विष्णु सहस्रनाम · 108 दिन · दिन 13 / 108 · तेरहवें श्लोक के नौ नाम
रोने पर शर्म आती है?
आँसू भी पूजा हैं
Today’s talk is being recorded — the verse and the whole talk are below to read.
रुद्रो बहुशिरा बभ्रुर्विश्वयोनिः शुचिश्रवाः । अमृतः शाश्वतस्थाणुर्वरारोहो महातपाः ॥ १३॥
रुद्र, बहुशिरा, बभ्रु, विश्वयोनि, शुचिश्रवा; अमृत, शाश्वतस्थाणु, वरारोह, महातपा।
आज की साधना
- 1. आज का सत्संग सुनें।
- 2. आज का श्लोक एक बार ख़ुद गाइए।
- 3. मन हो तो — पूरा पाठ, गाया हुआ (52 मिनट) — बैठकर, आँखें बंद करके।
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आज का सत्संग, पढ़कर
रोना आता है… और फिर शर्म आती है कि रोए क्यों?
कल हमने कहा था — आज एक ऐसा नाम आएगा जो आँसुओं से जुड़ा है। वो नाम… तेरहवें श्लोक का पहला ही नाम है। पहले… ज़रा गाकर सुनाता हूँ।
रुद्रो बहुशिरा बभ्रुर्विश्वयोनिः शुचिश्रवाः ।
अमृतः शाश्वतस्थाणुर्वरारोहो महातपाः ॥ १३॥
जय श्री कृष्ण। विष्णु सहस्रनाम… एक सौ आठ दिन की यात्रा। आज तेरहवाँ दिन। आज के नौ नाम।
पहले कल का हाल — कल किसी अनदेखे से दो मीठे बोल बोले? मन में समः कहा? श्लोक एक बार गाया? तो आज आपकी माला में… तेरहवाँ मनका।
और आज का पहला नाम ही वो है… जिसका कल वादा किया था — रुद्र। रुद्र के दो अर्थ बताए जाते हैं। एक — जो रुलाते हैं। और दूसरा — जो दुःख को भगा देते हैं।
पर ये नाम पड़ा कैसे? भागवत में इसकी कहानी है।
सृष्टि की शुरुआत में ब्रह्मा जी को एक बार बहुत क्रोध आया। उन्होंने उस क्रोध को रोकने की कोशिश की… पर वो रुका नहीं। और उनकी भौंहों के बीच से… एक बालक प्रकट हुआ। नीले और लाल रंग का।
और वो बालक… रोने लगा। रोते-रोते बोला — "मुझे मेरा नाम बताइए… मुझे रहने की जगह बताइए।"
ब्रह्मा जी ने बड़े प्यार से कहा — "मत रोओ। मैं तुम्हारे लिए ये सब करता हूँ।" "तुम एक व्याकुल बालक की तरह रोए… इसलिए लोग तुम्हें रुद्र कहेंगे।"
और रहने की जगह? ब्रह्मा ने कहा — हृदय, इन्द्रियाँ, प्राण, आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, सूर्य, चन्द्रमा… और तप। यानी रुद्र का एक घर… आपका हृदय भी है।
सोचिए। एक ऐसा नाम… जो रोने से पड़ा। और वही नाम… आज विष्णु के हज़ार नामों में है।
तो जिस शर्म से हमने शुरू किया था — कि रोए क्यों? रोना कमज़ोरी नहीं है। जिस नाम को हम पूजते हैं… उसकी शुरुआत ही आँसुओं से हुई। और वही नाम… दुःख भगाता भी है।
अब इसी श्लोक के बाक़ी नाम। बहुशिरा — जिनके अनगिनत सिर हैं। बभ्रु — भूरे-सुनहरे रंग वाले। विश्वयोनि — जिनसे पूरा विश्व जन्मा है।
फिर — शुचिश्रवा। जिनका यश ही पवित्र है। और अमृत — जो कभी नहीं मरते।
और फिर एक नाम… जो याद दिलाता है चौथे दिन की बात — शाश्वतस्थाणु। हमेशा का अचल खम्भा।
और आख़िरी दो — वरारोह और महातपा। वरारोह — सबसे ऊँचे पहुँचे हुए। और महातपा — जिनका तप सबसे बड़ा है।
तो आज घर ले जाने के लिए… तीन बातें।
पहली — रुद्र नाम रोने से पड़ा। आँसू भी पूजा में शामिल हैं।
दूसरी — जो रुलाते हैं… वही दुःख को भगाते भी हैं।
तीसरी — रोते बच्चे से ब्रह्मा ने कहा था — मत रोओ, मैं हूँ। आप भी अकेले नहीं हैं।
और आज के लिए एक छोटी-सी बात। आज अगर आँखें भर आएँ… तो उन्हें रोकिए मत। फिर धीरे से आँसू पोंछिए… और मन में कहिए — रुद्र।
और रोज़ की तरह — आज का श्लोक एक बार गाइए, और हो सके तो पूरा सहस्रनाम सुनिए। कमेंट में लिखिए — गाया… या सुना।
कल — चौदहवाँ श्लोक। एक माँ ने अपने छोटे-से बच्चे का मुँह खोलकर देखा… और उसमें पूरा ब्रह्माण्ड दिखा। कौन-सी कहानी? कौन-सा नाम? कल।
रुद्र… आँसू भी उसके हैं।
जय श्री कृष्ण। अब ये श्लोक… मेरे साथ गाइए।
रुद्रो बहुशिरा बभ्रुर्विश्वयोनिः शुचिश्रवाः ।
अमृतः शाश्वतस्थाणुर्वरारोहो महातपाः ॥ १३॥
आज घर ले जाने के लिए
- 1.रुद्र नाम रोने से पड़ा। आँसू भी पूजा में शामिल हैं।
- 2.जो रुलाते हैं… वही दुःख को भगाते भी हैं।
- 3.रोते बच्चे से ब्रह्मा ने कहा था — मत रोओ, मैं हूँ। आप भी अकेले नहीं हैं।