लोबान या राल: घर की धुनी में क्या जलाना चाहिए

घर की धुनी हेतु लोबान और राल के अंतर पर नोट्स।

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The notes
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01

लोबान और राल: दोनों क्या हैं और कहाँ से आते हैं

एक विदेशी राल और भारत की अपनी साल की राल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:29–02:11

वक्ता बताते हैं कि लोबान एक ऐसे पेड़ के दूध का ठोस रूप है जो भारत में नहीं होता — वह सुमात्रा, जावा और इंडोनेशिया में मिलता है — और इत्र तथा औषधि में प्रयोग होता है। वे जोड़ते हैं कि पूर्व काल में वे क्षेत्र देवताओं के विरोधी असुर, दैत्य, राक्षसों के निवास थे, और उन्हीं के द्वारा इसका अधिकाधिक प्रयोग होता होगा। भारत में जो प्रयोग होता है वह राल है, साल वृक्ष का गोंद, जो छाल काटते ही तुरंत ठोस हो जाता है; राल की धूनी, वे कहते हैं, सनातन संस्कृति में सब जगह होती है।

02

लोबान के धुएँ का स्वास्थ्य पर प्रभाव

यह रोग ठीक भी करता है और पैदा भी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:12–02:36

वक्ता कहते हैं कि लोबान का धुआँ दोनों ओर काम करता है: औषधि के रूप में इससे बहुत से चर्म रोग और जोड़ों के दर्द ठीक होते हैं, और उतने ही नए रोग हो भी जाते हैं — जोड़ों के, फेफड़ों के, अस्थमा जैसे। दोनों बातें सच हैं, इसलिए इसका औषधीय प्रयोग सोच-समझकर, दिशा-निर्देश में करना चाहिए, सामान्य सलाह पर नहीं।

03

श्याम धूप के रूप में लोबान: तंत्र में इसका प्रयोजन

यह प्रेतों को आकर्षित करता है, भगाता नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:34–06:08

लोबान पर मत बनाने से पहले, वक्ता कहते हैं, देख लें कि ऋषि-मुनि इसका प्रयोग कहाँ और कैसे करते थे। मुंडमालन तंत्र और कापालिक तंत्र जैसे तंत्र ग्रंथों में — जहाँ शव साधना, श्याम साधना और श्मशान जागरण का वर्णन है — धूप विधि में लोबान को "श्याम धूप" कहा गया है, और इसका प्रयोग दो जगह होता है। पहला, और सबसे अधिक, नकारात्मक और वायवीय ऊर्जाओं — भूत, प्रेत, पिशाच — को आकर्षित करने के लिए, भगाने के लिए नहीं; शमशान साधना करने वाले या प्रेत-आसन सिद्ध करने वाले उच्च कोटि के तांत्रिक (जैसे त्रिपुर भैरवी की उपासना में, जो प्रेत पर विराजमान हैं, या हनुमान जी के मरकटी स्वरूप में) इसका इसी के लिए प्रयोग करते हैं। दूसरा, शनि, भैरव या हनुमान जी के उन तंत्र-युक्त मंदिरों में जहाँ अन्य शक्तियाँ भी स्थापित हैं, जहाँ दरबार लगते हैं और प्रेतों को बुलाया या किसी के सिर से हटाया जाता है। सामान्य मंदिर में इसका प्रयोग नहीं होता, न होना चाहिए।

04

लोबान घर में कभी क्यों नहीं जलाया जाता

यह प्रेत-पिशाच को प्रसन्न करता है और पितरों को भगा देता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:09–07:27

वक्ता बताते हैं कि लोबान की धूनी जो भी उपस्थित हो उस पर क्या करती है: तांत्रिक इसी से किसी के सिर पर आवेशित ऊर्जा को बुलाता है, और प्रेत या पिशाच इससे बहुत प्रसन्न और शांत होता है — लेकिन देव शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा, अपने देव-पितृ या सात्विक घर के देवी-देवता चिड़चिड़ाकर हटने का प्रयास करते हैं। इसलिए, वे कहते हैं, सनातनी को श्याम धूप घर में कभी नहीं करना चाहिए: घर में पहले से मौजूद नकारात्मक ऊर्जा पुष्ट और संतुष्ट होती है, शुभ शक्तियाँ दूर भागती हैं, और कुल के पितृ सबसे पहले भागते हैं। सुगंध पसंद हो या न हो, अलग बात है। वे बताते हैं कि इस्लाम में इसका सबसे अधिक प्रयोग कहाँ है — मज़ारों पर जहाँ मुर्दे लेटे हैं, जिससे सैयद, पीर, ख़बीस और जिन्न प्रसन्न होते हैं — और कहते हैं कि जो इसे हानिरहित बताते हैं वे पहले अध्ययन करें।

05

प्रतिष्ठा से पहले स्थान को सभी ऊर्जाओं से खाली करना

पहले निर्वात, फिर शुभ शक्तियों को स्थान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:28–08:16

वक्ता लोबान का भगाने वाला एकमात्र प्रयोग बताते हैं। जब घर का बंधन करना हो और उसमें बहुत सी नकारात्मक ऊर्जाएँ हों — सात्विक और तामसिक दोनों, या केवल तामसिक — तब गंधक, लोबान और हींग को कुछ अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर अपामार्ग की लकड़ी पर धूनी की जाती है। पूरा स्थान खाली हो जाता है: न कोई देव शक्ति रहती है, न प्रेत-पिशाचिक शक्ति; वह निर्वात बन जाता है जिसमें केवल परब्रह्म परमेश्वर, साक्षात जगदंबा, रहती हैं। तभी शंख ध्वनि, कपूर प्रज्वलित करके आदि से शुभ सात्विक ऊर्जा का आवाहन करके उन्हें स्थान दिया जाता है।

06

घर की दैनिक धूनी के लिए राल का मिश्रण

जो देवताओं को पुष्ट करता है और नकारात्मक को भगाता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:35–10:22

राल, साल वृक्ष का गोंद, कूटकर पत्थर जैसा दाना बनाकर जलाया जाता है, और उसी से, वक्ता कहते हैं, देवी-देवता पुष्ट और संतुष्ट होते हैं। धूनी के लिए इसमें लौंग, काला तिल, काली मिर्च, कपूर, इलायची और जटामांसी जैसी औषधीय चीज़ें मिलाई जाती हैं; इससे शुभ सात्विक ऊर्जा बढ़ती है। इसकी सुगंध दिव्य और तेज़ होती है; शुभ शक्तियाँ इससे मज़बूत होती हैं और नकारात्मक दूर भागती हैं। मंत्रित करके इसकी धूनी करें, वे कहते हैं, तो हो ही नहीं सकता कि नकारात्मक शक्ति वहाँ ठहरे — वह कमज़ोर पड़कर भागती है।

07

तंत्र में राल: इसके नाम और स्थान बंधन में प्रयोग

अश्वकर्ण, कार्स्य, धूप वृक्ष, सूर्य धूप, सर्ज धूप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:23–11:03

तंत्र में राल का भी प्रयोग है, वक्ता कहते हैं, अश्वकर्ण, कार्स्य, धूप वृक्ष, सूर्य धूप और सर्ज धूप नामों से। बहुत से कवचों में इसका वर्णन मिलता है, और रेणुका तंत्रम में भगवती छिन्नमस्तिका के स्वरूप की प्रसन्नता के लिए ऐसे मंत्र विधान हैं जिनकी धूनी कार्स्य या अश्वकर्ण धूप से की जाती है — वह धूप राल ही है। उन मंत्रों का पाठ करते हुए इससे धूनी करने पर स्थान-बंधन हो जाता है: शुभ शक्तियाँ आसानी से आती हैं और अशुभ दूर भागती हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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