लोबान या राल: घर की धुनी में क्या जलाना चाहिए
घर की धुनी के लिए लोबान और राल के अंतर पर नोट्स: दोनों पदार्थ क्या हैं और कहाँ से आते हैं, मुंडमालन तंत्र और कापालिक तंत्र जैसे तांत्रिक ग्रंथ लोबान (श्यामा धूप) को उच्च साधनाओं में नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करने तथा विशिष्ट तांत्रिक मंदिरों तक सीमित क्यों रखते हैं, घर में लोबान की धुनी सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों पर क्या प्रभाव डालती है, किसी स्थान को दोनों प्रकार की शक्तियों से पूरी तरह रिक्त करने का विशेष कर्म, और नित्य गृह पूजा के लिए राल — लौंग, काला तिल, काली मिर्च, कपूर, इलायची और जटामांसी के साथ — ही सही चुनाव क्यों है।
What this video covers
9 concepts, in the order they are taught. Jump to any one.
9 also answer a common question
Questions this answers
9 of the notes below are questions in their own right. Scroll for more.
लोबान, एक विदेशी वृक्ष का गोंद
लोबान क्या है और यह कहाँ से आता है?
लोबान एक ऐसे वृक्ष का जमा हुआ गोंद है जो भारत का नहीं है — यह सुमात्रा, जावा और इंडोनेशिया में पाया जाता है — और इसका प्रयोग इत्र तथा औषधि में होता है।
लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल उस वृक्ष से निकलने वाला दूधिया रस है जो जमकर ठोस हो जाता है; उस वृक्ष की संरचना, पत्ते और फूल भारत के नहीं हैं, बल्कि ऐसे वृक्ष सुमात्रा, जावा और इंडोनेशिया जैसे क्षेत्रों में मिलते हैं। छाल पर चीरा लगाने पर दूधिया रस बहता है जो हवा लगते ही जम जाता है, और यही ठोस रूप इत्र तथा औषधीय प्रयोगों में काम आता है।
लोबान के धुएँ का स्वास्थ्य पर प्रभाव
क्या लोबान का धुआँ साँस में लेना सुरक्षित है?
लोबान का धुआँ दोनों ओर काम करता है — यह कुछ चर्म रोगों को ठीक कर सकता है और जोड़ों के दर्द में राहत दे सकता है, पर यही धुआँ जोड़ों, फेफड़ों और श्वास संबंधी नए रोग, जैसे दमा, भी उत्पन्न कर सकता है।
औषधि के रूप में लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल का धुआँ कुछ चर्म रोगों को ठीक कर सकता है और जोड़ों के दर्द में राहत दे सकता है। परंतु वही धुआँ नए रोग भी उत्पन्न कर सकता है — जोड़ों की समस्याएँ तथा फेफड़ों और श्वास संबंधी रोग, जैसे दमा। चूँकि इसका प्रभाव दोनों दिशाओं में जाता है, इसलिए इसका औषधीय प्रयोग सामान्य सलाह पर नहीं करना चाहिए; यह किस व्यक्ति और किस रोग के लिए उपयुक्त है, इस पर सावधानीपूर्वक विचार और विशेषज्ञ मार्गदर्शन आवश्यक है।
राल, भारत के साल वृक्ष का गोंद
राल लोबान से किस प्रकार भिन्न है?
राल भारत के अपने साल वृक्ष का गोंद है, जिसका प्रयोग सनातन संस्कृति में धुनी के लिए सर्वत्र होता है — जबकि लोबान मूल रूप से विदेशी है।
लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल भारत का मूल गोंद नहीं है — प्राचीन काल में जिन क्षेत्रों में इसके वृक्ष होते थे, वहाँ देव विरोधी समुदाय, जैसे असुर, दैत्य और राक्षस, निवास करते थे और वही इसका अधिक प्रयोग करते थे। भारत में इसके स्थान पर परंपरागत रूप से रालभारत के साल वृक्ष का गोंद-राल। का प्रयोग होता है, जो साल वृक्ष (शोरिया रोबस्टा) के गोंद से बनता है: साल वृक्ष की छाल पर चीरा लगाने पर एक तैलीय पदार्थ निकलता है जो शीघ्र जमकर राल बन जाता है, और सनातन संस्कृति में सर्वत्र धुनी के लिए इसी का प्रयोग होता है।
तंत्र शास्त्र में लोबान श्यामा धूप के रूप में
लोबान को श्यामा धूप क्यों कहा जाता है और तंत्र शास्त्र में इसका क्या प्रयोजन है?
तांत्रिक ग्रंथों में लोबान को 'श्याम धूप' कहा गया है, और इसका मुख्य कार्य नकारात्मक शक्तियों तथा प्रेतों को भगाना नहीं, बल्कि आकर्षित करना है — इसका प्रयोग उच्च स्तरीय साधनाओं और विशिष्ट तांत्रिक मंदिरों में होता है, सामान्य पूजा में नहीं।
मुंडमालन तंत्र और कापालिक तंत्र जैसे तांत्रिक ग्रंथ — जिनमें शव साधना, श्यामा साधना और श्मशान जागरणश्मशान भूमि का अनुष्ठानिक जागरण, जो मुण्डमालन एवं कापालिक तंत्र जैसे ग्रंथों में वर्णित उन्नत तांत्रिक विधियों का भाग है। जैसे कर्मों का विस्तार से वर्णन है — विशिष्ट धूपन विधियाँ बताते हैं जिनमें लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल को 'श्याम धूपतंत्र शास्त्र में लोबान का वह नाम जब इसका प्रयोग नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने के बजाय आकर्षित करने हेतु किया जाता है — यह उन्नत साधनाओं व विशेष तांत्रिक मंदिरों तक सीमित है।' कहा गया है। वहाँ इसके दो प्रयोजन हैं: पहला, नकारात्मक और बाहरी शक्तियों (भूत, प्रेत, पिशाच) को भगाना नहीं बल्कि आकर्षित करना, जिसका प्रयोग उच्च स्तरीय तांत्रिक कर्म करने वाले साधक जानबूझकर करते हैं — जैसे वे जो त्रिपुर भैरवी अथवा हनुमान के मार्कटेश्वर स्वरूप की उपासना करते हुए प्रेत-आसनउच्च-स्तरीय तांत्रिक साधकों द्वारा उन्नत विधियों के अंतर्गत स्थापित और सिद्ध किया जाने वाला "प्रेत-आसन"। (प्रेतासन) की स्थापना या सिद्धि करते हैं। दूसरा, इसे शनि, भैरव या हनुमान जी को समर्पित उन विशिष्ट तांत्रिक मंदिरों में जलाया जाता है जहाँ विशेष सत्ताएँ स्थापित हैं, प्रेतों का आवाहन होता है या भूत बाधा उतारी जाती है — सामान्य गृह मंदिरों या साधारण देव पूजा में नहीं।
लोबान की धूनी घर की ऊर्जा कैसे बदलती है
लोबान की धुनी घर में सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों पर क्या प्रभाव डालती है?
लोबान की धुनी सकारात्मक शक्तियों, पितरों और कुलदेवताओं को अत्यंत व्याकुल करके वहाँ से हटा देती है, जबकि प्रेत और पिशाच जैसी नकारात्मक सत्ताओं को तृप्त और शांत करती है।
लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल की धुनी का प्रयोग या तो तब होता है जब कोई नकारात्मक सत्ता देवता का रूप धरकर किसी पर आई हो और उसे पूरी तरह प्रकट करना हो, अथवा विशिष्ट तांत्रिक कर्मों में नकारात्मक शक्ति का आवाहन करके उसे शांत करना हो। यदि वहाँ कोई सकारात्मक शक्ति, कल्याणकारी पितृ या सात्त्विक कुलदेवी उपस्थित हो, तो लोबान की धुनी उन्हें अत्यंत व्याकुल कर देती है और वे पीछे हटकर वहाँ से चले जाते हैं। इसके विपरीत यदि वहाँ कोई प्रेत या पिशाच हो, तो लोबान का धुआँ उसे तृप्त और शांत करता है।
प्रतिष्ठा से पूर्व स्थान को पूर्ण रिक्त करना
तांत्रिक साधक किसी घर को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों शक्तियों से पूरी तरह कैसे रिक्त करते हैं?
गंधक, लोबान, हींग और कुछ जड़ी-बूटियों का विशेष मिश्रण अपामार्ग की लकड़ी पर जलाकर स्थान को समस्त शक्तियों से रिक्त किया जाता है, और उसके बाद सात्त्विक उपायों से पुनः सकारात्मक शक्तियों का आवाहन किया जाता है।
किसी निवास से तीव्र नकारात्मक शक्तियों को हटाते समय तांत्रिक साधक एक विशेष कर्म करते हैं जिसमें गंधक, लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल, हींग और कुछ विशिष्ट जड़ी-बूटियों को अपामार्ग की लकड़ी पर जलाया जाता है। यह प्रक्रिया उस स्थान को समस्त शक्तियों से — सकारात्मक (देव) और नकारात्मक (प्रेत) दोनों से — पूरी तरह रिक्त कर देती है। स्थान के निर्वात हो जाने पर शंख ध्वनि, कर्पूर प्रज्वलन और मंगल मंत्रों के पाठ जैसे सात्त्विक उपायों से पुनः सकारात्मक आध्यात्मिक शक्तियों का आवाहन किया जाता है।
घर की धूनी में लोबान का स्थान क्यों नहीं
क्या घर में लोबान जलाना चाहिए?
नहीं — लोबान (श्याम धूप) कभी घर के भीतर नहीं जलाना चाहिए: यह वहाँ पहले से मौजूद नकारात्मक शक्ति को पुष्ट करता है और पितरों तथा सात्त्विक देवताओं को वहाँ से हटा देता है।
लोबान (श्याम धूपतंत्र शास्त्र में लोबान का वह नाम जब इसका प्रयोग नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने के बजाय आकर्षित करने हेतु किया जाता है — यह उन्नत साधनाओं व विशेष तांत्रिक मंदिरों तक सीमित है।) कभी घर के भीतर नहीं जलाना चाहिए। वहाँ इसका प्रयोग स्थान में पहले से उपस्थित नकारात्मक शक्तियों को पुष्ट और तृप्त करता है, जबकि सबसे पहले पितृ वहाँ से हट जाते हैं और उसके बाद सात्त्विक कुलदेवता। किसी को उसकी सुगंध अच्छी लगती है या नहीं, यह प्रश्न से बाहर की बात है। इस दावे को परखने का एक उपयोगी सूत्र — कि यह हानिरहित है — यह है: इस्लामी परंपरा में लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल का सर्वाधिक प्रयोग मजारों और कब्रिस्तानों में होता है, जहाँ सैयद, पीर और जिन्न जैसी सत्ताएँ ही इसके धुएँ से तृप्त होती हैं। घर में इसे मुक्त रूप से जलाने की सलाह — चाहे कितने ही विश्वास से दी गई हो — इस बात के सामने तौली जानी चाहिए कि यह पदार्थ वास्तव में कहाँ विहित है।
घरेलू धूनी का राल मिश्रण
नित्य गृह धुनी के लिए राल में क्या मिलाना चाहिए?
राल में लौंग, काला तिल, काली मिर्च, कपूर, इलायची और जटामांसी मिलाई जाती है — इस मिश्रण की सुगंध सात्त्विक शक्तियों को बल देती है और नकारात्मक शक्तियों को भगा देती है।
रालभारत के साल वृक्ष का गोंद-राल।, अर्थात साल वृक्ष का गोंद, पत्थर जैसे दानों में पीसकर जलाया जाता है; यही दिव्य शक्तियों को पुष्ट और प्रसन्न करता है, और सनातन संस्कृति में देव पूजा में वास्तव में इसी का प्रयोग होता है। नित्य गृह धुनी के लिए इसमें लौंग, काला तिल, काली मिर्च, कपूर, इलायची और जटामांसी मिलाई जाती है। इससे बनने वाली सुगंध दिव्य और तीक्ष्ण बताई गई है: शुभ और सात्त्विक शक्तियाँ इससे बल पाती हैं तथा नकारात्मक शक्तियाँ क्षीण होकर भाग जाती हैं। मंत्र से अभिमंत्रित करके जलाने पर उस स्थान में किसी नकारात्मक शक्ति के टिकने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।
तंत्र में राल के नाम और प्रयोग
क्या तंत्र में राल का कोई प्रयोग है?
हाँ — अश्वकर्ण, कास्य, धूप वृक्ष, सूर्य धूप और सर्ज धूप नामों से राल कवचों में तथा रेणुका तंत्रम् जैसे ग्रंथों में आता है, जहाँ मंत्र सहित इसे जलाने से स्थान-बंधन होता है।
तंत्र में लोबानभारत में न पाए जाने वाले वृक्ष (सुमात्रा, जावा, इंडोनेशिया) का राल के साथ-साथ रालभारत के साल वृक्ष का गोंद-राल। का भी प्रयोग होता है, अपने ही नामों के साथ: अश्वकर्ण, कास्य, धूप वृक्ष, सूर्य धूप और सर्ज धूप। अनेक कवचों में इसका वर्णन है, और रेणुका तंत्रम् जैसे ग्रंथों में भगवती छिन्नमस्तिका के स्वरूप को प्रसन्न करने की कुछ मंत्र विधियों में इसी धूप का विधान है। उन मंत्रों का पाठ करते हुए इसे जलाने पर स्थान-बंधनराल जलाकर व रक्षा-मंत्रों का जाप करते हुए किसी स्थान के चारों ओर बनाया गया आध्यात्मिक कवच — जो दिव्य उपस्थिति का स्वागत करते हुए नकारात्मक प्रभावों को दूर रखता है। होता है — अर्थात स्थान का ही बंधन, जिसके बाद शुभ शक्तियाँ सहज ही प्रवेश करती हैं और अशुभ शक्तियाँ बाहर रोक दी जाती हैं।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।