भगवती शाकंभरी दुर्गा की साधना — अनुष्ठान विधि और एक दिवसीय पूर्णिमा प्रयोग

भगवती शाकंभरी की साधना की विधि।

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01

शाकंभरी — दुर्गमासुर के कारण पड़े अकाल में धारण किया गया शताक्षी स्वरूप

भगवती शाकंभरी कौन हैं और वह स्वरूप कैसे प्रकट हुआ?

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–00:44 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि शाकंभरी भगवती दुर्गा का वही स्वरूप है जो शाकंभरी के नाम से विश्व विख्यात है। जब दुर्गमासुर के कारण पूरे विश्व में अकाल पड़ गया, तब जगदंबा ने शताक्षी रूप धारण किया — अपने शरीर में सौ नेत्र प्रकट करके — और उन नेत्रों के द्वारा जल यानी कि आंसू प्रवाहित हुए, जिससे विश्व में जल की पूर्ति हुई और जितने भी शाक-सब्ज़ी होते हैं उनका पुनः उद्भव हुआ।

02

शाकंभरी और अन्नपूर्णा — लगभग एक समान स्वरूप, मंत्र और विधान

शाकंभरी और अन्नपूर्णा आपस में कितनी निकट हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 00:45–00:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवती शाकंभरी का स्वरूप और भगवती अन्नपूर्णा का स्वरूप, और विशेष करके उनके तंत्र संबंधी बहुत सारे मंत्र और विधान, लगभग एक समान होते हैं।

वक्ता दोनों स्वरूपों को साथ रखकर कहते हैं: भगवती शाकंभरी का स्वरूप और भगवती अन्नपूर्णा का स्वरूप। और विशेष करके, वे कहते हैं, उनके तंत्र संबंधी जो बहुत सारे मंत्र और विधान हैं, वे आपस में लगभग एक समान होते हैं।

03

घर में अन्न, धन और वस्त्र की कभी कमी न होना

गृहस्थ को अन्नपूर्णा या शाकंभरी का अनुष्ठान क्यों करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 00:56–01:17 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हमें अपने नित्य जीवन में, और विशेष करके गृहस्थ साधक को, या तो भगवती अन्नपूर्णा या भगवती शाकंभरी का समय-समय पर अनुष्ठान करते रहना चाहिए। जिनकी कृपा प्रसाद से हमारे घर-परिवार में अन्न, धन, वस्त्र इत्यादि की कभी कोई कमी नहीं होती।

04

अधिकार — दीक्षित हो या अदीक्षित, स्त्री हो या पुरुष

शाकंभरी साधना का अधिकारी कौन है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:18–01:38 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि इस साधना को कोई भी व्यक्ति कर सकता है — चाहे वह दीक्षित हो या अदीक्षित — और स्त्री-पुरुष, कोई भी इसे कर सकते हैं।

अधिकार के विषय में वक्ता स्पष्ट हैं: इस साधना को कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह व्यक्ति दीक्षा प्राप्त हो या अदीक्षित हो। स्त्री हो या पुरुष, वे कहते हैं — कोई भी इसे कर सकता है।

05

नवरात्र, कोई पर्व काल, अथवा पूर्णिमा तिथि

शाकंभरी साधना आरंभ करने का सर्वश्रेष्ठ समय कौन-सा है?

· Reviewed Sep 2026 · 01:39–01:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि आरंभ करने का सर्वश्रेष्ठ समय साल की कोई भी नवरात्र है, चाहे प्रकट नवरात्र हो या गुप्त नवरात्र। साधना का आरंभ किसी भी विशेष पर्व काल से भी किया जा सकता है, और पूर्णिमा तिथि से भी इसका आरंभ किया जा सकता है।

वक्ता कहते हैं कि इस साधना को आरंभ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ समय साल की कोई भी नवरात्रि होती है — इस साधना को प्रकट नवरात्र में या गुप्त नवरात्रि में किया जा सकता है। अथवा किसी भी विशेष पर्व काल से भी साधना का आरंभ किया जा सकता है। पूर्णिमा तिथि से भी इस साधना का आरंभ आप कर सकते हैं।

06

लाल या पीला वस्त्र, पूर्व या उत्तर दिशा, और चतुर्भुजा या अष्टभुजा विग्रह

लाल या पीला वस्त्र और आसन, पूर्व या उत्तर की ओर मुख, और चतुर्भुजा या अष्टभुजा विग्रह

· Reviewed Sep 2026 · 01:57–02:21

वक्ता कहते हैं कि साधना में विशेष करके लाल अथवा पीला वस्त्र प्रयोग करना है, और पूर्व अथवा उत्तर की दिशा की ओर मुख करके जप करना है। आसन भी पीला अथवा लाल ही रहेगा। जगदंबा भगवती के श्री विग्रह को स्थापित कर सकते हैं, जो चतुर्भुजा हैं; अथवा अष्टभुजा दुर्गा की भी इसमें उपासना कर सकते हैं, और उन्हीं के श्री विग्रह पर अर्चन पूजन कर सकते हैं।

07

गुरु-गणपति स्मरण, ध्यान, और विनियोग-न्यास-मंत्र वाली पीडीएफ

पहले गुरु-गणपति का स्मरण, फिर ध्यान — विनियोग, न्यास और मंत्र लिंक की गई पीडीएफ में हैं

· Reviewed Sep 2026 · 02:22–02:43

वक्ता कहते हैं कि सर्वप्रथम गुरु, गणपति इत्यादि का स्मरण करने के पश्चात भगवती शाकंभरी दुर्गा का ध्यान करेंगे। वीडियो के डिस्क्रिप्शन में एक पीडीएफ फाइल का लिंक दिया हुआ है जिसमें भगवती की इस साधना का विनियोग, ऋषि इत्यादि न्यास, कर न्यास और हृदय न्यास सब कुछ लिखा हुआ है, तथा ध्यान मंत्र और जप मंत्र भी लिखा हुआ है। उसी को करना है।

08

शाकंभरी कवच, अथवा सप्तशती का चंडी दुर्गा कवच

शाकंभरी कवच, अथवा वह उपलब्ध न हो तो सप्तशती वाला भगवती का चंडी दुर्गा कवच

· Reviewed Sep 2026 · 02:44–03:00

वक्ता कहते हैं कि उसको करने से पहले आप शाकंभरी कवच का पाठ कर सकते हैं। अगर वह उपलब्ध न हो तो भगवती के चंडी दुर्गा कवच का पाठ कर लें, जिसका वर्णन सप्तशती में है। और उसके पश्चात इस मंत्र का अनुष्ठान करें।

वक्ता कहते हैं कि उस विधि को करने से पहले आप शाकंभरी कवच का पाठ कर सकते हैं। अगर वह उपलब्ध न हो, तो भगवती के चंडी दुर्गा कवच का पाठ कर लें, जिसका वर्णन दुर्गा सप्तशती में है। और उसके पश्चात इस मंत्र का अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। करें।

09

सवा लाख जप के साथ दशांश हवन, तर्पण, मार्जन और नौ कन्याएँ; सामान्य संख्या 27,000

सवा लाख जप के साथ दशांश हवन, तर्पण, मार्जन और नौ कन्याओं का भोज — अथवा सामान्य रूप में 27,000 जप

· Reviewed Sep 2026 · 03:01–03:23

वक्ता कहते हैं कि इस मंत्र का अधिकाधिक जप करना चाहिए। अगर आप इस मंत्र का सवा लाख जप करके उसका दशांश हवन, दशांश तर्पण, दशांश मार्जन और नौ कन्याओं का भोज करते हैं, तब भगवती शाकंभरी की कृपा आपको विशेष रूप से प्राप्त होती है। सामान्य रूप यह है कि इस मंत्र का कम से कम 27,000 जप, दशांश हवन, तर्पण और मार्जन करना चाहिए।

10

किसी को भी भूखा या प्यासा नहीं छोड़ना — न शत्रु को, न पशु को

भूख या तृष्णा से पीड़ित किसी को भी छोड़ना नहीं है — न शत्रु को, न पशु को

· Reviewed Sep 2026 · 03:24–04:07

वक्ता कहते हैं कि इस मंत्र के साधक को किसी भी परिस्थिति में ऐसे किसी भी व्यक्ति का सहयोग करना चाहिए जो अन्न से यानी भूख से पीड़ित हो, या जल के कारण जिसकी तृष्णा काफी बढ़ी हुई हो — चाहे वह शत्रु ही क्यों न हो। कभी किसी को भूखा नहीं देखना है। अगर कोई भूखा व्यक्ति मिले तो यथाशक्ति उसकी अन्न से सहायता करनी है, और चाहे कोई पशु ही क्यों न भूखा हो, उस वक्त जो भी बुद्धि कार्य करे, शरीर जो भी सामर्थ्य प्रदान करे, और आर्थिक रूप से जितना सक्षम हों, उतना साथ देना चाहिए।

11

अन्नपूर्णा और शाकंभरी इसी स्वरूप के माध्यम से साधक की परीक्षा लेती हैं

इस साधना में भूखे को अन्न देना भगवती को प्रसन्न क्यों करता है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:08–04:25 · Also a question

वक्ता बताते हैं कि कहते हैं कि अगर ऐसा किया जाए तो भगवती जल्दी प्रसन्न होती हैं। वे समझाते हैं कि यह इसलिए भी कहा गया है क्योंकि अन्नपूर्णा और शाकंभरी दुर्गा की जब आप साधना करेंगे तो वे इसी स्वरूप के माध्यम से आपकी परीक्षा लेती हैं; और जब आप अन्न से किसी की सहायता करते हैं, उसकी क्षुधा को तृप्त कर देते हैं, तो भगवती ही तृप्त होकर आपके ऊपर कृपा करती हैं।

12

पौष माह की पूर्णिमा — वह दिन जब यह स्वरूप धारण किया गया

भगवती शाकंभरी का अवतरण दिवस कौन-सी पूर्णिमा है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:26–04:37 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नवरात्र के सिवाय पूर्णिमा को, विशेष करके पौष माह की पूर्णिमा को, भगवती का अवतरण दिवस कहा गया है: उसी दिन जगदंबा ने यह स्वरूप धारण किया था। उस दिन भी एक दिवसीय साधना विशेष रूप से की जा सकती है।

वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि के सिवाय, पूर्णिमाओं में विशेष करके पौष माह की पूर्णिमा को भगवती का अवतरण दिवस कहा गया है — उसी दिन जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम। ने यह स्वरूप धारण किया था। तो वे कहते हैं कि उस दिन भी यह एक दिवसीय साधना आप विशेष रूप से कर सकते हैं।

13

किसी भी महीने की पूर्णिमा को एक दिवसीय साधना — 5,000 जप, दशांश, और एक कन्या

अन्नपूर्णा या शाकंभरी साधना का एक दिवसीय पूर्णिमा रूप क्या है?

· Reviewed Sep 2026 · 04:38–05:03 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि अगर आपके पास समय की कमी हो तो अन्नपूर्णा साधना अथवा शाकंभरी साधना किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को एक दिवसीय साधना के रूप में भी की जा सकती है। एक दिन में आप यथाशक्ति जप करेंगे, जितना आपसे हो सके: 5,000 जप करके उसका दशांश हवन, तर्पण, मार्जन और एक कन्या का भोज — अथवा एक कन्या का जो भी खाने का, वस्त्र इत्यादि और श्रृंगार का सामान होता है, वह सब कुछ आप मंदिर में दान भी कर सकते हैं। इस प्रकार से साधना को सिद्ध करें।

14

मंत्र की नित्य पाँच माला अथवा ग्यारह माला

अनुष्ठान पूर्ण होने के पश्चात नित्य मंत्र की पाँच या ग्यारह माला प्रतिदिन

· Reviewed Sep 2026 · 05:04–05:25

वक्ता कहते हैं कि प्रयोग के लिए, इस अनुष्ठान को करने के पश्चात आप नित्य मंत्र की पाँच माला अथवा ग्यारह माला जप नित्य कर सकते हैं।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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