गृहस्थ के नौ रात्रि — महाविद्या क्रम से सप्तशती, रात्रि में नवदुर्गा जाप, हवन और पारण

दीक्षारहित गृहस्थ के लिए नौ रात्रि की नवरात्र योजना।

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02

नए संवत्सर में पहला नवरात्र, और प्रतिपदा को घट स्थापना

क्या कोई पहली बार भी नवरात्र रख सकता है, और कलश स्थापना कब होती है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:58–02:02 · Also a question

जो नया संवत्सर आरंभ हो रहा है, उसमें प्रत्येक व्यक्ति नवरात्र कर सकता है, वह भी जो पहली बार कर रहा हो। कलश स्थापना प्रतिपदा के दिन शुभ मुहूर्त में की जाती है; अपने क्षेत्र के ज्ञानी ब्राह्मण-विद्वानों द्वारा बताए गए समय के अनुसार भी किया जा सकता है।

04

दिन में सप्तशती पाठ, रात्रि में तिथि अनुसार दुर्गा मंत्र जाप

साथ-साथ दो चीजें — दिन में सप्तशती पाठ, रात्रि में तिथि के अनुसार दुर्गा मंत्र

· Reviewed Sep 2026 · 02:40–02:55

दो चीजें साथ लेकर चलनी हैं। पहली है श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करना। दूसरी है रात्रि काल में, उस दिन जो तिथि है उसके अनुसार भगवती महादुर्गा का जो स्वरूप रहेगा, उस स्वरूप के मंत्र का जाप करके कृपा प्राप्त करना।

अब यह कि करना कैसे है: वक्ता कहते हैं कि दो चीजें लेकर चलनी हैं। पहली चीज है श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करना। दूसरी चीज है कि रात्रि काल में, जो तिथि है उस तिथि के अनुसार उस दिन भगवती महादुर्गा का जो स्वरूप रहेगा, उन दुर्गा स्वरूप के मंत्र का जाप करके कृपा प्राप्त करना।

05

रक्त चंदन, रुद्राक्ष या स्फटिक की माला और उसका चेतन-युक्त होना

नवरात्र के जाप के लिए कौन-सी माला ली जाए, और क्या उसकी प्राण प्रतिष्ठा आवश्यक है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:56–03:27 · Also a question

जाप के लिए रक्त चंदन की माला या रुद्राक्ष की माला — इन दोनों में से कोई भी — ली जा सकती है, और स्फटिक की माला पर भी जाप किया जा सकता है। माला को प्राण प्रतिष्ठित और चेतन-युक्त कर लें; विधान चैनल पर दिया गया है। यदि अब तक प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई है तो अमावस्या तिथि के दिन, जो सोमवती अमावस्या पड़ रही है और दिव्य काल है, उस दिन भी किया जा सकता है।

06

महाविद्या क्रम — सप्तशती का नौ तिथियों में विभाजन

क्या पूरी दुर्गा सप्तशती प्रतिदिन पढ़ी जाती है?

· Reviewed Sep 2026 · 03:28–03:41 · Also a question

नहीं — सप्तशती का पूर्ण पाठ प्रतिदिन नहीं करना है। वह महाविद्या क्रम से किया जाता है, जिसकी पूरी विधि चैनल पर अलग से दी गई है। वे कहते हैं कि यहां वे बताएंगे कि नौ दिन का एक साथ कैसे-कैसे करना है।

वक्ता कहते हैं कि अब सबसे पहली बात: सप्तशती का पूर्ण पाठ हमें प्रतिदिन नहीं करना है। हम उसे महाविद्या क्रम से करेंगे। महाविद्या क्रम की पूरी विधि चैनल पर अलग से बताई गई है, श्रोता उसे भी देखकर और स्पष्ट हो सकते हैं। आज भी वे वर्णन करेंगे कि नौ दिन का एक साथ कैसे-कैसे करना है।

09

गणपति, भैरव, हनुमान और नरसिंह; और महागुरु के रूप में भगवान दत्त

नवरात्र व्रत में भगवती के साथ किन देवताओं का पूजन किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:27–05:02 · Also a question

भगवती के साथ गणपति जी, भैरव जी, हनुमान जी और भगवान नरसिंह — इन चारों का पूजन करना होता है। यदि आप केवल इन चारों के नाम से अक्षत और पुष्प चढ़ाते हैं तो भी आपकी पूजा स्वीकार है, इसलिए अधिक चिंतन नहीं करना चाहिए। यदि विधान आता है तो बढ़िया है, नहीं तो केवल इतना।

10

उत्कीलन या मृत्यु संजीवनी की आवश्यकता नहीं; कवच, अर्गला, कीलक, प्रथम अध्याय, फिर तंत्रोक्त देवी सूक्तम

इस क्रम में उत्कीलन या मृत्यु संजीवनी नहीं — कवच, अर्गला, कीलक, प्रथम अध्याय, फिर देवी सूक्तम

· Reviewed Sep 2026 · 05:03–05:30

जब पूजन और पाठ महाविद्या क्रम से किए जाते हैं, तो उसमें उत्कीलन और मृत्यु संजीवनी अथवा संजीवन क्रम करने की आवश्यकता नहीं होती; वे कहते हैं कि यह उन्होंने उस वीडियो में अलग से बताया है और प्रमाण भी दिए हैं। आपको केवल कवच, अर्गला और कीलक का पाठ करना है, और पहले दिन प्रथम अध्याय का; प्रथम अध्याय के पश्चात तंत्रोक्त देवी सूक्तम का पाठ करना है।

12

गलत संस्कृत पाठ के बजाय पूरी सप्तशती हिंदी में भावपूर्वक पढ़ना

यदि संस्कृत का उच्चारण न आता हो तो क्या दुर्गा सप्तशती हिंदी में पढ़ी जा सकती है?

· Reviewed Sep 2026 · 05:47–06:05 · Also a question

जिन्हें संस्कृत में पाठ करना नहीं आता, वे कृपया गलत पाठ न करें। हिंदी में भावपूर्वक पूर्ण पाठ कीजिए। इसमें कोई परेशानी नहीं है — कोई कितना भी कहे कि हिंदी में करने से कुछ नहीं होता, और यह भी कि "मां भाव की भूखी हैं" — ये दोनों विषय आते हैं, और आपको चिंता नहीं करनी है।

13

कुछ नवरात्रों में संस्कृत सीखना — प्रतिदिन दस श्लोक से 700 श्लोक

कुछ नवरात्रों में प्रतिदिन दस श्लोक — सातों सौ श्लोक पूरे हो जाते हैं

· Reviewed Sep 2026 · 06:06–06:53

वे यह नहीं कह रहे कि जीवन पर्यंत हिंदी में ही पाठ करें। दो-तीन, चार-पांच नवरात्र होते-होते संस्कृत धीरे-धीरे आने लगेगी; आधा घंटा या पंद्रह मिनट दीजिए तो छह महीने में सीख जाइएगा। श्लोक तो 700 ही हैं — प्रतिदिन दस करेंगे तो दो महीने दस दिन में सीख जाइएगा। केवल उच्चारण करना सीखना है, कंठस्थ नहीं करना है।

14

आठ बजे, एक कर्म साक्षी दीपक, और शैलपुत्री का मंत्र

लगभग आठ बजे, कर्म साक्षी दीपक के साथ, शैलपुत्री के मंत्र पर

· Reviewed Sep 2026 · 06:54–07:30

प्रतिपदा की रात्रि में, या संध्या के समय जब परिवार के साथ या अकेले आरती हो जाए, तब पहले भी जाप कर सकते हैं; नहीं तो लगभग आठ बजे पुनः अपने आसन पर बैठें। अखंड ज्योत प्रज्वलित है; एक कर्म साक्षी दीपक अलग से प्रज्वलित करें, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें, गुरु, गणपति, बटुक भैरव और भगवान नरसिंह के नाम से अक्षत-पुष्प चढ़ाएं, और उसके बाद भगवती के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री दुर्गा के मंत्र का जाप करें।

15

नौ माला भगवती को समर्पित, और नौ लौंग तथा नौ कपूर प्रज्वलित

नौ माला भगवती को समर्पित, और समापन पर नौ लौंग तथा कपूर प्रज्वलित

· Reviewed Sep 2026 · 07:31–07:51

रात्रि में प्रथम दुर्गा स्वरूप का नौ माला जाप करके भगवती को समर्पित कर दिया जाता है। आपको इतना ही करना है। चाहें तो किसी पात्र में नौ कपूर और नौ लौंग प्रज्वलित कर दीजिए। इसके साथ पहले दिन का पूजन पूर्ण हुआ — समय बहुत कम लगेगा, समय एकदम प्रामाणिक रहेगा, और भगवती की पूर्ण कृपा प्राप्त होगी।

16

दूसरा-तीसरा अध्याय, चौथा, और पांचवां से आठवां; ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा और कूष्मांडा

दूसरा-तीसरा अध्याय, फिर चौथा, फिर पांचवें से आठवें तक — ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा

· Reviewed Sep 2026 · 07:52–08:33

द्वितीय तिथि को: पुनः कवच, अर्गला और कीलक, दुर्गा सप्तशती के दूसरे और तीसरे अध्याय, तथा तंत्रोक्त देवी सूक्तम, और रात्रि में भगवती ब्रह्मचारिणी का नौ माला जाप। तृतीया को: दिन में कवच, अर्गला, कीलक, चतुर्थ अध्याय और तंत्रोक्त देवी सूक्तम, तथा रात्रि में भगवती चंद्रघंटा का नौ माला जाप। चतुर्थी को: कवच, अर्गला, कीलक, पांचवां, छठवां, सातवां और आठवां अध्याय, तंत्रोक्त देवी सूक्तम, और रात्रि काल में भगवती कूष्मांडा के मंत्र का नौ माला जाप।

17

नौवां-दसवां अध्याय, फिर ग्यारहवां; स्कंदमाता और कात्यायनी

नौवां और दसवां अध्याय, फिर ग्यारहवां — रात्रि में स्कंदमाता और कात्यायनी

· Reviewed Sep 2026 · 08:34–09:00

पंचमी तिथि को कवच, अर्गला और कीलक के साथ नौवें और दसवें अध्याय का पाठ करें, और रात्रि काल में स्कंद माता के मंत्रों का जाप करें। षष्ठी तिथि को एकादश अध्याय, कवच, अर्गला, कीलक और तंत्रोक्त देवी सूक्तम के साथ। कवच, अर्गला और कीलक प्रतिदिन किए जाते हैं, और अध्यायों के बाद तंत्रोक्त देवी सूक्तम — "या देवी सर्वभूतेषु" वाली स्तुति — पढ़ी जाती है। षष्ठी की रात्रि में भगवती कात्यायनी का नौ माला जाप।

18

बारहवां-तेरहवां अध्याय, फिर तीनों रहस्य; कालरात्रि और महागौरी

बारहवां और तेरहवां अध्याय, फिर तीनों रहस्य — कालरात्रि और महागौरी

· Reviewed Sep 2026 · 09:01–09:28

सप्तमी तिथि को कवच, अर्गला और कीलक के साथ बारहवें और तेरहवें अध्याय का पाठ करें, देवी सूक्तम का पाठ करें, और रात्रि में भगवती कालरात्रि का नौ माला जाप करें। इससे तेरह अध्याय पूर्ण हो जाते हैं, इसलिए अष्टमी तिथि को कवच, अर्गला और कीलक के साथ तीनों रहस्यों का पाठ करेंगे — वे तीनों रहस्य, मूर्ति रहस्य आदि, जो तेरह अध्यायों और तंत्रोक्त देवी सूक्तम के बाद दिए गए हैं — और रात्रि में महागौरी के मंत्रों का जाप करेंगे।

20

अष्टमी की रात्रि में महागौरी और सिद्धिदात्री दोनों का जाप, नवमी की सुबह आहुतियां

अष्टमी की रात्रि में महागौरी और सिद्धिदात्री दोनों का जाप, आहुतियां नवमी की सुबह

· Reviewed Sep 2026 · 10:06–10:32

यदि मन में संशय रह जाए कि यह कैसे होगा, तो दूसरा मार्ग है। अष्टमी की रात्रि में महागौरी की नौ माला जपने के पश्चात भगवती सिद्धिदात्री का भी नौ माला जाप एक ही साथ कर दीजिए। फिर नवमी की सुबह नौ दुर्गाओं में से प्रत्येक के मंत्रों से कम से कम सत्ताईस-सत्ताईस आहुति अग्नि में दीजिए।

21

स्त्री के लिए गुग्गुल, पुरुष के लिए घी; वेदोक्त निषेध और तंत्रोक्त अनुमति

क्या स्त्री आहुति दे सकती है, और किस द्रव्य से?

· Reviewed Sep 2026 · 10:33–11:02 · Also a question

यदि आप स्त्री हैं तो गुग्गुल से दीजिए; पुरुष हैं तो घी से दीजिए। यह पूछे जाने पर कि क्या स्त्री आहुति दे भी सकती है, वक्ता उत्तर देते हैं कि वैदिक विधान में नहीं देना चाहिए, वेदोक्त विधान में नहीं होता — वे टिप्पणी करते हैं कि बाकी लोग आजकल बहुत होशियार हो चुके हैं। लेकिन, वे कहते हैं, यह तंत्रोक्त विधान है, यह जगदंबा का विधान है, और इसमें स्त्री सामान्य आहुति आदि कर सकती है, कोई दिक्कत नहीं है।

22

अष्टमी के अंतिम बीस मिनट और नवमी के आरंभ के बीस मिनट, और चामुंडा का प्रादुर्भाव

अष्टमी और नवमी के बीच का संधि काल क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 11:03–11:39 · Also a question

अष्टमी के अंतिम बीस मिनट और नवमी के आरंभ के बीस मिनट को संधि काल कहा जाता है। इसी में भगवती का सबसे प्रमुखतम स्वरूप, जिसे जगदंबा का चामुंडा स्वरूप कहा जाता है — जिसे वे सबसे बड़ी जगदंबा का सबसे बड़ा तंत्रोक्त स्वरूप कहते हैं — प्रादुर्भूत हुआ। इसलिए इस स्वरूप का पूजन इसी समय करना चाहिए। नवमी को पारण करना है या नहीं, यह श्रोता के अपने विवेक पर छोड़ा गया है।

23

दीप दान और बलि; न्यूनतम एक नारियल और तीन नींबू

जहां पूरी विधि संभव न हो: दीप दान, और कम से कम एक नारियल तथा तीन नींबू

· Reviewed Sep 2026 · 11:40–11:53

दीप दान कैसे करना है, बलि कैसे देनी है, किन्हें बलि देनी है और किन्हें नहीं — इस पर अलग से वीडियो है; वक्ता श्रोताओं से कहते हैं कि उसे भी देख लें और संभव हो तो कर भी लें। यदि इतनी बड़ी विधि नहीं कर पाएंगे तो कम से कम एक नारियल और तीन नींबू की बलि अवश्य दे दीजिए, और कपूर, लौंग आदि जला दीजिए।

24

अन्न और दक्षिणा का दान, और पूरे व्रत का जगदंबा को समर्पण

अन्न और दक्षिणा का दान, और पूरा व्रत जगदंबा को समर्पित

· Reviewed Sep 2026 · 11:54–12:28

इतना करने के बाद, अंतिम दिन पारण करने से पहले, कुछ अन्न आदि का दान करना है और दक्षिणा आदि का दान करना है, संकल्प करके; और अंत में समर्पण करना है — कि हमने जो पूरा नवरात्र व्रत किया है, जगदंबा, वह हम आपको समर्पित करते हैं। उसके बाद ही पारण करना चाहिए।

वक्ता कहते हैं कि इतना करने के बाद, अंतिम दिन, पारण करने से पहले कुछ अन्न आदि का दान करना है और दक्षिणा आदि का दान करना है, संकल्प करके। और अंत में समर्पण है: कि पूरा नवरात्र व्रत जो हमने किया है, जगदंबा, वह हम आपको समर्पित करते हैं। उसके बाद ही पारण कीजिएगा।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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