तांत्रिक बंधन में बँधे कुलदेवी-देवता को मुक्त कैसे करें

बँधे हुए कुल देवता को पहचानने और मुक्त करने का मार्गदर्शन।

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The notes
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01

घर के देवता बंधन में हों तो परिवार की पूजा का क्या होता है

नकारात्मक ऊर्जा पूजा खा जाती है; जितनी पूजा, उतनी परेशानी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–00:48

वक्ता वह स्थिति सामने रखते हैं जहाँ घर में पूजित देवी-देवताओं को किसी मंत्र विद्या, किसी सिद्धि, किसी वचन या किसी लाग के द्वारा बाँध दिया गया हो, और पूछते हैं कि तब उस परिवार को सेवा-पूजा कैसे करनी चाहिए। बंधित देव शक्ति, वे कहते हैं, कभी ठीक से कृपा नहीं कर पाती। बंधन के बाद वहाँ जो भी नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है, वह आपकी पूजा स्वयं ग्रहण कर लेती है, आपका पूजन-पाठ फलीभूत होना बंद हो जाता है, और उल्टा परेशानी शुरू हो जाती है। व्यक्ति तब सोचता है कि पूजन-पाठ व्यर्थ है: जितनी पूजा करता है, उतनी ही विपरीत परिस्थिति बनती है।

02

देवता बाँधे जा सकते हैं, इसके पौराणिक प्रमाण: मेघनाद द्वारा हनुमान, मल्ल-मणि द्वारा महाकाली

शिव को मार्तंड भैरव अवतार क्यों लेना पड़ा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:07–01:29

जो लोग इस बात पर हँसते हैं कि देवी-देवता को भला कोई कैसे बाँध सकता है, उन्हें वक्ता पौराणिक आख्यानों से उत्तर देते हैं: देखिए हनुमान जी को मेघनाद ने कैसे बंधन में बाँधा था, और भगवती महाकाली को मल्ल और मणि नामक तांत्रिकों ने कैसे अपने यंत्र में कैद करके बंधन में डाल दिया था — जिस कारण भगवान शिव को मार्तंड भैरव का, अघोर स्वरूप का अवतार लेना पड़ा। इन्हीं चरित्रों जैसा कुछ, वे कहते हैं, कलिकाल में भी उन देव शक्तियों और अंशात्मक योगिनियों के साथ चलता है जो कुल में उपस्थित होकर परिवार के पालन-पोषण और रक्षण का दायित्व निभाती हैं।

03

कुल देवता कैसे बाँधे जाते हैं: रस्सी से नहीं, मंत्र से दी गई सौगंध से

द्वेषी साधक अपनी सिद्ध शक्ति को आगे कर दुहाई देता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:30–03:00

वक्ता कहते हैं कि जिस व्यक्ति ने किसी शक्ति को सिद्ध किया है, वचन में लिया है, वह दूसरी शक्ति को उसी प्रकार के वचन और दुहाई से बाँध सकता है जैसी सबर मंत्र में दी जाती है। बंधने का अर्थ रस्सी से बाँधना नहीं: कुछ ऐसे मंत्र हैं जिनका प्रयोग करके सौगंध दे दी जाती है और देवता रुक जाते हैं। उदाहरण: यदि हनुमान जी कुल के देवता हैं तो उन्हें राम जी की शपथ दे दी जाती है — bajrang-baan में भी शपथ दी जाती है, "आपको शपथ है कि हमारा कार्य सिद्ध करें"। कोई साधक जो स्वयं हनुमान जी की सेवा करता हो, बहुत जप-तप कर चुका हो, हनुमान जी के किसी वीरगण की या किसी और देवता की सिद्धि कर चुका हो, और आपसे द्वेष रखता हो, उन्हें आगे करके अपने वचन, मंत्र और सेवा-पूजा से आपके घर की दिव्य ऊर्जाओं को रोक लगा देता है: "इस परिवार की बातों पर ध्यान न दें, न सुनें, जब तक हम मुक्त न कर दें"। इस तरह देवी-देवता सामान्य तरीके से वचन में बंधित हो जाते हैं। उपदेव श्रेणी की शक्तियों के लिए, वे जोड़ते हैं, विषय अलग है और उस पर अलग वीडियो है।

04

बंधित देवता का पहला उपाय: सहायक शक्ति की शरण, बंधित देवी के लिए भैरव

निकट सिद्ध पीठ के भैरव, फिर वही घर पर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:01–04:16

जैसे ही पता चले या अनुभूति हो कि देवी-देवता बंधन में हैं, वक्ता कहते हैं, सबसे पहला कार्य यह है कि उस देवता की सहायक शक्ति — सहायक शक्तियों — की शरणागति लें। यदि घर में देवी पूजित हैं — भगवती का कोई भी स्वरूप, कोई अंशात्मक योगिनी, कोई devi-tattva — तो भैरव जी की शरण लें, उनका अनुष्ठान करें, उनका आवाहन करें। परिस्थिति बहुत विपरीत हो तो अपने पास के जिस भी सिद्ध पीठ के भैरव हों उनका अनुष्ठान करें: कोलकाता में, जहाँ कालीघाट में भगवती काली विराजित हैं, वहाँ के भैरव नकुलेश्वर भैरव हैं। वहाँ जाकर भैरव स्तोत्र, शतनाम, कवच का पाठ और उनके निमित्त दीपदान करके प्रार्थना करें। कुछ समय वहाँ करने के बाद यही प्रक्रिया घर पर भी करें, तो बंधन टूटेगा।

05

बंधित हनुमान जी को राम के माध्यम से मुक्त करना: जप, राम रक्षा स्तोत्र, रामचरितमानस और हवन

हनुमान राम की सुनते हैं; राम की दुहाई ही उपाय

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:17–04:37

यदि हनुमान जी पूजित हैं और बाँध दिए गए हैं, वक्ता कहते हैं, तो उपाय राम जी के माध्यम से बनता है, क्योंकि हनुमान जी राम जी की सुनते हैं और राम जी की दुहाई से ही वहाँ विषय बनेगा। भगवान श्री रामचंद्र जी महाराज का नाम जप करें, उनके निमित्त राम रक्षा स्तोत्र आदि का पाठ करें, रामायण जी और रामचरितमानस जी का पाठ करें, और कुछ चौपाइयों और मंत्रों का हवन आदि करें, जिससे श्री राम जी प्रसन्न होकर बंधन से मुक्त करें।

06

देवता का बंधन और शरीर (सवारी) का बंधन दो अलग विषय हैं

केवल सच्ची सवारी — आज 95 प्रतिशत नौटंकी है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:38–05:14

वक्ता दो स्थितियाँ अलग करते हैं। एक वह जहाँ किसी के शरीर पर बंधन किया गया हो — ऐसा व्यक्ति जिस पर पहले किसी देवता की शुभ शक्ति की, बिल्कुल यथार्थ शक्ति की सवारी आती थी, और उसे बाँध दिया गया। दूसरी वह जहाँ देवता को ही बाँधकर रोका गया है। दोनों अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं और दोनों का विषय अलग है; यह वीडियो, वे कहते हैं, केवल देवताओं के बंधन पर है। वे जोड़ते हैं कि यहाँ किसी भूत-प्रेत या किसी नौटंकी की बात नहीं हो रही — यह सर्वविदित है कि आज के समय में 95 प्रतिशत लोग नौटंकी ही करते हैं।

07

कम से कम एक मंडल: बंधित देवता और सहायक देवता की 41 दिन संयुक्त पूजा

परेशानी बहुत हो तो संकल्प लेकर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:15–05:37

यदि बहुत ज्यादा परेशानी रहती हो, वक्ता कहते हैं, तो व्यक्ति को कम से कम एक मंडल की पूजा करनी चाहिए, उसका संकल्प लेकर; एक मंडल का अर्थ है कम से कम 41 दिन। इसमें आपकी जो भी शक्तियाँ हैं — आपके घर के जो भी देवी-देवता हैं — और जिनकी आप सहायता ले रहे हैं, उन दोनों की संयुक्त पूजा करेंगे।

08

शिव की शपथ से रुके प्रचंड कुल देवता: रुद्राभिषेक और 14 दिन बिल्व हवन

साक्षात वीरभद्र-भद्रकाली भी भक्त के वचन की मर्यादा रखते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:38–07:04

ऐसे परिवार का उदाहरण लेकर जिसके कुल देवी-देवता सोखा बाबा और बन्नी माता हैं, वक्ता कहते हैं कि लोग ऑफेंडेड हो जाते हैं — उन्हें भला कौन बाँध सकता है? — पर पुनः पुनः कहते हैं कि शिव जी की शपथ और दुहाई से ये दोनों शक्तियाँ भी रुकेंगी। यदि लगे कि आपके कुल देवताओं में जो प्रचंड शक्तियाँ हैं — साक्षात वीरभद्र, भद्रकाली — उन्हें भी कोई रोक रहा है, तो इसलिए कि वे भक्तों के वचन की मर्यादा रखती हैं: किसी ने लाग लगाकर कह दिया "प्रभु, आप मत सुनें", तो वे नहीं सुनेंगी। तब महादेव की शरणागति लें: रुद्राभिषेक करें, या द्वादश ज्योतिर्लिंग के नामों से अभिषेक, और महादेव के अष्टोत्तर शतनाम, तत्पुरुष मंत्र, या यज्ञोपवीत धारण करते हों तो गायत्री के साथ शिव के वैदिक मंत्रों से — जो बन पड़े — बिल्व की समिधा पर घी और तिल की आहुति प्रतिपदा से चतुर्दशी तक, 14 दिन, प्रतिदिन कम से कम 108 आहुति। ऐसे देवता बंधन से खुल जाएँगे; किसी पर सवारी आती थी तो फिर आएगी; और बंधन का संकेत मिला था तो पुनः संकेत मिलेगा कि वे मुक्त हो चुके हैं, और परिवार का कल्याण होगा।

09

देवता बँधने के बाद प्रेत-पिशाच उत्पात: अपामार्ग पर बजरंग बाण और महाभैरव हवन

उस स्थान पर हवनात्मक प्रयोग ही; जानकार उत्तम पर अनिवार्य नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:05–08:06

यदि बंधन के बाद घर में पैशाचिक बाधा उपस्थित कर दी गई हो — जहाँ घर के देवी-देवता थे वहाँ प्रेत-पिशाच तांडव मचा रहे हों — तो वक्ता कहते हैं कि उसी स्थान पर हवनात्मक प्रयोग ही करना चाहिए। bajrang-baan का नित्य पाठ करें; 21 पाठ करते हों तो कम से कम 3 पाठ से अपामार्ग की लकड़ी पर हवन करें। भैरव जी का पाठ करते हों तो महाभैरव सबसे अकाट्य है: कम से कम 5 पाठ करें और 1 पाठ से शाम के समय हवन करें। इन सबका — हनुमान चालीसा सहित — हवन करने पर यह बंधन भी कटेगा और भूत-प्रेत बाधा भी हटेगी; साथ में क्षेत्रपाल निकाय आदि का प्रयोग करें। जानकार का सहयोग अति उत्तम है, पर वे कहते हैं कि आज लोग प्रायः जानकार से संतुष्ट नहीं होते, और आप स्वयं यह प्रयोग करके कुल देवता को मुक्त कर अपनी पूजा उन तक पहुँचा सकते हैं। यही, वे कहते हैं, सरल विधान है।

10

सावधानी: देवता बाँधने-खोलने के सीधे मंत्र भगतवाल का विषय हैं, जानकार के बिना प्रयोग न करें

अपने ही देवता बँध सकते हैं, या बँधा प्रेत खुल सकता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:07–09:06

सरल विधान के सिवाय, वक्ता कहते हैं, बहुत से ऐसे मंत्रोक्त विधान भी हैं जिनमें सीधे मंत्र चलाया जाता है और बंधित देवता खुल जाते हैं, और ऐसे मंत्र भी हैं जिनसे देवताओं को बाँधा जाता है — पर यह भगतवाल का विषय है, और उनके अनुसार आप YouTube-Facebook पर ये मंत्र देख भी लें, जान भी लें, तब भी बिना किसी जानकार व्यक्ति के सान्निध्य में रहे इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए। नहीं तो गलती से भी आपके अपने देवता, आपके आराध्य से जुड़ी शक्तियाँ बंधित हो गईं तो वे आपको नाच नचा देंगी, मानेंगी भी नहीं, परेशान करके रख देंगी — और जो दोष लगेगा वह अलग। और बंधन खोलने में हो सकता है पता चले कि कोई प्रेत-पिशाच बंधन में था और आपकी विधि से वह भी खुल गया; जानकारी न हो तो उसमें दिक्कत हो जाएगी। इसलिए सीधे मंत्रों के बजाय ऐसे मंत्रों का प्रयोग करें जिनसे कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े: महाभैरव आदि, या हनुमान चालीसा, bajrang-baan, काली चालीसा, दुर्गा चालीसा।

11

बंधन खोलने वाला हवन: अपामार्ग की लकड़ी, गोबर के उपले, सरसों और लाल गुंजा, 41 दिन

बलि से बँधा बंधन भी टूटता है; बची बलि स्वप्न में बताई जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:07–09:33

वक्ता कहते हैं कि सुरक्षित मार्ग — महाभैरव, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, काली चालीसा या दुर्गा चालीसा — का प्रयोग अपामार्ग की लकड़ी पर हवन के रूप में करें: अपामार्ग की लकड़ी, गाय के गोबर के उपले, साथ में सरसों और लाल गुंजा; इन्हें मिलाकर आहुति देंगे तो बंधन आदि खुलेगा। 41 दिन एक मंडल कर लें तो, वे कहते हैं, ऐसा हो ही नहीं सकता कि बंधन न टूटे, चाहे कितनी भी बलि आदि देकर बाँधा गया हो। और यदि बलि का लाग नहीं छूट रहा हो तो स्वप्न आदि के माध्यम से बार-बार आदेश हो जाएगा कि इस जगह, इस स्थान पर जाकर यह बलि चढ़ा दें — तो वह बंधन भी कट जाएगा।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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