वंश वृद्धि दुर्गा कवच: संतान प्राप्ति और वंश वृद्धि हेतु साधना

संतान प्राप्ति और वंश वृद्धि हेतु वंश वृद्धि दुर्गा कवच की विधि।

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01

वंश वृद्धि रुकने के बताए गए कारण

वंश वृद्धि रुकने के कौन-कौन से कारण बताए गए हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 00:06–00:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि वंश वृद्धि रुकने के कारण जन्म कुंडली का दोष — पंचम भाव पर किसी क्रूर ग्रह की दृष्टि — कुल का दोष, अथवा पूर्वजों या स्वयं के द्वारा किए गए कर्मों से उत्पन्न दोष होते हैं, भले ही व्यक्ति मेडिकली पूर्णतः सही हो।

02

वंश वृद्धि दुर्गा कवच की शरण कब लें

मेडिकली सब ठीक होते हुए भी संतान न हो, तो महादेव और जगदंबा दोनों की शरणागति

· Reviewed Sep 2026 · 00:46–01:11

वक्ता कहते हैं कि ऐसी स्थिति में भगवान महादेव के साथ-साथ भगवती जगदंबा की शरणागति लेनी चाहिए — इसमें वे स्थितियाँ भी सम्मिलित हैं जहाँ मेडिकली सब ठीक होते हुए गर्भ नहीं ठहरता, अथवा बार-बार गर्भपात हो जाता है।

03

इस साधना में अपेक्षित गोपनीयता

पति केवल पत्नी को और पत्नी केवल पति को बताए; गुरु से चर्चा हो सकती है, अन्य किसी से नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 01:12–01:41

वक्ता कहते हैं कि यह साधना करने वाला पति अपनी पत्नी के सिवाय और पत्नी अपने पति के सिवाय किसी को न बताए; कोई गुरु या मार्गदर्शक हो तो उनसे चर्चा की जा सकती है, पर अन्य किसी व्यक्ति को न तो बताना चाहिए और न ही उससे पूछना चाहिए।

04

वंश वृद्धि दुर्गा कवच का उद्गम और नाम

भगवान सूर्यनारायण द्वारा दिया गया, नाम वंश कवचम् अथवा वंश वृद्धि दुर्गा कवचम्

· Reviewed Sep 2026 · 01:42–02:18

वक्ता कहते हैं कि यह कवच भगवान सूर्यनारायण के द्वारा दिया गया है और इसका नाम वंश कवचम्, वंश वृद्धि दुर्गा कवचम् है।

05

वंश वृद्धि दुर्गा कवच की सिद्धि की विधि

वंश वृद्धि दुर्गा कवच को सर्वप्रथम सिद्ध कैसे किया जाता है?

· Reviewed Sep 2026 · 02:19–03:11 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि किसी भी महीने के शुक्ल या कृष्ण पक्ष की अष्टमी से चतुर्दशी तक प्रतिदिन मूल कवच का 108 बार पाठ करें — घर में या भगवती दुर्गा के मंदिर में, पीले या लाल वस्त्र में, पूर्व दिशा या श्री विग्रह की ओर मुख करके, घी के दो दीपक जलाकर, संकल्प लेकर तथा कुशा और पावित्री अंगूठी धारण करके।

06

वंश वृद्धि दुर्गा कवच की जप विधि

108 पाठ पूरे होने तक दाहिने हाथ में कमल का फूल, बेल फल या बिना फोड़ा नारियल

· Reviewed Sep 2026 · 03:12–04:02

वक्ता कहते हैं कि 108 पाठ पूरे होने तक दाहिने हाथ में कमल का फूल, बेल फल (बिल्व) या पानी वाला बिना फोड़ा नारियल रहना चाहिए, गिनती के लिए कोई अन्य वस्तु प्रयोग करनी चाहिए, और फिर वह फूल या फल भगवती के श्री चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।

07

वंश वृद्धि दुर्गा कवच का अंतिम दिन का हवन

दुर्गा के 108 नाम या जयंती मंगला काली मंत्र से घी और गुग्गल की 108 आहुति, उत्तम यह कि पति-पत्नी साथ करें

· Reviewed Sep 2026 · 04:03–05:46

वक्ता बताते हैं कि अंतिम दिन स्वयं सूक्ष्म हवन करके भगवती दुर्गा के 108 नाम अथवा जयंती मंगला काली मंत्र से घी और गुग्गल की 108 आहुति देनी चाहिए, उत्तम यह कि पति-पत्नी साथ में करें; और वे कहते हैं कि इसे घुश्मेश्वर महादेव की अलग विधि के साथ जोड़कर करना अति उत्तम है।

08

अनुष्ठान में न्यूनतम जप संख्या और अभिमंत्रित कलश

प्रथम अनुष्ठान में कम से कम 1100 जप, और ढक्कन लगे कलश में रखा गंगाजल नित्य पाठ की ऊर्जा ग्रहण करता है

· Reviewed Sep 2026 · 05:47–06:21

वक्ता कहते हैं कि इस अनुष्ठान को प्रथम बार करने पर कम से कम 1100 जप कर लेना चाहिए, और साथ में ढक्कन लगा हुआ कलश या लोटा शुद्ध गंगाजल से भरकर रखना चाहिए, जो नित्य पाठ की ऊर्जा और अंतिम दिन हवन की अग्नि का ताप ग्रहण करे।

09

इस वंश वृद्धि कवच से दूर होने वाले कष्ट

वंश रोकने वाले दोष, लंबे समय की संतानहीनता और बार-बार शिशु-मृत्यु में लाभ का दावा

· Reviewed Sep 2026 · 06:22–07:35

वक्ता दावा करते हैं कि यह साधना वंश को रोकने वाले किसी भी दोष से छुटकारा दिलाती है, लंबे समय से संतान न पाने वाली (बंध्या) स्त्री और बार-बार शिशु खोने वाली (मृतवत्सा/काकबंध्या) स्त्री को लाभ देती है, गर्भधारण में बाधक कुछ मेडिकल स्थितियों में भी लाभकारी है, तथा ग्रह, पितर या अभिचार कर्म से उत्पन्न बाधा भी दूर करती है — साथ में स्त्री द्वारा धारण किया गया अभिमंत्रित रुद्राक्ष इसमें और सहायक होता है।

10

अभिमंत्रित कवच धारण करने से मिलने वाली निरंतर रक्षा

गले या कमर में धारण किया जाने वाला कवच, गर्भस्थ शिशु की और जन्म के बाद भी रक्षा करता है

· Reviewed Sep 2026 · 07:36–08:19

वक्ता कहते हैं कि इस अनुष्ठान से बना अभिमंत्रित कवच स्त्री द्वारा गले में या कमर में धारण किया जाता है, और वह गर्भस्थ शिशु की तथा जन्म के पश्चात भी भगवती और योगिनीs की कृपा में रक्षा करता रहता है।

11

परंपरागत रूप से गुप्त कवच को प्रकाशित करने का कारण

परंपरा में अप्रकाशित रखा गया, अब इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि अभिचार से वंश वृद्धि रुकती है

· Reviewed Sep 2026 · 08:20–08:46

वक्ता कहते हैं कि इस कवच के विषय में कहा गया है कि इसे सर्वत्र प्रकाशित न करें, परंतु वे इसे अब इसलिए बता रहे हैं क्योंकि उनके अनुसार अच्छे-अच्छे लोगों पर किए गए अभिचार के कारण वंश वृद्धि रुक जाती है, इसलिए वे इस उपाय का अधिक लोगों तक पहुँचना आवश्यक मानते हैं।

12

अभिमंत्रित जल पति-पत्नी कब-कब पिएँ

शुक्र दोष वाला पति प्रतिदिन प्रातः खाली पेट पिए; पत्नी ऋतु-स्नान के दिन से आरंभ करे

· Reviewed Sep 2026 · 08:47–09:38

वक्ता कहते हैं कि शुक्र दोष वाला पुरुष प्रतिदिन प्रातः स्नान और पूजा के पश्चात वह अभिमंत्रित जल खाली पेट पिए, और स्त्री उस दिन से पीना आरंभ करे जिस दिन वह ऋतु स्नाता होकर प्रथम पूजन करती है।

13

अभिमंत्रित जल समाप्त हो जाने पर क्या करें

मूल कवच का पाठ फिर भी नित्य करें — कम से कम सात बार, उत्तम सत्ताईस बार — और नया जल अभिमंत्रित करें

· Reviewed Sep 2026 · 09:39–10:18

वक्ता कहते हैं कि जल समाप्त हो जाने पर, या यदि जल रखना भूल गए हों, तब भी मूल कवच का पाठ प्रतिदिन करना है — कम से कम सात बार, और सत्ताईस बार तो अति उत्तम — और उसी प्रकार अभिमंत्रित करने के लिए भगवती के पास नया जल रख देना चाहिए।

14

गर्भधारण हेतु अभिमंत्रित मक्खन

ऋतु-स्नान के पश्चात भगवती के सामने रखा एक चम्मच देसी गाय का मक्खन, कवच से अभिमंत्रित

· Reviewed Sep 2026 · 10:19–10:59

वक्ता कहते हैं कि स्त्री के ऋतु स्नाता होने के पश्चात शुद्ध देसी गाय (गौ) के दूध से बना लगभग एक चम्मच भर मक्खन भगवती के सामने रखकर इस कवच से अभिमंत्रित करना चाहिए, और उसे खाने से गर्भधारण होता है, ऐसा वर्णन आया है।

15

रविवार की संक्रांति या रविवार की शुक्ल सप्तमी का महत्व

रविवार को पड़ने वाली संक्रांति या शुक्ल सप्तमी: अभिमंत्रित जल या मक्खन घर की चौखट पर लें

· Reviewed Sep 2026 · 11:00–11:36

वक्ता कहते हैं कि जब कभी रविवार को संक्रांति लगे, या शुक्ल पक्ष की सप्तमी रविवार को पड़े, तब अभिमंत्रित जल या मक्खन घर के प्रमुख द्वार की चौखट (चौखट) पर सूर्यनारायण को देखते हुए ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि वह उनका विशेष दिवस और उनकी विशेष कृपा का दिन माना गया है।

16

साधना सफल होने पर अपेक्षित आजीवन आचरण

दंपति से और आने वाली संतान से भी सदाशिव की आजीवन भक्ति की अपेक्षा

· Reviewed Sep 2026 · 11:37–11:45

वक्ता कहते हैं कि इस कवच और घुश्मेश्वर महादेव के पूरे विधान से जब लाभ प्राप्त हो जाए, तो दंपति और आने वाली संतान को भी आजीवन सदाशिव और भगवती की भक्ति करते रहना चाहिए तथा दूसरों का कल्याण करने का प्रयास करते रहना चाहिए — इससे धर्मयुक्त संतान की प्राप्ति अवश्य होती है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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