तांत्रिक गुरु शिष्य का बंधन कैसे और क्यों करते हैं

वक्ता बताते हैं कि गुरु शिष्य की प्राप्त सिद्धियों का बंधन कैसे और क्यों करते हैं।

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Questions this answers

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The notes
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01

गुरु द्वारा शिष्य की प्राप्त सिद्धियों का बंधन

गुरु से साधना सीखने के बाद शिष्य की प्राप्त सिद्धियाँ अचानक काम करना क्यों बंद कर देती हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 00:00–00:41 · Also a question

वक्ता एक ऐसी स्थिति बताते हैं जिसमें गुरु से साधना सीखकर सिद्धि और दिव्य दृष्टि (दिव्यदृष्टि) प्राप्त कर चुका शिष्य कालांतर में पाता है कि ये सब क्षमताएँ कुंठित हो गई हैं, और गुरु इस विषय में न तो कारण बताते हैं और न ही आगे कोई चर्चा करते हैं।

02

सुरक्षा हेतु गुरु का एक विद्या अपने पास रखना

गुरु सदैव एक अंतिम विद्या शिष्य से क्यों रोक कर रखते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 00:42–01:06 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गुरु अपनी सभी विद्याएँ शिष्य को नहीं देते — यदि दस विद्याएँ दे रहे हैं तो ग्यारहवीं एक विद्या अवश्य अपने पास रखते हैं, ताकि शिष्य कभी गलत मार्ग पर चले तो उसका बंधन कर सकें।

03

सात्विक शिष्य के बंधन के पीछे धन और अवज्ञा

गुरु एक सात्विक और शुद्ध आचरण वाले शिष्य का भी बंधन क्यों कर देते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 01:07–01:32 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि शिष्य के सही और सदाचारी होने पर भी गुरु द्वारा बंधन करने का सबसे बड़ा कारण धन बनता है — वे वर्तमान युग को अर्थ प्रधान युग बताते हैं, और शिष्य द्वारा गुरु के कहे कार्य को मना कर देने की ओर संकेत करते हैं।

04

बंधन का आधार — शिष्य के मंत्र और वचन की जानकारी

गुरु को शिष्य की साधना के विषय में इतनी जानकारी कैसे होती है कि वे उसका बंधन कर सकें?

· Reviewed Sep 2026 · 01:33–02:07 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिन गुरु के माध्यम से शिष्य ने साधना की है, उन्हें पहले से ज्ञात होता है कि शिष्य ने क्या वचन लिए, किस मंत्र से शक्ति का आवाहन किया, किस मंत्र से वचन लिया, और उस शक्ति के माध्यम से वह किन-किन कार्यों को संपादित करने में सिद्ध है — यही जानकारी आगे चलकर बंधन का आधार बनती है।

05

मंत्र की उपसंहार विधि से सिद्धि का उपसंहार

गुरु मंत्र-विद्या के माध्यम से ही शिष्य की सिद्धि का बंधन कैसे करते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 02:08–02:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कुछ गुरु, संबंधित मंत्र-विद्या को जानने के कारण, उसी मंत्र की उपसंहार विधि (उपसंहार विधि) का प्रयोग करते हैं — जो प्रत्येक गुरु परंपरा में अलग-अलग होती है — और जिस देवी शक्ति को शिष्य के पास आना था, उसे वचन देकर आने से इंकार करवा देते हैं।

06

रोक लगाने के साधन रूप में शिष्य के बाल और नाखून रखना

कुछ तंत्र साधक साधना सिखाने से पहले शिष्य के बाल और नाखून क्यों ले लेते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 02:37–03:13 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि कुछ विशिष्ट प्रकार के तंत्र साधक साधना सिखाने से पहले शिष्य के बाल, चुटैया, अथवा हाथ-पैर के नाखून कटवाकर अपने पास रख लेते हैं, ताकि कालांतर में शिष्य कोई बड़ी सिद्धि प्राप्त करके उनकी बात न माने तो उस पर रोक लगाई जा सके।

07

बंधन के दो प्रमुख मार्ग

सामर्थ्यवान गुरु शिष्य को बिना बताए ही बंधन कर सकते हैं — दूसरा मार्ग विद्या को स्थायी रूप से कुंठित कर देना है।

· Reviewed Sep 2026 · 03:14–03:31

वक्ता कहते हैं कि समर्थ गुरु शिष्य को बिना बताए ही उसका बंधन करने में सक्षम होते हैं, और बंधन की आवश्यकता होने पर गुरु द्वारा अपनाए जाने वाले दो प्रमुख तरीकों में से यह एक है।

08

दिव्य दृष्टि और सिद्धि के विकास का माध्यम — सूक्ष्म शरीर

आवाहित शक्ति पहले शरीर के भीतर वृद्धि पाती है, और भौतिक शरीर से भिन्न सूक्ष्म शरीर ही उससे संतुलन बनाकर दिव्य दृष्टि विकसित करता है।

· Reviewed Sep 2026 · 03:32–04:19

वक्ता बताते हैं कि जिस शक्ति का आवाहन किया जाता है, उसकी ऊर्जा सबसे पहले साधक के शरीर में वृद्धि पाती है, और भौतिक शरीर से जुड़ा हुआ किंतु उससे भिन्न सूक्ष्म शरीर ही उस ऊर्जा के साथ संतुलन बनाकर दिव्य दृष्टि अथवा अन्य सिद्धियों का विकास करता है।

09

सूक्ष्म शरीर का बंधन या मलिनीकरण

गुरु शिष्य की दिव्य दृष्टि जैसी सूक्ष्म शरीर की क्षमताओं को स्थायी रूप से कैसे रोक देते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 04:20–05:28 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो गुरु चाहते हैं कि शिष्य को दिव्य दृष्टि या दूर श्रवण शक्ति दोबारा कभी प्राप्त न हो, वे उसके सूक्ष्म शरीर का बंधन कर देते हैं या उसे मलिन कर देते हैं — किसी तंत्र के माध्यम से, ग्रंथ विद्या के माध्यम से, अथवा कोई अभिमंत्रित वस्तु या जड़ी खिलाकर — जिससे आवाहित शक्ति कृपा ही न कर पाए, भले ही वह शिष्य के समक्ष आकर खड़ी हो जाए।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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