पूर्वजों का पूजित विग्रह कभी मत हटाइए — और उसके सम्मुख किन रात्रियों में बैठें

पूर्वजों से चले आए पूजित विग्रह हटाइए नहीं, उन्हीं की पूजा कीजिए।

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Questions this answers

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The notes
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01

वे जानकार जो पहले घर का पूजा स्थान खाली करवाते हैं

जब कोई जानकार कहे कि पूजा स्थान खाली करना पड़ेगा, तो क्या पुराने विग्रह हटा देने चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 01:38–02:17 · Also a question

नहीं — उनका कारण मनोवैज्ञानिक हो या कोई भी हो, यह गलती कभी नहीं करनी चाहिए। जहाँ परेशानी दिखाने-सुनाने जाते हैं, वहाँ अक्सर बता दिया जाता है कि आपके घर में अमुक चीज पूजित है, उसे घर से निकाल दीजिए; कुछ लोगों को यह भी कहा जाता है कि साधना ठीक से तभी होगी जब सारे पुराने विग्रह हटा दिए जाएँ।

02

पूर्वजों से चली आई वस्तु में समाहित कई पीढ़ियों की ऊर्जा

पूर्वजों से चला आया विग्रह कई पीढ़ियों का जप-तप अपने भीतर लिए होता है

· Reviewed Sep 2026 · 02:18–03:56

क्योंकि उसमें कई पीढ़ियों की ऊर्जा समाहित हो चुकी होती है। जहाँ आपके पूर्वजों द्वारा रखी गई कोई शिला, कोई विशेष विग्रह या कोई तंत्रोक्त वस्तु सेवित-पूजित हो रही है, उसमें कई पीढ़ियों का जप और तप है — और आप उनमें से कोई भी चीज देखने तो गए नहीं थे।

03

एक साधक द्वारा साझा की गई घटना: सुंदर विग्रह के लिए खाली किया गया पूजा स्थान

वह घर जहाँ से देवी-देवता हटा दिए गए थे, और उसके बाद मिली बात

· Reviewed Sep 2026 · 03:57–05:04

एक श्रोता ने वक्ता को बताया कि जब घर में परेशानी शुरू हुई और वे दिखाने-सुनाने गए, तो सबसे पहले यही बताया गया कि आपने घर के देवी-देवताओं को हटा दिया है और अब उनका स्थान वहाँ है ही नहीं — भगवती का छोटा विग्रह एक नई दुल्हन की इच्छा पर बड़े विग्रह से बदल दिया गया था।

04

मायके की देवी को ससुराल ले जाना

क्या विवाह के समय बेटी को अपने मायके की देवी अपने साथ ले जानी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 05:05–06:28 · Also a question

वक्ता के अनुसार नहीं ले जानी चाहिए। आप जिस भी भाव से पूजती हों, उस शक्ति को साथ ले जाना मायके को खाली कर देना है — आप दूसरे घर की गृहलक्ष्मी बनने जा रही हैं, और जाते-जाते अपने माता-पिता के सौभाग्य का कारण खाली करके जा रही हैं।

05

भाव भाव है और क्रिया क्रिया — पाँच साल में पत्थर भी चैतन्य

क्या केवल पूजा जाने से एक साधारण पत्थर भी जागृत हो जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 06:29–07:08 · Also a question

हाँ। एक पत्थर भी यदि पाँच साल पूजा जाए तो चैतन्य और जागृत हो जाता है। वक्ता भाव और क्रिया को अलग रखते हैं — भाव भाव होता है, क्रिया क्रिया — और बताते हैं कि तांत्रिक कर्मों में नकारात्मक शक्तियों को कोयले और कंकड़ों में ही बैठाया जाता है, क्योंकि इतनी छोटी वस्तुएँ भी उन्हें धारण कर लेती हैं।

06

वह साधारण विग्रह जो शायद पूरे घर को थामे हुए है

हो सकता है वही साधारण पुराना विग्रह घर की बरकत और रक्षा का कारण हो

· Reviewed Sep 2026 · 07:09–07:59

हो सकता है वही कारण हो कि आपके घर में अब तक बरकत है और आपका रक्षण हो रहा है। हटाइएगा तो क्या पता सब ध्वस्त हो जाए। वक्ता कहते हैं कि लोग पुराने विग्रह इसलिए बदलते हैं कि उनका सुंदर श्रृंगार नहीं हो पाता — और वहीं से बर्बादी शुरू हो जाती है।

07

पूर्वजों के विग्रह के सम्मुख बैठने के तंत्रोक्त रात्रि काल

पूर्वजों की पूजित वस्तु के सम्मुख अनुष्ठान के लिए तंत्रोक्त रात्रि काल

· Reviewed Sep 2026 · 08:00–11:31

वे निशाधि काल की रात्रियाँ जिन्हें तंत्रोक्त माना गया है: दीपावली की रात्रि, होलिका की रात्रि, रक्षाबंधन की रात्रि, भाद्रपद की अमावस्या, चैत्र की अमावस्या — और ग्रहण काल। वहाँ एकाध रात का अनुष्ठान करके देखिए, कुछ न कुछ अनुभव अवश्य होगा।

08

शबरी कवच में दीक्षा की आवश्यकता नहीं, पर भीतर की गायत्री मानसिक

क्या शबरी कवच के लिए दीक्षा आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 11:32–12:41 · Also a question

किसी भी प्रकार की दीक्षा की आवश्यकता नहीं है, नवनाथ दीक्षा की भी नहीं। केवल एक बात ध्यान रखनी है: बीच में जहाँ एक बार गायत्री आती हैं, वहाँ उनका उच्चारण नहीं करना है — उस अंश का मानसिक रूप से पाठ कर लेना है।

09

रात्रि के अनुष्ठान के लिए उदया तिथि नहीं, निशीथ-व्यापिनी तिथि

जब पूर्णिमा दो दिन पड़ जाए तो रात्रि के अनुष्ठान किस तिथि पर होंगे?

· Reviewed Sep 2026 · 12:42–15:30 · Also a question

साधना के लिए वही पूर्णिमा या अमावस्या देखनी होगी जो वास्तव में रात्रि में व्याप्त हो। जहाँ 30 की रात्रि भर पूर्णिमा रहेगी, वहाँ दीप दान और हर तंत्रोक्त अनुष्ठान उसी रात्रि का है — अगली रात्रि में पूर्णिमा है ही नहीं, इसलिए उसमें किए गए का कोई लाभ नहीं।

10

केवल एक यंत्र, पूरे विधान से बना, और सस्ते यंत्रों से आने वाली दिक्कत

गृहस्थ को घर में कितने यंत्र रखने चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 15:31–16:36 · Also a question

केवल एक — इष्ट का, जिसका निर्माण पूरे विधि-विधान से हुआ हो। पाँच और दस रुपये वाले रंग-बिरंगे यंत्र कबाड़ी को बेचे गए घरेलू कचरे और प्लास्टिक को रीसाइकल करके बनाए जाते हैं; इसी अपवित्रता और उसमें की गई पूजा से दिक्कत आती है।

11

यंत्र देवता का घर, और उसके लिए अपेक्षित आवरण पूजन

यंत्र देवता का घर है, और वह आवरण पूजन माँगता है

· Reviewed Sep 2026 · 16:37–16:50

धूप-दीप दिखा देना पूजा नहीं है। यंत्र देवताओं का घर है और उनका पूरा परिवार उसमें विराजमान रहता है — और आप एक की भी अर्चना, पूजन और आवरण नहीं कर पाते, फिर भी घर में उनकी बाढ़ लगा देते हैं।

12

यंत्र को बाजार से खरीदने के बजाय विधिपूर्वक बनवाना

यंत्र कैसे बनवाना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 16:51–18:13 · Also a question

अपने गुरु से बनवाइए, या किसी परिचित सुनार से, अपने पुरोहित से विचार-विमर्श करके।

13

मुहूर्त क्यों देखा जाता है, और देवताओं का अपना समय भी होता है

मुहूर्त आखिर देखा ही क्यों जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 18:14–19:52 · Also a question

क्योंकि एक व्यवस्था बनी हुई है, और देवताओं के अपने समय होते हैं। जमीन खरीदने का मुहूर्त है, उसके पूजन का, नींव रखने का और गृह प्रवेश का भी — क्योंकि दिव्य शक्तियाँ आपके साथ घर में जाती हैं और नियत समय पर हविष्य से तृप्त होती हैं; गलत समय पर जाइए तो दिक्कत होती है।

14

मिल गई तांत्रिक सामग्री गृहस्थ के रखने की चीज क्यों नहीं है

अपने आप मिल गई साँप की केंचुली जैसी वस्तु का क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 19:53–21:26 · Also a question

उसे तंत्र क्षेत्र के किसी व्यक्ति को दे दीजिए जो उसका कुछ कर सके। साँप की केंचुली, बिल्ली की जेर, जड़ मोहरा — मिल भी जाएँ तो आप उन्हें रखेंगे कैसे और करेंगे क्या? ऐसी वस्तु देने वाले के लिए भी नियम और विधान बने हुए हैं।

15

विनियोग नहीं, संकल्प में पार्वती का नाम लेना

पार्वती की कृपा हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय उनका नाम कहाँ लें?

· Reviewed Sep 2026 · 21:27–21:48 · Also a question

संकल्प में। वक्ता यह भी मानते हैं कि चाहें तो विनियोग में भी कह सकते हैं, पर उनका अपना मत है कि यह संकल्प में ही होना चाहिए — और शेष मूल तत्वों के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।

16

जहाँ घर के देवी-देवता ज्ञात न हों वहाँ जयंती मंगला काली

पैसे और स्वास्थ्य दोनों की दिक्कत हो तो क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 21:49–22:02 · Also a question

घर के देवी-देवताओं की सेवा-पूजा कीजिए — और जहाँ यह ज्ञात न हो कि वे कौन हैं, वहाँ जितनी क्षमता हो उतना जयंती मंगला काली का जप कीजिए। वक्ता कहते हैं कि यह उत्तर वे बार-बार देते हैं।

17

तीनों देती हैं; प्रश्न यह है कि आप ले कितना सकते हैं

सारे सुखों के लिए लक्ष्मी, कामाख्या और भुवनेश्वरी में से किसकी साधना करें?

· Reviewed Sep 2026 · 22:03–22:30 · Also a question

इनमें से कोई भी — तीनों ही आपको सारे सुख देंगी। लक्ष्मी भी देंगी, कामाख्या भी देंगी, भुवनेश्वरी भी देंगी; उनकी सामर्थ्य में कोई कमी नहीं है। इसके बजाय यह सोचिए कि उसे ले पाने की शक्ति आप में कितनी है।

18

आवरण की सामग्री हलवा-पूरी की तरह क्यों नहीं बाँटी जाती

आवरण की सामग्री इसलिए सार्वजनिक नहीं की जाती कि उसकी नकल होगी और दुरुपयोग

· Reviewed Sep 2026 · 22:31–25:12

क्योंकि उसकी नकल की जाएगी, उसे दोहराया जाएगा और उसका दुरुपयोग होगा। वक्ता सप्तशती के तेरह आवरणों का उल्लेख करते हैं, जिनमें से दस का पूजन होता है, और बताते हैं कि सामान्य रूप से उपलब्ध नवें आवरण में भैरव पूजन का उल्लेख ही नहीं है — ऐसा विवरण वे बाँटकर नकल करवाना नहीं चाहते।

19

बाल और नाखून, जो शरीर की ऊर्जा के जीवित वाहक हैं

साधना काल में बाल और नाखून क्यों नहीं काटने चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 25:13–27:30 · Also a question

क्योंकि वे जीवित हैं और शरीर से जुड़ी ऊर्जा उनमें रहती है — इसीलिए तंत्र में इन्हीं के माध्यम से व्यक्ति पर प्रयोग किए जाते हैं। साधना आरंभ होने से दो-तीन दिन पहले क्षौर कर्म करा लीजिए, और पूर्ण होने के बाद फिर से।

20

दंडवत और महामृत्युंजय, तथा पहले से ली गई मन्नत

क्या स्त्रियाँ दंडवत प्रणाम और महामृत्युंजय का जप कर सकती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 27:31–28:25 · Also a question

वक्ता दोनों के लिए मना करते हैं: शास्त्रों ने स्त्रियों के लिए दंडवत प्रणाम निषिद्ध किया है, और महामृत्युंजय वैदिक मंत्र है जिसका उच्चारण केवल द्विज ही कर सकता है। जहाँ मन्नत पहले ही ली और पूरी की जा चुकी है, वहाँ उस स्थान के पुजारी से बात कीजिए।

21

बिना गुरु के काली की मूर्ति पूजा, शांत स्वरूप में

क्या बिना गुरु के काली की मूर्ति पूजा की जा सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 28:26–28:48 · Also a question

हाँ, कोई पाप नहीं लगता। विधिपूर्वक मूर्ति पूजा कीजिए, सामान्य रहते हुए — बलि आदि विशिष्ट चीजों में मत जाइए — और विग्रह सौम्य तथा शांत स्वरूप का हो। उग्र स्वरूप की पूजा मत कीजिए।

वक्ता उत्तर देते हैं कि इसमें पाप लगने का कोई प्रश्न ही नहीं है। उनकी शर्तें ढंग पर और विग्रह पर हैं। मूर्ति पूजा विधिपूर्वक कीजिए, उसे लेकर सामान्य रहिए, और बलि जैसी अत्यंत विशिष्ट चीजों में मत जाइए। और विग्रह सौम्य हो, शांत हो। उनका एकमात्र निषेध: उग्र स्वभाव वाले विग्रह का पूजन मत कीजिए।

22

उमानंद भैरव, गुवाहाटी के प्रमुख क्षेत्रपाल

गुवाहाटी के क्षेत्रपाल कौन हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 28:49–29:48 · Also a question

गुवाहाटी में एक से अधिक क्षेत्रपाल हैं, और प्रमुख क्षेत्रपाल उमानंद भैरव हैं। कामाख्या पीठ पर उमानंद के साथ कामेश्वर महादेव भी हैं; उससे आगे उमानंद हैं।

जब पूछा गया कि गुवाहाटी में क्षेत्रपाल उमानंद जी हैं या भीमशंकर जी, तो वक्ता उत्तर देते हैं कि वहाँ एक से अधिक क्षेत्रपाल हैं, और प्रमुख क्षेत्रपाल उमानंद भैरव हैं। वे स्थान की व्यवस्था भी जोड़ते हैं: जब आप कामाख्या पीठ जाते हैं तो वहाँ उमानंद के साथ कामेश्वर महादेव हैं, और उससे आगे उमानंद।

23

लांगुर उपनिषद की पात्रता, और उसकी विधि क्यों नहीं दी जाती

लांगुर उपनिषद की साधना के लिए क्या आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 29:49–30:33 · Also a question

वक्ता विधि देने से इनकार करते हैं। इसकी तीव्रता ऐसी है कि इसमें एक भी गलती सह्य नहीं है। इसके पास जाने से पहले उनकी बताई न्यूनतम शर्त: वैष्णव मंत्रों और राम नाम का 27 नक्षत्रों की गिनती पर 27 लाख जप, और विधिवत दीक्षा।

24

उपनयन से मिलने वाली गायत्री दीक्षा, और जिसके लिए गुरु फिर भी चाहिए

उपनयन संस्कार स्वयं कौन सी दीक्षा दे देता है?

· Reviewed Sep 2026 · 30:34–31:06 · Also a question

उपनयन के समय आपको गायत्री की दीक्षा मिल जाती है और आप पात्र हो जाते हैं। लेकिन विशेष दीक्षा — कोई भी तंत्रोक्त मंत्र, या किसी संप्रदाय-परंपरा का ज्ञान — गुरु दीक्षा प्राप्त करने के बाद ही मिलती है; बताने वाले गुरु ही हैं।

25

जहाँ पूरा अर्गला हवन संभव न हो वहाँ न्यूनतम संख्या

अर्गला के प्रथम मंत्र के हवन में कम से कम कितनी आहुतियाँ?

· Reviewed Sep 2026 · 31:07–31:18 · Also a question

कम से कम 108। वक्ता कहते हैं कि यदि आप अर्गला के प्रथम मंत्र का हवन बहुत अधिक नहीं कर सकते, तो कम से कम 108 आहुति कर लीजिए।

वक्ता प्रश्नों के दौर के बीच इसे एक पंक्ति की छूट के रूप में देते हैं। यदि आप अर्गला के प्रथम मंत्र का हवन बहुत अधिक नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम 108 आहुति कर लीजिए।

26

करवाए गए मारण के विरुद्ध शीघ्र फल देने वाले पाठ

जहाँ घर पर मारण तंत्र करवाया गया हो वहाँ क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 31:19–32:45 · Also a question

वक्ता की पसंद शबरी कवच, नरसिंह का माला मंत्र, महाभैरव, और हनुमान जी का बजरंग बाण है — जिनसे शीघ्र लाभ मिलता है। नारायण कवच भी किया जा सकता है, पर हिंदी में वह एक सीमा तक ही रक्षा करेगा; ऐसे अनुष्ठान मंदिर में कीजिए।

27

वह गर्भ जहाँ दोबारा नहीं पहुँचना है, और गोवा-शिमला की दौड़

साधना इसलिए है कि चेतना पूर्व जन्मों को जान सके और प्रारब्ध पार कर सके, न कि पैसा, नौकरी या संपत्ति पाने के लिए

· Reviewed Sep 2026 · 32:46–34:00

साधना इसलिए है कि चेतना इतनी विकसित हो जाए कि व्यक्ति अपने पूर्व जन्मों को जान सके और प्रारब्ध में अटका न रहकर उसे पार कर ले। लोग वास्तव में इसे पैसे, नौकरी, अच्छे जीवनसाथी और धन-संपत्ति के लिए करते हैं — और शरीर बूढ़ा हो जाने पर तब कहीं चार धाम।

28

फोटो पीछे, विग्रह आगे

मूर्ति ले आने के बाद पुरानी फोटो का क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 34:01–34:17 · Also a question

फोटो को पीछे रखिए और श्री विग्रह को आगे; पूजन विग्रह पर कीजिए और फोटो को भी धूप-दीप दिखा दीजिए। वक्ता इसे कोई बड़ा विषय नहीं मानते।

29

पुण्य का उदय उसी से नापा जाता है जो व्यक्ति की वास्तविक प्राथमिकता है

शुभ पुण्यों का उदय किसे कहते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 34:18–35:10 · Also a question

वक्ता कोई निश्चित उत्तर नहीं देते: यह व्यक्ति पर और उसकी प्राथमिकता पर निर्भर है। नब्बे प्रतिशत लोग पैसा कमा लेने को ही इसका चिह्न मानते हैं; बाकी लोग जिस भी इच्छा की पूर्ति हो जाए उसे मान लेते हैं।

30

नकारात्मक साधक की शक्ति के नीचे बैठा देव पूजन

क्या अभिचार करवाने वाला व्यक्ति देवी-देवताओं की पूजा भी करता है?

· Reviewed Sep 2026 · 35:11–37:26 · Also a question

हाँ, और वह पहले होता है। अभिचार करने से पहले साधक अपने इष्ट को मजबूत करता है — और छोटी विद्या सिखाने वाले गुरु ने स्वयं तंत्रोक्त रूप में शिव या महाकाली की कृपा प्राप्त की होगी, तथा उनकी कोई विशेष योगिनी या गण सिद्ध किया होगा।

31

चौखट धोना और कुलवधू द्वारा पाँच तिलक लगाना

घर की चौखट का पूजन कैसे और कब किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 37:27–38:15 · Also a question

उसे गंगाजल से धोइए; नारंगी सिंदूर को घी में मिलाइए; फिर पहले कुलदेवी का स्मरण करके और शुभ मंत्र का उच्चारण करके घर की कुलवधू ऊपर की ओर पाँच स्थानों पर तिलक लगाती हैं। यह होली, दीपावली, नवरात्रि और विजयादशमी पर होता है — दीपावली में अवश्य।

32

पहले रोटी विधान, फिर गेहूँ के आटे का चौमुखा दीपक

जहाँ कई तांत्रिकों द्वारा मारण किया गया हो वहाँ तत्काल क्या किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 38:16–38:41 · Also a question

रोटी विधान तुरंत कीजिए। जहाँ दिक्कत बहुत अधिक है, वहाँ पहले गेहूँ के आटे का चौमुखा दीपक बनाकर क्षेत्रपाल विधि से उतारा शीघ्र कीजिए, और उसके बाद ही हनुमान चालीसा का संपुट हनुमान जंजीरा मंत्र के साथ लगाइए।

33

जो ब्राह्मण यज्ञोपवीत कराते हैं वही प्रायश्चित भी कराते हैं

जहाँ उपनयन हुआ ही न हो, वहाँ प्रायश्चित कौन कराएगा?

· Reviewed Sep 2026 · 38:42–39:41 · Also a question

वही ब्राह्मण जिनसे आप उपनयन के लिए बात करेंगे। जो आपको फिर से यज्ञोपवीत देंगे और संस्कार कराएँगे, वही प्रायश्चित की विधि स्वयं भी करेंगे और आपसे भी कराएँगे — वे संकल्प लेकर कुछ भाग स्वयं करते हैं, क्योंकि यह अकेले संभव नहीं है।

34

तीन वर्ष का शास्त्रीय नियम, बनाम जन्म की प्रतीक्षा वाली प्रथा

जिस त्यौहार के दिन किसी की मृत्यु हो गई हो, उस त्यौहार का क्या होगा?

· Reviewed Sep 2026 · 39:42–41:12 · Also a question

शास्त्रोक्त रूप से यह तीन वर्ष का है — जिस पर्व काल में मृत्यु हुई हो, वह पर्व तीन वर्ष तक नहीं मनाया जाएगा और चौथे वर्ष से मनाया जा सकता है। उस दिन किसी के जन्म लेने तक प्रतीक्षा करने की प्रथा एक अलग प्रचलन है; अपने पुरोहित से पूछिए कि आप पर कौन सा लागू है।

35

दशमी पर गंगा पूजन, और बटुक भैरव जयंती

दशमी तिथि पर गंगा पूजन, और गंगा दशहरा पर बटुक भैरव जयंती

· Reviewed Sep 2026 · 41:13–41:28

दशमी तिथि के दिन भगवती गंगा का पूजन करना चाहिए। गंगा दशहरा का काल वही दिन है जिस दिन बटुक भैरव जयंती पड़ती है, और उस दिन उनका विशेष पूजन किया जाता है — इस पर चैनल पर पहले से एक वीडियो है।

वक्ता इसे संक्षेप में बताते हैं। दशमी तिथि के दिन भगवती गंगा आदि का पूजन करना चाहिए। और गंगा दशहरा का समय वही दिन है जिस दिन बटुक भैरव जयंती पड़ती है; उस दिन उनका विशेष पूजन किया जाता है। वे श्रोताओं को चैनल पर पहले से मौजूद उस वीडियो की ओर भेजते हैं।

36

एक बार पूजित हो जाने पर विग्रह बेहतर विग्रह से बदला नहीं जाता

अनजाने में सस्ते में लिया गया विग्रह भी, एक बार पूजित हो जाने पर, बदला नहीं जाता

· Reviewed Sep 2026 · 41:29–41:41

वक्ता उत्तर एक प्रश्न से देते हैं: अब जब वे पूजित हो गए हैं, तो बदलना क्यों है? विग्रह किस दाम में लिया गया या कैसे चुना गया, इससे परे वे स्थापित पूजा को ही निर्णायक मानते हैं।

37

बार-बार बच्चों का सपना, और घर का बंधन

सपने में बार-बार छोटे बच्चे दिखना किसका संकेत है?

· Reviewed Sep 2026 · 41:42–42:27 · Also a question

जहाँ वे बार-बार दिख रहे हों, वहाँ वक्ता की बताई भगवती काली की विधि कीजिए — काली मंदिर में किया जाने वाला वह पूजन — और उसके बाद घर की निकारी करके घर का बंधन कीजिए। यदि स्वयं न कर सकें तो किसी से करवा लीजिए।

38

लंबी साधना के लिए फोटो नहीं, विग्रह क्यों चाहिए

क्या कालिका योगिनी साधना फोटो पर की जा सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 42:28–42:45 · Also a question

नहीं — फोटो पर मत कीजिए, क्योंकि यह लंबी साधना है जिसका प्रभाव जीवन भर रहता है। फोटो खराब हो जाए तो पूरी साधना प्रभावित होती है। बहुत छोटा ही सही, पर श्री विग्रह रखिए।

39

उल्टा सिंह, जिससे वह प्रत्यंगिरा स्वरूप हो जाता है

दुर्गा के विग्रह में सिंह किस ओर मुख किए है, क्या इससे अंतर पड़ता है?

· Reviewed Sep 2026 · 42:46–44:20 · Also a question

हाँ। जहाँ सिंह उल्टा है, वहाँ स्वरूप विपरीत प्रत्यंगिरा के भाव में चला जाता है — उल्टा सिंह दुर्गा प्रत्यंगिरा का माना जाता है। उल्टे सिंह वाला विग्रह नहीं रखना चाहिए।

40

बाल गोपाल, जिनका कोई तंत्रोक्त वर्णन नहीं है

क्या बाल गोपाल के श्री विग्रह पर आवरण पूजन किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 44:21–45:50 · Also a question

बिल्कुल नहीं — बाल गोपाल का कोई तंत्रोक्त वर्णन है ही नहीं, और वक्ता इसे शौकिया पूजा कहते हैं। वे संतान गोपाल स्वरूप को, जिसका शास्त्रीय वर्णन है, उस लड्डू गोपाल स्वरूप से अलग करते हैं जिसे लोग वास्तव में रखते हैं।

41

विंध्यवासिनी के पूजन के लिए फोटो का पर्याप्त होना

क्या भगवती विंध्यवासिनी का पूजन फोटो से किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 45:51–57:33 · Also a question

हाँ — वक्ता कहते हैं कि भगवती विंध्यवासिनी का पूजन बिल्कुल किया जा सकता है, और उसके लिए फोटो ही पर्याप्त है।

सत्र के अंतिम उत्तरों में वक्ता कहते हैं कि भगवती विंध्यवासिनी का पूजन बिल्कुल किया जा सकता है, और उसके लिए फोटो जो है उतना ही बहुत है।

42

आसन से उठना, मस्तक पर जल लगाकर

पूजा समाप्त होने के बाद आसन से कितनी देर में उठना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 57:34–58:03 · Also a question

कम से कम एक-दो मिनट तो अवश्य बैठना चाहिए। फिर आसन उठाकर वहाँ जल डालिए, वह जल अपने मस्तक पर लगाइए, और भगवान इंद्र का स्मरण करते हुए उठिए।

वक्ता एक बैठक के समापन की विधि बताते हैं। पूजा समाप्त होने के बाद कम से कम एक-दो मिनट, न्यूनतम इतना तो बैठना ही चाहिए। फिर आसन उठाकर जल डालिए; वह जल अपने मस्तक पर लगाइए; और भगवान इंद्र का स्मरण करते हुए तब उठिए।

43

फोटो, जिन्हें खराब हो जाने पर हटाया जा सकता है

विग्रह न हटाने का नियम फोटो पर लागू नहीं होता

· Reviewed Sep 2026 · 58:04–59:55

नहीं, यह फोटो पर लागू नहीं है — फोटो तो वैसे भी अपने आप खराब हो जाती है। इसमें परेशान होने की आवश्यकता नहीं है: फोटो पाँच-दस साल में खराब हो जाती है और तब हटाई जा सकती है, और जब तक ठीक है तब तक उसका पूजन करते रहिए।

44

ट्रेडिंग में जाने से पहले राहु और पंचम भाव देखना

स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग में सफलता के लिए कौन सी साधना करनी चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 59:56–1:00:22 · Also a question

वक्ता कोई साधना नहीं बताते। पहले जन्म कुंडली दिखवाइए — राहु की स्थिति क्या है, पंचम भाव की स्थिति क्या है — और उसके बाद ही इन सब में जाइए। और तब भी, वे कहते हैं, यह कहना मुश्किल है कि फलादेश सौ प्रतिशत सटीक होगा।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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