बिना दीक्षा के बगलामुखी साधना — तीन आरंभिक साधनाएं और रुद्रयामल का 108 नाम स्तोत्र

बिना दीक्षा के भगवती पीतांबरा की साधना करने पर।

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01

36 अक्षरी मूल मंत्र, सहस्त्रनाम, स्तोत्र और कवच

बिना दीक्षा के 36 अक्षरी मूल मंत्र, सहस्त्रनाम, स्तोत्र और कवच लिए जा सकते हैं या नहीं।

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–00:53

क्या बिना दीक्षा के भगवती पीतांबरा महाविद्या की साधना की जा सकती है; क्या बिना दीक्षा के भगवती पीतांबरा का 36 अक्षरी मूल मंत्र लिया जा सकता है; क्या सहस्त्रनाम, स्तोत्र इत्यादि का पाठ किया जा सकता है; क्या उनके कवच इत्यादि का पाठ किया जा सकता है; और क्या बिना दीक्षा के पीतांबरा बगलामुखी से संबंधित मंत्रों का जप करना सही है, अथवा उसका कोई विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

02

क्रियात्मक विषयों में दक्षता, और सही उच्चारण

दीक्षा वास्तव में क्या देती है, और बिना दीक्षा वाले व्यक्ति को किस बात का ध्यान रखना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:54–01:14 · Also a question

दीक्षा से दक्षता आती है, और वह दक्षता उन चीजों में आती है जो क्रियात्मक हैं। इसलिए यदि आप बिना दीक्षा के भगवती पीतांबरा के किसी भी मंत्र का जप करते हैं, तो उस मंत्र का उच्चारण सर्वप्रथम आपको सही आना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि दीक्षा से दक्षता आती है, और जब दक्षता आती है तो वह किस विषय पर आती है? जो क्रियात्मक चीजें हैं, उनमें दक्षता आती है। प्रश्न यहां यह हो जाता है: यदि आप बिना दीक्षा के भगवती पीतांबरा के किसी भी मंत्र का जप करते हैं, तो उस मंत्र का उच्चारण सर्वप्रथम आपको सही आना चाहिए।

03

मकार या गकार रूप, और किस क्रम में चलना है

एकाक्षरी मंत्र में भी मकार या गकार रूप का, और किस क्रम में चलना है इसका प्रश्न उठता है।

· Reviewed Sep 2026 · 01:15–01:55

यदि आप भगवती पीतांबरा का एक अक्षर भी — एकाक्षरी मंत्र भी — करते हैं, तो उसे मकार रूप से जपना है या गकार रूप से, और वह आपके लिए कितना उचित है या नहीं, यह एक अलग विषय हो जाता है। सामान्य रूप से किस रूप में जप करना चाहिए, और आप किस क्रम में जाना चाहते हैं, यह भी आपको जानना आवश्यक है। इन विषयों की जानकारी होनी चाहिए।

04

दीक्षा का मंत्र प्राप्ति और अपने अनुसार प्रयोग तक सिमट जाना

लोग केवल मंत्र प्राप्त करने के लिए ही दीक्षा क्यों चाहते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 01:56–02:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आज के समय में सबसे मुख्य कारण यह हो गया है कि दीक्षा इसलिए चाहिए कि हमें मंत्र प्राप्त हो जाए; और मंत्र प्राप्त होने के पश्चात हम उस मंत्र को सिद्ध कर लें और अपने अनुसार उसका प्रयोग करें। दीक्षा इतने तक ही सीमित हो जाती है।

05

दीक्षा न मिलने पर भी दिक्कत, और समर्थ गुरु के रोक लगाने पर भी

जब दीक्षा अपने मन के अनुसार नहीं मिलती तो क्या होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:29–02:50 · Also a question

जब मन के अनुसार दीक्षा की प्राप्ति नहीं होती, तब भी दिक्कत है। और दीक्षा मिल भी जाए तथा गुरु रोक लगा दें — वे स्पष्ट करते हैं कि उनका आशय योग सामर्थ्य गुरु से है, उन लोगों से नहीं जिन्हें जानकारी नहीं है और जो कुछ भी बोलते रहते हैं — तो ऐसे गुरु जब आपको कोई बात बताएं और वह आपके मन के अनुसार न हो, तब भी दिक्कतें होने लगती हैं।

06

जीवित दीक्षा गुरु के स्थान पर गुरु स्वरूप की पूजा

यदि दीक्षा प्राप्त ही न हो रही हो तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 02:51–03:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहला चीज यही देखनी चाहिए कि यदि आप दीक्षा नहीं लेना चाहते, या आपकी दीक्षा नहीं हो रही, या किसी भी कारणवश दीक्षा प्राप्त नहीं हो रही है, तो सर्वप्रथम आपको गुरु स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। गुरु स्वरूप का अर्थ क्या है और गुरु कैसे खोजना है, इसके लिए वे अपने पहले के वीडियो "आओ मित्र लालटेन लेकर गुरु खोजते हैं" की ओर संकेत करते हैं।

07

अपने क्षेत्र के किसी योग्य और गुरु रूप में पूजित महापुरुष की साधना

किसी और के अनुभव से प्रेरित होकर 36 अक्षरी मंत्र लेने से पहले क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 03:29–04:04 · Also a question

भगवती पीतांबरा के 36 अक्षरी मंत्र का जप करने का कारण चाहे कुछ भी हो — किसी के वीडियो को सुनकर बहुत अधिक मोटिवेट हो जाना कि उनके अनुभव से 36 अक्षरी की साधना करने से ऐसा प्रभाव मिला, और वही कष्ट आपके जीवन में है, चाहे कारण विचार का हो या किसी शत्रु का — सर्वप्रथम आपको अपने क्षेत्र के किसी योग्य और गुरु रूप में पूजित महापुरुष की साधना करनी चाहिए।

08

रामकृष्ण परमहंस और मां शारदा; बामा खेपा और "जय गुरु जय तारा"

बंगाल के क्षेत्र से आने वाले व्यक्ति को किस गुरु स्वरूप की पूजा करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 04:05–04:43 · Also a question

यदि आप बंगाल के क्षेत्र से हैं, तो परमहंस स्वामी — भगवान रामकृष्ण परमहंस — की साधना कर लीजिए, और उनके साथ मां शारदा, मां शारदामणि और रामकृष्ण परमहंस की। यदि आप बंगाल से आगे के क्षेत्र में, तंत्र क्षेत्र में जाना चाहते हैं और कोई योग्य गुरु नहीं मिल रहे, तो बामा खेपा की पूजा कीजिए; उनका नाम जप ही कीजिए। वहां "जय गुरु जय तारा" हर कोई बोलता है, और उसी मंत्र को लेकर चला जा सकता है — यह जरूरी नहीं कि मंत्र एकदम मुख से ही मिले।

10

परम गुरु और शरणागति, जब प्रारब्ध से गुरु प्राप्त नहीं हुए हैं

क्या भगवान दत्तात्रेय की साधना के लिए भी दीक्षा आवश्यक नहीं है?

· Reviewed Sep 2026 · 05:21–06:02 · Also a question

वक्ता स्पष्ट कहते हैं कि भगवान दत्तात्रेय की भी साधना करने के लिए दीक्षा की अनिवार्यता है। लेकिन फिर भी वे परम गुरु हैं; और यदि आपको गुरु प्राप्त नहीं हो रहे — हमारा प्रारब्ध ऐसा है कि हमारे जीवन में प्रारब्ध से यह निर्मित ही नहीं हुआ कि गुरु प्राप्त हों — तो कम से कम उनकी शरणागति को स्वीकार करना चाहिए और उनका माला मंत्र लेना चाहिए, जिसके लिए चैनल पर एक वीडियो है।

11

सवा लाख, या कम से कम 27000 — प्रत्येक नक्षत्र के लिए एक हजार

दत्तात्रेय के एकाक्षरी मंत्र का कितना जप करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 06:03–06:41 · Also a question

भगवान दत्तात्रेय का एकाक्षरी मंत्र इत्यादि होता है। वह बीजाक्षर है, लेकिन फिर भी, चूंकि उसमें प्रणव इत्यादि नहीं है, वह कम से कम सही है; आप उसका स्मरण इत्यादि के लिए प्रयोग कर सकते हैं या उनका नाम जप कर सकते हैं। वह आपको सर्वप्रथम कम से कम सवा लाख करना चाहिए; उतना न कर पाएं तो 27000 तो जरूर करना चाहिए — प्रत्येक नक्षत्र के लिए 1000, यानी कम से कम 27000 जप।

12

माला मंत्र का कम से कम 1100 का अनुष्ठान

यदि दत्तात्रेय माला मंत्र लिया जाए तो कम से कम 1100 का अनुष्ठान करना चाहिए।

· Reviewed Sep 2026 · 06:42–06:58

यदि आप दत्तात्रेय माला मंत्र का करते हैं, तो कम से कम 1100 का अनुष्ठान करना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि यदि आप दत्तात्रेय माला मंत्र का करते हैं, तो कम से कम 1100 का अनुष्ठान करना चाहिए। इतना करने के पश्चात आप भगवती पीतांबरा से संबंधित और क्या कर सकते हैं?

13

हरिद्रा गणपति तंत्रोक्त है, इसलिए उसके स्थान पर संकट हरण गणेश स्तोत्र

बिना दीक्षा वाले के लिए कौन सी गणपति साधना उपयुक्त है, और हरिद्रा गणपति को क्यों छोड़ा जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 06:59–07:24 · Also a question

दत्तात्रेय को गुरु स्वरूप में मानने के पश्चात आप भगवान गणपति की साधना करेंगे। वक्ता कहते हैं कि हरिद्रा गणपति की साधना तंत्र की दृष्टि से है, तंत्रोक्त विधि विधान से है — तो वह न करके, सामान्य गणपति पूजन में संकट हरण गणेश स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। उसका कम से कम सात दिन का अनुष्ठान करना चाहिए: सात दिन में 1100 पाठ, प्रतिदिन 108 पाठ; या 11 दिन में 1100 पाठ।

14

महाभैरव मंत्र के विधान से भैरव जी की सेवा पूजा

इसके बाद भैरव जी की सेवा पूजा आती है, जो महाभैरव मंत्र के विधान से की जाती है।

· Reviewed Sep 2026 · 07:25–07:47

अब गुरु हो गए, गणपति हो गए, अब आते हैं भैरव जी। आपको भैरव जी की सेवा पूजा करनी है, और उसके लिए महाभैरव मंत्र का एक विधान चैनल पर दिया हुआ है; उसकी आप साधना कर सकते हैं और जप कर लेंगे।

वक्ता कहते हैं कि अब गुरु हो गए, गणपति हो गए, अब आते हैं भैरव जी। आपको भैरव जी की सेवा पूजा करनी है। भैरव जी की सेवा पूजा करने के लिए महाभैरव मंत्र का एक विधान चैनल पर दिया हुआ है। उसकी आप साधना कर सकते हैं। वह जप कर लेंगे।

15

स्तोत्र हां; मूल और बीज मंत्र केवल दीक्षा के पश्चात या एक निश्चित समय तक

स्तोत्रों का पाठ किया जा सकता है, पर मूल और बीज मंत्र दीक्षा की या एक निश्चित समय की प्रतीक्षा करते हैं।

· Reviewed Sep 2026 · 07:48–08:36

ये तीन आरंभिक साधनाएं कर लेने के पश्चात आप भगवती पीतांबरा के किसी भी स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। मूल मंत्र, बीज मंत्र इत्यादि दीक्षित होने के पश्चात ही करना चाहिए, या फिर इन आरंभिक साधनाओं को करने के पश्चात एक निश्चित समय तक ही करना चाहिए। उनमें सवा लाख इत्यादि का अनुष्ठान आपको नहीं करना चाहिए — उसके लिए किसी परंपरा में दीक्षित होना आवश्यक है।

16

रुद्रयामल का 108 नाम वाला स्तोत्र

बिना दीक्षा वाला गृहस्थ भगवती पीतांबरा का कौन सा पाठ कर सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 08:37–08:44 · Also a question

उसके पश्चात भगवती पीतांबरा के शतनाम को लेकर चलें — यानी रुद्रयामल के 108 नाम का जो स्तोत्र है। वक्ता कहते हैं कि रुद्रयामल में वर्णित 108 नामावली, 108 नाम का जो स्तोत्र है, परम दिव्यता से युक्त है।

वक्ता कहते हैं कि उसके पश्चात भगवती पीताम्बरा"पीत वस्त्रधारिणी" — भगवती बगलामुखी का एक नाम। के शतनाम को लेकर चलें — यानी 108 नाम का जो स्तोत्र है, रुद्रयामल का। रुद्रयामल में वर्णित भगवती पीतांबरा की जो 108 नामावली है, 108 नाम का जो स्तोत्र है, वह परम दिव्यता से युक्त है।

17

शत्रुओं और विचार का विनाश, तथा सभा में आकर्षण

पीतांबरा शतनाम स्तोत्र किन कामनाओं को पूर्ण करने में सक्षम बताया गया है?

· Reviewed Sep 2026 · 08:45–09:23 · Also a question

भगवती पीतांबरा से आपकी जितनी भी कामनाएं हैं — कि भगवती पीतांबरा मेरे शत्रुओं का सर्वनाश करें, या विचार इत्यादि का पूर्ण रूप से विनाश करें; कि किसी सभा में जाएं तो वहां हमारा आकर्षण बढ़े और लोग हमारी ओर आकर्षित हों — इन सभी चीजों को संपन्न करने में सक्षम स्तोत्र, वे कहते हैं, रुद्रयामल का भगवती पीतांबरा का शतनाम स्तोत्र है। इसलिए उसका अनुष्ठान आपको करना चाहिए।

18

एक-एक दिन — गुरुवार को दत्तात्रेय, शुक्रवार को गणपति, शनिवार को भैरव

यदि तीनों आरंभिक साधनाओं के लिए समय न हो, तो गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को एक-एक दिन।

· Reviewed Sep 2026 · 09:24–09:48

यदि आप कहते हैं कि नहीं, भगवान दत्तात्रेय की साधना नहीं करनी है, उतना समय नहीं है, गणपति जी की भी नहीं करनी, भैरव जी की भी नहीं — तो कम से कम एक-एक दिन की साधना भी कर लें: गुरुवार के दिन भगवान दत्तात्रेय की, शुक्रवार के दिन गणपति जी की, शनिवार के दिन भैरव बाबा की। कम से कम लगातार तीन दिन में एक-एक दिन की साधना कर लें। वे कहते हैं कि इनकी कृपा अति आवश्यक है — और आपके कुल के देवी देवता की जो आवश्यकता होगी, वह सब तो आपको करना ही चाहिए।

19

मंगलवार, गुरुवार या शनिवार से 3600 पाठ — 36 दिन या 11 दिन

शतनाम स्तोत्र के लिए कौन सा संकल्प और कितनी संख्या बताई गई है?

· Reviewed Sep 2026 · 09:49–10:03 · Also a question

उसके पश्चात किसी भी मंगलवार से, गुरुवार से अथवा शनिवार से 3600 पाठ का संकल्प लीजिए। या तो 36 दिन का लीजिए, या यदि आप उतना नहीं करना चाहते तो 11 दिन का संकल्प लीजिए। प्रतिदिन 100 पाठ करने का संकल्प लेकर भगवती पीतांबरा के रुद्रयामल में वर्णित शतस्तोत्र नाम स्तोत्र का पाठ आपको प्रतिदिन करना चाहिए।

20

शत्रु और कृत्या विनाश के लिए रात्रि; लक्ष्मी और ऋण मुक्ति के लिए भोर या संध्या

पीतांबरा शतनाम स्तोत्र का पाठ किस समय करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 10:04–10:36 · Also a question

रुद्रयामल तंत्र से वर्णित के अनुसार आप इसे रात्रि काल में करेंगे। जब भी लक्ष्मी संबंधित प्रयोग किया जाता है, वह सुबह-शाम ही करना चाहिए। यदि रात्रि काल में करना है, तो वह शत्रु विनाश के लिए, तंत्र और विचार घात के विनाश के लिए, तथा परकृत्या प्रयोग के नाश के लिए करना चाहिए। लक्ष्मी प्राप्ति और ऋण मुक्ति हेतु शाम के समय या सुबह भोर के समय करना अति उत्तम होता है; रात को आप कर सकते हैं, लेकिन सुबह या संध्या का समय अति उत्तम है।

21

वर्षों तक 36, 21, 11 या 7 दिन के संकल्प बार-बार दोहराना

जिसकी श्रद्धा केवल पीतांबरा में बसी है, उसे लंबे समय तक क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 10:37–11:21 · Also a question

यदि आपकी श्रद्धा सिर्फ पीतांबरा में बसी हुई है, आपका प्राण पीतांबरा के चरणों में बसता है और दीक्षा भी प्राप्त नहीं हुई है, तो केवल इसको अपने जीवन में उतार दीजिए। शतस्तोत्र का विधि विधान अपने भीतर उतार लीजिए और प्रतिदिन 100 पाठ करते चलें। 36-36 दिन का संकल्प लीजिए, कुछ दिन आराम कीजिए, फिर कीजिए; 36 दिन का नहीं तो 21 दिन का, 21 का नहीं तो 11 का, 11 का नहीं तो सात दिन का — सात दिन की साधना, दो-तीन दिन रुकें, फिर सात दिन। 1100 का संकल्प लेकर करते रहिए।

22

स्वयं में योग्यता; और यंत्र, विग्रह तथा किसे साधना नहीं करनी है, इन पर अलग वीडियो

जब हमारे भीतर योग्यता आती है, तब सिद्ध और योग्य गुरु प्राप्त होते हैं और वे हमें दूर तक ले जाते हैं।

· Reviewed Sep 2026 · 11:22–11:56

वे कहते हैं कि जब हमारे भीतर योग्यता आएगी, तब वैसे दिव्य पुरुष हमें प्राप्त होंगे — वैसे दिव्य, योग्य, सिद्ध गुरु हमें प्राप्त होंगे, और वे फिर हमें काफी दूर तक ले जाएंगे। तो इसलिए बिना दीक्षा के बगलामुखी साधना इस प्रकार से करनी चाहिए; यदि दीक्षित नहीं हैं तो भी कोई बात नहीं है, और इन विधि विधानों का पालन करते हुए आगे चलना चाहिए। बाकी जो विषय हैं — यंत्र रखना है कि नहीं, विग्रह रखना है कि नहीं, किसे साधना नहीं करनी है, परेशानी कैसे बढ़ने लगती है — उनके लिए इसी चैनल पर अलग-अलग वीडियो हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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