भगतवाल में चौकी की शक्ति कैसे बढ़ती या घटती है

चौकी की शक्ति की व्यावहारिक प्रक्रिया पर नोट्स।

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The notes
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01

भगतवाल में व्यक्ति को गुरु के पास लाने वाले दो उद्देश्य

प्रतिशोध, या जिज्ञासा जो कल्याण और पैसे में बँटती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:55–03:08

वक्ता कहते हैं कि भगतवाल में जो भी चौकी बनाना चाहता है वह पहले गुरु खोजता है, और लोग दो उद्देश्यों से गुरु के पास जाते हैं। एक प्रतिशोध की भावना से — धन की हानि हुई, शरीर की हानि हुई, पारिवारिक कलह, किसी रिश्तेदार, जाति-बिरादरी या पटीदार से विवाद हुआ, और बदला लेने तंत्र में आता है। दूसरा जिज्ञासु बनकर आता है, और जिज्ञासु भी दो प्रकार के हैं: एक जो ज्ञान पाना, शक्तियों को समझना और पोषित करना, उनके माध्यम से जन कल्याण करना और फिर मुक्त हो जाना चाहता है; दूसरा जो साफ कहता है कि हम ऐसी चीज़ें जागृत करके पैसा कमाएँगे, लोगों का काम हो या न हो इससे ज़्यादा मतलब नहीं, और काम हो जाए तो सोशल मीडिया पर दस जगह दिखाकर और पैसा कमाएँगे।

02

भगतवाल गुरु शिष्य को कैसे तैयार करता है: कुलदेवी-पितृ सेवा, दीक्षा, फिर वचनबद्ध शक्तियों का जागरण

किसी मंत्र से पहले सवा महीने की सेवा; भोग के बदले काम का वचन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:09–05:13

वक्ता कहते हैं कि हर भगतवाल गुरु अपनी गुरु परंपरा के अनुसार सिखाता है, और अच्छा गुरु पहले देखता है कि शिष्य के घर की शक्ति और देवी कौन है, पितृ-पूर्वज कौन हैं, और उनकी सेवा करवाता है — परंपरा के अनुसार सोमवार, शुक्रवार या शनिवार का व्रत — सबसे पहले सवा महीने तक। उसके बाद ही किसी अच्छे समय में मंत्र दीक्षा देकर उसका अनुष्ठान करवाता है, और तभी एक-एक चीज़ जागृत करवाना शुरू करता है: लोक वीर, मसान, मसानी, प्रेतनी, भूतनी, हर एक अलग तरीके से, हर एक को वचनबद्ध करके। जागृत और वचनबद्ध करने का तरीका, और हर शक्ति का आवाहन-विसर्जन कैसे होता है, वे किसी और चर्चा के लिए छोड़ देते हैं। फिर गुरु शिष्य के घर में इन शक्तियों को स्थान दिलवाता है, हमेशा के लिए या केवल रखकर पूजा और भोग देकर; वचन हमेशा वही रहता है — तुम मेरा काम करोगे और हम तुम्हें भोग देंगे।

03

भगतवाल चौकी की वचनबद्ध शक्तियों का भोग और प्रयोग-रहित परख काल

बीड़ी, गांजा, दारू, बलि नियम से; एक सप्ताह से सवा साल केवल सेवा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:14–07:01

वक्ता कहते हैं कि भगतवाल में, चाहे गुरु परंपरा से हो या स्वयं सीखे, मुख्य रूप से नकारात्मक शक्तियाँ ही सिद्ध की जाती हैं — मसान, प्रेत, पिशाच, मरी हुई मसानी — और उन्हें सिगरेट, बीड़ी, गांजा, दारू, दाल-भात, उड़द के पकौड़े आदि दिए जाते हैं, बलि भी चलती है; हर एक का नियम होता है कि किस दिन कौन सा भोग, और उसमें गलती नहीं चलती। एक समय गुरु नियम बना देता है: सवा साल तक — या बहुत बार सप्ताह भर, महीने, सवा महीने तक — किसी पर प्रयोग नहीं करना, केवल सेवा करनी है, प्रयोग बाद में। उस सेवा काल में, वे कहते हैं, ये निम्न शक्तियाँ भोग, पूजा, बलि के साथ साधक की अपनी प्राण ऊर्जा से पोषित होती हैं, जिससे उनका इच्छित शरीर बढ़ता है और आकर्षण पैदा होता है — एक प्रेत दूसरे प्रेत को सबसे अधिक आकर्षण देता है।

04

जन कल्याण से भगतवाल चौकी कैसे बढ़ती है

तंत्र काट का पुण्य भूत-प्रेत शक्तियों को भी संतुष्ट करता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:02–08:48

वक्ता कहते हैं कि शक्तियाँ तैयार होने पर दोनों तरह के लोग आने लगते हैं — पहले किसी मित्र का काम हुआ, आस-पड़ोस को पता चला, या साधक खुद प्रचार करता है कि हम तारापीठ में श्मशान साधना कर रहे हैं — और हर काम या तो अच्छा होगा या बुरा। यदि कोई तंत्र-पीड़ित आया और साधक ने अपनी शक्तियों से तंत्र काट किया, उनकी रक्षा के लिए कुछ प्रयोग किया और कल्याण किया, तो उसके पुण्य में वृद्धि होती है; उसकी चौकी की शक्तियाँ प्रसन्न-संतुष्ट होती हैं, अच्छी ऊर्जा बढ़ती है, और जो धन मिला उससे वह अपना पालन करे, सिद्ध किए देवी-देवताओं को (चाहे नकारात्मक ही हों) भोग-पूजा दे, और कुछ जीवों की सेवा करे — कुत्ते की ही सही — तो ऐसे व्यक्ति की चौकी दिन-प्रतिदिन बड़ी होती है, चाहे वह भूत-प्रेत की ही हो, क्योंकि समाज का कल्याण हो रहा है और जीवों के आशीर्वाद से वृद्धि हो रही है। गति की बात अलग है, वे जोड़ते हैं: उन शक्तियों की मुक्ति नहीं होगी, उनका अपना प्रारब्ध भुगतना पड़ेगा, लेकिन चौकी बढ़ेगी।

05

किसी परिवार पर पैसे लेकर भगतवाल अभिचार कैसे शुरू होता है: रेकी और सबसे कमज़ोर सदस्य

असुरक्षित घर पर सीधा विद्वेषण; सुरक्षित घर में पीने वाले बेटे या असावधान बेटी के रास्ते प्रवेश

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:49–12:33

वक्ता कहते हैं कि समय के साथ चौकी के भूत-प्रेत-पिशाच की माँग बढ़ती है, क्योंकि प्रेत शरीर इच्छाओं का शरीर है, और जब कोई भगत को एक लाख रुपये देकर शत्रु को तहस-नहस करने को कहता है, तो भगत पहले लक्षित परिवार की रेकी — जासूसी, हीलिंग नहीं — करता है, अपने कच्चे कलवे, मसान, कभी सिद्ध कपाल, या मरने से पहले बुज़ुर्गों द्वारा वचन में सौंपी गई शक्तियों से, मुस्लिम शक्तियाँ भी। वह देखता है कि घर में कौन सी पूजा होती है। यदि कुछ नहीं होती — घर बंधित नहीं, कोई वार्षिक पूजन नहीं, किसी शक्ति पीठ पर जाना नहीं — तो घर खुला है और वह सीधे विद्वेषण करके कलह-क्लेश करवाता है। यदि घर में पूजा होती है, तो वह उस एक सदस्य को ढूँढता है जो नहीं करता: बाहर खाने-पीने वाला किशोर बेटा, जिसके अशुद्ध शरीर पर मदिरा चाहने वाला पिशाच आसानी से हावी होकर घर में प्रवेश करता है और कलह शुरू करवाता है; या किशोर बेटी जिसके पास कोई कवच या ऊर्जा-सुरक्षा नहीं — खुले बाल, सुबह-शाम इत्र, भूत-प्रेत को न मानना — जिस पर चौकी की मोहिनी या पिशाचिक शक्ति लगा दी जाती है, ताकि वह ग्रसित होकर घर लौटे और या तो चिड़चिड़ी, बीमार, झगड़ालू हो जाए या अपनी इच्छा के विरुद्ध चरित्र से भटकने लगे।

06

घर की अपनी शक्तियों को बाँधना और परिवार को पूजा-पाठ से हटाना

अपमानित गृह-शक्तियाँ पीछे हटती हैं; बुज़ुर्गों का जप शरीर-कष्ट से तुड़वाया जाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:34–15:31

वक्ता कहते हैं कि यदि लक्षित परिवार की कुल-शक्तियाँ ठीक से पूजित नहीं हैं तो भगत को रोकने वाला कुछ नहीं; यदि हैं, तो रेकी से भीतर की स्थिति जानकर पहले उन शक्तियों को भोग और मंत्र से बाँधा जाता है — घर में कम पूजा हो तो सामान्य पूजा से, और बहुत पूजा-पाठ वाला घर भी कुंठित किया जा सकता है यदि शत्रु इतना ईर्ष्यालु हो कि पैसा खर्च करे, क्योंकि जिस भगत को जानकारी नहीं वह किसी बड़े साधक से एक बार बंधन करवा लेता है, जिसके बाद उसकी चौकी सब नियंत्रण में कर लेती है। फिर कलह बढ़ाई जाती है: बेटा पीने लगा, मार-पिटाई हुई, पूजा छूटी, पूर्णिमा की पूजा छोड़ दी, क्रोध में किसी ने पूजा का सामान फेंक दिया — और जाने-अनजाने घर की शक्तियों का अपमान करके परिवार उन्हें पीछे हटा देता है, जिससे अभिचार को और मौका मिलता है। अच्छे घर की लड़की का भाग जाना भी ऐसे अभिचार का हिस्सा है, वे कहते हैं — बाद में वह कहती है कि हम ऐसा चाहते नहीं थे; लोग वशीकरण कहते हैं, पर वे बता रहे हैं कि चौकी से परिवार कैसे तोड़ा जाता है। अंत में जो बुज़ुर्ग सेवा-पूजा, नाम-जप करते हैं उनके शरीर में कष्ट दे दिया जाता है ताकि वे कर ही न पाएँ, और घर की ऊर्जा पूरी बँध जाती है।

07

अभिचार-ग्रस्त परिवार कैसे उबरता है: पुण्य उदय, सही सहायक, तंत्र काट, पलटना और गृह बंधन

पीड़ा प्रारब्ध का कटना है; पैसे वाला शत्रु दस बार और पलटवाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:35–18:22

वक्ता कहते हैं कि जब देव-कृपा और पूजा-पाठ वाला अच्छा परिवार इस तरह बाँधा जाता है तो पूरे परिवार का प्रारब्ध कट रहा है — जितनी जल्दी मानें उतना अच्छा — और एक समय आता है, साल, दो साल या पाँच साल बाद, जब घर में किसी का पुण्य उदय होता है और वह इन चीज़ों को जानने और सही से करने की ठानता है; वह भटकेगा, दस जगह ठोकर खाएगा, और कभी न कभी सही व्यक्ति या सही माध्यम मिल जाएगा। ऐसा व्यक्ति, जो तंत्र की काट क्रियाएँ जानता है, पहले बताता है कि घर में कौन-कौन से प्रयोग हुए हैं, कितना समय लगेगा, क्या विधि-विधान करना है और देवी-देवताओं की क्या स्थिति है। फिर हर सदस्य के शरीर से काट होकर शरीर सुरक्षित किया जाता है और पूरा तंत्र पलटा जाता है (पलटना), चाहे एक दिन के लिए ही — लेकिन यदि शत्रु पैसे वाला है और भोग-दारू के लिए पैसा देता जा रहा है, तो उसका तांत्रिक तुरंत दस और पलट देता है, इसलिए सहायक परिवार के भरोसे के अनुसार तंत्र-युद्ध करता है। चीज़ें हटाने पर वह परिवार को खड़ा करता है: घर में इस तरह पूजा-पाठ करना है, गृह बंधन होता है, अपनी शक्तियों की पूजा बताई जाती है, नवरात्रि में साधना और हवन, शक्ति पीठ की यात्रा, और अपने गणों — चाहे अपनी चौकी के भूत-प्रेत ही हों — का पहरा भी लगाता है। धीरे-धीरे घर की ऊर्जा लौटती है।

08

भगतवाल चौकी के विरुद्ध महाविद्या और हनुमान प्रयोग क्रमशः होते हैं, सीधे कभी नहीं

पहले भैरव पूजा-बलि, घर में मंदिर का अंश स्थापित, फिर कवच और हवन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:24–19:45

वक्ता कहते हैं कि यदि पीड़ित परिवार को कोई महाविद्या का साधक या कोई प्रचंड साधक मिल जाए, तो वह सारी सामान्य काट क्रियाएँ तो करता ही है, साथ में अपनी महाविद्याओं का प्रयोग करता है और कल्प विधान भी करने को कहता है। लेकिन तंत्र में इन सबका प्रयोग कभी सीधे-सीधे नहीं होता; हमेशा स्टेप-वाइज़ होता है। जिसके शरीर पर कष्ट है उस पर सीधे प्रयोग करवा देना गलत है और परेशानी हो जाती है — छोटा सा विधान होता है, पर होता है: पहले भैरव जी की ऐसे पूजा-बलि करो, फिर मंदिर का हल्का सा अंश ही सही घर में स्थापित करो, तब करो। फिर बंधन शक्तियों का प्रयोग होता है — चाहे हनुमान जी का ही, यदि अच्छे हनुमान साधक मिल जाएँ: पंचमुखी हनुमान या एकादशमुखी हनुमान का वज्र कवच और हवनात्मक प्रयोग सिखाकर अनुष्ठान लेकर किया जाता है, जिसके बाद गलत भगत ने घर पर जो शक्तियाँ चलाई थीं उनकी हनुमान जी कुटाई शुरू कर देते हैं, घर में हनुमान जी के दूतों का पहरा पड़ जाता है, या परिवार बालाजी जैसे जागृत शक्तिपीठ से ऐसी चीज़ें प्राप्त कर लेता है, और घर का रक्षण होता है।

09

दुष्ट भगतवाल चौकी क्यों ढहती है: पिटी हुई शक्तियाँ वचन से मुकर जाती हैं

प्रेत मन के अधीन है; तपोगुण नहीं, शिष्य का धोखा, विसर्जन नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:47–23:19

वक्ता कहते हैं कि गलत भगत एक ही परिवार का नुकसान नहीं करता; पैसे के लिए दस जगह प्रयोग किए होंगे, और उनमें से पाँच यदि महाविद्या, हनुमान जी या दुर्गा जी के पाठ-हवन संकल्प लेकर पलटवार करें, तो उसकी शक्तियाँ जहाँ जाती हैं वहीं पिटती हैं — हनुमान जी कूटते हैं, भगवती बगलामुखी बंबू कर देती हैं, भैरव जी का सोटा पड़ता है, या उच्च कोटि की तांत्रिक शक्तियाँ, चाहे नकारात्मक ही हों, चीर-फाड़ कर भेज देती हैं — यंत्र, मंत्र, स्तोत्र अनुष्ठान, वैदिक या तांत्रिक किसी भी माध्यम से। दो, तीन, चार साल ऐसा होने पर शक्तियाँ क्षीण होकर कहती हैं, हम क्यों लात खाकर तेरा काम करें; प्रेत सूक्ष्म शरीर है जो अब भी मनुष्य-जीवन के मन के अधीन है, इसलिए साथ नहीं निभाएगा। इसीलिए भगतवाल में शक्ति "साथ छोड़ देती है", भले वचन की पक्की रही हो: साथ देना कम कर देती है, गई तो आई नहीं। फिर भगत के शरीर में कष्ट, घर में परेशानी, वंश वृद्धि नहीं, और अंत में चौकी किसी काम की नहीं रहती, क्योंकि उसने महाशक्तियों की सेवा नहीं की और ऊर्जा तपोगुण में नहीं थी। यदि कोई शिष्य धोखा दे दे, या वचनबद्धता के कारण वह शक्तियों को न किसी को दे पाए न विसर्जन कर पाए, तो बर्बादी पूरी हो जाती है।

10

भगतवाल चौकी को फलता-फूलता रखना: कल्याण, धन का सदुपयोग और समय पर विसर्जन

भूत-प्रेत शक्तियों के लिए महादेव का स्थान; शक्तिपीठ में जीवित पिंडदान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 23:20–24:12

वक्ता कहते हैं कि यदि इन्हीं शक्तियों से जन कल्याण और सेवा हो रही है, परिवार का भरण-पोषण करने के बाद पैसे का सदुपयोग और जीव सेवा हो रही है, और भगत में इतनी बुद्धि है कि ये भूत-प्रेत शक्तियाँ हैं, इसलिए उनके लिए महादेव का स्थान बना दे और समय रहते उनका विसर्जन कर दे ताकि उनकी भी गति हो जाए, तो उसकी चौकी की बढ़ोतरी होती है, शुभ शक्तियाँ भी आती हैं, और बाद में बहुत भटकना नहीं पड़ता — समय रहते आत्म-कल्याण कर लेता है। बहुत लोग, वे जोड़ते हैं, शक्तिपीठों और अन्य पीठों में जीवित अवस्था में ही अपना पिंडदान कर लेते हैं कि आगे पता नहीं क्या हो, या किसी परंपरा में चले जाते हैं कि भगतवाल कर ली, अब अपनी मुक्ति-गति देखें; उनकी शक्तियाँ समय रहते साथ देती हैं और सद्गति करा देती हैं, और वे प्रायः बहुत नहीं फँसते।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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