विष्णु सहस्रनाम · 108 दिन · दिन 18 / 108 · अठारहवें श्लोक के दस नाम

बीमारी से थक गए हैं?

भगवान भी एक वैद्य हैं

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वेद्यो वैद्यः सदायोगी वीरहा माधवो मधुः । अतीन्द्रियो महामायो महोत्साहो महाबलः ॥ १८॥

वेद्य वैद्य सदायोगी वीरहा माधव मधु अतीन्द्रिय महामाय महोत्साह महाबल

वेद्य, वैद्य, सदायोगी, वीरहा, माधव, मधु; अतीन्द्रिय, महामाय, महोत्साह, महाबल।

आज की साधना

  1. 1. आज का सत्संग सुनें।
  2. 2. आज का श्लोक एक बार ख़ुद गाइए।
  3. 3. मन हो तो — पूरा पाठ, गाया हुआ (52 मिनट) — बैठकर, आँखें बंद करके।
दिन लगातार

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आज का सत्संग, पढ़कर

घर में कोई बीमार है, दवाइयों की लम्बी लिस्ट है, अस्पताल के चक्कर लग रहे हैं, और आप अन्दर से बहुत थक गए हैं?

कल मैंने आपसे कहा था कि आज का नाम बताएगा कि भगवान ख़ुद एक वैद्य हैं। वो नाम आज के अठारहवें श्लोक में है। पहले ये श्लोक ज़रा गाकर सुनाता हूँ।

वेद्यो वैद्यः सदायोगी वीरहा माधवो मधुः । अतीन्द्रियो महामायो महोत्साहो महाबलः ॥ १८॥

जय श्री कृष्ण। विष्णु सहस्रनाम की एक सौ आठ दिन की इस यात्रा में आज अठारहवाँ दिन है, और आज के श्लोक में दस नाम हैं।

पहले कल का हाल पूछ लूँ। कल कोई टलता हुआ वादा निभाया, मन में वामन कहा? श्लोक एक बार गाया? तो आज आपकी माला में अठारहवाँ मनका जुड़ गया।

श्लोक का पहला नाम है वेद्य, यानी वो जिन्हें जानना ज़िन्दगी में सबसे ज़रूरी है। और उसके ठीक बाद आता है वो नाम, जिसका कल वादा किया था, वैद्य, यानी इलाज करने वाला, डॉक्टर। पुराने आचार्य कहते हैं कि ये नाम एक बहुत बड़ी बीमारी का इलाज करता है, जन्म और मृत्यु के उस चक्र का, जिसे हम संसार कहते हैं।

पर मज़े की बात ये है कि भगवान सचमुच वैद्य बनकर भी आए हैं। भागवत में समुद्र-मन्थन की कहानी आती है, जब देवता और असुर अमृत के लिए समुद्र मथ रहे थे। और तब समुद्र से एक अद्भुत पुरुष निकला, साँवला, युवा, पीले वस्त्र पहने, गले में माला, कानों में चमकते कुण्डल, और हाथों में अमृत से भरा कलश।

भागवत कहती है कि वो भगवान विष्णु का ही अंश थे, और उनका नाम था धन्वन्तरि, जिन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है। ज़रा सोचिए, जिसके हाथ में अमृत है, वो एक राजा या योद्धा बनकर नहीं, एक वैद्य बनकर आया। यानी शरीर का इलाज करना और मन का दुःख दूर करना, दोनों उसी के काम हैं।

और गीता में कृष्ण ख़ुद कहते हैं, "मैं ही रस से भरा चन्द्रमा बनकर सारी औषधियों को पुष्ट करता हूँ।" मतलब हर जड़ी-बूटी में, हर दवा में जो असर है, वो भी कहीं न कहीं उन्हीं का है।

तो जिस थकान से हमने आज शुरू किया था, उसके लिए मैं आपसे बस इतना कहूँगा। डॉक्टर की बात मानिए, दवा समय पर लीजिए, जो इलाज चल रहा है उसे पूरे भरोसे से चलने दीजिए, क्योंकि वो भी उन्हीं की दी हुई चीज़ें हैं। पर साथ में ये भी याद रखिए कि हर इलाज के पीछे एक वैद्य और है, जो आपके घर का हाल जानता है, और जो आपकी थकान भी देख रहा है।

इसी श्लोक में और नाम भी हैं। सदायोगी, यानी जो हमेशा योग में टिके रहते हैं, और वीरहा, यानी जो अधर्म के योद्धाओं का अन्त करते हैं। फिर दो बड़े मीठे नाम आते हैं, माधव और मधु। माधव यानी लक्ष्मी जी के पति, और मधु यानी जो ख़ुद मिठास हैं, जिनका नाम लेते ही जैसे मुँह मीठा हो जाए। फिर आता है अतीन्द्रिय, यानी जो इन्द्रियों से परे हैं, और आख़िर में तीन नाम, महामाय, महोत्साह और महाबल, यानी बड़ी माया वाले, बड़े उत्साह वाले और बड़े बल वाले।

और आज के लिए एक छोटी-सी बात। आज जब भी आप दवा लें, या बस एक गिलास पानी पिएँ, तो एक पल रुकिए, और मन में कहिए, वैद्यः। और अगर घर में कोई बीमार है, तो उनके पास बैठकर भी ये नाम एक बार धीरे से ले सकते हैं।

और रोज़ की तरह, आज का श्लोक एक बार गाइए, हो सके तो पूरा सहस्रनाम भी सुनिए, और कमेंट में लिख दीजिए कि आपने गाया, या सुना।

कल हम उन्नीसवें श्लोक पर आएँगे, और कल की कहानी में मूसलधार बारिश है, डरा हुआ पूरा गाँव है, और एक बच्चा है, जिसने सात दिन तक एक हाथ पर पूरा पहाड़ उठाए रखा।

वैद्य, यानी वो जो हर इलाज के पीछे खड़े हैं। जय श्री कृष्ण। अब ये श्लोक मेरे साथ गाइए।

वेद्यो वैद्यः सदायोगी वीरहा माधवो मधुः । अतीन्द्रियो महामायो महोत्साहो महाबलः ॥ १८॥

आज घर ले जाने के लिए

  1. 1.भगवान का एक नाम है वैद्य। और वो वैद्य बनकर आए भी — धन्वन्तरि।
  2. 2.डॉक्टर और दवा… उन्हीं की दी हुई चीज़ें हैं। उन्हें पूरा मानिए।
  3. 3.हर इलाज के पीछे एक वैद्य और है… जो आपकी थकान भी देख रहा है।