चतुर्थी से चतुर्दशी — गृहस्थ के लिए संकट नाशन गणपति स्तोत्र का दस दिवसीय अनुष्ठान

सामान्य गृहस्थ के लिए दस दिन का गणपति अनुष्ठान।

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The notes
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01

किसी भी अनुष्ठान में सफलता की पूर्वशर्त गणपति साधना

तंत्र में चरणबद्ध विधान हैं; यह गृहस्थ के लिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:04–00:40

वक्ता कहते हैं कि भगवान गणेश की साधना के बिना कोई भी किसी विशेष अनुष्ठान में या जीवन के किसी भी क्षेत्र में पूर्ण सफलता नहीं पा सकता, इसलिए गणपति साधना अत्यंत आवश्यक है। तंत्र में, वे कहते हैं, इसके विभिन्न चरण हैं: बीज मंत्रों के द्वारा ashta-vinayaka और महागणपति स्वरूप की साधना का बहुत चरणबद्ध विधान दिया गया है। यहाँ वे जो साधना रख रहे हैं, वह इसके बजाय सामान्य साधक या सामान्य गृहस्थ के लिए है, ताकि वह जीवन में आने वाली हर कठिनाई पार कर सके।

02

दस दिवसीय गणपति साधना कब करें: असफल साधनाएँ, केतु, संतान, धन, विद्या और परीक्षा

साधना के कारण, और सबको क्यों करनी चाहिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:01–01:56

वक्ता कहते हैं कि यह गणेश साधना अवश्य करनी चाहिए जब जीवन के किसी क्षेत्र में बहुत अधिक कठिनाई आ रही हो और बहुत सी साधनाएँ करने पर भी सफलता न मिल रही हो; साथ ही जो साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, ताकि आगे की प्रमुख साधनाओं में कोई कठिनाई न आए; जन्म कुंडली में केतु का दुष्प्रभाव हो तब भी; और संतान उत्पत्ति से लेकर धन, विद्या प्राप्ति या प्रतियोगी परीक्षा में सफलता न मिलने पर भी। उनके हिसाब से प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में यह साधना अवश्य करनी चाहिए।

03

दस दिवसीय गणपति साधना का समय: किसी भी पक्ष की चतुर्थी से चतुर्दशी

कोई भी महीना, कोई भी पक्ष; भाद्रपद भी उपयुक्त

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:57–02:24

वक्ता कहते हैं कि यह साधना किसी भी महीने के किसी भी पक्ष — कृष्ण या शुक्ल — की चतुर्थी तिथि से आरंभ की जाती है और चतुर्दशी तिथि को इसका समापन होता है, इस प्रकार यह दस दिन की साधना है। अगर कोई भाद्रपद महीने में करने जा रहा है, जिसमें गणेश पूजा सार्वजनिक रूप से हर जगह मनाई जाती है, तो वह भी बहुत उपयुक्त है; उस महीने में भी यह साधना की जा सकती है।

04

संकट नाशन गणपति स्तोत्र साधना की सामग्री: नई सफेद कॉपी, लाल पेन और स्तोत्र

चतुर्थी से पहले क्या जुटाएँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:25–02:52

वक्ता कहते हैं कि सबसे पहले एक सफेद कॉपी — पूरी खाली, नई — और एक लाल रंग का पेन लाना है। साथ ही संकट नाशन गणपति स्तोत्रम भी पास होना चाहिए; वे कहते हैं कि उसका पीडीएफ वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिंक कर देंगे, जिसे डाउनलोड करके प्रिंट आउट रख लेना है।

इसके लिए, वक्ता कहते हैं, सबसे पहले एक सफेद कॉपी लानी है: पूरी खाली, नई कॉपी। लाल रंग का पेन ले लीजिए। साथ ही संकट नाशन गणपति स्तोत्रम आपके पास होना चाहिए। वे कहते हैं कि उसका पीडीएफ वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिंक रहेगा; उसे डाउनलोड करके प्रिंट आउट निकलवा कर रख लीजिए।

05

पहले दिन का गणपति पूजन: स्नान, नए वस्त्र, जनेऊ, भोग और अर्पण

स्त्री जनेऊ चढ़ाती है, पहनाती नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:53–03:55

वक्ता कहते हैं कि चतुर्थी को गणेश जी का पंचोपचार, दशोपचार या सोलह उपचार पूजन करें, जितनी सामर्थ्य हो या जितना आता हो। मूर्ति या फोटो हो तो मूर्ति को दूध और पञ्चामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएँ और यज्ञोपवीत अवश्य चढ़ाएँ; जो पुरुष जनेऊ पहनते हैं वे पहना दें, पर स्त्री केवल चढ़ाएगी, पहनाएगी नहीं। फिर लड्डू या मोदक का भोग लगाएँ, भोग के बाद दूर्वा ज़रूर चढ़ाएँ, और धूप, बिल्व तथा लाल फूल चढ़ाएँ; सुगंधित दीप जलाएँ, घी का हो तो अति उत्तम।

06

चतुर्थी को संकट नाशन गणपति स्तोत्र आठ बार लिखना

पहले गुरु स्मरण; संख्या फलश्रुति से

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:56–04:13

वक्ता कहते हैं कि पूजन के बाद पहले अपने गुरु का, या जिन्हें मानसिक रूप से गुरु मानते हों उनका, स्मरण करके नई कॉपी में लाल पेन से संकट नाशन गणपति स्तोत्र लिखना आरंभ करें। इसे आठ बार लिखना है, जो संख्या स्तोत्र की अपनी फलश्रुति में दी है, जिसे वे पढ़ने को कहते हैं। यह लेखन केवल एक बार, चतुर्थी को, होता है, और लिखी हुई कॉपी और पेन साधना के दौरान गणपति के पास रखे रहते हैं।

07

संकट नाशन स्तोत्र के नित्य पाठ: प्रतिदिन 27 से 108, हर पाठ एक दूर्वा पर

दूर्वा कम हो तो एक पर दस-ग्यारह पाठ; विकल्प में लाल फूल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:14–05:03

वक्ता कहते हैं कि लिखने के बाद पाठ आरंभ होता है: कम से कम 27 और संभव हो तो नित्य 108 पाठ, चतुर्थी से चतुर्दशी तक, जिससे पाठ शुद्ध भी होता है और प्रभाव भी बहुत तीव्र देता है। पास में दूर्वा रखें, संभव हो तो 108; एक दूर्वा पर एक पाठ करके उसे गणपति को समर्पित कर दें। दूर्वा कम हो तो एक दूर्वा पर दस या ग्यारह पाठ करके चढ़ाएँ, ऐसे ग्यारह दूर्वा में 108 पाठ पूरे हो जाते हैं। दूर्वा न मिले तो लाल फूल या गणपति को चढ़ने वाला कोई भी फूल चलेगा, लाल कनेर या गुड़हल हो तो अति उत्तम।

08

गणपति साधना में आसन, दिशा और बाद के दिनों की छोटी दिनचर्या

लाल या पीला, पूर्व या उत्तर; स्नान की जगह गंगाजल

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:04–05:26

वक्ता कहते हैं कि आसन और वस्त्र लाल या पीले, और दिशा पूर्व या उत्तर, दोनों में से कोई भी रख सकते हैं। गणपति को रोज़ स्नान कराने की आवश्यकता नहीं: स्नान पहले दिन ही होता है, अगले दिन से उन पर गंगाजल छिड़ककर भोग लगाएँ, धूप-दीप जलाएँ और पाठ करें। आठ बार लिखना भी केवल पहले दिन का ही है।

09

गणपति साधना का समापन हवन: घी और गुग्गुल, बारह नामों में से हर नाम से बारह आहुति

सिर्फ दो चीज़ें, और नाम स्तोत्र से

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:27–06:36

वक्ता कहते हैं कि चतुर्दशी को जब उस दिन के 108 पाठ, या नित्य 27 कर रहे थे तो 27 पाठ, पूरे हो जाएँ, तो संभव हो तो एक छोटा सा हवन ज़रूर करें। सिर्फ दो चीज़ों का प्रयोग होता है: पुरुष घी और गुग्गुल मिलाकर आहुति देता है। आहुति नाम से दी जाती है: संकट नाशन गणेश स्तोत्र में गणपति के बारह नाम हैं, और हर नाम से बारह-बारह आहुति दी जाती हैं। वे कहते हैं कि बारह नाम अलग पीडीएफ में वीडियो के लिंक में डाल देंगे। हवन के बाद पूर्णाहुति और आरती होती है।

10

विशेष स्थिति: गणपति साधना में महिला साधिका की हवन सामग्री

काला तिल, पंचमेवा, गुड़, मधु, चावल वाली सामग्री; जौ नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:37–06:58

वक्ता कहते हैं कि महिला साधिका पुरुषों के लिए बताई घी-गुग्गुल आहुति के बजाय, संभव हो तो हवन सामग्री से हवन करे: हवन की लकड़ी और सुगंधित धूप में काला तिल, पंचमेवा, गुड़ और थोड़ा सा मधु मिलाकर। जौ डालने की आवश्यकता नहीं, पर चावल ज़रूर डालें। इन सबको मिलाकर हवन करें, जिसके बाद पूर्णाहुति और आरती सदा की तरह होती है।

11

गणपति साधना का समापन: लिखी कॉपी का दान और एक छोटे बालक को भोजन

कोई भी वर्ण; शास्त्र में बारह से कम, आज पाँच से आठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:59–07:50

वक्ता कहते हैं कि चतुर्दशी के दिन ही जिस कॉपी में आठ बार स्तोत्र लिखा था, उसे ऐसे मंदिर में ले जाएँ जहाँ गणेश जी की भी मूर्ति हो — शिव मंदिर में भी होती है — और वहाँ के ब्राह्मण को संकल्प करवाकर कुछ अन्न और दक्षिणा के साथ दान कर दें। संभव हो तो कम से कम एक छोटे बालक को अपने हाथ से भोजन या मिठाई भी खिलाएँ। बालक में वर्ण देखने की आवश्यकता नहीं; ब्राह्मण ही हो यह ज़रूरी नहीं, सदाचारी बालक हो तो बहुत अच्छा। कहा तो बारह वर्ष से कम अवस्था का बालक गया है, पर आज के समय के अनुसार पाँच, छह, सात या आठ साल तक का बच्चा अति उत्तम। इस प्रकार साधना पूर्ण होती है।

12

दस दिन के बाद: आजीवन आठ नित्य पाठ, हर वर्ष दोहराव, और संकल्प पूर्ति का आश्वासन

कम से कम छह महीने; एक वर्ष करने पर कोई प्रारब्ध धर्मयुक्त इच्छा नहीं रोक सकता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:51–08:40

वक्ता कहते हैं कि दस दिन पूरे होने पर पाठ छोड़ना नहीं है: कम से कम आठ पाठ नित्य, संभव हो तो सुबह-शाम दोनों समय, छह महीने तक लगातार, और उनके अनुसार आजीवन। दस दिन का अनुष्ठान भी हर साल जब गणेश पूजा आए या जो महीना उपयुक्त लगे उसमें दोहराना चाहिए, और हर महीने दोहरा लें तो अत्युत्तम। अगर साल भर ऐसा कर लें, तो वे लिखकर देते हैं कि जिस संकल्प से यह कर रहे हैं वह पूर्ण न हो, यह संभव ही नहीं — प्रारब्ध में कितनी भी प्रबल चीज़ लिखी हो, गणपति कृपा कर दें तो अवश्य मिलेगा। इच्छा धर्मयुक्त होनी चाहिए, धर्म के विपरीत नहीं: पुत्र, संतान, धन, विद्या, प्रतियोगी परीक्षा में सफलता, एक वर्ष तक निरंतर।

13

सावधानी: साधना शुरू करने से दो-तीन दिन पहले संशय दूर करें, उसी दिन नहीं

उसी दिन के प्रश्न का उत्तर समय पर न मिले

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:41–09:00

वक्ता कहते हैं कि साधना से जुड़ा कोई संशय या प्रश्न हो तो कमेंट में या उनके टेलीग्राम ग्रुप में पूछा जा सकता है, पर वे ध्यान दिलाते हैं कि जिस दिन पूजा शुरू करनी है उसी दिन भेजे संदेश का तुरंत उत्तर न भी मिले। इसलिए दो-तीन दिन पहले ही सभी संशय दूर कर लें और उसके बाद ही साधना आरंभ करें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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