लिए, वक्ता कहते हैं, उस स्थान के देवी-देवता के नाम से बलि दी जाती है — यानी अपने गृह देवता, न कि परिसर के पास जो भी देवता हो: गृह देवता के नाम से चौखट पर नींबू की बलि दें, दोनों टुकड़े घर के दोनों ओर रखें और उन पर कपूर जलाएँ। दूसरी बलि कुल देवता, कुल के भैरव के नाम से — यदि भैरव जी पूजित हैं। इस प्रक्रिया को लेकर चलें तो, वे कहते हैं, गृह पूरी तरह बंधित हो जाता है।

15

बंधित घर पर नींबू की बलि एक मुहर

मज़बूती मंत्र की क्षमता पर निर्भर; रोगी का कमरा भी इसी तरह बाँध सकते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:44–13:24

वक्ता कहते हैं कि गृह बंधन कितना मज़बूत है यह इस पर निर्भर करता है कि साधक ने जिस मंत्र से बंधन-कीलन किया उसमें कितनी क्षमता है; नींबू की प्रक्रिया स्टैंप है — बाँधने की प्रक्रिया के बाद नींबू की बलि दे दी तो मुहर लग गई कि घर बंध गया, कोई नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर सकती; तगड़ा बंधन हो जाता है। इसी तरह, वे जोड़ते हैं, किसी रोगी या परेशान व्यक्ति का कमरा भी बाँधा जा सकता है, और नींबू की बलि देकर बाँधना सर्वश्रेष्ठ है।

16

स्वयं सिद्ध मंत्रों और लौंग जैसी जड़ी-बूटियों से मोहन और वशीकरण

जड़ी-बूटियाँ जो वे सार्वजनिक नहीं बताते; 108 की एक माला से अधिकार; क्षुद्र मंत्र की आपत्ति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:25–14:30

मोहन, आकर्षण और वशीकरण में, वक्ता कहते हैं, परिणाम फिर सिद्ध मंत्र पर निर्भर करता है; मोहिनी प्रक्रियाओं में लौंग के समान दिखने वाली कुछ जड़ी-बूटियों का भी प्रयोग होता है, जिनका प्रयोग सार्वजनिक रूप से बताना उचित नहीं। सबसे बड़ी बात स्वयं सिद्ध मंत्रों की है — विशिष्ट मंत्र जिन्हें सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं: किसी शुभ मुहूर्त में या किसी भी समय एक बार 108 की एक माला जप लें और अधिकार मिल गया। बहुत लोग इन्हें क्षुद्र श्रेणी का मंत्र कहते हैं और कहते हैं कि इतनी जल्दी प्रयोग से प्रारब्ध नहीं कटेगा, दिक्कत होगी — वह अलग विषय है, वे कहते हैं; पर इन मंत्रों और जड़ियों से आकर्षण-वशीकरण के सब प्रयोग संपन्न होते हैं।

17

वशीकरण, उच्चाटन और विद्वेषण में नींबू का रस: प्रयोग जिन्हें वक्ता प्रोत्साहित नहीं करते

उनका उद्देश्य ऐसे प्रयोगों को सेवा-पूजा और बलि से शांत करना है, कराना नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:31–15:16

वक्ता कहते हैं कि स्वयं सिद्ध मंत्रों से नींबू अभिमंत्रित करके, उस देवता के नाम की बलि देते हुए काटकर उसका रस पानी में मिलाया जाता है और जिसे वशीकृत या आकर्षित करना है उसे किसी भी तरह पिला दिया जाता है — और उसे दिक्कत होती है। उच्चाटन में भी नींबू का ऐसा प्रयोग होता है, जिसमें व्यक्ति घर से दूर भागता है, घर में रहने का मन नहीं करता, और विद्वेषण में, जिसमें लोग आपस में लड़ते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य, वे कहते हैं, ये प्रक्रियाएँ कराना नहीं, बल्कि ऐसा कुछ हुआ हो तो सेवा-पूजा और बलि देकर उसे शांत करना है — हालाँकि विद्वेषण आदि सब में नींबू का पूरा प्रयोग होता है।

18

11,000 बार जपा गया कवच उस देवता को आपके साथ खड़ा कर देता है

इष्ट के कवच का न्यूनतम जो हर साधक के पास हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:17–15:50

वक्ता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रयोग अपने इष्ट मंत्र और कवच का है। जब परिवार का कोई सदस्य जो पूजा-पाठ नहीं करता (स्वच्छता रखे या न रखे) शरीर में कष्ट पाए, तो प्रश्न यह है कि आपने कौन सा मंत्र और कवच सिद्ध किया है। किसी एक देवता के कवच को 11,000 बार जप लें, वे कहते हैं, तो समझ लीजिए कि वह देवता प्रचंड रूप से आपका सहयोग और साथ देने के लिए खड़े हैं; इसलिए अपने इष्ट के किसी कवच का कम से कम 11,000 जप कर लेना चाहिए।

19

कवच से अभिमंत्रित नींबू परिवार के सदस्य के शरीर पर बंधन के रूप में काटना

जो बीमार है और पूजा करने में असमर्थ; बंधन तब तक रहता है जब तक कोई तगड़े से न तोड़े

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:51–16:24

वक्ता कहते हैं कि यदि आपने जप करके कवच सिद्ध किया है और घर-परिवार में कोई बीमार पड़ रहा है जो पूरी तरह पूजा-पाठ करने में सक्षम नहीं, तो उसी कवच से नींबू अभिमंत्रित करके, जिसे सुरक्षित करना है उसके शरीर पर घुमाकर, बंधन के लिए बोलकर शरीर पर ही काट दें। जब तक कोई उस बंधन को तगड़े तरीके से तोड़ेगा नहीं, वह खुलेगा नहीं। इस प्रकार, वे कहते हैं, नींबू के अनेक प्रयोग हैं।

20

पीला पड़ा नींबू केवल अंतिम विकल्प

तंत्र के हर प्रयोग में नींबू हरा ही रहे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:25–16:42

वक्ता कहते हैं कि विशेष रूप से यह ध्यान रखना है कि जो नींबू पीला हो गया है उसे सबसे अंतिम विकल्प मानें। नहीं तो अधिकतम प्रयास करें कि नींबू हमेशा हरा रहे, और तंत्र आदि के किसी भी प्रयोग में हरे, कच्चे नींबू का ही प्रयोग करें।

एक बात विशेष रूप से ध्यान रखनी है, वक्ता कहते हैं: जो नींबू पीला हो जाता है उसे सबसे लास्ट ऑप्शन मानिए। नहीं तो अधिकतम प्रयास करना चाहिए कि नींबू कभी भी हरा रहे, और तंत्र आदि के प्रयोगों के लिए हम हमेशा हरे नींबू, कच्चे नींबू का ही प्रयोग करें, किसी भी प्रकार से।

21

जब कोई गुनिया न मिले तो नींबू के प्रयोग स्वयं करना

बिना मंत्र, बिना किसी जानकार को बुलाए, उस शक्ति के लिए जो शांत नहीं हो रही

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:43–17:12

वक्ता कहते हैं कि इन सब प्रयोगों के सिवाय, यदि किसी पर कोई ऐसी शक्ति आ गई है जो शांत नहीं हो रही, समस्या बढ़ी हुई है और आसपास कोई जानकार व्यक्ति नहीं मिल रहा, और स्वयं ही उसे कम से कम शांत करना है — तो बिना किसी मंत्र के, बिना किसी गुनिया को बुलाए या आह्वान किए, यदि आप अपनी समस्या के लिए स्वयं इन सब चीज़ों का प्रयोग करते हैं तो उसका निराकरण आपके जीवन में हो जाता है।

22

सावधानी: शांति कर्म के सिवाय अन्य कर्मों में नींबू

वहाँ दोष गंभीर विषय बन जाता है; प्रतीकात्मक बलि फिर भी सच्ची, तगड़ी सुरक्षा देती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:13–17:51

वक्ता दो बातें अलग करते हैं: शांति कर्म में बलि के जो प्रयोग बताए गए, जिनसे हमारी सुरक्षा होती है, और शांति कर्म के सिवाय अन्य कर्मों में नींबू का प्रयोग — जो ऐसा करते हैं उन्हें बड़ा सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि वहाँ कोई दोष उत्पन्न हो गया तो बहुत दिक्कत वाला विषय हो जाता है। बलि बलि होती है, वे कहते हैं: प्रतीकात्मक बलि देकर भी आप सुरक्षित हो सकते हैं, और बड़ी-बड़ी चीज़ों के सामने तगड़े हो सकते हैं।

23

समस्या बार-बार लौटे तो: इष्ट को बलि और सुबह-दोपहर-शाम दोहराव

जब काट टिकता नहीं तब क्या करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:52–18:12

वक्ता कहते हैं कि जब समस्या बार-बार बन रही हो और कट न रही हो, बार-बार दिक्कत हो रही हो, तो दो बातें करनी हैं: पहली, आपने जो इष्ट मंत्र सिद्ध किया है उसके देवी-देवता को बलि; और दूसरी, इसी नींबू की प्रक्रिया को बार-बार दोहराना — सुबह, दोपहर, शाम। तब ऐसी समस्याएँ सुलझने लगती हैं।

यह ज़रूर है, वक्ता कहते हैं: जब कभी समस्या बन रही है और कट नहीं रही, बार-बार दिक्कत हो रही है, तो एक तो आपने जो इष्ट मंत्र सिद्ध किया है उसके देवी-देवता को बलि; और दूसरा, इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहराना — सुबह, दोपहर, शाम। तब, वे कहते हैं, ये समस्याएँ इस प्रकार सुलझने लगती हैं।

24

दुर्गा नाम की सिद्धि नाम जप से होती है

नवरात्र के लिए बताए दुर्गा नाम पर एक श्रोता को उत्तर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:26–18:34

एक श्रोता के प्रश्न पर कि नवरात्र में जिस दुर्गा नाम का महत्व बताया था उसे कैसे सिद्ध करें, वक्ता उत्तर देते हैं कि भगवती के नाम का जप करके उसे सिद्ध किया जा सकता है।

प्रश्नों में, वक्ता से पूछा जाता है कि नवरात्रि में जिस दुर्गा नाम का महत्व बताया था उसे कैसे सिद्ध करें। उनका उत्तर है कि भगवती के नाम जप को करके उसे सिद्ध किया जा सकता है।

25

नॉनवेज-शराब लेने वाला भगवती भक्त कौन सा कवच करे — साबरी या कामाख्या?

कोई भी कर सकते हैं; धारण के लिए अघोर शिव या अघोर काली कवच; कामाख्या अंतिम विकल्प

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:48–19:18 · Also a question

एक श्रोता, जो भगवती का भक्त है पर नॉनवेज और शराब लेता है, पूछता है कि साबरी कवच करे या कामाख्या कवच; वक्ता कहते हैं कि किसी को भी कर सकते हैं। शरीर पर धारण करने वाले कवच के लिए, अघोर कवच — अघोर शिव कवच, अघोर काली कवच — धारण करें तो चलेगा। कामाख्या कवच को, वे कहते हैं, अंतिम विकल्प रखें।

26

क्या नींबू या जायफल की बलि रोज़ दी जा सकती है?

रोज़ की बलि बाध्य नियम बन जाती है जिसका छूटना हानि करता है; वार या तिथि तय करें; लौंग-कपूर रोज़ ठीक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:19–20:34 · Also a question

नहीं — वक्ता कहते हैं कि नींबू की बलि यदि कभी प्रतिदिन दी जाए तो वह नियमबद्ध हो जाती है, जैसे अन्य क्षेत्रों में जहाँ रोज़ बलि चढ़ती है तो चढ़ानी ही है। यदि आपने नित्य बलि आरंभ कर दी, चाहे जायफल की, चाहे नींबू की, तो वह समस्या वाला विषय हो जाता है, क्योंकि जो बलि कंटिन्यू दे रहे हैं वह देते रहनी है, बीच में छूटनी नहीं चाहिए; कहीं चले गए, बलि छूट गई, देने वाला कोई नहीं, तो हानिकारक प्रभाव बन जाता है। उनके अनुसार प्रतिदिन लौंग-कपूर की बलि ठीक है — वह अलग अग्नि बलि है, आरती, सुगंध, धूप में प्रयोग होती है — पर नींबू और जायफल हमेशा कंटिन्यू देना संभव नहीं, इसलिए साप्ताहिक वार या तिथि तय रखें।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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