कुलदेवी सप्तमी — जिस कुल शक्ति का नाम भी नहीं पता, उनका पूजन कैसे करें

कुलदेवी सप्तमी पर कुल शक्ति के पूजन पर एक लाइव सत्र।

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01

कुल शक्ति में कौन-कौन आती हैं, और उनका पूजन कब होता है?

कुल शक्ति का अर्थ केवल कुलदेवी नहीं, कुल में उपस्थित प्रत्येक शक्ति

· 03:03–03:37 · Also a question

केवल कुलदेवी नहीं, बल्कि कुल में उपस्थित प्रत्येक शक्ति। सनातन धर्म के प्रत्येक व्यक्ति के घर में श्रावण की किसी न किसी तिथि को कुल शक्ति से संबंधित शक्तियों के पूजन का विधान सदैव रहा है — और अधिकतर महादेव के साथ भगवती की प्रमुख योगिनियाँ ही कुलदेवी के रूप में उपस्थित रही हैं।

02

श्रावण में सारी शक्तियाँ शिव के पास क्यों एकत्र हो जाती हैं?

पूरे श्रावण मास भर हर शक्ति शिव की सेवा में उपस्थित रहती है

· 03:38–03:59 · Also a question

क्योंकि श्रावण में हर प्रकार की शक्ति — महाशक्ति, उपशक्ति, देवी-देवता, उपदेवता, यहाँ तक कि भूत, प्रेत और पिशाच भी — भगवान शिव के सन्निकट उपस्थित होकर पूरा महीना उनकी सेवा में व्यतीत करती है। महाशिवरात्रि में जो सेवा एक रात्रि की होती है, श्रावण में वही पूरे मास की हो जाती है।

03

जानकार साधक श्रावण में गृह बंधन करने से क्यों मना करते हैं?

जब शक्तियाँ अन्यत्र एकत्र हों, तब बंधन की प्रक्रिया क्यों नहीं की जाती

· 04:00–04:44 · Also a question

क्योंकि बंधन में किसी न किसी शक्ति को पकड़ा जाता है, और यदि वह शक्ति उस समय शिव की सेवा में उपस्थित है तो खिंचकर आने से उसका अपना नियम भंग होता है। मना बिल्कुल नहीं है — कहना बस इतना है कि इस मास में शक्तियों का आवागमन जितना कम हो सके उतना अच्छा।

04

सिद्धि श्रावण में पूरी कीजिए और प्रयोग भाद्रपद में कीजिए

सिद्धि श्रावण में पूरी कीजिए, प्रयोग भाद्रपद में

· 04:45–05:50

श्रावण पूर्णिमा को कर सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं; उसके बाद भाद्रपद का मास है और भाद्रपद में भी अपनी एक शक्ति है। सीधा विभाजन यह है कि मंत्र या कवच की सिद्धि श्रावण में पूरी कर लीजिए, और प्रयोग — रक्षा का हो, गृह बंधन का हो, कोई भी हो — भाद्रपद में कीजिए।

05

क्या किसी घर में केवल कुलदेवी हों और कुल देवता न हों, या इसका उल्टा हो?

हर कुल शक्ति युग्म में होती है, चाहे दोनों के विषय में पता हो या न हो

· 05:51–06:50 · Also a question

प्रचलित रूप में जिनके विषय में आप जानते हैं उन्हीं की पूजा कीजिए — लेकिन भीतर का विषय ऐसा कभी हो ही नहीं सकता कि उनके साथ युग्म शक्ति न हो। जहाँ पूजित शक्ति कुंवारी हैं, वहाँ भी उनसे बड़ी कोई न कोई शक्ति होगी; बस वे प्रत्यक्ष उपस्थित होकर आपकी पूजा लेने का अधिकार नहीं रखती होंगी।

06

बहुत कम घरों को यह क्यों पता है कि उनकी मूल कुल शक्ति कौन थीं?

पीढ़ी दर पीढ़ी मूल कुल शक्ति कैसे छूटती चली गईं

· 06:51–08:19 · Also a question

क्योंकि हर पीढ़ी में वंश फैलता चला जाता है, और सबसे मूलभूत कुल शक्ति आज शायद ही कहीं पूजित रह गई हैं। लगभग 90% घरों में मूल शक्ति छूट चुकी है और उनके स्थान पर कोई और बैठ गया है।

07

अभिचार से घर में आई हुई शक्ति कुल देवता के रूप में कैसे पूजित हो जाती है?

एक-दो पीढ़ी में कुल देवता के समकक्ष बैठ जाने वाली प्रतिस्थापित शक्ति

· 08:20–10:03 · Also a question

अभिचार से त्रस्त होकर कोई व्यक्ति किसी शक्ति को घर में स्थान दे देता है, इस वचन पर कि वह घर का कल्याण करेगी। फिर वह कुल देवता के समकक्ष बैठकर पूजा लेने लगती है, और एक-दो पीढ़ी बाद वह केवल कुल शक्ति के रूप में जानी जाती है — किसी को याद ही नहीं रहता कि वह आई कैसे थी।

08

कुल देवी-देवता की पूजा साल में एक बार पर आकर क्यों रुक गई?

वह टैबू जिसने कुल शक्ति के पूजन को साल में एक बार तक सीमित कर दिया

· 10:04–11:36 · Also a question

एक टैबू बैठा दिया गया है कि साल में एक बार पूजा हो जाए वही बहुत है, उससे ज्यादा करना ही नहीं है — जबकि कुलदेवी-देवता के नित्य स्मरण के लिए किसी भगवान ने मना नहीं किया। साथ में वह पुरानी चेतावनी भी चलती है कि ज्यादा पूजा-पाठ करने से भूत-प्रेत लग जाते हैं, जिसे वक्ता अपने ही देवताओं से फ्रस्ट्रेटेड लोगों की आवाज बताते हैं।

09

जो वर्ग ज्ञान रखता है उसकी उपेक्षा करने पर कुल का ज्ञान ही चला जाता है

ज्ञान रखने वाले वर्ग की उपेक्षा

· 11:37–12:44

समाज में जो वास्तव में ज्ञान रखता है उसी की उपेक्षा — कोई भी व्यक्ति, किसी भी जाति का, जिसे देवी-देवताओं की, कथा-पुराण की और अपने सनातन समाज की जानकारी है और जो समझाने का प्रयास करता है। वक्ता कहते हैं कि गाली सबसे अधिक उसी को पड़ती रही है।

10

साधना वर्षों बाद उत्तर देती है, और जो सुख वह देती है वही अगली पीढ़ी में उसे समाप्त कर देता है

संघर्ष, फिर रिस्पांस, और फिर वह निश्चिंतता जो क्रम तोड़ देती है

· 12:45–14:30

जो पीढ़ी पूरी मार खाई हुई है — शत्रुओं से त्रस्त, तंत्र से त्रस्त, ऋण से त्रस्त — वही स्वयं को मोटिवेट रखकर सेवा-पूजा करती है। वक्ता बताते हैं कि 2002-03 में आरंभ किए गए विषय में रिस्पांस उन्हें लगभग दस साल बाद मिलना शुरू हुआ। फिर कुल शक्ति स्वास्थ्य, धन, पुत्र-पौत्र सब देती हैं — और वह पीढ़ी अगली पीढ़ी को साधना नहीं, आराम सौंपती है।

11

घर में बच्चे को वास्तव में सिखाना क्या चाहिए?

वे बातें जो माता-पिता तय कर लेते हैं कि बच्चे को नहीं देनी हैं

· 14:31–16:05 · Also a question

ब्रह्म मुहूर्त, स्वस्ति वाचन, गणपति जी का स्तोत्र, सहस्रनाम, रुद्राभिषेक कैसे होता है — वही सब, जिसके बारे में माता-पिता तय कर लेते हैं कि बच्चे को इसकी क्या जरूरत है, पहले पढ़ाई। बच्चा फिर भी उस पथ पर न चले यह हो सकता है, वक्ता कहते हैं, लेकिन प्रयास ही न करना आपकी अपनी कमी है।

12

पुण्य बच्चे तक पहुँच जाता है, संस्कार नहीं — क्योंकि साधना की पूँजी दी ही नहीं जाती

साधना की पूँजी, जो कभी हस्तांतरित नहीं होती

· 16:06–17:35

अपनी साधना की पूँजी। पाप के कर्म जैसे बच्चों को मिलते हैं वैसे ही पुण्य भी मिलते हैं, इसलिए स्वास्थ्य और संपन्नता तो उन्हें मिल जाती है — लेकिन संस्कार नहीं मिलता, क्योंकि जिस एक चीज को देने में लोग सबसे अधिक कृपणता करते हैं वह साधना ही है।

13

श्री चक्र और कामाख्या मंत्र खुले में क्यों नहीं बताए जाने चाहिए?

जिन मंत्रों की अपनी शर्तें हैं, उन्हें खुले में बाँटना

· 17:36–18:50 · Also a question

क्योंकि जो इस तरीके से बता रहे हैं उन्हें यही ज्ञान नहीं है कि श्री चक्र के पूजन के विषय में किसी को बोलना-बताना है भी या नहीं, और यदि है तो किस तरीके से; कामाख्या मंत्र आदि किस प्रकार दिए जाते हैं। वक्ता कहते हैं कि इससे कितने ही लोगों के घर बर्बाद हो चुके हैं, और इनसे इंस्पायर होकर और भी बर्बाद होंगे।

14

सांसारिक सफलता को सबसे निकृष्ट सिद्धि क्यों कहा गया है?

तीन प्रकार की सिद्धियों में भौतिक सफलता सबसे निचले स्तर की

· 18:51–20:35 · Also a question

क्योंकि तीन प्रकार की सिद्धियों में मानव जीवन की भौतिक सफलताएँ — अच्छी गाड़ी, अच्छा घर, धन-धान्य, पुत्र-पौत्र, बिना कर्ज और बिना चिंता का सुखमय जीवन — सबसे निकृष्ट मानी गई हैं। देव कृपा वह भी है, पर सबसे निचले स्तर की, और वहाँ मोक्ष की गति नहीं है।

15

अगर आपको अपने कुल देवता का पता ही नहीं है, तो यह किसकी कमी है?

यह कमी आपके पूर्वजों की है, किसी प्रवचनकर्ता की नहीं

· 20:36–21:45 · Also a question

आपके पूर्वजों की। यदि आपको अपनी कुल शक्ति का पता नहीं है और आप इससे फ्रस्ट्रेटेड हैं, तो यह उनका दिया हुआ है — इसके लिए आप किसी प्रवचनकर्ता, पुराणकर्ता, कथाकार या तंत्र के ज्ञाता को दोष नहीं दे सकते। कमी उनकी रही; और अब दायित्व आपका है कि यह दोबारा न छूटे।

16

पूजा-पाठ से अर्जित पुण्य क्या दुष्कर्म का फल काट देता है?

पुण्य का फल परलोक में मिलता है; दुष्कर्म यहीं भुगतना पड़ता है

· 21:46–24:25 · Also a question

नहीं। वक्ता कहते हैं कि शिव महापुराण में यह स्पष्ट लिखा है — दुष्कृत करने के बाद जो पुण्य कर्म आप करते हैं उसका फल अवश्य मिलेगा, लेकिन आध्यात्मिक जगत में, परलोक में; भौतिक जगत में नहीं। यहाँ जो दुष्कर्म कर दिया है, उसका फल तो यहीं भुगतना है।

17

अतिक्रमण वाले विषयों पर सबसे ज्यादा सुनने वाले क्यों मिलते हैं?

भ्रम और अतिक्रमण वाले विषयों पर ही भीड़ जुटती है

· 24:26–26:53 · Also a question

क्योंकि लोगों को भ्रम उत्पन्न करने वाले विषय सुनने में आनंद आता है, और मेहनत माँगने वाले विषय पर चार गाली देकर भाग जाते हैं। पशुपतास्त्र, ब्रह्मास्त्र, खड्गमाला या श्री चक्र अर्चन की बात कीजिए और लाइव तुरंत वायरल हो जाएगा — कीमत, वक्ता कहते हैं, सौ योनियों तक चुकानी पड़ती है।

18

शरीर में जो प्राण है, उसे कुल शक्ति की देन क्यों कहा जाता है?

किसी कुल में जन्म तभी होता है जब उस कुल की शक्ति चाहती हैं

· 26:54–27:44 · Also a question

क्योंकि जब तक कुल शक्ति न चाहें, उनके कुल में जन्म हो ही नहीं सकता। वे अपने सामर्थ्य के अनुसार जीव को देखकर इच्छा करती हैं, इस भाव से कि यह जीव हमारे कुल में आएगा तो कुल का कल्याण करेगा — कोई माता-पिता, और कोई शक्ति, अपने कुल में खराब जीव नहीं चाहती।

19

कुल में किसी का जन्म होने पर क्या पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं?

जन्म पर पितृ और देवता वैसे ही प्रसन्न होते हैं जैसे श्राद्ध पर

· 27:45–29:31 · Also a question

हाँ। जैसे कोई व्यक्ति श्राद्ध कर्म करने जा रहा हो तो उसके पितृ-पूर्वज बहुत प्रसन्न होते हैं, वैसे ही किसी जीव के जन्म पर वे ढोल-नगाड़े बजाते हैं, इस भाव से कि यह जीव अच्छे कर्म करेगा, श्राद्ध करेगा, तर्पण करेगा। देवता भी इन्हीं कारणों से प्रसन्न होते हैं।

20

किसी व्यक्ति की सफलता से क्या उसके कुल देवी-देवता की चर्चा भी होती है?

कुल की प्रसिद्धि अपने साथ कुल की शक्ति की प्रसिद्धि लाती है

· 29:32–30:42 · Also a question

हाँ — और वक्ता का कहना है कि कोई कुल शक्ति इससे उल्टा नहीं चाहेंगी। उदाहरण वे राँची क्षेत्र की सोलह भुजी दुर्गा, भगवती देवड़ी का देते हैं, जिनकी चर्चा उस क्षेत्र के एक क्रिकेटर के विश्व विजेता बनने के बाद खूब चली और मंदिर का पूरा कायाकल्प हो गया।

21

सामर्थ्यवान का उपहास फ्रस्ट्रेशन से आता है, और उसके बाद उसी की भक्ति उधार ले ली जाती है

फ्रस्ट्रेशन से उपजा उपहास, और सफल व्यक्ति से उधार ली हुई भक्ति

· 30:43–33:13

क्योंकि उपहास उस मन को शीतलता देने का प्रयास है जो जानता है कि उस सामर्थ्य की बराबरी उससे हो नहीं सकती। और फिर वही लोग उन्हीं की पूजा शुरू कर देते हैं जिनकी पूजा वह सफल व्यक्ति करता है — इस आशा में कि वैसी ही सिद्धि हमें भी मिल जाए।

22

जिस सफल व्यक्ति से आप प्रेरित हैं, उसके देवता को अपनाने में गलती कहाँ है?

समर्पण ले लीजिए, पर अपनी कुल शक्ति को हटाकर नहीं

· 33:14–34:38 · Also a question

उनके देवता की पूजा शुरू करना ठीक है; गलती अपनी कुल शक्ति को हटाकर उनकी पूजा बैठा देना है। वक्ता इसकी तुलना उस बात से करते हैं कि जन्म देने वाले पिता को छोड़कर किसी और को पिता कहना शुरू कर देना — कोई पिता तुल्य हो सकता है, पर पिता के स्थान पर नहीं।

23

गुरु की गद्दी से मिली क्षमता साधक की अपनी मेहनत के बिना आ जाती है

गुरु की गद्दी से प्राप्त शक्ति, और वचनों से मुक्त होने के बाद क्या होता है

· 34:39–36:41

गुरु की गद्दी से। जो अपने गुरु की गद्दी से शक्तियों को प्राप्त करता है, जिसके पास परंपरागत शक्ति होती है, उसे बिना विशेष कोई प्रयास किए वैसी क्षमता प्राप्त हो जाती है — वह गद्दी की क्षमता है, यानी सीधे कहिए तो भगवती की कृपा है, जो गुरु सेवा से मिली है, अपनी साधना से नहीं।

24

कोई साधक अपने देवता को दूसरे के घर में कैसे पुजवा देता है?

दारू की धार से शुरू होकर स्थायी स्थापना तक पहुँचने वाला क्रम

· 36:42–38:45 · Also a question

क्रम से। कार्य सिद्ध हो गया और सामने वाला इंप्रेस हो गया; फिर उस देवता के नाम से घर के पास दारू की धार देना, पहले 11 दिन, फिर 21 दिन; और धीरे-धीरे उसी देवता को उसके घर में ही पुजवा देना — वह भी सदैव के लिए।

25

चालाकी से बैठाई गई शक्ति जिस घर में पूजी जाती है उसी को खोखला करती है

वह पूजा जो जिस घर में हो रही है उसी को खोखला करती है

· 38:46–39:40

आपसे कहा जाएगा कि दुर्गा चालीसा कीजिए, दुर्गा जी का स्तोत्र-सतनाम कीजिए, बगलामुखी स्तोत्र-सतनाम कीजिए — और उसके पीछे उसकी बैठाई हुई चीजें आपका पूरा घर खोखला करती रहेंगी। करेंगे आप, पाएगा वह। उसका सोर्स ऑफ एनर्जी आपके घर में बन चुका है।

26

कुल में बैठी हुई शक्ति जिस भी रूप में आई हो, कुल देवता के रूप में पूजित होती है

श्रावण में घर में उपस्थित हर प्रकार की शक्ति का पूजन होता है

· 39:41–40:05

श्रावण के महीने में हर प्रकार की शक्तियों का पूजन होता है — चाहे योगिनी हों, डाकिनी हों, या आपके घर में भूत-प्रेत के रूप में कोई शक्ति पूजन के लिए बैठी हो। वक्ता कहते हैं कि जो आपके कुल देवी-देवता के रूप में, बाबा कहकर पूजित हैं, वे आपके लिए भूत-प्रेत रहेंगे नहीं; कुल में उनका पूजन होगा।

27

क्या दूसरे के कुल देवता का प्रसाद खाना चाहिए?

दूसरे कुल का प्रसाद क्यों ग्रहण नहीं किया जाता

· 40:06–40:55 · Also a question

नहीं। दूसरे के कुल देवी-देवता का प्रसाद ग्रहण नहीं करना चाहिए — और यदि ऐसा प्रसाद आपको मिल जाए तो उसे गौ माता को खिला दीजिए, जिनकी जठराग्नि में हर प्रकार के लाग को भक्षण करके पचा जाने की क्षमता मानी गई है।

28

सप्तमी का प्रसाद कौन खा सकता है, और पूजन कौन करेगा?

प्रसाद और पूजन के अधिकार को लेकर घर के अपने नियम

· 40:56–42:00 · Also a question

घर के लोग ही। जिस घर का नियम है कि बेटियाँ प्रसाद ग्रहण नहीं करेंगी या कुल देवता का स्पर्श नहीं करेंगी, या यह कि घर के पुरुष ही प्रसाद बनाएँगे, पूजन करेंगे और वही प्रसाद खाएँगे — वह नियम रखना चाहिए। आजकल के प्रवचन सुनकर उस नियम का अतिक्रमण मत करवाइए।

29

यदि घर में पूजन करने के लिए कोई पुरुष उपस्थित ही न हो तो क्या करें?

यह प्रश्न किसी चैनल से नहीं, अपने बड़े-बुजुर्गों से पूछा जाता है

· 42:01–43:51 · Also a question

यह अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से पूछिए, उनसे नहीं। वे उत्तर देने से मना करते हैं क्योंकि एक गलत सजेशन आपकी जिंदगी तहस-नहस कर सकता है — वे यह भी नहीं कह सकते कि किसी ब्राह्मण को बुलाकर पूजन करवा लीजिए, क्योंकि वहाँ बाहर के हाथ का पूजन चढ़ेगा या नहीं यह उन्हें नहीं पता, और आपके देवता कौन हैं यह भी नहीं पता।

30

क्या कोई साधक दूसरे कुल की कुल शक्ति को ठीक-ठीक बता सकता है?

बाहर से बताई गई कुल शक्ति शायद ही कभी सटीक होती है

· 43:52–45:11 · Also a question

शत-प्रतिशत सटीक नहीं, और कारण ढाँचागत है — आपके घर में बैठी शक्ति आठ-दस पीढ़ी पुरानी और कहीं अधिक प्रचंड हो सकती है, जबकि जिनके पास आप गए हैं उनकी शक्ति उस स्तर की नहीं है। वह जानकारी वे ला ही नहीं सकते; उनमें वह सामर्थ्य नहीं है।

31

ब्रह्म शक्ति पूर्ण कृपा करने से पहले क्या चाहती हैं?

ब्रह्म शक्ति की प्रसन्नता शिव और बड़ी भवानी से होती है

· 45:12–45:57 · Also a question

दो से — बड़ी चंडिका, यानी भगवती माँ दुर्गा, जिन्हें भगतवाल में बड़ी भवानी कहा जाता है; और शिव। केवल सोमवार और अमावस्या का सात्विक पूजन देने से कृपा तो होगी, पर बहुत लिमिटेड कृपा — और आपको लगेगा कि बस इतना ही है।

32

बड़ी भवानी कौन हैं?

बड़ी भवानी यानी जगदंबा — प्रचलित लोक वर्गीकरण के विरुद्ध

· 45:58–47:09 · Also a question

बड़ी भवानी का अर्थ है जगदंबा — पूर्ण सामर्थ्य के साथ पूर्ण स्वरूप में विराजमान। वक्ता उस प्रचलित वर्गीकरण को नहीं मानते जिसमें मृत कुंवारी कन्या को भवानी, जलकर मरी सुहागन को सती, गर्भवती स्त्री की मृत्यु को कालिका और उसके गर्भस्थ शिशु को भैरव कहा जाता है।

33

किसी क्षेत्र की सबसे प्रचंड शक्ति प्रायः कहाँ मिलती है?

क्षेत्र का सबसे पुराना दुर्गा या चंडिका स्थल ही उस जगह की प्रचंडतम शक्ति रखता है

· 47:10–49:16 · Also a question

उस क्षेत्र के सबसे पुराने दुर्गा पूजन स्थल पर — कोई पुराना दुर्गा मंदिर, चंडिका मंदिर या भगवती काली का मंदिर, विशेष करके जहाँ बलि चढ़ती हो या महिषासुर मर्दिनी का पूजन होता हो, कम से कम पचास-सौ साल पुराना। उस स्थान की सबसे प्रचंडतम शक्ति वहीं अवश्य विद्यमान होती है।

34

जिनसे आप पूछने जाते हैं उनमें या तो सामर्थ्य नहीं होता, या विनम्रता नहीं होती

जिनसे आप पूछने जाते हैं, उनमें सामर्थ्य, विनम्रता और द्वेष

· 49:17–52:49

या तो वह बता नहीं सकता — उसकी शक्ति सौ साल पुरानी है और आपके घर की दस पीढ़ी पुरानी — या वह बताएगा नहीं: घुमा देगा, आधी-अधूरी या गलत जानकारी देगा। बताएगा तभी जब वह आपका कल्याण चाहता हो, बात बराबरी की हो, और वह विनम्र हो।

35

यदि कोई साधक दूसरे कुल की शक्ति को जब्त करने का प्रयास करे तो क्या होता है?

कुल की शक्ति को जब्त करना, और उसके बाद का बाँस

· 52:50–56:35 · Also a question

जब्त की गई शक्तियाँ आपके मंत्र बल का मान रखकर आ भी सकती हैं — लेकिन हाथ वे अपनी बड़ी शक्ति के सामने ही जोड़ेंगी, और बाँस वहीं से होगा। उस समय आपकी जब्त की हुई और अर्जित की हुई सारी शक्ति वहीं जब्त हो जाती है।

36

बड़े-बड़े चंडी पाठ करने वाले साधकों के घर में दुर्भिक्ष क्यों पड़ जाता है?

बड़े साधक का घर भी क्यों गिर सकता है

· 56:36–59:29 · Also a question

क्योंकि दुर्भिक्ष आप केवल सामने से देख रहे हैं। जो आप नहीं देख रहे वह यह है कि सामर्थ्य की प्राप्ति के बाद कौन सा दुष्कर्म किया गया — शक्तियों का दोहन, शक्ति के साथ आने वाली मदोन्मत्तता, और उसके पीछे-पीछे जाता हुआ संतुलन।

37

जिस साधक को सामर्थ्य प्राप्त हो गया हो, उसे समाज में कैसे रहना चाहिए?

संपर्क कम कीजिए, और किसी की गाली पर तपोबल कभी खर्च मत कीजिए

· 59:30–1:00:19 · Also a question

समाज के संपर्क में कम से कम आइए, मित्रता कम रखिए, और अटैचमेंट मत रखिए। कोई गाली दे तो दो गाली दे दीजिए — लेकिन उसके ऊपर अपने तपोबल का प्रयोग कभी मत कीजिए। चार बात सुनाकर चले आइए; हाथ में जल लेकर बैठकर शाप मत दीजिए।

38

क्या कोई ऐसी स्थिति भी है जहाँ साधक को शाप देना चाहिए?

वह एक स्थिति जहाँ शाप का संकल्प उचित है

· 1:00:20–1:02:38 · Also a question

जहाँ सचमुच कोई दुष्कृत हो गया हो — वे विदेश में एक बच्ची के साथ हुई घटना का उल्लेख करते हैं — और कोई और मार्ग न बचे, तब देना चाहिए। एक लाख जप का संकल्प करके भगवती से प्रार्थना कीजिए कि उस व्यक्ति को शीघ्र अति शीघ्र उचित दंड मिले। किसी का अहित करने के लिए इसका प्रयोग किया तो वही आप पर लौटेगा।

39

कुलदेवी का पूजन किस दिन करना चाहिए?

अपनी तिथि पता हो तो वही, नहीं तो श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी

· 1:02:39–1:03:04 · Also a question

यदि आपको अपने कुल की तिथि पता है तो विषय बहुत अच्छा है — उसी तिथि को कीजिए। यदि नहीं पता है तो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन अपनी कुल शक्ति का पूजन कीजिए — आप यह वीडियो किसी भी साल सुन रहे हों।

40

यदि पता ही न हो कि कुल देवी-देवता कौन हैं तो किसका पूजन करें?

शिव-गौरी और नजदीक का शक्तिपीठ, कुल शक्ति के नाम से

· 1:03:05–1:03:24 · Also a question

शिव-गौरी की पूजा कर लीजिए, और सबसे नजदीक का जो शक्ति पीठ है उसकी पूजा कुल शक्ति के नाम से कर लीजिए — और प्रार्थना कर दीजिए कि भगवती, जो भी हमारी कुल शक्ति हों, उन्हें यह पूजा प्राप्त हो जाए।

41

वार्षिक पूजन में कुलदेवी और कुल भैरव को क्या-क्या चढ़ाना चाहिए?

कुलदेवी के लिए सोलह शृंगार, कुल भैरव के लिए धोती-गमछा

· 1:03:25–1:03:53 · Also a question

कुलदेवी के लिए सोलह शृंगार, जो आपसे बन पड़े — साड़ी, साया, ब्लाउज का कपड़ा, चूड़ी, सिंदूर, मेहंदी — कम पैसे में ला रहे हों तब भी क्वालिटी में कंप्रोमाइज किए बिना। कुल भैरव के लिए धोती-गमछा — लाल, पीला या गुलाबी, जैसा आपका मन भाए।

42

देवघर क्षेत्र का घर अपने अज्ञात कुल देवी-देवता के स्थान पर बाबा वैद्यनाथ को भैरव और भगवती जय दुर्गा को शक्ति मान सकता है

अज्ञात कुल देवी-देवता के स्थान पर बाबा वैद्यनाथ और जय दुर्गा

· 1:03:54–1:04:56

वहाँ के भैरव बाबा वैद्यनाथ हैं और शक्तिपीठ भगवती जय दुर्गा का है, जहाँ भगवती का हृदय गिरा माना जाता है — इन्हीं को कुल शक्ति मानकर पूजन कर लीजिए। भगवती के लिए गुलाबी, लाल या पीले वस्त्र के साथ शृंगार, शिव जी के लिए पीला वस्त्र, और दोनों जगह खीर-पूरी का नैवेद्य।

43

कुलदेवी पूजन में पंचबली क्या है, और वह क्यों की जाती है?

पाँच जीवों को अन्न, ताकि कुल के पितृ और देवता भी तृप्त हों

· 1:04:57–1:05:43 · Also a question

पाँच प्रकार के जीवों को अन्न का दान — चींटी, गाय, कौवा, कुत्ता, और कोई एक व्यक्ति, यानी किसी भूखे को खिला दीजिए। उनके माध्यम से कुल के पितृ भी तृप्त होंगे और देवता भी तृप्त होंगे।

44

यदि कुल देवता का पता न हो तो हवन किसके नाम से करें?

नजदीक के ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ के नाम से आहुति

· 1:05:44–1:07:22 · Also a question

भवानी शंकर के नाम से और नजदीक के शक्तिपीठ के नाम से — दोनों की 108-108 आहुति। यज्ञोपवीत धारण करते हैं तो प्रणव के साथ कीजिए; स्त्री हैं और करने वाला कोई पुरुष नहीं है तो देवी प्रणव के साथ — "ह्रीं वैद्यनाथाय स्वाहा", "ह्रीं जय दुर्गायै स्वाहा"।

45

इस हवन में कौन सी लकड़ी चलेगी और कौन सी नहीं?

हवन की लकड़ी, और आम की लकड़ी का निषेध

· 1:07:23–1:08:13 · Also a question

आम की लकड़ी का प्रयोग नहीं करना है। नवग्रह लकड़ी का प्रयोग कीजिए, बेल की लकड़ी का कीजिए, या साल के वृक्ष की लकड़ी — जो सुगंधित होती है और बहुत अच्छे से जलती है — और गाय के गोबर के उपले। समिधा में बेल सबसे उत्तम है, और अंत में पूर्णाहुति कर लीजिए।

46

हवन में कुल शक्ति सबसे अधिक किससे प्रसन्न होती हैं?

तंत्रोक्त देवी सूक्तम, और खीर में मिला हुआ गौ घृत

· 1:08:14–1:09:04 · Also a question

तंत्रोक्त देवी सूक्तम से आहुति देने से — आपकी कुलदेवी कोई भी हों — और आहुति की खीर में गौ घृत मिला देने से। वक्ता कहते हैं कि कुल शक्ति इतनी प्रसन्न होती हैं कि पूरा वात्सल्य लौटाती हैं।

47

हवन में अपने क्षेत्र की किस शक्ति के नाम की आहुति देनी चाहिए?

हर हवन में क्षेत्र की इष्टात्री शक्ति का नाम

· 1:09:05–1:11:29 · Also a question

अपने क्षेत्र की इष्टात्री शक्ति के नाम की — झारखंड और बिहार में जय दुर्गा, उत्तर प्रदेश में भगवती विंध्यवासिनी, राँची और जमशेदपुर के क्षेत्र में भगवती छिन्नमस्तिका, और वैद्यनाथ धाम में भगवती बगलामुखी, जिनका प्राकट्य स्थान वही माना गया है।

48

यदि पता हो कि कुल शक्ति नाराज चल रही हैं तो क्या करें?

रूठी कुल शक्ति के लिए गुड़ वाली खीर की आहुति

· 1:11:30–1:13:25 · Also a question

रसियाओ बनाइए — चीनी के बजाय गुड़ वाली खीर — उसमें काला तिल, दही और गौ घृत मिलाइए, और बिल्व पत्र से 108 आहुति उन्हीं के नाम से दीजिए। वक्ता इसे सौम्य प्रयोग कहते हैं, षट्कर्म का प्रयोग नहीं।

49

आहुति से पहले बिल्व पत्र को कैसे तैयार करना चाहिए?

आहुति से पहले बिल्व पत्र की डंडी तोड़ देना

· 1:13:26–1:14:21 · Also a question

ऊपर से डंडी तोड़ दीजिए — जहाँ गाँठ जैसा बना होता है वह हिस्सा — तभी आहुति दीजिए, सीधे पूरा मत चढ़ाइए। सीधे चढ़ाने पर वह मुख में गड़ता है, और वक्ता का भाव यह है कि जो हमें कष्ट देता है वह जिन तक पहुँचेगा उन्हें भी कष्ट देगा।

50

"स्वाहा" के किस अक्षर पर आहुति छोड़ी जाती है?

स्वाहा के "आ" पर आहुति छोड़ना

· 1:14:22–1:16:46 · Also a question

"आ" पर — स्वाहा बोलने से पहले नहीं, और बोलते हुए भी नहीं, बल्कि "हा" के भीतर जो "आ" है उस पर। वक्ता इसे इस भाव से समझाते हैं कि हवन की अग्नि की आयु छोटे बच्चे की मानी गई है, और बच्चे को तब खिलाते हैं जब वह मुँह खोलकर "आ" करता है।

51

हवन किस भाव में करना चाहिए?

आँसू आ जाएँ तो रुक जाइए, ताकि उच्चारण स्पष्ट रहे

· 1:16:47–1:17:53 · Also a question

केवल अपने आराध्य के प्रति समर्पण का भाव — न भावुक होना है, न क्रोधी, न काम भाव आए, न कोई अन्य भाव। भक्ति के आँसू आ जाएँ तो अच्छी बात है, लेकिन उस समय आहुति मत दीजिए, थोड़ी देर रुक जाइए — नियम इसलिए है कि मंत्र का उच्चारण गलत न हो, दोष के कारण नहीं।

52

जिस मंत्र का आप जप करते हैं, क्या उसे आहुति के समय प्रकट में बोलना चाहिए?

जप वाला मंत्र मन में, प्रकट में केवल स्वाहा

· 1:17:54–1:18:26 · Also a question

नहीं। जिन मंत्रों का आप जप करते हैं, उन्हें आहुति के समय बोलकर नहीं कहना है — पंचाक्षरी का जप करते हैं तो पंचाक्षरी बोल-बोलकर स्वाहा नहीं करना है। मंत्र मन में बोलिए और प्रकट में केवल स्वाहा — ठीक वैसे ही जैसे आप जप करते हैं।

53

जिनके पास पूरा पूजन करने का सामर्थ्य न हो वे सप्तमी को क्या करें?

दो-तीन सौ रुपए में बन जाने वाला नारियल का खप्पर

· 1:18:27–1:23:23 · Also a question

खप्पर वाली विधि — एक बड़ा गड़ी वाला सूखा नारियल बीच से खड़ा काटकर दो खप्पर बनाइए, उनमें काजू-किशमिश और कपूर भरकर प्रज्वलित कीजिए; दाहिनी ओर कुलदेवी का खप्पर, बाईं ओर कुल भैरव का। पूरा खर्च लगभग दो-तीन सौ रुपए।

54

संकल्प, और पहले कुल भैरव का खप्पर प्रज्वलित करने का क्रम

संकल्प, और पहले कुल भैरव का खप्पर प्रज्वलित करना

· 1:23:24–1:25:02

हाथ में जल लेकर, अपना नाम-गोत्र बोलकर कहिए कि आज कुलदेवी सप्तमी के दिन हम अपनी कुल शक्ति की प्रसन्नता के निमित्त यथा सामर्थ्य यह पूजन कर रहे हैं। दाहिनी ओर का खप्पर कुलदेवी का है, बाईं ओर का कुल भैरव का — पहले कुल भैरव का प्रज्वलित कीजिए।

55

खप्पर क्षेत्र के शक्तिपीठ और वहाँ के भैरव के नाम से जाता है

क्षेत्र के शक्तिपीठ और वहाँ के भैरव के नाम से खप्पर

· 1:25:03–1:26:03

अपने आसपास के शक्तिपीठ और वहाँ के भैरव के नाम से — पुरुषोत्तम क्षेत्र में भगवती विमला और भगवान जगन्नाथ, कलकत्ता में कलकत्ते वाली काली और नकुलेश्वर भैरव, तारापीठ की ओर अक्षोभ्य भैरव और भगवती तारा — इस प्रार्थना के साथ कि यह हमारे कुल देवी-देवता तक पहुँचे।

56

जिनके पास लगभग कुछ भी सामर्थ्य न हो, उनके लिए न्यूनतम पूजन क्या है?

पाँच पान के पत्ते, पाँच दीपक और नौ बार आरती

· 1:26:04–1:26:48 · Also a question

पाँच पान, पाँच सुपारी, दस लौंग, दस इलायची, और कोई भी मीठी सामग्री जो आप घर में बना सकें। कर्म साक्षी दीपक जलाइए और पाँच छोटे-छोटे घी के दीपक जलाइए, सब कुछ पान के पत्तों पर समर्पित कीजिए, और कपूर से कम से कम नौ बार आरती दिखा दीजिए।

57

जिनके पास सामर्थ्य है वे सप्तमी को क्या करें?

सामर्थ्य हो तो जीव सेवा और कुलदेवी के नाम से दान

· 1:26:49–1:27:46 · Also a question

घर में पूजा कीजिए, जीव-जंतुओं की सेवा कीजिए, और ब्राह्मणों को, विद्वानों को, जिनके प्रति आपकी श्रद्धा है उन्हें, या मंदिर में दान कीजिए — और पूरा प्रयोजन कुलदेवी का रहे, कि कुलदेवी हम पर कृपा करें। जितना सामर्थ्य हो उस अनुसार कीजिए।

58

नारियल बलि पुरुष के हाथ से, नींबू की बलि पर कोई रोक नहीं, और श्रावण में छाग बलि घर पर नहीं

नारियल और नींबू की बलि, और किसे नहीं चढ़ानी चाहिए

· 1:27:47–1:28:49

कुलदेवी के लिए एक और कुल भैरव के लिए एक नारियल बलि, और यथासंभव कोई पुरुष अपने हाथ से करे — गर्भवती स्त्री विशेष करके न चढ़ाएँ, और स्त्रियों को ऐसे भी नारियल फोड़कर बलि नहीं देनी चाहिए। नींबू की बलि बिल्कुल दे सकते हैं; छाग बलि श्रावण में घर पर नहीं करनी चाहिए।

59

इस पूजन के लिए मुहूर्त, राहु काल और नक्षत्र देखना चाहिए?

श्रावण के पर्व काल में मुहूर्त देखा जाए या नहीं

· 1:28:50–1:29:30 · Also a question

उनका अपना मत — जिसे वे भाव प्रधानता कहते हैं, शास्त्र नहीं — यह है कि श्रावण में तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त, राहु काल, केतु काल मत देखिए, बस कर लीजिए। जो व्यक्तिवादी नहीं सिद्धांतवादी हैं वे मुहूर्त देखकर करें; आवश्यक बात यह है कि हो जाए।

60

कुलदेवी सप्तमी के बाद के दिनों में क्या करना चाहिए?

जिनका पूजन सप्तमी को किया, उन्हीं का नित्य स्मरण

· 1:29:31–1:31:09 · Also a question

जिनका भी पूजन और हवन आपने किया, उसी दिन से उनका नित्य स्मरण और नित्य पूजन उनके नाम से कीजिए। चलते-फिरते उनका नाम जपिए — और यदि आपको कोई गुरु मंत्र प्राप्त नहीं है तो नाम जप में कोई दोष नहीं है, कोई कुछ भी कहे।

61

जो नित्य साधना जम चुकी हो, उसमें समय के साथ कुछ जोड़ना चाहिए?

देवता बदले बिना अपनी बनी हुई साधना में अभिवृद्धि

· 1:31:10–1:33:22 · Also a question

हाँ, पुराने साधकों के लिए — क्योंकि एक ही चीज करते-करते पूरा अभ्यास हो जाने के बाद आगे न बढ़ें तो मन कटने लगता है। उसमें जोड़िए — षोडशोपचार पूजन में देवी सूक्तम के मंत्रों का समन्वय कर लीजिए, या सहस्रनाम के श्लोक गर्भस्थ कर दीजिए। जोड़ने का अर्थ देवता बदलना नहीं है।

62

यंत्र की समझ एक तेज कैलकुलेशन की तरह उतरने लगती है

यंत्र की समझ एक तेज गणना की तरह उतरना

· 1:33:23–1:34:22

क्योंकि सूक्तों का अभ्यास हो जाने और दैवी कृपा होने के बाद यंत्र का हिसाब उसी तरह निकलने लगता है जैसे मैथमेटिक्स में तेज कैलकुलेशन वाले के लिए इंटीग्रेशन-डिफरेंशिएशन — कि यंत्र का निर्माण किस प्रकार होगा और आगे क्या होगा, यह अपने आप सामने आ जाता है।

63

रुद्र चंडी पाठ का अधिकार किसे है?

अधिकार ग्रंथ में ही लिखा है, किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के कहने से तय नहीं होता

· 1:34:23–1:37:10 · Also a question

ग्रंथ पढ़िए — उसी में लिखा है कि यह सब कोई नहीं कर सकता, और किसके लिए मना है। वक्ता चैनल से इस पर निर्णय देने से मना करते हैं, और बताते हैं कि जब कोई प्रसिद्ध व्यक्ति कह देता है कि सब कोई कर सकते हैं, तो दस लाख लोग उसी को मान लेते हैं और शास्त्र किनारे रख दिया जाता है।

64

विंध्याचल में बड़ी माता और प्रेत माता का मंदिर बंद क्यों रहता है?

विंध्याचल की बड़ी माता, जिनका दर्शन सबके लिए नहीं है

· 1:37:11–1:38:23 · Also a question

क्योंकि ये अति प्रचंडतम शक्तियाँ हैं। प्रेत माता का दर्शन फिर भी हो जाता है, लेकिन बड़ी माँ का नहीं — उनका इतिहास काफी उग्र रहा है और वहाँ सभी को जाना भी नहीं चाहिए। बाहर से ही प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लेना उचित है।

65

गर्भ रक्षण के लिए क्या किया जा सकता है?

गर्भ रक्षण के तीन अभिमंत्रित उपाय

· 1:38:24–1:41:39 · Also a question

तीन विकल्प, और तीनों में सामग्री को उस कवच से अभिमंत्रित करना है जिसकी आपने सिद्धि की हो — सर्वश्रेष्ठ कामाख्या कवच: तेरह गाँठ वाला लाल धागा कमर में; लाल गुंजा के साथ गोमती चक्र, लाल कपड़े में सील करके; या पुष्य नक्षत्र में लिया गया पपीते का काला बीज, काले कपड़े में सील करके।

66

कुलदेवी के हवन के लिए तंत्रोक्त देवी सूक्तम में क्या बदलाव होगा?

देवी सूक्तम की आहुति में "कुल दिव्यै स्वाहा" जोड़ना

· 1:41:40–1:42:51 · Also a question

देवी सूक्तम की आहुति चलती है "नमस्तस्यै स्वाहा, नमस्तस्यै स्वाहा, नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा"। कुलदेवी के लिए चतुर्थी विभक्ति जोड़िए — "नमस्तस्यै कुल दिव्यै स्वाहा"; "कुल दिव्ये नमः" नहीं, क्योंकि चतुर्थी में ऐ की मात्रा लगेगी, ई की नहीं।

67

घर में अपने आप राहु-केतु की शांति कैसे करें?

साफ-सफाई, गणपति, ध्वजा और आवारा कुत्तों की सेवा

· 1:42:52–1:44:54 · Also a question

चार बातें — घर और विशेष करके वाशरूम शनिवार और बुधवार को खूब साफ रखिए, और पैर के तलवे साफ रखिए; शिव परिवार और संकटनाशन गणपति का पूजन बारह दूब चढ़ाकर कीजिए; हनुमान जी की लाल ध्वजा लगाइए और वहाँ सुबह-शाम धूप-दीप जले; और आवारा कुत्तों को अपने खाने से पहले खिलाइए।

68

मंदिर की कौन सी सेवा से राहु-केतु प्रसन्न होते हैं?

मंदिर की फटी ध्वजा बदलवाना, और चाँदनी अर्पित करना

· 1:44:55–1:45:28 · Also a question

मंदिर में जाकर साफ-सफाई और सेवा-पूजा; और जहाँ मंदिर का ध्वज फटा हुआ हो, वहाँ ध्वज बदलवाने में सहायता कीजिए — आर्थिक रूप से दीजिए, बनवाकर दीजिए। भगवती के स्थान पर ऊपर जो चाँदनी तानी जाती है, वह अर्पित करने से भी दोनों प्रसन्न होते हैं।

69

राहु की शांति के लिए कौन सा शिव अभिषेक करें, और चाँदी के नाग-नागिन की विधि क्या है?

ताँबे के लोटे के दूध में चाँदी का नाग-नागिन

· 1:45:29–1:46:49 · Also a question

ऐसे शिवलिंग का अभिषेक कीजिए जिसमें सर्प लगे हों। अमावस्या को सौ-डेढ़ सौ रुपए का छोटा सा चाँदी का नाग-नागिन बनवाकर, ताँबे के लोटे में दूध डालकर — इस प्रक्रिया में ताँबा ही चलेगा — मंदिर में शिव जी को चढ़ा दीजिए, मन में पंचाक्षरी जपते हुए। चढ़ जाने के बाद नाग-नागिन को स्पर्श नहीं करना है।

70

जिस घर में कुलदेवी सप्तमी की परंपरा ही लुप्त हो चुकी है वह क्या करे?

जहाँ परंपरा बची ही नहीं, वहाँ इसी सत्र में बताई विधि ही विधान है

· 1:46:50–1:48:18 · Also a question

जैसा इस सत्र में बताया गया है, पूरा उसी अनुसार कीजिए — पूरा लाइव इसी पर है। मध्य प्रदेश के श्रोता को भी वही उत्तर है: अपने क्षेत्र के नजदीक जो शक्तिपीठ पड़े उसे देख लीजिए। कर्म साक्षी दीपक की विधि पर चैनल पर पहले से चार-पाँच वीडियो हैं।

71

क्या जाति से तय होता है कि किसी कुल की कुलदेवी कौन हैं?

जाति से यह तय नहीं होता कि आपकी कुलदेवी कौन हैं

· 1:48:19–1:48:44 · Also a question

नहीं — आप यादव हैं या क्षत्रिय, इससे फर्क नहीं पड़ता। कुलदेवी कौन हैं, यह तो उस कुल के लिए देखना पड़ेगा; जाति से ऐसे नहीं बोल सकते। पता न हो तो जैसा बताया गया है वैसे नजदीक के शक्तिपीठ का पूजन कीजिए।

72

क्या कुलदेवी का पूजन मंदिर में दान करके भी किया जा सकता है?

मंदिर में सात-सात का दान उपाय नहीं, विधान है

· 1:48:45–1:50:53 · Also a question

हाँ — सात शृंगार, सात प्रकार की मिठाई और सात प्रकार का फल कुलदेवी के निमित्त मंदिर में दान किया जा सकता है। वक्ता यह स्पष्ट करते हैं कि यह कोई उपाय के तौर पर नहीं है — यह ऐसा विधान है जिससे उनकी कृपा होती है।

73

क्षेत्र की प्रचंड पर हाल में प्रकट हुई देवी को ही मुख्य मान लेना चाहिए?

क्षेत्र की प्राचीन शक्ति प्रमुख रहती हैं, हाल की शक्ति साथ में नाम से

· 1:50:54–1:51:37 · Also a question

नहीं — क्षेत्र की प्राचीन शक्ति ही प्रमुख रहें। गोरखपुर के श्रोता से वे कहते हैं कि प्रमुख रूप से भगवती विंध्यवासिनी की पूजा कीजिए, और वहाँ की जो शक्ति बहुत प्रचंड तो हैं पर जिनका प्राकट्य बहुत पुराना नहीं माना जाता, उनकी भी सेवा-पूजा उनके नाम से होनी चाहिए।

74

घर में शिवलिंग और अर्घी किस प्रकार रखनी चाहिए?

अलग अर्घी, और साथ में वासुकी, त्रिशूल तथा नंदी

· 1:51:38–1:52:29 · Also a question

गृहस्थ के लिए दोनों अलग-अलग होने चाहिए — नीचे अर्घी, पीतल की या पत्थर की, और उसके ऊपर शिवलिंग; एक में जुड़ा हुआ शिवलिंग नहीं होना चाहिए। नर्मदेश्वर रखिए या स्फटिक का, साथ में वासुकी नाग (पंचमुखी हों तो अति उत्तम), त्रिशूल और नंदी जी।

75

यदि किसी घर में कुलदेवी का पूजन पहले से किसी और तिथि को होता हो तो?

सामान्य सप्तमी से ऊपर अपने कुल की तिथि

· 1:52:30–1:53:55 · Also a question

अपनी ही रखिए। यदि आपके घर में कुलदेवी की पूजा पहले से पूर्णिमा को होती आई है तो पूर्णिमा को ही कीजिए, और सप्तमी के दिन सामान्य पूजन कर लीजिए। जिन्हें अपनी तिथि पता है वे उसी पर रहें; जिन्हें नहीं पता वे सब सप्तमी को करेंगे — इसीलिए इसे कुलदेवी सप्तमी कहते हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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