कलश विसर्जन विधि: नवरात्रि समापन के नियम

नवरात्रि व्रत समापन की चरणबद्ध विधि।

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01

नवरात्र का व्रत कब खोलना चाहिए?

पारण विजयदशमी को, नवमी या अष्टमी को कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:11–02:17 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो प्रतिपदा से नवमी तक व्रत करते हैं, वे पारण सदैव विजयदशमी को करें — कभी भी नवमी या अष्टमी को कन्या पूजन करके अन्न खाकर नहीं। नौ दिन का व्रत नवमी को नहीं, दशमी को विजयदशमी का पूजन करने के बाद खुलता है। वे विजयदशमी को वह दिन बताते हैं जो नौ दिन के व्रत, पूजा, साधना, हवन और जप को एक सूत्र में पिरोता है, जिसका अपना विजय मुहूर्त होता है।

02

विजयदशमी को शस्त्र पूजन

हर सनातनी घर में शस्त्र हो और उस दिन उसका पूजन हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:18–02:48

वक्ता कहते हैं कि विजयदशमी के दिन सबसे पहले शस्त्र पूजन, आयुध पूजन करना चाहिए: हर सनातन धर्मी के घर में शस्त्र होना ही चाहिए, और उस दिन उसका पूजन होता है। पूजन स्थान पर शस्त्र को पंचामृत और पंचगव्य से, फिर गंगाजल से स्नान कराकर, रोली-कुमकुम तिलक करके, धूप-दीप दिखाकर, भगवती को समर्पित कर उनके पास स्थापित कर देना चाहिए और धूप-दीप से पूजन करना चाहिए।

03

विजयदशमी को शमी और अपराजिता पूजन

दोनों की एक-एक टहनी, प्रार्थना के साथ काटकर कलश पर चढ़ाई

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:49–05:11

वक्ता कहते हैं कि विजयदशमी को शमी और अपराजिता पूजन अवश्य करना चाहिए: शमी शत्रु का विनाश करती है, अपराजिता हर क्षेत्र में विजय देती है, और नौ दिन का व्रत इन्हीं दोनों की कृपा से पूर्णता पाता है — प्रकृति पूजा के बिना कोई व्रत-त्योहार पूरा नहीं होता। जिनके पास पौधे नहीं हैं वे मानसिक रूप से ही सही, दोनों के नाम से दो दीपक जलाएँ, या फूल वाले या नर्सरी से पौधे ले आएँ। काटने का औज़ार धोकर शस्त्र रूप में पूजें; फिर रोली, कुमकुम, दीपक, अक्षत, नैवेद्य, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, गंगाजल और मौली लेकर पहले अपराजिता के पास जाएँ, जल चढ़ाएँ, मौली बाँधें, अक्षत-कुमकुम, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य चढ़ाएँ, बार-बार व्रत के पूर्ण फल और विजय की प्रार्थना करें, क्षमा माँगते हुए थोड़ी-सी लता काटें, फिर शमी के पास यही करें, और दोनों को कलश पर चढ़ा दें। पूर्ण विधान में यह नगर की सीमा से बाहर जाकर होता है, जो वे कहते हैं आज संभव नहीं।

04

विजयदशमी को पूजा स्थान पर किए जाने वाले पाठ

अपराजिता, रामरक्षा और आदित्य हृदय, दोनों नवरात्रों में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:12–05:45

वक्ता कहते हैं कि टहनियाँ कलश पर चढ़ाने के बाद पूजा स्थान पर बैठें, धूप-दीप पहले से जल रहा हो या उस दिन का पूजन कर लिया हो, और दशमी के दिन अपराजिता स्तोत्र, रामरक्षा स्तोत्र और आदित्य हृदय का पाठ करें — चैत्र और शारदीय दोनों नवरात्रों में, तीनों अवश्य। यदि ये तीन न करें तो कवच का पाठ और उसके साथ प्रतिलेख में "सतनाम" लिखे पाठ आदि कर लें, और फिर आरती करें।

05

नवरात्र कलश का विसर्जन: विदाई प्रार्थना और कलश हिलाना

संस्कृत में उत्तिष्ठ देवि चामुण्डे, या वही प्रार्थना हिंदी में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:46–06:59

वक्ता कहते हैं कि आरती के बाद विसर्जन के लिए हाथ में अक्षत और फूल लें और विसर्जन मंत्र बोलें — संस्कृत आती हो तो "उत्तिष्ठ देवि चामुण्डे", नहीं तो सामान्य हिंदी में: कि भगवती की कृपा और उनकी दी हुई बुद्धि व सामर्थ्य से यह नवरात्र व्रत-संकल्प पूर्ण हुआ; कि विनीत भाव से उन्हें विदा करने प्रस्तुत हूँ; कि माँ दुर्गा और उनके साथ आए सभी देवगण प्रसन्नतापूर्वक अपने-अपने लोक जाएँ और वहाँ से सदैव परिवार की रक्षा करें व सुख-समृद्धि दें; और भगवती लक्ष्मी और श्री गणेश भंडार गृह में स्थापित रहें। फिर बार-बार क्षमा प्रार्थना करते हुए अक्षत-फूल कलश पर या उसके सामने रख दें, और कलश तथा स्थापित सभी मंडल हिला दें। खोइंचा और क्षमा प्रार्थना के बाद बोए हुए जवारे और अपराजिता-शमी की टहनियाँ देवी के विग्रह या फोटो पर समर्पित करें।

06

खोइंचा: विसर्जन से पहले देवी के लिए बाँधी जाने वाली विदाई-पोटली

बेटी को घर से खाली हाथ विदा नहीं करते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:00–07:20

वक्ता कहते हैं कि बहुत से क्षेत्रों में खोइंचा भरना या भात भरना नाम की रीति है: एक चुनरी में माँ को अक्षत, फूल, धूप, घास और दक्षिणा रखकर उनके आँचल में बाँधा जाता है, जैसे बेटी को घर से खाली हाथ विदा नहीं करते। घर की सुहागन महिलाएँ इसे करती हैं, और यह विसर्जन मंत्र पढ़ने से पहले किया जाता है।

07

विशेष स्थिति: घर की एकमात्र सुहागन रजस्वला हो तो खोइंचा कौन भरे

घर के पुरुष भर सकते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:21–07:47

पूछे जाने पर कि घर में सुहागन स्त्री एक ही हो और वह उस समय रजस्वला हो जाए तो कौन करेगा, वक्ता उत्तर देते हैं कि ऐसी स्थिति में पुरुष खोइंचा भर सकते हैं — चुनरी में बाँधकर माँ को विदाई देने से पहले वहाँ रख सकते हैं।

09

नवरात्र के अंत में अखंड ज्योत

कलश हिलने तक जले; कलश के घर से निकलने से पहले शांत हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:24–09:14

वक्ता कहते हैं कि नवरात्र का अखंड दीप विसर्जन तक — कलश हिलने तक — जलते रहना चाहिए; विसर्जन मंत्र पढ़कर कलश हिला देने के बाद अखंड ज्योत बुझ जानी चाहिए। बचा तेल डिब्बे में निकालकर रखें, वर्षभर रोली मिलाकर तिलक में काम आएगा, और किसी की तबीयत खराब हो तो उसके मस्तक पर लगाकर भगवती से प्रार्थना कर सकते हैं; बची राख भी रख लें। कलश के घर से निकलने से पहले ज्योत पूरी तरह जलकर बुझ जाए और थोड़ा गंगाजल छिड़ककर ठंडी हो जाए — ज्योत घर में जलती रहे और कलश नदी ले जाएँ, ऐसा नहीं करना चाहिए, जब तक घर में पहले से कोई अलग विधि-विधान न चला आ रहा हो।

10

नवरात्र के बाद पारण: कलश निकलने से पहले अन्नदान, भोग और प्रसाद

अन्नदान और भोग के बाद ही खाएँ; खाने के बाद ही विसर्जन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:15–10:23

वक्ता कहते हैं कि पारण से पहले अन्नदान करना चाहिए: पाँच तरह का अन्न, या यथाशक्ति सवा किलो अन्न — आटा, चावल आदि का सीधा — हाथ से छूकर संकल्प लें कि "मैं ब्राह्मण को दान दे रहा हूँ", फिर रख दें और ब्राह्मण, पंडित जी या मंदिर भिजवा दें। फिर जो भी खाना बना है पहले माँ को भोग लगाएँ; पहले भगवती का चढ़ा प्रसाद खाएँ, फिर भोग — खिचड़ी, या दशमी को बनी पूरी-सब्ज़ी। पारण के बाद ही, और अखंड ज्योत पूरी तरह शांत होने पर, कलश घर से बाहर ले जाएँ; कलश विसर्जित करके आकर खाना — यह गलती न करें।

11

नवरात्र कलश का नदी में विसर्जन

ज्यों का त्यों ले जाएँ, तट पर धूप-दीप और प्रार्थना, प्रदक्षिणा, नारियल समेत डुबोएँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:24–11:44

वक्ता कहते हैं कि अतिरिक्त चुनरियाँ घर पर रख सकते हैं, पर कलश ठीक जैसे सजा है वैसे ही नदी तक जाता है। तट पर उसे रखकर धूप-दीप दिखाएँ और पुनः प्रार्थना करें — कोई अपराध हुआ हो तो क्षमा, सदैव रक्षा, और हर वर्ष सेवा की सद्बुद्धि — फिर अपनी जगह पर पाँच या कम से कम तीन बार प्रदक्षिणा घूमें, और कलश को नारियल समेत पानी में डुबोएँ, नारियल हाथ में पकड़े रहें कि बह न जाए। पूरा डूबने पर ढक्कन हटाकर भीतर की दक्षिणा, सुपारी और अन्य द्रव्य निकालें, चुनरी में बाँधकर जहाँ धन रखते हैं वहाँ रखें; पूर्ण पात्र के चावल नदी में मछलियों के लिए डाल दें या चिड़ियों को दें; कलश और नारियल नदी में छोड़ दें। बोए हुए जवारे भी सीधे विसर्जित कर सकते हैं — उनसे कोई प्रदूषण नहीं होता।

12

कलश पर लपेटा वस्त्र: विसर्जन के बाद ही निकालें

नौ दिन की शक्ति उसमें रहती है; पहले डुबोएँ, फिर निचोड़कर रखें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:45–12:28

वक्ता कहते हैं कि नारियल और कलश पर नौ दिन लपेटा गया वस्त्र विसर्जन से पहले नहीं उतारा जाता: कलश को नदी में डुबाने के बाद ही उसे निचोड़कर घर लाना है। वे बार-बार कहते हैं कि माँ ने नौ दिन जो चुनरी या वस्त्र पहना उसका सीधे प्रयोग करने का सामर्थ्य हममें नहीं है — बहुत लोग करते हैं, पर कलश के ऊपर का मुख्य वस्त्र पहले विसर्जित होना चाहिए; उसका नौ दिन का पूरा शक्ति-सामर्थ्य उसमें बना रहता है, पानी में डालने से खत्म नहीं होता। ऐसा न करना चाहें तो कम से कम उस पर पहले नदी का पानी छिड़कें, तभी वस्त्र हटाकर फिर विसर्जन करें।

13

सावधानी: नवरात्र कलश का नारियल कभी न फोड़ें

वह साक्षात दुर्गा हैं; फोड़ना देव-हत्या है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:29–12:41

वक्ता कहते हैं कि कलश के ऊपर रखा नारियल कभी नहीं फोड़ना चाहिए — इसे वे ऐसी बेवकूफी, ऐसी गलती बताते हैं जो कभी न करें, क्योंकि वह नारियल साक्षात दुर्गा का स्वरूप है। उसे फोड़ेंगे तो हत्या का दोष, सीधा-सीधा देव-हत्या का दोष लगता है। कलश को भी कभी नहीं फोड़ना चाहिए।

14

कलश का जल पीने के प्रसाद के रूप में रखना

उसमें नौ दिन की भगवती की शक्ति है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:48–13:09

वक्ता कहते हैं कि कलश हिलाने के बाद उसका थोड़ा-सा जल पीने के लिए रखा जा सकता है — विसर्जन करने जा रहे हों तब भी एक छोटे गिलास से निकालकर रख लें और सब कोई पिएँ, क्योंकि उसमें नौ दिन की भगवती की शक्ति है।

नदी तक जा सकें या नहीं, वक्ता कहते हैं, कलश हिलाने के बाद उसमें का थोड़ा-सा जल पीने के लिए रखा जा सकता है। विसर्जन करने जा रहे हों तब भी कलश का थोड़ा जल निकालकर — छोटे गिलास से निकालकर — रख लें, और सब कोई पिएँ: उसमें नौ दिन की भगवती की शक्ति है।

15

नदी न मिल सके तो नवरात्र कलश का विसर्जन

जल पीपल, बरगद या तुलसी में; कलश और नारियल पूजा स्थान में प्रतीक्षा करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:10–13:44

वक्ता कहते हैं कि यदि जाने के लिए नदी, तालाब, सरोवर न हो तो कलश का जल पीपल के वृक्ष, बरगद के वृक्ष या तुलसी के पौधे में डाल सकते हैं, और कलश को पूजा स्थान में ही साफ जगह रहने दें; बाद में कभी कहीं जाएँ तो विसर्जित कर दें, पर उसमें पैर नहीं लगना चाहिए और मिट्टी का हो तो फूटना नहीं चाहिए। नारियल भी उसी तरह पूजा स्थान में रहे, पूजन होता रहे, जब तक किसी यात्रा में विसर्जन न हो सके; पूर्ण पात्र के चावल चिड़ियों को डाल दें।

16

नवरात्र के बाद बचे जवारे का क्या करें

कचरे में कभी नहीं: हरा भाग रस के लिए, जड़ें गमले में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:45–14:28

वक्ता कहते हैं कि जवारे का ऊपरी हरा भाग कान पर लगाते हैं, भगवती को चढ़ाते हैं और धन रखने के स्थान पर रखते हैं, फिर भी बहुत बच जाते हैं; विसर्जन की सुविधा न हो तो कभी कचरे में न फेंकें। कलश हिलाने के बाद पूरा हरा भाग कैंची से काटकर उसका रस या शरबत बनाकर सब पी सकते हैं — कोई दोष नहीं लगता; नीचे का सफेद भाग गमले में डालकर ऊपर अच्छे से मिट्टी डालें और उसमें कोई पौधा लगा दें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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