सत्य घटना: श्री भैरव पाठ से मारण तंत्र कैसे नष्ट हुआ

मारण तंत्र से पीड़ित परिवार के सत्य मामले पर नोट्स।

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01

एक परिवार पर मारण प्रयोग कैसे प्रकट हुआ: आवाज़ें, खून के छींटे, विक्षिप्तता और दो मृत्युएँ

झारखंड का प्रकरण, पहले संकेत से टूटने तक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:04–04:24

वक्ता झारखंड में धनबाद के पास के एक गाँव की सत्य घटना बताते हैं, जहाँ तीन भाइयों के एक संपन्न परिवार पर बहुत तीव्र मारण प्रयोग किया गया था। लगभग तीन साल तक रात में घर के भीतर से कोई बुलाता सुनाई देता रहा, जिसे परिवार ने अनदेखा किया क्योंकि वे सामान्य पूजा-पाठ ही करते थे; फिर बड़े भाई पागल होने लगे, आसपास दिखाने-सुनाने से दो-तीन महीने का ही आराम मिला, मँझले भाई की भी वही स्थिति हुई, हर दूसरे-तीसरे दिन घर के सदस्यों की ही आवाज़ में कोई बुलाने लगा, और दीवारों व मुख्य चौखट के पास खून के छींटे मिलने लगे। एक तांत्रिक ने घर आकर बहुत खर्च से क्रियाएँ कीं और चार-पाँच महीने ठीक रहा; फिर होलिका दहन के आसपास बड़े भाई की दुर्घटना में मौके पर मृत्यु हुई और दस दिन के भीतर, श्राद्ध पूरा होने से पहले ही, मँझले भाई की भी दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इसके बाद बचे भाई की पत्नी अपना सूजा हुआ दाहिना पैर ज़मीन पर नहीं रख पाती थीं जबकि डॉक्टरों को कुछ नहीं मिला, और दोनों मृत भाइयों की आवाज़ में बुलावा आने लगा। परिवार समृद्ध था, वे कहते हैं, इसलिए शत्रु बहुत थे और किस पर शक करें, पता नहीं था।

02

पीड़ित परिवार को उपाय स्वयं क्यों करना चाहिए: बाहरी सहायता कुछ समय ही चलती है

तांत्रिक की सहायता समाप्त होती है; फिर आप अकेले हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:25–04:47

वक्ता कहते हैं कि जब परिवार ने उनसे संपर्क किया, भैरव अष्टमी आने वाली थी, तो उन्होंने महाभैरव मंत्र की विधि बताई और कहा कि इसे स्वयं करें। कारण: तांत्रिक, ऊर्जा वाला या गुणी कोई कितनी भी सहायता करे, एक निश्चित समय तक ही करेगा, उसके बाद आप अकेले रह जाएँगे और परेशानी फिर होगी। वह व्यक्ति पहले ही बहुत प्रताड़ित हो चुका था, वे कहते हैं, और बाकी परिवार को बचाना था।

03

मारण प्रयोग के विरुद्ध पहला चरण: शिव मंदिर में 21 दिन रोज़ 21 माला महाभैरव मंत्र

एक माला से शुरू करता नया साधक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:48–05:24

वक्ता कहते हैं कि उन्होंने उस व्यक्ति से शिव मंदिर में रोज़ 21 माला महाभैरव मंत्र करने को कहा। वे कोई बड़े साधक नहीं, बिल्कुल नए थे, इसलिए शुरू में एक-आध माला से, धीरे-धीरे, क्योंकि मंत्र थोड़ा बड़ा है और समय लगता है; गाँव के जीवट व्यक्ति थे, बैठने का अभ्यास था, तो कर पाए। 21 दिन तक 21-21 माला का पहला चक्र शिव मंदिर में दीप प्रज्वलित करवाकर पूरा हुआ। परिणाम, वक्ता कहते हैं, यह हुआ कि उनके शरीर में शांति आई और उन्होंने कहा कि बहुत बड़ा बल मिल गया, लगता है हम लड़ लेंगे, और पूछा कि आगे क्या करना है।

04

दूसरा चरण: 21 दिन रोज़ शाम पाँच बार बटुक भैरव स्तोत्र, तंत्रोक्त बटुक भैरव यंत्र के साथ

बटुक भैरव का यंत्र, अष्ट भैरव का नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:25–06:07

जब 21 दिन का मंत्र चक्र पूरा हुआ, वक्ता कहते हैं, उन्होंने कहा कि बटुक भैरव स्तोत्र के कम से कम पाँच पाठ रोज़, शाम के समय, शिव मंदिर में ही, 21 दिन लगातार करें और इसे कम से कम दो-तीन महीने दोहराते रहें; संकल्प उन्हें बता दिया। साथ में बटुक भैरव का तंत्रोक्त यंत्र विधि-विधान से, तंत्रोक्त तरीके से बनवाकर तंत्रोक्त माला के साथ भिजवाया। वे ज़ोर देते हैं कि यंत्र बटुक भैरव का हो, ashta-bhairav का नहीं। वे कहते हैं कि यह स्तोत्र और विधान अभी चैनल पर नहीं है, इस अनुभव के बाद डाल देंगे।

05

मंदिर में रखे यंत्र के साथ नित्य क्रम: एक माला, पाँच स्तोत्र पाठ, एक माला

यंत्र शिव के पास स्थापित, घर नहीं ले जाना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:08–06:32

वक्ता कहते हैं कि उन्होंने नित्य क्रम यह तय किया: महाभैरव मंत्र की कम से कम एक माला, फिर बटुक भैरव स्तोत्र के कम से कम पाँच पाठ, फिर महाभैरव मंत्र की एक और माला, और यह पूरा यंत्र पर समर्पित करते जाना। यंत्र मंदिर में शिव जी के पास स्थापित करना था और सब कुछ वहीं उस पर समर्पित करना था। उसे घर नहीं ले जाना था; मंदिर में ही कुछ व्यवस्था बनानी थी ताकि यंत्र 21 दिन वहीं रहे।

06

जब अभिचार अनुष्ठान बार-बार तोड़े: अधूरे दिन भी फलते हैं, पर एक पूरा 21-दिन चक्र ज़रूरी

हफ़्तों का काम चार-पाँच महीने में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:33–07:10

वक्ता कहते हैं कि पूरी विधि में चार-पाँच महीने लगे क्योंकि पहली बार अनुष्ठान पूरा नहीं हो पाया: जब चीज़ें ऐसी गड़बड़ होती हैं तो अनुष्ठान सफल नहीं होने दिया जाता, कभी किसी की तबीयत खराब, कभी खुद की, कभी कुछ और। उस व्यक्ति ने अपनी अवस्था समझी, हार नहीं मानी और धीरे-धीरे करते गए। ऐसा नहीं है, वक्ता कहते हैं, कि दस दिन किया तो फल नहीं मिलेगा; मिला। पर 21 दिन का एक पूरा अनुष्ठान एक बार हो जाए तो बहुत अच्छा है, और 21 बार का चक्र जब हो जाए तब जाकर सफल होता है। अंततः शिव मंदिर में 21-21 दिन के चक्र पूरे हुए।

07

मंदिर चक्रों के बाद: घर की निकारी, बंधन, भैरव यंत्र की स्थापना, हर सदस्य को कवच, नित्य धूनी और हवन

सब कुछ स्वयं बनाया और अभिमंत्रित, चरण दर चरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:11–07:46

वक्ता कहते हैं कि मंदिर में 21-21 दिन के चक्र पूरे होने पर उन्होंने बताया कि घर से निकासी (निकारी) स्वयं कैसे करनी है, किस चीज़ को कैसे अभिमंत्रित करना है, और घर का बंधन कैसे करना है। उसी विधि-विधान से घर का बंधन करवाया और घर में भैरव यंत्र स्थापित करवाया। निकारी के बाद उन्हीं से यंत्र बनवाकर, उन्हीं से अभिमंत्रित करवाकर घर के हर सदस्य को कवच के रूप में पहनाया। फिर घर में रोज़ अभिचार-नाश के लिए स्तोत्र से होने वाला धूनी प्रयोग शुरू करवाया, और हवन भी; एक-एक चीज़ बताकर, बहुत समय और मेहनत से करवाया, तब जाकर तंत्र का प्रभाव घटना शुरू हुआ।

08

मारण प्रयोग से राहत में कितना समय लगा: चैत्र पूर्णिमा से आठ महीने बाद शांत घर तक

राहत के बाद भी नित्य अभ्यास जारी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:47–08:42

वक्ता कहते हैं कि प्रभाव धीरे-धीरे घटा: मार्च-अप्रैल से राहत शुरू हुई, चैत्र पूर्णिमा के आसपास पूरा विधान पूर्ण हुआ, और नवंबर के अंत तक, आठ-नौ महीने बाद, न किसी की आवाज़ आई, न खून का छींटा, न पत्नी के पैर में कोई समस्या, न किसी और को कोई बाधा। वह व्यक्ति अब भी रोज़ सुबह-शाम नियमित अभ्यास करता है, और परिवार के बाकी लोगों को भी बताया गया है कि क्या करना है, कवच आदि पाठ सिखाए गए और सबने शुरू कर दिया है। परिवार मज़बूत हुआ, लोग समझे, और आज बटुक भैरव की कृपा से सुरक्षित हैं, वे कहते हैं।

09

अभिचार के विरुद्ध मंत्र जप शुरू करते ही परेशानी क्यों बढ़ जाती है?

प्रयोग को कष्ट होता है और वह पलटवार करता है; धैर्य न खोएँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:43–09:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जब उस व्यक्ति ने पहली बार मंत्र जप किया तो परेशानी बढ़ गई: रात में सो नहीं पाते थे और लगता था कोई गला दबा रहा है। वक्ता का स्पष्टीकरण: अभिचार बहुत बड़ा है, और जब आप जप करेंगे तो प्रयोग को कष्ट होगा; वह चाहेगा कि आप न करें, इसलिए रोकने के लिए गला दबाएगा, डराएगा, धमकाएगा, जो बन पड़ेगा करेगा। मारण क्रिया या शत्रु के तंत्र से ग्रस्त हर किसी के लिए उनका नियम: कोई चीज़ दो-तीन दिन करके छोड़िए मत, परेशान मत होइए, धैर्य मत खोइए; धैर्य रखते हुए अपने इष्ट देवता को समर्पित होकर करते रहिए, सफलता अवश्य मिलेगी।

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अभिचार के विरुद्ध महाभैरव मंत्र: एक शाबर मंत्र जिसका कभी उच्चारण करके पाठ नहीं करना

प्रबलतम प्रयोगों पर अकाट्य, एक शर्त पर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:37–10:25

वक्ता कहते हैं कि महाभैरव मंत्र, जो चैनल पर पहले से दिया है, विशेष रूप से अभिचार-नाश, रक्षण, शत्रु-नाश और प्रबलतम से प्रबलतम प्रयोग करने वालों के नाश के लिए अकाट्य है। पर चूँकि यह सबर मंत्र है, इसका कभी भी उच्चारण करते हुए पाठ नहीं करना है, और कभी बोलकर प्रयोग नहीं करना है। घर में कर सकते हैं पर बाहर कभी नहीं; घर में भी बोलकर नहीं कि घर के सदस्य सुनें, क्योंकि सुनने से प्रभाव पड़ेगा। इसका हवन चैनल पर पहले से दिए हवन विधान के अनुसार होगा; पूरी प्रयोग विधि स्तोत्र के साथ डाली जानी थी।

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निकारी के बाद घर के बंधन का समय: खाली घर में पुनः प्रवेश से पहले बाँधें

लौटने में बारह घंटे से बारह दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:26–11:20

वक्ता कहते हैं कि जब परिवार के घर में भैरव यंत्र स्थापित हुआ, जिस तरह बताया गया था उसे जागृत और स्थापित किया, तो उसके प्रभाव से काफ़ी सारी चीज़ें कटीं। वे इसके पीछे का नियम बताते हैं: जब आप घर से निकासी (निकारी) करते हैं तो घर खाली हो जाता है; उसके बाद 24 घंटे मान लीजिए, 12 घंटे मान लीजिए, 12 घंटे से 12 दिन में वह चीज़ फिर वापस आती है। उसके वापस आने से पहले घर का बंधन हो जाना चाहिए, ऐसा प्रयोग कि घर में पुनः नकारात्मक शक्ति प्रवेश न कर पाए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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