शमशानी तंत्र (अभिचार) के लक्षण कैसे पहचानें

अभिचार कर्म के तेरह लक्षणों पर एक निदानात्मक शिक्षण।

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01

अभिचार कर्म क्या है?

प्रक्षेपित शक्तियाँ, जिनका कोई इलाज नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–00:37 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि अभिचार कर्म का अर्थ है किसी व्यक्ति के शरीर या परिवार पर नकारात्मक शक्तियों का प्रक्षेपण हो चुका है, जिससे कोई बड़ा व्यवधान खड़ा हो रहा है और उसका न कोई इलाज मिलता है, न कोई समाधान। वे कहते हैं कि लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं; एक जैसा अनुभव और एक जैसी संभावनाएँ सबके साथ नहीं होतीं।

02

पर्व काल में अचानक तबीयत बिगड़ना: नए अभिचार का संकेत

ताकि पूजा-पाठ न हो सके

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:38–01:13

वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल नए अभिचार का सबसे पहला लक्षण यह है कि तबीयत एकाएक खराब होने लगती है, और विशेष रूप से पर्व काल यानी पर्व के समय। वे होली, होलिका दहन, दीपावली और दुर्गा पूजा का नाम लेते हैं: जब भी पर्व आएगा, ठीक उसी समय शरीर में दिक्कत बहुत बढ़ जाएगी। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण, उनके अनुसार, यह है कि व्यक्ति पूजा-पाठ न कर पाए; उसी समय उसे सबसे अधिक कष्ट होता है।

03

पूजा के समय कलह और मांगलिक कार्यों में अड़चनें: अभिचार के संकेत

शक्तियाँ सकारात्मक ऊर्जा रोकती हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:14–01:53

वक्ता कहते हैं कि तंत्र हो जाने पर पूजन-पाठ के समय ही परिवार में सबसे अधिक कलह-क्लेश होता है, और पर्व काल में अत्यंत भयानक मारपीट तक होने लगती है। कारण, वे बताते हैं, यह है कि प्रक्षेपित शक्तियाँ नहीं चाहतीं कि आप पूजन से ऐसी सकारात्मक ऊर्जाएँ बढ़ाएँ जिससे उनका काम रुक जाए और उन्हें आपको छोड़कर जाना पड़े। वे जोड़ते हैं कि घर में कोई मांगलिक कार्य होने वाला हो तो बहुत अड़चनें आती हैं, और किसी तरह हो भी जाए तो उस कार्य के कारण घर में परेशानी और बढ़ जाती है; आरंभ में ये सारी दिक्कतें काफी तेज़ी से होती हैं।

04

अमावस्या और पूर्णिमा पर बीमारी, जो तिथि बीतते ही उतर जाती है

चंद्र तिथि से बँधा लक्षण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:54–02:03

वक्ता कहते हैं कि अभिचार में अमावस्या और पूर्णिमा के समय घर का कोई न कोई सदस्य बहुत तीव्रता से बीमारी से ग्रसित होता है, और जैसे ही पूर्णिमा या अमावस्या बीत जाती है, वह ठीक होने लगता है।

अभिचार के लक्षणों में वक्ता यह गिनाते हैं: अमावस्या और पूर्णिमा के समय घर का कोई न कोई सदस्य बहुत तीव्रता के साथ बीमारी से ग्रसित होगा। वे कहते हैं कि जैसे ही पूर्णिमा-अमावस्या बीत जाएगी, वह ठीक होने लगेगा।

05

मंत्र या स्तुति आरंभ होते ही पूजा स्थान पर दुर्गंध

साधक को विचलित करने का निकृष्ट प्रयोग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:04–03:01

वक्ता तीसरे लक्षण के रूप में बताते हैं कि जब आप पूजन के लिए बैठते हैं, सुगंधित धूप-दीप जलाते हैं और मंत्र या स्तुति आरंभ करते हैं, तो दुर्गंध आने लगती है, विशेषकर ठीक पूजन के स्थान पर। वे इसे तांत्रिक द्वारा किया गया एक निकृष्ट प्रयोग कहते हैं, ताकि आप मन से विचलित हो जाएँ, पूजा-पाठ से हट जाएँ, भ्रमित हो जाएँ और आपको लगने लगे कि हमसे कोई त्रुटि हो रही है। वे चेताते हैं कि जैसे-जैसे आप पूजा कम करते हैं, नकारात्मक शक्तियों का वर्चस्व आपके पूजन स्थान और जीवन में बढ़ता है, और फिर आप जो धूप-दीप-भोग लगाते हैं वह भी सूक्ष्म शरीर के द्वारा वे ही लेने लगती हैं। वे जोड़ते हैं कि महाशक्तियाँ कुछ नहीं करेंगी, क्योंकि हर जीवात्मा उनकी संतान है और हम इसी माध्यम से अपना प्रारब्ध भी भोग रहे होते हैं।

06

अभिचार-ग्रस्त घर में भोजन और अचार का जल्दी खराब होना

ठंड में खट्टी दाल, स्पर्श से खराब अचार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:02–03:57

वक्ता कहते हैं कि सामान्य दिनों में सुबह बना भोजन शाम तक लगभग ठीक रहता है, लेकिन जहाँ शरीर या घर पर अभिचार हो, वहाँ दाल-सब्ज़ियाँ बहुत जल्दी खराब होती हैं; ठंड के दिनों में भी खट्टी हो जाती हैं और खाने की इच्छा ही नहीं रहती। वे कहते हैं कि यदि अभिचार-ग्रस्त व्यक्ति ही खाना बना रहा हो तो यह निश्चित है। वे जोड़ते हैं कि जिस व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह हावी हो चुकी हो, वह आम का अचार जैसी चीज़ें छुए तो वे ज़रूर खराब होने लगेंगी, और यह अधिकतर तब होता है जब कोई स्त्री स्पर्श करती है।

07

नवरात्रि में अखंड ज्योत का बार-बार बुझना

संकल्प पूरा नहीं हो पाता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:58–04:06

वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि आदि में आप अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं, तो अभिचार में वह किसी न किसी कारण से बुझेगी, बार-बार बुझेगी। परिणाम, उनके अनुसार, यह होता है कि सर्वप्रथम आपका नवरात्रि का संकल्प किसी न किसी कारण से पूर्ण नहीं हो पाता।

अन्य लक्षणों के सिवाय, वक्ता कहते हैं, आप नवरात्रि आदि में अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं; अभिचार में वह अखंड ज्योत किसी भी कारण से बुझेगी, और बार-बार बुझेगी। तो सर्वप्रथम, वे कहते हैं, किसी न किसी कारण से आपका नवरात्रि का संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। आदि पूर्ण नहीं होगा।

08

भ्रांति: अखंड ज्योत की बाती पर जमी कालिख भगवान के नेत्र हैं

बाती साफ करो, वरना दीपक बुझेगा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:07–04:45

वक्ता कहते हैं कि अखंड ज्योति बुझने का एक सामान्य कारण यह है कि बाती पर कालिख जम जाती है और आप उसे साफ नहीं करते। वे उन "महाज्ञानी और महामूर्ख" लोगों का उपहास करते हैं जो कहते हैं कि बाती में जमी कालिख भगवान के नेत्र के दर्शन हैं: लगातार जलती बाती में कार्बन जमेगा ही, और साफ न करने पर बाती और दीपक बुझ जाएँगे। वे कहते हैं कि यदि आप मानते हैं कि उसमें भगवान के नेत्र हैं और पूजा उसी से देवता तक जाती है, तो मत हटाइए, और आपकी अखंड ज्योत नौ दिन की जगह दो-चार दिन में बुझ जाएगी।

09

नवरात्रि में आवाहित देवताओं का कलश गिर जाना

नौ दिन की पूजा अधूरी रह जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:53–05:13

वक्ता कहते हैं कि जिनके घर अभिचारिक बाधा होती है, वहाँ ऐसा बहुत बार हुआ है कि कलश गिर जाता है। वे बताते हैं कि कलश में ही सभी देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है और वे उसमें आकर विराजते हैं, स्वयं जगदम्बा उसमें विराजमान होती हैं; इसलिए, ताकि नौ दिन की पूजा पूर्ण न हो, ऐसा लगेगा जैसे किसी ने कलश गिरा दिया। या तो चूहा-बिल्ली उसे गिरा देगा, वे कहते हैं, या किसी समय वह स्वयं ही गिर जाएगा।

10

घर के देवी-देवताओं को चढ़ाया नारियल हमेशा खराब निकलना

बलि जो हर बार खराब निकले

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:14–05:22

वक्ता कहते हैं कि घर पर आप जो भी बलि चढ़ाएँगे, विशेषकर घर के देवी-देवताओं के निमित्त नारियल की बलि या कुछ और, वह सदैव खराब ही निकलने लगेगा। वे कहते हैं कि यह अभिचार के कारण होता है।

वक्ता कहते हैं कि घर पर आप जो भी बलि चढ़ाएँगे, विशेष करके अपने घर के देवी-देवताओं के निमित्त नारियलनारियल — कलश पर पूर्ण फल के रूप में स्थापित, तथा बलि में प्राण के स्थान पर अर्पित। की बलि या कुछ और देते हैं, वह भी सदैव ही खराब निकलने लगेगा। यह, वे कहते हैं, अभिचार के कारण होगा।

11

ठीक पूजा के समय घर के आसपास कुत्तों-बिल्लियों का रोना

समय से पहचाना जाने वाला लक्षण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:23–05:41

वक्ता कहते हैं कि रात के समय, और विशेषकर जब आप पूजन-पाठ करते हैं, आपके घर के आसपास बहुत अधिक मात्रा में कुत्ते रोने लगते हैं, कभी बिल्लियाँ रोने लगती हैं। वे कहते हैं कि यदि ठीक उसी समय जब आप पूजा करने जाएँ यह बहुत अधिक हो, तो समझ लीजिए कि तंत्र का कुछ न कुछ प्रभाव है।

12

नींद में गला दबना और हड़बड़ाकर उठना: अभिचार का संकेत

जिसे स्लीपिंग पैरालिसिस कहकर टाल देते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:42–05:59

वक्ता कहते हैं कि एक सामान्य चीज़ जिसे हम "स्लीपिंग पैरालिसिस" कहकर टाल देते हैं, वह यह है: सोते समय एकाएक लगता है जैसे किसी ने गला दबा दिया, बोल नहीं पा रहे, हड़बड़ाकर उठते हैं, और लगता है कि कोई अगल-बगल में था। वे कहते हैं कि यह सीधी सी बात है: अभिचारिक क्रिया हुई है, तभी यह चीज़ हो रही है।

13

रात में घर में मौजूद सदस्य के स्वर में पुकारती आवाज़

घर के सभी लोग सुनते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:00–06:18

वक्ता कहते हैं कि यदि रात में कोई आकर आपको आवाज़ दे, घर के सभी लोग एक-दो बार कोई आवाज़ सुनें और वह घर के ही किसी व्यक्ति के स्वर में हो, टोन ऐसी जैसे भाई बुला रहा है, बहन बुला रही है या माता जी, जबकि वह व्यक्ति घर में ही है, तो समझ लीजिए कि आप पर अभिचारिक प्रक्रियाएँ हो रही हैं और तंत्र का प्रक्षेपण हो रहा है।

14

स्वस्थ पालतू पशु का अचानक मरना और गाय का बीमार होकर दूध बंद करना

पशुओं पर पहले असर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:19–06:40

वक्ता कहते हैं कि घर में कोई पालतू पशु, बिल्कुल स्वस्थ पशु या पक्षी, एकाएक मर जाए तो समझ लीजिए कि अभिचारिक प्रक्रिया चल रही है। इसी तरह, यदि आपने गाय रखी हैं और उन्हें बार-बार दिक्कत हो रही है, दूध देना बंद हो रहा है, तो समझ लीजिए कि आप पर कुछ न कुछ अभिचार का प्रयोग चल रहा है।

15

तंत्र में तुलसी, शमी, अपराजिता और सफेद गुड़हल का सूखना

देव पौधे मुरझाते हैं, सफेद गुड़हल एक दिन में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:41–07:21

वक्ता कहते हैं कि जब तंत्र का प्रक्षेपण होता है तो सामान्यतः सबसे पहले तुलसी का पौधा सूख जाता है, शमी हो तो लगेगी नहीं, और अपराजिता का फूल आना बंद होकर वह भी सूख जाती है; घर के जितने देव पौधे हैं वे सब कहीं न कहीं मुरझा जाते हैं। वे बताते हैं कि तुलसी जी बहुत बार अपवाद बन जाती हैं। सफेद गुड़हल, वे कहते हैं, बहुत संवेदनशील है: नकारात्मक शक्ति या अभिचार तंत्र चला हो तो वह कभी लगेगा नहीं, और खूब फल-फूल वाला पौधा भी एक-एक दिन में सूख जाता है।

16

अभिचार होने पर गुरु से मिली माला या रुद्राक्ष का टूटना

मारकेश काल में रुद्राक्ष प्रहार झेलता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:22–07:51

वक्ता कहते हैं कि यदि आप अपने गुरु जी से या किसी सिद्ध व्यक्ति से मिली माला धारण किए हैं, तो आप पर अभिचार की प्रक्रिया होने पर वह अवश्य टूटेगी; उसका मनका टूट सकता है या पूरी माला, और धारण किया हुआ रुद्राक्ष का बड़ा शुभ दाना भी दो टुकड़ों में बँट सकता है। यदि कुंडली के अनुसार मारकेश का प्रभाव हो, वे कहते हैं, तो उस समय वह ज़रूर टूटेगा, जब मृत्यु-तुल्य कष्ट मिलने वाला होता है; रुद्र के अंश रुद्राक्ष उसे सबसे पहले अपने ऊपर लेकर व्यक्ति की रक्षा करते हैं।

17

सामान्य पूजा में झूमना और भारीपन, जिसे देवता का आना समझ लिया जाता है

गलत शक्ति, जो ऊर्जा और भोग चाहती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:52–08:31

वक्ता कहते हैं कि यदि अब तक पूजा में आपको कुछ नहीं होता था और अब पूजा में बैठते ही एकाएक आप "खेलने" लगे हैं, झूमने की स्थिति होने लगी है, बार-बार शरीर भारी हो रहा है, जबकि आप कोई विशेष पूजा-पाठ नहीं करते, और मन में आ रहा है कि देवता आ रहे हैं, तो समझ लीजिए कि यह तंत्र की क्रिया है जिससे आपको छलने का प्रयास किया जा रहा है। कोई गलत शक्ति, वे कहते हैं, आपके शरीर की ऊर्जा और आपके पूजा भोग को स्वीकार करने का प्रयास कर रही है।

18

अभिचार से रक्षा के लिए कौन से विधान हैं?

कुल परंपरा के अनुसार चुनें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:32–08:58 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इसके लिए उनके चैनल पर बहुत सारे विधान पहले ही दिए गए हैं: हनुमान जंजीरा का विधान, हनुमान चालीसा, bajrang-baan, durga-32-names, बगला का, भगवती काली का वैरी नाशन, और भगवती बगलामुखी के बहुत सारे विधान। वे कहते हैं कि इनमें से जो भी अपनी कुल परंपरा के देवी-देवताओं के अनुसार उपयुक्त लगे, उसे जानकर वे प्रयोग स्वयं करें, जिससे अभिचार की प्रक्रिया से रक्षा हो और इन सबसे मुक्ति मिले।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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