श्री सांब शिवाय नमः — गृहस्थों के लिए बिना दीक्षा का भवानी-शिव मंत्र, महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि का विधान

एक शिव-शक्ति मंत्र जिसे वक्ता के अनुसार कोई भी गृहस्थ बिना दीक्षा के जप सकता है — श्री सांब शिवाय नमः — उसके सरल महाशिवरात्रि और दैनिक विधान, जप संख्या, अभिषेक के विवरण और संकल्प के साथ।

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01

क्या गृहस्थ बिना दीक्षा के शिव मंत्र का जप कर सकता है?

पंचाक्षरी के संशय, और उनसे मुक्त एक मंत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:03–01:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान सदाशिव की पूजा-उपासना के बिना गृहस्थ जीवन कभी पूर्ण हो ही नहीं सकता, फिर भी लोग अनेक स्रोतों से सुनते हैं कि बिना दीक्षा के उनके वैदिक या पौराणिक मंत्रों का जप नहीं कर सकते, और पंचाक्षरी मंत्र को लेकर भी उलझे रहते हैं — पवित्रता की आपत्ति, "गुप्त गायत्री" का दावा, प्रणव के अधिकार का संशय, यह मत कि स्त्रियाँ न करें, वे महात्मा जो इसलिए मना करते हैं कि नमः पहले लगा है — और अंत में जिसकी सुनी उसी के अनुसार जप करते या नहीं करते। वे एक ऐसा मंत्र देते हैं जिस पर कहीं कोई रोक-टोक नहीं, जिसे महाशिवरात्रि पर, मासिक शिवरात्रि पर या जीवन भर बिना शंका जपा जा सकता है, जिसमें महादेव, गौरी और लक्ष्मी का स्वरूप तीनों का वास है, और जिसके लिए किसी दीक्षा की आवश्यकता नहीं।

02

श्री सांब शिवाय नमः मंत्र का अर्थ

सादा श्री, लक्ष्मी बीज नहीं; अंबा सहित शिव

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:56–02:47

सदाशिव की उपासना का मंत्र, जैसा ट्रांसक्रिप्ट में है, "श्री सांब शिवाय नमः" है। वक्ता बल देते हैं कि इसमें श्री सादा शब्द है — न अनुस्वार की मात्रा, न मकार, इसलिए यह बीज नहीं है — यह लक्ष्मी का प्रतीक है, पूर्ण लक्ष्मी बीज नहीं; सांब का अर्थ है अंबा सहित, यानी भगवती पार्वती का साथ, इसलिए यह मंत्र पार्वती और शिव दोनों को एक साथ नमस्कार है, जिसके साथ श्री जुड़ा है।

03

श्री सांब शिवाय नमः जप का अधिकार, अजपा जप सहित

हर आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति या वर्ण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:48–03:28

वक्ता कहते हैं कि प्रत्येक गृहस्थ — बालक हो या वृद्ध, स्त्री हो या पुरुष, विवाहित हो या अविवाहित, हर वर्ण का व्यक्ति — इस मंत्र का जप कभी भी बिना संकोच, बिना शक और बिना भय के कर सकता है। जिन लोगों ने अजपा जप की शिक्षा के बाद पूछा था कि सदाशिव के किस मंत्र का जप करें क्योंकि नाम जप से मन नहीं भरता, उनसे वे कहते हैं: इसी मंत्र का जप कीजिए, और इसका अजपा जप भी किया जा सकता है।

04

श्री सांब शिवाय नमः का महाशिवरात्रि अनुष्ठान: समय और दैनिक संख्या

नौ दिन पहले की चतुर्थी से; रोज़ 125 या कम से कम 11 माला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:10–04:51

वक्ता कहते हैं कि इस मंत्र का प्रभाव अति तीव्र और अति शीघ्र है। इसे महाशिवरात्रि (फरवरी-मार्च) पर सिद्ध करना हो तो: महाशिवरात्रि से नौ दिन पहले चतुर्थी तिथि से महादेव का नवरात्र शुरू होता है, और महाशिवरात्रि स्वयं त्रयोदशी-चतुर्दशी के संयोग में लगती है; नौ-दस दिन पहले की वह चतुर्थी देखकर उसी दिन से जप आरंभ करें। यदि इतनी देर बैठ सकें कि दस दिनों में सवा लाख पूरा हो जाए तो प्रतिदिन 125 माला (12,500 जप) करें; नहीं तो चतुर्थी से चतुर्दशी के भीतर कम से कम पूरी 108 माला, यानी रोज़ कम से कम 11। सामर्थ्य के अनुसार 11, 21, 27, 108 या 125 माला प्रतिदिन चुनें और दस दिन में पूरा करें।

05

श्री सांब शिवाय नमः जप की माला: संस्कारित पंचमुखी रुद्राक्ष, कभी न बदलें

पीली गोमुखी में, जीवन भर एक ही माला

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:52–05:43

वक्ता कहते हैं कि इस जप के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष की माला सर्वश्रेष्ठ है, जो आसानी से मिल जाती है। वह संस्कारित होनी चाहिए — माला स्वयं कैसे संस्कारित करें, यह उन्होंने अलग से बताया है — पीली गोमुखी में रखी जाए, और एक बार बढ़िया माला ली जाए, क्योंकि एक बार लेने के बाद माला कभी बदलनी नहीं है; सदा वही माला प्रयोग में लानी है।

06

श्री सांब शिवाय नमः जप के वस्त्र, आसन, दिशा और स्थान

न विनियोग, न न्यास, न यंत्र; सरल पर तीव्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:44–06:40

वक्ता कहते हैं कि वस्त्र पीला या सफेद रख सकते हैं; आसन पीला, सफेद, कुश या कंबल का; मुख पूर्व, उत्तर या पश्चिम की ओर, पर दक्षिण की ओर कभी नहीं; घर में या, और भी उत्तम, सदाशिव के मंदिर में। विनियोग-न्यास की बिल्कुल आवश्यकता नहीं, न किसी यंत्र की — सदाशिव का जो भी ध्यान मंत्र प्रिय हो, उसके बाद सीधे सदाशिव की फोटो के सामने जप आरंभ कर दें। विधान सरलतम है, फिर भी जितना सरल उतना ही तीव्र, क्योंकि इसमें शिव-शक्ति का सायुज्य है और दोनों का आवाहन हो रहा है।

07

श्री सांब शिवाय अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन मंदिर में जलाभिषेक

लोटे में रुद्राक्ष, मिश्री, केसर; दीपक, नैवेद्य, आरती; केसर का नियम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:27–10:13

वक्ता कहते हैं कि पहले दिन से महाशिवरात्रि तक प्रतिदिन, घर में जप के बाद, सदाशिव के मंदिर जाकर जलाभिषेक करें, और एक छोटे से काम से मंत्र और भी तीव्र हो जाता है और जन्म-जन्मांतर तक कृपा मिलती है: जल के लोटे में एक अलग पंचमुखी रुद्राक्ष का दाना, गोटा मिश्री का टुकड़ा फोड़कर और चार-पाँच केसर के टुकड़े — केवल ये तीन। मंदिर में: पहले दीपक (शिव जी के लिए एक, या शिव परिवार के लिए पाँच) बत्तियाँ जोड़े में; फिर इसी मंत्र का जप करते हुए जल चढ़ाकर अभिषेक; फिर पुष्प, बेलपत्र या शमी; किशमिश का नैवेद्य शिवलिंग के पास, ऊपर नहीं; कपूर की आरती; लोटा औंधा रखकर अंत में ही उठाएँ। जो केसर जलहरी पर रुके वह अपने मस्तक पर — स्त्री हो या पुरुष — शिवलिंग के ऊपर से कभी नहीं; लोटे में बची केसर शिव जी पर ही रख दें। शिवरात्रि पर बेलपत्र, शमी, आक का फूल और फल भी चढ़ाएँ।

08

महाशिवरात्रि के बाद: जीवन भर नित्य जप और मंत्र का अजपा जप

शिव-पार्वती विवाह में सहयोग, फिर मंत्र शरीर-प्राण में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:14–11:06

महाशिवरात्रि पूर्ण होने पर, वक्ता कहते हैं, जिस भी मंदिर में शिव-पार्वती विवाह हो रहा हो वहाँ कुछ सहयोग अवश्य करें। अगले दिन से प्रतिदिन यथाशक्ति माला से जप करें — पाँच माला या 21 — नियम से जीवन भर। माला जप तो करना ही है, पर उसके सिवाय चलते-फिरते और सोते समय भी इस मंत्र का अजपा जप कर सकते हैं, मंत्र को अपने शरीर, जीवन, मन और प्राण में बैठा लें; इन दो मंत्रों में, वे कहते हैं, पूरा जीवन निकल जाएगा और जो चाहिए वह मिल जाएगा, यदि इतना नियम-निष्ठा से किया जाए।

09

महाशिवरात्रि के अलावा श्री सांब शिवाय अनुष्ठान: आरंभ दिन और न्यूनतम संख्या

मासिक शिवरात्रि, श्रावण या सोमवार/शुक्रवार; पहला अनुष्ठान 27,000; हवन नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:07–12:23

वक्ता कहते हैं कि महाशिवरात्रि के अलावा मासिक शिवरात्रि से संकल्प ले सकते हैं, जो कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी-चतुर्दशी के मध्य लगती है (तिथि पंडित जी से देख लें), या श्रावण के महीने में किसी भी शुभ समय, या किसी सोमवार या शुक्रवार को अच्छे मुहूर्त से, और ठीक इसी प्रकार करें। कितने दिन और प्रतिदिन कितना, यह अपनी इच्छा — पाँच दिन में 100 या 11 माला, 51,000, 21,000 या 27,000 का संकल्प — पर पहला अनुष्ठान कम से कम 27,000 का होना चाहिए, 27 नक्षत्रों के लिए एक-एक हज़ार, और हवन की आवश्यकता नहीं। एक शिवरात्रि से अगली शिवरात्रि तक, पूरा एक महीना सामर्थ्य अनुसार 108, 100 या 27 माला प्रतिदिन, अति उत्तम है।

10

एक निश्चित समय पर तीन महीने का मंत्र जप हर विपदा टाल देता है

रोज़ वही समय, कोई और मंत्र नहीं, पूरे जप में दीपक जलता रहे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:24–13:15

वक्ता कहते हैं कि यदि तीन महीने लगातार प्रतिदिन 27, 100 या 108 माला मंत्र जप कर लें तो कितनी भी बड़ी विपदा-विपत्ति क्यों न हो, वह टल जाती है — बशर्ते समय एक ही रहे: भोर में 4 बजे शुरू किया तो तीनों महीने 4 बजे ही; रात्रि में भी ठीक है, 8 या 9 बजे, पर समय बदलना नहीं। साथ में कोई और मंत्र नहीं करना; मंत्र जप केवल यही होना चाहिए। सदाशिव और पार्वती की — फोटो, विग्रह या शिवलिंग — पूजा करके जब तक जप चले तब तक घी, सरसों या तिल तेल का दीपक जलता रहे।

11

श्री सांब शिवाय जप का संकल्प और उसमें यथाशक्ति क्यों

फूल, अक्षत या जल; संख्या शिव और भगवती पर छोड़ें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:16–14:18

संकल्प अवश्य लेना चाहिए, वक्ता कहते हैं, सामान्य रूप से भी: हाथ में फूल, अक्षत या केवल जल लेकर कहें कि माँ भगवती पार्वती और भगवान सदाशिव की परम कृपा की प्राप्ति और अपनी सभी भौतिक कामनाओं की पूर्ति हेतु मैं यथाशक्ति सदाशिव व पार्वती के इस मंत्र का जप करने का संकल्प लेता/लेती हूँ। यथाशक्ति इसलिए, वे समझाते हैं, कि नया साधक 100 माला का संकल्प ले ले और 50 पर ही हालत खराब हो जाए — परीक्षा तो होती है — फिर दुविधा हो कि करें या न करें; यथाशक्ति से 50 पर भी समर्पण किया जा सकता है। जैसे-जैसे शिव और जगदंबा में भक्ति-समर्पण बढ़ेगा, वे सामर्थ्य भी बढ़ाएँगे; भगवती और सदाशिव से कहें कि जप पूर्ण करवाइए, तो वे बल अवश्य देंगे।

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मंत्र के पाँच सवा-लाख अनुष्ठान: शिव के अस्त्र मंत्र का द्वार

साधक को अस्त्र मंत्र करना चाहिए; कब कर सकता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:40–15:20

वक्ता कहते हैं कि जो इस मंत्र का सवा लाख जप पाँच बार कर लें — सवा-सवा लाख के पाँच अनुष्ठान — वे उसके बाद सदाशिव के किसी भी एक अस्त्र मंत्र मंत्र का अनुष्ठान कर सकते हैं, क्योंकि एक साधक को अस्त्र मंत्र अवश्य करना चाहिए। ऐसा व्यक्ति, चाहे कितने भी समय बाद — छह महीने या साल भर बाद — उनसे संपर्क करके अनुष्ठान पूर्ण होने की सूचना दे तो मार्गदर्शन किया जाएगा; अस्त्र का विधान वे यहाँ नहीं देते।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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