शमशानी तंत्र (अभिचार) के लक्षण कैसे पहचानें
अभिचार कर्म के तेरह लक्षणों पर एक निदानात्मक शिक्षण।
18 notes, in the order they are taught. Jump to any one.
2 also answer a common question
Questions this answers
2 of the notes below are questions in their own right. Scroll for more.
अभिचार कर्म क्या है?
प्रक्षेपित शक्तियाँ, जिनका कोई इलाज नहीं
वक्ता बताते हैं कि अभिचार कर्म का अर्थ है किसी व्यक्ति के शरीर या परिवार पर नकारात्मक शक्तियों का प्रक्षेपण हो चुका है, जिससे कोई बड़ा व्यवधान खड़ा हो रहा है और उसका न कोई इलाज मिलता है, न कोई समाधान। वे कहते हैं कि लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं; एक जैसा अनुभव और एक जैसी संभावनाएँ सबके साथ नहीं होतीं।
वक्ता यह बताने बैठते हैं कि कोई व्यक्ति स्वयं कैसे जाने कि उस पर किसी प्रकार का अभिचार कर्म हुआ है या नहीं। वे कहते हैं कि अभिचार कर्म से उनका अभिप्राय यह है कि किसी नकारात्मक शक्तियों का प्रक्षेपण अपने परिवार पर या अपने शरीर पर हो चुका है, जिसके कारण किसी न किसी प्रकार का बड़ा व्यवधान खड़ा हो रहा है, और उसका कोई इलाज नहीं मिल रहा, कोई समाधान नहीं मिल रहा। लक्षण गिनाने से पहले वे एक सावधानी जोड़ते हैं: ये चीज़ें हर व्यक्ति के साथ भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। एक जैसा अनुभव और एक जैसी संभावनाएँ सबके साथ नहीं होतीं।
पर्व काल में अचानक तबीयत बिगड़ना: नए अभिचार का संकेत
ताकि पूजा-पाठ न हो सके
वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल नए अभिचार का सबसे पहला लक्षण यह है कि तबीयत एकाएक खराब होने लगती है, और विशेष रूप से पर्व काल यानी पर्व के समय। वे होली, होलिका दहन, दीपावली और दुर्गा पूजा का नाम लेते हैं: जब भी पर्व आएगा, ठीक उसी समय शरीर में दिक्कत बहुत बढ़ जाएगी। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण, उनके अनुसार, यह है कि व्यक्ति पूजा-पाठ न कर पाए; उसी समय उसे सबसे अधिक कष्ट होता है।
वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली चीज़ यह है: जब कभी कोई व्यक्ति आप पर तंत्र अभिचार करता है और वह अभिचार बिल्कुल नया हो, तो एकाएक आपकी तबीयत खराब होना आरंभ हो जाती है, और विशेष करके पर्व काल यानी पर्व के समय। पर्व काल से उनका अर्थ है घर में होली-दीपावली का मांगलिक समय। होलिका दहन के समय दिक्कतें होंगी, दीपावली के समय, दुर्गा पूजा के समय; जब कभी पर्व आएगा, ठीक उसी समय शरीर में दिक्कत बहुत अधिक बढ़ जाएगी, ताकि आप पूजा-पाठ न कर पाएँ। वे कहते हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही होता है, और उसी समय आपको सबसे अधिक दिक्कत होगी।
पूजा के समय कलह और मांगलिक कार्यों में अड़चनें: अभिचार के संकेत
शक्तियाँ सकारात्मक ऊर्जा रोकती हैं
वक्ता कहते हैं कि तंत्र हो जाने पर पूजन-पाठ के समय ही परिवार में सबसे अधिक कलह-क्लेश होता है, और पर्व काल में अत्यंत भयानक मारपीट तक होने लगती है। कारण, वे बताते हैं, यह है कि प्रक्षेपित शक्तियाँ नहीं चाहतीं कि आप पूजन से ऐसी सकारात्मक ऊर्जाएँ बढ़ाएँ जिससे उनका काम रुक जाए और उन्हें आपको छोड़कर जाना पड़े। वे जोड़ते हैं कि घर में कोई मांगलिक कार्य होने वाला हो तो बहुत अड़चनें आती हैं, और किसी तरह हो भी जाए तो उस कार्य के कारण घर में परेशानी और बढ़ जाती है; आरंभ में ये सारी दिक्कतें काफी तेज़ी से होती हैं।
वक्ता कहते हैं कि जब तंत्र हो जाता है तो पूजन-पाठ के समय में ही आपस में सबसे अधिक कलह-क्लेश मचता है। इसके पीछे कारण, वे बताते हैं, यह है कि जो शक्तियाँ प्रक्षेपित की गई हैं, वे नहीं चाहतीं कि आप पूजन-पाठ के द्वारा ऐसी सकारात्मक ऊर्जाएँ बढ़ाएँ जिससे वे अपना कार्य पूरा न कर सकें और उन्हें आपको छोड़कर जाना पड़े। यही, वे कहते हैं, सबसे पहली शर्त है; इसीलिए पूजन के समय आपस में झगड़ा होगा, और पर्व काल में आपस में एकदम अत्यंत भयानक मारपीट होने लगेगी। वे जोड़ते हैं कि घर में कोई मांगलिक कार्य होने वाला हो तो इतनी अड़चनें आएँगी, और यदि वह किसी तरह संपन्न हो भी गया तो उस कार्य के कारण घर में परेशानी और बढ़ जाएगी। वे बताते हैं कि आरंभ में ये सारी दिक्कतें काफी तेज़ी से होती हैं।
अमावस्या और पूर्णिमा पर बीमारी, जो तिथि बीतते ही उतर जाती है
चंद्र तिथि से बँधा लक्षण
वक्ता कहते हैं कि अभिचार में अमावस्या और पूर्णिमा के समय घर का कोई न कोई सदस्य बहुत तीव्रता से बीमारी से ग्रसित होता है, और जैसे ही पूर्णिमा या अमावस्या बीत जाती है, वह ठीक होने लगता है।
मंत्र या स्तुति आरंभ होते ही पूजा स्थान पर दुर्गंध
साधक को विचलित करने का निकृष्ट प्रयोग
वक्ता तीसरे लक्षण के रूप में बताते हैं कि जब आप पूजन के लिए बैठते हैं, सुगंधित धूप-दीप जलाते हैं और मंत्र या स्तुति आरंभ करते हैं, तो दुर्गंध आने लगती है, विशेषकर ठीक पूजन के स्थान पर। वे इसे तांत्रिक द्वारा किया गया एक निकृष्ट प्रयोग कहते हैं, ताकि आप मन से विचलित हो जाएँ, पूजा-पाठ से हट जाएँ, भ्रमित हो जाएँ और आपको लगने लगे कि हमसे कोई त्रुटि हो रही है। वे चेताते हैं कि जैसे-जैसे आप पूजा कम करते हैं, नकारात्मक शक्तियों का वर्चस्व आपके पूजन स्थान और जीवन में बढ़ता है, और फिर आप जो धूप-दीप-भोग लगाते हैं वह भी सूक्ष्म शरीर के द्वारा वे ही लेने लगती हैं। वे जोड़ते हैं कि महाशक्तियाँ कुछ नहीं करेंगी, क्योंकि हर जीवात्मा उनकी संतान है और हम इसी माध्यम से अपना प्रारब्ध भी भोग रहे होते हैं।
वक्ता इसे तीसरा लक्षण कहते हैं। आप पूजन के लिए बैठते हैं, सुगंधित धूपपूजन में अर्पित की जाने वाली धूप; उपचारों के क्रम में इसका धूम्र स्वयं एक अर्पण माना जाता है।-दीप प्रज्वलित करते हैं, देव आराधना कर रहे हैं, और बहुत बार जैसे ही आप मंत्र उच्चारण या स्तुति आरंभ करते हैं, दुर्गंध आना शुरू हो जाती है, विशेष करके ठीक पूजन के स्थान पर। वे इसे एक निकृष्ट प्रक्रिया, निकृष्ट प्रयोग बताते हैं जो तांत्रिक द्वारा किया जाता है, ताकि आप अपने मन से विचलित हो जाएँ, पूजा-पाठ से हट जाएँ, भ्रमित हो जाएँ और आपको लगने लगे कि हमसे किसी प्रकार की त्रुटि हो रही है। वे परिणाम भी जोड़ते हैं: जैसे-जैसे आप पूजा-पाठ कम करते जाते हैं, नकारात्मक शक्तियों का वर्चस्व आपके पूजन स्थान और आपके जीवन में बढ़ने लगता है, और बाद में आप जो भी धूप-दीप-भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य। लगाते हैं, वह भी सूक्ष्म शरीर के द्वारा वे ही लेने लगती हैं। महाशक्तियों की व्यवस्था, वे कहते हैं, यहाँ पूरी अलग हो जाती है। वे वैसे भी कुछ नहीं करेंगी, क्योंकि हर जीवात्मावर्तमान भौतिक शरीर को सक्रिय करने वाली व्यष्टि आत्मा — जो मूलतः निराकार व निर्लिंग आत्मा से भिन्न प्रतीत होती है। उनकी संतान है, और हमारे कर्मों का जो प्रारब्धपूर्व कर्मों द्वारा पहले से गतिमान भाग्य का वह अंश — साधना व सत्कर्म इसकी तीव्रता को घटा सकते हैं, किंतु पूर्णतः मिटा नहीं सकते। है, उसे भी हम कहीं न कहीं इसी माध्यम से भोग रहे होते हैं।
अभिचार-ग्रस्त घर में भोजन और अचार का जल्दी खराब होना
ठंड में खट्टी दाल, स्पर्श से खराब अचार
वक्ता कहते हैं कि सामान्य दिनों में सुबह बना भोजन शाम तक लगभग ठीक रहता है, लेकिन जहाँ शरीर या घर पर अभिचार हो, वहाँ दाल-सब्ज़ियाँ बहुत जल्दी खराब होती हैं; ठंड के दिनों में भी खट्टी हो जाती हैं और खाने की इच्छा ही नहीं रहती। वे कहते हैं कि यदि अभिचार-ग्रस्त व्यक्ति ही खाना बना रहा हो तो यह निश्चित है। वे जोड़ते हैं कि जिस व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह हावी हो चुकी हो, वह आम का अचार जैसी चीज़ें छुए तो वे ज़रूर खराब होने लगेंगी, और यह अधिकतर तब होता है जब कोई स्त्री स्पर्श करती है।
वक्ता कहते हैं कि सामान्य दिनों में सुबह बना भोजन शाम तक लगभग ठीक रहता है। लेकिन जब आपके शरीर या घर पर कोई अभिचार कर्म हो गया हो, तो यदि अभिचार-ग्रस्त व्यक्ति ही खाना बना रहा है तब तो वह ज़रूर जल्दी खराब हो जाएगा। घर पर अभिचार हो तो दाल और सब्ज़ियाँ बड़ी जल्दी खराब होंगी; ठंड के दिनों में भी वह बिल्कुल खट्टी, खाने योग्य नहीं रह जाएगी, और खाने की इच्छा ही नहीं करेगी। अचार, आम का अचार और घर में बनने वाली ऐसी चीज़ों के बारे में वे कहते हैं: यदि अभिचार-ग्रस्त व्यक्ति के शरीर पर नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह हावी हो चुकी है, उसे अपने पूरे नियंत्रण में ले चुकी है, तो उसके द्वारा अचार आदि को स्पर्श किया जाए तो वह ज़रूर खराब होने लगेगा। वे जोड़ते हैं कि यह अधिकतर बार होता है, और विशेष करके यदि कोई स्त्री स्पर्श करती है तो उनके साथ यह चीज़ ज़रूर हो जाती है।
नवरात्रि में अखंड ज्योत का बार-बार बुझना
संकल्प पूरा नहीं हो पाता
वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि आदि में आप अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं, तो अभिचार में वह किसी न किसी कारण से बुझेगी, बार-बार बुझेगी। परिणाम, उनके अनुसार, यह होता है कि सर्वप्रथम आपका नवरात्रि का संकल्प किसी न किसी कारण से पूर्ण नहीं हो पाता।
अन्य लक्षणों के सिवाय, वक्ता कहते हैं, आप नवरात्रि आदि में अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं; अभिचार में वह अखंड ज्योत किसी भी कारण से बुझेगी, और बार-बार बुझेगी। तो सर्वप्रथम, वे कहते हैं, किसी न किसी कारण से आपका नवरात्रि का संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। आदि पूर्ण नहीं होगा।
भ्रांति: अखंड ज्योत की बाती पर जमी कालिख भगवान के नेत्र हैं
बाती साफ करो, वरना दीपक बुझेगा
वक्ता कहते हैं कि अखंड ज्योति बुझने का एक सामान्य कारण यह है कि बाती पर कालिख जम जाती है और आप उसे साफ नहीं करते। वे उन "महाज्ञानी और महामूर्ख" लोगों का उपहास करते हैं जो कहते हैं कि बाती में जमी कालिख भगवान के नेत्र के दर्शन हैं: लगातार जलती बाती में कार्बन जमेगा ही, और साफ न करने पर बाती और दीपक बुझ जाएँगे। वे कहते हैं कि यदि आप मानते हैं कि उसमें भगवान के नेत्र हैं और पूजा उसी से देवता तक जाती है, तो मत हटाइए, और आपकी अखंड ज्योत नौ दिन की जगह दो-चार दिन में बुझ जाएगी।
अखंड ज्योत बुझने की बात करते हुए वक्ता एक सीधा कारण अलग से बताते हैं: बाती पर कालिख जम जाती है, आप उसे साफ नहीं करते, और अखंड ज्योति बुझ जाती है। वे कहते हैं कि इस पर वे लोग, जिन्हें वे महाज्ञानी और महामूर्ख दोनों कहते हैं, बोलते हैं कि बाती में कालिख जम गई तो वहाँ भगवान के नेत्र के दर्शन होने लगे। उनका उत्तर: भाई, वह लगातार जल रही है तो उसमें कार्बन जमेगा ही, वह दिक्कत होगी ही। यदि आप उसे साफ नहीं करेंगे तो बाती बुझ जाएगी, दीपक बुझ जाएगा। वे व्यंग्य में आगे कहते हैं: भला, वहाँ भगवान के नेत्र दिख रहे हैं और आप मान रहे हैं कि देवता तक पूजा उसी से जाती है, तो फिर आप मत हटाइए। कालिख को ऐसे ही जलने दीजिए जब तक जले; आपकी अखंड ज्योत दो-चार दिन में बुझ जाएगी, नौ दिन की नहीं हो पाएगी। "भगवान को क्यों आप हटाएँगे दीपक की बाती में से," वे ऐसे लोगों के बारे में कहते हैं, उन्हें बेवकूफ बताते हुए।
नवरात्रि में आवाहित देवताओं का कलश गिर जाना
नौ दिन की पूजा अधूरी रह जाती है
वक्ता कहते हैं कि जिनके घर अभिचारिक बाधा होती है, वहाँ ऐसा बहुत बार हुआ है कि कलश गिर जाता है। वे बताते हैं कि कलश में ही सभी देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है और वे उसमें आकर विराजते हैं, स्वयं जगदम्बा उसमें विराजमान होती हैं; इसलिए, ताकि नौ दिन की पूजा पूर्ण न हो, ऐसा लगेगा जैसे किसी ने कलश गिरा दिया। या तो चूहा-बिल्ली उसे गिरा देगा, वे कहते हैं, या किसी समय वह स्वयं ही गिर जाएगा।
घर के देवी-देवताओं को चढ़ाया नारियल हमेशा खराब निकलना
बलि जो हर बार खराब निकले
वक्ता कहते हैं कि घर पर आप जो भी बलि चढ़ाएँगे, विशेषकर घर के देवी-देवताओं के निमित्त नारियल की बलि या कुछ और, वह सदैव खराब ही निकलने लगेगा। वे कहते हैं कि यह अभिचार के कारण होता है।
ठीक पूजा के समय घर के आसपास कुत्तों-बिल्लियों का रोना
समय से पहचाना जाने वाला लक्षण
वक्ता कहते हैं कि रात के समय, और विशेषकर जब आप पूजन-पाठ करते हैं, आपके घर के आसपास बहुत अधिक मात्रा में कुत्ते रोने लगते हैं, कभी बिल्लियाँ रोने लगती हैं। वे कहते हैं कि यदि ठीक उसी समय जब आप पूजा करने जाएँ यह बहुत अधिक हो, तो समझ लीजिए कि तंत्र का कुछ न कुछ प्रभाव है।
वक्ता कहते हैं कि रात के समय में, या विशेष करके जब आप पूजन-पाठ करते हैं, पूजन-पाठ के समय आपके घर के आसपास कुत्तों के रोने की आवाज़ काफी अधिक मात्रा में आएगी; कुत्ते रोने लगेंगे, कभी बिल्लियाँ रोने लगेंगी। और खास करके, वे कहते हैं, जब आप पूजा करने जाएँ ठीक उसी समय यह चीज़ बहुत अधिक हो, तो समझ लीजिए कि तंत्र का कुछ न कुछ प्रभाव है।
नींद में गला दबना और हड़बड़ाकर उठना: अभिचार का संकेत
जिसे स्लीपिंग पैरालिसिस कहकर टाल देते हैं
वक्ता कहते हैं कि एक सामान्य चीज़ जिसे हम "स्लीपिंग पैरालिसिस" कहकर टाल देते हैं, वह यह है: सोते समय एकाएक लगता है जैसे किसी ने गला दबा दिया, बोल नहीं पा रहे, हड़बड़ाकर उठते हैं, और लगता है कि कोई अगल-बगल में था। वे कहते हैं कि यह सीधी सी बात है: अभिचारिक क्रिया हुई है, तभी यह चीज़ हो रही है।
सामान्य लक्षणों में वक्ता उस बात का ज़िक्र करते हैं जो सोते समय होती है: सोने के समय जिसे स्लीपिंग पैरालिसिस बोला जाता है, उसे हम उसी नाम से टाल देते हैं। एकाएक लगता है जैसे किसी ने गला दबा दिया; बोल नहीं पा रहे हैं; हड़बड़ाकर उठते हैं। ऐसा लगता है कि कोई अगल-बगल में था। यह, वे कहते हैं, सीधी सी बात है: अभिचारिक क्रिया हुई है, तभी यह चीज़ हो रही है।
रात में घर में मौजूद सदस्य के स्वर में पुकारती आवाज़
घर के सभी लोग सुनते हैं
वक्ता कहते हैं कि यदि रात में कोई आकर आपको आवाज़ दे, घर के सभी लोग एक-दो बार कोई आवाज़ सुनें और वह घर के ही किसी व्यक्ति के स्वर में हो, टोन ऐसी जैसे भाई बुला रहा है, बहन बुला रही है या माता जी, जबकि वह व्यक्ति घर में ही है, तो समझ लीजिए कि आप पर अभिचारिक प्रक्रियाएँ हो रही हैं और तंत्र का प्रक्षेपण हो रहा है।
वक्ता एक और लक्षण बताते हैं: रात में कोई आकर आपको आवाज़ दे रहा है। घर के सभी लोग सुनते हैं; एक-दो बार कुछ आवाज़ आई और वह घर के ही किसी व्यक्ति के स्वर में थी। टोन ऐसी लगती है जैसे भाई बुला रहा है, बहन बुला रही है या माता जी, जबकि वह व्यक्ति घर में ही है। तो समझ लीजिए, वे कहते हैं, कि अभिचारिक प्रक्रियाएँ आप पर हो रही हैं और तंत्र का प्रक्षेपण आप पर हो रहा है।
स्वस्थ पालतू पशु का अचानक मरना और गाय का बीमार होकर दूध बंद करना
पशुओं पर पहले असर
वक्ता कहते हैं कि घर में कोई पालतू पशु, बिल्कुल स्वस्थ पशु या पक्षी, एकाएक मर जाए तो समझ लीजिए कि अभिचारिक प्रक्रिया चल रही है। इसी तरह, यदि आपने गाय रखी हैं और उन्हें बार-बार दिक्कत हो रही है, दूध देना बंद हो रहा है, तो समझ लीजिए कि आप पर कुछ न कुछ अभिचार का प्रयोग चल रहा है।
वक्ता यह लक्षण जोड़ते हैं: घर में कोई पालतू पशु है, बिल्कुल स्वस्थ पशु है, पशु हो या पक्षी, और वह एकाएक मर जाता है, मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, तो समझ लीजिए कि अभिचारिक प्रक्रिया चल रही है। गाय रखी हैं और उनको बार-बार दिक्कत हो रही है, दूध देना बंद हो जा रहा है, तो समझ लीजिए, वे कहते हैं, कि अभिचार का कुछ न कुछ प्रयोग आप पर चल रहा है।
तंत्र में तुलसी, शमी, अपराजिता और सफेद गुड़हल का सूखना
देव पौधे मुरझाते हैं, सफेद गुड़हल एक दिन में
वक्ता कहते हैं कि जब तंत्र का प्रक्षेपण होता है तो सामान्यतः सबसे पहले तुलसी का पौधा सूख जाता है, शमी हो तो लगेगी नहीं, और अपराजिता का फूल आना बंद होकर वह भी सूख जाती है; घर के जितने देव पौधे हैं वे सब कहीं न कहीं मुरझा जाते हैं। वे बताते हैं कि तुलसी जी बहुत बार अपवाद बन जाती हैं। सफेद गुड़हल, वे कहते हैं, बहुत संवेदनशील है: नकारात्मक शक्ति या अभिचार तंत्र चला हो तो वह कभी लगेगा नहीं, और खूब फल-फूल वाला पौधा भी एक-एक दिन में सूख जाता है।
वक्ता पहले कहते हैं कि तुलसी जी बहुत बार अपवाद स्वरूप हो जाती हैं। लेकिन सामान्यतः, वे कहते हैं, जब तंत्र का प्रक्षेपण होता है तो सबसे पहले तुलसी जी का पौधा सूख जाता है; शमीउपाय-अनुष्ठानों में प्रयुक्त एक पत्ता — परंपरागत रूप से शनिवार को नहीं तोड़ा जाता; शनिवार के अनुष्ठान हेतु आवश्यक हो तो इसे पूर्व शुक्रवार को तोड़ लिया जाता है। जी का पौधा हो तो वह भी नहीं लगेगा; अपराजिता हों तो पुष्प आना ही बंद हो जाएगा और वे भी सूख जाएँगी। मतलब घर के जितने देव वृक्ष, देव पौधे हैं, वे सब कहीं न कहीं मुरझा जाते हैं। घर में सफेद गुड़हल का पौधा लगा हो और नकारात्मक शक्ति हो, कुछ अभिचार तंत्र चला हो, तो वह कभी लगेगा नहीं, वे कहते हैं; वह तुरंत एक-एक दिन में सूख जाता है। उसमें बहुत फल-फूल हो रहा हो, लेकिन जैसे ही अभिचार की प्रक्रिया, तंत्र की प्रक्रिया होगी, वह तुरंत सूख जाता है, क्योंकि वह बहुत संवेदनशील होता है।
अभिचार होने पर गुरु से मिली माला या रुद्राक्ष का टूटना
मारकेश काल में रुद्राक्ष प्रहार झेलता है
वक्ता कहते हैं कि यदि आप अपने गुरु जी से या किसी सिद्ध व्यक्ति से मिली माला धारण किए हैं, तो आप पर अभिचार की प्रक्रिया होने पर वह अवश्य टूटेगी; उसका मनका टूट सकता है या पूरी माला, और धारण किया हुआ रुद्राक्ष का बड़ा शुभ दाना भी दो टुकड़ों में बँट सकता है। यदि कुंडली के अनुसार मारकेश का प्रभाव हो, वे कहते हैं, तो उस समय वह ज़रूर टूटेगा, जब मृत्यु-तुल्य कष्ट मिलने वाला होता है; रुद्र के अंश रुद्राक्ष उसे सबसे पहले अपने ऊपर लेकर व्यक्ति की रक्षा करते हैं।
वक्ता कहते हैं कि यदि आप माला धारण किए हुए हैं, आपके गुरु जी ने दी हो या किसी सिद्ध व्यक्ति से आपने माला धारण की हो, तो जब आप पर अभिचार की प्रक्रिया होगी, माला अवश्य टूटेगी। उसका मनका भी टूट सकता है, पूरी माला भी टूट सकती है; और यदि आप रुद्राक्षशिव पूजा के दौरान धारण की जाने वाली एक पवित्र बीज-माला । का बड़ा, शुभ, संपन्न दाना पहने हैं तो वह भी दो टुकड़ों में बँट सकता है। यदि कुंडली के अनुसार मारकेश का प्रभाव हो, वे कहते हैं, तो उस समय वह ज़रूर टूटेगा। वही समय होता है जब मृत्यु-तुल्य कष्ट मिलने वाला होता है। रुद्र के अंश जो रुद्राक्ष होते हैं, वे उसे सबसे पहले अपने ऊपर लेकर व्यक्ति की रक्षा करते हैं।
सामान्य पूजा में झूमना और भारीपन, जिसे देवता का आना समझ लिया जाता है
गलत शक्ति, जो ऊर्जा और भोग चाहती है
वक्ता कहते हैं कि यदि अब तक पूजा में आपको कुछ नहीं होता था और अब पूजा में बैठते ही एकाएक आप "खेलने" लगे हैं, झूमने की स्थिति होने लगी है, बार-बार शरीर भारी हो रहा है, जबकि आप कोई विशेष पूजा-पाठ नहीं करते, और मन में आ रहा है कि देवता आ रहे हैं, तो समझ लीजिए कि यह तंत्र की क्रिया है जिससे आपको छलने का प्रयास किया जा रहा है। कोई गलत शक्ति, वे कहते हैं, आपके शरीर की ऊर्जा और आपके पूजा भोग को स्वीकार करने का प्रयास कर रही है।
वक्ता एक और लक्षण बताते हैं। अभी तक आपको कुछ नहीं हो रहा था; आप पूजा-पाठ कर रहे थे। लेकिन अब पूजा में बैठते ही एकाएक आप "खेलना" शुरू कर देते हैं: झूमने की स्थिति होने लगती है, बार-बार शरीर भारी हो जाता है, जबकि आप कोई भी ऐसा विशेष पूजा-पाठ नहीं करते। और अब मन में आ रहा है कि नहीं, ये तो देवता आ रहे हैं। तो समझ लीजिए, वे कहते हैं, कि यह तंत्र की क्रिया है जिसके द्वारा आपको छलने का प्रयास किया जा रहा है। कोई गलत शक्ति है जो आपके शरीर के ऊपर की ऊर्जा को और आपके पूजा भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य। को स्वीकार करने का प्रयास कर रही है। सूची समाप्त करते हुए वे कहते हैं कि इन सभी माध्यमों से सबको यह समझना चाहिए कि घर में, परिवार में, शरीर पर तंत्र की स्थिति बनी हुई है और हमारे ऊपर तंत्र का प्रक्षेपण हो रहा है।
अभिचार से रक्षा के लिए कौन से विधान हैं?
कुल परंपरा के अनुसार चुनें
वक्ता कहते हैं कि इसके लिए उनके चैनल पर बहुत सारे विधान पहले ही दिए गए हैं: हनुमान जंजीरा का विधान, हनुमान चालीसा, bajrang-baan, durga-32-names, बगला का, भगवती काली का वैरी नाशन, और भगवती बगलामुखी के बहुत सारे विधान। वे कहते हैं कि इनमें से जो भी अपनी कुल परंपरा के देवी-देवताओं के अनुसार उपयुक्त लगे, उसे जानकर वे प्रयोग स्वयं करें, जिससे अभिचार की प्रक्रिया से रक्षा हो और इन सबसे मुक्ति मिले।
लक्षणों के बाद वक्ता कहते हैं कि इस विषय पर इसी चैनल पर बहुत सारे विधान दिए गए हैं: हनुमान जंजीरा का विधान है, हनुमान चालीसा, bajrang-baan, durga-32-names का, बगला का, भगवती काली का वैरी नाशन, भगवती बगलामुखी के बहुत सारे विधान। उनमें से, वे कहते हैं, जो भी आपको अपनी कुल परंपरापीढ़ी-दर-पीढ़ी दीक्षा के माध्यम से चली आ रही तांत्रिक साधना की कुल या वंश-परंपरा। के देवी-देवताओं के अनुसार उपयुक्त लगे, उसे जानकर तब उन प्रयोगों को आप स्वयं कर सकते हैं, जिससे अभिचार की प्रक्रिया से आपकी रक्षा हो सके और इन सभी से आप मुक्त हो सकें।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।