सत्य घटना: श्री भैरव पाठ से मारण तंत्र कैसे नष्ट हुआ
मारण तंत्र से पीड़ित परिवार के सत्य मामले पर नोट्स।
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एक परिवार पर मारण प्रयोग कैसे प्रकट हुआ: आवाज़ें, खून के छींटे, विक्षिप्तता और दो मृत्युएँ
झारखंड का प्रकरण, पहले संकेत से टूटने तक
वक्ता झारखंड में धनबाद के पास के एक गाँव की सत्य घटना बताते हैं, जहाँ तीन भाइयों के एक संपन्न परिवार पर बहुत तीव्र मारण प्रयोग किया गया था। लगभग तीन साल तक रात में घर के भीतर से कोई बुलाता सुनाई देता रहा, जिसे परिवार ने अनदेखा किया क्योंकि वे सामान्य पूजा-पाठ ही करते थे; फिर बड़े भाई पागल होने लगे, आसपास दिखाने-सुनाने से दो-तीन महीने का ही आराम मिला, मँझले भाई की भी वही स्थिति हुई, हर दूसरे-तीसरे दिन घर के सदस्यों की ही आवाज़ में कोई बुलाने लगा, और दीवारों व मुख्य चौखट के पास खून के छींटे मिलने लगे। एक तांत्रिक ने घर आकर बहुत खर्च से क्रियाएँ कीं और चार-पाँच महीने ठीक रहा; फिर होलिका दहन के आसपास बड़े भाई की दुर्घटना में मौके पर मृत्यु हुई और दस दिन के भीतर, श्राद्ध पूरा होने से पहले ही, मँझले भाई की भी दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इसके बाद बचे भाई की पत्नी अपना सूजा हुआ दाहिना पैर ज़मीन पर नहीं रख पाती थीं जबकि डॉक्टरों को कुछ नहीं मिला, और दोनों मृत भाइयों की आवाज़ में बुलावा आने लगा। परिवार समृद्ध था, वे कहते हैं, इसलिए शत्रु बहुत थे और किस पर शक करें, पता नहीं था।
वक्ता कहते हैं कि यह सत्य घटना झारखंड में धनबाद के पास के एक गाँव के परिवार की है, जिस पर मारण तंत्र का बहुत तीव्रतम मारण प्रयोग किया गया था और जिसका असर पूरे परिवार पर पड़ रहा था। यह रिकॉर्डिंग (नवंबर 2022) से लगभग एक साल पहले की बात है; परिवार ने दीपावली और भैरव अष्टमी के बीच कॉलिंग ऐप से फ़ोन पर संपर्क किया। तीन भाई थे, सब विवाहित, सबके बच्चे, और उसी साल दो बड़े भाइयों की अचानक मृत्यु हो गई थी; घर में बूढ़े माता-पिता, दो विधवा भाभियाँ और बच्चे बचे। ऐसी घटना के बाद, वे कहते हैं, किसी भी परिवार का मानसिक बल टूट जाता है। क्या परेशानी थी, पूछने पर उन्होंने बताया कि लगभग तीन साल से रात में बार-बार लगता था कि कोई बुला रहा है, किसी की आवाज़ सुनाई देती है। वक्ता कहते हैं कि सामान्य लोग जब तक परेशान नहीं होते, ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देते; परिवार सामान्य पूजा-पाठ, नित्य हनुमान चालीसा करता था, कोई विशेष नहीं, और इसे महत्व नहीं दिया। फिर तबीयत खराब होने लगी। बड़े भाई, जिनके परिवार के पास खूब खेती-बाड़ी और संपत्ति थी और भाइयों में कोई क्लेश नहीं था, विक्षिप्त अवस्था की ओर जाने लगे: बैठे-बैठे रोने लगते, बेमतलब की बातें कहते कि "तुम लोग कभी अलग हो जाओगे" या "हम मर जाएँगे"। बड़े-बुजुर्गों को शक हुआ और आसपास दिखाया-सुनाया गया; चीज़ें ठीक हुईं, पर दो-तीन महीने बाद फिर शुरू हो गईं, और कुछ समय बाद मँझले भाई की भी वही स्थिति हुई। साल-डेढ़ साल में बुलाने वाली आवाज़ लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन आने लगी, घर के किसी न किसी सदस्य की ही वाणी में। सबसे बड़ी बात, उन्होंने बताया, घर में खून के छींटे मिलने लगे, दीवार पर, कभी मुख्य चौखट के आसपास; वह खून था या कुछ और, यह कहना कठिन था, पर छाप वैसी ही पड़ती थी जैसी फेंके गए खून की पड़ती है। एक तांत्रिक को घर लाया गया, उन्होंने काफ़ी क्रियाएँ कीं, बहुत पैसा खर्च हुआ; चार-पाँच महीने परिवार ठीक रहा और दोनों भाई भी ठीक हो गए। फिर होली के आसपास, होलिका दहन के पास (किस साल, वक्ता को ठीक याद नहीं), बड़े भाई की दुर्घटना में मौके पर ही मृत्यु हो गई, और दस दिन के भीतर, श्राद्ध कर्म पूरा होने से पहले ही, मँझले भाई की भी मृत्यु हो गई, वह भी दुर्घटना से। परिवार टूट गया। बचे भाई की पत्नी को चलने-फिरने की समस्या शुरू हुई: वे कहती थीं कि दाहिना पैर ज़मीन पर रख ही नहीं पातीं, पूरा सूज गया है, और अच्छे-से-अच्छे डॉक्टरों को कोई समस्या नहीं मिली। अब दोनों मृत भाइयों की आवाज़ में हर दूसरे-तीसरे दिन बुलावा आता था। इतना समझ आ रहा था कि कुछ गड़बड़ है, वक्ता कहते हैं, पर कहीं दिखाने पर बात पकड़ में नहीं आती थी; और परिवार समृद्ध था, इसलिए शत्रु बहुत थे, किस पर शक करें, पता नहीं था।
पीड़ित परिवार को उपाय स्वयं क्यों करना चाहिए: बाहरी सहायता कुछ समय ही चलती है
तांत्रिक की सहायता समाप्त होती है; फिर आप अकेले हैं
वक्ता कहते हैं कि जब परिवार ने उनसे संपर्क किया, भैरव अष्टमी आने वाली थी, तो उन्होंने महाभैरव मंत्र की विधि बताई और कहा कि इसे स्वयं करें। कारण: तांत्रिक, ऊर्जा वाला या गुणी कोई कितनी भी सहायता करे, एक निश्चित समय तक ही करेगा, उसके बाद आप अकेले रह जाएँगे और परेशानी फिर होगी। वह व्यक्ति पहले ही बहुत प्रताड़ित हो चुका था, वे कहते हैं, और बाकी परिवार को बचाना था।
वक्ता कहते हैं कि परिवार ने उनसे तब संपर्क किया जब भैरव अष्टमी आने वाली थी। उन्होंने उन्हें महाभैरव मंत्र की विधि बताई और कहा: इसे स्वयं कीजिए। उनका तर्क एक सामान्य नियम है: देखिए, तांत्रिक, ऊर्जा वाला, गुणी कोई कितनी भी आपकी सहायता करेगा, एक निश्चित समय तक ही करेगा। उसके बाद आप फिर अकेले रह जाएँगे और परेशानी आपको ही होगी। यहाँ आदमी पहले ही प्रताड़ित हो चुका था, इतना कुछ देख चुका था; अब बाकी परिवार को बचाना था। तो उन्होंने बात मानी और स्वयं करना शुरू किया।
मारण प्रयोग के विरुद्ध पहला चरण: शिव मंदिर में 21 दिन रोज़ 21 माला महाभैरव मंत्र
एक माला से शुरू करता नया साधक
वक्ता कहते हैं कि उन्होंने उस व्यक्ति से शिव मंदिर में रोज़ 21 माला महाभैरव मंत्र करने को कहा। वे कोई बड़े साधक नहीं, बिल्कुल नए थे, इसलिए शुरू में एक-आध माला से, धीरे-धीरे, क्योंकि मंत्र थोड़ा बड़ा है और समय लगता है; गाँव के जीवट व्यक्ति थे, बैठने का अभ्यास था, तो कर पाए। 21 दिन तक 21-21 माला का पहला चक्र शिव मंदिर में दीप प्रज्वलित करवाकर पूरा हुआ। परिणाम, वक्ता कहते हैं, यह हुआ कि उनके शरीर में शांति आई और उन्होंने कहा कि बहुत बड़ा बल मिल गया, लगता है हम लड़ लेंगे, और पूछा कि आगे क्या करना है।
वक्ता कहते हैं कि पहला निर्देश था शिव मंदिर में रोज़ महाभैरव मंत्र की 21 माला करना। वह व्यक्ति कोई बड़ा साधक नहीं था; बिल्कुल नया था। इसलिए शुरू में एक-आध माला से, बहुत आराम से शुरू किया, क्योंकि मंत्र थोड़ा बड़ा है और अच्छा-खासा समय लग जाता था। गाँव के व्यक्ति थे, जीवट थे, बैठने का अभ्यास था, तो कोई दिक्कत नहीं हुई। फिर पहली बार 21 दिन तक रोज़ 21 माला शिव मंदिर में, दीप प्रज्वलित करवाकर, पूरी करवाई गई। उनके शरीर में, वक्ता कहते हैं, कहीं न कहीं शांति आई। सबसे पहली बात उन्होंने यह कही: मुझे एक बहुत बड़ा बल मिल गया है; ऐसा लग रहा है कि हम लड़ लेंगे। अब बताइए आगे क्या करना है।
दूसरा चरण: 21 दिन रोज़ शाम पाँच बार बटुक भैरव स्तोत्र, तंत्रोक्त बटुक भैरव यंत्र के साथ
बटुक भैरव का यंत्र, अष्ट भैरव का नहीं
जब 21 दिन का मंत्र चक्र पूरा हुआ, वक्ता कहते हैं, उन्होंने कहा कि बटुक भैरव स्तोत्र के कम से कम पाँच पाठ रोज़, शाम के समय, शिव मंदिर में ही, 21 दिन लगातार करें और इसे कम से कम दो-तीन महीने दोहराते रहें; संकल्प उन्हें बता दिया। साथ में बटुक भैरव का तंत्रोक्त यंत्र विधि-विधान से, तंत्रोक्त तरीके से बनवाकर तंत्रोक्त माला के साथ भिजवाया। वे ज़ोर देते हैं कि यंत्र बटुक भैरव का हो, ashta-bhairav का नहीं। वे कहते हैं कि यह स्तोत्र और विधान अभी चैनल पर नहीं है, इस अनुभव के बाद डाल देंगे।
पहला चक्र पूरा होने पर, वक्ता कहते हैं, अगली चीज़ थी बटुक भैरव स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है।। वे बताते हैं कि यह अभी चैनल पर नहीं डाला है, इस अनुभव के बाद डालेंगे, क्योंकि वे बता रहे हैं कि इतना बड़ा प्रयोग कैसे शांत और नष्ट किया गया। उन्होंने कहा: फिर से शिव मंदिर में ही, रोज़ शाम के समय स्तोत्र के कम से कम पाँच पाठ, 21 दिन लगातार, और इसे बार-बार दोहराइए; कम से कम दो-तीन महीने शिव मंदिर में ही करते रहिए। संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। बता दिया और उन्होंने शुरू कर दिया। साथ में बटुक भैरव जी का तंत्रोक्ततंत्र में कहा गया, जो उसी कर्म अथवा मंत्र के वेदोक्त रूप से भिन्न होता है। यंत्र पूरे विधि-विधान से, तंत्रोक्त तरीके से बनवाकर तंत्रोक्त माला के साथ भिजवा दिया। वक्ता एक सावधानी जोड़ते हैं: ध्यान रहे, यह बटुक भैरव का तंत्रोक्त यंत्र है, ashta-bhairav का नहीं।
मंदिर में रखे यंत्र के साथ नित्य क्रम: एक माला, पाँच स्तोत्र पाठ, एक माला
यंत्र शिव के पास स्थापित, घर नहीं ले जाना
वक्ता कहते हैं कि उन्होंने नित्य क्रम यह तय किया: महाभैरव मंत्र की कम से कम एक माला, फिर बटुक भैरव स्तोत्र के कम से कम पाँच पाठ, फिर महाभैरव मंत्र की एक और माला, और यह पूरा यंत्र पर समर्पित करते जाना। यंत्र मंदिर में शिव जी के पास स्थापित करना था और सब कुछ वहीं उस पर समर्पित करना था। उसे घर नहीं ले जाना था; मंदिर में ही कुछ व्यवस्था बनानी थी ताकि यंत्र 21 दिन वहीं रहे।
वक्ता कहते हैं कि फिर उन्होंने नित्य कार्य बताया: महाभैरव मंत्र की कम से कम एक माला कीजिए; बटुक भैरव स्तोत्रदेवता की स्तुति का पाठ, जिसे बिना दीक्षा के भी पढ़ा जा सकता है, जबकि मंत्र के लिए दीक्षा अपेक्षित है। के कम से कम पाँच पाठ कीजिए; फिर महाभैरव मंत्र की एक माला कीजिए। और यह पूरा यंत्र शिव जी के पास स्थापित कीजिए और उसी पर समर्पित करते जाइए। यंत्र घर नहीं ले जाना था। उन्होंने कहा: मंदिर में ही कुछ व्यवस्था बना लीजिए; यंत्र 21 दिन वहीं रहेगा। उन्होंने यह करना शुरू कर दिया।
जब अभिचार अनुष्ठान बार-बार तोड़े: अधूरे दिन भी फलते हैं, पर एक पूरा 21-दिन चक्र ज़रूरी
हफ़्तों का काम चार-पाँच महीने में
वक्ता कहते हैं कि पूरी विधि में चार-पाँच महीने लगे क्योंकि पहली बार अनुष्ठान पूरा नहीं हो पाया: जब चीज़ें ऐसी गड़बड़ होती हैं तो अनुष्ठान सफल नहीं होने दिया जाता, कभी किसी की तबीयत खराब, कभी खुद की, कभी कुछ और। उस व्यक्ति ने अपनी अवस्था समझी, हार नहीं मानी और धीरे-धीरे करते गए। ऐसा नहीं है, वक्ता कहते हैं, कि दस दिन किया तो फल नहीं मिलेगा; मिला। पर 21 दिन का एक पूरा अनुष्ठान एक बार हो जाए तो बहुत अच्छा है, और 21 बार का चक्र जब हो जाए तब जाकर सफल होता है। अंततः शिव मंदिर में 21-21 दिन के चक्र पूरे हुए।
वक्ता कहते हैं कि मान कर चलिए कि पूरी विधियों में चार-पाँच महीने लगे, क्योंकि पहली बार उनका अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। पूरा नहीं हो पाया। जब चीज़ें ऐसी गड़बड़ होती हैं, वे कहते हैं, तो अनुष्ठान भी सफल नहीं होने दिया जाता: कभी किसी की तबीयत खराब, कभी उनकी खुद की, कभी कुछ और। पर उस व्यक्ति ने अपनी अवस्था समझी, हार नहीं मानी और धीरे-धीरे करते गए। और ऐसा नहीं था, वक्ता कहते हैं, कि 10 दिन किए हैं तो फल नहीं मिलेगा; वह मिला। फिर भी 21 दिन का एक पूरा अनुष्ठान एक बार हो जाए तो बहुत अच्छा रहता है; 21 बार का चक्र जब पूरा हो जाए तब जाकर सफल होता है। तो शिव जी के पास 21-21 दिन के चक्र पूरे किए गए, और उसके बाद ही अगले चरण पर बढ़े।
मंदिर चक्रों के बाद: घर की निकारी, बंधन, भैरव यंत्र की स्थापना, हर सदस्य को कवच, नित्य धूनी और हवन
सब कुछ स्वयं बनाया और अभिमंत्रित, चरण दर चरण
वक्ता कहते हैं कि मंदिर में 21-21 दिन के चक्र पूरे होने पर उन्होंने बताया कि घर से निकासी (निकारी) स्वयं कैसे करनी है, किस चीज़ को कैसे अभिमंत्रित करना है, और घर का बंधन कैसे करना है। उसी विधि-विधान से घर का बंधन करवाया और घर में भैरव यंत्र स्थापित करवाया। निकारी के बाद उन्हीं से यंत्र बनवाकर, उन्हीं से अभिमंत्रित करवाकर घर के हर सदस्य को कवच के रूप में पहनाया। फिर घर में रोज़ अभिचार-नाश के लिए स्तोत्र से होने वाला धूनी प्रयोग शुरू करवाया, और हवन भी; एक-एक चीज़ बताकर, बहुत समय और मेहनत से करवाया, तब जाकर तंत्र का प्रभाव घटना शुरू हुआ।
वक्ता कहते हैं कि शिव जी के पास 21-21 दिन के चक्र पूरे होने के बाद उन्होंने तरीका बताया: घर से निकासी (निकारी) कैसे करनी है, स्वयं कैसे करनी है, किस चीज़ को क्या करना है, क्या अभिमंत्रित करना है, और घर का बंधन कैसे करना है। इसी विधि-विधान से घर का बंधन करवाया और घर में भैरव यंत्र स्थापित करवाया। निकारी के बाद उन्हीं से यंत्र बनवाकर, उन्हीं से अभिमंत्रित करवाकर घर के प्रत्येक सदस्य को कवच के रूप में पहनाया। फिर घर में प्रतिदिन इस स्तोत्र के द्वारा अभिचार-नाश के लिए जो धूनीविशेष लकड़ियों व बीजों को जलाकर घर या स्थान से नकारात्मक या तांत्रिक ऊर्जा दूर करने हेतु की जाने वाली धूनी। प्रयोग होता है, वह शुरू करवाया, और हवन भी करवाया। एक-एक चीज़ बता-बताकर करवाई गई; बहुत समय दिया गया, बहुत मेहनत की गई। तब जाकर, वक्ता कहते हैं, उनके घर से उस तंत्र का प्रभाव कम होना शुरू हुआ।
मारण प्रयोग से राहत में कितना समय लगा: चैत्र पूर्णिमा से आठ महीने बाद शांत घर तक
राहत के बाद भी नित्य अभ्यास जारी
वक्ता कहते हैं कि प्रभाव धीरे-धीरे घटा: मार्च-अप्रैल से राहत शुरू हुई, चैत्र पूर्णिमा के आसपास पूरा विधान पूर्ण हुआ, और नवंबर के अंत तक, आठ-नौ महीने बाद, न किसी की आवाज़ आई, न खून का छींटा, न पत्नी के पैर में कोई समस्या, न किसी और को कोई बाधा। वह व्यक्ति अब भी रोज़ सुबह-शाम नियमित अभ्यास करता है, और परिवार के बाकी लोगों को भी बताया गया है कि क्या करना है, कवच आदि पाठ सिखाए गए और सबने शुरू कर दिया है। परिवार मज़बूत हुआ, लोग समझे, और आज बटुक भैरव की कृपा से सुरक्षित हैं, वे कहते हैं।
वक्ता कहते हैं कि प्रभाव कम होते-होते अब मान कर चलिए आठ-नौ महीने हो चुके हैं। आखिरी प्रयोग के बाद मार्च-अप्रैल से राहत मिलनी शुरू हुई थी; अप्रैल मान लीजिए। और चैत्र पूर्णिमा के आसपास उनका सारा विधान पूरा हो गया था। अब जब नवंबर खत्म होने को है, न किसी की आवाज़ आई है, न रक्त का छींटा, न पत्नी के पैर में कोई समस्या, न किसी अन्य को इस प्रकार की कोई बाधा। ऐसी कोई चीज़ नहीं हो रही। और वह व्यक्ति अब भी नियमित, रोज़ सुबह-शाम करते हैं। परिवार के बाकी लोगों को भी कुछ-कुछ बता दिया गया है कि क्या-क्या करना है; सबको कवच आदि पाठ, कैसे क्या करना है, सिखाया गया और सब शुरू करवा दिया गया। तो परिवार मज़बूत हुआ, लोग समझे, और आज भगवान बटुक भैरव की कृपा से सुरक्षित हो पाए।
अभिचार के विरुद्ध मंत्र जप शुरू करते ही परेशानी क्यों बढ़ जाती है?
प्रयोग को कष्ट होता है और वह पलटवार करता है; धैर्य न खोएँ
वक्ता कहते हैं कि जब उस व्यक्ति ने पहली बार मंत्र जप किया तो परेशानी बढ़ गई: रात में सो नहीं पाते थे और लगता था कोई गला दबा रहा है। वक्ता का स्पष्टीकरण: अभिचार बहुत बड़ा है, और जब आप जप करेंगे तो प्रयोग को कष्ट होगा; वह चाहेगा कि आप न करें, इसलिए रोकने के लिए गला दबाएगा, डराएगा, धमकाएगा, जो बन पड़ेगा करेगा। मारण क्रिया या शत्रु के तंत्र से ग्रस्त हर किसी के लिए उनका नियम: कोई चीज़ दो-तीन दिन करके छोड़िए मत, परेशान मत होइए, धैर्य मत खोइए; धैर्य रखते हुए अपने इष्ट देवता को समर्पित होकर करते रहिए, सफलता अवश्य मिलेगी।
वक्ता उन सबसे कहते हैं जिनके साथ ऐसी अवस्था बनी है, मारण क्रिया है या शत्रु तंत्र कर रहे हैं: किसी चीज़ को एक बार, दो बार, दो-तीन दिन करके छोड़िए मत; परेशान मत होइए; धैर्य मत खोइए। उन्हें पता है, वे कहते हैं, कि परेशानी बढ़ती है। इसी प्रकरण में उस व्यक्ति ने कहा था: भाई, परेशानी तो बढ़ रही है। जब पहली बार मंत्र जप किया तो परेशानी और बढ़ गई थी; रात में सो नहीं पाते थे। वक्ता ने यह बताया भी नहीं था, फिर भी उन्होंने खुद बताया कि पहली बार जप करने पर अवस्था ऐसी हो गई कि रात को सोते हैं तो लगता है कोई गला दबा रहा है। परेशानी तो होगी ही, वक्ता कहते हैं। अभिचार बहुत बड़ा है और आप मंत्र जप करके आ रहे हैं; जब आप जप करेंगे तो उसको कष्ट होगा। वह चाहेगा कि जप न हो। आपके करने से उसे कष्ट है, इसलिए रोकने के लिए वह गला दबाएगा, डराएगा, धमकाएगा, जितना बन पड़ेगा करेगा। इसलिए धैर्य नहीं खोना है। धैर्य रखते हुए अपने इष्ट देवता को समर्पित होकर यह करेंगे, वे कहते हैं, तो इसमें अवश्य सफलता मिलेगी।
अभिचार के विरुद्ध महाभैरव मंत्र: एक शाबर मंत्र जिसका कभी उच्चारण करके पाठ नहीं करना
प्रबलतम प्रयोगों पर अकाट्य, एक शर्त पर
वक्ता कहते हैं कि महाभैरव मंत्र, जो चैनल पर पहले से दिया है, विशेष रूप से अभिचार-नाश, रक्षण, शत्रु-नाश और प्रबलतम से प्रबलतम प्रयोग करने वालों के नाश के लिए अकाट्य है। पर चूँकि यह सबर मंत्र है, इसका कभी भी उच्चारण करते हुए पाठ नहीं करना है, और कभी बोलकर प्रयोग नहीं करना है। घर में कर सकते हैं पर बाहर कभी नहीं; घर में भी बोलकर नहीं कि घर के सदस्य सुनें, क्योंकि सुनने से प्रभाव पड़ेगा। इसका हवन चैनल पर पहले से दिए हवन विधान के अनुसार होगा; पूरी प्रयोग विधि स्तोत्र के साथ डाली जानी थी।
वक्ता कहते हैं कि यहाँ प्रयुक्त विधान जल्दी ही चैनल पर डालेंगे। महाभैरव मंत्र वहाँ पहले से दिया है; जो लोग कर रहे हैं वे उसकी प्रयोग विधि पूछ रहे थे, और वे प्रयोग विधि पूरे स्तोत्र के साथ डाल देंगे। वे मंत्र का क्षेत्र बताते हैं: विशेष रूप से अभिचार-नाश के लिए, रक्षण के लिए, शत्रु-नाश के लिए, और जो लोग प्रबलतम से प्रबलतम प्रयोग करते हैं उनके नाश के लिए यह मंत्र अकाट्य है। फिर सावधानी: चूँकि यह सबर मंत्र है, इसका कभी भी उच्चारण करते हुए पाठ नहीं करना है; इन सब बातों का ध्यान रखना होगा, और विधान डालते समय वे फिर बताएँगे। न ही कभी इसे बोलकर प्रयोग करना है। घर में कर सकते हैं, पर बाहर कभी प्रयोग नहीं; और घर में भी बोलकर नहीं कि घर के सदस्य सुनें, क्योंकि सुनने से उन पर प्रभाव पड़ेगा। इसका हवन चैनल पर पहले से दिए हवन विधि-विधान के तरीके से होगा। इस प्रकरण में, वे बताते हैं, उस व्यक्ति को बहुत समय दिया गया था।
निकारी के बाद घर के बंधन का समय: खाली घर में पुनः प्रवेश से पहले बाँधें
लौटने में बारह घंटे से बारह दिन
वक्ता कहते हैं कि जब परिवार के घर में भैरव यंत्र स्थापित हुआ, जिस तरह बताया गया था उसे जागृत और स्थापित किया, तो उसके प्रभाव से काफ़ी सारी चीज़ें कटीं। वे इसके पीछे का नियम बताते हैं: जब आप घर से निकासी (निकारी) करते हैं तो घर खाली हो जाता है; उसके बाद 24 घंटे मान लीजिए, 12 घंटे मान लीजिए, 12 घंटे से 12 दिन में वह चीज़ फिर वापस आती है। उसके वापस आने से पहले घर का बंधन हो जाना चाहिए, ऐसा प्रयोग कि घर में पुनः नकारात्मक शक्ति प्रवेश न कर पाए।
वक्ता कहते हैं कि जब उनके घर में भैरव यंत्र स्थापित हुआ, जिस तरीके से उन्होंने उसे जागृत और स्थापित किया, उसके प्रभाव से काफ़ी सारी चीज़ें कटीं। वे बताते हैं कि क्रम क्यों महत्वपूर्ण है। जब आप घर से निकासी (निकारी) करते हैं तो घर खाली हो जाता है। खाली होने के बाद 24 घंटे मान लीजिए, 12 घंटे मान लीजिए; 12 घंटे से 12 दिन में वह चीज़ फिर वापस आती है। उसके वापस आने से पहले घर का बंधन हो जाना चाहिए; ऐसा प्रयोग हो जाना चाहिए कि घर में पुनः नकारात्मक शक्ति प्रवेश न कर पाए। अंत में वे आशा करते हैं कि इस प्रकार के तंत्र से परेशान हर किसी को इस घटना से कुछ सीखने को मिलेगा: हार मत मानिए; हारना अलग बात है, पर हार नहीं माननी है; लगे रहिए, भगवती और बटुक भैरव की कृपा से अवश्य निकल जाएँगे।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।