विष्णु सहस्रनाम · 108 दिन · दिन 17 / 108 · सत्रहवें श्लोक के बारह नाम

वादा निभाना महँगा पड़ रहा है?

सच पर टिको, वो पास हैं

0:00

उपेन्द्रो वामनः प्रांशुरमोघः शुचिरूर्जितः । अतीन्द्रः सङ्ग्रहः सर्गो धृतात्मा नियमो यमः ॥ १७॥

उपेन्द्र वामन प्रांशु अमोघ शुचि ऊर्जित अतीन्द्र सङ्ग्रह सर्ग धृतात्मा नियम यम

उपेन्द्र, वामन, प्रांशु, अमोघ, शुचि, ऊर्जित; अतीन्द्र, सङ्ग्रह, सर्ग, धृतात्मा, नियम, यम।

आज की साधना

  1. 1. आज का सत्संग सुनें।
  2. 2. आज का श्लोक एक बार ख़ुद गाइए।
  3. 3. मन हो तो — पूरा पाठ, गाया हुआ (52 मिनट) — बैठकर, आँखें बंद करके।
दिन लगातार

Kept on this device.

आज का सत्संग, पढ़कर

कभी किसी से कोई वादा किया था, और आज वो वादा निभाना इतना महँगा पड़ रहा है कि मन कहता है, छोड़ो, कौन याद रखेगा?

कल मैंने आपसे कहा था कि एक छोटा-सा ब्राह्मण बालक एक राजा से बस तीन क़दम ज़मीन माँगेगा। उस बालक का नाम आज के सत्रहवें श्लोक में है। पहले ये श्लोक ज़रा गाकर सुनाता हूँ।

उपेन्द्रो वामनः प्रांशुरमोघः शुचिरूर्जितः । अतीन्द्रः सङ्ग्रहः सर्गो धृतात्मा नियमो यमः ॥ १७॥

जय श्री कृष्ण। विष्णु सहस्रनाम की एक सौ आठ दिन की इस यात्रा में आज सत्रहवाँ दिन है, और आज के श्लोक में बारह नाम हैं।

पहले कल का हाल पूछ लूँ। कल किसी ने कड़वी बात कही, तो जवाब देने से पहले तीन साँसें लीं, मन में सहिष्णु कहा? श्लोक एक बार गाया? तो आज आपकी माला में सत्रहवाँ मनका जुड़ गया।

श्लोक का पहला नाम है उपेन्द्र, यानी इन्द्र के छोटे भाई, क्योंकि वामन भगवान अदिति माँ के बेटे बनकर आए थे, और इन्द्र भी अदिति के ही बेटे थे। और फिर आता है वो नाम, वामन, यानी छोटे क़द वाले, और ठीक उसके बाद प्रांशु, यानी बहुत ऊँचे। एक ही साँस में छोटा भी और विशाल भी, ये बात आपको अजीब लगेगी, पर कहानी सुनेंगे तो समझ आ जाएगी।

भागवत में कहानी है कि असुरों के राजा बलि बहुत शक्तिशाली थे, और उससे भी बड़ी बात, बहुत बड़े दानी थे। नर्मदा के किनारे वो एक बड़ा यज्ञ कर रहे थे, कि तभी एक छोटा-सा ब्राह्मण बालक वहाँ आया, इतना तेजस्वी कि सबको लगा जैसे सूरज उग आया हो।

बलि ने बड़े आदर से उसके पाँव धोए और कहा, "जो चाहो माँग लो, गाय, सोना, घर, गाँव, हाथी, जो भी चाहिए।" और बालक ने कहा, "मुझे बस तीन क़दम ज़मीन चाहिए, अपने पैरों से नापकर।" बलि हँस पड़े, बोले, "तुम बालक हो, भोले हो, मैं तुम्हें पूरा द्वीप दे सकता हूँ, और तुम बस तीन क़दम माँगते हो?" पर बालक ने इससे ज़्यादा कुछ नहीं माँगा।

तभी बलि के गुरु शुक्राचार्य ने उन्हें रोका और कहा, "ये कोई बालक नहीं है, ये स्वयं विष्णु हैं, और तीन क़दमों में ये सारे लोक नाप लेंगे। सब कुछ दे दोगे तो फिर जिओगे कैसे?" बलि कुछ पल चुप रहे। आप सोचिए, सामने गुरु की चेतावनी है, और दाँव पर सब कुछ है। पर फिर भी वो अपने वचन से नहीं हटे, और उन्होंने जल छोड़कर वो ज़मीन दान कर दी।

और तब वो छोटा बालक बढ़ने लगा, इतना बढ़ा कि धरती, आकाश, दिशाएँ, समुद्र, सब उसके भीतर समा गए। एक क़दम में उसने पृथ्वी नाप ली, दूसरे में स्वर्ग, और तीसरे क़दम के लिए कुछ बचा ही नहीं। तब बलि ने हाथ जोड़कर कहा, "मेरा वचन झूठा न हो, अपना तीसरा क़दम मेरे सिर पर रख दीजिए।"

तो जिस सवाल से हमने आज शुरू किया था, कि वादा निभाना महँगा पड़ रहा है, उसका जवाब बलि की कहानी में है। बलि ने सब कुछ दे दिया, पर अपना वचन नहीं तोड़ा। और भगवान ने ख़ुद उनके बारे में कहा कि इसका सब कुछ छिन गया, गुरु ने भी शाप दिया, फिर भी इसने सत्य नहीं छोड़ा। और फिर बलि से कहा, "तुम मुझे सदा अपने पास देखोगे।" यानी जिसने सब खोया, उसे भगवान का साथ मिला।

इसी श्लोक में और नाम भी हैं। अमोघ, यानी जिनका कोई काम व्यर्थ नहीं जाता, शुचि, यानी पवित्र, ऊर्जित, यानी बलवान, और अतीन्द्र, यानी जो इन्द्र से भी ऊपर हैं। और आख़िर में पाँच नाम, सङ्ग्रह, सर्ग, धृतात्मा, नियम और यम, यानी जो सबको समेटते हैं, जो सृष्टि रचते हैं, जिनका मन अटल है, और जो सबको अनुशासन में रखते हैं।

और आज के लिए एक छोटी-सी बात। कोई एक छोटा-सा वादा, जो बहुत दिनों से टलता आ रहा है, किसी को फ़ोन करना है, कोई चीज़ लौटानी है, आज उसे निभा दीजिए, और मन में कहिए, वामन।

और रोज़ की तरह, आज का श्लोक एक बार गाइए, हो सके तो पूरा सहस्रनाम भी सुनिए, और कमेंट में लिख दीजिए कि आपने गाया, या सुना।

कल हम अठारहवें श्लोक पर आएँगे। अगर घर में कोई बीमार है, दवाइयाँ चल रही हैं, अस्पताल के चक्कर लग रहे हैं, तो कल का नाम ख़ास आपके लिए है, क्योंकि वो बताएगा कि भगवान ख़ुद एक वैद्य हैं।

वामन, यानी वो जो छोटा बनकर आया, और सब कुछ नाप गया। जय श्री कृष्ण। अब ये श्लोक मेरे साथ गाइए।

उपेन्द्रो वामनः प्रांशुरमोघः शुचिरूर्जितः । अतीन्द्रः सङ्ग्रहः सर्गो धृतात्मा नियमो यमः ॥ १७॥

आज घर ले जाने के लिए

  1. 1.वामन छोटे दिखे… पर उनके तीन क़दमों में ब्रह्माण्ड समा गया।
  2. 2.बलि ने सब दिया, पर अपना वचन नहीं तोड़ा।
  3. 3.जो सच पर टिका रहता है… भगवान उसके पास रहते हैं।