नकली गुरु के वशीकरण की पहचान, और दुर्गा सप्तशती से उसका काट

एक नकली गुरु के वशीकरण, उसके लक्षण और उसके काट की सत्य घटना।

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01

शक्ति की भोग-लालसा साधक पर बाध्यता कैसे बन जाती है

किसी भ्रष्ट तांत्रिक का क्षुद्र शक्ति को दिया गया वचन साधक के शरीर की माँग में कैसे बदल जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–01:36 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि जब कोई तांत्रिक क्षुद्र शक्तियों को सिद्ध करता है तो उन्हें दिए जाने वाले वचन खाने-पीने के भोग और गंध-सुगंध से आगे बढ़कर शरीर के भोग तक पहुँच जाते हैं; ऐसा वचन दे देने के बाद जो लोग अपनी समस्या के समाधान हेतु उस तांत्रिक के पास आते हैं, उन्हीं को उस वचन की पूर्ति के लिए बाध्य कर दिया जाता है।

02

उन्होंने ऑनलाइन मार्गदर्शक क्यों खोजना आरंभ किया

शारीरिक और जीवन की कठिनाइयों के साथ आध्यात्मिक रुचि ने उन्हें ऑनलाइन खोजने पर विवश किया, जहाँ यूट्यूब और फेसबुक पर मिले एक व्यक्ति पर उनका विश्वास बन गया।

· Reviewed Sep 2026 · 01:37–02:42

वे बताती हैं कि एक समय उनके शरीर में और जीवन में विभिन्न प्रकार के कष्ट थे, और साथ ही वे आध्यात्मिक भी थीं, जिससे उनके मन में यह विचार आया कि पूजन-पाठ और साधना से उनकी समस्या दूर हो सकती है; इसलिए उन्होंने खोजना आरंभ किया और यूट्यूब तथा फेसबुक पर उन्हें एक व्यक्ति मिला जिन पर उनका प्रगाढ़ विश्वास बन गया।

03

शिविर में प्रयुक्त पदार्थ, और आकर्षण को प्रेम समझ लेना

शिविर में खाने-पीने की वस्तुओं और इत्र के माध्यम से एक शक्ति का प्रवेश कराया गया, जिसके बाद वे अकारण ही उनकी ओर आकर्षित होने लगीं और उसे प्रेम समझ बैठीं।

· Reviewed Sep 2026 · 02:43–03:19

वे बताती हैं कि इस तथाकथित गुरु द्वारा आयोजित साधना शिविर में उनके साथ किसी प्रकार का शारीरिक शोषण नहीं हुआ, परंतु खाने-पिलाने में प्रयुक्त पदार्थों और इत्र इत्यादि के माध्यम से उनके शरीर में एक शक्ति का प्रवेश करा दिया गया — जिसके पश्चात वे अकारण ही उनकी ओर आकर्षित होने लगीं और उस आकर्षण को सच्चा प्रेम समझ बैठीं।

04

बुलाने पर जाने की विवशता वशीकरण का लक्षण

किसी के कहने पर जाने की विवशता वास्तव में वशीकरण है, स्वेच्छा नहीं — इसका स्पष्ट लक्षण क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 03:20–03:59 · Also a question

इस वृत्तांत में बताया गया है कि इसके पश्चात शारीरिक शोषण हुआ, और साथ ही एक लक्षण बार-बार दोहराया गया: जब भी वह व्यक्ति फोन या मैसेज करके कहता कि आना है, तो वे जाने के लिए मजबूर हो जाती थीं, भले ही वे न जाना चाहती हों और भले ही वह न कोई फोर्स करता था न ब्लैकमेल — यही विवशता, न कि कोई प्रकट बल, इस बात का लक्षण थी कि वे वशीकरण की पकड़ में थीं।

05

अन्य स्त्रियों के साथ वही व्यवहार, और मंत्र-प्रयोग की स्वीकारोक्ति

जब उसे विश्वास हो गया कि वे पूरी तरह उसके वश में हैं, तब उसने खुलकर बता दिया कि उसने मंत्रों और एक विशेष शक्ति के प्रयोग से उन्हें वश में किया है।

· Reviewed Sep 2026 · 04:00–04:57

उन्होंने देखा कि जो स्त्रियाँ और लड़कियाँ अपनी समस्या के समाधान हेतु इस तथाकथित गुरु के पास आती थीं, वे भी उसी प्रकार उसकी ओर आकर्षित हो जाती थीं जैसे वे स्वयं हुई थीं; और जब उसे विश्वास हो गया कि वे पूरी तरह उसके कहने में चल रही हैं, तब उसने खुलकर बता दिया कि उसने मंत्रों और एक विशेष शक्ति के प्रयोग से उन्हें वश में किया है।

06

प्रेम स्वीकारने से इनकार और नियंत्रण बनाए रखने का दावा

उसने उनके प्रेम को स्वीकार करने से मना कर दिया और अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं मानी, और कहा कि जब वह चाहेगा तब उन्हें आना ही पड़ेगा।

· Reviewed Sep 2026 · 04:58–05:40

छल की सच्चाई जान लेने के पश्चात भी उसका आघात उनके मन को कुंठित कर गया; उन्होंने प्रयास किया कि यदि वह उनसे प्रेम करता है तो उनके प्रेम को स्वीकार करके आगे साथ चले, परंतु उसने मना कर दिया और अपनी कोई मंशा या जिम्मेदारी नहीं मानी, जिस पर उन्होंने कहा कि अब वे उससे कोई संबंध नहीं रखेंगी — और उसने उत्तर दिया कि जब वह चाहेगा तब उन्हें आना ही पड़ेगा।

07

तंत्र-सामग्री का रोक रखा जाना, और पकड़ के बाहरी लक्षण

उसके पास उनकी वे वस्तुएँ रह गई थीं जिनके माध्यम से तंत्र किया जाता है — पकड़ बेचैनी, पूजा में मन न लगने, मंदिर से भागने और रात को रोने के रूप में प्रकट होती थी।

· Reviewed Sep 2026 · 05:41–06:29

उसके पास उनकी कुछ व्यक्तिगत या "एसेंशियल" वस्तुएँ मौजूद थीं जिनके माध्यम से तंत्र इत्यादि किया जाता है, इसी कारण वे उससे निकल ही नहीं पा रही थीं; जब भी वे उसके विषय में सोचना बंद करना चाहतीं, वह इसी पकड़ के सहारे ऐसे प्रयोग कर देता कि वे पूरी बेचैन हो जातीं, पूजा-पाठ में बैठ नहीं पातीं, मंदिर से भागने लगतीं और रात को रोने लगतीं — और मैसेज का उत्तर न मिलने पर उनकी दशा और बिगड़ जाती।

08

प्रेम को स्वीकारने से पहले उसकी सत्यता परखना

जो भाव प्रेम जैसा प्रतीत हो, उसे स्वीकार करने और उस पर विश्वास करने से पहले परख लेना चाहिए कि वह वास्तव में क्या है।

· Reviewed Sep 2026 · 06:30–06:48

वक्ता मूल बात यह बताते हैं: मान भी लें कि उन्हें प्रेम हो गया था, तब भी उन्हें पहले परख लेना चाहिए था कि यह प्रेम वास्तव में सत्य है अथवा नहीं, न कि उसे वैसे ही स्वीकार कर लेना चाहिए था — और जब सच्चाई पूरी तरह स्पष्ट हो गई तथा उन्होंने अन्य लड़कियों के साथ भी वही कृत्य होते देख लिया, तभी उन्होंने वशीकरण का काट खोजना आरंभ किया।

09

वशीकरण के काट के रूप में दुर्गा सप्तशती महाविद्या क्रम पाठ

उन्होंने नवरात्र में श्री दुर्गा सप्तशती का महाविद्या क्रम से पाठ आरंभ किया और यथाशक्ति हवन सहित पूरा विधान पूर्ण किया, शेष क्रियाएँ मंदिर में कीं।

· Reviewed Sep 2026 · 06:49–07:30

वशीकरण का काट खोजते हुए उन्हें इसी चैनल का दुर्गा सप्तशती महाविद्या क्रम पाठ वाला वीडियो मिला; मन में आ चुके ग्लानि और अशुद्धता के भाव को लेकर उन्होंने नवरात्रि के समय में यह पाठ आरंभ किया, यथाशक्ति हवन सहित पूरा विधान पूर्ण किया, और शेष सभी क्रियाएँ मंदिर में कीं।

10

प्राप्त शांति, और प्रति मास अष्टमी से चतुर्दशी तक का पाठ

पाठ के पश्चात उन्होंने पाया कि तंत्र का प्रभाव कट चुका है, और उन्होंने प्रत्येक मास अष्टमी से चतुर्दशी तक यह पाठ करना आरंभ कर दिया।

· Reviewed Sep 2026 · 07:31–08:19

भगवती कृपा से पाठ पूर्ण करने के पश्चात उनके मन में असीम शांति का अनुभव हुआ और उन्होंने पाया कि तंत्र का प्रभाव पूरी तरह कट चुका है; तत्पश्चात उन्होंने इस पाठ को प्रत्येक मास अष्टमी से चतुर्दशी तक करना आरंभ कर दिया, जैसा वीडियो में बताया गया था।

11

अपनी भूल के निस्तारण हेतु अनुष्ठान, और कृपा के संकेत

उन्होंने स्वयं को भी उत्तरदायी माना कि उन्हें अपने ऊपर नियंत्रण रखना चाहिए था, इसके निस्तारण हेतु कई अनुष्ठान किए, और उसके बाद हुई घटनाओं को कृपा का संकेत माना।

· Reviewed Sep 2026 · 08:20–08:47

वे मानती हैं कि तंत्र तो उन पर किया ही गया, परंतु अपने ऊपर नियंत्रण उन्हें स्वयं रखना चाहिए था; अपने मन में रह गए अपराध बोध और आत्म-ग्लानि के निस्तारण हेतु उन्होंने कई अनुष्ठान किए; तत्पश्चात उनके साथ कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं जिन्हें उन्होंने दिव्य कृपा का संकेत माना और समझा कि जगदम्बा ने उन्हें उस अपराध से मुक्त कर दिया है।

12

अंतिम चेतावनी: ऑनलाइन मार्गदर्शक पर विश्वास से पहले परख

किसी पर भी आँख मूँदकर विश्वास नहीं करना चाहिए: विश्वास दृढ़ होने से पहले संपर्क ही नहीं करना चाहिए, और ऑनलाइन किसी से संपर्क करने वाली स्त्री को गार्जियन को साथ रखना चाहिए।

· Reviewed Sep 2026 · 08:48–09:39

वक्ता यह सीख देते हैं कि कभी भी किसी के ऊपर आँख मूँदकर विश्वास नहीं करना चाहिए, चाहे वह कोई भी क्यों न हो; जब तक सही विषय-सामग्री से विश्वास दृढ़ न हो जाए तब तक संपर्क करना ही नहीं चाहिए, और ऑनलाइन किसी से संपर्क करने वाली स्त्रियों को गार्जियन से बात करवानी चाहिए तथा तभी स्वयं बात करनी चाहिए जब वे वास्तव में इन विषयों को सँभालने में सक्षम हों।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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