सिद्धि ट्रांसफर कैसे होती है — किन शक्तियों का स्थानांतरण होता है, असल में क्या दिया जाता है, और खरीदी हुई शक्ति चुप क्यों हो जाती है
वक्ता समझाते हैं कि शक्ति या सिद्धि का स्थानांतरण असल में क्या है: किन शक्तियों का हो सकता है, साधक उन्हें कैसे तैयार करता है, पैसे लेकर किया गया ट्रांसफर सिर्फ भोग-भेंट और एक शब्द सीमित समय के लिए क्यों देता है, और स्पर्श शक्तियों से खरीदने वालों को कैसे फँसाया जाता है।
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क्या शक्ति या सिद्धि का ट्रांसफर सच में संभव है?
केवल निम्न शक्तियाँ जाती हैं; उच्च शक्तियाँ शक्तिपात से
यह पूछे जाने पर कि क्या ऊर्जा ट्रांसफर संभव है, वक्ता कहते हैं कि हाँ, बिल्कुल संभव है — लेकिन केवल निम्न स्तर की शक्तियों का। उच्च शक्तियों का स्थानांतरण नहीं होता; वे शक्तिपात के माध्यम से दी जाती हैं, और शक्तिपात तथा ऊर्जा स्थानांतरण में ज़मीन-आसमान का अंतर है।
वक्ता कहते हैं कि सोशल मीडिया पर लोग लगातार यह कहते सुनाई देते हैं कि कोई यक्षिणी ट्रांसफर कर रहा है, कोई योगिनी, कोई अप्सरादिव्य नर्तकी — साधना के प्रसंगों में प्रायः परीक्षा का रूप।, कोई भूत-प्रेत, कोई मसान, कोई काली, कोई भैरव। वे बताना चाहते हैं कि इसके पीछे की वास्तविकता क्या है और धरातल पर इसकी असली तकनीक क्या है। वे स्पष्ट करते हैं कि वे उन लोगों की चर्चा नहीं कर रहे जो पैसे लेकर धोखाधड़ी करते हैं — उसका निर्णय सुनने वाला स्वयं करे — पर कहते हैं कि जो वे बताने जा रहे हैं उसे समझ लेने पर व्यक्ति आगे बढ़ने से पहले यह परीक्षा भी ले सकेगा कि ऐसे लोगों की शक्तियों का कोई प्रभाव है भी या नहीं। क्या ऊर्जा ट्रांसफर संभव है, इस प्रश्न पर वे उत्तर देते हैं: हाँ, बिल्कुल। शक्ति का ट्रांसफर, ऊर्जा का स्थानांतरण होता है। लेकिन किन शक्तियों का? उच्च शक्तियों का स्थानांतरण नहीं होता। उच्च शक्तियाँ शक्तिपात के माध्यम से दी जाती हैं — और यह बहुत अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि शक्तिपात और ऊर्जा स्थानांतरण में ज़मीन-आसमान का अंतर है। शक्तिपात अपने आप में अलग विषय है, जिसे उच्च कोटि के साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। और योगी करते हैं; साधारण स्तर के साधकों के लिए यह संभव नहीं है। वे यह भी जोड़ते हैं कि लोग कहते हैं उच्च कोटि, निम्न कोटि कुछ नहीं होती, शक्ति तो शक्ति होती है। वे इससे असहमत हैं: यदि कोई तंत्र के क्षेत्र में गया है तो उसे पता होना चाहिए कि हर शक्ति की एक सीमा होती है, और कुछ शक्तियाँ ऐसी होती हैं जो सीमा से परे होती हैं। "उच्च" से उनका आशय उन्हीं शक्तियों से है, और वे उस विषय को यहीं छोड़ देते हैं क्योंकि उसमें बहुत सारे भेद और मतांतर हैं जिनसे विषय बदल जाएगा।
किन शक्तियों का ट्रांसफर हो सकता है?
केवल पृथ्वी से जुड़े भूत, प्रेत, मशान; परी, अप्सरा, यक्षिणी, योगिनी नहीं
वक्ता कहते हैं कि केवल इस पृथ्वी के क्षेत्रों से जुड़ी साधारण स्तर की शक्तियों — भूत, प्रेत, मसान — का ही स्थानांतरण एक साधक कर सकता है। परी का स्थानांतरण नहीं होता, न अप्सरा, यक्षिणी या योगिनी का; जो ऐसा मानता है वह गलतफहमी में है। श्मशानिक शक्तियों का स्थानांतरण हो सकता है, लेकिन उसके बहुत सारे नियम हैं।
वक्ता अब बताते हैं कि किन शक्तियों का स्थानांतरण किया जा सकता है। साधारण स्तर की वे शक्तियाँ जिनके बारे में सदा सुना जाता है — भूत, प्रेत, मसान — इन सबका स्थानांतरण संभव है। लोग परी के स्थानांतरण की भी बात करते हैं; वे कहते हैं कि परी का स्थानांतरण नहीं होता, और इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए। अप्सरादिव्य नर्तकी — साधना के प्रसंगों में प्रायः परीक्षा का रूप। का नहीं होता, यक्षिणी का नहीं होता, योगिनी का नहीं होता। सिर्फ और सिर्फ वे साधारण स्तर की शक्तियाँ जो इस पृथ्वी के क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं, उन्हीं का स्थानांतरण एक साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। कर सकता है। श्मशानिक शक्तियों को भी, यदि लोग ट्रांसफर कर रहे हैं, तो किया जा सकता है — लेकिन उसके बहुत सारे नियम हो जाते हैं।
ट्रांसफर से पहले साधक किसी प्रेत को कैसे बाँधता और तैयार करता है
बंधन, अपनी सिद्धि के नीचे चेतन करना, यात्रा योग्य बनाना
वक्ता प्रक्रिया बताते हैं: साधक पहले ऐसी आत्मा को बंधन में लेता है जिसकी दो-चार साल पहले काल मृत्यु हुई हो और जो भटक रही हो, उसे अपनी सिद्धि के नीचे चेतन करता है, उसे इतना प्रबल बनाता है कि वह एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र जा सके (जो कोई शक्ति अपने आप नहीं कर सकती), और फिर उस पर नियंत्रण स्थापित करके उसे अपनी शक्तियों में सम्मिलित कर लेता है।
साधक शक्तियों का स्थानांतरण कैसे और किनका करता है, इसे समझाने के लिए वक्ता एक उदाहरण रखते हैं। मान लीजिए कोई साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। है जिसने अपनी शक्तियों के माध्यम से किसी ऐसी आत्मा को दबाव में या बंधन में ले रखा है जिसकी दो-चार साल पहले काल मृत्यु हुई और जो भटक रही है। ऐसी शक्तियों को पहले बंधन में लिया जाता है। बंधन में लेने के बाद उसे अपनी शक्ति के नीचे चेतन किया जाता है — यानी साधक ने जो भी सिद्धि की हो, उस सिद्धि के नीचे लेकर उसे चेतन कर दिया जाता है। साथ ही उसे इतना प्रबल बनाया जाता है कि वह एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र जाने में सक्षम हो जाए। यह इसलिए ज़रूरी है, वे कहते हैं, क्योंकि कोई भी शक्ति एक जगह से दूसरी जगह अपने आप नहीं जा सकती; उसके पीछे बहुत सारे और कार्य करने पड़ते हैं तभी वह जा पाती है। तो पहले उसे उस स्तर की शक्ति बनाया जाता है — एक तरह से कहें तो उसका ट्रांसफॉर्मेशन किया जाता है। जब यह हो जाए, तब उस पर नियंत्रण स्थापित करके उसे साधक की अपनी शक्तियों में सम्मिलित कर लिया जाता है। तभी स्थानांतरण के लिए कुछ होता है।
पैसे लेकर किए गए शक्ति ट्रांसफर में वास्तव में क्या दिया जाता है
भोग-भेंट और एक शब्द, पूरी सिद्धि कभी नहीं
वक्ता कहते हैं कि जब शक्ति ट्रांसफर की जाती है तो साधक उसे अपने स्थान पर बुलाकर सिर्फ भोग-भेंट और एक साधारण शब्द — सावर मंत्र इत्यादि — पर दे देता है। वह अपनी की हुई पूरी सिद्धि कभी नहीं देता, और कोई साधक ऐसा करेगा भी नहीं: वह विद्या वर्षों की मेहनत और जन्म-जन्म के पुण्यों की कमाई है, और वह उसका रोज़गार नहीं है, इसलिए वह उसे पैसे से कभी नहीं देगा।
अब, वक्ता कहते हैं, जब किसी को ऊर्जा ट्रांसफर करनी हो तो साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। उस शक्ति को अपने स्थान पर बुलाकर सिर्फ भोग-भेंटभोग-आधारित प्रेत-शक्तियों से संचालित तांत्रिक प्रयोग को उलटने हेतु प्रयुक्त विशेष सिद्ध प्रति-भेंट। से दे देता है। भोग-भेंट का अर्थ हुआ कि उसने जो शक्ति दी, वह सिर्फ और सिर्फ भोग और भेंट पर दी, और एक साधारण शब्द से दी। "शब्द" का अर्थ हुआ मंत्र — सबर मंत्र इत्यादि — उसी से उन्होंने शक्ति दे दी। जो नहीं दिया जाता वह है साधक की की हुई पूरी सिद्धि। ऐसा कभी नहीं होता, और कोई साधक ऐसा करेगा भी नहीं। उसने जो विद्या सीखी है वह कितने लंगोट धोने के बाद — कितने वर्षों की मेहनत के बाद — मिली है, और वह उसे पैसे लेकर कभी नहीं देगा, क्योंकि वह उसका रोज़गार नहीं है और सिर्फ पेट का सवाल नहीं है। पेट के लिए तो जो करेगा, करेगा ही; लेकिन यह चीज़ जन्म-जन्म के पुण्यों के प्रभाव से प्राप्त होती है, चाहे ऊर्जा नकारात्मक हो या सकारात्मक — ऊर्जा ऊर्जा होती है। कोई भी नहीं देगा। तो, वे निष्कर्ष निकालते हैं, सिर्फ भोग-भेंट से ही ये लोग एक शक्ति को किसी दूसरे को दे देते हैं। और भोग-भेंट से लेने के बाद बहुत सारी सीमाएँ होती हैं, जो सब लेने वाले को समझा दी जाती हैं कि भाई ऐसा-ऐसा है, आपको ऐसा करना होगा।
खरीदी हुई शक्ति कुछ महीनों बाद जवाब देना क्यों बंद कर देती है
देने वाला वापस बुला लेता है, खरीदार को दोष देता है, फिर पैसा लेता है
वक्ता कहते हैं कि व्यक्ति ₹51,000 या ₹1,00,000 देता है, उसे कहा जाता है "मैंने आपको भैरव दे दिया", वह शब्द लेकर घर आता है, और बताई गई विधि से पूछने पर शक्ति जवाब भी देती है। छह महीने या साल भर काम करती है — फिर जिस साधक ने दी थी वह अपनी शक्तियों से उसे वापस बुला लेता है और जवाब बंद हो जाता है। तब खरीदार कहता है "किसी ने मेरी शक्ति बाँध दी", पर कोई बंधन नहीं हुआ; देने वाले ने बस वापस खींच ली। वह यह कभी नहीं मानेगा — तुम्हारी किसी गलती को कारण बताएगा और दोबारा देने के लिए फिर पैसा लेगा — इसलिए व्यक्ति कभी स्वतंत्र नहीं हो पाता। यही, वक्ता कहते हैं, 95% मामलों की वास्तविकता है; जो 5% पूरे विधि-विधान से होता है वह क्षेत्र ही अलग है।
वक्ता बताते हैं कि खरीदने वाले की ओर से क्या होता है। सामने वाला व्यक्ति ₹51,000 या ₹1,00,000 देकर फलानी शक्ति ले लेता है। उसे यह पता ही नहीं कि जो उसे दिखाकर दिया गया है वह शक्ति वास्तव में क्या है; उसे बस कह दिया गया कि "हाँ, मैंने आपको भैरव दे दिया है।" तो भाई साहब "भैरव" लेकर चले आए: शब्द उन्हें मिल चुके हैं, और वह शक्ति आवाज़ भी देती है — यानी जो कुछ वे पूछते हैं, बताई गई विधि से पूछने पर जवाब मिलता है। घर लाए, स्थापित कर दिया, भोग-भेंटभोग-आधारित प्रेत-शक्तियों से संचालित तांत्रिक प्रयोग को उलटने हेतु प्रयुक्त विशेष सिद्ध प्रति-भेंट। पर चला रहे हैं। कितने समय तक चलेगी? छह महीना, साल भर — कुछ समय तक अवश्य काम करेगी। उसके बाद जिन साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। ने वह शक्ति दी थी, वे अपनी शक्तियों के माध्यम से उसे वापस बुला लेते हैं। अब इन्हें आवाज़ मिलना बंद हो जाता है: पहले तो बहुत काम हो रहा था, अब नहीं हो रहा। इसके पीछे की कहानी बस यही है कि जिन्होंने ये सिद्धियाँ दी थीं, उन्होंने उसे वापस बुला लिया। तब खरीदने वाले कहने लगते हैं कि फलाने व्यक्ति ने हमारी शक्तियों का बंधन कर दिया। कोई बंधन नहीं हुआ — सीधी सी बात है कि देने वाले ने वापस खींच ली, वापस ले ली, अपने स्थान पर लौटा ली। अब, वक्ता कहते हैं, दोबारा पैसा दीजिए या उन्हें मनाइए। और देने वाला कभी खुलकर नहीं बोलेगा कि "मैंने तुम्हारा बंधन कर दिया", "मैंने तुम्हारे नेत्र बंद कर दिए", "मैंने तुम्हारी दूर-श्रवण शक्ति बाँध दी"। वह बोलेगा कि तुम्हारी गलती की वजह से ऐसा हो रहा है — तुमने फलानी गलती कर दी। गलती हुई हो या न हुई हो, उसके पास बताने के लिए बहुत सारे कारण हैं। आप कहोगे "गुरु जी, क्या करें?", और वह कहेगा ठीक है, इतना पैसा लगेगा, फिर लेगा, फिर दे देगा, और आप फिर करने लगोगे। तो, वक्ता कहते हैं, आप कभी स्वतंत्र रूप से कर ही नहीं पाओगे — यहीं बंद होकर रह जाओगे। यही वास्तविकता है, और 95% मामलों में यही होता है। जो 5% सही तरीके से, पूरे विधि-विधान से होता है, वह क्षेत्र ही अलग है।
सच्चा शक्ति स्थानांतरण केवल दीक्षित शिष्य को होता है, खरीदार को कभी नहीं
कोई दुकान नहीं, ₹11,000 या ₹21,000 में कोई सेल नहीं
वक्ता कहते हैं कि जो सही तरीके से स्थानांतरण करते हैं वे केवल अपने शिष्यों को देते हैं — जो उनकी गुरु परंपरा में दीक्षित हों — और वह भी तभी जब किसी कारणवश देना पड़े या इच्छा से दें। वे हर किसी को ऐसे नहीं देते जैसे दुकान या सेल लगी हो: "आइए, ₹11,000 या ₹21,000 में ले जाइए"। ऐसा, वे कहते हैं, नहीं होता।
जो थोड़े से स्थानांतरण सही तरीके से, पूरे विधि-विधान से होते हैं, उनके बारे में वक्ता कहते हैं कि ये लोग केवल अपने शिष्यों को ही देते हैं। वे हर किसी को ऐसे नहीं देते जैसे दुकान लगी हो, सेल लगी हो — "आइए, ₹11,000 या ₹21,000 में लेकर जाइए"। वैसा नहीं होता। होता यह है कि वे सिर्फ अपने उन शिष्यों को देते हैं जो दीक्षित हों, अपनी गुरु परंपरा में हों, और वह भी तभी जब किसी कारणवश देना पड़े या फिर अपनी इच्छा से दें। यह सब बताकर वे कहते हैं कि इसके पीछे की वास्तविकता बता दी गई: अगर कोई आपसे कह रहा है "फलानी शक्ति का ट्रांसफर ले लो, यह ले लो", तो अब आप जानते हैं कि क्या चल रहा है।
क्या एक ट्रांसफर की हुई शक्ति एक साथ दस जगह प्रकट हो सकती है?
प्रेत सिर्फ माया-भ्रम बनाता है; कई शक्तियों की चौकी अलग बात है
वक्ता कहते हैं कि इस प्रकार की शक्ति इतनी उच्च नहीं होती कि एक ही आत्मा, एक ही प्रेत को दस जगह प्रकट कर दिया जाए — यह संभव नहीं है, और ऐसा कहकर सिर्फ लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है। एक शक्ति दस जगह जा सकती है, पर प्रेत या मसानिक शक्ति में दस जगह एक साथ प्रकट होने की क्षमता नहीं होती; अधिक से अधिक वह माया और भ्रम बनाती है। 10–15 अलग-अलग मसानिक शक्तियों वाली चौकी, जिसमें हर एक अपने भोग-पिंड से सिद्ध की गई हो, अलग बात है।
वक्ता लोगों की एक और आपत्ति उठाते हैं: ठीक है, आपने इतनी सारी शक्तियाँ सिद्ध की हुई हैं, पर आप एक किसी शक्ति को दे रहे हैं — वह एक शक्ति इतने सारे लोगों को कैसे बाँट रहे हैं? एक ही शक्ति जगह-जगह कैसे जा सकती है? वे कहते हैं कि ट्रांसफर बेचने वाले इसे बहुत बड़ा विषय बनाकर, भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग करके बताते हैं कि हाँ, एक ही शक्ति बहुत सारी जगहों में जा सकती है। उनका उत्तर: सबसे पहली बात, वह इतनी उच्च स्तर की शक्ति नहीं है कि आप एक ही आत्मा को, एक ही प्रेत को दस जगह प्रकट कर दो। यह संभव नहीं है, और यह बात बोलकर सिर्फ लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है। हाँ, एक ही शक्ति दस जगह जा सकती है — पर दस जगह प्रकट होने की क्षमता इस प्रकार की प्रेत या मसानिक शक्तियों में नहीं होती। उसके लिए चौकी चाहिए, और वह बिल्कुल अलग चीज़ है: चौकी लगती है, उसमें ग्रुप चलता है, उसमें 10 या 15 अलग-अलग मसानिक शक्तियाँ होती हैं, सबको अपने भोग-पिंड पर सिद्ध किया गया होता है। फिर सबको अलग-अलग चलाया जाता है, तब वह चलती है। ऐसा कभी नहीं हो सकता, वे कहते हैं, कि उस शक्ति में इतनी दिव्य शक्ति हो कि वह एक बार में दस जगह प्रकट हो जाए। अगर सच में कोई ऐसा सोच भी रहा है, तो वह शक्ति केवल माया और भ्रम बना सकती है — इससे अधिक कुछ नहीं। वह सिर्फ एक ही है; दस जगह नहीं हो सकती। वे सुनने वालों से कहते हैं कि इसे अच्छी तरह समझ लें और इन भ्रमों में न पड़ें कि कैसे छला, ठगा और लूटा जाता है।
सच्चा शक्ति स्थानांतरण कैसे होता है और क्यों बना है
जो साधक अब सेवा नहीं कर सकता; पूरी चौकी से पहले टेस्ट ड्राइव
वक्ता कहते हैं कि ऊर्जा स्थानांतरण बेचने के लिए नहीं बनाया गया; वह किसी कारणवश बना है। जिस साधक ने कोई मसानिक शक्ति जगाई और उससे बहुत भला किया, हो सकता है उसका शरीर या पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ अब उसे सेवा, पूजा और भोग-भेंट देने न दें, और वह स्वतंत्र रूप से उसका विसर्जन भी न कर सके। तब वह उस शक्ति को अपने शिष्य, मित्र या किसी सक्षम साधक को देता है जो हृदय से, जन-कल्याण की भावना से उसे लेना चाहता हो। पूर्ण हस्तांतरण से पहले एक टेस्ट ड्राइव होता है: शक्ति एक, दो या तीन पक्ष के लिए भोग-भेंट पर दी जाती है; जब लेने वाला सक्षम सिद्ध होता है और शक्ति स्वयं कहती है कि मैं इसके साथ रहूँगा और इससे सेवा-पूजा लूँगा, तब पूरी प्रक्रिया से पूरी चौकी का स्थानांतरण होता है। जिसके पास सच में ऐसी शक्तियाँ होतीं, वे जोड़ते हैं, वह उन्हें बाँट नहीं रहा होता।
वक्ता कहते हैं कि जो साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। सच में ऐसी शक्तियाँ देता भी होगा, वह कभी खुलेआम नहीं बाँटेगा, क्योंकि उसे पता है कि गलती करने की भी सीमा होती है। ऊर्जा ट्रांसफर या स्थानांतरण बेचने के लिए नहीं बनाया गया — जिन लोगों ने आज इसे व्यवसाय बना दिया है, उनके बावजूद। यह किसी कारणवश बनाया गया है। वह कारण यह है। मान लीजिए आप किसी शक्ति की पूजा-सेवा करने में अब सक्षम नहीं हैं। आपने कोई मसानिक शक्ति जगा ली, जिसके द्वारा आपने लोगों की सेवा की, जन-कल्याण किया — वक्ता ज़ोर देते हैं कि वे किसी गलत बात के लिए नहीं कह रहे; आपने बहुत अच्छा काम किया, लोगों को तंत्राभिचार से बचाया, जीवन बचाया, परिवार बर्बाद होने से बचाया, पति-पत्नी को मिलाया। लेकिन अब उसकी सेवा, पूजा, भोग-भेंटभोग-आधारित प्रेत-शक्तियों से संचालित तांत्रिक प्रयोग को उलटने हेतु प्रयुक्त विशेष सिद्ध प्रति-भेंट। इत्यादि देने की क्षमता आप में नहीं बची: किसी कारणवश आपका शरीर साथ नहीं दे रहा, या अपनी और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के कारण अब आप इस शक्ति से छुटकारा चाहते हैं — और आप स्वतंत्र रूप से उसका विसर्जन नहीं कर सकते। यही आपकी परेशानी है। तब ऐसे लोग उस शक्ति को अपने किसी शिष्य को, मित्र को, या किसी ऐसे सक्षम साधक को देते हैं जो हृदय से इन शक्तियों को ग्रहण करना चाहता है, जन-कल्याण की भावना से लेना चाहता है। तब ऊर्जा स्थानांतरण पूर्ण रूप से दे दिया जाता है। पूर्ण रूप से देने से पहले, वे कहते हैं, एक तरह से समझ लीजिए कि टेस्ट ड्राइव होता है। पहले उसे लेने वाले को एक निश्चित समय — एक पक्ष, दो पक्ष, तीन पक्ष — के लिए भोग-भेंट पर दिया जाता है, यह देखने के लिए कि वह चला पा रहा है या नहीं। जब वह सक्षम हो पाता है, और शक्ति स्वयं कहती है कि "हाँ, यह सक्षम है; मैं इसके साथ रहूँगा, इसका साथ दूँगा, इससे सेवा-पूजा लूँगा," तब जाकर पूरी प्रक्रिया के माध्यम से पूरी चौकी का स्थानांतरण किया जाता है। यही, वे कहते हैं, वास्तविकता है कि इन शक्तियों की पूरी कार्य-प्रणाली कैसे चलती है — न कि वह जिसमें कोई बाबा आपको मसान, जिन्न, परी और अप्सरादिव्य नर्तकी — साधना के प्रसंगों में प्रायः परीक्षा का रूप। सब एक गठरी में बाँधकर दे दे और आप लेकर घूमते रहें। अगर उन लोगों के पास सच में वे शक्तियाँ होतीं, तो वे उन्हें बाँट नहीं रहे होते; वे स्वयं सक्षम होते।
जिसने सच में यक्षिणी सिद्ध की हो, वह उसे कभी नहीं बेचेगा
स्वर्ण प्रभा यक्षिणी ट्रांसफर के दावे
वक्ता उन लोगों की ओर इशारा करते हैं जो स्वर्ण प्रभा यक्षिणी "बाँट" रहे हैं और पूछते हैं कि क्या उन्होंने कभी सुना या देखा भी है कि वह शक्ति क्या है, या एक साधारण यक्षिणी क्या कर सकती है। वे कहते हैं कि एक यक्षिणी भी सिद्ध कर लेने पर आपमें इतनी क्षमता और इतनी समृद्ध शक्ति आ जाती है कि उसे बाँटकर पैसा कमाने की आवश्यकता ही नहीं रहती। तो क्यों बाँट रहे हो, क्यों पैसा ले रहे हो? यह सिर्फ खरीदने वालों की बेवकूफी है, वे कहते हैं, जिससे लोग वहाँ लुट रहे हैं।
वक्ता उन लोगों को अलग से लेते हैं जो अब स्वर्ण प्रभा यक्षिणी "बाँट" रहे हैं। क्या उन्होंने स्वर्ण प्रभा यक्षिणी के बारे में सुना भी है, कभी देखा भी है, क्या वे जानते हैं कि वह शक्ति क्या है और कैसे काम करती है? क्या किसी को यह भी पता है कि एक साधारण यक्षिणी की क्या शक्ति होती है? नहीं पता होगा, वे कहते हैं। उनका कहना है कि जब आप एक यक्षिणी भी सिद्ध कर लेते हैं तो आपमें इतनी क्षमता आ जाती है, और आपके पास इतनी समृद्ध शक्ति रहती है, कि आपको उसे बाँटकर पैसा कमाने की आवश्यकता ही नहीं रहती। ज़रूरत ही नहीं है। तो जो लोग कह रहे हैं "मैं बाँट रहा हूँ, आकर ले लो", उनसे वे पूछते हैं: क्यों बाँट रहे हो, क्यों पैसा ले रहे हो? अगर आपके पास सच में स्वर्ण प्रभा है तो आपको आवश्यकता ही क्या है? कोई नहीं, वे कहते हैं — बिल्कुल नहीं। यह सिर्फ लोगों की बेवकूफी है कि वे वहाँ जाकर लुट रहे हैं। वे जोड़ते हैं कि उस लूट के पीछे कुछ खास शक्तियाँ काम करती हैं, और वे बताएँगे कि लोग कैसे लूटते हैं और इसके पीछे क्या काम करता है।
स्पर्श शक्ति: आशीर्वाद का स्पर्श जो लोगों को साधक के वश में कर देता है
अहिरावण-महिरावण का वचन, बगला साधक का ₹500 वाला स्पर्श, और शक्ति माँगने वालों का फँसना
वक्ता कहते हैं कि कुछ साधक, जिनमें अच्छे ब्राह्मण वर्ण के साधक भी हैं, ऐसी शक्तियाँ सिद्ध करके रखते हैं कि आशीर्वाद के नाम पर सिर्फ स्पर्श कर देने से वह शक्ति आप पर चल जाती है, चाहे आपने कोई भी सिद्धि की हो। वे इसकी तुलना अहिरावण-महिरावण से करते हैं, जिनकी देवी के वरदान से ब्रह्मा, विष्णु, महेश और त्रिलोक की हर शक्ति उनकी वाणी के वश में थी — सिर्फ एक वानर, हनुमान, नहीं, जिन्होंने इसीलिए उनका अंत किया। ऐसी एक-कार्य वाली शक्तियाँ हर प्रकार की शक्ति को बाँधती हैं और सिर्फ वही एक काम करती हैं: स्पर्श मात्र से आप या तो साधक के वश में हो जाते हैं या स्वयं पैसा निकालकर उसे दे देते हैं। अपने जीवन से वे एक बहुत अच्छे बगला साधक को याद करते हैं जिनके स्पर्श से हर प्रणाम करने वाला ₹500 या जितना उसके पास हो दे देता था, भले बदले में कुछ न मिले। साधक ठीक इसी प्रकार की शक्ति उन लोगों पर चलाते हैं जो "मुझे फलानी शक्ति दे दो" कहकर आते हैं, और वे इसी तरह ठगे जाते हैं।
वक्ता कहते हैं कि ऐसी-ऐसी शक्तियाँ और सिद्धियाँ होती हैं: आशीर्वाद देने के नाम पर साधक — जिनमें अच्छे-अच्छे ब्राह्मण वर्ण के साधक भी हैं — ऐसी शक्तियाँ सिद्ध करके रखते हैं कि अगर वे आशीर्वाद के नाम से सिर्फ स्पर्श कर दें, तो स्पर्श के माध्यम से वैसी शक्ति आपके ऊपर चल जाती है, चाहे आपने कोई भी सिद्धि की हो। वे इसे एक वचन से समझाते हैं जिसके बारे में सुनने वाले ने सुना होगा। अहिरावण और महिरावण, जो देवी की सेवा-पूजा करते थे, देवी की वाणी के वश में त्रिलोक की हर शक्ति — ब्रह्मा, विष्णु, महेश — को रखते थे। सिर्फ हनुमान जी नहीं थे, क्योंकि वरदान देते समय उन्होंने अहिरावण-महिरावण से कहा था कि एक वानर मेरी वाणी के वश में नहीं है। उस वरदान के प्रभाव से ब्रह्मा, विष्णु, महेश तक उनकी वाणी के वश में थे, जिसके कारण अहिरावण-महिरावण बहुत प्रबल थे; लेकिन क्योंकि हनुमान जी नहीं थे, हनुमान जी ने उनका अंत कर दिया। ठीक इसी तरह, वक्ता कहते हैं, कुछ ऐसी शक्तियाँ होती हैं जिनके वचनों में हर प्रकार की शक्तियाँ होती हैं, और वे सिर्फ एक ही काम करेंगी। ऐसा साधक, जिसने उस प्रकार की शक्ति — स्पर्श शक्ति — सिद्ध की है, आपको आशीर्वाद के नाम से बस छू भर देगा। उस स्पर्श मात्र से आप या तो उसके वश (वशीकरण) में हो जाएँगे, या ऐसा हो जाएगा कि आप स्वयं पैसा निकालकर उसे दे देंगे। वे कहते हैं कि वे अपने जीवन का अनुभव बता रहे हैं: एक बहुत अच्छे साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। थे, बगलामुखी के साधक, जिन्होंने ऐसी सिद्धि रखी हुई थी। अगला व्यक्ति उनसे पूजा-पाठ कराए या न कराए, जब भी मिलता, ₹500 पैर पर रखकर देता — जिसे लोग "पाँव पूजा" कहते हैं: पैर छूकर प्रणाम करेगा तो ₹500 देगा, या जितना उसके पास हो, ताकि गुरु जी प्रसन्न हो जाएँ। गुरु जी भले बदले में एक मिट्टी का ढेला भी न दें, लेकिन व्यक्ति अपना सब कुछ उन पर लुटा देगा। ऐसी शक्तियाँ होती हैं, वे कहते हैं। और साधक ठीक इसी प्रकार की शक्तियों का प्रयोग दूसरे लोगों पर करते हैं — जो उसके प्रभाव में आकर कहते हैं "भाई, मुझे फलानी शक्ति दे दो, ढिमकानी शक्ति दे दो", और फिर ठगे जाते हैं। उन्हें आशा है कि सुनने वाले इन तकनीकों को समझेंगे, इनके प्रभाव से स्वयं को बचाएँगे, अच्छा और सही निर्णय लेंगे, और तभी इस क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे, न कि ऊटपटांग लोगों के चक्कर में पड़ेंगे।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।