मारण से त्वरित रक्षा के बिना सिद्धि समर्थ विधान — चौखट उतारा, नरसिंह, क्षेत्रपाल और जीवित कुक्कुट उतारा

बिना किसी सिद्धि के मारण या अभिचार प्रयोग से आपात रक्षा: नरसिंह की चौखट पर उतारा, भैरव प्याला या नींबू-गुड़ का विकल्प, क्षेत्रपाल निकारी, यात्रा में वाहन का उतारा, और एक रंग का कुक्कुट सीमा पार जीवित छोड़ने की विधि; साथ में लाइव प्रश्नोत्तर।

22 notes, in the order they are taught. Jump to any one.

4 also answer a common question

Questions this answers

4 of the notes below are questions in their own right. Scroll for more.

The notes
EN हिंदी
01

घर की चौखट पर उतारा: बिना किसी सिद्धि के मारण प्रयोग से सबसे तीव्र रक्षा

चौखट पर बैठे नरसिंह सबसे पहले रक्षा करते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:52–04:51

वक्ता कहते हैं कि लगभग हर किसी के जीवन में कभी न कभी मारण प्रयोग या अभिचार से भेंट हो जाती है, और कोई हनुमान जी या काली जी की सिद्धि करके रक्षा के लिए बैठा नहीं है। सबसे तीव्र रक्षा करने वाले देवता, वे कहते हैं, हर घर की चौखट पर बैठे हैं — भगवान नरसिंह, सबसे प्रथम देवता। पीड़ित व्यक्ति चौखट के अंदर की ओर खड़ा रहता है और उतारा अंदर से करके बाहर ले जाया जाता है: नींबू का उतारा, सेंधा नमक, लाल मिर्च, पीला या काला सरसों, या क्षेत्रपाल के लिए भेजा जाने वाला उतारा भी। उसी समय पचास प्रतिशत राहत मिल जाती है; जानकार व्यक्ति मिलने तक हर पंद्रह मिनट पर पाँच बार उतारा किया जाता है। किसी मंत्र सिद्धि की आवश्यकता नहीं — हनुमान चालीसा से भी हो जाता है — लेकिन चौखट न हो तो यह नहीं हो सकता।

02

दूसरा उपाय भैरव जी का प्याला, और वैष्णव के लिए विकल्प: नरसिंह को नींबू की बलि और गुड़

वैष्णव के लिए नरसिंह ही भैरव हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:52–05:39

वक्ता अभिचार के विरुद्ध बिना सिद्धि के दूसरे उपाय के रूप में भैरव जी के प्याले का नाम लेते हैं, लेकिन कहते हैं कि सभी इसे नहीं चढ़ा सकते: इसमें गुरु आदेश का विषय आ जाता है, और जिस वैष्णव को गुरु ने जीवन भर मदिरा का स्पर्श भी न करने का आदेश दिया हो, वह नहीं चढ़ा सकता। विकल्प यह है, वे कहते हैं, कि वैष्णव के लिए भगवान नरसिंह ही भैरव हैं — नरसिंह भैरव नाम का स्वरूप भी है, और रक्षा-प्रधान सभी देवता भैरव ही कहे गए हैं। तो जिस चौखट पर उतारा किया, वहीं, अगर बाहर नहीं जा सकते, नरसिंह को निंबू बलि दी जाती है और साथ में गुड़ का भोग लगाया जाता है।

03

मारण प्रयोग के विरुद्ध ताँबे के पात्र से गुड़-जल की धार

विष का भोग चौखट के आगे, ऊपर कभी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:40–06:48

वक्ता कहते हैं कि मारण के नाश के लिए नरसिंह के उग्रतम स्वरूप को जो धार दी जाती है, वह "विष का भोग" है: ताँबे के अर्घ्य पात्र या ताँबे के लोटे में जल में गुड़ कम से कम सवा मिनट — दो मिनट मान लीजिए — घोला जाता है, जब तक वह ताँबे से थोड़ा रिएक्ट न कर जाए। वह घोल पीड़ित व्यक्ति के सिर के ऊपर से उल्टा उतारा जाता है और घर की चौखट के पास भगवान नरसिंह के नाम से धार दे दी जाती है। यही धार शिव मंदिर की चौखट पर, शिव मंदिर के पीछे, और काली या सात बहन के मंदिर के पीछे भी दी जाती है — पीछे, सामने कभी नहीं। धार सदैव चौखट के ठीक आगे दी जाती है, ऊपर कभी नहीं; ऊपर श्रृंगार होता है।

04

चौखट न हो या अभिचार तीव्र हो तो उतारा क्षेत्रपाल को भेजना

असली क्षेत्रपाल भैरव हैं; डीह पर कौन है, यह जानें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:49–08:10

वक्ता कहते हैं कि चौखट न हो, या अभिचार बहुत कष्टदायक हो गया हो, तो उतारा क्षेत्रपाल के पास भेजा जाता है — इसमें भी सिद्धि की ज़रूरत नहीं, लेकिन एक नियम है: क्षेत्रपाल कौन हैं, यह जानना कहीं श्रेष्ठ है। मुख्य क्षेत्रपाल सदैव भैरव होते हैं, लेकिन पिछले सौ वर्षों में बँधे बहुत से डीहों पर लोगों ने ब्रह्म को डीह बाबा के रूप में स्थान दे दिया है, और तब दो निकारी जाती हैं — एक भैरव जी की और एक ब्रह्म बाबा की। भैरव जी की पूरी क्षेत्रपाल निकारी वह है जिसे सात्विक में उड़द बलि कहते हैं: गोटा काला उड़द, चावल और दही, ऊपर चौमुख दीपक दीपक, सफ़ेद मिठाई, दक्षिणा और पानी।

05

विशेष स्थिति: गाँव के डीह पर क्षेत्रपाल रूप में स्थापित ब्रह्म की निकारी

दही-चूड़ा या कच्चा दूध, जनेऊ और आटे का दीपक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:11–09:31

वक्ता कहते हैं कि जहाँ क्षेत्रपाल स्थान के प्रमुख देवता ब्रह्म हों, वहाँ भैरव की निकारी के साथ उनकी दूसरी निकारी जाती है: बाल ब्रह्म हों तो कच्चा दूध, नहीं तो दही-चूड़ा जिसमें लड्डू और जनेऊ रहे, पानी अलग से, और सरसों के तेल या घी में जला चार मुँह वाला आटे का दीपक। अगर उस ब्रह्म स्थान पर कोई ऐसी देवी भी हों जिन्हें बलि चढ़ती है, तो सरसों तेल का दीपक और दूध की मिठाई भी जाती है; जहाँ बलि चढ़ती है वहाँ भैंस के घी का प्रयोग हो सकता है, जिससे एक ही उतारे में सभी देवी-देवताओं का नैवेद्य हो जाता है और कृपा शीघ्र मिलती है — लेकिन यह टेक्निकल विषय है, जिसे वहाँ की जानकारी रखने वाला ही करे तो उचित है। इनमें से किसी में मंत्र सिद्धि की ज़रूरत नहीं।

06

यात्रा में अभिचार हो जाए तो देवता के वाहन के नाम से उतारा

नंदी, सोम नंदी या कालकंटक; किसी जीव को खिला दें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:32–10:25

वक्ता कहते हैं कि यात्रा में, किसी रास्ते-घाट पर, अगर लगे कि कोई प्रयोग हो गया है और समस्या शुरू हो गई है, तो सर्वश्रेष्ठ उपाय किसी भी देवता के वाहन के नाम से उतारा करना है — नंदी जी, सोम नंदी जी, कालकंटक महाराज, किसी के भी नाम से। और सबसे श्रेष्ठ यह कि कोई जीव मिल जाए तो उतारा उसे खिला दें या उसके सामने डाल दें।

07

बलि से चला मारण जब प्राण पर आ जाए: उग्र भैरव के लिए जीवित कुक्कुट का उतारा

जीव के बदले जीव छोड़ना — काटना नहीं, वध नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:26–15:37

वक्ता कहते हैं कि जब मारण प्रयोग बलि देकर चलाया गया हो, तो उसमें चलने वाली शक्ति जीव के बदले जीव माँगती है, इसलिए नींबू के साधारण उतारे और देवताओं के विधान से राहत न भी मिले। अगर आपात स्थिति में, डॉक्टर के पास हो आने के बाद भी, दो-चार घंटे बीत जाएँ और लगे कि प्राण निकल सकते हैं, तो जीव छोड़ना पड़ता है: एक रंग का कुक्कुट — पूरा सफ़ेद, पूरा काला या पूरा लाल — बिना घृणा के क्षेत्रपाल रक्षक उग्र भैरव के नाम से लाया जाता है, जिसका प्रमाण महाभैरव के विषय में कालिका पुराण में है। उस पर गंगाजल छिड़ककर, व्यक्ति का नाम-गोत्र लेकर प्रार्थना के साथ थोड़ा अरवा चावल खिलाया जाता है, सिर के ऊपर से तीन, पाँच या सात बार उल्टा उतारा जाता है, और अपनी सीमा से बाहर निर्जन स्थान में जीवित छोड़ दिया जाता है — काटना नहीं, वध नहीं। उसका क्या होगा, वह देवता का विषय है, और चला हुआ अभिचार सौ प्रतिशत समाप्त हो जाता है।

08

आपात उतारे केवल चला हुआ प्रयोग समाप्त करते हैं; स्थायी रक्षा के लिए पुरश्चरण चाहिए

कठिन समय के लिए मंत्र, स्तोत्र या कवच की सिद्धि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:38–16:51

वक्ता कहते हैं कि बिना सिद्धि के जो उतारे उन्होंने बताए हैं, वे उस समय चलाया गया प्रयोग नष्ट कर देते हैं — वह दोबारा काम नहीं करेगा, सौ प्रतिशत। लेकिन अगला आदमी फिर नया करे तो वह अलग विषय है; उससे पहले अपनी रक्षा का प्रबंध कर लेना है, और उसके लिए मंत्र, स्तोत्र या कवच का पुरश्चरण करके सिद्धि करना आवश्यक है, तभी कठिन समय में वह काम आएगा। आपात स्थिति में ये सब चीज़ें परिवार के लिए बहुत काम आती हैं, क्योंकि उस समय आप जिसके पास जाएँ वह रक्षा कर पाए या न कर पाए।

09

साधना के बीच कर्म साक्षी दीपक का बुझ जाना

पास में तेल रखकर डालते रहें; बुझे तो फिर जलाएँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:52–17:15

साधना के बीच कर्म साक्षी दीपक बुझ जाए तो क्या करें, इस पर वक्ता कहते हैं कि उसमें डाला हुआ वनस्पति घी या तेल कम हो रहा हो तो डिब्बा पास में रखिए और डालते रहिए ताकि वह न बुझे। फिर भी बुझ जाए तो उसे दोबारा जला देना चाहिए।

10

खरमास में भैरव डंडा नहीं चढ़ाया जाता

14 जनवरी या उसके बाद ही चढ़ाएँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:16–17:40

वक्ता एक श्रोता से कहते हैं कि खरमास में भैरव डंडा नहीं चढ़ाना है: इस अवधि में चढ़ाने की आवश्यकता नहीं — अभी रुकिए, और 14 जनवरी या उसके बाद ही चढ़ाइए।

एक श्रोता को उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं कि भैरव डंडा अभी खरमास में नहीं चढ़ाना है। खरमास में चढ़ाने की आवश्यकता नहीं — अभी रुकिए। 14 जनवरी या उसके बाद ही चढ़ाना चाहिए।

11

जायफल और नींबू की बलि सबके लिए है, हिंदी में पाठ करने वालों के लिए भी

इन दो बलियों पर कोई रोक नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:41–17:57

हिंदी में पाठ करने वाले एक श्रोता पूछते हैं कि क्या वे बलि दे सकते हैं। वक्ता कहते हैं बिल्कुल: जायफल की बलि और निंबू बलि सभी के लिए है, उसमें कोई दिक्कत नहीं।

हिंदी में पाठ करने वाले एक श्रोता पूछते हैं कि क्या वे बलि दे सकते हैं। वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल दे सकते हैं: जायफल की बलि और नींबू की बलि सभी के लिए है — उसमें कोई दिक्कत नहीं।

12

क्या धार्मिक ग्रंथ में महत्वपूर्ण अंश पेन से चिह्नित किए जा सकते हैं?

हाईलाइटर से, पेन से नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:18–19:34 · Also a question

धार्मिक ग्रंथ के पठन-पाठन में महत्वपूर्ण बिंदु पेन से चिह्नित कर सकते हैं या नहीं, इस पर वक्ता कहते हैं कि हाईलाइटर से निशान लगाइए। पेन से निशान लगाने को बहुत लोग मना करते हैं; हाईलाइटर से कोई गड़बड़ नहीं होती, और वह समय के साथ मिट भी जाता है।

एक श्रोता पूछते हैं कि किसी धार्मिक ग्रंथ का पठन-पाठन करते हुए महत्वपूर्ण बिंदु पेन से चिह्नित कर सकते हैं या नहीं। वक्ता कहते हैं कि हाईलाइटर से निशान लगाइए। पेन से निशान न लगाएँ — बहुत लोग मना करते हैं। हाईलाइटर से, वे कहते हैं, कोई गड़बड़ नहीं होती, और वह समय के साथ मिट भी जाता है।

13

यात्रा में शिवलिंग या शालिग्राम घर पर छोड़ने से क्या दोष लगता है?

सूखा मेवा, ढका जल और प्रार्थना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 19:35–20:14 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शालिग्राम जी के नियम ज़्यादा रहते हैं, लेकिन वर्तमान देश-काल-परिस्थिति में यात्रा पर जाने और शिवलिंग या शालिग्राम घर पर छोड़ने से दोष नहीं लगता। कोई उपाय नहीं करना, बस एक विधि: ज़्यादा दिन के लिए जा रहे हों तो उनके पास सूखा मेवा और चाँदी या पीतल के ढके पात्र में जल रखें जिसमें पानी खराब न हो, और प्रार्थना करके जाएँ कि जब तक हम नहीं हैं, आप इसमें से अपनी सेवा-पूजा स्वीकार करते रहें और हम जहाँ रहेंगे मानसिक रूप से आपका स्मरण-पूजन करते रहेंगे।

14

ग्रहण काल में मंत्र जप का फल किसी संख्या में सीमित नहीं

प्रश्न शिव षडाक्षरी पर; नियम हर मंत्र पर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 20:28–20:38

शिव षडाक्षरी मंत्र के जप से क्या फल मिलता है, इस पर वक्ता कहते हैं कि फल बहुत मिलता है — ग्रहण काल में इस या किसी भी मंत्र के जप को संख्या में सीमित नहीं किया जा सकता।

एक श्रोता पूछते हैं कि शिव षडाक्षरी मंत्र का जप करने से क्या फल मिलता है। वक्ता कहते हैं कि फल तो बहुत मिलता है: ग्रहण काल में इस या किसी भी मंत्र के जप को आप संख्या में सीमित नहीं कर सकते।

15

क्या बिना दीक्षा के ललिता सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है?

न्यास छोड़ें; नामावली बेहतर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 21:13–21:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि ललिता सहस्रनाम पर बहुत सारा विषय है और उसकी फलश्रुति पढ़ने से समझ आ जाएगा। लेकिन अगर दीक्षा नहीं है तो न्यास आदि के बिना पाठ करें। उनके अनुसार नामावली का पाठ — जिसमें हर नाम के साथ "नमः" लगा हो — अधिक उचित है, क्योंकि पूरा सहस्रनाम श्लोक रूप में होता है और सभी नाम श्लोक में होते हैं। ऐसे पाठ कर सकते हैं या सुन सकते हैं; सुनने में कोई दिक्कत नहीं।

16

गंदा साधना-आसन धोया जाता है, कपड़े से ढका नहीं

आसन को ही साफ़ करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 22:20–22:42

एक श्रोता पूछते हैं कि असली आसन गंदा होने के कारण उस पर रखे कपड़े का क्या करें और कितने दिन रखें। वक्ता पूछते हैं कि कपड़ा रखना ही क्यों है: आसन गंदा है तो आसन को धोकर साफ़ कीजिए — आसन पर कपड़ा क्यों लगाना?

एक श्रोता कहते हैं कि असली आसन ज़्यादा गंदा है इसलिए उस पर कपड़ा रखकर साधना करते हैं, और पूछते हैं कि उस कपड़े को बदलना हो तो उसका क्या करें और कितने दिन तक रखें। वक्ता प्रश्न से ही उत्तर देते हैं: कपड़ा रखना ही क्यों है? आसन गंदा है तो आसन को धोकर साफ़ कीजिए। आसन पर कपड़ा क्यों लगाना?

17

मंदिर में दीपक-कपूर पर रोक: निर्धारित स्थान पर जलाएँ या मानसिक प्रणाम करें

मुख्य है दर्शन करना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 23:06–24:17

काशी के काल भैरव जैसे बड़े मंदिरों में कपूर, दीपक और अक्षत तक न चढ़ाने दिए जाने पर क्या करें, इस पर वक्ता कहते हैं कि इसके पीछे कारण है — विंध्याचल मंदिर में हाल में लगी आग, जगह की कमी, और एक की बदमाशी से सबको भुगतना। निर्धारित स्थान हो तो वहाँ दीपक-कपूर जलाइए, जैसे कामाख्या में दीपक के लिए अलग से पूरा गृह और स्टैंड बने हैं; न हो तो कोई विकल्प नहीं — मानसिक रूप से प्रणाम कर लें और चिंता न करें, क्योंकि मुख्य दर्शन है। कुंभ में भी घाट पर दीपक नहीं जलाने देंगे, और बिछे पुआल और करोड़ों की भीड़ को देखते हुए यह उचित ही है।

18

पत्नी मनोरमा देही प्रार्थना में रोज़ कम से कम एक माला

एक माला से कम में कोई लाभ नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 24:46–24:51

वक्ता एक श्रोता से कहते हैं कि "पत्नी मनोरमा देही" की कम से कम एक माला अवश्य करें — उससे कम में कोई लाभ नहीं। कम से कम एक माला ज़रूर करनी है।

"पत्नी मनोरमा देही" प्रार्थना पर एक श्रोता को उत्तर देते हुए वक्ता कहते हैं: कम से कम एक माला अवश्य करिए। उससे कम में कोई लाभ नहीं। एक माला कम से कम ज़रूर करें।

19

स्वप्न में सर्प का सिर उठाकर ले जाना

नारायण या भैरव द्वारा संकट का हरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 25:00–25:10

वक्ता कहते हैं कि स्वप्न में सर्प अगर सिर उठाकर आपको ले गया तो इसका सीधा अर्थ है कि भगवान नारायण या भगवान भैरव द्वारा आपके संकट का हरण किया जा रहा है। यह अच्छा स्वप्न है।

एक श्रोता के स्वप्न पर, जिसमें सर्प सिर उठाकर उन्हें ले गया, वक्ता कहते हैं कि इसका सीधा अर्थ है कि भगवान नारायण या भगवान भैरव जी आपके संकट का हरण कर रहे हैं। अच्छा स्वप्न है, वे कहते हैं।

20

पंडित के मना करने पर भी अर्गला स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है

बिना कारण की रोक पर वक्ता का मत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 25:23–26:00

अर्गला स्तोत्र, देवी सूक्त, अष्टोत्तर नाम और सप्तशती का एक अध्याय करने वाले एक श्रोता कहते हैं कि किसी पंडित जी ने कहा है कि वे अर्गला नहीं कर सकते, जबकि वक्ता कहते हैं कर सकते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि पंडित जी ने क्यों मना किया यह पंडित जी जानें — उन्हें क्या पता — और कहते हैं कि दुनिया में अद्भुत लोग हैं जो जो नहीं करना चाहिए उसे करने को कह देते हैं; पाठ किया जा सकता है, यह उनका मत बना रहता है।

21

क्या अभिचार उसी देवता से उतारना ज़रूरी है जिसकी शक्ति चली हो?

ग्रामीण भगत का नियम बनाम तंत्र की असीम परिधि

· Reviewed Sep 14, 2026 · 26:08–26:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अभिचार उसी देवता से उतरे जिसकी शक्ति चली हो, या उस देवता के किसी गुरु से, यह विषय ज़्यादातर ग्रामीण भगत परंपरा में है; यह सही है और होता भी है, लेकिन तंत्र इसी तक सीमित नहीं। काली जी के मंत्र से अभिचार चला हो तो काली जी के ही मंत्र से उतरेगा, ऐसा एकदम नहीं — भगवान शिव से भी उतरेगा, और औरों से भी।

22

शिव और भगवती की पूजा में आसन का रंग

शिव के लिए पीला, भगवती के लिए लाल; लाल ऊन चलेगा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 27:12–27:21

शिव पूजा में लाल ऊन का आसन चल सकता है या नहीं, इस पर वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल कर सकते हैं — और लाल ऊन के आसन पर पीला प्रयोग करें तो और भी अच्छा। शिव जी के लिए पीला और भगवती के लिए लाल आसन अति उत्तम है।

एक श्रोता पूछती हैं कि शिव जी की पूजा में लाल ऊन का आसन कर सकते हैं या नहीं। वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल कर सकते हैं। लाल ऊन के आसन पर पीला प्रयोग करेंगे तो और भी अच्छा — यानी शिव जी का पीला हो और भगवती का लाल हो तो अति उत्तम है।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

Explore this topic