नकली गुरु के वशीकरण की पहचान, और दुर्गा सप्तशती से उसका काट
एक नकली गुरु के वशीकरण, उसके लक्षण और उसके काट की सत्य घटना।
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क्षुद्र शक्तियों को दिए तांत्रिक के वचन कैसे उसके पास आने वालों के शरीर की कीमत बन जाते हैं
भोग, फिर सुगंध, फिर शरीर
वक्ता कहते हैं कि जब कोई तांत्रिक क्षुद्र शक्ति को सिद्ध करता है तो उसे दिए जाने वाले वचन भोग (खाने-पीने की वस्तुएँ) और सुगंध से शुरू होते हैं, पर अगर शक्ति प्रबल पैशाचिक है जिसे शरीर चाहिए, तो वह समय-समय पर शरीर देने का वचन दे डालता है। वे जोड़ते हैं कि जो लोग बाद में ऐसे तांत्रिक के पास अपनी समस्या के समाधान के लिए आते हैं, उनकी समस्या इन्हीं शक्तियों से हल तो होती है, पर उन्हें अपने शरीर से उस शक्ति का भोग देने के लिए भी बाध्य किया जाता है। सामने वाला सोचता है कि उसकी सुरक्षा के लिए क्रियाएँ हो रही हैं, जबकि असल में उसके साथ छल हो रहा होता है।
वक्ता बताते हैं कि जब कोई तांत्रिक क्षुद्र शक्तियों को सिद्ध करता है तो सिद्धि के समय उन्हें दिए जाने वाले वचन एक तय प्रकार के होते हैं। पहले भोगगृहस्थ के भोजन से पूर्व देवता के समक्ष अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य। आता है: वह वचन देता है कि तुम्हें खाने-पीने की ये-ये वस्तुएँ दूँगा। फिर गंध-सुगंध का वचन कि तुम्हें इस-इस प्रकार की सुगंध मिलेगी। उसके आगे, वे कहते हैं, अगर शक्ति प्रबल है, प्रबल पैशाचिक शक्ति है जिसे शरीर का भोग और आनंद चाहिए, चाहे स्त्री का हो या पुरुष का, तो वचन और आगे बढ़ जाता है। स्त्रीत्व धारण करने वाली शक्ति को पुरुष का शरीर चाहिए होगा; प्रेत योनि में पुरुष रूप धारण करने वाली शक्ति को स्त्री का शरीर चाहिए होता है। ऐसी स्थिति में, वे कहते हैं, ऐसे साधक कहीं न कहीं शरीर देने का वचन भी दे डालते हैं कि ठीक है, समय-समय पर तुम्हें शरीर की उपलब्धि होती रहेगी। इसी क्रम में जब ऐसा व्यक्ति आगे बढ़ता है, तो जो लोग अपनी समस्या के समाधान के लिए उसके पास आते हैं, उनकी समस्या इन्हीं शक्तियों के माध्यम से हल तो होती है। लेकिन साथ ही जो व्यक्ति समाधान करवाने आया था, उसे अपने शरीर से उस शक्ति का भोग देने के लिए भी बाध्य कर दिया जाता है। वह सोचता है कि उसकी सुरक्षा के लिए ये क्रियाएँ हो रही हैं, जबकि असल में उसके साथ छल हो रहा होता है। आगे की सत्य घटना को वे इसी बात का एक उदाहरण बताते हैं।
विशेष प्रसंग: एक नकली ऑनलाइन गुरु ने शिष्या पर वशीकरण की पकड़ कैसे बनाई
लाभ से बना विश्वास, फिर शिविर में पदार्थ
वक्ता एक साधिका का अनुभव सुनाते हैं: शरीर और जीवन के कष्टों से घिरी और आध्यात्मिक रुचि वाली इस साधिका ने यूट्यूब-फेसबुक पर मार्गदर्शक खोजा, किसी पर गहरा विश्वास हुआ, उससे साधनाएँ कीं और लाभ हुआ, जिससे विश्वास और बढ़ा। उसके शिविर में बुलाए जाने पर वहाँ शारीरिक शोषण नहीं हुआ, पर खिलाने-पिलाने में मिलाए पदार्थों और इत्र के माध्यम से उनके शरीर में एक शक्ति का प्रवेश करा दिया गया, जिसके बाद वे अकारण उसकी ओर आकर्षित होने लगीं और इसे प्रेम समझ बैठीं। बाद में साधना बताने के बहाने पास बुलाकर उनका कई प्रकार से शारीरिक शोषण किया गया।
वक्ता कहते हैं कि साधिका ने बताया कि एक समय था जब उनके शरीर में कई प्रकार के कष्ट थे, जीवन में कई परेशानियाँ थीं, और साथ में वे आध्यात्मिक भी थीं। वे कहते हैं कि अध्यात्म के कारण ही मन में यह विचार आता है कि पूजन-पाठ-साधना करेंगे तो समस्या दूर हो सकती है, और साथ में आध्यात्मिकता में प्रगाढ़ता और समस्या दूर करने का सामर्थ्य भी मिल जाता है। इसलिए उन्होंने खोजना शुरू किया कि किसके पास जाएँ जो दोनों मार्ग बता सके। आजकल, वे कहते हैं, लोग सबसे पहले यूट्यूब-फेसबुक पर खोजते हैं, और वहीं उन्हें किसी पर प्रगाढ़ विश्वास हुआ कि यह हमारी समस्या दूर कर सकते हैं और इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का सही मार्गदर्शन कर सकते हैं। संपर्क में आने के बाद, वे कहते हैं, उस व्यक्ति ने इनसे विभिन्न साधनाएँ करवाईं, लाभ हुआ, और लाभ के कारण विश्वास प्रगाढ़ होता गया। विश्वास बढ़ने पर उसने कोई शिविर आयोजित किया और कहा कि वहाँ आकर सबके साथ बैठकर साधना करेंगे; वे शिविर में चली गईं। वहाँ जाने के बाद जो हुआ उसने इनका पूरा जीवन बदल दिया। साधना शिविर में ही, वक्ता कहते हैं, किसी प्रकार का शारीरिक शोषण नहीं हुआ। लेकिन इनके शरीर में एक शक्ति का प्रवेश करा दिया गया, और खिलाने-पिलाने में और इत्र के माध्यम से ऐसे पदार्थों का प्रयोग किया गया कि इनके मन में पूरी उथल-पुथल मच गई। वे अकारण ही उस साधक की ओर आकर्षित होने लगीं। उन्हें लगा कि शायद उसकी वाणी या व्यक्तित्व के प्रभाव से आकर्षण हो रहा है, और इसे प्रेम समझकर, जबकि हो छल रहा था, वे सामान्य रूप से समर्पित होती गईं। धीरे-धीरे, वे कहते हैं, दोनों के बीच बात बढ़ी; इन्होंने स्वयं सामने से अपनी बात रखी, और उसने कहा कि साधना के मार्ग में आगे बढ़ने के लिए साधना इस प्रकार करनी होगी, पास आइए, और वे चली गईं। वहाँ जाने के बाद इनका विभिन्न प्रकार से शारीरिक शोषण हुआ, और इसके अलावा वे कभी समझ ही नहीं पाईं कि इनके साथ हो क्या रहा है।
गुरु के प्रति आकर्षण वशीकरण है, प्रेम नहीं: इसके संकेत
बिना धमकी की मजबूरी, और अन्य स्त्रियों के साथ वही ढर्रा
वक्ता कहते हैं कि संकेत था मजबूरी: जब भी वह व्यक्ति फोन या मैसेज करके कह देता कि तुम्हें आना है, तो न चाहते हुए भी इन्हें जाना पड़ता था, जबकि उसने कभी जोर-जबरदस्ती या ब्लैकमेल नहीं किया। सच्चाई इन्हें तब समझ आई जब देखा कि जो स्त्रियाँ-लड़कियाँ अपनी समस्या लेकर उसके पास आती हैं, वे भी उसी तरह उसकी ओर आकर्षित हो जाती हैं और वह उनके साथ भी वही क्रियाएँ कर रहा है; यह प्रेम नहीं, किसी विद्या का प्रयोग था। जब उसे पूरा भरोसा हो गया कि यह अब उसके कहने में चल रही है, तब उसने स्वयं बता दिया कि यह उसकी शक्ति और मंत्रों का प्रभाव है, और अब यह कुछ नहीं कर सकती, घर में बता नहीं सकती, किसी से सहायता नहीं ले सकती।
वक्ता कहते हैं कि साधिका कभी समझ नहीं पाईं कि उनके साथ हो क्या रहा है। वे कहीं भी हों, घर में ही हों, अगर वह व्यक्ति फोन या मैसेज करके कह दे कि तुम्हें आना है, तो वे जाने के लिए मजबूर हो जाती थीं। वे चाहती थीं कि न जाएँ, फिर भी जाना पड़ता था। वे जोर देकर कहते हैं कि ऐसा नहीं था कि वह जबरदस्ती या किसी तरह ब्लैकमेल करके बुला रहा हो; पर अगर वह आदेश कर दे तो वे चली ही जाती थीं। उस व्यक्ति की सच्चाई इन्हें कब समझ आई? वक्ता कहते हैं, तब जब इन्होंने देखा कि जो भी अपनी समस्या का समाधान लेने उसके पास आता है, विशेषकर स्त्रियाँ-लड़कियाँ, वे किसी न किसी तरह उसकी ओर आकर्षित हो ही जाती हैं। साथ रहकर वे यह देख पाती थीं, और देख पाती थीं कि वह उनके साथ भी वही क्रियाएँ कर रहा है। यह बात इनसे छुपी नहीं रही। कुछ समय वे शांत रहीं; फिर सच्चाई अच्छी तरह देख लेने पर समझ गईं कि यह छल है, प्रेम नहीं बल्कि किसी विद्या का प्रयोग है। वे जोड़ते हैं कि जब व्यक्ति किसी पर विश्वास कर लेता है, तो उस व्यक्ति को भी, जिसे वक्ता लतखोर बाबा कहते हैं, पूरा भरोसा हो गया कि यह अब उसके कहने में चल रही है। तब उसने स्वयं सच्चाई प्रकट कर दी: कि ऐसी सामर्थ्य, ऐसी शक्ति होती है, यह उसकी शक्ति का प्रभाव है, उसने इस तरह वश में किया है, ऐसे मंत्रों का प्रयोग है, और वह इनके बारे में ऐसी-ऐसी बातें बता सकता है। उसने कहा कि अब तुम कुछ कर भी नहीं सकती; और सच में उस समय वे कुछ नहीं कर सकती थीं: घर-परिवार में बता नहीं सकतीं, किसी से सहायता नहीं ले सकतीं। फिर भी, वक्ता कहते हैं, सच्चाई जान लेने के बाद, चाहे कितना भी बड़ा वशीकरण प्रयोग हुआ हो, मन में यह कुंठा तो आ ही गई कि ऐसा नहीं होना चाहिए था। जिसके साथ भी इस तरह छल होगा, जिसके मन पर आघात होगा, वह कुंठित होगा ही; घात लगेगा ही।
रखी हुई निजी वस्तुओं के सहारे वशीकरण की पकड़ कैसे बनाए रखी जाती है
बेचैनी, मंदिर से भागना, रात को रोना
वक्ता कहते हैं कि जब साधिका ने उस व्यक्ति से कहा कि अगर प्रेम करते हैं तो हमारा प्रेम स्वीकार कीजिए, तो उसने सारी जिम्मेदारी से मना कर दिया, और जब इन्होंने कहा कि अब कोई संबंध नहीं रखूँगी तो उसने कहा कि अब तुम ऐसा कर ही नहीं सकती, हम जब चाहेंगे तुम्हें आना ही पड़ेगा। वे निकल नहीं पा रही थीं क्योंकि इनकी वे \"एसेंशियल\" चीजें, जिनके माध्यम से तंत्र किया जाता है, उसके पास थीं। जब भी ये न जाना या उसके बारे में न सोचना चाहतीं, वह ऐसे प्रयोग कर देता कि ये बेचैन-विचलित हो जातीं, पूजा-पाठ में बैठ न पातीं, मन उचाट हो जाता, मंदिर जातीं और वहाँ से भागने लगतीं, रात को रोतीं; और अगर मैसेज करके पूछतीं कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है और जवाब न मिले तो हालत और बिगड़ जाती। इस तरह इन्हें पूरी तरह घेर लिया गया।
वक्ता कहते हैं कि सच्चाई देख लेने के बाद साधिका ने प्रयास किया कि वह व्यक्ति ऐसा न करे: अगर आप हमसे प्रेम करते हैं तो हमारे प्रेम को स्वीकार कीजिए, हम आगे आपके साथ चलने को तैयार हैं। उसने मना कर दिया कि उसकी ऐसी कोई मंशा नहीं है, तुम सामने से आई थीं, मैंने तुम्हें कुछ नहीं कहा था। तब इन्होंने कहा कि ठीक है, आज के बाद आपसे किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं रखूँगी। पर उस व्यक्ति ने कहा कि अब तुम ऐसा कर ही नहीं सकती: जहाँ जाना है जाओ, लेकिन हम जब चाहेंगे तुम्हें आना ही पड़ेगा। निकल न पाने का कारण, वक्ता बताते हैं, यह था कि इनकी वे "एसेंशियल" चीजें, जिनके माध्यम से तंत्र इत्यादि किया जाता है, उसके पास मौजूद थीं। जब भी ये चाहतीं कि न जाएँ, उसके बारे में न सोचें, तो वह ऐसे-ऐसे प्रयोग कर देता कि ये पूरी बेचैन, विचलित हो जातीं। पूजा-पाठ में बैठ नहीं पाती थीं; मन उचाट हो जाता था। मंदिर जाती थीं और मंदिर से भागने लगती थीं। रात को किसी भी तरह रोना शुरू हो जाता था। और अगर उसे मैसेज करतीं कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है और वह कोई जवाब न दे, तो जवाब न मिलने से हालत और खराब हो जाती थी। एक तरह से, वे कहते हैं, यहाँ इन्हें पूरी तरह घेर लिया गया था और इनकी मजबूरी बढ़ती जा रही थी। उस अवस्था में वे दिन-रात रोती थीं। पहले भगवान सदाशिव की भक्ति-सेवा और भगवती की भक्ति करती थीं, पर अब इस तरह फँस चुकी थीं।
समर्पित होने से पहले परख लें कि प्रेम सच्चा है या नहीं
वशीकरण के जाल की मूल भूल
वक्ता इस पूरे प्रसंग की मूल बात बताते हैं: मान भी लें कि साधिका को प्रेम हो गया था, तो भी उन्हें पहले परख लेना चाहिए था कि यह प्रेम वास्तव में सत्य है या नहीं। वे इसे वही एक बात बताते हैं जो किसी उपाय की नौबत आने से पहले ही इन्हें जाल से बचा लेती।
पूरे प्रसंग को देखते हुए वक्ता कहते हैं कि मूल बात यह है: मान भी लेते हैं कि इन्हें प्रेम हो गया था। लेकिन इन्हें परख लेना चाहिए था कि यह प्रेम वास्तव में सत्य है अथवा नहीं। वे इसे आगे की सारी घटनाओं के पीछे की सीख बताते हैं। जो आकर्षण इन्हें हुआ वह पदार्थों और एक शक्ति से पैदा किया गया था, और इन्होंने बिना परखे उसे प्रेम मान लिया; परख, वे कहते हैं, पहले होनी चाहिए थी।
वशीकरण के उपाय के रूप में दुर्गा सप्तशती महाविद्या क्रम पाठ
नवरात्र में पाठ, हवन, फिर हर माह अष्टमी से चतुर्दशी
वक्ता कहते हैं कि सच्चाई जान लेने और अन्य लड़कियों के साथ भी वही होते देख लेने के बाद साधिका ने वशीकरण की काट खोजी और उन्हें इसी चैनल का श्री दुर्गा सप्तशती को महाविद्या क्रम से पढ़ने वाला वायरल वीडियो मिला। चैनल से बिना संपर्क किए, मन की ग्लानि और अशुद्धता के भाव को दूर करने के लिए, उन्होंने नवरात्रि में उसी क्रम से पाठ आरंभ किया, पूरा विधान पूर्ण किया, यथाशक्ति हवन करवाया और बाकी क्रियाएँ मंदिर में कीं। उसके बाद भगवती की कृपा से मन में असीम शांति का अनुभव हुआ, यानी तंत्र का प्रभाव पूरी तरह कट चुका था। वे समझाते हैं कि चंडी चरित्र में जगदम्बा की ऐसी शक्तियाँ समाहित हैं कि पूरे भाव से समर्पित होकर भगवती को पुकारने पर उनकी शक्तियाँ किसी भी तंत्र से निकालकर ले आती हैं। जैसा वीडियो में बताया था कि अष्टमी से चतुर्दशी तक इसका पाठ किया जा सकता है, वे हर महीने ऐसा करने लगीं और ग्लानि धीरे-धीरे कम होने लगी।
उस अवस्था में, वक्ता कहते हैं, प्रश्न था कि क्या करें, और साधिका ने खोजना शुरू किया कि वशीकरण की काट कैसे हो सकती है, क्योंकि सच्चाई इन्हें पता चल चुकी थी और अन्य लड़कियों के साथ भी यही कृत्य होते देख चुकी थीं। इसी खोज में इन्हें गृहस्थ तंत्र का श्री दुर्गा सप्तशती को महाविद्या क्रम से पढ़ने वाला वायरल वीडियो मिला। नवरात्रि के समय, वे कहते हैं, इन्होंने चैनल से कोई संपर्क नहीं किया था। पर मन की शांति के लिए, और मन में आ चुके ग्लानि और अशुद्धता के भाव को, कि हमने ऐसा अशुद्ध प्रेम कर लिया, दूर करने के लिए, उन्होंने श्री दुर्गा सप्तशती का महाविद्या क्रम से पाठ आरंभ किया। वे कहती हैं कि महाविद्या क्रम से पाठ के बाद पूरा विधान पूर्ण किया, यथाशक्ति हवन इत्यादि करवाया जो इनसे बन पड़ा, और बाकी सभी क्रियाएँ मंदिर में कीं। उसके बाद भगवती की कृपा से मन में असीम शांति का अनुभव हुआ, जिसे वक्ता तंत्र का प्रभाव पूरी तरह कट जाना बताते हैं। महाविद्या क्रम सप्तशती पाठ और पहले से चल रही सेवा-पूजा ने इन्हें वह सामर्थ्य दिया। उनकी व्याख्या: भगवती का महात्म्य, चंडी चरित्र, जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम। की ऐसी-ऐसी शक्तियाँ समाहित रखता है कि जब आप पूरे भाव से समर्पित होकर भगवती को पुकारते हैं तो उनकी शक्तियाँ किसी भी प्रकार के तंत्र से आपको निकालकर ले आती हैं; उसके आगे यह तो कुछ था ही नहीं। सिर्फ इतना ही नहीं: बाद में, जैसा उस वीडियो में बताया गया था कि अष्टमीपक्ष की आठवीं तिथि, जो शाक्त कर्मों के लिए विशेष अनुकूल मानी जाती है। से चतुर्दशी तक इसका पाठ कर सकते हैं, वे हर महीने यह करने लगीं। मन में ग्लानि का भाव धीरे-धीरे कम होने लगा और भगवती के प्रति समर्पण पहले से भी अधिक दृढ़ होने लगा।
वशीकरण के जाल के बाद प्रायश्चित्त: अपनी चूक को स्वीकारना
अपराध-बोध के लिए अनुष्ठान, और फिर कृपा के संकेत
वक्ता कहते हैं कि साधिका मानती हैं कि तंत्र तो हुआ, लेकिन अपने ऊपर नियंत्रण होना चाहिए था जो नहीं रहा, और मन में जो कष्ट, अपमान-बोध और अपराध-बोध रह गया उसके निस्तारण के लिए उन्होंने कई अनुष्ठान किए। उसके बाद, वे कहते हैं, भगवती ने सांकेतिक रूप से कृपा की: दिव्यता के रूप में कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं जिनसे इन्हें समझ आया कि जगदम्बा अब प्रसन्न हैं और उस अपराध से मुक्त कर चुकी हैं। फिर वे सेवा-भक्ति में लग गईं, पहले से बहुत अधिक ठीक हैं और लगातार साधनाएँ करती रहती हैं।
वक्ता कहते हैं कि साधिका जो अपराध, जो गलती हो गई, उसके लिए कहीं न कहीं स्वयं को भी जिम्मेदार मानती हैं: ठीक है, तंत्र तो रहा, लेकिन अपने ऊपर नियंत्रण होना चाहिए था जो नहीं रहा। मन में जो कष्ट का भाव, अपमान-बोध और अपराध-बोध रह गया, उसके निस्तारण के लिए भी उन्होंने कई अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। किए। उसके बाद, वे कहते हैं, सांकेतिक रूप से कहा जाए तो किसी माध्यम से भगवती ने इन पर कृपा की। दिव्यता के स्वरूप में कुछ ऐसी घटनाएँ इनके साथ हुईं जिनसे इन्हें समझ आया कि हाँ, जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम। अब हम पर प्रसन्न हैं और हमें उस अपराध से मुक्त कर चुकी हैं। तत्पश्चात ये सेवा-भक्ति में लग गईं। पहले से बहुत अधिक ठीक हैं, और लगातार साधनाएँ करती रहती हैं।
ऑनलाइन आध्यात्मिक मार्गदर्शक पर भरोसा करने से पहले की सावधानियाँ
आँख मूँदकर भरोसा नहीं; स्त्रियाँ गार्जियन को साथ रखें
वक्ता सीख देते हैं कि कभी किसी पर आँख मूँदकर विश्वास नहीं करना चाहिए, चाहे वह कोई भी हो, यह चैनल भी: जब तक विश्वास दृढ़ न हो और सही प्रकार के विषय न मिल जाएँ, तब तक संपर्क करना ही नहीं चाहिए, और विश्वास हो जाने पर ही आगे बढ़ें। स्त्रियाँ, माताएँ, बहनें यूट्यूब-फेसबुक देखकर किसी से भी संपर्क करें तो गार्जियन से बात करवाएँ, और तभी बात करें जब वे सक्षम हों और जीवन के अनुभव ऐसे हों कि इन चीजों को संभाल सकें; अन्यथा बात न करें, क्योंकि पता नहीं होता कि सामने वाला सही है या गलत। अंत में वे सबसे कहते हैं कि यथाशक्ति चंडी महात्म्य के माध्यम से भगवती की सेवा करें, जगदम्बा सुनकर हर कष्ट से निकालेंगी।
इस सत्य घटना से, वक्ता कहते हैं, सभी को यह सीख लेनी चाहिए कि कभी भी किसी पर आँख मूँदकर विश्वास न करें, चाहे वह कोई भी क्यों न हो। इस चैनल को भी सुनते हैं तो जब तक आपका विश्वास दृढ़ न हो, आपको सही प्रकार के विषय न मिल जाएँ और आपको ऐसा न लगे, तब तक संपर्क करना ही नहीं चाहिए; विश्वास हो जाए तब चलें। स्त्रियाँ, माताएँ, बहनें यूट्यूब-फेसबुक देखकर ऑनलाइन किसी से भी संपर्क करती हैं तो गार्जियन से बात करवाएँ। अगर आप सक्षम हैं, आपके जीवन के अनुभव ऐसे हैं कि आप इन चीजों को संभाल सकती हैं, तभी किसी से बात करनी चाहिए; अन्यथा नहीं करनी चाहिए। आपको नहीं पता कि सामने वाला व्यक्ति सही है या गलत। अंत में वे आशा करते हैं कि सब इस घटना से सीख लेंगे और यथाशक्ति भगवती के चंडी महात्म्य, चंडी चरित्र के माध्यम से अपने जीवन में भगवती की सेवा करेंगे; जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम। सुनकर हर कष्ट से निकालेंगी।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।