भगवान दत्तात्रेय के एकाक्षरी मंत्र का विधान — बिना गुरु वाले साधक के लिए पूर्णिमा से पूर्णिमा का अनुष्ठान

भगवान दत्त के एकाक्षरी बीज मंत्र का विधान।

21 concepts, in the order they are taught. Jump to any one.

9 also answer a common question

Questions this answers

9 of the notes below are questions in their own right. Scroll for more.

The notes
EN हिंदी
01

जिन्हें गुरु प्राप्त नहीं हुए, उनकी प्रथम साधना

भगवान दत्तात्रेय के एकाक्षरी मंत्र का विधान किसे करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:00–00:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान दत्तात्रेय के एकाक्षरी मंत्र का विधान प्रत्येक साधक को विशेष करके करना चाहिए, और विशेषकर उन्हें जिन्हें गुरु की प्राप्ति नहीं हुई है, जिन्हें किसी भौतिक गुरु के मुख से मंत्र की प्राप्ति नहीं हुई है, और जो अन्यथा साधना मार्ग पर सीधे भैरव जी, काली जी, दुर्गा जी और महाशक्तियों की साधना से आरंभ कर देते हैं।

02

हर पंथ और संप्रदाय में गुरु स्वरूप में पूजित

भगवान दत्तात्रेय की पूजा सभी गुरुओं की पूजा क्यों मानी जाती है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:24–01:05 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसका कारण यह है कि सनातन संस्कृति में जितने भी पंथ और संप्रदाय बने हैं, उन सभी में भगवान दत्तात्रेय किसी न किसी स्वरूप में — गुरु स्वरूप में — पूजित हैं। इसलिए यदि हम उनकी सेवा-पूजा करें तो सभी गुरुओं की पूजा हो जाती है।

03

शिष्य के असंतुष्ट रहने पर भी यही विधान

यदि गुरु प्राप्त तो हो गए हों, पर वे साधक को आगे न ले जा पा रहे हों, तो क्या करें?

· Reviewed Sep 2026 · 01:06–01:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि गुरु प्राप्त भी हो गए हों, किंतु किसी कारणवश वे आपको साधना मार्ग पर आगे नहीं ले जा पा रहे हों, या आप संतुष्ट नहीं हो पा रहे हों, तब भी आपको भगवान दत्त के इस एकाक्षरी मंत्र का विधान करना चाहिए।

04

पूर्णिमा या शुभ पर्व काल में देव दीक्षा

पहले देव दीक्षा विधान — पूर्णिमा या किसी शुभ पर्व काल में

· Reviewed Sep 2026 · 01:29–01:50

वक्ता कहते हैं कि देव दीक्षा विधान का लिंक इसी वीडियो के विवरण में दिया जाएगा। किसी भी शुभ पर्व काल में, या पूर्णिमा के दिन, सबसे पहले भगवान दत्तात्रेय के समक्ष वह विधान करना चाहिए — मानसिक रूप से उनके समक्ष समर्पित होकर उन्हें सद्गुरु और परम गुरु के रूप में स्वीकार करते हुए। उसके बाद ही, साधना मार्ग पर चलने से पहले, यह एकाक्षरी अनुष्ठान लेना चाहिए।

05

भगवान दत्त के पूर्ण स्वरूप का बीज मंत्र

भगवान दत्तात्रेय का एकाक्षरी मंत्र क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:51–02:15 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह भगवान दत्तात्रेय के पूर्ण स्वरूप का बीज मंत्र है। जैसे काली जी का बीज मंत्र है, दुर्गा जी का बीज मंत्र है, और जितनी भी प्रमुख महाशक्तियाँ हैं उनका बीज मंत्र है, उसी प्रकार परम गुरु स्वरूप और परम दिव्य स्वरूप भगवान दत्त का यह बीज मंत्र है।

06

तुरंत उपस्थिति और सभी अभीष्टों की पूर्ति

भगवान दत्त स्वयं साधक से क्या वचन देते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 02:16–02:51 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान दत्त स्वयं कहते हैं कि जो मुझको जिस भाव में जैसे भी भजता है, मैं तुरंत उपस्थित होकर उसके सभी अभीष्टों की पूर्ति कर देता हूँ। इसलिए वे श्रोताओं से कहते हैं कि मन में बिना किसी नकारात्मक विचार के, और किसी अति विद्वान जन की यह बात सुनकर रुके बिना कि स्वयं से यह विधान नहीं कर सकते, स्व कल्याण के लिए यह विधान कर लेना चाहिए।

07

तर्क के स्थान पर शरणागति, और प्रमाण कहाँ हैं

दूसरों की आपत्तियों में जाने से आगे नहीं बढ़ा जा सकता; प्रमाण अपनी जगह हैं

· Reviewed Sep 2026 · 02:52–03:56

वक्ता कहते हैं कि यदि आप दूसरों की बातों में जाएंगे तो अनेक बातें सुनकर कभी भी अपने कल्याण मार्ग पर आगे नहीं जा पाएंगे। सभी बातों को छोड़कर भगवान की शरणागति स्वीकार कीजिए और उन्हें समर्पित हो जाइए। वे जोड़ते हैं कि इसका प्रमाण पहले के वीडियो में दिया जा चुका है, जिनमें लाइव वीडियो भी हैं और उनमें इस विषय पर बहुत चर्चा की गई है।

08

किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि से, पीले रंग में

किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि से, पीले वस्त्र और पीले आसन पर

· Reviewed Sep 2026 · 03:57–04:19

वक्ता कहते हैं कि जब आप साधना मार्ग पर चलना चाहें और भगवान दत्त के स्वरूप की उपासना करना चाहें, तो इस साधना को किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि से आरंभ करें। पीला वस्त्र और पीला आसन रखें; आसन कुशा का भी रख सकते हैं। दिशा उत्तर, पूर्व या पश्चिम — किसी भी ओर रख सकते हैं।

09

गिरनार क्षेत्र की ओर मुख, और दक्षिण दिशा का निषेध

क्या यह जप गिरनार की दिशा की ओर मुख करके किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:20–04:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हाँ। आपके निवास स्थान से गिरनार पर्वत का क्षेत्र जिस दिशा में पड़ता है — गिरनार गुजरात में है — उस दिशा की ओर मुख करके भी जप कर सकते हैं। भगवान दत्त हर जगह विद्यमान हैं, क्योंकि वे साक्षात परब्रह्म परमेश्वर हैं, इसलिए किसी भी दिशा की ओर मुख कर सकते हैं; किंतु गृहस्थों को घर में शांति और पौष्टिक कर्म की साधना दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नहीं करनी चाहिए।

10

पीले धागे में रुद्राक्ष, पीली गोमुखी, पीत चंदन

पीले धागे में गुथी रुद्राक्ष माला, पीली गोमुखी और पीत चंदन

· Reviewed Sep 2026 · 04:46–05:05

वक्ता कहते हैं कि माला रुद्राक्ष की लेनी है, जो पीले धागे में गुथी हुई हो। गोमुखी भी पीली ही रखनी है। मस्तक पर पीत वस्त्र और पीत चंदन का — यानी पीले चंदन का — लेपन करना है; इस साधना के आरंभ में रक्त चंदन का लेपन नहीं करना चाहिए। उसके स्थान पर केसर का लेपन भी कर सकते हैं।

11

प्रथम दिन का पूजन धर्मपत्नी के साथ, और सामग्री अछूती

साधना की सामग्री का प्रयोग और कौन कर सकता है, और क्या पूजन में धर्मपत्नी सम्मिलित होती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 05:06–05:41 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपका विवाह आदि हो चुका है, तो प्रथम दिन पूजन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि यदि संभव हो तो भगवान दत्त का पूजन अपनी धर्मपत्नी के साथ अवश्य करें। साधना में प्रयोग किए जाने वाले वस्त्र दैनिक जीवन में प्रयोग नहीं करने हैं, केवल पूजन-पाठ में; और उन वस्त्रों का या आपके आसन का प्रयोग कोई अन्य व्यक्ति न करे, न ही आपकी माला या गोमुखी को कोई स्पर्श करे।

12

घी के दो दीप — दत्तात्रेय और भगवती अनघा लक्ष्मी

घी के दो दीपक — एक भगवान दत्तात्रेय के नाम, एक भगवती अनघा लक्ष्मी के नाम

· Reviewed Sep 2026 · 05:42–06:15

वक्ता कहते हैं कि इसमें घी का दीपक जलाना उत्तम और सर्वश्रेष्ठ रहेगा। प्रत्येक व्यक्ति को दो दीपक जलाने चाहिए: एक भगवान दत्तात्रेय जी के नाम से और दूसरा उनकी महाशक्ति भगवती अनघा लक्ष्मी के नाम से। इसमें प्रत्येक व्यक्ति को दो दीप प्रज्वलित करने चाहिए।

13

विनियोग और न्यास, फिर केवल बीज — न प्रणव, न नमः

पहले विनियोग और न्यास, फिर केवल बीज — न आगे प्रणव, न पीछे नमः

· Reviewed Sep 2026 · 06:16–06:39

वक्ता कहते हैं कि जप की पूरी विधि का एक पीडीएफ इसी वीडियो के विवरण में रहेगा, जिसे डाउनलोड करके प्रिंट आउट निकलवा लेना है। आप विनियोग करेंगे, न्यास करेंगे, तत्पश्चात एकाक्षरी मंत्र का जप करेंगे। इसमें न प्रणव लगाना है, न नमः — जितना बीज मंत्र है केवल उसी का जप अधिकाधिक मात्रा में करना है।

14

एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक प्रतिदिन 108 माला

एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक प्रतिदिन 108 माला

· Reviewed Sep 2026 · 06:40–06:59

वक्ता कहते हैं कि यदि एक पूर्णिमा से लेकर अगली पूर्णिमा तक प्रतिदिन 108 माला जप कर लें — समय सुबह, एकदम भोर के समय रख सकते हैं, या रात्रिकालीन साधना भी कर सकते हैं, शाम के समय भी कर सकते हैं — तो यही मात्रा है। किंतु वे कहते हैं कि ध्यान रखें, यदि 9-10 बजे साधना करेंगे तो प्रभाव कम मिलेगा; इसलिए सुबह भोर के समय करने का प्रयास करें।

15

सुबह 54 और शाम 54, तथा इस संकल्प का फल

क्या 108 माला को दो बैठकों में बाँटा जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 07:00–07:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हाँ। आप दो समय मिलाकर भी 108 माला पूर्ण कर सकते हैं — सुबह 54 माला और शाम को 54 माला; 54-54 दो बार भी कर सकते हैं। यदि एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक प्रतिदिन 108 माला जप कर देते हैं, तो भगवान दत्त की कृपा से न भौतिक जीवन में कुछ कमी रहेगी, न आध्यात्मिक जीवन में, और समय पर उनका मार्गदर्शन और सहयोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अवश्य मिलता रहेगा।

16

मीठा भोग, चढ़ाया गया जल, बेलपत्र और तुलसी पत्र

कोई भी मीठी सामग्री — छुहारा, किशमिश, मिश्री — साथ में बेलपत्र और तुलसी पत्र

· Reviewed Sep 2026 · 07:30–07:59

वक्ता कहते हैं कि भोग में आप कोई भी मीठी सामग्री लगा सकते हैं — छुहारा, किशमिश, मिश्री; इन सभी का भोग लगाना है। भोग लगाकर आप स्वयं भी खा सकते हैं और घर के लोगों को भी खिला सकते हैं। भोग के साथ जो जल रखेंगे, वह जल आप स्वयं पिएँगे। भगवान को बेलपत्र भी चढ़ा सकते हैं और तुलसी पत्र भी; दोनों चढ़ा सकते हैं।

17

गौ माता कामधेनु और भगवान दत्त के चार कुत्ते

साधना काल में किन प्राणियों को भोजन कराना अनिवार्य है?

· Reviewed Sep 2026 · 08:00–08:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब तक जप चले, जब तक साधना काल रहे — वस्तुतः यह तो सदैव जीवन में पालन करना चाहिए — प्रतिदिन गाय को भोग अवश्य खिलाना है। भगवान दत्त सदैव गाय के साथ चलते हैं, इसलिए गौ माता कामधेनु उनके साथ उपस्थित होती हैं और उनकी सेवा होनी चाहिए। भगवान दत्त के साथ चार कुत्ते रहते हैं, इसलिए इस बात का भी ध्यान रखना है कि कुत्तों को भी भोजन कराना है।

18

कम से कम 11 माला का हवन, उच्चारण केवल मन में

अंतिम दिन कम से कम ग्यारह माला का हवन, और मंत्र का उच्चारण केवल मन में

· Reviewed Sep 2026 · 08:25–09:08

वक्ता कहते हैं कि जप पूर्ण होने के बाद, यदि संभव हो तो अंतिम दिन — अर्थात जब पूर्णिमा से पूर्णिमा तक का जप पूरा हो जाए — हवन भी कर लीजिए। यह कम से कम 11 माला का हवन होगा। इसमें केवल बीज का उच्चारण करते हुए स्वाहा बोलेंगे; और उच्चारण मुख से नहीं, मन में करना है। चूँकि इस मंत्र को गुरु स्वरूप में धारण किया जा रहा है, इसलिए इसका जप कभी बोलकर नहीं करना है।

19

दो भोजपत्र, विपरीत दो त्रिभुज, बीच में बीज

दो भोजपत्र, एक-दूसरे से विपरीत दो त्रिभुज, और बीच में लिखा बीज

· Reviewed Sep 2026 · 09:09–09:45

वक्ता कहते हैं कि यदि इसके साथ एक और प्रयोग कर लें तो अति उत्तम होता है। दो भोजपत्र लेकर उन पर यंत्र बनाएँगे — यंत्र कैसा होता है यह दीक्षा विधान वाले वीडियो में देखा जा सकता है। दो त्रिभुज बनेंगे, एक-दूसरे से विपरीत, और बीच में भगवान दत्त का यह एकाक्षरी बीज लिखा जाएगा। उसकी प्राण प्रतिष्ठा की सामान्य विधि वहीं बताई गई है, और यदि आपको पूर्ण विधि आती है तो वह भी कर सकते हैं। तत्पश्चात उसे भगवान दत्त के पास रख देंगे और प्रथम दिन का जप पूर्ण करेंगे।

20

पीले धागे में ताँबे या चाँदी का कवच

एक यंत्र ताँबे या चाँदी के कवच में, पीले धागे में गले में धारण

· Reviewed Sep 2026 · 09:46–10:05

वक्ता कहते हैं कि दोनों में से एक यंत्र को किसी कवच में — चाहे ताँबे का हो या चाँदी का — डालकर, पीले धागे में करके अपने गले में पहन लेंगे; और आप जप करते रहेंगे। जब आपके 30 दिन पूर्ण हो जाएँगे, अर्थात जब अगली पूर्णिमा आएगी, तो उस दिन आप जप करेंगे, हवन करेंगे और समर्पण कर देंगे।

21

दूसरा यंत्र धारण, पहला नदी में विसर्जित

दूसरा कवच धारण किया जाता है और पहला नदी में विसर्जित

· Reviewed Sep 2026 · 10:06–11:09

वक्ता कहते हैं कि प्रथम दिन बनाकर भगवान के पास रख छोड़ा हुआ यंत्र तब एक सुंदर से नए कवच में डालकर गले में धारण कर लिया जाता है; और जो कवच आपने तब तक पहन रखा था, उसे नदी में ले जाकर विसर्जित कर देंगे। इस प्रकार कवच और मंत्र दोनों सिद्ध हो जाएँगे, जिसके बाद आप दैनिक जीवन में यथाशक्ति पाँच माला या 11 माला जप नियमित रूप से करते रहेंगे।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

Explore this topic