मारण प्रयोग होने पर शीघ्र प्राण रक्षा — तत्काल करने योग्य नौ विधान

किसी व्यक्ति पर मारण प्रयोग हो जाने पर उसके प्राणों की रक्षा के लिए वक्ता का नौ चरणों का आपात विधान — पहली अखंड ज्योत से लेकर लंबी अवधि के साप्ताहिक अभ्यास तक।

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The notes
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01

मारण प्रयोग पर पहली प्रतिक्रिया: कुल की शक्तियों से काम लें, बंधे कुलदेवता-पितरों का प्रश्न बाद में

कुल की शक्ति प्राण ऊर्जा का स्रोत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:16–00:57

वक्ता कहते हैं कि जैसे ही पता चले कि किसी परिजन पर मारण प्रयोग हो चुका है, सबसे पहला कार्य कुल शक्ति के माध्यम से करना है, क्योंकि कुल की शक्तियां ही उस व्यक्ति की प्राण ऊर्जा और जीवन ऊर्जा का स्रोत हैं। यदि आप अपने कुलदेवी-कुलदेवता को जानते हैं, तो उस समय यह विचार नहीं करना है कि प्रयोग ने कुलदेवता या पितृ को बंधित कर दिया होगा; वह उस समय गौण बात है।

02

कुल की शक्ति के नाम से प्राण-रक्षा की अखंड ज्योत, 27 काली मिर्च के साथ

संकल्प के शब्द, और कुल शक्ति न पता हो तो किसके नाम से

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:58–02:05

वक्ता कहते हैं कि पहला विधान है कुल की शक्ति के नाम से अखंड ज्योति प्रज्वलित करना, पीड़ित व्यक्ति के प्राण-रक्षण का संकल्प लेकर, और उसमें 27 नक्षत्र के नाम से 27 काली मिर्च डालना — नक्षत्रों के नाम न पता हों तो भी। यदि कुल की शक्ति का पता न हो तो वही दीप सबसे पहले भैरव जी के नाम से, या जिस प्रमुख देवता की पूरा परिवार मिलकर पूजा करता है उनके नाम से जलाया जाए।

03

रक्षा की अखंड ज्योत पर मुहूर्त, खरमास या मलमास का कोई बंधन नहीं; ठीक होने तक जलती है

प्राण-रक्षा का कार्मिक दीप, देवता का अनुष्ठान नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:06–02:35

वक्ता कहते हैं कि यह अखंड ज्योत तब तक जलेगी जब तक व्यक्ति ठीक न हो जाए, कम से कम सात से दस दिन, और जिस समय प्रयोग हुआ हो उस समय यह नहीं देखना है कि समय अच्छा है या नहीं, खरमास चल रहा है या मलमास। यह प्राण-रक्षा के लिए कार्मिक ज्योत है, किसी देवता का अनुष्ठान नहीं, इसलिए इसे कभी भी प्रज्वलित किया जा सकता है।

04

मारण प्रयोग के विरुद्ध क्षेत्रपाल निकारी, और उसे कहां देना है

प्रक्षेपित अभिचार शक्तियों को रोकने वाले पहले देवता क्षेत्रपाल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:36–03:27

वक्ता कहते हैं कि दूसरा प्रमुख कार्य, जब पीड़ित व्यक्ति को बहुत अधिक दिक्कत हो रही हो, यह है कि तुरंत अपने क्षेत्रपाल की जानकारी लें — आप जिस स्थान पर रहते हैं वहां का सबसे पुराना मंदिर — और वहां जाकर पूजा दें; जानकारी न मिले तो किसी भी शिव मंदिर के पास, उसके पीछे या बगल में या चौराहा के किनारे, क्षेत्रपाल निकारी अर्थात क्षेत्रपाल का बलि विधान करें। वे कहते हैं कि क्षेत्रपाल ही सबसे प्रमुख शक्ति हैं और अभिचारिक विद्याओं से प्रक्षेपित शक्तियों को रोकने वाले पहले देवता वही हैं।

05

मारण प्रयोग से पीड़ित के सिर से आटे के चौमुख दिये का उतारा

सरसों का तेल, 27 काली मिर्च, सात बार उल्टा, बाहर रखना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:28–04:49

जब क्षेत्रपाल की जानकारी न मिले, या आप किसी जगह नए हों या वहां इतनी सघनता हो कि वह विधान न हो सके, तो वक्ता कहते हैं कि घर के मुख्य दरवाजे के पास आटे का चौमुख दिया बनाएं, उसमें सरसों का तेल और 27 काली मिर्च डालें, पीड़ित व्यक्ति के सिर के ऊपर से सात बार उल्टा (एंटी-क्लॉकवाइज) घुमाकर उतारें, और उसे दरवाजे के बाहर या हो सके तो घर से कुछ दूर रख दें — क्षेत्रपाल या ग्राम देवी के नाम की ज्योत के रूप में। परेशानी अधिक हो तो निकारी और यह दिया दोनों करें, दिये को चौराहा पर या शिव मंदिर के पास पूजित पीपल या बरगद के पास रखें।

06

मारण प्रयोग के तीन तत्काल विधानों में अखंड ज्योत अनिवार्य

निकारी या आटे का दिया: जो संभव हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:50–04:59

वक्ता कहते हैं कि ये तीन विधान — अखंड ज्योति, क्षेत्रपाल निकारी और आटे का चौमुख दिया — तुरंत करने चाहिए। इन तीनों में से पहला, अखंड ज्योत वाला, तो जरूर; दूसरे-तीसरे में से जो संभव हो वह।

वे कहते हैं कि ये तीन विधान तुरंत करने चाहिए — या इन तीनों में से पहला, अखंड ज्योति वाला, तो जरूर, और दूसरे-तीसरे, क्षेत्रपाल निकारीक्षेत्रपाल को अर्पित एक विसर्जन-अनुष्ठान — सुरक्षा तथा क्षेत्र में निवास करने वाली दुष्ट शक्तियों (डाकिनी, शाकिनी, भूत, प्रेत, पिशाच, वेताल) की शांति हेतु प्रार्थना, जो घर की देहरी पर व्याप्त दुष्ट ऊर्जाओं को कम-से-कम 24 घंटे हेतु शुद्ध कर देती है। और आटे का दिया, में से जो संभव हो।

07

मारण प्रयोग से पीड़ित के लिए अपने सिद्ध मंत्र या नित्य पाठ का संकल्प-सहित जप

और कुछ न हो तो पीड़ित के पास धीमे स्वर में हनुमान चालीसा या बजरंग बाण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:00–05:33

वक्ता कहते हैं कि चौथा विधान, पिछले काम हो जाने पर, यह है कि जिस भी मंत्र का आपने जप किया हो, सिद्ध किया हो, अनुष्ठान या पुरश्चरण किया हो — सबर मंत्र, तंत्रोक्त या अन्य — या जिसका नित्य पाठ करते हों: दुर्गा कवच, हनुमान कवच, चालीसा, बजरंग बाण, साठिका या बीसा — उसका अधिकाधिक जप पीड़ित के नाम से संकल्प लेकर करें कि इनके प्राणों की रक्षा हो। ऐसा कुछ न हो तो संकल्प लेकर हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें, पीड़ित के पास धीमी आवाज में ताकि उसे भी सुनाई दे।

08

विभत्स मारण प्रयोग के लिए "संकट कटे मिटे सब पीरा" के संपुट से हनुमान चालीसा

गलत संपुट और सही संपुट

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:34–06:17

वक्ता कहते हैं कि यदि प्रयोग बहुत विभत्स हो और परेशानी अधिक हो, तो हनुमान चालीसा का पाठ "संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमरे हनुमत बलबीरा" के संपुट के साथ करें, सही विधि से, जो चैनल पर लाइव वीडियो में पूरी तरह प्रसारित है — यह गलत तरीका नहीं कि पहली चौपाई से पहले एक बार और अंत में एक बार पढ़ लिया। सही संपुट से पहले ही पाठ से आराम मिलना शुरू हो जाता है।

09

जिस दिन मारण प्रयोग हुआ हो उस दिन 108 दीपकों का भैरव दीपदान

अष्ट भैरवों के लिए आठ जगह भोग, केवल एक शाम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:18–07:11

वक्ता कहते हैं कि पांचवीं विधि चैनल पर बताई गई भैरव जी की दीपदान विधि है: 108 दीपकों से एक यंत्र बनाना है और अष्ट भैरव के नाम से आठ जगह भोग देना है, जिस दिन प्रयोग हुआ हो उस दिन घर में शाम को (या सुबह), केवल पहले दिन। भैरव जी की ऊर्जा बहुत प्रचंडता से आती है, वहां उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह नष्ट होने लगती है, और प्रयोग के पीछे कितना भी बलि विधान हो, वह अपनी मंशा में सफल नहीं हो पाता।

10

अभिचार के विरुद्ध अपामार्ग की लकड़ी पर काली मिर्च, पीली सरसों, लाल गुंजा और गुग्गल की रक्षा-धूनी

सुबह-शाम 7 से 11 दिन; हवन नहीं, इसलिए दोष नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:12–08:17

वक्ता कहते हैं कि छठा विधान, जिसे घर पर सुबह-शाम शुरू करके लंबे समय तक करना है, धूनी है: गाय के गोबर के कंडे या सबसे सही अपामार्ग की लकड़ी कपूर से प्रज्वलित करें और उस पर काली मिर्च, पीली सरसों, लाल गुंजा और गुग्गल मिलाकर धूनी दें, साथ में हनुमान जंजीरा, बजरंग बाण, हनुमान चालीसा, नरसिंह भगवान के मंत्र या अपना कोई सिद्ध किया हुआ सुरक्षात्मक मंत्र — साबर, तंत्रोक्त या पुराणोक्त — पढ़ते हुए। यह हवन नहीं है, इसलिए कोई दोष नहीं। इससे बनी ऊर्जा अभिचार का नाश करती है; दोनों समय, कम से कम सात और ग्यारह दिन तक तो जरूर करें।

11

भारी मारण प्रयोग के लिए दुर्गा सप्तशती संपुट अनुष्ठान या नवचंडी, साथ में रुद्राभिषेक

उचित साधकों द्वारा, घर पर, सामर्थ्य के अनुसार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:18–09:04

यदि अभिचार बहुत भारी हो और छह विधानों के बाद भी दिक्कत टली न हो, तो वक्ता कहते हैं कि सातवां विधान यह है कि उचित साधकों से दुर्गा सप्तशती का संपुट अनुष्ठान करवाएं — एक पाठ या नौ पाठ, एक दिन या पांच-सात दिन — या नवचंडी अनुष्ठान, अपने सामर्थ्य के अनुसार, साथ में रुद्राभिषेक, पार्थिव शिवलिंग का हो तो अति उत्तम, सब घर पर, यदि सक्षमता हो।

12

सप्तशती अनुष्ठान सामर्थ्य से बाहर हो तो धूनी में जयंती मंगला काली मंत्र

कम से कम 27 बार, पूरे घर को धूपित करते हुए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:05–09:22

सप्तशती अनुष्ठान की सक्षमता न हो तो वक्ता कहते हैं कि धूनी करते रहें और उसमें एक मंत्र और डालें — अर्गला स्तोत्र का प्रथम मंत्र, जयंती मंगला काली "जयंती मंगला काली भद्रकाली का पालिनी" — कम से कम 27 बार, उससे पूरे घर को धूपित करें, और धूनी में कपूर मिलाकर रखें ताकि वह प्रज्वलित रहती रहे।

13

मारण प्रयोग के विरुद्ध कम खर्च के स्वयं किए जाने वाले अनुष्ठान, जिनमें महाभैरव सर्वोत्तम

हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, महाभैरव या सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:23–10:02

वक्ता कहते हैं कि यदि आप सप्तशती जैसे बड़े अनुष्ठान, जिनमें 20–22 हजार रुपये लग जाते हैं, करवाने में सक्षम नहीं हैं, पर थोड़ा पूजन-पाठ स्वयं कर सकते हैं, तो हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का अनुष्ठान कर लें। उनके अनुसार सबसे सही, जिसके अनुभव चैनल पर बार-बार डाले जाते हैं, महाभैरव का अनुष्ठान है: पहले से किया हो तो ठीक, पर दिक्कत आने के बाद देख रहे हों तो कम से कम उसका पाठ शुरू कर दें। अन्यथा सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र, जो सिद्ध साबरी विद्या चैनल पर मिलेगा, उसका अनुष्ठान घर पर करने से भी परिवार और पीड़ित व्यक्ति की रक्षा होगी।

14

मारण प्रयोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए रक्षा कवच और स्वयं जप

दीक्षित हो तो गुरु मंत्र, अन्यथा भगवान का नाम या जयंती मंगला काली

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:03–10:25

वक्ता कहते हैं कि नौवां विधान यह है कि जिस व्यक्ति पर मारण प्रयोग किया गया है, उसके शरीर पर रक्षा कवच धारण करवाएं ताकि उसकी प्राण ऊर्जा की रक्षा हो, और उससे स्वयं भी मंत्र जप करवाएं: दीक्षित हो तो गुरु मंत्र इत्यादि, अन्यथा भगवान का नाम जप, या जयंती मंगला काली मंत्र का, जो नाम मंत्र है, जितना हो सके अधिकाधिक जप।

15

मारण प्रयोग के बाद साप्ताहिक काली या हनुमान मंदिर पूजन, नींबू की माला और ज्योत, और शाम को भैरव के नाम से दीप

लंबी अवधि की दिनचर्या, और भगवती की इच्छा तथा प्रारब्ध की सीमा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:26–11:18

वक्ता कहते हैं कि सभी विधानों के साथ-साथ मंगलवार और शनिवार को काली जी या हनुमान जी के मंदिर में पूजन दें, भगवती को नींबू की माला पहनाएं, और पीड़ित के हाथ से स्पर्श करवाकर संकल्प के साथ नींबू की ज्योत जलाएं। हर शाम घर के दोनों ओर एक-एक दीप, या चार बाती वाला एक छोटा-सा चौमुख दीप भैरव जी के नाम से प्रज्वलित करें। लंबे समय तक यह करते रहने से मारण का प्रभाव शांत और नष्ट हो जाता है, और कोई कितना भी प्रयोग कर ले वैसी अरिष्टता नहीं आ पाती जैसी वह चाहता है — बाकी, वे कहते हैं, भगवती की इच्छा और अपना प्रारब्ध और पुण्य।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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