शरीर पर सवारी आने लगे तो क्या करें — कंफर्मेशन, गुरु, साधना और दरबार के नियम

जिन साधकों के शरीर पर देवी-देवता की सवारी आने लगती है, उनके लिए एक प्रवचन।

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01

सवारी किसकी है, यह कंफर्म करना

शरीर पर देवी-देवता की सवारी आना आरंभ हो जाए तो सबसे पहला काम क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–00:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिस साधक-साधिका पर सवारी आना आरंभ हुई है, उनके परिवार वालों को सर्वप्रथम इस बात की 100% कंफर्मेशन करनी है कि शरीर पर आने वाली सवारी वही है जो वह स्वयं को बता रही है। देवी-देवता की सवारी आएगी तो अपना परिचय देगी, इसलिए सबसे पहले यही पता करना है कि सवारी किसकी है।

02

नया स्थान और पूजन विधि की आवश्यकता

आने वाली शक्ति के लिए नया स्थान और पूजन विधि चाहिए या नहीं?

· Reviewed Sep 2026 · 00:54–01:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि वह शक्ति पहले से ही आपके घर में उपस्थित हैं और उनका स्थान पहले से है, तो नया पूजा कुछ नहीं करना है। यदि कोई बाहरी शक्ति आई हैं, या किसी तीर्थ क्षेत्र की शक्ति आई हैं, या पूर्वकाल में कभी पूजित रही शक्ति अब जागृत हुई हैं, तो उनके लिए कौन-सा स्थान बने, कहाँ स्थान देना है, उनकी पूजा विधि, भोग, तिथि और समय — इन सबकी विस्तारपूर्वक जानकारी होनी चाहिए।

04

योग्य व्यक्ति के माध्यम से गुरु धारण, श्रेष्ठ हो कुल के गुरु

शक्ति को रखने का निर्णय हो जाए तो गुरु किसे बनाना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 02:21–02:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब यह तय हो जाए कि सवारी को स्थान देंगे और उनकी सेवा-पूजा करेंगे, तब किसी योग्य जानकार व्यक्ति के माध्यम से गुरु बनाना चाहिए और उनके द्वारा पूरे विधि-विधान जानने चाहिए। सबसे उचित यह है कि आपके कुल के कोई गुरु हों; अन्यथा कोई सही व्यक्ति, जिन पर आप विश्वास कर सकें और जो आपको किसी प्रकार की हानि न पहुँचाएँ।

05

असंतुलित ऊर्जा और फूला हुआ मस्तिष्क

यदि कोई गुरु के पास जाए ही नहीं तो क्या होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:57–03:33 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आप गुरु के पास न भी जाएँ तो भी वह शक्ति सामर्थ्य की प्राप्ति तो करा ही देंगी, लेकिन वह असंतुलित होगा, और आपके मस्तिष्क पर उनकी ऊर्जा का ऐसा प्रभाव रहेगा कि आप समझ नहीं पाएँगे। आपको लगेगा कि संसार के सबसे बलिष्ठ व्यक्ति आप ही हैं, और इसी कारण आप बहुत सी छोटी-मोटी गलतियाँ कर देंगे जो कालांतर में जीवन में बहुत बड़ी हानि उत्पन्न कर देंगी।

06

गलत गुरु से शक्ति को कष्ट, और शक्ति से आपको कष्ट

यदि चुने हुए गुरु ही गलत निकल जाएँ तो क्या होगा?

· Reviewed Sep 2026 · 03:34–04:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गुरु का सही होना बड़ा ज़रूरी है। अगर उचित गुरु न मिलें और आप हड़बड़ी में किसी को भी गुरु बना लें तो भी दिक्कत है: वे गलत मार्गदर्शन कर देंगे तो जो शक्ति आपके साथ आ रही हैं उनको भी दिक्कत और कष्ट होगा, और तब वे आपको भी कष्ट देंगी ही देंगी। वे कहते हैं कि यहाँ का सबसे विशिष्ट, सबसे सेंसिटिव पॉइंट यही है — सही व्यक्ति का चयन।

07

गोपनीयता और साधना की अनिवार्यता

यदि गुरु मिलें ही नहीं तो क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 04:07–04:35 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि गुरु की प्राप्ति नहीं हो रही है और शरीर पर सवारी आ रही है, तो कभी भी यह नहीं करना चाहिए कि बहुत अधिक ऊर्जा है, हम तो यह कर देंगे, वह कर देंगे। अगर सवारी बोल भी रही हैं तो भी इन सभी बातों को गुप्त रखते हुए साधना आरंभ करनी चाहिए। बिना साधना के इन शक्तियों का संतुलन संभव नहीं है — यह 100% जान लीजिए, वे कहते हैं; असंतुलित ऊर्जा किसी न किसी दिन तबाह करके रख देती है।

08

कुल परंपरा, अन्यथा भगवान दत्तात्रेय, फिर गणपति और भैरव

गुरु न हों तो सबसे पहले कौन-सी साधना आरंभ करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 04:36–05:00 · Also a question

आरंभिक साधना के विषय में वक्ता कहते हैं: यदि आपके घर में गुरु परंपरा (गुरु परंपरा) रही है, कोई दीक्षित रहे हैं, साधक रहे हैं, तो वे जिस परंपरा में थे उसके अनुसार कीजिए। अन्यथा किसी भी महाशक्ति की उपासना, या भगवान दत्तात्रेय की — गुरु स्वरूप, जिन्हें वे पूरे संसार के सबसे समर्थशाली गुरु, दिव्य गुरु कहते हैं — उनकी साधनाएँ आरंभ में करके तत्पश्चात गणपति साधना, भैरव साधना इत्यादि एक-एक करके करनी होंगी।

09

सवा-सवा लाख के पाँच अनुष्ठान, फिर अन्य मंत्र और रक्षा कवच

गुरु मंत्र को चैतन्य कैसे किया जाता है, और उसके बाद क्या?

· Reviewed Sep 2026 · 05:01–05:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गुरु मिल जाएँ तो उनके द्वारा प्रदत्त मंत्र को चैतन्य करना है। न मिलें तो स्वयं से किसी महाशक्ति का आश्रय लेकर — गुरु दक्षिणामूर्ति, भगवान दत्तात्रेय, या भगवान शिव के किसी भी स्वरूप का — गुरु स्वरूप में उनकी उपासना करनी चाहिए। गुरु मंत्र के सवा-सवा लाख के पाँच अनुष्ठान कीजिए, साल भर तक अनुष्ठान करते हुए। फिर जो अन्य मंत्र करना है — भगवती का, हनुमान जी का, भैरव जी का — उनका क्रमगत अनुष्ठान कर लें, और रक्षा कवच का भी, यानी स्वयं को पहले पूर्ण सुरक्षित कर लें।

10

त्रिनेत्र सिद्धि के बाद — वीरों का परिवार और कुल के पूर्वज

त्रिनेत्र की संतुलित सिद्धि के बाद ही गुरु अपने स्थान पर बैठकर साधक को उसकी शक्तियों से परिचित कराते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 05:33–06:23

वक्ता कहते हैं कि इसके पश्चात ही आगे बढ़ने पर — कुछ अनुष्ठान करवाने के बाद, जब त्रिनेत्र (दिव्यदृष्टि) इत्यादि की सही प्रकार से संतुलित सिद्धि प्राप्त हो जाएगी — तब गुरु अपने स्थान पर बैठकर आपको आपकी शक्तियों से परिचित करवाएँगे। केवल एक ही शक्ति नहीं होतीं: कोई भगवती, कोई योगिनी या कोई देवता आते हैं तो उनके साथ चलने वाली कई अन्य शक्तियाँ और कई वीर होते हैं।

11

पूर्णिमा या अमावस्या का खप्पर, शराब, और भोग देने का स्थान

किसी को पूर्णिमा तो किसी को अमावस्या का खप्पर, अलग-अलग प्रकार की शराब, और हर शक्ति के भोग का नियत स्थान

· Reviewed Sep 2026 · 06:24–07:15

वक्ता कहते हैं कि तत्पश्चात उनके भोगों के विषय में बताया जाएगा कि किसको किस प्रकार से भोग दिया जाएगा। बहुत सी ऐसी शक्तियाँ होती हैं जिनको पूर्णिमा के दिन खप्पर चढ़ता है, किसी को अमावस्या के दिन; किसी को शराब की धार लगती है, किसी को सादा शराब, किसी को कच्ची। किन्हीं को घर से बाहर भोग देना है, किन्हीं को चौखट पर, किन्हीं को पूजन स्थान में, किन्हीं को पानी रखने वाले स्थान में, किसी को तुलसी जी में, किसी को नदी या सरोवर के किनारे जाकर।

12

दरबार, प्रोफेशन और नीयत पर गुरु का प्रश्न

साधक शक्ति को अपने घर तक सीमित रखे या दरबार लगाए?

· Reviewed Sep 2026 · 07:16–07:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब सारा विधि-विधान हो जाए और मंत्र के जप से सिद्धि प्राप्त हो जाए, तब गुरु जी पूछेंगे कि आप स्वयं के अपने घर तक कल्याण करने तक सीमित रहना चाहते हो या दरबार इत्यादि लगाना चाहते हो। यदि आप चाहते हैं कि लोग आपके स्थान पर आएँ, तो आपका प्रोफेशन क्या है, आप पढ़ाई-लिखाई कर रहे हैं, आगे जीवन में क्या करना है, और घर के लोग कितने सहयोगी होंगे — यह सब देखकर ही निर्णय लेना चाहिए, और यह भी कि आप यह कार्य उचित प्रकार से करना चाहते हो या केवल फेमस होने के लिए।

13

सवा साल, पाँच साल या बारह साल का निषेध

दरबार लगाने से पहले साधक को कितनी अवधि प्रतीक्षा करनी होती है?

· Reviewed Sep 2026 · 07:46–08:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर विधिवत करना हो तो गुरु जी से बोलिए कि हम अच्छे प्रकार से सीखकर यह सब करना चाहते हैं, तो वे आपको विधि-विधान सिखाएँगे — और उसमें कम से कम सवा साल का, पाँच साल तक का, या बारह-बारह साल तक का निषेध होता है, जिसमें आप शक्ति को केवल जागृत करेंगे।

14

प्रतिदिन सवारी के विरुद्ध वचन, और महीने के नियत दिन

क्या सवारी का प्रतिदिन आना सही है?

· Reviewed Sep 2026 · 08:24–08:48 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शक्ति को जागृत करके जब वचन में (वचनबद्ध) लिया जाता है, तो गुरु इस चीज़ के लिए वचन करवाते हैं कि रोज़ प्रतिदिन नहीं आना है। वे साफ़ कहते हैं कि प्रतिदिन सवारी आ रही है तो भैया आप एकदम लेवल ज़ीरो पे हो; और जब चाहे तब बुला लेते हो और सवारी आ जाती है तो बहुत गड़बड़ है। वचन के समय ही तय होता है कि महीने में एक बार अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या या पूर्णिमा के दिन दरबार लगे, और उसी दिन तथा उनके पर्व काल में देवी या देवता शरीर पर आएँगे।

15

राजा स्वयं काम नहीं करता — उतारा साथ चलने वाली शक्तियों के नाम से

क्या प्रमुख देवी स्वयं उतारा करेंगी?

· Reviewed Sep 2026 · 08:49–09:52 · Also a question

वक्ता इसे क्षुद्र प्रकार की क्रिया बताते हैं और कहते हैं कि यह गलत है। अगर प्रमुख देवी, राजा ही काम करने लगेंगी, तो उसके इतने सारे नौकर-चाकर सेवकों का क्या काम? जो देवी आपके शरीर पे आ रही है वही देवी उतारा भी कर रही है और काट (तंत्र काट) भी कर रही है, तो साथ में चलने वाली बाकी सभी शक्तियों का क्या काम? गुरु बताएँगे कि साथ चलने वाली शक्तियों के नाम से उतारा देना है; प्रमुख शक्ति सिर्फ़ आदेश करेगी।

16

मुख भराई, गद्दी बंधन, आगंतुकों के नियम, और स्थान की सफाई

मुख भराई, गद्दी बाँधना, आने वालों के नियम, और उतारे के बाद स्थान को खाली करना

· Reviewed Sep 2026 · 09:53–10:34

वक्ता कहते हैं कि गुरु ही आगे बताएँगे कि दरबार लगाने के लिए पहले मुख भराई होगी, गद्दी बाँधी जाएगी — यानी स्थान दिया जाएगा। वे बताएँगे कि जिस स्थान पे दरबार लगाएँगे उसकी सुरक्षा किस प्रकार होगी, वहाँ आने वाले लोगों का क्या नियम होगा, उनको किस प्रकार आना है, उनका किस प्रकार वचन होगा, और उतारा हो जाने के बाद अपने स्थान को खाली कैसे करना है — क्योंकि आप जो प्रेत उतार रहे हैं वह अन्यथा वहीं रह जाएगा और आपके लिए दिक्कत बन जाएगा।

17

गलती खोजने से पहले ही बर्बादी शुरू हो जाती है

सवारी शुरू हुई, हल्ला मचा, और चार-पाँच दिन में दरबार तथा झाड़-फूँक शुरू — बर्बादी गलती खोजने से पहले ही आरंभ हो जाती है

· Reviewed Sep 2026 · 10:35–11:29

वक्ता उस ढर्रे के विरुद्ध चेतावनी देते हैं जिसमें आज सवारी आना शुरू हुआ, हल्ला हुआ कि फलाना देवी आनी शुरू हो गईं, और चार दिन, पाँच दिन, महीने भर के बाद आप दरबार लगा रहे हैं, झाड़-फूँक (झाड़ा) कर रहे हैं, लोगों को राहत हो जा रही है, आपका नाम हो गया। जब पूरा मैटर बिगड़ चुका होता है — दुष्ट शक्तियाँ हावी हो चुकी होती हैं, शुभ शक्ति मलिनता या किसी अन्य कारण से दूर हो चुकी होती है और आपकी बर्बादी शुरू हो चुकी होती है — तब आप खोजना शुरू करते हैं कि गलती कहाँ की। इसलिए, वे कहते हैं, गलती न करें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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