अनघा लक्ष्मी तर्पण विधि — घर की मृत स्त्री को शांत करने हेतु

अनघा लक्ष्मी पूजन तथा परेशान करने वाली मृत स्त्री को शांत करने हेतु बेल वृक्ष पर तर्पण की विधि।

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The notes
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01

अनघा लक्ष्मी — दत्तात्रेय की वामांगी शक्ति, जिनका पूजन उनके साथ किया जाता है

महाशक्ति के साथ उनके युगल स्वरूप का पूजन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:03–01:05

वक्ता कहते हैं कि भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और महेश का एकत्रित स्वरूप हैं जिनमें समस्त शक्तियाँ विद्यमान हैं, और उनकी महायोग शक्ति, उनकी वामांगी शक्ति, भगवती अनघा लक्ष्मी हैं। वे कहते हैं कि जब भी किसी महाशक्ति की पूजा की जाए तो उनके युगल स्वरूप का पूजन भी अवश्य करना चाहिए, इसलिए दत्तात्रेय के पूजन के साथ अनघा लक्ष्मी के 101 नामों से अर्चना या तर्पण करने पर उनकी विशिष्ट कृपा मिलती है। यदि कोई दत्तात्रेय के किसी मंत्र की 100 माला कर रहा हो तो साथ में उनके 101 नामों का पाठ कर लेने से वह विशेष कृपा प्राप्त होती है।

02

अनघा लक्ष्मी के 101 नामों से नियमित अर्चन: धन-समस्या में और कृष्ण पक्ष अष्टमी को

चार महीने प्रतिदिन, या महीने में एक बार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:06–01:39

वक्ता कहते हैं कि जहाँ धन-संबंधी समस्या बहुत अधिक हो, वहाँ कम से कम चार महीने तक प्रतिदिन केवल एक बार सुबह कुंकुम से भगवती अनघा लक्ष्मी के 101 नामों से अर्चन करने पर त्वरित रूप से उनकी विशिष्ट कृपा मिलती है। अलग से वे कहते हैं कि जो लोग भगवान दत्त की सेवा-पूजा करते हैं और अनघा लक्ष्मी आदि व्रत करते हैं, वे यदि हर महीने कृष्ण पक्ष अष्टमी को इन मंत्रों से अर्चन करें तो उनकी कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

03

धन हेतु अनघा लक्ष्मी का चाँदी के श्री बीज का प्रयोग

बीज धन रखने के स्थान पर रहता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:40–02:59

वक्ता एक ऐसा विधान बताते हैं जिसे वे दत्तात्रेय साधकों के लिए बहुत बड़ा वरदान कहते हैं, यद्यपि सामान्य रूप से कोई भी इसका प्रयोग कर सकता है। लक्ष्मी जी का बीज अक्षर श्री चाँदी का बनवाया जाता है; अनघा लक्ष्मी अष्टमी (मार्गशीर्ष में दत्तात्रेय जयंती के बाद आने वाली अष्टमी) को, या विपत्ति काल में किसी भी कृष्ण पक्ष अष्टमी को, उसे प्लेट में रखकर भगवती का स्वरूप मानकर कुंकुम से उनके नामों द्वारा अर्चन करते हैं, आरती दिखाते हैं और धन रखने के स्थान पर रख देते हैं। उस अष्टमी से प्रतिदिन उसे वापस पूजन स्थान पर लाकर पुनः कुमकुम से 108 बार या 101 मंत्रों से अर्चन करके धन के स्थान पर रख देते हैं; लाल और पीला पुष्प अवश्य चढ़ाते हैं। वे कहते हैं ऐसा करने से, विशेषकर धन-समस्या में, भगवती की विशिष्ट कृपा अवश्य मिलती है।

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अनघा बेल-वृक्ष तर्पण किसके लिए: घर की मृत स्त्री जो परिवार को परेशान करे

पित्रानी या डाकिनी, जब नारायण बलि संभव न हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:29–03:56

वक्ता कहते हैं कि यदि घर में किसी स्त्री की मृत्यु हुई हो, विशेषकर अकाल मृत्यु, और वह परिवार को बहुत परेशान कर रही हो, चाहे उसका स्वरूप कुछ भी हो गया हो, उसे पित्रानी (जैसे राजस्थान में कहते हैं) कहें या dakini, और उससे संबंधित दोष उपस्थित हो, तो भगवती के 101 नामों से बिल्व वृक्ष पर तर्पण किया जाता है। वे एक व्यक्ति का उदाहरण देते हैं जिनकी माता जी की हत्या हो गई थी और अब वे परेशान करती हैं, और नारायण बलि का सामर्थ्य अभी नहीं है: वहाँ यह तर्पण विकल्प है, और तीन-चार दिन से सप्ताह भर में उस शक्ति की उग्रता घटकर वह सौम्य हो जाती है। छोटे बच्चों को परेशान कर रही हो तब भी इसका प्रयोग कर सकते हैं।

06

अनघा लक्ष्मी के 101 नामों से बेल-वृक्ष तर्पण का विधान

पीतल का लोटा, मधु, काला तिल, तीन पान पत्ते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:57–05:54

वक्ता कहते हैं कि यह तर्पण बिल्व वृक्ष के तने पर गंगा जल से किया जाता है, वृक्ष के पास खड़े होकर या उसके नीचे बैठकर; वृक्ष पूजित होना चाहिए, सर्वोत्तम मंदिर के भीतर का, और निर्जन स्थान का कभी नहीं। पीतल के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ा मधु और काला तिल डालते हैं। तीन पान पत्ते (डंठल तोड़कर, अग्र भाग साबुत) एक साथ लेते हैं; घर की मृत स्त्री का नाम लेकर संकल्प बोलते हैं, घी का दीप पुष्प के ऊपर रखकर जलाते हैं, सीधे भूमि पर नहीं, और भगवती से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें संतुष्ट और सौम्य करें और परिवार को सामर्थ्य दें कि उनकी मुक्ति के लिए नारायण बलि करवा सकें। पत्ते पात्र में डालकर 101 नामों में से प्रत्येक के साथ 'तर्पयामि नमः' बोलते हुए वृक्ष पर जल डालते हैं। पत्ता और बचा जल घर लाकर पूरे घर में, विशेषकर मुख्य द्वार पर, छिड़क देते हैं।

07

अनघा तर्पण मंत्र में प्रणव केवल यज्ञोपवीत धारण करने वालों के लिए

बाकी सब श्री बोलें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:55–06:11

वक्ता कहते हैं कि इस मंत्र में प्रणव (ॐ) का प्रयोग केवल यज्ञोपवीत धारण करने वाले करें; बाकी लोग उसकी जगह 'श्री' का प्रयोग करेंगे। इसलिए प्रथम मंत्र 'श्री अनघाय नमः' है, जिसे तर्पण में 'श्री अनघाय तर्पयामि नमः' बोलते हुए पत्ते से वृक्ष पर जल डालते हैं।

08

बेल-वृक्ष तर्पण के विशेष प्रसंग: अल्पायु में मृत बच्ची, या नष्ट गर्भ या मृत संतान

जब समर्थ साधक या तीर्थ-कर्म संभव न हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:44–07:21

वक्ता कहते हैं कि यदि घर की कोई बच्ची, मान लें तीन से तेरह वर्ष के बीच की, जो रजस्वला हो चुकी हो सकती है, की अकाल मृत्यु हुई हो और वह परिवार को बहुत परेशान कर रही हो, और कोई सामर्थ्यवान साधक न मिला हो जो उसकी गति करा सके, न ही गंगा जी, प्रयाग, काशी या गया जी में विशेष कर्म के लिए आर्थिक साधन हों, तो भगवती के इस स्वरूप और इन मंत्रों से बिल्व वृक्ष पर तर्पण करके उसे शांत और सौम्य किया जा सकता है। वे जोड़ते हैं कि जिनका गर्भ खराब हो गया हो या जिनकी संतान की अकाल मृत्यु हुई हो, उन माता-पिता को बहुत कष्ट होता है, वे भी इसका प्रयोग करें; भगवती की कृपा से वह शांत हो जाती है।

09

बेल-वृक्ष तर्पण की अवधि: 40 दिन प्रतिदिन, फिर महीने में दो बार

सातवें दिन से लाभ, पर छोड़ना नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:22–07:42

वक्ता कहते हैं कि यह तर्पण प्रतिदिन, कम से कम 40 दिन लगातार करना होगा; तब लाभ अवश्य मिलेगा। सात दिन से लाभ दिखने लगता है, लेकिन छोड़ना नहीं चाहिए; उन्हें पूर्ण रूप से शांत करना चाहिए। 40 दिन के बाद चाहें तो केवल दो दिन, हर कृष्ण पक्ष अष्टमी और अमावस्या को तर्पण करने से शांति बनी रहती है।

10

सावधानी: बेल-वृक्ष तर्पण और काली प्रयोग साथ में नहीं

दो प्रयोग साथ करने से अत्यधिक उग्रता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:43–07:44

वक्ता कहते हैं कि इस तर्पण के अलावा काली जी का एक प्रयोग, जो वे पहले दे चुके हैं, भी इसी समस्या में किया जा सकता है, लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि यदि दोनों साथ में करेंगे तो बहुत अधिक उग्रता होगी। दोनों में से एक ही करना है, दोनों नहीं।

अंत में वक्ता कहते हैं कि इस तर्पणहवन व मार्जन के साथ किया जाने वाला जल आदि द्वारा देवता या पितरों को अर्पित तर्पण। के सिवाय काली जी का भी एक प्रयोग है, जो वे पहले ही दे चुके हैं, वह भी किया जा सकता है। लेकिन वे सावधान करते हैं कि यदि इसे इस तर्पण के साथ में करेंगे तो बहुत अधिक उग्रता होगी। इसलिए दोनों को साथ नहीं करना है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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