पूरा परिवार तांत्रिक प्रहार से पीड़ित — दत्तात्रेय वज्र पंजर कवच संपुट पाठ से रक्षा (सत्य घटना)

तांत्रिक प्रहार से रोगग्रस्त और निद्राहीन एक परिवार की सत्य घटना, और दत्तात्रेय वज्र पंजर कवच का संपुट पाठ — उसकी पूर्व शर्तें, विधान, प्रदर्शित संपुट और परिणाम — जिससे वक्ता के अनुसार उस परिवार की रक्षा हुई।

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01

पूरे घर पर तांत्रिक प्रहार के लक्षण: बिना मेडिकल कारण के रोग, पलट जाने वाली राहत, डरावने सपने और पूजा से उचटा मन

कानपुर के परिवार के प्रसंग में बताए गए लक्षण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:02–02:51

वक्ता कानपुर के एक परिवार का प्रसंग बताते हैं जिसमें हर सदस्य को कोई न कोई रोग था — बुखार, पेट दर्द आदि — पर मेडिकल जाँच में कोई ठोस कारण नहीं आता था और दवा असर नहीं करती थी। झाड़-फूँक और काट से राहत मिलती थी, पर दस-पंद्रह दिन में सब पलट जाता था और एक सदस्य से शुरू होकर एक-दो दिन में सबको वही समस्या हो जाती थी। रात में किसी को ठीक नींद नहीं आती थी, डरावने और गंदे सपने आते थे, सिर के पास कोई बैठा लगता था, मनोबल टूटा हुआ था, और पूजा-पाठ का विचार आते ही मन उचट जाता था कि यह सब बेकार है।

02

वज्र पंजर कवच संपुट प्रयोग से पहले की नींव: दत्त दीक्षा, जागृत एकाक्षरी मंत्र और जागृत कवच

कानपुर के प्रसंग में चार लाख जप और 4100 पाठ; न्यूनतम 1100 पाठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:52–04:25

वक्ता कहते हैं कि संपुट सीधे-सीधे कभी नहीं लगाया जाता। कानपुर के प्रसंग में साधक ने पहले भगवान दत्तात्रेय का दीक्षा विधान पूर्ण किया, फिर शिव मंदिर में दत्त एकाक्षरी मंत्र का चार लाख का पुरश्चरण, और फिर वज्र पंजर कवच का एक मंडल का अनुष्ठान — 41 दिन में 4100 पाठ, प्रतिदिन 108 पाठ सुबह-शाम में बाँटकर, मंदिर में सुबह चार बजे से। सामान्य नियम के रूप में वे कहते हैं: प्रयोग से पहले एकाक्षरी मंत्र को जागृत कर लें और कवच के कम से कम 1100 पाठ कर लें — 41 दिन न हो सके तो 11 दिन — साथ में दत्त पूजा, हवन और ब्राह्मण भोज या किसी साधु को भोजन, ताकि कवच जागृत हो जाए।

03

क्या लंबे अनुष्ठान के बीच स्वप्न दोष से साधना खंडित हो जाती है?

अनैच्छिक स्वप्न दोष शक्ति साधना के बाहर कोई दोष नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:26–05:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं नहीं। 41 दिन के कवच अनुष्ठान के बीच साधक को वह स्वप्न दोष हुआ जो पुरुषों को होता है, और उन्होंने पूछा कि अब तो साधना खंडित हो गई। बड़े संत-महात्माओं और शंकराचार्य परंपरा के साधकों का हवाला देते हुए वक्ता कहते हैं कि यदि स्वप्न में ऐसी स्थिति स्वयं उत्पन्न हो और साधना कोई शक्ति या महाशक्ति साधना न हो, तो उसे किसी दोष में न लें — आपने कोई प्रयास नहीं किया, तो आपको कुछ करना नहीं है; उसे अनदेखा करें, पकड़कर न बैठें। दायरा वे जोड़ते हैं: भगवती की कुछ विशेष शक्ति साधनाओं में इसका विशेष ध्यान रखना पड़ता है, वहाँ यह अनिवार्य हो जाता है।

04

परिवार पर किए अभिचार और कृत्या के नाश के लिए एकाक्षरी बीज से वज्र पंजर कवच का संपुट प्रयोग

संकल्प, हर श्लोक के आगे-पीछे ओम द्राम, रक्षा श्लोकों तक 27 पाठ, ग्यारह दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:33–09:49

वक्ता कानपुर के प्रसंग में शिव मंदिर में किए गए प्रयोग का वर्णन करते हैं: संकल्प कि वज्र पंजर कवच के इस संपुट पाठ से साधक और उसके परिवार पर की गई हर अभिचारिक गतिविधि और कृत्या प्रयोग नष्ट हो और उनका रक्षण हो। पूर्व पीठिका, विनियोग, न्यास, ध्यान और मंत्र एक बार पढ़े जाते हैं, पंचोपचार या मानसोपचार पूजन होता है, और जहाँ से कवच आरंभ होता है वहाँ से हर श्लोक को प्रणव और उसके बाद एकाक्षरी बीज से लपेटा जाता है — श्लोक से पहले "ओम द्राम" और बाद में "द्राम", जो वे पहले तीन श्लोकों पर दिखाते हैं। ऐसे कम से कम 27 पाठ किए जाते हैं, वहाँ तक जहाँ तक कवच में रक्षण के लिए कहा गया है, फलश्रुति छोड़कर। वे कहते हैं कि प्रयोग ग्यारह दिन चला, तुरंत राहत मिली, बच्चे का पुराना पेट दर्द पहले दिन से कम हुआ और तीसरे-चौथे दिन सामान्य हो गया; इसके बाद दत्तात्रेय माला मंत्र का प्रयोग हुआ, जिसे वे दूसरे वीडियो के लिए रखते हैं।

05

संपुटित वज्र पंजर कवच से गृह बंधन: घर में 108 पाठ, सात दिन दत्त हवन और क्षेत्रपाल निकारी

परिवार को राहत मिलने के बाद घर का बंधन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:50–10:15

वक्ता कहते हैं कि परिवार को राहत मिलने के बाद घर में ही इसका प्रयोग शुरू करवाया गया, घर के बंधन के लिए: गृह बंधन का संकल्प करके इसी कवच के 108 संपुट पाठ घर में, साथ में एकाक्षरी मंत्र और भगवान दत्तात्रेय के नाम मंत्र से 108 आहुतियों का हवन, पूरे सप्ताह, सातों दिन। इससे घर पूरी तरह सुरक्षित हो गया; क्षेत्रपाल निकारी आदि की प्रक्रिया भी की गई। वे पूरे विधान को बिल्कुल सरल बताते हैं, इसमें कोई क्लिष्ट विधान नहीं — धीरे-धीरे करेंगे तो सामर्थ्य भी मिलेगा और हो भी जाएगा।

06

महागुरु स्वरूप भगवान दत्तात्रेय: जिन पर उनकी कृपा हो, उन पर कोई तंत्र नहीं चलता

ब्रह्मा, विष्णु, महेश और जगदंबा की एकत्र शक्ति

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:16–10:55

वक्ता कहते हैं कि भगवान दत्त गुरु स्वरूप में, महागुरु स्वरूप में हैं, और उनकी सेवा-पूजा करने को कहते हैं। कितना भी बड़ा प्रेत-पिशाच हो, या कोई भी इस्लामिक शक्ति या तंत्र-मंत्र किया गया हो, यदि आप समर्पित होकर उनकी सेवा करते हैं तो उनके पास ब्रह्मा, विष्णु, महेश की एकत्र शक्ति और भगवती जगदंबा की महाशक्ति है; भगवती की कृपा से वे सर्व-समर्थ महासिद्ध हैं, सारी परंपराएँ उन्हीं से हैं, और उनकी कृपा से हर प्रकार के तंत्र पर विजय मिल सकती है। जिनके पीछे भगवान दत्त खड़े हों, वे पूछते हैं, उन्हें कौन हरा सकता है और उन पर कौन सा तंत्र चल सकता है? मनुष्य तो मनुष्य है; यह महाशक्ति है, और उनकी शरणागति में बहुत क्षमता है।

07

परिवार के रक्षण के लिए बृहस्पतिवार भगवान दत्त को: कवच या माला मंत्र पाठ, पूजा, दीपदान, और मज़ार-दरगाह की जगह उनका मंदिर

गुरु संप्रदाय के महागुरु को सप्ताह का एक दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:56–12:05

वक्ता सबसे कहते हैं कि अपने परिवार के रक्षण के लिए हर बृहस्पतिवार कम से कम इतना करें: दत्तात्रेय वज्र पंजर कवच का पाठ, या उनके माला मंत्र का पाठ, या उनकी सामान्य पूजा, या — समस्या बड़ी हो तो — दीपदान की विधि, बृहस्पतिवार दर बृहस्पतिवार। बृहस्पतिवार को कभी किसी मुल्ला, मज़ार, दरगाह या किसी पीर-फ़कीर के स्थान पर न जाएँ; भगवान दत्त के मंदिर जाएँ, और न हो तो घर में उनकी पूजा करें, उनका स्मरण और आवाहन करें। कवच को हिंदी में पढ़ने से, वे कहते हैं, पता चलता है कि दत्त स्मरण मात्र से कितनी जल्दी आ जाते हैं; गुरु परंपरा के इन महागुरु को सप्ताह का एक दिन दें तो आपका और परिवार का कल्याण होगा, अकल्याण कभी नहीं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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