गृहस्थ के नौ रात्रि — महाविद्या क्रम से सप्तशती, रात्रि में नवदुर्गा जाप, हवन और पारण

दीक्षारहित गृहस्थ के लिए नौ रात्रि की नवरात्र योजना।

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02

पहली बार नवरात्र करना: प्रतिपदा को कलश स्थापना और क्षेत्रीय मुहूर्त का पालन

नए संवत्सर में कोई भी आरंभ कर सकता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:58–02:02

वक्ता कहते हैं कि जो नया संवत्सर आरंभ हो रहा है उसमें हर व्यक्ति नवरात्रि कर सकता है, पहली बार करने वाला भी। कलश स्थापना प्रतिपदा के दिन शुभ मुहूर्त में कर लें; अपने क्षेत्र के अनुसार भी कर सकते हैं — क्षेत्र के ज्ञानी ब्राह्मण-विद्वान जो समय बताएँ — उस दिन सुविधा अनुसार कलश स्थापना, घटस्थापना करें और अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। कलश स्थापना की पूरी विधि, अखंड ज्योत का विधान और नवरात्र के नियम — दीपक बुझ जाए तो क्या, हवन कैसे-कब करें, पारण किस दिन, नौ कन्या पूजन कैसे हो, और पुरुष का ब्रह्मचर्य स्वप्न दोष से खंडित हो जाए तो क्या करें — वे कहते हैं कि अलग वीडियो में पहले से दिए हैं, यहाँ नहीं दोहराए गए।

04

गृहस्थ नवरात्र योजना के दो अंग: दिन में दुर्गा सप्तशती, रात में तिथि अनुसार नवदुर्गा मंत्र

पाठ और जप साथ-साथ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:40–02:55

वक्ता कहते हैं कि नौ दिन दो चीजें साथ लेकर चलनी हैं। पहली, श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ। दूसरी, रात्रि काल में उस दिन की तिथि के अनुसार भगवती महादुर्गा का जो स्वरूप रहेगा, उन दुर्गा के स्वरूप के मंत्र का जप करके कृपा प्राप्त करना।

कैसे करना है, इस पर वक्ता कहते हैं कि दो चीजें लेकर चलनी हैं। पहली चीज है श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करना। दूसरी चीज है कि रात्रि काल में जो तिथिचंद्र पंचांग की एक तिथि — कुछ प्रतिमाओं (जैसे शिवलिंग) को प्रतिदिन स्नान आवश्यक है, जबकि अन्य को केवल अपने निर्धारित साप्ताहिक दिन या तिथि पर। है, उस तिथि के अनुसार भगवतीदेवी का आदरसूचक संबोधन, जो इन प्रवचनों में विचाराधीन किसी भी स्वरूप के लिए प्रयुक्त होता है। महादुर्गा का जो स्वरूप उस दिन रहेगा, उन दुर्गा के स्वरूप के मंत्र का जप करके कृपा प्राप्त करना।

05

नवरात्र जप की माला: रक्त चंदन, रुद्राक्ष या स्फटिक, पहले प्राण-प्रतिष्ठित

सोमवती अमावस्या उसे प्रतिष्ठित करने का दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:56–03:27

वक्ता कहते हैं कि जाप रक्त चंदन की माला या रुद्राक्ष की माला — इन दोनों में से किसी पर — और स्फटिक की माला पर भी किया जा सकता है। माला की प्राण प्रतिष्ठा करके उसे चेतन युक्त कर लें; विधान चैनल पर है। अभी तक प्राण-प्रतिष्ठित न की हो तो, वे कहते हैं, जो सोमवती अमावस्या पड़ रही है, जो दिव्य काल है, उस दिन भी कर सकते हैं। जिनके पास उनके माध्यम से किसी अनुष्ठान में मिली तंत्रोक्त रुद्राक्ष या वैसी माला है, उन्हें उसमें कुछ नहीं करना, सीधे जाप आरंभ करना है।

06

नवरात्र योजना में दुर्गा सप्तशती महाविद्या क्रम से पढ़ी जाती है, प्रतिदिन पूरी नहीं

पाठ नौ दिनों में बँटा हुआ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:28–03:41

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली बात यह है कि सप्तशती का पूर्ण पाठ प्रतिदिन नहीं करना है; महाविद्या क्रम से करेंगे, जिसकी पूरी विधि उन्होंने चैनल पर अलग से बताई है। वे कहते हैं कि नौ दिन एक साथ कैसे-कैसे करना है, यह यहाँ भी वर्णन करेंगे।

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली बात यह है कि सप्तशती का पूर्ण पाठ प्रतिदिन नहीं करना है। महाविद्या क्रम से करेंगे। महाविद्या क्रम की पूरी विधि चैनल पर अलग से बताई गई है, उसे देखकर और स्पष्ट हो सकते हैं। वे कहते हैं कि नौ दिन का एक साथ कैसे-कैसे करना है, यह अभी भी वर्णन करेंगे।

08

नवरात्र व्रत में भगवती के साथ पूजित देवता: गणपति, भैरव, हनुमान, नरसिंह, और महागुरु दत्त

चारों के नाम से अक्षत-पुष्प ही पर्याप्त

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:27–05:02

वक्ता कहते हैं कि भगवती के साथ गणेश जी, भैरव जी, हनुमान जी और भगवान नरसिंह — इन चारों का पूजन करना होता है। चारों के नाम से केवल अक्षत-पुष्प चढ़ा दें तो भी पूजा स्वीकार है, इसलिए अधिक चिंतन न करें; विधान आता हो तो बढ़िया, नहीं तो केवल इतना। तरीका: आसन पर बैठें, आचमन करें, गणपति और अपने गुरु का ध्यान करें — गुरु न हों तो भगवान दत्तात्रेय का, जो महागुरु हैं, सबके गुरु, जिनके भीतर ब्रह्मा, विष्णु, महेश एकत्रित हैं — उनके नाम से अक्षत-पुष्प समर्पित करें, फिर गणपति के नाम से, फिर बटुक भैरव के नाम से, और तब दुर्गा सप्तशती का पाठ आरंभ करें।

09

महाविद्या क्रम में दैनिक सप्तशती पाठ: उत्कीलन या मृत्यु संजीवनी नहीं; कवच, अर्गला, कीलक, उस दिन का अध्याय, फिर तंत्रोक्त देवी सूक्तम

अध्याय के आगे-पीछे का नित्य ढाँचा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:03–05:30

वक्ता कहते हैं कि जब सप्तशती का पूजन-पाठ महाविद्या क्रम से होता है तो उत्कीलन और मृत्यु संजीवनी (संजीवन) क्रम करने की आवश्यकता नहीं होती — यह उन्होंने अलग वीडियो में प्रमाण सहित बताया है। करना केवल कवच, अर्गला, कीलक का पाठ है, फिर उस दिन का अध्याय — पहले दिन प्रथम अध्याय — और अध्याय के बाद तंत्रोक्त देवी सूक्तम का पाठ, 'या देवी सर्वभूतेषु' वाली स्तुति। कवच, अर्गला, कीलक नौ दिन प्रतिदिन होंगे।

11

संस्कृत न आती हो तो क्या दुर्गा सप्तशती हिंदी में पढ़ी जा सकती है?

अभी भाव से हिंदी; रोज दस श्लोक से संस्कृत सीखें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:47–06:53 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिन्हें संस्कृत में पाठ नहीं आता वे गलत पाठ न करें; हिंदी में भाव पूर्वक पूर्ण पाठ करें। कोई परेशानी नहीं — कोई कितना भी कहे कि हिंदी में कुछ नहीं होता, माँ भाव की भूखी हैं, और फिर भी दोनों विषय आ जाते हैं। पर वे यह नहीं कह रहे कि जीवन भर हिंदी में ही पढ़ें: संस्कृत सीखनी है। दो-तीन, चार-पाँच नवरात्र होते-होते धीरे-धीरे आने लगेगी; आधा घंटा या 15 मिनट दें तो छह महीने में सीख जाएँगे; सप्तशती 700 श्लोक ही है, रोज 10 श्लोक करें तो दो महीने 10 दिन में — केवल उच्चारण, कंठस्थ नहीं — और तब, वे कहते हैं, पीढ़ी की पीढ़ी तर जाएगी। अभी सामान्य जन हिंदी में पढ़ें।

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प्रतिपदा की रात्रि जप विधि: कर्म साक्षी दीपक, चारों रक्षकों को अर्पण, और शैलपुत्री की नौ माला

लगभग आठ बजे, संक्षिप्त, पूर्ण, लौंग-कपूर से समापन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:54–07:51

वक्ता कहते हैं कि प्रतिपदा की रात — या पहले, संध्या में, परिवार के साथ या अकेले आरती कर लेने पर — लगभग आठ बजे पुनः आसन पर बैठें। अखंड ज्योति प्रज्वलित है; एक कर्म साक्षी दीपक अलग से जलाएँ, धूप, दीप, नैवेद्य करें, और गुरु, गणेश, बटुक भैरव व भगवान नरसिंह के नाम से अक्षत-पुष्प अर्पित करें। फिर भगवती के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री दुर्गा के मंत्र की नौ माला जाप करके भगवती को समर्पित कर दें; इतना ही करना है। चाहें तो किसी पात्र में नौ कपूर, नौ लौंग प्रज्वलित कर दें। पहले दिन का पूजन पूर्ण; समय बहुत कम लगेगा, एकदम प्रामाणिक रहेगा, और भगवती की पूर्ण कृपा मिलेगी। नौ रात्रियों के लिए नौ दुर्गाओं के मंत्र उनके दिए एक पीडीएफ में हैं।

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नवमी का विकल्प: अष्टमी की रात महागौरी और सिद्धिदात्री का एक साथ जप, और सुबह के हवन में हर दुर्गा की सत्ताईस आहुति

पहले मार्ग पर संशय हो तो दूसरा मार्ग

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:06–10:32

वक्ता कहते हैं कि पूर्णाहुति के बाद नवमी की रात जप पर मन में संशय हो तो दूसरा मार्ग है। अष्टमी की रात महागौरी की नौ माला के बाद भगवती सिद्धिदात्री की भी नौ माला उसी बैठक में कर दें — दोनों का जाप अष्टमी को ही हो गया। फिर नवमी की सुबह अग्नि में नौ दुर्गाओं में से प्रत्येक के मंत्र से कम से कम 27-27 आहुति दें; स्त्री गुग्गुल से, पुरुष घी से। नवमी को पारण करना, वे जोड़ते हैं, श्रोता का अपना विषय है, अपने अनुसार देख लें।

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क्या स्त्री नवरात्र हवन में आहुति दे सकती है, और किससे?

वेदोक्त विधान में नहीं; इस तंत्रोक्त विधान में हाँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:33–11:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि स्त्री गुग्गुल से आहुति दे और पुरुष घी से। स्त्री आहुति दे सकती है या नहीं, इस प्रश्न पर वे कहते हैं कि वैदिक विधान में नहीं देनी चाहिए — वेदोक्त विधान में नहीं होता — और आजकल लोग इस पर बहुत होशियार हो गए हैं; पर यह तंत्रोक्त विधान है, जगदम्बा का विधान है, और इसमें स्त्री सामान्य आहुति आदि बिना किसी दिक्कत के कर सकती है।

17

अष्टमी-नवमी संधि काल: चामुंडा का पूजन, और न्यूनतम एक नारियल व तीन नींबू की बलि

अष्टमी के अंतिम बीस और नवमी के पहले बीस मिनट

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:03–11:53

वक्ता कहते हैं कि अष्टमी के अंतिम बीस मिनट और नवमी के आरंभ के बीस मिनट संधि काल कहलाते हैं। इसी में भगवती का सबसे प्रमुख स्वरूप, जगदम्बा का चामुंडा स्वरूप — उनका सबसे बड़ा तंत्रोक्त स्वरूप — प्रकट हुआ, इसलिए इस समय उस स्वरूप का पूजन करना चाहिए; उसका पूरा विधान अष्टमी रात के दो दुर्गाओं के जाप से अलग है। दीपदान कैसे करें, किन्हें बलि दें और किन्हें नहीं, यह अलग वीडियो में है; संभव हो तो करें। उतनी बड़ी विधि न कर पाएँ तो कम से कम एक नारियल और तीन नींबू की बलि जरूर दें, और कपूर-लौंग जला दें।

18

नवरात्र पारण से पहले दान और समर्पण

पहले पूरा व्रत जगदंबा को समर्पित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:54–12:09

वक्ता कहते हैं कि इतना करने के बाद, अंतिम दिन पारण से पहले कुछ अन्न आदि का दान और दक्षिणा का दान संकल्प करके करना है; और अंत में समर्पण — कि जो पूरा नवरात्रि व्रत किया है वह जगदम्बा को समर्पित करते हैं। उसके बाद ही पारण करें।

इतना करने के बाद, वक्ता कहते हैं, अंतिम दिन जब पारणनियत समय पर व्रत का विधिपूर्वक पारण, जिसके बिना व्रत अपूर्ण माना जाता है। करेंगे उससे पहले कुछ अन्न आदि का दान करना है, और दक्षिणागुरु अथवा आचार्य को दी जाने वाली भेंट, जिससे अनुष्ठान पूर्ण होता है; इसके बिना कर्म अपूर्ण माना जाता है। आदि का दान संकल्पकिसी पूजा या अनुष्ठान से पहले उसका उद्देश्य बताते हुए लिया गया औपचारिक संकल्प, जिससे उसका पुण्य समर्पित किया जाता है। करके करना है। और अंत में समर्पण: कि हम पूरे नवरात्रि व्रतउपवास और संयम के साथ निभाया जाने वाला संकल्प, जो अनुष्ठान की अवधि तक चलता है। को जो किए हैं, जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम।, आपको समर्पित करते हैं। उसके बाद ही, वे कहते हैं, पारण करें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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