सत्य घटना: ओझा का बैठाया सैय्यद और परिवार की रक्षा
महाराष्ट्र की एक सत्य अभिचार घटना का विवरण।
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परलौकिक शक्तियों से कार्य लेना प्रशिक्षित साधकों का विषय क्यों है, गृहस्थ का नहीं
प्रत्याक्रमण के लिए तैयार रहना
वक्ता कहते हैं कि इस विषय को विवादास्पद माना जाता है, पर शक्ति सत्य है; वह केवल उन साधकों के लिए है जो सिद्धियाँ पाकर जनकल्याण करते हैं और अपने परिवार के साथ बहुत मर्यादाओं में रहते हैं। जो दिव्य या अलौकिक शक्तियों के संपर्क में आकर उनके माध्यम से हस्तक्षेप करता है, उसे तैयार रहना चाहिए कि उधर से भी प्रत्याक्रमण हो सकता है, कष्ट और परेशानी हो सकती है। इसीलिए ऐसे साधक पहले वे शक्तियाँ सिद्ध करते हैं जो विपरीत परिस्थिति में रक्षा करें या आने वाले संकट की सूचना दें। एक सामान्य गृहस्थ जब ऐसी साधनाएँ सिद्ध करने लगता है, तो वे कहते हैं कि उसके जीवन में अनेक परेशानियाँ आ जाती हैं, क्योंकि वह उन्हें लंबे समय तक निभा नहीं सकता।
वक्ता आरंभ में कहते हैं कि इस विषय को विवादास्पद विषयों में रखा जाता है। लोग शक्ति को शक्ति मानते हैं, और यह सत्य भी है, पर वह केवल साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी।ों के निमित्त है: जो सिद्धियाँ प्राप्त करके जनकल्याण का कार्य करते हैं और अपने परिवार के साथ बहुत मर्यादाओं में रहकर विषयों को करते हैं। उनका तर्क है कि दिव्य, अलौकिक शक्तियों के संपर्क में आना और फिर उनके माध्यम से कोई कार्य करना, हस्तक्षेप करना, इसकी एक कीमत है। व्यक्ति को तैयार रहना चाहिए कि उधर से भी कभी उस पर प्रत्याक्रमण हो सकता है, और फिर कष्ट भी हो सकता है, परेशानी भी। इसीलिए ऐसे साधक ऐसी शक्तियाँ सिद्ध करते हैं जो विपरीत परिस्थितियों में उनकी रक्षा करें या उन्हें पहले से बता दें कि इस प्रकार का संकट आने वाला है। पर जब एक सामान्य गृहस्थगृहस्थ आश्रमी, जो साधना के साथ परिवार का भार भी वहन करता है — इन प्रवचनों का मुख्य श्रोता। इस प्रकार की साधनाएँ सिद्ध करना शुरू कर देता है, तो वे कहते हैं कि उसके जीवन में अनेक प्रकार की परेशानियाँ आ जाती हैं, क्योंकि वह उन्हें लेकर लंबे समय तक चल नहीं सकता। आगे की सत्य घटना इसी का उदाहरण बताई गई है।
ओझा के उपाय से तत्काल राहत और उससे बनने वाला भ्रामक विश्वास
हिंदू-इस्लामी मिश्रित पाँच मंत्रों की धूनी
वक्ता महाराष्ट्र के एक परिवार का केस बताते हैं जिनकी परेशानी यों शुरू हुई कि रात सोते समय कोई कान में बोल जाता था, और बढ़ते-बढ़ते चारों सदस्य सो नहीं पाते थे। पास के एक ओझा, जो हिंदू और इस्लामी दोनों शक्तियों की पूजा करते थे, ने कहा कि घर में एक शक्ति का उपद्रव है, घर का बंधन किया और सुबह-शाम 21 दिन जलाने के लिए धूनी दी, जिसमें पाँच मंत्र और पाँच आहुतियाँ थीं: तीन सनातन संस्कृति के और दो पूर्णतः इस्लामी सबर मंत्र। समस्या पहले दिन से ही मिट गई। वक्ता का बिंदु यह है कि तत्काल राहत मिलते ही व्यक्ति को विश्वास हो जाता है कि इस व्यक्ति में सामर्थ्य है, और इसी कारण असली गड़बड़ी पर किसी का ध्यान नहीं गया।
वक्ता बताते हैं कि महाराष्ट्र के इस घर की परेशानी छोटे रूप में शुरू हुई: रात को सोने के समय कोई कान में बोलकर चला जाता था। यह इतनी बढ़ गई कि परिवार के चारों सदस्य सो ही नहीं पाते थे; जहाँ नींद लगे, कोई कान में बोल दे। इसे सुलझाने के लिए वे अपने पास के एक ऐसे साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। के पास गए जो हिंदू और इस्लामी दोनों प्रकार की शक्तियों की पूजा करते थे और जिन्हें उस प्रकार की सिद्धियाँ थीं। उन्होंने देखा-सुना और कहा कि आपके घर पर इस-इस प्रकार की शक्ति का उपद्रव है; घर का बंधन करा लीजिए और हम कुछ देंगे जिसे रोज़ जलाना है, धूना करना है। वे घर आए, कुछ प्रक्रियाएँ कीं और सुबह-शाम जलाने के लिए धूनीविशेष लकड़ियों व बीजों को जलाकर घर या स्थान से नकारात्मक या तांत्रिक ऊर्जा दूर करने हेतु की जाने वाली धूनी। बनाकर दे गए। जो मंत्र-विधान दिया गया उसमें पाँच पूरे मंत्र थे और पाँच आहुतियाँ देनी थीं। पाँच में से तीन मंत्र सनातन संस्कृति के थे; बाकी दो इस्लामी सबर मंत्र थे, पूरी तरह इस्लामी, जिनमें किसी हिंदू देवी-देवता की बात नहीं थी। जब उन्होंने यह विधान शुरू किया तो समस्या पहले ही दिन से बिल्कुल हल हो गई। वक्ता कहते हैं कि जब भी तुरंत राहत मिलती है, व्यक्ति का विश्वास तुरंत बन जाता है: हमें सुरक्षा मिली, परेशानी दूर हुई, तो इस व्यक्ति के पास सामर्थ्य है। धूनी 21 दिन करनी थी, उन्होंने 21 दिन की; तब तक समस्या पहले ही हल हो चुकी थी। इसके बाद जो हुआ, वही इस केस की असली सीख है।
महीने भर बाद बेटी पर परेशानी का लौटना और ओझा का इनकार
घर को सुरक्षित बताते रहने के बीच बढ़ते लक्षण
वक्ता बताते हैं कि समस्या खत्म होने के लगभग महीने भर बाद बड़ी बेटी, जो 14 वर्ष की थी, को हर रात दिखने लगा कि कोई पुरुष आता है, पास बैठता है और हर गलत चीज़ करता है; लगता था सचमुच हो रहा है, नींद खुलने पर कुछ नहीं रहता। उसका भय बढ़ता गया, पर उसी ओझा ने कहा कि कोई विषय नहीं है, घर बिल्कुल सुरक्षित है, कुछ मंत्र-प्रयोग किए और घर का बंधन फिर किया। यह रुका नहीं: बच्ची रात को सोना ही भूल गई, अपच हो गई, जो खाती उल्टी हो जाती, डॉक्टर को दिखाया गया, और ओझा ने अंत में कह दिया कि यह मानसिक समस्या है, ऊपरी कुछ नहीं।
वक्ता केस आगे बढ़ाते हैं: महीना लगते-लगते, यानी समस्या खत्म होने के लगभग महीने भर बाद, दोनों बेटियों में से बड़ी बेटी के साथ, जो 14 साल की थी, ऊटपटांग हरकतें शुरू हो गईं। रात्रि काल में उसे बार-बार दिखाई देता कि कोई पुरुष आता है, पास आकर बैठता है, और जितनी गलत चीज़ें होती हैं सब करता है। ये ऐसे स्वप्न और अनुभव थे जिनमें लगता है कि हमारे साथ सचमुच हो रहा है, और नींद खुलने पर कुछ नहीं रहता। उसका भय बढ़ता गया, तो परिवार उसे उसी ओझाएक लोक-तांत्रिक जो मदिरा व मांस जैसे भोग द्वारा प्रेत-शक्तियों को बांधकर संचालित करता है। के पास ले जाकर दोबारा दिखाया। उन्होंने कहा कोई ऐसा विषय नहीं है, घर तो बिल्कुल सुरक्षित है। उन्होंने स्वयं भी कुछ मंत्र आदि का प्रयोग किया, घर आकर फिर घर का बंधन किया। पर विषय यहाँ रुका नहीं। समस्या बढ़ते-बढ़ते ऐसी हो गई कि बच्ची रात को सोना ही भूल गई। नींद पूरी न होने से शरीर में अपच की बीमारी हो गई; जो भी खाती, उल्टी हो जाती। डॉक्टर को दिखाया जा रहा था। और अब उसी व्यक्ति ने, जिसने घर देखा था, कह दिया कि इन्हें कोई मानसिक समस्या हो गई है, ऊपरी वार कुछ नहीं है। वक्ता इसे वह बिंदु बताते हैं जहाँ से असली परेशानी शुरू हुई।
घर में लोबान की धूनी: वक्ता की स्थायी आपत्ति
अकेले नहीं करनी चाहिए; हर चीज़ का काट है
वक्ता याद दिलाते हैं कि उन्होंने चैनल पर एक वीडियो डाला था कि घर में लोबान की धूनी नहीं करनी चाहिए। वे कहते हैं यही विवादास्पद विषय है: लोगों ने जमकर कहा कि ऐसा कुछ नहीं है और प्रमाण दिए कि देवी के सब कर सकते हैं। उनका उत्तर है कि अकेले नहीं कर सकते, और सबका काट है; ऐसे सब विषय उनके पास रखे हैं, पर वे यहाँ उस बहस को दोहराते नहीं। इस केस के परिवार ने वह वीडियो सुना था और उन्हें संदेश भेजा कि क्या उनकी धूनी ही इस परेशानी का एकमात्र कारण है।
वक्ता कहते हैं कि उन्होंने इस विषय पर चैनल पर एक वीडियो डाला था: कि घर में लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल की धूनीविशेष लकड़ियों व बीजों को जलाकर घर या स्थान से नकारात्मक या तांत्रिक ऊर्जा दूर करने हेतु की जाने वाली धूनी। नहीं करनी चाहिए। वे इसे ही विवादास्पद विषय कहते हैं। लोगों ने उस पर जमकर कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, और प्रमाण दिए कि देवी के सब कर सकते हैं। उनका उत्तर संक्षिप्त है: अकेले नहीं कर सकते हैं, और सबका काट है; सबके विषय उनके पास रखे हैं। वे कहते हैं कि उस विषय को यहाँ दोहराएँगे नहीं। इस केस के परिवार ने वह वीडियो सुना था, और बस उसी एक बिंदु को पकड़कर संदेश भेजा कि हम ऐसा करते थे, यह समस्या ऐसे-ऐसे हो गई, तो क्या यही एकमात्र कारण है? इसी प्रश्न से पूरे केस का विश्लेषण हुआ, और विश्लेषण में कारण कुछ और निकला।
मूल कारण: घर की रक्षा के लिए बैठाया गया सैयद, जो बिना पूजा के छूट गया
भूखी शक्ति जिसे गलत धूनी ने बल दिया
वक्ता कहते हैं कि विश्लेषण में निकला कि समस्या यह नहीं थी कि लोबान की धूनी से कोई अतृप्त आत्मा आ गई। ओझा ने घर की रक्षा के लिए अपनी सिद्ध की हुई एक इस्लामी शक्ति, जिसे बोलचाल में लोग सैय्यद कहते हैं, घर पर बैठा दी थी और उसी के माध्यम से घर का बंधन किया था। उसे 21 दिन की पूजा मिलनी थी, जो परिवार ने दे दी; उसके बाद किसी कारण से ओझा ने कोई ऐसी विद्या लगा दी कि तुम यहीं रहो, यहीं अपना पूजन-पाठ लो, और वह वापस नहीं गया। पूजा बंद होते ही वह परेशान हुआ, और रोज़ की धूनी, जिसके अंतिम दो मंत्रों में फातिमा आदि की दुहाई देकर काम करने का आदेश था, उसकी शक्ति और बढ़ाती रही। फिर उसका प्रकोप लड़की पर शुरू हुआ, और ओझा अपनी गलती स्वीकार न कर पाने से उसे मन का भ्रम बताता रहा।
वक्ता कहते हैं कि जब पूरे केस का विश्लेषण किया गया, तो जो सामने आया वह परिवार के अनुमान से बहुत अलग था। विषय केवल यह नहीं था कि वे लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल की धूनी कर रहे थे इसलिए घर में कोई अतृप्त आत्मा आ गई। वह नहीं था। गड़बड़ कहीं और थी। जो साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। आए थे, उन्होंने इस घर की रक्षा के लिए अपनी सिद्ध की हुई एक इस्लामी शक्ति वहाँ बैठा दी थी, और उसी के माध्यम से घर का बंधन किया था। बोलचाल की भाषा में लोग ऐसी शक्ति को सैय्यद कहते हैं। उसे बैठाकर उसकी 21 दिन की पूजा देनी थी; परिवार ने 21 दिन की पूजा दे दी। उसके बाद किसी कारणवश, जो भी रहा हो, उन्होंने उस शक्ति से कहा: तुम यहीं रहो, यहीं अपना पूजन-पाठ लो। उन्होंने कोई ऐसी विद्या लगा दी कि वह वापस नहीं गया। वक्ता कहते हैं कि इसका कारण उन्हें पता नहीं। वहीं से गड़बड़ी शुरू हुई। उस शक्ति को पूजा नहीं मिल रही थी और वह परेशान हो रही थी, और ऊपर से जो धूनी जल रही थी वह उसकी शक्ति बढ़ा रही थी, क्योंकि उस धूनी के अंतिम दो मंत्र उसी के लिए थे। वक्ता कहते हैं कि उन मंत्रों में फातिमा और इन सबकी दुहाई लगी है: काम करो, नहीं तो दूध हराम है। बस इसी से समझ में आ जाता है कि क्या स्थिति बनाई गई थी। फिर उसका प्रकोप उस लड़की पर शुरू हुआ। ओझा इस गलती को स्वीकार नहीं कर सकता था, इसलिए उसने कभी कहा ही नहीं कि ऐसा हुआ है या ऐसा कुछ होता भी है; उसने बस यही कहा कि यह आपके मन का भ्रम है, आप परेशान हो रहे हो।
सावधानी: घर में बैठाया जाने वाला उपाय साधक स्वयं करे और पूरा स्पष्ट करे
जो स्वयं न कर सकें, उसे मना करें
वक्ता कहते हैं कि इसी कारण वे लोगों को सचेत करते रहते हैं: आप कहीं भी जाइए, विषय कुछ भी हो, अगर आपके घर पर कुछ करने को कहा जा रहा है तो कहिए कि हम यह नहीं कर सकते, आप कीजिए, और पूरे विषय स्पष्ट करवाइए। वे जोड़ते हैं कि जो लोग नए होते हैं उन्हें जानकारी नहीं होती, और दिक्कत वहीं से होती है।
बैठाए गए सैय्यद से सीख निकालते हुए वक्ता कहते हैं कि इन्हीं कारणों से वे सचेत कराते हैं। आप कहीं भी जाइए, विषय किसी भी प्रकार का हो, अगर आपके घर पर कुछ करने की बात कही जा रही है, तो कहिए कि हम यह नहीं कर सकते, आप कीजिए। पूरे विषयों को स्पष्ट करवाइए। वे मानते हैं कि जो व्यक्ति नए होते हैं उन्हें जानकारी नहीं होती, और दिक्कत वहीं होती है।
उपद्रव वाले घर के लिए अपामार्ग की लकड़ी पर बजरंग बाण की धूनी, और बिना सिद्धि उसकी सीमा
बीस से पच्चीस प्रतिशत लाभ
वक्ता कहते हैं कि उस घर में दो प्रयोग शुरू करवाए गए, जिन्हें वे सबसे विशिष्ट बताते हैं और जिनसे चीज़ें तुरंत शांत होती हैं; प्रभाव अभी नया था, हालाँकि लड़की को समस्या शुरू हो चुकी थी। पहला था bajrang-baan की धूनी: अपामार्ग की लकड़ी पर सरसों, काली मिर्च और लाल गुंजा को गुग्गुल के साथ मिलाकर, सुबह सात बार और शाम सात बार बजरंग बाण का पाठ करते हुए धूनी पूरे घर में दिखानी होती है। इससे लगभग 20 से 25 प्रतिशत लाभ हुआ, क्योंकि परिवार को बजरंग बाण की कोई सिद्धि नहीं थी; बिना सिद्धि यह उतना प्रभावशाली नहीं हो पा रहा था।
प्रयोग करने की बारी आई तो वक्ता कहते हैं कि उन्होंने उस घर में दो चीज़ों का प्रयोग शुरू करवाया, जिन्हें वे सबसे विशिष्टतम प्रयोग कहते हैं; वे सदैव कहते हैं कि इन्हें कीजिए, चीज़ें तुरंत शांत होती हैं। यह प्रभाव अभी नया-नया ही पड़ना शुरू हुआ था, बहुत दिन नहीं हुए थे, इसलिए समस्या बहुत बड़ी नहीं थी, पर अगर कोई हाथ न डालता तो यह दिक्कत बहुत बढ़ जाती: लड़की को समस्या शुरू हो चुकी थी। पहला प्रयोग जो उन्होंने शुरू करवाया, वह था अपामार्गअपामार्ग (Achyranthes aspera) — एक पौधा जिसकी लकड़ी को धूनी में जलाकर घर से गंभीर नकारात्मक या तांत्रिक बाधाओं को दूर किया जाता है। की लकड़ी के ऊपर bajrang-baan की धूनीविशेष लकड़ियों व बीजों को जलाकर घर या स्थान से नकारात्मक या तांत्रिक ऊर्जा दूर करने हेतु की जाने वाली धूनी।। यह सरसों, काली मिर्च और लाल गुंजालाल घुंघची के बीज — घर या दुकान के बाहर उच्चाटन क्रिया हेतु फेंके जाते हैं, अथवा उसी प्रभाव के निवारण हेतु पीली सरसों के साथ धूनी में जलाए जाते हैं। को गुग्गुलसुगंधित गोंद, जो धूप रूप में जलाया जाता है अथवा घी में मिलाकर आहुति दी जाती है; रक्षा और समृद्धि के प्रयोगों में विशेष प्रयुक्त। के साथ मिलाकर की जाती है। सुबह सात बार और शाम सात बार बजरंग बाण का पाठ, और दोनों समय धूनी करते हुए घर में दिखानी होती है। इससे 20 से 25 प्रतिशत लाभ मिला। कारण, वे कहते हैं, यह था कि परिवार ने बजरंग बाण की कोई सिद्धि आदि नहीं की थी; कोई सिद्धि नहीं थी। बिना सिद्धि के करने पर विषय उतना प्रभावशाली नहीं हो पा रहा था।
पीड़ित लड़की के लिए जयंती मंगला काली जप और पिता के लिए नरसिंह कवच
हफ्ते में छूना बंद; मात्रा बढ़ने पर उत्पात बंद
वक्ता कहते हैं कि दूसरा कदम यह था कि लड़की जयंती मंगला काली मंत्र का सुबह-शाम 108-108 पाठ करे, केवल लौंग और कपूर जलाकर, और उसे विधि-विधान से काली मंदिर जाने की तैयारी करवाई गई। साथ ही उसके पिता सुबह-शाम नृसिंह कवच का पाठ करते, और bajrang-baan की धूनी चलती रही। लगभग सात दिन में पहला अनुभव आया: समस्या कम हुई और वह शक्ति अब छूती नहीं थी, पर दूर से बोलना, चिल्लाना, चींटी काटने जैसी हल्की चुभन और स्वप्न में परेशान करना जारी रहा। नरसिंह कवच चलते रहने और सबकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाने पर उसका उत्पात बंद हो गया।
धूनी का आंशिक परिणाम देखने के बाद वक्ता कहते हैं कि दूसरा विषय उठाया गया। उन्होंने परिवार से कहा कि लड़की जयंती मंगला काली मंत्र का सुबह 108 और शाम 108 पाठ करे, और उस समय केवल लौंगलौंग, जो अर्पण तथा छोटे प्रयोगों में प्रयुक्त होती है। और कपूर जलाए। उसे विधि-विधान से काली जी के मंदिर जाने की तैयारी भी करवाई गई। उसी के साथ उसके पिता को नृसिंह कवच का पाठ दिया गया। तो नरसिंह कवच का पाठ सुबह-शाम होता, लड़की जयंती मंगला काली का जप करती, और साथ ही bajrang-baan की धूनी चलती रही। लगभग सात दिन पूरे होने पर, सातवें-आठवें दिन, उनका पहला अनुभव आया। समस्या कम हो गई थी: वह शक्ति अब लड़की को छूती नहीं थी, पर दूर से बोलना, चिल्लाना, थोड़ा-सा चींटी काटने जैसी चुभन, स्वप्न में इस प्रकार की चीज़ें होती थीं, जिनसे लड़की परेशान होती थी। फिर जैसे-जैसे नरसिंह कवच का पाठ चलता रहा और यह सब धीरे-धीरे बढ़ाया गया, थोड़ी मात्रा बढ़ी, तब वहाँ से उसका उत्पात मचाना बंद हुआ।
शुद्ध हुए घर को सील करना: हवन, क्षेत्रपाल निकारी, जयंती मंगला से बंधन, अर्गला की आहुति और अभिमंत्रित कील
शुभ समय में परिवार ने स्वयं किया
वक्ता कहते हैं कि उत्पात बंद होने के बाद ऐसा शुभ समय आया जिसमें परिवार से विशिष्टतम प्रयोग करवाए गए। हवन कराने की पूरी विधि एक-एक चीज़ समझाई गई और उन्होंने स्वयं किया; क्षेत्रपाल निकारी की गई; फिर जयंती मंगला काली मंत्र से ही घर का बंधन हुआ; अर्गला स्तोत्र के प्रथम मंत्र से आहुति आदि देकर घर की सुरक्षा की गई; और उसी से कील अभिमंत्रित करके गाड़ी गई। वे यह दावा नहीं करते कि पुरानी समस्या इतने सामान्य उपाय से हल हो सकती है, पर कहते हैं कि इन नए साधकों ने बहुत मेहनत की और उसी की देन है कि उनका परिवार आज सुरक्षित है।
शक्ति का उत्पात बंद होने के बाद वक्ता कहते हैं कि ऐसा शुभ समय आया जिसमें परिवार से विशिष्टतम प्रयोग करवाए गए। हवन कराने की पूरी विधि, एक-एक चीज़, उन्हें समझाई गई और उन्होंने स्वयं किया। क्षेत्रपाल निकारीक्षेत्रपाल को अर्पित एक विसर्जन-अनुष्ठान — सुरक्षा तथा क्षेत्र में निवास करने वाली दुष्ट शक्तियों (डाकिनी, शाकिनी, भूत, प्रेत, पिशाच, वेताल) की शांति हेतु प्रार्थना, जो घर की देहरी पर व्याप्त दुष्ट ऊर्जाओं को कम-से-कम 24 घंटे हेतु शुद्ध कर देती है। की गई। फिर घर का बंधन जयंती मंगला काली मंत्र से ही किया गया। अर्गला स्तोत्र के प्रथम मंत्र से आहुति आदि देकर घर की सुरक्षा की गई। और उसी से कील अभिमंत्रित करके गाड़ी गई। वक्ता सावधानी से जोड़ते हैं कि वे बिल्कुल नहीं कह रहे कि पुरानी समस्या इतने सामान्य उपाय से हल हो सकती है। पर बहुत नए साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। होते हुए भी इस परिवार ने बहुत मेहनत की, और उसी की देन है कि उनका परिवार आज के समय में सुरक्षित है।
एक-दो प्रयोगों को समर्पित होकर सिद्ध करना: दस हज़ार जप की सीख
स्वयं पाई राहत से विश्वास; देर से कठिनाई
इस केस से वक्ता की सीख यह है कि अगर आप एक-दो चीज़ों को भी समर्पित होकर सिद्ध करने लगें, तो एक सीमा के बाद वे तीव्रतम प्रभाव देती हैं: यहाँ जयंती मंगला काली के 10,000-11,000 जप होने के बाद प्रभाव सबसे तीव्र हुआ। लड़की की भगवती पर अगाध श्रद्धा थी, और जब उसे पहली बार अपनी साधना से राहत मिली तो विश्वास बढ़ा कि वह इस विषय को संभाल सकती है, और फिर उस दुष्ट शक्ति को हटाया गया। वे चेताते हैं कि समस्या पुरानी हो जाती तो बहुत अधिक दिक्कत होती। वे यह भी बताते हैं कि ओझा ने एक बार कटने के बाद उस शक्ति को दोबारा नहीं चलाया; अगर वह चालन शुरू कर देता तो समस्या बनी रह सकती थी, पर उसने कुछ नहीं किया और शक्ति वहाँ से हटा दी गई।
इस अनुभव से वक्ता कहते हैं कि वे सबसे सिर्फ यही कहना चाहते हैं: अगर आप एक-दो चीज़ों को भी समर्पित होकर सिद्ध करना शुरू कर देते हैं, तो एक सीमा के बाद वे काम करती हैं। इस केस में जयंती मंगला काली के 10,000-11,000 जप पूरे होने के बाद उसने तीव्रतम प्रभाव दिया। लड़की की भगवतीदेवी का आदरसूचक संबोधन, जो इन प्रवचनों में विचाराधीन किसी भी स्वरूप के लिए प्रयुक्त होता है। पर अगाध श्रद्धा थी, और जब पहली बार उसे अपनी साधना से राहत मिली तो विश्वास बढ़ा कि हाँ, हम भी यह कर सकते हैं। फिर उस दुष्ट शक्ति को हटाया गया। वे जोड़ते हैं कि यही चीज़ पुरानी हो जाती तो बहुत अधिक दिक्कत हो जाती। इस केस में एक और बात: जिस ओझाएक लोक-तांत्रिक जो मदिरा व मांस जैसे भोग द्वारा प्रेत-शक्तियों को बांधकर संचालित करता है। ने शक्ति बैठाई थी, उसने उसे दोबारा चलाया नहीं। एक बार जब वह कटा तो दोबारा उसने प्रभाव नहीं दिया। अगर वह चालन शुरू कर देता तो समस्या बनी रह सकती थी, परेशानी हो सकती थी। पर जो भी कारण रहा हो, उसने आगे कुछ नहीं किया, और इस ओर से भी उस चीज़ को हटा दिया गया। अंत में वक्ता आशा करते हैं कि सुनने वाले विषयों को सही प्रकार से समझेंगे और अपनी परेशानी के अनुरूप अपना तपोबलतप और निरंतर साधना से अर्जित आध्यात्मिक शक्ति — किसी बाधा को पूर्णतः दूर करने के लिए इसे संचित नकारात्मक या तांत्रिक ऊर्जा से अधिक होना आवश्यक है। बढ़ाकर उसे सुलझाने का प्रयास करेंगे।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है। यह विवरण एक विशिष्ट साधक की व्यक्तिगत प्रथा का वर्णन है, समग्र रूप से किसी धार्मिक परंपरा के विषय में कोई दावा नहीं।